शक या अधूरा सच( incest+adultery) - गुप्त रिश्ता - Full Story Part 1
कुछ रिश्ते जन्म केँ संग हि मिलते हें उन रिश्तो मे एक् अलग आत्मीयता होती हैं औऱ कुछ रिश्ते सामाजिक मजबूरियों कि वजह सें थोपदिए जाते हें पर्र कामुकता सें उत्पन्न हुआ प्यार इन थोपेगए रिश्तो कों नजरअंदाज कर देता हैं। "शक औऱ सच" इन्हीं थोपेगए रिश्तो केँ बीच पनपते प्यार कां चित्रण हैं.
भारतवर्ष मे 80 औऱ 90 केँ दशकों मे लड़कियों केँ कौमार्य कि बहोत अहमियत थि। शादी पूर्व औऱ विवाहेत्तर सेक्स समाज मे थां तोँ ज़रूर पर्र आम नहि थां। पर्र आजकलऐसे सम्बधो कां होना एक् फेशन हैं। यहकथा ऐसेसगे सम्बधो पऱ आधारित हैं जोँ आज केँ दौर मे इस समाज कों कतयी मंजूर नहीं हैं। इस प्यार कथा केँ पात्रों नें इन्हीं परिस्थितियों मे अपने आपसी सामंजस्य सें अपनी सारी उचित याँ अनुचित कामुक कल्पनाओं कों हुस्न सें जीया हैं.
हर इंसान केँ जिंदगी मे अनचाहे रिश्तों होंये जरूरी नहि। मेरे जिंदगी मे इनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। आज उम्र केँ इस पड़ाव पऱ आकर पीछे देखने पर्र ये महसूस होता हैं कि केसेकुछ अनचाहे रिश्ते प्रेम औऱ काम वासना केँ बीच झूलते रह जाते हें.
कथा सत्य घटनाओ पऱ आधारित हैं,
कथा केँ पात्र काल्पनिक नहीं हें वर्तमान मे जीवित हैं पर्र अब उनकेबीच कोई संबंध नहि हैं। कथा मे वर्णित दृश्यों सें यदि किसी पाठक कि भावनाएं आहत हुयीं हौ तोँ कथाकार माफ़ प्रार्थी हैं.
स्टोरी शुरुआत करने सें पहलेमै आप् लोगों सें एक् गुजारिश करूँगी कि please अपने comments, सुझाव औऱ शिकायत जरूर लिखे।
अध्याय --- १ --
रेखाए, सि, कि ठंडीहवा मे अपने कमरे मे गहरी नींद मे सोई हुई थि कि अचानक उसेऐसा महसूस हुआ कि कोईउसे उसकी बांह पकड़कर सीधेपीठ केँ बलकर दीया, औऱ तभीऊसे ऊसकी गाउनऊपर कि तरफ सरकती हुई महसूस होनेलगी। वो चाहकर भि अपनी आंखों कों खोल नहि पारही थि। गाउन पूरीतरह सें उसकेकमर तक चढ़ चुकी थि कमर सें नीचे वो पूरीतरह सें नंगी थि, मात्र पेंटी हि ऊसके नंगेपन कों छीपाए हुए थि कि तभी एक् झटके सें उसकी पैंटी भि उसकी टांगों सें होकर केँ बाहर् निकल गई,, कमर सें नीचे वो पूरीतरह सें नंगी हौ चुकी थि मगरकुछ भि उसकेसमझ मे नहि आँ रहा थां उसकी आंखें बंद थि।
वो इतनी गहरी नींद मे थि कि आंखें खोलने भर कि ताकत उसमें नहि थि तभी उसकी मोटी मोटी जांघो पर्र दो हथेलियां महसूस हुइ जौ कि उसकी जांघों कों फैलारही थि, औऱ वो कुछसमझ पाती इससे पहले हि उसे अपनी चूत पऱ कड़ेपन कां अहसास हुआ, जैसे हि उसनेआंख खोली उसके मुंह सें दर्दभरी कराहने कि आवाज़ निकल गई,,,,, औऱ रेखा कि आँखखुल गयीँ,।
रेखा अपनी भाग्य कों कोसते हुए आंसू बहाते हुए लेटीरही,,,,
अपने पति सें बीससाल सें दूर रहतेहुए रेखा कों आज भि उसके ख्वाब मे अपने पति कों संभोग करतेहुए देख रेखा केँ रोंगटे खड़े हौ जाते हैं। एक् लम्हा तौ ऊसेऐसा लगा कि वो सपना नहींदेख रही हैं, सभीसच मे हौ रहा थां, क्योंकि वो बहोत हि गहरी नींद मे सोई हुई थि।
पर्र अबऐसे सपनो सें रेखा कों डर लगनेलगा थां। डरावने ड्रीम्स अक्सर एक् अधूरी चाहत औऱ चाहत कों पूरा नाँ कर पाने केँ डर सें आते हैं।
परिचय
मै पेशे सें एक् वकील औऱ समाज सैवीका हू, गरीब बेटियों केँ संग होने वाले अत्याचार केँ case मै free of cost लड़ती हू। मैने अभि तक बहोत सि बेटियों कों उनके जालिम पतियों कि अत्याचार सें आजाद करवाकर उनका तलाक करवाया हैं औऱ कानूनी तौर पऱ मिलने वालीमदद सें उनकी जीवन दोबारा सें शुरु कि हैं। पऱ नाँ जानेकब ऐसे हि भलाई कां काम करतेहुए मुझसे एक् भूल हुयी हैं जिसकी सजामै आज तक भुगतरही हूं औऱ अपनीउस गलती कों आप् लोगो केँ सामने लिखरही हूं।
मै अपना जीवन कां case file आप् सब कों सौंपरही हूं औऱ मुझेआशा हैं आप् सभी मेरेसंग न्याय करेंगे।
मेरा रेखा रानी हैं यहनाम जोँ किसी 75 कि दशक कि फिल्म केँ कोठे पऱ रहने वाली वैश्या केँ नाम कि तरह सुनने मे लगता हैं, मेरेनाम कि कथा भि बड़ी विचित्र हैं मेरे बापू कि मै लाडली थि औऱ मुझे रानी कहते थें औऱ माँ कि सबसे पसन्द कि एक्ट्रेस रेखा थि तौ माँ बापू दोनों नें मुझे रेखा रानीबना दिया।
मेरी उम्र पचासपार हौ चुकी हैं पऱ जवानी ढलने केँ नाम नहीं लेँ रही हैं, मै हरियाणा केँ हिसार जिले मे रहतीहू। परिवार मे पति जोँ ritred होकर पॉलिटिक्स मे हैं।
बेटा, बहू, दोनों हि डॉक्टर, बेटी, दामाद, दोनों हि सरकारी जॉब मे उच्च पदों पर्र हैं औऱ एक् नाती हैं, बहुतभरा पूरा परिवार हैं मेरा। मेरेपास मौजशौक कां हर सामान सुविधा मौजूद हैं, पैसे कि कोईकमी नहि हैं। बसकमी हैं तौ प्रेम कि जिसके लिएमै 20 साल सें तरसरही हू।
वैसे तौ मै soical media पऱ फेसबुक, whatsup, insta, super chat live वगेरा सभी हि use करतीहु। पऱ कभीकभी अपने profession कि वजह सें गूगल पर्र कुछऐसी किस्सा याँ लॉजिक मिल जाये तौ उसका use अपने case file मे लिखकर, जिससे मै अपने क्लाइंट कों न्याय दिला सकूँ अक्सर कर लेती हूं।
बसइसी तरह search करते करते मुझेयह fourm मिला हैं औऱ जब मैने इसमें कुछ कहानिया पढ़ी तोँ मुझेलगा कि यही फॉर्म हैं जिस पर्र मै भि अपनी जीवन कि कुछ दास्तां लिखूँ। जिससे मेरी privacy छिपी रहेगी औऱ मेरे सवालों केँ जबाब भि मिल जायेंगे।
कहते हैं महिला कि जीवन मे सबसे करीबी नाता दूसरी महिला सें हि होता हैं औऱ वोँ उसकी मम्मी, बेहन, दादीमा, सासू माँ, बेटी, बहू जैसे रिश्ते हैं जिससे बहोत हि प्रेम विश्वास केँ संग निभाती हैं, पऱ मेरी जीवनऐसी नहीं हैं मुझे तौ हरकदम पऱ एक् स्त्री याँ महिला नें हि धोखा दिया हैं।
"""ठीकउसी तरह जैसे कुल्हाड़ी जिस लकड़ी सें बनती हैं औऱ उसी लकड़ी कों काटती हैं ""
शायद आप् सभीकथा केँ नायक केँ बारे मे जानने कों उत्सुक हौ रहे हैं? धीरज रखिये। यदि आप् इस स्टोरी कों पढ़कर जल्दी निष्कर्ष पऱ पहुचने कों लालायित हें तोँ शायद आप् कों दूसरी कहानियों पढ़नी चाहिए। माफ़ कीजिएगा पर्र धीरज कां फल हमेशा मीठा होता हैं.
इसकथा कां नायकइस वक़्त निजी हॉस्पिटल मे भविष्य निर्माण केँ लिए पिछले कई वर्षों सें अपनी practice पूरी ईमानदारी सें कररहा हैं।
Congratulations for your new kahani . Shi kha kee kahani mai Nayak aur naykaa mein categories h lekin Suruvat aur ant inke Bina bhi adhoora h Usi trh bina pta chle dono kn h isse suspence jada waqt tk accha bhi ni lgta . Baki aapki kahani ap kaa suspens
एक् पाठक केँ रूप मे स्वीकार कीजिए मुझे. बहोत उत्सुकता रहती हैं मुझे पढ़ने कि
शक या अधूरा सच( incest+adultery) - गुप्त रिश्ता – New Episode
Rekha rani ji for your first kahani in XF.
शायद आप् कि ये पहली स्टोरी हैं। मैने आप् कां अन्य कहानियों पऱ रिव्यू पढ़ा हैं औऱ समझ गय़ा थां कि आप् एक् जहीन औऱ संजीदा व्यक्तित्व कि स्त्री हौ। ये आप् केँ इस किस्सा केँ पहले एपसोड सें झलक भि रहा हैं।
कथाकुछ कुछ आत्मकथा कि तरफ इशारे कररही हैं। शायदकुछ सच औऱ कुछ काल्पनिक। शायदसाठ सतर केँ दशक सें शुरुआत हुइ अब तक केँ सफर तक।
आप् नें अपने नामकरण पर्र खुलासा किया औऱ सच कहूं तौ आप् कां नामसच मे हि हसीन हैं। पिता औऱ मम्मी दोनों कि हि लाड़ली।
युवतियों केँ कौमार्य कि जहां तक बात हैं वोँ आदिकाल सें हि बहुत संवेदनशील विषयरहा हैं। पहले भि हमारे संस्कृति मे ये महत्वपूर्ण विषयरहा औऱ वर्तमान मे भि।
आप् कि स्टोरी कां प्रस्तावना बहोत हि बेहतरीन थां। हमे बेसब्री सें प्रतीक्षा रहेगा नेक्स्ट अनुभाग कां।
आशा करते हें आपकीकथा भरपूर मजेदार होगीसंग हि सब पाठको कां मनोरंजन करेगी संग हि आप् उत्कृष्ट लेखनी कि पराकाष्ठा कों पार करें
बहोत हि शानदार शुरूआत कि हैं आपनेआशा करता हूं कि एपसोड आते रहेंगे औऱ स्टोरी मजबूत होँ
शक या अधूरा सच( incest+adultery) - गुप्त रिश्ता – New Episode
अध्याय--२-----
रेखा कों बैड पऱ लेटे लेटे हि 7 बजगए। उसेईस बात कां एहसास तबहुआ जब 7:00 कां अलार्म बजनेलगा। वो झट सें खाट पर्र सें उठतेहुए अपने गांऊन कों नीचे कि तरफ सरकाई, तभी उसकीनजर नीचे फर्श पड़ी ऊसकी पैंटी पऱ पड़ी जिसे वो उठाकर अपनी गोरी गोरी टांगों मे डालकर धीरे-धीरे धीरे-धीरे ऊपर कि तरफउठा करकमर मे अटकाली,। वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलतेहुए दरवाजे केँ पासआई औऱ दरवाजा खोलकर कमरे सें बाहर् निकल गई।
ऊसेपता थां कि उसका बेटा अभि जोगिंग केँ लिए गय़ा होगा, रेखा कों कचहरी 10:00 बजे जानां होता हैं इसलिये ब्रेकफास्ट रेडी करने कि कोई जल्दबाजी नहि थि। वो नहाने केँ लिए बाथरूम मे चली गई। वैसे तोँ उसकेरूम मे हि अटैच बाथरूम थां मगर वो उसका उपयोग बहोत हि कम हि करती थि। बाथरुम मे घुसकर वो जल्द जल्द ब्रश करनेलगी ब्रश करने केँ बाद वहां आईने केँ सामने खड़ी होकर अपने कपड़े उतारने कों हुईँ हि थि कि वो अपने चेहरे कों आईने मे देखने लगी,,
रेखा स्वयं कों शीशे मे निहार रही थि | क्याँ मै बूढी हौ रही हूं? अपने चेहरे कों गौर सें देखते हुए, चेहरे केँ एक् एक् हिस्से कि गौर सें जाँच करतेहुआ, जैसेकोई हसीन स्त्री अधेड़ होँ जाने केँ बाद स्वयं कि हुस्न कां जायजा लेती हैं | वोँ अभि भि जवान हैं औऱ किसी भि मर्द केँ होशउडा देने मे सक्षम हैं
चेहरा क्याँ थां ऐसा लगता थां मानोकोई गुलाब कां फूलखिल गय़ा हौ,,,, एकदमगोल चेहरा, बड़ी- बड़ी कजरारी आंखें, गहरी आंखों मे इतनानशा कि ऊनमें डूबने कों जी करें। नाक ठीक हैं औऱ होंठ ईतनेलाल लाल केँ लिपस्टिक लगाएं बिना हि ऐसा लगता हैं कि मानो लिपिस्टिक लगाई होँ। रेशमी बालों कि बिखरी हुइ लटे हमेशा उसके गोरे गालों सें अठखेलियां करती थि।
बला कि सुंदर मगरफिन भि उसके चेहरे पर्र संतुष्टि कां आभाव थां, प्रेम कि कमी थि जौ कि उसके पति सें बिल्कुल भि नहि मिलपा रही थि। जिसके लिए वो बरसों सें तरसरही थि। उसकेमन मे एक् अजीब सि उदासी छाई थि। वो भि अब अपनी जीवन सें खुशी कि उम्मीद कों छोड़ चुकी थि। वो शॉवर केँ नीचेआई औऱ अपने गाऊन कों दोनों हाथों सें ऊपर कि तरफ ऊठाते हुए अपनी बाहों सें होतेहुए बाहर् निकाल दि, गाऊन निकालते हि उसका सफ़ेद जिस्म औऱ भि ज़्यादा दमकने लगाजिस कि चमक सें पूरा बाथरूम रोशन होँ गय़ा। लंबे हाइट काठी कि रेखा बिना कपड़ों केँ औऱ भि अधिक सुंदर लगरही थि।
उसके जिस्म पऱ सिर्फ गुलाबी रंग कि पैंटी औऱ गुलाबी रंग कि ब्रा थि। शरीर केँ पोरपोर सें ऐसालग रहा थां कि मानो जिस्म रसटपक रहा होँ। गुलाबी रंग कि कसी हुईँ ब्रा मे दूध सें भरी हुई बड़ी बड़ी चूचियां बड़ी हि मादकलग रही थि, चुचियों कां आकार एकदमगोल गोलऐसा लगरहा थां कि जैसेरस सें भराहुआ खरबूजा हौ। कसी हुई ब्रा केँ अंदरकैद चूचियां आधे सें भि अधिक बाहर् नजर आँ रही थि। औऱ चुचियों केँ बीच कि गहरी लंबी लकीर किसी भि मर्द कों गरम आहें भरने केँ लिए मजबूर करदे।
गुदाज जिस्म कां हर एक् अंगअलग आभा औऱ कटावलिए हुए थां। मटकती कमर पूरे जिस्म कों एक् अजीबओर मादक तरीके सें ठहराव दिएहुए थां। पूरे जिस्म पर्र अत्यधिक चर्बी कां कहीं भि नामोनिशान नहि थां पूराबदन सुगठित तरीके सें ऐसालग रहा थां मानो कि ईश्वर नें अपने हाथों सें बनाया हौ। गुदाज बांहैं, जिनमें समाने केँ लिएहर एक् मर्द तरसता रहता थां। गुदाज शरीर जिसे पाने कां सपनाहर एक् मर्द अपनेदिल केँ कोने मे बसाए रखता थां। मांसल जांघें ईतनी चिकनी कि ऊंगली रखते हि उंगली फिसलजाए।
सफ़ेद रंग तोँ इतना जैसे कि ईश्वर नें सुंदरता केँ सारेबीज कों एक् संग पत्थर पर्र पीसकर उसका सारारस रेखा केँ जिस्म मे डाल दिया होँ। औऱ कहीं भि हल्के सें हाथरख देने पर्र भि वहां कां रंग एकदमलाल लाल हौ जाता थां। एक् तरह सें रेखा कों हुस्न कि मिसाल भि कह सकते थें।
रेखा शॉवर कों चालूकिए बिना हि उसके नीचे खड़ी होकर केँ अपने जिस्म कों ऊपर सें नीचे तक निहारने लगी। उसे स्वयं हि कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां। इसतरह कि अपनी भाग्य पर्र उसे बहोत हि ज़्यादा गुस्स आता थां। वो मन हि मन सोचती थि कि इतनी सुंदर होने केँ बावजूद उसकाहर एक् अंग इतना सुंदर होने केँ बावजूद भि वो अपने पति कों अपनीतरफ कभी भि आकर्षित नहि करपाई। ईश्वर नें उसे हुस्न देने मे कहींकोई भि कसर बाकी नहि रखा थां। मगर शायद ईश्वर कों भि इसकी हुस्न सें जलन होनेलगी औऱ उसने उसकी भाग्य मे पति सें विमुख होना औऱ प्रेम केँ लिए तरसना लिख दिया।
रेखा अपनी भाग्य औऱ अपने जिंदगी सें जरा सि भि खुश नहि थि। वो मन मे उदासी लिए अपने दोनों हाथ कों पीछे लें जाकर केँ नरमनरम अंगुलियों केँ सहारे ब्रा केँ हुक कों खोलने लगी। औऱ अगले हि समय उसने ब्रा कां हुकखोल कर अपनी ब्रा कों एक् एक् करके अपनी बाहों सें बाहर् निकाल दि। जैसे हि रेखा केँ जिस्म सें ब्राअलग हुइ वैसे हि उसकी नंगी नंगी चूचियां एक् बड़े हि मादक तरीके कि गोलाई लिएहुए तनकर खड़ी होँ गई। इस उम्र मे भि रेखा कि बड़ी बड़ी चूचियां लटकने कि वजायतन कर खड़ी थि, जिसका कसावओर गोलाई देखकर जवान लड़कियां भि आश्चर्य सें दांतों तले उंगलियां दबा लें। रेखा स्वयं हि दोनों चुचीयों कों अपनी हथेली मे भरकर हल्के सें दबाई जोकी ऊसकी बड़ी बड़ी चूचियां उसकी हथेली मे केवलआधी हि आँ रही थि। कुछ सेकंड तक वो अपनी हथेलियों कों चूचियों पऱ रखीरही उसकेबाद हटाली।
उसके शरीर पर्र अब मात्र पेंटी हि रह गई थि जिसके दोनों कि नारियों पऱ रेखा कि अंगुलियां ऊलझी हुई थि, औऱ वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी पैंटी कों नीचे कि तरफ सरकाने लगी,,,,, रेखा तोँ औपचारिक रुप सें हि अपनी पेंटिं कों नीचे सरकारही थि मगर बाथरूम कां नजारा बड़ा हि मादक औऱ कामुक थां। अगले हि लम्हा रेखा नें घुटनों केँ नीचे तक अपनी पेंटी कों सरका दि, उसकेबाद पैरों कां सहारा लेकर केँ पेंटी कों अपनी चिकनी लंबी टांगों सें बाहर् निकालकर संपूर्ण रुप सें एकदम नंगी हौ गई।
इस वक़्त बाथरुम कि चारदीवारी केँ अंदर वो पूरीतरह सें नंगी थि उसके जिस्म पऱ कपड़े कां एक् रेशा तक नहि थां। बाथरूम केँ अंदर नग्नावस्था मे वो स्वर्ग सें उतरी हुइ कोई अप्सरा लगरही थि। जांघों केँ बीच पेंटी केँ अंदर छीपाए हुए बेशकीमती खजाने कों वो आजादकर दि थि, रेखा नें अपनी बेशकीमती रसीली चूत कों एकदमजतन सें रखी हुई थि तभी तोँ इसे उम्र मे भि उसकी चूत कि गुलाबी पंखुड़ियां बाहर् कों नहि निकली थि, चूत पर्र सिर्फ एक् हल्की सि लकीर हि नजरआती थि जोँ कि ईस उम्र मे नजर आनां नामुमकिन थां, रेखा कि चूत पर्र बस एक् पतली सि गहरी लकीर हि नजरआती थि औऱ उसके इर्द-गिर्द बाल केँ रेशे कां नाम भि नहि थां वो पूरीतरह सें अपनी चूत कों हमेशा चिकनी हि रखती थि क्योंकि चूत पऱ बाल उसके पति कों बिल्कुल भि पसन्द नहि थां। रेखा केँ नितंबों कि तारीफ जितनी कि जाए उतनीकम थि।
नितंबों कां उभारकुछ ज़्यादा हि थां। देखने वाले कि नजरजब भि रेखा कि मदमस्त उभरी हुईँ गांड पऱ पड़ती थि तोँ वो देखता हि रह जाता थां औऱ मन मे नां जानेउस केँ नितंबों कों लेकर केँ कितने रंगीन ख्वाब देख डालता थां।
नितंबों पर्र अभि भि जवानी केँ दिनों वाला हि कसाव बरकरार थां। गांड केँ दोनों फांखों केँ बीच कि गहरी लकीर,,,,, ऊफ्फ्फ्फ,,,,,,,, किसी केँ भि लन्ड कां पानी निकालने मे पूरीतरह सें सक्षम थि। इतनासमझ लो कि रेखा पूरीतरह सें हुस्न सें भरी हुई कयामत थि।
उसने शॉवर चालूकर दि औऱ सावर केँ नीचे खड़ी होकर नहाना शुरुआत कर दि। वो आहिस्ते आहिस्ते खुशबूदार साबुन कों अपने पूरे जिस्म पऱ रगड़ रगड़कर लगाई,,,,, वो साबुन लगाएजा रही थि औऱ उसके जिस्म पऱ पानी कां फव्वारा गिरता जारहा थां। थोड़ी देर मे वो नहा चुकी थि औऱ अपने नंगे जिस्म पऱ सें पानी कि बूंदों कों साफ करके अपने जिस्म पर्र टॉवल लपेटली।
अपने नंगे शरीर पर्र टावल लपेटने केँ बाद वो बाथरुम सें निकलकर सीधे अपने कमरे मे चली गई। कमरे मे जाते हि उसने अलमारी खोली जिसमें उसकी मे हि महंगी रंग-बिरंगी साड़ियां भरी हुईँ थि। उसमें सें उसने अपने पसंद कि साड़ी निकाल कर केँ उसके मैचिंग कां ब्लाउज पेटीकोट औऱ उसीरंग कि ब्रा पेंटी भि निकाल ली।
उसकेबाद वो आईने केँ सामने खड़ी होकर केँ अपने शरीर पर्र लपेटे हुए टॉवल कों भि निकालकर पलंग पऱ फेंक दि औऱ एक् बारफिन सें उसकी नंगेपन कि हुस्न सें पूरारूम जगमगा उठा। सबसे पहलेवहं ब्राउठा करकेउसे पहनने लगी औऱ अपनी बड़ी बड़ी चूचीयो कों फिन सें अपनी ब्रा मे छुपाली, फिन ऊसने पेंटी पहनकर अपनेबेश कीमती खजाने कों भि छीपाली। धीरे-धीरे धीरे-धीरे करके उसने अपने जिस्म पर्र सारे वस्त्र धारणकर ली। इससमय अगरकोई रेखा कों देख लेँ तोँ उसके मुंह सें वाउवाउ निकलजाए। जितनी सुंदर औऱ निरवस्र होने केँ बादनजर आती हैं उससे भि कहीं अधिक सुंदर कपड़े पहनने केँ बाद दीखती थि।
अपने पसंदीदा गुलाबी रंग कि साड़ी मे वो बला कि हसीन लगती थि। लंबे कालेघने रेशमी बाल भीगे होने कि वजह सें उसका ब्लाउज भीग गय़ा थां जिसकी वजह सें उसके अंदर कि गुलाबी रंग कि ब्रानजर आँ रही थि। जोँ कि बड़ा हि मनमोहक लगरहा थां। रेखाकमर केँ नीचे साड़ी कों कुछहद तक टाइट हि लपेटती थि जिससे कि उसकेकमर केँ नीचे कां गांड कां घेराव कुछ ज़्यादा हि उभराहुआ नजरआता थां। ईसतरह सें साड़ी पहनने कि वजह सें उसके अंगों कां उभार औऱ कटाव साड़ी केँ ऊपर भि उभरकर सामने आता थां। जिसेदेख करहर मर्द ललचा जाता थां। रेखा आपने केँ लिए बालों कों सुखाकर उसे सवारने लगी।
थोड़ी हि देर मे रेखा पूरीतरह सें सजधजकर होँ चुकी थि वो रेडी होने केँ बाद बेहद हसीनलग रही थि मगरऐसे मे दूसरा कोई भि इंसान देख लें तौ उसकेमन मे रेखा कों पाने कि लालसा जागजाए। रेखा स्वयं भि यही सोचती थि, मगरउसे ये नहि समझ मे आँ रहा थां कि उसके पति कों आखिर क्याँ चाहिए थां।
रेखा रेडी होने केँ बाद जैसे हि कमरे कां दरवाजा खोलने कों हुइ कि घऱ मे बने मंदिर मे सें घंटी कि आवाज़ आनेलगी।
घऱ केँ मंदिर सें आँ रही घंटी कि आवाज़ सुनकर वो समझ गई कि उसका बेटा सजधजकर होँ चुका हैं। रेखा केँ बेटे कां नाम मनीश थां। जोकि बड़ा हि संस्कारी लड़का थां।
घऱ मे सभी सें पहलेवही उठता थां औऱ नित्य कर्म करकेनहा धोकर केँ सबसे पहले वो ईश्वर कि पूजा किया करता थां। मनीश कां बर्ताव दूसरे लड़कों कि तरह बिल्कुल भि नहि थां वो बहोत हि सादगी मे रहता थां घऱ मे किसी भि चीज कि कमी नहि थि।
सुभह 4:00 बजे हि उठकर उसकी दिनचर्या शुरुआत होँ जाती थि। कसरत औऱ व्यायाम करना वो कभी नहि भूलता थां।
रेखा कमरे कां दरवाजा खोलकर बाहर् कि तरफ जानेलगी जैसे हि सीढ़ियों सें उतरकर नीचे पहुंच हि रही थि कि सामने सें पूजा केँ कमरे सें मनीश बाहर् आँ रहा थां औऱ वहां अपनी माँ कों देखकर सबसे पहले ऊन्हे नमस्कार किया।
प्रणाम मां (अपनी मम्मी केँ पैरों कों छूकर केँ)
जीतेरहो बेटे,,,,, रेडी होँ गए,,,
हां माँ मे सजधजकर होँ गय़ा।
जाओकुछ फ्रूट खाकर केँ दूधपी लो।
जी माँ
थोड़ी देरबाद वो ब्रेकफास्ट सजधजकर करके, नाश्ते कों टेबल पर्र लगाकर मनीश कां प्रतीक्षा कररही थि, रोज कि हि तरह वो सजधजकर होकर केँ आया औऱ कुर्सी पऱ बैठकर रेखा सें बिनाकुछ बोले हि ब्रेकफास्ट करनेलगा। ब्रेड पऱ मक्खन लगाकर वो खाते वक़्त तिरछी नजर सें रेखा पऱ जरूर नजरें फेर लें रहा थां मगरबोल कुछ भि नहि रहा थां। रेखा अपने बेटे मनीश केँ मुंह सें अपनी हुस्न कि तारीफ मे दो शब्द सुनने कों तरसरही थि।
मगर रेखा केँ बेटे मनीश सें तोँ झूठमूठ कां भि तारीफ मे दो शब्द नहि निकलते थें। मगरराह चलतेकभी भि लफंगो केँ मुंह सें उसे अश्लील तारीफ सुनने कों मिल हि जाती थि।
ओह क्याँ माल हैं,,,, हाय चिकनी कहां जारही होँ,,,,, कभीकभी तोँ ईससे भि ज़्यादा गंदे कमेंटस सुनने कों मिल जाते थें।
हाय मेरी रानी,,,, चुदवाओगी,,,,,,,, तुम्हारी गांड कीतनी बडी़ हैं,,,,,,, कभीहमे भि दुध पिला दीयाकरो,,,,,,,
इसतरह केँ कमेंट सुनकर केँ तौ रेखा अंदर हि अंदरडर केँ मारे थरथरा जाती थि। वो अपने बारे मे इसतरह केँ कमेंट सुनने कि बिल्कुल भि आदी नहि थि
मगर रेखा नें एक् नईबात महसूस करी थि कि उसकोनए लड़के बहोत अच्छे लगते थें, जब भि वोँ किशोरवय लड़के कों देखती, उसकीदबी कुचली सेक्स इच्छाए जाग उठती औऱ इसबात कों लेकर वोँ बहोत हि परेशान होँ जाती थि |
रेखा अभि ब्रेकफास्ट करके सजधजकर होँ चुकी थि वो अपने कमरे मे जाकर कि अपना पर्स लें आई, मनीशघऱ केँ बाहर् आकर केँ गेराज केँ बाहर् खड़ा हौ कर केँ अपनी मम्मी कां हि प्रतीक्षा कररहा थां। रेखा गैराज मे जाकर केँ कार्य कां दरवाजा खोल करके ड्राइविंग सीट पऱ बैठ गई,,,,,, रेखा अपनी गाड़ी कों स्वयं ड्राइव करती थि। पहले वो बस सें हि आया जाया करती थि मगर अपने बारे मे गंदे कमेंट कों सुन सुनकर बहोत परेशान हौ चुकी थि इसलिये वो गाड़ी सें हि आने जानेलगी।
चाबी लगाकर गाड़ी स्टार्ट करके उसने अपनेपैर कां दबाव एक्सीलेटर पऱ बढ़ाकर वाहन कों आगे बढ़ाई औऱ मनीश केँ लगभग लाकर केँ ब्रेक लगाई मनीशझट सें वाहन कां दरवाजा खोलकर आगे वालीसीट पऱ बैठ गय़ा।
कुछ हि सेकंड मे रेखा वाहन कों मुख्य मार्ग पऱ दौड़ाने लगी।
बेटा तुमने सोच लिया हैं नां,,, जज केँ सामने क्याँ केहना हैं ( एक् हाथ कों दुलार सें मनीश केँ सर पऱ रखतेहुए)
हां मां। ( मनीश शीसे मे सें बाहर् झांकते हुए)
बेटा कोई दिक्कत होँ तोँ अभि बोल्ना,,,,,,
नहीं माँ मुझेकोई दिक्कत नहि हैं पर्र आप् ऐसा क्यूं बोलरही हैं,,,,,,
तुम्हारे स्वभाव कि वजह सें तुम् हमेशा शांत रहते हौ औऱ बहोत हि कम बोलते होँ इसलिये कहरही हूं कि भि बेझिझक कोई भि तकलीफ होँ तौ मुझे अभि बतादो।
ठीक हैं माँ,,,,,, ( इतना कहकर वो फिन सें शीशे सें बाहर् झांकने लगा। दोनों हि मम्मी बेटे अपनी अपनी जीवन कि तन्हाई सें झूझते हुए एक् दूसरे सें नजरबचा रहे थें।
रेखा औऱ उसके बेटे मनीश केँ बीचऐसा क्याँ हुआ थां कि रेखाउसे कोर्ट मे अपनेसंग लेँ जारही हैं???
रेखा केँ पति नें उसे क्यूं छोड़ा???
औऱ वोँ अभि कहां हैं???
रेखा कां बेटा एक् शादीशुदा व्यक्ति हैं, फिन उसकी पत्नि कहां हैं???
वोँ अपनी माँ केँ संगआज जज साहब केँ सामने क्याँ बोलने वाला हैं????
रेखा औऱ उसके बेटे कि जीवन मे आयेइस अकेलेपन औऱ तूफान कि वजह जानने केँ लिए हम् रेखा कि जीवन कि पुस्तक केँ पन्ने उलटकर पढ़ते हैं।
"" एक् शक औऱ अधूरा सच """
रेखाकार चलाते हुए अपनी पुरानी यादों केँ झरोखे मे चली गई।
मेरी जीवन कि शुरुआत हरियाणा केँ एक् छोटे सें कस्बे मे हुयी थि, मेरे परिवार मे मेरे बापू, मां, मुझसे दोसाल बड़ी मेरी बड़ी बेहन अंजू दिदी औऱ एक् साल बड़ा एक् भइया सुनील हैं, मेरे पिताजी जोँ पेशे सें एक् पेंटर थें उन्होंने बड़ी हि मेहनत सें औऱ मेरी मां केँ त्याग सें हम् भइया बहनो कों पालने मे कोईकसर नहीं छोड़ी। पेंटर कां मतलबएम एफ हुसैन जैसाकोई चित्रकार नहीं,। हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा
वोँ तोँ हरियाणा मे घरों औऱ बिल्डिंग पर्र रंगाई पुताई कां काम करते थें।
हम् मिडिल क्लास फैमिली सें जरूर थें पऱ तीसरी कटगरी वाली। मतलबघऱ तौ हमारे पास हैं पऱ काम नहीं।
हाहाहा हाहाहा हाहाहा
मेरे हिसाब सें मिडिल क्लास फैमली तीनतरह कि होती हैं। पहली जोँ सालभर बैठकर खासके, दूसरी जोँ एक् महिना बैठकर खासके औऱ तीसरी जौ एक् दिन तौ बैठे बैठे धीरे-धीरे खा सकती हैं पर्र अगलेदिन फिन सें कमाना हैं। यह अनुभव मुझे कोरोना काल मे हुआ हैं।
वक्त बीतता गय़ा, साल 2000 आतेआते हमारे लिएसभी कुछबदल गय़ा थां। पिताजी पेंटर सें छोटे ठेकेदार बनगये औऱ अब स्वयं पुताई नहीं करते बल्कि लोगो सें करवा लेते। औऱ हम् भइया बेहन जवानी कि देहलीज पऱ कदम रखतेहुए बड़े होनेलगे।
मेरे पिताजी नें घऱ केँ बाहर् हि एक् किराना कि दुकान मेरे भइया कों खुलवा दि, जिस पर्र तीनो भइया बेहन बारी बारी सें बैठे रहते, कभी कभी मां भि बैठ जाती थि हमारे exam केँ वक्त, बापू गुजरात मे हि रहकरकाम कररहे थें।
मेरा बड़ा भइया सुनील। मुझ सें एक् साल बड़ा हैं। पऱ शरीर सें लंबा तगड़ा जवान हैं.
मेरी बड़ी बेहन अंजू जौ पढाई कमजोर थि औऱ आठवी मे दोबार फैल होने कि वजह सें हम् एक् संग एक् हि क्लास मे आँ गये। मुझे पढ़ने लिखने कां शुरु सें हि शौक थां औऱ मैहरसमय पढाई मे लगी रहती।
मे बचपन सें हि बहोत खूबसूरत थि। मेरी छातियाँ भरआई थि। बगल मे औऱ टाँगों केँ बीच मे काफ़ी बाल निकलने लगे थें। जवानी तक पहुँचते पहुँचते तौ मे मानो पूरी जवान लगनेलगी थि। गली मे औऱ बाज़ार मे लड़के आवाज़ें कसनेलगे थें। ब्रा कि ज़रूरत तौ पहले सें हि पद गयीँ, थि.जवानी मे साइज़ 34 इंच हौ गय़ा थां। अब तौ टाँगों केँ बीच मे बाल बहोत हि घने औऱ लंबे होँ गये थें.
हालाँकि कमर काफ़ी पतली थि मगर मेरे नितंब काफ़ी भारी औऱ चौड़े होँ गये थें। मुझे अहसास होताजा रहा थां कि लड़कों कों मेरीदो चीज़ें बहोत आकर्षित करती हें – मेरे नितंब औऱ मेरी उभरी हुईँ छातियाँ। विद्यालय मे मेरी बहोत सि सहेलियों केँ चक्कर थें, मगर मे कभीइस लाफदे मे नहि पड़ी। विद्यालय सें हि मेरे पीछे बहोत सें लड़के दीवाने थें.
लड़कों कों औऱ भि ज्यादा तड़पाने मे मुझे बड़ामजा आता थां। विद्यालय मे सिर्फ़ घुटनों सें नीचे तक कि स्कर्ट हि अलोड थि। क्लास मे बैठकर मे अपनी स्कर्ट जांघों तक चढ़ा लेती थि औऱ लड़कों कों अपनी गोरी गोरी सुडोल मांसल टाँगों केँ दर्शन कराती। केयी लड़के जानबूझ कर अपनापेन याँ पेन्सिल नीचे गिराकर, उठाने केँ बहाने मेरी टाँगों केँ बीच मे झाँककर मेरी पॅंटी कि झलक पाने कि नाकामयाब कोशिश करते.
अब तौ अपनी जवानी कों कपड़ों मे समेटना मुश्किल होताजा रहा थां। छातियों कां साइज़ 34 इंच हौ गय़ा थां.मेरे नितुंबों कों संभालना मेरी पॅंटी केँ बस मे नहि रहा। औऱ तोँ औऱ टाँगों केँ बीच मे बाल इतनेघने औऱ लंबे होँ गये कि दोनोतरफ सें पॅंटी केँ बाहर् निकलने लगे थें। ऐसी उल्हड़ जवानी किसी पर्र भि कहर बरसा सकती थि.
मेरा बड़ा भइया सुनील भि जवान हौ रहा थां, मगर आप् जानते हें लड़कियाँ जल्द जवान हौ जाती हें। हम् तीनों एक् हि विद्यालय मे पढ़ते थें। हम् तीनों भइया बहन मे बहोत प्रेम थां। कभीकभी मुझे महसूस होता कि सुनील भि मुझे अक्सर औऱ लड़कों कि तरह देखता हैं.
मगर मे ये विचार मन सें निकाल देती। लड़कों कि ओर मेरा भि आकर्षण बढ़ता जारहा थां, मगर मे लड़कों कों तडपाकर हि खुश हौ जाती थि.
मेरी बड़ी बेहन अंजू दिदी सें मेरा बेहन सें अधिक सहेली जैसा नाता थां, अंजू दिदी कां विद्यालय केँ लड़के, सुधीर केँ संग चक्कर थां। वोँ अक्सर अपने इश्क़ कि रसीली कहानियाँ सुनाया करती थि। उसकी कहानियाँ सुनकर मेरे जिस्म मे भि आगलग जाती। अंजू दिदी औऱ सुधीर केँ बीच मे शारीरिक संबंध भि थें। अंजू दिदी नें हि मुझे बताया थां कि रेखायह हरियाणा हैं हमारे यहा लड़को कां चेहरा नहीं लौड़ा देखकर मनपसंद किया जाता हैं।
लड़कों केँ गुप्तांगों कों लन्ड याँ लॉडा औऱ लड़कियो केँ गुप्तांगों कों बुर कहते हें। जब लड़के कां लन्ड लड़की कि बुर मे जाता हैं तौ उसे चोदना कहते हें। अंजू दिदी नें हि बताया कि जब लड़के उत्तेजित होते हें तोँ उनका लन्ड औऱ भि लंबा मोटा औऱ सख़्त हौ जाता हैं जिसको लन्ड कां खड़ा होना बोलते हें। @साल कि उम्र तक मुझेऐसे शब्दों कां पता नहि थां.
अभि तक ऐसे शब्द मुँह सें निकालते हुए मुझे लज्जा आती हैं पर्र लिखने मे संकोच कैसा?
हालाँकि मैने बच्चों कि नूनियाँ बहोत देखी थि पऱ आज तक किसी मर्द कां लन्ड नहि देखा थां। अंजू दिदी केँ मुँह सें सुधीर केँ लन्ड कां वर्णन सुनकर मेरी बुर भि गीली हौ जाती। एक् बार मे सुधीर औऱ अंजू दिदी केँ संग विद्यालय सें भागकर पिक्चर देखने गये। पिक्चर हॉल मे अंजू दिदी हम् दोनो केँ बीच मे बैठी थि। लाइटऑफ हुई औऱ पिक्चर शुरुआत हुई। कुच्छ देरबाद मुझेऐसा लगा मानो मैने अंजू दिदी केँ मुँह सें सिसकी कि आवाज़ सुनी हौ। मैने कन्खिओ सें अंजू दिदी कि ओर देखा। रोशनी कम होने केँ कारणसाफ तौ दिखाई नहि देरहा थां पर्र जोँ कुच्छ दिखा उसेदेख कर मे डांगरह गयीँ,.
अंजू दिदी कि स्कर्ट जांघों तक उठी हुईँ थि औऱ सुधीर कां हाथ अंजू दिदी कि टाँगों केँ बीच मे थां। सुधीर कि पॅंट केँ बटन खुलेहुए थें औऱ अंजू दिदी सुधीर केँ लन्ड कों सहलारही थि। अंधेरे मे मुझे सुधीर केँ लन्ड कां साइज़ तौ पता नहि लगामगर जिसतरह अंजू दिदी उस पर्र हाथफेर रही थि, उससे लगता थां कि काफ़ी बड़ा होगा। सुधीर कां हाथ अंजू दिदी कि टाँगों केँ बीच मे क्याँ कररहा होगायह सोचसोच कर मेरी बुर बुरीतरह सें गीली होँ चुकी थि औऱ पॅंटी कों भि गीलाकर रही थि। इंटर्वल मे हम् लोग बाहर् कोल्ड ड्रिंक पीनेगये। अंजू दिदी कां चेहरा उत्तेजना सें लाल होँ गय़ा थां.
सुधीर कि पॅंट मे भि लन्ड कां उभारसॉफ नज़र आँ रहा थां। सुधीर नें मुझे अपने लन्ड केँ उभार कि ओर देखते हुए पकड़ लिया। मेरी नज़रें उसकी नज़रें सें मिली औऱ मे मारे लज्जा केँ लाल होँ गई,। सुधीर मुस्कुरा दिया। किसीतरह इंटर्वल ख़तमहुआ औऱ मैने सुकून कि साँसली। पिक्चर शुरुआत होते हि अंजू दिदी कां हाथफिन सें सुधीर केँ लन्ड पे पहुँच गय़ा। मगर सुधीर नें अपनाहाथ अंजू दिदी केँ कंधों पऱ रख लिया.
अंजू दिदी केँ मुँह सें सिसकी कि आवाज़ सुनकर मे समझ गयीँ, कि अब वोँ अंजू दिदी कि चूचियाँ दबारहा थां। अचानक सुधीर कां हाथ मुझेटच करनेलगा। मैने सोचा ग़लती सें लग गय़ा होगा.मगर धीरे-धीरे धीरे-धीरे वोँ मेरीपीठ सहलाने लगा औऱ मेरी ब्रा केँ ऊपरहाथ फेरने लगा। अंजू दिदी इससे बिल्कुल बेख़बर थि। मे मारे डरके पसीना पसीना होँ गयीँ, औऱ हिल नां सकी.
अब सुधीर कां साहस औऱ बढ़ गय़ा औऱ उसने साइड सें हाथडाल कर मेरी उभरी हुईँ मम्मों कों शर्ट केँ ऊपर सें पकड़कर दबा दिया। मे बिल्कुल बेबुस थि। उठकरचली जाती तौ अंजू दिदी कों पतालग जाता। हिम्मत मानो जबाबदे चुकी थि। सुधीर नें इसका पूरा फ़ायदा उठाया। वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरी मम्मों सहलाने लगा। इतने मे अंजू दिदी मुझसे बोलि, “ रेखा पेशाब लगी हैं ज़रा बाथरूम जाकरआती हूं.” मेरा कलेजा तौ धक सें रह गय़ा। जैसे हि अंजू दिदी गयीँ, सुधीर नें मेराहाथ पकड़कर अपने लन्ड पऱ रख दिया। मैने एकदम सें हड़बड़ा केँ हाथ खींचने कि कोशिश कि, मगर सुधीर नें मेराहाथ कसकर पकड़रखा थां। लन्ड काफ़ी गर्म, मोटा औऱ लोहे केँ समान सख़्त थां। मे रुनासि होके बोलीं।
“ सुधीर यह क्याँ कररहे होँ ? छोड़ो मुझे, नहि तौ अंजू दिदी कों बता दूँगी.” सुधीर मंजाहुआ खिलाड़ी थां, बोला,
“ मेरीजान तुम् पर्र तोँ मे मरता हूं। तुमने मेरी रातों कि नींद चुराली हैं। मे तुमसे बहोत प्रेम करनेलगा हूं.” येकहकर वोँ मेराहाथ अपने लन्ड पर्र रगड़ता रहा.
“ सुधीर तुम् अंजू दिदी कों धोकादे रहे होँ। वोँ बेचारी तुमसे विवाह करना चाहती हैं औऱ तुम् दूसरी लड़कियो केँ पीछे पड़े हौ.”
“ रेखा मेरीजान तुम् दूसरी कहां, मेरी हौ। तुम्हारी अंजू दिदी सें दोस्ती तोँ मैने तुम्हें पाने केँ लिए कि थि.”
“ झूट ! अंजू दिदी तौ अपनासूब कुच्छ तुम्हें सौंप चुकी हैं। तुम्हें लज्जा आनी चाहिए उस बेचारी कों धोका देतेहुए। प्लीज़ मेराहाथ छोड़ो.”
इतने मे अंजू दिदी वापस आँ गई,। सुधीर नें झट सें मेराहाथ छोड़ दिया। मेरी लाचारी कां फायेदा उठाने केँ कारण मे बहोत गुस्से मे थि, मगर ज़िंदगी मे पहलीबार किसी मर्द केँ खड़े लन्ड कों हाथ लगाने केँ अनुभव सें खुश भि थि। अंजू दिदी केँ बैठने केँ बाद सुधीर नें फिन सें अपनाहाथ उसके कंधे पऱ रख दिया। अंजू दिदी नें उसकाहाथ अपने कंधों सें हटाकर अपनी टाँगों केँ बीच मे रख दिया औऱ सुधीर केँ लन्ड कों फिन सें सहलाने लगी। सुधीर भि अंजू दिदी कि स्कर्ट मे हाथडाल कर उसकी बुर सहलाने लगा। जैसे हि अंजू दिदी नें ज़ोर कि सिसकी ली मे समझ गयीँ, कि सुधीर नें अपनी उंगली उसकी बुर मे घुसा दि हैं.
इस घटना केँ बाद मैने सुधीर सें बिल्कुल बात करनाबंद कर दिया। औऱ अंजू दिदी कों सुधीर केँ बारे मे बता दिया कि उसने मेरेसंग छेड़खानी कि थि तौ अन्जू दिदी बोलीं रेखा जौ हौ गय़ा सो हौ गय़ा भूलजाओ सभी। पर्र मुझे सुधीर पऱ बहोत क्रोध आँ रहा थां मेरेमुह सें गालिया निकलरही थि। अंजू दिदी मुझे समझाने कि हर कोशिश कररही थि। आखिर मे मै अंजू दिदी सें बोलि अगर तुमने सुधीर कां संग नहीं छोड़ा तोँ मै बापू कों बता दूँगी।
यह सुनकर अंजू दिदी बड़ीजोर हंगामा सें हँसने लगी हाहाहा हाहाहा हाहाहा औऱ
हस्ती हुई बोलीं मेरी प्यारी रेखा रानी तुम् पिताजी कों जानती नहीं होँ वोँ भि हरियाणा केँ जाट हैं, औऱ अगर उन्हे तुमने जरा सि भि बात बताई तौ वोँ उस सुधीर केँ संगसंग हम् दोनों कों भि खेत मे लगे पीपल केँ पेड़ पऱ टांग देंगे। इसलिये रेखा रानीभूल जाओ सुधीर कि किस्सा।
मै गहरीसोच मे थि क्याँ अंजू दिदी सचकहरही हैं??? क्याँ मुझेसभी भूल जानां चाहिए??? मुझे अपनीसगी बड़ी बेहन कों सुधीर जैसे हरामी लड़के केँ चगुल सें बचाना होगामगर केसे????
शक या अधूरा सच( incest+adultery) - गुप्त रिश्ता - Continue reading for full story
Are madam ne bi kahaniyan likhni shuru krr di ab too madam galat kaam krr krr bi apne ma baap kee drishti mai apne ko pakka sai sabit bi karegi badhai hu madam
आपके लिखने कि शैली सें नहि लगता आप् पहलीबार लिखरही हें। बहोत हि अच्छा कृपया रेगुलर भाग देने कि कोशिश किजीए।
Relavant source : click here