ब्रह्माराक्षस - Desi sex story – New Episode
अध्याय दूसरा
१/१/२००२
आज अच्छाई केँ पक्ष केँ लिए बड़ा हि खासदिन थां आज केँ हि दिन उनके आश्रमों कि स्थापना हुई थि जिसवजह सें आज सातों अस्त्र धारक एकसाथ एक् स्थान पर्र मौजूद थें काल विजय आश्रम केँ मध्य मे इस समारोह कि सारी व्यवस्था कि गयीँ, थि औऱ जबसब अस्त्र धारक एक् संग एक् स्थान पर्र आए तोँ आकाश आतिशबाजी होनेलगी औऱ फिनइस समारोह कां आरम्भ होँ गय़ा जिसमें हरकोई अपनी अपनीकला कां प्रदर्शन करने केँ लिए उत्साहित थें औऱ अभि समारोह केँ आरंभ केँ पूर्व सबलोग काल विजय आश्रम। केँ पास मे बने एक् नदी पर्र जाकर अपने पूर्वजों कों नमन करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने वाले थें यहीइस समारोह कां पहला पड़ाव थां
अभि सभीउस नदी केँ पास पहुंचे हि थें कि तभी उन्हें वहां किसी बच्चे केँ रोने कि आवाज़ सुनाई देनेलगी जिसेसुन कर वो सब बहोत अधिक चकित हौ गए थें क्यूंकि आश्रम कां यह इलाक़ा बेहद मजबूत सुरक्षा कवच सें घिराहुआ थां जिसको भेदन करना किसी केँ लिए भि मुमकिन नहि थां
जबसबउस आवाज़ कि दिशा मे पहुचे तौ उन्हें वहां एक् बालक दिखाई दिया जोँ कि जमीन पर्र गिराहुआ थां औऱ वोँ सूरज केँ उष्म तापमान केँ कारण केँ कारणरो रहा थां उसके जिस्म कों देखकर हि लगरहा थां कि वो अभि कुछ घंटों पहले हि जन्मा हैं
उस बालक कों देखते हि गुरु राघवेंद्र नें अपनेदो शिष्यों कों उस बालक कों लेँ आने कां आदेश दियामगर इससे पहले कि वोँ दो सेवकउस बालक तक पहुचते उससे पहले हि उस स्थान पर्र एक् नर-भक्षी वाघ आँ गय़ा जिसेदेख शांति जल्दी हि आगे बढ़ी औऱ उन दोनों सेवकों केँ आगे खाड़ी हौ गई औऱ फिन अपनी आखेंबंद कर केँ उसशेर केँ संग संपर्क बनाने लगी
शांति :- तुम् कोण होँ औऱ आश्रम केँ इस हिस्से मे केसेआए
शांति इस वक्तवाघ कि भाषाबोल रही थि जोँ वहां मौजूद कोई भि समझ नहि पारहा थां शिवाय उसवाघ केँ
वाघ :- मे टहलरहा थां तब मुझेइस दिशा सें किसी बच्चे केँ रोने कि आवाज़ आनेलगी इसीलिए मे इस दिशा मे आया
शांति :- बालक केँ बारे मे सोचने केँ लिए शुक्रिया वाघजी परंतु अबयहा सें हम् सम्भाल लेंगे
वाघ :- ठीक हैं आपका शक्ति स्त्रोत मे महसूस करपारहा हूं इसीलिए मे आप् पर्र भरोसा कररहा हूं
इतना बोलकर वोँ वाघ वहां सें चला गय़ा जिसके बाद शांति नें उस बालक कों गोद मे उठाया औऱ जब उसने बालक केँ चेहरे पऱ नजर डाली तौ जैसे शांति पत्थर कि मूर्त बन गई वोँ मात्र एक् टकउस बालक केँ औऱ देखने लगी जैसे कि उसे बाकी सबसेकोई लेना देना नहि थां उसकी नीली आखें मासूम सां चेहरा शांति कों किसी औऱ हि दुनिया मे लेँ जारहा थां तौ वही जैसे हि शांति उस बालक कों उठाया बालक कां रोनाबंद हौ गय़ा
जबसभी नें शांति कों ऐसे मूर्ति बना देखा तौ सभी शांति कों आवाज़ देनेलगे मगर शांति तौ किसी औऱ हि दुनिया मे गुण थि यहदेख कर दिग्विजय शांति केँ पासआया औऱ हल्के सें उसके कंधे कों पकड़कर हिलाने लगा जिससे शांति होश मे आँ गई औऱ फिन वोँ उस बच्चे कों लेके राघवेन्द्र केँ पास पहुंच गई
शांति :- वोँ वाघइस बच्चे केँ रोने कि आवाज़ सुनकर हि यहांआया थां
राघवेन्द्र :- ठीक हैं परंतु तुम्हें क्याँ हुआ थां कितने आवाज़ दिए तुम्हें
शांति :- क्षमा करना गुरुजी मे इस बालक केँ सुंदरता मे खो गई थि
राघवेन्द्र :- कोईबात नहि
इतना बोलकर राघवेन्द्र नें बालक कों गोद मे लिया औऱ उसके माथे पऱ हाथरख कर उसके बारे मे जानकारी प्राप्त करने केँ लिए प्रयास करनेलगे मगर जैसे हि वोँ उस बालक केँ मस्तिष्क तक पहुंच सकते उससे पहले हि उन्हें एक् झटकालगा जिससे उनकाहाथ उस बालक केँ माथे सें हट गय़ा यहदेख कर राघवेन्द्र चकित हौ गए थें उन्हें यह तौ पताचल गय़ा थां कि वे किसीआम इंसान कां पुत्र नहि हैं मगरयह किसका पुत्र हैं औऱ आश्रम केँ इस हिस्से मे केसेआया यह अभि तक पहेली थि किसे सुलझाने केँ लिए राघवेन्द्र नें फिन सें एक् बारउस बालक केँ सर पऱ हाथ रखकर उसके अस्तित्व तक पहुंचने कां प्रयास किया जिसके लिएइस बार उन्होंने अपने अस्त्र कि शक्ति कों भि जागृत किया थां मगरफिन भि उनकेहाथ निराशा हि आयी परंतु इसबार उन्होंने कुछअलग महसूस किया उन्हें लगा जैसे अस्त्र कि शक्ति उस बालक केँ तरफ आकर्षित हौ रही हैं औऱ इसबात कां एहसास होते हि उन्होंने अपने अस्त्र कि शक्तियों कों सुप्त कर दिया
गौरव :- कुछपता चला गुरुदेव आपकोइस बालक केँ बारे मे
राघवेन्द्र :- हाँइस बालक केँ माता पिता कों कुछ लोगों नें मार डाला औऱ फिनइस बच्चे कों मरने केँ लिएनदी मे छोड़ दियाजिस वजह सें यहनदी केँ बहाव केँ संग आश्रम कि औऱ आँ गय़ा (झूठी स्टोरी)
जब राघवेन्द्र नें यहकथा सुनायी तोँ सभी बालक कों सहानुभूति केँ संग देखने लगे तोँ वही राघवेन्द्र बच्चे केँ बारे मे सबको बताना ठीक नहि समझरहे थें इसीलिए उन्होंने सबसेकह दिया कि " ये बालक आश्रम मे हि रहेगा औऱ वोँ स्वयं इस बालक कों शिक्षा देंगे" राघवेन्द्र केँ इस फैसले पर्र कोईकुछ नहि बोला क्यूंकि सभी जानते थें कि राघवेन्द्र जौ भि करते हें वोँ सबके औऱ आश्रम केँ हित मे हि करते हें
इसकेबाद सबने कार्यक्रम कों फिन सें आरंभ किया औऱ पूरे कार्यक्रम केँ दौरान शांति उस बालक कों अपनेसंग लेकर हि घूमरही थि जैसे कि उसे किसी औऱ सें कोई लेना-देना नहि हौ तौ वही बाकी अस्त्र धारक उसकीऐसी हालतदेख करमंद मंद मुस्करा रहे थें ऐसे हि आज कां दिन गुजर गय़ा जिसके बादकुछ दिन शांति हि उस बच्चे कां ध्यान रखरही मगरअब उसेशहर भि तौ जानां थां वहां पऱ उसका स्वयं कां हॉस्पिटल थां जिसकी जिम्मेदारी उस पर्र हि थि
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आज केँ लिए इतना हि
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Hello doston me jaanta hoon कि ye story aisa end deserve नहि karti aur na sirf 77 updates deserve karti hain ise औऱ बहोत कुछ pana tha मगरकुछ complications केँ kaaran aisa नहि ho paya उसके liye aap sabse me maafi chahunga
ब्रह्माराक्षस - Desi sex story – New Episode
अध्याय तीसरा
तोँ ऐसे हि वक्त गुजरता गय़ा औऱ जल्द हि वोँ बालक 5 साल कां होँ गय़ा औऱ तभी सें राघवेन्द्र नें उस बालक कों सभीकुछ सिखाना शुरुआत किया छोटी छोटी जादुई कला सें लेकर बड़े सें बड़े मायावी हमले तक सभीउसे सीखा दिया थां तौ वहीजब भि आश्रम मे बाकी गुरुओं मे सें कोई भि आता(यहा गुरु कां अर्थ अस्त्र धारक सें हैं) तोँ वोँ सब भि भद्रा कों अलगअलग कला सीखते जिन मंत्रों सें वोँ अपने अस्त्रों कों इस्तेमाल करतेवही मंत्र उन्होंने भद्रा कों भि सीखादिए थें जिससे अब वोँ तीनों हि आश्रमों मे गुरुओं केँ बाद सबसे शक्तिशाली योद्धा थां
१/१/२०२४
आजउस हादसे केँ बाद 22 वर्षो कां टाइम गुजर चुका थां संसार मे बहोत सें बदलाव भि आए थें जैसे कि अभि आश्रम पहले सें भि अधिक गुप्त औऱ सख्त होँ गए थें जब सें आश्रम मे सबको ब्रह्माराक्षसों पऱ हुए हमले केँ बारे मे जानकारी प्राप्त हुई थि तब सें सभीलोग गंभीर होँ गए थें यहा तक कि सारे गुरु भि बिनाअति आवश्यक कार्य केँ आश्रम केँ तरफ देखते भि नहि थें तोँ वही भद्रा केँ 15 साल पूरे होते हि राघवेन्द्र नें उससेवचन लें लिया कि जब तक प्राणों कां संकट नाँ वोँ कोई मायावी विद्या इस्तेमाल नहि करेगा औऱ वहीं भद्रा राघवेन्द्र केँ कहने पर्र खुदका सर भि काट सकता हैं तौ वो इसवचन केँ लिए केसेमना कर पाता
जब भद्रा 21 बरस कां हुआ तौ राघवेन्द्र नें उसेशहर जाके वहां केँ तौर तरीकों कों सीखने केँ लिएबोल दिया अभि बचपन सें हि मायावी शक्तियों कां अध्ययन करने सें भद्रा कां मन इतना तेजी सें विकास कररहा थां कि वो एक् बार जौ देख लेँ पढ़ लें याँ केवलसुन भि लेँ जल्दी हि उसके दीमाग मे किसी तस्वीर कि तरहछ्प जाता इसीलिए शहरआने केँ बाद वोँ शहर कि रंगत मे रंग गय़ा थां पढाई कि चिंता तोँ उसे थि हि नहि क्यूँकी कॉलेज मे जौ भि पढ़ाते उसने वोँ सभी पहले हि ग्रंथों मे पढ़ लिया थां मात्र भाषा कां अन्तर थां बस टेक्नोलॉजी उसकेलिए नयी थि जिसे भि उसने एक् साल मे इस प्रकार सीख लिया थां जैसे बचपन सें हि सीखते आँ रहा हौ
वहीशहर मे रहतेहुए उसकेतीन मित्र भि बने औऱ उन्हीं केँ संग वोँ पूरादिन रहता हैं
1) केशव = यह भद्रा केँ हि क्लास मे हैं औऱ उसका सबसे पहला साथीयही हैं इसे दूसरों सें पंगा लेने कि आदत हैं har वक्त किसी नां किसी सें लड़ते रहता हैं
2) रवि = यह केशव केँ बचपन कां साथी हैं मगरयह डरपोक किस्म कां हैं इसेबस कोईदेख केँ देख लें तौ यहडरजाए
3) प्रिया = यहशहर केँ बड़े व्यापारी कि इकलौती बेटी हैं मगर बहोत सुलझी हुइ हैं शहर केँ अंदर हि इसके पिता केँ 2 होटल्स हैं जिन मे सें एक् यह संभालती हैं औऱ यहदिल हि दिल मे भद्रा कि दीवानी भि हैं बस इसनेउसे बताया नहि हैं यहबात सिर्फ रवि औऱ केशव कों पता हैं
अब सें किस्सा भद्रा कि जुबानी
आज भद्रा कां 22 वा बर्थडे थां जिसके लिए उसके दोस्तों नें कुछखास इन्तेजाम किए थें जिससे भद्रा अनजान थां
आज सुभहजब मेरी नींद खुली तोँ मुझे खुदको अपना बर्थडे याद नहि थां मगरहाँ नएसाल केँ शुरुआत होने कां उत्साह जरूर थां जिसके बाद सबसे पहले मेंने अपनी दिनचर्या अनुसार ध्यान लगाकर अपनेदिल मन कों शुद्ध करके शांत किया औऱ फिन नहाने चला गय़ा आज मुझे मेरे जिस्म मे कुछ बदलाव महसूस हुए थें जिनपर मेने ध्यान नहि दिया क्यूंकि मुझेलगा थां कि यहसभी मेरे अन्दर कि शक्तियों केँ वजह सें हौ रहा थां
औऱ जब मे घऱ सें बाहर् निकला तोँ मेरेघऱ केँ बाहर् मेरे तीनों यार मौजूद थें जिनको देखकर मे दंगरह गय़ा क्यूंकि आज तक ऐसाकभी नहि हुआ थां कि वोँ मेरेघऱ पर्र आए
मे :- क्याँ बात हैं आज तुम् तीनों कि नींद जल्दखुल गई मुझेलगा थां कि आज भि मुझे तुम्हें लेने तुम्हारे घऱ आनां होगा
केशव :- अच्छा हैं कि तुम्हें याद तोँ हैं कि आज क्याँ हैं
मे :- इसमे क्याँ हैं यह तोँ सभी कों पता हैं कि आजनएसाल कां पहलादिन हैं
मेरीबात सुनकर उन तीनों नें भि अपनासर पीट लिया
मे :- क्याँ हुआ अपनासर क्युपीट रहे हौ
रवि :- कुछ नहि आओ तुम् व्हीकल मे बैठो
इतना बोलकर उन तीनों नें मुझे पकड़कर कार मे बिठा दिया औऱ फिन प्रिया व्हीकल चलाने लगी हम् तीनों कों भि वाहन चलाना नहि आती थि अभि मे कार मे बैठकर हमेशा कि तरह गानेसुन रहा थां कि तभी मेने ध्यान दिया कि हमारी कार कॉलेज सें अलग रास्ते पऱ जारही थि
मे :- यह क्याँ कॉलेज कां मार्ग तौ पीछेरह गय़ा
केशव :- हाँआज हम् कॉलेज नहि जारहे हें आजकुछ अलग सोचा हैं
मे :- अच्छा क्याँ सोचा हैं तुमने
रवि :- वोँ हम् नहि बतायेंगे तुम् प्रतीक्षा करो
मे :- ठीक हैं मत बताओ
यह बोलकर मे फिन सें गाने सुनने लगा तौ वहीजब हम् पहुचें तौ मेने देखा कि यह प्रिया कां हि होटल थां जिसे वोँ उसके फ्री वक्त मे संभालती थि अभि मे कुछ बोलता कि तभीउन तीनों नें मेरे आखों केँ उपर पट्टी बाँध दि औऱ फिन मेराहाथ पकड़कर मुझे अंदर लेँ गए औऱ जब हम् अंदर पहुचें तौ वहां जाने केँ बाद उन्होंने मेरे आखों कि पट्टी खोली औऱ जब मेने अपनी आखें खोली तौ वहा पर्र पूरा होटल सजाया हुआ थां औऱ सामने प्रिया केशव औऱ रवि तीनों केँ भि माता पिता मौजूद थें जिन्हें देखकर मेंने सबसे पहलेउन सबकेपेर छुएफिन उन सबके सामने खड़ा हौ कर
मे :- नएसाल कि आप् सबको बहोत बहोत बधाई
मेरीबात सुनकर वोँ सबदंग रहगए जिसके बाद केशव नें आकर मेरेसर पे मारते हुएकहा
केशव :- पागलआज तेरा जन्मदिन भि हैं
केशव कि बात सुनकर सब हसनेलगे जिसके बादसब नें मिलकर मेरा जन्मदिन मनाया जिसके बाद सबने मुझे बहोत सें तोहफे भि दिएसब बड़े मुझे बहोत मानते थें
जिसके बाद हम् सबने मिलकर खानां शुरुआत किया अभि हम् खानां खाते कि तभी मुझेयाद आया कि शांति नें भि मुझेआज अपनेघऱ पर्र बुलाया थां यहयाद आते हि मे वहा सें निकलने वाला थां कि तभी वहां प्रिया केँ पिता आँ गएयह अधिकतर देश सें बाहर् हि रहते थें इनकानाम शान थां
शान :- कहाचले birthday boy बिना हमसे मिले हि चल दिये
मे :- नहि ऐसा नहि हैं सर वोँ मुझे नहि पता थां कि आप् आने वाले हौ
शान :- अरे केसे नहि आता जिसके वजह सें मुझे लाखों कां नुकसान हुआ उससे केसे नाँ मिलता
प्रिया :- (अचानक सें) पापा
मे :- लाखों कां नुकसान केसे मे समझा नहि
शान :- अरे तुम्हारे बर्थडे कि बर्थडे पार्टी केँ लिए इसनेनए साल कि जोँ भि बुकिंग थि वोँ सभी कों मनाकर दिया जिससे हमें सबको उनके पैसे रिटर्न करने पड़े
उनकीबात सुनकर मे दंगरह गय़ा थां केहना तौ मे चाहता थां मगर वोँ हक्क नहि थां प्रिया मेरेलिए एक् खास मित्र मगरउसे इस नादानी केँ लिए उसके माता पिता केँ सामने परायों केँ सामने बोलने कां अधिकार नहि थां
मे :- क्षमा करनासर मगरअब यह आपका मेरेऊपर उधाररहा जिसे मे जल्द हि चुका दूंगा
जिसके बाद मे उन सबकेसंग हि बैठ गय़ा क्यूँकी प्रिया केँ पिता अभींआए थें औऱ उनकेआते हि जल्दी निकल जानां अच्छा नहि लगता
रानी (प्रिया कि मम्मी) :- (शान सें) आप् इतनी जल्द केसे आप् तोँ किसी मीटिंग मे जाने वाले थें
शान :- हाँइस शहर केँ सबसे बड़े बिजनेस मैन शैलेश सिंघानिया सें मिलने जानां थां मगर उनकेपास हम् जैसे छोटे बिजनेस मैन कों मिलने कां वक़्त कहा हैं
जैसे हि उन्होंने अपनीबात पूरी कि वैसे हि मेरेमन कि घंटीबज उठी क्यूंकि वोँ जिस शैलेश कि बातकर रहे थें वोँ कोई औऱ नहि बल्कि गुरु नंदी थें अब मुझे मेरा उधार चुकाने कां तरीका मिल गय़ा थां फिन मे वहा सें निकल गय़ा शांति सें मिलने
(यहा मे एक् बात साफ़कर देता हूं बचपन सें हि मे औऱ शांति दोस्तों केँ तरह हि एक् दूसरे सें मिलते थें जिससे मे औऱ वोँ एक् दूसरे केँ संग बहुतखुल गए थें तोँ वही बाकियों कों मेंने हमेशा अपने गुरुओं केँ रूप मे हि देखा हैं इसीलिए उनसे मेरा व्यावहार गुरु शिष्य जैसा हि हैं मगर वोँ सब मुझे अपने परिवार समान हि मानते हें)
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आज केँ लिए इतना हि
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ब्रह्माराक्षस - Desi sex story – New Episode
अध्याय चौथा
अभि मे शांति केँ घऱ पहुंच गय़ा थां जब मे वहा पहुचा तोँ मुझे देखते हि गार्ड नें बाहर् कां गेटखोल दिया मे हर हफ्ते एक् दिन इनसे मिलने तौ जरूरआता थां इसीलिए यहा केँ गार्ड्स मुझे शांति कां रिश्तेदार हि समझते थें जब मे वहा पहुचा तोँ उनकाघऱ खाली थां इस वक्त दुपहर केँ 2 बजरहे थें मतलब अभीं हॉस्पिटल सें आने मे उन्हें आधा घंटा बाकी थां तभी मेरे दिमाग़ मे खयालआया औऱ मे उनके कमरे मे जाकेछुप गय़ा औऱ उनकेआने कां प्रतीक्षा करनेलगा
तौ वही होटल मे सबलोग अपनेघऱ चलेगए थें अभि सिर्फ वहां प्रिया अपने माता पिता केँ संगथीं जोकि अपने पिता केँ व्यावहार सें बहुत क्रोध थि
प्रिया :- आपको क्याँ जरूरत थि उसे बताने कि उसेयह बर्थडे पार्टी आदि चीजे मनपसंद नहि हैं औऱ आपनेउसे बता दिया कि उसके बर्थडे पार्टी केँ लिए मेने अपने हि पिता कां लाखों कां नुकसान कराया हैं
शान :- तौ क्याँ हुआयह तौ बस एक् इम्तिहान थां उसका
प्रिया :- इम्तिहान कैसा इम्तिहान
शान :- अगर मेरी बेटी किसी लड़के सें प्रेम करने लगेगी तोँ मे उसे प्रेम करने सें रोक तोँ नहि सकतामगर उस लड़के कां इम्तिहान तोँ लें सकता हूं नां
उनकीबात सुनकर जहा प्रिया डर गई थि तोँ वही उसकी मम्मी रानीदंग हौ गई थि कि प्रिया मुझसे प्रेम करती हैं
प्रिया :- आपको केसेपता चला
शान :- भले हि मे काम केँ सिलसिले मे अधिकतर बाहर् रहता हूं मगरऐसा नहि हैं कि मे अपने परिवार कि सुरक्षा कों ध्यान न देनाकर दूंगा
रानी :- आपने मुझे क्यु नहि बताया फिन
शान :- क्युकी अब प्रिया बड़ी हौ गई हैं औऱ अगर मे तुम्हें बता देता तोँ तुम् इसे प्रश्न पूछपूछ कर हि परेशान कर देती औऱ मुझे अपनी बेटी केँ उपर पूरा भरोसा हैं कि वोँ कुछ भि गलत नहि करेगी
रानी :- तोँ यह इम्तिहान क्यु लिया आपने
शान :- क्युकी मे एक् पिता भि हूं खुदको जितना भि समझालू चिंता तौ होती हि हैं
प्रिया (शर्माते हुए) :- तोँ रिजल्ट क्याँ निकला वोँ पास याँ फैल
प्रिया कों ऐसे बोलते देख वोँ दोनों हंसने लगे जिससे वोँ औऱ ज़्यादा शर्माने लगी
शान :- रिजल्ट मे अभीं वक़्त हैं पहले देखने तौ दो कि जोँ उधार चुकाने कि बातकर रहा थां वोँ केसे चुकाता हैं
प्रिया :- अगरऐसा हैं तोँ आप् चिंता मतकरो भद्रा नें कहा हैं मतलब समझो वोँ होँ गय़ा
शान :- इतना भरोसा हैं तौ उससे इजहार क्यु नहि कियाअब तक
प्रिया :- डर लगता हैं
शान :- कैसाडर
प्रिया :- एक् बार एक् लड़की नें उसे पूरे कॉलेज केँ सामने i love you कहा थां तबउसे उस लड़की कों मनाकर दिया थां औऱ जबउस लड़की नें उसे जबरदस्ती किस करने केँ लिए कोशिश कि तोँ उसनेउसे थप्पड़ मारा थां फिनअब तक उसनेउस लड़की सें बात नहि कि हैं मे थप्पड़ सहनकर लूँगी मगर उसकी नाराजगी सहन नहि कर सकती
प्रिया कि बात सुनकर उसके माता पिता दंगरह गए थें
तोँ वही शांति केँ घऱ मे अभि कमरे मे बेड केँ पीछे छुपाहुआ थां जहां सें मेरीनजर पूरे कमरे मे जा सकती थि मगर मुझेकोई किसी भि कोने सें नहि देख सकता थां मेरेमन मे पूरी योजना रेडी थि जैसे हि वोँ आती मे उनपरझपट पड़ता औऱ उन्हें डराता जैसे अधिकतर मूवीज मे दिखाते
औऱ मे अपनीइस तरकीब केँ संग रेडी थां औऱ मे इस तरकीब कां इस्तेमाल करने केँ लिए उत्साहित थां कि तभी मुझे उनके गाडी कि आवाज़ सुनाई दि गई जिससे मे खुदको संभालते हुएछुप गय़ा औऱ जैसे हि वोँ अन्दर आयी तौ मे सही मौके कां प्रतीक्षा करनेलगा
अभि उन्होंने सलवार कमीज पहनी हुईँ थि जिसमें उनकीपीठ मेरेतरफ थि जिससे वोँ मुझेदेख नहि पातेरही थि मगर मे उन्हें जरूरदेख पारहा थां
इससमय उनकीपीठ मेरेतरफ थि अभि मे उन्हें डराने केँ लिएआगे बढ़ता कि तभी मुझेजोर कां झटकालगा क्यूँकी मे अभि आगे जाता कि तभी शांती नें जौ कमीज पहनीं थि वोँ उसने नीचे सें पकड़ली जौ देखकर मेरे पांवजहा थें वहीठहर गए औऱ मे आगे जोँ दिखने वाला थां उसके बारे मे सोचकर हि डर औऱ उत्साह ऐसे मिली हुई भावनाओं कां शिकार बनरहा थां
डर केँ मारे मे कमरे सें बाहर् नहि निकल सकता थां अगर उन्होंने देख लिया तौ मेरे बारे मे क्याँ सोचेंगी इसबात कां डर थां तोँ अगर मे यहा रुकारहा तोँ नां जाने क्याँ क्याँ देखने कों मिल सकता हैं यहसोच कर मेरे जिस्म मे उत्साह दौड़रहा थां कि तभी वोँ हुआ जिसके बारे मे अभि मे सोचरहा थां
अभि मे सोच हि रहा थां कि तभी शांति नें अपनी कमीज उतार दि यह मेरे जिंदगी कां पहला मौका थां जब मे किसीऔरत कों ऐसेदेख रहा थां औऱ वोँ भि उन्हें जिन्हें मे बचपन सें हि अपनी एक् सच्चे यार केँ रूप मे देखते आँ रहा थां मेरेमन आत्मग्लानि भि हौ रही थि कि
यहसभी गलत हैं आश्रम मे सिखाये गए संस्कार बारबार मेरे आखेंबंद कररहे थें तोँ वही मेरी उभरती जवानी औऱ मेरे अन्दर कि कामोत्तेजना मेरेनजर कों बारबार उनकी नंगीपीठ पर्र टिकारही थि जहा पर्र अभि मात्र उनके ब्रा कि डोरी हि थि जौ जल्द हि निकल गई जिसेदेख कर मेरा स्वयं पर्र काबु रखना मुश्किल हौ रहा थां
यहसभी कम थां कि तभी शांति नें अपनी सलवार भि उतार दि औऱ फिन जल्दी हि अपनी पँटी भि उतार दि अब तौ जैसे मेरेउपर बिजली गिरने लगी थि मे यहकभी सोच भि नहि सकता थां कि शांति ऐसे जन्मजात नंगी होगी औऱ मे छुपकर उनकी गांड देखकर उत्तेजित हौ करअलग अलग ख्वाब देखरहा होऊँगा
अभि मे जागते हुए ड्रीम्स देखरहा थां कि तभी शांति अपनी गांड हिलाते हुए बाथरुम केँ तरफचल पडी तौ वही उनके गांड कि थिरकदेख कर मे स्वयं कों रोक नहि पाया औऱ अपने हाथों सें अपने हथियार कों मसल नें लगा औऱ लन्ड मसलते हुएकब उनकी ब्रा उठाकर सूंघने लगा औऱ मूठ मारने लगा
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आज केँ लिए इतना हि
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