धोबन और उसका बेटा - ma beta ki sex - Real Kahani Part 1
धोबन औऱ उसका बेटा
चेतावनी.दोस्तो यह स्टोरी समाज केँ नियमो केँ खिलाफ हैं क्योंकि हमारा समाजमा बेटे औऱ भइया बेहन औऱ बाप बेटी केँ रिश्ते कों सबसे पवित्र नाता मानता हैं अतःजिन भाइयो कों इन रिश्तो कि कहानियाँ पढ़ने सें अरुचि होती होँ वो यहकथा नां पढ़े क्योंकि यह स्टोरी एक् पारवारिक सेक्स कि कथा हैं
बात बहोत पुरानी हैं पऱ आज आप् लोगो केँ संग बाटने कां मन किया
इसलिये बतारहा हू। हमारा परिवारिक काम धोबी (वाशमॅन) कां थां
हम् लोग एक् छ्होटे सें गाओं मे रहते थें औऱ वाहा गाओं मे धोबियों
कां एक् हि घऱ हैं इसीलिए हम् लोग कों हि गाओं केँ सारे कपड़े साफ
करने कों मिलते थें। मेरे परिवार मे मे मेरी एक् बेहन औऱ मा
पापा हैं। गाओं केँ महॉल मे लरकियों कि कमउमर मे शादिया हौ
जाती हैं इसीलिए जैसे हि मेरी बेहन कि उमर 16 साल कि हुई उसकी
विवाह कर दि गई औऱ वोँ पारोष केँ गाओं मे चली गई। पिछले एक्
साल सें घऱ मे अब्ब मे औऱ मेरीमा औऱ पिताजी केँ अलावा कोई नहीं
बचा थां मेरीउमर इस वक़्त 15 साल कि होँ गई थि औऱ मेरा भि
सोलहवा साल चलनेलगा थां। गाओं केँ विद्यालय मे हि पढ़ाई लिखाई
चालू थि। हमारा एक् छ्होटा सां खेत थां जिस पर्र पापा काम करते
थें औऱ मे औऱ मा नें कपड़े सॉफ करने कां काम सम्भहाल रखा थां.
कुल मिलाकर हम् बहोत सुखी सम्पन थें औऱ किसी चीज़ कि दिक्कत
नहीं थि। मेरे सें पहले कपड़े साफ करने मे मा कां हाथ मेरी बेहन
बेटाटी थि मगरअब मे यहकाम करता थां। हम् दोनोमा बेटेहर
वीक मे दोबार नदी पर्र जाते थें औऱ सफाई करते थें फिनघऱ
आकरउन कपड़ो कि इस्त्री कर केँ उन्हे गाओं मे वापस लौटाकर फिन
सें पुराने गंदे कपड़े एकतेकर लेते थें। हर बुधवार औऱ शनिवार
कों मे सुभह 9 बजे केँ वक़्त मे औऱ मा एक् छ्होटे सें गढ़े पर्र
पुराने कपड़े लादकर नदी कि ओर निकल परते। हम् गाओं केँ पास बहने
वालीनदी मे कपड़े नाँ धोकर गाओं सें थोरादूर जाकर सुनसान
स्थान पर्र कपड़े धोते थें क्योंकि गाओं केँ पास वालीनदी पर्र साफ
पानी भि नहीं मिलता थां औऱ डिस्टर्बेन्स भि बहोत होता थां.
अब मे ज़रा अपनीमा केँ बारे मे बतादू वोँ 34-35 साल केँ उमर कि
एक् बहोत खूबसूरत गोरी च्चीती महिला हैं। ज़यादा लंबी तौ नहीं परन्तु
उसकी लंबाई 5 फुट 3 इंच कि हैं औऱ मेरी 5 फुट 7 इंच कि हैं। मा
देखने मे बहोत खूबसूरत हैं। धोबियों मे वैसे भि गोरारंग औऱ
खूबसूरत होनाकोई नईबात नहीं हैं। मा केँ हसीन होने केँ कारण गाओं
केँ लोगो कि नज़र भि उसकेउपर रहती होगीऐसा मे समझता हू। औऱ
शायदइसी कारण सें वोँ कपड़े धोने केँ लिए सुन-सन स्थान पर्र जानां
ज़यादा पसन्द करती थि। सबसे आकर्षक उसके मोटे मोटे चूतर औऱ
नारियल केँ जैसी मम्मों थें। जोँ कि ऐसा लगते थें जैसे कि ब्लाउस कों
फार केँ निकल जाएँगे औऱ भाले कि तरह सें नुकीले थें। उसके चूतर
भि कम सेक्सी नहीं थें औऱ जब वोँ चलती थि तौ ऐसे मतकते थें कि
देखने वाले केँ उसके हिलते गांद कों देखकर हिल जाते थें। पऱ उस
समय मुझेइन बातो कां कम हि ज्ञान थां फिन भि तोरा बहोत तोँ गाओं
केँ लड़को कि संग रहने केँ कारणपता चल हि गय़ा थां। औऱ जब भि
मे औऱ मा कपड़े धोने जाते तोँ मे बरी खुशी केँ संग कपड़े
धोने उसकेसंग जाता थां.
जबमा कपड़े कों नदी केँ किनारे धोने केँ लिए बैठती थि तब वोँ
अपनी सारी औऱ पेटिकोट कों घुटनो तक उपरउठा लेती थि औऱ फिन
पिच्चे एक् पठार पर्र बैठकर धीरे-धीरे दोनो टाँगे फैलाकर जैसा
कि औरते पेशाब करनेसमय करती हैं कपरो कों सॉफ करती थि। मे
भि अपनी लूँगी कों जाँघ तक उठाकर कपड़े साफ करता रहता थां। इस
स्थिति मे मा कि गोरी गोरी टाँगे मुझे देखने कों मिल जाती थि औऱ
उसकी सारी भि सिमटकर उसके ब्लाउस केँ बीच मे आँ जाती थि औऱ
उसके मोटे मोटे चुचो केँ ब्लाउस केँ उपर सें दर्शन होते रहते थें.
कईबार उसकी सारी जेंघो केँ उपर तक उठ जाती थि औऱ ऐसे वक़्त
मे उसकी गोरी गोरी मोटी मोटी केले केँ ताने जैसे चिकनी जाँघो कों
देखकर मेरा लन्ड खरा हौ जाता थां। मेरेमन मे कई प्रश्न उठने
लगतेफिन मे अपनासिर झटककर काम करने लगता थां। मे औऱ मा
कपरो कि सफाई केँ संग-संग तरह-तरह कि गाओंघऱ कि बाते भि
करते जातेकई बार हम् उस सुन-सन स्थान पर्र ऐसा कुच्छ दिख जाता
थां जिसको देख केँ हम् दोनो एक् दूसरे सें अपना मुँह च्छुपाने लगते थें.
कपड़े धोने केँ बाद हम् वही पऱ नहाते थें औऱ फिनसंग लाएहुआ
खानां खानदी केँ किनारे सुखाए हुए कपड़े कों इक्कथा कर केँ घऱ
वापसलौट जाते थें। मे तोँ खैर लूँगी पहनकर नदी केँ अंदर
कमर तक पानी मे नहाता थां, मगरमा नदी केँ किनारे हि बैठ
कर नहाती थि। नहाने केँ लिएमा सबसे पहले अपनी सारी उतरती थि
फिन अपने पेटिकोट केँ नारे कों खोलकर पेटिकोट उपर कों सरकाकर
अपने दाँत सें पाकर लेती थि इस तरीके सें उसकीपीठ तोँ दिखती थि
मगरआगे सें ब्लाउस पूराधक जाता थां फिन वोँ पेटिकोट कों दाँत सें
पाकरे हुए हि अंदरहाथ डालकर अपने ब्लाउस कों खोलकर उतरती थि
औऱ फिन पेटिकोट कों छाति केँ उपर बाँध देती थि जिस सें उसके
चुचे पूरीतरह सें पेटिकोट सें ढक जाते थें औऱ कुच्छ भि
नज़र नहींआता थां औऱ घुटनो तक पूरा जिस्म ढक जाता थां। फिन वोँ
वही पर्र नदी केँ किनारे बैठकर एक् बारे सें जाग सें पानीभर भर
केँ पहले अपने पूरे जिस्म कों रगर-रगर करसॉफ करती थि औऱ
साबुन लगाती थि फिननदी मे उतरकर नहाती थि। मा कि देखा
देखी मैने भि पहलेनदी केँ किनारे बैठकर अपने शरीर कों साफ
करना सुरूकर दियाफिन मे नदी मे डुबकी लगा केँ नहाने लगा.
मे जब साबुन लगाता तोँ मे अपने हाथो कों अपने लूँगी केँ घुसा केँ
पूरे लन्ड आंड गांद पर्र चारोतरफ घुमा घुमा केँ साबुन लगा केँ
सफाई करता थां क्यूं मे भि मा कि तरह बहोत सफाई पसन्द थां.
जब मे ऐसाकर रहा होता तौ मैनेकई बार देखा कि माबरे गौर
सें मुझे देखती रहती थि औऱ अपनेपेर कि आरिया पठार पऱ धीरे-धीरे
धीरे-धीरे रगर केँ सॉफ करती होती। मे सोचता थां वोँ सयद इसलिये
देखती हैं कि मे ठीक सें सफाई करताहू याँ नहीं इसलिये मे भि
बारे धीरे-धीरे खूब दिखा दिखा केँ साबुन लगता थां कि कही दाँत नाँ
सुनने कों मिलजाए कि ठीक सें सॉफ सफाई कां ध्यान नहीं रखताहू
मे। मे अपने लूँगी केँ भीतर पूराहाथ डाल केँ अपने लौरे कों
अcचे तरीके सें साफ करता थां इसकाम मे मैने नोटीस कियाकई
बार मेरी लूँगी भि इधरउधर होँ जाती थि जससेमा कों मेरे लन्ड कि
एक् आध जहलक भि दिख जाती थि। जब पहलीबार ऐसाहुआ तोँ मुझे
लगा कि शायदमा डातेगी मगरऐसा कुच्छ नहींहुआ। तब निश्चिंत हौ
गय़ा औऱ मज़े सें अपना पूराढयन सॉफ सफाई पर्र लगाने लगा.
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मा कि सुंदरता देखकर मेरा भि मनकईबार ललचा जाता थां औऱ
मे भि चाहता थां कि मे उसे साफाई करतेहुए देखु पऱ वोँ ज़यादा
कुच्छ देखने नहीं देती थि औऱ घुटनो तक कि सफाई करती थि औऱ फिन
बरी सावधानी सें अपने हाथो कों अपने पेटिकोट केँ अंदर लें जाकर
अपनी च्चती कि सफाई करती जैसे हि मे उसकीओर देखता तोँ वोँ अपना
हाथ च्चती मे सें निकलकर अपने हाथो कि सफाई मे जुट जाती
थि। इसीलिए मे कुछ नहींदेख पता थां औऱ चुकी वोँ घुटनो कों
मोड़ केँ अपने छाति सें सताएहुए होती थि इसीलये पेटिकोट केँ उपर
सें छाति कि झलक मिलनी चाहिए वोँ भि नहींमिल पाती थि। इसी
तरह जब वोँ अपने पेटिकोट केँ अंदरहाथ घुसाकर अपने जेंघो
औऱ उसकेबीच कि सफाई करती थि यह ध्यान रखती कि मे उसेदेख
रहाहू याँ नहीं। जैसे हि मे उसकीओर घूमता वोँ झट सें अपनाहाथ
निकाल लेती थि औऱ अपने जिस्म पर्र पानी डालने लगती थि। मे मन
मसोस केँ रह जाता थां। एक् दिन सफाई करते करतेमा कां ध्यान शायद
मेरीतरफ सें हट गय़ा थां औऱ बरे धीरे-धीरे अपने पेटिकोट कों अपने
जेंघो तक उठा केँ सफाईकर रही थि। उसकी गोरी चिकनी जघो कों
देखकर मेरा लन्ड खरा होनेलगा औऱ मे जौ कि इससमय अपनी
लूँगी कों ढीलाकर केँ अपने हाथो कों लूँगी केँ अंदरडाल कर अपने
लन्ड कि सफाईकर रहा थां धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने लन्ड कों मसल्ने लगा.
तभी अचानक मा कि नज़र मेरेउपर गई औऱ उसने अपनाहाथ निकल
लिया औऱ अपने जिस्म पऱ पानी डालती हुइ बोलीं "क्याँ कररहा हैं जल्द
सें नहा केँ काम ख़तमकर" मेरे तौ होश हि उरगये औऱ मे जल्द
सें नदी मे जाने केँ लिएउठ करखरा होँ गय़ा, पर्र मुझेइस बात
कां तोँ ध्यान हि नहींरहा कि मेरी लूँगी तौ खुली हुइ हैं औऱ मेरी
लूँगी सरसारते हुए नीचेगिर गई। मेरा पूरा जिस्म नंगा हौ गय़ा औऱ
मेरा 8.5 इंच कां लन्ड जौ कि पूरीतरह सें खरा थां धूप कि रोशनी
मे नज़रआने लगा। मैने देखा कि मा एक् समय केँ लिए चकित होँ
कर मेरे पूरे जिस्म औऱ नंगे लन्ड कि ओर देखती रह गई मैने जल्द
सें अपनी लूँगी उठाई औऱ चुपचाप पानी मे घुस गय़ा। मुझेबरा
डरलगरहा थां कि अब क्याँ होगाअब तोँ पक्की डाँट परेगी औऱ
मैने कनखियो सें मा कि ओर देखा तौ पाया कि
वोँ अपनेसिर कों नीचे किया हल्के हल्के मुस्कुरा रही हैं औऱ अपने
पैरो पर्र अपनेहाथ चला केँ सफाईकर रही हैं। मे नें राहत कि
सांशली। औऱ चुपचाप नहाने लगा.उस दिन हम् जायदातर चुपचाप
हि रहे.घऱ वापस लौटते वक्त भि मा ज़यादा नहीं बोलि.
दूसरे दिन सें मैने देखा कि मा मेरेसंग कुछ ज़यादा हि खुलकर
हँसी मज़ाक करती रहती थि औऱ हमरेबीच डबल मीनिंग मे भि
बाते होनेलगी थि। पता नहींमा कों पता थां याँ नहीं पर्र मुझेबरा
मजा आँ रहा थां। मैनेजब भि किसी केँ घऱ सें कापरे लेँ कर वापस
लौटता तोँ मा बोलती "क्यूं राधिया केँ कापरे भि लाया हैं धोने केँ
लिए क्याँ"। तौ मे बोलता, `हा', इसपर वोँ बोलती "ठीक हैं तूँ धोना
उसके कापरे बरा गंदा करती हैं। उसकी सलवार तोँ मुझसे धोइ नहीं
जाती".फिन पूछती थि "अंदर केँ कापरे भि धोने केँ लिएदिए हैं
क्याँ" अंदर केँ कपरो सें उसका मतलब पनटी औऱ ब्रा याँ फिन अंगिया सें
होता थां, मे कहता नहीं तोँ इस पऱ हसने लगती औऱ कहती "तुँ लरका
हैं नाँ शायद इसीलिए तुम्हारी तरफ नहीं दिया होगा, देख अगलीबार जब मे
माँगने जाऊंगी तौ अवश्य देगी"फिन अगलीबार जब वोँ कापरे लाने जाती तोँ
सचमुच मे वोँ उसकी पनटी औऱ अंगिया लेँ केँ आती थि औऱ
बोलती "देख मे नां कहती थि कि वोँ तेरी नहीं देगी औऱ मुझेदे
देगी, तुँ लरका हैं नां तेरे कों देने मे शरमाती होंगी, फिन तूँ तोँ अब
जवान भि होँ गय़ा हैं" मे अंजान बना पुछ्ता क्याँ देने मे
शरमाती हैं राधिया तौ मुझे उसकी पनटी औऱ ब्रा याँ अंगिया फैलाकर
दिखती औऱ मुस्कुराते हुए बोलती "लेँ स्वयं हि देख लें" इस पर्र मे
शर्मा जाता औऱ कनखियों सें देखकर मुँह घुमा लेता तोँ वोँ
बोलती "अर्रे शरमाता क्यूं हैं, यह भि तेरे कों हि धोना परेगा" कह
केँ हसने लगती। हलकी आक्च्युयली ऐसा कुच्छ नहीं होता औऱ जायदातर
मर्दो केँ कापरे मे औऱ औरतो केँ मा हि धोया करती थि क्योंकि उस
मे ज़यादा मेहनत लगती थि, पऱ पता नहीं क्यूं माअबकुछ दीनो सें
इसतरह कि बातो मे ज़यादा इंटेरेस्ट लेनेलगी थि। मे भि चुप
चाप उसकी बाते सुनता रहता औऱ मज़े सें जवाब देता रहता थां.
जब हम् नदी पऱ कापरे धोने जातेतब भि मे देखता थां कि माअब
पहले सें थोरी ज़यादा खुलेतौर पऱ पेशआती थि। पहले वोँ मेरी
तरफ पीठ करके अपने ब्लाउस कों खोलती थि औऱ पेटिकोट कों अपनी
च्चती पऱ बाँधने केँ बाद हि मेरीतरफ घूमती थि, पर्र अब वोँ इस
पर्र ध्यान नहीं देती औऱ मेरीतरफ घूमकर अपने ब्लाउस कों खोलती
औऱ मेरे हि सामने बैठकर मेरेसंग हि नहाने लगती, जब कि पहले
वोँ मेरे नहाने तक इंतेज़ार करती थि औऱ जब मे थोरादूर जा केँ
बैठ जातातब पूरा नहाती थि।
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मेरे नहाते वाक़ूत उसका मुझे घूर्ना
बदस्तूर जारी थां औऱ मेरे मे भि हिम्मत आँ गई थि औऱ मे भि
जब वोँ अपने च्चातियों कि सफाईकर रही होती तौ उसेदेख कर देखता
रहता.मा भि मज़े सें अपने पेटिकोट कों जेंघो तक उठाकर एक्
पठार पऱ बैठ जाती औऱ साबुन लगाती औऱ ऐसे आक्टिंग करती जैसे
मुझेदेख हि नहींरही हैं। उसके दोनो घुटने मूरेहुए होते थें औऱ
एक् पेर थोरा पहलेआगे पसारती औऱ उस पऱ पूरा जाँघो तक साबुन
लगाती थि फिन पहलेपेर कों मोरेकर दूसरे पेर कों फैलाकर साबुन
लगाती। पूरा अंदर तक साबुन लगाने केँ लिए वोँ अपने घुटने मोरे
रखती औऱ अपनेबाए हाथ सें अपने पेटिकोट कों थोराउठा केँ याँ अलग
कर केँ दाहिने हाथ कों अंदरडाल केँ साबुन लगाती। मे चुकी थोरी
दूर पर्र उसकेबगल मे बैठा होता इसीलिए मुझे पेटिकोट केँ
अनादर कां नज़ारा तोँ नहीं मिलता थां, जिसके कारण सें मे मन मसोस केँ
रह जाता थां कि काश मे सामने होता, पर्र इतने मे हि मुझे ग़ज़ब
कां मजा आँ जाता थां। औऱ उसकी नंगी चिकनी चिकनी जंघेउपर तक
दिख जाती थि। मा अपनेहाथ सें साबुन लगाने केँ बादबरे मग कों
उठा केँ उसका पानी सीधे अपने पेटिकोट केँ अंदरदल देती औऱ दूसरे
हाथ सें संग हि संग रगर्ति भि रहती थि। यह इतना जबरदस्त सीन
होता थां कि मेरा तौ लन्ड खरा होँ केँ फुफ्करने लगता औऱ मे वही
नहाते नाहटे अपने लन्ड कों मसल्ने लगता.जब मेरे सें बर्दस्त नहीं
होता तौ मे सिडानदी मे कमर तक पानी मे उतर जाता औऱ पानी
केँ अंदरहाथ सें अपने लन्ड कों पाकरकर खरा होँ जाता औऱ मा कि
तरफघूम जाता.जब वोँ मुझे पानी मे इसतरह सें उसकीतरफ घूम
कर नहाते देखती तोँ वोँ मुस्कुरा केँ मेरीतरफ देखती हुईँ बोलती "
ज़यादा दूरमत जानां किनारे पर्र हि नहा लेँ आगे पानी बहोत गहरा हैं",
मे कुकछ नहीं बोलता औऱ अपने हाथो सें अपने लन्ड कों मसालते हुए
नहाने कि आक्टिंग करता रहता.इधर मा मेरीतरफ देखती हुईँ अपने
हाथो कों उपरउठा उठा केँ अपने कांख कि सफाई करतीकभी अपने
हाथो कों अपने पेटिकोट मे घुसा केँ च्चती कों साफ करतीकभी
जेंघो केँ बीचहाथ घुसा केँ खूब तेरज़ी सें हाथ चलने लगती, दूर
सें कोई देखे तौ ऐसा लगेगा केँ मूठमार रही हैं औऱ सयद मारती
भि होगी.कभी कभी वोँ भि खरे होँ नदी मे उतर जाती औऱ ऐसे
मे उसका पेटिकोट जोँ कि उसके जिस्म चिपका हुआ होता थां गीला होने
केँ कारण मेरी हालत औऱ ज़यादा खराबकर देता थां। पेटिकोट
छिपकने केँ कारण उसकीबरी बरी चुचिया नुमाया होँ जाती थि। कापरे
केँ उपर सें उसकेबरे बरे मोटे मोटे निपल तक दिखने लगते थें.
पेटिकोट उसके चूटरो सें चिपककर उसकेगंद केँ दरार मे फसा
हुआ होता थां औऱ उसकेबरे बरे चूतरसाफ साफ दिखाई देते रहते
थें। वोँ भि कमर तक पानी मे मेरेठीक सामने आँ केँ खरी हौ केँ
डुबकी लगाने लगती औऱ मुझे अपने चुचियों कां नज़ारा करवाती जाती.
मे तोँ वहीनदी मे हि लन्ड मसल केँ मूठमार लेता थां। हलकी
मूठ मारना मेरीआदत नहीं थि घऱ पऱ मे यहकाम कभी नहीं
करता थां पर्र जब सें मा केँ स्वाभाव मे चेंजआया थां नदी पऱ
मेरी हालतऐसे होँ जाती थि कि मे मज़बूर हौ जाता थां.
अब तोँ घऱ पऱ मे जब भि इस्त्री करने बैठता तौ मुझे बोलती
जाती"देख ध्यान सें इस्त्री करियो पिच्छली बार शयामा बोलरही थि
कि उसके ब्लाउस ठीक सें इस्त्री नहीं थें" मे भि बोल परता"ठीक हैं
कर दूँगा, इतना छ्होटा सां ब्लाउस तोँ पहनती हैं, ढंग सें इस्त्री भि
नहीं होँ पति, पता नहीं केसेकाम चलती हैं इतने छ्होटे सें ब्लाउस
मे" तौ मा बोलती "अरे उसकी च्चाटिया ज़यादा बरी थोरे हि हैं जौ वोँ
बरा ब्लाउस पहनेगी, हा उसकी सासू माँ केँ ब्लाउस बहोत बरेबरे हैं
बुधिया कि च्चती पहर जैसी हैं" कहकरमा हासणे लगती.फिन मेरे
सें बोलती"तुँ सबके ब्लाउस कि लंबाई चौरई देखता रहता हैं क्याँ याँ
फिन इस्त्री करता हैं"। मे क्याँ बोलता चुपछाप सिर झुकाकर इस्त्री
करतेहुए धीरे-धीरे सें बोलता "अर्रे देखता कौन हैं, नज़रचली जाती
हैं, बस"। इस्त्री करते करते मेरा पूरा शरीर पसीने सें नहा जाता
थां। मे मात्र लूँगी पहने इस्त्री कररहा होता थां। मा मुझे
पसीने सें नहाएहुए देखकर बोलती "छ्होर अब तूँ कुच्छ आरामकर लें
तब तक मे इस्त्री करतीहू, " मायहकाम करने लगती। थोरी हि देर
मे उसके माथे सें भि पसीना चुने लगता औऱ वोँ अपनी सारीखोल कर
एक् ओरफेक देती औऱ बोलती "बरी गर्मी हैं रे, पता नहीं तुँ केसेकर
लेता हैं इतने कपरो कि इस्त्री मेरे सें तोँ यह गर्मी बर्दस्त नहीं होती"
इस पर्र मे वहीपास बैठा उसके नंगेपेट, गहरी नाभि औऱ मोटे
चुचो कों देखता हुआ बोलता,
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