मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना) (Completed) - Ghar Ki Sachchai - Full Story Part 1
कुछदिन पहले मे मेरा एक् क्लोज फ्रेंड केँ संग सेक्स कों लेके डिस्कुस कररहा त। वो मध्य प्रदेश मे नौकरी करता हैं। मे नां उसकानाम, नाँ स्थान कां नामकुछ भि देना नहि चाहता हूण। उस सें जबबात कररहा थां, तबउस नें मुझे एक् ऐसी सच्ची स्टोरी सुनया, कि तब सें मेरा दिमाग़ जाम हौ गय़ा। वो किस्सा आप् लोगों सें शेयर करना चाहता हूण।
वो जहाँ नौकरी करता हैं, उस दफ़्तर मे, एक् दूसरा सेक्शन मे पटेल बोलके एक् व्यक्ति काम करता हैं। येउस व्यक्ति कि कहानि हैं वो व्यक्ति मेरा मित्र कां अच्चा मित्र बन गय़ा हैं। मेरायार उनकेघऱ जाते हैं, खानां खाते हैं औऱ कभीकभी चैस कां अड्डा भि जमा लेता हैं। अच्छी दोस्ती होने केँ कारन उन्होंने मेरा साथी कों उसका जिंदगी कां एक् गहरासच बताया। पर्र मे लिखने मे कच्चा हूण। मे उसकथा मे ज़ादा रंग नं चढाकर, सचमुच जौ घटाउस कों हि अपना तरीके सें आप् लोगों कों बताउंगा। इस मे मेराकुछ क्रेडिट नहि हैं। मे जबसुन रहा थां, तब मेरेदिल नें जैसेउस किस्सा कों चित्रण किया थां बस उतना हि कह पाऊंगा। मे मि.पटेल कां जबानी सें कहते रहुंगा। काम आसान होँ जाएगा। इस मे सेक्स हैं पर्र इतना डिटेल्ड नहि रहेगा, क्यूं कि इतना प्राइवेट बात मिस्टर पटेल स्वयं बताया नहीं। पऱ कहानी कां सिचुएशन सें आप् समझ जायेंगे केसे केसे वो सभीघटा उनका लाइफ मे। कोशिश करूँगा किस्सा एक् गति मे चलतीरहे
आज मे ज़ादा किस्सा लिख नहि पाऊंगा। बस आप् लोगों कों थोडा प्रेमिसेस क्याँ हैं स्टोरी कां वो बता दूंगा औऱ बहोत जलद हि किस्सा पूरा बताके एन्ड करवा दूंगा।
आप् लोगकुछ डिमांड मत कीजिये, क्यूं कि ये किसीका लाइफ कि सच्ची घटनाएँ हैं। जोँ मे सुना, वो आप् भि जानीए। बस एक् चीज़ स्टोरी कों केसेफील करते रहेंगे, वो बताइयेगा। आप् लोगअगर इंटेरेस्टेड नहि रहेंगे, तो मेहनत करके बताने कां जरूरत नहि होगा।
एम पी। मे मेरा मित्र किसी केँ घऱ मे पेइंग गेस्ट बन केँ रहता हैं।। मि.पटेल एक् छोटा बंगलो टाइपघऱ किराया मे लेके वहां रेह्ते हैं। उनकाघऱ मे मिसेस पटेल औऱ उन लोगों कां नर्सरी मे पड़नेवाली एक् बेटी हैं, ज़ीस कां नाम दिया हैं। वो मेरा मित्र कों चाचू बुलाता हैं। मि.पटेल (अब्ब सें हितेश नाम सें बुलाएँगे) कों मेरा साथीनाम सें हि बुलाता हैं पर्र उनकी पत्नि यानि कि मिसेस पटेल (अब्ब सें मंजु बुलाएँगे) कों भाभी हि कहता हैं। गुजरात मे अब्ब हितेश कां कोई नहि हैं। पिछला ५साल सें मंजु कां परेंट्स भि गुजरात छोड़के मुंबई मे आगये। वहा एक् फ्लैट खरीद केँ वो दोनों रेह्ते हैं। कथाउस टाइम सें डिटेल मालूम हैं जब हीतेश इंजीनियरिंग कां लास्ट इयर मे थां उस सें पहला घटना भि बताऊँगा जितना मे जानता हू। हितेश अहमेदाबाद मे हि पड़रहा थां। अहमेदाबाद केँ पास एक् स्थान हैं(नाम पूछिए मत) जहाँ हितेश अपनी मम्मी, नानाजी औऱ नानीमा केँ संग रहता थां। उस कां फ़ादर एक् अनाथ थां पऱ अच्छा इंसान थां। इस्सलिए उसका नानाजी उनकोघऱ जमाईबना केँ अच्चा प्रेम दिया थां। उसका नानीमा थोड़ी हिचकरही थि क्यूँकि उस वक़्त उनकी बेटी देखने मे बड़ी होगयी थि पऱ उम्र मे कम थि। गुजरात मे शायदकम उम्र मे विवाह होती हैं लगता हैं। सभी ख़ुशी सें जीरहे थें सालघूम नें सें पहले हि हितेश आगया। ख़ुशी सें सभीझूम उठे। पऱ ज़ादा समयये हाल नहि रहा। हितेश केँ जनम केँ दोसाल बाद मलेरिआ सें अचानक हितेश केँ फादर कि डेथ हौ गई। तब हितेश कि मां सिर्फ १८साल कि थि। एक् बड़ा झटकालगा थां उस फॅमिली कों पऱ धिरे धीरे-धीरे वो लोगउस सदमें सें बाहर् आनेलगे औऱ नार्मल होनेलगे। कुछसाल बाद हीतेश केँ नानाजी नानीमा मंजू कि दोबारा विवाह केँ बारे मे सोचे। पर्र मंजु स्वयं हि मनाकर दिया वो। हीतेश केँ नानाजी केँ पास रुपया औऱ प्रॉपर्टी थां। तो वो लोग एक् फॅमिली बन केँ, एक् आराम कि ज़िन्दगी बितारहा थें पऱ हितेश जब कॉलेज ख़तम किया उसको काम्पुसिंग मे हि नौकरी लग गय़ा मात्र २०साल कां उम्र मे। कंपनी मे जाके नौकरी ज्वाइन किया। औऱ वीकेंड मे घऱआया करता थां। पर्र उसका नानाजी नानीमा येसोच केँ परेशांन होते थें कि इतनेदूर, अकेला उसका रहना खानां सभी अकेले मे करने मे तकलीफ होती होगी। सो उसके नानाजी नानीमा उसकी विवाह करवा नें केँ लिएसोच लिया।
आगे केँ भाग कों आसान करने केँ लिए हीतेश कि जबान सें बोलुंगा। कि केसे उसके लाइफ कां एक् छुपाहुआ सपना अचानक स्वयं केँ बिना कोशिश मे सच होँ गय़ा। जोँ सपना सिर्फ वो देखता थां मन हि मन मे, वही शामे चीज़ उसका नानाजी नानीमा सभीठीक विचार करके अपनेसभी केँ भलाई केँ लिए केसेसच करवा दिया। सभी कि मर्ज़ी सें ये स्टोरी आगें गई। जौ कुछ परेशानिया आगेआई, वो केसे केसेदूर हुआ, केसे वो एक् सचचा प्रेम सें बढाहुआ फॅमिली, एक् हि रह गय़ा ज़िन्दगी भर केँ लिये। हीतेश कां नानाजी नानीमा अपना पोता हीतेश कों खोये। उन लोगों नें एक् नया पोता पाने कां आशा किया थां, आब वो लोगकभी पोता पाएंगे नाहि, पऱ नन्हि मुन्नी पोती दिआ कों पाके हि खुश हैं। क्यूं कि डॉक्टर साफ़मना कर दिया हीतेश कों, कि अगर वो दूसरा बच्चे केँ लिए प्रयास करेगा तौ उस्का पत्नि यानि कि मंजु कां जानजा सकता हैं। पहले पहले हीतेश कां प्रॉब्लम होता थां नानाजी नानीमा कों मां बापू बुलाने मे। कभीकभी नाना, नानीजी मुह सें निकल जाता थां। पऱ आजसात साल मे सभीकुछ परफेक्ट हौ गय़ा। जिस तरीके सें हीतेश रिस्पांसिबिलिटी लेके ज़िन्दगी बितारहा हैं, अपना पत्नि, बच्चा कां ख्याल रखता हैं, बूढ़ा साँस ससुरजी कां ध्यान रखता हैं, औऱ कोईआता इस फॅमिली मे तोँ शायदऐसा नहि हि पाता। ये लोग अपने दामाद सें बेहदखुश हैं। औऱ मंजू।। उसको पहले तौ सभी सपना जैसालगा थां। आब वो एक् अच्छी हाउसवाइफ हैं। बूतये सभी आसानी नें नहि हुआ केसेहुआ वो मे आप् कों बतौँगा।
एक् एक्स मित्र केँ कहने पर्र मे इस सच्ची घटना कों स्टोरी जैसा लिखने कां कोशिश किया। आप् लोगों कां इस किस्सा पड़कर क्याँ फीलिंग्स होता हैं, वो जरूर बताइयेगा। मुझे होसला बढ़ेगा
मै हितेश। बचपन सें मे अपना नानाजी नानीमा औऱ मां केँ संगरह केँ बड़ाहुआ। फादर नं रहने केँ कारन मेरा नानाजी नानीमा कभीकमी नहि छोड़ि प्रेम औऱ सपोर्ट देणे मे। मां हमेशा आपनि ममता औऱ प्रेम सें मुझे पालन किया। नानाजी केँ पास रुपया होने केँ कारन मुझेकभी कुछ भि चीज़ कां कमी मेहसुस करने नहि दीए। मे ऐसे हि तेज स्टूडेंट थां। इस्सलिए सभीलोग मुझे प्रेम हि प्रेम देते थें। मे बदमासी भि करता थां। पर्र इतना नहि जोँ कि बिगडे बच्चे करते हैं। छोटा मोटा शरारत करता वो अपनी तरीके सें क्षमा कियाकर देता थें। पऱ हाँ।।। मुझे हमेशा अच्चा वैल्यूज औऱ मोरालिटी केँ संग कि पाला वो लोग। बाहर् ज़ादा लोगों केँ संग मेरा दोस्ती भि नहि थां। नानाजी नानीमा औऱ मम्मी सभी मेरा मित्र भि थें औऱ टीचर भि। डांटते भि थें। फिन सीखाते भि थें। हम् चारों एक् बॉन्डिंग सें बढरहै थें बचपन सें। यही देखते गय़ा। मैंने ये सुना कि मेरा पापा गुजर जाने केँ कुछसाल बाद, मेरा नानाजी नानीमा मेरा मां कां दोबारा विवाह करवा नेकेलिए कोसिश किया थें। तब मेरा मां २३-२४साल कि थि। बहोत सुन्दर देखने मे थि। फिट औऱ गोरी। लम्बे बाल थां। पान कां पत्ते जैसामुह कां शेप। उनकाआँख, ऑय ब्रोव्स, नाक, होठ सभीकोई अर्टिस्ट कां बनाहुआ लगता हैं। बारवी क्लास तक पढ़ी हैं। उसकेबाद जिन्दगी मे हदसा औऱ बाद मे मुझेदेख भाल करके बड़ा करने मे जुट गई। मेरा औऱ कोई मौसी नहीं। सो नानाजी नानीमा कि वहीदेख भाल करति थि। घऱ कां काम भि करति थि, फिन मुझे पढाती भि थि औऱ वक्त मिलता तो वो बड़े बड़े लेखक केँ नावेल किस्सा पड़ने मे उस्ताद थि। एक् बेटी होने केँ कारन नानाजी नानीमा भि उनकोघऱ मे रहने कां सभी बंदोबस्त कर दिया थां। उनको भि बुक पड़ने कां नशालग गय़ा बचपन सें। बाद मे वो एक् हि कि थि जोँ वो अपनी स्वयं केँ लिए, अपनीमन कि ख़ुशी केँ लिए करती थि। मेरा नानीमा भि इतने ओल्ड नहि थें। पर्र मेरी मां मेरे पापा कां फॅमिली नहि होने केँ कारन अपना बेटा लेके नानाजी नानीमा केँ फॅमिली कों हि अपना फॅमिली सोच केँ सभीदेख भाल करती थि। शायदउस मे उनको ख़ुशी मिलति थि औऱ वक्त भि गुजर नें कां तरीका मिला थां। वो शांत स्वाभाव कि थि पऱ हसि कि बातों सें हस्ति भि थि औऱ टेलीविज़न मे दुःख दर्दभरी फिल्म देखके मायूस भि होँ जाति थि। कुछलोग नानाजी जी केँ पास उनको विवाह करने केँ लिए प्रपोजल भि लाया थां। पर्र कुछ मेरा नानाजी जी।। औऱ बाकि मेरा मम्मी कैंसिल कर दिया। स्टार्टिंग मे नानाजी नानीमा मां सें क्रोध करता थां। मां कां भविष्य केँ लिए वो बोलते थें कि सारी ज़िन्दगी पड़ी हैं तेरी, केसे गुजारेगि। औऱ ये भि कहते थें कि हितेश कों भि तौ एक् बाप पाने कां इचछा होता होगा। बाप कां प्रेम। पऱ मां कां कहना थां कि अगर वो किसी कों फिन सें विवाह किया तो वो व्यक्ति अपना अधिकार दिखाके मुझे त्याग करने कों कहेगा औऱ नानाजी नानीमा कों छोड़ केँ भि जानेलिए कहेंगा। आबइस सिचुएशन पे वो उनकेलिए सम्भब नहि थां वो मुझ सें दूर नहि रह सकति, औऱ नानाजी नानीमा कों अकेले छोड़के औऱ किसी फॅमिली मे जाके अपना गृहस्थी कर सकताथीं। मम्मी नें मेरामुह देख केँ उनकासभी सुख ख़ुशी विसर्जन देणे कां फैसला किया थां। नानाजी नानीमा धीरे-धीरे धीरे-धीरे उनकाबात मान नें लगा, पर्र अंदर हि अंदर फ्यूचर कों लेके परेशान थें।
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इसीबीच मे बड़ा होतेरहा। नानाजी नानीमा कों मे बहोत बहोत प्रेम करता थां। उन लोगों सें दूर नहि रह पाता मे। वो लोग मेरी दुनिया बन चुके थें। सबसे ज़ादा प्रेम करता थां मम्मी कों। उनकासभी कुछ मुझे बहोत अच्चा लगता थां। वो जौ कहे, जोँ करे, जोँ खानां बनाये, जौ कपडा ख़रीदे मेरे लिये.सभी.सभी कुछ मुझे अच्चा लगता थां। इतनी अच्छी होने केँ बाद भि उनको ज़िन्दगी बहोत कुछ दिया नहीं.फिन कुछ चीज़ देकेफिन लें भि लिया। हमारे सभी केँ ख्याल रखा, सभी कि जिम्मेदारी उठाना मुझे उनकेलिए एक् अद्भुत प्रेम थां मन मे। मे कभी उनको दुःख न् देणे कि शपथखाई थि मन मे.
नानाजी नानीमा मुझे हमेशा 'तुम्' केह्के बुलाते थें मम्मी भि। मगर मे नानाजी नानीमा कों 'आप्' केह्के बात करता थां। पर्र मां कों हमेशा 'तुम्' हि कहता थां। हम् सभी केँ बीच एक् बॉन्डिंग थां। नानाजी कां घऱ बहुत बड़ा थां। नानाजी नानीमा एक् बड़ा सां रूम मे रहते थें मे मां केँ संग रहता थां दूसरे एक् बड़े कमरे मे। घऱ मे औऱ भि तीनरूम हैं। जोँ खाली पड़े हैं। सामान हैं। पऱ मे जैसे जैसे बड़ा होता गय़ा मेरेलिए एक् स्टडी रूमबना। फिन मे अकेला सोनेलगा। मेरे नानाजी एक् दिन एक् रूम साफ़ सफाई करके औऱ एक् बेडलगा केँ वो रूम मेरेनाम कर दिया। मे बहोत खुश थां। आखिर मेरा भि एक् आइडेंटिटी बनरहा हैं। मे एक् इंडिविजुअल भि बनरहा थां। येसोच केँ अच्चा लगता थां.
मैने विद्यालय मे कुछयार बनाये थें। धीरे-धीरे धीरे-धीरे सेक्स केँ बारे मे जानना, अपोजिट सेक्स केँ प्रति आकर्षित होना.सभी बाकि लड़कों केँ जैसाफील करने लगता थां। उन दोस्तोँ सें मे मुठ मारने केँ बारे मे जानने लगा। अकेले एक् रूम मिलने केँ कारण मे रात कों एकदिन मुठ मारना ट्राई किया। पऱ डरलगा। अगर किसी कों पताचला तोँ। सभीकुछ सोचा, फिन भि उसदिन ट्राई किया औऱ अनाडी जैसा करके ख़तम किया। मुझे इतना अच्चा फील नहि हुआ। पऱ हा.एक् अजीब ख़ुशी केँ एक् फीलिंग्स सें मनभर गय़ा थां। कुछदिन बादफिन किया। पऱ शेम हालत थि। जबयेबात एक् साथी नें सुना उसने मुझे एक् बुक दिया। लगभग एक् महिना होँ चुका पहलामुठ मारेउस दिन बड़ीडर डर केँ वो पुस्तक छुपके घऱ लाया औऱ इंतजार करतेरहा रात कां सभीसो जाने केँ बाद मे कुछनया मेहसुस करने केँ उत्तेजना मे कांपरहा थां। हरदिन केँ तरह मां सोते वक्तआके दूध कां गिलास दिया औऱ खाटठीक करके मेरेपास आई। मे टेबल मे पड़रहा थां। उन्होंने मेरेसर केँ बालों मे हाथ फिराया प्रेम सें मे उनको देखा औऱ वो मुस्कुराके गुड नाईट बोलके चलि गई,। हररोज मुझेइस लम्हा बहोत ख़ुशी औऱ मम्मी केँ प्रति प्रेम अता हैं। पऱ आज एक् अजीब उत्तेजना मेरेबदन मे थां। मे इंतजार कररहा थां कब वो जाये औऱ मे रूमलॉक करू। वो जाने केँ थोडा देरबाद मे रूमलॉक किया औऱ वो पुस्तक निकाला। पुस्तक खोलतेही मेरामुह खुला केँ खुलारह गय़ा। वो एक् फोटोज सें भरीबुक हैं। सेक्स करतेहुए व्यक्ति औऱ महिला केँ फोटो.सभी फॉरेनर्स हैं। पेहली बारये सभीदेख केँ इतना उत्तेजित थां कि जल्द हि मेरा निकल गय़ा.
ऐसेकुछ दिन चलतारहाऔर अलगअलग पुस्तक मिलता रहा.मगर वो इतनारॉ थां औऱ एक् अद्धभुत दुनिया थां कि वो चीज़ सें मन हट्ने लगा.फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे एक् अजीब तरीके सें मन उत्तेजित होना चालू किया। रस्ते मे कोई लड़की देखके याँ बस मे बैठिकोई लड़की केँ फेसदेख केँ रात मे वो सोचता थां औऱ मस्टरबैट करता थां। ऐसा करने मे मन मे एक् अलग ख़ुशी मेहसुस होता थां। जैसे कि कोई अपनासहर कि लडकि, अपना जैसा अट्मॉस्फेरे मे बड़ाहुआ एक् लड़की केँ सरीरसोच केँ औऱ उसकेसंग मिलन केँ दृस्य कल्पना करके मेराकाम चलता थां। सोचता थां कि एकदिन ऐसेही एक् लड़की मेरी पत्नि बनेगी औऱ उसकेसंग मे मनभर केँ सेक्स करूँगा
येसभी केँ बाद भि मेरा पढाई मे कोईकमी नहि थां। मे अच्छे रिजल्ट करकेआगे बढ़ते रहा। एक् रविवार। मे घऱ मे थां। नानाजी नानीमा केँ संगसमय बितारहा थां। मां घऱ केँ काम मे लगीहुए थि नानीमा भि मम्मी कों हेल्प कररहे थि। मे एहिसभी देखरहा थां सोफ़े मे बैठके एक् स्पोर्ट्स मैगज़ीन हाथ मे लेके.उस दिन क्याँ पता क्यूं, मे अजीब नज़रों सें मां कों देखा। शायदये मेरा इतना महीनों केँ हरकतों कां फल थां। पर्र मे जब उनकी गर्दन हिला हिला केँ नानीमा सें बात करतेहुए देखातब मे उनकी कन्धा देखके मन अजीबनशा मे बंद होनेलगा। फिन उनकी ब्लाउज औऱ साड़ी केँ बीच केँ पेट् नज़रआया। मेरानशा लग गय़ा थां। अचानक वो बाथरूम सें पांव धोके केँ निकली। साड़ी थोडा ऊपर करके पकडे थें मुझे उनकी हील्स केँ ऊपर सें ऊँगली तक पूरापेर नज़रआया। सुन्दर गोलगोल हील्स हैं औऱ सुन्दर उंगलियां। एकदम लाइटकलर केँ नेल पोलिश लगाहुआ हैं। मे उनकीफेस नहि देखा.बस येसभी देख केँ नशा होँ गय़ा.
उसरात मे जब मस्टरबैट किया मुझे खाली वो सभी चीज़ नज़र केँ सामने आया। मे बहोत वक्त लेके एक् अजीब अद्भुत नए फीलिंग्स केँ संग किया.ऐसा आज तक नहि हुआ। मुझे ओर्गास्म केँ संग जोँ सटिस्फैक्शन मिला
वो लाइफ मे पहलीबार फीलहुआ। उसरात एक् गहरीनीद आया।
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मैने हमेशा एक् डिफरेंस देखा। मेरे बाकि दोस्तोँ कि मम्मी औऱ मेरी मां मे बहोत अंतर हैं। वो सभी एक् भारी भरकम मां जैसा होता थां, पर्र मेरी मां उन लोगों केँ छोटी बेहन याँ बेटी जैसे लगती थि। एक् तोँ उम्र बहोत कम हैं। संग मे वो देखने मे बहोत सुन्दर थि। उनको रस्ते मे जातेहुए देंखे तोँ कॉलेज कि लड़कियों कि तरह लगती थि। पर्र किसको मालूम कि उनको मेरे जैसा एक् बेटा हैं औऱ उनकी ज़िन्दगी मे एक् भयानक हदसा हौ चुका हैं.
उसरात केँ बादतीन सालबित चुका हैं। मे इंजीनियरिंग मे फर्स्ट इयर मे एडमिशन लें लिया। मेरेरूम मे ब कंप्यूटर आगया हैं। औऱ मेरा बारवी क्लास कां अच्छी रिजल्ट केँ लिए नाना नें मुझे एक् छोटा डिजिटल कैमरा तोहफा किया हैं.
येहसभी चेंजेस सें ज़ादा जोँ चेंजहुआ वो हैं मे स्वयं। मेरा नानाजी नानीमा औऱ मां केँ प्रति मेरा शद्ध भक्ति औऱ प्रेम, पहले जैसा हैं। जौ सभीलोक देखते हैं। पऱ अंदर हि अंदर मेरा मां केँ प्रति एक् दूसरी तरह कां प्रेम मन मे जनम लेँ लिया.कब केसेये सभीहुआ, मुझे भि पता नहि चला। नाहीं कभी किसी कों इस बारे मे पता चलेगा। मे उसको प्रेम सें मेरेमन केँ अंदर केँ कमरे मे छुपा केँ रखा.बीच बीच मे वहां सें निकाल केँ अकेले उसकेसंग मेरा सबसे अच्छा वक्त बिताता हू। औऱ फिन सें वहांरख देताहू। इस्स प्रेम कों मे बयां नहि कर पाऊंगा.
उसरात मेरा मां कां कंधा, पेट् कां हिस्सा औऱ पैरों कों सोच केँ मुझे जौ एक् सटिस्फीएड ओर्गास्म मिला थां उस केँ बाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरेमन मे मम्मी केँ लिए एक् अद्भुत प्रेम जागने लगा। नाकि वो मात्र सेक्स सें सम्बंद्धित हैं,.वो मेरेमन कि ख़ुशी कां सबसे बड़ा आधार हैं.
हां.उस दिन केँ बादआज तक मे जब भि मस्टरबैट किया, मेरे ख़यालों मे मात्र वो हि आति हैं। औऱ कोईकभी एंट्री नहि लें पायाआज तक्। मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे उनकोअलग नज़रियाँ सें देख्ना सुरु किया.पर्र सभी कां नज़र छुपाके, एवं मां कों भि आज तक पता नहि चला। वो आज भि हमेशा केँ तरह सोते वक्त एक् गिलास दूध लेकेआति हैं, खाटठीक करवाके मेरेपास आति हैं औऱ सर केँ बाल पे प्रेम सें उँगलियाँ फ़िराती हैं। औऱ थोडा देरबाद एक् प्यारी सि स्माइल केँ संगगुड नाईट केह्के चली जाती हैं। मे जब उनकोसोच केँ हिलाता हू, तो मेरे तन्नमन एक् नशे मे भर जाता हैं औऱ मुझेसभी सें ज़ादा संतुस्टि मिलति हैं.
मा हमेशा लाइटकलर नेल पोलिश मनपसंद करति हैं। जब भि वो किसीके घऱ विवाह याँ औऱ कोई प्रोग्राम मे जाती थि तो उन्होंने हल्का सां मेकअप लगा लेती थि। हलका लिपस्टिक उनके होठो कों औऱ भि हसीनबना देती थि। मेरेसंग मेरी बड़ी दिदी जैसा लगता थि। औऱ नानाजी नानीमा केँ संग लगता हि नहि थां कि वो उनका बेटी औऱ मे पोता हु.
कुछ दिन पहले तक मे मेरी मम्मी कां हर पिक्चर अपनी ऑखों सें कैद करता थां। उनकी तस्वीरें मात्र मेरीआँख सें हि खीचता थां, उनकी जाने अन्जाने मे तोंर तरीके कि तस्वीर मेरे दिमाग़ मे सेटकर लेता थां। पर्र मुझे कैमरा मिलने केँ बाद मे उस सें फोटो खीचता हू.सभी कां पिक्स लेताहूण। नानाजी नानीमा कां बहोत पिक्स लेता हूं.अन्य वक्त.फिन अन्य तरीके सें। संग मे मम्मी कां भि.डीजीटल कैमेरा होने केँ कारनकभी कभी मां केँ अन्जाने मे उनका बहोत फोटो खिचा। मे सभी फोटोपी। सि मे रखा हैं। पऱ स्पेशल मेरे मां कां सभी फोटो मे एक् सीक्रेट फोल्डर बनाके छुपाके रखा हैं। जौ सिर्फ मेरेलिए हि हैं। उस फोल्डर मे मां कां हर तरीके कां फोटोज हैं। हस्ते हुये, घुस्सेके वक्त, उदासी केँ फोटोस, प्रेम भरी झुकि हुईँ नज़र कां पिक्स, बाते करते वक्त कां पिक्स, काम करतेसमय कां फोटो, मेरेसंग पिक्स हैं जौ नाना क्लिक किया। औऱ बाकिकुछ जॉइंट फोटो सें मात्र मम्मी कां पिक्चर काट केँ अलगकर लिया.ऐसा भराहुआ हैं मेरा पिसी मम्मी कां फोटोज सें। अब मे हररात जब मम्मी दूध कां गिलास देकेचले जाते हैं औऱ सभीसो जाते हैं, मे वो फोल्डर खोल केँ मम्मी कों देखता हूण। उनकाहर अदागौर सें देखता हूण। औऱ एक् ड्रीम्स मे डुब जाताहूण। मां केँ लिए प्रेम उभर केँ आने लगता हैं। तब मे आहिस्ता सें पैंट कां ज़िप निकाल केँ अपना पेनिस निकाल ताहूण। वो अब औऱ भि बड़ा होने लगता हैं। मेरा मुठ्ठी भि कम पडता हैं। अपनी पाँच उँगलियाँ सें उसको टाइट पकडता हूं औऱ मम्मी केँ संग मिलन कां प्यारी दृस्य कल्पना करके धीरे-धीरे धीरे-धीरे हिलाने लगताहूण। अब पहले जैसा अनाडी केँ तरह नहि करताहूण। अपनासुख पाने केँ लिए स्वयं हि सिख गय़ा केसे संतुस्टि मिलती हैं। मेरा पेनिस बहोत मोटा हैं। औऱ उसका अगली पोरशन सबसे ज़ादा मोटा औऱ राउंड शेप कां हैं। सामने कां पोरशन फ्लैट हैं। मेरे देखे हुये बाकि पेनिस कि पिक्टुरेस जैसा अगलाभाग पतलाहोक पॉइंटेड टाइप नहीं। थोडा सां डम्बल केँ किनारे जैसा हैं। लम्बाई नार्मल हैं। जब ओर्गास्म होता हैं तब वो अगलेभाग कां कैप औऱ फूल जाता हैं औऱ मुठ्ठी केँ अंदरआने मे रुक जाता हैं। पऱ मे ओर्गास्म केँ समयअंख बंध करके माँके सरीर केँ अंदर मेरा सीमेन छोड़ने कां सुख प्राप्त करताहूण
मेरा मित्र जब हीतेश कों पुछा थां कि वो इंटरनेट सेक्स मे एडिक्ट हुआ थां क्याँ कभी?उस नें बताया कि उस कों कभी वहां जाने कि जरुरत नहि पडी। वो अपना स्वयं कां क्रिएट कियाहुआ एक् दुनिया बना केँ उस मे हि संतुस्टि प्राप्त करता थां। औऱ क्याँ चाहिए इस केँ अलावा। पऱ हाँ हीतेश नें ये बताया थां कि जब वो अपना नौकरी ज्वाइन किया औऱ उसका विवाह तय हौ गय़ा, तब विवाह कां डेट सें पहले जितना दिन मिला थां, वो सभीदिन वो नेट सें कुछ सेक्स एजुकेशन लिया थां.क्यूं लिया थां। इस बारे मे मे वक्त होने पऱ बताऊंगा।
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