नंगी लड़की देखने की जिज्ञासा - padosi ki beti – New Episode
मैंने कहा- तुँ इतन अच्छा चूसती हैं, इसका तौ यहहाल होना हि थां। कहां सें सीखायह सभी?
नीलम मुझसे बोलीं- ये बताओ कि तेरे कों मज़ाआया याँ नहि?
‘अरे बहोत आनंदआया। पऱ तुम् तौ बड़ी पक्की खिलाड़ी हौ औऱ मुझसे तौ कहरही थि कि व्यक्ति कां लण्ड देखने कि तुम्हारी बहोत जिज्ञासा हैं?
‘अरे वोँ तौ मे मजाककर रही थि। मैंने तौ तुम्हारी जिज्ञासा कों शान्त करने केँ लियेयह सभी किया थां। ’
‘वोँ केसे?’ मैंने पूछा, तोँ वोँ बोलीं- वैसे तोँ जब भि कभी मे अपने प्रश्न तुमसे पूछती थि, तोँ तुम् मेरीतरफ देखे बिना मेरे प्रश्न बता देते थें। पऱ जब मे उसदिन फ्राक पहनकर आई थि, औऱ गलती सें मेरे टांगों कि तरफ तुमने देखा औऱ उसी वक़्त मुझे तख्त पर्र बैठने कों कहा, उस टाइम तौ मे नहि समझपाई पऱ जब मे घऱ गई औऱ कपड़े बदलने लगीतभी मुझे अपनी गलती कां अहसास हुआ। मुझेलगा कि मुझे फ्राक पहनकर तुम्हारे पास नहि आनां चाहिये थां औऱ उस पर्र ये कि मैंने पैन्टी भि नहि पहनी थि। मे तुम्हें देख्ना चाहती थि यदि मे दूसरे दिन भि फ्राक पहनकर जाऊँ तौ तुम्हारा रिएक्शन क्याँ होगा। मगर जबउसदिन भि तुमने मुझे बिस्तर पर्र बैठने केँ लियेकहा तौ मे समझ गई कि तुम् क्याँ चाहते होँ। इसलिये मे उसदिन सें प्रतीक्षा कररही थि कि कब तुमको मे घऱ मे अकेला पाऊँ औऱ तुम्हारी जिज्ञासा कों शान्त करूँ।
‘अच्छा एक् बात तौ बताओ, तुम् इतनासभी केसे जानती होँ… इसतरह लण्ड चूसना, पहले सें तोँ चुदी हुईँ हौ क्याँ?’
‘नहि…’ नीलम बोलीं- पहले सें तौ नहि चुदी हूं… हाँ पऱ यहसभी मैंने अपने भैया-भाभी कि रतिक्रिया केँ कारण सीखा हैं। मेरे भैया-भाभी रतिक्रिया करते टाइम बड़े उन्मुक्त रहते हें। मुझेयाद हैं कि ये उनके सुहागरात वाली घटना हैं।
भैया औऱ भाभी कि विवाह लव मैरिज थि, इसलिये उनमें कोई हिचकिचाहट नहि थि, रात केँ साढ़े बारहबज रहे होंगे, तभी भैया केँ कमरे सें आती हुईँ आवाज़ सुनाई पड़ी:
भैया कहरहे थें- बबली तेरी गाण्ड बड़ी मादरचोद हौ रही हैं।
भाभी बोलीं- ‘हाँ, तुँ तौ ऐसेबोल रहा हैं कि मे दस-बीस व्यक्ति सें चुदवा कर आँ रही हूं। तुमने तौ हि मेरेसभी छेद कों अपने लण्ड सें खोलकर भोसड़ा बना दिया हैं। मुँह, चूत, गाण्ड सभी मे हि अपना लण्डडाल करहोल पोलकर दिया हैं। ’
मेरामन उनकेरूम मे झांककर देखने कां करनेलगा। मे उठी औऱ उनकेरूम केँ उस स्थान कों तलाशने लगी, जहाँ सें मे अन्दर देख सकूँ।
तभी मुझे भाभी कि आवाज़ सुनाई पड़ी, वोँ भैया सें कहरही थि- जानू, जरा सि खिड़की तौ खोलदो, बड़ी गर्मी होँ रही हैं।
भैया बोले- रहनेदो, हम् लोगों कों कोईइस तरहदेख लेगा।
भाभी बोलीं- एक् नीलम कां हि तौ रूम अपनेबगल मे हैं, औऱ किसका हैं? औऱ वोँ तौ सोरही हैं औऱ अगर उसने गलती सें देख भि लीया तौ वोँ भि कुछ हम् लोगों सें सीखेगी हि औऱ मज़ा भि लेगी कि केसे उसके भैया उसकी भाभी कों चोदते हें।
इतना सुनना थां कि मेरे रोंगटे खड़े हौ गये।
तभी भाभी बोलीं- कितनी ठंडीहवा मेरे नंगे शरीर पर्र पड़रही हैं। आओ, जल्द सें मेरी बुर चाटो, इसमें बड़ी खुजली हौ रही हैं, बड़ीदेर सें इसकारस तुम्हारे मुँह मे जाने केँ लियेतरस रहा हैं।
इतना सुनने केँ बाद मुझेउन लोंगों कि रतिक्रिया कों देखने कि ख़्वाहिश हुइ औऱ मे उनके कमरे कि खिड़की कि तरफचल दि।
मैंने झाँका तोँ देखा भाभी अपनी एक् टांग भैया केँ कंधे पर्र क्रास डालाहुआ हैं औऱ भाभी नें भैया कां सरठीक उसी प्रकार अपने चूत सें चिपका रखी थि, जैसे मैंने तुम्हारे संग किया थां।
भाभीकह रही थि- ओ मेरे राजाचूस मेरी बुर कों… चाट मेरी बुर कों… बड़ा आनंद आँ रहा हैं। कितना अच्छा चाटता हैं रे मेरे राजा।
दो-तीन मिनटों बाद भाभी घुटनों केँ बल बैठी औऱ भैया कां लौड़ा मुँह मे लेकर चूसने लगी। फिन भैया नें भाभी कों गोद मे उठाया औऱ खाट पर्र लेँ गये औऱ वहा पऱ तोँ औऱ गजब कां नजारा थां।
भैया खाट पर्र पीठ केँ बललेट गये, भाभी उनके मुँह कि तरफ अपनी गाण्ड कि औऱ भैया कां लण्ड पकड़कर अपने मुँह मे लेनेलगी।
उधर भैया भि कभी भाभी कि गाण्ड मे उँगली करतेहुए चूत चाटते तौ कभी उनकी गाण्ड चाटते।
उनकीइस हरकत कों देखकर मेराहाथ अपने आप् मेरे चूत कों सहलाने लगा। मे जल्दी दौड़कर अपने कमरे मे गई औऱ पजामी औऱ चड्डी उतारकर फिन सें उनके कमरे मे झांकने लगी।
इतने मे भाभी बोलीं- मेरा निकलने वाला हैं, मे गय्यई…
इतना कहकर वोँ ढीलीपड़ गई औऱ अहह…ओह… अहह… कि आवाज़ निकालने लगी।
इतने मे भैया बोले- बबली, मेरा भि निकलने वाला हैं जल्द सें मेरे लौड़े कों मुँह मे लो।
भाभी नें जल्दी हि भैया केँ लौड़े कों अपने मुँह मे भर लिया औऱ उनके लौड़े केँ रस कों पीनेलगी।
पूरारस चूसने केँ बाद भाभी उनकेबगल मे लेट गई औऱ एक्-दूसरे केँ होंठों कों चूसने लगे, फिन भैया भाभी सें बोले- बबली, तुम् चूत औऱ गाण्ड कों एक् संग चटवा लेती हौ औऱ पूरा आनंद लेँ लेती हौ, मेरी गाण्ड कां क्याँ होगा?
भाभी बोलि- ठीक हैं, चलो पोजीशन बदल करके 69 कि अवस्था मे आँ जाओ।
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मे तुम्हारी गाण्ड चाटते-चाटते लौड़ा खड़ा करती हूं औऱ तुम् मेरी चूत चाटकर मेरे चूत मे गरमी पैदाकरो ताकि चुदाई कां भि कार्यक्रम शुरुआत किया जाये।
उसकेबाद भाभी औऱ भैया पोजिशन बदलकर 69 कि अवस्था मे आँ गये, भाभी भैया कि गाण्ड चाटरही थि औऱ लौड़ा चूसरही थि औऱ भैया भाभी कि चूत चाटरहे थें।
जिस टाइम भाभी भैया कां लण्डचूस रही थि उनके मम्मे बड़ी तेजी-तेजी हिलरहे थें औऱ भैया उन स्तन कों पकड़कर दबाने कि कोशिश कररहे थें। थोड़ी देरबाद भैया कां नागफिन सें तनकर खड़ा हौ गय़ा, भैया नें भाभी कों अपनेऊपर सें हटाया औऱ उनको नीचे लेटाकर उनके चूत मे अपने लण्ड कों सेट करके एक् हि झटके मे अपना पूरा कां पूरा लण्ड उनकी बुर मे डाल दिया।
अब वोँ आसन बदल-बदल कर रतिक्रिया कररहे थें। कभी भैया नीचे लेटते औऱ भाभी भैया केँ ऊपर भैया केँ निप्पल पकड़कर उछलकूद मचाती तौ कभी भैया भाभी कों घोड़ी बनाकर उनकी बुर कां भुर्ता बनाते औऱ संग हि संग गाली देतेहुए उनकी गाण्ड मे चपत रसीदकर देते।
दर्द सें भाभी बिलबिला उठती औऱ बोलती- भोसड़ी केँ… कितना मेरे गाण्ड कि धुनाई करेगा? अभि हाथ सें माररहा हैं औऱ फिन लण्ड सें इसको धुनेगा।
‘चूत चोदी… तेरी गाण्ड हैं हि इतनी मस्त कि मेरा लौड़ा अपने आप् मार्ग भटकते हुए तेरी गाण्ड मे चला जाता हैं। ’ इतना कहकर भैया हँसने लगे औऱ भाभी भि ओ-आँ-ओकर रही थि।
तभी भैया बोले-आज चूत औऱ गाण्ड एक् संग हि चोद देता हूं, बहुतथक गय़ा हूं॰॰॰
‘हाँ दोस्त, थक तोँ मे भि गई हूं। जल्द सें दो-चार धक्के मेरी गाण्ड मे भि लगादो, मुझे भि बहोत नींद आँ रही हैं, भाभी बोलीं।
इतना सुनते हि भैया बोले- तोँ ठीक हैं गाण्ड ढीली छोड़।
‘दोस्त मेरी गाण्ड कों खोलकर केँ थोड़ी चाट भि लो ताकि सुरसुराहट कम हौ जाये। ’
भाभी केँ इतना बोलते हि भैया नें अपना लण्ड निकाला औऱ भाभी कि गाण्ड कों थोडा सां ढीला किया औऱ अपनीजीभ वहालगा दि।
उनकोइस तरह करतेदेख पता नहि मेरी उंगली कब मेरी योनि केँ अन्दर चली गई औऱ मे कबझर गई, मुझेपता नहि चला।
जब मेराहाथ पूरा गीला होँ गय़ा तबपता लगा कि मे भि झर चुकी हूं। जब मैंने अपनाहाथ देखा तौ वोँ पूरा मेरेरस सें सनाहुआ थां।
भैया कि बात मेरे कानों मे गूंजरही थि ‘बबली, तेरारस तौ बहोत मजेदार हैं। ’ औऱ पता नहि कब मेरी हथेली मेरी मुँह केँ पास आँ गई औऱ मेरीजीभ हथेली पर्र चलनेलगी। मुझे मेरेरस कां स्वाद बड़ा मजेदार लगरहा थां।
तभी भाभी कि दबी-दबी सि चीख सुनाई दि- अबे लौड़े कि धीरे-धीरे सें अपना लौड़ा अन्दर डाल। मे कोई रंडी नहि हूं तेरी पत्नि हूं। इसी झटके सें अपनी बेहन कि गाण्ड मारे तोँ जानू!!!
तब भैया बोले- जानू नाराज मत होँ। लो धीरे धीरेडाल रहा हूं।
5-7 मिनटबाद भैया बोले- जानू, मे झरने वाला हूं। तेरी गाण्ड मे झरूँ कि मुँह मे???
‘नहि गाण्ड मे नहि, मेरे मुँह मे अपनामाल निकाल। आज अपनी सुहागरात हैं। अपना तोहफा लिये बगैर नहि छोड़ूँगी। ’
‘तौ खोल अपना मुँह, मे आया। ’ इतना कहकर भैया अपना लौड़ा हिलाने लगे औऱ अपना पूरा वीर्य भाभी केँ मुँह मे डाल दिया औऱ भाभी उसको पूरागटक गई।
तब भैया बोले- मेरा तोहफा तोँ दो मुझे।
इतना सुनते हि भाभी नें अपनाहाथ अपने चूत मे डाला औऱ वहा सें रस निकाल करके भैया कों चटाने लगी।
फिन भैया कि आवाज़ आई- मेरेपास तुम्हारे लिये एक् तोहफा औऱ हैं। मगर उससे पहले एक् काम औऱ हैं उसको निपटा दे…
इतना कहकर भैया नें भाभी केँ चूतड़ों केँ नीचे सें हाथडाल कर उठाया औऱ खिड़की कि तरफआने लगे।
उनको खिड़की कि तरफआता देख मे भि अपनेरूम केँ ओट मे हौ गई ये देखने केँ लिये कि अब भैया भाभी क्याँ करेगें।
देखा कि भैया नें भाभी कों उठाकर खिड़की पऱ बैठा दिया औऱ बोलेलो अबमूत लोमगर ध्यान रखना कि सुभह सबसे पहले बारजा धो लेना।
जब भाभीमूत ली तौ भैया बोले- मे तेरे लिये सोने केँ कंगन औऱ सेक्सी ब्रा औऱ पैंटी लाया हूं, कल सुभहपहन लेना।
इतना कहकर दोनों सोने केँ लियेचले गये।
एक् बार मे फिन उनकी खिड़की कि तरफचल दि तोँ दोनों हि नंगे एक्-दूसरे सें चिपककर कों रहे थें।
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उनको खिड़की कि तरफआता देख मे भि अपनेरूम केँ ओट मे हौ गई ये देखने केँ लिये कि अब भैया भाभी क्याँ करेगें।
देखा कि भैया नें भाभी कों उठाकर खिड़की पऱ बैठा दिया औऱ बोलेलो अबमूत लोमगर ध्यान रखना कि सुभह सबसे पहले बारजा धो लेना।
जब भाभीमूत ली तौ भैया बोले- मे तेरे लिये सोने केँ कंगन औऱ सेक्सी ब्रा औऱ पैंटी लाया हूं, कल सुभहपहन लेना।
इतना कहकर दोनों सोने केँ लियेचले गये।
एक् बार मे फिन उनकी खिड़की कि तरफचल दि तोँ दोनों हि नंगे एक्-दूसरे सें चिपककर कों रहे थें।
उसकेबाद मैंने भि अपने पूरे कपड़े उतरे औऱ सोने केँ लियेचल दि।
भैया-भाभी कि चुदाई कि स्टोरी सुनाने केँ बाद नीलम नें मेरे होंठो कों चूमना शुरुआत कर दिया। एक् तरीके सें वो मेरीजीभ कां भि रसास्वादन कररही थि।
रसास्वादन करते-करते नीलम बोलीं- शरदआज मे तुमसे चुदने हि आई हूं, आज मुझेजी भर केँ चोदो… मेरी जन्म-जन्म कि प्यास बुझादो।
मे अगर अपनीबात कहूँ तोँ नीलम केँ अलावा उसतरह कां सेक्स कां आनंद मुझेफिन कभी नहि आया।
नीलम धीरे-धीरे सें मेरे निप्पल कों चाटरही थि औऱ बीच-बीच मे वोँ दाँत गड़ा देती जिसका असरये होता कि मे भि उसके निप्पल कों पकड़कर मरोड़ देता, जिससे वोँ सिसकारने लग जाती।
‘शरद मेरी एक् बात मानोगे?’
‘हाँकहो…’
‘जैसा-जैसा मे कहूँ, वैसा-वैसा तुम् करना, मे तुम्हें स्वर्ग कां आनन्द दूँगी। औऱ येमत बोल्ना ये गन्दा हैं, वोँ गन्दा हैं… बस करते जानां। ’
‘ठीक हैं आज मे तुम्हारी सभीबात मानूगा। मे संग हि संग उसकी चूत मे उँगली करनेलगा, वोँ गीली होँ चुकी थि औऱ उसकारस मेरे हाथो मे थां।
तभी उसने मेराहाथ पकड़ा औऱ अपने पूरे शरीर कों टच करतेहुए उँगली कों अपने मुँह मे लें गई औऱ रस कों चूस लिया औऱ अपनीजीभ मेरे मे डाल दि।
हम् लोग 69 कि अवस्था मे आँ गये, वोँ मेरा लण्डचूस रही थि औऱ मे उसकी बुर कों चाटरहा थां औऱ उसकी बुर सें आतेहुए रस कां मज़ा लें रहा थां, ऐसालग रहा थां कि जैसे मे कोई मलाईचाट रहा हूं।
इतने मे मे भि झर गय़ा औऱ उसने भि मेरी मलाई कों पूराचाट गई। फिन हम् दोनों एक् दूसरे सें अलगहुए औऱ थोड़ी देर निढाल होकर जमीन पऱ हि लेटे पड़ेरहे औऱ नीलम बड़े प्रेम सें मेरे लौड़े कों पकड़कर सहलारही थि औऱ मे उसकी मम्मों कों दबाता तौ कभी उसके निप्पल मे चिकोटी कटाता।
नीलम मुझसे बिल्कुल सटकर लेटी थि औऱ अपनी एक् टांग मेरे जांघों केँ ऊपररखे हुए थि।
कभी-कभी तोँ मेरे सुपाड़े केँ आवरण कों बड़ी बेदर्दी सें इस प्रकार नीचे कि ओर करती थि कि मेरे मुँह सें हल्की सि सीत्कार निकल जाती थि औऱ फिन अपने नाखून सें उसकटी हुइ स्थान कों कुरेदती थि।
उसकीइस हरकत सें जहाँ मीठा-मीठा दर्द होता थां वहीं एक् अजीब सि उत्तेजना बढ़ती जाती थि औऱ इस कारण मेरा लण्डफिन सें खड़ा होकर केँ अकड़ने लगा।
लण्ड महराज कों अकड़ता देख वोँ धीरे-धीरे सें मुस्कुराई औऱ बोलि- बड़ा अकड़रहा हैं, रूकजा थोड़ी देर मे तेरी अकड़ निकालती हूं।
इतना कहते हि नीलमउठी औऱ तेजी सें किचन कि ओर गई औऱ वहा सें एक् कटोरी मे तेल लें आई, धार बनाकर मेरे लण्ड पऱ तेल उड़ेली औऱ लण्ड कों तेल सें सरोबार कर दिया।
फिन स्वयं भि जमीन पऱ लेटकर अपनी टांगों कों उठाकर अपनेसर सें मिलाते हुए बोलि- मेरे राजा, अपनी उँगली सें तेल लेँ-लें कर मेरे बुर केँ छेद मे डालो ताकिये भि चिकनी हौ जाये।
मैंने उसकेकहे अनुसार किया, उसकेबाद बबली नें पास पड़ी बिस्तर सें रजाई जमीन पऱ बिछाई औऱ अपने चूतड़ केँ नीचे तकिया रखा, उसकेऐसा करते हि उसकी बुर उपर कि ओरउठ गई औऱ बुर कां मुहाना दिखने लगा।
मैंने भि घुटने केँ बलबैठ कर अपनी पोजीशन पकड़ी औऱ अपने लण्ड कों सेट करके धक्का मारा, मगर लण्ड अन्दर न् जाकरऊपर निकल गय़ा।
फिन नीलम नें अपनेहाथ सें अपनी बुर कों थोडा सां फैलाया औऱ मैंने लण्ड कों धीरे-धीरे सें सेट करके अन्दर झटके सें डाला।
नीलम एक् बारगी तौ चिल्ला उठी औऱ मुझे धक्के देकर हटाने लगी औऱ बोलि- कमीने हट… कमीने बहोत दर्द हौ रहा हैं।
मगर मुझेलगा कि मे अपना लण्ड निकाल नहि सकता हूं, इसलिये मे थोडा रूककर उसकेदूध केँ निप्पल कों चूसने लगा।
जब कुछदेर बाद उसका दर्दकम हुआ तौ अपने चूतड़ कों उठाकर मेरे लण्ड कों अन्दर लेने कि कोशिश करनेलगी औऱ मेरेकान मे बोलि- मेरे राजा, इसको फाड़दो।
उसकीइस बात कों सुनकर मे भि लण्ड कों अन्दर-बाहर् करनेलगा।
धीरे धीरे वोँ बड़बड़ाने लगी-चोद मेरे कों चोद, फाड़दे मेरी चूत कों। कब सें तड़पा रही थि यह मादरचोद।
औऱ पता नहि क्याँ-क्याँ बोलेजा रही थि।
थोड़ी देरबाद मेराबदन अकड़ने लगा औऱ मे खलास होकर उसकेऊपर गिर गय़ा औऱ थोड़ी देर उसकेऊपर लेटारहा। फिन उसने मुझे धीरे-धीरे सें हटाया औऱ खड़ी हुईँ औऱ जब उसकीनजर निकले हुएखून पऱ पड़ी तोँ हँसकर बोलीं- देख तूने तोँ मेराखून बहा दिया…
इतना कहकर वोँ पानी सें भराहुआ मगलाई औऱ अपनी बुर कों साफ करनेलगी फिन बड़े प्रेम सें मेरे लण्ड कों साफ किया औऱ ऊपर सें मेरा कुर्ता पहनकर चादर कों लेकर बाथरूम मे गई औऱ चादर कों अच्छे सें साफ किया।
बाथरूम सें निकलकर उसने क्रीम कों उँगली मे लेकर अपने चूत मे डालकर क्रीम लगाने लगी।
मैंने पूछा-ये क्याँ कररही होँ?
तौ बोलि- थोड़ी जलन होँ रही हैं, इसलिये क्रीम लगारही हूं।
फिन मेरे लण्ड कि तरफ देखकर मुस्कुरा केँ बोलीं- देख कैसा मुरझाया सां लटका हैं, अभि थोड़ी देर पहले केसे अकड़रहा थां। अब देखो तौ पूरी अकड़ निकाल दि नाँ।
‘नीलम क्याँ मेरे लियेगरम चाय बनाओगी? औऱ ये क्याँ… मे पूरा नंगा हूं औऱ तुम् कुर्ता पहनी हौ?’
‘लो बाबा, यह लो… कहकर कुर्ता उतारकर मुझेदे दिया औऱ गरमचाय बनाने लगी।
गरम चाय बनाते वक्तजब नीलम केँ कूल्हे हिलरहे थें तौ उसको देखकर मेरे लण्ड नें फिन सें फुँफकार मारनी शुरुआत कर दि।
नीलम नें गरमचाय दि औऱ मेरीगोद मे बैठते हुए बोलि- लोगरम चाय केँ संग बिस्कुट भि खालो।
इतना कहकर उसनेलपक कर केँ मेरे लौड़े कों पकड़ा औऱ अपनी बुर मे डाल लिया- राजा तुम् मेरे कों आजचोद केँ मस्तकर दो।
फिन वोँ मेरे कानों कों अपने होंठों सें किटकिटाए जारही थि।
मैंने थोड़ी देर केँ बाद नीलम कों उसीतरह गोद मे उठाया औऱ डायनिंग टेबल पऱ पटक दिया औऱ उसके दोनो पैरों कों अपने कंधे पर्र रखकरजोर सें धक्के पे धक्के देता गय़ा।
चोदते हुए उसकी हिलती हुई मम्मों देख्ना बड़ा हि सुंदर थां।
उसदिन वास्तव मे मेरी जिज्ञासा शान्त हुईँ थि कि मैंने नीलम कों कई आसनों सें चोदा औऱ चुदाई कां पहलापाठ सीखा।
तौ दोस्तो, अगली किस्सा मे नीलम औऱ मैंने क्याँ-क्याँ मस्ती कि औऱ बबली यानी नीलम कि भाभीकिस प्रकार मुझसे चुदी,
ये मे आप् लोगों कों बताऊँगा।
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