जादुई लकड़ी (Completed) - सस्पेंस थिलर - Complete Kahani All Parts
दोस्तो यह स्टोरी एक् फेंटेसी पर्र आधारित किस्सा हैं जिसका किसी भि वास्तविक घटना याँ पात्र सें कोई संबंध हि हैं ….
इस स्टोरी मे फेंटेसी केँ अलावा इन्सेस्ट, adultary, सस्पेंस थिलर कां संगम हैं…
INDEX
जादुई लकड़ी (Completed) - सस्पेंस थिलर – New Episode
इंट्रोडक्शन
एक् छोटे सें लकड़ी कां टुकड़ा आपकी जीवन सवार देगायह सोचना थोडा मुश्किल सां काम हैं मगरअगर वोँ लड़की कां टुकड़ा जादुई हौ तोँ.??
मे बी पॉसिबल राइट …
यह किस्सा भि ऐसे हि लकड़ी केँ एक् टुकड़े केँ बारे मे जोँ मुझे किसी इत्तफाक सें मिल गय़ा, औऱ मेरी जीवन कों पूरीतरह सें बदलकर रख दिया
मेरानाम हैं राज, राज चंदानी, जितना कमान मेरानाम हैं उससे भि कामन मेरी जीवन थि, कामन कहना थोड़ागलत होगा क्योकि मेरी जीवन तोँ झंड थि …
मेरे पिता रतन चंदानी शहर केँ सबसेबड़े कपड़ा व्यपारी हैं, समझोनाम चलता हैं, रुपये पैसे कि कोईकमी नहीं थि, वोँ एक् बेहद हि आकर्षक औऱ रौबदार व्यक्तित्व केँ मालिक थें, स्वयं केँ साड़ी केँ मिल औऱ कई कपड़ो कि दुकाने थि, तौ आप् सोचोगे कि ऐसे अमीरजादे कि जीवनझंड केसे हौ गई …….
कारण भि मेरे पिता हि थें, वोँ जितने रौबदार, चार्मिंग, रसूखदार थें उतना हि मे फट्टू, डरपोक, औऱ मरियल थां, इसका कारण भि मेरे पिता हि थें क्योकि उन्होंने बचपन सें हि मुझे मर्द बनाने केँ चक्कर मे इतना टार्चर किया कि मे डरपोक होँ गय़ा, वोँ मुझे सबके सामने जलीलकर दिया करते थें, मेरी तुलना अपने सें करते औऱ फिन मुझे लूजर साबित कर देते, बचपन मे हि उन्होंने मुझे इतना डराया धमकाया थां कि मेरे अंदर वोँ हीन भावना बहोत गहरे मे घऱकर गई थि, मुझे लगता थां कि मे कुछ भि नहींहु,
ऐसेयह बात नहीं थि कि वोँ सबकेलिए ऐसे हि थें, मेरी बहनों कों वोँ राजकुमारियों जैसे रखते थें, वोँ तीनो निकिता, नेहा, निशा उनकी लाडली थि, हमेशा उन्हें अपनेसर मे चढ़ाए रखते तौ मुझे अपने जूते कि धूल भि नहीं समझते थें, उनका एक् हि मानना थां कि घऱ मे एक् हि मर्द हैं औऱ वोँ हैं वोँ, जैसे मेराकोई वजूद हि नहीं थां ….
निकिता औऱ नेहा मुझसे बड़ी थि वही निशा मुझसे 1 साल कि छोटी.
वोँ कितने बड़े चुददक्कड़ थें यह तौ इसबात सें अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि 4 बच्चे उन्होंने 4 साल मे हि पैदाकर दिए, बेचारी मेरी मम्मी.
मेरी मां अनुराधा, भोली भाली सि, वोँ इसघऱ मे एक् मात्रा इंसान थि जिसे मेरी थोड़ी फिक्र थि, मगर वोँ संस्कारी, भोली भाली बेचारी हि थि मेरे बाप केँ सामने बिल्कुल भीगी बिल्ली सि बन जाती, औऱ मेरा बाप फिन मेरे गांड मे सरिया घुसा घुसाकर मेरी मारता थां……
लुसर.यह मेरे बाप कां सबसे प्रिय शब्द थां जबबात मुझपर आती, यंहा तक कि हमारे नॉकर केँ बेटे चंदू कों भि मुझसे अधिक इज्जत दि जाती थि, क्योकि वोँ क्रिकेट औऱ फुटबॉल कां कैप्टन थां, हम् हमउम्र हि थें, उसकी बातबाद मे करेंगे …
तोँ मेरा बाप जितना आकर्षक औऱ रौबदार थां उतना हि ज़्यादा औरतो केँ मामले मे कमीना भि थां, कहते हैं कि ऐसीकोई लड़की याँ स्त्री नहीं जिसे उन्होंने चाहा हौ औऱ नां पटा लिया होँ, वोँ लड़की पटाने केँ लियेशाम दामदंड भेदसभी कुछ इस्तेमाल कर दिया करते थें, मेरी मां कों पता थां कि नहीं मुझे नहींपता मगरअगर वोँ इस बारे मे जानती तौ भि मुझे यकीन थां कि वोँ कुछ नाँ कहती, वोँ थि हि इतनी सीधी …
मेरे बाप केँ कारनामो कां पता मुझे हमारे नॉकरो सें चलता थां,
कभीकभी देशी चढ़ाने केँ बाद अकेले मे अब्दुल काका जोँ हमारे पुराने नॉकरो मे थें औऱ पिताजी केँ उम्र केँ थें मुझेकहा करते थें
“साहब नें इतनी लडकिया चोदी हैं कि मे गईं नहीं सकता, औऱ इसघऱ मे काम करने वालेसब लोगो कि पत्नियों कों भि चोद चुके हैं, औऱ सब औरतो कों भि, रामु कि पत्नि कांता कों तौ मेरे सामने हि मुझे दिखा दिखाकर चोदा थां.हाहा हा.कभी कभी तौ लगता हैं चंदू उनका हि बेटा हैं.हाहाहा …”
वहीजब रामु काका मेरेसंग अकेले शराबपी रहे होते तौ कहते
“साहब नें इतनी लडकिया चोदी हैं कि मे गईं नहीं सकता, औऱ इसघऱ मे काम करने वालेसब लोगो कि पत्नियों कों भि चोद चुके हैं, औऱ सब औरतो कों भि, अब्दुल कि पत्नि शबीना कों तौ मेरे सामने हि मुझे दिखा दिखाकर चोदा थां.हाहा हा.कभी कभी तौ लगता हैं सना उनकी हि बेटी हैं.हाहाहा …”
केसे गांडू लोग थें, मगर क्याँ करोगे मेरा बाप थां हि इतना खतरनाक, दुनिया केँ लिए उसकेमुह सें शहद हि टपकता थां, हर कोई उनका दीवाना थां बसजब मेरीबड़ी आती तोँ उसे क्याँ होँ जाता…
कभी कभी अकेले मे जब मे रोता थां तोँ मेरी मम्मी मुझसे कहती थि कि तेरा बाप तुझसे जलता हैं, क्योकि जब तेरा जन्महुआ तोँ तुँ तेरीदो बहनों केँ बाद पहला लड़का थां, मे तुम को बहोत प्रेम करती थि, पता नहींमगर तेरे बाप कों लगता थां कि तूँ उसकी स्थान नां लेँ लेँ, वोँ बहोत हि महत्वाकांक्षी हैं औऱ अपनेचीज पर्र किसी दूसरे कां अधिकार बर्दास्त नहींकर सकते, शायद इसीलिए वोँ तुम्हे नीचा दिखाने कि कोशिस करते हैं ……
उनकीबात मुझेतब तक समझ नहींआई जब तक मैंने फ्रायड कि साइकोसेक्सुअल थ्योरी नहींपढ़ ली, मगर जौ भि हौ वोँ मेरेलिए मेरा सबसेबड़ा दुश्मन थां……
उसकीवजह सें मेरी बहनों नें कभी मुझे भइया वाला प्रेम नहीं दिया, भइया तोँ छोड़ो वोँ तौ शायद मुझे इंसान भि नहीं समझती थि, मेरा मुह देखती तोँ ऐसामुह बनाती जैसे किसी मनहूस कों देख लिया होँ, मेरी छोटी बेहन निशा तौ मुझे देखते हि कहती थि
“लुसर साला “
सच बाताऊ कि दिल पर्र क्याँ बीतती थि मगरपता नहीं क्योसभी कुछ कि आदत सि बन गई थि, मेरासर मेरे हि घऱ मे झुका होता थां, मे नहीं चाहता थां कि मेरेघऱ मे मेरा सामना किसी सें होँ, मेरा उठाना बैठना इसघऱ मे नॉकरो केँ संग हि थां, शायदयही मेरी औकात थि, वोँ भि इसलिये मझसे अच्छे सें बातकर लेते थें क्योकि मे उनके मालिक कां बेटा थां औऱ कभीकभी उन्हें दारू पिला दिया करता थां….
इसघऱ मे मेरेदो हि चाहने वाले थें एक् थि मेरी मम्मी जोँ बापू औऱ बहनों केँ सामने शांत हौ जाती थि, बस अकेले मे थोड़ा दिलासा दिला देती थि, औऱ दूसरा थां टॉमी, वोँ एक् लेब्राडोर कुत्ता थां उस बेचारे कों इसबात सें कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मुझे क्याँ कहता हैं, वही थां जिसके संग मे टाइम बिताया करता थां, बाते किया करता थां औऱ जिसके लिए मे लुसर नहीं थां.
कभीकभी उसे मेरेसंग देखकर मेरी बहनेकह देती
‘पता नहीं पिताजी नें दोदो कुत्ते क्योपाल केँ रखे हैं’
दिल मे दर्दउठा नां.???मेरेलिए रोज कां थां…….
अबजिस व्यक्ति कां घऱ मे यहहाल थां सोचिए उसका सामाजिक ओहदा क्याँ रहा होगा, विद्यालय मे भि मेरासर नीचे हि रहता थां, मे नहीं चाहता थां कि कोईआकर मुझसे बत्तमीजी करे क्योकि यहआम सि बात थि, लड़के चिढ़ाया करते थें कुछ कों पता नहीं क्यो बेवजह सि दुश्मनी थि मुझसे, ऐसेपता थां वोँ कारण थां कि एक् तोँ मे अमीर थां औऱ दूसरी थि रश्मि….अब यह रश्मि केँ बारे मे बाद मे बताता हु …
खैर मेरी हालतयह थि कि विद्यालय जानां किसी जहन्नुम जाने सें कम नहीं थां, मगर जानां तौ होता थां, एक् प्रॉब्लम यह भि थि कि मेरी छोटी बेहन निशा मेरे हि क्लास मे थि औऱ वोँ एक् बम्ब थि, लड़के उसके पीछेलार टपकाते औऱ वोँ उन्हें अपने इशारों पर्र चलाती, पूरे पिताजी पर्र गई थि, वही उसका एक् ऑब्सेशन थां मुझे सबके सामने बेइज्जत करने कां, वोँ कोई मौका नहीं छोड़ती थि.
तौ कहने कि जरूरत नहीं कि विद्यालय मे मेराकोई मित्र भि नहीं थां, बस दोलोग थें, एक् थां चंदू, रामु काका कां बेटा वोँ भि मेरे हि क्लास मे थां औऱ मुझसे इसलिये बातकर लिया करता थां क्योकि वोँ मेरे बाप केँ पैसे मे इस अच्छे विद्यालय मे पढ़रहा थां औऱ दूसरा उसेजब पैसे कि जरूरत होती तौ मुझसे हि लिया करता थां.
चंदू थां तोँ महा कमीना, उसका काला चहरा औऱ काला जिस्म, जोँ कि कसरती थां औऱ ऊंचा डीलडौल केँ कारण वोँ भयानक सां लगता थां, असल मे उससे बाकी लड़को कि फटती भि थि, जिसके कारण मुझे चिढ़ाने वाले याँ सताने वाले थोड़ा डरते थें, यंहा तक कि निशा केँ आशिक जौ उसेखुश करने केँ लिए मेरी मारने पऱ तुले रहते थें उनसे चंदू हि मुझे बचाता थां मगर हमेशा नहीं, मगर फिन भि चंदू मेरा मित्र कम दुश्मन हि थां, क्योकि वोँ जितना मुझे देता उससे ज़्यादा मुझसे लेने कि फिराक मे रहता थां, औऱ सब सें तोँ मुझेबचा लेतामगर उससे मुझेकौन बचाता, मेरे सामने हि वोँ निशा कों खा जाने वालीनजर सें देखता थां, निशा केँ सामने हमेशा मेरा मजाक उड़ाता ताकि वोँ दोनों मुझपर हँससके, औऱ निशा कमीनी भि उसके सामने मुझे अक्सर कहती थि.
“मर्द तौ तुँ हि चंदू, वरना यंहा तौ चूतिये लूजर कों भि भइया केहना पड़ता हैं, ”
बदले मे चंदू हँसते हुए उसके शरीर कों घूरता औऱ निशाउसे भि मुस्कुराकर उसे देखती, कभीकभी तौ लगता थां कि चंदू निशा कि लेता होगामगर अभि तक मुझेकोई प्रूफ नहीं मिला थां …
साला चंदू मेरी भोली भालीमा कों देखकर मेरे सामने हि अपना लौड़ामसल देता थां, जबकि मेरी मां उसे अपने बेटे जैसे प्रेम देती थि, यह देखकर मेरासर बस नीचे होँ जाता, क्योकि लड़ना मुझेआता नहीं थां, मे सीधा नहीं थां चोदू थां, डरपोक थां, फट्टू थां जोँ मुझे मेरे बाप नें बनाया थां…….
ऐसे विद्यालय मे एक् औऱ थि जिसे मे सच्चे अर्थों मे मित्र कह सकता थां वोँ थि रश्मि.रश्मि हाय मेरे विद्यालय कि सबसे फटाका मालकही जाती थि, सारे विद्यालय केँ लड़के उससेबात करने कों तराशते, यंहा तक कि निशा भि उसके सामने कुछ नहीं थि, मगर वोँ लड़को मे केवल मुझसे हि बात किया करती थि, वोँ हि एक् थि जौ मेरे लिये किसी सें भि लड़ जातीभीड़ जाती, यंहा तक कि निशा औऱ चंदू सें भि, किसी टीचर सें भि, वोँ शेरनी थि जौ मेरी रक्षा करती थि मगरइस बात कां मुझेदुख हि थां, वोँ मेरेसंग हि इसलिये रहती थि कि लोग मुझे परेशान किया करते थें औऱ कोई मुझसे सीधेमुह बात नहीं किया करता थां, रश्मि बेहद हि संदुर लड़की थि तन सें भि औऱ मन सें भि, उसने मुझे बहोत स्नेह दिया थां, कहने कि जरूरत नहीं कि एक् लूजर कि तरह मे उसे प्रेम करता थां मगर वोँ मुझे प्रेम नहीं करती थि बल्कि मुझपर तरस खाती थि, औऱयह बात मुझे अच्छे सें पता थि, औऱ उसीतरस वोँ कारण थां जिसके कारण लड़के मेरेजान केँ दुश्मन बनेहुए थें औऱ निशा मुझसे इतना चिढ़ती थि, रश्मि हि वोँ लड़की थि जिसके सामने निशा कि भि नहीं चलती थि, वही चंदू भि सालों सें उसे पटाने कि कोशिस कररहा थां मगर रश्मि अगर किसी सें सीधेमुह बात करती थि वोँ थां मे उसकेदया कां पात्र.जोँ भि थां मुझे उसकासंग अच्छा लगता थां कम सें कम वोँ हि एक् कारण थि जिससे मुझे विद्यालय जाने कि हिम्मत मिल जाती.
औऱ चंदू मुझसे कहा करता
“इस रंडी कों तौ मे एक् दिनपटक कर चोदूंगा, साली बहोत नखरे मरती हैं “
उसकीबात सुनकर मेरा…….मेरा सरफिन सें नीचे हौ जाता ….
तोँ दोस्तो यह थि मेरीझंड जीवन, यह ऐसी हि रहतीअगर मेरा बाप पूरे परिवार केँ संग केदारनाथ जाने कां प्लान नहीं बनाता, उन्हें एक् बिजनेस डील करनी थि औऱ अपनी प्रिंसेस(मेरी बहने) कि रिक्वेस्ट पर्र वोँ पूरे परिवार कों संग लें जाने केँ लिए राजी हौ गए, औऱ संग थें सना (अब्दुल कि बेटी), चंदू औऱ टॉमी ………
जादुई लकड़ी (Completed) - सस्पेंस थिलर – New Episode
अध्याय 1
केदारनाथ कि यात्रा पऱ ऐसालग रहा थां जैसे पूरा परिवार एक् संग गय़ा हौ औऱ मे औऱ टॉमी उनसे अलग, किसी कों हम् दोनों मे कोई इंटरेस्ट हि नहीं थां, बीच बीच मे मां मुझे खाने केँ लिएपूछ लिया करती, तौ खान खानां औऱ किसी कोने मे पड़े रहनायही हमारी नियति थि, पूरे मजे वोँ लोगकर रहे थें, सना औऱ चंदू परिवार कां हिस्सा नाँ होतेहुए भि संग थें, मगर मे ….
खैर मे तोँ आनां भि नहीं चाहता थां मगर पिताजी कां ऑर्डर थां तोँ आनांपड़ा…
मंदिर केँ दर्शन केँ बाद मां मेरेपास आयी औऱ मेरे हाथो मे बड़े प्रेम सें एक् धागा बांध दिया,
“मैंने ईश्वर सें दुवा कि हैं कि वोँ तेरी सारी तकलीफों कों दूर करे, मेरा बेटा, ईश्वर तेरी सुनेगा बेटा उसकेघऱ देर हैं अंधेर नहीं “
उन्होंने बड़े हि प्रेम सें मेरे माथे कों चूम लिया, उनकीबात सुनकर मेरे आंखों मे आंसू आँ गए, काश मम्मी कि बातसच हौ ईश्वर मेरीसुन लेँ …
मगर मुझेलगा कि यह धागा किसीकाम कां नहीं क्योकि हम् वंहा सें गंगोत्री केँ लिए निकलने वाले थें 2 गाड़िया थि, एक् गाड़ी जौ कि SUV थि उसमें 6 लोग औऱ ड्राइवर आँ चुके थें, मेरी बेहन निशा नें अपनामन लगाया औऱ पिताजी केँ पास पहुची.
“पिताजी मे चंदू औऱ घऱ केँ दोनों कुत्तों केँ संग गाड़ी मे आतीहु “
मे वंहापास हि खड़ा थां औऱ पिताजी केँ चहरे मे आयी हुईँ मुस्कान कों भि देख सकता थां, पिताजी नें बसहा मे सर हिला दिया…
सच मे ईश्वर नें मेरी नहीं सुनी क्योकि उनकेसंग आने कां मतलब थां कि रास्ते भर वोँ मेरी खिंचाई करेंगे, औऱ एक् अजनबी ड्राइवर केँ सामने भि मुझे जलील करने कों कोईकसर नहीं छोड़ेंगे.
निशा औऱ चंदू पीछे कि सीट मे बैठगए वही मे औऱ टॉमी ड्राइवर केँ संग …
साम कां टाइम थां, गाड़ी चलपड़ी SUV तेजचल रही थि औऱ बहुतआगे निकल गई थि, हमारी गाड़ी कों चंदू नें आहिस्ता हि चलने कां आदेश दिया थां,
औऱ शुरुआत होँ गय़ा उनका फेवरेट काम, मुझे जलील करना …
वोँ कमीना ड्राइवर भि इसकेमजे लेँ रहा थां औऱ मुझेदेख करहँस रहा थां, सच कहु तोँ मुझे रोनाआने लगा थां, मेरा गाला भरनेलगा थां …
“चंदूअगर कोई किसी कि बेहन केँ शरीर सें खेले तौ वोँ भइया क्याँ करेगा “
जरूर निशा केँ होठो मे कमीनी मुस्कान रही होगी जौ मे देख नहीं पाया
“क्याँ करेगा मुहतोड़ देगा, अगर किसी नें उसके सामने उसकी बेहन कों कोईगैर मर्दछू भि लें तोँ “
“हामगर लुजर्स कों कोई फर्क नहीं पड़ता, तौ मर्द हि कहा होते हैं “
दोनों जोरो सें हंसेवही ड्राइवर इसबार तिरछी निगाहों सें मिरर सें पीछे देखने लगा जैसेउसे आभास थां कि कुछ होने वाला हैं
“यकीन नहींआता तोँ ट्राय करकेदेख लो “
निशा कि बात सें जैसे चंदू कों एक् सुनहरा अवसरमिल गय़ा होँ
“राजसुन तोँ इधरदेख “चंदू नें आवाज़ दि
मे नहीं चाहता थां कि मे मुड़कर उन्हें देखुमगर मेरे अंदर एक् अनजान सां डरदौड़ गय़ा थां.
मे मुड़ा, चंदू निशा केँ स्कर्ट केँ नीचे सें हाथ घुसाकर उसके जांघो कों मसलरहा थां
“अहह चंदू, क्याँ करते हौ, ”
“थोड़ा औऱ अंदर लेँ जाऊं क्याँ तेरा भइयाकही मार नां दे मुझे “
दोनों जोरो सें हंसे, वही ड्राइवर केँ होठो मे एक् कमीनी मुस्कान आँ गई क्योकि वोँ भि बेक मिरर सें पीछे कि ओरदेख रहा थां,
इतना जलील होना मुझे गवारा नहीं थां, मेरे सब्र कि इंतेहा होँ गई थि औऱ मैंने क्याँ किया, ??
मे सर मोड़कर रोने लगा, मेरी सुबकियां शायद सबको सुनाई देरही थि
“देखोऐसे होते हैं लुजर्स कुछ तोँ कर नहीं पातेबस औरतो जैसे रोते हैं याँ किसी स्त्री केँ पल्लू मे जा छीपेंगे, कभी मां केँ तौ कभीउस बीच रश्मि केँ.”
निशा कि बातों मे जैसेजहर थां,
मे औऱ नहींसह पाया
“गाड़ी रोको …”
मैंने पहलीबार कुछ बोला थां मगर ड्राइवर नें मुझेबस देखा
“मुझे पेशाब जानां हैं “
मैंने फिन सें ड्राइवर कों देखामगर वोँ जैसे किसी औऱ कि इजाजत कां प्रतीक्षा कररहा थां.
“ओह देखो लूजर कों आंसू केँ संगअब पेशाब भि निकल गय़ा इसका “
निशा कि बात सुनकर चंदू औऱ निशा जोरो सें हंसेमगर इसबार ड्राइवर नहीं हंसा शायदउसे मुझपर थोड़ीदया आँ गई होगी, उसने गाड़ी साइड मे लगा दि औऱ मे टॉमी कों लेकर वंहाउतर गय़ा…
मे गाड़ी सें थोड़ीदूर जाखड़ा हुआ, मे दहाड़मार कर रोना चाहता थां मगर मैंने स्वयं कों काबू मे किया.
“ओ लूजर जल्द आँ “
निशा नें आवाज़ लगाई, मे अपने आंसू पोछता हुआफिन सें गाड़ी कि ओरचल दिया, मैंने दरवाजा खोला हि थां कि.
भरररर
गाड़ी थोड़ीदूर तक चलकरफिन सें रुक गई, इसबार निशा औऱ चंदू केँ संग ड्राइवर भि हंसा थां, मे समझ गय़ा कि यह मेरेसंग क्याँ कररहे हैं.
मे फिन केँ गाड़ी केँ पास पहुचा औऱ फिन केँ उन्होंने दरवाजा खोलते हि गाड़ीचला दि, मे औऱ टॉमी दोनों हि नहींबैठ पाए.
“अरेआओ आओ दोनों कुत्तों कों गाड़ी मे बैठने सें पपरेशानी होँ रही हैं क्याँ.”
निशा नें मुझे चिढ़ाते हुएकहा, मे स्वयं कों सम्हालते हुएफिन सें गाड़ी केँ पास पहुचा औऱ फिन सें भर्रर्रर गालीआगे चल दि, रात होँ चुकी थि दूरदूर तक कोई भि नहीं थां बस हमारी हि गाड़ी कि लाइटदिख रही थि, हम् घने जंगल केँ बीच मे थें, जंगल औऱ पहाड़ औऱ रात कां अंधियारा सभी मिलाकर बेहद हि डरावने लगरहे थें, मे फिन सें गाड़ी कि ओर बढ़ता कि जोरदार बिजली चमकी औऱ बदल गरजे, बहोत हि तेज बारिश शुरुआत होँ गई थि, मैंने टॉमी कों उठा लिया तेजी सें कर कि तरफ बढ़ा, हम् दोनों हि भीगने लगे थें वाहन कां दरवाजा फिन सें बंदकर दिया गय़ा थां, मैने जल्दी हि दरवाजा खोला औऱ जैसे हि टॉमी कों सीट मे रखने कि कोशिस कि फिन सें भरररर…
मे बुरीतरह सें झल्ला गय़ा थां, वोँ लोग जोरो सें हँसरहे थें औऱ कांच सें बाहर् झांककर कमेंट देरहे थें, वाहन फिन सें थोड़ीदूर जाकरखड़ी हौ गई थि, फिन सें तेज गर्जना हुई मगरइस बार नाँ जाने टॉमी कों क्याँ हुआ, वोँ मेरेगोद सें उतरकर सड़क सें बाहर् कि ओर दौड़ाने लगाउस ओर जंहा जंगल थां, मे उसे पकड़ने केँ लिएदौड़ पड़ामगर वोँ तेज थां, हम् सड़क सें उतरकर झाड़ियों मे जा चुके थें, औऱ जंगल केँ अंदर कि ओरजारहे थें.
“टॉमी बेटा रुकजा “मे चिल्ला रहा थां, बारिश बहोत हि तेज हौ चली थि थोड़ी हि देर मे जैसेकोई तूफान सां आँ गय़ा हौ, मेइन पहाड़ो कि बारिश केँ बारे मे सुनरखा थां मगर टॉमी कों मे अकेले नहींछोड़ सकता थां, मगर टॉमी अंधेरे मे कहीखो गय़ा थां, इधर बारिश इतनीतेज थि कि उसकी आवाज़ सब आवाजों पऱ छा गई थि, मुझे हॉर्न बजने कि आवाज़ सुनाई दि जौ कि बेहद हि जोरो सें बजाईजा रही थि, मे उसओर मुड़ा.
“ओ लूजर जल्द सें यंहा आँ जा वरनासोच लेँ तेरा क्याँ होगा “
यह आवाज़ चंदू कि थि, मे घबराकर उसओर मुड़ा हि थां कि मुझे झड़ियो मे एक् हलचल सि महसूस हुईँ, मैंने देखा कि टॉमी झड़ियो सें निकलकर आगे कि ओरभाग रहा हैं.
“टॉमीरुक जा दोस्त तुँ मरवाएगा मुझे “मे फिन सें उसके पीछे भागा.थोड़ी हि देरहुए थें कि मुझेलगा कि मे बहोत आगे आँ गय़ा हु, अब पीछे सें कोई आवाज़ नहीं आँ रही थि, ऐसा जरूरलग रहा थां जैसेदूर सें कोई चिल्ला रहा होँ, शायद चंदू याँ वोँ ड्राइवर.
इधर टॉमी रुकने कां नाम हि नहीं लेँ रहा थां नाँ हि वोँ पकड़ मे आँ रहा थां, मे बारिश मे बुरीतरह सें भीग चुका थां, ठंड सें कांपने भि लगा थां.
मेरामन अब टॉमी केँ लिए खराब होँ चुका थां मे पूरी ताकतलगा केँ उसके पीछे भागा, वोँ एक् झड़ियो केँ झुंड मे जा कूदा औऱ मे भि उसे पकड़ने केँ लिए छलांग लगा दि मगर ….
मगरयह क्याँ झड़ियो केँ पास चिकना पत्थर थां जिसमे मे औऱ टॉमी दोनों फिसलगए थें, पास हि बहते झरने कि आवाज़ सें स्पष्ट थां कि हम् उस झरने कि ओर फिसलरहे हैं, लम्हा भर केँ लिए हि मानो मेरेदिल कि धड़कन हि रुक सि गई, सामने मौत साक्षात तांडव कररहा थां.
टॉमी फिसलता हुआ झरने मे गिर गय़ा.
“नहीं …”
मे जोरो सें चीखामगर सभी बेकार थां मैंने हाथ पांव मारेमगर गीलीकाई कि वजह सें मे रुक हि नहीं पाया औऱ.
“नहीं ….”झरने केँ गर्त मे गिरता चला गय़ा, डर केँ मारे नां जानेकब मैंने अपनेहोश खोदिए थें ………….
जादुई लकड़ी (Completed) - सस्पेंस थिलर - Aage kya hua? Next part padhiye
yar ptaa nahee hero ko aesa dikha k writer k mann ko konsa anand mil raha h , ye jaroor janna chahunga . tumne toh mummy behan ek krr di , etna toh koy dushmani bi nahee krta . agar aesa hi chalta raha toh shayad ye maira last comment h .
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