दूध ना बख्शूंगी/ completee - prem kahani – New Episode
विवश विकास कों खूंटी सें जैकी बाली रस्सी कां सिरा खोलना हि पड़ा…सिरा खोलकर उसने रस्सी कों ढील दि ! !
कुन्दे मे रस्सी सरकी----जैकी कां बदन नीचे जाने लगा…पेर फर्श सें टिकगए, विकास बोला------“खोल तौ अपने बाप कों। "
हैरी नें उसी मुस्कान केँ संग कहा------"ये काम मोन्टो करेगा। "
मोन्टो नें हैरी कि तरफं देखकर दांत किटकिटाए विकास केँ अदिश पर्र उसे जैकी केँ नजदीक पहुचना हि पड़ा ----विकास नें औऱ ढील दि।
मीन्टो अपने दोनों पेरों पर्र खडा होकर बंधन खोलने लगा------हेरी दिलचस्प निगाहों सें मोन्टो कों हि देखरहा थां…अभि मोन्टो शायद पहली गांठ भि नहि खोल पाया थां कि विकास नें बिजली कि सि तेजी सें अपने, हाथ वाले सिरे कां फंदा हैरी कि तरफ़ उछाला।।।
फंदा हैरी केँ गले मे जा गिरा।
हैरी बौखालाया------उससे पहले कि वो कुछसमझ पाता, अपनेहाथ मे दबी रस्सी कों पकडे मोन्टो पूरी ताकत सें हाल केँ एक् कोने कि तरफभाग पड़ा------कुन्दे अंदर सें रस्सी खिंचती हि चली गई।
एक् झटका-सां लगा औऱ हैरी कां शरीरहवा मे लहराता हुआ तेजी सें छत कि तरफ़ बढा--------गर्दन पऱ फंदे केँ कसाव केँ कारण हैरी केँ कंठ सें घुटी… चीखें निकल गई जवकि-----!
"हा-हा-हा!" विकास पागलों केँ समान कह्रकहा लगांउठा।।
दृश्य भि बदल गय़ा थां।
॥॥॥॥॥
हैरीहवा मे झूलरहा थां !
गले मे फन्दा------गर्दन घुटंने केँ कारण चेहरा लाल होताजा रहा थां-वो अपने दोनों हाथो सें गले सें फन्दा निकालने कि असफल कोशिश करने लगा----बंधा जैकी हाँल केँ फर्श पर्र पड़ा थां….रस्सी कों मजबूती केँ संग पकडे मोन्टो एक् कोनै मे।
“अब ज़राहॉल केँ फर्श पर्र गिरकर दिखाओ बेटे?" पागलों कि तरह हसताहुआ विकास कहरहा थां…"बम बांधकर लाए थें…यदि कुछ करेंगे तोँ फर्श पर्र गिरने कि धमकी.!"
"फैंटास्टिक !" विजयकह उठा…"जियो प्यारे दिलजले क्याँ इलाज निकाला हैं!"
हैरीअब फंदे सें ध्यान हटाकर वेल्ट खोलने कि कोशिश करनेलगा थां।
फर्श पऱ पड़ा जैकी चीखा…“उसे रोको विकास-----यदि उसने बेल्ट खोलली तोँ…। खतरा विकास भि भांप चुका थां…भांपते हि उसनेहवा मे लटके हैरी पऱ जम्पलगा दि----बहा मे झूलते हुए हैरी कों पकड लिया उसने------एक् तेज झटकालगा।।।।
मोन्टो केँ लिएभार सम्भालना मुश्किल होँ गय़ा------बह रस्सी केँ खिंचाव केँ संग घिसटा।
हैरी औऱ विकास तेजी सें फर्श कि तरफ़आए।
जैकीचीख पंड़ा-----"सम्भालो मोन्टो----:---यदि बे फर्श सें टकरागए तौ बम.-।
मोन्टो नें पूरी ताकत सें स्वयं कों रोकर-------रस्सी खीची-फर्श पर्र टकराने सें पहले हि वेऊपर खिंचते चले गंए------हैरी फंदे मे औऱ विकास हैरी कों पकड़े लटकरहा थां-वे झूलगए।
रस्सी केँ उस सिरे पऱ दोनों कि लडाई जारी हौ गई---बे झूलेरहे थें-लड़ रहे थें----रस्सी कों तेज झटकेलग रहे थें---उधर मोन्टो कों यह झटके सहने कठिनपड रहे थें----हर झटके केँ संग जमीन सें उसके नन्है पांव उखड़ जाते---------हैरी औऱ विकास कां वजनउसे खदेड़ देता-----जितना वो खिदड़ता, उसी अनुपात मे गुंथे हुए हैरी औऱ विकास फर्श कि-तरफ आते।
॥॥॥॥॥
अजीब दृश्य थां----अजीब सनसनीखेज।
देखने वालो केँ प्राण खुश्क हौ गए------------चेहरे पीले…दिल बूरीतरह धक-धक करने लगे…बड्री हि बिचित्र स्थिति थि----
------मौत मात्र एक् समयदूर थि----फर्श कि तरफ वढ़ती------मोन्टो अपनी पूरी ताकत कां इस्तेमाल करकेफिन कुन्दे कि तरफखीच लेता।
सारा खेल…सबकी जिन्दगी गोन्टो केँ हाथ मे थि-------उसकी ताकत पर्र निर्भर थि…उधर हैरी लगातार अपनी बैल्ट कों खेलते कां प्रयास कररहा थां-----विकस कि कोशिश उस बैल्ट कों स्वयं कब्जाने कि थि…उसे छोड़कर विकास केँ फर्श पऱ कूद जाने कां अर्थ थां---हैरी कां बैल्ट खौल लेना औऱ फिनहाल केँ फर्श याँ किसी दीवार पर्र दे मारना---------दोनों कां वजन मोन्टो पर्र सम्भल नहि रहा थां-----उसके हाथ सें रस्सी निकल जाने कां अर्थ थां------हैरी ओंर विकाश कां फर्श पऱ गिर पड़ना !!
ऐसा होते हि हाल केँ परखच्चे उड जाने थें !!
जैकी-विजय-रघुनाथ--रैना--जूलिया आदिसब चीखरहे थें----मोन्टो कां हौंसला बढारहे थें-----उसे जोश दिलारहे थें---उन सबकी जिन्दगी कों मौत मे तब्दील कर देने बालाबम उसके हाथों मे झूलरहा थां-----मोन्टो केँ कमजोर पड़ते याँ हिम्मत, हारते हि सबकीमौत निश्चित थि।
फंदे मे लटका हैरी पागलों कि तरह अपने दोनों हाथो केँ दुहत्थड विकास केँ सिर मे माररहा थां-----बिकास केँ दोनों हाथ उसकीकमर मे बंधी बैल्ट मे घुसेहुए थें। मोन्टो केँ कमजोर पडने पर्र जबवे फर्श कि तरफआते तोँ देखने बालों कि चीखें निकल जाती।
यही दृश्य लगभग पांच पिनट तक रहा।
किर-जब विकास नें एक् तेज झटका दिया तौ बैल्ट टूट गई----बेल्ट टूटते हि वो तेजी सें फर्श कि तरफ़ गिरा-------एक् संगसब चीख पडे----------"सम्भलो विकास !"
विकास फर्श पऱ गिरा----चीखें निकल गई।
दूर तक लुढ़कता चला गय़ा, किंतु दाएंहाथ मे दबी बैल्ट कों लडके नें फ़र्श सें नं टकराने दिया वो हाथ उसनेहवा मे हि लहराए रखा----रूका----बैल्ट संभाले खडाहुआ।।।
सबने राहत कि सांसली।।
हैरीअब भि फंदे मे कैदबहा मे झूलरहा थां।
खतरा टलता देखते हि जैसे मोन्टो पागल हौ गय़ा----उसने एकदम रस्सी ढीली छोड़ दि…फ्रंदे केँ संग हि हैरी 'फड़ाक' " सें फर्श सें आँ टकराया----मोन्टो नें रस्सी खींची----------फिन छोड़ दि----हबा मे उठने केँ बाद हैरी कां जिमफिन फर्श सें टकराया।
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झुंझलाए सें मोन्टो नें बार-बार यही क्रिया दोहरानी शौरूकर दि----ठीक इसतरह, जैसे कुएं सें पानी भरताकोई आदमी-बार बार बाल्टी कों पानी कि सतह सें टकराता हैं।
विकास बैल्ट कों हाल केँ संग हि अटैच्ड स्टोर रूम मे लें गय़ा------बैल्ट कों स्टोर रूम मे रखकर वो तुरंत हि वापस आया----स्टोंर रूम केँ बाहर् कां ताला लगाकर उसने चाबी रोशनदान केँ जरिएहाल सें बाहर् फेक दि-----------तब बोला-"रूक जाओं मोन्टो ?"
मोन्टो रुक गय़ा।
उससमय हैरीछत केँ समीपहबा मे झूलरहा थां। उसकीतरफ देखते हुए विकास नें कहा-----“इसे नीचे उतारो। "
मोन्टो नें एकदम रस्सी छोड़ दि।
हैरी तेजी केँ संग गिरा औऱ "भड़ाक' सें फर्श सें टकराया।
“तुम् बीच मे नहि बोलोगे…मोन्टो-फैसला मात्र हम् दोनों केँ बीच होगा। "
हैरी केँ गले मे पडे फंदे कों ढीला करके विकास नें निकालते हुए कहा----------"तुम् जैकी गुरु कों उसीतरह लटकाकर रस्सी खूंटी मे बांधो। "
आजाद होते हि हैरी नें दोनों जूतों कां प्रहार विकास कि छाती पऱ किया।
एक् चीख केँ संग विकास हवा मे उछलकर दूरजा गिरा, मगर गिरते हि जबरदस्त फुर्ती केँ संग उछलकर खडा भि होँ गय़ा ॥
-इधर हैरी भि गुर्राकर खडा हौ चुका थां।
वे आमने सामने थें-----हैरी औऱ विकास।
दो बराबर लम्बाइयां।
दोनों केँ चेहरे पर्र वाशियाना भाव-आंखों मे खून----गुस्से सें जले भूने-----विकास गुर्राया-----"बम बांधकर आया थां सोचा तौ यह होगा कि केँ सामने इस हाॅल सें निकल जाओगे ?"
दोनों केँ चेहरे पऱ वाशियाना भाव-आंखों मे खून----गुस्से सें जले भूने-----विकास गुर्राया-----"बम बांधकर आया थां सोचा तौ यह होगा कि केँ सामने इस हाॅल सें निकल जाओगे ?"
"रोक तौ तुँ मुझेअब भि नहि सकेगा हैरामी !"
विकास नें उछलकर फ्ताइंग किक मारी--------हैरी फर्श पऱ गिरा----विकास कि ठोकर उसके चेहरे पर्र पडी----फिन उठा---ठोकर फिन चेहरे पऱ----फिन उठा------इस बार हैरी नें उसका जूता पकडकर टांग मरोडी-चकरधिन्नी कि तरह घूमकऱ विकास फर्श सें जा टकराया।
वे भिड़ चुके थें !
जंगली शेरों कि तरह----एक्-दूसरे केँ खून केँ प्यासे होकर।
रैना औऱ जूलिया चीखरही -रैना विकास सें इस खूनी लडाई कों बंद करने केँ लिएकह रही थि तोँ जूलिया हैरी सें -----विजय औऱ जैकी चीख-चीखकर दोनों सें हि कहरहे थें।
मगर एक् भि तोँ नं माना-------एक् नें भि तौ नं सुनी।
मोन्टो नें अपनाकाम कर दिया थां।
दोनों हि लड़ते रहे-----दरिन्दो कि तरहा पांच मिनट-दस मिनट--पन्द्रह, बीस, पच्चीस औऱ तीस मिनटखाद वे दोनों हि खून सें लथपथ होँ गए------हाॅल केँ फर्श पऱ भि जैसेखून कि पुताई होँ गई-किसी कों नहि मालूम थां कि खूऩ कां कौंन-सां ज़र्रा हैरी कां हैं औऱ कौन-सां विकास कां।
ऐसा महसूस होँ रहा थां, जैसेवे अभि…अभि खून केँ किसी दरिया सें निकलकर आएहों !
अपने जिगर केँ टुकडो कों ऐसी अवस्था मे देखकर तौ रैना औऱ जूलिया कलेजे फटगए। बुरीतरह बिलखती हुईँ वेइस खूनीखेल कों वन्द करने केँ लिए कहती रहीं।।।।
विजय औऱ जैकी जैसे जांवाजों केँ कलेजे थर्रा गए ----गुलफाम जैसा दहाड़े मार-मारकर रो पड़ा-अशरफ, विक्रम,, नाहर, परवेज, आशा औऱ अजय केँ तोँ होश हि फाख्ता होँ गए।
मोन्टो तक केँ नन्हें सें शरीर-----कां एक्-एक् रोयां खडा होँ गय़ा।
उन सबके मनोभावनों सें लापरवाह विकास नें हैरी केँ खून सें लथपथ शरीर कों सिर सें ऊपर उठाकर पूरी बेरहमी केँ संग फर्श पऱ दे मारा ----------
उन सबके मनोभावनों सें लापरवाह विकास नें हैरी केँ खून सें लथपथ शरीर कों सिर सें ऊपर उठाकर पूरी बेरहमी केँ संग फर्श पर्र दे मारा ----------एक् चीख केँ संग हैरी लुढ़कता हि चला गय़ा.…अभि वो फर्श सें उठ भि नहि पाया थां विकास नें झपटकर उसकेखून सें लथपथबाल पकडे----ऊपर उठाया औऱ सिर कि भरपूर टक्कर उसके चेहरे पर्र मारी। खून ताजा हौ उठा !!!!!
हैरी केँ हाथ-पैर ढीले पड़ने लगे-------जबकि इसबात कि परवाह किए बिना विकास उसे मारता हि चला गय़ा-----हेरी कि गूंजती हुई चीखें भि धीमी पडतीजा रहीथीं।
हैरीमेँ बिरोध कि ताकत-नं रही।
"मोन्टो!" विकास दहाड़ा----"चाकू ला !
मोन्टो हिचका----आदेश कां पालन नहि किया उसने।
हैरी केँ बाल पकड़े हि विकास मोन्टो कि तरफ घूमकर कर गरजा-----"सुना नंहीँ तूने?"
मोन्टो सहम गय़ा-----हाथ जेब मे पहुँचा-----कांपत्ते हुए मोन्टो नें चाकू विकास कि तरफ़ उछाल दिया-एक् हाथ सें बाल पकड़े विकास नें, दूसरे हाथ सें चाकू लपका-बटन दबाया।
क्लिक --- चाकूखुल गय़ा!!!
अभि उसने चाकू हैरी केँ सीनेमेँ घोंपने केँ लिएहवा मे उठाया हि थां कि रैनाचीख पडी---------"नहि विकास-नहीं… तुम्हें पेरीशपथ मेरे लाल…मेरे दूध कि शपथ तुझें !"
"मा.माँ…!" दहाड़ता हुआ लड़का उसकीतरफ घूमा।
बुरी तरंह बिलखती हुई रैनाकह उठी------------यदि तूने जूलिया बेहन केँ अरमानों कां खूनइस तरह बहाया तौ हें तुम्हे कभीदूध नाँ बख्शूंगी------मे अपनीजान दे दूंगी विकास ------ मेरे बेटे…जैसे तुँ मुझें प्यारा हैं, उसीतरह जूलिया बेहन कों हैरी प्यारा हैं। छोड़दे!"
"'म._.मम्मी तुम् पागल होँ गई हौ क्याँ?" हैरी केँ बाल छोड़कर विकास वहशियों केँ समान चीखा------पागलों कि तरह दोढ़कर रैना केँ नजदीक पहुंचा…गुस्से कि अधिकता मे चाकू
हवा मे उठाकर चीख पड़ा--"म.मम्मी।.मैँ तुम्ही कों।। "
"म.मार डाल-मुझे मारडाल विकास-मगर हेरी कों बख्श दे----मै तेरेहाथ जोड़ती दूं…दूघ कां वास्ता देती हूं?"
"दूध.दूध.दूध.दूध पिलाया हि क्यूं थां मुझें---------म.माँ-----यदि तेरादूध पीकरआज इतना बड़ा न् हुआ होता तोँ तेरी शपथ------तेरी मांग मे भि सिन्दूर कि शपथ----इस कुत्ते कि बोटी-बोटी करकेइस मुल्क केँ खेतो मे बिखेर देता मे। "
"व.विकास'…स्वयं कों सम्भाल मेरे लाल------इतना जोश--इतनी देशभक्ति भि ठीक नहि। ”।.
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चाकूहाथ मे लिए वो घूमा…किसी पागल सें कम नहि लगरहा थां लडका----`हैरी केँ सामने पहुंचा---- चाकू अभि तक हाथ मे थां…एक् हाथ सें उसका गिरेबान पकडा-बुरी तरह झंझोड़ता हुआ चीखा। खून केँ बदलेखून करता हैं नां हैरी-----तूँ जान केँ बदलेजान हाथ केँ बदलेहाथ लेता हैं न् कमीने--तेरा इंतकाम पूरा होगा…किसी औऱ केँ हाथ लेने कि कोशिश क्यूं कि तूने….…यह हाथ लें----------जिसने तेरे बाप कां हाथ काटा थां-------यह ओहमैँ स्वयं दूगा तेरी। "
कहने केँ संग हि गुस्से मे उफनते हुए विकास नें अपना चाकू बालाहाथ दूसरे हाथ मे मारने केँ लिएहवा मे उठाया तेजी सें बाएंहाथ कि तरफबढा।
"न्…नहि नहि----!" हर एक् कंठ सें चीख निकल गई।
विकास कां हाथबीच हि मे लहरा उठा-------कलाई हैरी केँ मजबूत हाथ मे थि औऱ वो हैरी थां…जोँ चीख-चीखकर कहरहा थां------"ब.वस। विकास औऱ जलील न् कर साथी-मै गलत थां-----घर्मयुद्ध मे हाथ कां बदला लेने नहि निकलना चाहिए थां मुझे। "
"येहाथ कटना हि चाहिए-इसने गुरु कां हाथ काटा हैं। " चीखने केँ संग हि जब विकास नें एक् झटके केँ संग अपनी कलाई छुडा ली---तौ हैरी नें अपनी पूरी ताकत सें उसके जबडे पऱ मूसा मारा----चीख केँ संगहवा मे लहराकर बिकास दुरजा गिरा---------++- उसकेहाथ सें चाकू निकल गय़ा-------------ज़ब वो फर्श पऱ पड़ा थां, तौ हैरीचीख रहा थां…“हरामजादे----कुत्ते---जौ स्वयं शर्मिन्दा हे…उसे औऱ ज़्यादा जलील करकै क्याँ तुँ खुदकुशी केँ लिए मजबूर करना चाहता हैं----क्षमा करदे दोस्त-----क्याँ यह चाहता हैं बेवफा कि साथी होकर तेरे क्रदर्मो मे गिरू------तेरे पेर पकड़कर माफी मांगू तुझसे ?"
"ह.हैरी !"
बुरीतरह बिलखता हैरीचीख पड़ा.--"यह नहि होगा विकास-----तेरा मित्र हू कुत्ते औऱ यार पैरों मे गिरकर माफी नहि मांगा करते--------पेर निहीं पकडूंगा तेरे-----तेरी मर्जी…क्षमा करके मेरेगले सें आँ लिपट याँ चाकू सें अपनाहाथ काटकर हैरी कों खुदकुशी केँ लिए मजबूर करदे। "
"ह…हैरी !"
" माफकर दे दोस्त !"
"ह।.हेरी…मेरे मित्र !" विकास दौडकर उससे लिपट गय़ा…हैरी नें उसे बाँहों मे कस लिया-एक्-दूसरे सें लिपटे वे दोनों लम्बे लड़के तरहरो रहे थें-बिलख-बिलखकर। जबकि शेष केँ होठो पर्र जिंदगी कि मुस्कान दौड़ गई।
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