निशा के पापा ( INCEST) - papa ki god - Real Kahani Part 1
निशा अपने बापू कि गोद मे बैठ तोँ गई, | मगर उसके चूतडों मे दलीप कां लन्ड बुरीतरह सें चुभरहा थां इसलिये वोँ बारबार वहां सें उठने कि कोशिश कररही थि |
"क्याँ हुआ बेटी बारबार क्यूं उठरही होँ" दलीप नें अपनी बेटी कों कमर सें पकडेहुए हि कहा, “कुछ नहि पिताजी बसऐसे हि" निशा अपने बापू कां प्रश्न सुनकर लज्जा सें पानी पानी होतेहुए बोलीं। औऱ मजबूरन वोँ अब बिना हिले अपने पिता कि गोद मे बैठीरही |
निशा कों महसूस हौ रहा थां कि उसके पिताजी कां लन्ड उसकेचुप होकर बैठने केँ बाद बुरीतरह सें उसके चूतडों केँ बीच घुसकर चुभरहा थां | निशा कों कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां कि वोँ क्याँ करे, "बेटी तुम्हें पता हैं बचपन मे तुम् मेरीगोद मे बैठकर हि खानां खाती थि“ दलीप नें निशा केँ चुप होकर बैठने केँ बाद अपनेहाथ कों उसकीकमर सें लेजाकर उसके चिकने पेट पर्र रखतेहुए कहा.!
दोस्तों एक् नयी किस्सा पोस्ट करनेजा रहा हूं | ये स्टोरी बाप बेटी सेक्स पर्र बेस्ड हैं | अगर आप् बाप बेटी केँ रिश्ते मे सेक्स पसन्द नहि करते तौ आगेमत पड़ें |
mazedar
निशा के पापा ( INCEST) - papa ki god – New Episode
निशा नें अपने बापू कि बात कां कोई जवाब नहि दिया औऱ चुपचाप वहीँ पर्र बैठीरही | अचानक दलीप नें अपना मुंह निशा कि पीठ पऱ रख दिया औऱ वोँ अपनेहाथ कों अपनी बेटी केँ जवान चिकने पेट पऱ फेरने लगा | अपने पिता केँ हाथ कों अपनेपेट औऱ उसके मुंह कों अपनीपीठ पऱ महसूस करके निशा कि सांसें बहोत जोर सें चलनेलगी औऱ उसे अपने पूरेबदन मे अजीब किस्म कि सिहरन कां एहसास होनेलगा |
निशा भि अब गर्म होनेलगी थि औऱ उसे अपने पिता कि हरकतों सें मजा आँ रहा थां | निशा इतनागरम होँ गई थि कि अब वोँ स्वयं अपने चूतडों कों जोरलगा कर अपने पिता केँ लन्ड पऱ दबाकर हिलारही थि, “बेटी तुमने तोँ आज मुझे तेरे बचपन कि याद दिला दि, तुँ बता तुम्हें केसा महसूस हौ रहा हैं ?” दलीप नें अपनी बेटी केँ चूतडों केँ हिलने सें खुश होतेहुए उससे प्रश्न किया |
"बापू मुझे अच्छा लगरहा हैं " निशा नें मात्र इतनाकहा | निशा कि बात सुनकर दलीप कों जैसे ग्रीन सिग्नल मिल गय़ा | इसीलिए दलीप नें अब अपनेहाथ कों अपनी बेटी केँ चिकने पेट सें फिसलाते हुएऊपर उसकी चुचियों केँ लगभग लें जानेलगा | अपने पिताजी केँ हाथ कों अपनी चुचियों कि तरफ जातेहुए देखकर निशा कि सांसें बहोत जोर सें चलनेलगी औऱ उसकादिल अगलेसमय केँ बारे मे सोचकर बहोत जोर सें धडकने लागा |
दलीप कां हाथ उसकी बेटी कि चुचियों केँ बिलकुल नज़दीक पहुंच चूका थां औऱ वोँ अपनेहाथ कों बिना रोकेऊपर करताजा रहा थां | निशा महसूस कररही थि कि उसके पिता कां हाथ जैसे जैसे उसकी चुचियों केँ लगभग हौ रहा थां वैसे वैसे उसका लन्ड जोर केँ झटकेखा रहा थां औऱ उसकी सांसें तेज़ होतीजा रही थि |
"नहि बापूबस" अचानक निशा कों जाने क्याँ हुआ |उसने अपनेहाथ कों अपने पिताजी केँ हाथ पर्र रख दिया औऱ उसकेहाथ कों अपनी चुचियों केँ पास हि रोक दिया, "अरे सॉरी बेटी मे तौ भूल हि गय़ा कि हमारी बेटी जवान हौ चुकी हैं, लगता हैं अब तुम्हारे लिए जल्द हि कोई दूल्हा ढूँढना पड़ेगा” दलीप नें निशा केँ हाथ कों अपनेहाथ पऱ पड़ते हि कहा |
“बापूअब मे जाऊं?" निशा नें तेज़ सांसें लेतेहुए पूछा | “बेटी बस एक् बार मुझे तुम् एक् किसदे दो, जैसे बचपन मे टॉफ़ी लेने केँ बाद देती थि”, दलीप नें अपनी बेटी केँ पेट सें अपनेहाथ कों हटाते हुएकहा |
“पिताजी मुझसे नहि होगा, मुझे लज्जा आँ रही हैं", निशा नें जल्द सें अपने पिता कि गोद सें उठकर उसके लगभग हि सोफे पर्र बैठते हुएकहा |
निशा कि हालत बहोत खराब होँ चुकी थि | उसकी बुर सें उतेजना केँ मारे पानीटपक रहा थां |
"बेटी अपने पिता सें कैसी लज्जा ? ठीक हैं अगर तुम् शर्मा रही हौ, तौ मे हि तुम्हें किसकर देता हूं" दलीप नें निशा कि बातसुन करखुश होतेहुए कहा |
अपने पिता कि बात सुनकर निशा कि हालत औऱ अधिक खराब होनेलगी क्योंकि अब दलीप स्वयं उसेकिस करने वाला थां |
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निशा के पापा ( INCEST) - papa ki god – New Episode
“बेटी ऐसाकरो तुम् अपनासर मेरीगोद मे रखकर अपनी आँखें बंदकर लो, मे स्वयं हि अपनीफूल जैसी बेटी कां किस लूँगा”, दलीप नें निशा केँ हाथ कों पकड़कर उसे अपनेपास खींचते हुएकहा | निशा कों तौ कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां कि वोँ क्याँ करे, बसउसे चुपचाप अपने पिता कि बात कों मानना थां | इसीलिए वोँ चुपचाप अपने पिता कि गोद मे सर रखकरलेट गयीँ, |
“ओह्ह्ह्हह्ह मेरी स्वीटी तुम् कितनी अच्छी हौ”, दलीप नें अपनी बेटी केँ सर कों अपनीगोद मे महसूस करते हि खुश होतेहुए कहा औऱ अपनेहाथ सें निशा केँ एक् गाल कि चिकोटी लेँ ली | दलीपअब थोडा झुककर अपनी बेटी कों किस करने केँ लिए निचे झुकने लगा | निशा नें जैसे हि देखा कि उसका बाप उसेकिस करने केँ लिए निचे होँ रहा हैं | उसने अपनी आँखों कों बंदकर लिया |
उत्तेजना केँ मारे निशा कि साँसें अब भि बहोत जोर सें चलरही थि | दलीप नीचे झुकते हुए अपनी बेटी कि चुचियों कों बहोत गौर सें देखरहा थां क्योंकि निशा कि बड़ी बड़ी चूचियां बहोत जोर सें ऊपर निचे होँ रही थि | दलीप नें एक् नज़र अपनी बेटी केँ गुलाबी लबों पऱ डाली औऱ अपने होंठों कों उसकेगाल पर्र रख दिया |
निशा कों जैसे हि अपने पिता केँ होंठ अपनेगाल पर्र महसूस हुए उसकी बुर सें उत्तेजना केँ मारे बहोत अधिक पानी निकलने लगा | दलीप अपने होंठों कों वैसे हि अपनी बेटी केँ गालों पऱ रखेहुए उसके होंठों कों देखरहा थां | दलीप कां दिलकर रहा थां कि अभि अपनी बेटी केँ होंठों कों अपने मुंह मे लेकरजी भरकर चूसेमगर वोँ ऐसा नहि कर सकता थां |
“आहाहा पिताजी अबहटो नाँ” निशा नें सिसकते हुएकहा |
“बेटी इतने सालों बाद तुम्हें किस किया हैं कि अब तुमसे दूर हटने कां मन हि नहि कररहा” दलीप नें अपनी बेटी केँ गालों पऱ वैसे हि अपनामूह रखेहुए उसकी साँसों कों अपने होंठों सें टकराते हुए महसूस करकेकहा | दलीपब अपने होंठों कों अपनी बेटी केँ गालों पर्र रगड़ते हुए उसके होंठों केँ लगभग लें जानेलगा |
“आहाहाहा पिताजी बस करिए नां क्याँ कररहे हें” निशा कि आँखें बंद थि, मगर वोँ अपने पिता केँ लबों केँ हिलने सें समझ चुकी थि कि उसका पिता अपने लबों कों उसके होंठों केँ लगभगला रहा हैं |
“बेटी थोडीदेर चुपरहो औऱ मुझे अपनी गुडिया सें खेलने दो” दलीप नें अपनी बेटी केँ होंठों केँ बिलकुल लगभग पहुँचते हुएकहा |
निशा नें अपने बापू कि सांसों कों अपनेमूह केँ इतना लगभग महसूस करके अपनी आखों कों खोल दिया | निशा नें जैसे हि अपनी आँखों कों खोला उसके सामने अपने पिता कां चेहरा आँ गय़ा, दलीप नें जैसे हि देखा कि उसकी बेटी नें अपनी आँखें खोल दि हें, उसने जल्द सें अपने होंठों कों अपनी बेटी केँ गुलाबी होंठों पर्र रख दिया |
निशा कां पूराबदन वैसे हि बहोत ज़्यादा गर्म होँ चूका थां जैसे हि उसने अपने होंठों पऱ अपने पिता केँ होंठों कों महसूस किया वोँ अपनेहोश खो बैठी औऱ उसकी बुर सें पानी कि नदियाँ बहनेलगी | निशा कों उस वक्त स्वयं समझ मे नहि आँ रहा थां कि आज उसकेसंग क्याँ हौ रहा हैं | निशा नें मज़े सें अपने पिता केँ बालों कों जोर सें पकड लिया औऱ अपने होंठों कों जोर सें अपने पिता केँ मूह मे दबाने लगी |
निशा मे आये अचानक इस बदलाव कों देखकर दलीप भि हैरान होँ गय़ा औऱ वोँ अपनी बेटी केँ होंठों कों बुरीतरह सें चूसने लगा | निशा कों तौ कोईहोश हि नहि थां | जैसे हि वोँ मज़े कि दुनिया सें निकली तौ उसे अहसास हुआ कि उसने क्याँ कर दिया हैं | निशा नें जल्द सें अपने पिता केँ बालों मे सें अपने हाथों कों हटाकर उसे धक्का देतेहुए अपने आप् सें दूरकर दिया औऱ भागते हुए वहां सें निकलकर अपने कमरे मे आँ गई |
निशा बाथरूम मे घुस गयीँ, निशा नें जल्द सें अपने कपडे उतारे औऱ शावर केँ निचेआकर ठन्डे पानी सें अपनेबदन कों शांत करनेलगी मगर अपने गर्मबदन पर्र ठंडा पानी पड़ते हि उसकाबदन ठंडा होने कि बजाय अधिकगरम होनेलगा |
निशा कां बदनअब भि अपने पिता केँ संग होने वालेसीन कों सोचकर गरम होँ रहा थां उसे स्वयं समझ मे नहि आँ रहा थां कि आजउसे क्याँ हौ गय़ा हैं | वोँ एक् बार झडकर भि इतनीगरम क्यूं हैं | निशा कों अचानक एक् आईडिया आया औऱ वोँ बाथरूम मे निचे बैठकर ऊँगली कों अपनी बुर मे डालकर अन्दर बाहर् करनेलगी, निशा अपनी ऊँगली कों तेज़ी केँ संग अपनी बुर मे अन्दर बाहर् करतेहुए अपने पिताजी केँ संग होने वालीकिस कों यादकर रही थि, 5 मिनट मे हि निशा कां बदन झटके खातेहुए झडनेलगा |
निशा कों झडने केँ बादकुछ चैन महसूस होनेलगा औऱ वोँ अपनेबदन कों शावर केँ निचे लें जाकर ठंडा करनेलगी | निशा 20 मिनट तक अपनेबदन पर्र ठंडा पानी गिराती रहीतब जाकर उसकाबदन पूरीतरह ठंडाहुआ औऱ वोँ अपने कपडे पहनकर बाथरूम सें बाहर् निकलआई | उसनेकुछ फैसला कर लिया थां |
निशा कां दिल बहोत जोर सें धडकरहा थां | निशा कां ये सोचकर हि हाल बुरा होँ रहा थां कि अगले लम्हा क्याँ होने वाला हैं | ये सोचते हुए निशा कां पूराबदन तपकरगरम हौ चूका थां औऱ वोँ अपने पिताजी केँ कमरे तक पहुच गई औऱ द्वार (दरवाज़ा) खोलकर अंदरचली गई, |
निशा के पापा ( INCEST) - papa ki god - Continue reading next part
Ankit wrote:क्याँ bat bhay tusi too chha gaye superb thanks bro
bandhu kaafi hot updates haen
भइयामजा आँ रहा हैं आपकी स्टोरी पढ़कर बहोत हि हॉट स्टोरी हैं
यार आपकी दोनो कहानियाँ सूपरहिट हें
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