एक कुँवारी एक कुँवारा - padosi ki beti - Complete Kahani All Parts
एक् कुँवारी एक् कुँवारा
ये मेरे औऱ पायल केँ बीच केँ पहले सम्भोग कि गाथा हैं। आज भि जबउन पलों कों याद करता हूं। तब मेरा लण्ड खड़ा हौ जाता हैं औऱ उसकोयाद करकेमुठ मार लेता हूं।
आज मुझेपता नहि वोँ कहां हैं। पर्र यदि वोँ इसकथा कों पढ़रही हौ। तोँ वोँ भि उन पलों कों यादकर रही होगी।
आगरा केँ सिकंदरा मे किराए कां घर-मकान लिया। जिसमें ऊपरी मंजिल मे घर-मकान-मालिक कां परिवार औऱ नीचे केँ दोरूम केँ सैट मे मे औऱ पीछे केँ दोरूम केँ सैट मे एक् अरोरा परिवार रहता थां।
अरोरा साहब केँ परिवार मे मियां-पत्नि, एक् लड़का औऱ एक् लड़की पायल (उम्र 19 साल) रहते थें। उनका लड़का इंग्लैंड मे रहता थां। हम् दोनों केँ बीच मे घर-मकान कां आँगन कॉमन थां।
पायल एक् अल्हड़ सि। कमनीय काया कि स्वामिनी थि। तकरीबन 5’3″ लम्बे हाइट कि उस हिरनी कां फिगर 32B-28-30 कां थां। वोँ पंजाबी थि। तौ गोरी औऱ मस्त थि जैसा कि अधिकतर पंजाबी लड़कियाँ होती हें।
पायलहर वक्तघऱ पऱ हि रहती थि औऱ मैंनेजमेंट केँ एंटरेन्स एग्जाम कि तैयारी कररही थि।
पिता नौकरी पऱ जाते औऱ देररात लौटते थें, उसकी मां एक् विद्यालय मे टीचरथीं औऱ साम केँ समय ट्यूशन पढ़ाती थीं।
हम् दोनों अक्सर बातें करते थें, मेरा उनकेघऱ पर्र बहोत आनां-जानां थां, अक्सर मे उनकेघऱ पर्र हि खानां खाता थां।
सच कहूँ तौ मेरादिल पायल पर्र आँ गय़ा थां, मे उसको चोदना चाहता थां। पर्र उसकी ख़्वाहिश कां मुझको पता नहि थां।
बस इतना मालूम थां कि उसको मेरासंग अच्छा लगता हैं।
कभी-कभी मे उसको इधर-उधर छूने भि लगा थां। वोँ बिल्कुल बुरा नहि मानती थि। बल्कि वोँ एक् स्माइल भि देती थि।
एक् दिन मे अपनेकाम पर्र नहि गय़ा औऱ घऱ पऱ हि थां। पऱ येबात उनसभी कों पता नहि थि।
लगभग 11 बजेजब मे आँगन मे गय़ा। तौ देखा कि पायल मात्र तौलिया मे खड़ी थि, वोँ अभि नहाकर हि निकली थि, तौलिया उसके सीने पऱ बंधा थां औऱ वोँ जाँघों तक हि थां।
मे सन्नरह कर मात्र उसको देखता रह गय़ा।
वोँ भि सन्नरह गई।
कुछ पलों मे उसकोहोश आया औऱ वोँ अन्दर भाग गई।
मे भि कुछ वक्त केँ लिएसमझ नहि सका कि क्याँ करूँ। फिन मे भि उसके पीछे उसके कमरे मे गय़ा औऱ देखा कि वोँ वैसे हि खड़ी हैं औऱ उसकी सांसें तेज-तेज चलरही हें।
मेरेमन मे काम-वासना कां संचार होँ गय़ा। मेरा लण्ड खतरनाक तरीके सें खड़ा हौ गय़ा थां। मे धीरे-धीरे सें उसके पीछे गय़ा औऱ उसकी नग्न गर्दन पर्र अपने होंठरखा कर हल्का सां चुम्बन दिया।
वोँ काँप सें गई औऱ कहनेलगी- आप् जाओयहा सें।
मे कुछ बोलता तभी किसी नें उसकेघऱ कि घंटी बजाई औऱ मे जल्द सें अपने कमरे मे चला गय़ा।
थोड़ी देरबाद मैंने बहोत कोशिश कि। पर्र उसने अपना द्वार (दरवाज़ा) नहि खोला।
फिन बात आई-गई होँ गई।
पर्र इसकेबाद वोँ मेरे सामने ज़्यादा नहि आती थि। अकेली तौ बहोत कमआती थि। पऱ हम् दोनों कि नज़रें बदल गई थीं।
वोँ अब मुझको बहोत प्रेम भरी नज़रों सें देखती थि, मे भि रोज़ उसकीयाद मे लण्ड कां रस निकल देता थां।
पऱ मुझको कोई मौका नहि मिलरहा थां कि मे कुछकर पाऊँ।
मे हर संभव कोशिश कररहा थां कि कोई मौका मिले औऱ इत्तफ़ाक़ सें ऐसा मौकामिल भि गय़ा।
हुआये कि पायल कों दो एग्जाम पेपर देने दिल्ली जानां थां। पऱ उन लोगों कों पंजाबी होने केँ बावजूद दिल्ली कां कुछ भि नहि पता थां।
तब उसकी मम्मी नें मेरे कों बुलाया- बेटा, तुम् तोँ दिल्ली बहोत जाते हौ। क्याँ तुम् रोहणी नाम कि स्थान जानते होँ?
मे- हाँ क्यूं?
पायल कि मम्मी- बेटा पायल केँ एग्जाम कां सेंटर हैं वहा। क्याँ तुम् पायल औऱ अंकल केँ संग जाकरउसे एग्जाम दिला दोगे?
मे- हाँ क्यूं नहि।
मे मन हि मन बहोत खुश होँ गय़ा कि चलोकुछ समयसंग रहने कां मौका मिलेगा औऱ पायल केँ दिल कि बात जानने मे भि आसानी होगी।
पायल कि मां- ठीक हैं फिन मे तुम् तीनों कां रिजर्वेशन करवा देती हूं।
मे- ठीक हैं।
हम् सबको एक् हफ्ते बाद निकलना थां।
मे खुश थां। मे भि तैयारी मे जुट गय़ा।
मैंने एहतियातन एक् कंडोम कां पैकेट। नारियल केँ तेल कि शीशी.आई पिल कां पैकेट रख लिया थां। शायद जरूरत पड़जाए।
आखिर वोँ समय भि आँ गय़ा जब हमको निकलना थां, रात कि ट्रेन दादर अमृतसर एक्सप्रेस थि, हम् सभी स्टेशन आँ गए।
हम् सबकी 2 AC मे सीटबुक थीं।
सुभह हम् लोगजब दिल्ली पहुँचने वाले थें। तभी पायल केँ घऱ सें घर-मकान-मालिक कां फ़ोनआया कि पायल कि मम्मी गिर गई हें। उनके पांव मे बहुतचोट आई हैं।
येसभी सुनकर हम् सभी घबरागए। पर्र जब मैंने अपने घर-मकान-मालिक सें बात कि। तबपता चला कि वोँ लोग उनको हॉस्पिटल लें गए हें औऱ अब वोँ ठीक हें, दोपहर केँ बाद उनकेपेर कां ऑपरेशन होगा। औऱ उन्होंने बोला कि अंकल कां आनां जरूरी हैं।
येसोच कर हम् सबने लौटने कां प्लान बनाया। पऱ अंकल बोले- अकेला मे लौट जाता हूं। तुम् पायल कों एग्जाम दिलाकर कल आँ जानां।
पर्र मैंने कहा- नहि। हम् सभी वापस चलते हें।
तब अंकल बोले- बेटा अब जोँ होना थां। वोँ होँ गय़ा औऱ पायल कि पूरेसाल कि मेहनत बेकार होँ जाएगी। इसकासाल भि ख़राब होगा।
पायल- पर्र पिताजी ऐसा केसे हौ सकता हैं। मे केसे रोहित केँ संग.
पर्र उसके पिताजी नें उसेबीच मे हि रोक केँ समझाया- बेटा देखो, साल मत ख़राब करो औऱ मे तौ वापसजा हि रहा हूं न्?
मे- अंकल मे केसे पायल केँ संग रुकूँगा?
अंकल- देखो रोहित तुम् समझदार होँ औऱ जिम्मेदार भि हौ। तुम् जरूरठीक सें एग्जाम दिला दोगे औऱ फिन एक् दिन कि हि तौ बात हैं। कल तौ रात तक तुम् आँ हि जाओगे।
फिन हम् दोनों नें मिलकर अंकल कों आगरा कि ट्रेन मे बिठा दिया औऱ वोँ ट्रेन केँ जाने केँ बाद हम् दोनों नें एक्-दूसरे कि तरफ देखा।
मैंने देखा कि पायल अपनी मां केँ लिए बहोत परेशान हैं।
मे- देखो घबराओ नहि। सभीठीक हौ जाएगा। औऱ तुम् मात्र अपने एग्जाम पर्र ध्यान दो औऱ बाकीसभी ईश्वर पर्र छोड़दो। जौ होगा वोँ अच्छा हि होगा।
पायल-हाँ पऱ.
मे- देखो अंकलगए हें। औऱ भि लोग हैं वहा। वोँ सभी उनकीठीक सें देखभाल करेंगे। तुम् परेशान होगी। तोँ तुम्हारा पेपर भि ख़राब होगा औऱ फिन मम्मी क्याँ सोचेगी। इसलिये तुम् केवल एग्जाम मे ध्यान दो औऱ फिन मे हूं नां।
पायल-हाँ तुम् संग तोँ हौ।
येकहकर उसके मासूम सें चेहरे पर्र मुस्कान आँ गई। येदेख कर मे खुश हौ गय़ा औऱ उसकाहाथ हल्के सें पकड़कर बाहर् चल दिया।
जैसे हि मैंने उसकाहाथ पकड़ा। उसने मेरीतरफ देखा। पर्र बोलि कुछ नहि।
मैंने पहाड़गंज मे होटल श्रीराम मे एक् AC रूम लें लिया। ये वही होटल थां जहाँ मे अक्सर दिल्ली आकर रुकता थां। सो हमकोरूम आसानी सें मिल गय़ा।
एग्जाम पेपरदिन मे 3 बजे सें थां औऱ हमको 2 बजे तक वहा पहुँचना थां।
मैंने समय देखा तोँ मात्र 6 बजरहे थें मेरेपास उसको पटाने केँ लिए बहोत वक्त थां।
कमरे मे आकर मैंने गरमचाय आर्डर कि औऱ हम् दोनों बैठकर उसकी माँ केँ बारे मे बात करनेलगे।
मैंने देखा कि पायल बहोत हि ज़्यादा परेशान थि औऱ नर्वस भि थि।
शायद मेरेसंग अकेले कमरे मे होने कि बात कों जानकर वोँ अधिक दिक्कत मे थि।
येदेख कर मैंने भि उसको प्रभावित करने केँ लिए एक् चालचली, मैंने उससेकहा- देखो पायल, तुम् इसतरह परेशान होगी तौ तुम्हारा पेपर ख़राब होँ जाएगा औऱ तुम् मैंनेजमेंट नहि कर पाओगी।
वोँ चुपरही।
फिन मे थोडा रुककर बोला- औऱ एक् बात.इस बात केँ लिएमत परेशान हौ कि तुम् मेरेसंग अकेली हौ औऱ मे तुम्हारे संगकुछ कर दूँगा। तुम् मेरी जिम्मेदारी होँ औऱ मे उसको बखूबी निभाऊँगा।
मेरीइस बात कां असर जल्दी हुआ, वोँ हल्के सें मुस्कराई औऱ मेरीतरफ देखकर बोलि- मे जानती हूं।
जहाँ तक मेरामन थां। मे येबात जानता थां कि इससे अच्छा मौका मेरे कों कभी नहि मिलेगा। जब मे इस अल्हड़ सें कुंवारी पंजाबी कन्या कों चोद सकता हूं।
अचानक पायल बोलीं- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहि हैं क्याँ?
मे- नहि.
पायल- क्यूं?
मे- क्याँ करूँ.कोई मुझको मनपसंद हि नहि करता।
पायल- अच्छा.
मे- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहि हैं क्याँ?
पायल- नहि.
‘ओह्ह.’
पायल सें इसतरह बात शुरुआत हुई औऱ मुझको कुछ तसल्ली हुइ।
मेरी आँखें उसकी मस्त औऱ सेक्सी बॉडी कों ताड़रही थीं। उसके छोटे-छोटे सें उरोज़। गालों कि लाली। मुझको दीवाना बनारही थि।
मेरे बॉक्सर मे मेरा लण्ड आकार लेनेलगा थां। सो मैंने किसी भि तरह केँ तकलीफ़ सें बचने केँ लिएउस पर्र एक् तकिया रख लिया ताकि पायल मेरेउठे हुए लण्ड कों नं देखे।
पायल मेरे कों इसतरह सें घूरते देखकर शर्माने लगी औऱ उसके गालों कि लालीबढ़ गई। जौ मुझको औऱ वासना कि आग मे झोंकरही थि।
वोँ बोल- क्याँ देखरहे हौ रोहित। क्याँ मेरे कों पहलेकभी देखा नहि हैं?
मे- तुम् बहोत सुंदर होँ पायल। देखा तोँ बहोत बार हैं। औऱ एक् बार तोँ बहोत अच्छे सें भि देखा हैं (मेरा इशारा उस तौलिया वाली घटना कि तरफ थां) पर्र इतनापास सें। औऱ इतने इत्मीनान सें पहलीबार देखरहा हूं।
पायल मेरीइस बात कों समझकर औऱ भि शर्मा गई, उसकेगाल औऱ लाल हौ गए।
शायद पायल केँ दिमाग़ मे भि मेरे जैसा हि शायदचल रहा थां। पर्र उसकी हिचकिचाहट उसेआगे बढ़ने सें रोक देती थि।
पायल-ऐसा क्याँ देखा मेरे अन्दर। जौ किसी औऱ मे नहि देखा?
मे- आज तक इतने ध्यान सें किसी कों देखा हि नहि दोस्त। जितने पास सें तुमको देखा। क्याँ नहि हैं तुम्हारे पास। औऱ जौ तेरेपास हैं। उस जैसा शायद हि किसी लड़की केँ पास हौ।
येकहकर मैंने उसकी आँखों मे झाँका। तोँ उसने शर्मा कर नजरें झुकालीं।
इस एक् झलक मे उसने मेरी आँखों मे स्वयं केँ लिए अपनापन औऱ प्रेम कों अच्छे सें देख लिया थां।
मे जानता थां कि मे आगेबढ़ सकता हूं। पर्र मन केँ किसी कोने मे डर भि थां कि वोँ कहीं भड़क न् जाए।
पलंग पऱ तकिये केँ सहारे दीवार सें लगकर मे आधा लेटाहुआ थां औऱ पायल मेंरे पांव कि तरफखाट केँ एक् कोने मे बैठी थि।
मे- पायल एक् बात पूछूँ?
पायल- पूछो.
मे- तुमको मे कैसा लगता हूं। मेरा मतलब हैं कि तुम् मेरे बारे मे क्याँ फील करती होँ?
पायल मेरे प्रश्न पऱ कुछ नहि बोलीं। एकदमचुप सें हौ गई। उसने मेरीतरफ एक् बार देखा औऱ नजरें झुकालीं।
‘कहो न् पायल.’
पायल- रोहित तुम् एक् अच्छे लड़के होँ। मेरेदिल मे एक् सॉफ्ट कार्नर भि तुम्हारे लिए हैं। पर्र मे वैसा नहि सोचती जौ किसी लड़की कों एक् लड़के केँ लिए सोचती हैं। तुम् समझरहे हौ नं रोहित?
पायल सें एक् लम्बी चुप्पी केँ बाद बड़ा सां स्टेटमेंट दिया। जोँ मेरेलिए एक् शुभ संकेत थां। मे भि कोई रिलेशन मे नहि जानां चाहता थां। मेरा ध्यान मात्र औऱ केवल उसको चोदना थां।
मे- देखो पायल मे तुमको बहोत मनपसंद करता हूं। पर्र मे भि कोई रिलेशनशिप अभि नहि चाहता। क्याँ तुम् मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी? देखो तुम् पऱ कोई दबाव नहि हैं। तुम् चाहो तोँ मना भि कर सकती हौ। मुझको बुरा नहि लगेगा। देखो जौ मेरेदिल मे होता हैं। वही मेरी जुबान पर्र भि होता हैं। मे बहोत साफ औऱ खुलेदिल कां इंसान हूं।
पायल- वोँ मे जानती हूं।
फिन थोड़ी सें चुप्पी केँ बाद बोलि- मुझे आपकी गर्लफ्रेंड बनकर अच्छा लगेगा। पऱ मे कोई आपको वादा नहि कर सकती।
मे- मैंने कबकहा तुम् कोई वादाकरो। देखो हम् दोनों कां हि कोई बॉयफ्रेंड याँ गर्लफ्रेंड नहि हैं। सो हम् दोनों एक्-दूसरे केँ बन सकते हें औऱ भविष्य किसने देखा हैं?
पायल मेरीबात सुनकर मुस्कराई। शायद वोँ भि समझ चुकी थि कि मे क्याँ कहना चाहता हूं। फिन भि वोँ अनजान बनीरही।
मैंने समय देखा अभि मात्र 8 बजे थें। अब भि बहोत समय थां हमारे पास औऱ मे चाहता थां कि वोँ बात करतीरहे। मे इसबात कों किसीतरह सेक्स चैट कि तरफ लें जानां चाहता थां।
‘पायल मेरेपास आकर बैठो नं.’
मस्त कहानी हैं भइया
बढ़िया कथा..
एक कुँवारी एक कुँवारा - padosi ki beti – New Episode
मेरीबात सुनकर पायल नें एक् अजीब सां फील करके मेरीतरफ देखा।
उसके चेहरे सें मैंने अंदाज़ा लगा लिया कि वोँ हिचकिचा रही हैं। शायद उसकेमन कुछडर सां भि थां।
मे उठा औऱ उसकाहाथ पकड़कर अपनीतरफ बुलाया, वोँ धीरे-धीरे सें मेरेपास खिसककर बैठ गई।
हम् दोनों हि बहोत अजीब सां फीलकर रहे थें, मेरेदिल कि धड़कन तेज़थीं, बदन मे कंपकपाहट थि।
आप् जानते हि होंगे कि किसी लड़की केँ संगबंद कमरे मे अकेले होना। दोनों कों कितनी घबराहट सें भर देता हैं। वोँ भि तब.जब दोनों कां हि पहलीबार हौ।
हम् दोनों केँ बीच एक् लम्बी चुप्पी सें छा गई। मात्र रुक-रुक कर एक्-दूसरे कों गहरी नजरों सें देख लेते थें।
तभी पायल एकदम सें उठी औऱ बोलीं- मे फ्रेश हौ सजधजकर होँ जाती हूं।
वोँ उठी हि थि कि अचानक मैंने उसकाहाथ पकड़कर बोला- रुको नं। अभि बहोत वक्त हैं। थोड़ी बात करते हें।
मेरे अचानक हाथ खींचने सें वोँ एकदम सें मेरेऊपर गिर गई, मेरे सीने मे उसके प्यारे-प्यारे मस्त चूचों केँ गड़ने सें मेरे मुँह सें ‘अहह.’ कि आवाज़ निकली।
अरे। कितना सॉफ्ट सां टच थां। मेरेहाथ उसकीकमर मे थें। कुछसमय तौ हम् दोनों हि सभीभूल गए।
उसनेसर उठाकर मेरी आँखों मे देखा, मुझे उसकी आँखों मे वोँ हि नज़रआया। जोँ मेरेदिल मे थां।
वोँ उठनेलगी। मैंने भि उसे जाने दिया पऱ उसकी पूरीपीठ मे एक् बार उसकी ब्रा कां स्ट्रेप फील करतेहुए हाथफेर दिया।
मेरेइस सेंसुअल टच सें उसके शरीर कि थरथराहट कों मैंने महसूस कर लिया थां।
‘सॉरी.’
एक् छोटा सां शब्द मैंने बोला। पऱ वोँ चुपरही.
मैंने फिन सें बोला- सॉरी नाँ.
‘ओके.’ पायल एक् हल्की सें मुस्कान केँ संग बोलीं।
मे- सोनाऊ वीआरकपल?
येसुन कर पायल नें मेरीतरफ देखा औऱ कुछ लम्हा रुककर धीरे-धीरे सें अपनासर धीरे-धीरे सें हिलाकर ‘यस’कहा।
दोस्तो, अचानक मैंने अपने आपको बहुत हल्का सां महसूस किया। मे उसको चोदने कि दिशा मे एक् कदम बढ़ा चुका थां। वोँ लम्हा दूर नहि थां जब मे उसकी न्यूड बॉडी कों महसूस कर पाउँगा। उसके मस्त चूचों कों चूस पाऊँगा। उसकी कुंवारी बुर कां पहला पानीपी सकूंगा।
उसकाहाथ अपनेहाथ मे लेकरउसे सहलाते हुए बोला- पायलआई लाइकयू सोमच.आई एम वेरी हैप्पी नाउ।
पायल हल्के सें मुस्कराई औऱ बोलीं- मे भि.
मैंने फिन हल्के सें उसके हाथों मे प्रेम सें भरा चुम्बन किया। वोँ एकदम सें काँप गई औऱ हाथ कों छुड़ाने लगी। पऱ मेरी पकड़ मज़बूत थि। मैंने उसकाहाथ नहि छोड़ा औऱ उसको अपने औऱ नज़दीक खींच लिया।
वोँ धीरे-धीरे सें मेरे औऱ पास आँ गई।
उसके हाथों सें मे उसकी घबराहट महसूस कररहा थां। दोनों कि हि हथेली पसीने सें भीग गई थि। हम् दोनों एक्-दूसरे कि आँखों मे देखते हुए नाँ चाहते हुए भि बहोत कुछकह रहे थें, बिना बोले एक्-दूसरे कि मानसिक स्थिति महसूस कों कररहे थें।
मे अपने होंठ उसकी हथेली पर्र रखकर रगड़ने लगा। पायल नें अपने आपको छुड़ाने कि एक् नाकामयाब कोशिश केँ बाद अपनी आँखें बंदकर लीं।
मेरेहाथ धीरे-धीरे सें उसकी पतलीकमर कों पकड़कर अपनेपास खींचकर बाँहों मे हल्के सें भर लिया। पायल कि साँसें तेज होँ रहीथीं, उसका शरीर कांपरहा थां, मेरे हाथों कां जादुई स्पर्श उसको भि अच्छा लगरहा थां।
धीरे-धीरे सें मैंने उसके गालों पऱ एक् चुम्बन किया। उसके मुँह सें हल्की ‘आअह.’ निकली, उसके शरीर मे कंपकंपाहट थि।
मेरे होंठों नें उसको आरामसे किस करना शुरुआत किया। कभी उसकी गर्दन पर्र। औऱ कभी गालों पर्र। आँखों पर्र.
मेरे होंठों कां स्पर्श मेरे औऱ उसके अन्दर एक् आग कों जलारहा थां- आअह्ह रोहित। आआह्ह प्लीज़। छोड़ो। आअह्ह्ह मतकरो। रुकोओओ.
पऱ मे कुछ सुनने कों सजधजकर नहि थां, मे लगातार उसकोचूम रहा थां, मेरेहाथ उसकीपीठ मे इधर-उधर हौ रहे थें।
मे उसके जिस्म कि मुलायमियत। कोमलता। औऱ पवित्रता कों महसूस कररहा थां।
पायल कि आवाजें बढ़रही थीं- रोहित प्लीज़ छोड़ो। रुकोओ। मतकरो। आआह्ह.
मे- पायल मुझेमत रोको नाँ। तुमको अच्छा लगेगा.
पायल- नहि। यहसही नहि हैं। रुको। आअह्हह्हह। क्याँ कररहे हौ। आआह्ह्ह मतकरो। मुझेकुछ होँ रहा हैं। आअह्ह्ह। रोहित क्याँ कररहे होँ।
मे- पायल हम् दोनों अबकपल हें नां। औऱ येकपल केँ बीचसभी सही होता हैं।
पायल- नहि। मे नहि कर सकतीयह सभी.यह गलत हैं।
मे- क्याँ गलत हैं औऱ क्याँ नहि कर सकती?
पायल-वही। जौ तुम् कररहे हौ। बहोत अजीब सां महसूस होँ रहा हैं। मैंने कभीऐसा महसूस नहि किया। हम् दोनों केँ बीचये सभीसही नहि हैं।
उसकी हल्की औऱ धीरे-धीरे आती आवाज़ सें मे अंदाज़ा लगा सकता थां कि उसको अच्छा लगरहा हैं। पऱ कहीं नां कहीं वोँ दिल सें भि सभी चाहती हैं। पर्र डर केँ वोँ मनाकर रही हैं, उसको उसके संस्कार औऱ एथिक्स उसकोरोक रहे थें।
मैंने उसको अपनी बाँहों मे लेकर एक् हाथ सें उसकी ठोड़ी कों उठाकर उसकी आँखों मे देखा।
पायल नें भि प्रेम सें भरी निगाहों सें एक् बार मेरीतरफ देखा औऱ आँखबंद करलीं।
मैंने अपने होंठों कों उसके सॉफ्ट औऱ मुलायम होंठों पर्र रखदिए।
आअह क्याँ समय थां। ऐसासमय जिसे केवल हम् औऱ आप् महसूस कर सकते हें।
पायल नें काम्प कर मुझको कस केँ पकड़ लिया। पऱ प्रतिउत्तर मे कुछ नहि किया। उसने एक् बारफिन दूर जाने कि कोशिश कि। पऱ वोँ मेरी बांहों सें निकल नहि पाई।
मेरे होंठ उसके नीचे केँ होंठों कों चूसरहे थें।
मैंने कोशिश कि उसके होंठों केँ अन्दर तक किस करने कि। पऱ पायल नें कसकर अपने होंठों कों बंदकर लिया। मे कभी नीचे कां होंठ तौ कभीऊपर कां होंठचूस रहा थां।
मेरेहाथ उसकी नर्म काया कों सहलाकर उसमें उत्तेजना कां संचार कररहे थें, वोँ कस केँ मुझे पकड़रही थि।
थोड़ी कोशिश केँ बाद उसने उसने रेस्पॉन्स करना शुरुआत किया औऱ मेरे होंठों कों ठीक सें किस करने कि इज़ाज़त दे दि।
आअह्ह्ह। क्याँ समय थां। लगता थां यह वक़्त यहींरुक जाए। हम् दोनों कां पहला चुम्बन.
उसने मेरीजीभ कां अपनी मुँह मे स्वागत किया।
अब हम् दोनों एक्-दूसरे कों पूर्ण तन्मयता सें चुम्बन कररहे थें, एक्-दूसरे कि जीभ कों चूसरहे थें।
‘ऊओह्ह्ह। आआअह। हम्म.’ कि मुँह सें निकलती आवाज़। हम् दोनों कों औऱ उत्तेजित कररही थि।
पायल नें मुझको कस केँ पकड़रखा थां। बहुतदेर बादजब हम् दोनों कां ‘लिपलॉक’ अलगहुआ। तौ पायल कि साँसें तेजचल रहीथीं। उसकासर मेरे सीने पऱ थां। उसकी सॉफ्ट सें चूचे मेरे जिस्म कों छूरहे थें।
आअह क्याँ नज़ारा थां। सच मे भगवान कि बेहतरीन रचना मेरी बांहों मे थि।
सुर्ख लाल चेहरा। तेज साँसें। बिखरे बाल। भीगे होंठ। वोँ केवलकाम कि देवी कि तरहलग रही थि। लगता थां कि भगवान नें बहोत फुर्सत मे बनाया थां।
‘पायल.’ मैंने उसको धीरे-धीरे सें पुकारा।
पायल नें ‘हम्म.’ केँ संग जबाव दिया।
मे- पायल मेरीतरफ देखो।
येसुन कर उसनेसर उठाकर मेरीतरफ देखा औऱ फिन सें नजरें नीचेकर लीं।
मैंने भि उसकीइस अदा पऱ उसको सीने सें चिपका लिया औऱ उसको धीरे-धीरे सें पलंग पऱ लिटाकर उसकेऊपर आँ गय़ा।
आअह.इस समय कां मे कब सें इंतजार कररहा थां। ऊओहमाय गॉड… एक् अल्हड़ सि कमनीय कंचन सि पंजाबी कन्या मेरे नीचे थि… मुझे यकीन हि नहि होँ रहा थां।
पायल जिसकी याद मे मे रोज़मुठ मारा करता थां। अब वोँ मेरे नीचे थि।
मेरा एक् पेर उसकी जाँघों पर्र थां औऱ मे हल्का सां उसकेऊपर थां। मैंने फिन उसको लब-चुम्बन करना शुरुआत किया। कभी निचला होंठ। तोँ कभीऊपर कां होंठ चूसता!
उसका एक् हाथ मेरेसर कों सहलारहा थां। दूसरे हाथ सें उसने मुझको कस केँ पकड़रखा थां।
हम् दोनों बहुतदेर तक चुम्बन करतेरहे, फिन मैंने अपनेहाथ कों उसकी मम्मों पऱ रख दिया।
आअह्ह्ह क्याँ अहसास थां। कितने नर्म। जैसीरुई कां गोला हल्के सें दबाया हौ।
तभी पायल नें मेराहाथ पकड़कर मुझे धक्का दे दिया, वो पायलखाट सें एकदम सें खड़ी हौ गई।
मे- क्याँ हुआ?
पायल- नहि यहठीक नहि हैं। तुम् ये कहां टचकररहे थें?
मे- क्यूं क्याँ हुआ दोस्त। कुछ भि तोँ नहि टच किया। केवलकिस हि तोँ किया थां।
पायल- इतने भोलेमत बनो। तुमको पता हैं तुमने क्याँ टच किया औऱ येगलत हैं। मे ऐसा नहि कर सकती। सॉरी रोहित।
मेरा तौ सारानशा हि उतर गय़ा, मे बहोत डर गय़ा। धीरे-धीरे सें बोला- सॉरी पायल.
मेरे दिमाग़ कां दही होँ गय़ा थां।
पायल- देखो रोहित मे जानती हूं कि तुम् मुझे बहोत मनपसंद करते हौ औऱ मे भि उतना मनपसंद करती हूं तुमको। पर्र जौ तुम् चाहरहे होँ। उसकेलिए शायद मे दिल औऱ मन सें रेडी नहि हूं।
मे- पायल मे ऐसाकुछ नहि चाहता हूं। जिसमें तुम्हारी सहमति नहि होँ। तुम् संग हौ। यही बहोत हैं औऱ तेरेसंग केँ आगे.‘उस’ चाह कि अहमियत नहि हैं। मैंने फिन धीरे-धीरे सें उसे अपनी बांहों मे भरकर उसके माथे पर्र एक् हल्का चुम्बन किया।
पायल भि मेरे प्रेम केँ आगेझुक गई। औऱ उसने मेरे सीने मे सर छुपा लिया, वोँ मेरे सीने मे सररखकर मेरे कों बाँहों मे लिएरही।
मे भि आहिस्ता उसको बाँहों मे लिए-लिए उसकीपीठ कों सहलाता रहा, उसकी ब्रा स्ट्रिप केँ ऊपर औऱ उसकी चूतड़ केँ ऊपर सें थोडा दबावडाल कर सहलाता रहा।
उसकेबदन कि गर्मी कां उसकीहर समय कांपते जिस्म। उसके जिस्म मे होती हरकत कां अहसास कररहा थां।
मेरीगरम सांसों कों वोँ महसूस कर सकती थि औऱ इस गर्म शरीर कि गर्मी सें मेरे लन्ड कि अंगड़ाई कों शायद वोँ भि महसूस करनेलगी थि क्योंकि मेरा लन्ड उसकोटच कररहा थां।
उसके हाथों कां कसावबढ़ गय़ा थां। उसकेबदन मे भि हल्की हरकत होनेलगी थि।
अचानक पायल नें सर उठाया औऱ मेरे लबों पऱ अपनेलब रखदिए। मे भि कुछ पलों केँ बाद बहोत अजीब सां महसूस करतेहुए उसके चुम्बन कां जवाब देनेलगा।
ऐसा लगता थां। समयथम सां गय़ा हैं, दिल कि धड़कन जोर सें बजनेलगी थि, हम् दोनों बेसुध होँ गए थें।
मैंने उसको बाँहों मे उठा लिया, उसने भि समर्पण करतेहुए मेरेगले मे बाँहें डालदीं।
उसकोउठा करफुल साइज शीशे केँ सामने खड़ा करके उसको पीछे सें स्वयं सें चिपका लिया।
उसकी आँखें बंदथीं। तब मैंने धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोला- पायल। देखो हमारी-तुम्हारी जोड़ी कितनी अच्छी लगरही हैं।
पायल नें धीरे-धीरे सें नशीली आँखों कों खोलकर देखा औऱ शर्माते हुएघूम कर मेरे सीने मे अपनासर छुपा लिया। मैंने भि उसको चिपका कर उसकेगले पर्र अपनेगरम होंठरख दिए।
पायल-आआह।
मे उसके खुलेगले पर्र अपनेगरम होंठ रगड़ने लगा। मे अपने हाथों सें उसकीपीठ कों सहलारहा थां। चूतड़ कों दबारहा थां।
पायल कि सांसों कि गर्मी मुझको पागलकर रही थि, मे उसके हाथों कां कसाव अपने जिस्म पऱ महसूस करनेलगा थां।
मे- पायल.
पायल- हम्म्म.
मे- आईलवयू.
पायल- मे भि तुमको प्रेम करती हूं रोहित.
इतना सुनने केँ बाद मेरे कों समझ नहि आँ रहा थां कि मे आगेकोई स्टेप लूँ कि नहि। क्योंकि मे पायल कों हर्ट नहि करना चाहता थां। उसके अकेले संग होने कां कोई फायदा नहि उठाना चाहता थां।
उसको मैंने फिन सें बाँहों मे उठाकर खाट पर्र लिटा दिया औऱ उसकेऊपर आकर चुम्बन करनेलगा।
पायल भि अब पहले सें अधिक औऱ प्रेम केँ संग मेरे चुम्बन कां जवाबदे रही थि।
कभी मे उसकेऊपर केँ होंठों कों चूमता। कभी नीचे केँ होंठों कों चूसता। उसकीजीभ कों मे अच्छे सें चूसरहा थां।
प्रेम औऱ वासना दोनों संग-संग बढ़ने लगीथीं।
मेरा शरीर उसकेबदन पर्र थां। उसकीफूल सि कमनीय काया। मेरे शरीर केँ नीचे थि। उसके उभार कों अपने सीने मे महसूस कर सकता थां।
जब मे अलगहुआ तौ मैंने अपनी शर्ट उतार दि, अब मे फिन सें उसकेऊपर आँ कर उसकी गर्दन पऱ किस करनेलगा।
पायल-अहह रोहित। प्लीजज। रुको रोहित रुको।
पऱ रोहित कों रुकना नहि थां। कभी गर्दन पर्र कभी कानों पर्र कभी कानों कि लौ पऱ। मेराहर एक् चुम्बन पायल कि अंदरूनी चाहत कों जगारही थि।
उसकाबदन धीरे धीरे पिघलरहा थां। जैसे कि कोई मोमबत्ती पिघलती हैं। उसके शरीर कों फूल सां हल्का होताहुआ मे महसूस कर सकता थां।
मेरे चुम्बन कां जवाब वोँ चुम्बन सें देरही थि।
पायल-ओह रोहित। क्याँ कररहे होँ। मतकरो। प्लीजज्ज। रुकजाओ। कुछ हौ रहा हैं मुझको। मान भि जाओ नं रोहित.
तभी मैंने उसकी गर्दन पर्र जोर सें काट लिया।
पायल-आउच। क्याँ करते होँ रोहित.
मे- कुछ नहि। अपनी गर्लफ्रेंड कों प्रेम कररहा हूं।
पायल- अच्छा निशान देकर?कोई सहेली देखेगी आगरा मे। तोँ क्याँ सोचेगी?
मे- अरे तेरी सहेली पूछेगी। तौ कह देना। मेरे बॉयफ्रेंड कां निशान हैं।
पायल-धत.
मे अभि भि उसकेऊपर थां, उसकेहाथ मेरीपीठ कों सहलारहे थें, अबकीबार मैंने उसकी गर्दन पर्र फिन सें किस करना शुरुआत कर दिया औऱ किस करते-करते उसके उभारों केँ पास केँ कटाव केँ ऊपर चुम्बन करना शुरुआत किया थां कि उसकाबदन कांपने लगा, उसकी बाँहों कि पकड़ मज़बूत होनेलगी। मेरेहाथ उसके मस्त चूचों पऱ थां।
मेरेहाथ उसको हल्के-हल्के सहलारहे थें। उसकी बाँहों कों उसकी गर्दन पर्र मेरे चुम्बन कां प्रहार चालू थां।
पायल- रोहित, ये मुझको क्याँ होँ रहा हैं?
मे- क्याँ हुआ तुमको?
पायल-पता नहि अन्दर सें कोई करेंट सां दौड़रहा हैं। कुछ बेचैनी सि हैं। ऐसा लगता हैं कि कुछ बाहर् आने कों हैं।
येकहकर उसने हमकोजोर सें जकड़ लिया औऱ मेरेबाल कों पकड़कर खींचकर मुझे चूमने लगी। उसके अचानक इस हमले नें मुझे भि चकितकर दिया।
उसके चुम्बन कां जवाब मैंने भि देना शुरुआत कर दिया, मेरा लन्ड भि सख्त होँ गय़ा थां, मेरे हाथों कां दबाव उसकी चूचों पर्र बढ़ गय़ा।
एक कुँवारी एक कुँवारा - padosi ki beti – New Episode
अब मे उत्तेजना मे उसकी मम्मों कों जोर सें मसलने लगा। मेरा दूसरा हाथ धीरे-धीरे सें नीचेजा कर‘लव ट्रैंगल’ केँ बीच मे यौवन केँ दरवाज़ा पऱ दस्तक देनेलगा। पायल केँ बदन कां तनावबढ़ गय़ा थां। मेरे दोनों हाथसही स्थान पर्र अपनाकाम कररहे थें। कपड़ों केँ ऊपर सें योनि दरवाज़ा कों सहलाना एक् ऐसासुख थां। जिसको शब्दों मे बयान नहि कियाजा सकता।
पायल- रोहित मुझको कुछ हौ रहा हैं। अच्छा लगरहा हैं। ऊह अह्ह्ह अआह्ह्ह ओह। धीरे-धीरे सें। दर्द होता हैं। रुको रोहित कुछ होने वाला हैं मुझको। ऊह्ह्ह्ह्ह् राहुल्ल्ल। ऊऊऊ.
इतनाकह कर उसने मुझको जोर सें बाँहों मे जकड़ लिया, उसके नाख़ून मेरीपीठ केँ माँस केँ अन्दर तक चलेगए थें, दर्द कि एक् पीड़ा करंटबन कर दौड़ गई, उसने मेरे होंठों कों काट खाया।
औऱ फिन। उसकाबदन हल्का होता गय़ा। पकड़ ढीली होती गई। कुछबचा थां। तोँ हंगामा पायल केँ सांसों कां.
मे समझ चुका थां कि उसकाये ज़िंदगी कां पहला ऑर्गेस्म हुआ हैं।
वोँ अभि भि मेरी बाँहों मे थि। उसकीतेज सांसों सें उठते-गिरते उसके सीने केँ दो उभार। गालों कि लाली। भिंची हुइ जाँघें इसबात कां गवाहथीं कि उसको परमसुख। नारीत्व कां अहसास होँ चुका थां।
उसको पहलीबार एक् लड़के केँ स्वर्णिम। सेंसुअल टच कों महसूस होँ चुका थां।
मेरा लन्ड पूरीतरह रेडी थां। मेरी पैंट मे सरउठा केँ खड़ा थां। जोँ उसकीलव ट्रैंगल कों टच करवाकर अपने होने कां अहसास दिलारहा थां।
कुछदेर मे पायल नार्मल होँ गई तोँ मैंने उसकाहाथ लेकर अपने लन्ड केँ ऊपररख दिया।
पायल नें जल्दी अपनाहाथ हटा लिया।
मैंने फिन उसकाहाथ वहा लें जाकररख दिया। इस बार मैंने उसकाहाथ कों छोड़ा नहि। उसकेहाथ सें मे अपने लन्ड कों सहलारहा थां। दबारहा थां।
पायल नें मेरीतरफ एक् बार प्रश्नवाचक नजरों सें देखा।
मे- करो न् दोस्त.
पायल- रोहित मुझेडर लगरहा हैं।
मे- किसबात कां डर.?
पायल- तुम्हारा बहुत बड़ा हैं। दूसरा मे इसकेआगे नहि बढ़ सकती।
पायल नें मुझसे ऊपरीतौर पर्र सभीकुछ करने कि इजाजत दे दि थि पऱ अब भि वोँ चुदाई सें डररही थि।
मे- डरने कि क्याँ बात हैं। तुमको अच्छा लगेगा।
पायल-हाँ जोँ कुछ तुमने किया औऱ जोँ मैंने महसूस किया। वैसा मैंने कभी महसूस नहि किया हैं, ऐसालग रहा थां कि मे सातवें आसमान मे उड़रही थि।
जब पायल अपनीबात बतारही थि। तोँ मैंने अपनी पैंट केँ बटनखोल दिए औऱ उसकाहाथ मैंने पकड़कर पैंट मे डाल दिया।
पायल नें फिन भि कुछ नहि किया, शायद वोँ झिझकरही थि। पर्र उसनेहाथ भि नहि हटाया।
मेरा लण्ड पूरीतरह सें खड़ा थां। मे उसे अभि चोदना चाहता थां। पर्र सुभह सें अब तक जौ भि बात हम् दोनों केँ बीच हुई थि। उससे मेरेदिल मे उसके प्रति प्रेम पनप गय़ा थां।
अब मे उसे प्रेम करता थां औऱ बगैर उसकी मर्ज़ी केँ कुछ नहि करना चाहता थां।
मे धीरे-धीरे सें उसकेऊपर आकरउसे होंठों पर्र चुम्बन करनेलगा।
पायल कां हाथ अभि भि मेरी जॉकी केँ अन्दर थां।
मे- पायल क्याँ हुआ। सहलाओ नाँ.
पायल- रोहित तुम् क्याँ चाहते हौ मेरे सें?
मे- कुछ नहि। बस तुमको चाहता हूं औऱ तुमको महसूस करना चाहता हूं। तेरे हाथों कां स्पर्श महसूस करना चाहता हूं।
पायल- पऱ यहगलत हैं। एक्-दूसरे कों ऐसा छूना क्याँ सही हैं? क्याँ हम् दोनों कों आगे बढ़ना चाहिए?
मे- देखो तुमको जोँ आनन्द मिला वोँ कैसा थां। कैसालगा तुमको?
पायल- बहोत अच्छा लगा। अजीब सि फीलिंग थि। पऱ ऐसा मैंने कभी नहि महसूस किया। मेरे शरीर मे करंट सां दौड़रहा थां। बहोत अच्छा लगरहा थां।
मे- देखो हम् दोनों केँ लिए पहलीबार हैं। तुमको तोँ सुखमिल गय़ा। क्याँ मेरी गर्लफ्रेंड अपने बॉयफ्रेंड कों वैसा आनन्द नहि देना चाहेगी?
पायल सें हल्की स्माइल केँ संग बोलि- तुम् सें बातों मे कोईजीत नहि सकता।
येकहकर वोँ मेरे होंठों कों चूमने लगी, मे भि अपनेबदन कां पूराभार उस पऱ डालकर उसके चुम्बन कां जवाब देनेलगा।
मेरेहाथ उसकी टी-शर्ट केँ अन्दर जाकर उसकी ब्रा केँ ऊपर सें उसके उभारों कों सहलाने लगे। पायलफिन सें अपनाहोश खोकर मेरेरंग मे रंगने लगी।
मुझे इंतजार थां उसके हाथों कि हरकत कां। जोँ अभि भि मेरी जॉकी केँ अन्दर थां। मेरे लण्ड पऱ उसके रसीले हाथों कि गर्मी आँ रही थि। लण्ड अकड़ सां गय़ा थां। दर्द भि हौ रहा थां, लण्ड बाहर् आनां चाहता थां।
मैंने धीरे-धीरे सें उसकी टी-शर्ट कों ऊपर उठाना शुरुआत किया थां, पायल नें मेराहाथ पकड़ लिया- नहि रोहित!
मे- पायल मुझे तुमको देख्ना हैं। पूरा देख्ना हैं। औऱ मे कुछ भि तुम्हारी मर्ज़ी केँ बगैर नहि करूँगा। जहाँ तुम् चाहोगी वहीं तक मे आगे बढूंगा औऱ जहाँ न् करोगी। वहींरुक जाऊंगा। मुझेमत रोको।
ये कहकर मैंने उसकेबैक मे हाथडाल करउसे थोडा उठाया, फिन उसकी टी-शर्ट कों पूरा निकाल दिया।
आहह-आहह। क्याँ हुस्न थि। गोरा शरीर.दाग रहित.उस पर्र पिंक ब्रा। नाँ चाहते हुए भि मेरी आंखें बड़ी होँ गईं। मुँह खुला कां खुलारह गय़ा।
मेरे चेहरे केँ भावदेख कर पायल केँ गोरेगाल गुलाबी हौ गए औऱ शरमाकर उसने दोनों हाथों सें अपना चेहरा ढक लिया।
मौकादेख कर मैंने अपना पैन्ट उतार दिया। मैंने फिन सें उसके दोनों हाथों कों उसके चेहरे सें हटाया औऱ उसका एक् हाथ अपने लण्ड केँ ऊपररख दिया औऱ उसकाहाथ दबा दिया।
‘अआह्ह्ह। ओह्ह्ह। नहि रोहित प्लीज। रुकजाओ। ’
रोहित तौ उसके खूबसूरती पर्र दीवाना हौ गय़ा थां। रोहित नें अपना चेहरा उसकी गर्दन पर्र रखकर अपने भीगे होंठों कों उसकी गर्दन पऱ रगड़ना शुरुआत कर दिया।
‘रोहित रुकजाओ प्लीजज्ज। रुकजाओ। ’ हम् दोनों केँ वस्त्रविहीन जिस्म केँ ऊपरीभाग एक्-दूसरे सें रगड़ने लगे थें। उसकी चूचियां मेरी विशाल छाती पर्र मसलीजा रहीथीं। मेरे पैरों कि उंगलियां उसके पैरों कों सहलारही थीं।
‘ओह्ह्ह्ह। रोहित। यह क्याँ कररहे हौ। प्लीज मानजाओ। मतकरो नाँ। मुझेकुछ फिन सें हौ रहा हैं। ’
मैंने उसकेकान मे धीरे-धीरे सें कहा- पायल मेरी जॉकी केँ अन्दर हाथडाल कर सहलाओ नां।
पायल- नहि। मुझे लज्जा आती हैं।
मैंने उसकाहाथ अपनी जॉकी मे डाल दिया। मेरा लम्बा लण्ड लोहे कि रॉड केँ माफिक पूरीतरह सें खड़ा थां।
मैंने फिन सें पायल सें बोला- मेरी गर्लफ्रेंड। प्लीज़ सहलाओ नां।
पायल केँ ब्रा केँ ऊपरी हिस्से कों मे लगातार किसकर रहा थां याँ यह बोलो कि मे चूसरहा थां। उसके गोरे जिस्म पऱ जहाँ मे चूमता। वहा कां हिस्सा लाल होँ जाता थां।
शायद उत्तेजना मे याँ फिन मेरीबात मानकर वोँ पहलीबार मेरा लण्ड अपने हाथों मे लेँ कर सहलाने लगी।
ओह मायगॉड। क्याँ फीलिंग थि। क्याँ तरंग सि मेरे शरीर मे दौड़ गई।
‘ओह्ह्ह्ह पायल.आई लवयू.हाँ ऐसे हि सहलाओ। अच्छा लगरहा हैं। ’
मेरी उत्तेजना चरम पर्र थि। कभी भि मे ब्लास्ट हौ सकता थां।
मैंने उसकी ट्रैक पैन्ट कों नीचे सरकना शुरुआत किया।
उत्तेजना कां आलमयह थां कि पायल नें स्वयं हि अपने हिप्स उठाकर सहयोग कर दिया।
अब वोँ मात्र ब्रा औऱ पैंटी मे थि।
जस्ट लाइकअ हॉर्स बॉटल। उसके पूरे शरीर पर्र एक् भि दाग नहि थां। निर्मल सि काया। पतलीकमर। चौड़े कूल्हे मांसल भरी हुई जाँघें। वाओ क्याँ खूबसूरती थां पायल कां। मेरी उम्मीद सें कहीं ज़्यादा निर्मल पवित्र, निश्छल। चिकना। सॉफ्ट एंड रेशमी। बाल रहित यौवन। उसकीदेह पऱ एक् भि बाल नहि। एक् भि दाग नहि थां।
उसकी पैंटी उसकेरस सें पूरी भीगी थि बड़ा सां गीलापन कां धब्बा साफ महसूस हौ रहा थां।
पायल पूरीतरह सें उत्तेजना मे थि। उसका एक् हाथ मेरे लण्ड कों सहलारहा थां। तोँ दूसरा हाथकभी मेरे बालों पऱ। तौ कभी मेरीपीठ पऱ घूमरहा थां।
मैंने भि अपना जॉकी उतार दिया, मे पूर्ण रूप सें नग्न थां, उसकी ब्रा कों ऊपरउठा कर मे उसके एक् चूचे कों मुँह मे भरकर चूसने लगा।
‘ओह्ह रोहित। अह। आअह्ह। अच्छा लगरहा हैं। आआआह्ह ह्ह्ह्ह.’
मे हाथ पीछे लेँ गय़ा औऱ ब्रा कां हुकखोल दिया औऱ उसको बाहर् निकाल दिया। अह्ह्ह। पिंक निप्पल। एक् रुपये केँ पुराने सिक्के केँ बराबर निप्पल केँ चारों तरफ हल्का ब्राउन ऐरोला… माशाअल्लाह। उसकी 32B कि चूचियाँ क्याँ मस्तथीं।
मेरे भीगे होंठों नें खुदबखुद झुककर उसके पिंक निप्पल कों मुँह मे भर लिया औऱ चूसने लगा।
पायल कां जिस्म मचल गय़ा। उसके मुँह सें सिसकी औऱ कराहट कां हंगामा निकलने लगा ‘अह्ह्ह। ओह्ह्हउ। उह। रोहित अच्छा लगरहा हैं। ओह्ह धीरे-धीरे सें। न् काटो नहि। दर्द होता हैं.’
वोँ यहकहकर मेरेसर कों मम्मों पर्र दबाने लगी, मे औऱ जोर सें चूसने लगता.कभी काट भि लेता।
पायल कि उत्तेजना कां आलमये थां कि मैंने मम्मों चूसते हुए उसकी पैंटी कों भि निकाल दिया। अब पायल औऱ मेराबदन पूरा हि नग्न थां।
‘आअह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह्ह.’ वोँ उत्तेजना सें कांपने लगी।
कभी मे उसके निप्पल पर्र अपनीजीभ घुमाता तोँ कभी उसकोकाट लेता।
‘आउच अहह रोहित। धीरे-धीरे नां। दर्द होता हैं। मतकरो ओह्ह धीरे-धीरे सें करो नाँ.’ उसका एक् हाथ लगातार मेरे शरीर पऱ घूमरहा थां। वोँ लण्ड कों कभी सहलाती तौ कभीदबा देती।
हरबार मेरे मुँह सें उत्तेजक आवाज़ निकल जाती‘आउच अहहअहह। ह्हआ’
मेराहाथ उसकी बुर मे थां औऱ उसकी बुर पर्र हल्के सुनहरे रोएँ जैसेबाल थें।
उसकी बुर केँ कटाव पऱ मेरी उंगली नें सहलाया, पूरी गीली बुर मेरीइस हरकत पऱ पायलउछल सि गई, उसने अपनी पूरीकमर उठा दि।
उसने मेरे लण्ड कों जोर सें दबा दिया, दर्द कि लहर शरीर मे दौड़ गई। पर्र कुछ दर्द अच्छे लगते हें।
उसके छोटे सें छेद केँ पास मेरी उंगलियाँ इधर-उधर हौ रहीथीं। बुर सें नदी केँ बहाव कि तरहरस बहरहा थां।
उसने मेरासर पकड़कर अपनी मम्मों कि तरफकर दिया, मे बच्चों कि माफिक चूसने लगा। चाटने लगा। काटने लगा।
‘आअहहा हहुउऊउ। आअहहुउ ओह्ह्ह राहुल्ल। कुछ निकलने वाला हैं। ओह्ह। उसकेहाथ मे लण्ड आगे-पीछे हौ रहा थां।
हम् दोनों हि उत्तेजना केँ चरम स्तर पर्र थें औऱ जोर कि आवाज़ केँ संग उसने मेरे लण्ड कों जोर सें दबा दिया औऱ अपने पैरों कों मेरीकमर मे बांधकर जकड़ लिया।
मे भि उसके लण्ड केँ दबाने केँ संग अपना सारामाल उसकी हथेली पर्र गिराने लगा, मेरारस कुछ उसके शरीर पर्र। कुछ पलंग पऱ गिररहा थां।
इतनारस तौ मेरे लण्ड सें कभी नहि निकला थां।
पायल भि दोबारा झड़ गई थि।
कमरे मे मात्र औऱ केवल हम् दोनों कि सांसों कां हंगामा थां। दोनों नें एक्-दूसरे केँ नग्नबदन कों जकड़रखा थां। उसकीफूल सि काया मेरेबदन केँ बोझतले दबी थि।
बहुतदेर तक हम् दोनों कुछपता नहि थां औऱ कब दोनों नींद केँ आगोश मे चलेगए। पता हि नहि चला।
तकरीबन एक् घंटे केँ बाद पायल कि आँख खुली। मेरा शरीर अभि भि आधा उसकेऊपर थां। पायल आहिस्ता मेरे बालों कों सहलारही थि।
तभी मेरीआँख खुली। उसके होंठों पऱ प्यारा सां हल्का चुम्बन किया।
मैंने उसकी आँखों मे देखा। वोँ शरमाकर दूसरी तरफ देखने लगी।
हम् दोनों अभि भि नग्न अवस्था मे थें, दोनों केँ शरीर पऱ मेरेरस केँ निशान थें, उसकेबदन मे स्थान-स्थान लाल-लाल निशान थें। जोँ हम् दोनों केँ प्रेम कि स्टोरी कों बयानकर रहे थें।
मे धीरे-धीरे सें उठा औऱ खड़ा होकर उसकोगौर सें देखने लगा।
पायल नें लज्जा सें अपनेऊपर चादर कों खींच लिया। पर्र मैंने चादरहटा कर उसको बाँहों मे उठा लिया।
आज ऊपरीतौर पर्र मैंने पायल केँ संगसभी कुछकर लिया थां औऱ वोँ मेरेसंग सभीकुछ अपनी ख़ुशी सें कररही थि।
अब देख्ना ये थां कि कि वोँ मुझसे चुदती कब हैं।
ओह्ह्ह्ह्ह् कितनी फूल सें हल्की काया थि उसकी। नर्म सि। रुई केँ माफिक… उसको बाथरूम मे लें जाकर शावरचला दिया।
ठंडे पानी कि फुहार नें हम् दोनों केँ शरीर कों पानी सें सराबोर कर दिया, मे उसको नहलाने लगा, मैंने बॉडीवाश सें उसको औऱ उसने मुझे नहला दिया।
हम् दोनों बहुत हल्का औऱ सकून महसूस कररहे थें, एक्-दूसरे कों तौलिये सें सुखाकर वापस कमरे मे आँ गए।
पायल लज्जा सें लाल होँ रही थि, बार-बार अपने मे सिमटरही थि।
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