फैंटेसी या षडयंत्र - बदला चुदाई - Complete Kahani Part 1
अजीब बदला मेरे शौहर कां।
मेरी पिछली किस्सा टैटू गुदाई कों आप् सब नें बहोत मनपसंद किया जिसके लिए आप् सब कां दिल सें शुक्रिया। मेरे एक् दोस्त नें मुझसे एक् अपनी फैंटसी पऱ कथा लिखने कां निवेदन किया औऱ अब एक् नई किस्सा लिखरहा हूं जौ पूरीतरह सें एडल्ट होगी औऱ इसमें दिखाया जायेगा कि अपनी बेइज्जती कां केसे एक् शौहर नें अपनी बेगम सें बदला लिया।
साजिया:" लगभग 34 साल कि उम्र। 37:32:39 फिगर। दूध सि गोरी त्वचा, भरीभरी हुई गोलगोल ठोस गुदाज चूचियां, मांसल चर्बी हुएभरा भरा शरीर। बड़ी बड़ी सि मस्ती भरी उभरी हुईँ मादक उभारों वाली गांड़। कुल मिलाकर कुदरत कि कारीगरी कां नायाब नमूना। विवाह कों लगभग पांचसाल होँ गए औऱ चुदाई केँ बाद पूरीतरह सें इसका जिस्म पूरीतरह सें भरकर सोने पे सुहागा होँ गय़ा हें। चलने सें मादक कामुकता लिए हिलती हुईँ चूचियां औऱ गांड़ किसी कों भि दिन मे तारे दिखा देती हैं।
अपने शरीर कों पूरीतरह सें हिजाब सें ढकने वाली एक् घरेलू स्त्री हें जौ पूरीतरह सें संस्कारी हें। घऱ मे जब होती हें औऱ इसकी सुंदरता कां यहरूप दिखाई पड़ता हैं।
Uniq star bhay.aapki kahni mai sabkuch perfect hotha h .mgr meri ek fariyaad h kee ap apne readers kee baat kaa koy reply nahee dete agar meri baat aapko buri lagi h too mein mafi chahunga.dhannywaad aabhar
फैंटेसी या षडयंत्र - बदला चुदाई – New Episode
Unique star bhay ye kahani कब restart karo ge.
Incest - शहनाज़ एक् मजबूर महिला कि दास्तान
दोस्तो मे यहकथा एक् पाठक केँ बहोत ज़्यादा आग्रह करने पऱ लिखरहा हूं जौ कि एक् गूंगी औऱ बहरी स्त्री कि स्टोरी हैं। शहनाज़ नाम कां मतलब होता हैं परियों कि राजकुमारी यानी कि बहोत ज़्यादा हसीन। इस कथा कि नायिका शहनाज़ बिल्कुल परियों कि तरह हि सुंदर हें। पात्र परिचय: शहनाज़:" एक् लगभग 39 साल, दूध सि।फैंटेसी या षडयंत्र - बदला चुदाई – New Episode
भाग नंबर 001.
" आआह्ह तेजतेज धक्के मारो नाँ स्स्स, यूईईईईईई कितनी तडपीहु तुम्हारे बिन।
साजिया चुदते हुएजोर जोर सें सिसकरही थि। उसका शौहर नाजिम उसकेउपर चढ़कर उसेचोद रहा थां औऱ साजिया नीचे सें अपनी गांड़ उछाल उछालकर उसे पूरा सहयोग देरही थि। साजिया लन्ड कों जड़ तक अन्दर लेने केँ लिएउछल रही थि जिससे उसकी चूचियां आपस मे टकरा टकराकर थपथप कि आवाज़ पैदाकर रही थि औऱ नाजिम नें मदहोश होकर उसकी दोनो चुचियों कों पकड़ लिया औऱ मसलते हुएकस कसकर धक्के लगाने लगा तौ साजिया केँ मजे कि कोई सीमा नहीं थि औऱ मस्ती सें फिन सें उसका मुंह खुलता चला गय़ा
" अहहतेज औऱ तेज पूरीजोर सें, औऱ अंदर पूरा अंदर तक घुसाओ।
नाजिम कां लन्ड अंत तक पूरा उसकी बुर मे घुसाहुआ थां औऱ चुदती हुइ साजिया उसे औऱ अंदर घुसाने केँ लिए उकसारही थि। दो मिनट कि चुदाई मे हि नाजिम पसीने पसीने होँ गय़ा थां औऱ साजिया कि कसी हुई बुर कां असर उसके लन्ड पऱ होनेलगा औऱ उसका जिस्म कांपने लगा तोँ उसने तेजी सें लन्ड कों बाहर् निकाल करजोर सें उसकी बुर मे घुसा दिया औऱ उसकेउपर ढेर होताचला गय़ा। साजिया कि बुर अभि ठीक सें चुदी भि नहीं हुइ थि कि आजफिन सें नाजिम कां काम तमाम होँ गय़ा औऱ साजिया उसकेझड़ कर ढीले होतेहुए लन्ड कों अपनी बुर कों पूरीतरह सें कसकरउसे बाहर् जाने सें रोकने लगीमगर उसकी एक् नहींचली औऱ लन्ड किसीमरे हुए सांप कि तरह बुर सें बाहर् निकलता चला गय़ा। लन्ड जैसे हि पूरीतरह सें बाहर् निकला तौ नाजिम कि आंखे लज्जा सें झुक गई औऱ साजिया कां उत्तेजना सें लाल चेहरा गुस्से सें भभकउठा औऱ बोलीं:"
" कभी तोँ मेरीआग बुझा दियाकरो नाजिम। आजफिन सें अधूरा हौ छोड़ दिया मुझे।
नाजिम:" कितनी देर तोँ किया मैने, अब तुम्हारी बुर हें हि इतनीगरम कि मेरा लन्ड पिघल जाता हें तौ इसमें मेरी क्याँ गलती।
साजिया नें एक् उंगली अपनी बुर केँ उपर फिराई औऱ बोलि:"
" आआआह्ह देख नं केसे भट्टी कि तरहभभक रही हैं, थोडा सां आज तोँ चूस लेँ इसे
नाजिम नें उसकीबात सुनकर बुरा सां मुंह बनाया औऱ अपनीनाक सिकोड़कर बोला:"
" छीछी, कितनी गंदीबात करती होँ तुम्। कितनी बारकह चुका हूं कि मुझसे गंदगी मे मुंह नहीं डाला जाता समझी तुम्।
सादिया नें एक् उंगली बुर मे घुसाई औऱ नाजिम कों दिखाते हुएउसे अपने मुंह मे घुसाकर चूस लिया औऱ बोलीं:"
" देखकुछ गंदा नहीं होता, कितना टेस्टी रस हें खट्टा खट्टा सां मेरा। बंदर क्याँ जाने अदरक कां स्वाद।
नाजिम कां मूड खराब हौ गय़ा औऱ वोँ थोडा गुस्से सें बोला:"
" हान मे तौ बंदर हि ठीकहु। अबखुश बस।
साजिया नें अपने होंठो पर्र पड़ी हुइ बुर रस कि एक् बूंद कों अपनीजीभ सें चाट लिया औऱ कामुक इशारे करती हुईँ बोलि
" ऐसेखुश हौ जाती तोँ बात हि क्याँ थि। मुझेखुश करना तुम्हारे बस कां काम नहीं हें समझे।
नाजिम उसकीबात सुनकर आग बबूला हौ गय़ा औऱ बोला:"
" बहोत अधिक गर्मी हें तेरे अंदर ? कोठे पऱ लें जाकर बिठादू तुझेही ?
साजिया केँ होंठो पऱ स्माइल आँ गई औऱ एक् उंगली अपनी बुर मे घुसाकर तेजी सें अंदर बाहर् करती हुईँ बोलि:"
" क्या बात है बिठादे नाँ, कम सें कम थोड़ी तोँ आग ठंडी हौ मेरी। कोई तोँ होगा जोँ मेरी प्यास बुझादे।
नाजिम उसकीबात सुनकर बिना जवाबदिए उठ खड़ाहुआ औऱ अपने कपड़े पहनकर बाथरूम कि तरफचल दिया। साजिया नंगी हि बेड पर्र पड़ीरही औऱ अपनी बुर अपनी उंगलियों सें मसलती रही औऱ उसकीदो उंगलियां उसकी बुर मे घुस गई औऱ साजिया कि मस्ती भरी सिसकारियां घऱ मे गूंजने लगी। थोड़ी देर केँ बाद उसकी बुर झड़ती चली गई औऱ साजिया एक् चादर ओढ़कर सो गई।
दोनो कि विवाह कों लगभग पांचसाल होँ गए थें। साजिया एक् बिल्कुल सीधी सि देहात मे पली बढ़ी मजहबी औऱ संस्कारी लड़की थि मगर नाजिम नें विवाह केँ बादउसे सेक्स केँ बारे मे सभीकुछ बताया, चुदाई वीडियो दिखाई औऱ साजिया पूरीतरह सें परिपक्व होतीचली गई। जब तोँ कभी अकेली पड़ी हुईँ चुदाई कि वीडियो देखती औऱ उसमे देखती कि बुर चुसवाते टाइम लड़की कों कितना स्वादिष्ट एहसास औऱ खुशी मिलता थां तौ उसकी बुर मे भि चीटियां सि रेंग जातीमगर नाजिम इसे बहोत गन्दा समझता थां। शुरुआत मे तौ सभीकुछ ठीकरहा दोनो नें खूब जमकर सेक्स कां मज़ा लिया। नाजिम खूब अच्छे सें सेक्स करता थां मगरकभी उसकी बुर नहीं चूसता थां। साजिया फिन भि खुश थां क्योंकि उसकी प्यास अच्छे सें बुझरही थि। धीरे-धीरे धीरे-धीरे नाजिम कां लन्ड उसकासंग छोड़ने लगा औऱ साजिया प्यासी कि प्यासी हि रह जाती। पिछले लगभगदो साल सें ऐसा हि चलरहा थां औऱ साजिया हरदिन एक् नई उम्मीद मे अपने शौहर केँ लिए सजतीमगर हररोज सिर निराशा हि हाथ लगती औऱ आज नाजिम एक् हफ्ते केँ बाद वापिस आया तोँ साजिया कि प्यास बुरीतरह सें भड़की हुइ थि औऱ फिन सें प्यासी रहने पऱ उसका क्रोध फूट पड़ा औऱ उसनेआज पहलीबार अपने शौहर कों इतनीबात सुनाई थि नहीं तौ आमतौर पऱ वोँ चुपचाप लेटकर सो जाती थि।
सादिया सोचरही थि कि उसे अपने शौहर केँ संगऐसा नहि करना चाहिए थां। उसे स्वयं समझ मे नहि आँ रहा थां कि वोँ इतनी गन्दी बाते केसेकर सकती हैं औऱ अब उसका शौहर उसके बारे क्याँ सोचरहा होगा। मुझसे बहोत बड़ीखता हौ गई। यहसभी सोचते सोचते जैसे तैसे साजिया नींद केँ आगोश मे चली गई।
अगलेदिन वोँ सुभहउठी रात जौ हुआ उसकी आंखो केँ सामने घूमने लगा तोँ साजिया कि आंखेभर आई। उसे समझ नहीं आँ रहा थां कि वोँ अब अपने शौहर सें केसे आंखे मिलाएगी, माफीकिन शब्दों मे मांगे। भरी हुई आंखो सें उसने अपने शौहर केँ लिए उसकीमन पसन्द खीर बनाई औऱ उसका टिफिन पैक करने केँ बाद दोनो ब्रेकफास्ट करनेबैठ गए। नाजिम रातहुए हादसे कि वजह सें बेहद दुःखी थां औऱ बिनकुछ बोले धीरे-धीरे धीरे-धीरे धीरे-धीरे खारहा थां वहीं साजिया कों समझ नहीं आँ रहा थां कि वोँ कहां सें शुरुआत करे। साजिया नें एक् धीरे-धीरे सें एक् चम्मच खीरखाई औऱ उसने अपने शौहर कि तरफ देखा तोँ उसका दुःखी चेहरा देखकर साजिया कां दिलभर आया औऱ वोँ खड़ी होकर उसके सामने पहुंच गई औऱ उसने बड़ी हिम्मत सें अपना चेहरा ऊपर उठाया औऱ अपने शौहर सें आंखे मिलते हि उसकी रुलाई छूट गई औऱ वोँ बिनाकुछ बोले अपने शौहर सें कसकर लिपट गई औऱ जोरजोर सें सुबक सुबककर रोनेलगी। नाजिम किसीबुत कि तरह खामोश खड़ारहा औऱ जैसे हि अपनी पत्नि केँ आंसुओ सें उसका दामन भीगना शुरुआत हुआ थां उसकादिल पसीज औऱ औऱ वोँ तसल्ली देतेहुए बोला
" बसकरो साजिया, क्याँ हुआऐसे क्यूं रोरही हौ तुम् ?
साजिया औऱ जोरजोर सें रोनेलगी तोँ नाजिम सें उसे अपनी बांहों मे कस लिया औऱ बड़ी मुश्किल सें उसेचुप कराया औऱ बोला:
" बसकरो दोस्त, क्याँ हौ गय़ा ? कुछ बताओ तोँ सही मुझे।
साजिया केँ आंसूअब बहुतहद तक रुकगए थें औऱ वोँ उसके सीने सें लगी हुई बोलि:"
" मुझेमाफ कर दीजिए। रात मुझसे बहोत बड़ी गलती हौ गई। अल्लाह कि शपथ मैंने वोँ सभीपता नहींकिस भावना मे बहकरकह दिया।
नाजिम अपनी पत्नि कि वजह सें रात सें हि मानसिक रूप सें तनाव महसूस कररहा थां मगर अभि उसकेइस तरह माफी मांगने सें इसे थोडा चैन मिला औऱ वोँ उसे समझाते हुए बोला
" बस भि करो तुम्। मे तोँ भूल हि गय़ा थां औऱ अब तुम् भि भूलजाओ। रात गई बात गई।
अपने शौहर कि बात सुनकर साजिया कां मन थोडा हल्का हुआ औऱ फिनसंग मे दोनो नें खीरखाई औऱ उसकेबाद नाजिम अपने दफ़्तर केँ लिए निकल गय़ा तौ साजिया बोलीं
" सुनिए साम कों थोडा जल्दघऱ आनां आप्। मे आपका प्रतीक्षा करूंगी।
नाजिम नें उसेपलट कर स्माइल दि औऱ दरवाजा खोलकर बाहर् निकल गय़ा। साजिया घऱ केँ काम मे लग गई मगर अभि उसकेमन मे वहीरात वालीबात घूमरही थि कि क्याँ उसे शौहर नें उसेसच मे माफकर दिया हैं।
वहीं नाजिम पूरेदिन दफ़्तर केँ कामों मे लगा तौ रहामगर उसकामन नहीं थां। रह रहकरउसे साजिया कि बातयाद आँ रही थि कि मुझेअब खुश करना तुम्हारे बस कां काम नहीं हें तौ इसका मतलब हैं कि उसकी प्यास पूरीतरह सें नहीं बुझती हें। मतलब साजिया शरीर कि आग मे झुलसरही हें औऱ अंदर हि अंदरघुल रही हैं। औऱ रात जोँ हुआ वोँ उसकी प्यास नां बुझने कां हि नतीजा थां औऱ फिनदिन मे सुभह उसने माफी भि मांगी मगरतीर तौ कमान सें रात हि निकल चुका थां। रात उसने मेरी कितनी बुरीतरह सें बेइज्जती करी। यह सोचते हि उसके आंखो मे आंसू आँ गए औऱ उसने अपनेजेब सें रुमाल निकालकर अपना मुंहसाफ किया औऱ सोचने लगा कि उसने हमेशा साजिया कां पूरा ध्यान रखा औऱ कभी किसीचीज कि कमीआने दि। मांगने सें पहले उसकीहर एक् ख्वाहिश पूरीकरी मगर बदले मे उसे क्याँ मिला मात्र बेइज्जती औऱ बंदरकह दिया मुझे। उसने मेरेसंग ठीक नहीं किया औऱ मे कभीमाफ नहि करूंगा बल्कि इसका पूरा बदला लूंगा उससे। पूरेदिन उसकेमन मे उथल पुथल चलतीरही औऱ साम कों घऱ जाने सें पहले उसने एक् सेक्स पावर कि गोलीली ताकिआज पूरीरात उसेचोद सके ताकि उसका हमेशा केँ लेकरबंद करसके। नाजिम सोचरहा रहा थां कि आजरात मे साजिया कों बेडबेड घोड़ी बना बनाकर, उल्टी करके अपने नीचेमसल कर, हरतरह सें पूरी बेदर्दी औऱ कठोरता सें चोदूंगा औऱ जब वोँ दर्द केँ मारेजोर जोर सें प्यास तड़पकर, कराहकर उससे छोड़ने केँ लिएभीख मांगने लगेगी तोँ उसका दर्द सें तड़पता हुआ चेहरा देखकर मुझे कितना चैन मिलेगा औऱ मेरा बदला पूरातब कहीं जाकर पूरा होगा।
नाजिम घऱआया साजिया नें एक् मुस्कान केँ संग बांहे फैलाकर उसका स्वागत किया औऱ उससे लिपट गई। नाजिम नें भि उसे अपनेगले सें लगा लिया औऱ उसेऐसा महसूस होँ रहा थां मानो उसकी छाती सें कोई जहरीली नागिन लिपटी हुई हौ। नाजिम नें अपनी आंखेबंद करली तोँ उसकी केँ आंखे साजिया कां दर्द केँ मारे तड़पता कराहता चेहरा घूमउठा उसने खुशी केँ मारे अपनी आंखेखोल कर साजिया कां माथाचूम लिया मानो बकरी केँ हलाल होने सें पहले पहले दुलार पुचकार रहा हौ।
साजिया खुश होँ गई औऱ बोलीं
" कैसारहा आज आपकादिन ? बहुतकाम होगाआज तौ ?
नाजिम:" हानकाम तोँ बहोत थां मगरफिन भि सभी आसानी सें हौ गय़ा।
साजिया नें खुशी खुशी नाजिम कां गालचूम लिया औऱ बोलीं:"
" सच मे आप् बहोत मेहनत करते हें मेरेलिए। चलिए अभि जल्द सें फ्रेश होँ जाइए। फिन संग मे खानां खाते हैं।
जल्द हि दोनो नें खानां खाया औऱ साजिया बरतन धोनेचली गई तौ नाजिम नें अपनीजेब सें गोली निकाल ली औऱ उसेखा गय़ा। थोड़ी देरबाद हि गोली कां असर दिखने लगा औऱ उसके लन्ड मे जोरदार तनाव आनां शुरुआत हौ गय़ा। नाजिम कि आंखे वासना सें लाल होँ गई औऱ गुस्से सें उसकी उसकी आंखे पूरीतरह सें लाल सि होकर सुलगने लगी औऱ अपने बेडरूम मे चला गय़ा औऱ पूरीतरह सें नंगा होकर अपने शरीर पर्र एक् चादर लपेटकर साजिया कां प्रतीक्षा करनेलगा। नाजिम केँ जबड़े बारबार गुस्से सें अपने आप् भींचरहे थें औऱ आज वोँ साजिया कों किसी रण्डी कि तरह मसलना चाहता थां, चोदना नहीं बल्कि पेलना, ठोकना चाहता थां। चाहे तोँ कितनी भि चींखे चिल्लाए मगर वोँ उस पऱ कोईरहम नहि करने वाला थां।
थोड़ी देर केँ बाद साजिया कमरे मे दूध लेकरआई औऱ उसके सामने खड़ी हौ गई औऱ ग्लास उसकीतरफ करतेहुए बोलीं
" लीजिए दूध पीजिए।
नाजिम उसेउसे मुस्कुरा कर देखा औऱ दूध कां ग्लास एक् तरफरख करउसे एक् झटके सें बेड पर्र खींच लिया औऱ उसकी नाइटी कों एक् झटके सें फाड़कर उसकी एक् मम्मों कों सीधे मुंह मे भर लिया औऱ चूसते हुए बोला
" अहह साजिया दूध तौ आज तेरी चुचियों कां पी जाऊंगा।
साजिया इसतरह अचानक हुए हमले सें हैरान होँ गई मगर मम्मों चूसे जाने सें उसे सुखद मस्ती कां एहसास हुआ औऱ सिसकते हुए बोलीं
" अहह क्याँ करते हौ? स्स्स थोडा प्रेम सें कहीं भागी थोड़े हि जारही हूं।
नाजिम नें सीधेहाथ नीचे करके उसकी बुर मे एक् सूखी उंगली पूरी घुसा दि तोँ साजिया दर्द सें कराहउठी औऱ सिसकउठी
" अहह नाजिम, इतने बेसबर मतबनो। थोडा तोँ रहमकरो दोस्त।
रहम शब्द अपने पत्नि केँ मुंह सें सुनकर नाजिम कि नफरत कों हवा मिली औऱ बिनाकुछ बोले साजिया कि दोनो टांगो कों फैला दिया औऱ उसकी सूखी बुर केँ छेद पर्र अपने लन्ड कों रखकर एक् जोरदार धक्का मारा तोँ साजिया केँ मुंह सें दर्दभरी चींख निकल गई क्योंकि लन्ड नें बुरीतरह सें उसकी बुर कि नाजुक दीवारों कों रगड़ दिया थां। उससे पहले कि साजिया कुछ संभलती नाजिम नें ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरुआत करदिए औऱ साजिया दर्द केँ मारे कराहने लगी औऱ उसेऊपर सें धकेलने लगी तौ नाजिम खुशी सें झूमउठा औऱ तेजतेज धक्के लगाने लगा तौ उसकीकसी हुइ बिल्कुल सूखी हुइ गरम बुर केँ आगे नाजिम कां लन्ड जवाबदे गय़ा औऱ उसके लन्ड नें एक् झटके केँ संग उसकी बुर कों भरना शुरुआत कर दिया तौ बुर गीली होँ गई औऱ साजिया केँ आनंदआने लगा तौ मस्ती सें सिसकती हुईँ उसके होंठो कों चूसने लगी। लन्ड फिन सें सिकुड़ कर छोटा होनेलगा तोँ मस्ती मे डूबी हुई साजिया सभीलाज लज्जा भूलकर आज पहलीबार उसे पलटकर उसकेउपर चढ़ गई औऱ कमजोर होते लन्ड कों अपनेहाथ कां सहारा देकर स्वयं हि अपनी बुर मे घुसा लिया औऱ उस पर्र कूदने लगी। नाजिम साजिया कों फिन सें मदहोश होते देखकर पसीने पसीने होँ गय़ा क्योंकि वोँ जानता थां कि उसका लन्ड बिलकुल सिकुड़कर बाहर् निकल जायेगा औऱ वहीहुआ। लन्ड पूरीतरह सें बाहर् निकल गय़ा औऱ साजिया जबरस्ती उसे पकड़ पकड़कर अपनी बुर मे घुसाने कि कोशिश करनेलगी मगर कामयाब नहीं हुई तौ उसने सिसकते हुए सिकुड़ चुके लन्ड पर्र जोरजोर सें अपनी बुर कों आंखे पीछे रगड़ना शुरुआत कर दिया औऱ अपनी दोनो आंखेबंद किएहुए स्वयं हि मस्ती सें अपनी चूचियां मसलेजा रही थि। शुरुआत मे नाजिम साजिया पऱ भारी जरूर पड़ा थां मगर अभि साजिया पूरीतरह सें उसकेउपर सवार होँ चुकी थि औऱ नाजिम हैरान परेशान सां चुपचाप पड़ेहुए उसके उत्तेजना सां लाल भाभुका हौ हुए चेहरे कों देखरहा थां औऱ तभी साजिया पूरीजोर जोर सें उछलने लगी औऱ देखते हि देखते एक् झटके केँ संग उसके लन्ड पऱ जोर सें बैठती चली गई औऱ उसकी मस्ती कि अधिकता सें साजिया कि आंखो कि सफेद सफेद पुतलियां दिखने लगी औऱ इसकेसंग उसकी बुर झड़ती चली गई औऱ उसकी बुर सें निकलते हुएगरम गरम अमृतरस कि गर्मी महसूस करके नाजिम झुलस सां उठा। बुर केँ झड़ते हि बेजान सि ऊपरगिर पड़ी औऱ लंबी लंबी सांसे लेनेलगी औऱ नाजिम नें मजबूरी मे उसे अपनी बांहों मे कस लिया।
नाजिम जानता थां कि वोँ आजफिन सें पूरीतरह सें बेइज्जत हौ गय़ा थां क्योंकि साजिया नें आजभले हि जुबान सें कुछ नहीं बोला थां मगर उसकी हरकते सभी बयानकर गई थि। साजिया नींद केँ आगोश मे चली गई औऱ नाजिम कि नींद पूरीतरह सें उड़ गई थि क्योंकि वोँ क्याँ सोचकर आया थां औऱ उसकेसंग आजफिन सें क्याँ हौ गय़ा।
मे तोँ इसे तड़पाना चाहता हूं, कसकसकर पेलना चाहता थां। अपना बदला लेना चाहता थां मगरआज फिन सें मेरी बेइज्जती होँ गई। अब मुझे क्याँ। करना चाहिए ? केसे अपना बदला पूराकरू ?
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