शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी) - desi chudai mom son - Episode 1
प्यारे वाचक मित्रों
सालों पहले लिखीइस जबरदस्त गुजराती कथा कां तर्जुमा पेशकर रहा हूं। आशा हैं कि मेरी अन्य कहानियों कि तरहइस किस्सा कों भि आप् सबका उतना हि स्नेह प्राप्त होगा।
प्रस्तुत हैं "शीला कि लीला(५५ साल कि शीला कि जवानी)
Sheela too land k liye pagal hue jaa rahi h or ab rukhi k kariye uske mard ko fasane wali h ab dekhte h kese yeh rasik ko fasati h or sath me or kis2 ko fasati h apni choot kee agni ko bhujane
शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी) - desi chudai mom son – New Episode
५५साल कि शीला, रात कों १०बजे रसोईघर कि जूठन फेंकने केँ लिए बाहर् निकली। थोड़ीदेर पहले हि बारिश रुकी थि। चारों तरफ पानी केँ पोखरभरे हुए थें। भीनी मिट्टी कि मदमस्त खुशबू सें ठंडा वातावरण बेहद कामुक बना देने वाला थां। दूर कोने मे एक् कुत्तिया। अपनी पुत्ती स्वयं हि चाटरही थि। शीला देखती रह गई.!! वो सोचने लगी कि काश.!! हम् औरतें भि येकाम अगर स्वयं कर पाती तौ कितना अच्छा होता। मेरीतरह लन्ड केँ बिना तड़पती, नं जाने कितनी औरतों कों, इस मदमस्त बारिश केँ मौसम मे, तड़पना नं पड़ता।
वो घऱ पर्र लौटी। औऱ दरवाजा बंद किया। औऱ बैड पर्र लेट गई।
उसका पति दोसाल केँ लिए, कंपनी केँ काम सें विदेश गय़ा थां। औऱ तब सें शीला कि हालत खराब हौ गई थि। वैसे तौ पचपनसाल कि उम्र मे औरतों कों चुदाई कि इतनीभूख नहीं होती। पर्र एकलौती बेटी कि विवाह हौ जाने केँ बाद। दोनों पति पत्नि अकेले सें पड़गए थें। रुपया तोँ बहुत थां। औऱ उसका पति मदन, ५८ साल कि उम्र मे भि। बहुत शौकीन मिजाज थां। रोजरात कों वो शीला कों नंगी करकेअलग अलग आसनों मे भरपूर चोदता। शीला कि उम्र५५ साल कि थि। मेनोपोज़ भि होँ चुका थां। फिन भि साली.कूद कूदकर लन्ड लेती। शीला कां पति मदन, ऐसे अलगअलग प्रयोग करता कि शीला पागल होँ जाती। उनकेघऱ पर्र ब्लू-फिल्म कि डीवीडी कां ढेरपड़ा थां। शीला नें वो सभीदेख रखी थि। उसे अपनीचुत चटवाने कि बेहद ख़्वाहिश होँ रही थि। औऱ मदन कि नामौजूदगी नें उसकी हालत औऱ खराबकर दि थि।
ऊपर सें उस कुत्तीया कों अपनी पुत्ती चाटते देख। उसके पूरे शरीर मे आग सि लग गई।
अपने नाइट ड्रेस केँ गाउन सें। उसने अपने४० इंच केँ साइज़ केँ दोनों बड़ेबड़े गोरे बबले बाहर् निकाले। औऱ अपनी हथेलियों सें निप्पलों कों मसलने लगी। आहहहह.!! अभि मदनयहा होता तौ। अभि मुझ पऱ टूटपड़ा होता। औऱ अपनेहाथ सें मेरीचुत सहलारहा होता। अभि तोँ उसेआने मे औऱ चार महीने बाकी हैं। पिछले २० महीनों सें। शीला केँ भूखे भोसड़े कों किसी पुरुष केँ स्पर्श कि जरूरत थि। पऱ ओहयह समाज औऱ इज्जत केँ जूठे ढकोसले.!! जिनके डर केँ कारण वो अपनी प्यास बुझाने कां कोई औऱ जुगाड़ नहींकर पारही थि।
"ओहमदन। तूँ जल्दआजा। अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे.!!" शीला केँ दिल सें एक् दबी हुई टीस निकली। औऱ उसेमदन कां मदमस्त लोडायाद आँ गय़ा। आजकुछ करना पड़ेगा इस भोसड़े कि आग कां।
शीला उठकरखड़ी हुईँ औऱ रसोई मे गई। फ्रिज खोलकर उसने एक् मोटा ताज़ा बैंगन निकाला। औऱ उसे हि मदन कां लन्ड समझकर अपनीचुत पऱ घिसने लगी। बैंगन मदन केँ लन्ड सें तौ पतला थां। पर्र मस्त लंबा थां। शीला नें बैंगन कों डंठल सें पकड़ा औऱ अपने होंठों पऱ रगड़ने लगी। आँखें बंदकर उसनेमदन केँ सख्त लन्ड कों याद किया औऱ पूरा बैंगन मुंह मे डालकर चूसने लगी। जैसे अपने पति कां लन्ड चूसरही हौ। अपनीलार सें पूरा बैंगन गीलाकर दिया। औऱ अपने भोसड़े मे घुसा दिया। आहहहहहहह। तड़पती हुईँ चुत कों थोड़ा अच्छा लगा।
आज शीला। वासना सें पागल हौ चली थि। वो पूरी नंगी होकर रसोई केँ पीछेबने छोटे सें बगीचे मे आँ गई। रात केँ अंधेरे मे अपने बंगले केँ बगीचे मे अपनी नंगीचुत मे बैंगन घुसेड़कर, स्तनों कों मरोड़ते मसलते हुए घूमने लगी। छिटपुट बारिश शुरुआत हुई औऱ शीलाखुश हौ गई। खड़ेखड़े उसने बैंगन सें मूठ मारते हुए भीगने कां खुशी लिया.मदन केँ लन्ड कि गैरमौजूदगी मे बैंगन सें अपने भोंसड़े कों ठंडा करने कां प्रयत्न करती शीला कि नंगी जवानी पर्र बारिश कां पानी। उसके मदमस्त स्तनों सें होतेहुए। उसकीचुत पऱ टपकरहा थां। विकराल आग कों भि ठंडा करने कां माद्दा रखने वाले बारिश केँ पानी नें, शीला कि आग कों बुझाने केँ बजाए औऱ भड़का दिया। वास्तविक आग पानी सें बुझ जाती हैं पऱ वासना कि आग तोँ ओर प्रज्वलित हौ जाती हैं। शीला बागीचे केँ गीलेघास मे लेटी हुइ थि। बेकाबू होँ चुकीहवस कों मामूली बैंगन सें बुझाने कि निरर्थक कोशिश कररही थि वो। उसे जरूरत थि। एक् मदमस्त मोटे लंबे लन्ड कि। जौ उसके फड़फड़ाते हुए भोसड़े कों बेहद अंदर तक। बच्चेदानी केँ मुख तक धक्के लगाकर, गर्म गर्म वीर्य सें सराबोर करदे। पक-पक पुच-पुच कि आवाज़ केँ संग शीला बैंगन कों अपनीचुत केँ अंदर बाहर् कररही थि। आखिर लन्ड कां काम बैंगन नें कर दिया। शीला कि वासना कि आगबुझ गई। तड़पती हुईँ चुत शांत होँ गई। औऱ वो झड़करवही खुले बगीचे मे नंगीसो गई। रात केँ तीनबजे केँ लगभग उसकीआँख खुली औऱ वो उठकरघऱ केँ अंदरआई। अपने भोसड़े सें उसने पिचका हुआ बैंगन बाहर् निकाला। गीले कपड़े सें चुत कों पोंछा औऱ फिन नंगी हि सो गई।
सुभहजब वो नींद सें जागीतब डोरबेल बजरही थि "दूध वाला रसिक होगा" शीला नें सोचा, इतनी सुभह, ६ बजे औऱ कौन होँ सकता हैं!! शीला नें उठकर दरवाजा खोला। बाहर् तेज बारिश होँ रही थि। दूधवाला रसिक पूरा भीगाहुआ थां। शीलाउसे देखते हि रह गई। कामदेव केँ अवतार जैसा, बलिष्ठ बदन, मजबूत कदकाठी, चौड़े कंधे औऱ पेड़ केँ तने जैसी मोटी जांघें। बड़ीबड़ी मुछों वाला३५ साल कां रसिक। शीला कों देखकर बोला "कैसी हौ भाभीजी?"
गाउन केँ अंदर बिना ब्रा केँ बोबलों कों देखते हुए रसिक एक् लम्हा केँ लिए जैसेभूल हि गय़ा कि वो किसकाम केँ लिएआया थां!! उसके भीगेहुए पतले कॉटन केँ पतलून मे सें उसका लन्ड उभरने लगा जौ शीला कि पारखी नजर सें छिप नहींसका।
"अरे रसिक, तुम् तोँ पूरेभीग चुके हौ। यहींखड़े रहो, मे पोंछने केँ लिए रुमाल लेकरआती हूं। अच्छे सें शरीर पोंछलो वरना झुकाम होँ जाएगा" कहकर अपने कूल्हे मटकाती हुइ शीला रुमाल लेनेचली गई।
"अरे भाभी, रुमाल नहीं चाहिए,। बस एक् बार अपनी बाहों मे जकड़लो मुझे। पूराबदन गर्म होँ जाएगा" अपने लन्ड कों ठीक करतेहुए रसिक नें मन मे सोचा। बहेनचोद सालीइस भाभी केँ एक् बोबले मे ५-५ लीटरदूध भरा होगा। इतनेबड़े हैं। मेरीभेस सें ज़्यादा तौ इस शीला भाभी केँ थनबड़े हैं। एक् बार दुहने कों मिलजाए तौ मज़ा हि आँ जाए।
रसिकघऱ केँ अंदर ड्रॉइंगरूम मे आँ गय़ा औऱ डोरक्लोज़र लगा दरवाजा अपने आप् बंद हौ गय़ा।
शीला नें आकर रसिक कों रुमाल दिया। रसिक अपने कमीज केँ बटन खोलकर रुमाल सें अपनी चौड़ी छाती कों पोंछने लगा। शीला अपनी हथेलियाँ मसलते उसेदेख रही थि। उसके मदमस्त चुचे गाउन केँ ऊपर सें उभरकर दिखरहे थें। उन्हे देखकर रसिक कां लन्ड पतलून मे हि लंबा होताजा रहा थां। रसिक केँ सख्त लन्ड कि साइज़ देखकर। शीला कि पुच्ची बेकाबू होनेलगी। उसने रसिक कों बातों मे उलझाना शुरुआत किया ताकि वो ओर वक़्त तक उसके लन्ड कों तांकसके।
"इतनी सुभह जागकर घऱघऱदूध देने जाता हैं। थक जाता होगा। हैं नां!!" शीला नें कहा
"थक तौ जाता हूं, पऱ क्याँ करूँ, काम हैं करना तौ पड़ता हि हैं। आप् जैसेकुछ अच्छे लोग कों हि हमारी कदर हैं। बाकीसभी तोँ। खैर जानेदो" रसिक नें कहा। रसिक कि नजर शीला केँ बोबलों पर्र चिपकी हुईँ थि। ये शीला भि जानती थि। उसकीनजर रसिक केँ खूँटे जैसे लन्ड पर्र थि।
शीला नें पिछले २० महीनों सें। तड़पतड़प कर.मूठ मारकर अपनी इज्जत कों संभाले रखा थां। पऱ आज रसिक केँ लन्ड कों देखकर वो उत्तेजित हथनी कि तरह गुर्राने लगी थि।
"तेरीठंड लगरही हैं शायद.रुक मे गरमचाय बनाकर लाती हूं" शीला नें कहा
"अरे रहने दीजिए भाभी, मे आपकीगरम चाय पीने रुका तोँ बाकी सारे घरों कि गरमचाय नहीं बनेगी। अभि बहुत घरों मे दूध देने जानां हैं" रसिक नें कहा
फिन रसिक नें पूछा "भाभी, एक् बात पूछूँ? आप् दोसाल सें अकेले रहरही हौ। भैया तौ हैं नहीं। आपकोडर नहीं लगता?"ये कहतेहुए उस चूतिये नें अपने लन्ड पऱ हाथफेर दिया
रसिक केँ कहने कां मतलबसमझ न् पाए उतनी भोली तौ थि नहीं शीला!!
"अकेले अकेले डर तौ बहुत लगता हैं रसिक। पर्र मेरेलिए अपना घऱ-बार छोड़कर रोजरात कों संग सोने आएगा!!" दुःखी होकर शीला नें कहा
"चलिए भाभी, मे अब चलता हूं। देर होँ गई। आप् मेरेफोन मे अपना नंबरलिख दीजिए। कभीअगर दूध देने मे देर हौ तौ आप् कों मोबाइल करबता सकूँ"
तिरछी नजर सें रसिक केँ लन्ड कों घूरते हुए शीला नें चुपचाप रसिक केँ फोन मे अपना नंबर स्टोर कर दिया।
"आपकेपास तौ मेरा नंबर हैं हि। कभी बिनाकाम केँ भि मोबाइल करते रहना। मुझे अच्छा लगेगा" रसिक नें कहा
शीला कों पताचल गय़ा कि वो उसे दानेडाल रहा थां
"चलता हूं भाभी" रसिक मुड़कर दरवाजा खोलते हुए बोला
उसके जाते हि दरवाजा बंद होँ गय़ा। शीला दरवाजे सें लिपटपड़ी, औऱ अपने स्तनों कों दरवाजे पऱ रगड़ने लगी। जिस रुमाल सें रसिक नें अपनी छाती पोंछी थि उसमे सें आती मर्दाना महक कों सूंघकर उस रुमाल कों अपने भोसड़े पर्र रगड़ते हुए शीला सिसकने लगी।
कवि कालिदास नें अभिज्ञान शाकुंतल औऱ मेघदूत मे जैसे वर्णन किया हैं बिल्कुल उसी प्रकार। शीलाइस बारिश केँ मौसम मे कामातुर होँ गई थि। दूध गर्म करने केँ लिए वोँ रसोई मे आई औऱ फिन उसने फ्रिज मे सें एक् मोटा गाजर निकाला। दूध कों गर्म करनेगेस पर्र चढ़ाया। औऱ फिन अपने तड़पते भोसड़े मे गाजर घुसेड़कर अंदर बाहर् करनेलगी।
रूम केँ अंदर बहुत गर्मी हौ रही थि। शीला नें एक् खिड़की खोल दि। खिड़की सें आती ठंडीहवा उसके जिस्म कों शीतलता प्रदान कररही थि औऱ गाजर उसकीचुत कों ठंडाकर रहा थां। खिड़की मे सें उसने बाहर् सड़क कि ओर देखा। सामने हि एक् कुत्तीया केँ पीछे १०-१२ कुत्ते, उसे चोदने कि फिराक मे पागल होकरआगे पीछेदौड़ रहे थें।
शीलामन मे हि सोचने लगी "बहनचोद। पूरी दुनिया चुत केँ पीछे भागती हैं। औऱ यहा मे एक् लन्ड कों तरसरही हूं"
सांड केँ लन्ड जैसा मोटा गाजर उसने पूरा अंदर तक घुसा दिया। उसके मम्मे ऐसे दर्दकर रहे थें जैसे उनमेदूध भर गय़ा होँ। भारी भारी सें लगते थें। उस वक़्त शीला इतनी गर्म हौ गई कि उसकामन कररहा थां कि गैस केँ लाइटर कों अपनी पुच्ची मे डालकर स्पार्क करें।
शीला नें अपने सख्त गोभी जैसे मम्मे गाउन केँ बाहर् निकाले। औऱ रसोई केँ प्लेटफ़ॉर्म पर्र उन्हे रगड़ने लगी। रसिक कि बालों वाली छाती उसकीनजर सें हट हि नहींरही थि। आखिरदूध कि पतीली औऱ शीला केँ भोसड़े मे एक् संग उबालआया। फरक केवल इतना थां कि दूध गर्म होँ गय़ा थां औऱ शीला कि चुत ठंडी होँ गई थि।
रोजमर्रा केँ कामों सें निपटकर, शीला गुलाबी साड़ी मे सजधजकर सब्जी लेने केँ लिए बाजार कि ओर निकली। टाइट ब्लाउस मे उसकेबड़े बड़े मम्मों, हरकदम केँ संग उछलते थें। आते जातेलोग उन मादक चूचियों कों देखकर अपना लन्ड ठीक करनेलग जाते। उसके मदमस्त कूल्हे, राजपुरी आम जैसे बबले। औऱ थिरकती चाल।
एक् जवान सब्जी वाले केँ सामने उकड़ूँ बैठकर वो सब्जी देखने लगी। शीला केँ पैरों कि गोरी गोरी पिंडियाँ देखकर सब्जीवाला स्तब्ध रह गय़ा। घुटनों केँ दबाव केँ कारण शीला कि बड़ी चूचियाँ ब्लाउस सें उभरकर बाहर् झाँकने लगी थि।
शीला कां ये बेनमून खूबसूरती देखकर सब्जीवाला कुछ पलों केँ लिए, अपने आप् कों औऱ अपने धंधे तक कों भूल गय़ा।
शीला केँ दो बबलों कों बीचबनी खाई कों देखकर सब्जीवाले कां छिपकली जैसा लन्ड एक् लम्हा मे शक्करकंद जैसाबन गय़ा औऱ एक् मिनटबाद मोटी ककड़ी जैसा!!!
"मुली कां क्याँ भाव हैं?" शीला नें पूछा
"एक् किलो केँ ४० रूपीए"
"ठीक हैं। मोटी मोटी मुली निकालकर दे मुझे। एक् किलो" शीला नें कहा
"मोटी मुली क्यूं? पतली वाली ज़्यादा मज़ेदार होती हैं" सब्जीवाले नें ज्ञान दिया
"तुझेही जितना कहा गय़ा उतनाकर। मुझे मोटी औऱ लंबी मुली हि चाहिए" शीला नें कहा
"क्यूं? खानां भि हैं याँ किसीओर काम केँ लिए चाहिए?"
शीला नें जवाब नहीं दिया तौ सब्जीवाले कों ओरजोश चढ़ा
"मुली सें तौ जलन होगी। आप् गाजर लेँ लो"
"नहीं चाहिए मुझे गाजर.यह लें पैसे" शीला नें थोड़े गुस्से केँ संगउसे १०० कां नोट दिया
बाकी खुले पैसे वापिस लौटाते टाइमउस सब्जीवाले नें शीला कि कोमल हथेलियों पर्र हाथफेर लिया औऱ बोला "औऱ क्याँ सेवाकर सकता हूं भाभीजी?"
उसकीओर गुस्से सें घूरते हुए शीलावहा सें चल दि। उसकीबात वो भलीभाँति समझ सकती थि। पर्र क्यूं बेकार मे ऐसे लोगों सें उलझे.ऐसा सोचकर वो किराने कि दुकान केँ ओर गई।
बाकी सामान खरीदकर वो रिक्शा मे घऱआने कों निकली। रिक्शा वाला हरामी भि मिरर कों शीला केँ स्तनों पऱ सेटकर देखते देखते। औऱ मन हि मन मे चूसते चूसते। ऑटोचला रहा थां।
एक् तरफघऱ पऱ पति कि गैरहाजरी, दूसरी तरफ बाहर् केँ लोगों कि हलकट नजरें। तीसरी तरफ भोसड़े मे होँ रही खुजली तौ चौथीतरफ समाज कां डर। परेशान होँ गई थि शीला!!
घऱ आकर वो लाश कि तरहखाट पर्र गिरी। उसकी छाती सें साड़ी कां पल्लू सरक गय़ा। यौवन केँ दो शिखरों जैसे उत्तुंग बूब्ज़। शीला कि हर सांस केँ संगऊपर नीचे होँ रहे थें। लेटे लेटे वो सोचरही थि "बहनचोद, इन माँस केँ गोलों मे भला कुदरत नें ऐसा क्याँ चमत्कार किया हैं कि जौ भि देखता हैं बस देखता हि रह जाता हैं!!" फिन वो सोचने लगी कि वैसे तौ मर्द केँ लन्ड मे भि ऐसा कौनसा चाँदलगा होता हैं, जौ औरतें देखते हि पानी पानी होँ जाती हैं!!
शीला कों अपने पति मदन केँ लन्ड कि याद आँ गई। ८इंच कां। मोटे गाजर जैसा। ओहहह। ईशशश। शीला नें इतनी गहरी सांसली कि उसकी चूचियों केँ दबाव सें ब्लाउस कां हुक हि टूट गय़ा।
कुदरत नें मर्दों कों लन्ड देकर, महिलाओं कों उनका ग़ुलाम बना दिया। पूरा जिंदगी। उस लन्ड केँ धक्के खा खाकर अपने पति औऱ परिवार कों संभालती हैं। पूरादिन घऱ कां कामकर थक केँ चूर होँ चुकी महिला कों जब उसका पति, मजबूत लन्ड सें धमाधम चोदता हैं तौ महिला केँ जनमजनम कि थकानउतर जाती हैं। औऱ दूसरे दिन कि महेनत केँ लिए रेडी होँ जाती हैं।
शीला नें ब्लाउस केँ बाकी केँ हुक भि खोलदिए। अपने बूब्ज़ केँ बीच कि कातिल चिकनी खाई कों देखकर उसेयाद आँ गय़ा कि केसेमदन उसकेदो बबलों केँ बीच मे लन्ड घुसाकर बूब्ज़-चुदाई करता थां। शीला सें अबरहा नहीं गय़ा। घाघरा ऊपरकर उसने अपनीभोस पऱ हाथ फेरा.रस सें भीग चुकी थि उसकीचुत। अभि अगरकोई मिलजाए तौ। एक् हि झटके मे पूरा लन्ड अंदरउतर जाए। इतना गीला थां उसका भोसड़ा। चुत केँ दोनों होंठ फूलकर कचौड़ी जैसेबन चुके थें।
शीला नें चुत केँ होंठों पर्र छोटी सि चिमटी काटी। दर्द तौ हुआ पर्र मज़ा भि आया.इसी दर्द मे तोँ स्वर्गिक मजा छुपा थां। वो उन पंखुड़ियों कों औऱ मसलने लगी। जितना मसलती उतनी हि उसकीआग औऱ भड़कने लगी। "ऊईईई मम्मी। " शीला केँ मुंह सें कराह निकल गई। ओह। कहीं सें अगर एक् लन्ड कां बंदोबस्त होँ जाए तौ कितना अच्छा होगा। एक् सख्त लन्ड कि चाह मे वो तड़पने लगी। थैली सें उसने एक् मस्त मोटी मुली निकाली औऱ उस मुली सें अपनीचुत कों थपथपाया। एक् हाथ सें भगोष्ठ केँ साथ खेलते हुए दूसरे हाथ मे पकड़ी हुई मुली कों वो अपनेछेद पऱ रगड़रही थि। भोसड़े कि गर्मी औऱ बर्दाश्त नं होने पऱ, उसने अपनी गांड कि नीचे तकिया सटाया औऱ उसगधे केँ लन्ड जैसी मुली कों अपनीचुत केँ अंदर घुसा दिया।
करीब-करीब १०इंच लंबी मुलीचुत केँ अंदरजा चुकी थि। अब वो पूरेजोश केँ संग मुली कों अपने योनिमार्ग मे रगड़ने लगी.५ मिनट केँ भीषण मुली-मैथुन केँ बाद शीला कां भोसड़ा ठंडाहुआ। शीला कि छाती तेजी सें ऊपर नीचे होँ रही थि। सांसें नॉर्मल होने केँ बाद उसने मुली बहार निकाली। उसकेचुत रस सें पूरी मुलीसन चुकी थि। उस प्यारी सि मुली कों शीला नें अपनी छाती सें लगा लिया.बड़ा मज़ा दिया थां उस मुली नें! मुली कि मोटाई नें आज तृप्त कर दिया शीला कों!!
मुली पर्र लगे चिपचिपे चुत-रस कों वो चाटने लगी। थोड़ा सां रस लेकर अपनी निप्पल पर्र भि लगाया। औऱ मुली कों चाटचाट करसाफ कर दिया।
अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकीचुत मे जलन होने शुरुआत हौ गई। शीला नें चूतड़ों केँ नीचेसटे तकिये कों निकाल लिया औऱ दोनों जांघें रगड़ती हुईँ तड़पने लगी."मर गई!!! बाप रे!! बहोत जलरहा हैं अंदर."जलन बढ़ती हि गई। उस मुली कां तीखापन पूरीचुत मे फैल चुका थां। वो जल्दी उठी औऱ भागकर रसोई मे गई। फ्रिज मे सें दूध कि मलाई निकालकर अपनीचुत मे अंदर तक मल दि शीला नें। !! ठंडी ठंडीदूध कि मलाई सें उसकीचुत कों थोड़ा सां आराम मिला। औऱ जलन धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम होनेलगी। शीलाअब दोबारा कभी मुली कों अपनीचुत केँ इर्द गिर्द भि भटकने नहीं देगी.जान हि निकल गई आज तोँ!!
साम तक चुत मे हल्की हल्की जलन होती हि रही। बहनचोद। लन्ड नहींमिल रहातभी इन गाजर मूलियों कां सहारा लेनापड़ रहा हैं.!! मादरचोद मदन। हरामी। अपना लन्ड यहा छोड़कर गय़ा होता तोँ अच्छा होता। शीला परेशान हौ गई थि। अबइस उम्र मे कीसे पटाए??
शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी) - desi chudai mom son – New Episode
New kahani updated
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