घर की जवान बूरें और मोटे लंड - [ Incest - घरेलू चुदाई की कहानी ] - पापा - Complete Kahani Part 1
प्रिय पाठकों,
मस्तरानी कां आप् सब कों प्रेम भरा नमस्ते |
इस स्टोरी कां नाम हैं, "घऱ कि जवान बूरें औऱ मोटे लन्ड"
आशा करती हूं कि यहकथा आप् सब कों बहोत मनपसंद आएगी औऱ इसे आप् सब कां बहोत प्रेम मिलेगा |
तोँ औऱ वक़्त ज़ाया नाँ करतेहुए मे इसकथा कि शुरुवात करनेजा रही हूं |
घऱ कि जवान बूरें औऱ मोटे लन्ड
चेतावनी : यह स्टोरी पारिवारिक रिश्तों कि कामुकता पऱ आधारित हैं जोँ समाज केँ नियमों केँ खिलाफ हैं | अगर आप् यह मनपसंद नहि करते तौ यह आपकेलिए बिलकुल भि नहि हैं |
संसार मे बूर औऱ लन्ड कां नाता सबसे प्यारा होता हैं | लन्ड हमेशा सें हि अपनी पत्नि औऱ गर्लफ्रेंड कि बूरों सें अपनी प्यास बुझाते आये हें, ठीक वैसे हि बूरें भि अपने पति औऱ बॉयफ्रेंड सें अपनी प्यास बुझती आईं हें | मगर चूत याँ लन्ड पत्नि, गर्लफ्रेंड, पति, बॉयफ्रेंड केँ अलावा किसी औऱ कां होँ तौ मज़ा दुगना होँ जाता हैं| जैसे पड़ोसन, पड़ोसी, शिक्षक, शिक्षिका इत्यादि। |
मगर एक् बूर औऱ लन्ड कों सबसे ज़्यादा मज़ा उनके अपने हि परिवार केँ लन्ड औऱ बूरें हि दे सकती हें | किसी भि मर्द कां लन्ड सबसे विकराल रूपतभी लेता हैं जब उसके सामने जोँ बूर हैं वोँ उसकी अपनीसगी बेटी, बेहन याँ मम्मी कि हौ | ठीक वैसे हि किसी भि लड़की याँ स्त्री कि बूर अपने आप् खुल केँ सबसे ज़्यादा तभी रिसती हैं जब उसके सामने जोँ लन्ड हैं वोँ उसके अपनेसगे बाप, भइया याँ बेटे कां हौ |
यहकथा भि एक् परिवार केँ ऐसे हि कुछ बुरों औऱ लंडों कि हैं जौ समाज केँ नियमो कों तारतार करतेहुए चुदाई कां अनोखा खुशी लेते हें |
किस्सा रामपुर केँ एक् उच्च मध्यम परिवार कि हैं | स्टोरी केँ किरदार कुछइस प्रकार हें |
पिता : रमेश सिंह ; उम्र५२ साल। एक् किराने कि दूकान चलाते हें। १०साल पहले तक वोँ अपने खेतों मे काम भि करते थें औऱ कसरत भि इसलिये जिस्म ५२साल कि उम्र मे भि उनका शरीरकसा हुआ हैं.
मम्मी : उमा देवी ; उम्र४८ साल.घऱ कों संभालने केँ अलावा वोँ हिसाब पुस्तक कां भि ध्यान रखती हैं। ज़्यादा पढ़ी लिखी नां होने पर्र भि उसे दुनियादारी कि समझ हैं.
बेटा (बड़ा) : रौनक सिंह ; उम्र२६ साल। एक् प्राइवेट कंपनी मे काम करता हैं। सेल्स मे होने केँ कारण वोँ अधिकतर टूर पे हि रहता हैं। वोँ एक् जिम्मेदार बेटा हैं.
बहु : उर्मिला सिंह ; उम्र२४ साल। अपनी सासू केँ संगघऱ संभालती हैं। १साल पहले हि विवाह कर केँ इसघऱघऱ मे आई थि औऱ जल्दहे सबकी चहेती बन गई हैं। सफ़ेद रंग, सुड़ौल जिस्म औऱ अदाएं ऐसी कि किसी भि मर्द केँ होशउड़ा दे.
बेटी/बेहन : पायल सिंह ; उम्र२१ साल.बी.ए फर्स्ट इयर कि क्षात्रा। इसीसाल कॉलेज मे एडमिशन लिया हैं। पायलइस कथा कि मुख्य पात्र भि हैं। गोरारंग, भरी हुई चुचियां, पतलीकमर औऱ उभरी हुई चुतडदेख केँ उसके कॉलेज केँ लड़को कों अपनेबैग सामने टांगने पड़ते हें.
बेटा (छोटा): सोनू सिंह ; उम्र१८ ; १२वीं कक्षा कां क्षात्र। अव्वल दर्जे कां कमीना। विद्यालय मे लडकियों कि स्कर्ट मे हमेशा झांकता रहता हैं। उसकेबैग मे हमेशा गन्दी कहानियों कि ३-४ किताबें रहती हैं.
सुभह केँ ६बजेरहे हैं। सूरज कि पहली किरण खिड़की सें होतेहुए उर्मिला कि आँखों पऱ पड़ती हैं। उर्मिला टीम-टीमाती हुई आँखों सें एक् बार खिड़की सें सूरज कि औऱ देखती हैं औऱ फिन एक् अंगडाई लेतेहुए बैड पऱ बैठ जाती हैं। हांफी लेतेहुए उर्मिला कि नज़रपास केँ टेबल पर्र रखी रौनक कि तस्वीर पऱ जाती हैं तौ उसके चेहरे पे हलकी सि मुस्कान आँ जाती हैं। अपनी हथेली कों ओठो केँ निचेरख केँ वोँ रौनक कि तस्वीर कों एक् फ्लाइंग किस देती हैं औऱ अपनी नाईटी ठीक करतेहुए बाथरूम मे घुस जाती हैं.
७बज चुके हैं। ब्रेकफास्ट करीबबन चूका हैं औऱ गैस पे गरमचाय बनरही हैं। उर्मिला तेज़ कदमो केँ संग अपनी ननदी पायल केँ कमरे कि तरफ बढती हैं। दरवाज़ा खोल केँ वोँ अन्दर दाखिल होती हैं। सामने खाट पे पायल एक् टॉप औऱ पजामे मे सोरही हैं। करवट होँ कर सोने सें पायल कि चौड़ी चुतडउभर केँ दिखरही हैं। उर्मिला पायल कि उभरी हुई चूतड़ों कों ध्यान सें देखती हैं। उसके चेहरे पे मुस्कान आँ जाती हैं। वोँ मन हि मन सोचती हैं, "देखो तोँ केसे अपनी चौड़ी चूतड़ कों उठा केँ सोरही हैं। किसी मर्द कि नज़रपड़ जाये तोँ उसका लन्ड अभि सलामी देनेलगे"। उर्मिला उसके लगभग जाती हैं औऱ एक् चपत उसकीउठी हुई चुतड पे लगा देती हैं.
उर्मिला : ओ महारानी। ७बजगए हैं। (पायल कि चुतड कों थपथपाते हुए) औऱ इसे क्यूं उठारखा हैं? कॉलेज नहि जानां?
पायल: (दोनों हाथो कों उठा केँ अंगडाई लेतेहुए उर्मिला भाभी कि तरफ देखती हैं। टॉप केँ ऊपर सें उसकीबड़ी बड़ी चुचियां ऐसेउभर केँ दिखरही हैं जैसेटॉप मे किसी नें दोबड़े गोलगोल खरबूजे रखदिए हौ) उंssss
भाभी.बस ५ मिनट औऱ सोने दीजिये नाँ प्लीज.!! कलरात देर तक पढाई कि थि। बस भाभी.औऱ ५ मिनट.(पायल गिडगिडाते हुए कहती हैं).
उर्मिला : अच्छा बाबाठीक हैं। मगर केवल५ मिनट.अगर ५ मिनट मे तूँ अपने कमरे सें बाहर् नहि आई तौ मई मम्मीजी कों भेज दूंगी। फिन तौ तुम्हें सुभह सुभहभजन सुनाएगी तौ तेरी नींद अपने आप् हि खुल जाएगी (उर्मिला हँसते हुए कहती हैं)
पायल : नहि भाभी प्लीज। मे पक्का ५ मिनट मे उठ जाउंगी। आप् मां सें मत बोलियेगा.
उर्मिला : हाँहाँ नहि कहूँगी। पर्र तूँ ५ मिनट मे उठ जानां.
पायल : हाँ भाभी.(फिन पायल तकिये केँ निचेसर छुपा केँ सो जाती हैं औऱ पायल कमरे सें बाहर् चली जाती हैं)
उर्मिला किचन मे आती हैं तोँ उसकी सासू माँ उमा देवीगरम चाय कों कप मे डालरही हैं.
उर्मिला: अरे माँ जी। मे तोँ बस पायल कों उठा केँ आँ हि रही थि। आप् जाईये औऱ टेलीविज़न देखिये। आपके प्रवचन कां समय हौ गय़ा हैं.
उमा : कोईबात नहि बेटी। थोडा काम मुझे भि तोँ कर लेने दियाकर। साराकाम तौ तुँ हि करती हैं घऱ कां (उमा देवीबड़े हे प्रेम सें उर्मिला सें कहती हैं)
उर्मिला : कप मुझे दीजिये मां जी। मे सोनू कों भि उठा देती हूं। यह दोनों भइया बेहन बिना उठाये उठते हि नहि हैं.
उमा : सोनू कों मे उठा दूंगी। तूँ यहकप लेँ औऱ पहले अपने बाबूजी कों गरमचाय देदे। बूढ़े होँ चले हें मगरअब भि इनकी जवानी नहि गई। इस उम्र मे लोग सुभहसैर सपाटे केँ लिए जाते हैं औऱ एक् यह हें कि कसरत करेंगे (उमा देवीमुह बनाते हुए कहती हैं)
उर्मिला : (हँसते हुए) मां जी आप् भि नां.बस.!! ५२साल कि उम्र मे भि बाबूजी कितने हट्टे-कट्ठे लगते हैं। उनके सामने तोँ आजकल केँ जवान लड़के भि मातखा जाए। आप् तोँ बसयूँ हि बाबूजी कों भला-चूत कहती रहती हें (उर्मिला केँ चेहरे पऱ हलकी सि मायूसी आँ जाती हैं)
उमा : (उर्मिला कि ठोड़ी कों पकड़ केँ उसका चेहरा प्रेम सें उठा केँ कहती हैं) अरे मेरी बहुरानी कों बुरालग गय़ा? अच्छा बाबाअब नहि कहूँगी तेरे बाबूजी केँ बारें मे कुछ भि। अबठीक हैं? (उमा देवी कि बात सुनके उर्मिला केँ चेहरे पे मुस्कान वापस आँ जाती हैं। उसकी मुस्कान देख केँ उमा कहती हैं) इतनी सुन्दर औऱ प्यारी बहु मिली हैं मुझे। सबका कितना ख्याल रखती हैं। नहि तौ आजकल कौनसी बहु अपने सासू ससुरजी कां इतना ख्याल रखती हैं?
उर्मिला : क्यूं नाँ रखूँ माँ जी? आप् दोनों नें हमेशा सें हि मुझे अपनीबहु नहि बेटी माना हैं तोँ मेरा भि तोँ फ़र्ज़ हैं कि मे आप् दोनों कों अपने माता पिता कां दर्ज़ा दू.कप दीजिये। मे बाबूजी कों हैं देकरआती हूं। वैसे बाबूजी हें कहां?
उमा : छत पऱ होंगे औऱ कहां ? कररहे होंगे अपने कसरत कि तैयारी.
उमा देवी कि बात सुनके उर्मिला हँस देती हैं औऱ छत कि सीढीयों कि ओरबढ़ जाती हैं.
छत पर्र रमेश अपनेकसे हुए जिस्म पऱ सरसों कां तेललगा रहा हैं। खुला शरीर, निचे एक् सफ़ेद धोती जौ घुटनों तक उठा राखी हैं। सूरज कि रौशनी मे उसकातेल सें भरा शरीर जैसेचमक रहा हैं। उर्मिला गरमचाय कां कप लेँ करछत पऱ आती हैं औऱ उसकीनज़र बाबूजी केँ नंगे सक्त जिस्म पर्र पड़ती हैं। वैसे उर्मिला नें बाबूजी कों कईबार इसहाल मे देखा हैं, उनके जिस्म कों कईबार दूर सें निहारा भि हैं। रौनक कां घऱ सें दूर रहना उर्मिला केँ इस व्यवहार केँ कई कारणों मे सें एक् थां। उर्मिला कुछसमय बाबूजी केँ जिस्म कों दूर सें हि निहारती हैं फिनगरम चाय लें कर उनकेपास जाती हैं.
उर्मिला : यह लीजिये बाबूजी आपकीगरम चाय(गरम चायपास केँ टेबल पऱ रखतेहुए कहती हैं)
रमेश : सहीसमय पे गरमचाय लायी हौ बहु। मे अभि कसरत शुरुआत करनेहे वाला थां। ५ मिनटबाद आती तौ शायद नहि पी पाता.
उर्मिला : (बाबूजी कि बात सुनके उर्मिला कां मुह छोटा होँ जाता हैं। वोँ जानती हैं कि बाबूजी कसरत मात्र लंगोट पहन केँ करते हैं। अगर वोँ ५ मिनट केँ बादआती तोँ बाबूजी कों लंगोट मे देखने कां खुशी लेँ पाती) आपकीबहु हूं बाबूजी। आपकी सुभह कि गरमचाय केसेमिस होने देती?
रमेश : (हँसते हुए) हहाहाहा। बहु.सही कहा तुमने। इसलिये तौ मे हमेशा कहता हूं कि मेरी एक् नहि दो बेटियां हैं.
उर्मिला : यह तोँ आप् होँ बाबूजी जोँ अपनीबहु कों बेटी कां दर्ज़ा देरहे होँ, नहि तोँ लोग तौ अपनीबहु कों नौकरानी बना केँ रखते हैं.
रमेश : नाँ नां बहु.तुँ हैं हि इतनी सुन्दर.औऱ प्यारी। कोईऐसी बहु कों नौकरानी बना केँ रखता हैं क्याँ भला?
बाबूजी कि बात सुनके उर्मिला उनकेपेर पढने केँ लये निचे झुकती हैं। नहाने केँ बाद उर्मिला नें जौ ब्लाउज पहना हैं उसकागला थोडा गहरा हैं। झुकने सें साड़ी कां पल्लू निचेगिर जाता हैं जिसे उर्मिला सँभालने कि जरा भि कोशिश नहि करती। गहरेगले केँ ब्लाउज सें उर्मिला केँ तरबूज जैसी चुचियों केँ बीच कि गहराई साफ़ दिखने लगती हैं। बाबूजी कि नज़र जैसे हि उर्मिला कि बड़ीबड़ी चुचियों केँ बीच कि घाटी पे पड़ती हैं उनकी आँखेबड़ी औऱ थूकगले मे रुक जाता हैं। रमेश नें वैसे बहोत सि लडकियों औऱ औरतों कों अपने लन्ड कां पानी पिलाया हैं मगर अपनीबहु कि जवानी केँ सामने वोँ सभी पानी भारती हैं। किसीतरह सें रमेशथूक कों गले सें निचे उतारते हुए कहता हैं.
रमेश : अरेबस बसबहु। मेरा आशीर्वाद तोँ हमेशा तेरेसंग हैं। (बहु केँ सर पे हाथरख केँ आशीर्वाद देने केँ बाद रमेश उर्मिला केँ दोनों कंधो कों पकड़ केँ उसे उठाता हैं) जुगजुग जियो बहु.सदा सुहागन रहो.
उर्मिला : (मुस्कुराते हुए नज़रे झुका केँ अपना पल्लू ठीक करती हैं) अच्छा बाबूजी। मे अब चलतीहु। माँ जी कि किचन मे सहायता करदूँ.
रमेश : हाँ बहु.तुम् जाओ। मे भि अपनी कसरतकर लेता हूं.
उर्मिला धीरे-धीरे धीरे-धीरे सीढीयों कि तरफ बढ़ने लगती हैं। "उफ़.!! बाबूजी केसे मेरीबड़ी बड़ी चुचियों केँ बीच कि गहराई मे झाँकरहे थें। उनका लन्ड तौ पक्का धोती मे करवटें लें रहा होगा"। उर्मिला केँ दिल मे यह ख्याल आता हैं। उसकेकदम सीढीयों सें उतरते हुए अपने आप् हि थम जाते हैं। कुछसोच कर वोँ दबे पावँछत केँ दरवाज़े केँ पास जाती हैं औऱ वहीं दिवार कि आड़ मे बैठ जाती हैं। थोड़ी दूरी पर्र बाबूजी खड़े हैं। गरमचाय कि ३-४ चुस्कियां लेँ कर वोँ कप टेबल पऱ रख देते हैं औऱ अपनी धोती कि गाँठ खोलने लगते हें। उनकीपीठ उर्मिला कि तरफ हैं। धोतीखोल करपास पड़ी बिस्तर पऱ डालने केँ बाद बाबूजी अपने दोनों हाथों कों कन्धों कि सीध मे लाते हें औऱ फिन अपने शारीर केँ उपरी हिस्से कों दायें बाएं करने लगते हैं। जैसे सें बाबूजी दाईतरफ मुड़ते हें, उर्मिला कि नज़र उनके लंगोट केँ आगे वाले हिस्से पर्र पड़ती हैं। उर्मिला केँ मुह सें हलकी आवाज़ निकल जाती हैं, "ओह दैया.!!"। लंगोट कां अगला हिस्सा फूल केँ उभराहुआ हैं, लगभग३-४ इंच। लंगोट केँ उभार केँ दोनों तरफ सें कुछ काले सफ़ेदबाल दिखाई पड़रहे हैं। "उफ़.!! लंगोट कां उभार हि ३-४इंच कां हैं तोँ बाबूजी कां ल.हे भगवान्.पता नहि माँ जी नें केसे झेला होगाइसे."। उर्मिला अपने आप् मे हि बडबडाने लगती हैं। उसकीनज़र लंगोट केँ उस उभरेहुए हिस्से पे मानोफंस सि जाती हैं.
वहांछत पऱ उर्मिला अपनी दुनिया मे खोई हुईँ हैं औऱ यहाउमा देवीगरम चाय कां कप लेँ कर अपने बेटे सोनू केँ कमरे तक पहुँच गई हैं। वोँ कमरे मे घुसती हैं। सामने सोनूबैड पे चादरओढ़ केँ पड़ाहुआ हैं.
उमा : लल्ला.!! सोनू बेटा.!! उठ जा.आज विद्यालय नहि जानां हैं क्याँ?
सोनू : (आँखेखोल केँ एक् बार माँ कों देखता हैं औऱ फिन आँखेबंद कर लेता हैं) मां अभि सोने दीजिये नां.
उमा : (कप टेबल पे रख केँ) चुप कर.बड़ा आया अभि सोने दीजिये नाँ वाला.चल उठ जल्द सें.७:३० हौ गए हैं। अभि सोता रहेगा फिन पायल सें लडेगा नहाने केँ लिए.औऱ यह टेबल कितना गन्दा कररखा हैं। किताबें तौ ठीक सें रखाकर बेटा.
उमा टेबल पे रखी किताबें ठीक करने लगती हैं। जैसेहे वोँ निचे गिरी पुस्तक उठाने केँ लिए झुकती हैं, उसकेलो कट ब्लाउज केँ गले सें उसकी फुटबॉल जैसी चुचियों केँ बीच कि गहराई दिखने लगती हैं। कमीना सोनूरोज इसी मौके कां इंतज़ार करता हैं। अपनी मां केँ ब्लाउज मे झांकते हुए वोँ दोनों चुचियों कां साइज़ मापने लगता हैं। चादर केँ अन्दर उसका एक् हाथ चड्डी केँ ऊपर सें लन्ड कों मसलरहा हैं। उमा पुस्तक उठा केँ टेबल पे रखती हैं औऱ दूसरी तरफघूम केँ कुर्सी पे रखे कपडेझुक केँ उठाने लगती हैं। सोनू कि नज़रों केँ सामने उसके मां कि चौड़ी चुतडउठ केँ दिखने लगती हैं जोँ साड़ी केँ अन्दर कैद हैं। सोनू मम्मी कि चुतड कों घूरता हुआ अपनाहाथ चड्डी मे दाल देता हैं औऱ लन्ड कि चमड़ी निचे खींच केँ लन्ड केँ मोटे टोपे कों खाट पे दबा देता हैं। मम्मी कि चुतड कों देखते हुए सोनू लन्ड केँ टोपे कों एक् बारजोर सें बैड पे दबाता हैं औऱ वैसे हि अपनीकमर कां जोरलगा केँ रखता हैं मानो वोँ असल मे हि अपनी माँ कि गांड केँ छेद मे अपना लन्ड घुसाने कि कोशिश कररहा होँ। उमाजसी हे कपडेठीक करके सोनू कि तरफ घुमती हैं, सोनूझट सें हाथ चड्डी सें बाहर् निकाल लेता हैं औऱ आँखेबंद कर लेता हैं.
उमा : नहि सुनेगा तूँ सोनू?(उमा कड़क आवाज़ मे कहती हैं)
सोनू : अच्छा माँ आप् जाइये। मे २ मिनट मे आता हूं.
उमा : अगर तुँ २ मिनट मे नहि आया तौ तुम्हारी तरफआज ब्रेकफास्ट नहि मिलेगा। मेरे हि लाड़ प्रेम सें इसे बिगाड़ दिया हैं। नाँ मे इसेसर पे चढ़ाती, नाँ यह बिगड़ता.(उमा बडबडाते हुए कमरे सें बाहर् चली जाती हैं)
वहांछत पर्र उर्मिला बाबूजी कि लंगोट पऱ नज़रे गड़ाएहुए हैं। वोँ लंगोट केँ उभरेहुए हिस्से कों देखकर लन्ड केँ साइज़ कां अंदाज़ा लगाने कि कोशिश कररही हैं। "९इंच। नाँ नाँ.१० सें ११इंच कां तौ होगा हि। जिस लड़की पऱ भि बाबूजी चड़ेंगे, पसीना छुडवा देंगे"। तभी बाबूजी ज़मीन पऱ सीधा हौ करलेट जाते हें औऱ दंड पेलने लगते हैं। बाबूजी कि कमर ज़मीन सें बारबार ऊपरउठ करफिन सें ज़मीन पऱ पटकन लें रही हें। उर्मिला यह नज़ारा गौर सें देखरही हैं। एक् बार तोँ उसकादिल किया कि दौड़ केँ बाबूजी केँ निचेलेट जाए औऱ साड़ीउठा केँ अपनी टाँगे खोलदें। मगर वोँ बेचारी करती भि क्याँ? समाज केँ नियमउसे ऐसा करने सें रोकरहे थें। एक् बार कों वोँ उन नियमो कों तोड़ भि देती पऱ क्याँ बाबूजी उसेऐसा करने देंगे? उसकेमन मे यह सारी बातें औऱ प्रश्न घूमरहे थें। निचे उसकीबूर चिपचिपा पानी छोड़ने लगी थि। बैठेहुए उर्मिला नें साड़ी निचे सें जांघो तक उठाई औऱ झुक केँ अपनीबूर कों देखने लगी। उसकीबूर केँ ऊपरघने औऱ दोनों तरफ हलके काले घुंगराले बाल थें। उसकीबूर डबल रोटी कि तरहफूल गई थि औऱ बूर कि दरार सें चिपचिपा पानीरिस रहा थां। उर्मिला नें अपनीबूर कों देखते हुए धीरे-धीरे सें कहा, "लेगी बाबूजी कां लन्ड? बहोत लम्बा औऱ मोटा हैं, गधे केँ लन्ड जैसा। लेगी तोँ पूरीफ़ैल जाएगी। बोल.फैलवाना हैं बाबूजी कां लन्ड खा केँ?"। अपने हि मुहँ सें यहबात सुन केँ उर्मिला मुस्कुरा देती हैं फिन वोँ बाबूजी केँ लंगोट कों देखते हुए२ उँगलियाँ अपनीबूर मे ठूँस देती हैं। बाबूजी केँ हर दण्ड पेलने पर्र उर्मिला अपनीकमर कों आगे कि औऱ झटका देती हैं औऱ संग हि संग दोनों उंगलियों कों बूर कि गहराई मे पेल देती हैं। उर्मिला बाबूजी केँ दंड पेलने केँ संगताल मे ताल मिलाते हुए अपनीकमर कों झटकेदे रही हैं औऱ उंगलियों कों बूर मे ठूंसरही हैं। उर्मिला नें ऐसाताल मिलाया थां कि अगरउसे बाबूजी केँ निचे ज़मीन पऱ लेटा दियाजाए तोँ बाबूजी केँ हरदंड पऱ उसकीकमर उठे औऱ उनका लन्ड जड़ तक उर्मिला कि बूर मे घुस जाये.
बाबूजी केँ १०-१५दंड पलते हि उर्मिला कि उंगलियों नें राजधानी कि रफ़्तार पकड़ली। वोँ इतनी मदहोश होँ चुकी थि कि उससेपता हि नहि चला कि कब वोँ ज़मीन पर्र दोनों टाँगे खोलेलेट गई औऱ उसी अवस्था मे अपनीबूर मे दोनों उँगलियाँ पेलेजा रही हैं। "ओह बाबूजी.!! एक् दोदंड मुझ पऱ भि पेल दीजिये नां.!! आहsss.!!"। उर्मिला अपनेहोश खोकर बडबडाने लगी थि। कुछ हि लम्हा मे उसका शरीर अकड़ने लगा औऱ कमर अपने आप् हि झटके खानेलगी। एक् बार उसके मुहँ सें "ओह बाबूजी। आहssssss" निकला औऱ उसकीबूर गाढ़ा सफ़ेद पानी फेकने लगी। पानी इतनीजोर सें निकला कि कुछ छींटे सामने वाली दिवार पर्र भि पड़गए.कुछ हि समय मे उर्मिला कों होशआया औऱ उसने ज़मीन पर्र पड़ेहुए हि बाबूजी कों देखा तौ वोँ अब भि दंडपेल रहे थें। उर्मिला झट सें उठी औऱ अपनी साड़ी सें बूर औऱ फिन दिवार कों साफ़ किया। साड़ी कों ठीक करतेहुए वोँ तेज़ कदमो सें सीढीयों सें निचे उतरने लगी.
(स्टोरी जारी हैं। शुरुआत कैसी हैं कृपया कर केँ बतायें )
घर की जवान बूरें और मोटे लंड - [ Incest - घरेलू चुदाई की कहानी ] - पापा – New Episode
भाग१:
उधर सोनू अंगडाई लेताहुआ अपने कमरे सें जैसे हि बाहर् निकला उसकीनज़र अपनी दिदी पायल पर्र पड़ी। पायलगले मे तोवेल लिएहुए बाथरूम कि तरफजा रही थि। पायल नें टाइट पजामा पहनाहुआ थां जौ पीछे सें उसकी चौड़ी चूतडों पऱ अच्छी तरह सें कसाहुआ थां। पायल कि मटकती हुईँ चाल सें उसके चुतड किसीघड़ी केँ पेंडुलम कि तरह दायें - बाएँ हौ रहे थें। सोनू नें एक् नज़र किचन मे डाली तौ मां खानां बनाने मे वैस्थ थि। सोनू नें अपनी गन्दी नज़रफिन सें एक् बार पायल दिदी केँ चूतड़ों पे गड़ा दि औऱ एक् हाथ चड्डी मे दाल केँ अपने लन्ड कों मसलने लगा.तभी पायल केँ हाथ सें उसकी ब्राछुट केँ निचेगिर गई औऱ वोँ उसे उठाने केँ लिए झुकी। पायल केँ झुकते हि उसकी चौड़ी चुतड पजामे मे उभर केँ दिखने लगी.यह नज़ारा सोनू केँ लन्ड कि नसों मे खून भरने केँ लये बहुत थां। अपनी बेहन कि उभरी हुइ चुतडदेख उसके लन्ड नें विराट रूप लें लिया औऱ एक् एक् नसउभर केँ दिखने लगी। सोनू नें बिना वक़्त गवाएँ दोनों हाथो कों आगेकर केँ इस अंदाज़ मे रखा जैसे पायल दिदी कि कमरपकड़ रखी होँ। फिन अपनीकमर कों पीछे लेँ जाकरजोर सें झटकादे करऐसे आगे लाया मानो पायल केँ चूतड़ों केँ बीच केँ छोटे सें छेद मे अपना विशाल लन्ड एक् हि बार मे पूरा ठूँस दिया होँ। फिन वैसे हि अपनीकमर कों आगे किये सोनू१-२ कदमआगे कि ओर गय़ा जैसे वोँ पायल कि गांड केँ छेद मे अपना लन्ड जड़ तक घुसा देना चाहता होँ। तब तक पायल अपनी ब्राउठा चुकी थि औऱ बाथरूम मे घुसने लगी। सोनूझट सें अपने कमरे मे घुस गय़ा.
कमरे कां दरवाज़ा बंदकर सोनू नें बैड पर्र छलांग लगा दि औऱ तकिये केँ निचे सें एक् कथा कि पुस्तक निकाल केँ पन्ने पलटने लगा। एक् पन्ने पर्र आतेहे उसकी नज़रेटिक गई। एक् हाथ पुस्तक कों संभाले हुए थां औऱ दूसरा हाथ चड्डी उतारने लगा थां। चड्डी घुटनों सें उतरते हि सोनू केँ हाथ नें लन्ड कों अपनी हिरासत मे लें लिया औऱ लन्ड कों अपने अंजाम तक पहुँचाने मे लग गय़ा। उसकी आँखेउस पन्ने मे लिखेहर शब्द कों ध्यान सें पढ़रही थि औऱ हाथ लन्ड पे तेज़ रफ़्तार मे चलरहा थां। कुछ हि पलो मे सोनू कि कमर अपने आप् हि खाट सें ऊपर उठनेलगी औऱ उसकेबदन नें किसी कमान (bow) कां रूप लेँ लिया। सोनू कां जिस्म ऐसी अवस्था मे थां कि अगर उसकीकमर पलंग सें उठने केँ पहले किसी लड़की कों उसके लन्ड पे बिठा दिया जाता तौ सोनू कां लन्ड नाँ मात्र उस लड़की कि बूर मे जड़ तक घुस जाता बल्कि वोँ लड़की भि २फीटहवा मे उठ जाती। सोनू तेज़ी सें अपनाहाथ लन्ड पे चलाये जारहा थां। अचानक उसका जिस्म अकड़ने लगा औऱ उसके मुहँ सें कुछ शब्दफूट पड़े, "अहह.!! पायल दिदी.!!"। उसके लन्ड सें सफ़ेद गाढ़े पानी केँ फ़ौवारे छुटने लगे.हर एक् फ़ौवारे पऱ सोनू कि कमर झटके खाती औऱ उसके मुहँ सें "अहह। पायल दिदी" निकल जाता.७-८ फ़ौवारे औऱ हर फ़ौवारे पर्र पायल कां नाम लेने केँ बाद सोनू पलंग पऱ जंग मे हारेहुए सिपाही कि तरह निढ़ाल होँ करलेट गय़ा। उसकी आँखेकब लग गई पता हि नहि चला.
इस घटना सें पहले एक् औऱ घटना हौ चुकी थि जिसका अंदाज़ा सोनू कों नहि थां। जब सोनू पायल दिदी कि चुतड कों देख केँ वोँ सारी हरकतें कररहा थां तब उर्मिला सीढीयों केँ पासखड़ी होँ केँ वोँ सभीदेख रही थि। मगर वहां सें उर्मिला केवल सोनू कों देखपा रहीथीं, पायल कों नहि। सोनू केँ जाने केँ बाद उर्मिला वहांआई औऱ बाथरूम केँ पास वाली खिड़की सें बहार देखने लगी.उसे लगा कि सोनू खिड़की सें बाहर् किसी लड़की कों देख केँ वोँ सभीकर रहा थां। मगर खिड़की सें बाहर् कोई भि नहि थां। उर्मिला कां माथा ठनका। वोँ किचन मे उमा देवी केँ पासआती हैं.
उर्मिला : माँ जी.बाथरूम केँ संग वाली खिड़की पऱ अभि कोई थां क्याँ ?
उमा : पगली। कौन आएगा ? गेट तोँ बंद हैं औऱ नाँ हि मैंने गेट खुलने कि आवाज़ सुनी थि। पर्र तूँ यह क्यूं पूछरही हैं ?
उर्मिला : कुछ नहि माँ जी.बसऐसे हि। मुझेलगा कि शायदकोई आया होँ। लगता हैं मेरावहम थां। अच्छा मां जी पायल कहां हैं ?
उमा : पायल नहाने गई हैं। बस अभि अभि गई हैं तौ थोडा वक़्त लगेगा उसे निकलने मे। क्यूं तुझेही कोईकाम थां क्याँ पायल सें ?
उर्मिला : अरे नहि मां जी.बस वोँ कुछ कपडे लेने थें बाथरूम सें। कोईबात नहि। मे उसके निकलने केँ बाद लें लुंगी.
उर्मिला वहां सें सीधा अपने कमरे मे आती हैं। खाट पर्र लेटते हि उसके चेहरे पर्र मुस्कान आँ जाती हैं। "तोँ मेरा नन्हा देवर जी अपनी हि दिदी केँ पीछेलगा हुआ हें। "दिदी तेरा देवरु दीवाना तौ सुना थां पर्र यहा तोँ देवर जी अपनी हि दिदी कां दीवाना हैं"। पायल केँ चहरे पर्र फिन सें मुस्कान आँ जाती हैं। "जौ हरकत सोनूकर रहा थां जरुर पायल कि पीठ उसकीतरफ होगी.ऐसा उसके सामने थोड़ी नां करेगा। वोँ जरुर पायल कि चुतडदेख रहा होगा, औऱ क्यूं नाँ देखे। पायल कि चुतड हैं हि ऐसी कि किसी कां भि लन्ड खड़ाकर दे। भइया-बेहन कां मिलन तोँ अब करवाना हि पड़ेगा। पायल औऱ सोनू कों बैड पर्र एक् संग नंगा सोचते हि जिस्म मे आगलग गई। सच मे देखूंगी तोँ नां जाने क्याँ होगा ?"। उर्मिला पायल औऱ सोनू केँ बारें मे सोचते हुए मुस्कुराये जारही थि। उसका दिमाग़ वोँ सारे उपाए खोजने मे लग गय़ा जिस सें सोनू औऱ पायल केँ भइया बेहन वाले पवित्र रिश्ते कों लन्ड औऱ बूर केँ गंदे रिश्ते मे बदल दियाजाए.
(किस्सा जारी हैं। अब तक कैसीलगी कृपया कर केँ बतायें )
Apki kahani number 1 h sir parivar kee kahani best hoty h Nice sonu ko kamina banao apni mummy uma k sath pyaar dikhao. Bachpan mai mummy beta pyaar dikhao sir Thank you
घर की जवान बूरें और मोटे लंड - [ Incest - घरेलू चुदाई की कहानी ] - पापा – New Episode
aapka
बेस्ट थ्रेड.हैं सर
शानदार चरित्र.
मुझे
मुझे बेस्ट charcter पिता रमेशलगा।
जोँ अपनीबहू उर्मिला औऱ बेटी
कों 11 इंचा लोडे सें बुरीतरह ठोकेगा
सर प्लीज रमेश कों मुख्य नायक
बनाकर हि रखे
जौ अपनीबहू औऱ बेटी
सें seduce होकर सेक्स करे
बाकी सोनू अपनी मात्र
माँ केँ चक्कर मे रहे
मम्मी केँ चूतड़ कों हि ताके
पायल कॉमनरहे मगर
पिताजी सें ज़्यादा चिपकी रहे
पिताजी सें गहरा अफेयर चलाये
भाभी औऱ पायल पिताजी
पऱ अधिक सें अधिक सम्वाद करे
यह मेरी fantacy हैं बाकी
आप् ज़्यादा जानते होंगे।
घर की जवान बूरें और मोटे लंड - [ Incest - घरेलू चुदाई की कहानी ] - पापा - Next part mein bada twist
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