चढ़ती जवानी की अंगड़ाई - Desi kamuk kahani - Episode 1
चढ़ती जवानी कि अंगड़ाई
नमस्ते दोस्तों आप् सब पाठकगण कां ढेर सारा प्रेम मुझे बार-बार नहि कहानियां लिखने कों प्रेरित करता हैं। ऐसे हि मे एक् स्टोरी कों फिन सें लिखने जारहा हूं जोँ आप् लोगों कों उम्मीद हैं कि बेहद पसन्द आएगी,,,,,
ये स्टोरी पूरीतरह सें काल्पनिक हैं,,,,,, इसकेसब पात्र भि पूरीतरह सें काल्पनिक हैं,,,,,,
ये स्टोरी एक् लड़की केँ इर्द-गिर्द हि घूमती रहती हैं जिसका नाम पूनम हैं।
1,,,, रामदेवी,,,,, पूनम कि माँ हैं,, जौकी दिखने मे ठीक-ठाक हि हैं,,,, भराहुआ जिस्म बस थोडा सां मोटी हैं बाकीइस उम्र मे भि मर्दों केँ पानी निकालने मे पूरीतरह सें सक्षम हैं। मर्दों कों आकर्षित करने लायक बड़ी बड़ीगोल चूचियां हांबस थोडा सां लटक सि गई हैं,,,,, बड़ी बड़ी गांड जौ कि हमेशा थिरकते रहती हैं।
2,,,,, संध्या,,,,, पूनम कि छोटी चाची,,,,, बेहद हसीन एकदम गोरारंग लाललाल हॉठ,,, तनी हुईँ चुचीयां औऱ उभरी हुईँ भरावदार गांड जिसे देखते हि सभी कां लन्ड खड़ा होँ जाता थां।
3,,,,, रितु चाची ये पूनम कि सबसे छोटी चाची थि। एकदम मॉर्डन टाइप कि उसके शरीर पऱ चर्बी कां कहीं भि नामोनिशान नहि थां,,,, कपड़े भि एकदम स्टाइलिस पहनती थि।
4,,,,,, सुजाता,,,,,, ये पूनम कि फूफी थि जोँ कि उम्र मे पूनम सें बस 5 साल हि बड़ी थि,,,, अभि तक विवाह नहि हुई थि मगर विवाह कि बातचल रही थि,,,,, सुजाता चुदास सें भरी हुई थि मगर अभि तक उसने अपनी चूत मे लन्ड डलवाकर उसका,,, अपनी जवानी कां उद्घाटन नहि करवाई थि।
इसकथा केँ कुछ मुख्य किरदारो कां उल्लेख यहां होँ चुका हैं मगर अभि भि बहोत सें किरदार आने बाकी हैं इसलिये उन कीरदारों सें कथा केँ अंतर्गत हि मुखातिब होँ पाएगे,,,,,
अब किस्सा कां एपसोड जल्द हि देने कि पूरी कोशिश करुंगा पऱ मुझे उम्मीद हैं कि आप् लोग अपने कमेंट सें मेरीइस स्टोरी कों भि जबरदस्त रिस्पांस देंगे।
शुक्रिया।
superb ..................
चढ़ती जवानी की अंगड़ाई - Desi kamuk kahani – New Episode
ये स्टोरी हे एक् छोटे सें देहात कि देहात अधिक भि छोटा नहि थां सुख सुविधाओं केँ सारे सामान उस देहात मे मौजूद थें।
पंछियों नें कलर मचाना शुरुकर दिया थां,,,, पंछियों कि सु मधुर आवाज़ सें देहात कि सुभह कां नजारा औऱ भि अधिक बेहतर हौ गय़ा थां। पक्षियों कि आवाज़ औऱ मुर्गे कि बांग कि आवाज़ सुनते हि देहात केँ लोग आहिस्ता कर केँ खाट छोड़ना शुरुआत हौ जाते थें,,,,, सूरज कि पहली किरण धरती पर्र पड़ते हि करीब-करीब पूरा देहात आलस मरोड़ कर अपने अपने कामकाज मे लग जाया करता थां,,,, औऱ यही उनकी दिनचर्या भि होती थि ऐसे हि रोज कि हि तरहरमा देवी अपने कमरे सें बाहर् आतेहुए,,,,, अपनी बेटी कों जोरजोर सें आवाज़ लगाकर बुलाने लगी,,,,,
पूनम,,,,,,,, ओ पूनम,,,,,,,, अरे धूप निकलने कों आई हैं औऱ ये लड़की हैं कि अभि तक सोरही हैं,,,,,, नाँ जानेइसे कब अक्ल आएगी इतनी बड़ी होँ गई हैं मगर किसी भि प्रकार कि जिम्मेदारी कां एहसास नहि हैं,,,,।
( रमा देवी कों इसतरह सें रोज कि हि तरह चिल्लाते देखकर संध्या जोकि पूनम कि चाची थि वो झाड़ू लगाते लगाते,, बोलि,, घऱ बहोत बड़ा थां घऱ मे सभी केँ अलग-अलग कमरेबने हुए थें मेहमान केँ लिए भि अलगरूम बनाहुआ थां औऱ घऱ कां आंगन भि बहुत बड़ा थां जिसमें रोजसाफ सफाई करके झाड़ू लगाना पड़ता थां औऱ अधिकतर येकाम संध्या हि करतीे थि। आंगन केँ चारों तरफ दीवार खड़ी करके एक् घेरा सां बनाया हुआ थां। आंगन केँ सामने हि बड़ा सां तबेला बनाहुआ थां जिसमें गाय भैंस बंधी हुई थि। संध्या झाड़ू लगाते लगाते बोलीं)
क्याँ दिदी आप् भि सुभह-सुभह नन्हीं सि जान पऱ इतनाबरस रही हैं।
नन्ही सि जान नहि वो तों शैतान कि नानीमा हैं। विद्यालय जानां हैं सूरज निकल गय़ा मगरये लड़की अभि तक उठी नहि हैं।
( रमा क्रोध दिखाते हुए बोलि औऱ रमा कि बात सुनकर संध्या मुस्कुराते हुए बोलि,,,, )
दिदी बेवजह आप् परेशान हौ रही हें पूनम तौ नं जानेकब सें उठ चुकी हैं औऱ इस वक़्त करीबनहा रही होगी,,,,,,
( संध्या कि बात सुनकर रमा देवी कों थोडा चैन मिला औऱ वो चिंता केँ भाव दर्शाते हुए संध्या सें बोलीं,,, )
संध्या तुँ भि उसकोकुछ सिखाओ वरना अभि भि वो बच्चों जैसा हि व्यवहार करती हैं मेरी तोँ एक् नहि सुनती तुम्हारी हि बात मानती हैं इसलिये थोडा-बहोत उसे डांटा फटकारा करो,,,
दिदी आप् बिल्कुल चिंता मत कीजिए पूनम मेरी बेटी जैसी हैं औऱ मुझे अच्छे सें पता हैं कि उसे केसे संभालना हैं आप् जाइएवहं अपने टाइम पर्र हि सजधजकर होँ जाएगी,,,,,
( रामादेवी संध्या कि बात सुनकर आश्वस्त हौ करचली गई,,,, संध्या पूनम कि बड़ी चाची थि जौ कि चाची कां एक् मित्र कि तरह ज़्यादा रहती थि बेहद हसीनगोल मटोल चेहरा बड़ी बड़ी आंखें गुलाबी होठ,, सुभह सुभह उठने कि वजह सें बाल थोड़े अस्त व्यस्त थें जोँ कि बालों कि लटे चेहरे पर्र आती थि जिसकी वजह सें संध्या कि हुस्न मे चार चांदलग जाते थें। बड़ी बड़ी चूचियां जोकी ब्लाउज मे शमा नहि पाती थि औऱ बैठकर झाड़ू लगाने कि वजह सें मम्मों कां आधे सें भि अधिकभाग साफतौर पर्र नजरआता थां। ब्लाउज केँ दोबटन खुलेहुए थें जाहिर थां कि रात मे संध्या केँ पति नें संध्या केँ ब्लाउज खोलकर उसकी बड़ी बड़ी चूचियो कों मुंह मे भरकर पिया होगा,,, औऱ जीभरकर दोनों खरबूजे सें खेलकर निश्चित तौर पऱ उसकी जमकर चुदाई भि कि होगी,, क्योंकि संध्या चलते वक़्त थोडा लंगड़ा करचलरही थि ऐसातभी होता थां जबरात भर संध्या अपने पति सें चुदवाती थि। वैसे भि घऱ कां साराकाम काज करतेहुए संध्या थक जाती थि मगररात कों अपने पति केँ संग चुदवा कर अपनी सारी थकान मिटा लेतीे थि। सुभहकाम करने कि जल्दबाजी मे शायद वो ठीक सें अपने ब्लाउज केँ बटनबंद करना हि भूल गई थि इसलिये उपर केँ दोबटन खुलेरह गए थें,,, जिसमें सें संध्या केँ दोनों कबूतर फड़फड़ाते हुएनजर आँ रहे थें। संध्या अधिकांश तौर पर्र बैठे-बैठे हि झाडू लगाया करती थि जब जल्द झाड़ू लगाते हुएआगे पाव करकेआगे कि तरफ बढ़ती थि तोँ उसका पिछवाड़ा,,,, कुछ ज़्यादा हि बाहर् कि तरफ निकलकर उभर जाता थां,,, औऱ देखने वालों कि तोँ सांस हि फंस जाती थि। कुल मिलाकर संध्या केँ शरीर मे जवानी कूटकूट करभरी हुई थि।
रमा देवी कां पूनम केँ प्रति चिंतित रहना लाजमी थां क्योंकि वो अक्सर अपनी जिम्मेदारियों केँ प्रति लापरवाह हि नजरआती थि उसके विद्यालय कां वक़्त होँ रहा थां मगरइस वक़्त वो बाथरुम मे थि। बाथरूम मे घुसते हि वो दरवाजे कि कड़ी लगाकर दरवाजे कों बंदकर ली,,,।
पूनम नहाने केँ लिए बाथरुम मे प्रवेश कर केँ अंदर सें बाथरूम कि कड़ीलगा दि,,,, वो मन हि मन मे कोई प्यारा सां गीत गुनगुनाते हुए अपनेगले पऱ सें दुपट्टा उतारकर पास मे हि डोरी पऱ लटका दि,,,, वाउ दुपट्टा दूरी पऱ लटकाने केँ बाद अपनी ड्रेस कों नीचे सें ऊपर कि तरफ लें जातेहुए इतनी गोरी गोरी बाहों मे सें होतेहुए ड्रेस कों भि निकाल दि। उसे अच्छी तरह सें मालूम थां कि उस विद्यालय जाने केँ लिएउसे देरी हौ रही हैं इसलिये जल्द-जल्द अपनी ब्रा केँ हुक कों भि अपनेहाथ कों पीछे कि तरफ नां करखोल दि औऱ अगले हि लम्हा ब्रा कों भि अपने जिस्म सें अलगकर दि,,,,, ब्रा केँ अलग होते हि उसके छोटे छोटे नारंगी अपने पूरबहार मौसम कों दिखाने लगे थें,,, ऊसकीे छोटी-छोटी औऱ गोल नारंगीयो कों देखकर साफ मालूम पड़रहा थां कि पूनम केँ शरीर मे अब जवानी चिकोटी काटने लगी थि। कब उसने सलवार कि डोरी कों खोलकर सलवार कों उतार फेंकी पता हि नहि चला,,, उसके शरीर पर्र सिर्फ अब पेंटिं रह गई थि,,, जिसे अगले हि समय उंगलियों कां सहारा लेकर आरामसे सरकाते हुए अपनी लंबी गोरी टांग सें बाहर् निकाल फेंकी,,,,। इस टाइम बाथरूम मे वो संपूर्ण रूप सें निर्वस्त्र हौ गई थि,,,, वैसे तौ वो जब भि कुएं याँ हेडपंप पऱ नहाती थि तोँ पूरीतरह सें अपने कपड़े नहि निकालती थि मगरजब भि वो बाथरूम मे नहाती थि तब एकदम नंगी होकर हि नहाती थि। इसतरह सें उसे नहाने मे बेहद आनंद भि आता थां क्योंकि बाथरूम केँ अंदर पूरीतरह सें नंगी होकर नहाने मे वो अपने जिस्म केँ कोने कोने पऱ साबुन लगाकर नहा पाती थि। इसलिये उसे नहाने मे संपूर्ण संतुष्टि कां एहसास होता थां।
पूनम अपने सारे कपड़े उतारकर नहाना शुरुआत कर दि ठंडा पानी उसके जिस्म पऱ पड़ते हीैं उसका शरीर पूरीतरह सें गनगना जारहा थां। मगर ठंडे पानी मे नहाने कां चैन; वो अपने जिस्म मे पूरीतरह सें अनुभव करती थि। ठंडा पानी उसकेसिर पऱ पड़कर नीचे कि तरफ किसी मोतियों कि तरह फिसलते हुएजा रहा थां,,,, उसकीगोल गोल चूचियों सें होकर केँ ऊसके चिकने सपाटपेट सें होकर केँ नाभी सें गुजरकर पूनम कि चिकनी जांघों केँ बीच सें उस पतली सि दरार सें होकर नीचे कि तरफगिर रही थि। ये नजारा सामान्य नहि थां बल्कि बड़ा हि उन्मादक औऱ कामोतेजक थां। पूनम केँ लिए तौ इसतरह सें नहाना बेहद सामान्य सि बात थि मगर पूनम कों इसतरह सें नहाते हुए किसी कां देख लेना हि उसकी जीवन कां बड़ा हि अमूल्य औऱ उत्तेजक क्षण होगा। वैसे भि अक्सर लड़के जौ व्यक्ति लड़कियों औऱ औरतों केँ अंगों कों देखने कां एक्सक्यूज़ हि ढूंढते रहते हें औऱ ऐसे मे अगर उनके सामने उनकी नजरों केँ सामने पूनम जैसी हसीन लड़की संपूर्ण निर्वस्त्र अवस्था मे,,, जोकि एकदम गोरी सुंदर चिकने जिस्म वाली,,, औऱ मर्दों कि कामोत्तेजना कां सबसे उत्तेजक प्रसार बिंदु उसकी दोनों गोलाइयां अपना संपूर्ण रूपलिए नजर आँ रही हौ, औऱ नितंब जोँ कि ऐसालगे कि कुदरत नें स्वयं किसी कैनवास पऱ अपनी जादुई पींछी सें अंगों कों ऊभारकर करउस मे रंगभरे हौ,, जिसके शरीर कां हर कटाव एक् अलग हि परिभाषा लिखता होँ ऐसी लड़की कों देखकर किसी भि मर्द कां मनडोल जाए औऱ देखने भर केवल सें हि कब उसका मर्दाना अंग ऊथनात्मक स्थिति मे आकरकब पानी छोड़दे शायद उसको भि पता नाँ चले,,,, पूनम अद्भुत हुस्न कां खजाना थि।
देखते हि देखते उसने स्नान करली,,,, औऱ नहाने केँ बाद जैसे हि उसने टॉवल लेने केँ लिएहाथ बढ़ाई तौ उसे ज्ञात हुआ कि उसने तौ बाथरूम मे टॉवर लाना हि भूल गई थि।
चढ़ती जवानी की अंगड़ाई - Desi kamuk kahani – New Episode
अपनीइस गलती पर्र उसेफिन सें क्रोध आया क्योंकि ऐसी गलती अक्सर वो बारबार करती थि। पहले कि हि तरह उसनें धीरे-धीरे सें बाथरूम कां दरवाजा मात्र इतनाभर खोली कि उसका चेहरा दिखाई दे,,,,, औऱ फिनआदत केँ अनुसार अपनी छोटी वाली चाची कों आवाज़ लगाने लगी जोँ कि किचनघऱ मे गरमचाय बनारही थि पूनम कि आवाज़ सुनते हि वो समझ गई कि आजफिन सें वो बाथरुम मे टावल लें जानां भूल गई हैं। अक्सर वो पूनम कों टावलदे दिया करती थि मगरआज उसके दिमाग़ मे कुछ औऱ चलरहा थां औऱ वो मुस्कुरा कर किचनघऱ सें बाहर् आई। वो आकर बाथरूम केँ दरवाजे पर्र खड़ी होँ गई जिसमें सें पूनम केवल अपना चेहरा भर दिखारही थि अपनी चाची कों देखते हि वो बोलि।
प्लीज प्लीज प्लीज,,,,, चाची मुझे टॉवेल देदो मुझे विद्यालय जाने मे बहोत देर होँ रही हैं।
नहि आज तोँ मे तुम्हें बिल्कुल भि टॉवल नहि दूंगी तुम्हारी येरोज कि आदत हौ गई हैं। ( इतना कहने केँ संग हि वो बाकी लोगों कों भि आवाज़ देकर बुलाने लगी। )
संध्या दिदी जल्दआओ सुजाता देखो तौ सहीअगर तुम्हें आज असली फिल्म देखनी हैं तौ जल्द आँ जाओ,,,,,, आज बहोत हि बेहतरीन फिल्म देखने कों मिलेगी,,,,,,
( अपनीऋतु चाची कि बात सुनते हि पूनम केँ चेहरे पर्र बनावटी क्रोध नजरआने लगा,,, औऱ दूसरी तरफ रितु कि आवाज़ सुनकर संध्या औऱ सुजाता भि आँ गई बाथरूम कां दृश्य देखकर उन लोगों कों समझते देर नहि लगी कीयहां क्याँ चलरहा हैं। अपनी जेठानी औऱ ननदी कों वहांआया देखकर रितु बोलि। )
दिदी आज देख्ना तुम्हें असली फिल्म देखने कों मिलेगी आज पूनमफिन सें बाथरुम मे टावल लें जानां भूल गई हैं। औऱ आज पूनमखोल हम् लोगों कों अपने नंगे शरीर कां दर्शन कराएगी। ( अपने रीति चाची कि बात सुनकर पूनम कों क्रोध आनेलगा वो जानती थि कि आजयेलोग आनंद लेना चाहते हें औऱ उसे विद्यालय जाने केँ लिएदेर भि होँ रहा थां,,, इसलिये वहांऋतु चाची कों छोड़कर अपनी संध्या चाची सें बोलीं। )
प्लीज चाची आप् देदो नां मुझे बहोत देर होँ रही हैं मजाक कां टाइम नहि हैं।
( पूनम कि बात सुनकर संध्या मुस्कुराते हुए बोलि। )
नहि पूनमआज तोँ हम् लोग तुम्हारी एक् भि नहि सुनने वाले औऱ नाँ हि तुम्हारी कोई सहायता करने वाले हें।
क्याँ चाची आप् भि,,,,, ( पूनम बाथरूम केँ दरवाजे मे सें हल्का सां अपना चेहरा बाहर् निकाल कर औऱ बड़े हि मासूम बनकर पत्नि संध्या चाची सें बोलि,,,, मगर उसकेइस मासूम पन कां किसी पर्र भि कोईअसर नहि हुआ औऱ उसकी संध्या चाची बोलि। )
नहि पूनमआज तुम्हारे किसी भि बात कां हम् पऱ कोईअसर होने वाला नहि हैं भलाईइसी मे हैं कि आज तुम् अपने नंगेपंन कां दर्शन हमेंकरा हि दो हम् भि तोँ देखें कि तुम् जितनी बाहर् सें हसीन लगती हौ अंदर सें कितनी सुंदर दीखती हौ।,,,,,
क्याँ चाची आप् लोग भि,,,, क्याँ तुम्हें अच्छा लगेगा अगर तुम् मुझेऐसी हालत मे देखोगी तौ,,,,,
हां मेरी रानी बिटिया हमें अच्छा लगेगा अब बिल्कुल भि देरमत करो औऱ बाहर् आँ जाओ हम् लोग भि तरसगए हें तुम्हें नंगी देखने केँ लिए तुम्हारे सुंदर भरावदार नितंब कों देखने केँ लिए।।
( पूनम कों विद्यालय जाने केँ लिएदेर हौ रहा थां किसी भि वक़्त उसकी सहेलियां घऱ पर्र आँ सकती थि औऱ जिसतरह कि जीदआज उसकी दोनों चाची कों नहि लगारखी थि उन्हीं केँ सू्र मे उसकी सुजाता फूफी भि सुरलगा रही थि उन्हें भि आजउसे नंगी देखने कां नशाचढ़ चुका थां थक हारकर पूनमफिन सें उन लोगों कों समझाते हुए बोलीं। )
चाची क्यूं ऐसीजिद कररही हौ क्याँ देख्ना चाहती होँ मेरेपास भि वही हैं जौ कि तुम् लोगों केँ पास हैं फिनऐसी जिद्द क्यूं? ( पूनम बहोत हि भोलेपन मे बोलि)
हां मेरी पूनम रानी हम् लोगों केँ पासजिस तरह केँ अंग हैं तुम्हारे पास भि वहीसभी हैं,,,, मगरअब तुम्हारे जैसी कड़कमाल हम् लोग नहि रहगए हें,,,,, ( संध्या कि इसबात पर्र उसकी रितु चाची हंसने लगी औऱ संग मे उसकी सुजाता फूफी भि हंसने लगी,,,, पूनमसमझ गई कि आजउसे लगता हैं कि इन लोगों केँ बीचउसे एकदम नंगी हि अपने कमरे मे जानां होगा,,,,,, उसकारूम बाथरूम केँ ठीक सामने हि तीनचार कदम कि हि दूरी पऱ थें,,, मगरये तीनचार कदमउसे मीलों सें कम नहि लगरहे थें। वो बिना कपड़ों केँ हि अपने कमरे मे जाने केँ लिए अपने आप् कों पूरीतरह सें रेडीकर ली वो बाहर् कदम बढ़ाने हि वाली थि औऱ बाहर् खड़ी उसकी चाची औऱ फूफी उसे एकदम नंगी देखने कां प्रतीक्षा हि कररहे थें कि तभीउसे यादआया कि वो दुपट्टा ओढ़़कर आई थि। ये ख्याल आते हि उसकी आंखों मे चमकनजर आनेलगी,,, औऱ वो जल्दी पलटी औऱ बाथरूम मे जाकर दुपट्टे कों अपनी चूचियों सें होकर केँ लपेटली जोकि दुपट्टा अधिक बढ़ा तौ नहि थां मगरफिन भि उसके नितंबों कों ढक लें रहा थां। पूनम अपने दुपट्टे कों इंसान सें बांधकर बाथरुम केँ बाहर् अपनाकदम बाहर् निकाली औऱ उसे बाहर् आता देखकर उसकी दोनों चाचियां औऱ फूफी केँ चेहरे पऱ मुस्कान फेलने लगी,,, वो लोग मात्र पूनम कि नंगी टांग हि देखे थें औऱ उन्हें लगनेलगा थां कि आज सचमुच पूनम कों पूरीतरह सें नंगी देखने कां सुख प्राप्त कर लेंगी मगरतभी
पुनम अपने चेहरे पर्र विजयी मुस्कान लिए बाथरुम सें बाहर् आनेलगी,,, उसके जिस्म कों दुपट्टे सें ढकाहुआ देखकर उन लोगों केँ चेहरे उतरगए औऱ उन लोगों कां उतराहुआ चेहरा देखकर पूनम जोर-शोर सें उन्हें चिढ़ाते हुए हंसने लगी,,,,, क्योंकि उन लोगों कों पूनम कां जौ अंग देख्ना थां वो तौ पूरीतरह सें दुपट्टे सें ढंकाहुआ थां,,, औऱ बस चिकनी जांघे औऱ गोरी लंबी टांगें हि नंगीनजर आँ रही थि,,,, इसलिये उन लोगों केँ चेहरे पऱ निराशा फैल गई,,,,, मगर जैसे हि पूनमउन लोगों सें आगे निकली,,,, कि तभी तीनो कि नजर उसकीपीठ कि तरफ सें होती हुइ कमर केँ नीचे कि तरफ गई तोँ उन लोगों कि आंखें पूनम केँ पीछे कां नजारा देखकर फटी कि फटीरह गई औऱ वो लोगजोर जोर सें हंसने लगी,,, उन लोगों कों हंसता देखकर पूनम कों कुछसमझ मे नहि आया कि आखिरये लोगहंस क्यूं रही हें। वो अपने कमरे केँ लगभग पहुंच चुकी थि मगरउन लोगों कों हंसता हुआ देखकर उसनेनजर घुमाकर उन लोगों कों देखी तौ उन लोगों कि नजर उसके पिछवाड़े पर्र टिकी हुइ थि औऱ वो लोगजोर जोर सें हंसरही थि। जैसे हि पूनम कि नजर नीचे कि तरफ अपने नितंबों पर्र गई तौ ऊसे अपनी गलती कां एहसास होते हि वहां जल्द सें अपने कमरे मे चली गई औऱ जल्द सें दरवाजा बंदकर दि,, कमरे केँ अंदर पहुंचकर अपनी गलती पर्र उसे भि मुस्कुराना आँ गय़ा,,,, क्योंकि दुपट्टा कां कपड़ा एकदम पतला थां औऱ उसका शरीर पूरीतरह सें पानी मे भीगाहुआ थां जिसकी वजह सें जैसे हि वो दुपट्टे कों अपने जिस्म पर्र लपेटी तौ गीले जिस्म होने कि वजह सें वो दुपट्टे कां पतला कपड़ा पूनम केँ नंगे शरीर सें एकदम चिपक सां गय़ा,,,,, जोँ कि उसके भरावदार नितंबों कों उभारकर प्रदर्शित करनेलगा,,,,, जिसकी वजह सें दुपट्टे सें ढंकने केँ बावजूद भि उसके भरावदार नितंबों कां उभार औऱ कटाव एकदमसाफ साफ गोरेरंग सहितनजर आँ रहा थां जिसको देखकर उसकी दोनों चाचिया औऱ फूफी खिलखिलाकर हंसरही थि।
चढ़ती जवानी की अंगड़ाई - Desi kamuk kahani - Aage kya hua? Next part padhiye
Congratulations for another sexi kahani
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