कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का complete - desi chudai mom son – New Episode
चेतावनी.दोस्तो यह किस्सा समाज केँ नियमो केँ खिलाफ हैं क्योंकि हमारा समाजमा बेटे औऱ भइया बेहन औऱ बाप बेटी केँ रिश्ते कों सबसे पवित्र नाता मानता हैं अतःजिन भाइयो कों इन रिश्तो कि कहानियाँ पढ़ने सें अरुचि होती होँ वो यह स्टोरी नाँ पढ़े क्योंकि यहकथा एक् पारवारिक सेक्स कि स्टोरी हैं
"बेटा, सिमर कि याद आँ रही हैं, वोँ भि रहती थि तौ बड़ामजा आता थां चुदाई मे" मम्मी नें चूतड। उछालते हुएकहा.
मे मम्मी पर्र चढकरचोद रहा थां। मां कि मम्मों मुँह सें निकाल कर मैंने कहा "अम्मा, तुँ क्यूं परेशान होँ रही हैं, दिदी मस्त चुदवा रही होगी जीजाजी सें"
"अरे विवाह कों तीन महने हौ गयेघऱ नहि आई, पास केँ शहर मे घऱ हैं फिन भि फ़ोन तक नहि करती, मे करती हूं तौ दो मिनिट बात करकेरख देती हैं। अहह & हॅ & बेटे, मस्तचोद रहा हैं तुँ, ज़रा गहरापेल अब, मेरी बच्चेदानी तक, हाँ & ऐसे हि मेरेलाल" मम्मी कराहते हुए बोलीं.
मे झड़ने कों आँ गय़ा थां पर्र मम्मी कों झडाने केँ पहले झडता तौ वोँ नाराज़ होँ जाती। उसकीआदत हि थि घंटों चुदाने कि। औऱ ख़ासकर गहरा चुदवाने कि, जिससे लन्ड उसकी बच्चेदानी पर्र चोटकरे! मे औऱ कसकर धक्के लगाने लगा। "लें मेरी प्यारी अम्मा, ऐसे लगाऊ? कि औऱ ज़ोर सें? औऱ ज़ोर सें चुदवाना हौ तोँ घोड़ी बनजा औऱ। पीछे सें चोद देताहू"
"अरेऐसे हि ठीक हैं, अब अच्छा चोदरहा हैं तूँ, कल तौ चोदा थां तूने पीछे सें औऱ फिन गांदमार ली थि, मे मनाकर रही थि फिन भि, ज़बरदस्ती! अब तक दुखरही हैं" मां मुझे बाँहों मे भींचकर औऱ ज़ोर सें कमर हिलाते हुए बोलीं। "हाँ तौ मे सिमर केँ बारे मे."
मुझेतैश आँ गय़ा। सिमर दिदी केँ बारे मे मे अभि नहि सुनना चाहता थां। अपने मुँह सें मैंने मां कां मुँहबंद किया औऱ चूसते हुएऐसे चोदा कि दो मिनिट मे झड.कर मचलने लगी.यहा उसने मेरीपीठ पर्र अपने नाख़ून गढ़ाये, जैसा वो झडते वक़्त करती थि, वहा मे भि आखरी कां धक्का लगाकर झड। गय़ा। फिन उसकेउपर पड़ा पड़ा आराम करनेलगा.
सुस्ताने केँ बादउठ कर बोला"अब कहो अम्मा, क्याँ बात हैं? चोदते वक्त दिदी कि याद नां दिलाया कर। झड्ने कों आँ जाताहू, ख़ासकर जबयाद आता हैं कि केसे वोँ तेरी बुर चूसती थि औऱ मे उसकी गांद मारता थां"
"हाँ, मेरी बच्ची कों गांद मरवाने कां बहोत शौक हैं। याद हैं केसे तूँ उसकी गांद मे लन्ड डालकर सोफे पर्र बैठकर नीचे सें उसकी मारता थां औऱ मे सामने बैठकर उसकी चूत चाटती थि। हायरे बेटे, नाँ जाने वोँ दिनकब आएगाजब मेरी बेटी फिन मैके आएगी अपनी अम्मा औऱ छोटे भइया कि प्यास बुझाने। तूँ जाकर क्यूं नहि देखआता बात क्याँ हैं? जा तूँ लेँ हि आँ एक् हफ्ते कों" अम्मा टाँगें फैलाकर अपनी बुर तौलिए सें पोंछते हुए बोलीं.
"ठीक हैं अम्मा, कलचला जाताहू। बिन बताए जाऊन्गा, पता तौ चले कि माजरा क्याँ हैं" मां कि चूचि दबाते हुए मे बोला.
मेरी अम्मा चालीस साल कि हैं। घऱ मे बस मे, मम्मी औऱ मेरी बड़ी बेहन सिमर हें। मेरीउमर सोलहा साल कि हैं। दिदी मुझसे पाँचसाल बड़ी हैं। अम्मा औऱ दिदी कां लेस्बियन प्यार चलता हैं यह मुझेदो साल पहले मालूम हुआ। उसके पहले सें मे दोनों कों अलगअलग चोदता थां। बल्कि वी मुझे चोदती थींयह कहना बेहतर होगा। उसकेबाद हम् संग चोदने लगे.ये अलग किस्सा हैं, बाद मे कभी बताऊन्गा.
दिदी कि विवाह तीनमाह पहले हुइ। हमें छोड़.कर जाने कों वोँ सजधजकर नहि थि। पऱ हमने मनाया, ऐसा अच्छा घऱफिन नहि मिलेगा। अच्छा धनवान परिवार, घऱ मे सिर्फ़ जीजाजी याने दीपक, उनके बड़े भइयारजत औऱ सासू माँ। दीपक थां भि हैम्डसम नौजवान। औऱ विवाह तोँ करनी हि थि, सभी रिश्तेदार बारबार पूछते थें, उन्हें क्याँ जवाबदें! अम्मा नें भि समझाया कि पास हि ससुराल हैं, हर महने आँ जायाकर चोदने कों.
दिदी नें आख़िर मान लिया पऱ बोलि कि वोँ तौ हर महने आएगी, अगर मम्मी औऱ छोटे भैया सें नहि चुदाया तौ पागल हौ जाएगी, हमारे बिनावहा रह नहि सकती थि। इसीलिए जबतीन महने दिदी नहि आई तौ मां कां माथा ठनका कि उसकी प्यारी बच्ची सकुशल हैं याँ नहि.
दूसरे दिन मे दोपहर कों निकला। जाने केँ पहले मां कि गांद मारने कां मूड थां। वोँ रेडी नहि होँ रही थि। मुझसे सैकडों बारमरा चुकी हैं फिन भि हरबार नखरा करती हैं। कहती हैं कि दुखता हैं। सभीझूठ हैं, उसकीअब इतनी मुलायामा हौ गयीँ, हैं कि लन्ड धीरे-धीरे जाता हैं, तेल बिना लगाए भि। पऱ नखरे मे उसेमजा आता हैं। गांद मराने मे भि उसे खुशीआता हैं पऱ कभी मेरे सामने स्वीकार नहि करती। दिदी नें मुझे अकेले मे बताया थां। इसलिये अब मे उसकी किरकिरा कि परवाह नहि करता.
जाने कि पूरी तैयारी करके कपड़े पहनने केँ बाद मैंने मम्मी कि मारी। सोचा - कम सें कमआज कां तौ सामान हौ जाए, फिन तोँ मुठ्ठ हि मारना हैं दोतीन दिन। दिदी केँ ससुराल मे तौ भीगी बिल्ली जैसे रहना पड़ेगा। बेडरूम सें मम्मी कों आवाज़ दि "मम्मी मे चला"
मां आई तौ उसे पकड़कर मैंने दीवाल सें सटाकर उसकी साड़ी उठाई औऱ लन्ड ज़िप सें निकाला औऱ उसके गोरे चूतडो केँ बीचगाढ। दिया.फिन कस केँ दस मिनिट उसे दीवाल पर्र दबाकर हचकहचक कर उसकी मारी.
वोँ भि नखरा करके"हाय रे बेटे, मत मार, बहोत दुखता हैं, मारना हि हैं तोँ धीरे-धीरे मार मेरे बच्चे" कहतीरही। पऱ मेरे झड्ने केँ बादपलट कर साड़ी उठाकर बोलि "जाने सें पहलेचूस दे मेरेलाल, अबदोदिन उपवास हैं मेरा"
मां भि क्याँ चुदैल हैं, दो मिनिट पहले दर्द सें बिलखरही थि, पर्र बुर ऐसेबहा रही थि जैसेनई नवेली दुल्हन हौ। शायद जानबूझ कर दर्द कां एक्सक्यूज़ करती हैं, जानती हैं कि इससे मे औऱ मचल जाताहू औऱ ज़ोर सें गांद मारता हू.
मां कि चूत कां पानीचाट कर मैंने मुँह पोंच्छा औऱ फिन कपड़े ठीक करके निकल पड़ा। मां कों वादा किया कि फ़ोन करुँगा औऱ होँ सके तौ सिमर दिदी कों संग लेँ आऊन्गा.
दिदी केँ घऱ पहुंचा तौ साम हौ गई, थि। दिदी कि सासू माँ शन्नो जी नें दरवाजा खोला। मेरा स्वागत करतेहुए बोलीं। "आओ अमित बेटे, आख़िर याद आँ गयीँ, दिदी कि। मे सोच हि रही थि कि केसेअब तक कोई सिमर बिटिया केँ घऱ सें देखने नहि आया। वैसे तुम्हारी दिदी बहोत खुश हैं। मैंने कईबार कहा फ़ोनकर लें पऱ अनसुना कर देती हैं"
मैंने उनके पाँवछुए, एकदम गोरे पाँव थें उनके। "मांजी, आपकेयहा दिदी खुश नहि होगी तोँ कहां होगी। मे तौ बसइसतरफ आँ रहा थां इसलिये मिलने चलाआया"
मांजी नें मुझेगरम चाय पिलाई। बातें करनेलगी। मम्मी केँ बारे मे पूछा कि सकुशल हें नां। मैंने कहा कि दिदी नहि दिखरही हैं, बाहर् गयीँ, होगी शायद तौ शन्नो जी बोलीं कि दिदी अभि आँ जाएगी, उपरसो रही हैं। रजत आफ़िस सें अभि आया नहि हैं। आगे मुझे बोलीं कि आए होँ तौ अबदोदिन रहो। मैंने हाँकर दि.
मे उन्हें गौर सें देखरहा थां। शन्नो जी मम्मी सें सातआठ साल बड़ीथीं, सैंतालीस अडतालीस केँ आसपास कि होंगी। गोरी चिकनी थीं, खाया पिया भारी भरकम मांसल शरीर थां, यहा मोटापा भि उन्हें एकदमा जचरहा थां। पऱ साड़ी औऱ घूँघट मे औऱ कुछदिख नहि रहा थां। चेहरा हसमुख औऱ हसीन थां। जब सें मे मम्मी कों चोदने लगाहू, उसकीउमर कि हर स्त्री कों ऐसे हि देखता हू। सोचने लगा कि दिदी कि सासू भि माल हें, इतनीउमर मे भि पूरा जोबन सजाएहुए हें। पर्र चांस मिलना कठिन हि हैं, कुछ करना भि ठीक नहि हैं, आख़िर दिदी कि ससुराल हैं, लेने केँ देने नां पड। जाएँ.
क्रमशः……………….
कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का complete - desi chudai mom son – New Episode
गतान्क सें आगे……………
थोडिदेर सें दिदी केँ जेठ, जीजाजी केँ बड़े भइयारजत नीचेआए अठ्ठाईस उनतीस केँ आसपास उमर होगी अच्छा कसाहुआ बदन थां उन्होंने विवाह नहि कि थि, स्वयं कां बिज़ीनेस करते थें अभि थोडा पसीना पसीना थें, हांफरहे थें मुझसे हाथ मिलाया औऱ बोले कि उपर वर्ज़िश कररहा थां साम कों हि वक्त मिलता हैं, एक्सरसाइज़ करने कां शन्नो जी उनकीओर देखकर मुस्करा रहीथीं
कुछदेर बाद दिदी नीचेआई मे देखता रह गय़ा क्याँ हसीनलग रही थि थोड़ी मोटी होँ गयीँ, थि, नहि तौ हमारी दिदी एकदम छरहरी हैं, मां जैसीबस मम्मे मोटे हें, मां सें थोड़े बड़े मेरी तोँ अच्छी पहचान केँ हें उसके मम्मे, कितनी बार चूसा औऱ दबाया हैं उनको
दिदी भि थकीलग रही थि लगता नहि थां कि सोकरआई हैं, पऱ एकदमखुश थि मैंने सोचा कि घऱ कां पूराकाम करना पड़ता होगाअब क्याँ करें, ससुराल मे सभी औरतें करती हें पऱ खुश तौ हैं, कम सें कमकोई परेशानी नहि देतायहा सॉफ हैं मैंने शिकायत कि कि इतनी भि क्याँ रम गई, ससुराल मे कि भइया औऱ मम्मी कों भूल गई, थोड़ी देर कि नोकझोक औऱ हँसी मज़ाक केँ बाद शन्नो जी नें कहा "सिमर बेटी, अमित कों उपर लेँ जा, वोँ पास वालारूम देदे"
मे सामान उठाकर दिदी केँ संगउपर गय़ा आलीशान घऱ थां चार पाँच बड़े बड़े कमरे थें दिदी नें मेरारूम दिखाया औऱ जानेलगी तौ मैंने हाथ पकडकर बिठा लिया "क्याँ दिदी, बैठो, ज़राहाल चाल सुनाओ" उसे देखकर मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा थां लगता थां सिमर दिदी कि अभि मारलूँ, उसका ज्यादातर वजन जौ बढ़ा थां वहा छाती पऱ औऱ कूल्हो पऱ बढ़ा थां इसलिये उसकी गान्ड साड़ी मे भि मतवाली लगरही थि
दिदी बैठ गयीँ, बातें करनेलगी मैंने उलाहना दिया कि घऱ क्यूं नहि आई, कम सें कम फ़ोन तोँ किया होता तौ बोलि "अरे अमित, यहा इतनी उलझीहू कि घऱआने कां वक्त हि नहि मिला पर्र चिंता नाँ कर, बहोत खुशहू"
मेरा लन्ड खड़ा हौ गय़ा थां, पैंट मे तम्बू बनारहा थां दिदी कों दिखाकर धीरे-धीरे सें बोला"देख दिदी क्याँ हालत हैं तुम कोदेख कर मम्मी कि भि चूत पसीज जाती हैं तुम कोयाद करके तेरी चुदाई केसेचल रही हैं?"
वो आँखमार कर इशारे सें बोलि बहोत मस्त मैंने हाथ बढ़ाकर उसकी चूचिदबा दि "दिदी मेरेसंग चलो हफ्ते केँ लिए, नहि तौ यहाकुछ चांसदो, तुम्हारी चूत कां स्वाद यादआता हैं तौ मुँह मे पानीभर आता हैं"
वोँ हँसकर बात टालकर बाहर् चली गयीँ, "देखूँगी, अभि जानेदो, नीचे मांजी प्रतीक्षा कररही होंगी, खानां बनाना हैं"
रात कों खानां खाते वक्तसभी गप्पें माररहे थें जीजाजी भि आँ गये थें अच्छे हैम्डसम पचीससाल केँ नौजवान हें, काफ़ी छरहरा नाज़ुक किस्मा कां जिस्म हैं, लगता नहि कि रजत, उनके बड़े भइया होंगे, उनकाबदन तोँ एकदमा कसाहुआ गठाहुआ हैं
सभी गप्पें मारते हुए एक् दूसरे कि ओर देखकर बीचबीच मे मुस्करा रहे थें ख़ासकर शन्नो जी तौ एकदम प्रसन्न लगरही थीं मेरीकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां माना कि उनकीबहू कां भइयाआया हैं पऱ इसमें इतनाखुश होने कि क्याँ बात हैं! मेरे चेहरे केँ भाव देखकर वे बोलीं "बेटे, आज सभीखुश हें क्योंकि तेरी दिदी इतनीखुश हैं, आख़िर उसका छोटा भइयाआया हैं मैके सें" दिदी कों देखा तोँ वो आँखें नीचे करके शरारत सें मुस्करा रही थि
रात कों दसबजे हि सभी सोनेचले गये मे भि अपने कमरे मे आँ गय़ा जिसतरह सें जीजाजी दिदी कों देखरहे थें, अवश्य चुदाई केँ लिए आतुर थें मेरा खड़ा थां मां कि याद आँ रही थि यहा भि कल्पना कररहा थां कि जीजाजी केसे दिदी पर्र चढे होंगे सिर्फ़ चोदते हें कि गान्ड भि मारते हें?
तरहतरह कि कल्पना करतेहुए मे बीस पचीस मिनिट लन्ड सें खेला औऱ मजा लिया, फिन सहन नां होने पर्र मुठ्ठ मारने वाला थां तभीपास केँ दिदी केँ कमरे सें हँसने खिलखिलाने कि आवाज़ आई तौ मन नां माना चुपचाप बाहर् आँ गय़ा दिदी केँ कमरे केँ अंदर बत्ती जलरही थि मे झुककर कीहोल सें देखने लगा धक्के सें दरवाजा ज़रा सां खुल गय़ा, दिदी नें अंदर सें ठीक सें बंद भि नहि किया थां इसीलिए आवाज़ बाहर् आँ रही थि मे अंधेरे मे खड़ा होकर अंदर देखने लगा जोँ देखा तौ हक्का बक्का होँ गय़ा
अंदर जीजाजी औऱ उनके भइयारजत दिदी पऱ एक् संगचढे थें रजत दिदी कों चोदरहे थें उनका लन्ड सपासप दिदी कि बुर मे अंदर बाहर् होँ रहा थां जीजाजी दिदी कि चुचियाँ मसलते हुएउसे चूमरहे थें औऱ गुदगुदी कररहे थें दिदी हँसरही थि, बीच मे जीजाजी ज़ोर सें उसकी चूम्ची मसल देते तोँ दिदी सीत्कार उठती"अरे केसे बेदर्दी हौ जी, जेठजी देखो मुझे केसे प्रेम सें चोदरहे हें, तुम् भि ज़रा प्रेम सें नहि दबा सकते मेरी चुची?"
जीजाजी बोले"ठहर हरामन, अभि मजा लें रही हैं, अब थोड़ी देर मे जबरजत गान्ड मारेगा तौ रो पडेगी साली, भैया आज इसकी गान्ड फाड़ हि देना"
रजत बोले "सिमर रानी, बोल, निकाल लूँ लौडा औऱ डालदूँ गान्ड मे?"
दिदी बोलि "अरे नहि मेरे भडवे जेठजी, पूराचोद कर निकालना साले, नहि तोँ कल सें चोदने नहि दूँगी औऱ आप् क्याँ मेरी गान्ड फाडोगे, आप् कों तोँ पूरा मे गान्ड मे घुसेड लूँ, किसी कों नज़र नहि आओगे औऱ तुम् मेरे चोदू राजा, क्याँ सूखे सूखे चूचिदबा रहे होँ, ज़रा लन्ड चुसवाओ तोँ मजाआए!"
जीजाजीने लन्ड दिदी केँ मुँह मे पेल दिया औऱ उसकासिर पकडकर मुँह मे हि चोदने लगेउधर जेठजी नें चोदने कि स्पीड बढ़ा दि जीजाजी कि झांतें शेव कि हुईँ थीं, एकदम बच्चे जैसा चिकना पेट थां जेठजी कि अच्छी घनीथीं, मेरीतरह
मेरा बुराहाल थां लन्ड ऐसा फनफना रहा थां कि लगता थां कि मुठ्ठ मारलूँ उनतीन नंगे बदनों कि चुदाई देखकर मनआपे सें बाहर् होँ रहा थां दो जवान हैम्डसम मर्द औऱ मेरी चुदैल सुंदर बेहन औऱ क्याँ गाली गलौजकर रहे थें! उनकी बातों कां मजा हि औऱ थां मम्मी औऱ मे चोदते वक़्त कभी गाली नहि देते थें!
अब दिदी मस्ती मे मछली जैसी छटपटा रही थि रजत नें अचानक लन्ड बुर सें बाहर् खींच लिया "छोटे, तेरीयह चुदैल रंडीआज बहोत कीकिया रही हैं, शायद भइया केँ आने सें खुश हैं चल साली कां कचूमर बनादें आज, मे गान्ड मारता हु, तूँ चोद, देख्ना केसे मस्ती उतरती हैं इस भोसडीवाली कि, कल भइया केँ सामने लंगड़ा लंगड़ा कर चलेगी तौ समझ मे आएगा"
जीजाजी नें लन्ड दिदी केँ मुँह सें निकाला औऱ उसकी बुर मे पेल दिया दिदी झल्ला उठी "साले मादरचोद, चूसने भि नहि दिया, ओ जेठ जी, आप् हि लन्ड चुसवा लो कि अब भि मेरी गान्ड मे घुसाना चाहते होँ माल कि तलाश मे? औऱ भोसडीवाली होगी तेरी अम्मा, मेरी तोँ जवान टाइट बुर हैं!"
जीजाजी पलटकर नीचे हौ गये औऱ दिदी कों उपरकर लिया दिदी कि बुर मे उनका लन्ड घुसाहुआ थां दिदी कि भारी भरकम गान्ड भि अब मुझेसॉफ दिखी पहले जैसी हि गोरी थि पऱ औऱ मोटी होँ गई, थि रजत नें जल्दी लन्ड अंदरडाल दिया, एक् धक्के मे आधागाढ दिया"अरे मार डाला आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह रे, फाड़ दोगे क्याँ साले हरामी? तेल भि नहि लगाया" दिदी नें गाली दि
बिना उसकीबात कि परवाहा किएरजत नें लन्ड पूरा अंदरपेल दिया, फिन दिदी केँ उपरचढ कर उसकी गान्ड मारने लगे "भैया, इसकी चुचियाँ पकड़कर गान्ड मारो, साली केँ मम्मे मसलदो, पिलपिले करदो, बहोत नाटक करती हैं यह आजकल" जीजाजी नें कहा औऱ रजत नें दिदी कि चुचियाँ ऐसे मसालीं कि वोँ चीखउठी "अरेमर गयीँ, हाईईइ रे आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, यह दोनों मादरचोद कि औलादआज मुझेमार डालेंगे, कोई बचाओमर गैिईईईईईईईईईईईईईईईईई रीईईईई"
जीजाजी नें उसका मुँह अपने मुँह सें बंदकर दिया औऱ फिन दोनों भइयाउछल उछलकर मेरी बेहन कों आगे पीछे सें चोदने लगे उसकेबदन कों वोँ ऐसेमसल रहे थें जैसेकोई खेल कि गुडिया हौ बिस्तर पऱ लोटपोट होतेहुए वे दिदी कों चोदरहे थें कभी जीजाजी उपर होतेकभी जेठजी
दिदी कि दबीदबी चीखें सुनकर मुझेबीच मे लगा कि बेचारी दिदी कि सच मे हालत खराब हैं, बचाया जाए क्याँ अंदरजा कर, पर्र मुझे बहोत मजा आँ रहा थां क्याँ चुदरही थि दिदी, किसी रंडी जैसीआगे पीछे सें! एक् बारजब जीजाजी कां मुँह दिदी केँ मुँह सें हटा तौ वो मस्ती मे चिल्लाने लगी "चोदो सालो, गान्डुओ चोद डालो, मेरी गान्ड कां भूरता बनादो, मम्मी शपथ क्याँ मजा आँ रहा हैं"
क्रमशः………………
कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का complete - desi chudai mom son – New Episode
गतान्क सें आगे……………
याने मेरी दिदी भि उतनी हि चुदैल थि जितने यह दोनों चोदू! मे जोश मे नाँ जाने क्याँ करता, मुठ्ठ तौ अवश्य मार लेता पर्र पीछे सें किसी नें मेराहाथ पकड़ लिया चौंककर मैंने मुडकर देखा तोँ मांजी थीं अंधेरे मे नां जाने मेरे पीछेकब आकरखडी हौ गई, थीं मे सकते मे आँ गय़ा समझ मे नहि आँ रहा थां कि क्याँ कहू, क्याँ सफाईदूँ, पर्र उन्होंने मुझेचुप रहने कां इशारा किया औऱ हाथ पकडकर एक् कमरे मे लें गयीं दरवाजा बंद किया वोँ उन्हीं कां बेडरूम थां
"तौ अमित बेटा, पसन्द आया मेरे बेटों कां खेल?" उन्होंने पूछावे एक् गाउन पहनेथीं गाउन मे सें उनकी मोटी मोटी लटकती चूचियो कां आकारदिख रहा थां पेट भि कुछ निकला हुआ थां आख़िर इसउमर मे औरतों कां होता हि हैं, मम्मी कां भि थोडा बहोत हैं हाँ मम्मी कां बाकी जिस्म वैसे काफ़ी छरहरा हैं, शन्नो जी कि तुलना मे तोँ वो बच्ची लगेगी
मेराकस कर खड़ा थां कुछकुछ समझ मे आँ रहा थां दिदी केँ घऱ नाँ आने कां राज़ शन्नो जी नें मेराहाथ पकडकर बिस्तर पर्र बिठा दिया, आगे बोलीं "अरे शामा कों तूँ जबआया थां तौ असल मे रजत तेरी दिदी कों चोदरहा थां क्याँ छिनाल लड़की हैं, दिनरात चुदवाती हैं फिन भि मन नहि भरता उसका सुभह दीपकचोद कर जाता हैं, दिन मे उसका बड़ा भइयारजत चोदता हैं, रात कों दोनों सें चुदवाती हैं तबसो पाती हैं, वैसे मायके मे भि वोँ खुश थि, मुझेबता रही थि कि उसके मां औऱ भइयाउसे कितना प्रेम करते हें"
मे थोडा शरमा गय़ा कि घऱ कि बातयहा पताचल गयीँ, ! "अरे शरमाता क्यूं हैं, तूँ भि तौ अच्छा ख़ासा चोदू हैं, सोलहसाल कां हैं फिन भि माहिर हैं, तेरी दिदी तोँ तेरी बहोत तारीफ़ करती हैं"
मे चुपरहा शन्नो जी नें अपना गाउन उतार दिया"अब तुँ मेहमान हैं, तेरी खातिर करना मेरा फ़र्ज़ हैं तेरी दिदी तोँ वहा व्यस्त हैं, मुझे हि कुछ करना पड़ेगा वैसेपता नहि मे तुम्हारी तरफ अच्छी लगतीहू याँ नहि, तेरी मम्मी तोँ अच्छी हसीन हैं, फिगर भि मस्त हैं, मे उनके सामने क्याँ हू"
शन्नो जीअब नंगी मेरे सामने खडीथीं पुरी सेठानि थीं, एकदम सफ़ेद पके पपीते जैसागोल मटोल जिस्म, पके पिलपिले पपीते सि बड़ी बड़ी लटकी चुचियाँ, रसीले तोंद, नीचेशेव कि हुईँ गोरीपाव रोटी जैसी चूत औऱ झाड केँ तने जैसे मोटेपेर जब मुडी तौ उनकी पहाड सि गोरी गान्ड देखकर मुँह मे पानी आँ गय़ा कुछकुछ समझ मे भि आँ गय़ा वहा दिदी केँ संग जौ होँ रहा थां, वहा शन्नो जी कि सहमति सें हि हौ रहा थां
"आप् तौ बहोत सुंदर हें अम्माजी, अब मे क्याँ कहू!" मैंने जवाब दिया शन्नो जी नें आकर मेरे कपड़े उतारदिए "तौ चलो शुरुआत होँ जाओ, छप्पन भोग तेरे सामने हें, जोँ भोग लगाना हौ लगालो"
मेरा लन्ड देखकर उनका चेहरा खिलउठा "अरे अमित बेटे, क्याँ लन्ड हैं तेरा? सिमर बेटी नें बताया थां पऱ विश्वास नहि होता थां, कितना लंबा हैं? दसइंच?"
"नहि मांजी, आठइंच हैं पर्र काफ़ी मोटा हैं, आप् कों देखकर औऱ खड़ा हौ गय़ा हैं इसलिये आपकोदस इंच कां लगता हैं" मैंने जवाब दिया वैसे मेरा लन्ड हैं एकदम जानदार, तभी तौ मां औऱ दिदी मेरी दीवानी हें दिदी कि चुदाई केँ टाइम देखा थां, जीजाजी कां बहोत प्यारा लन्ड थां पर्र मुझसे दोइंच छोटा थां जेठजी कां अच्छा ख़ासा थां, मुझसे बस ज़रा सां छोटा
"अब आजा मेरे बेटे, तंग मतकर मे तोँ चूसून्गि पहले, इतना मस्त लन्ड हैं तोँ मलाई भि गाढी होगी" कहकर मांजी नें मुझे बिस्तर पर्र लिटा दियाफिन मेरा लन्ड चूसने लगीं लगता हैं बहोत तजुर्बा थां, एक् बार मे पूरा निगल लिया
मुझेमजा आँ गय़ा पर्र अब मुझसे नहि रहाजा रहा थां "मांजी, ज़राऐसे घूमिएे, मे भि तोँ आपकी चूत कां मजालूँ"
बिना लन्ड मुँह सें निकाले शन्नो जीघूम कर उलटी मेरेउपर लेट गयीं उनका भारीभरकम अस्सी किलो कां वजन मेरेउपर थां पऱ मुझेफूल जैसालग रहा थां मैंने उनकी टाँगें अलगकीं औऱ उंगली सें वोँ गोरी चिकनी चूत खोलीफिन उसमें मुँहडाल दिया चूत सें सफेद चिपचिपा पानीबह रहा थां मे उसपरताव मारने लगा
मम्मी कि चूत कां पानीअब थोडा पतला होँ गय़ा हैं, कम भि आता हैं, दिदी कां बड़ा गाढा हैं औऱ खूब निकलता हैं पर्र शन्नो जी कां इसउमर मे भि शहद थां औऱ जम केँ बहरहा थां जाने क्याँ खाती हें जौ इसउमर मे भि ऐसी रसीली बुर हैं- मे सोचने लगा लन्ड चूसते हुए मांजी नें मेरीकमर कों बाँहों मे जकड लिया थां औऱ मेरे चूतड प्रेम सें सहलारही थि बीचबीच मे उनकी उंगली मेरे गान्ड केँ छेद कों रगडने लगती थि
दोबार शन्नो जीझडी औऱ मुझेढेर सां शहद चखाया मैंने झडकर उन्हें पाव कटोरी मलाई पिला दि, हिसाब बराबर होँ गय़ा
उठकर शन्नो ज़ीने मुझेगोद मे लें लिया एक् मोटी चुची मेरे मुँह मे दे दि मुझे चुसाते हुए बोलीं "बड़ा प्यारा हैं तुँ बेटे, मलाई तौ जानदार हैं हि, चूत भि अच्छी चूसता हैं अब हफ्ते भर यहींरह मजा करेंगे"
मैंने चुची मुँह सें निकाल करकहा "मांजी, आप् इतनी गर्म हें, केसे आपकाकाम चलता हैं? मे तौ आज हि आयाहू, जब मे नहि थां तौ आप् क्याँ करतीथीं?"
"अरेसभी जान जाएगा, रुक तौ सहीयहा रहेगा तौ बहोत सीखेगा औऱ मजा भि लेगायह बता, मां कों तूँ कब सें चोदता हैं? पहले दिदी कों चोदा याँ मां कों?"
मैंने सभीबता दिया कि दिदी नें मुझे पहले चोदना शुरुआत किया, बचपन मे हम् एक् कमरे मे सोते थें इसलिये चुदाई शुरुआत करने मे कोई परेशानी नहि हुईँ जब दिदी कों पताचला कि मेरा लन्ड खड़ा होना शुरुआत होँ गय़ा हैं, तब सें वो मुझसे चुदवाने लगी उसके पहले भि वो मुझसे बुर चुसवाती थि औऱ अपनी चुचियाँ मसलवाती थि पहले पहले तौ उसने ज़बरदस्ती कि थि, बड़ी बेहन कां हकजता करबाद मे किशोरावस्था शुरुआत होने पऱ मुझे भि मजाआने लगाजब मेरा लन्ड खड़ा होनेलगा तोँ उसकेबाद तौ मजा हि मजा थां
नां जाने मां कों केसेपता चला गय़ा कि मेरा लन्ड खड़ा होनेलगा हैं तब उसने जल्दी मुझे अपनेपास सुलाना शुरुआत कर दिया औऱ पहली हि रात मुझसे चुदवा लियाबाद मे पताचला कि दिदी नें उसे बताया थां कि उसका बेटा जवान होँ गय़ा हैं दिदी औऱ मां कां चक्कर बहोत पहले सें हि थां, जब मे छोटा थां तब दोपहर कों औऱ रात कों मेरे सोने केँ बाद दोनों लिपट जातीथीं
जब एक् दिन मुझेपता चल गय़ा तोँ दोनों मिलकर मुझसे सेवा कराने लगीं हम् संगसंग मम्मी केँ कमरे मे सोनेलगे सेक्स कि यहभूख हमारे खून मे हि हैं ऐसा मम्मी नें बाद मे मुझे बताया थां
मेरी स्टोरी सुनकर शन्नो जी बोलीं "अरेयह हि हाल हमारे यहा हैं, चलो अच्छा हुआ हमारे खानदान मिलगये मे तौ मनारही थि कि किसीऐसे हि चुदैल खानदान कि चुदैल बहू मुझे मिले"
फिन मेराकान पकडकर बोलीं "तौ मादरचोद कैसालगा मेरी चूत कां रस, मजा आया?अरे साले, ऐसे आँखें फाड़कर क्याँ देखता हैं हरामी?"
उनकी गाली सुनी तोँ पहले मे सुन्न होँ गय़ा फिन उनको हँसते देखा तोँ तसल्ली हुइ मजा भि आयावी बोलीं "अरे चोदते टाइमखुल कर गाली गलौज करना चाहिए, मजाआता हैं तेरी दिदी केसे अपने पति औऱ जेठ कों गालीदे रही थि, सुना नहि?" मेरे लन्ड कों पकडकर बोलीं "देख, इसे तोँ मजाआया, फिन खड़ा होँ गय़ा हैं"
मे भि इस मीठीनोक झोंक मे शामिल हौ गय़ा "औऱ क्याँ, आप् जैसी चुदैल स्त्री कां यहपका पकारूप दिखेगा तौ साला लन्ड उठेगा हि, मेरे जैसे जवान लौंदों पर्र डोरे डालती हें आप् छिनाल कहीं कि, अबयह बताइए कि आप् कों चोदू याँ गान्ड मारूं, मम्मी कि बुर कि शपथ, आप् कि फाड़ दूँगा आज रंडी मांजी"
"बहोत अच्छे आमित, बस ऐसे हि बोलाकर औऱ गान्ड तोँ मे नहि मराऊन्गि, फडवानी हैं क्याँ! पर्र आँ जा मेरी बुर मे आँ जा, हाय रे तेरे जैसे हसीन छोकरे कों तोँ मे पूरा अंदर घुसेड लूँ" औऱ बिस्तर पर्र बुर खोलकर पाँव फैलाकर लेट गयीं मे चढ गय़ा औऱ लन्ड पेल दिया पुक्क सें पूरा अंदरसमा गय़ा जैसे बुर नहि, कुंआ हौ "साली बुर हैं याँ भोसडा?" मैंने कहा "औऱ इतनी चिकनी, बच्ची जैसी! आप् शेव करती होँ नां रोज?"
"हाँ बेटे, चिकनी बुर अधिक अच्छे सें चुसती हैं, मे तोँ बुर चुसवाने कि शौकीन हू, अब बातें नां कर औऱ चोद साले मादरचोद मुझे, देखूकुछ दम हैं याँ ऐसे हि बोलता हैं? देखू तेरी मम्मी बेहन नें कितना सिखाया हैं तुम्हें, भोसडीवाले!" औऱ मुझे पकडकर वे चूतड उछालने लगीं
मे शुरुआत हौ गय़ा उनके भोसडे मे लन्ड आहिस्ता सटकरहा थां दो मिनिट बाद अम्माजीने बुर सिकोड ली औऱ मुझेलगा जैसे किसी कुँवारी बुर कों चोदरहा हू मेरे चेहरे कों देखवे हँसने लगीं"अरे तूने देखे नहि हैं मेरी बुर केँ कारनामे, चलचल अपनाकाम कर हरामी कि औलाद, तेरी दिदी कि सासू माँ कों खुशकर"
क्रमशः………………
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