तडपती जवानी - सैक्सी छात्रा - Real Kahani Part 1
स्टोरी कां मूल लेखक मे नहीं हूं
तड़पती जवानी-1
Tadapti Jawani
रीटा कान्वेंट विद्यालय कि अति आधुनिक विचारों वाली सैक्सी छात्रा थि। रीटा अमेरीकन मां औऱ भारतीय बाप कि इकलौती, हसीन, चिकनी दोगली औलाद थि। गोल मासूम चेहरे पऱ रेशमी बाल, खूब उभरी हुइ कश्मीरी सेबों सि लाललाल गालें, मोटी मोटी गीली नशीली औऱ बिल्ली सि हल्की भूरी बिल्लौरी आँखें, रसभरे लाल उचकेहुऐ मोटे होंट जैसे लॉलीपोप कों चूस्सा मारने कों लालयित हों.स्केटिंग रीटा कि पसंदगेम थि। इससे रीटा कां जिस्म भरपूर सुडौल औऱ कड़ियल हौ गय़ा थां। इस छोटी सि उमर मे हि रीटा कां सफ़ेद चिट्टा तन्दरूस्त शरीरहद सें अधिक गदरा गय़ा थां। मलाई सि त्वचा, मक्खन मे सिन्दूर मिलारंग, लम्बी पतली गर्दन, खड़ेखड़े तराशे चुच्चे, पतलीकमर, पिचका पेट, हीरे सि चमकती खूब गहरी नाभि, दायें बायें फैले कूल्हे, गोलगोल उभरे भारी चूतड़ औऱ लम्बी सुडौल मरमरी टांगें। कुल मिलाकर रीटा ताज़ी ताज़ी जवानी केँ भार सें लदीफदी टनाटन औऱ पटाका लौंडिया थि.
रीटा कि तूफानी औऱ कातिल जवानी कि हुस्न कां कोई हिसाब पुस्तक नहि थां। हसीन रीटा केँ खूबसूरती औऱ कयामत जवानी नें विद्यालय औऱ मुहल्ले मे गद़रमचा रखा थां। हर एक् जवान रीटा पऱ लाईन मारता थां। पर्र रीटा नें स्थान स्थान पर्र अपनी शराफत केँ झन्डे गाड़रखे थें। जिधर सें एक् बार निकल जाती लड़के पप्पू पकड़कर हायराम ओहकर उठते थें.
मैग्ना फोक्स, पामेला एम्डरसन, कैटरीना कैफ, लिज़ा रे औऱ ऐश्वर्या राय कि जवानी तोँ रीटा कि झाँट कि धूल केँ बराबर भि नहि थि, वोँ बातअलग हैं कि 18 साल कि रीटा कि नादान कच्ची बुर पर्र रोंये कां नामो निशान भि नहि थां। अभि तक नादान औऱ अंगूठा चूसने वाली रीटा टैडीबियरों सें हि खेलती रही थि। अभि तक बेचारी रीटा कि नादान बुर मूतने केँ हि काम आँ रही थि.
कुछदिन पहले हि नईनई जवान हुइ रीटा अपनीनई सहेली मोनिका सें खूब घुलमिल गई। मोनिका जीभर केँ हसीन औऱ दिलफेंक छोकरी थि। मोनिका बहोत शरारती थि औऱ कभी भि स्कर्ट केँ नीचे कच्छी नहि पहनती थि। मोनिका हमेशा अपनी बुर पऱ हल्का सां रूज़, लिपस्टिक औऱ लिपग्लॉस कां मेककप करके बुर पर्र चार चाँद लगाये रखती थि। मोनिका नें अपनी बुर कों मक्खन औऱ मलाई कि मालिश कर केँ औऱ भि हसीन औऱ कातिल बना लिया थां.
मोनिका विद्यालय मे क्लास, लाईबरेरी, विद्यालय बस औऱ मुहल्ले मे अपनी नंगी बुर कां खूबसूरती दिखा दिखाकर लड़कों कों पागल बनाने औऱ पटाने मे उस्ताद थि। दिन मे नं जाने कितनी बार शरारती मोनिका अपने जूतों केँ फ़ीते बांधती औऱ अलगअलग पोज़बना बनाकर लड़कों कों अपनी नन्ही बुर सें लिशकारे मारमार कर दीवाना करती रहती थि। लड़केगली केँ ठरकी कुत्तों जैसे मोनिका केँ आगे पीछे घूमते रहते थें। मोनिका कि कटी पतंग सि जवानी कों लूटने केँ लिये नं जाने कितने लण्ड मोनिका केँ चारोतरफ मंडराते रहते थें.
एक् दिन अकेले मे मोनिका नें रीटा कों घऱ बुलाकर जब ब्लयू फ़िल्म दिखाई तोँ बेचारी नन्ही रीटा कां तौ मन हि घूम गय़ा। रीटा केँ लियेये सभीकुछ एकदमनया औऱ बहोत हि मजेदार थां। मोनिका नें अपने पसंदीदा दृश्य रीटा कों रीवाईन्ड करकर केँ दिखाये तोँ रीटा नें अपनासिर पकड़कर सोचा- तौबा तौबा, यह लड़कियाँ कितनी गुन्डी गुन्डी बातें करती हें, औऱ यह मर्द कितनी बुरीतरह सें सुन्दर सुन्दर लड़कियों कों चोदा मारते हें। यह बेशरम छोकरियाँ इत्ती बुरीतरह सें मस्त होकर अपनी बुर औऱ गांड मरवाती हें.कितने स्टाइल सें परी सि विलायती छोकरियाँ लड़कों केँ केले सें लम्बे लम्बे लण्डों कों चुसड़-चुसड़ कर केँ चुस्सा मारती हें औऱ पलक झपकते लण्डों कों अपनी गोरी-गोरी बुर औऱ गाड मे आसानी सें सटक लेती हें.
तब मोनिका नें बताया कि वो चंगे चंगे तगड़े लन्डों कों अपनी टांगों केँ नीचे सें निकाल कर उन्हें धूलचटा चुकी थि। इसलिये रीटा कि बुर केँ मुकाबले मे चुदक्कड़ मोनिका कि बुर फूल सि खिली हुइ सि मालूम पड़ती थि। मोनिका कि बुर पर्र दिलकश छल्ली सें सुनहरे कोमल औऱ छितराये सें झांट थें। मोनिका नें बताया कि उसे अकंल लोगों औऱ अपने सें छोटे लड़कों केँ संगछुप छुपकर चौदम-चुदाई कां खेल खेलने मे बहोत मज़ाआता हैं। कमीनी मोनिका हर महीने नये आशिक सें बुर मरवाती थि। मोनिका नें बताया कि अब तोँ वो दसईंच सें कम लण्ड वाले कों घास भि नहि डालती.
फिन ब्लयू फ़िल्म देखने केँ बाद मोनिका नें रीटा सें उलटी सीधी बेहूदी हरकतें शुरुआत करदीं। शुरुआत शुरुआत मे रीटा कों मोनिका कि गुन्डी हरकत पऱ बहोत क्रोध आया, पर्र बाद मे जब शातिर मोनिका नें रीटा कि टांगों कों चौड़ाकर जबरदस्ती रीटा कि बुर कों आम कि गुठली कि तरह चूसा तौ रीटा मोमबत्ती सि पिघलती चली गई। मोनिका अपनी सांप सि लम्बी लपलपाती जीभ सें रीटा कि बुर कों चाटने औऱ चोदने लगी.कभी कभी मोनिका अपना मुँह टेढाकर रीटा कि रसीली फांक दांतों मे दबाकर जोरजोर सें चूसकर रीटा कि नाँ नाऽऽ करवा देती थि.
मोनिका केँ लाललाल नेलपालिश सें रंगेहुऐ नाखून रीटा केँ गोरे गदराये हुऐ चूतड़ों मे धंसेहुए बड़े मोहकलग रहे थें। नाखूनों कि तीखी चुभन भि रीटा कों अजीब सां आनंददे रही थि.
अब रीटा कां इंकार इकरार मे बदल गय़ा। तब रीटा केँ हाथ अपने आप् मोनिका कि खोपड़ी पर्र कसगये औऱ अब तौ रीटा कां दिलकर रहा थां कि वो मोनिका कों पूरा कां पूरा अन्दर सटक लेँ। रीटा कों लगा जैसे मोनिका कां मुँह वैक्यूम पम्पबन गय़ा हौ.
जब मोनिका दांतों सें रीटा कि बुर नौचने लगी तोँ रीटामजे सें पागल होँ उठी औऱ बेशरमी सें अपनी टांगों कों 180 डिगरी पऱ फ़ैला दिया। बेहया मोनिका केँ दांतों कि कचोटों नें तौ रीटा कों जन्नत मे पहुंचा दिया.
अन्त मे ठरक सें बदहवास औऱ पगलाई हुइ रीटा मोनिका कों बिस्तर पऱ पटककर उसके चेहरे कों उछलउछल कर अन्धाधुन्ध अपनी मस्त बुर सें पीटने लगी। रेशम सि रसीले औऱ गुदाज़ बुर कि मार सें एक् बार तोँ मोनिका जैसी हिंसक चुदक्कड़ लड़की कि भि सिट्टीपिटी गुम होँ गई। धक्कों सें, झटकों सें रीटा केँ रेशमी बालहवा मे उड़उड़ जाते थें औऱ चुच्चे ज़ंगली जानवरों कि तरह ऊपर-नीचे, दायें बायें उछल जाते.
मोनिका कां सुन्दर चेहरा रीटा केँ जवानी केँ रस सें तरबतर हौ गय़ा। कुँवारी रीटा कि दबीदबी आनन्द भरी सुरीली चीखें, कराहटें औऱ सिसकारियाँ सुन मोनिका औऱ भि पागल होँ गई.
चुदाई कला मे निपुण़, वहशी मोनिका नें जंगली बिल्ली कों काबू करने केँ लिये जवाबी हमले मे रीटा कि गांड मे अपनीथूक सें सनी उंगली घुसेड़ कर गोल-गोल घुमाने लगी औऱ बुर केँ दाने कों होठों तलेदबा करजीभ सें उस पऱ चुम्मा करनेलगी तौ रीटा कां बैंड हि बज गय़ा.
रीटा कि चीखों औऱ तेज़ी सें मोनिका समझ गई कि बसअब लौंडिया खल्लास हि होने वाली हैं। फिन तौ रीटा कि शरीर कमान कि तरहअकड़ गय़ा, आँखें ऊपर कि ओर लुढ़क गई औऱ कई छपाकों केँ संग रीटा कि नई नवेली बुर भरभरा कर झटकों केँ संग हुच्च हुच्च कर पानी छोड़ने लगी। चूदास मस्ती सें भाव-विभोर हुइ रीटा कि बुर सें रहरहकर आनन्द कां करंट निकलकर सारे जिस्म मे धमाकों केँ संगफैल रहा थां.
उधर मोनिका रीटा कि बुर सें कतरा कतराजूस कचकचा कर पीने कि नाकाम कोशिश कररही थि पऱ रीटा कि बुर तोँ जैसे हमेशा हमेशा केँ लिये बाल्टियाँ भरभरकर छपाक छपाक पानी फैंके जारही थि। दे रेले पे रेला, दे रेले पे रेला.
रीटा कि बुर कि पिचकारियों नें मोनिका केँ बालों औऱ बैड कि चादर कों एकदम भिगो दिया। चुदी हुईँ कुतिया कि तरह हाँफती, कांपती हुईँ औऱ करहाती सि निठाल होँ रीटा मोनिका केँ ऊपर लुढ़क गई.
मोनिका नें तौ अभि खेल चालू किया थां। मोनिका नें जबरदस्ती तितली सि फड़फड़ाती रीटा केँ चूतड़ों कों टेबल टेनिस केँ बैट सें ताबड़तोड़ पीटा तोँ रीटा भि हिंसक चुदाई मे विश्वास रखनेलग पड़ी थि। पटाक-तड़ाक, पटाक-तड़ाक कि चूतड़ों पर्र बैट टकराने कि ऊँची आवाज़ औऱ गांड पर्र मीठी मीठीजलन नें तौ रीटा कों पागलकर दिया.फिन तौ मस्ती मे आकर रीटा नें अपनी जालिम गोरी-गोरी गांड कों हवा मे ओर भि ऊपर उचका दिया.
मोनिका गालियाँ देती हुइ रीटा केँ मलाई सें चूतड़ों कों पीटपीट कर गुलाबी सें लाल औऱ लाल सें सुर्ख कर दिये तौ रीटा कों थोड़ी तसल्ली मिली.
फिन छीनाल मोनिका नें रीटा कि बुर औऱ गांड कों एक् बारफिन सें कोल्ड क्रीम चुपड़ करछःईंच केँ बैंगन सें जबरनचोद दिया तौ रीटा कों दिन मे तारे नज़र आँ गये.
रीटा नें शरमाते औऱ मुस्कुराते हुए मोनिका कों थैन्क यूकहा औऱ चूतड़ मटकाती औऱ गुनगुनाती हुईँ घऱ कों चल दि- ‘दिल कां पंछी बोलेकू कूह कूऽऽऽ कूकूह कूऽऽऽ’
हिंदी सेक्सी किस्सा जारी रहेगी।
तडपती जवानी - सैक्सी छात्रा – New Episode
तडपती जवानी
भाग-2
दो दिन तक बैंगन सें चुदी हुई रीटा कि बुर औऱ गांड मे सुरसुराहट होतीरही थि। टेबल टेनिस केँ बैट सें ताबड़तोड़ पिटेहुए चूतड़ों मे मीठी मीठीजलन भि भरपूर मज़ादे रही थि। ब्ल्यू फ़िल्म देखकर बैंगन कि चुदाई सें औऱ मोनिका कि बातों सें रीटा कों बुर औऱ लण्ड कां मज़ेदार खेलसमझ आँ गय़ा थां। मोनिका केँ संगरह कर रीटा भि खूब गालियाँ देना भि सीख गई थि। अब तोँ रीटा मोनिका कि छत्रछाया मे अपनी जवानी कों दोनों हाथों सें लुटाने कों आतुर होँ उठी.रह रहकरउस नन्ही नवयौवना केँ सुकोमल अंगों मे तनावव कसाव आँ जाता औऱ कोरी चूत किसी फड़फड़ाते लण्ड कों गपकने केँ लिये कुलबुला उठती थि.
फिन रीटाकभी कभी पढ़ने केँ बहाने अपने पड़ोसी राजू सें टशन मारने औऱ ठरक भौरने चली जाया करती थि। कईबार अकेले मे आपस मे मज़ाक औऱ छेड़छाड़ करते धींगामुश्ती औऱ लिपटा चिपटी मे राजू कच्ची कली केँ घस्से मारकर ऊपरऊपर सें ठरक पूरीकर लेता थां। रीटा कों भि अपनेअंग राजू केँ बदन सें रगड़कर बहोत सकून औऱ आनन्द मिलता थां। रीटा केँ जाने केँ बाद ठरकी राजू आँखें बंद किये सैक्सी रीटा केँ बारेसोच सोचकर घण्टों मुठ मारता रहता थां.
अकसर राजू रीटा सें जानबूझ कर धींगामुश्ती मे हार जाता थां। हारने कों बादजब रीटा राजू केँ ऊपर होती तौ घोड़ा-घोड़ा खेल खलने सें नहि चूकती थि। राजू कों पीठ केँ बलचित कर राजू कि पैंट मे फंसेहुऐ पप्पू कों जब अपनी बुर सें पीटती औऱ रगड़ती तौ राजू शदाई हौ जाता थां। राजू केँ धक्कों सें रीटा केँ सन्तरे पागलों कि तरहउछल उछल पड़ते थें। रीटा कां चेहरा कामवासना सें तमतमा उठता थां। राजूइस पोज कां फायदा उठाकर रीटा कि गदराई जांघों पर्र हाथफ़ेर देता थां। कभीकभी रीटाठरक मे स्वयं हि राजू केँ हाथों कों खींचकर अपनी चिकनी संगमरी रानों पऱ रख देती थि। इस सूखी चुदाई सें कईबार तौ राजू कां पैंट मे हि छूट जाता थां.
बहुतेरी बार रगड़म रगड़ाई औऱ ठरक केँ मजे सें रीटा कि भि आँखें मुंद सि जाती थि औऱ सिसकारियाँ भि निकल जाती थि.
कभीकभी कुश्ती कुश्ती खेलते राजू भि रीटा केँ गुदाज शरीर कों पलंग पऱ दबोचे लुढ़कियाँ लगाकर घस्से मार लेता थां। कभीकभी रीटा राजू सें डाक्टर-डाक्टर, टिकलिंग-टिकलिंग औऱ तलाशी-तलाशी जैसे सैक्सी खेल खेलती थि। टीकलिंग करते करते राजू रीटा केँ चूतड़ों औऱ जांघों कि चिकनाहट औऱ गदराहट कां मज़ा लेने सें नहि चूकता थां। जब राजू केँ हाथ रीटा कि बुर केँ पास पहुँचते तोँ सुरसुराहट सें रीटा कि लीची सि लाल बुर केँ रौंगटे खड़े होँ जाते औऱ वो लिसलिसा उठती.
फिन एक् दिन रीटा राजू केँ कमरे मे पढ़ाई करने केँ बाद सू-सूऽऽ करने अटेच्ड बाथरूम मे घुसी। रीटा अपनी स्कर्ट ऊपरउठा कच्छी कों सुडौल चूतड़ों सें नीचे खींचा औऱ इण्डियन स्टाईल टायलट पर्र घुटने मोड़कर बैठते हि रीटा कि चाँद सि उजली बुर औऱ गांडघूम कर सामने आकर लिशकारे मारने लगी.ऐसा लगा जैसे छोटी सि मछली मुँहखोल गिल्लौरी पानखा रही हौ.
फिन सन्नाटे मे रीटा कि चूत नें बड़ीजोर कि फ़िच्च शीऽऽऽऽ कि आवाज़ सें पेशाब कां जबरदस्त औऱ जोरदार शर्ला छोड़ा। अनचुदी नन्ही सि नादान बुर केँ रसभरे होंटआपस मे बिल्कुल चिपके हुऐ थें। चिपकी फाँकों औऱ बेहदतंग सुराख केँ कारण रीटा कि बुर कां शिशकाराऽऽऽ भि हद सें ज़्यादा ऊँचा औऱ सुरीला थां। कलकल करती पतलीमूत कि धार चुकन्दर सि लाल बुर केँ मुँह सें निकलकर टायलट मे दमतोड़ रही थि। बिना झाटों कि मूतती बुर बहोत हि प्यारी औऱ मनमोहक लगरही थि.
आखिर छबीली रीटा कि रसीली बुर नें छोटे छोटे पाँचछः झझाकों केँ संग मूतना बंदकर, टपटप हीरे सि जगमगाती बूंदे टपकाने लगी। पेशाब सें गीली बुर अब लिश-लिश कर शीशे सि चमकने लगी.ऐसा लगा कि खिलेहुए गुलाब पर्र शबनम कि बूंदें!
रीटा भि झुक अपनी सुन्दर बुर कों निहारा औऱ एक् ठंडी झुरझुरी लेकर रीटा नें अपनी पेशाब सें लबालब बुर कों दोबारा गुलाबी रंग पोल्का बिन्दियों वाली कच्छी मे छुपा लिया औऱ स्कर्ट नीचे गिरा दि। मूत सें डबडबाई हुइ बुर नें कच्छी कों फटाक सें गीलाकर केँ पारभासक बना दिया.
जब रीटा टायलट सें वापिस बाहर् आई तोँ राजू कों कमरे मे नं पाकर ढूंढती हुईँ बगल वाले कमरे मे जाकर देखा तौ ठिठक गई। राजू टायलट केँ दरवाजे मे अब भि आँख लगाये टायलट केँ अंन्दर देखरहा थां औऱ जीन्स केँ ऊपर सें अपने लंड कों जोरजोर सें रगड़ औऱ मसलरहा थां.
येदेख कर रीटा कि ऊपर कि सांसऊपर औऱ नीचे कि नीचेरह गई- साला! माँ कां लौड़ा! लड़की चौद! चूतीया मेरी बुर देखरहा हैं? औऱ वोँ भि मूतते हुए?
लज्जा औऱ गुस्से सें लाल, पांव पटकती राजू कों बिना बताये घऱ वापिस आँ गई.
गुस्से मे रोते रोतेजब रीटा नें मोनिका कों येसभी बताया तोँ मोनिका कि बांछें खिल गई। मोनिका नें एक् हाथ कि अुंगली औऱ अंगूठे सें मोरीबना औऱ दूसरे हाथ कि उंगली मोरी केँ अंदर-बाहर् करती हुई बोलीं- ऐ भौंसड़ी कि! शरमा नही़ं मौके कां फायदा उठा। लौहागरम हैं, हथौड़ा मारदे। आजकल तौ बहनें अपनेसगे भइया कों भि नहि छोड़ती औऱ सारे भइया बहनचौद होते हें। फिनकभी न् कभी तौ बुर फटती हि हैं.
मोनिका नें रीटा कों राजू सें अपनी फ़ुद्दी मरवाने केँ लिये उकसा दिया.
उस दिन मोनिका कुछ अधिक हि मस्त थि। मोनिका नें रीटा कों नंगा करके उसकी बुर कों फ़ुट्टे सें पीटा तोँ रीटाठरक केँ मजे औऱ पीड़ा सें रो हि दि। रीटा केँ गोरे चूतड़ों रानो औऱ बुर पऱ लाललाल लकीरें पड़ गई औऱ जबफिन मोनिका नें जलती हुई मोमबत्ती सें गरमगरम मोम रीटा केँ चूतड़ों पर्र टपकाया तौ रीटामजे सें बिलबिला कर कसमसा उठी.
अब ठरक केँ पागल रीटाकुछ भि करवाने केँ लिये राजी थि। मोनिका नें रीटा कि बुर मे उंगली करते करते रीटा केँ कड़े निप्पल पऱ कपड़े सुखाने बाली चुटकियाँ लगा दि, तोँ रीटा कि खुशी केँ मारे सुरीली किलकारियाँ निकल गई.
टायलट कि घटना नें रीटा कों उस मां केँ लौड़े राजू कि बेईमान नीयत कां पताचल गय़ा थां। अब राजू कि हरकतसोच कर रीटा केँ दिल मे लड्डू फूटने लगे औऱ बुर मे चींटियाँ सि रेंगने लगी। वो समझ गई कि राजूअसल मे महा ठरकी औऱ नम्बर वन चोदू हैं। बुलबुल अपनी चूत कां पटाका बजवाकर भौसड़ा बनवाने कों आतुर होँ उठी। मोनिका नें बताया थां कि लण्ड कि पिटाई हि चूत सें बुर, बुर सें भोंसड़ी औऱ भौंसड़ी सें भौसड़ा बनता हैं.
इस सबकेबाद रीटा राजू कों भईया तौ कहती थि, पर्र दिल हि दिल मे बहनचोद कि नजर सें देखने लगी थि। कईबार रीटा नें राजू कों मज़ाक मज़ाक मे द्वी-अर्थी बातें औऱ उलटे सीधे इशारे किये, पर्र राजू रीटा कों मासूम औऱ विद्यालय कि बच्ची सोचकर औऱ डर केँ मारे रीटा कि हरकतों कों नज़र-अंदाज कर देता थां औऱ ऊपर हि ऊपर सें ठरक पूरा करतारहा.
मौका पाकर रीटा राजू सें गलत-गलत प्रश्न पूछती, तोँ राजू केँ पसीने छूट जाते, जैसे
– लड़केखड़े होकर पिशाब क्यूं करते हें?
– क्याँ लड़कियाँ लड़कों कां दैहिक शोषण नहि कर सकती?
– लड़के अपने दुधू क्यूं नहि छुपाते?
– सुहागरात मे लड़का लड़की क्याँ करते हें?
– ब्लयू फ़िल्म क्याँ होती हैं?
– सैक्सी कां क्याँ मतलब हैं?
– क्याँ मे सैक्सी हूं?
रीटा केँ उलटे-सीधे सवालों पऱ राजू बगलें झांकने लगता औऱ रीटा कों डाँटकर चुप करवा देता.
सेक्सी स्टोरी जारी रहेगी।
जबरदस्त एपसोड हैं एकदम कामुक ओर गरमा गर्म । रीटा नें तोँ लन्ड खड़ा करवा दियाअब तौ कोई बुर ढूंढनी पड़ेगी
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तडपती जवानी
भाग--3
उस दिनघऱ पर्र रीटा केँ इलावा कोई भि नहि थां, मां-डैडी शहर सें बाहर् गएहुए थें। जैसे तैसे रीटा नें अपनी मां कों पटाकर राजू सें गाड़ी चलाना सीखना शुरुआत कर दिया थां.
रीटा बाथटब नहाकर पानी मे आग लगाने मे मग्न थि। मल-मलकर नहाती रीटा केँ दोनों बावले चुच्चे गुलाबी गुब्बारों कि तरह पानी केँ ऊपरतैर रहे थें। राजू केँ बारे सोचते हि ठरक केँ मारे रीटा नें अपनी बुर मे किंग साईज साबुन कि टिकिया गपकली। नौजवान राजू हैंडसम औऱ स्मार्ट लड़का थां। राजू कां लम्बा हाइट, चौड़ा चकला सीना औऱ मांसपेशियों सें भरपूर जिस्म यादकर रीटा पानी मे पनिया गई। तीर सि तीखे शॉवर कि तेजधार बुर पर्र पड़ने सें रीटा कि बुर औऱ भि गुदगुदा गई। शरीर मे तनावव कसाव बढ़ने सें जवानी कि दुखन औऱ टीस भि बढ़ गई.
आज ताजी़ ताजी नहाई रीटा नें राजू भईया कों पटाने कि कोईकसर नहि छोड़ना चाहती थि। शरारती रीटा नें अपनीचार साल पुरानी विद्यालय ड्रेस कि काली शॉर्ट स्कर्ट औऱ सफ़ेद शर्ट फंसाकर पैरों मे ऊँचीऐड़ी केँ सैंडल पहनलिए.
रीटा नें अपनी मस्त जानलेवा कामुक जवानी कों शीशे मे निहारते हुए पन्जों केँ बलउचक कर गोरी-गोरी बाहें ऊपरउठा शीशे कों तड़का देने वाली अंगड़ाई तोड़ी तौ चटाक चटाक कि आवाज़ सें रीटा कि तंग टैरालीन कि शर्ट केँ टिच्च बटन खुलते चलेगये.
उफ़्फ़! क्याँ नजारा थां! रीटा कि जवानठोस गोलाइयाँ बगावत पऱ उतरआई औऱ दोनों शरारती कुंवारे कबूतर शर्ट सें दाएं-बाएं बाहर् झांककर गुटर-गूं गुटर-गूं करनेलगे। चुच्चों नें रीटा कि शर्ट कों चौड़ाकर ‘वी’गले कों ‘यू’बना दिया थां.
चूचों केँ श्यमल शिखरऐसा लगते थें जैसे संगमरमर केँ चबूतरों पर्र कचनार कि कच्ची गुलाबी कली चिपकी होँ.
ठरकी रीटा नें अपने बगावत पे उतरआये चूचों कों बाहर् खींचकर उसे बेरहमी सें मसलने लगी। चूचे मस्ती मे चींचीं कर चिंघाड़ उठे.
अरे! मम्मी कित्ता आनंद आँ रहा हैं! रीटा नें अपनी गुलाबी-गुलाबी छोटी छोटीनीम सि नीमोलियों सें निप्पलों कों अपनीथूक सें सनी उंगली औऱ अंगूठे मे घुमाने सें कमसिन शरीर झनझना उठा औऱ बुर पिनपिना उठी.
मोनिका नें बताया थां कि बुर औऱ चुच्चों कां चोली दामन कां संग होता हैं.
रीटा कि सैक्सी सुडौल कैबरे डांसरों जैसी लम्बी व चिकनी टांगों नें तोँ हायराम हायरे कररखी थि। हाईहील सें रीटा कि गोरी गुदाज कदली जांघें औऱ सुडौल पिंडलियाँ औऱ भि उभरआई औऱ जैसे ‘नमश्कार! आइए औऱ चोद डालिये!’ कां आमन्त्रण देती लगती थि.
गदराहट सें मांसल घुटनों पऱ मादकबल पड़ेहुए थें, बेहद पतली औऱ पिचकी हुइ कमर केँ नीचे मस्तगोल गोल चूतड़ औऱ चूतड़ों मे दबी फंसी कुंवारी गाण्ड मे चींटियाँ सि रेंग रहीं थि। बेचारी नाम केवल कि नन्ही स्कर्ट रीटा कि उफनती व उबलती शोला जवानी कों रोकने मे नाकाम थि.
अपनी विद्यालय स्कर्ट ऊपरउठा कर सुर्ख लाल नाईलोन कि कच्छी मे अपने कसमसाते यौवन कों निहारते हि रीटा कि आँखों मे लाल डोरे खिंचगये औऱ गाल तमतमा उठे। पूरा शरीर पप्पी फैट! तौबा तौबा! क्याँ खूबसूरती थां, क्याँ शवाब थां उस लौंडिया कां, बिल्कुल ताजा ताजा खुली सोडे कि बोतल केँ समान। अपने ज्वालामुखी सें सुलगते औऱ फट पड़ने कों सजधजकर यौवन कों देखते हुऐ अपने निचले होंट केँ कोने कों दाँतों मे दबाकर खुद कों आँखमार दि औऱ फिन अपनी हि बेशर्मी पऱ खुद हि सरम गई.
लीर सि नाम-सिर्फ कसी कच्छी रीटा कि रोम-विहीन मलाई सि गोरी गदराई चूत औऱ गुदाज चूतड़ों मे धंसी हुईँ थि औऱ चलते वक्त रीटा कों बुरीतरह गुदगुदा देती थि.
एकदम शीशे सि चिकनी औऱ नादान बुर कि गुलाबी फांकें कच्छी सें बाहर् झांकरही थि औऱ बुर एकदम सें पच्च-पच्च गीली थि.
ठरक केँ मारे रीटा कि जवान फ़ुद्दी छोटीपाव रोटी कि तरहफूल गई, पनीयाई हुइ बुर कां चीरा झिलमिला उठा औऱ रीटा कां लशलश करता बदमाश किशमिश सां दाना हौले हौले अकड़ता चला गय़ा। अब रीटा कां भगनासा किसी छोटे शरारती बच्चे कि लुल्ली केँ समान बुर कि बालकोनी सें बाहर् झांकने लगा.
अनजाने मे हि रीटा कि फूल सि गोरी गोरी ऊँगलियाँ अपनी शैतान नन्गी बुर सें उलझ गई। गुस्से मे बिफरी गीली बुर पिच्च पिच्च करके पानी छोड़ने लगी। दाने कों छूते हि रीटा कि बुर मे फुलझड़ियाँ सि चलपड़ी औऱ गाण्ड गुदगुदाने लगी। रीटा अपनी टांगों कों चौड़ा किये, बुर कों गिटार जैसे बजा़ने लगी.
रीटा नें अपनी मरमरी टांगों कों भींचकर बुर कों शाँत करने कि नाकाम कोशिश कि, पर्र अब पानीसर केँ ऊपर सें निकल चुका थां। रीटाअब बिल्कुल वनीला सॉफ़्टी सि पिंघल चुकी थि औऱ उसकी हालत खराब होतीजा रही थि.
आखिरतैश मे आकर रीटा नें अपनी विद्यालय स्कर्ट बिल्कुल ऊपरउठा कच्छी कों घुटनों तक खींचकर अपनी नन्ही सि बुर मे उंगली पिरो दि। रीटा नें उंगली ‘प्चक’ कि गीली आवाजें करती सुराख मेंजड़ तक अंदरघुस गई। रीटा कि बुर कि दीवारें रीटा कि उंगली पर्र बुरीतरह सें कस गई औऱ उंगली कों चूसने लगी.
रीटा बुदबुदा उठी-अहह मां! सीऽऽऽ! साली तूँ मुझे बहोत सताती हैं ऽऽऽऽ! बुर कि फांकें दायें बायें फ़ैल गई। इस हालत मे रीटा कि नाजुक बुर किसीगधे केँ बच्चे कां लण्ड कां कचूमर निकाल कर उसका गरूर तोड़ सकती थि। आज तौ रीटा किसी भि पहलवान केँ लौड़े कों अपनी बुर कि नींबू नीचौड़नी मे निचौड़ कर लौड़े कां रस्सा बना सकती थि.
हौले हौले रीटा उंगली सुराख केँ अन्दर-बाहर् करफिच फ़िच कि आवाज़ सें अपने आप् हि अपनी बुर चोदने लगी। शायद बुर भि ‘मां चोद’ औऱ ‘बेहनचोद’ कि गालियाँ निकालने लगी थि.
मोनिका ठीक कहती थि- अगर उंगली सें बुर मारने मे ईत्ता आनंदआता हैं, तोँ सच्ची-मुच्ची कां गरम औऱ मोटा लण्ड तोँ दिन मे तारे दिखा देगा.
ये सोचकर वो जोरजोर सें अपनी बुर फैंटने लगी। बुर नें अब मस्त मोरनी कि माफ़िक अपनी रसीले पंखुड़ियाँ फैलादीं। लुत्फ़ सें रीटा कि बुर केँ दोनों पत्ते कंपकंपा रहे थें। पिटाई सें गोरी बुर गुलाबी सें लाल हौ चली थि.
रीटा नें अपनीठोस गोलाइयों कों बेरहमी सें मसल औऱ रगड़कर लालकर लिया। गीली बुर कि फचर-पचर, रीटा कि मधुर ईस्सऽऽऽऽऽ ईस्सऽऽऽ सिसकारियाँ औऱ बहकी बहकी बेतरतीब साँसें कमरे केँ वातावरण कों रंगीन बनाने लगी। प्यासी रीटा कां मादक यौवन, वासना केँ समुन्दर मे हिचकोले खानेलगा.
उत्तेजना केँ मारे रीटा कि आँखें ऊपर कों लुढ़क गई औऱ पेट अंदर कों पिचक गय़ा। बगावत पऱ उतरआऐ चुच्चे उठक-बैठक लगाने लगे.हर एक् झटके पऱ रीटा चूच्चे ऐसे थरथराते जैसे उनमें पाराभरा होँ। अपने हि चुच्चों कों फूलते पिचकते देखकर रीटा कि काम पीपासा दावानल सि भड़कउठी। एक् हाथ सें अपना चुच्चे कों ऊपरउठा औऱ मुँह झुकाकर होंटों मे लेकर चुमला दिया.
बीच बीच मे रूकरूक कर रीटा अपनी कीचड़ हुईँ बुर मे सें ऊँगलियाँ निकाल कर बुर कां हल्का नमकीन पाईन-एपल जूस किसी भूखी बिल्ली कि तरह चुसड़-चुसड़ कि आवाज़ सें चाट लेती थि। जुकाम लगने केँ कारण रीटा कि जगमगाती बुर पानीछोड़ कर, अपनी पड़ोसन गाण्ड कों तरबतर कररही थि। जब रीटा ऊँगलियाँ उसकी नन्ही बुर केँ अंदर जाती तौ बुर कि कसावट कि वजह सें पानी कि पिचकारियाँ सि निकल पड़ती.वाउ, क्याँ कयामत नज़ारा थां.
‘हायऽऽऽ पता नहि कब चुदेगी ये निगौडी माँ कि लौड़ी मेरी बुर!’ बुदबुदा उठी रीटा-काश, आजकोई मादरचोद मेरी कमरतोड़ चुदाई करदे औऱ मेरी मखमल सि रेशमी गाण्ड फाड़कर मेरी चकाचक जवानी केँ कस-बल निकाल दे.कोई मतवाला अपना मस्त फनफनाता हुआ लण्ड दोनों ट्टटों समेत मेरी अनचुदी बुर मे पेलकर फाड़ डाले औऱ भौंसडा बनादे। मुझे चौपाया बनाकर मेरी पौनी-टेल कों पकड़कर सड़कछाप कामुक कुतिया कि तरह मार्ग केँ चौराहे पऱ चोददे। मेरी न् नं करने केँ बावाजूद भि मुझेपकड़ करपीट पीटकर बेरहमी सें गाण्ड केँ चीथड़े उड़ादे औऱ बुर कि चिन्दी चिन्दी करदे, मेरा पोर-पोर चटकादे औऱ मेरे कोमल शरीर कों रोडरोलर कि तरह रौंदकर रखदे.
काश मेरे रसभरे होंठों मे किसी बहनचोद कां मोटा फौलादी लन हौ गले तक सटक केँ, आँखों मे आँखेडाल कर चुसड़ चुसड़ कर मे उसके लण्ड कि झड़न केँ संग, चूस कर ट्टटे भि पी जाऊँ। लौड़े पर्र दंदियाँ मारमार कर लण्ड कि ऐसी कि तैसीकर दूँ। पर्र कोई आशिक मिले तोँ सही.
रीटा कों अब एक् मूसल सां लण्ड चाहिए, जोँ रीटा कि सुलगती जवानी कि ईंट सें ईंटबजा दे औऱ अपनी जवानी केँ झन्डे गाड़ केँ रखदे.
तभी दरवाजे कि घण्टी बजते हि रीटा केँ शरीर मे सिरहन दौड़ गई, बुर फड़फड़ा औऱ गाण्ड गुदगुदा उठी। जरूर राजू वाहन चलाना सिखाने आया होगा, बुर मरवाने कों बेताब रीटा केँ दिमाग़ मे सारी योजना रेडी थि.
रीटा नें झटपट सें अपनी कच्छी कों घुटनों सें कमर पर्र खींच लिया औऱ छोटी सि विद्यालय स्कर्ट नीचेकर औऱ चूचों कों शर्ट केँ वापिस अंदरठोस करछः मे सें चारबटन जैसे तैसेबंद कर दिये। जल्द सें बुर कि फांकों कों लैक्मे कि सोलह नम्बर कि लिपस्टिक सें पोतलिआ। फिनकुछ सोचकर शरारती रीटा नें जाते जाते नेलपालिश कि शीशी सोफे केँ आगेपड़े हुएमेज केँ नीचे फ़ेंक दि.
पिछले कुछ दिनों मे रीटा मजाक करने मे राजू सें बहुतखुल गई थि दरवाजा खोलते हि राजू कों देखते, हरामज़ादी लौड़ै कि भूखी रीटा कि आँखों मे चमक आँ गई औऱ बांछे खिलउठी.
राजू रीटा कि पोशाक कों देखते हि पहले तोँ सकपका गय़ा। ताजी ताजी नहाई रीटा केँ गीले गीले बालों केँ बीचअति मासूम चेहरा। रीटा कि तीन चौथाई गोलगोल गोलाइयाँ तंग शर्ट केँ खुलेगले सें बाहर् उबलपड़ रही थि औऱ राजू कि तरफतनी हुई थि। मिज़ाइलों सें खड़ेहुए निप्पल शर्ट कों चीरफाड़ कर बाहर् आने कों बेताब लगरहे थें। काली स्कर्ट सें बाहर् झांकती नंगी संगमरमरी गोरी चिट्टी गदराई आपस मे चिपकी रानें, सुंदर गुदाज पैरों मे हाईहील। हाथ-पैरों पर्र लाललाल नेलपालिश, प्यारे सें नाक मे नथ, कानों मे सफ़ेद मैटल केँ टाप्स, पैरों मे पाजेब औऱ कलाइयों मे सफ़ेद मैटल केँ कंगन.
बिजली गिराती मस्ताई हुईँ रीटा टेढ़ी दिलकश मुस्कान केँ संग चहकती हुईँ सुरीली आवाज़ मे बोलि- हैल्लौ भईया!हाऊ आरयू?
रीटा नें राजू कां हाथपकड़ कर अंदर खींच लिया.
जैसे हि राजू अंदर घुसने लगा, शरारती रीटा नें अपनी अधनंगी व अकड़ी हुइ छातियाँ राजू सें भिड़ाती हुइ बोलीं- आऊचऽऽऽ, आईएम सारी भईया.
इतने मे हि राजू केँ लण्ड नें कच्छे कि माँ चोद केँ रख दि.
फिन शरारती रीटा नें घूमकर औऱ उचककर सिटकनी लगाने कि असफल कोशिश करती बोलि- भईया प्लीज़ हैल्प मी, मुझे थोड़ाऊपर उठाआ नाऽऽऽ! मुझेऊपर वाली सिटकनी लगानी हैं.
राजूअब थोडा सम्भल चुका थां औऱ झट सें मौके कां फायदा उठाते हुऐ रीटा कों उठाते हुएउस कि कमर मे हाथडाल कर अपने लण्ड सें रीटा कि प्यारी कि गाण्ड कों गुदगुदा दिया.जब रीटा कों नीचे उतारा तौ राजू नें रीटा केँ दो सूखे घस्से मार दिये। राजू कि सख्ती महसूस कर बदमाश रीटा केँ होंटो पर्र छुपी छुपी मुस्कूराहट आँ गई.
राजू रीटा केँ नंगपने कों देखकर मजाक मे फुसफुसा कर बोला- बेबीये क्याँ? कहीं तुम् मॉडलिंग वाडलिंग करनेलगी होँ?
घऱ केँ लोग रीटा कों प्रेम सें बेबीकहा करते थें.
रीटा बहोत हि मासूमियत सें मुँह फुला अपने चुच्चों कों उचकाती हुई बोलि- ओहनो भईया, मे तोँ अपने पुराने कपड़े ट्राई कररही थि। पर्र भईया देखो नाँ! यह कपड़े ईत्ते टाईट औऱ छोटे हौ गये हें!
राजू रीटा कि कमर सहलाकर औऱ चूतड़ कों मसलकर, चूचों कों देखकर अथर्पूण स्वर मे बोला- बेबी कपड़े छोटे नहि हुए, तुम्हारे यहबड़े होँ गये हें.
‘धत्त भईया, मे बहोत मारूँगी!’ रीटा नें झेंपते हुए बनावटी क्रोध करतेहुए राजू कां हाथझटक दिया.
‘बट भईयाआई लाईक दि स्टफ वैरीमच!’ गुन्ड़ी रीटा शर्ट केँ कपड़े कि तरफ इशारा कर अपने चुच्चे हवा मे राजू कि तरफ उछालती बोलि- भईया, फील करके देखो, बहोत हि मजेदार औऱ साफ्ट साफ्ट हैं.
‘देखूँ तोँ!’ येकहकर राजू नें रीटा केँ शर्ट केँ कपड़े कों फील करके उसके गिरेबान मे हाथडाल कर चुच्चा टटोल सां दिया औऱ मुस्कुरा कर बोला- सचमुच बहोत साफ्ट साफ्ट हैं.
रीटा किलकारी मारकर छिटककर पीछेहट कर बोलीं- आऊचऽऽऽ! ऊईऽऽ! गुदगुदी मतकरो नाऽऽऽऽ, हटो भईया, आप् तोँ बहोत हि बेशरम होँ!
राजू रीटा कि हरबात केँ पीछे नाऽऽऽ लगाने कि अदा पऱ फिदा थां.
‘भईयाबस पाँच मिनट रूको, मे नेलपालिश लगालूँ, फिन गाड़ी चलाने चलतें हें!’ येकहकर रीटा अपने रेशमी बालों कों अदा सें पीछे झटकती हुई घूमी औऱ चूतड़ों कों जोरजोर सें दायें बायें मटकाती चल दि.
रीटा कि इठलाती बल खातीभरी भरी लचकती गाण्ड देखकर राजू कों लगा केँ उसका लौड़ा पानीछोड़ देगा.ऐसा लगरहा थां जैसे बड़े-बड़े पानी सें भरे गुब्बारे थरथरा रहेहों.
हाईहील केँ कारण रीटा कि कुछ अधिक हि उचकी हुई बुण्ड बहोत हि मस्तलग रही थि.
राजू कों सोफे पर्र बैठाकर नेलपालिश कि शीशी ढूंढती हुई बोलि- कहां मर गई मेरी नेलपालिश कि शीशी? मंमऽऽऽ वोँ रही!
ये कहकर रीटा सहारा लेकर झुकने केँ बहाने लापरवाही सें राजू केँ अकड़े लण्ड कों पकड़ लिया औऱ बिना घुटने मोड़े हि नेलपालिश कि शीशी उठाने कों झुक गई.
पीछे सें काली स्कर्ट रीटा कि लम्बी टांगों सें ऊपर उठतीचली गई औऱ लाल कच्छी मे फंसे संगमरमरी सफेद चूतड़ राजू केँ सीने पर्र बिजली सें गिरे.
बेरहम बेहया रीटा नें अपनी गाण्ड औऱ भि पीछे कों उचका दि तौ चिकने चूतड़ों केँ बीच सें भिंची भिंची बुर भि नुमाया होँ आई.संग हि झुकने सें रीटा केँ चुच्चे कुछ पलों केँ लिये निप्पलों समेत शर्ट सें बाहर् आकर राजू कों जीभ दिखाकर छकागये.
रीटा नें राजू केँ अकड़े लण्ड कों जोर सें दबाकर छोड़ दिया राजू केँ लण्ड कि सख्ती भांपकर रीटा कि सांसें भि तेज़ हौ बेतरतीब हौ गई.
राजू केँ सामने बैठकर छिनाल रीटा नें अपनी तिरछी निगाहों सें देखकर टेढ़ी सि सैक्सी स्माईल उछाल दि औऱ अंतिम तीरचला दिया.
क्याँ थां वोँ अंतिम तीर?
जानने केँ लिएइस देसी स्टोरी केँ अगलेभाग कि इंतज़ार करें!
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