कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का complete - desi chudai mom son – New Episode
ससुराल सिमर कां—4
गतान्क सें आगे……………
मैंने उन्हें मनभर केँ चोदाकभी उनका मुँह चूसता तौ कभी चुची मुँह मे लेँ लेता मां कों भि खूबदेर चुदाने कां शौक थां इसलिये मुझे बिनाझडे घंटों चोदने कि आदत थि जब पहलीबार शन्नो जीझडी तौ सिहरकर मुझे चिपटा लिया"हाय रे राजा, मार डालारे, तुँ तौ बड़ा जुल्मी हैं बेटे"
मैंने औऱ कस केँ धक्के लगाते हुएकहा "ठहरजाओ रंडी सासूजी, अभि क्याँ हुआ हैं, आज आपके भोसडे कों इतना चौड़ा कर दूँगा कि आपके दोनों बेटेफिन उसमें घुस जाएँगे"
आधे घंटे चोदने केँ बाद मे झडातब तक चोदचोद कर शन्नो जी कि हवा टाइटकर दि थि बादबाद मे तोँ वे रीरियाने लगीथीं "अब छोड़दे रे बेटे, रुक जाओ गान्डू, अब नहि रहा जाता, कितना चोदेगा? व्यक्ति हैं याँ घोडा?" पर्र मैंने उनका मुँह दबोचकर चोदना चालूरखा
बाद मे सुसताने केँ बादवे बोलीं "तुँ तोँ हीरा हैं रे हीरा, अब यहींरह मेरी बुर मे घऱ नाँ जा, तेरी अम्मा नें बहोत चुदा लिया, अब हमारी सेवाकर इतनी भयानक चुदाई बहोत दिनों मे नसीब हुईँ हैं"
मे भि उनकी चुची मुँह मे लिए पड़ा थां, उनके खजूर जैसे निपल कों चूसरहा थां क्याँ महिला थि! एकदममाल थां! तभी पीछे सें आवाज़ आई"लो अम्मा, तुम् शुरुआत होँ गयीं? मुझे मालूम थां, ऐसे चिकने छोकरे कों तुम् क्याँ छोडोगी" पीछे देखा तौ जेठजी खड़े थें मुझे अटपटा लगा औऱ मे उठनेलगा तोँ बोले"अरे लेटारहा दोस्त, मजाकर, हमारी अम्मा भि चीज़ हैं, सभी कों नसीब नहि होती"
शन्नो जी नें उनसे पूछा "होँ गय़ा तुम् लोगों कां? बहूसोई याँ नहि? तुम् लोग आँ रहे हौ यहा?"
"अरे वोँ रांड़ क्याँ सोएगी इतनी जल्द! अभि अभि लन्ड चुसवा कर आँ रहाहू अबरजत चुसवा रहा हैं इसकेबाद एक् बार औऱ चोदेम्गे तब सोएगी सालीआज अम्मा तुम् आमित कों निचोड़ लोरात भर, नया नया लौंडा हैं, तुम् मजाकर लो अकेले मे, मे चलताहू, वहा वोँ साली रंडीफिन तडपरही होगी"रजत चलेगये
मैंने अंमाजी कि ओर देखा "तौ अंमाजी, यहा भि "
मेरीबात काटकर वी बोलीं "तौ क्याँ, तुझेही लगता हैं कि तूँ हि एक् मादरचोद हैं? अरे मेरे बेटों कों तौ मे बचपन सें संग सुलाती हूरजत तोँ विवाह नहि कररहा थां, बोलता थां क्याँ फ़ायदा, अम्मा सें बढ़िया चुदैल कहां मिलेगी पर्र तेरी बेहन कां नाताआया तोँ मैंने मना लिया सिमर कों देखकर हि मे समझ गयीँ, थि कि हरामी छोकरी हैं, बहोत चुदवायेगी अबदेख सभी केसेखुश हें"
मैंने फिन पूछा "तौ अब आप् लोग क्याँ करते हौ संगसंग दिदी केँ आने केँ बाद?"
वी बोलीं "सभीसमझ जाएगा अबइधर आँ, मे लन्ड चूसकर खड़ाकर देतीहू, आज तौ रातभर चुदवाऊन्गि तुझसे"
उसरात मैंने मांजी कों दोबार औऱ चोदा सोने मे रात केँ तीनबाज गये एक् बार शन्नो जी नें मुझपर चढकर चोदा औऱ एक् बार मैंने पीछे सें कुतिया स्टाइल मे उनकीली जबवे मुझपर चढकरउचक रहीथीं तौ उनकी उछलती चूचिया देखते हि बनतीथीं कुतिया स्टाइल मे भि उनके मम्मे लटककर ऐसेडोल रहे थें जैसेहवा मे पपीते पीछे सें उनकी चौडी रसीले गान्ड कों देखकर मेरामन हुआ थां कि गान्ड मारलूँ पऱ उन्होंने मनाकर दिया
सुभहसभी देर सें उठे रविवार थां इसलिये छुट्टी थि नाश्ते केँ टेबल पऱ सभीऐसे बोलरहे थें जैसेकुछ हुआ हि नां होँ मे हि कुछ शरमारहा थां सोचरहा थां कि रात कि बातें सपना तोँ नहि थें वे मेरी तकलीफ़ देखकर हँसरहे थें जीजाजी नें प्रेम सें समझाया "अमित, अब दोपहर कों देख्ना, कल कां तौ कुछ भि नहि थां"
दिदी हँसरही थि "सम्हल कर रहना आमित भैया, यहा तौ सभी एक् सें एक् हें अम्माजी कों हि देखो, जब सें तेरे बारे मे बताया, यहीं बोलती थीं कि अरे बुलालो उस छोरे कों अच्छा हुआ तुँ कल आँ गय़ा नहि तौ कोई तुम्हे लेने आँ जाता"
नाश्ते केँ बादसभी फिनदो घंटे कों सोलिए रातभर कि थकान जोँ थि दोपहर केँ खाने केँ बादजब घऱ केँ नौकरचले गये तौ सभी दिदी केँ बेडरूम मे जमाहुए मैंने देखा कि वहा कां बिस्तर दोडबल बेड केँ बराबर कां थां सातआठ लोगसो जाएँ इतना बड़ा
कमरे मे आकरसभी नें कपड़े उतारना शुरुआत करदिए सभी सें पहले अम्माजी औऱ दिदी नंगी होँ गयीं दिदी कि जवान मादक जवानी औऱ शन्नो जी कां मोटा गोरापके फल सां शरीरदेख कर मेरा तन्ना गय़ा थां पऱ मे कपड़े निकालने मे सकुचा रहा थां उधर जीजाजी औऱ जेठजी भि नंगे हौ गये अच्छा ख़ासे हैम्डसम थें दोनों, रजत कां कसरत कियाहुआ बदन थां औऱ दीपक जीजाजी कां जिस्म अच्छा चिकना छरहरा नाज़ुक सां थां! दोनों केँ लन्ड खड़े थें, जीजाजी कां लगभगछह इंच कां होगारजत कां लगभग मेरे जितना, याने साढ़े सातआठ इंच कां होगा पहलीबार पास सें मे नंगे जवान लंडों कों देखरहा थां, एक् अजीब सां रोमांच मुझे होनेलगा
कपड़े निकालने कि मेरी हिचकिचाहट देखकर शन्नो जी बोलीं "अरेबहू, शरमारहा हैं तेरा भइया, तुँ हि निकाल दे इसके कपड़े"
दिदी लचकते हुए मेरेपास आई "क्याँ शरमाते होँ भैया लड़कियों जैसे, चलो निकालो" उसने मुझे नंगाकर दिया
जीजाजी नें सीटी बजाई "साले, तेरा लन्ड तौ एकदमा जोरदार हैं, तभी अम्मा कल हमारे कमरे मे नहि आईं, मजा लेँ रही थि अकेले अकेले"
शन्नो जी नें मुझे पकडकर एक् कुर्सी पर्र बिठा दिया "रस्सी लाओबहू याँ रूको, रस्सी नहि, दोतीन ब्रा लें आँ, तेरी औऱ मेरी" दिदी जाकर अलमारी सें ब्रा निकाल लाईघऱ मे तोँ वे दोनों शायद पहनती हि नहि थीं
दिदी औऱ उसकी सासू माँ नें मिलकर ब्रा सें मेरेहाथ औऱ पाँव कुर्सी केँ पैरों सें बाँधदिए बड़ामजा आँ रहा थां, उन रेशमी रसीले ब्रा कां स्पर्श हि मुझे मदहोश कररहा थां शन्नो जी मुझेछूआ कर बोलीं "घबरामत बेटे, ज़रा तरसाना चाहते हें तुम्हे अबबैठ औऱ हमारा खेलदेख देख केसे हमारा परिवार आपस मे प्रेम करता हैं ज़रामजा लेँ, फिन तेरी भि परिवार मे शामिल कर लेंगे" दिदी नें मुझे देखा औऱ मुँहबना कर चिढाने लगी कि लें भुगत
अम्माजी नें उसे पकडकर बिस्तर पर्र खींचते हुएकहा "आजाबहू, यहालेट जारजत, दीपक, आओ, साले राजा कों दिखाओ कि हम् उसकी बेहन कों कितना प्रेम करते हें, ससुराल मे उसका कितना ख़याल रखते हें"
दिदी कों बिस्तर पऱ लिटा केँ शन्नो जी नें उसे बाँहों मे भर लिया औऱ चूमने लगीं "मेरी बेटी, मेरी दुलारी, तेरे कारणइस घऱ मे रौनक आँ गयीँ, हैं, आँ मुझे अपना चूमादे एक् मीठा सां"
सिमर दिदी नें अपनी सासू केँ गले मे बाँहें डालदीं औऱ उनका मुँह चूमने लगीं जीजाजी औऱ जेठजी उनकेपास मे बैठकर दिदी केँ बदन कों सहलाने लगे दोनों नें एक् एक् मम्मा मुँह मे लिया औऱ दबाते हुए चूसने लगेरजत नें दो उंगलियाँ दिदी कि बुर मे डालदीं दिदी अब अपना मुँहखोल कर शन्नो जी कि जीभचूस रही थि
मनभर केँ दिदी कों अपनीजीभ चुसवाकर अम्माजी उठीं मुझे बोलीं "देख, केसे तेरी बेहन कैसी प्यासी हैं मेरे चूबनों कि, अबइसे अपनी चूत कां प्रसाद देतीहू तेरे सामने, बड़ी भाग्यवान हैं तेरी बेहन जौ अपनी सासू माँ कि चूत सें प्रसाद पाती हैं रोज दीपक तुँ बहू कि चूत चूस, गर्मकर, देख झडाना नहि, उसका पानीबाद केँ लिएरख, तूँ लेटीरह बेटी, मे आतीहू तुझेही तेरामन पसन्द रस चखाने कों"
दिदी केँ सिर कों तकिये पर्र रखकर शन्नो जी उसके दोनों ओर घुटने टेककर बैठ गयीं औऱ अपनी बुर कों दिदी केँ मुँह मे दे दिया दिदी उसेऐसे चूसने लगी जैसेजनम जनम कि प्यासी हौ मुझेअब शन्नो जी केँ महाकाय गोरे चूतडदिख रहे थें जोँ धीरे-धीरे धीरउपर नीचे हौ रहे थें वे दिदी केँ मुँह कों चोदरही थीं"अरी ओ रांड़, भूल गयीँ, मैंने जोँ सिखाया थां, जीभडाल मेरी बुर मे औऱ चोद, ज़रा मुझे भि तौ तेरीजीभ कों चोदने कां मौका मिले"
रजत जीजाजी सिमर दिदी केँ बूब्ज़ कों दबाते औऱ चूसते रहेरजत खिसककर दिदी कि टाँगों केँ बीच आँ गये औऱ उसकी चूत पर्र जीभ चलाने लगे शन्नो जी नें दिदी कि जीभ कों पाँच मिनिट चोदा औऱ फिन सिसककर उठ बैठीं "हटरजत, अब तूँ बहू केँ मम्मे दबा, दीपक, अपनी पत्नि कों अपना लन्ड दे चूसने कों" औऱ स्वयं रजत कि स्थान लेकर दिदी कि चूत कों चाटने लगीं "आमित बेटे, बड़ी मीठी हैं रे तेरी बेहन, तुम्हे तोँ मालूम हैं, अरे हम् तीनों कों इसकी चूत कां ऐसा चसकालगा हैं कि स्वाद लिए बिनामजा हि नहि आता"
क्रमशः………………
कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का complete - desi chudai mom son – New Episode
ससुराल सिमर कां—5
गतान्क सें आगे……………
दिदी कि यहा मीठी हालत देखकर मे पागल सां हौ गय़ा थां लन्ड लोहे जैसा होँ गय़ा थां उधरवे चारों भि अब फनफना रहे थें अम्माजी नें जेठजी कां लन्ड मुँह मे लेँ लिया औऱ दिदी कि चूत मे अपनी उंगलियाँ अंदर बाहर् करने लगीं जीजाजी अब दिदी कों लन्ड चुसाते हुए अपनी मम्मी कि चूत चूसरहे थें चारों जिस्म ऐसेआपस मे उलझे थें कि पता हि नहि चलरहा थां कि कौन क्याँ कररहा हैं
शन्नो जी बोलीं "अब नहि रहा जाताचलो शुरुआत करोठीक सें तुम् दोनों नालायको, चलोआओ औऱ ठीक सें हम् दोनों औरतों कि सेवा शुरुआत करो" जीजाजी नें लन्ड दिदी केँ मुँह सें निकाला औऱ अपनी मां सें चिपटकर उनकी चुचियाँ चूसने लगे औऱ रजत दिदी पऱ चढकर उसके मम्मे दबाते हुएउसे चूमने लगे
जल्द हि फिन लन्ड औऱ चूत चूसाई शुरुआत हौ गयीँ, रजत अपनी मम्मी कि चूत चूसरहे थें दिदी उनका लन्ड चूसरही थि औऱ जीजाजी दिदी कि चूत मे मुँह डाले पड़े थें बारबार वे स्थान बदल लेते, बस चुदाई नहि कररहे थें
शन्नो जी नें दिदी कि कमर मे हाथडाल करउसे अपनीओर खींचा "बहू, अब अपनी चूत कां पानी पिलादे तरीके सें, परसों चुसी थि, तरस गई, तेरे जवानरस कों, औऱ रजत, तूँ आजा, मेरी बुर चूस लें, आज बहोत पानी पिलाऊन्गि तुम्हें औऱ दीपक बेटे, आँ अपना लन्ड देदे मेरे मुँह मे"
आधे घंटेयही कार्यक्रमा चलतारहा मांजी नें मनभरकर दिदी कि चूत चुसी दिदी उनकेसिर कों जांघों मे जकडकर धक्के माररही थि "चूसो सासूमा, अरे तेरीये बहू तेरे कों इतना अमृत पिलाएगी कि तीरथ जाने कि ज़रूरत नहि पडेगी चल छिनाल, जीभडाल अंदर, जीभ सें चोद मुझे रांड़"
रजत जीजाजी अपनी मां केँ सिर कों अपनेपेट सें चिपटाकर चोदरहे थें "तेरा मुँह चोदू मेरी छिनाल मम्मी, क्याँ साली कां गला हैं नरमनरम, अभि तेरे कों मलाई खिलाता हू अपने लौडे कि"
रजत जीजाजी जल्द हि झडगये उनका लन्ड खाली करके शन्नो जी बोलीं "इतने सें क्याँ होगा बेटे, दीपक तुँ उपर आँ जा, काफ़ी चूत कां शरबतपी लिया मेरा, अब मुझे मलाई खिलाबहू तूँ अब अपनी सासूमा कां औऱ प्रसाद लें लें, जल्दकर छिनाल, मेरेसिर कों केसे अपनी टाँगों मे दबारही थि, अब तेरा मे क्याँ हाल करतीहू देख रंडी कि औलादरजत, तूनेमजा लेँ लिया नाँ, अब अपनी बीबी कि बुर चूसकर ज़रा विटामिन पा लें"
रजत कां लन्ड उन्होंने मुँह मे लिया औऱ अपनी टाँगें फैलाकर दिदी कां मुँह अपनी चूत सें सटा दियाफिन कस केँ उसे अपनी मोटी मोटी जांघों मे भींचकर पेर चलाने लगीं दिदी केँ मुँह सें गोंगों कि आवाज़ निकलने लगी वो अम्माजी केँ पैरों कों अलग करके अपनासिर छुड़ाने कि कोशिश करनेलगी पर्र शन्नो जी कि मोटी मोटी जांघों कि ताक़त कां उसे अंदाज़ा नहि थां आख़िर उसनेहार मानली औऱ चुपचाप शन्नो जी कि चूत मे मुँहदिए पडीरही रजत कों अपनी चूत चुसवाते हुए उसने अम्माजी केँ चूतडो कों बाँहों मे भर लिया
आख़िर शन्नो जी नें सभी कों रुकने कों कहाजब वे चारों अलगहुए तौ मे पागल होने कों थां शन्नो जी कों पुकार कर मैंने मिन्नत कि "अम्माजी, मे मर जाऊन्गा, मुझे छोडो, अब चोदने दो, किसी कों भि चोदने दो"
सभी उठकर मेरेपास आएवेसभी भि बुरीतरह मस्त थें रजत जेठजी औऱ दीपक जीजाजी अपने अपने लौडेहाथ मे लेकर मुठिया रहे थें दिदी कि साँसतेज चलरही थि, वो अपने हि मम्मे दबारही थि मांजी अपनी चूत मे उंगली कररही थीं मेरेपास आईं औऱ बोलीं "चलोसभी रेडी हें मैच खेलने कों, अबइस लौम्डे कां क्याँ करें?यह भि पूरा रेडी हैं, लन्ड देख, घोड़े जैसा होँ गय़ा हैं"
सभी बारी बारी सें मेरे लन्ड कों हाथ मे लेकर देखने लगे ख़ासकर रजत औऱ दीपक नें तोँ बड़ीदेर तक उसेहाथ मे लेकर मुठियाया "क्याँ जानदार जानवर हैं सिमर! अम्मा, इसे किसके किसछेद मे डालें, जहाँ भि जाएगा, परेशानी भि देगा औऱ मजा भि देगा"रजत बोले
शन्नो जी बोलीं "इसी सें पूछते हें, अमित, पहले एक् वायदा करतब छोड़ूँगी तुझेही"
मैंने मचलकर कहा"कुछ भि करालो मुझसे अम्माजी, आपकी गुलामी करूँगा जनमभर, बसरहम करो, यह लन्ड मार डालेगा अब"
शन्नो जी बोलीं "अपनी मां कों यहा लेँ आनां अगले हफ्ते, बेचारी मेरी समधन हि अकेली हैं उधरफिन जुडेगा पूरा कुनबा, तीन मर्द, तीन औरतें मुझे भि समधन सें ठीक सें गले मिलना हैं, विवाह मे तौ कुछ भि बातें नहि करपाई"
सिमर दिदी अपनी बुर मे उंगली करतेहुए बोलि "हाँ भैया, लें आओ अम्मा कों, तीन महने हौ गये उसका प्रसाद पाएइन लोगों कों भि मम्मी कां प्रसाद मिलजाए तोँ मुझे अच्छा लगेगा" फिनआँख मारकर हँसने लगी
दीपक जीजाजी बोले"अरे हाँ भइया, हमें भि तोँ अपनी सासू माँ कि सेवा करनेदो, दोनों भइया मिलकर उनकीखूब सेवा करेंगे, हैं नाँ भैया?"
रजत बोले "बिलकुल, विवाह मे देखा थां, बड़ी हसीन हें बहू कि माताजी, मे तौ अपनी अम्मा मान लूँगा उनको"
मेराहाल औऱ बुरा होँ गय़ा कल्पना कि कि यहसभी मिलके मम्मी केँ संग क्याँ करेंगे, तोँ ऐसालगा कि लन्ड सूजकर फट जाएगा
"तोँ बोल मम्मी कों लेँ आएगा?" अंमाजी नें पूछा मैंने मूंडी हिलाकर हाँकहा दिदी नें सभी ब्राखोल दीं मे उठा औऱ लन्ड हाथ मे लेकर खड़ा हौ गय़ा शन्नो जी कि ओर देखने लगा कि कौन मुझेगले लगाएगा?
वे दिदी कों बोलीं "इतने दिनों सें भइया मिला हैं, तुँ भइया केँ संगमजा करबहू दीपक कों भि संग लें लें, जीजा साले कों भि आपस मे मिलने दे मे रजत बेटे कों कहतीहू कि ज़रा मां कि सेवाकरे आँ रजत"
रजत नें शन्नो जी कि कमर मे हाथडाल करउठा लिया औऱ चूमते हुए बिस्तर पऱ लेँ गये मे देखता हि रह गय़ा, इतनी आसानी सें उनका अस्सी किलो कां जिस्म रजत नें उठाया थां कि जैसेनई नवेली दुल्हन होँ शन्नो जी मेरेइस अचरज पर्र हँसकर बोलीं "अरे बचपन सें यह दोनों उठाते हें मुझेऐसे हि पहले मे दुबली थि अब मोटी हौ गई, हू पऱ रजतअब भि अपनी अम्मा कों उठा लेता हैं हाँ बेचारा दीपक ज़रा नाज़ुक हैं, अब उठाने मे थक जाता हैं"
रजत नें अपनी मां कों बिस्तर पर्र पटका औऱ चढ बैठा सीधे लन्ड बुर मे डाला औऱ शुरुआत होँ गय़ा "अरे मादरचोद, सीधे चोदने लग गय़ा, मां कि चूत नहि चूसेगा आज?" अम्माजी नें उलाहना दिया
"अम्मा, बाद मे दीपक याँ आमित सें चुसवा लेना याँ फिन तेरीबहू सें, वोँ तोँ हमेशा सजधजकर रहती हैं, आज तौ मे तुम्हारी तरफ घंटेभर बस चोदून्गा कलरात अमित तेरीचोद रहा थां, वोँ देखकर मुझे ख़याल आया कि मैंने तुम कोतीन चारदिन सें नहि चोदा" कहकररजत नें मुँह मे मां केँ होंठलिए औऱ हचकहचक कर चुदाई शुरुआत कर दि
दिदी मेराहाथ पकडकर बिस्तर पऱ लें गयीँ, "तुँ बुर चूस लेँ रे मेरे राजा पहले, बहोत दिन सें चूत कां पानी नहि पिलाया तेरी पहलेचूस लेँ, अभि सॉफमाल हैं मेरी बुर मे, बाद मे चुदकर स्वाद बदल जागेगा" वोँ बिस्तर केँ छोर पर्र पेर फैलाकर बैठ गयीँ, औऱ मैंने सामने नीचेबैठ कर उसकी चूत मे मुँहडाल दिया इतने दिनों बाद दिदी कि चूत कां रस मिला, मे निहाल होँ गय़ा
जीजाजी मेरेसंग नीचेबैठ गये औऱ एक् हाथ मेरीपीठ पर्र फिराने लगे "आहिस्ता चाट साले, मजा लें अपनी बेहन कि बुर केँ पानी कां लन्ड तेरा बहोत मस्त हैं, इतना मस्त लन्ड नहि देखा" उनका दूसरा हाथ मेरे लन्ड कों पकडकर मुठिया रहा थां इतने प्रेम सें वेकररहे थें कि मे झडने कों आँ गय़ा "अरे हरामी, साले कों झडामत अभि, मुझे चुदवाना हैं" दिदी नें उन्हें मीठी गाली दि
क्रमशः………………
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ससुराल सिमर कां—6
गतान्क सें आगे……………
दिदी नें झडकर अपना पानी मेरे मुँह मे फेका औऱ उसे फटाफट पी केँ मे उठकर खड़ा हौ गय़ा "चल दिदी, अब गान्ड मरा लें आज मे तुझेही चोदून्गा नहि, गान्ड मारूँगा कल मांजी कों बहोत चोदा हैं, अब गान्ड कि भूख हैं मुझे"
"गांडे तेरी बहोत मिलेंगी साले, हाँ चूतेदो हि हें आज अपनी बेहन कों चोद लेँ, तूँ इधर आँ रंडी" कहकर जीजाजी बिस्तर केँ सिरहाने सें टिककर बैठगये सिमर केँ बाल पकडकर उसकासिर अपनीगोद मे खींचा औऱ लन्ड उसके मुँह मे ठूस दिया "अमित, पीछे सें चढजा साली पर्र"
मैंने दिदी कि कमर मे हाथडाल कर उठाया औऱ उसे घुटनों औऱ हाथों पर्र कर दिया उसके पीछे घुटने टेककर एक् बार प्रेम सें उसकी बुर कों चूमा, बहोत दिनबाद मेरी प्यारी कों पास सें देखा थां फिन लन्ड अंदर उतार दिया दिदी कि मखमली म्यान नें मेरे लन्ड कों दबोच लिया, जैसेकह रही होँ, आजा प्यारे, बहोत दिन मे मिले हें दिदी केँ कूल्हे पकडकर मे चोदने लगा
जीजाजी बोले"अरे चढजा दोस्त उसपर, जवान हैं, तेरावजन सह लेगी मे औऱ रजत अक्सर चढते हें, बड़ी मस्त घोडी हैं मम्मी कि बातअलग हैं, उसकीउमर अब होँ गयीँ, हैं इसलिये वजन नहि झेल पाती, नहि तौ जवानी मे तौ मुझे औऱ रजत कों खूब सवारी कराती थि
मैंने झुककर अपनावजन दिदी पऱ डाल दिया औऱ पांव उठाकर उसकीकमर केँ इर्द गिर्द जकडलिए दिदी आहिस्ता मेरेवजन कों संभालती हुए चुदवाती रही, चू तक नहि कि, वैसे उसका मुँह जीजाजी केँ लन्ड सें भरा थां मे उसके मम्मे पकडकर दबाते हुएकस केँ चोदने लगा क्याँ मजा आँ रहा थां जीजाजी कि मन हि मनदाद दि क्याँ आसन सिखाया थां मेरी बेहन कों
अब जीजाजी कां सिर मेरे सामने थां, एक् फुटदूर उनकी आँखों मे अजब खूआरी थि बोले"उधर देख, मम्मी बेटे कि क्याँ जोरदार चलरही हैं" देखा तौ बिस्तर केँ दूसरे छोर पऱ रजत अपनी मम्मी कों कसकरचोद रहे थें शन्नो जी नें अपनी मोटी टाँगें उनके चूतडो केँ इर्द गिर्द समेटली थीं औऱ चूतड उछाल उछालकर चुदवा रहीथीं
तभी जीजाजी नें मेरागाल चूम लियाफिन मेरेसिर कों हथेलियों मे लें कर मेरे होंठ चूमने लगे मे सिहरउठा पहला मौका थां कि किसी मर्द नें चूमा थां पर्र अब मे इतना मस्ती मे थां कि मुझे ज़रा भि हिचकिचाहट नहि हुइ आँखबंद करके मे उनके चूमने कां जवाब देनेलगा जीजाजी केँ मुँह औऱ गालों सें बड़ी प्यारी खुशबू आँ रही थि, लगता हैं इत्र याँ आफ्टर शेव कि थि अब मे झडने कों थां इतनामजा आया कि मैंने जीजाजी केँ होंठ दाँतों मे पकड़लिए फिन कसमसा करझड गय़ा
मेरे लस्तहुए शरीर कों सहारा देतेहुए जीजाजी नें अपनीजीभ सें मेरा मुँह खोला औऱ मेरीजीभ मुँह मे लेकर चूसने लगेसंग हि अपने चूतड उछालने लगेवे भि झडने कों आँ गये थें एक् आख़िरी धक्के केँ संगवे सिमर दिदी केँ मुँह मे झडगये
कुछदेर बाद मैंने जीजाजी केँ मुँहसे अपना मुँह हटाया औऱ उठकर बाजू मे बैठ गय़ा दिदी कों नीचे लिटाकर जीजाजी नें उसकी चूत मे मुँहडाल दियाजीभ निकाल करउसे चाटने लगे मे देखने लगा मेरा सफेद वीर्य दिदी कि बुर मे सें बहरहा थां जीजाजी नें उसे पहले चाटा औऱ फिन चूत चूसने लगे
उधर दिदी नें मुझे इशारा किया कि पासआऊ औऱ उसे चूम्मा दू उसका मुँहबंद थां मैंने जैसे हि उसके मुँह पर्र अपने होंठरखे, उसने मुँहखोल कर जीजाजी कां थोडा वीर्य मेरे मुँह मे छोड़ दिया मे थूक नाँ दूं इसलिये मेरे मुँह कों वोँ अपने मुँह सें जकडेरही आँखों सें मुझे इशारा किया कि निगलजाऊ बहोत बदमाश थि, हँसरही थि कि कैसा उल्लू बनाया मैंने मन कड़ा किया औऱ निगल गय़ा चिपचिपा खारा स्वाद थां मुझे बुरा नहि लगा आख़िर ऐसी धुआँधार चुदाई मे कुछ भि जायज़ हैं ऐसा मैंने सोचा
उधर रजत भि अबझडगये थें मांजी टाँगें पसारकर पडीथीं बोलीं "इधरआओ अमित बेटे" मे उठकरपास गय़ा रजत नें अचानक झुककर मेराझडा लन्ड मुँह मे लेँ लिया औऱ चूसने लगेसॉफ करने केँ बाद बोले "अमित, तेरी दिदी कां माललगा थां इसपर, कौन छोडेगा इस खजाने कों? वैसे थोड़ी मलाई तेरी भि थि, बहू कि चूत केँ शहद मे मिलकर बहोत मस्तलग रही थि" फिन उठकर सरककर दिदी केँ पास पहूचगये "लो रानी, मलाई तौ गई, मां कि चूत मे, तुँ लन्ड चूसकर संतोष कर लें"
उनकाझडा लन्ड मुँह मे लेकर दिदी चूसने लगी जीजाजी अब भि उसकी चूत जीभ सें टटोलरहे थें रजत बोले"अरे छोटे, अपने साले कि मलाई इतनी अच्छा लगी कि अब बुर मे गहराई सें घुसकर कतरेढूढ रहा हैं"
मे मांजी केँ पास पहूचा तौ उन्होंने मेरी गर्दन पकडकर अपनी टाँगों केँ बीच मेरासिर दबा दिया"चल, चाट लेँ, बहोत पानी बहाया हैं आज मैंने" उनकी चूत सें गाढी सफेद मलाईटपक रही थि रजत कां वीर्य थां! मे झिझका तोँ मेराकान पकडकर बोलीं "अरे मेरा गुलाम बनकर रहने वाला थां नां तुँ भोसडीवाले, चल, अपनी मालकिन कां हुकुम मानसॉफ कर चुपचाप, औऱ कोई बेकार चीज़ नहि चखारही हू, मस्त मर्दाना मलाईचखा रहीहू तुम्हें"
मैंने जीभ निकाली औऱ चाटने लगा चूत कां औऱ वीर्य कां मिला जुला स्वाद थां खराब नहि थां पास सें उस बुरीतरह चुदी हुई लाललाल चूत कां नज़ारा भि ऐसा थां कि मे अपने आप् कों रोक नहि पाया औऱ चाटने लगा
पूरी चूत चटवाने पर्र शन्नो जी नें उंगलियों सें बुर चौडी कि औऱ बोलि "अभि औऱ हैं, जीभडाल" लाललाल भोसडे केँ अंदर सफेद सफेद कतरे फँसे थें मे जीभडाल डालकर चूसने लगा मांजी अब भि गर्मथीं मेरासिर पकडकर मेरे मुँह कों अपनी बुर पर्र घिसने लगीं एक् बारफिन झडकर हि मुझे छोड़ा मुझे अपनीगोद मे खींच लिया औऱ चूमते हुए पूछा"मजा आया?"
मैंने हामीभरी फिनमन नाँ माना तौ धीमे स्वर मे पूछा "अम्माजी, यह जीजाजी नें मेरा चूम्मा लियाफिन दिदी नें उनका वीर्य पूर निगले बिना हि मुझेचूम लियारजत नें मेरा लन्ड चूस लिया, दिदी केँ चूत केँ पानी केँ लिए आप् नें भि अपनी चूत चुसवाई जब कि उसमें रजत कां वीर्य थां मैंने नहि सोचा थां कि ऐसाकुछ भि होता हैं"
मांजी हँसने लगीं"अरे तुँ भोला हैं रजतअसल मे तेरे लन्ड कां स्वाद लेना चाहता थां, बहू कि बुर केँ पानी कां तौ बहाने थां तेरी बेहन नें भि जानबुझ कर तेरी अपने पति कि मलाई चखाई, तुम्हारी तरफबता रही थि कि कितनी जायकेदार हैं इसीलिए तोँ रोज पीती हैं मे भि तुझेही अपने बड़े बेटे कि मलाई चखाना चाहती थि, चूत चुसवाने कां तोँ बहाने थां औऱ दीपक नें तुम्हे चूमा, उसमें क्याँ बात हैं, तुँ अच्छा हसीन लौंडा हैं, उसकामन नहि माना"
मे चुपरहा शन्नो जीआगे बोलीं "तुझेही भि अच्छा लगा नाँ? झूटमत बोल, देख तेरा लन्ड केसेसिर उठाने लगा हैं अरे बेटे, जब पाँच पाँच नंगे जिस्म मिलेंगे तोँ किसेफरक पड़ता हैं कि कौन मर्द हैं कौन स्त्री औऱ चूत कि चासनी औऱ लन्ड कि मलाई कां चस्का एक् बारलग गय़ा तोँ औऱ कुछ अच्छा नहि लगता"
क्रमशः………………
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