छीनाल मां - माँ बेटे की चुदाई - Complete Kahani Part 1
एक् रात कों 1 बजे मे अपने कमरे मे लेटाहुआ फोन पे गन्दी गन्दी चुदाई कि कहानियां पढ़रहा थां। मुझे ध्यान नहि रहा कि दरवाज़ा पूरीतरह सें बंद नहि हैं। मे मम्मी बेटे कि चुदाई वाली कहानीयों पढने मे मुझे बहोत आनंदआता हैं औऱ मे आज भि ऐसी हि एक् कथा कों रस लेकरपढ़ रहा थां। मेरा लवड़ा पत्थर कि तरह टाईट होँ गय़ा थां औऱ मे उसेहाथ मे लेकर हिलारहा थां। बाप रिश्तेदार केँ यहा बाहर् गए थां इसलिये मम्मी सोरही थि औऱ मे उसे हि याद करतेहुए सेक्सी इन्सेस्ट कहानीपढ़ रहा थां। मुझे मेरी मम्मी बहोत सेक्सीलगती हैं, उसकेबड़े बड़े पांच पांच किलोके मम्मे औऱ औऱ उनपेतीर कि तरहतने पांचइंच केँ चूचक चूसने कां मेराबड़ा मन करता हैं। 48 इंच कि उसकीकमर हैं जिसके कारन उसके चूतड बहोत बड़े हें। मुझे लगता हैं वोँ गांड बहोत मरवाती होगी। उसकीबड़ी सि तोंद निकली हुयी हैं, जोँ मुझे अक्सर दिखती रहती हैं। खानां खाने केँ बाद वोँ साडीउतर देती हैफिर अपनी मोती तोंद मे मेरे सामने हि हाथ फेरते हुए कहती - मेरे मुन्ने यहीं मैंने तेरी पूरेनौ महीने रख केँ पाला हैं। फिन वोँ अपने मोटे मम्मो कों दोनों हाथो मे भर लेती जोँ हाथो मे आनहीं पाते.तब उसकेलो कट स्लीवलेस ब्लाउज सें आधे सें ज़्यादा गोरे गोरे मम्मे बाहर् झाँकने लगते। वोँ मुझे दिखाते हुए कहती - इन्ही सें मैंने तेरी पांचसाल तक दूध पिलाया हैं। ऐसा सुनते हि मेरा लवड़ा निक्कर मे खड़ा होँ जाता। वोँ अपनी बगलों केँ बालसाफ़ नहि करती थि, इसलिये वहां 10 इंच लम्बे बालों कां जंगलउगा हुआ थां। जिन्हें वोँ मेरे सामने हि कंघी करती, मेरामन करता कि वहां मे अपनीजीभ सेकंघी करदूँ। पर्र वोँ मुझेऐसा कोई मौका नहि देती इसलिये मुझेमन मारकर कामुक कहानिया पढ़करमुठ मारना पड़ता.आज भि मे जोरजोर सें लवड़ा हिलारहा थां तभी मेरी मम्मी कमरे मे घुसआई
छीनाल मां - माँ बेटे की चुदाई – New Episode
."अरे मेरा बेटा सोया नहि अब तक, फोन मे पढ़रहा हैं। हिंदी कहानियां पढ़रहा हैं.""ओह शिट.आई। तुम् सोयी नहि अब तक!!""अरे तूँ तौ पूरा नंगा हैं बेटा!!! अरे इतनीरात कों पूरे कपडे क्यूं उतार रक्खे हें तूने !!! औऱ यह मेरी गन्दी चड्ढी तेरेहाथ मे क्यूं हैं?? क्याँ कररहा हैं तूँ। बोल मेरी चड्ढी केँ संग क्याँ कररहा हैं??? मैंने रात मे सोनेसे पहले चड्ढी उतरकर बाथरूम मे रखी थि। तूँ वहां सें मेरी गन्दी चड्ढी लेँ आया औऱ उसकेसंग तूँ यह क्याँ कररहा हैं.""कुछ नहि आई.""कुछ क्याँ नहि। औऱ यहकौन सि कथा पढ़रहा हैं तुँ। दिखा जरा."उसने झटके सें मेराफोन छीन लिया औऱ पढने लगी."मां बेटे कि चुदाई कि स्टोरी। तौ तूँ इतनीरात कों यहसभी पढता हैं। मां बेटे कि चुदाई। औऱ कोई स्टोरी नहि मिली तुम्हें पढने कों हरामखोर, कुत्ते कि औलाद। तोँ तूँ ऐसी कहानिया पढने केँ बाद अपनीआई केँ संगयह सभी करना चाहता हैं। अपनीसगी आई केँ संग."वोँ अपने नंगेपेट मे हाथ फेरते हुए बोलीं - नौ महीने मैंने तुम कोयहा रख केँ पाला औऱ तुँ अपनीसगी आई केँ बारे मे ऐसा सोचता हैं। उसके बारे मे चुदाई कि कल्पना करता हैं। तेरा लवड़ा जरूरऐसी कहानियां पढ़करखड़ा होता होगा, क्यूं??मे कुछ नहि बोला."अब चुप क्यूं हैं हरामखोर, मुह पे तालापड़ गय़ा क्याँ?? हांखड़ा तौ होता हैं, देखो लवडे कों कैसाखड़ा कियाहुआ हैं। ८इंच कां लवड़ा कैसाफूल गय़ा हैं। लज्जा नहि आती तेरीआई केँ सामने लवड़ाखड़ा करने मे."मे लन्ड कों छुपाने लगा."छुपाता क्यूं हैं भड़वे। मेरी चड्ढी कों सूंधकर लन्ड खड़ा करता हैं औऱ फिनआई कों देख केँ छुपाता हैं। सूअर मैंने हि इसको खिला पिला केँ इतनाबड़ा किया हैं तभीये मेरी चड्ढी कों देख केँ फूलरहा हैं। बोल न् सहीकह रही हूं न् मे। सही हैन.""सॉरी आई ""सोरी सें क्याँ होगा!!! तूँ अपनीसगी आई कों चुदाई कि नज़र सें देखता हैं। उसकेसंग शारीरिक सम्बन्ध बनाना चाहता हैं। उसको चोदना चाहता हैं। अरेकिस हरामखोर सूअर कों मैंने पैदाकिआ जोँ अपनीसगी मम्मी कों चोदना चाहता हैं। उसकी चड्ढी कों सूंघ केँ मुठ मरता हैं। लवड़ाखड़ा करता हैं."आई नें गुस्से सें मेरेबाल पकड़कर मुझेझकझोर दिया."तूँ मेरीकोख मे हि क्यूं नं मर गय़ा। मादरचोद तुझेही मैंने पैदा हि क्यूं किआ। तूँ अपनी मम्मी कि बुर मे 8 इंच कां यह मोटा लवड़ा डालना चाहता हैं। मेरे भोसड़े कों चोदना चाहता हैं। हायरे मेरासगा बेटा मेरा भोसदा चोदना चाहता हैं। अपनीसगी मम्मी कों भि नहि छोड़ा। कैसा कलयुग आँ गय़ा हैं भगवन कि बेटा हि अपनी मम्मी कां भोसडे मे लन्ड पेलना चाहता हैं."मेरी मम्मी कि आँखे गुस्से सें लाल हौ रही थि। उसकेमन मे जौ आँ रहा थां वोँ बकतीजा रही थि। मुझे भि बहोत ग्लानी हौ रही थि, मनकररहा थां कि मर जाऊंमगर मेरा लवड़ा बैठने कि बजाय औऱ खड़ा होँ रहा थां। मेरी मां मेरे लन्ड कों घूरेजा रही थि."देख तौ कैसातन रहा हैं। इसका मतलब तुँ सच मे अपनीआई कों चोदना चाहता हैं। तेरे बाप कों पता चलेगा तोँ वोँ तुम को फांसी पे लटका देगा। मेरे भोसड़े कों उसके औऱ रिश्तेदारों केँ अलावा आज तक किसी औऱ नहि चोदा। औऱ तुँ भि इस भोसड़े मे लवड़ा पेलना चाहता हैं। लज्जा कर तेरीआई हूं मे। पैदाकिआ हैं मैंने तुम्हे.""सोरी मां। गलती होँ गई,। अब नहि करूँगा। कभी नहि करूँगा." सोरी मां। गलती होँ गयीँ,। अब नहि करूँगा। कभी नहि करूँगा."
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तेरी हरकतों कों देख केँ तोँ ऐसा लगता हैं कि तुँ रोज़ करेगा। बता क्याँ करता हैमेरी चड्ढी केँ संग.बता। कैसा मज़ा मिलता हैं तेरी.बोल भडवे। क्याँ करता हैं तूँ मेरी गन्दी चड्ढी केँ संग.""आई। जब तुम् सो जाती होँ तौ मे बाथरूमजाकर तुम्हारी चड्ढी लेँ आता हु.""तुम्हारी तरफ केसेपता चला कि मेरी चड्ढी बथरूम मे हैं.""आई तुम् मेरे सामने हि कईबार पेटीकोट सें चड्ढी निकाल दिया करती थि औऱ बाथरूम मे फेंक देती थि तो.""हाय रामराम मे तौ तुम्हें बच्चा समझऐसा करती थि औऱ तूँ मुझेऐसा करतेदेख लवड़ाटाईट करता थां। सही कहती हैं मेरी मम्मी आजकल केँ लौंडो कां कोई भरोसा नहि। मौका मिले तौ सबसे पहले मां कों छोड़दें। बताफिन क्याँ करता थां तुँ.""मे बाथरूम जाता औऱ तुम्हारी गन्दी चड्ढी कों कमरे मे लें आता.फिन नंगा हौ जाता। तुम्हारी चड्ढी कों सूंघता। उसमे सें तेरी बुर कि बासआती। तौ मेरा लवड़ाखड़ा होने लगता। उसमे तुम्हारी बुर कां पानीलगा होता, मे उसे चाटता। मेरा लवड़ा एकदम टाईट होँ जाताफिन मे अपना लवड़ा चड्ढी मे फंसाकर चड्ढी कों चोदता."मम्मी यह सुनकर गुस्से मे बोलीं - वाउ मेरी चड्ढी चोदता औऱ कल्पना करता कि तूँ मुझेचोद रहा हैं। तेरा लवड़ा मेरे भोसड़े मे घुसरहा हैं। तूँ मेरे पांच पांच किलो केँ मम्मे दबारहा हैं। यही नं। यही सोचता हैं न् तूँ। बता। मे तुझेकितना सीधा समझती थि.सबसे तेरी तारीफ करती थि कि मेरा बेटा चुदाई सें दूर हैं। दिनभर पढता रहता हैं। मादरचोद तुँ यह पढता थां। मम्मी बेटे कि चुदाई कि कहानिया। मेरी गन्दी चड्ढी केँ संगमुठ मरता हैं। मां कों चोदने कि कल्पना करता हैं। आनेदे तेरे बाप कों उसी सें तेरी शिकायत करुँगी। साले गोलीमार देगा वोँ तेरी। मादरचोद.यह सुनते हि मेरी गांडफट गई,। मेरे बाप कां क्रोध बहोत खतरनाक हैं। उसकेउपर आठ मर्डर केँ केसचल रहे हें। वोँ एक् नुम्बर कां हरामी इंसान थां। मोहल्ले कि एक् भि स्त्री ऐसी नहि थि जिसे उसने न् चोदा होँ। मे मां केँ पैरों पे गिर गय़ा."मुझे माफ़कर देआई। मुझसे बहोत बड़ी गलती हौ गई,। मैंने तेरे भोसड़े कों याद करकेमुठ मारी.अब कभी तेरेनाम कि नहि मरूँगा। न् तेरे भोसड़े कों यादकरूँगा। न् हि तेरी गन्दी चड्ढी छुऊंगा."मां नें अपने पेटीकोट कों कमर तक उठाया औऱ अपने६ इंच केँ क्लीन शेव्ड भोसड़े कों दिखाते हुएकहा - यही चाहिए न् तुम्हें। इसी भोसड़े कां भूखा हैं नं तुँ कुत्ते। यहीं अपना लन्ड पेलना चाहता हैं नं तुँ। मुझे कुतिया बना केँ चोदना चाहता हैं न् तूँ। देख.इसी भोसड़े कां दीवाना हैं न् तूँ। इसी केँ लिए तेरा लवड़ाखड़ा होता हैं। अपनीसगी आई कि इसी बुर कों देखकर तुँ मुठ मारता हैं नं। यहीं सें निकला हैं तूँ कुत्ते.मे आई केँ भोसड़े कों घूरते हुए बोला- मुझेमाफ़ करदेआई। अब गलती दुबारा नहि करूँगा। प्लीज पिताजी कों न् बोल्ना प्लीज."तूँ ऐसा केसेकर सकता हैं। तुँ मेरासगा बेटा हैं, मे तेरी सग्गी आई। औऱ अपनीसगी आई केँ भोसड़े कों हि तुँ चोदना चाहताहै."
तुँ ऐसा केसेकर सकता हैं। तुँ मेरासगा बेटा हैं, मे तेरी सग्गी आई। औऱ अपनीसगी आई केँ भोसड़े कों हि तूँ चोदना चाहताहै।
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