घर का रसीला तरबूज। (Completed) - माँ बेटा – New Episode
चंदा-मन हि मन मुस्कुराते हुए हरिया कि नज़रो कों अपनी बुर कों घूरते पाकर, देखा बेटा कुछ दिखा क्याँ
हरिया- अपनी नज़रे मतकते हुए उसके तलवो पर्र हाथ फेरते हुए, देख रहाहू काकीकही नज़र तौ आँ नहींरहा हैं
चंदा- थोडा दबाकर देखने कि कोशिश कर बेटा, दर्द होगा तौ पताचल जाएगा कहां पऱ लगा हैं औऱ फिन चंदा अपनी दोनो जाँघो कों औऱ अच्छे सें फैलाकर अपने घाघरे कों थोडा औऱ उठा देती हैं औऱ उसका भारी भरकम गदराया भोसड़ा पूराखुल कर हरिया कि आँखो केँ सामने आँ जाता हैं औऱ चंदा काकी कां रसीला भोसड़ा देखकर हरिया कि नज़रे बस उसकी मस्तानी बुर पऱ हि टिक जाती हैं
चंदा- नाटक करतेहुए, थोडा गुस्से मे, हरिया क्याँ देखरहा थां तूँ
हरिया- एक् दम सें थोडा डरकरकुछ भि नहीं काकी
चंदा कां घाघरा अभि भि उसकी जाँघो तक चढ़ाहुआ थां औऱ हरिया उसकी टांग छोड़कर खड़ा होँ गय़ा थां
चंदा- उसकाहाथ पकड़कर वही अपने पैरो केँ पास बैठा लेती हैं औऱ, सच-सचबता हरिया तुँ मेरे घाघरे केँ अंदर क्याँ देखरहा थां
हरिया- घबराते हुए अपने सूखे होंठो पऱ जीभफेर कर, नहीं काकी मे कुछ भि नहींदेख रहा थां,
चंदा-मन हि मन मुस्कुराते हुए, पक्का तुँ मेरे घाघरे केँ अंदर नहीं झाँकरहा थां नाँ
हरिया- नहीं काकी बिल्कुल नहीं
चंदा-चल ठीक हैं अब ज़रा अच्छे सें काँटा देख कहां लगा हैं औऱ चंदाफिन सें अपनी एक् टांगउठा कर हरिया केँ कंधे कि औऱ रख देती हैं औऱ उसकी पूरी बुर खुलकर हरिया केँ मुँह केँ सामने आँ जाती हैं, हरिया उसके तलवो कों देखता हैं फिन भि उसकी फूली हुइ बुर उसके सामने आँ जाती हैं औऱ वो चंदा काकी कि बुर कों देखे बिना नहींरह पाता हैं,
चंदा- हरिया तुम्हें शरम नहींआती अपनी काकी कि बुर कों इसतरह खा जाने वाली नज़रो सें देखरहा हैं,
हरिया- थोडा हिम्मत करतेहुए, क्याँ करू काकीजब मे तुम्हारे पैरो केँ तलवो कों देखता हू तोँ तुम्हारी वोँ भि नज़र आँ जाती हैं,
चंदा- तौ क्याँ तुँ अपनी काकी कि बुर कों देखेगा
हरिया- डरतेहुए नहीं काकी मे देख्ना नहीं चाहता हू पऱ आपकापैर देखते हुए वो दिख जाती हैं,
चंदा- क्याँ देख्ना नहीं चाहता हैं तुँ
हरिया- अपनी नज़रे नीचे सें उसकी बुर कि ओर करतेहुए, आपकी बुर
चंदा- क्यो तुम्हे मेरी बुर देख्ना अच्छा नहीं लगता हैं क्याँ,
हरिया- कोई जवाब नहींदे पाता हैं
चंदा- अच्छा चलदेख लें पर्र काँटा भि जल्द सें ढूँढ कहां लगा हैं, औऱ चंदा अपना घाघरा इसबार कमर तक चढ़ाकर अपनी पूरी बुर हरिया केँ सामने खोल देती हैं, ये नज़ारा देखकर हरिया कां मान करता हैं कि अभि अपनी काकी कि बुर मे मुँहडाल करचूस डाले,
चंदा- हरिया कां हाथ पकड़कर अपनीओर खीच लेती हैं औऱ मुस्कुरकर हरिया कों देखकर, ऐसे क्याँ देखरहा हैं बेटा क्याँ खा जाएगा मेरी बुर कों, सच-सचबता तेरी मेरी बुर कैसी लगती हैं,
हरिया- थोडा शरमाते हुए, अच्छी हैं काकी,
चंदा- च्छूकर देखेगा
उसकीबात सुनकर हरिया कोई जवाब नहीं देता हैं, तब चंदाउसे अपनेपास खीचकर उसके गालो कों चूमती हुई, अच्छा सच-सचबता तूने औऱ किस-किस कों नंगी देखा हैं,
हरिया- किसी कों नहीं काकी
चंदा-झूठ मतबोल, अगर सच-सच बताएगा तोँ मे तुम्हारी तरफ अपनी बुर च्छूकर देखने दूँगी
हरिया- मे सचकहरहा हू काकी मैनेआज सें पहलेकभी बुर नहीं देखी,
चंदा-अच्छा तुँ सच नहीं बताएगा, अच्छा यह तौ बता गाँव मे कौन सि स्त्री कों नंगी देखने कां सबसे अधिकमन करता हैं तेरा,
हरिया- मुझे क्याँ पता काकी मैने थोड़े किसी कों नंगी देखा हैं,
चंदा कि नज़रे हरिया केँ लूँगी मे फूलेहुए लन्ड पऱ थि औऱ वो आजउस लन्ड कां स्वाद चखने केँ लिए बेचैन हौ उठी थि औऱ उसेपता थां कि उसकेपास हरिया कि दुखती रग कां राज भि हैं, वो समझ गई थि कि हरिया केँ दिलो दिमाग़ मे क्याँ चलता रहता हैं, इसीलिए येदिन भर अपनेघऱ मे हि घुसा रहता हैं,
चंदा- हरिया कों अपनेपास सटाकर, अच्छा हरिया तुम्हें पता हैं अपने पूरे गाँव मे सबसे ज्यादा उठी हुई औऱ गदराई स्त्री कौन हैं
हरिया- कौन हैं
चंदा- उसके लन्ड कि औऱ देखकर, तेरी माँ औऱ कौन
अपनी मां कां नाम सुनते हि हरिया कां लन्ड झटका मारने लगा औऱ चंदा कों उसका एहसास उसकी लूँगी केँ उपर सें होँ गय़ा,
चंदा- मालूम हैं तेरी माँ केँ भारी भरकम चुतडो नें पूरे गाँव कों पागलकर रखा हैं, हरकोई तेरी माँ कों खूब कस-कसकर चोदना चाहता हैं
हरिया- ये तुम् क्याँ कहरही हौ काकी
चंदा-सच कहरही हू बेटे, तेरी मां कि गदराई जवानी उसकी मोटी-मोटी जंघे औऱ फैलेहुए भारी भरकम गान्ड देख-देख कर लोगो केँ लन्ड खड़े होँ जाते हैं,
तेरा भि लन्ड अपनी मां कों देखकर खड़ा होँ जाता हैं नां
हरिया- यह क्याँ कहरही हौ काकी, मे भलाऐसा क्यो करूँगा
चंदा उसके मोटे लन्ड कों लूँगी केँ उपर सें एक् दम सें पकड़ लेती हैं औऱ हरिया अहह करके चंदा सें सत जाता हैं, औऱ उसकी गदराई जाँघो कों अपनेहाथ केँ पंजो मे भरकर मसल्ने लगता हैं
चंदा- उसके लन्ड कों सहलाते हुए, सच बोल हरिया तेरा लन्ड भि अपनी मां कों देखकर खड़ा हौ जाता हैं नां,
हरिया- चंदा कि मोटी जाँघो कों सहलाता हुआ, नहीं काकीये तुमसे किसने कह दिया,
चंदा- उसके लन्ड कों कसकर दबाते हुए तौ फिन अपनी मां कों नंगी नहाते हुए क्योदेख रहा थां,
उसकीबात सुनते हि हरिया केँ होशउड़ जाते हैं औऱ उसकेहाथ कि पकड़ चंदा कि जाँघो सें ढीलीपड़ जाती हैं,
चंदा- उसकाहाथ पकड़कर अपनी दोनो जाँघो कों फैलाकर अपनी फूली हुई बुर केँ उपररख लेती हैं औऱ, अरे डरता क्यो हैं बेटे मे किसी सें कहने थोड़े हि जारही हू, मुझे मालूम हैं तुम्हे अपनी मां कों पूरी नंगी देखने कां कितना मन करता हैं, तुँ क्याँ तेरी स्थान कोई भि बेटा होता जिसकी ऐसी गदराई औऱ जवान मां होती वो उसे पूरी नंगी करके अवश्य चोदना चाहता,
चंदा कि बातेसुन कर हरिया कां लन्ड पूरेताव मे आँ जाता हैं औऱ वो चंदा कि बुर कों खूब ज़ोर-ज़ोर सें मसल्ने लगता हैं,
चंदा- सीसियते हुए उसके मोटे लन्ड कों लूँगी सें बाहर् निकाल कर देखती हैं औऱ पागल हौ जाती हैं औऱ हरिया केँ मोटे लन्ड कों झुककर अपने मुँह मे भरकर पागलो कि तरहखूब कस-कसकर चूसने लगती हैं, हरिया मानो आसमान मे उड़ने लग जाता हैं, वो चंदा काकी कि दोनो मोटी जाँघो औऱ पूरी फूली हुइ बुर कों पागलो कि तरह दबोच-दबोच कर मसल्ने लगता हैं, चंदा हरिया केँ लन्ड कों खूब कस-कसकर तब तक चुस्ती हैं जब तक कि उसका सारा पानी चंदापी नहीं जाती हैं, हरिया चंदा काकी कि बुर कों खूब मसल-मसल करलाल कर देता हैं औऱ अपने लन्ड कां सारा पानी चंदा काकी केँ मुँह मे छोड़ देता हैं जिसे चंदा काकी पूरा चाट-चाट करचूस लेती हैं,
चंदा- हरिया कों चूमते हुए, अब बता बेटा सच-सच तुँ अपनी मां कों पूरी नंगी करके चोदना चाहता हैं नां
हरिया कां मोटा लन्ड फिन सें खड़ा होने लगता हैं औऱ वो चंदा काकी केँ होंठो कों चूमते हुए उसके मोटी-मोटी चुचियाँ कों दबाते हुए, हा काकी मुझे अपनी मां बहोत अच्छी लगती हैं, मे उसे पूरी नंगी करकेखूब कस-कसकर चोदना चाहता हू, जब तुम् मां कि तेल मालिश करती होँ तब मे उसका पूरा भोसड़ा देख चुकाहू वो मुझे बहोत अच्छी लगती हैं,
चंदा- हरिया कों रंग मे आतादेख उसेउठ कर कुटिया केँ अंदर चलने कों कहती हैं औऱ फिन दोनो कुटिया केँ अंदरचले जाते हैं ज़मीन पर्र चंदा एक् चटाईडाल करउसे पकड़कर नीचे बैठा लेती हैं औऱ फिन हरिया केँ मोटे लन्ड कों दोनो हाथो सें पकड़कर सहलाते हुए, हा बेटा अबबता तेरा क्याँ-क्याँ मन करता हैं अपनी मां केँ संग करने कों,
हरिया- चंदा काकी कि बुर कों अपने हाथो मे भरकरखूब कसकर दबोचते हुए, हे काकी मेरादिल करता हैं कि मे अपनी माँ कि खूब गान्ड औऱ बुर कों चतु उसकी बुर कि फांको कों फैला-फैला करखूब उसकी फूली हुईँ बुर कां रसपीजाउ, उसे पूरी नंगी करके अपने लन्ड पऱ बैठाकर खूब कस-कसकर चोदु, उसकीखूब मोटी-मोटी गान्ड कों खूबजी भरकर गहराई तक चोदु,
चंदा- उसके लन्ड केँ टोपे कों सहलाती हुइ, अपनी काकी कों चोदेगा?
हरिया- हाँ काकी क्यो नहीं औऱ फिन हरिया अपना मोटा लन्ड अपनी काकी कि दोनो जाँघो केँ बीचबैठ कर उसकी दोनो जाँघो कों उपर तक उठाकर उसके घुटनो कों मोड़ देता हैं औऱ मोटे लन्ड कों उसकी फूली हुई बुर कि गदराई फांको कों हटाकर कसकर एक् हि झटके मे जड़ तक पेल देता हैं औऱ चंदा अहह.अहह करके सीसीयाने लगती हैं, हाय हरिया कितना मोटा लन्ड हैं रे तेराओह मामर गई, उसकीऐसी आवाज़ सुनकर हरिया उसकी दोनो मोटी जाँघो कों औऱ कसकर फैलाते हुएखूब कस-कसकर उसकी फूली बुर मे अपने मोटे लन्ड कों बिल्कुल जड़ तक पेलना शुरुआत कर देता हैं औऱ चंदाअहह अहह करती हुइ अपने मोटे-मोटे चुतडो कों हरिया केँ लन्ड पऱ मारने लगती हैं, हरिया खूब हुमच-हुमच कर चंदा काकी कों चोदना शुरुआत कर देता हैं, कुछदेर बाद हरिया चंदा काकी कों घोड़ी बनाकर पीछे सें उसकी मोटी-मोटी गोरी गान्ड औऱ एक् बित्ते कि लंबी औऱ चौड़ी बुर कों खूब कस-कसकर चाटने लगता हैं औऱ चंदाअहह अहह करती हुइ खूब सीसीयाने लगती हैं,
चंदा-अरे हरिया यहसभी चोदने कि कलाबाजी कहां सें सीखा हैं रे तूँ तोँ बहोत अच्छा चोदता हैं, तेरी माँ अगर एक् बार तुझसे अपनी बुर मरवा लेँ तोँ वो तोँ तेरे मोटे लन्ड कि
दीवानी होँ जाएगी, तुँ नहीं जानता हरिया तेरी मां कि बुर कितनी चुदासी हैं वो तौ मोटे-मोटे लन्ड खाने केँ लिए तड़पति रहती हैं,
हरिया- सच काकी तुम् सचकहरही हौ, मैने तौ मां कि बुर दूर सें देखी हैं पर्र तुमने तोँ उसे च्छूकर भि देखा हैं कैसी लगती हैं मेरी मां कि बुर औऱ फिन हरिया पीछे सें चंदा कि गान्ड औऱ बुर कों लंबी-लंबी जीभ निकाल कर चाटने लगता हैं,
चंदा-अहह अहहओह हरिया तेरी मां कि बुर तौ बहोत फूली हुईँ औऱ चिकनी हैं रे वो जब तेरे मुँह मे अपनी बुर खोलकर बैठेगी तब तुम कोपता चलेगा कितना मस्त भोसड़ा हैं तेरी माँ कां, सारे गाँव केँ मोटे लन्ड उसकी फूली हुई बुर मे घुसना चाहते हैं औऱ मुझेआज पताचला कि उसकी बुर मे घुसने केँ लिए उसके अपने बेटे कां मोटा लन्ड कितना उतावला हैं, बोल चोदेगा अपनी मां कों
क्रमशः।
घर का रसीला तरबूज। (Completed) - माँ बेटा – New Episode
गतान्क सें आगे.
हरिया- हा काकी मे अपनी मां कों खूब रगड़-रगड़ कर चोदना चाहता हू, जबघऱ मे चलती हैं तोँ दिल करता हैं उसे जाकर अपनीगोद मे उठाकर खूब प्रेम करू, उसका चेहरा इतनाभरा हुआ औऱ हसीन हैं कि दिल करता हैं उसके गालो होंठो कों खूब चुसू औऱ उसकी बुर मे लन्ड पेलते हुए उसकीजीभ कां रसखूब चुसू, मां कों जब भि चोदु उसकी रसीली जीभ कों चूस्ते हुए उसकी बुर मे अपना मोटा लन्ड डालु,
औऱ फिन हरिया चंदा काकी कि बुर मे पीछे सें अपना मोटा लन्ड कसकरपेल देता हैं औऱ सतसट उसकीकमर पकड़कर धक्के पर्र धक्के मारने लगता हैं, वो चोद चंदा काकी कों रहा थां मगर उसकीबंद आँखो केँ सामने उसकी माँ कि गदराई जवानी नाचरही थि, उसकेहर धक्के केँ संगउसे ऐसा लगता थां कि जैसे वो अपनी माँ कि गान्ड माररहा हैं, वो चोद चंदा काकी कों रहा थां मगर उसकी कल्पना मे उसकी माँ उसके सामने पूरी नंगी होकर अपनी बुर उठा-उठा कर अपने बेटे कों दिखाते हुएनाच रही थि, उसने अपनी कल्पना मे अपनी माँ कों पूरी नंगी करकेखूब नचा-नचा कर बुर औऱ गान्ड मतकते हुए देखा थां, औऱ उसकेहर धक्को केँ संगउसे ऐसालग रहा थां कि जैसे उसकी मां नंगी नाचती हुइ उसे अपनी बुर दिखा-दिखा करकहरही होँ लें बेटा चढ़जा अपनीमा केँ नंगे जिस्म पर्र औऱ खूबकर करचोद दे मेरी बुर कों,
उसके धक्के कि रफ़्तार अपनी मां कि नंगे शरीर कि कल्पना सें बढ़ती जारही थि औऱ वो खूब कस-कसकर सतसट अपने मोटे लन्ड कों चंदा काकी कों घोड़ी बनाकर उसकी बुर माररहा थां, उधर चंदा काकीउस धमाकेदार चुदाई सें पूरीतरफ मस्त हौ चुकी थि, तभी हरिया कि आँखो केँ सामने कल्पना मे उसकी मां नें अपनी दोनो जाँघो कों फैलाकर अपना मदहोश कर देने वाला भोसड़ा दिखाया तोँ हरिया अपनी कल्पना मे अपनी मां कि मस्त बुर कों खूब कस-कसकर चोदता हुआ एक् दम सें झाड़ गय़ा औऱ उसकी आँखो केँ सामने उसकी मां कि फूली हुईँ बुर नें उसका सारा पानी चंदा काकी कि बुर मे गिरवा दिया थां,
हरिया सें चुदवाने केँ बाद चंदा अपनेपेट केँ बल अपनी गान्ड उठाएहुए लेटी थि औऱ हरिया उसके भारी भरकम चुतडो कि गहरी दरार मे अपनी उंगलिया घुमारहा थां,
हरिया- काकी तुम्हारी मोटी गान्ड औऱ इसकाये भूराछेद कितना अच्छा लगरहा हैं,
चंदा-अरे बेटा जब अपनी माँ कि मोटी गान्ड औऱ उसकी गान्ड कि गहरी दरार कों फैलाकर देखेगा तोँ खड़ा-खड़ा मूत देगा
हरिया- क्यो इतनी मस्त हैं क्याँ माँ कि गान्ड
चंदा-अरे बेटा उसके गोरे-गोरे भारी भरकम चुतडो कों चाटने औऱ चोदने केँ लिए तौ पूरा गाँव पागल हैं पर्र किसी कों उसकी गान्ड कि गहराई देखने कां मोका नहीं मिला, तेरी मां कि स्थान कोई चालू रांड होती तोँ अब तक सारे गाँव कां लन्ड अपनी गदराई गान्ड मे लेँ चुकी होती, पऱ तेरी मां पर्र हाथ रखने कि हिम्मत किसी नें नहीं दिखाई औऱ तौ औऱ तेरा बाप भि उसे कहां ढंग सें चोद पाता हैं, सचकहु उसे तेरे जैसे मोटे लन्ड कि ठुकाई सें हि राहत मिलेगी, तेरा मोटा लन्ड देखकर तोँ ऐसा लगता हैं जैसेइसे तेरी माँ कों चोदने केँ लिए हि बनाया गय़ा हैं,
हरिया- अपने दोनो हाथो सें चंदा कि दोनो गान्ड कों फैलाकर उसकी गुदा कों सूंघकर अहह काकी कितनी मस्त गुदा हैं तुम्हारी मे अपना लन्ड एक् बार इसमे भि डालदू
चंदा- एक् दम सें पलटकर नाँ बेटा नाँ, मे अपनी गान्ड नहीं मरवाउंगी, तुम्हें ज्यादा गान्ड मारने कां मनकररहा हैं तोँ जाकर अपनी माँ कि गान्ड मार उसकी गान्ड हैं भि बहोत मोटी तेरा मोटा लन्ड सह लेगी, मे तोँ तेरायह मूसल अपनी गान्ड मे लेकरमर हि जाउन्गि,
हरिया- पऱ काकी माँ मुझे कहां अपनी गान्ड दे देगी तुम् हि मार लेनेदो नाँ,
चंदा- नहीं बेटे तेरा लन्ड तेरी माँ कि गान्ड मे हि सही रहेगा, कोशिश करकेदेख लें शायद तुझसे अपनी बुर औऱ गान्ड मरवाने केँ लिए राज़ी हौ जाए,
हरिया- कुछसोच कर, तोँ काकी तुम् हि कोई उपाय बताओ नाँ
चंदा- बेटा मे क्याँ उपाय बताऊ, फिन भि मे कोशिश करूँगी चलअब जल्द सें कपड़े पहन लेँ हमे बहोत देर हौ गई हैं कोईइधर हि नां चला आँ रहा हौ,
चंदा कां शकसही निकला औऱ दूर सें कमलाआती हुइ दोनो कों दिखाई देती हैं, कमला कों देखकर चंदा खेतो केँ बीच मे काम करने पहुच जाती हैं औऱ हरिया इधरउधर केँ काम मे लग जाता हैं,
कुछदेर बाद तीनो पेड़ कि छाया मे बैठकर बाते करने लगते हैं, हरिया खानां खाकरबैठ जाता हैं तब कमलाउसे कुछदेर कुटिया मे आराम करने कों कह देती हैं औऱ फिनजब हरिया कुटिया मे चला जाता हैं तब कमला अपने पल्लू सें तेल कि छ्होटी सि शीशी निकाल कर चंदा कों देतेहुए
कमला- लें चंदा पकड़यह तेल औऱ एक् बार औऱ कसकर मेरे पैरो कि मालिश करदे नां जाने क्यो इतना दर्दबना हुआ हैं उस टाइम तुझसे मालिश करवाई तोँ कुछठीक होँ गय़ा थां पऱ अब तौ जाँघो मे भि जकड़न महसूस हौ रही हैं, लें ज़रा अच्छे सें कसकर मालिश कर मे यही पेड़ केँ नीचेलेट जातीहू,
चंदा- मुस्कुराते हुए कमला कि साडी कों उसकीकमर तक कर देती हैं,
कमला-अरे क्याँ कररही हैं पूरी नंगीकर दिया तूनेकही हरिया बाहर् आँ गय़ा तौ वो देख लेगा
चंदा- अपने हाथो मे तेलभर कर उसकी गदराई जाँघो मे लगाकर मसल्ते हुए, अरे मालकिन देख भि लेगा तोँ क्याँ हुआअब तुम्हारा हरिया भि कोई बच्चा नहींरहा अब तौ उसे भि तुम्हारे जैसी गदराई स्त्री कों चोदने कां मन करता होगा,
कमला- क्याँ अनबसनब बकरही हैं मेरे बेटे केँ बारे मे, चुपचाप मालिश करअहह हाँयही सबसे ज्यादा दर्द हैं
चंदा- मुस्कुराते हुए, मालकिन तुम्हारी मोटी जंघेखूब कस गई हैं लगता हैं बहोत टाइम सें इन्हे किसी मर्द नें दबोचा नहीं हैं इसलिये खूनबँध गय़ा हैं इनमे,
कमला-अब इस बुढ़ापे मे कौन दबोचेगा मेरी जंघे
तभी चंदा कमला कि बुर कों सहला देती हैं औऱ ओह मालकिन तुम्हारी बुर सें तौ पानीबह रहा हैं
कमला- थोडा शर्मकार मुस्कुराते हुए, हाँ रेजब तुँ इसतरह छुएगी तौ पानी नहीं तौ क्याँ बहेगा,
चंदा- एक् बातकहु मालकिन
कमला- क्याँ
चंदा- अपनेकभी घोड़े जैसा मोटा औऱ लंबा लन्ड देखा हैं,
कमला- नहीं तौ, क्यो तूने किसका देख लिया
चंदा-कुछ नहींबस ऐसे हि पुंछ लिया
कमला-अब अधिक नखरा नां छोड़बता भि किसका देखा हैं तूने
चंदा हल्के सें मुस्कुराते हुएसमझ गई थि कि कमला कि बुर बहोत चुदासी हैं उसने धीरे-धीरे सें अपनेहाथ मे ढेर सारातेल लेकर कमला कि बुर कों खूब फैलाकर उसमेभर कर उसकी चिकनी बुर कों मसल्ने लगी,
कमला-अहह ये क्याँ कररही हैं चंदा, अब बता भि दे तूने किसका मोटा लन्ड देखा हैं
चंदा- रहनेदो मालकिन आप् नाराज़ होँ जाओगी
कमला-अरे नहींरे मे भला तुझसे कभी नाराज़ हौ सकतीहू तुँ तौ मुझसे हरतरह कि बातेकर लेती हैं अबबता भि दे
चंदा-आज मैने आपके बेटे हरिया कां लन्ड देखा हैं, क्याँ बताऊ मालकिन उसके बराबर तगड़ा औऱ मोटा लन्ड मैनेआज तक नहीं देखा, जोँ स्त्री उसके मोटे लन्ड सें एक् बारचुद जाए वो जीवनभर उसके लन्ड कि दीवानी रहेगी,
कमला-ये तूँ क्याँ कहरही हैं औऱ तूने केसे हरिया कां लन्ड देख लिया,
चंदा-सच बताऊ मालकिन, हरिया कुटिया केँ पीछे पेशाब करने गय़ा थां औऱ मे कुटिया केँ अंदर थि तब मेरी नज़र अचानक कुटिया केँ एक् छेद सें पीछे कि ओर गई औऱ मैने देखा हरिया अपने लन्ड सें खड़ा-खड़ा खेलरहा थां उस वक़्त उसका लन्ड ढीला थां मगरतब भि उसके पूरेहाथ मे नहींसमा रहा थां औऱ फिन वो अपने लन्ड कि खाल कों कभीआगे कभी पीछे करके सहलाने लगा, वो अपनी आँखेबंद करके अपने लन्ड कों सहलारहा थां ऐसालग रहा थां जैसे वो अपनी कल्पना मे किसी स्त्री कों पूरी नंगी करकेचोद रहा थां धीरे धीरे उसका मोटा लन्ड विकराल रूप धारण करनेलगा औऱ फिन हरिया नें अपने लन्ड कों खूब कस-कसकर हिलाया औऱ लगभग 5 मिनिट बाद वो झाड़ गय़ा, वो नज़ारा देखकर तोँ मालकिन मेरी बुर भि गीली होँ गई थि,
चंदा कि बातसुन कर कमला कि साँसे तेज हौ गई थि औऱ उसकी गान्ड ज़मीन सें रह-रहकर उठ जाती थि औऱ वो अपनी फूली हुई बुर कों चंदा केँ हाथो मे मारने लग गई थि, चंदा नें उसकीदशा देखकर उसकी बुर कों कसकर अपने हाथो मे भींच लिया,
घर का रसीला तरबूज। (Completed) - माँ बेटा – New Episode
कमला- क्याँ सचमुच हरिया कां लन्ड बहोत बड़ा हैं
चंदा-हाँ मालकिन मैने तोँ आज तक ऐसा मोटा लन्ड नहीं देखा, औऱ फिन चंदा अपनी मालकिन कि बुर मे सॅट सें दो उंगलिया पेल देती हैं औऱ फिन
चंदा- एक् बातकहु मालकिन
कमला- क्याँ
चंदा- कमला कि बुर मे उंगली पेलते हुए, आपके बेटे केँ लन्ड केँ मुक़ाबले पूरे गाँव मे बस एक् हि बुर हैं मालकिन
कमला- किसकी बुर
चंदा- आपकी मालकिन
कमला- सीसियते हुए, यह तुँ क्याँ कहरही हैं चंदा
चंदा-सच कहरही हू मालकिन आपके बेटे कां लन्ड औऱ आपकी गदराई हुईँ फूली बुर कों देखकर ऐसा लगता हैं जैसे वो मोटा लन्ड आपको चोदने केँ लिए हि बना होँ सच मालकिन अगर वो मोटा लन्ड आपकीइस फूली बुर मे घुसजाए तौ आपको एक् दम मस्तकर देगा। औऱ फिन चंदा अपनीतीन उंगलिया ज़ोर-ज़ोर सें कमला कि फूली हुइ चिकनी बुर मे चलाने लगती हैं,
चंदा- औऱ वैसे भि मालकिन आजकल केँ जौ लड़के होते हैं नाँ वो बहोत अच्छे तरीके सें चोदते हैं, वो औरतो केँ बिनाकहे हि उनकी सारी इच्छाए पूरीकर देते हैं
कमला- मतलब
चंदा- मतलबये कि मालकिन आजकल केँ जवान लड़के सबसे अधिक औरतो कि गान्ड औऱ बुर कों चाटना औऱ चूसना पसन्द करते हैं,
कमाल-अहह ये क्याँ कहरही हैं तूँ चंदा, भला तेरी केसेपता कि आजकल केँ लड़के औरतो कि बुर औऱ गान्ड चाटना चाहते हैं
चंदा- मैने स्वयं हरिया कों अपनी आँखेबंद करकेमूठ मारते हुएये कहते सुना हैं
कमला- अपनी जाँघो कों पूरीतरह खोलकर फिला देती हैं औऱ चंदा उसकी बुर कों खूब कस-कसकर सहलाने लगती हैं,
कमला- क्याँ कहरहा थां मेरा बेटा
चंदा-अरे मैनेठीक सें नहीं सुना पर्र वो अपना लन्ड मसल्ते हुए इतना अवश्य बड़बड़ा रहा थां कि मे तुम्हारी पूरी बुर पी जानां चाहता हू मे तुम्हारी खूब कस-कसकर गान्ड चाटना चाहता हू
कमला- पर्र तूनेये नहीं सुना वो किसकी बातकर रहा थां
चंदा- नहीं मे ये तोँ नहींसुन पाई पऱ मुझे तोँ लगता हैं वो तुम्ही कों अपने ख्यालो मे नंगी करकेचोद रहा थां मालकिन
कमला-चुप कर बेशरम, भलाये कभी हौ सकता हैं कि वो अपनी मां कों हि चोदने केँ बारे मे सोचेगा
चंदा- मुझेऐसा लगा इसलिये मैनेकह दिया
कमला- पऱ तुझेही ऐसा हि क्योलगा
चंदा- वोँ मुझे इसलिये लगा क्योकि एक् दोबार उसने अपना लन्ड हिलाते हुएओह माँ शब्दकहा थां
कमला-कुछ सोचकर, ये भि तौ होँ सकता हैं कि उसे दर्द हौ रहा होँ औऱ वो उसी दर्द केँ कारण उसके मुँह सें मां शब्द निकला हौ जैसे अक्सर लोगो केँ मुँह सें निकल जाता हैं
चंदा-अरे मालकिन लन्ड हिलाने मे कौन सां दर्द होता हैं उसमे तौ औऱ मजाआता हैं औऱ वो मज़े मे अपनी माँ कों यादकर रहा थां मतलब अवश्य वो तुम्हे हि अपने ख्यालो मे पूरी नंगी करकेचोद रहा होगा,
कमला-उठ कर बैठते हुए, चल बेशरम अबचुप हौ जा औऱ येबात तुँ किसी सें कहना नहीं, लोग बेकार मे मेरे बेटे कों बदनाम कर देंगे
चंदा-अरे नहीं मालकिन मे किसी सें क्यो कहनेलगी, वैसे भि आज तक मैनेये सभी बाते आपके अलावा किसी सें नहीं कि हैं, अच्छा मालकिन आप् बोलो तोँ मे अबजाउ सबेरे सें हि खेत मे हू ज़राघऱ कि ओर भि झाँकआउ,
कमला-ठीक हैं जा औऱ वो लकड़ी कां गट्टा घऱ पऱ रखती हुई चली जानां,
चंदा केँ जाने केँ बाद कमला खड़ी होकर चंदा कि बातो कों सोचने लगती हैं औऱ उसकी बुर सें ढेर सारा पानी बहने लगता हैं, वो दबे पाँव कुटिया केँ अंदर जाती हैं जहा हरिया नीचे चटाई मे लेटाहुआ थां,
कमला भि उसकेबगल मे जाकरलेट जाती हैं, वो कुछ सोचती उससे पहले हि हरिया एक् अंगड़ाई लेकर अपने एक् पैर कों अपनी माँ कि कमर मे डालकर उससे चिपक जाता हैं, उसका मोटा लन्ड ड्रीम्स मे भि अपनी मां कों चोदरहा थां जिसकी वजह सें उसका लन्ड पूरीतरह लूँगी सें बाहर् निकलकर उसकी माँ कि मोटी गान्ड मे ठोकरमार रहा थां,
हरिया थका थां इसलिये उसकी नींद गहरी थि मगर उसका लन्ड बराबर तनाहुआ उसकी मां कि मोटी गदराई गान्ड मे चुभरहा थां, औऱ जिसके कारण कमला कां दिल जोरो सें काँपने लगा थां औऱ वो नाँ चाहते हुए भि चुपचाप अपनी मोटी गान्ड कों अपने बेटे केँ मोटी लन्ड सें सताएहुए पड़ी थि, कुछदेर बाद कमला नें हरिया कां हाथ अपनेउपर सें हटाकर अपना मुँह उसकीओर कर लिया औऱ जब उसकी नज़र अपने बेटे केँ मोटे लन्ड पऱ पड़ी तौ उसकादिल धाक्क करकेरह गय़ा, उसे चंदा कि बातसच लगी वाकई उसके बेटे कां लन्ड उसके मस्त भोस्डे कों चोदने केँ लायक थां,
कमला काफ़ी देर तक अपने बेटे केँ मोटे लन्ड कों देखती रही औऱ फिनजब उसने देखा कि हरिया गहरी नींद मे हैं तोँ उसनेवही लेटकर अपने बेटे केँ लन्ड कों धीरे-धीरे सें पकड़कर सहलाया औऱ उसकी बुर कां दाना कूदने लगा औऱ उसकी बुर सें खूब चिपचिपा पानी बहनेलगा, कमला कों ज़रा भि एहसास नहीं थां कि उसकेहाथ कां दबाव उसके बेटे केँ लन्ड पर्र बढ़ता जारहा थां औऱ एक् समयऐसा आया कि कमला नें अपने बेटे केँ लन्ड कों अपने दोनो हाथो मे भरकरखूब कसकर भींच दिया औऱ हरिया एक् दम सें कसमसा कर दूसरी औऱ करवट लें करसो गय़ा.
कमला अपनी फूली हुईँ बुर सहलाती लेटीरही मगर उसकी आँखो सें नींद कोसोदूर थि, लगभग 1 घंटेबाद हरिया उठा तौ उसने देखा उसकी मां उसकेबगल मे लेटी हुईँ हैं अपनी मां केँ गदराए भारी भरकम चुतडो कों अपनीतरफ उठादेख कर हरिया कां लन्ड फिन सें सर उठाने लगा थां औऱ उसने अपनी माँ केँ मोटी-मोटी चुतडो पर्र धीरे-धीरे सें हाथ फेरते हुए एक् धीमी आवाज़ लगाईमगर कमला जागते हुए भि सोतीबनी रही,
हरिया नें जब अपनी मां केँ गदराए चुतडो कों धीरे-धीरे सें सहलाया तोँ उसेऐसा मजाकभी नहींआया औऱ वो वही बैठा-बैठा अपनी माँ कि मोटी गान्ड केँ उपर अपनेहाथ फेरते हुए अपनी मां कि मदमस्त उठी गान्ड केँ गुदज एहसास कां मजा लेनेलगा, जब उसकाहाथ अपनी मां कि गान्ड कि गहरी दरार मे जाता तोँ उसकामन करता कि अपना पूराहाथ वो अपनी मां कि गान्ड मे भरदे,
उसने धीरे-धीरे सें अपनी मां केँ मोटे-मोटे चुतडो पऱ अपना मुँहरख कर हल्के सें दबाया तौ वो येसोच कर औऱ भि पागल होनेलगा कि जब वो अपनी मां कि मोटी गान्ड कों पूरी नंगी करके अपने मुँह कों उसकी गान्ड मे भरेगा तबउसे कितना मजा आएगा, वो अभि कुछसोच हि रहा थां कि कमला कसमसाने कां नाटक करती हुईँ उठ बैठी औऱ हरिया नें जल्द सें अपनाहाथ हटा लिया,
कमला-उठ गय़ा बेटे
हरिया- हाँमा मे तौ कब कां जाग चुका थां
कमला- अच्छा चलअबघऱ कि ओर चलते हैं, यहकुछ लकड़ियो कां गट्टर पड़ा हैं इन्हे उठा लेँ मे वोँ वाली लें लेतीहू औऱ फिन कमला आगे-आगे चलनेलगी औऱ हरिया अपनी मां कि लचकती मोटी गान्ड कों ललचाई नज़रो सें देखता हुआआगे बढ़ने लगा, अपनी मां कि जबर्दुस्त उठी हुई मोटी गान्ड औऱ उसके भारी चुतडो कि थिरकन नें चलते-चलते हि हरिया कां लन्ड खड़ाकर दिया थां,
बीच-बीच मे कमलाजब पीछेपलट कर हरिया कों देखती तोँ वो इधरउधर देखने लगतामगर जब कमला नें उसकी लूँगी कि ओर देखा तौ वो दंगरह गई, हरिया कां लन्ड पूरीतरह तनाहुआ थां, वो समझ गई थि कि उसके बेटे कां लन्ड उसकी स्वयं कि मां केँ भारी चुतडो कों देख-देख कर झटकेमार रहा हैं, वो अपनेमन मे सोचने लगीकही हरिया सचमुच मुझे अपने लन्ड सें चोदना तोँ नहीं चाहता हैं, चंदाठीक हि कहरही थि ये लन्ड हिलाते हुए आँखेबंद करके मुझे हि नंगी करकेचोद रहा होगा, इसका लन्ड भि कितना मोटा हैं, सचऐसे लन्ड सें चुदवाने मे तौ मजा आँ जाता होगा,
बस इतनासभी सोचना थां कि कमला कि बुर भि फूलकर पानी-पानी होँ चुकी थि मगर अभि तक उसने अपनेमन मे अपने बेटे सें चुदवाने कां ख्याल नहीं किया थां, बस वो यहीसभी सोचती हुईँ कबघऱ पहुच गई उसेपता भि नहींचला.
रात कों हरिया कां पिताजी खेत पऱ हि बिस्तर डालकर सोता थां औऱ हरिया उसेवही खानां देकर आँ जाता थां, रात कों कमला आँगन केँ चूल्हे मे रोटिया सेकरही थि औऱ आग कि गर्मी सें वो बहाल थि उपर सें बिजली भि काफ़ी देर सें गई हुईँ थि, कमला कां साडी कां पल्लू उसके जाँघो पऱ गिरा थां औऱ उसके मोटी-मोटी चुचियाँ पूरीतरह सें नज़र आँ रहे थें औऱ उसकी साडी दोनो घुटनो केँ उपर तक चढ़ि हुइ थि,
क्रमशः।
घर का रसीला तरबूज। (Completed) - माँ बेटा - Aage kya hua? Next part padhiye
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