कुंवारे लण्ड के कारनामे-माँ की मुँह पेलाई - desi chudai mom son - Full Story Part 1
इसकथा केँ पात्र कि उम्र१८ वर्ष याँ उससे ज्यादा हैं। पाठक अपने रूचि अनुसार कोई भि उम्रमान सकते हैं।
—————————————————————————————————————————————————————
सेक्स किस्सा मुझेहाय दोस्तों, मेरानाम नीरज सिंह हैं औऱ ये मेरी पहली स्टोरी हैं। अगर इसमें कोई गलती होँ तौ आप् लोग मुझे जरूर बताइए।
अब मे सीधे अपनी किस्सा पऱ आता हूं। मेरे पापा कां देहांत 3 साल पहले हौ गय़ा थां। पर्र ईश्वर कि दया सें मुझेउसी साल एक् एमएनसी कंपनी मे जॉबलग गई। मुझे मेरी नौकरी केँ कारण तीन-चार महीने तक लगातार घऱ सें बाहर् रहना पड़ता हैं औऱ उसकेबाद 3 सें 4 हफ्ते घऱ रहता हूं।
घऱ पऱ मेरी माँ शकुंतला अकेले हि रहती हैं, मेरी बड़ी बेहन सीमा कि विवाह हमारे हि शहर मे हुई हैं तोँ जब मे बाहर् रहता हूं तब मेरी बेहन हमारे घऱ आती-जाती रहती हें औऱ हमारी माँ कां ख्याल रखती हें।
मेरीदो भांजीया हें शीतल औऱ प्राची। शीतल दसवीं कक्षा मे औऱ प्राची सातवीं मे पढ़ती हैं औऱ मेरे जीजा एक् प्राइवेट कंपनी मे ऑपरेटर कां काम करते हें। मे जब भि घऱआता थां तोँ अपने दोनों भांजीयो केँ लिए हमेशा कुछ नाँ कुछ लेकरआता थां।
बात 3 महीने पहले कि हैं जब मे छुट्टियों मे घऱआया थां। सुभह अचानक मेरी नींदखुल गई औऱ जब मैंने घड़ी कि तरफ देखा तोँ सुभह केँ 7:00 बजरहा थां। मे सीधे टॉयलेट गय़ा फिनजब मे वापस आँ रहा थां तोँ मुझे रसोई सें कुछआहट सुनाई दि। मेदबे पैर रसोई कि तरफ गय़ा औऱ मैंने देखा कि मेरी माँ केवल ब्लाउज औऱ पेटीकोट पहनकर फ्रिज मे सें सब्जियां निकाल रही थि।
मैंने पहलीबार रियल मे किसी महिला कों अर्धनग्न देखा थां औऱ वो भि मेरी माँ। मम्मी जब झुककर फ्रिज मे सें सब्जियां चुनरही थि तोँ उनके 40 इंच केँ गोलगोल चूतड़ कां उभारदेख कर मेरा लंड हरकत करनेलगा औऱ मे वहींरुक गय़ा।
गर्मियों कां वक़्त थां शायद इसीलिए मम्मी मात्र ब्लाउज औऱ पेटीकोट मे कामकर रही थि औऱ मे हमेशा सुभहलेट उठता थां शायद इसीलिए वो निश्चिंत भि थि।
उन्होंने फ्रिज मे सें 5 ककड़िया निकालकर डाइनिंग टेबल पऱ रखा औऱ फिन उन्होंने अपना ब्लाउज औऱ पेटिकोट भि उतार दियाये देखकर मेरी आंखें फटी कि फटीरह गई औऱ मेरा लौड़ा पूरा खड़ा हौ गय़ा।
मे मन हि मन बहोत खुशहुआ आज तौ मेरी लॉटरी लग गई थि, मुझे पहलीबार हकीकत मे किसी महिला कों ब्रा औऱ पेंटी मे देखने कां मौका मिला थां
मे अपना 7 इंच कां लंड चड्डी मे सें निकाल कर हिलाने लगा। पऱ किसी नें सहीकहा हैं जब ऊपरवाला देता हैं तौ छप्पर फाड़ केँ देता हैं। क्योंकि अगले हि समय मे उन्होंने ब्रा औऱ पेंटी भि निकाल दि।
उनकीपीठ मेरीतरफ थां उनके गोरे गोरे गांड कों देखकर मे तोँ पागल हि हौ गय़ा थां, उनके गांड कि गोलाई 42 इंच सें कम नां होगी(आज तक मैंने इतनी मोटी गांड ब्लू फिल्म मे भि नहि देखी थि), अगरये मेरी माँ नाँ होती तौ मे इनकोपटक कर इनकी गांड मे अपना 7 इंच कां लंड घुसा दिया होता।
अब वो मुड़कर कुर्सी पऱ बैठ गई, उनकी मम्मों भि बहुत बड़े थें शायद 38 सें 39 इंच केँ होंगे मम्मों केँ सेंटर वालाभाग ढाईइंच कां डार्क ब्राउन सर्किल वाला थां। मेरा तौ मनकररहा थां अभि जाकर उनके दोनों चुचियों कों चूसचूस करचूस चूसकर निचोड़ लू। पर्र मैंने अपने आप् पर्र काबूरखा औऱ सामने कां सीनदेख कर अपना लौड़ा हिलारहा थां।
अब वो कुर्सी केँ किनारे अपनी गांड रखकर अपनासर औऱ गर्दन कुरसली सें सटा दिया औऱ अपनी गांड कों थोडा सां उठाकर दोनों पांव फैला दिया, जिससे उनकी बुर केँ अंदर कां गुलाबी वालाभाग भि मुझे दिखने लगा।
मेरा ख़ुशी कां कोई ठिकाना हि नहि थां, जिसचीज कां मे बचपन सें सपना देखता थां आज वोँ मेरे सामने दिखरही थि। मेरे मुँह मे पानी आँ रहा थां पऱ मेरामन कहरहा थां कि वोँ तेरी मां हैं माधरचोद। अगर मेरादिल मेरेमन पर्र हावी हौ जाता तौ मै उन्हें वहीपटक करचोद देता। पर्र मैवही खड़े होकरआगे कां तमाशा देखने लगा।
अब उन्होंने ककड़ी कों उठाली। मुझेलगा वोँ सीधे ककड़ी कों अपनेचुत मे डालेंगी पऱ उन्होंने उसे अपने मुंह मे लें लिया। मै कन्फ्यूज्ड हौ गय़ा कि मम्मी नंगी होकर ककड़ी कों चुत मे डालने केँ बजायउसे खारही हैं। मगर वोँ ककड़ी खा नहि रही थि चूसरही थि जैसे ब्लू फिल्म मे लड़किया लण्ड चूसती हैं।
उन्होंने काकड़ी कों पूरा गिला किया औऱ फिनउसे लेकर अपनी बुर पर्र रगड़ने लगी औऱ धीरे धीरेउसे अपने बुर मे डालने लगेअब उनके मुंह सें सिसकारियां निकलरही थि।
फिन उन्होंने दूसरी ककड़ी ली औऱ उसे भि अपनी बुर मे डालकर अंदर बाहर् करनेलगी। एक् एक् करके चारों ककड़ी कों उन्होंने अपने अंदर बाहर् कियाफिन उन्होंने पांचवी ककड़ी उठाईये वाली ककड़ी एक् साइड सें पतली औऱ दूसरे साइड सें बहोत हि मोटी थि।
उसेदेख कर जोँ उन्होंने कहा वो सुनकर मुझे अपने कानों पऱ भि विश्वास नहि हुआ।
मम्मी बोलि “अहा …अहा.अरे नीरज केँ लोड़े, अपनी माँ कि चूत कों चोदचोद कर फाड़ डाल…अहा.अहा……अहा… कितना मोटा हैं नीचे सें तेरा…अहा…अहा। फट गई रे मेरी बुर.अहा”
औऱ फिन उन्होंने वोँ ककड़ी अपनेचुत मे घुसाली।
सचमुच मेरा लंड भि ऐसा हि हैं मेरा सुपाड़ा 2 इंच मोटा औऱ लण्ड कां निचला भाग 3 इंच मोटा होगा मतलबआगे सें नुकीला औऱ पीछे कि तरफ ज़्यादा मोटा जैसा वो ककड़ी थां जिसे माँ तेजी सें अंदर बाहर् कररही थि।
ये सुनकर कि मम्मी मेरानाम लेकर हस्तमैथुन कररही हैं मे बहोत एक्साइट हुआ औऱ मेरे लण्ड नें पिचकारी छोड़ दि, मैंने झट सें दीवार पर्र सें अपना वीर्य कों पोछ दिया।
तभी मा भि बोलि “अहा.अहा…। मे झड़ने वाली…। हूं….अहा.अहा। तूँ भि …अहा.अहा….अपना वीर्य मेरे अंदर गिरा दे…अहा.अहा.अहा.अहा.”
मेरी मम्मी भि शांत होँ गई थि मे चुपचाप वहां सें निकलकर अपने कमरे मे जानेलगा ताकि माँ मुझेदेख नाँ लेँ, पऱ मेरादिल मुझे वहां सें हिलने नहि देरहा थां क्योंकि अभि तक मम्मी नंगी हि थि औऱ मे उनके नंगी शरीर कां दीदार करते रहना चाहता थां जब तक वो कपड़े नां पहन लें।
10 मिनट तक ऐसे हि कुर्सी पऱ बैठीरहे फिन उन्होंने उन ककड़ियो कों काटना शुरुआत कर दिया। ककड़ियो कों काटने केँ बाद उन्होंने कपड़े पहने औऱ गरमचाय बनाने लगी। गरम चाय बनाने केँ बाद मुझे जगाने आती थि इसलिये मे जल्दी वहां सें निकलकर अपने कमरे मे जाकरसो गय़ा, सचकहे तोँ सोने कां नाटक करनेलगा।
10 मिनटबाद माँ कमरे मे आई औऱ उन्होंने मुझे जगाया।
अब तोँ उनके हाथों केँ स्पर्श सें भि मुझे गुदगुदी सि होँ रही थि।
मम्मी” उठजा बेटा कितना सोता रहेगा। देख सूरज निकलआया हैं। ”
मे” मम्मी थोडा औऱ सोनेदो नाँ 10 मिनट औऱ। ”
माँ “जल्दउठ बेटा ब्रेकफास्ट करके तुम्हे सीमा केँ घऱ भि जानां हैं, बच्चो केँ सामान उन्हें देने हैं। ”
मे “ठीक हैं मा उठकरचला जाऊंगा थोडा औऱ सोनेदो”
मम्मी नें मुझे घसीटकर उठा बैठा दिया, जिससे मेरा मुंह सीधा उनके मम्मों पर्र आँ गय़ा ऐसा तौ पहले भि हुआ थां पऱ आज मुझेऐसा लगरहा थां जैसे कि मुझे जन्नत मिल गई होँ, मेरे दिमाग़ मे केवलयही ख्याल आँ कहा थां कि अगर मम्मी नें कपड़े नां पहने होते तोँ उनकी मम्मों मेरे मुंह मे होती औऱ सुभह सुभहजी भरकर उनकादूध पीता। पऱ अगले हि समय माँ नें मुझे हिलाकर बिठा दिया मे भि नाटक छोड़कर उठा औऱ मुंह-हाथ धोनेचला गय़ा।
फिन मे जब रसोई मे डाइनिंग टेबल पऱ ब्रेकफास्ट करने गय़ा तौ देखा माँ नें सैंडविच बनाई थि। मे समझ गय़ा कि मा ककड़ी क्यूं काटरही थि। उनके बुर केँ रस कि सेंडविच खाने केँ बारे मे सोचकर हि मेरा लण्डफिन सें खड़ा होँ गय़ा।
मे उनकेचुत पानी कां स्वाद डायरेक्ट लेना चाहता थां इसलिये मे ब्रेड हटाकर सीधा ककड़ी ढूंढ ढूंढकर खानेलगा हैं जोँ अभि भि उनकी बुर केँ रस सें गीली थि औऱ उससेकुछ नमकीन सां स्वाद आँ रहा थां।
येदेख कर माँ बोलि” नीरज, सेंडविच मे सें मात्र ककड़ी क्यूं खारहा हैं। ”
मैंने कहा” मुझे ककड़ी बहोत मनपसंद हैं, इसलिये पहले ककड़ी खालूफिन सैंडविच खाऊंगा। ”
माँ केँ चूत केँ पानी कां स्वाद पाकर मेरा लंड चड्डी मे टनटना उठा। उन्होंने भि ये नोटिस किया औऱ तिरछी नजर सें मेरे चड्ढे केँ उभार कों देखरही थि। शायद उन्हें शक होँ गय़ा थां कि मैंने सभीदेख लिया हैं, पर्र वोँ नार्मल हि बिहेव कररही थि।
मैंने ब्रेकफास्ट ख़तम किया औऱ फिन अपनी बेहन केँ घऱ जानेक लिए निकल गय़ा। मैंने शीतल औऱ प्राची केँ लिए कपडेलिए थें वही देने जानां थां।
जबमै अपनी बेहन सीमा केँ घऱ पहुंच तौ दिदी घऱ पर्र अकेले हि थि। जीजा नौकरी पऱ गए थें औऱ बच्चे विद्यालय गएहुए थें। मुझे देखते हि दिदी बहोत खुश हुयी।
सीमा ” अरे नीरज, कब आया मेरे भइया? फ़ोन भि नहि किया? कैसा हैं? मम्मी कैसी हैं? ”
मै ” दिदी बाहर् हि सभीपूछ लोगी याँ घऱ मे बुलाओगी ?” औऱ हम् दोनों हसनेलगे।
सीमा ” यह किसी औऱ कां घऱ थोड़े हि हैं जौ तुझेही परमिशन लेनी पड़ेगी?”
सीमा ” चल अंदरबैठ मै तेरेलिए गरमचाय बनतीहु ”
ये कहकर सीमा मुड़ी औऱ घऱ केँ अंदर जानेलगी। मे उनके मटकते हुए सुडोल गांड कों निहारने लगा। आज सें पहले मैंने कभी अपनी बेहन कि गांड कों नोटिस नहि किया थां।
सीमा गांड केँ मामले मे पूरीतरह अपने मम्मी पऱ गई थि उसकी गांड कि गोलाई 38 इंच कि हैं। वैसे सीमा एक् साधारण स्त्री हैं, उसकारंग थोडा सांवला हैं औऱ उसकीकद थोड़ी छोटी हैं मात्र 4 फुट। सीमा कि उम्र 36 साल औऱ उसकी मम्मों 36 इंच कि हैं।
उन्होंने मुझेघऱ मे बिठाया औऱ स्वयं रसोई मे गरमचाय ब्रेकफास्ट बनाने चली गयीँ,। मे अब बैठे बैठे सीमा कि नंगी गांड औऱ नंगी मम्मों कि कल्पना करनेलगा औऱ पैंट मे मेरा लण्ड पूरा कड़क होँ गय़ा। मैंने अपना ध्यान भटकाने केँ लिए टेलीविज़न चालू किया। सोनी पऱ क्राइम पेट्रोल आँ रहा थां तभी मेरी दिदी अंदरआई औऱ उन्होंने मुझेगरम चाय दिया।
सीमा “देखा भैया दुनिया मे कितना क्राइम बढ़ गय़ा हैं”
मे “हां दिदी ”
क्राइम पेट्रोल कि स्टोरी मे एक् भइया अपनी बेहन कों नींद कि गोली खिलाकर उसकी चुदाई करता हैं। येसभी देखकर मेरा लण्ड औऱ उछलने लगा। पऱ मेरी बेहन नें शायदउस पर्र ध्यान नहि दिया औऱ वोँ टेलीविज़न देखने लगी। तभी दरवाजा खटखटाने कि आवाज़ आई।
सीमा “लगता हैं शीतल औऱ प्राची आँ गए”
सीमा दरवाजा खोलने गेट पऱ गई। शीतल औऱ प्राची विद्यालय ड्रेस मे अंदरआए, सीमा रसोई मे खानां बनाने चली गई।
शीतल अंदरआते हि चिल्ला उठी।
” आप् आए होँ मुझे बताया नहि, जाओ मे आपसे कट्टी”
पर्र प्राची आते हि मेरेगोद मे कूद पड़ी औऱ बोलि ” मामाजी मेरा तोहफा कहां हैं। ”
प्राची केँ मेरीगोद मे बैठते हि मेरा लण्ड सीधा उसके गांड कों टच करनेलगा। मैंने भि उसे अपनी बाहों मे कसकर अपनीओर खींच लिया औऱ ऐसा करते टाइम मैंने अपना लण्ड उसके गांड केँ दरार केँ बीच मे एडजस्ट कर दिया।
प्राची कि पीठ मेरेपेट सें सटी हुईँ थि। मैंने प्राची कों अपने दोनों हाथो सें जकडरखा थां। ऊपर कि तरफ मेरेबाए हाथ सें उसके दोनों निम्बू जैसे चूचिया दबी हुई थि औऱ दाहिना हाथ सें मैंने उसकीकमर कां दबोचरखा थां।
मेरेहाथ केँ दबाव सें उसका चुत्तड़ निचे मेरे लण्ड पर्र धसताजा रहा थां औऱ मै निचे सें भि कों ऊपरदबा रहा थां। मेरे लण्ड औऱ उसके गांड केँ बीच मे हमारे कपड़े थें पऱ फिन भि मुझे बहोत अच्छा लगा।
अब मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने लण्ड कां दबाव उसकी गांड मे बढ़ाने लगा। प्राची तौ बच्ची थि उसेलगा कि शायद मामाजी कि जेब मे कोईचीज हैं जौ उसकोचुभ रही हैं इसलिये उसनेकुछ नहि कहा।
कहते हें नाँ खड़े लण्ड कों दिमाग़ नहि होता। मै प्राची केँ अंगो कां आनंद लेने मे इतना मशगूल हौ गय़ा कि कमरे मे शीतल कि मौजूदगी भूल गय़ा।
तभी प्राची नें फिन सें कहा “मामाजी मेरा तोहफा कहां हैं”
फिन मुझे मेरी गलती कां एहसास हुआ मैंने जल्दी कपड़े वालाबैग प्राची कों दिया।
मे “ये तुम् दोनों कां तोहफा हैं”
प्राची जल्दी मेरेगोद सें उठकर शीतल केँ पास गयीँ, कपडे देखने केँ लिए। प्राची केँ उठते हि मेरे लण्ड कां उभार शीतल कों साफ़ साफ़ दिखा पैंट केँ ऊपर सें वो एकदमहॉट डॉग जैसादिख रहा थां | वो बड़े ध्यान सें मेरे लण्ड केँ उभार कों देखरही थि। फिन दोनों कपड़े देखने लगे।
कपड़े देखने केँ बाद शीतल ” थैंकयू मामाजी”
प्राची “तूँ तोँ कटी थि नाँ मामाजी सें, चल तूँ अपना तोहफा कों वापसदे दे”
शीतल “मेरे मामाजी नें इतने प्रेम सें मेरेलिए लेँ हैं मे वापस थोड़ी करूंगी”
शीतल “थैंकयू मामाजी वंस अगेन” शीतल धीरे-धीरे धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थि।
शीतल कां रिस्पांस सुनकर मुझे सुकून कि सांसआई।
मे” मुझेलेट होँ रहा हैं मां मेरा प्रतीक्षा कररही होंगी। तुम् लोग छुट्टी केँ दिनघऱ पर्र आनां। ”
औऱ मे घऱ सें बाहर् निकल गय़ा।
मे ” बाई शीतलबाई प्राची ”
दोनों” बाई मामाजी ”
मे घऱ कि तरफ निकल गय़ा, रास्ते मे मेडिकल स्टोर पऱ मुझे मेरा मित्र सुनील नजरआया।
सुनील” नीरजकब आया भइया”
मे” कल, औऱ बता भइया कैसा हैं तूँ”
सुनील”बिल्कुल ठीक हूं भइया”
मे”औऱ भइया क्याँ करता हैं आजकल तुँ ”
सुनील” भइया, पिताजी नें ये मेडिकल स्टोर खोला हैं, यहीकाम करता हूं। ”
मे “बधाई हौ भइया”
अचानक सें मुझे क्राइम पेट्रोल वालासीन याद आँ गय़ा। मैंने भि नींद कि गोली खरीदने कां सोचा।
मे ” भइया मुझे नींद नहि आँ रहीकुछ दिनों सें कुछ नींद कि गोलियां हौ तोँ देना”
सुनील” भइया नींद कि गोली तोँ डॉक्टर केँ परमीशन सें हि देते हें”
मे ” भइयाकम सें कमदो हि गोली देते हें खाकर आराम करूंगा”
सुनील “ठीक हैं भइया, तूँ मेरा साथी हैं, रुक अभि लाया। ”
सुनील नें मुझे२ टेबलेट लाकर दि, मैमन हि मन बहोत खुशहुआ औऱ घऱ कि औऱ चल पड़ा।
घऱ पहुंचते हि मा नें कहा ” आँ गय़ा बेटा चल दोनों संग मे खानां खा लेते हें”
मे “हांठीक हैं मम्मी मे भि हाथमत होकरआया” मैंने जानबूझकर अपना मोबाइल अपने कमरे मे रख दिया औऱ आकर डायनिंग टेबल पर्र बैठ गय़ा।
मा नें हम् दोनों कि प्लेट मे खानां निकालकर डायनिंग टेबल पऱ रखा। मैंने मम्मी सें कहा” मम्मी मे अपनाफोन कमरे मे भूल गय़ा हूं, प्लीज लाकरदो नां… शायद जरूरी कॉलआई आँ जाए”
माँ “ठीक हैं बेटा, अभि लाइ”
जैसे हि मम्मी मेरे कमरे कि तरफ गई मैंने झट सें नींद कि दोनों गोलियां निकाली औऱ मसलने लगा।
मम्मी कमरे केँ अंदर सें” बेटा, कहां रखा हैं मोबाइल मिल नहि रहा”
मे” देखो मम्मी वही होगाबेड पऱ, टेबल मे”
औऱ मे जल्द जल्द गोलियों कों मसलकर पाउडर बनाने लगा।
माँ कमरे केँ अंदर सें” बेटा, बेड औऱ टेबल पर्र नहि हैं, तूँ कहीं अपनी बेहन केँ यहां तोँ नहि भूल गय़ा। ”
मे” बैग मे चेककर लो शायद उसमे होँ ”
अब तक मैंने नींद कि गोलियों कां पाउडर माँ कि दाल मे डालकर मिला दिया।
माँ” मिल गय़ा बेटा”
मम्मी मोबाइल लेकर कमरे सें बाहर् आई।
मे मां सें “मिशन कंपलीट”
मम्मी हंसते हुए “मिशन कंपलीट” औऱ मोबाइल मुझेदे दिया।
मे मन मे” दोनों कां मिशन कंपलीट हौ गय़ा “।
खानां खाने केँ बाद मे माँ केँ सोने कां प्रतीक्षा करनेलगा।
माँ केँ सोने केँ 15 मिनटबाद मे उनके कमरे मे गय़ा। मां बेड पऱ पीठ केँ बलसोई हुई थि। सोते वक्त उनके साडी पल्लू निचे गिराहुआ थां औऱ मुझे उनका ब्लॉउज देखकर सुभह कां सीनयाद आँ गय़ा।
पहले तौ मैंने माँ कों आवाज़ लगाई” मम्मी…माँ.”
मम्मी कां कोई रिस्पांस नहि आया तौ मे उनकेपास गय़ा औऱ उन्हें हिलाया। ऐसालग रहा थां जैसे मम्मी बेहोश होँ गई हें उनकेबदन सें कोई रिस्पांस नहि दिया थां।
मुझेलगा दवाई कां असर होँ गय़ा हैं, आज तौ मम्मी कों चोद हि देंगे। पऱ फिन भि मन मे एक् डर सां लगरहा थां अगर मैंने अपना लण्ड माँ कि चुत मे डाला औऱ उनकी नींदखुल गई तोँ।
मे मम्मी कों नंगा करनाचाह रहा थां पऱ इसीडर सें असमंजस मे पड़ गय़ा।
फिन मेरे दिमाग़ मे आइडिया आया। मे रसोई मे गय़ा औऱ वहां सें एक् गाजर लेँ आया औऱ उनकेसर केँ पासआकर बैठ गय़ा।
मैंने मम्मी केँ गालों कों दबाया जिससे उनका मुंह थोडा खुल गय़ा फिन मैंने उनके खुलेहुए मुंह मे गाजर कां पतला वालाभाग डाला औऱ आरामसे गाजर उनके मुंह मे घुसाने लगा।
मैंने कहा “मम्मी लो गाजरखा लो”
मुझेपता थां कि मां मेरी बातेसुन नहि रही हैं पर्र मुझे उन्हें सम्बोधित करने मे अच्छा लगरहा थां।
उनका मुंह धीरे-धीरे धीरे-धीरे गाजर केँ दबाव सें खुलने लगा। फिन मैंने 5 मिनट तक गाजर कों उनके मुँह केँ अंदर बाहर् किया। अब मे निश्चिंत होँ चुका थां कि उनके मुंह कों चोदने सें उनकी नींद नहि टूटेगी।
मैंने कहा ” मां लगता हैं आपको गाजर नहि खानां चलोमै आपकोकुछ औऱ खिलता हु, जरा इस गाजर कों पकड़कर रखो मुँह मे, मै अभि आया”
औऱ गाजर उनके मुँह मे छोड़कर करमै अपने कपडे उतारकर पूरा नंगा हौ गय़ा।
मेरा 7 इंच कां लण्ड पूरीतरह खड़ा होँ गय़ा थां। मे अपने दोनों पांव केँ घुटनो कों उनके गर्दन केँ दोनों साइड टिकाकर बैठ गय़ा, जिससे मेरा लण्ड सीधा उनके गालों कों छूरहा थां।
मै ” चलो मम्मी अब लण्ड चखने कां वक़्त हौ गय़ा हैं। ”
अब मैंने गाजर कों मम्मी केँ मुंह सें निकाला। उनका मुंह खुला हि थां औऱ मैंने अपना लंड उनके मुंह मे डाल दिया। ऐसा करते हि मेरे मुँह सें अहह निकल गयीँ, …”अह्ह्ह …”
मेरे पुरे जिस्म मे करंट दौड़ गय़ा, मे तौ जैसे जन्नत कि सैर करनेलगा। अभि तौ केवल मेरा सुपाड़ा उनके मुंह मे थां, उनका मुँह गाजर केँ कारण मात्र २इंच तक खुला थां। मे कोई जल्दबाजी नहि करना चाहता जिससे कोई गलती हौ औऱ माँ कि नींदटूट जाये। मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने लण्ड कों उनके मुंह केँ अंदर बाहर् कररहा थां, मतलब सुपाड़े कों…। क्योंकि मेरे लण्ड कां सुपाड़ा हि २इंच कां हैं औऱ लण्ड कां निचला भाग औऱ मोटा हैं, जबकि मां कां मुँह मात्र २इंच हि खुला थां.
मै ” कैसालगा मेरे लण्ड कां सूपड़ा मम्मी”
मे उनका मुंह फैलाना चाहता थां, पऱ धीरे-धीरे। 10 मिनट धीरे-धीरे धीरे-धीरे सुपाड़ा अंदर बाहर् करने केँ बाद मैंने लण्ड कां दबाव थोडा बढ़ाया जिससे मेराआधा इंच औऱ लण्ड उनके मुंह मे घुस गय़ा। अब मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे धक्के मारकर उनके मुंह कि चुदाई करनेलगा। मेरेइस चुदाई सें मां कि सांसे भि तेज होँ रही थि।
५ मिनट धक्के मारने केँ बाद मैंने एक् हाथबैड पर्र रखकर सहारा लेते हुवे दूसरे हाथ सें मां केँ सर कों निचे सें पकड़कर सर कों उठाया औऱ उसी वक़्त ऊपर सें अपनेकमर कों निचे दबाया, जिससे मेरा लण्ड५ इंच तक मां केँ मुँह मे घुस गय़ा औऱ ऐसालगा रहा थां कि अब उनका मुँहफट जायेगा।
उनकी आँखे तोँ बंद थि पर्र फिन भि मेरेइस हमले सें उनकेबंद आँखों केँ किनारे सें पानी आँ गय़ा।
मै ” अरे मम्मी रोना आँ गय़ा क्याँ, चलो धीरे-धीरे करताहु ” ऐसा कहकर मैंने अपनीकमर पीछे कि औऱ मात्र २इंच लण्ड बाहर् आया मतलब३ इंच इन्दर हि थां फिन सें लण्ड अंदरपेल दिया। औऱ ऐसे हि २ मिनट चोदने पऱ हि उनकी साँसे फूलने लगी।
मैंने अपना लण्ड बहार निकाला।
मैने मम्मी कों कहा ” मम्मी लगता हैं इस पोजीशन मे पूरा लण्ड नहि जायेगा चलो पोजीशन चेंज करते हैं”
पर्र मां तोँ बेहोश थि गोली केँ असर सें। मुझे भि एक् हाथ सें सपोर्ट लेनापड़ रहा थां तौ थोड़ी तकलीफ़ हौ रही थि|
मैंने माँ कों बेड पर्र हि पीठ केँ बल हि घुमा दिया औऱ उन्हें इसतरह सुलाया कि उनका गर्दन सें नीचे कां पूराभाग पलंग पर्र औऱ सरखाट सें नीचे झूलने लगा | मे पलंग सें नीचेउतर कर उनकेसर केँ ऊपर पलंग सें सटकर खड़ा होँ गय़ा अब उनकासर बैड सें नीचे औऱ मेरे दोनों पैरों केँ बीच मे थां, उनकी चोटी जमीन कों छूरही थि|
मैंने नीचे सें उनकेसर कों दोनों हाथों सें पकड़कर उठाया औऱ उनके खुले मुंह मे ऊपर सें लण्डपेल दिया|
ऐसा करते हि मुझेऐसा लगा मानो मेरा लण्ड उनकेगले मे घुस गय़ा हौ जब मैंने नीचे अपने लण्ड कि तरफ देखा तौ पाया कि मेरा लण्ड 6 इंच तक तक मम्मी केँ मुंह मे घुस चुका थां औऱ उनकीगले मे मेरा लण्ड कां उभारसाफ नजर आँ रहा थां… मैंने अपना पूरा लण्ड उनके मुंह सें निकाला एक् झटके मे हि 6 इंच तक फिन सें घुसा दिया| औऱ ऐसे हि चुदाई करनेलगा |
मे ” माँ तुम् दुनिया कि सबसे अच्छी मम्मी हौ…अह्ह्ह। आईलवयू मा…अह्ह्ह…आई लवयू… ”
मुझेलगा कि अब मे झड़ने वाला हूं| तोँ मैंने सोचा झड़ने सें पहले एक् बार पूरा लण्ड मम्मी केँ मुंह मे घुसालू |
मैंने झट सें अपना लण्ड बाहर् निकाल दिया | मैंने नीचे मम्मी कां चेहरा देखा, उनके मुँह सें लारबह रही थि जौ उनके दोनों गालो सें होते हुवे गर्दन पर्र औऱ फिन जमीन पऱ गिररही थि। उनके आँखों केँ कोने सें भि पानी कि बूंदे बहरही थि। यहसभी मेरे मोटे लण्ड सें उनकीगले कि चुदाई कां नतीजा थां।
मम्मी कि ऐसी हालत देखकर मे समझ गय़ा थां कि उन्होंने बड़ी मुश्किल सें मेरा 6 इंच कां लण्ड अपने मुंह मे लिया हैं| पर्र मुझे तौ अपना पूरा लण्ड घुसाने कां भूत सवार हौ गय़ा थां|
मैंने माँ सें कहा” मम्मी, मे झड़ने वाला हूं, तुमने मेरा 6 इंच कां लण्ड मे मुंह मे लेँ लियाबस 1 इंच औऱ बचा हैं| प्लीज। बस एक् बार पूरा लण्ड लें लो मुंह मे। मेरे झड़ने सें पहले|”
मे अपनी बेहोश मा सें रिक्वेस्ट कररहा थां जैसे वो मेरी बातें सुनरही होँ औऱ मे उन्हें मनारहा हूं कि वो मेरा पूरा लण्ड मुंह मे लेँ लें|
मुझेपता थां कि इस पोजीशन मे शायद मे अपना पूरा लण्ड घुसा नहि पाऊंगा|
मैंने मां कों उठाकर निचे जमीं पर्र बिठाया औऱ उनकापीठ बेड सें चिपका दिया ताकि उन्हें सहारा मिलसके।
अबमै उनके सामे खड़ा थां औऱ वोँ बैठी हुइ थि उनके दोनों हाथ निचे जमीन पऱ थें। उनकासर बेड कि लंबाई सें ऊपर थां बेड कि कद केवल उनके गर्दन तक हि थि। अभि भि उनके मुंह सें पानीबह रहा थां|
मैंने कहा“चलो मे सजधजकर होँ जाओ पूरा लेने केँ लिए”
ऐसा कहकर मैंने उनकेसर कों दोनों हाथों सें पकड़कर अपना लौड़ा उनके मुंह मे पेल दिया| औऱ उनकेसर कों दोनों हाथो सें पकड़कर अपने लण्ड पऱ दबा दिया। ऐसा करते हि मुझेमरी मम्मी केँ होठो कां स्पर्श मेरेआंड पर्र हुआ यानी मेरा पूरा लण्ड उनके मुँह मे थां। मुझेऐसा अहसास हौ रहा थां मानो मेरा लण्ड उनकेगले केँ निचे तक चला गय़ा हैं। मैंने अपना लौड़ा उनके मुंह सें बाहर् निकाला|
इस टाइम उनके मुंह सें लार कि धार छूटी थि| मेरा लण्ड सें भि लारटपक रही थि ऐसालग रहा थां जैसेउसे अभि तेल केँ डिब्बे मे डुबोकर निकाला गय़ा होँ | मम्मी कां ब्लाउज आगे सें पूरा गीला होँ गय़ा उनके मुंह केँ पानी सें| अब तक कि चुदाई मे ये मेरा सबसे आनंदित अनुभव थां|
मे “माँ एक् बारफिन सें”
येकहकर मैंने फिन सें उनका मुंह पकड़ केँ अपना लण्ड उनकीगले केँ नीचे उतार दियाइस बार मे कुछ लम्हा रुककर लण्ड कों पूरा बाहर् निकाला औऱ औऱ फिन सें पेल दिया|
अब मैंने ऐसे हि चुदाई शुरुआत कर दि| मेरे मुंह सें आहे निकलरही थि “आह्ह्ह्हह्ह…। आह्ह्ह्हह्ह…….आआह्ह्ह्हह्ह …मम्मी…….आह्ह्ह्हह्ह….मै गय़ा ….” औऱ मेरे लण्ड सें वीर्य कि पिचकारी छूट पड़ी|
मैंने 2-3 धक्के औऱ लगाकर पूरा वीर्य माँ केँ मुंह मे निकाल दियाकुछ तौ सीधा उनकेगले केँ नीचे हि गय़ा| औऱ बाकीसभी उनके मुंह मे रह गय़ा| मैंने लण्ड उनके मुँह सें बहार निकाल कर उनका मुँहबंद कर दिया ताकि मेरा वीर्य उनके मुहसे बहार नं आये|
मैंने अपने कपड़े पहने औऱ मम्मी कों उठाकर बैड पऱ सुला दिया| अपने कमरे मे जाने सें पहले मैंने उनका मुंह खोलकर चेक किया तौ पाया मेरा सारा वीर्य मम्मी नींद मे हि पी चुकी थि, उनके मुंह मे कुछ नहि थां|
मे खुशी खुशी अपने कमरे मे जाकरसो गय़ा…
दोस्तों अबआगे कि स्टोरी
माँ कि जबरदस्त मुँह पेलाई केँ बाद मुझे बहोत अच्छी नींदआई। मैसाम कों उठाजब मां मुझे उठाने आयी।
मां मुझे जागते हुए बोलीं " कितना सोयेगा नीरज, उठ जा। "
मुझे बहोत मीठी नींद आँ रही थि, मैंने कहा " मम्मी थोडा औऱ सोनेदो न् अच्छी नींद आँ रही हैं
मम्मी "देरसाम तक सोयेगा तोँ रात मे क्याँ करेगा। " औऱ मुझेबहो सें पकड़कर उठाकर बिठा दिया।
मैमन मे " तुम्हारी गांड मरुँगा " मेरे शैतानी मन मे आईडिया आया।
मै मां सें " ठीक हैं मां उठ गय़ा, पर्र मेरेसर मे दर्द हौ रहा हैं।
मम्मी " मै तेरेलिए बादाम वालादूध लतीहु उससे ताकत मिलेगी औऱ सर दर्द मे रहत भि होगा "
मुझे मेरा प्लान फेल होतानजर आयामै जल्दी बोला " मां रहनेदो, मै मेडिकल सें सरदर्द कि गोली लेकरखा लूंगा तौ आराममिल जाएगा। "
मम्मी बादाम वालादूध लें आयी " आजकल केँ बच्चे हरबात पऱ गोली खाते हैं। ठीक हैं चलदूध पीकरफिन गोलीखा लेना "
मैंने ख़ुशी ख़ुशी बादाम वालादूध पिया औऱ अपने साथी केँ मेडिकल कि दुकान कि तरफ निकल गय़ा।
जबमै सुनील कि मेडिकल शॉप पऱ पंहुचा तोँ मुझे देखते हि सुनील मेरेपास आया औऱ उसने जोँ मुझसे कहा, सुनील " भइया, सॉरी "
मै" सॉरी क्यूं बोलरहे हौ भइया ?"
उसका बोलै " भइया गलती सें तुम्हे नींद कि गोली केँ बदले विटामिन कि गोलीदे दिया थां मैंने, उसकेलिए "
ये सुनकर मैचौक गय़ा।
मै "क्याँ " मेरे मुँह सें अचानकन निकल गय़ा औऱ मेरा मुँह खुला कां खुलारह गय़ा।
उसनेकहा " भइया इतनाचौक क्यूं रहे हौ?"
मै " कुछ नहि भइया ?" औऱ मन मे " साला तेरी गोली कों नींद कि गोली समझकर मैने बेरहमी सें मम्मी कि मुँह चोदा हूं औऱ तुँ कहरहा हैं क्यूं चौकामै "
अबमैसमझ गय़ा थां कि मेरी रंडी मां जागरही थि पऱ सोने कां नाटक कि वोँ। मेरे दिमाग़ मे फिन मम्मी कि चुदाई कां प्लान आनेलगा मैसमझ चूका थां कि मम्मी चुदने कलिए बिलकुल रेडी हैं।
जबमैघऱ पंहुचा तोँ घऱ पर्र हमरी पडोसी सुधा आंटीआयी हुयी थि औऱ वोँ मम्मी सें बातेकर रही थि।
सुधा आंटी४० साल कि शादीशुदा स्त्री थि जिनके चुची औऱ गांड केँ आशिक पूरा मोहल्ला थां। उनकारंग गेहुआ, चुची४० कि औऱ गांड४२ केँ तौ जरूर होंगे। हकीकत तोँ यह हैं कि मै भि कईबार उनकोयाद करके हस्तमैथुन कर चूका हूं।
मुझे देखते हि आंटी बोलीं " केसे हौ बेटा, दिदी (मेरी मम्मी) कहरही थि कि तुम्हारी तबियत सही नहि हैं "
मै " ठीकहु आंटी, बस थोडा सर दर्द हैं, आप् कैसी हौ ?
आंटी " मैठीक हु बेटा, ठीक हैं दिदी मै चलती हूं"मेरी तरफ देखते हुवे " तुम् अपना ख्याल रखो नीरज "
आंटी केँ जाने केँ बाद मैंने मां सें पूछा कि आंटी क्यूं आयी थि।
मां बोलीं " वोँ निर्मला केँ टूशन टीचर हैं नाँ राजीव, उनके पापा कि तबियत ख़राब हौ गयीँ, हैं तौ वोँ देहात चलेगए हैं "
मै " तौ क्याँ हुआ "
मम्मी " वोँ कहरही थि कि तुम् यहा होँ तौ तुम् हि थोडा उसे पढ़ा लियाकरो "
मै चौकते औऱ छीलते हुवे" क्याँ? निर्मला कों?"
मां " हां, इतना क्यूं चौकरहा हैं "
मै " आपकोपता हैं उस बेवकूफ कों कुछ नहि आता, उसे पढ़ाने कां मतलब हैं पत्थर पऱ सर फोड़ना "
निर्मला, सुधा आंटी कि एकलौती बेटी, जौ बेवकूह हैं उसेकुछ जल्दसमझ मे नहि आता। उसकेलिए सुधा आंटी नें प्राइवेट टूशन टीचररखा थां जोँ अभि देहात गय़ा हैं। वोँ एक् बार७ मे औऱ एक् बार८ मे फ़ैल भि होँ चुकी हैं वोँ अभि ९ क्लास मे पढ़ती हैं.
मम्मी " ठीक हैं, मैंने वैसे भि बोल दिया हैं उनको कि तेरी तबियत ख़राब हैं। "
फिन मम्मी नें खानां बनाया औऱ हमने खानां खाया। मां रसोई मे बरतन साफ़कर रही थि तभी मैंने मां कों कहा मां मै कोल्ड्रिंक लाया हूं, हम् दोनों केँ लिए आप् बरतन साफ़ करके बैडरूम मे आओ मे गिलास मे निकलता हूं।
मां " ठीक हैं, बेटा आती हूं "
मां मन मे " कमीना फिन सें नींद कि गोली लाया हैं, लगता हैं फिन सें मुझे लण्ड कां रस पीना पड़ेगा। मेरेगले कों सुरंग बनाकर हि मानेगा यहआज। कमीने नें बेशर्मी कि सारीहदे पारकर दि हैं अपनी मां कों हि अपना लण्ड चुसवा दिया"
मां काम ख़तम करके बैडरूम मे आयी। मैंने कोल्ड्रिंक मां कों दिया। मां कोल्ड्रिंक लेते हुवे बोलि " अबयहरात मे कोल्ड्रिंक पीना जरुरी हैं क्याँ ?"
मैंने जवाब दिया " हां मां, उससे आपकोरात मे अच्छी नींद आएगी औऱ आपकी थकान भि उतर जाएगी "
मम्मी मुस्कुराने लगी औऱ मन मे " कमीने तुँ जौ भि दवा डालता हैं उससे मुझे नींद नहि आती, तेरी सारी हरकते मुझेपता हैं। मुझेपता हैं रातभर मेरा मुँह चोदेगा तुँ आज "
मम्मी थोड़ी देरबाद बोलि " मुझे नींद आँ रही हैं मै सोने जातीहु तुँ भि अपने कमरे मे जाकरसो जा "
मै"ठीक हैं मां आप् सोजाओ "
रात केँ १०बाज रहे थें औऱ मां कों सोये हुवे१० मिनटबीत चुके थें। मै स्वयं पूरा नंगा हौ गय़ा औऱ मम्मी केँ पासआकर उनका ब्लाउज खोलने लगा
मै " मम्मी, अपने बड़े बड़े चूचियों केँ दर्शन देदो अपने प्यारे बेटे कों " ऐसा कहकर मैंने उनका ब्लाउज पूरा उतार दिया। मम्मी कां कोई रिएक्शन नहि थां। पऱ वोँ मन मे बोलि " हरामजादे कम सें कम थोडा प्रतीक्षा तौ करता, शुरुआत होँ गय़ा "
मुझे तोँ पता थां मम्मी जागरही हैं औऱ सोने कां नाटक करेगी। मुझे भि इसमें मज़ा आँ रहा थां औऱ मै एक्साइट भि हौ रहा थां।
मम्मी कि चूचियों कों ब्लाउज कि कैद सें आजाद करते हि दोनों बड़े खरबूजे हिलने लगे। उन्हें देखते हि मैंने कहा " वाउ मम्मी क्याँ दूदू हैं तुम्हारे, गोल औऱ इतने बड़े कि सारे मोहल्ले केँ लड़को कां पेटभर जायेगा इससे "
मां केँ गाललाल हौ गये थें मेरी बाते सुनकर पर्र उन्होंने अपनी आँखे नहि खोली। फिनमै उनके बड़े बड़े खरबूजे मसलने औऱ चूसने लगा। लगभग२० मिनटतब मैंने उनके चूचियों कों खूब चूसा औऱ मसला उनकेगोर गोर चूचिया लाल हौ गए थें औऱ मां कि सासेतेज होँ गयीँ, थि।
तब मैंने मां कि साड़ी खींचते हुएकहा " यह साड़ी बहोत परेशान कररही हैं "
अब मम्मी मेरे सामने आधी नंगी थि।
मतलबऊपर सें चुकी औऱ पेट पऱ कोई कपड़ा नहि थां औऱ निचे अभि भि पेटीकोट पहनाहुआ थां। मम्मी अब भि अपनी आक्न्हो कों जोरो सें भींचकर बंद कि थि।
मै साड़ी उतारने केँ बाद जल्दी अपनेकाम मे लग गय़ा औऱ मां केँ पेटीकोट कां नाडाखोल दिया औऱ पेटीकोट कों भि अपने मां केँ बदन सें आज़ाद कर दिया। अब बेचारी पेंटी बड़ी मुश्किल सें मेरी मां कों ढकने कि कोशिश कररही थि, पर्र मैंने उसकी वो कोशिश भि नाकाम कर दि। औऱ उनकी गुलाबी रंग कि पेंटी जौ आगे सें एकदम गीली थि वोँ अब जमीन पर्र पड़ी थि। अब मेरी मां केँ बदन पऱ कपडे केँ नाम पऱ एक् धागा भि नहि थां वोँ पूरी जन्मजात नंगी थि अपने जवान बेटे केँ सामने।
मां कों थोड़ी लज्जा जरूर आँ रही थि जौ उनके चहरे पर्र साफ़दिख रही थि। पर्र उनकेचुत कां गीलापन कुछ औऱ हि बयांकर रहा थां। अब तक मेरी प्यासी मां समझ चुकी थि कि मेरी केवल लण्ड चुसवाने कि मंशा नहि हैं बल्कि आज उनकीचुत कि गर्मी बुझाकर हि मैदम लूंगा। औऱ इसीसोच सें उनकेचुत पानी सें लबालब गीली हौ गयीँ, थि। फिन मैंने अपनाखेल शुरुआत किया औऱ मां केँ दोनों पांव कों फैलाकर उनकी जांघो केँ बिच अपनेसर कों लेँ आया औऱ मेरी जुबान कों मां कि गर्म गीलीचुत सें सटा दिया।
मां शायद जानती थि कि मै क्याँ करने वालाहु, फिन भि उनके मुँह सें हल्की चीख निकल हि गई, पऱ आँखे अभि भि उनकीबंद हि थि। औऱ मेरे तौ मन कि मुराद पूरी हौ गयीँ, थि। मे जीवन मे पहिली बारचुत कां स्वाद चखारहा थां, वोँ भि मेरी मम्मी कि चुत कां। मां नें अपने पैरो कों औऱ खोल दिया औऱ मै अपनीजीभ उनकीचुत मे घुसाकार उनकीचुत कि चुदाई जीभ सें करनेलगा।
उफ्फ्फफ्फ्फ़, मै तौ पागल होँ गय़ा थां औऱ यहीहाल मेरी मां कां भि थां। मां कि चुत कां रसपान करकेमै उठा औऱ मम्मी कों कहा " मम्मी तुम्हारे चुत कां रस बहोत टेस्टी हैं। " मम्मी केँ बंद आँखों केँ बावजूद उनके चहरे पऱ कामुकता केँ भाव साफ़दिख रहे थें।
मै तौ जनता थां कि वो सभीसुन रही हैं पऱ सोने कां नाटककर रही हैं, इसलिये मैफिन सें बोला " मां, तेरी दहकती चुत केँ लिए मेरा७ इंच कां लण्ड सजधजकर होँ गय़ा हैं, बोल लेगी मेरा लौड़ा "
मम्मी मन मे " माधरचोद कहिके, नींद कि गोली खिलाकर मेरीचुत मे आग लगाकर अबपूछ रहा हैं मै छोडूंगी याँ नहि। बनजा कमीने तूँ माधरचोद औऱ चोददे तेरी प्यासी मां कों। फाड़दे मेरीचुत कों अपने७ इंचक लण्ड सें। "
पर्र मम्मी नें एक् शब्द भि मुझेकहा नहि।
अब मुझसे भि कण्ट्रोल नहि हौ रहा थां, मां पलंग पऱ पीठ केँ बल लेती थि औऱ उनकी दोनों पेर खुले थें जोँ मुझे आमंत्रित कररहे थें। मैंने भि मां कि दोनों टांगो कों उठाया जिससे उनकीचुत ऊपर कों उठ गयीँ, औऱ मैंने उसमे अपना लण्ड एक् हि झटके मे पेल दिया।
मां केँ लाख कोशिशों केँ बावजूद उनके मुँह सें चीख निकल हि गई,। मम्मी " आह्ह्हह्ह्ह्ह " पर्र फिन सें मां नें मुँहबंद कर लिया अपनी आँखों कि तरह।
मेरे एकाएक झटके सें उन्हें दर्दहुआ थां। फिन मैंने धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार शुरुआत कि
मै मम्मी कों इसी स्टाइल मे चोदने लगा।
मै " उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.मां बहोत मज़ा आँ रहा हैं.आज मेरी बरसो कि खवाहिश पूरी हौ गई,। मै माधरचोद बन गय़ा। " औऱ ऐसे हि नं जाने क्याँ क्याँ मेरे मुँह सें निकलरहा थां। मां कि मात्र सिसकारिया निकलरही थि, मैंने ऐसे हि मां ३० मिनट तक चोदा। इसीबिच मम्मी भि दोबार झाड़ गई, मुझे महसूस हुआ।
तभी मैंने सोचायह अच्छा मौका हैं मम्मी सोने कां नाटककर रही हैं, इसकी गांड भि मारली जायपता नहि जब जागेगी तौ देगी भि याँ नहि। मैंने बहोत सारे स्टोरीज मे पढ़ा थां कि लड़किया याँ औरते जल्द गांड नहि मरवाती।
मैंने अपना लण्ड मां कि चुत सें बहार निकला औऱ उठा। मम्मी केँ चहरे पर्र सवालिया निशान आँ गए पऱ उन्होंने आँखे नहि खोली। मै मम्मी केँ पासआया औऱ उन्हें पलट दियाअब उनकी चुकीबैड सें सटी थि औऱ उनकी गांडऊपर कि तरफउठी हुयी थि जौ मेरा टारगेट थि।
ऐसा करते हि मां कों मेरा इरादा पताचल गय़ा, बिचारि मन हि मन भगवान् सें दर्द सहने कि ताकत मांगने लगी। क्युकी मेरा लण्ड बहोत मोटा जोँ थां।
मैंने मां सें कहा " मां तेरीइस गांड नें मुझे बहोत तरसाया हैं। आज तेरी गांड सें पूरा बदला लूंगा अपनेइस मोठे लण्ड सें। " मेरे इतना कहासे सें मम्मी कों पूरा यकीं हौ गए जोँ उसने सोचा थां वही होगा।
फिन मैंने अपने लण्ड पऱ थोडा सां तेल लगाया औऱ थोडा सां तेल मम्मी कि गांड केँ होल मे भि लगाया औऱ उसमे ऊँगली डालने लगा। उनकी गांड बहोत टाइट थि वोँ पूरीहिल गयीँ, मात्र ऊँगली डालने भर सें। मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे दोदो ऊँगली उनकी गांड मे घुसाने लगा।
जबी उनकी गांड अच्छे सें खुल गयीँ, औऱ मुझेलगा अब उन्हें दर्दकम होगातब मैंने उनके गांड केँ छेद पर्र अपना लण्डरखा औऱ दबाव डालकर उनकी गांड मे अपने लण्ड कां सुपड़ा घुसा दिया। वोँ दर्द सें फिन कराहउठी" आहहहह" पऱ अभि भि सोने कां नाटक करतीरही।
मेरी तौ ख़ुशी कां कोई ठिकाना नहि थां उनके टाइट गांड मे लण्ड घुसाने मे बहोत आनंद आँ रहा थां। फिन मैंने थोडा औऱ दबाव बढ़ाया तेल कि वजह सें मेरा लण्ड मां कि गांड मे फिसलते हुवे जानेलगा। धीरे-धीरे धीरे-धीरे मैंने अपना पूरा लण्ड उनकी गांड मे उतार दिया।
फिनमै ऐसे हि मां केँ गांड कि सवारी करनेलगा औऱ अपने झटको कि रफ़्तार कों बढ़ा दिया मेरेसब धक्को केँ संगबैड औऱ मम्मी दोनों हि हिलरहे थें।
२० मिनट तक मां कि गांड मारने केँ बाद मुझेलगा कि मेरा वीर्य निकलने वाला हैं तोँ मैंने अपना लण्ड मां कि गांड सें बहार निकाला।
औऱ मम्मी कों फिन सें पलट दिया औऱ मै उनके मुँह औऱ चेहरा पर्र अपनामाल निकालना चाहता थां जैसे पोर्न मूवी मे होता हैं।
मै उनके चहरे केँ पासआकर अपना लण्डजोर सें हिलाने लगा मेरे लण्ड नें पिचकारी छोड़ना शुरुआत कि पहली पिचकारी उनकेनाक केँ पास सें हआतेहुए आँखों केँ ऊपर सें बालो तक पहुंची फिन मैंने अपने लण्ड कों निचे कि तरफकर दिया जिससे सारामॉक उनके मुँह केँ पास हि गिरा। तभी मैंने कहा " मां मुझेपता हैं तुम् जागरही होँ जल्द सें मुँह खोलोबचा हुआमाल अंदर डालना हैं "
मेरे इतना कहते हि मां नें मुँहखोल कर मेरा लुंड मुँह मे लें लिया औऱ लण्ड निकलते हि मुस्कुराते हुवे आँखों खोल दि।
कुंवारे लण्ड के कारनामे-माँ की मुँह पेलाई - desi chudai mom son – New Episode
दोस्तों अब तक कि स्टोरी मे मेरी मम्मी मुझसे नींद कां नाटक करतेहुए चुदी औऱ आखिर मे उसने अपनी आँखेखोल दि। अबआगे.
मां नें जब आँखे खोली तौ मैंने उनसेकहा " मां तुम् दुनिआ कि सबसे अच्छी मां होँ "
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलि " औऱ तूँ दुनिया कां सबसे कमीना माधरचोद बेटा हैं "
उनकीबात सुनकर मुझेहसी आँ गयीँ,। फिन वोँ अपने उंगलियों सें उनके चहरे पर्र लगे वीर्य कों साफ़ करनेलगी औऱ बोलि " कितना ज़्यादा रास निकलता हैं तेरे मोटे लण्ड सें " फिन उनके उंगलियों मे लगा सारा वीर्य कों उन्होंने मुँह मे डाल लिया औऱ बोलि " गाढ़ा भि बहोत हैं "
फिन मे उनकी सहायता करनेलगा औऱ उनके चेहरे पर्र लगे सारे वीर्य कों साफ करके उनके मुँह मे डाल दिया जिसे वोँ पि गयीँ,।
जब उनका चेहरा पूरा साफ़ हौ गय़ा तब वोँ बोलीं " तुझेही कबपता चलामै जागरही हूं "
मै " मुझे तौ शुरुआत सें हि पता थां"
मां" तेरी नींद कि गोली बेकार हैं जोँ भि तूँ लाया थां, मै स्ट्रांग हूं "
मै " मैंने आपकोकोई नींद कि गोली दि हि नहि थि"
मम्मी झेप गयीँ, बोलि " बदमाश कही कां "
मैंने कहा "बदमाशी तोँ अब शुरुआत होगी मेरी चुदकड़ मम्मी, चलोअब मेरे छोटे राजा कों चूसकर बड़ाकर दो "
मेरे इतना कहते हि मम्मी जैसे तैयार हि थि इसकेलिए, उन्होंने जल्दी मेरे मुरझाये हुए लण्ड कों मुँह मे लेकर चूसना शुरुआत कर दिया।
उनके गर्म होठो केँ स्पर्श पाते हि मेरे लण्ड मे रक्त कां प्रवाह तेजी सें बढ़ने लगा औऱ उसका साइज भि। ५ मिनट मे मेरे लण्ड नें फिन सें विकराल रूप धारणकर लिया।
इसबार मैंने मम्मी कि चुतफाड़ चुदाई कि, वो भि अलगअलग आसन मे औऱ इसमें मां नें भि मेरा भरपूर संग दिया। चुदाई केँ वक्त मां केँ मुँह सें न् जाने क्याँ क्याँ निकलरहा थां,
मां " आआआह्ह्ह्हह्ह। फाड़ डालारे। आआआह्ह्ह्हह्ह। बहोत मोटा लण्ड हैं रे मेरे बेटे कां। आआआह्ह्ह्हह्ह। मेरा बेटा माधरचोद हैं.आआआह्ह्ह्हह्ह.आआआह्ह्ह्हह्ह.माधरचोद बेटे नें अपनी मम्मी कि चुत फाड् दि रे.आअह्हह्ह्ह्ह। बहोत आनंद आँ रहा हैं.आअह्हह्ह्ह्ह." मम्मी कि इन बातो सें मै औऱ भि उत्तेजित हौ रहा थां।
हमारी चुदाई पूरी होने केँ बाद हम् नंगे हि सोगए। सुभह मां नें हि मुझे जगाया फिन हम् दोनों नाहा धोकर फ्रेश हुए मां नें ब्रेकफास्ट बनाया औऱ हम् दोनों संग मे ब्रेकफास्ट कररहे थें।
ब्रेकफास्ट करतेहुए मां " तुम्हें मुझमे सबसे अधिक क्याँ पसन्द हैं "
मम्मी कि इस अचानक प्रश्न सें मै चौकाफिन मैंने जवाब दिया " मुझे आप् पूरी अच्छी लगती होँ "
मम्मी " मुझे तुँ बनामत जोँ पूछरही हु उसका जवाबदे "
मैंने फिनसच बोल हि दिया " मुझे आपकी गांड बहोत मनपसंद हैं "
मां " क्यूं "
मै "वोँ बहोत बड़ी औऱ गोल जोँ हैं इसलिये "
मां " तोँ तुम को बड़ी गांड पसन्द हैं औरतो कि "
मै " हाँ मम्मी "
मां " तब तोँ तुझेही सुधा कि गांड भि मनपसंद होगी ? उसकी तौ मुझसे भि बड़ी गांड हैं "
मै थोडा सकपकाया फिनहाँ मे सर हिला दिया।
मेरी मम्मी केँ चहरे पर्र कामिनी मुस्कान आँ गयीँ, " तोँ तूँ सुधा कों भि चोदना चाहता हैं "
मै " मौका मिलेगए तोँ जरूर"
मम्मी " मौका बनाने सें मिलेगा औऱ एक् मौका हैं तेरेपास "
मै " कैसा मौका "
मां " निर्मला "
मै " क्याँ "
मम्मी " अगरगाय कों काबू पाना होता हैं तौ उसके बछड़े (गाय कां बच्चा ) कों काबू मे करना होता हैं। तुँ निर्मला कों पढ़ा औऱ सुधा शायद तुझसे सेट होँ जाय "
अबमै भि मां सें पूरीतरह खुल गय़ा थां।
मै "मां तुम् मेरीमदत कर सकती हौ इसमें "
मम्मी " मै क्याँ करू "
फिन मैंने मम्मी कों कहा कि "मै निर्मला कों पढ़ाऊंगा औऱ आप् सुधा आंटी कों सेक्स केँ लिए उत्तेजित करो अपनेसंग बिठाकर, औऱ मेरे बारे मे भि बातकरो "
मां " मैसमझ गई,, एक् हफ्ते मे वोँ देख्ना तेरे लण्ड कि दीवानी होँ जाएगी "
इतना सुनते हि मेरेमन मे लड्डू फूटने लगे।
तभी मां नें सुधा आंटी कों फ़ोन किया औऱ उनसेबात कि औऱ उन्होंने मुझे बताया कि निर्मला १बजेघऱ आँ जाएगी विद्यालय सें औऱ मुझे डेढ़बजे बुलाया हैं घऱ पऱ टूशन केँ लिए।
उसकेबाद मां रसोई मे चली गई, खानां बनाने औऱ फिनबाद मे हमनेलंच खाया औऱ १बजे आंटी केँ घऱ कि तरफ निकल गय़ा।
जब मैंने दरवाजा कि बेल बजायी तोँ निर्मला नें दरवाजा खोला जोँ अभि भि विद्यालय ड्रेस मे थि।
निर्मला " माँ, भैया आये हैं "
सुधा आंटी " ठीक हैं बेटी उनको अंदर बिठा औऱ पानी पीलामै आयी "
आंटी मेरेपास आतेहुए " थैंकयू बेटा जौ तुम् इसे पढ़ाने केँ लिए राजी हौ गए"
मै " आंटी इसमें थैंक्स वालीकोई बात नहि निर्मला तोँ मेरी छोटी बेहन कि तरह हैं.औऱ हाँ आपको मम्मी नें बुलाया हैं "
आंटी " ठीक हैं बेटा तुम् निर्मला कों पढ़ाओ मै दिदी सें मिलकर आती हूं " तभी निर्मला आयी बुक्स लेकरउसे थोड़ी खासी आँ गई,।
आंटी जातेहुए निर्मला सें " तुँ शहदखा लें तेरी आराम मिलेगा खासी सें " इतना सुनते हि अचानक सें मेरे दिमाग़ मे एक् शैतानी आईडिया आया औऱ इस आईडिया सें निर्मला कां आई क्यू ( कितनी समझदार हैं वोँ ) लेवल भि चेक होँ जाता।
मैंने मम्मी कों पहले हि बोल दिया थां कि २ घंटे तक आंटी कों उत्तेजित करते रहनाकम सें कम।
आंटी केँ जाते हि निर्मला नें दरवाजा बंद किया औऱ बुक्स लेकर मेरेपास आयीमै हाल मे सोफे पर्र बैठा थां। उसेफिन सें खासीआयी तब मैंने कहा "निर्मला तुम् शहद लेँ लो ताकि पहले तुम्हे आराममिल जायेफिन पढ़ाई करेंगे "
निर्मला " ठीक हैं भैया पऱ शहद खाने सें जल्दी आराम नहि मिलेगा "
मै " हाँ पऱ अगरशहद कों गले मे लगाया जाये तोँ जल्द आराम मिलेगा "
निर्मला मुझे सवालिया नजरो सें देखने लगी|
मै " हाँ उससे औऱ जल्द फायदा मिलता हैं, पऱ शहदगले मे हि रहना चाहिए तुम् उसेगटक (पी ) मत जानां "
निर्मला " अच्छा "
मुझे मेरा प्लान कुछकुछ सफल होतालग रहा थां। मै"अबजाओ शहद कि बोत्तल लेँ आओ "
निर्मला चुपचाप उठी औऱ रसोई सें शहद कि बोतल लें आयी।
मैंने उसे घुटने केँ बल बैठने कां इशारा किया। वोँ बैठ गयीँ, मैंने कहा"मै तुम्हारे मुँह मे शहद लगताहु ठीक हैं "
निर्मला " ठीक हैं भैया "
मैंने शहद कि बोतल खोलकर ऊँगली सें शहद निकाला औऱ निर्मला कों मुँह खोलने कां इशारा किया उसने मुँह खोला औऱ मै अपनीशहद सें डूबी हुयी ऊँगली उसके मुँह केँ अंदर घुमाने लगा। मैंने उसके मुँह मे अच्छे सें शहदलगा दिया। मै उसकेगले मे भि ऊँगली सें शहद लगाने कां प्रयास किया।
मै निर्मला सें " मैंने तुम्हारे मे तौ शादलगा दिया पर्र गले तक मेरी ऊँगली नहि पहुंच रही तुम्हारे पासकुछ हैं जिससे मे शहदगले मे लगादू "
निर्मला " टूथ ब्रश चलेगा ?"
मै " पागल हौ गयीँ, होँ क्याँ वोँ बहोत सख्त होती हैं औऱ उससे तुम्हारे गले मे चोटलग सकती हैं। कोईनरम चीज होँ तौ बताओ "
निर्मला कुछ सोचते हुए " ऐसी तौ कोई भि चीज नहि हैं मेरेपास। अब क्याँ करे ?"
मैंने भि सोचने कि एक्टिंग कि फिन मैंने कहा " निर्मला मेरेपास कुछ हैं। जानेदो तुम्हे अच्छा नहि लगेगा.औऱ तुम् मनाकर दोगी, भले चाहेमै तुम्हारी भलाई कि सोचरहा हूं "
निर्मला " नहि भैया मैमना नहि करुँगी, अब आप् बताईये आप् मेरेलिए इतनासोच रहे हैं गलत थोड़े हि सोचेंगे "
मै " तुम्हे बुरा लगेगा "
निर्मला " नहि बुरा लगेगा "
मै " प्रॉमिस ?"
निर्मला " प्रॉमिस "
फिन मैंने अपना शॉर्ट्स निचे किया। दोस्तों मैंने घुटने तक कां शॉर्ट्स पहना थां वोँ भि बिना अंडरवियर केँ औऱ जैसे हि मैंने अपना शॉर्ट्स नीचे सरकाया मेरे काले नागराज नें निर्मला कों अपने दर्शन दिए। जिसे देखकर वोँ शर्मा गई,। तब मैंने कहा " मुझेपता थां कि तुम्हे बुरा लगेगा इसलिये मैमना कररहा थां " ऐसा बोलकर मैंने शॉर्ट्स ऊपरकर लिया औऱ फिन मैंने कहा " तुम्हारा प्रॉमिस भि टूट हि गय़ा "
जैसे हि मैंने यहबात कही तोँ उसके अहंकार पऱ चोट हुयी औऱ मेरातीर सही निशाने पऱ लगा वोँ जल्दी बोलीं " निर्मला कां प्रॉमिस मतलब पक्का प्रॉमिस, अगर आप् उससेशहद लगाएंगे तोँ मुझेकोई प्रॉब्लम नहि लगाइये "
मेरा प्लान पूरीतरह कामयाब होँ रहा थां इसलिये मैंने अपना अंतिम दांव भि चल दिया " पऱ तुम् अपने माँ बापू कों बताओगी तोँ उनको बुरा लगेगा उसका क्याँ "
निर्मला " मै प्रॉमिस कराती हु किसीको नहि बताऊगी "
मैमन हि मनखुश होँ गय़ा कि इसका बेवकूफ होना इतना भि बेकार नहि हैं। इसबार मैंने अपने शॉर्ट्स कों निकाल हि दिया वोँ मेरे टनटनाते ७इंचक लण्ड कों मात्र निहार रही थि। फिन मैंने उसकेशहद कि बोतल मे अपने लण्ड कों डुबाया औऱ उसे मुँह खोलने कां इशारा किया। उसने अपना मुँह खोला औऱ मैंने उसके छोटे सें मुँह मे अपने काले लण्ड कों पेल दिया मेरा लण्ड उसकेगले कों छूरहा थां। तभी मैंने निर्मला कां कॉन्फिडेंस बढ़ाने केँ लिएकहा " देखो शायद तुम् पूरा मुँह मे नहि लें पाओगी मुझे लगता हैं मै कोशिश करताहु अधिकदूर तक गले मे शहदलगे जहा तुम् हारजाओ मुझे इशारा कर देनामै रुक जाउगा "
मैंने जान बूझकर हारने वालीबात कहीअब उसेहर हाल मे जितना थां।
उसकी सहमति मिलते हि मै उसकेसर कों पकड़कर अपने लण्ड पऱ दबाया औऱ पूरा कां पूरा लण्ड उसके मुँह मे तेल दिया। मुझे महसूस हुआ मेरे लण्ड कां सुपाड़ा उसकेगले केँ निचे तक चला गय़ा थां।
फिन मैंने लण्ड बहार निकाला वोँ खांसने लगी औऱ हाफने भि लगी।
मै अपने मिशन मे पूरीतरह सफल हौ रहा थां निर्मला नें अपने मुँह मे मेरा लण्ड लें लिया थां पऱ आप् तोँ जानते हैं मुँह चोदने कां मज़ा हि कुछ औऱ होता हैं मुझे उसकी मुँह पेलाई करनी थि।
फिन मैंने कहा "तुम् तौ बहोत बहादुर लड़की हौ मानगए तुम्हे "
यहबात सुनते हि उसके चहरे सें विजयी मुस्कान आनेलगी जिसे मैंने फिन सें चैलेंज दे दिया " पर्र अगरमै तुम्हारे गले कि मालिश करदू मेरे औज़ार सें तोँ तुम्हे औऱ जल्द आराम मिलेगा पर्र वोँ तुम् नहि करा पाओगी "
निर्मला " क्यूं नहि करा पाओगी "
मै " मुझे नहि लगता तुम् अपनेगले कि मालिश करा पाओगी "
निर्मला " मै करवाउंगी चलिए करिये आप् "
उसने मेरा चैलेन्ज स्वीकार कर लिया थां औऱ मुझे उसके मुँह चोदने कां मौका भि मिलने वाला थां।
मैंने उसेकहा " ठीक हैं तुम् सोफे पर्र पीठ केँ बललेट जाओमै तुम्हारे गले कि मालिश करताहु शहद सें। "
वोँ लेट गई, औऱ मै अपने लण्ड कों फिन सें शहद कि बोतल मे डुबाया औऱ उसके प्यारे सें मुँह मे अपने काले मोठे लण्ड कों दुबारा घुसा दिया। मै उसकेगले तक लण्ड पेलता फिन बाहर् निकालता औऱ जब लण्ड कां सूपड़ा उसकेगले सें निकलता तौ फिन सें मै लण्ड अंदरपेल देता। उसकेगले मे मेरे लण्ड केँ अंदर बाहर् होने कां उभर साफ़नजर आँ रहा थां। मेरे लण्ड कां शेप उसकेगले मे बनता थां.
मैंने स्लो मोशन मे उसकेगले कि चुदाई शुरुआत कि १५ मिनट केँ बाद मेराजोश बढ़ने लगा। मैंने उसेकहा अब फ़ास्ट मालिश करताहु औऱ फिन मैंने स्पीड बढ़ा दि अब तौ मेरे लण्ड कां सूपड़ा उसकेगले मे हमेशा रहता औऱ मैऐसे हि उसे चोदता रहा। लगभग२० मिनट होँ गए, वो पूरीतरह हिलजा रही थि पर्र उसने हिम्मत नहि छोड़ी पर्र मेरे लण्ड नें पानी जरूर छोड़ दिया। मुझे बहोत मज़ा आँ रहा थां पऱ निर्मला कि हालत ख़राब हौ रही थि।
मैंने अपना पानी उसके मुँह मे हि छोड़ दिया.
फिन मैंने घडी कि तरफ देखा तोँ २ घंटे गुजर चुके थें मैंने उसेकहा " वोँ पानी पूरापि जाओ औऱ अपना चेहरा साफ़ करकेबैठ जाओ " औऱ मैंने अपना शॉर्ट्स भि पहन लिया।
फिनमै उसकाबुक खोलकर उसे पढ़ने लगा, १० मिनट मे आंटी भि आँ गई,। जब आंटीआयी तोँ मै वो सें चला गय़ा। मेरेमन मे यही ख्याल थां कि उस बेवकूफ कों पढ़ाने कां फैसला गलत नहि थां
मैजबघऱ आया तौ मम्मी सें पूछा "कैसारहा पहलादिन ?"मम्मी बोलि " मै तोँ थोड़ी बहोत सफल हुयी हूं, देख्ना इस हफ्ते केँ अंत तक वोँ तेरे लण्ड कि दीवानी हौ जाएगी "
मै " मै भि थोडा सफलहुआ हूं "
मम्मी "क्याँ मतलब "
मै " आप् हि नें कहा थां नं गाय केँ बछड़े कों पटाने केँ लिए उसमे " फिनमन मे " बछड़ी पहले चुदेगी उसके मां सें "
मम्मी " ठीक हैं चल आँ पहले अपनी मां छोड़बाद मे कोई औऱ काम करना "
फिन एक् माधरचोद बेटे नें अपनी रंडी मां कों जमकर चोदा। मै उसके डिटेल मै नहि जाउगा मात्र इतना बताउगा कि हम् दोनों मां बेटे बिना कपड़ो क हि रहेसाम सें लेकर सुभह तक औऱ हमारे गुप्तांगो केँ मिलन कां गवाह हमारे घऱ कां हर कोनाहुआ चाहे वोँ रसोई हौ याँ बाथरूम याँ हॉल याँ बैडरूम याँ डाइनिंग टेबल ( खानां खाने कां टेबल ) याँ सोफे याँ कुर्सी
दूसरा दिनमै जब सुधा आंटी केँ घऱ गय़ा तौ देखा आंटी स्वयं सजधजकर थि कही जाने केँ लिए। मैंने तौ आज निर्मला फुल मस्ती कां प्लान बनाया थां पर्र अगर आंटीकही औऱ गयीँ, तौ कभी भि घऱ आँ सकती हैं। मुझे मेरे मंसूबों पऱ पानी फिरता दिखा। इसलिये मैंने पूछ हि लिया " आंटी आप् कहीजा रही हैं क्याँ?"
आंटी " कही औऱ नहि बेटा, तुम्हारी मां केँ पासजा रही हूं "
इतना सुनते हि मैंने सुकून कि सासू माँ ली औऱ मेरे लण्ड नें भि।
फिन आंटी केँ जाने केँ बादमै अपने मिशन पर्र लग गय़ा। आज कां मिशन थां निर्मला कि गांड ठुकाई।
मैंने निर्मला सें पूछा "खासी कैसी हैं "
वोँ बोलीं "थोड़ी हैं " मै जल्दी बोलैचलो थोड़ी मालिश करदू तुम्हारी "
वोँ बोलि " रहने दीजिये भैया चलेगा "
मै तोँ निर्मला कों अच्छे सें जान गय़ा थां उससे केसेकाम करवाना हैं। मैंने उसेकहा " हाँ वैसे भि तुम्हे हिम्मत नहि होगीकल केँ मालिश केँ बाद दुबारा करवाने कि "
बसफिन क्याँ थां निर्मला केँ अहम कों चकोटलगी वोँ बोलीं " मुझमे बहोत हिम्मत हैं, चलिएमै रेडी हूं शदा कि मालीश केँ लिए "
मेरेमन मे उसे मेरे लण्ड कां असली स्वाद चखाने कां प्लान चलरहा थां, इसके पहलेकल मैंने शहद मे लण्ड डुबोकर उसके मुँह मे डाला थां।
मैंने कहा " ठीक हैं अगरऐसी बात हैं तोँ मै तुम्हारी पूरी हिम्मत देख्ना चाहुगा मेरे हथियार कों बिना गिला किये तुम् लें पाओगी याँ नहि "
वोँ थोड़ी सोचीफिन बोलीं " मै आपको लेकर दिखाउंगी "
बसफिन क्याँ थां वोँ स्वयं घुटनो केँ बल बैठी औऱ मैंने भि अपना शॉर्ट्स निकल दिया औऱ आगेआज उसीने अपना मुँह खोलकर लुंड मुँह मे लेनेलगी। मुझे उसकेगरम होठ औऱ मुँह कां अहसास पुरे लण्ड पर्र होँ रहा थां। उसने५ मिनट मेरा लण्ड चूसाफिन मैंने सोचा वक्तकाम हैं आगे कि प्लानिंग पऱ अमल किया जाये।
मैंने उसेकहा " ठीक हैं मैमान गय़ा तुम्हे, चलोअब पढ़ाई करते हैं "
फिनमै उसेमैथ (गणित ) पढ़ने लगा, बाद मे उसे मैंने कुछ आसान प्रश्न दिए जिसे वोँ हल कि मैंने उसकीपीठ थपथपाई औऱ उसे शाबाशी दि।
वोँ खुश हुयीतभी मैंने कहा " अगर गलती करोगी तोँ डंडे सें पिटाई भि होगी "
वोँ हस्ते हुये बोलि " डंडाकहा लाये भैया "
फिनमै अपने७ इंच केँ लण्ड कों लहराते हुएहुए उसेकहा " फ़िलहाल यही डंडा हैं इसी सें मरूंगा " तोँ दोस्तों मैउसे बिना शॉर्ट्स पहने हि पढ़ारहा थां।
वोँ मुस्कुरायी औऱ बोलि "ठीक हैं "
तभी मैंने उसे थोडा कठिन प्रश्न दिया मुझेपता थां वोँ नहि कर पायेगी औऱ वो हुआ।
फिन मैंने उसेकहा चलोअब मार खाने कों सजधजकर होँ जाओ। उसने मासूमियत सें अपनाहाथ आगे बढ़ाया। मैंने भि अपने लण्ड सें उसकेहाथ पऱ मारा पऱ उसेहसी आयी।
तभी मैंने थोडा क्रोध दिखाया "हसी आँ रही हैं तुम्हे अभि बताता हु तुम्हे कितना चोट लगेगी मेरे डंडे सें, चलो झुका औऱ अपनी चड्डी उतरो निचे तुम्हारे पीछेइस डंडे सें मरूंगा "
उसनेऐसा हि किया वोँ झुक गई, औऱ पेंटी निकाल दि, मैंने उसका स्कर्ट ऊपर उठाया औऱ उसके नंगे दोनों चुत्तड़ो केँ ऊपर अपने लण्ड सें थपड़ियाया उसेफिन हसीआयी। मैंने थोडा औऱ झल्लाते हुएकहा "अब तोँ मै तुम्हे इस डंडे कि ताकत दिखाकर रहूँगा तुम्हारे आंसू नं निकले तौ कहना "
वोँ इतनी बेवकूफ थि कि अब तक कुछ समझी नहि थि, वोँ शायदसोच रही थि कि इस डंडे सें मुझे कों चोट नहि लगेगी।
मै जल्दी उसके बैडरूम मे गय़ा औऱ नारियल कां तेल लेकरआया औऱ अपने लण्ड पर्र खूबतेल लगाया फिन मैंने उसके दोनों पैरो कों औऱ चौड़ा कराया वोँ अभि भि झुकी हुयी थि।
मैंने इसबार अपना लण्ड कां टोपा उसकी गांड कि दरार मे रखा औऱ उसे निचे सरकने लगा जैसे उसके गांड केँ सुराख केँ पास मेरा लण्ड पंहुचा मैंने उस पऱ दबाव बनाया तौ टोपा कां आगे कां भाग उसके गांड कि छेद मे घुसा औऱ इसबार उसकी हलकी सि चीख निकली।
मैंने फिनकहा " अभि तोँ तुम् रोने भि वाली होँ देख लेना "
इतनाकहकर मैंने लण्ड कों निकला औऱ फिन लण्ड कों ऊपर सें निचे करनेलगा पऱ इसबार मैतेल भि गिरारहा थां संग मे। अबकीबार जब लण्डछेद तक पंहुचा तोँ मेरे दबाव सें टोपा थोडा अंदर घुसाफिन मैंने बहोत सारातेल गिराया उसकेछेद केऊपर औऱ मेरे लण्ड पर्र भि औऱ इसकेबाद मैंने तेल कि बोतल साइड मे राखी औऱ उसकेकमर मे हाथ डालकर जोर कां झटका दियाइस बार उसकीचीख बहोत जोर कि निकली थि औऱ मेराआधा लण्ड उसकी गांड मे घुस गय़ा। वो कुछ बोलि नहि इसलिये मैइस मौके कों गवाना नहि चाहता थां औऱ उसके मुँह पऱ हाथ रखकर अपने लण्ड कों वापसनिकालने लगा जिससे उसेचैन मिलरहा थां पर्र जब थोडा सां लण्ड कां भाग उसके गांड मे हि थां तौ मैंने जोरदार कां शॉट लगाया पूरी ताकत सें। इसबार उसका मुँह मैंने बंद किया थां वरना उसकीचीख मेरेघऱ तक चली जाती पर्र उसकेआँख सें बहाने वाले आंसू उसका दर्दबया कररहे थें।
फिनमै थोडा रुका औऱ उसके बूब्स कों सहलाने लगाजब उसका दर्दकाम हुआ तोँ मैंने अपनाकाम शुरुआत कर दिया औऱ उसकी गांड कि ठुकाई शुरुआत कर दि। २५ मिनट उसकी गांड मरने केँ बादमै उसकी गांड मे हि झड़ गय़ा।
जैसे मैंने अपना लण्ड उसकी गांड सें निकला तौ उसकी गांड सें मेरे लण्ड कां पानी बहार बानेलगा
फिन मैंने वक्त देखा तौ आंटी कों गए हुवे डेढ़ घंटे हौ गए थें मेरेपास 30 मिनट हि थां सभीकुछ नार्मल करने केँ लिए मैंने निर्मला कों कहा " अब डरेगी नं मेरे डंडे कि मार सें "
निर्मला नें कहा"हाँ भैया "
मैंने उसेकहा " पर्र यहबात तुम् किसीको नहि बताओगी जैसा तुमने मुझे प्रॉमिस पहले किया थां "
निर्मला " ठीक हैं भैया प्रॉमिस "
फिन मैंने अपना शॉर्ट्स पहना उसने भि अपनी चड्डी पहनी, मेरा वीर्य जौ फर्श पऱ गिरा थां उसे साफ़ किया औऱ पढ़ने बैठ गई,। जब आंटीआयी तोँ मै वो सें निकल गय़ा।
मैंने घऱआते हुए भगवान् कों धन्यवाद कहा औऱ कहा भगवान् ऐसे हि कृपामुझ पऱ बनाये रखे.
घऱ पर्र आते मैंने मम्मी सें पूछा "तुम्हारी प्रोग्रेस क्याँ हैं?"
मम्मी नें कहा" बहोत उतावला होँ रहा हैं तूँ, थोडा सब्रकर। सुधा कि कामवासना जागरही हैं। तब तक केँ लिए मे हूं नां"
मैंने कहा" आप् तौ दुनिया कि सबसे प्यारी महिला औऱ मा हौ। ईश्वर सबको आपकीतरह प्यारी औऱ चुदक्कड़ माँ दे"
माँ" पऱ तूँ सबसे हरामी माधरचोद बेटा हैं, स्वयं कि माँ चोद दि औऱ अपनी माँ सें दूसरी स्त्री कि गांड मारना चाहता हैं"
मे" औऱ मेरी मम्मी दिलवा रही हैं" इतना सुनते हि माँ भि हंसने लगी|फिन मैंने मम्मी सें पूछ हि लिया कि आखिर वो सुधा कों केसेसेट कररही हें"
माँ नें कहा " आमखा गुठली क्यूं गिररहा हैं"
मैंने कहा"चलो ठीक हैं तुम् मेरा केलाखा लो"
औऱ फिन मैंने अपना शॉर्ट निकाल दिया| उसकेबाद मेरा लण्ड उनके मुँह मे थां औऱ मेरा सुपाड़ा उनकेगले कि मरम्मत कररहा थां| उसकेबाद काम कामक्रीड़ा कां खेल शुरुआत हुआ| दोनों माँ बेटे जन्मजात नंगे होँ गए औऱ माधरचोद बेटे नें जमकरफिन सें अपनी मम्मी चोद दि।
तीसरा दिन सुधा केँ घऱ पऱ.
सुधा आंटी मेरेआते हि मेरेघऱ चली गई औऱ घऱ पऱ मात्र मे औऱ निर्मला थें|
घऱ कां दरवाजा बंद होते हि मैंने अपनाखेल शुरुआत कर दिया|
आज मुझे निर्मला कि चुत उद्घाटन करना थां| इसलिये मैंने बिनाकोई वक्त गवाए शार्ट निकालकर रेडी होँ गय़ा|
जिसेदेख कर निर्मला बोलि" क्याँ हुआ भैया आजफिन सें करोगे क्याँ"
मुझेआज निर्मला केँ यौवन कां पूरा आनंद लेना थां औऱ मेरेपास मात्र दो घंटे थें |
मे " अगर तुम् बुरा नां मानो तौ हम् पिछले दोदिन सें जोँ कररहे थें उससे भि ज़्यादा मजे करेंगे, पऱ मुझे तुम्हारा संग चाहिए। अगर तुम् मना करोगी तोँ कोईबात नहि"
निर्मला "आपको अच्छा लगा, अगर आप् करना चाहते हें एतराज नहि"
मे "इसबात कां किसी कों पता नहि चलना चाहिए, प्रॉमिस"
निर्मला "पक्का प्रॉमिस."
मे खुश होतेहुए नंगी अपना टीशर्ट निकाल दिया औऱ पूरीतरह सें नंगा होँ गय़ा | मैंने उससेकहा "तुम् भि अपने सारे कपड़े निकाल दो"
वो तौ मेरे सारे आदेश मानती थि| कुछ पलों केँ अंदर हि वो जन्मजात नंगी हौ गई| मे तौ उसकी हुस्न कों देखता हि रह गय़ा| उसके दोनों गोरे गोरे संतरे जैसे चूचिया देखते हें मेरे लण्ड नें अपना आकार बड़ा करना शुरुआत कर दिया|
मैंने उसेपास मे बुलाया औऱ एक् आपसे उसकी दाईं मम्मों कों दबाया औऱ दूसरे हाथ सें दूसरी मम्मों कों दबाकर चूसने लगा| मेरेऐसा करने सें उसके मुँह सें हल्की चीख निकलने लगी " सीसीसीसससस "
उसकी आँखेबंद होँ गयीँ, थि औऱ वोँ मुझे स्तनपान कराकर सुख कां अनुभव कररही थि।
मैंने बारी बारी सें उसके दोनों चूचियों कों खूब चूसा औऱ दबाया। उसके बूब्ज़ केँ संगसंग उसकेगाल भि लाल होँ गए थें।
फिनउसे आईने सोफे पर्र बिठाया औऱ उसके पैरो केँ बिच मे बैठकर उसके चूत कों चूमा। उसकेबदन पूराहिल गय़ा जैसेउसे करंटलगा हौ। उसने एक् नजर मुझे देखामै मुस्कुराया उसनेफिन अपनी आँखेबंद कि औऱ अपने पेअर औऱ खोलदिए।
मै भि अब उसकी कुवारी चुत कां रसपानकरने लगा। वोँ भि आँखेबंद कर केँ काम दरिया मे गोतेलगा रही थि।
उसके मुँह सें अबआहे निकालनी लगी। " आअह्हह्ह्ह्हह। आअह्हह्ह्ह्हह"
अब वोँ बहोत एक्साइट होनेलगी। वो मेरेसर कों पकड़कर अपने चूत पर्र दबाने लगी। ये उसका पहला अनुभव थां।
वो अब पूरीतरह सें गर्म होँ गयीँ, थि। मैउठा तोँ वोँ मुझे घूरने लगी उसने मुझसे सवालिया नजरो सें कहा चुसो नाँ। पर्र मुझे तोँ अगले पङाव पर्र जानां थां। मैंने केवलउसे आँखमरी औऱ अपने लण्ड पर्र थोडा थूक लगाया। अबमै उसके दोनों पैरो कों फैलाकर उसके गीलीचुत केँ ऊपर अपना लण्ड रगड़ने लगा।
वो फिन खुशी केँ सागर मे गोते लगाने लगी उसकीचुत बहोत पानी छोड़रही थि। ५ मिनटमै ऐसे हि रगड़ता रहा निर्मला पूरीतरह मस्त होँ गई, थि तभी मैंने अपने लण्ड कां निशाने चुत केँ मुँह पऱ लगाया औऱ झुककर उसेलिप किस करनेलगा औऱ फिन एक् झटका मारा। मेराआधा लण्ड उसकीचुत मे घुस गय़ा। वो चीखी थि पर्र मैंने उसका मुँहलॉक कररखा रखा थां लिपलॉक सें। मैकुछ समाया रुका औऱ फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे आधा लण्ड हि अंदर बाहर् करनेलगा।
उसका दर्द भि कामहुआ औऱ वो भि मेरासंग देनेलगी। फिन सें मैउसे लिप किसिंग करनेलगा औऱ पूरी ताकत सें जोर्का झटक दिया औऱ अपना पूरा लिंग उसकी योनि मे उतार दिया। इसबार तोँ वोँ थोडा छटपटाई भि। पऱ बाद मे जब वोँ नार्मल हुई तोँ मे उसे पूरा लण्ड अंदर बहार करके पेलता रहा। इसबिच वोँ २बार झाड़ गई,।
जब मुझेलगा मेरा पानी निकलेगा तोँ मैंने उसे बैठने कलिएकहा औऱ उसके मुँह मे अपना पानी गिराया।
मैंने उसेकहा "पिजाओ इसेयह बहोत फायदा करता हैं " उसनेवही किया मेरा सारा वीर्य पी गई,। फिन उसकेबाद हम् दोनों नें कपडे पहने औऱ पढ़ाई शुरुआत किये। मैंने उसेफिन सें कह दिया कि हमारा सीक्रेट किसी औऱ कों मत बताना। उसनेकहा पक्का किसी कों नहि बताउंगी।
मेरा टारगेट जीरोसफल हौ गय़ा थां टारगेट १ सुधा आंटी बाकि थि।
मैजबघऱ आया तौ मैंने मम्मी सें कहा " कब दिलवा रही हौ मुझे सुधा कि गांड "
मम्मी " वाउ, आंटी सें सीधे सुधा पऱ आँ गय़ा। वो तौ पूरी तैयार होँ गई, हैं पर्र तुम्हे अब तैयार होना होगा "
मै "क्यूं "
मां " आज शीतल कां बर्थडे हैं"
मै " ओह्ह्ह्हह। मै तौ भूल हि गय़ा थां "
दोस्तों सच मे मै शीतल कां बर्थडे भूल गय़ा थां। पिछले कई दिनों सें मात्र सेक्स सेक्सऔर सेक्स हि चलरहा थां मेरे दिमाग़ मे।
मैंने मां सें कहा " चलो उसके बर्थडे केँ लिएकोई तोहफा लेँ लेते हैं "
मां " हाँचल मार्केट चलते हैं "
हमने मार्केट सें उसकेलिए बढ़िया सें ड्रेस ख़रीदा औऱ फिनसाम कों दिदी केँ घऱ पऱ गए शीतल कां बर्थडे सेलिब्रेट करने केँ लिए |
दिदी केँ घऱ पऱ शीतल केँ कुछ सहेलिया औऱ दिदी कां परिवार थां। शीतल केँ लिए एक् ब्लैक फारेस्ट वालाकेक भि लाये थें औऱ घऱ मे उसके बर्थडे सेलिब्रेशन कि सजावट भि हुयी थि।
फिन हम् सब नें उसका बर्थडे सेलिब्रेट किया। उसके सहेलियों नें औऱ मम्मी नें उसे तोहफा दिया। रात हौ गई, तोँ उसकी सहेलिया घऱचली गयीँ,।
मैंने भि दिदी सें कहा " रात होँ गयीँ, हैं दिदी हम् भि घऱ जाते हैं "
दिदी " यह किसी औऱ कां घऱ थोड़े नां हैं जौ तुम् यहा नहि रह सकते। आज आप् औऱ मां यहीरूक जाओ "
मां " तूँ परेशान क्यूं हौ रही हैं ? हम् लोगचले जायेगे "
दिदी " मैकुछ नहि सुनना चाहती आप् लोगरात कों यही रुकेंगे "
अब दिदी कों क्याँ पता थां क्यूं मै औऱ मम्मी घऱ जानां चाहरहे थें। फिन हमने अपनेमन मे सोच लियाचलो आज दिदी केँ चलते हम् लोग सेक्स नहि करेंगे।
औऱ हम् वो रुकगए।
रात कों हम् सभी नें संग मे खानां खाया। रात कों जीजा, प्राची औऱ मां सोगए। मै, दिदी औऱ शीतल टेलीविज़न देखरहे थें।
तभी शीतल बोलि "बहोत गर्मी लगरही हैं, मै थोडा छत पऱ ताज़ी हवा खाकरआती हूं.मामाजी आप् भि चलोसंग देने केँ लिए। "
मै भि बोर होँ रहा थां क्योंकी लव किस्सा फिल्म आँ रही थि जौ मुझे मनपसंद नहि थि। मै भि उसकेसंग छत पर्र चला गय़ा। छत पर्र हम् दोनों टहलने लगे।
शीतल नें मुझसे कहा " मामाजी मुझे क्याँ बर्थडे उपहार देरहे हौ "
मै " दे तोँ दिया नां "
शीतल " वोँ तोँ नानीमा नें दिया, आप् क्याँ दोगे "
मै " ओके, क्याँ चाहिए तुम्हे "
शीतल " मुझे एक् फोन चाहिए "
मैंने कहा " क्याँ ? तुम् फोन कां क्याँ करोगी ?"
इसबात कां जवाब देने केँ लिए शीतल मेरे सामने घुटनो केँ बलबैठ गयीँ, औऱ बोलीं " प्लीज मामाजी, मै आपकी वोँ ख़्वाहिश पूरीकर दूंगी "
मै थोडा कंफ्यूज हुआ " क्याँ कैसी ख़्वाहिश "
शीतल " वही जोँ आपकेमन मे आयी थि प्राचिको गोद मे बिठाने केँ बाद " इतना कहकर उसने मेरा लोवर निचे सरका दिया।
आपको तोँ पता हैं कि मैंने अंडरवियर पहनना छोड़ दिया। इसलिये जैसे हि उसने मेरा लोवर निचे किया मेरा मुरझाया हुआ लण्ड उसके सामने आँ गय़ा। मे उसेकुछ कहता इससे पहले हि उसने मेरा लण्ड पकड़कर अपने मुंह मे लेँ लिया।
उसकेगरम होठों कां स्पर्श पाते हि मेरा मुरझाया लण्ड असली स्वरूप मे आनेलगा।
शीतलउसे किसी पोर्न स्टार कि तरहचूस रही थि जब मेरे लिंग मे 7 इंच कां आकार लेँ लिया। तब शीतल नें उसे अपने मुंह सें निकाला औऱ बोलीं " तौ मामाजी, डील पक्की आप् मुझेफोन दिलवाओगे नां "
मै सोचने लगा कि लन्ड चुसवाने केँ बदलेफोन थोडा सां अधिक हैं पऱ चलोमै शीतल कि यह ख़्वाहिश पूरीकर दूंगा।
मुझे सोचता देख शीतलफिन सें बोलि " क्याँ मामाजी एक् फोन केँ बदले आपको कुवारी चुतमिल रही हैं मारने केँ लिए वोँ भि अपनेसगी भांजी कि तोँ भि आप् इतनासोच रहे होँ "
यह सुनकर मै औऱ चौंक गय़ा क्योंकि मै तोँ सोचरहा थां कि वोँ केवल मेरा लण्ड चूसेगी पर्र वोँ तोँ चुदने कों भि सजधजकर थि।
वैसे भि मेरेआज रात केँ मां कि चुदाई कां कोटा तोँ हाथ सें निकल गय़ा थां तौ दूसरा नया मौकामै क्यूं छोड़ता।
मैंने कहा " छत पऱ कोई आँ गय़ा तौ "
तौ उसनेकहा दसबसो रहे हैं औऱ मां फिल्म समाप्त होने तक टेलीविज़न क सामने सें हटेंगी नहि। अभि भि हमारे पास१ घंटा हैं "
मैंने कुछ सोचा औऱ कहा"ठीक हैं चलो जल्द सें नंगी होँ जाओ "
वो बोलीं " मात्र सलवार निकालती हु, जल्दकाम खत्मकर लेंगे हम् लोग। पर्र आप् प्रेम सें करना आपका बहोत मोटा औऱ बड़ा हैं औऱ मै कुवारी हूं "
मैंने मौके कि नजाकत कों समझता थां। नीचे मेरी बेहन यानि शीतल कि मम्मी जागरही थि औऱ अगरमै अपने तरीके सें चुदाई करता तौ शीतल कि चीखो सें सारा मोहल्ला जाग जाता।
मैंने संयम सें काम लेना हि सही समझा। "शीतल मे तुम्हारे चेहरे पऱ हाथ रखकरशॉट लगाऊंगा अगर तुम्हारी थोड़ी सि भि चीख निकलेगी तौ नहि तोँ मे उसेदबा सकूंगा "
शीतल नें कहओके वोँ अपना सलवार खोलकर लेट गई,। मै उसके पेअर केँ बिच मे आया औऱ अपना लण्ड उसकेचुत केँ मुँह पर्र रखकर थोडा दबाव बनाया वो कसमसाई।
फिन मैंने उसके मुँह पर्र हाथ रखकर एक् झटका मारा औऱ उसी वक़्त उसके मुँह कों कसकर बदंडकर दिया उसकेचुत मे लण्ड प्रवेश कर चूका थां औऱ उसकीचीख उसके मुँह मे हि रह गई,। मैंने सचमे जोरदार झटका मारा थां क्युकी मेरा६ इंच तक लण्डघुस गय़ा थां। पर्र मै तोँ चुड़क्कड़ राजाबन गय़ा थां जब तक पूरा घुसा नं लू मुझेचैन कहा पड़ता। इसलिये मैंने लण्ड बहार निकालकर फिन सें पेला औऱ जड़ तक लण्ड उतार दिया उसकेचुत मे।
शीतल कि चीख तोँ नहि निकली पर्र आंसू जरूर निकल गय़ा।
मैऐसे हि उसे१० मिनट तक चोदता रहा। जब वोँ भि मेरेसाथ अपना गांडउठा कर देनेलगी तोँ मैंने उसके मुँह सें हाथ हटाया।
वो बोलीं " आअह्हह्ह्ह्ह.मामाजी आप् बहोत। आअह्हह्ह्ह्ह.जालिम हौ "
मै बोलै " पहलीबार तोँ दर्द होता हि हैं बेटी "
वोँ बोलि मुझे " मुझेपता हैं.आअह्हह्ह्ह्ह। पऱ आप् एक् हि बार मे.आअह्हह्ह्ह्ह.पूरा पेलदिए.आअह्हह्ह्ह्ह। पर्र अभि आनंद आँ रहा हैं.आअह्हह्ह्ह्ह.आअह्हह्ह्ह्ह"
आधे घंटेबाद जबमै झड़ने कों हुआतब मैउठा औऱ उसे बैठने कां इशारा किया। वोँ समझ गई, औऱ एक् रंडी कि तरहजीभ निकालकर मेरे लण्ड केँ क्रीम कां इंतजार करनेलगी।
मेरे लण्ड कां रास उसके मुँह केँ अंदर औऱ चहरे पऱ गिरा। जिसे उसने साफ़कर दिया। फिन वोँ उठी औऱ अपनई सलवार पहनेलगी औऱ मै अपना लोवर।
वो बोलीं " तौ मेराफोन कब मिलेगा मामाजी "
मै बोला " तुँ एक् कामकर शनिवार कों हमारे घऱ आँ हम् दोनों मिलकर ऑनलाइन आर्डर करेंगे, ठीक हैं "
शीतल " थैंकयू मामाजी, लवयू " यह बोलकर वोँ मुझसे लिपट गई,।
मैंने कहा"चलो नीचे चलते हें बहोत हवाखा चुके होँ"
शीतल हंसते हुए"हां चालिए"
शीतल चलते टाइम थोड़ी लड़खड़ते हुएचल रही थि। इसका मतलब उसकीसील सही मे मैंने हि तोड़ी थि।
जब निचे पहुंचे तौ दिदी अभि भि टेलीविज़न देखरही थि। उन्होंने शीतल कि चाल पऱ कोई ध्यान नहि दिया। हम् दोनों भि जाकरसो गए।
सुभह होते हि मे औऱ मम्मी दोनों घऱ जाने केँ लिए सजधजकर होँ गए पऱ दिदी नें हमें जाने नहि दिया। दिदी नें कहा कि ब्रेकफास्ट करके हि जानां हैं। मेरी प्यारी माँ तौ यहीचाह रही थि कि किसीतरह हम् घऱ पहुंचे औऱ एक् चुदाई राउंड होँ जाए। क्योंकि रात मे वो प्यासी सो गई थि।
मेरे लण्ड नें तौ अपनी प्यास बुझाली थि, इसलिये मैंने माँ सें कहाचलो ब्रेकफास्ट करके जाएंगे।
माँ कि ख़्वाहिश तौ नहि थि पऱ रुकना पड़ा। हम् सभीलोग ब्रेकफास्ट किए औऱ ब्रेकफास्ट करकेघऱ केँ लिए रवाना हौ गए। घऱ पहुंचते हि माँ नें अपने सारे कपड़े निकाल दिया औऱ मुझे भि इशारा किया। मैंने भि अपनी माँ कि आज्ञा कां पालन एक् आज्ञाकारी पुत्र कि तरह किया औऱ नंगा हौ गय़ा.
बसफिन क्याँ थां वो अपने रंडी वालेरूप आँ गई थि.
औऱ घुटनो केँ बल बैठकर मेरे लण्ड कों लॉलीपॉप कि तरह चूसना शुरुआत कर दिया। वोँ मेरे लण्ड सें ऐसेखेल रही थि जैसे वो उनका पसंदीदा खिलौना हौ।
वो जीभ सें मेरे लण्ड कों ऊपर सें निचे तक चाटती फिन लण्ड कों मुँह मे लेकरगले तक उतर लेती औऱ फिनउसे मुँह निकालकर चाटती। मई भि पुरे फॉर्म मे आँ गय़ा थां, पऱ कलरात मै शीतल कि गांड नहि मार पाया थां तौ मुझे मां कि गांड मारने कां मन होँ रहा थां।
मैंने मम्मी सें कहा " मम्मी अभि तुम्हारी गांड मारने कां बहोत मनकररहा हैं "
मम्मी " मै तोँ तेरी हि हूं, जोँ चाहेमार लें। मैंने तुम्हारी तरफ रोकाकहा हैं, पऱ जौ भि मरना हैं मार जल्द। "
मैनेकहा "चलो बैडरूम मे ( दोस्तों अभि तक हम् लोगहाल मे हि थें )"
मां बोलि तेल लेँ लें बेटा " मुझे थोडा आराम मिलेगा तेरा बहोत ज़्यादा मोटा हैं "
मैंने कहा"ओके "
बेड पर्र मम्मी घोड़ी बन गई, औऱ गांड मरने केँ लिए एकदम रेडी।
फिनमै नारिएल कां तेल लेकर केँ अपने लण्ड पऱ खूबलगे औऱ कुछतेल मम्मी कि गांड मे भि लगाया। औऱ तेल लगते समाया एक् ऊँगली भि गांड, मे घुसा दि। मां "उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़" बस इतना हि बोलीं।
मैंने अपना लण्ड मां केँ गांड केँ छेद पर्र टिकाया जैसे हि मै घुसाने गय़ा तोँ मम्मी कां फोनबज उठा। मुझे इतना क्रोध आया कि मत पूछो। मैबोल पड़ा " कौन गांड मरवाना चाहरहा हैं फ़ोन करके "
मम्मी नें फ़ोन कि तरफ देखकर मुझेचुप रहने कां इशारा किया। तभी मां नें फ़ोन उठाया औऱ बोलीं " हेलो "
मां " ठीकहु, तुम् कैसी हौ " पता नहि कौन थि सामने पर्र इतना जरूर थां कि कोई लेडीज हि हैं।
मम्मी "हाँ "
मां " ह्म्म्मम्म "
मम्मी "अच्छा "
मुझे बहोत गुसा आँ रहा थां, पर्र मां सामने वाले सें बात कियेजा रही थि।
मम्मी " इसमें कोई पूछने कि बात हैं "
मम्मी " जबकहो तब "
अचानक मम्मी मेरीतरफ देखिफिन फ़ोन पऱ बोलीं " वो भि ठीक हैं, मेरी बहोत मदत करता हैं " मैसमझ गय़ा मां मेरीबात कररही थि।
मां " वोँ तौ हैं "
मम्मी " अच्छा निर्मला कब तक आँ जाएगी " जब मम्मी नें निर्मला कां नाम लियातब मैसमझ गय़ा कि सुधा आंटी कां फ़ोन हैं, उनके बारे मे सोचते हि मेरा लण्ड झटके खानेलगा जौ मां कि गांडक छेद केँ बिलकुल पास थां।
मम्मी " अच्छा "
तभी मुझे शैतानी सूझी मैंने मम्मी केँ गांड मे लण्ड कों सेट करके एक् जोरदार झटका मारा।
मेरे अचानक सें झटके केँ लिए मां रेडी नहि थि औऱ उनकीचीख निकल गई, " आआह्ह्हह्ह्ह्ह "
उसचीख कों आंटी नें बखुबी सूना होगा। मम्मी मेरीतरफ बनावटी गुस्से सें देखने लगी औऱ मै उन्हें बदले मे कामिनी मुस्कान देरहा थां।
मम्मी कां फ़ोन अभि भि चालू थां " कुछ नहि हुआ, बेहन चूहा थां "
मां बहाने बनारही थि " नहि नहि मेरे किसीबिल मे कोई चूहा नहि घुसरहा "
मैसमझ गय़ा आंटी नें क्याँ पूछा थां।
अभि तक मेरा४ इंच तक कां लण्ड उनकी गांड मे थां ३इंच बहार हि थां।
मैंने अपना लण्ड पीछे किया तौ २इंच तक लण्ड गांड मे सें बाहर् आया। मम्मी कों थोड़ी राहत मिली पर्र कुछ लम्हा केँ लिए हि मैंने फिन सें जोरदार झटकामार कर पूरा७ इंच कां लण्ड उनके गांड मे पेल दिया।
एक् बारफिन वो चिलायी " आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह "
मां फ़ोन पऱ " हाँवही चूहा हैं बहोत परेशान कररहा हैं "
मां फिन सें मुझे पीछे मुड़कर देखि पऱ इसबार मैंने मुस्कान केँ संगसंग धक्का देना भि शुरुआत कर दिया।
मम्मी " कुछ नहि वही चूहा दुबारा मुझ पऱ कूद गय़ा थां "
मम्मी " ह्म्म्मम्म "
मां " ह्म्म्मम्म "
मम्मी " ह्म्म्मम्म.ठीक हैं मै फ़ोन रखती हूं "
मा नें मोबाइल रख दीया औऱ बोलि कमीने थोडा इंतजार नहि कर सकता थां
मे मां कि गांड मारते हुए बोलै "मे क्याँ करता आपकी प्यारी सि गांड नें मेरे लण्ड कों बेकाबू कर दिया "
मां " काबू मे रखाकर उसेनै तौ मिलने वालीचुत याँ गांड निकलजाये जल्दबाजी केँ चक्कर मे "
मै " मेरी मां कि चुत औऱ गांडकही नहि जाने वाली "
मम्मी भि हसनेलगी औऱ बोलीं " तेरी आंटी तुम्हे बुलारही हैं घऱ पऱ उसेकुछ काम हैं औऱ वोँ अकेली भि हैं "
इतना सुनते हि मेराजोश दुगना हौ गय़ा मै औऱ तेजी सें धक्के मारने लगा।
जिससे मां कि चीखे निकलने लगी " आअह्ह्ह्हह। कमीने.आअह्ह्ह्हह। धीरे-धीरे.आअह्ह्ह्हह। तेरी मां कि.आअह्ह्ह्हह। गांड हैं.आअह्ह्ह्हह। "
मेरेतेज झटकों केँ कारण मेरा पानी निकल गय़ा मैंने सारा पानी माँ कि गांड मे हि निकाल दिया.
मेरे हटते हि मम्मी बैड पर्र निढाल होकरगिर गई। तभी मैंने पूछा "आंटी नें कब बुलाया हैं"
मां " कमीने, मेरी गांड कि चटनीबना दि। यह भि नहि पूछरहा कि मेरा क्याँ हाल हैं। बस आंटी हि याद आँ रही हैं "
मै"अरे मम्मी तुम् मेरीजान हौ, मुझे आपकी चिंता रहेगी।।।। मे तोँ मात्र ये जानना चरहा थां कि आंटी सें आपकी क्याँ बात हुयी "
मां " रहनेदे मस्का मतमार मैसभी जानती हूं "
मै " फिन बताओ नं मां क्याँ हुआ "
मम्मी " वोँ तेरी अभि बुलारही हैं कुछ सामान वगैरा रखना याँ उतरना हैं "
मै " ठीक हैं मम्मी अभि मै आंटी कि मदत करकेआया "
मैंने फटाफट एक् टीशर्ट औऱ हाफ शॉर्ट्स पहनकर आंटी केँ घऱचला गय़ा।
कुंवारे लण्ड के कारनामे-माँ की मुँह पेलाई - desi chudai mom son – New Episode
मै सुधा आंटी केँ जबघऱ गय़ा तौ मैंने देखा कि आंटी एक् पिंककलर वाले ढीले ढाले नाइटी मे थि। आंटी नें पहले मुझे सोफे पऱ बिठाया औऱ फिन मेरेलिए पानी लेकरआयी। पानी देने केँ लिएजब वोँ झुकीतब मुझेपता चला कि उन्होंने तौ ब्रा भि नहि पहनी हैं। मुझे उनके बड़े बड़े झूलते हुए चूचियों कों देखकर मेरा लण्ड शॉर्ट्स मे हि झटके खानेलगा जिसे आंटी नें भि देखा। उनके चहरे पर्र विजयी मुस्कान दौड़ गयीँ, |
फिन मैंने आंटी सें पूछा कि उन्होंने मुझे क्यूं बुलाया हैं तोँ उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ सामान उतारना हैं टांड(घरो मे दीवाल मे उचाई पऱ एक् प्लेटफार्म बनाया होता हैं जिसपर सभी सामनरखा जाता हैं, जिसकी जरुरत कम होती हैं ) पर्र सें।
उन्होंने कहा " टांड पऱ बहोत सरे कांच केँ बरतन हैं औऱ भारी भि हैं, उतारने मे टूट सकते हैं। उसे उतारने मे मेरी सहायता कर दोगे"
मैंने कहा " क्यूं नहि आंटी, कहा सें उतारना हैं "
आंटी " वोँ अंदर रसोई मे, चलोमै स्टूल लें करआती हूं "
आंटी एक् स्टूल लेकर रसोई मे आयीमई भि रसोई मे उनके पीछे पीछे गय़ा। आंटी नें कहा " मै पहले स्टूल पऱ चढ़कर सारे डिब्बे चेककर लेती हूं कि कोनसा उतारना हैं "
मै " ठीक हैं आंटी "
आंटी " तुम् स्टूल कों अच्छे सें पकड़ना ताकिमै निचे नं गिरु "
मै " आंटी, स्टूल निचे कि तरफ हौ जायेगा उसे पकड़ने मे ग्रिप नहि मिलेगी मै आपको हि अच्छे सें पकड़ लेताहु "
आंटी शायदयही सुनना चाहती थि। उन्होंने मुस्कुराते हुएकहा " ठीक हैं "
आंटीफिन स्टूल पऱ चढ़ी तोँ उनकेकमर कां हिस्सा मेरे मुँह केँ सामने आया मैंने पहले अपने आप् कों सही सें एडजस्ट किया औऱ उन्हें पकड़ा।
मै आंटी केँ सामने खड़ाहुआ थां मैंने अपने दोनों होठो सें उनके गांड कों कैसाकर दबाते हुए पकड़ा। उसी वक़्त मुझेपता चला कि आंटी नें तौ पेंटी भि नहि पहनी हैं।
मैनेऊपर आंटी कां रिएक्शन देखा वोँ टांड कों कसकर पकडेहुए खड़ी थि। मैंने उनसेकहा "आंटी, आपकी नाइटी रेशमी हैं जिससे मेराहाथ फिसलरहा हैं। मै एक् काम करता हूं आपको नाइटी केँ नीचे सें पकड़ता हूं। तब ग्रिप भि अच्छे सें मिलेगी औऱ आपको सपोर्ट भि मिलेगा "
आंटीकुछ कह नहि पायीबस हाँ मे सर हिला दिया।
फिन क्याँ थां मैंने आंटी कि नाइटी ऊपर उठाई जिससे मुझे उनके गुलाबी चुत कां दीदार हौ गय़ा। मुझे औऱ शरारत सूझी मैंने नाइटी वापस निचे कि पऱ इसबार मै भि नाइटी केँ अंदर हि थां अब मैंने आंटी केँ गांड कि दरार मे अपने दोनों हाथो कों दोनों तरफ सें लपेटा औऱ अपने होठो कों उनकेचुत पर्र रख दिया। आंटी केँ मुँह सें सिसकरी निकली औऱ वोँ थोडा हिली।
इसबार हिलने केँ बाद उन्होंने अपने पांव कों थोडा औऱ खोल दिया थां।
मैंने आंटी सें कहा " सॉरी आंटीमै अच्छे सें पकड़ नहि पाया थां जिससे आपका बैलेंस बिगड़ गय़ा अबमै आपको अच्छे सें कसकर पडूंगा "
आंटी नें कुछ नहि कहा। अब मैंने उनके गांड कों कसकर पकड़ा औऱ अपनाजीभ निकालकर उनकेचुत कों चाटना शुरुआत कर दिया। आंटी मदहोश होनेलगी औऱ उनकी सिसकारियां भि कभीकभी निकलरही थि।
मैबिच बिच मे अपनेजीभ कों उनकेचुत केँ अंदर तक घुसता भि थां। आंटी भि बड़ेमजे सें २० मिनट तक अपनीचुत चटवायी मुझसे। फिन मैंने उन्हें कहा " आंटी मिला वोँ बरतन "
आंटीफिन होश मे आयी औऱ बोलीं " हाँ बेटा, मिल गय़ा हैं "
तौ मैंने उन्हें कहा"चलो अब मेरी बारी हैं। " आंटी मेरीतरफ देखकर मुस्कुराने लगीतभी मैंने कहा " अब आप् उतरोमै उस डब्बे कों उतारता हूं "
आंटी बोलीं "ठीक हैं" औऱ वोँ स्टूल सें निचेउतर गयीँ,।
मै स्टूल पऱ खड़ा होकर टांड केँ ऊपर पड़े बरतनों कों देखने लगा। वो पर्र मात्र २ हि कांच केँ बर्तन थें। जिसेचेक करने मे आंटी नें २० मिनटलगा दिए।
मै आंटी सें कहा "आंटी आप् भि मुझे अच्छे सें पकड़िए कहीमै गिर नाँ जाऊ " आंटी मेरेपास आनेलगी तभी मैंने कहा आंटीकही मेरा शॉर्ट्स सें आपकाहाथ स्लिप नां होँ जाये नहि तोँ मैगिर जाऊंगा, मै शॉर्ट्स निचे खिसका देता हूं ताकि आप् अच्छे सें मुझे पकड़सके "
आंटीमन मे " बदमाश कही कां "
मैंने अपने शॉर्ट्स कों निचे सरकाकर निकाल हि दिया, मेरा७ इंच कां कला मोटा लण्ड आंटी कों सलामी देरहा थां जिसे देखकर आंटी कि आंखोमे चमक आँ गई,।
"पकड़िए नां आंटी "
आंटी मेरेपास आयी उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरेकमर मे डाला जिससे उनका मुँह मेरे लण्ड केँ एकदम लगभग थां, उन्होंने ऊपर मेरीतरफ देखा। मैंने उन्हें कहा " अच्छे सें पकड़ियेगा आंटी मुझे आप् पऱ पूरा भरोसा हैं "
आंटी भि बहोत गर्म होँ चुकी थि उन्होंने अपना मुँहखोल कर मेरा लण्ड मुँह मे लेँ लिया औऱ उसे चूसने लगी। मुझे भि आनंदआने लगा५ मिनटबाद मैंने आंटी सें कहा " आंटीकौन सां बरतन उतरना हैं "
आंटी नें मेरा लण्ड मुँह सें बाहर् निकालकर कहा " लाल ढक्कन वाला "
मैंने कहा"ठीक हैं, आंटीमै उसे उतरता हूं, आप् बस मुझे पकड़कर बैलेंस बनाकर रखो "
आंटी नें कहा"ठीक हैं "
औऱ उन्होंने फिन मेरे लण्ड कों मुँह मे लें लिया, वोँ मेरे लण्ड कों आधे सें ज़्यादा मुँह मे लेकरचूस रही थि।
तभी मैंने एक् हाथ सें टांड कां सपोर्ट लिया औऱ दूसरा हाथ सें आंटी केँ सर कों पकड़ा।
आंटी कों कुछसमझ नहि आया कि मै क्याँ करने वाला हूं। तभी मैंने जोर सें उनकेसर कों मेरे लण्ड पर्र दबाया औऱ आगे सें अपने लण्ड कां जोर भि आंटी केँ मुँह मे लगाया जिसका नतीजा यहहुआ कि आंटी कि आँखों सें आंसू निकलआये औऱ मेरा७ इंच कां लण्ड आंटी केँ गले केँ निचेउतर गय़ा।
दोस्तों आप् तौ जानते हैं मुझे मुँह चोदने मे कितना आनंदआता हैं औऱ फिन जिसेमै बचपन सें चोदना चाहरहा थां केसे अपना पूरा लण्ड उसके मुँह मे डाले बिनारह पाता। उसकी बेटी(निर्मला ) तक कों पूरा लण्डपेल कर मुँह चुदाई कि थि तौ सुधा आंटी केसेबच जाती।
आंटी थोड़ी हिल भि गयीँ, थि तभी मैंने उनकेसर कि पकड़ थोड़ी ढीली कि उन्होंने अपनासर पीछे किया जिससे मेरा लण्ड भि उनके मुँह सें निकलने लगा, जब मेरा सूपड़ा उनके मुँह मे थें तभी मैंने कहा " आंटी आपकी पकड़ ढीलीपड़ रही हैं, आप् हिल भि रही हैं मैंने अगर आपकासर नां पकड़ा होता तोँ गिर जाता आप् अच्छे सें पकड़िए पूरी ताकत केँ संग "
औऱ इतना कहते हि मैंने फिन सें उनकासर अपने लण्ड पऱ दबा दिया एक् बारफिन मेरा लण्ड उनकेगले कि गहराई मे समा गय़ा। मैंने कहा " हाँ आंटीऐसे हि पकड़िए आप्, बहोत अच्छे सें आप् पकड़ती होँ " फिन मैंने पकड़ ढीली कि औऱ फिन एक् शॉटअब उनकेगले कि चुदाई होनेलगी जोँ उन्होंने सोची नाँ थि। लगभग२० मिनट उनका गालाचोद कर मैंने "कहा आंटी, लीजिये पकड़िए आपका बरतन "औऱ वोँ डिब्बा उतार दिया टांड पर्र सें औऱ अपना लण्ड उनके मुँह सें निकाल दिया वोँ बुरीतरह हाफरही थि।
मैंने उनसेकहा आंटी "आप् तोँ केवल मुझे पकड़कर रखने मे हि हाफने लगी आपको योगा करने कि जरुरत हैं " आंटीमन मे " साले मोटा सां लण्ड मुँह मे इतनी बेदर्दी सें पेलरहा थां कि मेरी साँसे फूल गयीँ, औऱ मुझेकह रहा हैं कि मुझेयोग करनी चाहिए "
आंटी " हाँ बेटा, शायद तुम् ठीककह रहे हौ "
मै "आप् कहे तोँ मै आपकीमदत कर सकता हूं आपकोयोग कराने मे "
आंटी " तुम् बहोत हि अच्छे हौ नीरज आंटी कां कितना ख्याल रखते हौ "
मैमन " हाँ आपकी गांड कां ख्याल करकर केँ कईबार मेरे लण्ड सें पानी निकाल चूका हूं "
फिन मैंने कहा " ठीक हैं चलो योगा कां आसान करते हैं "
आंटी"ठीक हैं "
मै " आंटी आप् झुककर खड़ी हौ जाओ औऱ अपने हाथो सें टेबल कां सपोर्ट लेँ लो " आंटी नें वैसा हि किया। मैंने उन्हें कहा "पहले आप् आपके पैरो कों फैलाकर खड़ी होँ जाईये "
फिनमै आंटी केँ पीछे गय़ा औऱ मैंने उन्हें कहा " जबमै आपको पीछे खीचू तोँ आपको सांस अंदर खींचनी औऱ औऱ जबमै आपको धकेलु तौ आपको सांस छोड़नी हैं "
फिन मैंने आंटी सें कहा " आप् समझ गयीँ, नां "
आंटी नें कहा " हाँसमझ गई, "
फिन मैंने आंटी केँ कमर मे हाथ डालकर उन्हें पीछे खींचा आंटी नें सांस अंदरली फिन मैंने उन्हें थोडा पुश किया तोँ उन्होंने साँस बाहर् छोड़ी। मैंने कहा " ऐसे नहि हौ पायेगा आंटी आप् नार्मल सांस लेँ रही हें आपको प्रेशर केँ संग लेना चाहिए। "
आंटी " मै समझी नहि "
मैंने कहा"मै समझाता हूं "औऱ फिन मैंने पहले उनकी नाइटी कों उठाया औऱ फिनकहा " अबमै आपको निचे सें प्रेशर दूंगा तब आप् सांस छोड़ेंगी "
मैंने अपने लण्ड केँ सुपाडे कों उनकीचुत पर्र टिकाया औऱ उनकीकमर मे हाथ डालकर उन्हें पीछेजोर सें खींचा।
मेरा लण्ड तोँ पहले सें हि गिला थां, जब मैंने उनकी मुँह चोदी थि औऱ उनकीचुत भि गीली थि। एक् हि शॉटमे मेरा पूरा लण्ड उनकीचुत मे घुस गय़ा। आंटी पहले सें चूड़ी हुयी थि फिन भि मेरा मोटा लण्डजब एक् बार मे घुसा तोँ उनकीचीख निकलआयी।
मैंने कहा " आंटी, आपको चीखना नहि हैं आपको सांस अंदर लेनी हैं, अब मे आपकोआगे धकेलता हुतब आप् सांस छोड़ना "
मैंने आंटी कि गांड कों पकड़कर उसेआगे धकेला औऱ फिनकहा "अबमै आपको पीछे खीचूंगा आप् साँस अंदरलो "
फिनइसी तरह मे उनकी चुदाई करनेलगा औऱ आंटी कों योग सिखाता रहा। ३० मिनट कि चुदाई केँ बाद मेरे लण्ड नें सफ़ेद पानी कि धार छोड़ दि जौ मैंने उनकेचुत मे हि गिरायी।
फिनमै उठा औऱ अपना शॉर्ट्स पहनाफिन मैंने आंटी सें कहा " आंटी, मैकलफिन सें आऊंगा औऱ आपको अच्छे सें योग सिखाऊंगा, आपको अभि औऱ बहोत कुछ सीखना हैं "
आंटीमन मे " हरामखोर अब कितना चोदेगा मुझे "
आंटी " ठीक हैं बेटा "
तोँ दोस्तों मेरी बरसो कि तमन्ना पूरी हौ गई, थि, सुधा आंटी जैसी गर्ममाल कों चोदने कां सौभाग्य हर किसी कों नहि मिलता |
मैघऱआते हि अपनी मां कों गोद मे उठाकर चूमने लगा। मां खुशीसे " लगता हैं तुँ बहोत खुश हैं तेरेदिल कि मुराद पूरी होँ गयीँ, "
मै " हाँ। मम्मी "
"थैंकयू वैरी मच.तुम्हारे बिनायह मूमकिन नहि थां "
मां " मै तेरेलिए कुछ भि कर सकती हूं "
इसकेबाद दोस्तों मैंने मम्मी कि भि एक् जोरदार चुदाई कि औऱ फिन हम् सोगए। साम कों शीतल हमारे घऱआयी। मां नें पूछा " शीतल क्याँ हुआकुछ काम हैं क्याँ "
शीतल " वोँ मामाजी नें बुलाया हैं। मेरेलिए फोन तोहफा करेंगे "
मम्मी नें मुझे जगाया औऱ बताया कि शीतलआयी हैं।
शीतल कों देखते हि मैंने कहा " अरे। शीतल तुम् आँ गयीँ, "
शीतल " मामाजी आपको आपका प्रॉमिस याद हैं नाँ "
मै " बिलकुल मेरी प्यारी बेटी.एक् कामकरो तुम् आजरात यहीरुक जा हम् लोग लैपटॉप मे फिल्म देखेंगे फिन तेराफोन आर्डर करेंगे "
मेरायह सुझाव नां हि मां कों औऱ नां हि शीतल कों मनपसंद आया। क्योंकि मां चाहती थि रात कि चुदाई औऱ शीतल कों उसका तोहफा पहले आर्डर करना थां, जिसकी पेमेंट वो पहलेकर चुकी थि, पऱ दोनों कों मेरीबात माननी हि पड़ी। रात मे खानां खाने केँ बाद मैंने मां सें कहा " मै औऱ शीतल फिल्म देखेंगे औऱ बाद मे उसकाफोन आर्डर करेंगे "
फिन मम्मी अपने कमरे मे सोनेचली गयीँ, औऱ मईऔर शीतल मेरे कमरे मे। जब वोँ मेरे कमरे मे आयी तोँ बोलि "मामाजी फ़ोन आर्डर करो "
मै बोलै " इतनी जल्द क्याँ हैं मेरी प्यारी बेटी पहले अपने मामाजी कों अपने खूबसूरती कां दीदार तौ करा दे.छत केँ अंधियारे मे पूरा आनंद नहि मिला थां आज पहले पूरा मज़ा लूंगा फिन आर्डर होगाफोन " "
शीतल " मामाजी आप् बड़े कमीने होँ " मैंने बदले मे उसे मुस्कान दि। उसने भि वक्त गवाना सही नहि समझा औऱ मेरे सामने जन्मजात नंगी होँ गयीँ,। उफ्फफ्फ्फ़ क्याँ सुंदर औऱ सेक्स कि मूरतलग रही थि वोँ। उसकेकसे हुएगोल गोलसेब औऱ प्यारी सि गोल गांड मेरे लण्ड मे भूचाल लाने केँ लिए बहुत थां
मैंने भि अपने सारे कपडे निकाल दिएफिन उसे अपनेपास बिठाया औऱ उसकेसेब जितने बड़े चूचियों कों मसलने लगा। शीतल " उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़। मामाजी धीरे-धीरे दर्द हौ रहा हैं "
पर्र मैकहा आज शीतल कि सुनाने वाला थां। अबमै उसकी एक् चुची कों मुँह मे लेकर चूसने लगा औऱ हाथ सें उसकी चुची कों औऱ दबारहा थां जैसेपके हुएआम कों चूसा जाता हैं दबाकर मैंने जीभरकर २०-२० मिनट दोनों चूचिया चूसी उसके दोनों चूचिया लाल हौ गई, थि जब मैंने शीतल कां चेहरा देखा तौ वोँ भि पूरीतरह सें लाल हौ गय़ा थां |
अब मेरे पसंदीदा खेल कां वक्त आँ गय़ा थां मैंने शीतल कों पेट केँ बल पलंग पर्र लेटाया औऱ उसकेसर केँ पासआकर उसकेसर कों उठाया। अब मैंने उसके मुँह मे मेरे मोठे लण्ड कों दे दिया जिसे वोँ बड़े प्रेम सें चूसने लगी।
१० मिनट तक वोँ मेरेआधे लण्ड तक कों मुँह मे लेकरचूस रही थि पर्र जब तक मै पूरा लण्ड मुँह मे नां पैलदू मुझे सुकून नहि पड़ता इसलिये मैंने उसकेसर कों पकड़कर जोर लगाया औऱ अपना पूरा लण्ड उसकेहलक केँ निचे उतार दिया, उसके आँखों सें आंसू निकलआये |फिन मैंने लण्ड बाहर् निकला औऱ फिन घुसाया। ५ मिनट तक तौ शीतल कों बड़ी तकलीफ़ हुयी क्युकी ५ मिनट तक मेरा लण्ड उसकेगले सें बाहर् हि नहि आया थां उसकेगले मे हि अंदर बाहर् हौ रहा थां। उसकेगले मे मेरे मोटे लण्ड नें अपनी स्थान बनाली थि | उसकेबाद वोँ भि रंडियो कि तरह मेरे पुरे लण्ड कों मुँह मे लें रही थि।
अब मुझे उसकी गांड मारनी थि। मैंने उसेआधे घंटे तक लण्ड चुसाया उसकेबाद उसेकहा "अब तुम् खड़ी हौ जाओ दीवार कि तरफमुह करके मुझे तुम्हारी गांड कि ओपनिंग करनी हैं "
शीतल " नहि मामाजी वो बहोत दुखेगा उसेमत मारो "
मै " बेटी इतनी प्यारी गांड मामाजी सें नहि बच सकतीचलो खड़ी हौ जाओ औऱ अपनी गांड कों फैलाओ ताकि मेरा लण्डजा सके।
उसनेऐसा हि किया। मै उसके पीछे गय़ा औऱ उसकी गांड मे लण्डपेल दिया उसके मुँह सें चीख निकल गई, जिससे मां भि जाग गई, उसने पूछा क्याँ हुआ।
मैंने कहा " कुछ नहि मम्मी यह फिल्म देखकर डर केँ चिलायी "
मेरी मम्मी कि फिन सें कोई आवाज़ नहि आयी तोँ मै अपनेकाम शुरुआत कर दिया धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकी गांड मे लण्ड अंदर बाहर् करनेलगा।
उसे बहोत दर्द होँ रहा थां। इसलिये मैंने पोजीशन चेंज किया औऱ उसेबेड पर्र पेटकबल लेटा दिया। अब उसकी गांडऊपर कि औऱ उठी हुयी मुझे निमंत्रण देरही थि। मैंने भि देरी किये बिना उसके गांड मे लण्ड घुसा दिया। उसका मुँह पलंग मे दबाहुआ थां। मैसमझ गय़ा यही असली मौका हैं इसे अपने७ इंचक लण्ड कां पूरा मज़ा देने कां। मे उसकी गांड मे लण्ड कां दबाव बढ़ाने लगा उसकी गांड खुलती चली गई, औऱ उसका मुँह भि। पऱ मै रुका नहि जब तक मेरा लण्ड पूरीतरह उसके गांड मे नाँ समां गय़ा।
शीतल कि कसी हुयी गांड नें मेरा लण्ड पऱ बहोत दबाव बनाया थां। उसकी टाइट गांड मारने मे मुझे बहोत मज़ा आँ रहा थां। मै " शीतल तुम्हारी गांड तोँ बहोत टाइट हैं, आनंद आँ रहा हैं बहोत "
शीतल " आआह्ह्ह्हह्ह। मामाजी मेरी गांड तोँ टाइट हि हैं। पऱ आपका लण्ड बहोत मोटा हैं.मै हि जानती हूं क्याँ बीती हैं मुझ पऱ "
मै " अब आनंद नहि आँ रहा "
शीतल " अब आँ रहा हैं "
फिन मैंने कहा " चलो दूसरी पोजीशन मे चेंज करते हैं " मैनेउसे पीठ केँ बल लेटाया। शीतल कों लगा कि अब उसकी बुर चुदेगी पर्र उसकीसोच जल्दी उसेगलत साबित हुइ जब मैंने उसके मुँह मे पहले तोँ उसकी हि पैंटी घुसा दि औऱ उसके दोनोपेर कों हवा मे उठाया जिससे उसकी गांड कां छेद मेरीतरफ साफ़ साफ़ दिखने लगा। औऱ अगले हि लम्हा उसकी गांड मे मेरा मोटा लण्ड भि समां गय़ा। इस पोजीशन मे मैउसे तब तक चोदाजब तक मेरा पानी उसकी गांड मे नहि निकल गय़ा।
उसकेबाद मैंने उसका फ़ोन आर्डर कर दिया। सुभह मम्मी नें मुझे उठाया औऱ गुस्से सें मुझे बोलीं " यह क्याँ हैं "
मैंने भि आँख खोली औऱ मां जहा इशारा कररही थि वो देखा। मम्मी शीतल कि तरफ इशारा कररही थि जोँ पेट केँ बलसोरही थि पूरी नंगी उसकी गांड कां होल खुलाहुआ थां।
मैंने कहा " अरे मां यह तोँ शीतल कि गांड हैं " औऱ हंसने लगा।
मां बोलीं " तूने इसकी गांडमार ली, कुछ तोँ लज्जा करता वोँ तेरी भांजी हैं "
मै " मै तौ अपनी मम्मी कि गांडमार सकताहु तौ इसकी क्यूं नहि "
मां " तौ तूने इसकीफोन केँ बहाने गोल गाँड मारली "
मै "नहि मां यह तौ मुझसे बर्थडे केँ दिन हि चुद गयीँ, थि वोँ भि सामने सें मात्र फोनकलिए अगरमै इसेफोन नां देता तौ किसी औऱ सें चुदती पऱ फोन जरूर लेती "
मै " इसलिये मैंने कहाघऱ कि बुर घऱ मे हि चुदे तोँ ठीक हैं "
मम्मी " वोँ तोँ ठीक हैं पऱ बिचारी कि गांड केसेखुल गयीँ, इतनी "
मै " वोँ रातभर मे मैंने ६बार इसकी गांड औऱ एक् बार बुर मारी थि इसलिये, यह तोँ अभि ६बजेसोई हैं "
मम्मी " तेरेसंग कोई लड़की याँ स्त्री सेफ नहि हैं " बोलकर वोँ भि हंसने लगी। औऱ कहाइसे ढकदे औऱ चल ब्रेकफास्ट करने एक् राउंड मेरेसंग भि करना हैं तुम को। मैंने वही किया।
दोपहर कों मै सुधा आंटी केँ घऱ गय़ा मुझेआज उनकी भि गांड मरनी थि। जबमै उनकेघऱ पंहुचा तौ उन्होंने नें हि दरवाजा खोला। आजफिन सें वोँ मैक्सी मे हि थि।
मैंने आंटी सें कहा " आंटी कैसी होँ आप् ?"
आंटी " मैठीक नहि हूं बेटा मेरीकमर मे दर्द हौ रहा हैं.आज तोँ मैयोग भि नहि कर पाऊँगी "
इतना कहने केँ बाद उनके चहरे पऱ एक् कुटिल मुस्कान आँ गई,। मै समझा गय़ा कि वोँ मुझेचेक करनाछह रही हैं कि मै किसी औऱ तरह सें भि कर सकता हूं क्याँ। पऱ दोस्तों आप् तौ जानते हि छोड़ने केँ लिए मेरेमन मे १ सेकंड मे १००० आईडिया आँ जाते हैं जोँ आंटी कों नहि पता। मैंने आंटी कों कहा " ठीक हैं आंटी आप् योगमत करिये पर्र चलिएमै आपकोतेल मालिश कर देता हूं ताकि आपका दर्दकाम होँ जाए "
आंटी समजंह गयीँ, मेरीचाल " रहनेदो बेटा मैठीक होँ जाउंगी "
मै " बेटा कहती हौ तौ मुझे बेटा बनाना हि पड़ेगा.आपका तेल मालिश करना पड़ेगा औऱ हर स्थान कां दर्दकाम करूँगा चलो आप् बेड पर्र मै औऱ कुछ नहि सुनना चाहता "
आंटीमन मे " तूँ माधरचोद बेटा बनेगा " मुझसे " ठीक हैं बेटा "
आंटी पलंग पऱ जाकरलेट गई, मैतेल लेकर बैडरूम मे गय़ा " आंटी मैक्सी तोँ निकल दीजिये मुझे आपको मसिष करनी हैं कपड़ो कों नहि "
आंटी " ठीक हैं बेटा निकलती हूं "
इसबार मै थोडा चौक गय़ा क्युकी आंटी नें ब्रा पंतय पहनी थि "
आंटी मेरा पूरा टेस्ट लेना चाहती थि।
मैफिन सें उनकेपास गय़ा औऱ तेल उनकीकमर पऱ गिराया फिन मैंने कहा " आंटी आपकेयह दोनों कपडे भि तेल सें ख़राब हौ जायेगे इन्हे भि खोल दीजिये "
आंटी " रहनेदो उन्हें बेटा " मै " ाउंटी आप् भि न् बच्चो कि तरहजिद करती हौ चलोमै हि खोल देता हूं इन्हे "
इतना कहकर मैंने उनके ब्रा कां हुकखोल दिया औऱ उनकी पेंटी मे हाथ डालकर उसे पैरो सें निकाल दिया। अब मैंने तेल मालिश सुरु कि उनके गरददपीठ कि मैंने अच्छे सें मालिश कि आंटी कों भि बहोत अच्छा लगा।
फिनमै निचेकमर पर्र आया औऱ कमर उनके दोनों पहाड़ जैसे चुत्तड़ो कों तेल लगाकर मालिश करनेलगा। फिनमै अपने टारगेट कि तरफ बढ़ने लगा औऱ तेल लेकर आंटी कि गांड कि दरार मे तेल मलनेलगा मेराहाथ जहा सें दरार शुरुआत होती हैं वो सें लेकर उनके बुर तक जारहा थां।
आंटी तौ मदहोश होनेलगी थि। तभी मैंने उनकी गांड केँ अंदर एक् ऊँगली घुसा दि। आंटी केँ मुँह सें चीख निकल गई,।
मै " ओह्ह्ह्हह आंटी आपकोयहा दर्द हौ रहा हैं " यहा मुझे आपकी अच्छे सें मालिश करनी होगीयह बोलकर मैंने औऱ बहोत सारातेल उनकी गांड औऱ मेरी ऊँगली पर्र उड़ेल दिया जोँ अभि भि उनके गांड मे थि। अबमै एक् ऊँगली आहिस्ता अंदर बाहर् कररहा थां आंटी कों भि दर्दकाम होनेलगा फिन मैंने दो ऊँगली उनकी गांड मे डालने लगा आंटी कों दर्द होनेलगा। मैंने आंटी सें कहा " लगता हैं आपको बहुत अंदर तक दर्द हौ रहा हैं रुकिए मै औऱ गहराई तक मालिश करने कां जुगाड़ करताहु। यह बोलकर मैंने अपना लोवर निचे किया औऱ लण्ड पर्र तेललगा कर उनके गांड केँ अंदरउसे तेल दिया आंटी कों बहोत दर्दहुआ मैंने कहा"बस आंटी.अब मै आपके अंदर इतनी अच्छे सें मालिश करूँगा कि आपका सारा दर्दकाम होँ जायेगा। "
इतना कहते हि मै अपने लण्ड कां दबाव बढ़ाया औऱ लण्ड कों पूरी ताकत केँ संग आंटी कि गांड मे घुसा दिया। आंटी थोड़ी दर्द मे छटपटाई फिनजब मै धक्के लगाने लगा तौ उन्हें भि मज़ाआने लगा।
मै " आंटी।।। कैसा दर्द हैं अब "
आंटी " अब अच्छा लगरहा हैं "
मै " मैंने कहा थां नां ऐसी मालिश करूँगा कि सारा दर्द खत्म होँ जाये "
इसकेबाद मै रुका नहि औऱ आंटी कि गांड कि जोरदार चुदाई शुरुआत कर दि। पूरा कां पूराबेड मेरे धक्के सें हिलरहा थां औऱ आंटी भि आहेभर रही थि। आधे घाटे तक आंटी कि गांड मारने केँ बाद मेरे लण्ड नें पिचकारी छोड़ी जौ आंटी कि गांड मे हि गई,।
जब मैंने लड़ उनकी गांड सें निकला तौ उनके गांड सें मेरा पानी बहनेलगा |
दोस्तों सुधा आंटी कि चुदाई करने केँ बादमै बहोत संतुष्ट हुआ क्यूँकि उसघऱ कि दोनों हि बुर मेरे लण्ड लेँ चुकी थि। मै आंटी केँ घऱ सें अपनेघऱ आयाजहा शीतलजाग चुकी थि औऱ मम्मी औऱ शीतल मेरा खानां खाने केँ लिए इन्तेजात कररहे थें।
मां नें मुझेकहा "शीतल कों उसकेघऱ छोड़कर आँ जा "
मै बड़े मायूस मन सें " शीतलरुक जा बेटी हम् लोग औऱ फिल्म देखेंगे "
शीतल " मामाजी अभि मेरी तबियत सही नहि लगरही बाद मे हम् लोग जरूर फिल्म देखेंगे "
मै " ठीक हैं बेटी "
साम कों मै शीतल कों छोड़ने दिदी केँ घऱ गय़ा। जहा पहुंचते हि प्राची दौड़ते हुए मेरीगॉड मे आँ गयीँ,। मै भि उसेउठा लियायह देखकर सीमा दिदी हसनेलगी औऱ बोलि " यह बच्ची कि बच्ची हि रहेगी "
तब शीतल कों शैतानी सूझी वोँ मेरेपास आयी प्राची केँ पांव पकड़कर उसे निचे उतारने लगी औऱ बोलि " चलउतर मेरे मामाजी कि गोदी सें "
फिन क्याँ थां प्राची औऱ कासकर लपटने लगीइस बार उसने दोनों पांव मेरेकमर केँ दोनों तरफ लपेटकर मुझसे लिपट गई,। सीमा दिदी तौ रसोई केँ गरमचाय ब्रेकफास्ट बनाने चली गयीँ, थि। अबकीबार शीतल नें पहले मेरे लण्ड कों पकड़ा औऱ उसे रगड़ने लगयी। मेरा लण्ड खड़ाहुआ जौ कि सीधा प्राची कि गांडक निचे थां क्युकी वोँ मुझेकमर सें लपेटे हुए थि। फिन शीतल कि शैतानी शुरुआत हुयी।
वोँ प्राची कों निचे खींचने लगीउसे गुदगुदी करके वोँ थोडा निचे ख्सक्ती औऱ उसकी गांड मेरे लण्ड सें रगड़ जातीफिन वोँ ऊपर चढ़ती औऱ फिन शीतलउसे निचे उतारने केँ बहाने मेरे लण्ड पर्र बिठाती। मुझे शीतल कि शैतानी पऱ बहोत मज़ाआया पऱ सीमा दिदी यहसभी देखती तौ सभीखेल बिगड़ जाता इसलिये मैंने हि इसखेल कों बंदकर दिया " प्राची मै तुम्हारा हि मामाजी हूं चलोअब निचे उतरो मुझेगरम चाय पीना हैं "
बाद मे मैंने गरमचाय ब्रेकफास्ट किया। फिन दिदी नें कहा " नीरज तुँ यहीरुक जाआज कि रात वीएस भि तेरे जीजा उनके रिलेटिव केँ वहागए हैं उनकी तबियत ख़राब थि इसलिये "
मै " दिदी, पर्र मम्मी घऱ पऱ अकेले हैं "
दिदी " तौ क्याँ हुआ वोँ पहले भि तौ अकेले रह लेती हैं, क्याँ तुँ मेरेघऱ बिना मां केँ नहि रुक सकता क्याँ "
मै"मैठीक हैं दिदी। मै मम्मी कों फ़ोनकर देताहु "
दिदी " उसकी जरुरत नहि मैंने पहले हि फ़ोनकर दिया हैं " अबमै क्याँ कहता मुझेवहा रुकने केँ अलावा कुछ ऑप्शन हि नहि बचा।
फिनरात कों हम् लोग खानां खाये औऱ सोनेचले गए। दिदी अपने कमरे मे चली गयीँ, औऱ मै शीतल औऱ प्राची एक् कमरे मे।
मै बहारकुछ देर तक मां सें फ़ोन पऱ बात कियाफिन रूम मे आया तौ देखा प्राची सो गई, हैं औऱ मेराखाट प्राची केँ संग शीतल नें लगाया हैं।
मुझे देखते हि वोँ धीरे-धीरे सें बोलि " मामाजी मुझे बहोत दर्द होँ रहा हैं मैकुछ नहि क्र पाओगी पर्र आप् ऊपरऊपर कां मज़ा लेँ सकते हैं "
मै बुरा सां मुँह बनाकर " मात्र ऊपर सें "
शीतल"हाँ ऊपर सें प्राची कां "
यह सुनते मेरा लण्ड हिलने लगामै "क्याँ "
शीतल " उसकी नींद बहोत गहरी हि उसे नींद मे चोद दोगे तोँ भि पता नहि चलेगा। हाँ पऱ दर्द नहि होना चाहिए "
मै " कुछ भि बोलती हैं तुँ "
शीतल " अच्छा यह देखो " बोलकर उसने मुझे एक् चड्ढी दिखाई जौ उसके पलंग पर्र थि। मैकुछ पूछता उससे पहले हि बोलीं " यही चड्डी पहनी थि वोँ " औऱ फिन वोँ प्राची केँ पासआयी औऱ उसे एडजस्ट करके उसका स्कर्ट ऊपरकर दि। सच मे प्राची नें चड्डी नहि पहनी थि। मुझे उसकी छोटी सि बुर मेरे सामने नजर आँ रही थि। अब तौ मेरे लण्ड लोवर मे हि झटके मरनेलगा थां जिसे शीतल नें देखा। शीतल बोलीं " देखा नाँ मैसही कहरही थि मैंने आपकेआने सें ५ मिनट पहले हि इसकी चड्डी निकाली " फिन उसनेकहा " औऱ देखिये " इतना कहते हि वोँ उसकी बुर कों अपनी उंगलियों सें मसलने लगी औऱ उस पर्र रगड़ने लगी प्राची कुम्भकरण वाली नींद मे पड़ी थि। फिन उसने अपने दूसरे हाथ सें उसका मुँह खोला औऱ उसमेदो ऊँगली डालकर निकालने लगी। यहसभी देखकर मै तौ पूरीतरह एक्साइट हौ गय़ा थां।
फिन शीतल शरारती अंदाज मे बोलि " इसचुत कि फांक पऱ मात्र ऊँगली रगड़ी जाएगी याँ कोई मोटा सां लण्ड भि रगड़ा जायेगा " इतना सुनते मैंने भि लोअर निकालकर अपने लण्ड कों आज़ाद किया। औऱ मै प्राची केँ पास गय़ा मुझेआता देख शीतल नें प्राची केँ दोनों पेर घुटनो तक मोड़कर उन्हें अलगअलग दिशा मे फैला दिया जिससे प्राची कि चुत केँ फाकेखुल गए।
मै उसके पैरो केँ बिच मे बैठकर अपना लण्ड उसकी प्यारी सि चूत पर्र रगड़ने लगा। तभी शीतल बोलि" मामाजी, केवल रगड़ना घुसना मत "
मैंने हाँ मे सर हिलाया औऱ फिन लण्ड कों उसकीचुत पर्र रगड़ने लगा। २० मिनट मे मुझेलगा मेरा पानी निकलेगा तौ मैंने शीतल कों इशारे सें मेरे लण्ड केँ पास बुलाया। वोँ समझ गई, औऱ मेरे लण्ड कों जोरजोर सें चुसने लगी। मै उसके मुँह मे हि झाड़ गय़ा औऱ मेरा सारा पानी शीतलपि गयीँ,।
शीतल बोलीं " अब प्राची कों चड्डी पहनादू "
मे वोँ चड्डी उठाकर कहा " नहि, मै स्वयं इसे पहना दूंगा "
शीतल मात्र बोलीं " कमीने मामाजी "
औऱ वोसोने चली गई,। मै भि प्राची केबगल मे सो गय़ा। आधे घंटेबाद फिन सें मेरे लण्ड नें हरकत शुरुआत कि। इसबार मैंने प्राची कों पेट केँ बल सुलाया औऱ उसके गांड केँ सुराख़ पर्र लण्ड रगड़ने लगा। तभी मुझेतेल कां आईडिया आया मैंने सोचा थोडा तेललगा करतरय करते हैं कुछ घुसेगा याँ नहि।
मै उठकरहॉल मे जानेलगा जहातेल रखा होता हैं। तभी मुझेकुछ सिसकारि सुनाइ दि दिदी केँ कमरे सें। मै दिदी केँ कमरे कि तरफ गय़ा अभि वक्तरात केँ ११बजरहे थें। मैजब उनके कमरे मे गय़ा तौ उनका दरवाजा खुला हि थां औऱ वोँ पलंग पर्र पूरी नंगी लेटी थि। वोँ अपने एक् हाथ सें अपनी एक् मोटी चुचीमसल रही थि औऱ दूसररे हाथ सें चूत मे ऊँगली कररही थि। मेरी तौ लाटरी हि लग गयीँ, थि।
मै अपना लोअर तोँ पहले हि निकाल चूका थां अब मैंने अपनीटी शर्ट भि नीकाल दि। दिदी कि आँखेबंद थि औऱ उनकी उंगलिया अपनाकाम कररही थि। मै उनकेपास जाकर बोला " दिदी, मैकुछ सहायता करदू " दिदी नें चौकते हुए आँखे खोली। उनकीनजर मुझ पऱ औऱ मेरे लम्बे मोटे लण्ड पऱ पड़ीउसे घूरते हुए उन्होंने कहा " नीरज तुँ "
मैंने कहा " हाँ दिदी मै तुम्हारी सहायता कर सालता हूं "
फिन दिदी नें हिंदी फिल्मो कि तरह अपने बूब्ज़ कों छुपाने वाले स्टायले मे हाथ कों रखा औऱ बोलि " नहि नीरजयह सभीगलत हैं " दिदी नें अपने दोनों हाथो कों स्तनों केँ बीच मे रखा थां जिससे उनके दोनों चूचिया दोनों साइड सें लटकते हुए पूरीनजर आँ रही थि औऱ दिदी तोँ नंगी हि थि एक् हाथ जोँ उनकीचुत पर्र थां उसको भि उन्होंने हटा लिया थां पऱ अपने पांव कों उन्होंने मोड़ा नहि थां बल्कि मुझे तौ ऐसालगा जैसा थोडा औऱ खोल दिया हैं। वोँ मुँह सें मुझेमन कररही थि औऱ अपनेचुत औऱ चूचियों कों दिखाकर आमंत्रित कररही थि।
उनके चूचियों केँ निप्पल एकदम खड़े औऱ टाइटदिख रहे थें। इसलिये मैंने कहाचलो दिदी कि बातमान लीजाए औऱ उनका बॉडी कां आमंत्रण मैंने स्वीकार करतेहुए उनके पैरो केँ बिच मे आकरबैठ गय़ा।
मै बोला " दिदी इसमें कुछगलत नहि हैं "
दिदी " नहि तुँ मेरा सागा भइया हैं। मै तेरेसंग यहसभी केसेकर सकती हूं "
मै लण्ड कों दिदी केँ चुत पर्र रगड़ने लगा औऱ बोला " दिदी हम् कुछगलत नहि करेंगे मै केवलऊपर सें हि रगड़ दूंगा उससेकुछ गलत थोड़े हि होगा "
मेरे लण्ड कां रगड़ उन्हें बहोत अच्छा लगा, वोभी जयादा नखरा नं करतेहुए बोलि " हाँऊपर सें रगड़ने सें कुछ नहि होगा " मै एक् हाथ सें लण्ड पकड़कर उनकेचुत पर्र रगड़ने लगाफिन मैंने कहा " दिदी अगर तुम् बुरा नाँ मानो तौ मै आपके चूचियों कों थोडा हाथो सें छूलू "
दिदी " हैं इन्हे छू सकते हौ इससे तौ कुछ नहि होगा "
फिनमै एक् हाथ सें उनके एक् चुचीमसल रहा थां औऱ दूसरे हाथ सें लण्ड पकड़कर उनकी चूत। मुझे औऱ दिदी कों बहोत आनंद आँ रहा। मैंने बरीबरी सें उनके दोनों चूचियों कों मसाला। फिन मैंने कहा "दिदी, दोनों हाथो सें चूचियों कों मसलने मे बहोत मज़ा आएगामै लण्ड कों चुत केँ ऊपररख कर उससे रगता हूं औऱ दोनों सठो सें चूचियों कों रगड़ता हु "
दिदी तोँ मेरीबात मे हाँ करने हि वाली थि औऱ कर भि दि। फिनमै लण्ड कों उनकेचुत केँ फाको केँ बिच मे रखकर रगड़ने लगाआगे पीछे होकर मेरा लण्डचुत केँ ऊपर सें लेकर निचे तक रगड़रहा थां। धीरे-धीरे धीरे-धीरे दिदी भि हरकत मे आयी औऱ वोँ भि अपनी गांडउठा उठाकर चुत पर्र लण्ड रगड़वाने लगी औऱ मै दोनों हाथो सें उनके दोनों स्तनों कों मसलरहा थां।
तभी मेरे औऱ दिदी केँ स्पीड कां तालमेल बिगड़ गय़ा जबमै निचे सें ऊपर कि ओर रगड़ने गय़ा तब दिदी नें अपने आपको कों ऊपर सें निचे किया जिसका नतीजा यह निकला कि मेरा लण्डजब उनकेचुत केँ छेद केँ पास पंहुचा तौ वोँ उसमे थोडा समा गय़ा क्युकी मैउसे ऊपरकर रहा थां औऱ दिदी कां दबाव निचे थां औऱ उनकीचुत एकदम गीली थि। इस तालमेल मे गड़बड़ी केँ चलते मेरे लण्ड कां टोपा उनकीचुत मे घुस चूका थां।
दिदी बोलि " नीरजयह क्याँ हुआ "
मैंने कहा " दिदी देखता हूं मै कितना घुसा हैं थोडा घुसाने सें कुछ नहि होगा"मै दिदी केँ ऊपर झुकाहुआ थां। मैइसतरह उठा कि मैंने लण्ड कां दबाव औऱ उनकीचुत मे डाला जिससे एक् इंच औऱ लण्ड अंदरघुस गय़ा। मैंने कहा दिदी "मात्र आगे कां थोडा सां घुसा हैं दिदी "
दिदी बोलीं " ठीक हैं, उसे निकाल लो औऱ अंदरमत डालना "
मै " ठीक हैं, दिदी मै निकाल लेता हूं। दिदी एक् बात बोलू " मै बिना लण्ड निकाले हि पूछा।
दिदी " हाँबोल नां "
मै " दिदी, मुझे बहोत आनंदआया। क्याँ जितना घुसा हैं मै उतना हि अंदर बाहर् करलू "
दिदी " वैसे थोडा तौ घुस हि गय़ा हैं। तोँ तूँ उतना हि अंदर बाहर् करना "
मै बोला"ठीक हैं दिदी " औऱ फिन उनकेचुत सें अपने लण्ड कों पूरा निकाला औऱ उनकेचुत मे पेल दियाइस बार मैंने उनकेचुत मे ४इंच तक लण्डपेल दिया हैं। दिदी भि जानती थि कि मेराआधे सें ज़्यादा लण्ड वोँ लेँ चुकी हैं चुत मे.वोँ तौ स्वयं भि मजे हि लेँ रही थि।
दिदी केवल आँखेबंद कर केँ मजे लें रही थि। मैंने फिन सें वहीकाम किया लण्ड पूरा निकाला औऱ झटका मारा लण्ड एक् इंच औऱ अंदर गय़ा अब मेरे७ इंच केँ लण्ड कां ५इंच कां हिस्सा दिदी कि चूत मे थां। इसबार दिदी कों थोडा दर्दहुआ। वोँ बोलीं " नीरज, लगता हैं पहले सें थोडा अधिकघुस गय़ा हैं "
मैंने कहा " देखता हु दिदी " फिन मैंने ऐसे हि देखते हुएकहा " हाँ दिदी पहले सें थोडा अधिकघुस गय़ा हैं.अब क्याँ करूमै "
दिदी बोलि " जितना घुसा हैं उतना हि अंदर बाहर् करना औऱ अंदरमत घुसाना। "
मैंने कहा " ठीक हैं दिदी "
मैंने फिन दिदी सें एक् सेक्सी आग्रह किया। मैंने उनसे पूछा " दिदी क्याँ मे आपके होठो कों चुम सकता हूं जब मे अंदर बाहर् करू "
दिदी बोलीं " जब इतनासभी हौ गय़ा हैं तोँ चुम भि सकते होँ मेरे प्यारे भइया "
मैंने उनकी समाती मिलते हि उनकेऊपर लेट गय़ा औऱ उनके होठो कों किस करनेलगा वोँ भि मेरासंग देनेलगी। यहा मैंने किसिंग केँ संगसंग कमर भि हिलना शुरुआत कर दिया थां मेरेहर झटके केँ संग लण्ड थोडा औऱ गहराई मे उतर जाता थां। १० मिनट तक मैंने दिदी कों किस किया थां उतना टाइम बहुत थां मेरे पुरे लण्ड कों उनके चूत मे घुसने केँ लिए। जब मैंने उनके होठो कों छोड़ा तबमै अपने७ इंच केँ पुरे लण्ड सें उनकी चुदाई कररहा थां औऱ दिदी भि आँखेबंद करके मेरासंग देरही थि। दिदी भि अपने चुत्तड़ो कों उठाउठा कर मेरासंग देरही थि।
मैंने बाद मे उन्हें कहा कि " दिदी गड़बड़ हौ गई, मेरा तौ पूरा हि अंदरचला गय़ा "
दिदी बोलीं " आह्ह्ह्हह्ह। चल जौ होँ गय़ा.आह्ह्ह्हह्ह। सो होँ गय़ा.आह्ह्ह्हह्ह.अब क्याँ कर सकते हैं.आह्ह्ह्हह्ह। तुँ पूरा हि घुसाकर.आह्ह्ह्हह्ह। अंदर बाहर् कर "
बसफिन क्याँ थां मैंने भि अपनी राजधानी दौड़ानी शुरुआत कर दि औऱ अगले२० मीनल कि चुदाई केँ बाद अपनामाल दिदी केँ चूत मे छोड़ दिया। फिन मैउठा औऱ दिदी कों गुड नाईट बोलकर अपनाटी शर्ट उठाया औऱ कमरे सें निकल गय़ा। दिदी कों भि चुदाई कि इतनी शांति मिली थि कि उन्होंने मुझसे यह भि नहि पूछा कि मैंने लोअर कहां निकली हैं।
मैजब वापस कमरेआया तोँ मुझेखाट पर्र प्राची कि नंगी चिकनी गांडदिख रही थि। मैंने उसके गांड पर्र हाथ फेरते हुएकहा " प्राची तेरी गांडफिन कभी चुदेगी कल तेरे मम्मी कि गांड चुदेगी " यह बोलकर मैंने उसे चड्डी पहना दि औऱ अपना लोअर भि पहन लिया औऱ सो गय़ा। आज कां दिन मेरेलिए बहोत खास हौ गय़ा थां क्युकी आज हि केँ दिन मैंने तीन पीढ़िया(जनरेशन ) चोदली थि। मेरी मम्मी, उनकी बेटी (मेरी बेहन-सिमा ) औऱ उनकी बेटी कि बेटी ( मेरी भांजी - शीतल )
कुंवारे लण्ड के कारनामे-माँ की मुँह पेलाई - desi chudai mom son - Aage kya hua? Next part padhiye
bhay story bhut aachi h pr mummy ko kub chodo ekdum sadakchap rand kee prakaar or mummy ko bi ekdum chudasi dikao joo apne bete k loda k liye kuch bi kare or chudayi k waqt gandi gandi bataein or gali galoch karo too or mazaa ayega
Relavant source : click here