खाला और अम्मी की चुदाई (Completed) khala ki chudai Mere ghar mein ammi aur khala ki chudai ki kahani. Ammi aur khala dono hi jawan aur khubsurat thi. Khala ki umar 37 saal thi aur ammi se do saal choti thi. Main apne dost ke saath unki chudai ki kahani sunane ja raha hoon. Khala ki jawani aur ammi ki pyaas, dono ne milkar mujhe pagal kar diya.
Khala ki chudai ki awaaz sun kar ammi bhi hot ho gayi aur dono ne milkar mujhe choda.
खाला और अम्मी की चुदाई (Completed) - khala ki chudai - Real Story Continue Part 1
खाला औऱ अम्मी कि चुदाई
मुसन्निफ़: शाकिर अलीमे शाकिर अली हूं, बाईससाल कां, औऱ लाहोर मे रहता हूं। जौ वाक़्या आज आप् कों सुनाने जारहा हूं आज सें चारसाल पहलेपेश आया थां। मेरेघऱ मे अम्मी अब्बा केँ अलावा एक् बेहन औऱ एक् भाई हें। मे सभी सें बड़ा हूं। यहतब कि बात हैं जब मे दसवीं जमात मे पढ़ता थां। इस वाक़्ये कां ताल्लुक मेरी खाला सें हैं जिनका नाम अम्बरीन हैं। अम्बरीन खाला मेरी अम्मी सें दोसाल छोटीथीं औऱ उनकी उम्रउस वक़्त क़रीब अढ़तीस बरस थि। वोँ शादीशुदा थीं औऱ उनकेदो बेटे थें। उनकाबड़ा बेटा राशिद तक़रीबन मेरा हम्-उम्र थां औऱ हम् दोनों अच्छे मित्र थें। अम्बरीन खाला केँ शौहर नवाज़ हुसैन बेहदरईस थें। उनके लाहोर मे इलेक्ट्रॉनिक्स औऱ अप्लाइअन्स केँ दोबड़े शोरूम थें औऱ एक् शोरूम दुबई मे भि थां। खालू नवाज़आधा वक़्त लाहोर मे औऱ आधा वक़्त दुबई मे रहते थें। अम्बरीन खाला भि बेहद ऐक्टीव थीं औऱ खालू केँ कारोबार मे भि सहायता करतीथीं। उनका लाइफ स्टाईल बेहद हाई-क्लॉस थां औऱ वोँ अपनी शामें अक्सर सोसायटी-पार्टियों औऱ क्लबों मे गुज़ारती थीं। खाला लाहोर केँ रोटरी कल्ब कि सीनियर मेंबर थीं औऱ बहुत सोशल वर्क करतीथीं।
अम्बरीन खालाबड़ी सुंदर औऱ दिलकश स्त्री थीं। वोँ बिल्कुल मशहूर अदाकारा सना नवाज़ कि तरह दिखती थीं। तीखेनैन नक़्श औऱ दूध कि तरह सफ़ेदरंग। उनके लंबे औऱ घनेबाल गहरे ब्राउन रंग केँ औऱ आँखें भि ब्राउन थीं। उनकाक़द दरमियाना थां औऱ बदनबड़ा गुदाज़ थां मगर कहीं सें भि मोटी नहि थीं। कंधे चौड़े औऱ फ़रबा थें। मम्मे भि बहोत बड़े औऱ गोल थें जिन कां सांइज़ छत्तीस-अढ़तीस इंच सें तौ किसीतरह भि कम नहि होगा। उनके चूतड़गोल औऱ गोश्तदार थें। अम्बरीन खाला बहुत मॉडर्न खातून थीं औऱ कभी भि चादर वगैरह नहि ओढ़तीथीं। उनकी कमीज़ों केँ गले बहुत गहरे होते थें औऱ जब अम्बरीन खाला पतले कपड़े पहनतीं तौ उनका सफ़ेद औऱ गदराया हुआँबदन कपड़ों सें झाँकता रहता थां। अक्सर वोँ कमीज़ केँ संग सलवार कि बजाय टाइट जींस भि पहनती थीं।
खाला और अम्मी की चुदाई (Completed) - khala ki chudai – New Episode
मे अक्सर उनकेघऱ जाया करता थां ताकि उनके उभरेहुए बूब्ज़ औऱ मांसल चूतड़ों कां नज़ारा कर सकूँ। खाला होने केँ नाते वोँ मेरे सामने दुपट्टा ओढ़ने कां भि तकल्लुफ़ नहि करतीथीं इसलिये मुझे उनके मम्मे औऱ चूतड़ देखने कां खूब मौका मिलता थां। कभी-कभी उन्हें ब्रा केँ बगैर भि देखने कां इत्तेफाक हौ जाता थां। पतली क़मीज़ मे उनके हसीन मम्मे बड़ी क़यामत ढाते थें। उनकी कमीज़ केँ गहरेगले मे सें उनके मोटेकसे हुए मम्मे अपनी तमामतर गोलाइयों समेत मुझेसाफ़ नज़रआते थें। उनके बूब्ज़ केँ निप्पल भि मोटे औऱ बड़े थें औऱ अगर उन्होंने ब्रा नाँ पहनी होती तोँ क़मीज़ केँ ऊपर सें बाहर् निकले हुएसाफ़ दिखाई देते थें। ऐसे मोक़ों पर्र मे आगे सें औऱ सांइड सें उनके स्तन कां अच्छी तरह जायज़ा लेता रहता थां। सांइड सें अम्बरीन खाला केँ स्तन केँ निप्पल औऱ भि लंबेनज़र आते थें। योंसमझ लें कि मैंने तक़रीबन उनके मम्मे नंगेदेख हि लिये थें। स्तन कि मुनासबत सें उनके चूतड़ भि बेहद मांसल औऱ गोल थें। जब वोँ ऊँचीहील कि सैंडल पहन केँ चलतीं तौ दोनों गोल औऱ जानदार चूतड़ अलहदा-अलहदा हिलते नज़रआते। उस वक़्त मेरे जैसे कम-उम्र औऱ सेक्स सें नाँ-वाक़िफ़ लड़के केँ लियेइस क़िस्म कां नज़ारा पागलकर देने वाला होता थां।
अम्बरीन खाला केँ सुंदर शरीर कों इतने क़रीब सें देखने केँ बाद मेरेदिल मे उनकेबदन कों हाथ लगाने कां सपनेसमा गय़ा। मेरी उम्र भि ऐसी थि केँ सेक्स नें मुझे पागल किया हुआँ थां। रफ़्ता-रफ़्ता अम्बरीन खाला केँ बदन कों छूने कां सपने उनकी बुर हासिल करने कि ख्वाहिश मे बदल गय़ा। जब उन्हें हाथ लगाने मे मुझे कोंईख़ास कामयाबी नाँ मिलसकी तौ मेरा पागलपन औऱ बढ़ गय़ा औऱ मे सुभहसाम उन्हें चोदने केँ ख्वाब देखने लगा। इस सिलसिले मे कुछ करने कि मुझ मे हिम्मत नहि थि औऱ मे महज़ ख्वाबों मे हि उनकी बुर केँ अंदर घस्से मार-मार करउस कां कचूमर निकाला करता थां। जब मे उनकेघऱ पे होता थां औऱ नसीब सें जबकभी मुझे मौका मिलता तोँ अम्बरीन खाला कि ब्रा-पैंटी याँ उनकी ऊँचीहील वाली सैंडल बाथरूम मे लेजाकर उनसे अपने लन्ड कों रगड़-रगड़ कर अपना पानी निकाल लेता थां। फिन एक् ऐसा वाक़्या पेशआया जिस केँ बारे मे मैंने कभी सोचा भि नहि थां।
मेरीबड़ी खाला केँ बेटे इमरान कि विवाह पिंडी मे हमारे रिश्तेदारों मे होनातय हुई। बारात नें लाहोर सें पिंडी जानां थां। बड़े खालू नें जौ फौज सें रिटायर हुए थें पिंडी केँ आर्मी मेस मे खानदान केँ ख़ास-ख़ास लोगों कों ठहराने कां बंदोबस्त किया थां। बाक़ी लोगों नें होटलों मे क़याम करना थां। हम् नें दोबस औऱ दो टोयोटा हाइऐस वैन किराए पऱ लीथीं। बस कों विवाह कि मुनासबत सें बहोत अच्छी तरह सजाया गय़ा थां। सारे रास्ते बस केँ अंदर लड़कियों कां विवाह केँ गीत गाने कां प्रोग्राम थां जिस कि वजह सें खानदान केँ सब बच्चे औऱ नौजवान बसों मे हि बैठे थें। मैंने देख लिया थां केँ अम्बरीन खाला एक् वैन मे बैठरही थीं। मेरे लियेयह अच्छा मौका थां।
मे भि अम्मी कों बताकर उसीवैन मे सवार हौ गय़ा ताकि अम्बरीन खाला केँ क़रीबरह सकूँ। उनके शौहर कारोबार केँ सिलसिले मे माल खरीदने दुबईगये हुए थें लिहाज़ा वोँ अकेली हि थीं। उनके दोनों बेटे उनकेमना करने केँ बावजूद अपनी अम्मी कों छोड़कर हल्ला-गुल्ला करनेबस मे हि बैठे थें। वैनभरी हुई थि औऱ अम्बरीन खालासभी सें पिछली सीट पऱ अकेली खिड़की केँ संग बैठीथीं। जब मे दाखिल हुआँ तौ मेरी कोशिश थि कि किसीतरह अम्बरीन खाला केँ संगबैठ सकूँ। वैन केँ अंदर आँ कर मैंने उनकीतरफ देखा। मे उन सें काफ़ी क़रीब थां औऱ मेरा उनकेघऱ भि बहोत आनां जानां थां इस लिये उन्होंने मुझेदेख कर अपनेसंग बैठने कां इशारा किया। मे जल्दी हि स्थान बनाता हुआँ उनकेसंग चिपककर बैठ गय़ा। पीछे कि सीट पर्र हम् दोनों हि थें।
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अम्बरीन खाला विवाह केँ लियेखूब बन संवरकर घऱ सें निकली थीं। उन्होंने सब्ज़रंग केँ रेशमी कपड़ेपहन रखे थें जिन मे उनका सफ़ेद गदराया हुआँबदन दावत-ए-नज़ारा देरहा थां। बैठेहुए भि उनकेगोल बूब्ज़ केँ उभार अपनी पूरी आब-ओ-ताब केँ संगनज़र आँ रहे थें। संग मे दिलकश मेक-अप, ज़ेवर औऱ ऊँचीहील केँ सुनहरी सैंडल पहनेहुए कयामत ढारही थीं। कुछ देर मे हम् लाहोर शहर सें निकलकर मोटरवे पर्र चढ़े औऱ अपनी मंज़िल कि तरफ रवाना हौ गये। मे अम्बरीन खाला केँ संगखूब चिपककर बैठा थां। मेरीरान उनकीरान केँ संगलगी हुई थि जब कि मेरा बाज़ू उनके बाज़ू सें चिपका हुआँ थां। बगैर आस्तीनो वाली क़मीज़पहन रखी थि औऱ उनके गोरे सुडोल बाज़ू नंगेनज़र आँ रहे थें। अम्बरीन खाला केँ नरम-गर्म बदन कों महसूस करते हि मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा। मैंने जल्दी अपनेहाथ आगेरख कर अपनेतने हुए लन्ड कों छुपा लिया।
अम्बरीन खाला नें कहा केँ मे राशिद कों समझाऊँ कि मेट्रिक केँ इम्तिहान कि तैयारी दिललगा करकरे क्योंकि दिन थोड़ेरह गये हें। मैंने उनकी तवज्जो हासिल करने लिये उन्हें बताया केँ राशिद एक् लड़की केँ इश्क़ मे मुब्तला हैं औऱ इसीवजह सें पढने मे दिलचस्पी नहि लेता। वोँ बहोत नाराज़ हुईं औऱ कहा केँ मे उसकी हरकतें उनके इल्म मे लाता रहूँ। इस तरह मे नां सिर्फ़ उनका राज़दार बन गय़ा बल्कि उनकेसंग मर्द औऱ स्त्री केँ ताल्लुकात पर्र भि बात करनेलगा। वोँ बहोत दिलचस्पी सें मेरी बातें सुनती रहीं। उन्होंने मुँहबना करकहा कि आजकल कि लड़कियों कों वक़्त सें पहले सलवार उतारने कां शौक होता हैं। यहऐसी कुतिया कि मानिंद हें जिन कों गर्मी चढ़ी हौ। यह तौ मुझेबाद मे मालूम हुआँ कि अम्बरीन खाला स्वयं भि ऐसी गर्म कुत्तिया मानिंद औरतों मे सें थीं। उनकी बातें मुझे गर्मकर रहीथीं। मैंने बातों-बातों मे बिल्कुल क़ुदरती अंदाज़ मे उनकी मोटीरान केँ ऊपरहाथ रख दिया। उन्होंने क़िसी क़िस्म कां कोंई रद्द-ए-अमल ज़ाहिर नहि किया औऱ मे उनकेबदन कां मज़ा लेतारहा। वोँ स्वयं भि बीच-बीच मे मेरी रानों पऱ हाथरख कर सहलारही थीं।
बिल-आख़िर साढ़ेचार घंटेबाद हम् पिंडी पहुंच गये। मे अम्बरीन खाला केँ संग हि रहा। अम्मी, नानीजान औऱ कुछ औऱ लोगमेस मे चलेगये। अम्बरीन खाला केँ दोनों बेटे भि मेस मे हि रहना चाहते थें। मैंने अम्बरीन खाला सें कहा केँ कियों नाँ हम् होटल मे रहें। कमरे मे औऱ लोग भि नहि होंगे, बाथरूम इस्तेमाल करने कां मसला भि नहि होगा औऱ अगलेदिन बारात केँ लिये तैयारी भि आसानी सें हौ जायेगी। अम्बरीन खाला कों यहबात मनपसंद आयी। उन्होंने अपने बेटों कों कुछ हिदायात दीं औऱ मेरेसंग मुर्री रोड पर्र रिजर्व एक् होटल मे आँ गयीं जहाँ खानदान केँ कुछ औऱ लोग भि ठहररहे थें। मैंने अम्मी कों बता दिया थां केँ अम्बरीन खाला अकेली हें मे उनकेसंग हि ठहर जाऊँगा। उन्होंने बा-खुशी इजाज़त दे दि।
होटल दरमियाना सां थां। कमरे छोटेमगर साफ़ सुथरे थें। कमरे मे दोबेड थें। कमरे मे आकरफिन हम् नें कपडे तब्दील किये। अम्बरीन खाला नें घऱ वाला पतली सि लॉन कां जोड़ापहन लियाजिस मे सें हमेशा कि तरह उनका गोरा शरीरनज़र आँ रहा थां। कपड़े बदलने केँ बावजूद उन्होंने अपनी ब्रा नहि उतारी थि। मुझे थोड़ी मायूसी हुई क्योंकि बगैर ब्रा केँ मे उनके स्तन कों ज़्यादा बेहतर तरीक़े सें देख सकता थां। उन्होंने आदतन ऊँचीऐड़ी वाले सैंडल भि पहनेरखे थें। खैर अम्बरीन खाला कों अपनेसंग एक् कमरे मे बिल्कुल तन्हा पाकर मेरेदिल मे उन्हें चोदने कि खाहिश नें फिनसर उठाया। मगर मे यह करता केसे? वोँ भला मुझे कहां अपनी बुर लेने देतीं।
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