तेरे प्यार मे.... (Completed) Tere Pyar Me Ek hot kahani, jismein pyar aur chudai ka sangam hota hai. Tere pyar me do logon ke beech ki hot jagah, jahan lund aur chut ka milan hota hai. Ahhh ufff, moan, tight, throbbing, sweat, heat, craving, incest pleasure.
Is kahani me aapko milega hot chut, lund, pani chhutna, aur bahut kuch. Padhiye aur anubhaviye is hot kahani ko.
तेरे प्यार मे.... (Completed) - Tere Pyar Me - Real Story Continue Part 1
★ INDEX ★
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हुइ रोशन मेरी गलियां मेरे सरकार आये हैं, मेरे सरकार आये हें, मेरे सरकार आये हें,
तेरे प्यार मे.... (Completed) - Tere Pyar Me – New Episode
#1
“तेज औऱ तेज ” घोड़ो कि पीठ पर्र चाबुक मारते हुए कोचवान केँ जबड़े भींचे हुए थां। नवम्बर कि पड़ती ठण्ड मे बेशक उसने कम्बल ओढाहुआ थां पऱ उसकीबढ़ी धडकने, माथे सें टपकता पसीना बतारहा थां कि कोचवान घबराया हुआ थां। चांदनी रात मे धुंध सें लिपटा हसीं चांद बेहद हसीनलग रहा थां। जंगल केँ बीच सें होतेहुए घोड़ागाड़ी अपनी रफ़्तार सें दौड़ेजा रही थि। लालटेन कि रौशनी मे कोचवान बारबार पीछेमुड करदेख रहा थां.
“न् जानेकब ख़त्म होगायह सफ़र ” कोचवान नें अपने आप् सें कहा। ऐसा नहि थां कि इस रस्ते सें वोँ पहलेकभी नहि गुजरा थां हफ्ते मे दोबार तौ वोँ इसी रस्ते सें शहर कि दुरीतय करता थां पर्र आज सें पहले वोँ हमेशा दिन ढलने तक हि गाँव पहुँच जाता थां, आजउसे देर, थोड़ीदेर होँ गई, थि.
असमान मे चमकता चाँद औऱ धुंधदो प्रेमियों कि तरहआँख मिचोली खेलरहे थें। कोईकवी शायर होता तोँ उसरात औऱ चाँद कों देखकर न् जाने क्याँ लिख देता.कोचवान नें सरसरी नजरउस बड़े सें बरगद पर्र डाली जौ इतना ऊँचा थां कि उसकाछोर दिन मे भि दिखाई नहि देता थां.
“बस थोड़ीदेर कि बात औऱ हैं ” कहतेहुए उसनेफिन सें घोड़ो कि पीठ पर्र चाबुक मारी। पर्र तभी घोड़ो नें जैसे बगावत कर दि। कोचवान कों झटका सां लगा गाड़ी अचानक रुकने पर्र। उसनेफिन सें चाबुक मारकर घोड़ो कों आगे बढ़ाना चाहा पर्र हालात जस केँ तस.
“अब तुमको क्याँ हुआ ” कोचवान नें झुंझलाते हुएकहा। उसने लालटेन कि रौशनी थोड़ी औऱ तेज कि तोँ मालूम हुआ कि सामने सड़क पर्र एक् पेड़ कां लट्ठा पड़ा थां.
“क्याँ मुसीबत हैं ” कहतेहुए कोचवान घोड़ागाड़ी सें निचे उतरा औऱ लट्ठे कों परे सरकाने लगा। सर्दी केँ मौसम मे ठण्ड सें कापते उसकेहाथ पूराजोर लगाकर लट्ठे कों इतना सरका देना चाहते थें कि गाड़ीआगे निकलसके। उफनती सांसो कों सँभालते हुए कोचवान नें अपनीपीठ लट्ठे पऱ हि टिका दि.
“आगे सें चाहेकुछ भि हौ जाये, पैसो केँ लालच मे देर नहि करूँगा ” अपने आप् सें बाते करतेहुए उसने घोड़ो कि लगाम पकड़ी औऱ उन्हें लट्ठे सें पार करवाने लगा। वोँ गाड़ी पर्र चढ़ हि रहा थां कि एक् आवाज़ नें उसका ध्यान अपनीतरफ खींच लिया.
“सियार ” उसके होंठो बुदबुदाये। वोँ जल्दी हि गाड़ी पर्र चढ़ा औऱ एक् बारफिन सें घोड़े पूरी शक्ति सें दौड़ने लगे.
मंगू- औऱ क्याँ इसे जहाजबना दू, एक् तौ वैसे हि ठण्ड केँ मारेसभी कुछजमा हुआ हैं ऊपर सें तुमने यह जंगल वाला मार्ग लें लिया.
मे- दोस्त तुम् लोग जंगल केँ नाम सें इतना घबराते क्यूं होँ, यहकोई पहलीबार हि तौ नहि हैं कि हम् इस रस्ते सें गुजररहे हैं। औऱ फिनयह तेरी हि तोँ जिद थि नं कि दोचार पूरी ठूंसनी हैं
मंगू- वोँ तौ स्वाद स्वाद मे थोड़ी ज़्यादा होँ गयीँ, भइया पर्र आजदेर भि कुछ ज़्यादा हि होँ गयीँ,.
मे- इसीलिए तौ जंगल कां मार्ग लिया हैं घूमकर सड़क सें आते तौ औऱ देर होती
दरसल मे औऱ मंगू एक् न्योते पऱ थें.
इधर कोचवान सियारों कि हद सें आगे निकलआया थां पर्र उसकेजी कों सुकून नहि थां। होता भि तोँ केसे पेड़ो केँ बीच सें उस चमकती आभा नें उसका रस्ता रोक दिया थां। कोचवान अपनी मंजिल भूलकर बसउस रौशनी कों देखरहा थां जोँ चांदनी मे मिलकर सिंदूरी सि हौ गई, थि.
“इतनीरात कों जंगल मे आग, देखता हूं क्याँ मालूम कोई राही होँ। अपनीतरफ कां हुआ तौ लेँ चलूँगा संग ” कोचवान नें नेक नियत सें कहा औऱ उसआग कि तरफचल दिया। अलाव केँ पास जाने पऱ कोचवान नें देखा कि वहां पर्र कोई नहि थां
“कोई हैं ” कोचवान नें आवाज़ दि.
“कोई हैं, ” उसनेफिन पुकारा पर्र जंगल मे ख़ामोशी थि.
“क्याँ पताकोई पहले रुका होँ औऱ जाने सें पहले अलाव बुझाना भूल गय़ा हौ ” उसने अपने आप् सें कहा औऱ वापिस मुड़ने लगा कि तभी एक् मधुर आवाज़ नें उसका ध्यान खींच लिया। वोँ कुछ गुनगुनाने कि आवाज़ थि। हलकी हलकी सि वोँ आवाज़ कोचवान केँ सीने मे उतरने लगी थि.
“यह जंगली लोग भि न् इतनीरात कों भि सुकून नहि मिलता इनको बताओयह भि कोई वक़्त हुआ गाने कां ” उसने अपने आप् सें कहा औऱ घोड़ागाड़ी कि तरफ बढ़नेलगा। एक् बारफिन सें गुनगुनाने कि आवाज़ आनेलगी पर्र इसबार वोँ आवाज़ कोचवान केँ बिलकुल पास सें आई थि। इतनापास सें कि उसे नं चाहते हुए भि पीछेमुड कर देख्ना पड़ा। औऱ जब उसने पीछेमुड कर देखा तोँ वोँ देखता हि रह गय़ा। उसकी आँखे बाहर् आने कों बेताब सि हौ गई,.
चांदनी रात मे खौफ केँ मारे कोचवान थरथर कांपरहा थां। उसकी धोतीमूत सें सनी हुइ थि। वोँ चीखना चाहता थां, जोरजोर सें कुछ कहना चाहता थां पर्र उसकी आवाज़ जैसेगले मे कैद होकर हि रह गयीँ, थि.
“मंगू, साइकिल रोकजरा, ” मैंने कहा
मंगू-अब तोँ सीधाघऱ हि रुकेगी यह
मे- रोक दोस्त मुताई लगी हैं
मंगू नें साइकिल रोकी मे वहीखड़ा होकर मूतने लगा। कि अचानक सें मेरे कानो मे हिनहिनाने कि आवाजे पड़ी.
मे- मंगू, घोड़ो कि आवाज़ आँ रही हैं
मंगू- जंगल मे जानवर कि आवाज़ नहि आएगी तौ क्याँ किसी बैंड बाजे कि आवाज़ आएगी.
मे- देखते हैं जरा
मंगू- नं भइया, मे सीधा मार्ग नहि छोड़ने वाला वैसे भि देर बहोत हौ रही हैं.
मे- अरे आँ न् जब देखो फट्टू बना रहता हैं.
मंगू नें साइकिल कों वही पऱ खड़ा किया औऱ हम् दोनों उसतरफ चलदिए जहाँ सें वोँ आवाज़ आँ रही थि। हम् जब गाड़ी केँ पास पहुचे तौ एक् लम्हा कों तौ हम् भि घबरा सें हि गए.सड़क केँ बीचोबीच घोड़ागाड़ी खड़ी थि। पऱ कोचवान नहि
तभी मंगू नें उस जलते अलाव कि तरफ इशारा किया
मे- लगता हैं कोचवान उधर हैं, इतनी सर्दी मे भि इसकोघऱ जाने कि स्थान जंगल मे बैठकर दारू पीनी हैं.
मंगू- मां चुदाये, अपने कों क्याँ मतलब भइया वैसे हि देर हौ रही हैं चल चलते हैं
मे- हाँ तूनेसही कहा अपने कों क्याँ मतलब
मे औऱ मंगू साइकिल कि तरफ जाने कों मुड़े हि थें कि ठीकतभी पीछे सें कोई भागते हुएआया औऱ मंगू सें लिपट गय़ा.
“आईईईईईईईईईईईइ ”जंगल मे मंगू कि चीख गूँजपड़ी.
वोही एहशास, वोही अंदाज़ . पात्र अलग औऱ हालात अलग. बेहद, हि उम्दा अंश थां भइया । शुभारंभ केँ लिए शुभकामनाएं ।
तेरे प्यार मे.... (Completed) - Tere Pyar Me – New Episode
सर्वप्रथम आपको एक् नई किस्सा कि शुरुआत केँ लिए बधाई। वैसे तौ गुजारिश 2 पढ़ने वाला थां परंतु उसके 70 अपडेट्स लिखेजा चुके थें, औऱ फिलहाल केँ लिए वक़्त निकालना कुछ कठिन हैं, कारण, मे आपकी लेखनी सें परिचित हूं औऱ जानता हूं कि यदि एक् बारउसे पढ़ना शुरुआत किया तौ पूर्ण करने सें पूर्व रुक नहीं पाऊंगा। खैर, देखते हें कबकुछ खाली टाइम मिलता हैं औऱ उसे पढ़ने कां संयोग बनेगा। बहरहाल, दिल अपना प्रीत पराई। शब्द नहीं हें उसकी तारीफ केँ लिए!! आभार आपका कि आपनेयह कालजयी किस्सा लिखी।
तौ, “तेरे प्रेम मे", किस्सा कि शुरुआत हुई हैं एक् कोचवान औऱ उस जंगल सें जिसमें इसकथा कां मुख्य भागबसा दिखाई पड़रहा हैं। कथा कां नायक अपने मित्र मंगू केँ संग जंगल केँ रास्ते निकलरहा थां औऱ वहीं सें वोँ कोचवान भि। कोचवान नें निश्चित हि कोईऐसी चीज़ देखी जिसके कारण उसकाडर सें बुराहाल हौ गय़ा। क्याँ कोईमृत देह.? याँ फिनकुछ औऱ, स्टोरी अभि शुरुआत हि हुईँ हैं परंतु पहले हि भाग सें रोमांच पैदा होना आरंभ हौ गय़ा हैं।
देखते हें कि नायक कों उसकी नियति जोँ यहांलाई हैं, आगे उसकेसंग क्याँ होता हैं। बहरहाल, लगता हैं कि कोचवान नें हि मंगू कों पीछे सें पकड़ लिया हैं, शायदडर केँ कारण। शुरुआत, बेहतरीन हैं भइया, यूंही लिखते रहिए।
अगली कड़ी कि इंतज़ार मे।
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Agar wo aadamkhor Kabir kaa hisaab sein chacha h too kahin anju na too istemal nahee kia thaa chacha kaa Champa kee shaadi me ye maira logic h update kaa hissa. Sei. mgr exact answer sirf fauji bhay de sakta h
Minakshi
Fauji bhay mere man me sawal h ye pehli bar haan kee Kabir ko kese.kabir ko ptaa chala kee vo hi atma kaa ansh h sunaina kaa.kuch bate too saaf Karo bhay.sar dhard say phata jaa rahai fauji bhay
Bindu
मैंने हमेशा कहा हैं इस फोरम पर्र मुझेबस आप् हि समझते हैं. नां जानेकौन सि वोँ डोर हैं जिसने हम् दोनों कों जोड़ा हुआ हैं
Vandana
Champa kaa jikar lekhak kaa bhatkana thaa joo safal rahe aur siyaar vo bhi bata diya thaa kee janwaar payar kaa bhukha hotha h.chahe vo siyaar hu ya dog
Aditee
Ek baat note kijiya abi tak siyar nahee aaya Kabir ko bachane na khandar me na yaha Jabke Nisha na usa jassosi krna beja h Kabir kee Nisha or siyar kaa sambandh ajib h
Kaveri
Nisha janti h sona sirf kablr ko milenga nadi k paani say sona kabir hi nikal paya thaa or na hi usne lalach kia thaa dekhte ab aage wakai mai bohot bhadhiya story
Kamla
Itna maara maari.bhay hila hi daala.story kis mod ja rahi hain samjh hi nahii aa rah. Ab too koy kuch nahee kh sakte.dekhte kya hotha
Medhaa
Aisi kahaniyo kaa end happy hu bi nahee sakta. bus kuch cheeze thi joo muze hi kya zyadatar pathako ko achhi nahee lagi or na hi hajam huyi.pr khair chhodiye.story aapki h, aapne bhut kuch sochna samajh krr hi har kirdaar ko aesa banaya hoga.
Manju
मंगलसूत्र रिश्तों कि ऐसी जटिल व्यवस्था हैं जिसेदो तरह सें समझ सकते हैं, आपका अनुमान पहली व्यवस्था हैं
Champa
बुरा किसलिए लगनाअंत लिखना लेखक पऱ निर्भर करे हैं. अंत हैप्पी होँ यहहरबार जरूरी नहि होता.