दीदी मुझे प्यार करो न completee - body-focused teasing - Latest Update 1
दिदी मुझे प्रेम करो न्
कानपूर सें लगभगचार घंटे कि दूरी पर्र मोहनगढ़ गाँव हैं। हम् उस गाँव केँ मूल निवासी थें। हमारे घऱ मे मे, मेरे माँ-बाप, मेरे भैया बसचार लोग हि थें। मेरे पिता पूरे गाँव मे अपनी करतूतों केँ लिए बदनाम थें। वोँ दिनभर पीते रहते थें औऱ हमेशा हि उनकी किसी नं किसी सें झड़प हौ जाती थि औऱ फिन पूरे घरवाले परेशान रहते। मां हमेशा पापा कों समझती पर्र वोँ शराब कि लत मे मां कि बात पे बिलकुल ध्यान नहि देते। मेरी मां पापा कि आदतों सें हमेशा दुखी रहती। पापा नें उम्रभर कोई अच्छी जॉब नहि कि औऱ हमारी माली-हालत हमेशा हि ख़राब बनीरही। थोडा बहोत हमारे खेत सें अनाज कां इंतजाम होँ जाता थां औऱ जैसे-तैसे हि हम् अपने जिंदगी कां निर्वाह कररहे थें। भैया नें गाँव केँ सरकारी विद्यालय सें हि दसवीं औऱ बारहवीं कि पढाई कि थि। फिन उन्होंने कानपूर यूनिवर्सिटी सें कॉरेस्पोंडेंस ग्रेजुएशन कम्पलीट कि थि औऱ सरकारी जॉब कि तैयारी करते थें। अपनी तैयारी केँ संगसंग वोँ गाँव मे बारहवीं तक केँ बच्चों कों ट्यूशन पढ़ते थें। इसतरह कुछआय भि जोँ जाती थि औऱ भैया कि तैयारी मे सहायता भि मिल जाती थि।
पापा कि आदतों नें एक् दिन उनकीजान हि लेँ ली। हम् सबघऱ पे हि थें कि खबर मिली कि रोड पे उन्हें किसी व्हीकल नें ठोकरमार दि औऱ वोँ मार्ग पे हि दम तोड़गए। हमारे पूरेघऱ मे मातमछा गय़ा। हालाँकि उनकी आदतों कि वजह सें हमें लोगों केँ सामने बहुत जलील होना पड़ा थां पऱ घऱ मे हम् दोनों भइया उन्हें पिता-समान हि इज्जत देते थें। हमारी मम्मी, जौ पापा कि मौत केँ वक़्त 51 साल कि थीं, नें हमेशा हमें पापा कि इज्जात करनी सिखाई थि औऱ वोँ स्वयं भि हमारे सामने पापा कों कुछ भि बुरा-भला नहि कहतीथीं। जरूर अकेले मे वोँ उन्हें समझाती थीं कि वोँ शराब कि आदत छोड़दें। पऱ भगवान् कों कुछ औऱ हि मजूर थां औऱ पापा 55 कि उम्र मे हि हमें छोड़कर चलेगए।
भैया पढ़ने मे बहुत अच्छे थें औऱ पूरे गाँव मे लोग उनकी तारीफ़ करते थें। पापा केँ देहांत केँ ठीक एक् सालबाद भैया कों एक् अच्छी सरकारी जॉबमिल गई, औऱ फिन भैया नें मम्मी औऱ मुझे अपनेसंग हि कानपूर शहर बुला लिया। हमने एक् 2bhk फ्लैट रेंट पे लिया थां जिसका किराया भैया नें कंपनी लीज रेंट करवा दिया थां। भैया कि उम्रउस वक़्त 25 थि औऱ मेरी 18 औऱ मां कि 52। मैंने अभि-अभि दसवीं कि परीक्षा गाँव केँ हि पाठशाला सें दि थि औऱ फिन कानपूर मे एक् कॉलेज मे बारहवीं केँ लिए नामांकन करवा लिया। भैया औऱ मेरी उम्र मे दससाल कां अंतर थां औऱ वोँ मुझे बहोत मानते थें। नौकरी केँ संग भि जबकभी उन्हें वक्त मिलता वोँ मुझे पढ़ते थें। पापा केँ निधन केँ बाद सें मां थोड़ी दुःखी-दुःखी रहती थि।
जॉब मिलने केँ बाद सें भैया नें घऱ कि सारी जिम्मेवारी लेँ ली थि औऱ वोँ हमें किसी भि चीज कि कमी नहि महसूस होने देते थें। कॉलेज समाप्त होने केँ बाद मैंने इंजीनियरिंग कॉलेज मे नामांकन केँ लिए तैयारी शुरुआत कर दि। मम्मी कि तबियत लगातार ख़राब हि हौ रही थि। घऱ पे भैया नें नौकरानी रखी थि जौ घऱ कां सारकाम कर देती थि। भैया कों नौकरी करतेहुए 4 साल हौ गए थें औऱ मां उनसेअब विवाह करने कों कहनेलगी। पहले तौ भैया नें मन कियाकुछ दिन पऱ फिन मम्मी कि बिगड़ती तबियत देख-कर उन्होंने विवाह केँ लिएहाँ कर दि पऱ उन्होंने शर्तरखी कि विवाह वोँ अपनी पसन्द कि लड़की केँ संग हि करेंगे। मम्मी कों इसबात सें कोई ऐतराज़ नहि थां।
दो महीनों केँ अंदर हि उन्होंने अपनी पसन्द सें विवाह करली, मेरी भाभी भैया सें उम्र मे 5 साल बड़ी थि, दरअसल दोनों कां प्यार शादी थां। भाभी अपनेघऱ कि सबसे बड़ी थि, उन्होंने अपने भइया-बहनों कि पढाई कि वजह सें देर सें विवाह करने कां फैसला किया थां। वोँ भैया कि हि कंपनी मे काम करतीथीं जहाँ दोनों एक् दूसरे सें प्रेम कर बैठे।
भाभी एक् भरे शरीर कि बेहद गदराई महिला थीं भैया उनके सामने बच्चे जैसे लगते थें। वोँ बहोत सुंदर तौ थि हि मगर उनके शरीर कां कसावदूर सें हि दीखता थां। मेरी मां पहले तौ इस विवाह केँ खिलाफ थीं पर्र फिन भैया केँ जिद केँ आगे वोँ मान गई,। भैया, भाभी नें मंदिर मे विवाह कि औऱ हमने हमारे गाँव सें किसी कों भि नहि आमंत्रित किया थां। विवाह केँ बाद भाभी औऱ भैया दोनों काम पे जाते थें औऱ मे अपने कोचिंग। सभीकुछ सहीचल रहा थां। हमने एक् नया 3 bhk घर-मकान किराये पे लें लिया थां। भैया भाभी एक् कमरे मे रहते थें, एक् मे मम्मी, औऱ एक् मुझे मिला थां। नयी भाभी केँ संग भि मे बहोत जल्द घुल-मिल गय़ा थां। हालाँकि तब मेरी उम्रबस 19 कि थि मगर मुझे सेक्स कां थोडा ज्ञान तौ आँ हि गय़ा थां औऱ भाभी कां जिस्म मुझे बहुत आकर्षित करता थां। मे भि स्वयं केँ लिए भाभी जैसे हि गदराई शरीर केँ स्त्री कि कामना करता थां|
मे देख सकता थां कि भैया अब बहुतखुश रहते थां हौ भि क्यूं नहि इतनी मोटी गदराई गाय मिली थि उन्हें पत्नि केँ रूप मे। दोनों दफ़्तर सें आने केँ बाद खानां खाते हि अपने कमरे मे बंद होँ जाते थें। औऱ शनिवार औऱ इतवार कों तौ पूरे-पूरे दिन वोँ कमरे मे हि रहते थें। खैरऐसा किसी भि नए जोड़े केँ संग रहता हैं विवाह केँ बादमगर विवाह केँ 6 महीने बाद तक यहीचल रहा थां। भाभी केँ जिस्म मे औऱ कसाव आँ गय़ा थां इसबीच औऱ वोँ औऱ भि ज़्यादा गदरा गयीँ, थीं। मे उन्हें भाभी मम्मी कहता थां जैसा कि हमारे गाँव मे भाभियों कों बुलाते थें। उनके व्यव्हार सें ऐसा नहि लगता थां जैसे वोँ मुझे बिलकुल भि शर्माती हों, वोँ मुझे एक् बेटे कि जैसे हि मानती थि। हमेशा मेरी पढाई औऱ मेरे स्वास्थय केँ लिए पूछती रहतीथीं। मां कां भि पूरा देखभाल करतीथीं वोँ औऱ मां कों कोई भि काम नहि करने देतीथीं
घऱ मे सबखुश थें, इसबीच मेरा नामांकन इंजीनियरिंग कॉलेज मे हुआ औऱ मुझे भोपाल जानां पड़ा पढाई करने। मे 3 महीने मे बस एक् बारआता थां घऱ औऱ जब भि घऱआता थां भाभी केँ जिस्म कि कसावट बढ़ी हुईँ हि पाता| उन्होंने जॉब वापस नहि करने कां निर्णय लेँ लिया थां क्यूंकि अब तक भैया कि तनख्वाह बहुत अच्छी हौ गई, थि, भाभीघऱ कां अच्छा ध्यान रखती थि।
मगर मेरी मां कि तबियत अब बहुत ख़राब रहती थि, भैया नें उन्हें दिल्ली लेँ जा करके अच्छे डॉक्टर सें भि दिखाया थां मगर वोँ ठीक नं हौ सकीं। मेरे दूसरे साल इंजीनियरिंग मे उनका निधन होँ गय़ा। भाभी नें बढ़ी हुईँ जिम्मेवारी जल्दी उठाली वोँ मुझसे अबहर हफ्ते एक् बारबात करती थि औऱ मेरा ख्याल लेतीथीं। भाभी मां जैसे कि मे उन्हें बुलाता थां वोँ बिलकुल मां जैसे हि अब मेरा ध्यान रखनेलगी।
मे दिवाली कि छुट्टी मे घऱआया थां। भाभी नें पूराघऱ सजाया हुआ थां पर्र भैया किसी दफ़्तर केँ जरुरी काम सें बाहर् गएहुए थें औऱ घऱ पे मे औऱ भाभी हि बस थें। भाभी कों देखते हि मे थोडा असहज होँ जाता हूं क्यूंकि वोँ बड़ी मादक लगतीथीं। मगर उन्हें इसबात कां बिलकुल भि एहसास नहि थां। उनकेबदन कि बनावट कुछ 48 - 40 - 48 होँ गयीँ, थि। केसे भि कपड़े पहने वोँ, उनके यौवन कि मादकता साफ़ झलकती थि। यह पहलीबार थां जब मे औऱ वोँ अकेले थें घऱ पे। मुझे वोँ बिलकुल ऐसे लगती जैसे हमेशा हि चुदने केँ लिए सजधजकर होँ। भैया जरूर भाभी कों जम केँ चोदते होंगे भाभी केँ लगातार बढ़ते बदन कों देख केँ यह आसानी सें कहाजा सकता थां।
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मे 6 दिनों कि छुट्टी पे आया थां औऱ हरदिन मेरी उत्तेजना बढ़रही थि। भाभीघऱ मे nighty मे हि रहतीथीं जौ कि उनके शरीर केँ गदरायेपन कों बिलकुल निखार रहा थां। पहले हि दिनजब मे अपने कमरे सें सो केँ बाहर् निकला तौ देखा वोँ ड्राइंग हॉल मे लेटीं थीं। मुझे देखते हि उन्होंने अपने मम्मों पे टॉवलदाल दिया पर्र वोँ इतने बड़े मम्मों थें कि टॉवल केँ ऊपर सें हि मुझे उत्तेजित करगए। खैर मे झेप गय़ा औऱ दुबारा कमरे केँ अंदरचला गय़ा। जिस तरीके सें उनके मम्मों उभरेहुए थें वोँ पूरीगाय दिखरही थि। उनके nighty कां कलर ट्रांसपेरेंट वाइट थां औऱ गोरे शरीर कि वजह सें वोँ एक् भरी-पूरी मांसल महिला दिखती थीं। मे सोचता थां अगर मुझेयह गदराई गायमिल जाए तौ मे इसे दिन-भर दुहूँगा पऱ क़िस्मत तोँ भैया नें हि पायी थि। मे उनके जिस्म सें उत्तेजित हौ गय़ा थां औऱ वोँ जब भि सामने आती मे नं चाहे भि उनके जिस्म कों आगे सें याँ पीछे सें घूरता रहता थां।
भाभी औऱ भैया दोनों नें decide किया कि वोँ बच्चा अभि नहि चाहते हें। उन दोनों सें फॅमिली प्लानिंग कि हुईँ थि। दुसरे दिन मैंने ऐसे हि बात बढ़ाने केँ लिए उनके घरवालों केँ बारे मे पूछा - भाभी जानती थि कि मुझे अधिकपता नहि थां इसलिये वोँ मुझे बताने लगी। भाभी केँ घऱ मे उनके मम्मी-पिता औऱ एक् भइया औऱ एक् बेहन हें। भइया बेहन दोनों कि विवाह हौ गई, हैं औऱ दोनों खुश हें अपने जिंदगी मे। फिन मैंने उनसे उनके औऱ भैया केँ विवाह कि बात छेड़ दि। वोँ थोड़ी शर्मा गयीं पऱ बोलीं कि वोँ औऱ भैया दोनों अपने-अपने घऱ कि जिम्मेवारी संभाल रहे थें जौ दोनों कों अच्छी बातलगी। यहीवजह थि कि दोनों कों आपस मे बात करने केँ लिए बहोत कुछ होता थां दफ़्तर मे औऱ फिन दोनों लगभगआते गए। भाभी मेरे सें बहुत लगभग बैठी थि औऱ यह बहुत उत्तेजना सें भरा माहौल थां। मैंने उनके उम्र कि बात भि छेड़ दि। वोँ थोड़ी झेप गई, पर्र कहा कि उन्हें भि यकीन नहि थां कि भैया जोँ कि इतने स्मार्ट दीखते हें एक् बड़ी उम्र कि महिला केँ संग विवाह कों रेडी होँ जायेंगे। भाभी हालाँकि चाहती थि भैया सें विवाह करनामगर थोड़ी आशंकित भि थि क्यूंकि उनकेबीच 5 साल कां फर्क थां। मैंने भि बात बढ़ाने केँ लिए उन्हें बताया कि केसे हमारी मम्मी बिलकुल नहि चाहती थि कि यह विवाह होँ पऱ भैया नें जिद करकेयह विवाह कि। मैंने भि भाभी सें कहा कि वोँ इतनी सुंदर हैं वोँ उन्हें विवाह केँ
proposals तोँ आते होंगे तौ उन्होंने कहा कि वोँ ठान चुकी थि कि जब तक अपने छोटे भइया बेहन कि पढाई औऱ विवाह नहि हौ जाती वोँ विवाह नहि करेंगी। उनके माँ-बाप हालाँकि जिन्दा थें पऱ कुछकाम नहि करते थें। गाँव सें अनपढ़ हि शहर आँ गए थें, कुछसाल काम किया भि थां पर्र फिन भाभी नें अच्छी जॉब पकड़ली तौ अपने पिता कों काम करने सें मनाकर दिया क्यूंकि वोँ बहुत छोटे स्तर कि जॉब किया करते थें। अब उनके मम्मी-पिता कि जिम्मेवारी भाभी कां भइया उठाता हैं।
फिन मैंने उनसे पूछा कि क्याँ वोँ खुश हें भैया केँ संग तौ उन्होंने कहा कि आपके भैया सें पूछो आप्। मैंने जल्दी कहा कि भैया तोँ बहोत खुश होंगे आपके जैसी पत्नि पाकर आप् इतना ध्यान जोँ रखती हौ उनका (हालाँकि मे कहनाकुछ औऱ चाहता थां!)| वोँ खुश होँ गयीं औऱ फिन हमने यूँही इधर-उधर कि बात कि फिन वोँ अपने कमरे मे चली गयीं औऱ मे अपने कमरे मे।
मैंने ऐसी दूसरी औरतें भि देखीं हें पऱ भाभी जैसा confidence किसी मे नहि देखा। अधिकतर ऐसीभरे शरीर कि औरतें कुछ नं कुछ इशारा दे देती हें मगर पिछले 3 सालों मे भाभी नें मुझेकुछ भि hint नहि दिया। हाँ मे बिना hint केँ हि उत्तेजित रहता थां वोँ अलगबात हैं। पऱ पूरी पतिव्रता थि मेरी भाभी
भाभी मुझे बेटा - बेटा कह केँ बुलाती थि पर्र नं चाहते हुए मे मना भि नहि कर सकता थां। वोँ माँ केँ जाने केँ बाद औऱ सहज हौ गयींथीं मुझे लेकर औऱ इसबार कि छुट्टी मे तौ मुझे उनका व्यवहार थोडा औऱ मम्मी जैसालग रहा थां। हरकुछ घंटे पे मुझे खाने केँ लिए पूछती थीं। दिवाली कि छुटियाँ बीत गयींमगर इसबार बहुत वक़्त बिताया थां मैंने भाभी केँ संग औऱ उनके शरीर केँ प्रति मेरा आकर्षण बढ़ गय़ा थां। मे वापस तोँ चलाआया पर्र उनके शरीर कि चाहतसंग हि रही। खैर मे अपने पढाई मे मसगुल हौ गय़ा। इसबीच औऱ भि बारघऱ आया मे पर्र बसकुछ हि दिनों केँ लिए। मैंने अपनी इंजीनियरिंग कॉलेज कि पढाई पूरी कि औऱ एक् अच्छी कंपनी मे जॉब करनेलगा।
मुझेजॉब करते अभि 1 साल भि नहि हुआ थां कि अचानक मुझे भाभी कां कॉलआई आया कि भैया कां एक्सीडेंट होँ गय़ा औऱ उनकी हालत बहुत नाज़ुक हैं। भाभीफोन पे रोरही थीं, मैंने तुरत अगले हि फ्लाइट सें हॉस्पिटल पंहुचा पऱ तब तक भैया कां देहांत होँ चूका थां। यह हमारे घऱ केँ लिए एक् बड़ा सदमा थां। भाभी औऱ मेरा भतीजा तोँ रोयेजा रहे थें। पूरे क्रिया-क्रम तक भाभी नें कुछ नहि बोला। भाभी तोँ बेसुध थि बिलकुल। भाभी केँ मम्मी-पिता, उनके भइया औऱ बेहनसब हमारे हि घऱ आँ गए थें।
सबबस भाभी कों हि चुप कराने मे लगेहुए थें। वोँ लगातार रोयेजा रही थि। थकने पे सो जाती थि फिन रोने लगती थि। उन्हें देख-कर मुझे भि रोना आँ जाता थां। पूरे एक् महीने होँ चुके थें भैया केँ death केँ बाद सें - मैंने अपनी छुट्टी बढ़ाली थि भाभी केँ भइया औऱ उसकी पत्नि औऱ भाभी केँ मां-पिता संग मे हि थें। भाभी कि बेहन वापसचली गई, थि। सब बहुत परेशान थें कि भाभी कां भविष्य क्याँ होगा। एक् दिन उनके पापा नें औऱ उनके भइया नें (राहुल, जोँ कि उनसे 5 - 7 साल छोटा थां) मुझे दूसरे कमरे मे बुलाया औऱ वोँ भाभी केँ हालत पे चिंता जाहिर करनेलगे मैंने उन्हें कहा कि वोँ ठीक हौ जाएँगी पर्र वोँ दोनों बहुत चिंतित थें। मुझेऐसा लगा जैसे उनलोगों नें कुछसोच रखा थां औऱ मुझे बताने केँ लिए बुलाया होँ। मैंने उन्हें कहा कि मे भाभी कों अपनेसंग शहर लेँ जाऊंगा वैसे भि हम् यहा रेंट पे हि रहते थें। तब भि वोँ दोनों बहोत सहज नहि दिखे। राहुल नें कहा कि दिदी भैया सें बहोत प्रेम करती थि औऱ जब तक वोँ अकेले रहेगी उसे भैया कि याद आएगी। फिन मैंने कहातभी तोँ मे उन्हें अपनेसंग लें जारहा हूं। उन्हें कोई दिक्कत नहि होगी, जैसे वोँ पहलेखुश रहती थि वैसे हि रहेंगी। फिन उनके पापा नें वोँ बातकह हि दि जिसके लिएउन दोनों मे मुझेअलग
बुलाया थां - तुम् मधु (भाभी कां नाम) सें विवाह करलो!यह मेरेलिए बहुत अचंभित करने वाला थां। एक् बाप जोँ किसीकाम केँ लायक नहि थां औऱ एक् भइया जिसे भाभी नें स्वयं इस लायक बनाया थां वोँ भाभी कि विवाह उनके देवरु सें हि (जौ कि 15 साल छोटा थां!) करने कि बातकह रहे थें। मेरे सामने जल्दी भाभी कां रोटाहुआ चेहरा, औऱ उनका गदराया शरीर (जोँ कि औऱ निखार गय़ा थां बीते सालों मे), मेरे भैया, सभी मेरेसोच मे आनेलगे। मे बिलकुल शांत हौ गय़ा कुछदेर केँ लिए।
राहुल नें बोला कि मधु दिदी मेरा बहुत ख्याल रखेगी औऱ फिन मुझे इतनी स्वाभाव सें अच्छी पत्नि नहि मिलेगी। राहुल केँ पिता नें भि भाभी कि तारीफ कि औऱ मुझे प्रेम सें समझाने लगे। मुझेसमझ नें नहि आँ रहा थां। मैंने उन दोनों कों कहा पर्र वोँ मेरी भाभी मम्मी हैं औऱ मेरे सें इतनी बड़ी हें उम्र मे (भाभी कि उम्रतब 38 साल कि थि औऱ मे 23 साल कां)। यह विवाह नहि हौ सकती चाहे हम् लोग कितना भि चाहे। राहुल नें तपाक सें कहा कि भाभी थोड़े हि नं मां होती हैं मे तुम्हारी स्थान होता तौ उम्र केँ लिए तोँ बिलकुल भि नहि सोचता। मधु दिदी इतनी हसीन हें कि जिसे चाहे वोँ विवाह करने कों रेडी होँ जाए हम् तोँ बस चाहते हें कि घऱ कि इज्जत घऱ मे हि रहे औऱ तुम् तोँ कमाते भि होँ, तुम्हे यहबोझ भि नहि लगेगा। दिदी जैसे तुम्हारे भैया कां ख्याल रखती थि तुम्हारा भि रखेगी। अभि उसेकोई बच्चा भि नहि हैं, जौ बच्चा होगा वोँ तुझसे हि होगा। (यह बात मुझे बहोत उत्तेजित कर गयीँ, )| मुझेसमझ मे नहि आँ रहा थां, वैसे भि मैंने भाभी कों संगशहर लें जाने कि बातकही थि। अगर मे विवाह किसी औऱ सें भि करता तोँ भि मुझे जिंदगी भर भाभी कां देखभाल करना हि थां औऱ शायदयही डर थां इन बाप-बेटे कों जिसकी वजह सें वोँ चाहते थें मे विवाह हि करलूं।
मेरी असमंजसता सें उन दोनों कों hint तौ मिल हि गय़ा थां। राहुल कि पिता नें कहा कि अगर मे सहमत हूं इसकेलिए तौ वोँ मधु (अपनी बेटी, मेरी भाभी) सें आज हि बात करेंगे औऱ फिन परसों कोर्ट मे दोनों कां निकाह करवा दिया जायेगा। (दरअसल उनलोगों कां भि जिंदगी अस्त-व्यस्त हौ गय़ा थां इसमें, लगभग एक् महीने आने कों थें औऱ भाभी बिलकुल भि नहि समझरही थि। मुझे भि दफ़्तर सें कॉल्स आँ रहे थें वापसआने केँ लिए। मे छुट्टी पे छुट्टी लेँ रहा थां)| हालाँकि मे इसबात सें उत्तेजित भि थां कि भाभी जैसे गदराये जिस्म कि स्त्री मुझेमिल रही थि पत्नि केँ रूप मे पऱ मुझेकतई नहि लगा कि यह हौ पायेगा सो मैंने उन दोनों कों हाँकह दिया।
राहुल औऱ राहुल केँ पिता दोनों बहुतखुश होँ गए औऱ उनके पिता नें मेरेपीठ पे हाथ रखतेहुए कहा कि वोँ कभीइस एहसान कों भूल नहि पाएंगे। राहुल नें मुझे थैंकयू जीजाजी बोला औऱ फिन दोनों कमरे केँ बाहर् चलेगए। मे बिलकुल खामोश बहोत सारेसोच मे खो गय़ा। मुझेइस बात कि बेहद सुखानोमिति हौ रही थि कि एक् दुधारू गाय मुझे जिंदगी भर केँ लिएमिल रही थि औऱ जिससे मे हमेशा उतेज्जित रहूँगा। मे हमेशा सें भाभी जैसे हि स्त्री सें विवाह करना चाहता थां पऱ भाभी स्वयं मुझेमिल जायेगी यह मुझे तनिक भि उम्मीद नहि थि। साम तक राहुल औऱ उसके पिता नें भाभी कों छोड़कर सबसेबात करली, भाभी सें बात करने केँ लिए राहुल नें अपनी दिदी (जौ कि भाभी सें 2 - 3 साल छोटी थि) कों बुला लिया| मे अपनेकाम मे व्यस्त थां औऱ रह-रहकर भाभी कां सुन्दर चेहरा औऱ उसका मांसल शरीर मेरे सामने आँ जाता औऱ मुझे उत्तेजित कर जाता।
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जब राहुल कि छोटी दिदी (सुमन)आयी साम मे तौ मुझेलग गय़ा जैसे कि आजरात हि यहलोग सभी फैसला कर देंगे। मे बगल वाले कमरे मे हि थां जब भाभी केँ घऱ वाले उन्हें समझारहे थें। भाभी बिलकुल कुछ नहि बोलरही थि औऱ थोड़ी-थोड़ी देर पे रोने भि लगती थि। सुमन नें भाभी सें कहा कि वैसे भि तुम्हे सुनील (मेरानाम) केँ संग हि जिंदगी भर रहना होगा, बेहतर होगायदि तुम् दोनों विवाह करलो। तभी राहुल नें बोला कि सुनील इसबात केँ लिए राजी हैं। तब मैंने भाभी कि आवाज़ सुनी वोँ बोलीं कि सुनील कों इसबात कि समझ नहि हैं वोँ तौ अभि बच्चा हैं। (यह मुझे उनकेतरफ सें हाँ जैसेलगी)। राहुल केँ पिता नें मेरी तारीफ करतेहुए कहा कि वोँ कमाता हैं, इतना जिम्मेवार हैं स्वयं हि कहरहा थां भाभी कों शहर लेँ जा केँ संग रखूँगा। बिलकुल विवाह कां प्रस्ताव मैंने औऱ राहुल नें रखा थां पऱ वोँ तुम्हारी जिम्मेवारी केँ लिए तौ वैसे भि सजधजकर थां। वैसे भि उसे तुम्हारी इतनी हसीन पत्नि कहां मिलेगी सो वोँ जल्दी मान गय़ा। मे समझरहा थां राहुल औऱ उनके पिता कि चाल वोँ विवाह कों बस एक् मजह फॉर्मेलिटी कि तरहपेश कररहे थें। यह लगभग घंटेभर चला पऱ मे तब तक सो गय़ा थां।
सुभहसभी नें खानां खाया औऱ फिन मुझे भाभी केँ कमरे मे बुलाया गय़ा, भाभीनहा करके बहोत दिनों केँ बाद बहुत फ्रेश लगरही थीं। भाभी केँ बगल मे उनकी बेहन सुमन बैठी थि। औऱ मुझे राहुल केँ माता -पिता नें अपनेबीच मे सोफे केँ दूसरी तरफ बैठाया थां। उनके पापा नें बात कि शुरुवात कि। मे एक्-टक भाभी कों देखरहा थां उनके चेहरे पे निरंतर रोने कि वजह सें थोड़ी उदासी आँ गयीँ, थि पऱ जिस्म वैसा हि कसाहुआ थां। भाभी बहुत सीरियस दीखरही थि। जैसा मे समझपा रहा थां वोँ इसेबस एक् फॉर्मेलिटी केँ रूप मे देखरही थि उन्होंने पति-पत्नि केँ बीच केँ संबंधों केँ बारे मे शायद सोचा नहि थां वरना वोँ मुझपे भि शक करती। वोँ शर्मिंदगी तौ महसूस कररही थि मगर उनकी शर्मिंदगी मुझेइस बात मे फसाने कों लें केँ थि। वोँ शर्मिंदा थीं कि उनके पिता औऱ भइया नें मुझे उनसे विवाह करने कि बातकही थि। राहुल केँ पिता नें मुझे पूछा कि क्याँ मुझेकोई आपत्ति हैं इस विवाह कों लेकर तोँ मैंने कहा कि मे भाभी मां कों हमेशा खुश रखूँगा औऱ भाभी मां जैसा चाहेंगी वैसे हि करूँगा। राहुल कि मां नें जल्दी कहा कि मे उन्हें मधु बुलाऊँ औऱ नं कि भाभी मम्मी। मैंने कहा मां जी मे अपनीमधु कों हमेशा खुश रखूँगा| मे देख सकता थां कि भाभी कि आँखों सें आंसूं छलकआये। फिन राहुल केँ पापा नें भाभी सें कहा कि क्याँ उन्हें कोई आपत्ति हैं तौ भाभी नें भि अपनेसर कों नां मे इशारे सें घुमाया। फिन क्याँ थां राहुल औऱ सुमन दोनों नें मुझे जीजाजी कह केँ congratulate किया औऱ भाभी कि औऱ देख केँ मुझसे कहा कि जीजाजी हमारी दिदी कां पूरा ख्याल रखना।
अगले हि दिन हमारी कोर्ट मे विवाह हुई औऱ फिन मंदिर होके हम् सभीलोग साम कों घऱ पे वापसलौट आये। हमने किसी भि दूसरे जन कों पता नहि चलने दिया थां यहा तक कि हमारे घर-मकान-मालिक भि अनभिज्ञ थें इसबात सें। भाभी केँ कमरे कों सुमन नें सजा दिया थां औऱ रात मे मुझे भाभी केँ कमरे मे हि सोना थां। मेरी तौ हालत बहुत ख़राब थि। उत्तेजना सें परिपूर्ण मे बैचैन थां कि रातकब आएगी पर्र मुझेयह भि नहि पता थां कि भाभी केसे रियेक्ट करेगी। मेरे दिमाग़ मे शहर वापस जाने कों लेकर बहुत ख़ुशी थि क्यूंकि यहा तौ बहुतलोग थें मगरशहर मे बस मे औऱ मेरी गदराई गाय होगीफिन तौ मे उन्हें दिन-भर चोदूँगा। रात आँ गई, औऱ जब मे अंदर कमरे मे जानेलगा तौ सुमन औऱ राहुल नें मुझे thumps up कां सिग्नल दिया। सुमन नें मेरेहाथ मे दूध कां गिलास दिया औऱ बोला कि भाभी मेरा इंतजार कररही हैं।
जब मे अंदरआया तौ भाभी मुझेदेख केँ रोनेलगी, मैंने उन्हें समझाते हुएकहा कि भाभी मां अगर आप् नहि चाहेंगी तौ मे कुछ नहि करूँगा। मैंने तोँ आपकेहित केँ लिए हि विवाह केँ लिएहाँ कर दिया थां। पऱ वोँ रोती रहीं। मैंने बहोत समझाया पर्र वोँ बिलकुल एक् बेसुध महिला कि तरह रोती हि रहीं। वैसे मे इतने लगभग थां अपनी काम-ख़्वाहिश कि तृप्ति केँ लिएमगर मैंने संयम सें काम लेना जरुरी समझा औऱ उनकेपास बैठ केँ उनके
गालों सें आसुओं कों हाथ सें पूछने लगाफिन मैंने उनके माथे पे एक् चुम्बन दि। पहलीबार मे उनके जिस्म कों स्पर्श कररहा थां। जब मैंने उनके गालों पे हाथरखा तोँ मुझे अजीबसुख कि अनुभूति हुई। इतनी रसीले थि उनकी त्वचा। फिन मैंने धीरे-धीरे सें उनके दोनों कन्धों पे हाथरख केँ उन्हें लिटा दिया। मैंने उनसे पूछा कि अगर वोँ साड़ी चेंज करना चाहती हें तौ मे हेल्प कर देता हूं। उन्होंने कुछ बोला नहि। मे बगल मे लेट गय़ा औऱ उनके गालों पे आंसू पोछते हुएहाथ फेरने लगा।
मेरे अंदर असीम उत्तेजना कां संचार हौ रहा थां। मैंने हिम्मत करके अपनेहाथ कों उनके होठों केँ बीच लें जा करके होठों कों एक्-दूसरे सें अलग किया औऱ फिन अपने होठों कों उनके लगभग लेँ जानेलगा। भाभी नें जैसे फुर्ती सें अपने चेहरे कों दूसरे तरफकर लिया पऱ कुछ बोला नहि। मैंने भि जिद नहि कि। मे अपनेहाथ कों भाभी केँ विशाल स्तनों केँ ऊपर फेरने लगा औऱ उनके ब्लाउज केँ हुक कों खोलने लगातभी भाभी दूसरी तरफ मुँह करके रोनेलगी। उनके बूब्ज़ इतने बड़े थें कि मे रुक नहि पाया औऱ उनके रोतेहुए भि मैंने उनके स्तनों कों ब्लाउज सें बाहर् कर दिया औऱ उन्हें अपनीतरफ घुमा केँ बोला कि भाभी आप् रो क्यूं रही हें। मुझे अच्छा नहि लगरहा हैं। मैंने अपने हाथों सें उनके स्तनों कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे सहलारहा थां। वोँ शायदसोच रही थि कि यह अभि बोलरहा थां बिना उनकी मर्ज़ी केँ कुछ नहि करेगा औऱ अभि उनके स्तनों कों सहलारहा हैं जबकि भाभी नहि चाहती थि। सो मैंने जल्दी उन्हें सॉरीबोल उनके ब्लाउज कों दुबारा लगा दिया, पऱ वोँ बूब्ज़ इतने बड़े थें कि दुबारा ब्लाउज लगाने मे बड़ी दिक्कत आयी। मैंने फिन भाभी सें माफ़ी मांगते हुएकहा कि आपका शरीर हि ऐसा हैं कि मे फिसल गय़ा औऱ फिन मे दूसरी तरफ मुँह करकेसो गय़ा।
अगली सुभहसब अपने-अपने घऱ वापस जाने कि तैयारी मे थें। उन सबकोपता थि कि भाभी बिलकुल भि खुश नहि हें पऱ उन्हें इसके अलावा कोई औऱ उपाय भि नहि दिखरहा थां। साम मे मे औऱ भाभी फ्लाइट सें दिल्ली आँ गए। राहुल नें घऱ कों खाली करने औऱ सारे सामान कों ट्रांसपोर्ट करने कि जिम्मेवारी लेँ ली। जब भाभी केँ घऱ केँ लोग जानेलगे तोँ मुझे बुलाकर थैंकयू कहा औऱ बोला कि मधु थोड़ी दुःखी हैं पऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे खुश हौ जाएगी औऱ फिन हमारे जिंदगी मे बहोत ख़ुशी आएगी।
रात तक हम् दिल्ली (जहाँ मे नौकरी करता थां) मे थें, मैंने अपने घर-मकान-मालिक कों बता दिया थां कि भाभी भि मेरेसंग रहने आँ रहे हें। मैंने 2bhk फ्लैट लेँ रखा थां मगर मुझेइस बात कां डर थां कि कहीं भाभी औऱ मेरी विवाह कि बात सबको नं पताचल जाए। पता नहि क्यूं मुझेऐसा लगरहा थां कि लोगइसे सही नहि मानेंगे। मेड नें रात कां खानां बना दिया थां औऱ मे औऱ भाभीखा केँ दूसरे कमरे मे सोने केँ लिए आँ गए।
भाभी नें nighty चेंजकर ली औऱ मैंने बॉक्सर डाल लिया। भाभी केँ शरीर कि विशालता कों उनकी nighty बिलकुल नहि संभाल पारही थि। मैंने भाभी कों पहलीबार इस nighty मे देखा थां| nighty पूरी खींची हुइ लगरही थि। एक् तरफ कों उनके स्तनों केँ उभार कि वजह सें वोँ बहुतआगे तक आयी हुईँ थि औऱ फिन उनके नितम्बों केँ विकास केँ वजह सें बहुत पीछे तक खींची हुईँ थि। वोँ एक् विशाल चुड़क्कड़ महिला कि तरहलग रही थि उस nighty मे। मैंने उनसे पूछा कि उनकेपास औऱ nighty हैं कि नहि- तोँ उन्होंने नाँ मे सर हिलाया। मैंने कहां कि कहींयह फट नं जाए पूरा खिंच गय़ा हैं आपके शरीर केँ फैलाव कि वजह सें। उन्होंने सर झुकाते हुएकहा कि सूरज (मेरे भैया) नें जान-बूझ करऐसा लिया थां। (भाभी अभि भि मेरे भावनाओं कों समझ नहि रही थि तभी तौ उन्होंने ऐसाकहा!)। मुझेयह बात बेहद उत्तेजित कर गयीँ, औऱ मैंने बिना टाइम गवाएं जल्दी कहा कि भाभी मम्मी किसी भि मर्द कों आपके जैसी एक् गदराई स्त्री ऐसे हि तंग कपडे मे चाहिए होगी (पहलीबार मैंने भाभी केँ मुँह पे गदराई शब्द कां इस्तेमाल किया थां!)| भाभीझेप गयीँ, औऱ मैंने भि बातआगे नहि बढ़ाई। भाभी नें लाइटबंद करने कों कहा, मे हालाँकि लाइटबंद नहि करना चाहता थां क्यूंकि मुझे भाभी केँ शरीर कों देखने कां मे कररहा थां। पर्र मेरे सामने पूरा जिंदगी पड़ा थां औऱ मे जल्द-बाज़ी नहि करना चाहता थां। कल कि तरह हि मे औऱ भाभी दूसरी तरफ मुँह करकेसो गए। पर्र मैंने एक् तरकीब निकाली कि धीरे-धीरे धीरे-धीरे मे भाभी सें पति-पत्नि वाली बातें किया करूँगा कुछ दिनों मे तोँ हमें पूरा पति-पत्नि बनना हि हैं। वैसे भि भाभी नें जबइस रिश्ते केँ लिएहाँ किया थां तोँ उन्हें यह अपेक्षित भि होगा कि हम् संग मे सभीकुछ करेंगे। सुभह मैंने उन्हें मधु बुलाया वोँ थोड़ी शर्मायी मगरफिन मैंने उनसेकहा कि भाभी मम्मी बुलाना सही नहि हैं क्यूंकि हमारा नाता पति-पत्नि कां हैं। पऱ मैंने उन्हें प्रॉमिस किया कि मे दूसरों केँ सामने उन्हें भाभी मम्मी हि बुलाया करूँगा। उन्होंने कुछकहा नहि पऱ उन्हें इसबात पे आपत्ति नहि दिखी।
8 बजे सुभह नौकरानी आयी औऱ मैंने उसे भाभी मां सें मिलाया औऱ कहां कि यहअब यहीं रहेंगी। नौकरानी थोड़ी डर गई, क्यूंकि उसेलगा कहीं उसकी नौकरी न् चलीजाए फिन मैंने उसेकह दिया कि खानां वोँ हि बनाएगी, भाभी मम्मी बसउसे गाइडकर देंगी। औऱ उसे भाभी मां कां पर्सनल काम भि करना हैं झाड़ू-पोछा केँ सिवा। मैंने भाभी मां कों अलग बुलाकर कह दिया कि आप् अपने जिस्म कि मालिश-वालिश भि करवा लिया करना इससे। नाश्ता करके मे दफ़्तर केँ लिएचला गय़ा, पूरेदिन दफ़्तर मे मे उत्तेजित रहा। मुझे यकीन हि नहि हौ रहा थां कि भाभी जैसी गदराई स्त्री अब मेरी पत्नि थि। मैंने दफ़्तर मे किसी कों भि नहि बताया थां मेरी विवाह केँ बारे मे मगर उन्हें मैंने यहबता दिया थां कि भाभी मेरेसंग दिल्ली रहने कों आँ गयींथीं|
दीदी मुझे प्यार करो न completee - body-focused teasing - Kahani ab aur interesting hogi
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