सबाना और ताजीन की चुदाई complete - choot ki pyaas - Complete Kahani Part 1
सबाना औऱ ताजीन कि चुदाई -1
हेल्लो मे यानी आपका साथीराज शर्मा एक् औऱ मस्तकथा लेकर हाजिर हूं दोस्तो आप् तौ जानते हि होंगे कि एक् मर्द सें अधिक सेक्स एक् स्त्री मे होता हैं जब मर्द स्त्री कि गर्मी शांत नहींकर पाता हैं तौ स्त्री पर्र क्याँ गुजरती हैं औऱ यही सें एक् स्त्री कां पतन होना शुरुआत हौ जाता हैं यह स्टोरी एक् भि कामातुर खूबसूरत औरत सबाना कि हैं जोँ अपने पति सें संतुष्ट नाँ होँ पाने कि वजह सें बाहर् कि दुनिया मे अपनेकदम बढ़ा देती हैअब आप् स्टोरी कां मजा लीजिए औऱ रेप्लाई अवश्य दे
सुभह केँ आठबजरहे थें। परवेज़ नें जल्द सें अपना पिजामा पहना औऱ बाहर् निकल गय़ा। शबाना अभि पलंग पऱ लेटी हुईँ हि थि, बिल्कुल नंगी। उसकी बुर पर्र अब भि पठान कां पानी नज़र आँ रहा थां, औऱ मायूसी मे उसकी टांगे फैली हुईँ थि। आजफिन पठानउसे प्यासा छ्चोड़ करचला गय़ा थां।
"हरामजाड़ा छक्का" पठान कों गाली देतेहुए शबाना नें अपनी बुर मे उंगली डाली औऱ ज़ोर ज़ोर सें अंदर बाहर् करनेलगी। फिन एक् भारी हल्की चीख केँ संग वोँ शिथिल पड़ने लगी, उसकी बुर नें पानी छ्चोड़ दिया.मगर बुर मे अब भि आगलगी हुईँ थि, लन्ड कि प्यासी बुर कों उंगली सें शांत करना मुश्किल थां।
नहाने केँ बाद अपनाबदन पोंच्छ कर वोँ बाथरूम सें बाहर् निकली औऱ नंगी हि आईने केँ सामने खड़ी होँ गई। आईने मे अपने शरीर कों देखकर वोँ मुस्कुराने लगी, उसे स्वयं अपनी जवानी सें जलन होँ रही थि। शानदार गुलाबी चुचियाँ, भरेहुए मम्मे पतलीकमर, क्लीन शेव बुर जिसके उपरी हिस्से पऱ बालों कि एक् पतली सि लकीर जैसे मार्ग बतारही हौ - जन्नत कां।
उसने एक् ठंडीअहह भरी, अपनी बुर कों थपथपाया औऱ चड्डी पहनली। फिन अपने गदराए हुए एकदमगोल औऱ कसेहुए स्तन कों ब्रा मे लपेटकर उसनेहुक बंदकर लिया। अपने उरोजो कों ठीक सें सेट किया, वोँ तौ जैसे उच्छल कर ब्रा सें बाहर् आँ रहे थें। ब्रा कां हुकबंद करने केँ बाद उसने अलमारी खोली औऱ सलवार कमीज़ निकाली, मगरफिन कुच्छ सोचकर उसने कपड़े वापस अलमारी मे रखदिए औऱ बुर्क़ा निकाल लिया।
अब वोँ बिल्कुल रेडी थि, सिर्फ़ एक् हि बदलाव थां, आज उसने बुर्क़े मे सिर्फ़ चड्डी औऱ ब्रा पहनी थि। फिन अपना छ्होटा सां पर्स जौ कि मुट्ठी मे आँ सके औऱ जिसमें 10-50 रुपये केँ 4-5 नोटरख सके, लेकर निकल गई। अब वोँ बस स्टॉप पर्र आकरबस कां इंतेज़ार करनेलगी, उसेपता थां इससमय बस मे भीड़ होगी औऱ उसे बैठने कि क्याँ, खड़े होने कि भि स्थान नहि मिलेगी। यही चाहती थि वोँ। शबाना सर सें पांव तक बुर्क़े मे धकि हुइ थि, सिर्फ़ आँखें नज़र आँ रही थि। किसी केँ भि उसे पहचान पाने कि कोई गुंजाइश नहि थि।
जैसे हि बसआई, वोँ धक्का मुक्की करकेचढ़ गई, किसीतरह टिकेट ली औऱ बीच मे पहुँच गई औऱ इंतेज़ार करनेलगी। किसी मर्द कां जोँ उसेछुए, उसके प्यासे बदन कों राहत पहुँचाए। उसे ज्यादा इंतेज़ार नहि करना पड़ा। उसकी जाँघ पऱ कुच्छ गर्म गर्मलगा। वोँ समझ गई कि ये लन्ड हैं। सोचते हि उसकी धड़कनें तेज़ होँ गई, औऱ उसने अपने आपको थोडा अड्जस्ट किया.अब वोँ लन्ड बिल्कुल उसकीगंद मे सेट होँ चुका थां। उसने धीरे-धीरे सें अपनी गांद कों पीछे कि तरफ दबाया। उसके पीछे खड़ा थां प्रताप सिंग, जौ बस मे ऐसे हि मौकों कि तलाश मे रहता थां। प्रताप समझ गय़ा कि लाइन क्लियर हैं। उसने अपनाहाथ नीचे किया औऱ अपने लन्ड कों सीधा करके शबाना कि गंद पर्र स्लिम कर दिया.अब प्रताप नें अपनाहाथ शबाना कि गंद पर्र रखा औऱ दबाने लगा.हाथ लगाते हि प्रताप चौंक गय़ा, वोँ समझ गय़ा कि बुर्क़े केँ नीचे सिर्फ़ चड्डी हैं। उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे शबाना कि रसीले गोलगोल उठी हुइ गंद कि मसाज करना शुरुआत कर दिया.अब शबाना एकदम गर्म होनेलगी थि। प्रताप नें अपनाहाथ अबउपर किया औऱ शबाना कि कमर पऱ सें होताहुआ उसकाहाथ उसकीबगल मे पहुँच गय़ा। वोँ शबाना कि हल्की हल्की मालिश कररहा थां, उसकीपीठ पऱ सें होताहुआ उसकाहाथ शबाना कि कमर औऱ गंद कों बराबर दबारहा थां। औऱ नीचे प्रताप कां लन्ड शबाना कि गंद कि दरार मे धंसाहुआ धक्के लगारहा थां। फिन प्रताप नें हाथ नीचे लिया औऱ उसके बुर्क़े कों पीछे सें उठाने लगा। शबाना नें कोई विरोध नहि किया औऱ अब प्रताप कां हाथ शबाना कि चड्डी पऱ थां। वोँ उसकी जाँघ औऱ गंद कों अपने हाथों सें आटे कि तरह गूँथरहा थां। फिन प्रताप नें शबाना कि दोनों जांघों केँ बीचहाथ डाला औऱ उंगलियों सें दबाया। शबाना समझ गई औऱ उसने अपनी टाँगें फैला दि। अब प्रताप नें बड़े आहिस्ता अपनी उंगलियाँ शबाना कि बुर पऱ रखी औऱ उसे चड्डी केँ उपर सें सहलाने लगा। शबाना मस्त होँ चुकी थि औऱ उसकी साँसें तेज़ चलनेलगी थि। उसने नज़रें उठाई औऱ इतमीनान किया कि किसी कि नज़र तोँ नहि, यकीन होने केँ बाद उसने अपनी आँखें बंद कि औऱ मज़े लेनेलगी। अब प्रताप कि उंगली चड्डी केँ किनारे सें अंदरचली गई थि। शबाना कि भीगी हुई बुर पर्र प्रताप कि उंगलियाँ जैसेकहर बरपारही थि। ऊपर नीचे, अंदर-बाहर् - शबाना कि बुर जैसे तार-तार होँ रही थि औऱ प्रताप कि उंगलिया खेत मे चलरहे हल कि तरह उसकी लंबाई, चौड़ाई औऱ गहराई नापरही थि। प्रताप कां पूराहाथ शबाना कि बुर केँ पानी सें भीग चुका थां - फिन उसने अपनीदो उंगलियाँ एक् संग बुर मे घुसा औऱ दोतीन ज़ोर केँ झटकेदिए - शबाना ऊपर सें नीचे तक हिल गई औऱ उसके पांव उखड़गये, वोँ प्रताप पर्र एकदम सें निढाल होकरगिर पड़ी। वोँ झाड़ चुकी थि। आज तक इतना शानदार स्खलन नहि हुआ थां उसका। उसने अपनाहाथ पीछे किया औऱ प्रताप केँ लन्ड कों पकड़ लिया। इतने मे झटके केँ संगबस रुकी औऱ बहुत सें लोगउतर गये.बस तकरीबन खाली हौ गई,। शबाना नें अपना बुर्क़ा झट सें नीचे किया औऱ सीधी नीचेउतर गई। आजउसे भरपूर मजा मिला थां, रोज़ तौ सिर्फ़ कोई पीछे सें लन्ड रगड़कर छ्चोड़ देते थें। आज जोँ हुआ वोँ पहलेकभी नहि हुआ थां। आप् ठीक समझे शबाना यही करके मज़ेलूट रही थि। क्योंकि पठानउसे कभीखुश नहि कर पाया थां।
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उसने नीचे उतरकर रोड क्रॉस कि औऱ रिक्क्षा पकड़ली। ऐसामजा ज़िंदगी मे पहलीबार आया थां। वोँ बारबार अपनाहाथ देखरही थि, उसकी मुट्ठी बनाकर प्रताप केँ लन्ड केँ बारे मे सोचरही थि। उसनेघऱ सें थोड़ी दूर हि रिक्क्षा छ्चोड़ दिया ताकि किसी कों पता नाँ चले कि वोँ रिक्कशे सें आई हैं। वोँ पैदल चलकर अपने घर-मकान मे पहुँची औऱ ताला खोलकर अंदरचली गई।
अभि उसने द्वार (दरवाज़ा) बंद किया हि थां कि घंटी कि आवाज़ सुनकर उसनेफिन द्वार (दरवाज़ा) खोला। सामने प्रताप खड़ा थां। वोँ समझ गई कि प्रताप उसका पीछाकर रहा थां, इसडर सें कि कोई औऱ नाँ देख लें उसने प्रताप कां हाथ पकड़कर उसे अंदर खींच लिया। द्वार (दरवाज़ा) बंद करके उसने प्रताप कि तरफ देखा, वोँ हैरान थि प्रताप कि इस हरकत सें। "क्यूं आए होँ यहा ?" "ये तोँ तुम् अच्छि तरह जानती हौ." "देखोकोई आँ जाएगा" "कोई आनेवाला होता तोँ तुम् इसतरह बस मे मज़े लेने केँ लिए नहि घूमरही होती"। "मे तुम्हें जानती भि नहि हूं" "मेरानाम प्रताप हैं, अपनानाम तोँ बताओ" "मेरानाम शबाना हैं, अब तुम् जाओयहा सें"। बातें करते करते प्रताप शबाना केँ बदन पऱ हाथ फिरारहा थां। प्रताप केँ हाथ उसकी चुचियो सें लेकर उसकीकमर औऱ पेट औऱ जांघों कों सहलारहे थें। शबाना बारबार उसकाहाथ झटकरही थि औऱ प्रताप बारबार उन्हें फिन शबाना केँ शरीर पऱ रखरहा थां। मगर प्रताप समझ गय़ा थां कि शबाना कि नाँ मे हां हैं
अब प्रताप नें शबाना कों अपनी बाहों भर लिया औऱ बुर्क़े सें झाँकति आँखों पऱ चुंबन जड़ दिया। शबाना कि आँखें बंद हौ गई औऱ उसकेहाथ अपने आप् प्रताप केँ कंधों पऱ पहुँच गये। प्रताप नें उसके बुर्क़े कों उठाया, जैसेकोई घूँघट उठारहा होँ। चेहरा देखकर प्रताप कों अपनी भाग्य पऱ भरोसा नहि हौ रहा थां। गजब कि हसीन थि शबाना - गुलाबी रंग केँ पतले होंठ, बड़ी आँखें, गोरा चिटारंग औऱ होंठों केँ ठीक नीचे दाईंतरफ एक् छ्होटा सां तिल। प्रताप नें अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसके गालों कों चूमना औऱ चाटना शुरुआत कर दिया। शबाना नें आँखें बंदकर ली औऱ प्रताप उसे चूमेजा रहा थां। उसके गालों कों चाटरहा थां, उसके होंठों कों चूसरहा थां। अब शबाना भि अच्च्छा संगदे रही थि औऱ उसकीजीभ प्रताप कि जीभ सें कुश्ती कररही थि। प्रताप नें हाथ नीचे किया औऱ उसके बुर्क़े कों उठा दिया, शबाना नें अपने दोनों हाथऊपर करदिए औऱ प्रताप नें बुर्क़ा उतार फेंका। प्रताप शबाना कों देखता रह गय़ा, इतना शानदार शरीर जैसे किसीने नें तराशकर बनाया होँ।
"दरवाज़े पर्र हि करना हैं सबकुच्छ ?" - प्रताप मुस्कुरा दिया औऱ उसने शबाना कों अपनी बाहों मे उठा लिया औऱ गोद मे लेकर पलंग कि तरफचल पड़ा। उसने शबाना कों बेड केँ पास लेँ जाकरगोद सें उतार दिया औऱ बाहों मे भर लिया। शबाना कि ब्रा खोलते हि जैसेदो परिंदे पिंजरे सें छ्छूट कर उड़ेहों। बड़े बड़े मम्मे औऱ उनपर छ्होटी छ्होटी गुलाबी चुचियाँ औऱ उठेहुए निपल्स। प्रताप तोँ देखता हि रह गय़ा, जैसे कि हर कपड़ा उतरने केँ बादकोई ख़ज़ाना सामने आँ रहा थां। प्रताप नें अपना मुँह नीचे लिया औऱ शबाना कि चूचियों कों चूसता चला गय़ा औऱ चूस्ते हुए हि उसने शबाना कों पलंग पऱ लिटा दिया। शबाना केँ मुँह सें सिसकारिया निकलरही थि औऱ वोँ प्रताप केँ बालों मे हाथ फिरारही थि, उसेदबा रही थि औऱ अपनी चूचियों कों उसके मुँह मे धकेलरही थि। शबाना मस्त होँ चुकी थि। अब प्रताप उसकेपेट कों चूसरहा थां औऱ प्रताप कां हाथ शबाना कि चड्डी पऱ सें उसकी बुर कि मसाजकर रहा थां। शबाना मस्त होँ चुकी थि, उसकी बुर कि लन्ड कि प्यास उसे मदहोश कररही थि। उसकी सिसकारियाँ बंद नहि होँ रही थि औऱ टाँगें अपनेआप फैलकर लन्ड कों बुर मे घुसने कां निमंत्रण देरही थि। प्रताप उसकेपेट कों चूमते हुए उसकी जांघों केँ बीच पहुँच चुका थां। शबाना खाट पर्र लेटी हुइ थि औऱ उसकी टाँगें बेड सें नीचेलटक रही थि। प्रताप उसके पैरों केँ बीच सें होताहुआ बेड केँ नीचेबैठ गय़ा औऱ शबाना केँ पेर फैलादिए। वोँ शबाना कि गोरी गोरी, गदराई हुइ भारी भारी सुडौल जांघों कों बेतहाशा चूमरहा थां औऱ उसकी उंगलिया चड्डी पऱ सें उसकी बुर सहलारही थि। प्रताप केँ नथुनो मे शबाना कि बुर सें रिस्ते हुए पानी कि खुश्बू आँ रही थि औऱ वोँ मदहोश होँ रहा थां। शबाना पर्र तौ जैसेनशा चढ़ गय़ा थां औऱ वोँ अपनी गांदउठा उठाकर अपनी बुर कों प्रताप कि उंगलियों पऱ रगड़रही थि।
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अब प्रताप चड्डी केँ ऊपर सें हि शबाना कि बुर कों चूमने लगा, हल्के हल्के दाँत गढ़ारहा थां शबाना कि बुर पर्र। औऱ शबाना प्रताप केँ सिर कों पकड़कर अपनी बुर पर्र दबारही थि, गांदउठा उठाकर बुर कों प्रताप केँ मुँह मे घुसारही थि। फिन प्रताप नें शबाना कि चड्डी उतार दि। अब उसके सामने सबसे हसीन बुर थि एकदम गुलाबी एकदम प्यारी। एकदम सफाई सें रखी हुइ कोईसीप जैसी। प्रताप उसकी खुश्बू सें मदहोश होँ रहा थां औऱ उसने अपनीजीभ शबाना कि बुर पऱ रख दि। शबाना उच्छल पड़ी औऱ उसके जिस्म मे जैसे करेंट दौड़ गय़ा, उसने प्रताप केँ सिर कों पकड़ा औऱ अपनीगंद उचकाकर बुर कों प्रताप केँ मुँह पर्र रगड़ दि। प्रताप कि जीभ शबाना कि बुर मे धँस गई औऱ प्रताप नें अपने होंठों सें शबाना कि बुर कों ढँक लिया औऱ एक् उंगली भि शबाना कि बुर मे घुसा दि - अब शबाना कि बुर मे प्रताप कि जीभ औऱ उंगली घमासान मचारही थि। शबाना रहरहकर अपनी गांदउठा उठाकर प्रताप केँ मुँह मे बुर दबारही थि। उसकी बुर सें निकलरहा पानी उसकी गांद तक पहुँच गय़ा थां। प्रताप नें अब उंगली बुर सें निकाली औऱ शबाना कि गंद पर्र उंगली फिराने लगा। बुर केँ पानी कि वजह सें गंद मे उंगली फिसलकर जारही थि। शबाना कों कुच्छ होश नहि थां - वोँ तोँ चुदाई केँ नशे सें मदहोश हौ चुकी थि, आज तक उसे इतनामजा नहि आया थां। उसकी सिसकारिया बंद नहि हौ रही थि। उसकीगंद मे उंगली औऱ बुर मे जीभ घुसी हुई थि औऱ वोँ नशे मे धुत्त शराबी कि तरहबैड पऱ इधरउधर होँ रही थि। उसकी आँखें बंद थि औऱ वोँ जन्नत कि सैरकर रही थि। किसी तेज़ खुश्बू कि वजह सें उसने आँखें खोली, तोँ सामने प्रताप कां लन्ड थां। उसेपता हि नहि चलाकब प्रताप नें अपने कपड़े उतारदिए औऱ 69 कि पोज़िशन मे आँ गय़ा। शबाना नें प्रताप केँ लन्ड कों पकड़ा औऱ ऊपर नीचे करनेलगी, प्रताप केँ लन्ड सें पानीगिर रहा थां औऱ वोँ चिपचिप हौ रहा थां - शबाना नें लन्ड कों अच्छि तरह सूँघा, उसे अपने चेहरे पऱ लगाया औऱ उसका अच्छि तरह जायज़ा लेने केँ बादउसे चूम लिया.फिन अपना मुँह खोला औऱ लन्ड कों मुँह मे लेकर चूसना शुरुआत कर दिया। वोँ एक् लॉलिपोप कि तरह लन्ड चूसरही थि, लन्ड केँ सुपरे कों अपने मुँह मे लेकर अंदर हि उसेजीभ सें लपेटकर अच्छि तरहचूस रही थि। औऱ प्रताप उसकी बुर अब भि चूसरहा थां।
अचानक जैसे ज्वालामुखी फटा औऱ लावा बहनेलगा। शबाना कां शरीर बुरीतरह अकड़ गय़ा औऱ उसकी टाँगें सिकुड गई, प्रताप कां मुँह जैसे शबाना कि जांघों मे पिसरहा थां, शबाना बुरीतरह झाड़ गई औऱ उसकी बुर नें एकदम सें पानी छ्चोड़ दिया, औऱ वोँ एकदम निढाल गई। आज एक् घंटे मे वोँ दोबार झाड़ चुकी थि जबकि अब तक उसकी बुर मे लन्ड गय़ा भि नहि थां।
क्रमशः।
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