चढ़ती जवानी की अंगड़ाई - pani chhutna - Complete Kahani All Parts
नमस्ते दोस्तों आप् सब पाठकगण कां ढेर सारा प्रेम मुझे बार-बार नहि कहानियां लिखने कों प्रेरित करता हैं। ऐसे हि मे एक् स्टोरी कों फिन सें लिखने जारहा हूं जोँ आप् लोगों कों उम्मीद हैं कि बेहद मनपसंद आएगी,,,,,
ये कथा पूरीतरह सें काल्पनिक हैं,,,,,, इसकेसब पात्र भि पूरीतरह सें काल्पनिक हैं,,,,,,
ये स्टोरी एक् लड़की केँ इर्द-गिर्द हि घूमती रहती हैं जिसका नाम पूनम हैं।
1,,,, रामदेवी,,,,, पूनम कि मां हैं,, जौकी दिखने मे ठीक-ठाक हि हैं,,,, भराहुआ शरीरबस थोडा सां मोटी हैं बाकीइस उम्र मे भि मर्दों केँ पानी निकालने मे पूरीतरह सें सक्षम हैं। मर्दों कों आकर्षित करने लायक बड़ी बड़ीगोल चूचियां हांबस थोडा सां लटक सि गई हैं,,,,, बड़ी बड़ी गांड जौ कि हमेशा थिरकते रहती हैं।
2,,,,, संध्या,,,,, पूनम कि छोटी चाची,,,,, बेहद सुंदर एकदम सफ़ेद रंगलाल लालहॉठ,,, तनी हुइ चुचीयां औऱ उभरी हुई भरावदार गांड जिसे देखते हि सभी कां लन्ड खड़ा होँ जाता थां।
3,,,,, रितु चाची ये पूनम कि सबसे छोटी चाची थि। एकदम मॉर्डन टाइप कि उसके जिस्म पऱ चर्बी कां कहीं भि नामोनिशान नहि थां,,,, कपड़े भि एकदम स्टाइलिस पहनती थि।
4,,,,,, सुजाता,,,,,, ये पूनम कि फूफी थि जोँ कि उम्र मे पूनम सें बस 5 साल हि बड़ी थि,,,, अभि तक विवाह नहि हुईँ थि मगर विवाह कि बातचल रही थि,,,,, सुजाता चुदास सें भरी हुइ थि मगर अभि तक उसने अपनी चूत मे लन्ड डलवाकर उसका,,, अपनी जवानी कां उद्घाटन नहि करवाई थि।
इस किस्सा केँ कुछ मुख्य किरदारो कां उल्लेख यहां हौ चुका हैं मगर अभि भि बहोत सें किरदार आने बाकी हैं इसलिये उन कीरदारों सें किस्सा केँ अंतर्गत हि मुखातिब होँ पाएगे,,,,,
अबकथा कां भाग जल्द हि देने कि पूरी कोशिश करुंगा पऱ मुझे उम्मीद हैं कि आप् लोग अपने कमेंट सें मेरीइस स्टोरी कों भि जबरदस्त रिस्पांस देंगे।
शुक्रिया।
ये स्टोरी हे एक् छोटे सें देहात कि देहात ज़्यादा भि छोटा नहि थां सुख सुविधाओं केँ सारे सामान उस देहात मे मौजूद थें।
पंछियों नें कलर मचाना शुरुकर दिया थां,,,, पंछियों कि सु मधुर आवाज़ सें देहात कि सुभह कां नजारा औऱ भि ज़्यादा बेहतर हौ गय़ा थां। पक्षियों कि आवाज़ औऱ मुर्गे कि बांग कि आवाज़ सुनते हि देहात केँ लोग आरामसे कर केँ खाट छोड़ना शुरुआत होँ जाते थें,,,,, सूरज कि पहली किरण धरती पर्र पड़ते हि करीब-करीब पूरा देहात आलस मरोड़ कर अपने अपने कामकाज मे लग जाया करता थां,,,, औऱ यही उनकी दिनचर्या भि होती थि ऐसे हि रोज कि हि तरहरमा देवी अपने कमरे सें बाहर् आतेहुए,,,,, अपनी बेटी कों जोरजोर सें आवाज़ लगाकर बुलाने लगी,,,,,
पूनम,,,,,,,, ओ पूनम,,,,,,,, अरे धूप निकलने कों आई हैं औऱ ये लड़की हैं कि अभि तक सोरही हैं,,,,,, नाँ जानेइसे कब अक्ल आएगी इतनी बड़ी हौ गई हैं मगर किसी भि प्रकार कि जिम्मेदारी कां एहसास नहि हैं,,,,।
( रमा देवी कों इसतरह सें रोज कि हि तरह चिल्लाते देखकर संध्या जोकि पूनम कि चाची थि वो झाड़ू लगाते लगाते,, बोलि,, घऱ बहोत बड़ा थां घऱ मे सभी केँ अलग-अलग कमरेबने हुए थें मेहमान केँ लिए भि अलगरूम बनाहुआ थां औऱ घऱ कां आंगन भि बहुत बड़ा थां जिसमें रोजसाफ सफाई करके झाड़ू लगाना पड़ता थां औऱ ज़्यादा तरयेकाम संध्या हि करतीे थि। आंगन केँ चारों तरफ दीवार खड़ी करके एक् घेरा सां बनाया हुआ थां। आंगन केँ सामने हि बड़ा सां तबेला बनाहुआ थां जिसमें गाय भैंस बंधी हुइ थि। संध्या झाड़ू लगाते लगाते बोलीं)
क्याँ दिदी आप् भि सुभह-सुभह नन्हीं सि जान पर्र इतनाबरस रही हैं।
नन्ही सि जान नहि वो तों शैतान कि नानीमा हैं। विद्यालय जानां हैं सूरज निकल गय़ा मगरये लड़की अभि तक उठी नहि हैं।
( रमा क्रोध दिखाते हुए बोलीं औऱ रमा कि बात सुनकर संध्या मुस्कुराते हुए बोलीं,,,, )
दिदी बेवजह आप् परेशान हौ रही हें पूनम तोँ नं जानेकब सें उठ चुकी हैं औऱ इस टाइम करीबनहा रही होगी,,,,,,
( संध्या कि बात सुनकर रमा देवी कों थोडा चैन मिला औऱ वो चिंता केँ भाव दर्शाते हुए संध्या सें बोलीं,,, )
संध्या तुँ भि उसकोकुछ सिखाओ वरना अभि भि वो बच्चों जैसा हि व्यवहार करती हैं मेरी तौ एक् नहि सुनती तुम्हारी हि बात मानती हैं इसलिये थोडा-बहोत उसे डांटा फटकारा करो,,,
दिदी आप् बिल्कुल चिंता मत कीजिए पूनम मेरी बेटी जैसी हैं औऱ मुझे अच्छे सें पता हैं कि उसे केसे संभालना हैं आप् जाइएवहं अपने वक्त पऱ हि सजधजकर होँ जाएगी,,,,,
( रामादेवी संध्या कि बात सुनकर आश्वस्त होँ करचली गई,,,, संध्या पूनम कि बड़ी चाची थि जौ कि चाची कां एक् यार कि तरह अधिक रहती थि बेहद हसीनगोल मटोल चेहरा बड़ी बड़ी आंखें गुलाबी होठ,, सुभह सुभह उठने कि वजह सें बाल थोड़े अस्त व्यस्त थें जोँ कि बालों कि लटे चेहरे पऱ आती थि जिसकी वजह सें संध्या कि हुस्न मे चार चांदलग जाते थें। बड़ी बड़ी चूचियां जोकी ब्लाउज मे शमा नहि पाती थि औऱ बैठकर झाड़ू लगाने कि वजह सें मम्मों कां आधे सें भि ज़्यादा भागसाफ तौर पऱ नजरआता थां। ब्लाउज केँ दोबटन खुलेहुए थें जाहिर थां कि रात मे संध्या केँ पति नें संध्या केँ ब्लाउज खोलकर उसकी बड़ी बड़ी चूचियो कों मुंह मे भरकर पिया होगा,,, औऱ जीभरकर दोनों खरबूजे सें खेलकर निश्चित तौर पऱ उसकी जमकर चुदाई भि कि होगी,, क्योंकि संध्या चलते टाइम थोडा लंगड़ा करचलरही थि ऐसातभी होता थां जबरात भर संध्या अपने पति सें चुदवाती थि। वैसे भि घऱ कां साराकाम काज करतेहुए संध्या थक जाती थि मगररात कों अपने पति केँ संग चुदवा कर अपनी सारी थकान मिटा लेतीे थि। सुभहकाम करने कि जल्दबाजी मे शायद वो ठीक सें अपने ब्लाउज केँ बटनबंद करना हि भूल गई थि इसलिये उपर केँ दोबटन खुलेरह गए थें,,, जिसमें सें संध्या केँ दोनों कबूतर फड़फड़ाते हुएनजर आँ रहे थें। संध्या अधिकांश तौर पर्र बैठे-बैठे हि झाडू लगाया करती थि जब जल्द झाड़ू लगाते हुएआगे पाव करकेआगे कि तरफ बढ़ती थि तोँ उसका पिछवाड़ा,,,, कुछ अधिक हि बाहर् कि तरफ निकलकर उभर जाता थां,,, औऱ देखने वालों कि तौ सांस हि फंस जाती थि। कुल मिलाकर संध्या केँ शरीर मे जवानी कूटकूट करभरी हुई थि।
रमा देवी कां पूनम केँ प्रति चिंतित रहना लाजमी थां क्योंकि वो अक्सर अपनी जिम्मेदारियों केँ प्रति लापरवाह हि नजरआती थि उसके विद्यालय कां वक्त हौ रहा थां मगरइस वक्त वो बाथरुम मे थि। बाथरूम मे घुसते हि वो दरवाजे कि कड़ी लगाकर दरवाजे कों बंदकर ली,,,।
पूनम नहाने केँ लिए बाथरुम मे प्रवेश कर केँ अंदर सें बाथरूम कि कड़ीलगा दि,,,, वो मन हि मन मे कोई प्यारा सां गीत गुनगुनाते हुए अपनेगले पर्र सें दुपट्टा उतारकर पास मे हि डोरी पऱ लटका दि,,,, वाउ दुपट्टा दूरी पर्र लटकाने केँ बाद अपनी ड्रेस कों नीचे सें ऊपर कि तरफ लेँ जातेहुए इतनी गोरी गोरी बाहों मे सें होतेहुए ड्रेस कों भि निकाल दि। उसे अच्छी तरह सें मालूम थां कि उस विद्यालय जाने केँ लिएउसे देरी हौ रही हैं इसलिये जल्द-जल्द अपनी ब्रा केँ हुक कों भि अपनेहाथ कों पीछे कि तरफ नाँ करखोल दि औऱ अगले हि लम्हा ब्रा कों भि अपने जिस्म सें अलगकर दि,,,,, ब्रा केँ अलग होते हि उसके छोटे छोटे नारंगी अपने पूरबहार मौसम कों दिखाने लगे थें,,, ऊसकीे छोटी-छोटी औऱ गोल नारंगीयो कों देखकर साफ मालूम पड़रहा थां कि पूनम केँ शरीर मे अब जवानी चिकोटी काटने लगी थि। कब उसने सलवार कि डोरी कों खोलकर सलवार कों उतार फेंकी पता हि नहि चला,,, उसके जिस्म पर्र सिर्फ अब पेंटिं रह गई थि,,, जिसे अगले हि लम्हा उंगलियों कां सहारा लेकर आहिस्ता सरकाते हुए अपनी लंबी गोरी टांग सें बाहर् निकाल फेंकी,,,,। इस वक्त बाथरूम मे वो संपूर्ण रूप सें निर्वस्त्र होँ गई थि,,,, वैसे तौ वो जब भि कुएं याँ हेडपंप पर्र नहाती थि तौ पूरीतरह सें अपने कपड़े नहि निकालती थि मगरजब भि वो बाथरूम मे नहाती थि तब एकदम नंगी होकर हि नहाती थि। इसतरह सें उसे नहाने मे बेहद आनंद भि आता थां क्योंकि बाथरूम केँ अंदर पूरीतरह सें नंगी होकर नहाने मे वो अपने शरीर केँ कोने कोने पर्र साबुन लगाकर नहा पाती थि। इसलिये उसे नहाने मे संपूर्ण संतुष्टि कां एहसास होता थां।
पूनम अपने सारे कपड़े उतारकर नहाना शुरुआत कर दि ठंडा पानी उसके जिस्म पऱ पड़ते हीैं उसका शरीर पूरीतरह सें गनगना जारहा थां। मगर ठंडे पानी मे नहाने कां चैन; वो अपने जिस्म मे पूरीतरह सें अनुभव करती थि। ठंडा पानी उसकेसिर पऱ पड़कर नीचे कि तरफ किसी मोतियों कि तरह फिसलते हुएजा रहा थां,,,, उसकीगोल गोल चूचियों सें होकर केँ ऊसके चिकने सपाटपेट सें होकर केँ नाभी सें गुजरकर पूनम कि चिकनी जांघों केँ बीच सें उस पतली सि दरार सें होकर नीचे कि तरफगिर रही थि। ये नजारा सामान्य नहि थां बल्कि बड़ा हि उन्मादक औऱ कामोतेजक थां। पूनम केँ लिए तौ इसतरह सें नहाना बेहद सामान्य सि बात थि मगर पूनम कों इसतरह सें नहाते हुए किसी कां देख लेना हि उसकी जीवन कां बड़ा हि अमूल्य औऱ उत्तेजक क्षण होगा। वैसे भि अक्सर लड़के जोँ व्यक्ति लड़कियों औऱ औरतों केँ अंगों कों देखने कां बहाने हि ढूंढते रहते हें औऱ ऐसे मे अगर उनके सामने उनकी नजरों केँ सामने पूनम जैसी सुंदर लड़की संपूर्ण निर्वस्त्र अवस्था मे,,, जोकि एकदम गोरी हसीन चिकने शरीर वाली,,, औऱ मर्दों कि कामोत्तेजना कां सबसे उत्तेजक प्रसार बिंदु उसकी दोनों गोलाइयां अपना संपूर्ण रूपलिए नजर आँ रही हौ, औऱ नितंब जोँ कि ऐसालगे कि कुदरत नें स्वयं किसी कैनवास पऱ अपनी जादुई पींछी सें अंगों कों ऊभारकर करउस मे रंगभरे हौ,, जिसके शरीर कां हर कटाव एक् अलग हि परिभाषा लिखता हौ ऐसी लड़की कों देखकर किसी भि मर्द कां मनडोल जाए औऱ देखने भर केवल सें हि कब उसका मर्दाना अंग ऊथनात्मक स्थिति मे आकरकब पानी छोड़दे शायद उसको भि पता नाँ चले,,,, पूनम अद्भुत हुस्न कां खजाना थि।
देखते हि देखते उसने स्नान करली,,,, औऱ नहाने केँ बाद जैसे हि उसने टॉवल लेने केँ लिएहाथ बढ़ाई तोँ उसे ज्ञात हुआ कि उसने तौ बाथरूम मे टॉवर लाना हि भूल गई थि।.
जवानी सें भरपूर औऱ मदमस्त जवानी कि अंगड़ाई भर्ती हुई पूनम.
Bathrum ke andar poonam apne kapde utarte huye।
very nice start. Brother, let a low class old and ugly male house servant seduce the female members of this family and make them his personal whores.
चढ़ती जवानी की अंगड़ाई - pani chhutna – New Episode
अपनीइस गलती पर्र उसेफिन सें क्रोध आया क्योंकि ऐसी गलती अक्सर वो बारबार करती थि। पहले कि हि तरह उसनें धीरे-धीरे सें बाथरूम कां दरवाजा केवल इतनाभर खोली कि उसका चेहरा दिखाई दे,,,,, औऱ फिनआदत केँ अनुसार अपनी छोटी वाली चाची कों आवाज़ लगाने लगी जोँ कि किचनघऱ मे गरमचाय बनारही थि पूनम कि आवाज़ सुनते हि वो समझ गई कि आजफिन सें वो बाथरुम मे टावल लेँ जानां भूल गई हैं। अक्सर वो पूनम कों टावलदे दिया करती थि मगरआज उसकेमन मे कुछ औऱ चलरहा थां औऱ वो मुस्कुरा कर किचनघऱ सें बाहर् आई। वो आकर बाथरूम केँ दरवाजे पर्र खड़ी होँ गई जिसमें सें पूनम मात्र अपना चेहरा भर दिखारही थि अपनी चाची कों देखते हि वो बोलि।
प्लीज प्लीज प्लीज,,,,, चाची मुझे टॉवेल देदो मुझे विद्यालय जाने मे बहोत देर हौ रही हैं।
नहि आज तोँ मे तुम्हें बिल्कुल भि टॉवल नहि दूंगी तुम्हारी येरोज कि आदत होँ गई हैं। ( इतना कहने केँ संग हि वो बाकी लोगों कों भि आवाज़ देकर बुलाने लगी। )
संध्या दिदी जल्दआओ सुजाता देखो तोँ सहीअगर तुम्हें आज असली फिल्म देखनी हैं तोँ जल्द आँ जाओ,,,,,, आज बहोत हि बेहतरीन फिल्म देखने कों मिलेगी,,,,,,
( अपनीऋतु चाची कि बात सुनते हि पूनम केँ चेहरे पर्र बनावटी क्रोध नजरआने लगा,,, औऱ दूसरी तरफ रितु कि आवाज़ सुनकर संध्या औऱ सुजाता भि आँ गई बाथरूम कां दृश्य देखकर उन लोगों कों समझते देर नहि लगी कीयहां क्याँ चलरहा हैं। अपनी जेठानी औऱ ननदी कों वहांआया देखकर रितु बोलि। )
दिदी आज देख्ना तुम्हें असली फिल्म देखने कों मिलेगी आज पूनमफिन सें बाथरुम मे टावल लेँ जानां भूल गई हैं। औऱ आज पूनमखोल हम् लोगों कों अपने नंगे जिस्म कां दर्शन कराएगी। ( अपने रीति चाची कि बात सुनकर पूनम कों क्रोध आनेलगा वो जानती थि कि आजयेलोग आनंद लेना चाहते हें औऱ उसे विद्यालय जाने केँ लिएदेर भि हौ रहा थां,,, इसलिये वहांऋतु चाची कों छोड़कर अपनी संध्या चाची सें बोलि। )
प्लीज चाची आप् देदो नाँ मुझे बहोत देर होँ रही हैं मजाक कां वक़्त नहि हैं।
( पूनम कि बात सुनकर संध्या मुस्कुराते हुए बोलीं। )
नहि पूनमआज तौ हम् लोग तुम्हारी एक् भि नहि सुनने वाले औऱ नां हि तुम्हारी कोई सहायता करने वाले हें।
क्याँ चाची आप् भि,,,,, ( पूनम बाथरूम केँ दरवाजे मे सें हल्का सां अपना चेहरा बाहर् निकाल कर औऱ बड़े हि मासूम बनकर पत्नि संध्या चाची सें बोलि,,,, मगर उसकेइस मासूम पन कां किसी पऱ भि कोईअसर नहि हुआ औऱ उसकी संध्या चाची बोलीं। )
नहि पूनमआज तुम्हारे किसी भि बात कां हम् पऱ कोईअसर होने वाला नहि हैं भलाईइसी मे हैं कि आज तुम् अपने नंगेपंन कां दर्शन हमेंकरा हि दो हम् भि तोँ देखें कि तुम् जितनी बाहर् सें सुंदर लगती हौ अंदर सें कितनी हसीन दीखती होँ।,,,,,
क्याँ चाची आप् लोग भि,,,, क्याँ तुम्हें अच्छा लगेगा अगर तुम् मुझेऐसी हालत मे देखोगी तोँ,,,,,
हां मेरी रानी बिटिया हमें अच्छा लगेगा अब बिल्कुल भि देरमत करो औऱ बाहर् आँ जाओ हम् लोग भि तरसगए हें तुम्हें नंगी देखने केँ लिए तुम्हारे सुंदर भरावदार नितंब कों देखने केँ लिए।।
( पूनम कों विद्यालय जाने केँ लिएदेर होँ रहा थां किसी भि वक़्त उसकी सहेलियां घऱ पर्र आँ सकती थि औऱ जिसतरह कि जीदआज उसकी दोनों चाची कों नहि लगारखी थि उन्हीं केँ सू्र मे उसकी सुजाता फूफी भि सुरलगा रही थि उन्हें भि आजउसे नंगी देखने कां नशाचढ़ चुका थां थक हारकर पूनमफिन सें उन लोगों कों समझाते हुए बोलीं। )
चाची क्यूं ऐसीजिद कररही हौ क्याँ देख्ना चाहती होँ मेरेपास भि वही हैं जौ कि तुम् लोगों केँ पास हैं फिनऐसी जिद्द क्यूं? ( पूनम बहोत हि भोलेपन मे बोलीं)
हां मेरी पूनम रानी हम् लोगों केँ पासजिस तरह केँ अंग हैं तुम्हारे पास भि वहीसभी हैं,,,, मगरअब तुम्हारे जैसी कड़कमाल हम् लोग नहि रहगए हें,,,,, ( संध्या कि इसबात पऱ उसकी रितु चाची हंसने लगी औऱ संग मे उसकी सुजाता फूफी भि हंसने लगी,,,, पूनमसमझ गई कि आजउसे लगता हैं कि इन लोगों केँ बीचउसे एकदम नंगी हि अपने कमरे मे जानां होगा,,,,,, उसकारूम बाथरूम केँ ठीक सामने हि तीनचार कदम कि हि दूरी पऱ थें,,, मगरये तीनचार कदमउसे मीलों सें कम नहि लगरहे थें। वो बिना कपड़ों केँ हि अपने कमरे मे जाने केँ लिए अपने आप् कों पूरीतरह सें रेडीकर ली वो बाहर् कदम बढ़ाने हि वाली थि औऱ बाहर् खड़ी उसकी चाची औऱ फूफी उसे एकदम नंगी देखने कां प्रतीक्षा हि कररहे थें कि तभीउसे यादआया कि वो दुपट्टा ओढ़़कर आई थि। ये ख्याल आते हि उसकी आंखों मे चमकनजर आनेलगी,,, औऱ वो जल्दी पलटी औऱ बाथरूम मे जाकर दुपट्टे कों अपनी चूचियों सें होकर केँ लपेटली जोकि दुपट्टा ज़्यादा बढ़ा तौ नहि थां मगरफिन भि उसके नितंबों कों ढक लें रहा थां। पूनम अपने दुपट्टे कों इंसान सें बांधकर बाथरुम केँ बाहर् अपनाकदम बाहर् निकाली औऱ उसे बाहर् आता देखकर उसकी दोनों चाचियां औऱ फूफी केँ चेहरे पर्र मुस्कान फेलने लगी,,, वो लोग मात्र पूनम कि नंगी टांग हि देखे थें औऱ उन्हें लगनेलगा थां कि आज सचमुच पूनम कों पूरीतरह सें नंगी देखने कां सुख प्राप्त कर लेंगी मगरतभी
पुनम अपने चेहरे पर्र विजयी मुस्कान लिए बाथरुम सें बाहर् आनेलगी,,, उसके शरीर कों दुपट्टे सें ढकाहुआ देखकर उन लोगों केँ चेहरे उतरगए औऱ उन लोगों कां उतराहुआ चेहरा देखकर पूनम ज़ोर-ज़ोर सें उन्हें चिढ़ाते हुए हंसने लगी,,,,, क्योंकि उन लोगों कों पूनम कां जोँ अंग देख्ना थां वो तौ पूरीतरह सें दुपट्टे सें ढंकाहुआ थां,,, औऱ बस चिकनी जांघे औऱ गोरी लंबी टांगें हि नंगीनजर आँ रही थि,,,, इसलिये उन लोगों केँ चेहरे पऱ निराशा फैल गई,,,,, मगर जैसे हि पूनमउन लोगों सें आगे निकली,,,, कि तभी तीनो कि नजर उसकीपीठ कि तरफ सें होती हुइ कमर केँ नीचे कि तरफ गई तौ उन लोगों कि आंखें पूनम केँ पीछे कां नजारा देखकर फटी कि फटीरह गई औऱ वो लोगजोर जोर सें हंसने लगी,,, उन लोगों कों हंसता देखकर पूनम कों कुछसमझ मे नहि आया कि आखिरये लोगहंस क्यूं रही हें। वो अपने कमरे केँ लगभग पहुंच चुकी थि मगरउन लोगों कों हंसता हुआ देखकर उसनेनजर घुमाकर उन लोगों कों देखी तौ उन लोगों कि नजर उसके पिछवाड़े पर्र टिकी हुई थि औऱ वो लोगजोर जोर सें हंसरही थि। जैसे हि पूनम कि नजर नीचे कि तरफ अपने नितंबों पऱ गई तौ ऊसे अपनी गलती कां एहसास होते हि वहां जल्द सें अपने कमरे मे चली गई औऱ जल्द सें दरवाजा बंदकर दि,, कमरे केँ अंदर पहुंचकर अपनी गलती पऱ उसे भि मुस्कुराना आँ गय़ा,,,, क्योंकि दुपट्टा कां कपड़ा एकदम पतला थां औऱ उसका शरीर पूरीतरह सें पानी मे भीगाहुआ थां जिसकी वजह सें जैसे हि वो दुपट्टे कों अपने शरीर पऱ लपेटी तोँ गीले शरीर होने कि वजह सें वो दुपट्टे कां पतला कपड़ा पूनम केँ नंगे शरीर सें एकदम चिपक सां गय़ा,,,,, जौ कि उसके भरावदार नितंबों कों उभारकर प्रदर्शित करनेलगा,,,,, जिसकी वजह सें दुपट्टे सें ढंकने केँ बावजूद भि उसके भरावदार नितंबों कां उभार औऱ कटाव एकदमसाफ साफ गोरेरंग सहितनजर आँ रहा थां जिसको देखकर उसकी दोनों चाचिया औऱ फूफी खिलखिलाकर हंसरही थि।
पूनम अपने कमरे मे जा चुकी थि औऱ अपनी हि बेवकूफी पर्र हंसरही थि। दरवाजे पऱ कुंडी लगाकर वो पूरीतरह सें निश्चिंत होँ गई अब वो कमरे मे बिल्कुल अकेली थि।
उसे विद्यालय जाने केँ लिएदेर हौ रही थि क्योंकि किसी भि वक़्त उसकी सहेलियां घऱ पऱ आँ सकती थि इसलिये वो जल्दी अपने जिस्म पऱ लिपटी हुईँ दुपट्टे कों,,, जौ कि उसका साराभेद खुल चुका थां उसे अपने शरीर पर्र सें हटाकर टेबल पर्र रख दि अब वो कमरे मे बिल्कुल नंगी खड़ी थि। उसका सफ़ेद जिस्म एकदमचमक रहा थां लंबे लंबेघने बाल उसकीपीठ सें चिपके हुए थें। उसमें सें पानी कि बूंदे किसी मोती केँ दाने कि तरह फिसलकर नीचेगिर रही थि। पूनम केँ बाल थोड़ी ज़्यादा हि लंबे थें इसवजह सें आगे कि तरफ भि उसकी दोनों चुचियों पऱ भि बलखारहे थें। मगर चूचियों केँ गोलाई पऱ बालों कि लट बहोत हि सुंदर लगरही थि। चूचियों कि छोटी-छोटी निप्पल अनार केँ दाने कि तरह उभरी हुईँ अपनी हुस्न बिखेर रही थि। वो अपनेखाट केँ लगभग गई औऱ अपने पलंग कों उलटपलट करकुछ ढूंढने लगी,,,, उसकेइस तरह सें पलंग केँ नीचे ढूंढने सें,,, वो थोडा झुक गई जिसकी वजह सें इसकी तौ भरी हुइ गांडकुछ ज़्यादा हि भरकर बाहर् कि तरफ दिखाई देनेलगी चौकी बड़ी हि कामुकता सें भरी हुई थि। इससमय वेदर कों ये नजारा देख लेँ तोँ बिनाकहे वो पूनम कि कमर पकड़कर उसकी गांड पर्र अपना लन्ड रगड़ने लगे। खाट केँ नीचे सें तभी उसने अपनी पैंटी निकाली औऱ उसमें एक् केँ बाद एक् करके अपने दोनों पैर डालकर पहनने लगी,,,,,, आहिस्ता वो अपनी पैंटी कों ऊपर कि तरफ सरकाते हुए,,, जांघों तक लेँ आई औऱ एक् नजर उनसे अपनी जांघों केँ बीच कि पतली दरार पर्र डालकर मुस्कुरा दि,,,,, उसकी मुस्कुराहट मे एक् वजह थि क्योंकि उसकी पतली दरार केँ इर्द-गिर्द हल्के हल्के बाल आनां शुरुआत होँ गए थें। वो मुस्कुराते हुए पेंटिं कों पहनली औऱ उस अनमोल खजाने समान पतली दरार कों पेंटिं केँ अंदर छुपाली। पेंटी कों पहनने केँ बाद उसकी चूत वाली स्थान हल्की-हल्की पैंटी केँ ऊपर सें भि उपसी हुईँ नजर आँ रही थि। पूनमउसे पलंग केँ नीचे सें अपनी ब्रा भि निकाल कर पहनने लगी औऱ कुछ हि देर मे उसकी दोनों नारंगीया भि ब्रा केँ अंदरकैद हौ गई। वो बार-बार दीवार पऱ लगी घड़ी कि तरफ देखेजा रही थि क्योंकि उस विद्यालय कां वक्त होँ रहा थां औऱ अभि तक वो पूरीतरह सें रेडी नहि हौ पाई थि किसी भि टाइम उसकी सहेलियां घऱ पर्र तौ होँ सकती थि औऱ वो इसी जल्दबाजी मे जल्द-जल्द अपने विद्यालय कां ड्रेस पहनने लगी। अभि वो विद्यालय केँ कुर्ते कों अपनेसिर मे डालकर पहनना शुरुआत कि थि कि तभीघऱ सें बाहर् उसकी सहेलियों कि आवाज़ आनेलगी जोंकि उसे हि पुकार रही थि।
पूनम,,,,, ओ,,,,,,,,, पूनम आजफिन देर सें विद्यालय पहुंचना हैं क्याँ जल्दकर,,,, रेडी हुई कि नहि,,,,,,
अरे,,,,,,, आई बसदो मिनट खड़ीरहे,,,,,, ( पूनम विद्यालय केँ ड्रेस कों पहनते हुए बोलि,,,,,, )
हे ईश्वर लगता हैं आजफिन देर होँ गई हैं जल्दकरो वरनासच मे टीचर कि डांट खानां पड़ेगा,,, ( पूनममन हि मन मे बड़बड़ाते हुए अपनी सलवार आलमारी सें निकाल कर कहनेलगी सलवार कहने केँ बाद जल्द-जल्द अपने बालों कों संवार कर वो सजधजकर हौ गई,,,,। वो जल्द सें टेबल पर्र सें विद्यालय बैग उठाई औऱ जाते जाते एक् बार आईने मे अपने चेहरे कों देखने लगी औऱ आईने मे अपने चेहरे कों देखकर मुस्कुरा दि क्योंकि बला कि सुंदर लगरही थि वो,,,,,
दरवाजा खोलकर जल्द बाहर् आईओर सैंडल पहनकर जैसे हि जाने कों हुई कि पीछे सें उसकी संध्या चाची आवाज़ लगाई,,,,
अरे कहां चलीरुक,,,,, जब देखोतब सुपरफास्ट कि तरह कहीं भि निकल जाती हैं।
क्याँ हुआ चाची विद्यालय जाने मे मुझेदेर हौ रही हैं।
अरे पगली विद्यालय जाने सें पहलेकुछ ब्रेकफास्ट तौ कर लेँ क्याँ खालीपेट विद्यालय जाएगी,,,,
नहि चाहती मुझेदेर होँ रही हैं अगर ब्रेकफास्ट करने बैठूंगी तौ विद्यालय मे टीचर कि डांट सुननी पड़ेगी,,,,
अच्छा रुकये दुध तोँ पी लेँ,,,,, ( इतना कहकर वो स्वयं अपनी स्थान सें उठकरदूध कां गिलास लेकर पूनम केँ पासआई औऱ पूनम कों दूध कां गिलास थमाते हुए बोलीं। )
कुछ खाया पियाकर वरनाऐसे हि हड्डी कि तरह जाएगी,,,
चाची मुझे मोटी नहि होना हैं मे ऐसे हि ठीक हूं। ( दूध कां गिलास जानते हुए बोलीं औऱ एक् हि सांस। मे पूरादूध पी गई,,,, दूध पीकर वो अपनी चाची कों गिलास थमाते हुए बोलि। )
तुम् बहोत अच्छी हौ चाची तुम् मेरा कितना ख्याल रखती हौ,,,,
अच्छा अब विद्यालय जा तेरी सहेलियां प्रतीक्षा कररही हैं। ( संध्या मुस्कुराते हुए बोलि औऱ पूनम संध्या कों बायबोल करघऱ केँ बाहर् आँ गए जहां पऱ उसकी दोनों सहेलियां थोडा गुस्से मे उसका प्रतीक्षा कररही थि। )
दोस्त तूँ हमेशा लेट हौ जातीे हें,,, करती क्याँ रहती हैं,,,,,,,,,,,,,,,, तुँ काम भि तोँ नहि करतीबस उठकर नहाने धोने मे तेरी इतना वक़्त बीत जाता हैं कि रोजतु हमसे प्रतीक्षा करवाती हैं औऱ विद्यालय मे डांट सुनवाती हैं वो तोँ अलग,,,,,,
बस कर मेरी अम्मा इतना तोँ मेरी मम्मी भि मुझे नहि बोलती हे जितनां तूँ सुनादे रही हैं। ( इतना कहकर वो तीनों विद्यालय कि तरफ जानेलगे बेला औऱ सुलेखा ये दोनों पूनम कि सहेलियां थि जोकि उसकेघऱ केँ बिल्कुल लगभग हि रहती थि दोनों पूनम कि हम् उम्र होने केँ कारण,,, औऱ एक् हि क्लास मे पढ़ने कि वजह सें पक्की सहेलियां बन चुकी थि। अक्षर वालों नें इसीतरह पर्र पूनम केँ घऱ पऱ आकर उसका प्रतीक्षा कर केँ तीनों संग मे हि विद्यालय जाते थें।
दोस्त कल केँ मैथ्स मे तोँ मुझेकुछ भि समझ मे हि नहि आया नाँ जाने मुझे मैथ्स मे क्यूं इसतरह कि तकलीफ़ होँ जाती हैं (चलते चलते बेला पूनम सें बोलि,,,, )
अरे तूँ चिंता मतकर मुझेसभी कुछआता हैं मे तुम को समझा दूंगी तेरी तौ आता हैं नां सुलेखा,,,, ( ऊंची नीची पगडंडियों पऱ जल्द जल्द पांव बढ़ाते हुए पूनम बोलीं। )
नहि दोस्त मुझे भि कुछसमझ मे नहि आया थां। ( सुलेखा चिंतित स्वर मे बोलीं। )
चलकोई बात नहि मे तुम् दोनों कों समझा दूंगी औऱ वैसे भि तुम् दोनों पढ़ाई लिखाई मे अधिक ध्यान देते हौ नहि इसलिये तुम् लोगों कों इसतरह कि तकलीफे झेलनीं पड़ती हैं।
( तीनों आपस मे बातें करतेहुए ऊंची नीची पगडंडियों सें होतेहुए चलीजा रही थि उस विद्यालय केँ तरफ कि मार्ग कुछखास ठीक नहि थि मार्ग बहोत हि सच्चा थां मगर रास्ते केँ अगल-बगल पेड़ पौधों कि वजह सें मार्ग बहोत हि नयनरम्य लगती थि। औऱ ऊंची नीची पगडंडियों पर्र पूनम जैसे जैसे अपनेकदम रखतीे थि,,,, वैसे वैसे उसकी भरावदार नितंब ऊंची नीची मार्ग कि वजह सें मटकजा रही थि। पूनम केँ पीछेआने वालेहर शख्स कि नजर वो चाहे बूढ़ा होँ याँ जवानउन लोगों कि नजर हमेशा पूनम कि लचकती हुई गांड पऱ हि टिकी रहती थि।,,,, पूनम कि दोनों सहेलियों कों भि पूनम बहोत अच्छी लगती थि इसलिये तोँ वो हमेशा उसकेसंग हि रहतेी थि। अक्सर ये मार्ग करीब-करीब सुनसान हि रहती थि हमेशा इक्का-दुक्का हि लोग आते-जाते नजरआते थें,,,, क्योंकि देहात भि अधिक बड़ा नहि थां।
ठंडी ठंडीहवा वातावरण कों औऱ भि अधिक खुशनुमा कररही थि। शीतल पावन केँ संग-संग पूनम केँ रेशमी बाल भि हवा मे लहरारहे थें बारबार बालों कि लटे गोरेगाल कों चूमते हुए पूनम केँ संग अठखेलिया कररही थि। पूनम बार-बार अपनी उंगलियों कां सहारा लेकर बालों केँ रेशमी लोगों कों अपनेकान केँ पीछेकर देरही थि। पूनम कि यह हरकत भि अपने आप् मे बड़ी हूं खूबसुरत थि। पूनम कि इसीअदा पर्र तोँ सारा स्कुल फीदा थां।
पूनम अपनी सहेलियों केँ संग लंबे-लंबे कदम भरतेहुए चलीजा रही थि,,,, मार्ग केँ आगे हि एक् मोड़आता थां जहां पर्र एक् लड़का खड़ा होकर किसी कां प्रतीक्षा कररहा थां। पूनम उसकीतरफ गौरकिए बिना हि आगे निकल गई मगर वो लड़का पूनम कों देखता हैं औऱ वही खड़ारहा औऱ फिनजब वो देखा कि पूनम औऱ उसकी सहेली आगे निकल गई हैं तोँ वो भि पीछे पीछेचल दिया,,,,,
पूनम अक्सर उस लड़के कों वहीं खड़ा पाती थि मगरकभी भि उसके बारे मे अपनी सहेलियों सें कुछपूछ नहि पाए उसकाइस तरह सें वहां खड़ा रहना बड़ा अजीब लगता थां।
मगरआज उससेरहा नहि गय़ा तोँ वो अपनी सहेली सें बोलीं।
दोस्त बेलाइस लड़के कों अक्सर मे यही खड़ेहुए देखती हूं ऐसा लगता हैं जैसे किसी कां प्रतीक्षा कररहा होँ,,,,,
हां दोस्त मे भि तोँ उसकोयही रोज देखती हूं,,,, ( सुलेखा भि पूनम केँ सुर मे सुर मिलाते हुए बोलीं। )
दोस्त यूनिफार्म तोँ अपने हि उस विद्यालय कि हैं मगरइस लड़के कों कभी मैंने अपने विद्यालय मे देखी नहि। ( पूनमकुछ ख्याल करतेहुए बोलि मगरइन सभी कि बातें सुनकर बेला मुस्कुरा रही थि औऱ उस लड़के कां राज खोलते हुए बोलीं,,, )
तुँ पूनमसच मे इस लड़के कों नहि जानती,,,,, ?
नहि तोँ,,,,, मे भलाइसे जानकर क्याँ करूंगी।
दोस्त पूनम क्याँ तुम् सच मे इस लड़के कों नहि जानती?( बेला आश्चर्य जताते हुए बोलि। )
बिना तुँ पागल होँ गई हैं क्याँ ऐसे क्यूं पूछरही हैं मे गंगाइस लड़के कों जानकर क्याँ करुंगी कि कौन हैं कहां सें आता हैं क्याँ करता हैं?( पूनम थोडा क्रोध दिखाते हुए बोलि)
दोस्त पूनमये मनोज हैं मनोज इसके पीछे विद्यालय कि सारी लड़कियां दीवानी रहती हैं,। ( बेला चहकते हुए बोलि। ) तुम कोपता हैं इस सें दोस्ती करने केँ लिए लड़कियां आगे सें चलकर उसकेपास जातीे हें।
अच्छा ऐसी क्याँ खासबात हैं,, ऊसमे,,,,
अरे दोस्त देखी नहि कितना हैंडसम हैं वोँ।
चल जानेदे अपने सें क्याँ लेना-देना,,,, वहां खड़ा रहता हैं तोँ खड़े रहनैदो,,,, मगर एक् बातसमझ मे नहि आँ रही हैं कि वो वहां खड़ारह कर किसका प्रतीक्षा करता रहता हैं,,,,
( पूनम कि बात सुनकर बेलाजोर सें हंसते हुए बोलि। )
मे बताऊं कि वहां क्यूं खड़ा रहता हैं किसका प्रतीक्षा करता रहता हैं?
हांबता,,,,
मगर पहले वादाकरो कि तुम् मुझसे नाराज नहि होगी औऱ नाँ मुझ पऱ क्रोध करोगी तभी मे बताऊंगी।
चल अच्छा बता मे तुझेही कुछ नहि कहूंगी,,, ( कुछसोच कर थोड़ी देरबाद बोलीं। )
वो लड़काउस मोड़ पर्र खड़ा होकर तेरा हि प्रतीक्षा करता रहता हैं।
( बेला कि हैं बात सुनकर पूनम कां दिलधक सें कर गय़ा,,,, )
जानती हैं तुँ पूनम वो तुम्हारी तरफ बहोत मनपसंद करता हैं। तेरा दीवाना हौ गय़ा हैं वोँ,,,,,
( बेला कि येबात सुनकर पूनम कि हालत खराब होनेलगी उसेसमझ मे हि नहि आँ रहा थां कि बेला क्याँ कहरही हैं मगरइस बात सें उसे बहोत क्रोध आया,,,,, वो क्रोध करतेहुए बेला सें बोलीं,,,,, )
बेला तुम्हारी तरफकुछ पता भि हैं कि तुँ क्याँ कहरही हैं तूँ अच्छी तरह सें जानती हैं कि इनसभी बातों सें मेराकोई वास्ता नहि हैं।
अरे मे जानती हूं कि तेरा वास्ता नहि हैं मगर लड़कों कां क्याँ,,,,, उन्हें केसेरोक सकती हैं तुँ,,,,,, वो तोँ तेरीमन हि मन चाहने लगा हैं। पागल होँ गय़ा हैं तेरी हुस्न कों देखकर तभी तोँ पागलों कि तरहउस मोड़ पऱ खड़ा होकर तेरा प्रतीक्षा करता रहता हैं।
तुम्हें येसभी केसे मालूम,,,,,,, तुम्हें ये केसे मालूम कि वो मेरा हि प्रतीक्षा करता रहता हैं,,,, होँ सकता हैं कि तुम को गलतफहमी होँ रही हौ। ( पूनम शंका जताते हुए बोलि। )
पूनम तुँ सच मे बुद्धू हैं। तुँ देखती नहि हैं कि वो केसे तुम्हे हि घूरता रहता हैं,,,, तेरा प्रतीक्षा करता रहता हैं,,, जैसे हि तुँ मार्ग पर्र नजरआती हैं उसके चेहरे कि खुशीबढ़ जाती हैं।
औऱ जैसे हि तुँ आगे बढ़ती हैं कि वो भि पीछे पीछेचला आता हैं औऱ तेरी यकीन नहि आता तोँ देखलो पीछे मुड़कर वो आता हि होगा,,,,,
( बेला कि इसबात पऱ वो अपनी नजरें पीछे घुमाकर देखी तौ सच मे वो पीछे-पीछे उसी कों हि घूरता हुआचला रहा थां। पूनम कों अब क्रोध आनेलगा थां मगर वो अपने गुस्से कों छिपाकर विद्यालय कि तरफ बढ़ीजा रही थि। उसे लड़कों कां इसतरह सें पीछे घूमना अच्छा नहि लगता थां। पूनम केँ चेहरे पर्र क्रोध थां औऱ बेला उसके चेहरे कि तरफ देखते हुए बोलि। )
अब तौ यकीन होँ गय़ा नाँ कि तुम्हें ये किसका दीवाना हैं।
( बेला कि ईसबात पऱ पूनम आंखें तरेरते हुएउसे देखने लगी वो कुछउसे बोल पाती इससे पहले हि विद्यालय आँ गय़ा। औऱ वो कुछबोल नहि पाई।
गदराई हुई जवानी कि मालकिन पूनम कि संध्या चाची
चढ़ती जवानी की अंगड़ाई - pani chhutna – New Episode
विद्यालय मे पूनम कां मन पढ़ाई मे बिल्कुल नहि लगरहा थां। उसे बड़ा अजीब सां महसूस होँ रहा थां। उसके सामने कभी भि आज तक ऐसी स्थिति नहि आई थि। क्योंकि पूनमइन सभी चपेड़ो मे कभी पड़ती हि नहि थि। वो बेहद भोली भाली औऱ सीधी सादी थि प्रेम व्यार कि बातों सें कोसों दूर रहती थि फिरभी विद्यालय केँ कई मनचले लड़कों नें उसके सामने अपनेदिल कि बात रखनी तौ चाहीमगर वो किसी कों भि जरा सां भि भाव नहि दि। घऱ मे पहले सें हि उसके बापू औऱ उसके चाचाओ नें सख्त हिदायत देरखी थि कि अगरकभी भि उसकानाम बाहर् हि लड़कों सें जुड़ा प्रेम व्यार केँ चक्कर मे वो पड़ी तोँ उसदिन भूल जाएंगे कि वो उसकी लड़की हैं। तब सें तोँ पूनम केँ मन मे औऱ भि ज़्यादा डर गय़ा थां कि कहींकोई भूल सें भि उसेकुछ बोल नां दे इसलिये तोँ वो विद्यालय सें सीधाघऱ औऱ घऱ सें सीधा विद्यालय आती जाती थि मगरआज उसकामन परेशान हौ चुका थां। बेला नें हि उसे बताई थि कि उस लड़के कां नाम मनोज हैं क्योंकि लड़कियों मे बहुत मशहूर हैं। क्योंकि वो बहुत हैंडसम लगता थां हाइट-काठी गोरारंग एक् लड़की कों जिसतरह कां बॉयफ्रेंड चाहिए थां वो सारी खूबियां उसके मे थि,,,, औऱ अपनी ईन्ही खूबियों कि बदौलत उसने बहुत लड़कियों कों अपनी गर्लफ्रेंड बनाया औऱ अपना मतलब निकल जाने पर्र उसे छोड़ दिया,,,,, बहुत दिनों सें उसकीनजर पूनम पऱ थि उसकी हुस्न उसकीे सादगी उसके चेहरे कां भोलापन,,, उसेभा गय़ा थां औऱ वो उसके पीछेलग गय़ा थां। दीन रात उठते बैठते हमेशा उसकी आंखों केँ सामने बस पूनम कां हि चेहरा नाचता रहता थां,,, इसलिये वो पूरी तैयारी केँ संग पूनम केँ पीछेपड़ गय़ा थां मगर बहुत दिनों सें उसे बिल्कुल भि कामयाबी नहि मिलरही थि फिरभी वो पूनम सें बात करने केँ लिए उसकी सहेली बेला औऱ सुलेखा दोनों कों पटारखा थां। सुलेखा तोँ पहले सें हि मनोज कि दीवानी थि मगर मनोज ताकिउसे जरा भि भाव नहि देता थां जबकि बेला औऱ सुलेखा अच्छी तरह सें जानती थि कि मनोज किसी सें भि दोस्ती करता हैं उसे अपने पलंग पर्र जरूर लें जाता हैं। औऱ ये दोनों भि मनोज कितनी दीवानी थि कि सभीकुछ जानते हुए भि उस सें दोस्ती करने केँ लिए तड़पती थि,,, हां इतना भि थां कि उमर केँ संगसंग देना औऱ जुलेखा कि जांघो केँ बीच चीटियां रेंगना शुरुआत हौ गई थि औऱ वो दोनों तौ अपनी चूत कि खुजली मिटाने केँ लिए भि सजधजकर थि। मनोज सिर्फ उन लोगों सें बातचीत भरकरसके इतने सें हि वो दोनों पूनम कों मनोज सें बात कराने कां एक्सक्यूज़ ढूंढरही थि मगर पूनम केँ गुस्से कों देखते हुए दोनों हमेशा बात कों टाल जाती थि। मगरआज हिम्मत करकेजब पूनम नें उस लड़के केँ बारे मे पूछे तोँ वो सभीकुछ बोलदी,,,, मगर पूनम कों अपनी दोनों सहेलियों कि बात पर्र बिल्कुल भि विश्वास नहि होँ रहा थां यहीसभी वो क्लास मे बैठकर सोचरही थि। पूनम कों इसतरह सें ख्यालों मे खोयाहुआ देखकर बेला बोलीं,,,
क्याँ हुआ पूनम तुम् पऱ भि उसके प्यार कां चमत्कार लगता हैं चढ़ने लगा हैं तभी तौ उसके ख्यालों मे खोई हुईँ हौ,,,,, ( वो पूनम कों छेंड़ती हुईँ बोलि। )
बकवास बंदकर बोला तुम को अच्छी तरह सें पता हैं कि मुझेऐसा बिल्कुल भि अच्छा नहि लगता औऱ अगरये बात मेरेघऱ वालों कों पताचल गई तौ मेरा जीना मुश्किल हौ जाएगा इसलिये मे परेशान हूं।
क्यूं डरती हैं पूनमअरे कुछ नहि होगा आखिर वो तुझसे प्रेम करनेलगा हैं,,,।
तूँ स्वयं हि सीख प्रेम कि एबीसीडी मुझे नहि सीखना,,,,,,
अरे दोस्त तूँ तोँ नाराज होनेलगी।
अब नाराज नां होऊ तोँ क्याँ करूं,,,, बात हि ऐसी हैं। बेला तुम् नहि जानती मेरे घरवालों कों मुझ पऱ बहोत अधिक विश्वास हैं वो लोग अच्छी तरह सें जानते हें कि मे कभी भि कोई भि गलतकाम नहि करूंगी, जिससे मेरे खानदान कि बदनामी होँ इसलिये मे इनसभी बातों सें डरती हूं।
पूनम तुँ खानां खा चिंता करती हैं तूँ थोड़ी उसके पीछे पड़ी हैं वो पागल कि तरह तेरे पीछे पड़ा हैं इसमें कौन सि बदनामी होगीजब तूँ आगे जाकर केँ उस सें बात करेगी तभी नां किसी कों पता चलेगा कि तुम् दोनों केँ बीच मे कुछ हैं तुँ ऐसा करेगी हि नहि तौ कितना भि तेरे पीछेपड़ जाए तुझेही घबराने कि जरूरत नहि हैं।
( बेला अच्छी तरह सें जानती थि कि अगर वो इसबात कों ज़्यादा तूल देगी तौ पूनम खामखा बात कां बतंगड़ बना देगी इसलिये वो उसे समझा बुझाकर हाथ झाँड़ने कि कोशिश करनेलगी,,, पूनम केँ चेहरे पर्र अभि भि तकलीफ़ केँ भावसाफ नजर आँ रहे थें मगर कुदरत नें पूनम कों इतनी सादगी सें बड़े हि फुर्सत सें बनाया थां कि तकलीफ़ कि हालत मे भि उसकी हुस्न निखरकर। आंखों कों ठंडक देती थि।
आरामसे करकेकब वक्त गुजर गय़ा इसबात कां ख्याल पूनम कों तबहुआ जब छुट्टी कि घंटी बजनेलगी। उसकेमन मे एक् अजीब सां डरबन चुका थां क्योंकि उसेपता थां कि वो लड़काफिन सें उसी स्थान उसका प्रतीक्षा कररहा होगा पहले तोँ उसकेमन मे उसके प्रति लेकरकोई भि भावना डर जैसाकुछ भि नहि थां मगरजब सें बेला नें उस लड़के केँ बारे मे उस कों बताई थि तब सें उसकेमन मे अजीब सां डरबैठ गय़ा थां। ये पूनम केँ लिएडर थां मगर पूनम कि स्थान अगरकोई औऱ लड़की होती तौ उसकेलिए ये आनंद होता,,,, बेला औऱ सुलेखा तोँ इस लम्हा केँ लिए नां जानेकब सें बेचैनी रही थि,,,,, खैर पूनमडर कों अपने अंदर समेटए अपनी दोनों सहेलियों केँ संग बातें करते हें अपनेघऱ कि तरफचली जारही थि मगर बार-बार पूनम कि नजर रास्ते पऱ उसी कों ढूंढरही थि। औऱ वैसा हि हुआ जैसा कि रोज होता थां वो लड़काफिन सें उसी मोड़ पर्र उसका प्रतीक्षा करताहुआ उसे दिखाई दे गय़ा जैसे जैसे वो आगेबढ़ रही थि उस कि दिल कि धड़कन बढ़ती जारही थि। पूनम नजरे झुकाकर जल्द-जल्द चलीजा रही थि मगर बार-बार उसकी नजरें अपने आप् उसकीतरफ चली जाती थि जोँ कि वो पूनम कों हि देखरहा थां। उसेयूं अपनीतरफ देखता हुआ पाकर उसका जिस्म पूरीतरह सें गनगना जारहा थां। जैसे-जैसे उसकेबीच कि दूरीकम होतीजा रही थि वैसे वैसे उसकी धड़कन तेजगति सें दौड़रही थि। मनोज बिनापलक झपकाए बसऊसे हि एक् टक देखेजा रहा थां। उसकी आंखों सें ऐसालग रहा थां कि जैसे वो पूनम केँ फुल सें जिस्म कां रस किसी भवरे कि तरह धीरे-धीरे धीरे-धीरे करके निचोड़ता हुआपी रहा होँ। पूनमडर केँ मारे उसकीतरफ नजर नहि बनापाई औऱ तेज कदमों केँ संगआगे बढ़ गई जबकुछ दूरी पऱ गई तौ नां चाहते हुए भि वो पीछे मुड़कर देखें मगरउस स्थान पऱ अभि भि वहांखडे होकरउसे हि देखरहा थां,,, पूनमउसे देखी तौ मन मे बड़बड़ाते हुए जानेलगी,,,,,
पूनम कों इसतरह सें बड़बड़ाते हुए देखकर बेला मुस्कुराते हुए बोलि।
क्याँ बेला क्यूं उस बेचारे कों तुँ इतना कोर्स रही हैं दिख नहि रही कितना दीवानों कि तरह तेरेआगे पीछेलगा हुआ हैं।
काश हम् लोगों कि भि क़िस्मत ऐसी होती,,,,,,
तोँ जाबोल देलग जाएगा वो ं तेरे पीछे,,,,, ( पूनम क्रोध दिखाते हुए बोलीं। )
अरेबोल तौ दूंमगर वो तौ तेरा दीवाना होगा हम् लोगों केँ पीछे कहां पड़ने वाला हैं।
देख दिला सकतीकुछ ज़्यादा हि बकबककर रही हैं हम् लोग यहां पढ़ने आते हें नाँ कि लड़कों केँ संग मटरगस्ती करने औऱ तुम को भि यहीसभी करना हैं तोँ पढ़ाई छोड़दे लगजाइन लफंगों केँ पीछे,,,,,,
अरे दोस्त तु तौ नाराज होँ जाती हैं।,,,
नहि मे तेरी पूजा करूंचल अबबस बहोत होँ गय़ा पढ़ाई पऱ ध्यान दे अगले महीने सें एग्जाम आने वाले हें। अगर अभि पढ़ाई मे ध्यान नहि दि तोँ एग्जाम पेपर पऱ लिखना मनोज मनोज मनोज,,,,,,,,
अरे वाउ पूनम रानी एक् हि दिन मे उसकानाम भि तुझको याद होँ गय़ा,,,,,,
तुँ नहि सुधरेगी,,,,, ( इतना कहने केँ संग हि वो बेला कों मारने केँ लिए उसकीतरफ बढ़ी कि बेला औऱ सुभह कां दोनों हंसते हुएभाग खड़ेहुए,,,,, पूनमवही रुपए क्योंकि उसकाघऱ आँ चुका थां औऱ वो दोनों हंसते हुए अपनेघऱ कि तरफचले गए पूनम भि कुछदेर मे हि खड़ी होकर सोचने लगी कि येउसे क्याँ हौ गय़ा हैं,,, क्यूं उसकानाम उसके होठों पऱ आँ गय़ा,,,,,,, साला हरामी,,,,,,
( पूनममन मे गाली देकर अपनेघऱ मे चली गई,,,,, जाते हि वो अपने कपड़े बदलकर खानां खानेबैठ गई उसकेबाद थोडा बहोत कामकर केँ अपने कमरे मे जाकरसो गई।
दोपहर मे अक्सर सभीलोग कुछदेर आराम हि करते थें। येरोज कां हि थां। बैड पर्र लेटते हि फिन सें उसे मनोजयाद आँ गय़ा जैसे तैसे करकेउसे नींदआई।
साम कों उसकी नींद खुली तौ सभीलोग कुछ नाँ कुछकाम कर हि रहे थें। वो भि अपने कमरे सें बाहर् आकरहाथ मुंहधो कर,,,,, झाड़ू उठाई औऱ पूरेघऱ मे झाड़ू लगाना शुरुकर दि वैसे तोँ घऱ मे हरकोई झाड़ू लगाता थां मगरआज उसकी माँ औऱ उसकी दोनों चाहिए किसी औऱ काम मे लगेहुए थें इसलिये वो स्वयं हि झाड़ू उठाकर पूरे आंगन मे झाड़ू लगाने लगी। तभी उसकी संध्या चाची जोकि गेहूं साफकर रही थि वो पूनम कि तरफदेख कर हंसते हुए बोलि।।
पूनमआज तुमने जौ सुभह-सुभह इतनी अच्छी पिक्चर दिखाई होँ उसे देखने केँ बाद तोँ हम् लोगों केँ होश हि उड़गए हें। ( इतना कहने केँ संग हि संध्या केँ संगसंग उसकी छोटी चाची औऱ उसकी फूफी तीनों ठहाके लगाकर हंसने लगे,, उनको हंसता हुआ देखकर पूनम बोलीं,,,,, )
चाची जितना मुस्कुराना यादकरो मेरी तोँ तुमसे अपनेआधी पिक्चर देखे थें मगर देख्ना एक् दिन मे तुम् सभी कि पूरी पिक्चर देखूंगी औऱ उसदिन बताऊंगीे कि किसकी पिक्चर अच्छी थि।
हांहां,,, देख लेना हमें भि उसदिन कां प्रतीक्षा रहेगा,,,
( इसकेबाद उन लोगों मे हंसी मजाक कां दौर शुरुआत हौ गय़ा हरतरह सें ये परिवार पूरीतरह सें सुखी औऱ संपन्न थां आपस मे किसी केँ बीच किसी भि प्रकार कां मतभेद नहि थां। आपस मे सबलोग बड़े प्रेम सें रहते थें उन सबकेबीच मे पूनम सबकी लाडली थि।
साम कों सबलोग मिलकर खानां बनाए औऱ उसकी चाची खानां परोस परोसकर थाली लगाती औऱ पूनमसब कों खाने कि थाली लेँ जाकर देती,,,,, इस तरह सें सबलोग कों खानां खिलाने केँ बाद पूनम औऱ उसकी चाची औऱ फूफी सभीसंग मे मिलकर खानां खाते थें। खानां खाने केँ बादसब औरतें औऱ पूनम मिलकर घऱ केँ बर्तन कों भि साफ करके रखते थें।
देहात मे अक्सर लाइटआती थि चली जाती थि,,,, ज्यादातर देहात मे अंधेरा हि रहता थां,, लाइट केँ आने औऱ जाने कां कोई वक़्त निश्चित नहि थां। हमेशा कि तरहआज भि लाइट नहि थि एकदम अंधेरा छायाहुआ थां। घऱ कां साराकाम समाप्त करने केँ बादघऱ कि औरतें बैठकर कुछदेर गप्पे लड़ाया करते थें। रोज कि तरहआज भि पूनम,,, पूनम कि दोनों चाचीया औऱ उसकी फूफी बैठकर इधरउधर कि बातें करतेहुए अपना वक़्त व्यतीत कर रहीे थि। गर्मी अपने जोरों पऱ थि, पूनम कि दोनों साथिया बहोत हि हसीन औऱ भरेहुए जिस्म कि थि उसकी फूफी भि किसी सें कम नहि थि। याँ यूंकह दो कि पूनम केँ घऱ मे पूनम केँ संगसंग सब औरतें बहोत हसीन हें मगरइन सब मे पूनम कि हुस्न उन लोगों सें एक् कदम ज़्यादा हि थि। उन लोगों कों वहां बैठे बैठे बहुत वक़्त बीत गय़ा थां। जैसे-जैसे रात गहरारही थि वैसे वैसे,,,, शीतल हवा कां झोंका गर्मी केँ जोर। कों कमकररहा थां। वो लोग वहां सें उठकर अपने अपने कमरे मे जाने वाले हि थें कि तभी पूनम केँ चाचा नें संध्या कों आवाज़ लगाकर कमरे मे बुलाने लगे,,,,, पूनम केँ चाचा कि आवाज़ सुनकर पूनम कि छोटी चाची हंसने लगी औऱ हंसते हुए बोलि,,,,
जाओ दिदी लगता हैं,,,, कि भइया साहब कां खड़ा हौ गय़ा हैं,,,
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