इंसाफ कौन करेगा!! - मुर्डर - Real Story Continue Part 1
दोस्तो मे बहुत वक़्त सें एक् अलग सें कुछ स्टोरी लिखना चाहता थां। आखिरकार आज वोँ दिन आँ गय़ा जब मे एक् ऐसी स्टोरी कि शुरुवात हौ रही हें जिसे लिखना मेरा सपनारहा हैं!! यह स्टोरी मर्डर, सस्पेंस सेक्स सें भरपूर एक् ऐसीकथा होगी जोँ आपका भरपूर मनोरंजन करेगी! इस स्टोरी कों कोई भि धर्म केँ नजरिए सें नं देखे क्योंकि अंत मे जब सच्चाई सामने आयेगी तोँ दूध कां दूध औऱ पानी कां पानी जौ जायेगा
संगबने रहिए औऱ कथा कां मजा लीजिए!!
*आलमबाग पुलिस दफ़्तर लखनऊ!!*
एक् तगड़ा हसीन नौजवान पुलिस ऑफिसर तेजी सें एसएसपी केँ कमरे मे घुसा औऱ जोर सें दरवाजा बंद करने केँ बाद सलाम करतेहुए बोला:"
" जय हिन्द सर!! इंस्पेक्टर मानव रिपोर्टिंग सर!!
जोर सें दरवाजे केँ बंद होने कि आवाज़ हुई औऱ एसएसपी सत्य प्रकाश नें एक् नजर इंस्पेक्टर मानव कों देखा औऱ बोला:"
कितनी बार तुम्हारी तरफ समझाया कि गेट कों धीरे-धीरे बंद कियाकरो, तोड़ना चाहते होँ क्याँ दरवाजे कों तुम्!! क्यूं शक्ति प्रदर्शन करते हौ
मानव नें एक् बार ताड़कर दरवाजे कों देखा औऱ बोला:"
" जैसी आपकी आज्ञा सर!! मे आगे सें ध्यान रखूंगा!!
सत्य प्रकाश नें उसेउपर सें नीचे तक घूरा औऱ बोले"
" इंस्पेक्टर मानव अपनी टोपी सीधीकरो! जब देखो उल्टी पहनते हौ !! यह पुलिस स्टेशन हें तुम्हारा घऱ नहीं हें!
इंस्पेक्टर मानव नें अपनी टोपी सीधी करतेहुए बोला:" वोँ क्याँ हैं डैडी आप् तौ जानते हि हें कि मुझे बचपन सें हि क्रिकेटर बनने कां कितना शौक थां!! बस इसलिये अपने आप् उठीघूम जाती हें मेरी टोपी!!
सत्य प्रकाश नें उसे एक् बारफिन सें गुस्से सें घूरा औऱ बोला:"
" फालतू बकवास बंदकरो औऱ काम कि बात सुनो, मुख्तार अली मर्डर केस कि जांचआज सें आप् करोगे!! कोई दिक्कत ?
मानव नें एक् बार एसएसपी सत्य प्रकाश कि तरफ देखा औऱ करीब-करीब खीजते हुए बोला:"
" क्याँ डैडी आप् भि मुझेहर बारयह छोटे मोटेकेस मे फंसा देते हौ, कोई बड़ाकेस हौ तोँ वोँ दीजिए!!
सत्य प्रकाश नें उसेखा जाने वाली नजरो सें देखा औऱ अपनी आवाज़ सख्त करतेहुए आदेशात्मक लहजे मे कहा
" यहां मे मात्र एसएसपी हु तुम्हारा बाप नहीं। जितना बोला हें उतनाकरो!!
मानव नें एक् बार तिरछी नजरों सें अपने बाप कि तरफ देखा औऱ सपाट चेहरे केँ संग बोला"
" ठीक हें एसएसपी साहब, मगर ऐसे केसे मेरी तरक्की होगीजब तक आप् मुझेयह बच्चो जैसेकेस देते रहोगे? मर्डर केस सें अच्छा तौ मुझे किसी मिनिस्टर कि बेटी कां बॉडी गार्ड हि बना दीजिए जैसे आपने मुझे पिछले साल राज्य मंत्री शशिकरण कि बेटी कां बनाया थां। शपथ सें क्याँ कमाल थि वोँ लड़की !!!
सत्य प्रकाश अब करीब गुस्से सें चिल्ला पड़ा:"
" बहोत बकवास करते होँ तुम्!! मुझे तुम्हारी फालतू बात नहीं सुननी, जाओ औऱ अपनाकाम करो नहीं तोँ सस्पेंड कर दूंगा तेरी समझेगए नाँ!!
मानव भि पूराघाघ किस्म कां इंसान थां तौ इतनी आसानी सें कहां बाजआता भला, उसके चेहरे पर्र मुस्कान आई औऱ बोला:"
" इस जवानी मे भि मर्डर केस सॉल्व करूंगा तौ फिनकिस काम कि यहजॉब!! इससे अच्छा तौ आप् मुझे सस्पेंड हि कर दीजिए कम सें कम थोड़े दिन गोवा हि घूम आऊंगा!!
सत्य प्रकाश उसकी बातो सें पूरीतरह सें झुंझला उठा औऱ अपनी टेबल पऱ पड़ाहुआ डंडा उठाते हुए बोला:"
" तुम् जाते हौ याँ नहीं !!
मानवअब अपनीसीट सें खड़ाहुआ औऱ अपने बाप कि तरफ स्माइल देतेहुए बोला:"
" थोडा प्रेम सें कहिए न् पिताजी!! जब देखो आपके होंठो पर्र अंगारे हि रहते हें मेरेलिए!!
सत्य प्रकाश कुछ भि करकेउसे भगाना यहकेस देना चाहता थां क्योंकि वोँ उसकी काबिलियत कों बखूबी जानता थां इसलिये स्माइल करतेहुए बोला:"
" अच्छा ठीक हें अबखुश!! जाओ औऱ अपनाकाम कर, मुझे जल्द सें जल्द इसकी रिपोर्ट चाहिए क्योंकि ऊपर सें बहुत दबाव हें मुझ पऱ!!
मानवअब मुस्कुरा उठा औऱ अपनी वर्दी केँ कॉलर कों खड़ा करतेहुए बोला:"
" यह हुईँ नं बात!!अब देखो केसे मे यहकेस सॉल्व कर दूंगा!! ठीक हें मे चलता हूं!!
इतना कहकर वोँ पलटा औऱ जानेलगा तभी अचानक सें वापिस आया औऱ बोला:"
" वोँ माँ बोलरही थि कि उनसेअब घऱ कां काम नहीं होता!! उन्हे एक् बहु चाहिए!
सत्य प्रकाश गुस्से सें :" तुम् जाते होँ याँ नहीं !! धक्के मारकर निकालू क्याँ तुम्हे ??
मानव" नहीं उसकी जरूरत नहि बस आपका आशीर्वाद चाहिए थां!! क्याँ आपके पांवछू सकताहु एक् बार !!
सत्य प्रकाश बहोत अच्छे सें जानता थां कि उसका बेटा कितना बड़ा नौटंकीबाज हैं तोँ बोला:"
" ठीक हें जल्दकरो !!
मानवआगे बढ़ा औऱ उसके पांव छूकर बोला:"
" मुझे आशीर्वाद दीजिए पापा कि इसकेस केँ समाप्त होते होते मे आपकेलिए एक् हसीन सि बहु ढूंढसकू!!
सत्य प्रकाश नें उसकाकान पकड़ा औऱ खड़ा करतेहुए बोला:"
" दरवाजा उधर हें!! जाओ औऱ अपनाकाम करो !!
मानव अंदर हि अंदर मुस्कुरा उठा औऱ बोला:"
" आप् दुनिया केँ पहलेऐसे बाप हें जौ अपने बेटे सें इतना ज़्यादा नाराज रहते हौ!! आपके गालियां हि मेरेलिए आशीर्वाद हें! वर्दी पहनी हें तौ जॉब तोँ करनी पड़ेगी!! मिलते हि जल्द हि !
इतना कहकर वोँ पलटा औऱ सीटी मारते हुए मटकते हुए गाना गातेहुए बाहर् कि तरफचल दिया " मेरे सपनो कि रानीकब आयेगी तुँ!!
सत्य प्रकाश उसकी हरकतों सें झुंझला उठा थां औऱ जैसे हि मानवगेट केँ पासआया तोँ अपनीआदत केँ अनुसार जोर सें गेट कों बंद कों जोर सें बंद किया औऱ बाहर् निकल गय़ा। पीछे सें सत्य प्रकाश एक् बारफिन सें बड़बड़ाते हुए बोला:"कभी नहीं सुधर सकतायह लड़का!!
तभी मानवफिन सें दरवाजे पर्र आया औऱ बोला:"
" आपनेकुछ कहा क्याँ !!
सत्य प्रकाश नें अब दुखी होकर अपनी पिस्टल उठाली औऱ उसकीतरफ तानते हुए बोला:"
" जाते होँ याँ गोलीमार दू तुम्हे!!
मानव नें अपने बाप कि तरफ चौंकते हुए देखा औऱ बोला:"
" अरे बाप रै बाप!! मुझेभरी जवानी मे नहीं मरना!!
इतना कहकर उसनेफिन सें दरवाजे कों जोर सें बंद किया औऱ बाहर् कि तरफभाग पड़ा!! पीछे सें सत्य प्रकाश नें सुकून कि सांसली औऱ एक् ग्लास पानी पीकर अपनी कुर्सी पर्र बैठकर सोच मे डूब गय़ा!!
इंसाफ कौन करेगा!! - मुर्डर – New Episode
Unique star bhay.hope this kahani will be a long one and not a "short one" as all your other kahaniyan have been।
Also, since you are very busy and give updates very slowly (which I an understand).however, many folks in this forum दो not understand.and keep on requesting for updates (nothing wrong in that as well) because of which (some negative comments), you get angry and "cut short" your kahani which has been the case in the last 3-4 kahaniyan.
Hope this will not be the case with this one.
Hope you can provide regular updates of this sexy kahani as and when you get waqt (& sincerely hope the gaps in updates are not very long )। Thank you.
इंसाफ कौन करेगा!! - मुर्डर – New Episode
*अशोकनगर*
अशोकनगर मे ऑटो सें एक् बेहद हसीन लड़की उतरी औऱ मार्ग पऱ जाते एक् व्यक्ति सें पूछी:"
" भइया साहबयह ठाकुर रमन सिंह कां घऱकौन सां हें ?
व्यक्ति नें एक् बारउस लड़की कों ध्यान सें देखा कि उसने अपने सुंदर शरीर पऱ हिजाब पहनाहुआ थां जिसमे उसकी हुस्न अपनेचरम पऱ थि औऱ उसकी हसीन हल्के नीलेरंग कि आंखे किसी कों भि सम्मोहित करने केँ लिए बहुत थि। व्यक्ति नें एक् घऱ कों तरफ इशारा किया औऱ बोला:"
" मैडमयही हें ठाकुर साहब कां घऱ!! आप् शायदइस इलाके मे पहलीबार आई हें!!
लडकी:"जी ठीक पहचाना आपने, दरअसल यहां केँ सरकारी इंटर कॉलेज मे मुझे विज्ञान केँ अध्यापक कि नौकरी मिली हें !!
इतना कहकर वोँ लड़कीआगे बढ़ गई औऱ व्यक्ति नें एक् बारफिन सें उसकीतरफ देखा औऱ मन हि मन उसकी हुस्न कि तारीफ करतेहुए आगेबढ़ गय़ा! वोँ लड़की रिक्शा वाले कों पैसे देकरआगे बढ़ी औऱ फोनबेल बजाई तोँ एक् दुबली पतली सि महिला नें दरवाजा खोला औऱ बोलीं:"
" हान कहिए किससे मिलना हें आपको ?
लडकी नें गर्मी केँ कारण अपने माथे पर्र आए पसीने कों साफ किया औऱ बोलि:"
" जी मुझे ठाकुर साहब सें मिलना थां !!
स्त्री: कल आनां ठाकुर साहब तौ आज हि सुभह दिल्ली चलेगए औऱ अबकल हि आयेंगे!! वैसे आप् हें कौन?
लडकी:"जी मेरानाम शहनाज हैं औऱ मे यहां कॉलेज मे पढ़ाने केँ लिएआई हु!!
महिला:" अच्छा तोँ आप् अंदरआइए!! मुझे तोँ ठाकुर साहब नें आपके बारे मे बताया थां!!
शहनाज नें चैन कि सांसली औऱ अपनाबैग लेकर अंदरघुस गई औऱ जल्द हि एक् बेहद हसीन कमरे मे थि!
स्त्री:" यह आपकारूम रहेगा, आप् आराम कीजिए, कोई दिक्कत होँ तौ मुझे आवाज़ दीजिए आप्!!
शहनाज नें उसके जाते हि कमरे कों बंद किया औऱ सबसे पहले अपने हिजाब कों उतार दिया मानो उससे उसकीकोई दुश्मनी रही होँ!! हिजाब उतारकर उसने सुकून कि सांसली औऱ बेड पऱ पसर गई! बेड बहुत आरामदायक थां औऱ शहनाज बहुतथकी हुइ थि इसलिये नींद केँ आगोश मे चली गई! साम कों लगभग वोँ छहबजे केँ आसपास वोँ उठी औऱ नहाकर फ्रेश हौ गई। उसनेउस स्त्री कों आवाज़ लगाई जिसका नाम लक्ष्मी थां तोँ बुढिया लक्ष्मी उसकेपास आँ गई औऱ बोलि:"
" जीमेम साहब कहिए आप्!! क्याँ चाहिए आप्!!!
शहनाज:" कुछ नहीं बैठिए नं आप्! मैंने गरमचाय बनाई हें तौ आप् भि मेरेसंग पीजिए!!
लक्ष्मी:" नहीं बेटी, हम् तोँ गरीबलोग हें! मेरी इतनी औकात कहां!
शहनाज नें उसकेहाथ मे जबरदस्ती गरमचाय कां कप दिया औऱ अपनेपास बैठा लिया औऱ लक्ष्मी डरती हुईँ उसकेपास बैठ गई औऱ गरमचाय पीनेलगी।
शहनाज:" यह अशोकनगर मे कितने विद्यालय हें ? औऱ क्याँ क्याँ सुविधा हें ?
लक्ष्मी:" विद्यालय केँ नाम पऱ बेटी एक् सरकारी विद्यालय हें औऱ कुछ दूसरे प्राइवेट विद्यालय हें जिनमे बच्चे पढ़ा पाना गरीब व्यक्ति केँ बस कों बात तोँ नहीं हें! वोँ तौ भला ठाकुर साहब कां जिन्होंने अपनी ज़मीन देकरयह विद्यालय बनवा दिया थां वरना गरीब व्यक्ति केँ बच्चे कहां पढ़ पाते!!
शहनाज:" अच्छा फिन तोँ ठाकुर साहब कों लोग बहुत मानते होंगे अशोकनगर मे!!
लक्ष्मी:" बेटा लोग उन्हे देवता कि तरह पूजते हें! औऱ वोँ सच मे देवता हें भि, किसी भि गरीब कों खालीहाथ नहि जाने देते, नां जाने कितनी लड़कियों कि विवाह कराई हें !!
शहनाज:" अच्छा एक् मतलब ठाकुर साहब देहात केँ लोगो केँ लिए तोँ ईश्वर हि हें!! कौनकौन हें ठाकुर साहब केँ परिवार मे औऱ ?
लक्ष्मी:" हान बेटी!! एक् बेटा हैं जोँ लंदन मे हि बस गय़ा हैं औऱ कभी लौटकर वापिस नहि आया जिसके सदमे मे ठकुराइन भि चलबसी!! बसअब तोँ केवल ठाकुर साहबबचे हुए हें औऱ जैसे तैसे करके अपनी सांसे पूरीकर रहे हें बेचारे!!
शहनाज:" अच्छा इसका मतलब ठाकुर साहब बहुत बूढ़े होँ गए हें बेचारे!!
लक्ष्मी:" हान बेटी लगभग 85 साल कि उम्र तोँ होगी उनकी!!
शहनाज नें गरमचाय ख़त्म करी औऱ खालीकप एक् तरफरख दिया औऱ बोलि:"
" अशोकनगर केँ चेयरमैन कौन हें अभि?
शहनाज कि गरमचाय ख़त्म होते हि लक्ष्मी नें भि जल्द जल्दगरम चाय कि सिपली औऱ बोलि:"
" बेटी अभि तोँ यहां कां चेयरमैन विजय कुमार हें! कहते हें कि बहोत बेईमान औऱ घटिया व्यक्ति हें !! ठाकुर साहब कि उम्र होने केँ बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा तौ तब सें बस विजय हि चेयरमैन हें यहां बेटी!
शहनाज:" अच्छा वैसे विजय सहाबकाम क्याँ करते हें ?
लक्ष्मी:" कहने केँ लिए तौ ट्रांसपोर्ट चलाते हें मगर ईश्वर हि जाने इतना रुपया कहां सें आता हें इसकेपास!! आधे सें अधिक अशोकनगर कि जमीन पर्र आज उसका हि कब्जा हें बेटी!
शहनाज:" जबऐसा हें तौ कोईकुछ करताकोई नहीं हें ?
लक्ष्मी:" लोगो नें कोशिश करीमगर उसके खिलाफ बोलने वाले किसी भि व्यक्ति कां पता नहींचला कि कहां गायब हौ गएबाद मे सभी! कहते हें कि उसकेसिर पऱ किसी मंत्री कां हाथ हैं औऱ पुलिस भि उससे मिली हुइ हें बेटी! कोई चाहकर भि कुछ नहींकर सकता!!
शहनाज:" अच्छा तौ यहबात हैं। मतलब विजय कुमार अच्छा व्यक्ति नहीं हैं!!
लक्ष्मी:" अच्छा क्याँ बेटी वोँ तौ बुरा भि व्यक्ति कहलाने केँ लायक नहि हैं!! काला वनमानुष सां व्यक्ति हें जौ रामायण केँ राक्षसों कि याद दिलाता हैं!!.
शहनाज:" अच्छा!! औऱ कौनकौन हैं अशोकनगर मे जौ अच्छे लोग हें यहां!!
लक्ष्मी:" अच्छे तोँ बस ठाकुर साहब हि हैं!! बाकीसभी तौ एक् सें बढ़कर एक् बेईमान औऱ घटिया व्यक्ति हें!! एक् इंस्पेक्टर विकास यादव हें जौ पुलिस डिपार्टमेंट कां सबसे रिश्वतखोर व्यक्ति हें!!
शहनाज:" अच्छा बताया माँ जी आपने! औऱ कुछ बताए नां आप् ताकि मुझे यहां रहने मे दिक्कत न् आएं?
लक्ष्मी:" औऱ तोँ कुछखास हैं नहीं, बस एक् तालाब हें औऱ उसकेपास हि खेल कां एक् मैदान हें जहां बच्चे खेलते रहते हें! अच्छा बेटी एक् बात तोँ मे तुम्हे बताना हि भूल गई कि अशोकनगर मे एक् भि घऱ मुस्लिम कां नहीं हैं!
शहनाज:" अरे मम्मी जी तौ क्याँ हुआ!! वैसे भि मेरेलिए जाति धर्मकोई मायने नहि रखता!
लक्ष्मी:" मेरे कहने कां मतलब थां कि खानां पीना, पहनावा सभीकुछ अलग होगा! शायद तुम्हे अजीब सां लगे!
शहनाज नें लक्ष्मी कां हाथ पकड़ लिया औऱ बोलि:"
" हें तोँ सभी इंसान हि औऱ सभी कपड़े हि पहनते हें! औऱ फिन मुझे करना हि क्याँ हें विद्यालय सें घऱ औऱ घऱ सें विद्यालय!
लक्ष्मी:" अच्छा बेटी फिन तौ ठीक हें, अच्छा सुन जोँ कुछ भि मैने तुम्हे बताया हें बेटी यहसभी बाते अपनेपास हि रखना! किसी कों पताचला तोँ दिक्कत हौ जायेगी!!
शहनाज:" आप् फिकरमत कीजिए!! मेरी आपसेकोई बात हि नहीं हुईँ हैं!!
उसकेबाद लक्ष्मी बाहर् आँ गई औऱ शहनाज अपने कमरे कि अपने तरीके सें सजाने मे लग गई! लगभग एक् घंटे कि मेहनत केँ बादरूम सेट होँ गय़ा औऱ शहनाज खानां खाने केँ बादसो गई!! अगलेदिन वोँ सुभहउठी औऱ विद्यालय जाने केँ लिएघऱ सें निकल गई!!
विद्यालय अधिकदूर नहि थां तौ वोँ पैदल हि जानेलगी! हिजाब पहनी हुईँ शहनाज कों जब दफ़्तर जाते लोगो नें अशोकनगर कि मार्ग पऱ देखा तोँ हल्की हैरानी हुई क्योंकि मुस्लिम औरतउस इलाके मे शायद हि कभीआई थि औऱ फिन शहनाज तौ जीती जागती कयामत थि औऱ लोगो कि आंखे औऱ मुंह खुले केँ खुलेरह गए!
शहनाज विद्यालय पहुंची औऱ प्रिंसिपल साहब सें मिली जिनका नाम निधि शर्मा थां औऱ अपने बारे मे बताया तोँ निधि शर्मा नें उसका स्वागत किया औऱ बोलि:"
" आपका स्वागत वोँ आप् लोग क्याँ कहते हें उर्दू मे इस्तकबाल हैं आपके विद्यालय मे!!
शहनाज हल्की सि मुस्कुराई औऱ बोलि:" जी शुक्रिया आपका!! उर्दू, हिन्दी, अंग्रेजी चाहेकोई भि भाषा होँ क्याँ फर्क पड़ता हें बस दिलो मे इज्जत होनी चाहिए!
निधि:" आपकीबात सें मे सहमतहु! चलिए आपको पूरा विद्यालय दिखा देतीहु!
शहनाज निधि केँ संग विद्यालय देखरही थि औऱ सब बच्चों केँ संगसंग दूसरे टीचर भि हिजाब मे शहनाज कों देखकर रोमांचित थें! विद्यालय दिखाने केँ बाद निधि नें शहनाज कों उसकी क्लास केँ बारे मे बताया कि उसे क्लास 9 औऱ 10 कों विज्ञान पढ़ाना हैं !!
शहनाज क्लास 9 मे गई औऱ सब बच्चों नें उसकागुड मॉर्निंग किया औऱ उसकेबाद शहनाज बोलीं:"
" हेल्लो बच्चो मेरानाम शहनाज हें औऱ मे आपकीनई टीचर हूं! आप् सें पूरे विद्यालय कों विज्ञान पढ़ाना मेरी जिम्मेदारी होगी! आप् सब एक् एक् करके अपनानाम बताए!
सब बच्चे एक् केँ बाद एक् करके अपनानाम बतारहे थें औऱ शहनाज ध्यान सें सुनरही थि। कुल मिलाकर लगभग 43 बच्चे थें जिनमे 13 लड़की औऱ 30 लड़के थें! कुछ लड़के बड़े शैतान लगरहे थें औऱ शहनाज कि नजरेसभी समझ गई थि औऱ बोलि:"
" अच्छा एक् क्लास कां मॉनिटर कौन हें ?
एक् लड़का:" मैडम मेरा राजा यादव हें औऱ मे हि इस क्लास कां मॉनिटर हु!
शहनाज नें उसेगौर सें देखा लगभग 17 साल कां एक् लड़का बिलकुल दूध सां सफ़ेद, नां ज़्यादा दुबला औऱ न् हि पतला, बेहद खूबसूरत औऱ आकर्षक, घुंघराले बाल औऱ हल्की नीली नशीली आंखेउसे बेहद कामुक बनारही थि। शहनाज नें उसेगौर सें देखा औऱ बोलि:"
" कल सें मेरे क्लास मे आने सें पहले बोर्ड साफ होना चाहिए, चोक कां डिब्बा होना चाहिए औऱ एक् डस्टर केँ संग अटेंडेंस रजिस्टर भि होना चाहिए!!
" मैडम आप् इसी फिक्र मतकरो, यह आहिस्ता कर लेगा राजा क्योंकि पिछले दोसाल सें यहसभी यही तोँ कररहा हैं!!
एक् लड़की जिसका नाम प्रिया थां राजा पर्र व्यंग्य करतेहुए बोलीं औऱ सबलोग हंस पड़े औऱ राजा कां मुंह गुस्से सें लाल होँ गय़ा औऱ बोला:"
" तुँ अपनेकाम सें मतलबरखा कर, बहोत ज़्यादा बकवास करती हैं जब देखो!
बातआगे बढ़ती उससे पहले हि शहनाज बीच मे बोल पड़ी:"
" चुपरहो दोनो नहीं तौ क्लास सें बाहर् कर दूंगी!! मुझे अपनी क्लास मे कोई ड्रामा नहीं चाहिए!
उसकेबाद शांति छा गई औऱ शहनाज पढ़ाने लग गई! बहुत अच्छे सें वोँ बच्चो कों समझारही थि! छुट्टी हुईँ औऱ शहनाज अपनेघऱ कि तरफचल पड़ी!
रास्ते मे एक् बारफिन सें लोगउसे ताड़कर देखरहे थें औऱ सामने कुछ आवारा लड़के खड़ेहुए थें जौ उसे देखकर टिप्पणी करनेलगे थें!!
एक्:" क्याँ गजब कि मैडमआई हैं भइया विद्यालय मे लगता हें सारे बच्चे टॉप करेंगे इसबार!
दूसरा:" अरेकोई भि मेरा भि दाखिला करवादो इससे तोँ मुझे भि पढ़ना हें विज्ञान!!
सारे लड़के जोरजोर सें हंसने लगे औऱ शहनाज नें सभीकुछ सुनामगर अनसुना करकेआगे बढ़ने लगीतभी फिन सें पीछे सें आवाज़ आई
" तेरा एडमिशन नं होँ पाए कलवा क्योंकि पहले तुम्हें आठवीपास करनी पड़ेगी जिसमे तौ दसबार फेलहुआ थां!!
एक् बारफिन सें सभीजोर जोर सें हंस पड़े औऱ उनमें सें एक् जोँ कुछ ज़्यादा हि दबंग थां जिसका नाम कालिया थां वोँ शहनाज केँ पीछे पीछेचल पड़ा औऱ बोला:"
" रामराम मास्टरनी जी! मे रोहन थोडा कुछहमे भि पढ़ा दीजिए!
शहनाज कुछ नहि बोलीं औऱ आगे बढ़ती रही! उसकेदिल कि धड़कन जरूरबढ़ गई थि औऱ उससे पीछा छुड़ाने केँ लिएतेज तेज चलनेलगी! कालिया भि एक् नंबर कां हरामी थां इसलिये बिनाडरे उसके पीछेआता रहा औऱ फिन सें बोला:"
" अरे जवाबदो देदो मेरीबात कां मास्टरनी जी!
शहनाज नें पहलीबार उसकीतरफ देखा औऱ बोलि:"
" मे तुम् जैसों केँ मुंह नहीं लगती!
इतना कहकर वोँ फिन सें आगेबढ़ गई औऱ कालिया उसके पीछे पीछे! शहनाज एक् तरफ जहांडरी हुई थि वहीउसे कालिया कि हिम्मत पऱ हैरानी हौ रही थि कि दिन दहाड़े केसे वोँ बिनाडरे उसका पीछाकर रहा थां औऱ अब शहनाज कां दिलजोर सें धड़कउठा क्योंकि आगे एक् पतली सि गली थि जिससे निकलकर उसे ठाकुर साहब सें घऱ केँ रास्ते कि तरफ मुड़ना थां औऱ एक् समय केँ लिए उसके पांव कांपउठे मगर अगले हि लम्हा हिम्मत करकेआगे बढ़ गई औऱ जैसे हि गली मे घुसी तौ पीछे सें बाज कि तरह कालिया आया औऱ उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोला:"
" मुंह नहीं लगना तौ मतलगो, वैसे भि मे तौ तुम्हें गले लगाना चाहता हूं!
शहनाज उससेहाथ छुड़ाने कि नाकाम कोशिश करती हुई बोलीं:"
" देखोयह गलतबात हैं, मेराहाथ छोड़ो नहीं तौ अंजाम बहोत बुरा होगा तेरे!
कालिया:" बड़ाजोर दिखारही हैं मुझे, कुछ दिन केँ अंदर हि तेरी सारी अकड़ नहीं निकाल दि तौ मेरानाम कालिया नहीं!
इतना कहकर कालिया नें उसकाहाथ छोड़ दिया औऱ शहनाज तेजी सें आगेबढ़ गई! वोँ करीब-करीब भाग हि रही थि कि कहीं कालिया उसेफिन सें न् पकड़ लेँ मगर कालिया अपनी स्थान सें हिला भि नहीं औऱ शहनाज आखिरकार घऱ केँ अंदर पहुंच गई औऱ पसीने पसीने हुइ पड़ी थि!
उसे देखकर लक्ष्मी अपनी लेकरआई औऱ पानी देतेहुए बोलीं:"
" क्याँ हुआ बेटी? बड़ी गर्मी हें क्याँ बाहर्? केसे पसीना आयाहुआ हैं तुम्हें इतना ज़्यादा?
शहनाज अपने आपको संभालते हुए पानी पिया औऱ बोलीं:"
" हान वोँ मुझे गर्मी कि ज़्यादा आदत नहीं हैं न्! आजसच मे ज़्यादा हि गर्मी हें!!
उसकेबाद शहनाज नें अपना हिजाब उतारा औऱ अपना पसीना सुखाने लगी। लक्ष्मी सें उसेपता चला कि ठाकुर साहब अभि एक् हफ्ता नहीं आँ पाएंगे! खानां खाकर वोँ सो गई!
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