हाए मम्मी मेरी लुल्ली..........completee - body-focused teasing - Complete Kahani Part 1
आज सुभह सें सलोनी कां मूड बिगड़ा हुआ थां, क्याँ वजह थि वोँ स्वयं नहि जानती थि | “कैसा बकवास दिन हैं” वोँ स्वयं कों बोलती हैं | पूरेघऱ मे ऐसी शांति थि कि घऱ कि हर चीज़ सें नीरसता झलकरही थि | तीन बेडरूम कां घऱ बहुत खुला डुला थां | मगरउस उदासी औऱ सन्नाटे मे वोँ घऱ अपने असली अकार सें कुछ जयादा हि बड़ाजान पड़ता थां |
सलोनी कां मनघऱ केँ किसीकाम मे नहि लगरहा थां | उसकेसर मे हल्का सां सरदर्द भि थां | शायदरात कों नाँ सो सकने कि वजह सें थां | पिछले पूरेदिन वोँ घऱ कि साफ़ सफाई मे व्यस्त थि, उसेलगा थां शायदरात कों वोँ अच्छी नींदसो सकेगी मगर थकान औऱ हलके जिस्म दर्द केँ बीच भि वोँ सोने मे असफलरही थि औऱ पूरीरात करवटें बदलते गुजरी थि |
सलोनी कां पति सुभाष पिछले हफ्ते सें दुसरे शहर मे थां | वोँ एक् कंस्ट्रक्शन कंपनी मे जूनियर इंजिनियर थां | पगार अच्छी होने कि वजह सें वोँ किसीकाम सें इन्कार नहि करता थां, इसीलिए इसबार जब दुसरे शहर मे चलरहे किसी प्रोजेक्ट केँ लिए कंपनी कों एक् इंजिनियर भेजना थां तौ केवलवही राजीहुआ थां बाकीसभी बहाने बनाने लगे | उसकी मेहनत औऱ काम केँ लिए इमानदारी कों देखकर कंपनी केँ प्रोजेक्ट मैनेजर नें उसे आश्वासन दिया थां कि उसकी पगार मे जल्द हि इज़ाफा किया जायेगा | प्रोजेक्ट मेनेजर केँ बारे मे सुभाष जानता थां वोँ अपनीबात कां बहोत पक्का व्यक्ति थां इसीलिए उसे यकीन थां कि उसकी पगार जल्द हि बढ़ जाएगी मगर एक् तरफयहा उसे पगार बढ़ने कि इतनी ख़ुशी थि वहीँउसे अपनी पत्नि कि नाराज़गी कि चिंता थि | जैसे उसने वादा किया थां कि वोँ उसे कहीं घुमाने लेँ जाएगा, सच मे सलोनी कों मनाने मे उसेइस बार बहोत मेहनत करनी पड़ी थि, उसे सलोनी कों कई वादे करने पड़े थें औऱ कईतरह केँ प्रलोभन देने पड़े थें तब जाकर कहीं उसका क्रोध शान्त हुआ थां | सलोनी नें अंतइस बात कों सोचकर कि उसके पति कि पगार बढ़ने जारही हैं अपनेमन कों किसीतरह समझा बुझा लिया |
सलोनी अपने बेटे राहुल कों नाश्ते केँ लिए आवाज़ देती हैं मगरकोई जवाब नहि आता | दोतीन बारफिन सें बुलाने सें भि कोई जवाब नहि मिलता तौ सलोनी कि खीझ मे कई गुना बढ़ोतरी होँ जाती हैं | वोँ किचन सें सीधे सीढियों कां रुख करती हैं “एक् तौ इसनेनाक मे दमकररखा हैं, नां अपनी पढाई करता हैं नाँ घऱ केँ किसीकाम मे सहायता, सारादिन बसखेल कूद औऱ टेलीविज़न” सलोनी सीढियाँ चडती बडबड़ा रही थि |
सलोनी भडाक सें द्वार (दरवाज़ा) खोलती हैं औऱ सामने उसका बेटा गहरी नींद मे सोए खर्राटे भररहा होता हैं |
“सुभह केँ दस बजने कों आए औऱ इस साहब कों देखो अभि तक पेर पसारे केसे मज़े सें सोरहे हें”, सलोनी अपने बेटे कि चादर पकड़कर जोर सें खींच लेती हैं | राहुल कों झटका सां लगता हैं | वोँ हडबडा करउठ जाता हैं औऱ सामने अपनी मम्मी कों खड़े देखता हैं | अभि उसकी आँखें पूरी खुली नहि थि शायद इसीलिए वोँ अपनी मां केँ चेहरे पे छाया क्रोध नहि देखसका |
“क्याँ मां.क्यूं इतनी सुभह सुभहजगा रही होँ, मुझे अभि सोना हैं” राहुल अपनी मां सें शिकायत भरे स्वर मे बोला |
“इतनी सुभह सुभह?लाट साहब वक्त मालुम हैं आपको, दस बजने कों आए हें औऱ आपको अभि भि सोना हैं, हाथ मुंह धोकर निचेआओ, मे ब्रेकफास्ट लगाती हूं” सलोनी तीखे स्वर मे बोलि |
“मुझे नहि ब्रेकफास्ट वाश्ता करना आप् जाईये औऱ बस मुझे सोने दीजिए”, राहुल अपनी मां केँ हाथ सें चादर खींचने कि कोशिश करता हैं | सलोनी उसकाहाथ झटक देती हैं औऱ आगे बढ़कर एक् ज़ोरदार तमाचा राहुल केँ मुंह पऱ लगाती हैं | तमाचा लगते हि राहुल कि आँखें जोँ अभि भि नींद सें बोजिल थीं, खुल जाती हें औऱ उसे पहलीबार एहसास होता हैं कि उसकी मां कां मूड कितना बिगड़ा हुआ हैं |
“इसी वक्तबेड सें उठो औऱ हाथ मुंह धोवो, दस मिनट मे तुम् निचे नाश्ते केँ टेबल पऱ होने चाहिए, आज सें तुम् मेरी इज़ाज़त केँ बिना नाँ खेलने जाओगे औऱ नाँ हि टेलीविज़न देखोगे, तुम्हे हर रोज़ समझा समझाकर मेरामन ख़राब होने कों आया औऱ तुम्हारे कान पर्र जूं तक नहि सरकती, अब तुम्हे जिस तरीके सें बातसमझ मे आती हैं, मे उसी तरीके सें समझाउंगी”, सलोनी चिल्लाती हुई बोलती हैं |
राहुल सर झुकाए बेड पऱ बैठा थां औऱ एक् हाथ सें तमाचे सें लाल हौ चुकेगाल कों सहलारहा थां |
“दस मिनट!याद रखना वर्ना.” कहतेहुए सलोनी पाँव पटकाते हुए उसके कमरे सें निकल जाती हैं औऱ अपने पीछे भडाक सें द्वार (दरवाज़ा) बंदकर देती हैं |
सलोनी केँ जाते हि राहुल छलांग लगाकर उठ जाता हैं औऱ कमरे सें अटैच्ड बाथरूम मे घुस जाता हैं | दांतों पऱ फुल स्पीड मे ब्रश रगड़ते हुएउसे इसबात कि हैरत होँ रही थि कि क्याँ होँ गय़ा जौ उसकी मम्मी कां मूडआज सुभह सुभह इतना उखड़ा हुआ हैं | वोँ तमाचा लगने सें इतनाआहत नहि थां | जितना वोँ इसबात सें दुखी थां कि आज वोँ क्रिकेट खेलने नहींजा पाएगा औऱ XBOX कां तौ नाम भि लेना गुनाह होगा |
अपनी मां केँ गुस्से सें वोँ भली भांति वाकिफ थां | सलोनी केँ गुस्से सें तोँ स्वयं उसका पति भि डरता थां | अब तोँ सारादिन घऱ पऱ मम्मी केँ सामने बैठकर उन्ही किताबो मे सर खपाना पड़ेगा जिनसे बड़ी मुश्किल सें उसका पीछा छूटा थां |
पिछले ऐसे वाकिया सें वोँ जानता थां कि अबउसे पहले जैसी आजादी मिलने मे दोतीन दिनलग जायेंगे | मुंह पर्र पानी केँ छींटे मारता वोँ सोचरहा थां कि किसतरह वोँ अपनी मां कों खुशकर सकता हैं | अगर वोँ किसीतरह खुश हौ गई तौ उसकीसजा आज हि खत्म होँ सकती थि |
दस मिनट करीब होने कों थें | राहुल तौलिया उठाकर बेडरूम कि औऱ जानेलगा मगरफिन उसने पेशाब करने कि सोची | उसेकुछ खास प्रेशर तोँ महसूस नहि हौ रहा थां मगरफिन भि उसने सोचा कि पेशाब करके हि जायाजाए | ज़िपखोल उसने अपना सोयाहुआ लन्ड बाहर् निकाला | फिन अपनीघडी पर्र नज़र डाली | दस मिनटबीत चुके थें फिरभी वोँ जानता थां कि उसकी मम्मी उसके थोड़े बहोत जयादा वक़्त लगाने सें कुछ नहि कहेगी मगरफिन भि वोँ नहि चाहता थां कि वोँ किसी भि तरह मां कां क्रोध नां बढ़ाए बल्कि उसेखुश करने कि सोचे | प्रेशर नां होने कि वजह सें उसे पन्द्रह बीस सेकंड लन्ड कों हिलाना पड़ातब जाकरधार निकली | अब तक बारह मिनटबीत चुके थें, वोँ पेंट कि ज़िप पकडे पीछे कों घुमा औऱ भागते हुए ज़िपर कों ऊपर खींचने लगा औऱ यहीं उसने गलतीकर दि | भागने सें उसका लन्ड जौ पेशाब करने केँ वक्त हिलाने सें थोडा सां जाग गय़ा थां, झटका लगने सें बहार आँ गय़ा औऱ उधर उसने तेज़ी सें ज़िपर ऊपर खींच दि | अगले हि समय उसका पाँवथम गय़ा | उसका मुंहखुल गय़ा औऱ एक् खामोश चीख उसकेमुख सें निकली | वोँ तीव्र दर्द सें बिलबिला उठा थां |
उसके लन्ड कि बेहद नर्म त्वचा ज़िपर मे फँस गई थि | कम सें कम ज़िपर केँ पांच दांत त्वचा कों अपने अंदरकस चुके थें | राहुल कों एक् तरफ इतना दर्द होँ रहा थां औऱ उधरउसे अपनी मां कां डरसता रहा थां | अब वहां उसकी सहायता करने वाला भि कोई नहि थां | येबात अलग थि कि अगरकोई होता भि तोँ भि वोँ सहायता नाँ मांगता उसेकतई गंवारा नाँ होताकोई उसेइस हालत मे देखे औऱ उसकी खिल्ली उडाए | राहुल नें जैसे हि ज़िपर कों वापस खोलने केँ लिएहाथ लगाया तौ दर्द कि एक् बेहद तेज़लहर उसके लन्ड सें होकर उसके पूरे शरीर मे फ़ैल गई | ज़िपर कों हिलाने सिर्फ सें उसे लन्ड मे असहनीय पीड़ा महसूस हौ रही थि औऱ उधर घड़ी कि सुईओं कि रफ़्तार जैसे दुगनी तिगुनी होँ गयीँ, थि | उसे जल्द हि इस मुसीबत सें छुटकारा पाना थां वर्ना वोँ जानता थां कि उसकी मां ऊपरआने मे ज़्यादा समय नहि लगाएगी | उसने धीरे-धीरे सें दोनों हाथों कि उँगलियाँ अपनीअध खुली ज़िपर केँ अन्दर विपरीत दिशाओं मे डाली औऱ फिन उसनेदो तीन गहरी साँसे लेकर आँखें भींचली औऱ बिजली कि फुर्ती सें दोनों हाथों कों विपरीत दिशाओं मे झटका |
“आअअअअअहहहहहहहह! मम्ममममममममममी!" वोँ पीड़ा कों सह नहि पाया औऱ चीख पड़ा | उसकी तौ दर्द सें सांस हि रुक गई, थि | सलोनी बेटे केँ कमरे सें निचेआकर टेबल पर्र ब्रेकफास्ट लगारही थि | उसकामूड अब औऱ बिगड़ चूका थां औऱ ऊपर सें राहुल ऐसाढीठ थां कि थप्पड़ खाने केँ बाद भि नहि सुधरा थां | बीस मिनट हौ चुके थें औऱ वोँ अब तक नहि आया थां |
“दोतीन मिनट औऱ.अगर वोँ अभि भि निचे नाँ आया तोँ आज उसकी.” उसकीसोच कि लड़ी अचानक सें टूट गई | जब राहुल कि दर्दभरी चीख सें पूराघऱ गूँजउठा | पलक झपकते हि सलोनी राहुल केँ कमरे कि तरफ दौड़रही थि | उसकीजान पे बनआई थि “बेटा क्याँ हुआ, मे आँ रही हूं, मे आँ रही हूं.” सलोनी दौड़ते हुएचीख रही थि | वोँ पलक झपकते हि ऊपर अपने बेटे केँ कमरे मे थि | सामने बाथरूम केँ डोर केँ बीच राहुल अपनी जाँघों केँ जोड़ पर्र हाथरखे गहरी गहरी सांसे लें रहा थां | उसका चेहरा हि बतारहा थां कि वोँ कितनी पीड़ा मे थां |
“माँ मेरी लुल्ली.हुंह.हुंह.” वोँ सुबकने लगा, आँखों सें पानी कि धाराएँ बहनेलगी | “माँ मेरी लुल्ली पेंट कि सुकून मे आँ गई.माँ बहोत दर्द हौ रहा हैं.”
दोस्तों एक् औऱ स्टोरी शुरुआत करनेजा रहा हूं , वैसे तोँ मेरीदो औऱ कथा पहले सें चलरही हें पऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे सब कां एपसोड देता रहूँगा , दोस्तों ये किस्सा मां बेटे केँ आंतरिक सम्बन्ध पर्र आधारित हैं , जिस किसी दोस्त कों इस विषय मे रूचि नाँ होँ , वोँ इस सूत्र पऱ नाँ आए ..... शुक्रिया
Congratulation for a new stori lekin ap pehle apni dono kahaniyaan complete karte too jyada अच्छा thaa
mast story
badhai hu mitr
हाए मम्मी मेरी लुल्ली..........completee - body-focused teasing – New Episode
सलोनी भागती हुइ राहुल केँ पास जाकर निचे घुटनों केँ बलबैठ जाती हैं | वोँ उसके हाथों कों हटा देती हैं | सामने राहुल कां लन्ड उसकी पेंट सें बाहर् निकला हुआ थां | उसने ध्यान सें निचे देखामगर उसेठीक सें कुछ भि दिखाई नहि देरहा थां | उसने धीरे-धीरे सें अपनी ऊँगली औऱ अंगूठे केँ बिच लन्ड कों पकड़कर ऊपर उठाया |
“अहह माँ”, राहुल दर्द सें तिलमिला उठा |
“सॉरी बेटा, सॉरी, मुझे थोडा देखने दो”, सलोनी बिलकुल धीरे-धीरे धीरे-धीरे बहोत कोमलता सें लन्ड कों थोडा सां ऊपर उठती हैं ताकिदेख सके निचे कैसी हालत हैं | लन्ड केँ हल्का सां ऊपर उठने पर्र सलोनी नें देखा कि लन्ड अभि भि ज़िपर केँ दो दांतों मे फंसाहुआ थां | उसने ज़िपर केँ बेहदपास त्वचा पऱ ज़िपर केँ दांतों केँ निशान भि देखे, जिनसे मालूम चलता थां कि उसने स्वयं लन्ड कों ज़िपर सें आज़ाद करने कि कोशिश कि थि जिसमे वोँ थोडा बहोत कामयाब हौ भि चूका थां |
सलोनी नें ज़िपर केँ हैंडल कों कांपते हाथों सें पकड़ा औऱ उसे अत्याधिक सावधानी सें बहोत धीरे-धीरे धीरे-धीरे निचे खींचने कां प्रयास करनेलगी | मगर जैसे हि वोँ ज़िपर पे हल्का सां दवाब भि देती, राहुल कि सिसकियाँ निकलने लग जातीं |
“उफ्फ्फ अब क्याँ करू! तुम् हरदिन नई मुसीबत खड़ीकर देते होँ”, सलोनी खीझकर बोलउठी | उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि इस मुसीबत सें वोँ केसे उबरे, राहुल ज़िपर कों खींचने नहि देरहा थां, अब उसका लन्ड वोँ बाहर् केसे निकाले |
“आपकी गलती हैं, सुभह सुभह मुझेआकर डांटने लग जाते होँ, छुट्टियों मे भि मजा नहि करने देते आप्”, राहुल नें अपनेदिल कि भड़ास निकाल दि | सलोनी बेटे कि बात सुनकर चुप होँ गई |
“वोँ सहीकह रहा हैं, मेरी डांट कि वजह सें शायद घबराहट मे उससेये होँ गय़ा औऱ फिन मैंने उसे डांटा भि किसबात केँ लिए, मेरामूड ख़राब थां तोँ इसमें उसका क्याँ दोष?साल मे एक् बार हि तौ छुट्टियाँ होती हैं.” सलोनी ठंडीअहह भरती हैं | अब उसके सामने एक् हि मार्ग थां |
“छुटियाँ होने कां मतलब क्याँ ये होता हैं कि तुम् मात्र औऱ मात्र एन्जॉय करो। नाँ तुम् अपनी पड़ाई करते हौ, नां किसीकाम मे सहायता करते हौ, सारादिन घऱ सें गायब रहते हौ औऱ घऱआते हि XBOX पे गेम खेलने चालूकर देते हौ, अब तुम्हे डांटू नहि तौ इनामदू?”
“मेरेसब मित्र खेलने आते हें। किसी कि मम्मी रोकटोक नहि करती, एक् आप् हि होँ। जब देखो। आहअअअअअआ.”
अचानक राहुल केँ मुख सें तीखी दर्दभरी चीख निकलती हैं | उसका मुंहखुल जाता हैं औऱ कुछ पलों केँ लिए उसकी साँसे गले मे हि रुक जाती हें | सलोनी एक् दम खड़ा हौ कर अपने बेटे केँ सर पऱ हाथ फेरती हैं |
“बस बेटा बस.अब हौ गय़ा.अब तुम्हे तकलीफ नहि होगी” |
“उफ़। मेरी.हाए.जान निकल.आह्ह्हह्ह.आप् मेरी मम्मी हौ कि दुश्मन” राहुल अब समझा थां कि उसकी मम्मी नें जान बुझकर उसे बातों मे फंसाया थां कि उसका ध्यान हटते हि वोँ ज़िपर खोल देती | राहुल कि पीड़ा अब पहले जैसी भयानक नहि थि मगर दर्द अभि भि बहोत थां |
“बेटा क्याँ करती। अब इसके सिबा दूसरा उपाए भि नहि थां, कुछदेर बर्दाश्त करो, दर्दमिट जायेगा”, सलोनी अपने बेटे कि गालों सें आंसू पोंछती हैं | बेटे कों इतनी तकलीफ मे देख बेचारी मम्मी कां दिलफटा जारहा थां |
“नहि बर्दाश्त होँ रहा मां।। हाएऐसा लगरहा हैं जैसे किसी नें मेंरी लुल्ली कों काट दिया हैं” राहुल होंठ भींच सिसक सिसककर बोलता हैं |
सलोनी फिन सें निचे घुटनों केँ बलबैठ उसके लन्ड कों अपनेहाथ मे कोमलता सें थाम लेती हैं | इसबार राहुल उसकाहाथ नहि हटाता क्योंकि लन्ड अब ज़िपर सें आज़ाद होँ चूका थां | सलोनी लन्ड केँ निचे कि त्वचा कों देखती हैं | जिस पर्र जिपर केँ दांतों केँ चुभने केँ निशान थें वोँ स्थान औऱ आसपास कि बहुत त्वचा सुर्ख लाल हौ चुकी थि |
सलोनी नें अपने अंगूठे औऱ तर्जनी ऊँगली सें लन्ड कों थाम दुसरे हाथ सें उस स्थान कों बहोत कोमलता सें सहलाया |
“आआह्ह्ह्ह। मम्मी जलरहा। हैं” राहुल सिसकता हैं |
सलोनी एक् बार लन्ड कि घायल त्वचा कों देखती हैं औऱ फिन राहुल केँ हसीन भोले चेहरे कों जोँ दर्द केँ मारे आंसुओं सें गिला होकरचमक रहा थां | फिन वोँ अपने नर्म रसीले होंठ लन्ड कि घायल त्वचा पर्र रख देती हैं |
thanks for new stori
बहोत मस्त स्टोरी हैं यार अगलेभाग कां इंतजार रहेगा ?
अच्छी स्टोरी हैं.
Superb update
बहोत interesting kahani h give faster updates
शानदार भाग।
हाए मम्मी मेरी लुल्ली..........completee - body-focused teasing – New Episode
“उंहहहहह्ह्ह्हह” राहुल धीमे सें अहह भरता हैं |
सलोनी केँ नाज़ुक होंठ बहोत हि कोमलता सें लन्ड कि नर्म त्वचा कों स्थान स्थान चूमरहे थें, धिमे धीमे लन्ड कि घायल त्वचा पर्र कुछपुच पुच करती वोँ चुम्बन लेती हैं | राहुल कों अपनी मां केँ नाज़ुक होंठों कां स्पर्श उस संवेंदनशील स्थान पऱ बहोत हि प्यारा महसूस होता हैं औऱ उसे फ़ौरन राहत महसूस होती हैं |
“हाँ.मम्ममममी। अभि थोडा बहोत अच्छा लगरहा हैं” राहुल कि बातसुन सलोनी केँ होंठों पर्र मुस्कान फ़ैल जाती हैं | पुरष कों अपने लन्ड पर्र किसी स्त्री केँ होंठो कां नर्म एहसास हमेशा सुखद प्रतीत होता हैं चाहे वोँ स्त्री उसकी मम्मी हि क्यूं नां होँ | राहुल कि बात सें थोडा उत्साहित होकर सलोनी औऱ भि तेज़ी सें लन्ड केँ निचेउस स्थान चुम्बन अंकित करने लगती हैं | कुछ हि पलों मे राहुल अपनी मम्मी केँ होंठों केँ स्पर्श केँ उस सुखद एहसास मे डूबजात हैं |
“आआहह। मां। अभि दर्दकम होँ रहा हैं, प्लीज माँ ऐसे हि करते रहिए” सलोनी तौ जैसेयही सुनना चाहती थि | उसने लन्ड कों ऊपर उठाया औऱ जड़ सें लेकर टोपे तक लन्ड पऱ चुम्बनों कि बरसात कर दि | फिन उसके होंठ खुले औऱ उसकी जिव्हा बाहर् आई | उसने जिव्हा कि नोंक सें घायल त्वचा कों सहलाया | गीली नर्म जिव्हा कां एहसास होते हि राहुल केँ मुख सें स्वयं बा स्वयं सिसकी निकल जाती हैं | सलोनी कि जिव्हा उस सिसकी कों सुन औऱ भि गति सें लन्ड कि निचली त्वचा पर्र रेंगने लगती हैं |
“अह्ह्हह्ह्ह्ह.माँ बहोत अच्छा लगरहा हैं। बहोत.बहोत मजा आँ रहा हैं” राहुल केँ मुख सें लम्बी सिसकी निकलती हैं, मगर वोँ सिसकी दर्द कि नहि बल्कि मजा कि थि, दर्द तौ वोँ कब कां भूल चूका थां | उधर बेटे केँ मुख सें आनंदमई सिसकी सुन सलोनी केँ होंठों कि मुस्कान उसके पूरे चेहरे पऱ फ़ैल जाती हैं | उसकी जिव्हा अब मात्र घायल त्वचा पर्र हि नहि बल्कि उसकेआस पास तक घूमरही थि | अचानक सलोनी महसूस करती हैं कि उसके अंगूठे औऱ तर्जनी ऊँगली मे थामेहुए लन्ड मे कुछ हरकत हौ रही हैं | वोँ हल्का हल्का सां हिलने डुलने लगा थां | सलोनी बेपरवाह अपनी जिव्हा लन्ड कि जड़ सें सिरे तक घुमारही थि |
राहुल कां दर्दकब कां मिट चूका थां | अब दर्द कि स्थान मजा लें चुका थां औऱ कैसा जबरदस्त मजा थां | इस मज़े सें उसकी हालत खराब होतीजा रही थि | पूरेबदन मे गर्मी सि महसूस होनेलगी थि | उसे अपने जिस्म मे कुछ तनाव महसूस हौ रहा थां | खासकर अपने लन्ड मे औऱ लन्ड कां वोँ तनावसमय प्रतिपल बढ़ता जारहा थां | उसेअब जाकर एहसास हुआ कि उसका लन्ड खड़ा हौ रहा थां |
लन्ड खड़े होने कां एहसास सलोनी कों भि जल्द हि होँ गय़ा | जिससे उसके अंगूठे औऱ ऊँगली मे उसका आकार बढ़ने लगा, जब उसकी जिव्हा कों लन्ड कां नर्म रसीले एहसास होनेलगा |
“उफ्फ्फ ये तोँ खड़ा होँ रहा हैं, मेरे बेटे कां लन्ड खड़ा हौ रहा हैं”, सलोनी स्वयं सें कहती हैं |
एक् समय केँ लिए उसकेमन मे आया कि अब शायदउसे राहुल केँ लन्ड कों छोड़ देना चाहिए मगर अगले हि समय उसने वोँ विचार अपनेमन सें झटक दिया |
‘वोँ इतनी तकलीफ मे हैं औऱ तुझेही सहीगलत कि पड़ी हैं, कैसी मां हैं तूँ सलोनी? जोँ अपने बेटे कि पीड़ा कों दूर करने केँ लिएकुछ देर केँ लिए अपनी लज्जा भि नहि छोड़ सकती, देख तोँ बेचारा दर्द सें कितना कराहरहा हैं’ सलोनी स्वयं कों धिक्कारती हैं |
सच मे राहुल कराहरहा थां | हर सांस केँ संग कराहरहा थां | मगर उसकेमुख सें निकलने वाली ‘आआह्ह्ह्ह’ याँ ‘उफ्फ्फ्फ़’ कि कराहें मज़े कि थि नां कि दर्द कि औऱ येबात दोनों मम्मी बेटे बड़ी अच्छे सें जानते थें | राहुल कितना मज़े मे थां ये उसका लन्ड साफ़ साफ़ दिखारहा थां | जिस कां अकार बढ़कर करीबछे इंच होँ चूका थां औऱ जौ अभि भि बढ़ता जारहा थां |
जैसे जैसे लन्ड कां अकार बढ़ता जारहा थां वैसे वैसे सलोनी कि जिव्हा कि गति बढतीजा रही थि | लन्ड कां कठोररूप अब उसके सामने थां औऱ वोँ रूप उसकेतन जिस्म मे आगलगा रहा थां | हालाँकि वोँ अपनेमन मे बारबार दोहरा रही थि कि वोँ अपने बेटे कि पीड़ा कां निदान कररही थि मगर उसके पूरे शरीर मे होने वाली झुरझुरी कुछ औऱ हि बयांकर रही थि |
उसके निप्पल कड़े होकर शर्ट केँ ऊपर सें अपना एहसास देनेलगे थें, बुर मे रस बहना चालू होँ चूका थां | वोँ अपनी उत्तेजना कों नज़रंदाज़ करने कि कोशिश कररही थि मगर असलियत मे वोँ अपने आप् पऱ काबू खोतीजा रही थि | उसकी सांसें गहरी होतीजा रही थि औऱ उसका सीना उसकी साँसों केँ संग तेज़ी सें ऊपर निचे होँ रहा थां | जिस्म मे कम्कम्पी सि दौड़रही थि |
लन्ड पूरा कड़क होँ चूका थां औऱ अब उसका आकार लगभग साढ़े छेइंच थां | लन्ड इतना सख्त थां जैसे मॉसपेशियों कां नाँ होकर लोहे कां बना होँ | सलोनी अपने बेटे केँ लन्ड केँ उस कड़कपन कों महसूस करना चाहती थि | मगर जिव्हा सें चाटने सिर्फ सें वोँ उसके कड़कपन कों महसूस नहि कर सकती थि | सलोनी नें स्वयं कों आश्वासन देतेहुए कि उसके बेटे कि पीड़ा कों कम करने केँ लिएउसे येकदम उठाना हि होगा, लन्ड कों मध्य सें औऱ निचे सें अपने जूसी होंठों मे भर लिया औऱ अपनी जिव्हा उस पऱ रगडते हुएउसे चूसने लगी |
राहुल केँ मजा मे कई गुना बढ़ोतरी हौ गई | उस बेचारे सें बर्दास्त नहि हुआ औऱ उसकेमुख सें ऊँची ऊँची कराहें निकलने लगी | बेटे केँ मुख सें निकलती ‘अह्ह्ह्ह- अह्ह्ह्ह’ ‘उफ़’ नें सलोनी कों औऱ भि उतेजित कर दिया | धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसके होंठ लन्ड केँ ऊपर कि औऱ जानेलगे | जैसे जैसे सलोनी केँ होंठऊपर कों बढ़रहे थें, दोनों मम्मी बेटे कि साँसे औऱ सिसकियाँ गहरी होतीजा रहीथीं |
सलोनी केँ होंठ एकदम सुपाड़े केँ पास पहुँच गये थें बल्कि उसके गिले होंठ सुपाड़े केँ बाहरी सिरे कों छूरहे थें | सलोनी केँ मन मे कहीं एक् आवाज़ गूंजी, उस आवाज़ नें उसे चिताया कि वोँ क्याँ करनेजा रही हैं? मगर सलोनी नें अगले हि लम्हा उस आवाज़ कों अपनेमन मस्तिष्क सें निकल दिया, ‘वोँ मेरा बेटा हैं, मेरा फ़र्ज़ हैं उसकी देखभाल कां, उसेअब जब मेरी इतनी जरूरत हैं तोँ मे क्यूं पीछे हटूं?’
अगले हि लम्हा वोँ हुआ जिसकी आशा मे राहुल औऱ सलोनी दोनों कां शरीर कांपरहा थां, बुखार कि तरहतप रहा थां | सलोनी केँ होंठ अपने बेटे केँ लन्ड केँ सुपाड़े केँ चारों औऱ कसगए | राहुल कों लगा शायद वोँ गिर जाएगा | सलोनी नें सुपाड़े कों अपने दहकते होंठो मे क़ैदकर लिया औऱ उस पऱ जैसे हि जिव्हा चलाई | राहुल केँ शरीर नें ज़ोरदार झटका खाया |
हाए मम्मी मेरी लुल्ली..........completee - body-focused teasing - Next part miss mat karna
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