ब्रह्माराक्षस - Desi sex story - Real Kahani Part 1
सबका स्वागत हैं ब्रह्माराक्षस केँ किरदारों केँ परिचय औऱ किस्सा मे उल्लेखित विश्व केँ विश्व निर्माण केँ बारे मे जानकारी केँ इस अध्याय मे
तौ सबसे पहले हम् इस विश्व सें मिल लेते हैं उसेजान लेते हैं
इसकथा कां विश्व हमारे असल विश्व सें ज्यादा भिन्न नहि हैं सिर्फ कुछ बदलाव किए हैं
इस विश्वास बहोत जीवों कां निवास हैं जिनमे 2 संघों कां निर्माण किया हैं एक् संघ हैं अच्छाई कां तौ दूसरा संघ हैं बुराई कां ईन दोनों पक्षों मे हरसमय युद्ध होता रहता थां जिससे यहा कि धरती रक्त रंजीत होँ जाया करती थि दोनों हि पक्षों कों इसवजह सें बहोत ज़्यादा हानि औऱ नर संहार कां सामना करनापड़ रहा थां इसी केँ चलतेईन दोनों पक्षों केँ उच्च स्तरीय अधिकारियों नें ये फैसला किया कि उन मेसेकोई भि शख्स किसी दूसरे पक्ष केँ सीमा कां उल्लंघन नहि करेगी जिसके बादहर तरफसुख औऱ शांति कां वातावरण फैल गय़ा
मगरयह ज़्यादा टाइम नाँ चला जैसे जैसे वक़्त बढ़रहा थां वैसे हि दोनो पक्षों केँ शक्ति शाली लोगों मे अहंकार कां जन्म होनेलगा औऱ उसी केँ चलतेजहा बुराई कां पक्ष अपने समाज कां विस्तार करने केँ लिएहर संभव कोशिश कररहा थां तौ वही अच्छाई कां पक्ष अपने हि जलन केँ चलते अपने हि साथियो कां विनाश करने केँ लिए आतुर थां
औऱ इसीजलन केँ वजह सें इसकथा कि शुरूवात हुईँ किस्सा पऱ जाने सें पहले हम् इस विश्व कि रचना केँ बारे मे जानकारी प्राप्त कर लेते हें
इस विश्व मे तीन पक्ष हैं पहला हैं अच्छाई इस पक्ष मे वहीलोग हैं जोँ कि अपनेसब दुष्कर्मों कों सबमोह माया कों छोड़कर स्वयं कों संसार कि भलाई औऱ रक्षा केँ लिए समर्पित कर देते हें
तोँ दूसरा पऱ हैं प्राणी पक्षइस पक्ष मे आम मानव याँ ऐसेजीव जौ अभि भि सत्कर्म औऱ दुष्कर्म केँ बीच फंसेहुए हें जोँ कि नां पूर्णतः सत्य केँ रास्ता पऱ हैं औऱ नाँ हि बुराई केँ रास्ता पर्र
वही तीसरा पक्ष पर्र हैं बुराई कां जिसमें वोँ जीव हैं जोँ पाप औऱ दुष्कर्म कों हि अपने जिंदगी कां सारसमझ कर जीते हैं इनका उद्देश्य एक् हि हैं कि इनके अलावा इस संसार मे कोई भि शक्ति नाँ हौ
जब संसार मे अच्छाई औऱ बुराई केँ पक्ष मे महा संग्राम होँ रहा थां थां तभी आसमान सें एक् बहोत बड़ा शक्ति पुंज धरती पर्र आके गिरा जिसे पाने केँ लिए बुराई केँ पक्ष नें हर सम्भव प्रयास किया परंतु उस पुंज नें स्वयं कों अच्छाई केँ पक्ष केँ अधीनकर दिया जिसके बादमहा संग्राम मे बुराई पर्र अच्छाई कि जीत कां जश्न मनाये जानेलगा जिसके बाद वोँ पुंजसात अस्त्रों मे बदल गय़ा जिनमें महा चमत्कारिक शक्तियों कां वास थां जिन्हें सप्त शक्ति कहा जाता हैं औऱ यही कारण हैं कि बुराई पक्षइसे पाने केँ लिएहर संभव कोशिश कररहा थां
मगरउन अस्त्रों नें अच्छाई केँ पक्ष मे सें सात योद्धाओं कों अपने धारक केँ रूप मे चुन लिया थां औऱ उनसात योद्धाओं केँ संघ कों सप्तऋषि केँ नाम सें जानां जाता हैं
तोँ वहीइस किस्से केँ बाद अच्छाई केँ पक्ष मे कुछ साधु अपने हि साथियों सें ईर्ष्या करनेलगे जिसका फायदा बुराई कां पक्ष लेनेलगा इसीबात कों ध्यान मे रखतेहुए उन सप्तऋषि नें सब सप्त अस्त्रों कों छुपा दियाजब तक उनकी जरूरत नां नाँ होँ औऱ उसी केँ संग हि अच्छाई केँ पक्ष कों तीन आश्रमों मे विभाजित कर दियाजहा सबको उनके कर्मों केँ अनुसार जगह दिया जाता
सबसे पहलेआता हैं कालदृष्टि आश्रम ये सबसे निचले स्तर पर्र कार्यरत हें इनका कार्य इतना हि हैं कि वो इसइस संसार मे ग्यान कां प्रसार करे
फिनआता हैं काल दिशा आश्रम जौ कि मध्यम स्तर पऱ कार्यरत हें इनका कार्य यह हैं कि ये अपने संपूर्ण जिंदगी काल मे अपनी संस्कृति अपनी परंपरा औऱ अच्छाई कि सुरक्षा करे किसी भि कीमत पर्र
औऱ सबसे आखिर औऱ उच्च स्तरीय आश्रम हैं काल विजय आश्रम यह आश्रम इस संसार मे अच्छाई केँ रक्षण केँ संग हि बुराई कां विनाश हौ यह सुनिश्चित करता हैं
हर आश्रम कि देखरेख औऱ सुरक्षा कि जिम्मेदारी सप्तऋषि कि थि इसीलिए उन्होंने हर आश्रम मे 2-2 ऋषि केँ संघ मे रहने कां निश्चय किया औऱ जौ सातवा ऋषिबचा जौ कि बाकी 6 ऋषि मे सबसे ज़्यादा शक्ति शाली केँ संग हि ज्ञानी भि थें उन्हें मायावी महागुरु कां सम्मान देके उन्हें तीनों आश्रम औऱ सातों अस्त्रों केँ सुरक्षा कि जिम्मेदारी दि गई
इस किस्सा मे हरदिन एपसोड देना थोडा मुश्किल होगा इसीलिए 1 दिन केँ गैप सें एपसोड आएँगे
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आज केँ लिए इतना हि
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ब्रह्माराक्षस - Desi sex story – New Episode
अध्याय पहला
जैसे कि सबने पढ़ा कि केसे अच्छाई कों मिलीनई शक्तियों केँ कारण अच्छाई केँ संग देने वालेलोग अपने हि साथियों सें ईर्ष्या करनेलगे उन्हें अपने हि साथियों सें जलन होनेलगी जिसका फायदा बुराई कां पक्ष लिया करता हैं
औऱ इसीजलन कां शिकार बना एक् साधु औऱ साध्वी कां जोड़ा दोनों भि विवाहित थें औऱ पूरे संसार केँ मायावी शक्तियों सें पूर्णतः शिक्षित औऱ जानकार थें औऱ वोँ अपनीसब शक्तियों कां प्रयोग मात्र संसार केँ भलाई केँ लिए करते थें जिससे वोँ सभी स्थान पर्र प्रसिद्ध होनेलगे मगर उनके आसपास केँ लोगों कों येअछा नहि लगता थां इसी केँ चलते उन्होंने एक् षड्यंत्र कां निर्माण किया औऱ उन साधु साध्वी कां रूप लेकर एक् महान विद्वान साधु केँ यज्ञजगह पर्र संभोग क्रिया करनेलगे
जिससे वोँ यज्ञ निष्फल होँ गय़ा औऱ वोँ साधु क्रोधित हौ गएमगर वोँ दोनों बहरूपिये वहां सें भाग निकले मगरउस साधु नें उनका नकली चेहरा देख लिया थां जिससे वो सीधेउन साधु साध्वी केँ घऱजा पहुचे जहा वोँ दोनों अपने अजन्मे पुत्र केँ लिए प्राथना कररहे थें
औऱ जब उन्होंने उस साधु कों अपने दरवाज़ा पर्र देखा तौ वोँ आती प्रसन्न होँ उठे परंतु उनका क्रोधित चेहरा देखकर डरगए औऱ उनसेइस गुस्सा कां कारण पूछने लगेमगर उस साधु नें बिनाकुछ कहे औऱ बिनाकुछ सुने उन्हें अक्षम्य श्राप दे दिया जिसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु होँ जातीमगर उनकेकिए पुण्य कर्म केँ कारण उनकी मृत्यु नहि हुईँ परंतु वोँ असुररूप मे परावर्तित हौ गएमगर उनके कर्मों औऱ ज्ञान केँ वजह सें वोँ ब्रम्हाराक्षस बनगए
औऱ जबउन दोनों कों इस षड्यंत्र कां पताचला तोँ उन्होंने उनसब साधुओं कां अंतकर दिया औऱ उन्हें भि अपनेतरह हि ब्रह्माराक्षस कां रूप लेने केँ लिए मजबूर कर दिया औऱ तब सें जौ भि वेदपाठ करने वाला ज्ञानी विद्वान साधु याँ आदमीकोई भि अक्षम्य अपराध करता वोँ ब्रह्माराक्षस कां रूप लेने केँ लिए मजबूर हौ जाते इसीलिए उनकाजगह पाताल लोक मे हौ गय़ा औऱ उसदिन सें वोँ दोनों साधु साध्वी पाताल लोक मे रहकर भि अच्छाई कां संग देते परंतु इसवजह सें उनका पुत्र जिसने इस संसार मे कदम भि नहि रखा थां वोँ मृत्यु कों प्राप्त होँ गय़ा औऱ इस कां पूर्ण दोष उन्हीं ज्ञानी साधु पऱ आया जिसने श्राप दिया थां इसी कारण वो भि ब्रह्माराक्षस केँ रूप मे परावर्तित होँ गय़ा
तौ वहीइस तरह पूरे संसार मे इसबात कां खुलासा हौ गय़ा औऱ सब साधु महात्मा अपने अपने दुष्कर्म कि माफ़ी पाने केँ लिए उसका प्रायश्चित करने केँ लिएअलग अलग तरीके करनेलगे मगर विधि केँ विधान औऱ कर्मों केँ फल सें कोईबच नाँ सका औऱ इसतरह ब्रह्माराक्षस प्रजाति कां निर्माण हुआ
तौ वहीइस सभी केँ ज्ञात होते हि सप्तऋषियों नें एक् आपातकालीन बैठक बुलायी औऱ फिन सबने मिलकर फैसला किया कि हर 100 सालों मे अस्त्रों कि जिम्मेदारी वो अपने उत्तराधिकारी कों देकर अपने कर्मों कां दंड पाने केँ लिए मुक्त हौ जाएंगे औऱ तभी सें ये नियम कों लागू किया गय़ा
तौ वहीउन साधु साध्वी जोँ अब ब्रह्माराक्षस प्रजाति केँ सम्राट औऱ साम्राज्ञी केँ रूप मे थें वोँ भि उन सप्त अस्त्रों कि सुरक्षा केँ लिए अपना योगदान देनेलगे औऱ इसीवजह सें उन सप्तऋषियों नें मिलके अपनी सप्त शक्ति सें उन दोनों कों इंसानी रूप देने कां फैसला कियामगर इसकेलिए उन्हें उचित विद्या औऱ मंत्र नहि मिलपा रहा थां इसीवजह सें वोँ हर लम्हा उन अस्त्रों कि शक्ति कों औऱ ज्यादा जानने कां प्रयास करतेरहे औऱ जब उन्हें उस मंत्र कां पताचला तोँ उन्होंने जल्दी उसका इस्तेमाल उन दोनों पर्र कियामगर वोँ निष्फल हौ गय़ा जिससे सबलोग उदास होकर अपने अपने नियमित कार्यों मे लागगए
औऱ वक्त कां पहिया अपनीगति सें चलनेलगा कईशतक गुजरगए सप्तर्षियों कि कई पीढ़ियों कों शस्त्र धारक बनने कां सौभाग्य प्राप्त हुआ थां परंतु जैसे जैसे संसार मे पाप कां साम्राज्य स्थापित होनेलगा तौ अस्त्रों नें भि अपने धारक केँ चुनाव कों औऱ ज़्यादा कठिन औऱ करीब नामुमकिन बना दियाजिस वजह सें कोई भि शख्सअब धारक नहि बनपाई औऱ उनकोउन अस्त्रों कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी दि गई औऱ उन अस्त्रों कि शक्तियां नाँ होने केँ कारणसभी चिंतित होनेलगे क्यूंकि जबपाप कां साम्राज्य स्थापित हुआतब सें लेकरअब तक बुराई केँ पक्ष नें असीमित मायावी शक्तियों कों ग्रहण कर लिया थां औऱ वो महा शक्ति शाली हौ गए थें इसी कारण सें अब अस्त्रों कि सुरक्षा खतरे मे पड़ गई थि तब उन्हीं दो साधु साध्वी नें जिनका नाम त्रिलोकेश्वर औऱ दमयन्ती थां
उन्होंने अपने ग्यान औऱ ब्रह्माराक्षस कि शक्तियों केँ सहायता सें नए सप्तर्षियों कों वोँ अलौकिक ग्यान औऱ विद्या प्रदान कि जिसका पता सिर्फ देवता औऱ असुरों कों थां औऱ जब वो ग्यान सप्तर्षियों कों प्राप्त हुआ तोँ बहोत सें असुर औऱ बुराई केँ पक्ष केँ अन्य मित्र क्रोधित हौ गए औऱ उन्होंने उन दोनों केँ खिलाफ षडयंत्र रचना शुरुआत कर दिया जिसमें उनकासंग स्वयं ब्रह्माराक्षसोँ नें दियामगर सभी जानते थें कि उनपर सीधा हमला करने सें वोँ सब मारे जाते इसीलिए उन्होंने छल कां सहारा लेनासही समझा
तौ वहीजब कलयुग कां आरंभहुआ तोँ असुरों कों येसही टाइमलगा औऱ उन्होंने अपने सालों प्राचीन बदला लेने केँ लिए योजना बनाना शुरुआत कर दिया औऱ फिन वोँ टाइमआया जब पूरे संसार मे कलयुग कां प्रभाव फैल गय़ा औऱ अच्छाई कां पक्ष कमजोर पड़ने लगामगर तभीउस समय केँ सप्तर्षियों नें पुराना ग्रंथों मे सें कई सारी पुराना विद्या सीखली जिनको पुराना काल मे अस्त्रों कि शक्तियों केँ आगे तुच्छ समझकर भुला दिया गय़ा थां उन्हीं शक्तियों मे उन सप्तर्षियों कों कुछऐसे मंत्र मिले जिनसे उन अस्त्रों कि शक्तियों कों जागृत करके इस्तेमाल कियाजा सकता थां परंतु उन अस्त्रों केँ धारक कि शक्तियों केँ आगेयह मंत्र तुच्छ समझे जाने जाते थें इसीलिए अब तक इनके बारे मे जानकारी किसी कों भि नहि थि परंतु टाइम कि मांग नें सबकोईन शक्तियों सें मिला दिया थां
१/०१/२००२
इस तारिक कों एक् बहोत हि विचित्र घटना घटीं इतिहास मे पहलीबार एक् ब्रह्माराक्षस जन्म लेने वाला थां येबात हर स्थान पर्र आग कि तरहफैल गई क्यूंकि मृत्यु केँ बाद बहोत सें ज्ञानी विद्वान लोग ब्रह्माराक्षस बनेहुए थें मगर जिसका जन्म हि ब्रह्माराक्षस कि रूप मे हुआ होँ ऐसाये पहला बालक थां औऱ उसके माता पिता कोई औऱ नहि बल्कि ब्रह्माराक्षस प्रजाति केँ सम्राट औऱ साम्राज्ञी थें औऱ जब एक् ब्रह्माराक्षस नें सम्राज्ञी कि हालत देखी तोँ उसने बताया कि जौ बालक श्राप केँ प्रभाव सें मारा गय़ा थां वोँ पुनर्जन्म लेने वाला हैं मगरइस बार वोँ बालक जन्म सें हि ब्रह्माराक्षस होगा औऱ वोँ सब सें ज़्यादा शक्तिशाली होगायह सभी बताने वाला ब्रह्माराक्षस औऱ कोई नहि वही साधु थां जिसने त्रिलोकेश्वर औऱ दमयन्ती कों श्राप दिया थां
ऐसे हि १ वर्षबीत गय़ा औऱ वोँ टाइम आँ गय़ा जब साम्राज्ञी दमयन्ती अपने बालक कों जन्म देने वाली थि मगर असुरों केँ छल सें इस टाइम तक सम्राट औऱ साम्राज्ञी दोनों बेहद कमजोर होँ गए थें औऱ जब दमयन्ती नें बच्चे कों जन्म दिया तौ वहां मौजूद सब चकितरह गए क्यूंकि बालक इंसानी रूप मे थां जिससे सभीलोग उदास होँ गए शिवाय सम्राट औऱ साम्राज्ञी केँ क्यूंकि उन्हें एहसास हौ गय़ा थां कि यह इंसानी रूप सप्तअस्त्रों कि शक्ति कां नतीज़ा हैं जिस शक्ति कां इस्तेमाल उन दोनों कों इंसानी रूप देने केँ लिएहुआ थां परंतु सबकोलगा कि वोँ निष्फल हौ गई मगरअसल मे वोँ शक्ति उन दोनों केँ बदन मे समा गई थि औऱ अब वोँ पूर्ण शक्ति उस बालक केँ अंदर थि
अभि वोँ दोनों इसबात कि खुशिया मना पाते उससे पहले हि उन पऱ आक्रमण हौ गय़ा जौ कि उनके अपने साथियों नें किया थां साम्राज्ञी तौ बालक कों जन्म देनेवजह सें औऱ असुरों द्वारा किएगए छल सें अत्याधिक कमजोर थि तोँ वही कमजोर तौ सम्राट भि थें मगर उन्होंने अपनीबची हुईँ सब शक्ति कों एकत्रित कर केँ अपने पुत्र केँ लिए एक् विशेष प्रकार केँ कवच कां निर्माण किया जिससे उस बच्चे केँ शक्तियों कां एहसास होनाबंद होँ गय़ा औऱ उन्होंने उस बालक कों अपने चमत्कार सें कहींदूर भेज दियामगर इससभी केँ कारण वोँ बेहद कमजोर हौ गए औऱ इसी कां फायदा उठाकर असुरों नें उन्हें कैदकर दिया औऱ उनका हुकुम मानेऐसे ब्रह्माराक्षस कों सम्राट घोषित किया गय़ा
उन्होंने त्रिलोकेश्वर औऱ दमयन्ती कों मारने कां भि प्रयास किया परंतु ब्रह्माराक्षस कों मारने केँ लिए ब्रम्हास्त्र कि जरूरत होती हैं जौ उनकेपास नहि थां औऱ नाँ वोँ इतने सक्षम थें कि ब्रम्हास्त्र जैसी शक्ति कां इस्तेमाल करसके
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आज केँ लिए इतना हि
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Hello doston me jaanta hoon कि ye story aisa end deserve नहि karti aur na sirf 77 updates deserve karti hain ise औऱ बहोत कुछ pana tha मगरकुछ complications केँ kaaran aisa नहि ho paya उसके liye aap sabse me maafi chahunga
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ब्रह्माराक्षस - Desi sex story – New Episode
किरदारों कां परिचय
त्रिलोकेश्वर = ब्रह्माराक्षस प्रजाति कां सम्राट फिलहाल असुरों कि कैद मे हैं
दमयन्ती = ब्रह्माराक्षस प्रजाति कि सम्राज्ञी ये भि असुरों कि कैद मे हैं
विक्रांत = ब्रह्माराक्षस प्रजाति कां गुरु इसने हि श्राप देकर त्रिलोकेश्वर औऱ दमयन्ती कों ब्रह्माराक्षस बनने पर्र मजबूर किया थां
काली = ब्रह्माराक्षस प्रजाति कां नया सम्राट असुरों कां गुलाम
मायासुर = असुरों कां सेनापति
मोहिनी = असुरों कि योद्धा
कामिनी = असुरों कि योद्धा
विराज = असुरों कां सम्राट
असुरों केँ बाकी केँ मित्र = प्रेत, भूत, पिशाच, नरभेड़िये, तांत्रिक
शैलेश = अस्त्र धारक / रक्षक अस्त्र क्रमांक 7 नंदी अस्त्र आम लोगों केँ लिए एक् सफल व्यापारी (Business mann) बेहद आमिर औऱ शक्तिशाली व्यक्ती परंतु वही सर्वोत्तम साधु जिन्होंने नंदी अस्त्र कों जागृत कर दिया हैं औऱ उसकी शक्तियों कां प्रयोग करने मे सक्षम भले हि अस्त्र कों वो पूरीतरह सें धारण करने मे असक्षम रहेमगर फिन भि अकेले हज़ारों कि सेना कों मार गिराये
गौरव = अस्त्र धारक / रक्षक अस्त्र क्रमांक 6 वानर अस्त्र आम लोगों केँ लिए एक् सफल पहलवान (gymnast) बेहद स्फूर्त औऱ तेज व्यक्ती परंतु वही सर्वोत्तम प्रबंधक अपने ग्यान केँ सहायता सें हर परिस्थिति मे सें निकलने केँ लिए योजना बनाना इनकेलिए सबसे आसानकाम हैं इन्होने भि वानर अस्त्र कों जागृत किया हैं औऱ उसकी शक्तियों कां प्रयोग करने मे सक्षम भले हि अस्त्र कों वो पूरीतरह सें धारण करने मे असक्षम रहेमगर फिन भि इनकीगति इतनी कि प्रकाश केँ गति सें एक् स्थान सें दूसरी स्थान जाने मे सक्षम
ये दोनों भि कालदृष्टि आश्रम केँ स्वामी हें यह दोनों वहां पऱ वास नहि करते हें मगरफिन भि अपने कर्तव्य चुकाने केँ लिएकभी भि असफल नहि हुएइसी वजह सें इनकी दोहरी जीवन सें किसी अन्य साधु कों कोई आपत्ति नहि हैं
साहिल = अस्त्र धारक / रक्षक अस्त्र क्रमांक 5 अग्नि अस्त्र यह सज्जन आम लोगों केँ इलाक़ों सें दूरचीन देश केँ सीमा पर्र बने जंगलों मे रहते हें वहां कि सरकार भि इनका औऱ इनके बुद्धी कां गुणगान करने केँ लिए मजबूर हैं ये एक् उत्तम योद्धा हैं औऱ चीन केँ जंगली आदिवासियों कों अपने शिष्य रूप मे स्वीकार करके अच्छाई पक्ष केँ लिए सैन्य कां निर्माण कररहे हें इन्होंने भि अग्नि अस्त्र कों जागृत किया हैं औऱ उसकी शक्तियों कां प्रयोग करने मे सक्षम हैं भले हि अस्त्र कों वो पूरीतरह सें धारण करने मे असक्षम रहेमगर फिन भि इनकी शक्ति जब जगती हैं तौ ये अकेले हि बड़ी सें बड़ी सेना कों जलाकर राख मे बदलदे
दिलावर = अस्त्र धारक / रक्षक अस्त्र क्रमांक 4 जल अस्त्र आम लोगों केँ लिए एक् सफल तैराक अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर्र विजेता बेहद स्फूर्त औऱ तेज व्यक्ती परंतु वही सर्वोत्तम प्रबंधक अपने ग्यान केँ सहायता सें हर परिस्थिति मे सें निकलने केँ लिए योजना बनाना इनकेलिए सबसे आसानकाम हैं इन्होने भि अपनेजल अस्त्र कों जागृत किया हैं मगर अस्त्र कों वो पूरीतरह सें धारण करने मे असक्षम रहेमगर फिन भि इनकीजल शक्ति इतनी प्रबल हैं कि यह अकेले बड़े सें बड़े समुद्र कों सूखादे याँ फिन किसी सूखेहुए समुद्र कों पुनर्जीवित करदेसंग हि ये किसी भि समुद्री जीव कि भाषासमझ सकते हें औऱ बोल सकते हें
ये दोनों भि काल दिशा आश्रम केँ स्वामी हें यह दोनों भि वहांवास नहि करतेमगर जब भि इनकी जरूरत होती हैं यह जल्दी आश्रम पहुच जाते हें
शांति = अस्त्र धारक / रक्षक अस्त्र क्रमांक 3 धरती अस्त्र आम लोगों केँ लिए एक् सफल वैद्य (डॉक्टर) बेहद समझदार औऱ शांत स्वभाव कि व्यक्ती परंतु वही इन्हें चारो वेदों कां ग्यान हैं ख़ासकर आयुर्वेद कां यह अपने ग्यान केँ सहायता सें हर मनुष्य कां इलाज करती हैं औऱ उन कि हैसियत केँ हिसाब सें हि उनसेधन लेती हैं इन्होने भि अपने धरती अस्त्र कों जागृत किया हैं परंतु ये भि बाकीसभी कि तरह अस्त्र कों पूरीतरह सें धारण करने मे असक्षम रहेमगर फिन भि इनका जिस्म चट्टान जैसे मजबूत हैं औऱ उससे भि मजबूत हैं इनका विश्वास जोँ हर मुश्किल सें मुश्किल काम कों करने कि ताकत इन्हें देता हैं औऱ संग हि ये किसी भि धरती पर्र रहने वालेहर प्राणी औऱ मनुष्य कि भाषाबोल औऱ समझ सकते हें
दिग्विजय = अस्त्र धारक / रक्षक अस्त्र क्रमांक 2 सिँह अस्त्र आम लोगों केँ लिए RAW एजेंट बेहद स्फूर्त औऱ दिलेर व्यक्ती तौ वही सर्वोत्तम योद्धा चाहे सामने कोई भि हौ यह किसी सें भि नहि डरतेजिस वजह सें जौ काम बाकीलोग करने मे कतराते हैं वोँ कामयह मुस्कराते हुए करते हें इन्होने भि अपने सिंह अस्त्र कों जाग्रत किया हैं परंतु बाकीसभी केँ जैसे हि पूरीतरह सें धारण करने मे असक्षम रहेमगर फिन भि इनकाबल इतना अधिक हैं कि यह बड़ी सें बड़ी chattan कों अपने एक् घुसे मे चकनाचूर करदे
ये दोनों भि काल विजय आश्रम केँ स्वामी हें ये दोनों भि बाकियों कि तरह अपनी दोहरी जीवन जीते हें
सबसे अंतिम औऱ शक्तिमान अस्त्र हें काल अस्त्र इसके धारक / रक्षक हैं गुरु राघवेन्द्र इनको इनके ग्यान औऱ अनुभव केँ आधार पर्र मायावी महागुरु कां जगह प्राप्त हुआ हैं बाकी 6 धारक आश्रम कि व्यवस्था औऱ जिम्मेदारी इन्हीं केँ उपर छोडकर शहर मे अपनीअलग जीवन जीते हें इन्होंने अपनी पूरे जिंदगी-भर मात्र आश्रम मे रहकर वहां कि स्थिति औऱ व्यवस्था सम्भाले हुए हें यह हमेशा इसी प्रयास मे रहते हें कि कभी भि किसी भि अच्छाई पक्ष केँ योद्धा पऱ संकट नां आए
इस स्टोरी मे एक् किरदार औऱ हैं औऱ वोँ हैं भद्रा गुरु राघवेंद्र कां शिष्य जिसे वोँ अपने पुत्र कि तरह मानते हें उनकेपास जौ भि ग्यान औऱ विद्या हैं सभी उन्होंने भद्रा कों भि दि हैं भद्रा अब तक तौ आश्रम मे हि रहता थां परंतु उसके 21 वे बर्थडे केँ बाद सें गुरुदेव नें उसेशहर भेज दियाजहा उसे आधुनिक युग केँ ग्यान औऱ यंत्र केँ विज्ञान कां निरीक्षण करके समझना थां इसीलिए वोँ पिछले 1 साल सें शहर मे रहरहा हैं इसके औऱ भि राज हैं जौ वक़्त केँ संग बाहर् आयेंगे औऱ यहीइस कथा कां नायक भि हैं
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आज केँ लिए इतना हि
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ब्रह्माराक्षस - Desi sex story - Next part mein bada twist
Hello doston me jaanta hoon कि ye story aisa end deserve नहि karti aur na sirf 77 updates deserve karti hain ise औऱ बहोत कुछ pana tha मगरकुछ complications केँ kaaran aisa नहि ho paya उसके liye aap sabse me maafi chahunga
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