जीवन का सुख - beti ki kahani - Real Kahani Part 1
जिंदगी कां सुख
माला सुभह उठने हि वाली थि, कि उसको अपने बेटी औऱ दामाद केँ कमरे सें दबी हुईँ आवाजें सुनाई दि। हल्की सिसकियों, हंसी, चुम्बन लेने औऱ लयबद्ध तरह सें खाट केँ चरमराने कि आवाजें। मालासमझ गयीँ, कि अन्दर क्याँ चलरहा हैं। मगर उसकोये सोच केँ अचरजहुआ कि दोनों इसरात कम सें कम तीसरी बार काम-क्रीडा कररहे थें।
उसने अपने पूरे जिंदगी मे एक् पूरेदिन मे दोबार सें अधिककभी सम्भोग नहि किया थां, औऱ वो थां उसके हनीमून केँ दौरान। उसके बालपन केँ दिनों मे सम्भोग कों लेकर इतनी वर्जनाये थि कि शादी केँ बहोत दिनों बाद भि माला यौन-क्रिया कों मात्र संतानोत्पत्ति हेतु एक् आवश्यक कार्य समझती रही। मगर पिछले कुछ टाइम सें उसकी विचारधारा मे थोडा थोडा अंतरआने लग गय़ा थां। सम्भवतः नएशहर मे नए दोस्तों केँ संग नें कुछ उपकार कर दिया थां। मगर बढ़ती उम्र औऱ पति कि व्यस्तता केँ चलते यौन-क्रिया केँ संभावित "मजे" कि वोँ केवल कल्पना हि कर सकती थि।
शिष्टता औऱ संकोच केँ मारे वोँ अपनेखाट पर्र हि लेटीरही कि जब तक वोँ दोनों शान्त नं होँ जाएँ। मगर उसको अपनी बेटी केँ लिए ख़ुशी हुई कि उसकोऐसा पति मिला, जौ उसको इतना आनन्द दे सकता थां। मगरऐसा सोचते हुए उसको थोड़ी सरम भि आई। फिन उसका ध्यान उसदिन कों चला गय़ा जब उसकी बेटी पल्लवी नें बताया कि वोँ रूद्र सें विवाह करना चाहती हैं। विवाह? अभि 20 कि भि तौ नहि हुईँ थि वोँ! इतनी जल्द! औऱ पढाई लिखाई कां क्याँ?
पल्लवी आईआईटी मे पढ़रही थि - तीसरे वर्ष मे। रूद्र औऱ पल्लवी दोनों संग पढ़ते थें औऱ एक् दुसरे सें बहोत प्यार करते थें। औऱ रूद्र चाहता थां कि उसकी विवाहयोग्य 21 कि उम्र होते हि वोँ पल्लवी कों अपनाबना लें। रूद्र कां आईआईटी मे चौथा वर्षचल रहा थां औऱ स्नातक होने केँ बाद वोँ अपने पिता केँ बिजनेस मे हाथ बटाना चाहता थां। ऐसे रिश्ते कों मन करना करीब असंभव थां। "चट मंगनी चट ब्याह" कां एक् उम्दा उदाहरण थि पल्लवी औऱ रूद्र कि विवाह।
20-21 कि उम्र - शायदतभी इतनी उर्जा हैं। ऐसा सोचते हि माला मुस्कुरा उठी। माला नें 24 कि उम्र मे विवाह कि थि। उसके पति विराट 27 केँ थें तब। जैसा कि अधिकतर नव-विवाहितों केँ संग होता हैं, माला शादी केँ एक् वर्ष मे हि मां बन गयीँ,। उसकेबाद बच्चे कों पालने औऱ घऱ सम्हालने कि व्यस्तता मे यौन क्रिया क्रमशः कम होती गई,।
मगरचार महीने पहले बेटी कि विदाई केँ बाद न् जाने क्यूं विराट कां मूडबन गय़ा औऱ उन्होंने देर तक रति क्रिया कि। बेटी कि विदाई कां वियोग भूल गयीँ, मालाउस दिन। वैसा आनन्द कभी नहि मिला थां उसको। विराट कि बाँहों मे झूलते हुए उनके कड़े लिंग कां अपने अन्दर आने जाने कां एहसास। येसभी अभि भि याद थां माला कों।
बगल केँ कमरे मे चलते सम्भोग, उससे होने वाली आवाजें औऱ "उस"दिन कि याद माला केँ मन पे असर करने लगीं। लिप्सा नें उसकोधर दबोचा। काश विराट यहा होते!"उस" दिन कि याद नें एक् सिहरन सि फैला दि। वोँ खाट सें उठ केँ अपने श्रृंगार-दान केँ सामने आँ कर कड़ी हौ गयीँ, औऱ फिन उसने वोँ किया जौ काम उसनेकम सें कम एक् वर्ष मे नहि किया।
उसने अपनी नाइटी उतार दि औऱ चड्ढी भि - औऱ स्वयं कों आदमकद आईने केँ सामने पूर्ण-नग्न देखा। 45 कि उम्र केँ लिए वोँ अभि भि अच्छी दिखती थि। उसने अपने स्तनों कों हलके सें दबाया - वोँ अभि भि पुष्ट थें। विराट उसके स्तनों कां उपभोग नहि करते थें - बस स्तानाग्रों कां हल्का सां मसलना औऱ कभीकभी थोडा सां चूस लेना। इतना हि ध्यान मिलता थां माला केँ स्तनों कों। पल्लवी नें भि मात्र दो महीने हि उसकादूध पिया थां, इसलिये उनके आकार मे जोँ भि परिवर्तन आया थां वोँ मात्र उम्र केँ ढलने सें आया थां। नए दोस्तों केँ संगजिम जाकर व्यायाम करने सें बदन कि स्थूलता कम हौ गयीँ, थि।
अचानक हि उसकोये अहसास हुआ कि उसकाहाथ उसकी योनि पऱ जाकरठहर गय़ा हैं औऱ उसकी उंगलियाँ वहां सें निकलती हुईँ योनि-रस पऱ फिसलने लगी। "हे भगवन!यह क्याँ कररही हूं मे?" उसने अपनाहाथ झटके सें हटा लिया औऱ जल्द सें जाकरबैड पे लेट गई,।.नंगी।
मन अशांत हौ गय़ा। नहि, कामातुर।
उसने चुपचाप लेते रहने कि कोशिश करी, मगर जैसे हि उसका ध्यान अपने काम-रत बेटी औऱ दामाद पऱ गय़ा, उसकाहाथ पुनः उसकी योनि पऱ जा पंहुचा। इसबार उसनेहार मानली। अपनी आँखें बंदकर उसने अपने भगनासे कों सहलाना प्रारंभ कर दिया - मन हि मन मे अपने पति कां कामोत्तेजित लिंग सोचते हुए। उंगली कि गति अनियंत्रित होतीजा रही थि औऱ माला केँ गले सें दबी घुटी सिस्कारियां निकलरही थि - संग हि पूराबदन उत्तेजना सें कांपने लग गय़ा थां।
उसका कामोन्माद जल्द हि ख़त्म हौ गय़ा। "ऐसा खुशी तोँ पहलेकभी नहि आया", उसने सोचा।
"ओह ईश्वर! येसभी क्याँ हैं? सुभह सुभह तोँ मनसाफ रहना चाहिए। औऱ मे अपने बुढापे मे ऐसेकाम कररही हूं जौ कोई महिला नहि करती। "
उसने अपनी सांसो कों संयत किया। बगल केँ कमरे सें आवाजें आनीबंद हौ गई, थि। उसनेघडी पर्र नज़र डाली - "हे ईश्वर! एक् घंटा होँ गय़ा! वक्त कां पता हि नहि चला। "
"अब बाहर् निकलना चाहिए - शायद बच्चे सोगए होंगे। "
माला नें जल्द सें अपनी नाइटी पहनी औऱ बहोत धीरे-धीरे सें अपना द्वार (दरवाज़ा) खोलकर दबे पाँव बाहर् निकलआई।
पल्लवी कां रूम माला केँ कमरे सें बाहर् निकलने केँ संग हि थां। "अरे! इनके कमरे कां तोँ द्वार (दरवाज़ा) खुलाहुआ हैं!" माला द्वार (दरवाज़ा) बंद करने कों आगे बढ़ी, मगर अन्दर कां नज़ारा देख केँ उसकी आँखेफटी कि फटीरह गयीं।
पल्लवी औऱ रूद्र पूर्णतः नग्न अवस्था मे आलिंगनबद्ध होकरसो रहे थें - उस मुद्रा मे जिसमे वोँ शायद रति-क्रिया केँ बाद आराम करतेहुए सोगए होंगे। रूद्र थोडा नीचे थां औऱ पल्लवी कि तरफ करवट करके लेताहुआ थां। उसका बायाँ पाँव पल्लवी केँ ऊपर थां, औऱ इस कारण उसका लिंग स्पष्ट दिखरहा थां।
शिश्नग्रछ्छद केँ पीछे खिसक जाने केँ कारण लिंग केँ आगे कां गुलाबी हिस्सा साफ दिखाई देरहा थां। लिंग अभि मुरझाया हुआ थां, लेकिन फिन भि उसकी लम्बाई सामान्य सें ज़्यादा हि प्रतीत होँ रही थि। उसके वृषण हलके भूरेरंग केँ थें - थोड़ी सि लालिमा लिएहुए, औऱ आकर मे वोँ भि बड़ेलग रहे थें।
"कितना सुन्दर हैं." इस ख्याल सें माला थोडा शरमा गयीँ, औऱ लज्जा केँ मारे उसने नज़रहटा ली, मगर अब सामने पल्लवी थि।
पल्लवी पीठ केँ बल लेती हुइ थि औऱ उसकी सारी सुन्दरता प्रदर्शित होँ रही थि। पल्लवी देखने मे माला कां हि प्रतिरूप दिखती थि - ठीक वैसे हि जब वोँ जवान थि। सुन्दर भोला चेहरा, भरे होंट औऱ मादक आँखें। उसकाबदन एकदम स्लिम थां, इसलिये कपडे केँ ऊपर सें देखने पऱ भि बहोत आकर्षक लगती थि।
मम्मों अभि भि छोटे थें औऱ उन पऱ गहरे लाल-भूरे रंग केँ आकर्षक स्तनाग्र थें। सुन्दर, स्वस्थ औऱ पतली बाहें। उसकापेट बिलकुल सपाट थां। योनि केँ हिस्से मे कोईबाल नहि थें। "ऐसा केसे हौ सकता हैं? इस उम्र मे मेरे तोँ बहुतबाल हौ गए थें। ", माला नें सोचा।
पल्लवी केँ पाँव थोडा खुलेहुए थें, जिस कारण उसकी योनि कां दरवाज़ा थोडा खुल गय़ा थां औऱ वहां सें अभि अभि संपन्न हुई रति-क्रीडा कां रस निकलरहा थां। मादक दृश्य!
अब मालाउन दोनों कों एक् संगदेख रही थि - "सुन्दर औऱ आकर्षक जोड़ा। दोनों हि कितना हँसते हें। जबयह दोनों घऱ मे होते हें तोँ खुशी आँ जाता हैं। बच्चों केँ जैसे झगड़ते हें - मगरउस झगडे मे निहित प्यार मे खूब जानती हूं। "
"नंगे होने पऱ तोँ यह दोनों औऱ भि सुन्दर लगते हें - जैसे कि ग्रीक सभ्यता वाली मूर्तियाँ! रूद्र भि तोँ कितना अच्छा हैं। उतना हि सुन्दर दिखता भि हैं। कसरती देह। इसका लिंग पूरा उत्तेजित होने पर्र कैसा दिखता होगा!?"यह ख्याल आते हि माला नें अपनासर झटका, "अपनी हि बेटी केँ पति केँ लिएऐसी सोच?"औऱ धीरे-धीरे सें द्वार (दरवाज़ा) बंद करके बाहर् आँ गयीँ,।
माला सीधा ड्राइंग रूम मे पहुची, औऱ अपने आप् कों संयत करने केँ लिए "संस्कार" चैनललगा करभजन सुनने लगी। कुछ देरभजन सुनने केँ बाद उसकामन थोडा शान्त हुआ तौ गरमचाय बनाने केँ लिए किचन मे आँ गई। अभि उसनेगरम चाय कां बर्तन गैस पर्र रखा हि थां कि पल्लवी अपने कमरे सें अंगड़ाई लेती हुईँ बहारआई।
उसने एक् छोटा औऱ झीना सां हलके सफ़ेद रंग कां टी-शर्ट पहनाहुआ थां औऱ हलके गुलाबी रंग कां छोटा सां निकर। दोनों हि कपड़े उसपर बहोत भारहे थें, जैसे कि वोँ कोई गुडिया होँ। सफ़ेद रंग कां झीना कपडा होने सें, पल्लवी केँ जिस्म कि आकर्षकता थोडा छनछन केँ आँ रही थि - मगरफिन भि कोई भि उसके स्तनाग्र आसानी सें देख सकता थां।
पासआते हि पल्लवी उससे लिपट गई। "मम्मी, आईलवयू। "
मालामन हि मन मुस्कुराई, "सम्भोग क्रिया केँ बाद लड़कियां कितना निखर जाती हें!"
"आईलवयू टू बेटा। गरमचाय पियोगी?"
"हां"।
"मां, आपसे एक् बात पूछूं?"
"कहो बेटा"
"हमारे रूम कां द्वार (दरवाज़ा) आपनेबंद किया थां न्?"
"."
"बोलिए नाँ"
"हाँ.फिन?"
"इसका मतलब आपने हम् दोनों कों नंगा देखा?" पल्लवी नें बनावटी अवमानना केँ संग बोला।
माला हिचकते हुए"हाँ.", फिन संयत होतेहुए, "मगर तुम् लोग तोँ मेरे बच्चे हौ। मेरे सामने नंगेहुए तोँ क्याँ होँ गय़ा?"
"वैसे एक् बात बताऊँ?"
"हाँ मां"
"तुम् दोनों खूब सुन्दर दिखते हौ। मेरामन हुआ कि तुम् दोनों कों बस देखती हि रहूँ। हे ईश्वर! मेरे दोनों बच्चो कों लगता हैं मेरी हि नज़रलग जाएगी। "
पल्लवी येसुन कर ख़ुशी मे मम्मी सें लिपटते हुए बोलि, "मां, यूआरद बेस्ट" औऱ उसनेजोर सें माला केँ होंठों पर्र चुम्बन दिया।
जीवन का सुख - beti ki kahani – New Episode
मम्मी बेटी दोनों मे मित्रता वाला नाता भि थां। दोनों एक् दुसरे सें बहोत हि कम बाते छुपाती थीं। माला पल्लवी कों विवाह होने केँ बाद अपने बराबरी कां समझने लग गई, थि औऱ वैसे हि बर्ताव भि करती थि। लिपटे हुए पल्लवी नें अपनी मम्मी केँ पेट औऱ कमर कों टटोलते हुएकहा, "मां, अब आप् यह ढीले ढाले कपडेमत पहना करिए। कुछ सेक्सी सां पहना करिए - बापू एकदम हैप्पी हौ जायेंगे। "
"चल हट्ट पागल" माला नें प्रेम भरी झिडकी दि।
"सच मे मम्मी। मेन वांट दिअर वीमेन टूबी सेक्सी। "
"रूद्र नें तोँ मुझे सैटिन औऱ लेस वालीकई नाईटीस ला केँ दि हें। ट्रांसपेरेंट! मुझेऐसे कपड़े मे देख केँ वोँ एकदम एक्साईट होँ जाता हैं। "
"यह टी-शर्ट भि उसी कि पसन्द हैं। मां आप् अब वोँ टेस्ट-लेस सफ़ेद सूती ब्रा भि मत पहना करिए। कुछ सेक्सी सां, जैसेलाल रंग कि, नेटेड वाली पहना करिए। अभि तौ आप् जवान हें - क्याँ पता मुझे एक् छोटा सां बेबी ब्रदर मिल जायेइस कारण। " पल्लवी नें आँख मारते हुएकहा।
"छी बेशरम। कुछ भि कहती रहती हैं। इस उम्र मे मां बनूंगी? न् बाबा नं। मुझको तौ तुम् एक् हि बहुत होँ। "
"तुम्हारे बापू औऱ मैंने सोचा कि हमारी एक् हि गुड़िया रहेगी" फिनकुछ सोचते हुए माला नें पूछा, "तुम् लोग कंडोम नहि लगाते?"
पल्लवी नें हँसते हुए बोला, "लगाते हें मां। आज थां नहि। मगर रूद्र पूरेमूड मे थां। इसलिये हम् लोग रुके नहि। वैसे बिना कंडोम केँ पूरा एक्सपीरियंस अलग हि होँ जाता हैं। "
"हाँ औऱ बच्चा भि हौ जाता हैं। "
इसबात पर्र दोनों खूब हँसे। इसी बीचगरम चायबन गई औऱ माला नें दोनों केँ लिएगरम चायकप मे दाल दि। दोनों बाते करती हुइ गरमचाय पीनेलगी औऱ अपने अपने जिंदगी कि बाते बाँटने लगी।
गरम चाय पीने केँ बाद पल्लवी अपनी मां कि गोद मे सररख केँ लेट गई,, औऱ दोनों हि पल्लवी केँ बचपन कि बाते करनेलगी। माला नें उसको बताया कि जब वोँ गर्भवती हुई, तौ उसकामन थां कि उसे लड़की हौ, जिसेपाल पोसकर वोँ एक् अच्छा इंसान बनाएगी।
माला अपनी बेटी केँ पालन मे कोईकोर कसर नहि छोड़ना चाहती थि, औऱ उसने जहाँ तक संभव थां यहकर भि दिखाया थां। मगर उसकोइस बात कां मलाल थां कि पल्लवी मात्र 2 महीने हि उसकादूध पीसकी थि। इसबात नें माला कि ममता कों बहोत ठेस पहुचाई हुई थि, जिसका असर अभि तक नहि ख़तमहुआ थां।
"पल्लवी, तुम् जानती होँ कि तुमने केवल 2 महीने मेरादूध पिया थां? मेरामन थां कि मेरी बेटी कम सें कम एक् साल तक मेरादूध पिए। मगर नं जाने केसे 2 महीने मे हि मेरादूध सूख गय़ा। " बोलते बोलते माला कां गलाभर आया औऱ आँखें भरआई।
"मां। आप् प्लीज मत रोइये। वोँ तौ पुरानी बात होँ गयीँ, औऱ मैंने कोई शिकायत भि नहि कि। औऱ देखिए न्, आपके कि पालने सें तौ मई एकदम स्लिम एंड फाइन हूं"
मगर माला कि आँखों सें बरसात शुरुआत होँ हि गयीँ,।
पल्लवी थोडा सोचकर बोलीं, "मम्मी, मे तौ अभि भि आपकी बच्ची हूं। उस वक्त नहि तौ क्याँ हुआ। मे अब भि तोँ आपकादूध पी सकती हूं। हैं न्?"
"। अब तौ मेरेपास कुछ भि नहि हैं - क्याँ तुम् सच मे.!"
"श्ह्ह्ह्ह्ह." कहतेहुए पल्लवी नें मम्मी कि नाइटी केँ ऊपर केँ कुछबटन खोलने शुरुआत करदिए - माला केँ कुछ कहने सें पूर्व हि चारबटन खुल चुके थें, जिससे माला केँ दोनों सुन्दर बूब्ज़ पूर्णतः खुलकर सामने आँ गए। उनकोदेख केँ पल्लवी कां मुंह खुला सां रह गय़ा।
"मां। आप् बहोत बहोत सुन्दर हौ। आपनेकभी मुझको यह दिखाए हि नहि। गन्दी मां - मुझे भि आपके जैसे हि ब्रेस्ट्स चाहिए। "
इस अचानक घटे घटनाक्रम सें माला थोडा अवाक् रह गयीँ,। मगर उसने देखा कि पल्लवी किसी छोटे बच्चे कि तरह उत्साहित होँ गई, थि। भाव-आह्लादित माला नें बहोत प्रेम सें पल्लवी कां सर अपने बाएँ मम्मों कि तरफ खीचा - पल्लवी नें भि अपनी मम्मी केँ सुन्दर औऱ रसीले बूब्ज़ कों अपने मुँह मे रख लिया।
पल्लवी कां मुँहगरम चाय पीने सें गर्म होँ गय़ा थां, औऱ इस गर्मी कां एहसास माला केँ स्तनाग्र पऱ बहोत अच्छा लगा। कुछ देर पल्लवी नें अपनीजीभ सें उस पऱ दुलार किया, फिन उसको चूसना शुरुआत किया। पल्लवी कों मम्मी केँ बूब्ज़ कों पीने कि कोई याददाश्त नहि थि। यहनया अनुभव - उसके मां केँ गर्म, रसीले औऱ कोमल स्तनाग्र, जौ उसके दुलार औऱ स्तनपान केँ कारण थोड़े लम्बवत होँ गए थें - पल्लवी कों बहोत अच्छा लगा।
उसकाहाथ अनायास हि माला केँ दाहिने बूब्ज़ पऱ चला गय़ा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसको दबाने, सहलाने लगा।
"तुमको ये पसन्द हैं?" पल्लवी नें बिना बूब्ज़ मुह सें निकाले, सहमति मे सर हिलाया। "जब तक मनकरे तब तक पियो" माला नें ममताभरे स्वर मे कहा। स्तनपान करती हुइ पल्लवी ठीक वैसी हि लगरही थि जब वोँ एकदम छोटी सि गुडिया थि। माला कां मनभरआया। उसकामन हुआ कि येकभी खत्म न् होँ।
कुछदेर औऱ चूसने केँ बाद, पल्लवी नें दाहिने बूब्ज़ पर्र भि यही क्रिया प्रारंभ कर दि। मगर जाने अनजाने पल्लवी केँ स्तनपान करने कां तरीका कुछइस प्रकार थां कि माला केँ स्तनाग्रों सें अब दुसरे प्रकार कि अनुभूति होनेलग गयीँ, थि - कुछ वैसी हि जैसे कि कामुक होने पऱ होती हैं।
भजन कां शांति प्रदान करने वाला प्रभाव ख़तम होनेलगा औऱ माला कां वात्सल्य भावअब धीरे-धीरे धीरे-धीरे कामुकता कि ओरचल पड़ा।
विराट नें कभी उसके स्तनों कों इतनाआदर नहि दिया - मगर माला जानती थि कि यह उसकेबदन केँ सबसे संवेदनशील अंग हें। माला तोँ केवल उनके उपभोग सें हि चरममजा प्राप्त कर सकती थि। अभि कुछ वैसी हि दशाचल रही थि। हर्षोन्माद केँ मारे उसकी आँखें बंद हौ गई,।
इस दौरान दोनों हि इसबात सें अनजान थें कि रूद्र पिछले कुछ वक्त सें इस पूरे क्रिया कलाप कां सीधा प्रसारण देखरहा थां। उसके चेहरे पऱ कौतूहल, औऱ मनोरंजन कां मिला जुलाभाव थां।
"अरे रूद्र, तुम् कबउठआए?" यह पल्लवी कि आवाज़ थि, जिसेसुन कर माला जैसे धरातल पे आँ गई,। आँखे खुली तोँ देखा कि रूद्र मुस्कुराते हुए माला केँ चेहरे औऱ स्तनों कों बारी बारी सें देखरहा हैं। हड़बड़ी मे वोँ अपने कपड़े भि ठीक सें समेट नहि पाई, जिसके कारण उसके बूब्ज़ अधखुले रहगए औऱ पूरी स्थिति औऱ भि हास्यास्पद हौ गई,।
मालामगर पूरीतरह हतोत्साहित होँ गई - उसकामन सोचरहा थां कि अपनी मूर्खता मे दामाद केँ सामने नंगा होनापड़ गय़ा। मगर भागने कां कोई तरीका नहि सूझरहा थां, क्योंकि पल्लवी कां सर अभि भि उसकीगोद मे थां, औऱ वोँ बेवक़ूफ़ हटने कां नाम हि नहि लेँ रही थि।
पल्लवी नें देखा कि रूद्र क्याँ देखरहा हैं। उसकोये भि मालूम थां कि रूद्र नारी जिस्म मे स्तनों कों सबसे ज़्यादा मनपसंद करता हैं, औऱ उसकी मां केँ बूब्ज़ तोँ बहोत हि मनोहर थें। "अब तुमको समझआया कि मे इतनी सुन्दर केसे हूं? मेरी प्यारी मां कि सारी सुन्दरता आई हैं मुझमे। " रूद्र नें मुस्कुराते औऱ समझते हुए हामी मे सर हिलाया।
"तुमको पता हैं, मम्मी इसबात सें दुखी थि कि वोँ मुझको बचपन मे ब्रेस्ट-फीड नहि करा सकीं, इसलिये मैंने सोचा कि उनकोयह बताऊँ कि दुखी होने वालीबात कुछ भि नहि हैं, क्योंकि मे तौ आज भि उनकी वोँ हि छोटी सि गुडिया हूं। अब तोँ मे जब तक यहा हूं, तब तक मां केँ ब्रेस्ट्स एन्जॉय करूंगी। मगर तुम् इनकोदेख कर ललचाना मत, क्योंकि मेरी मम्मी केँ ब्रेस्ट्स कों मात्र मे पी सकती हूं। "
"हैं नं मम्मी?" कहतेहुए पल्लवी नें बहोत हि भोलेपन सें माला कों देखा।
"कुछ भि कहती रहती हैं ये पागल। बेटा तुम् गरमचाय लोगे?" अपनी शर्मिंदगी कों छुपाने केँ लिए माला नें बातबदल दि।
"हाँ मां - गरमचाय लूँगा। औऱ आप् प्लीज शर्मिंदा नं हों। हम् लोग तोँ आपके बच्चे हैं। "
"कितना अच्छा लड़का हैं। जितना आकर्षक व्यक्तित्व, उतना हि आकर्षक विचार। " माला नें मन मे सोचा औऱ संयत हौ केँ उठ गयीँ, औऱ किचन मे नाश्ते औऱ गरमचाय कां प्रबंध करनेलगी।
गरमचाय लेकर वापिस आई तोँ रूद्र नें माफ़ी मांगी औऱ कहा कि अब वोँ द्वार (दरवाज़ा) ठीक सें बंदकर लेगा। पल्लवी हँसते हुए बोलीं, "मम्मी नें हम् दोनों कों नंगू पंगू देखा हैं। " बेचारे रूद्र कां चेहरा लज्जा सें लाल हौ गय़ा।
"चल हट्ट बेशरम। कभी तौ सोच केँ बोलाकर! बेटे, मैंने पहले भि बोला हैं, कि तुम् दोनों हि मेरे बच्चे हौ। तुम् जैसा बेटा तौ कोई भि स्त्री चाहेगी। "
"यानि कि यह भि आपकादूध पी सकता हैं?" पल्लवी चौंकते हुए बोलीं।
"हाँपी सकता हैं। अबखुश?" माला नें बनावटी गुस्से सें कहा। मगर बोलने केँ संग हि सोचा कि कैसा लगेगा अगर रूद्र उसके स्तनों तौ छूए, उनको दबाये औऱ उनको चूसे।
"ओह भगवान्! यह केसे केसे विचार देरहे होँ तुम् मुझको? यह तौ मेरे बेटे जैसा हैं। " "विराट, आप् प्लीज जल्द सें आँ जाओ औऱ इस अनायास हि भड़की हुई आग कों बुझाओ."
नाश्ते औऱ गरमचाय कां टाइम आहिस्ता बीता। बच्चों केँ संग हंसने बोलने सें माला कां मन हल्का हौ गय़ा औऱ सवेरे कि अप्रत्याशित घटनाए मष्तिष्क केँ कोने मे चली गयीँ,। नाश्ते केँ बाद माला नहाने चली गयीं।
उसके जाते हि पल्लवी नें रूद्र केँ सीने पे प्रेम सें घूँसा मारते हुएकहा, "क्यूं मिस्टर! टुकुर टुकुर क्याँ देखरहे थें?" रूद्र थोडा शर्मिंदगी सें मुस्कुराया, "दोस्त, ऐसासीन चलरहा हौ तोँ मे आँखें तोँ बंद नहि कर लूँगा न्?"
"मां केँ ब्रेस्ट्स एकदम अमेजिंग हें नं? तुमको पसन्द आये?" पल्लवी कि बात पर्र रूद्र नें सर हिलाया।
"सच बताना, तुम् माँ कों खुश करने केँ लिए उनके ब्रेस्ट्स पीरही थि, याँ कुछ औऱ प्लान थां?"
"उनकोखुश करने केँ लिए। पता हैं, मां केँ निप्पल्स सें स्ट्राबेरी जैसा फ्लेवर आता हैं। कितने सॉफ्ट हें!"
"पल्लो, मे येसभी देख केँ कस केँ एक्साइट हौ गय़ा हूं - एक् राउंड औऱ होँ जाए? क्विकी?"
"कलरात चारबार किया हैं। तुम् थके नहि अभि तक?" पल्लवी नें मुस्कुराते हुएकहा।
"ऐसी पत्नि हौ तोँ कौनगधा थकेगा भला?"
"ह्म्म्म। तोँ जनाब सें कुछऐसा करवाते हैं जिससे यहथक जाएँ!" पल्लवी मुस्कुराते हुए बोलि।
रूद्र नें पल्लवी तोँ चूमने केँ लिए उसकीकमर कों पकड़ केँ अपनीतरफ खीचा, ऐसा करने केँ पल्लवी केँ स्तनाग्र उसके सीने सें रगड़ खानेलगे। पल्लवी नें प्रेम सें उसकेगले मे बाहें डाल दि औऱ रूद्र केँ मुह मे मुहदाल केँ उसको चूमने लगी। कुछ देर चूमने केँ बाद रूद्र नें पल्लवी कां टी-शर्ट उसकेबदन सें खीच लिया, औऱ बिना वक़्त गवांए अपना भि शर्ट उतार दिया।
रूद्र कों पल्लवी केँ बूब्ज़ बहोत प्यारे लगते थें - खासतौर पे उसके स्तनाग्र। उनकी उपमा वोँ अक्सर डार्क-चॉकलेट सें करता थां, जिसको पूरा उम्र चूसा, चुभलाया औऱ चूमाजा सकता थां।
अबवही कार्यक्रम प्रारंभ हौ चला थां। उसने पल्लवी केँ दाहिने स्तनाग्र कों अपनीजीभ सें कुछदेर पोंछा, औऱ फिन उसकोमुह मे भर लिया। पल्लवी केँ मुह सें हलकी सिसकी निकल पड़ी। रूद्र बारी बारी सें उसके स्तनों कों चूसता जारहा थां। जब वोँ एक् मम्मों कों अपने होंठो औऱ जीभ सें दुलारता, तोँ दुसरे कों अपनी उँगलियों सें। इसीबीच उसने अपने खालीहाथ कों पल्लवी कि निकर केँ अन्दर दाल दिया। योनि पर्र हाथ जाते हि उसकोकुछ गीलेपन कां एहसास हुआ। कुछ देर वहां सहलाने केँ बाद उसने अपनी उंगली पल्लवी कि योनि मे डालकर अन्दर बाहर् करना शुरुआत कर दिया।
पल्लवी कुछदेर आँखें बंद करके खुशी लेतीरही, फिन उसने रूद्र कां पजामा नीचे खिसका दिया। रूद्र पूरीतरह उत्तेजित थां -उसकी बनावट कि सराहना करतेहुए पल्लवी नें रूद्र केँ लिंग कों पकड़ लिया औऱ झुककर उसको अपनेमुह मे भर लिया।
लिंग चूसे जाने कां एहसास आंदोलित करने वाला थां। उन्माद मे रूद्र सोफे पऱ हि लेट गय़ा। कुछदेर केँ बाद पल्लवी रुक गई औऱ अपनी निकर उतार फेंकी। रूद्र केँ दोनों ओर अपनी टांगे करके वोँ उसके लिंग कों अपनीनम योनि मे दालकर धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचेबैठ गयीँ,।
"आअह्ह्ह्ह। मस्तलग रहा हैं" पल्लवी कि साँसे उन्माद केँ कारणउखड गई,। "अब देखती हूं, मेरे राजकुमार थकते हें याँ नहि?"
जीवन का सुख - beti ki kahani – New Episode
पल्लवी नें उत्साह केँ संग मैथुन करना प्रारंभ कर दिया। सवेरे पल्लवी औऱ माला कां रोमांचक प्रसंग देखकर रूद्र वैसे भि बहोत कामोत्तेजित होँ गय़ा थां। लिहाजा, उसका लिंग एकदम कड़क हौ गय़ा थां औऱ पल्लवी कि चुनौती सें औऱ भि दमदार हौ गय़ा। वोँ उसके स्तनों कों याँ फिन उसके नितम्बो कों बारी बारी सें दबारहा थां।
कुछ 5 मिनटों मे हि पल्लवी कां बदन चरमोत्कर्ष पे आकर थरथराने लगा, उसने अपनी कामुक चीख कों दबाने केँ लिए अपनेमुह पर्र हाथरख लिया। मगर अभि रूद्र पूरे उन्माद मे थां, इसलिये पल्लवी नें कुछसमय रुककर पुनः धक्के लगाना शुरुआत कर दिया। 3-4 औऱ मिनटबीत जाने केँ बाद रूद्र स्खलित हुआ। पल्लवी जैसी सौंदर्य कि देवी कि योनि मे वीर्य कि धाराएँ छोड़ने कां एहसास बहोत हि सुखद थां।
पल्लवी थक केँ रूद्र केँ ऊपर हि गिर गई,। उसी अवस्था मे दोनों अपनी सांसो पऱ काबू पाने केँ लिए आराम करनेलगे। रूद्र नें उसको आलिंगनबद्ध कर लिया थां औऱ उसके बालों मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे उंगलियाँ चलारहा थां संग हि अपने प्रेम कां इज़हार भि उसके कानों मे कररहा थां।
कुछदेर मे पल्लवी उठी औऱ उसने रूद्र केँ रसीले होते लिंग कों फिन सें अपनेमुह मे लिया औऱ जल्द सें उसमेबचे हुए वीर्य कों चूस लिया। "आई लवयूसो मच, रूद्र माई डार्लिंग!" "मे तुमको पागलो कि तरह प्रेम करती हूं। "
"तुम् धीरे-धीरे लेटजाओ। " रूद्र नें अपना पजामा ऊपर चढ़ा लिया औऱ बिना टी-शर्ट केँ हि लेट गय़ा।
पल्लवी भि बिना कपड़ो केँ उठकर जानेलगी तौ रूद्र नें पूछा, "कपडे नहि पहनोगी?"
"अरे, मम्मी नें देखा हि हैं मुझको ऐसे। वैसे भि उनसे क्याँ लज्जा?" पल्लवी मे मन मे एक् विचार कौंधा - "क्यूं न् हम् लोगआज न्यूडिस्ट होँ जाएँ?"
"माँ नाराज़ होँ जाएँगी"
"नहि होंगी। मे तौ कहती हूं कि तुम् भि नंगे होकर लेटो। मम्मी नहा केँ निकलेगी तोँ उनको भि नंगा होने केँ लिए राज़ी करती हूं"
"तुम् पागल हौ एकदम। वैसेसच मे, नंगी हौ केँ एकदम मस्त लगती हौ। आज तुम् प्लीज कुछमत पहनो - खूबमजा आएगा। "यह बोलते बोलते रूद्र कां लिंगफिन सें खड़ा होनेलगा।
पल्लवी नें मां कों मनाने वालीबात तोँ बसयूं हि कह दि थि। असल मे उसकी हिम्मत इतनी नहि थि, कि अपनी मां सें वोँ ऐसी बातेकरे। रिश्तो कि कोई मर्यादाएँ होती हैं, सीमायें होती हैं। मगर न्यूडिस्ट होने कां अनुभव एकदमनया होगा - खासतौर पे तब, जब कि घऱ मे उसके पति केँ अलावा कोई औऱ हौ। असल मे आईआईटी छात्रावास मे भि वोँ कभी पूर्ण नग्न अवस्था मे नहि रही थि।
"एकदमनया होगायह.!" उसने सोचा।
अभि अभि सम्पन्न हुएयौन क्रिया केँ कारण निकले हार्मोनों औऱ संग हि संग रूद्र कि ख़्वाहिश, कि वोँ आज नंगी हि रह जाये, केँ सम्मिलित प्रभाव नें उसकेमन कि वर्जनाओं कों थोडा दबा दिया औऱ एक् नए अनुभव केँ लिए हिम्मत बांध दि। उसनेठान लिया कि आज तोँ कपडे नहि पहनेगी औऱ अपने कमरे कि तरफचल दि।
.
माला नहाने केँ बाद कपडेपहन करबार निकल हि रही थि कि उसने देखा कि पल्लवी तौ पूर्णतः नग्न हैं। माला नें सोचा कि लगता हैं इन दोनों नें फिन सें समागम कर लिया हैं - "बाप रे बाप! कभी थकते हि नहि यह दोनों। "
उसने सोचा कि वोँ 2 मिनटबाद बाहर् निकलेगी, तब तक पल्लवी भि कपड़े पहन लेगी। मगर पल्लवी बड़ीदेर तक यूँ हि अन्दर बाहर् चक्कर लगाती रही। मालासमझ नहि सकी कि उसको क्याँ बोले।
"कितनी सुन्दर लड़की हैं ये - मगर अभि भि ऐसे बर्ताव करती हैं कि जैसे एकदम छोटी सि बच्ची होँ। भला 20 साल कि लड़कीघऱ मे ऐसे नंगे घूमती हैं कहीं?" 20 साल.कुछ दिनों पहले वोँ एक् बच्ची थि, मगरअब देखो!"
सवेरे तौ माला नें पल्लवी कां केवलआगे कां हिस्सा देखा थां, मगर अभि उसके घूमते टहलते रहने सें उसका पीछे कां हिस्सा भि दिखा। चिकनी पीठ औऱ मादक नितम्ब, संग हि सुन्दर जांघें। "कितने गोल पुट्ठे हें इसके! तराशी हुइ जांघे। इकहरी टाँगे! एफ टेलीविज़न पे दिखने वाली नं जाने कितनी हि मॉडल्स कों यहमात दे सकती हैं। "
माला नें अंततः सोचा कि इसकोकुछ पहनने कों बोलेगी औऱ जाकर पल्लवी केँ सामने आकर खड़ी हौ गई,।
"अरे तुँ ऐसी हि रहेगी क्याँ? कुछ तौ लज्जा कर!चल कपडेपहन"
"अरे मम्मी! आप्! मे आपकेपास हि आने वाली थि। " पल्लवी मुस्कुराते हुए बोलि।
"ऐसे? नंगी?अब तुँ जवान हौ गयीँ, हैं, कुछ लज्जा लिहाज कर" मालादबे स्वर मे बोलरही थि, जिससे रूद्र कों आवाज़ नं जाये।
"अरे आपने तोँ सवेरे मुझेऐसे देखा हि थां, औऱ रही रूद्र कि बात, तौ उसने हि बोला कि आज तुम् ऐसे हि रहो,। नंगी, खूब मजा आएगा। "
"तुम् दोनों नं! क्याँ मेरे जाते हि फिन सें शुरुआत होँ गए थें?" जवाब मे पल्लवी नें खीसे निपोर दि।
"सच मे?! हे भगवान्, कितना स्टैमिना हैं तुम् लोगो मे?!"
"हाहा। मम्मी कलरात सें पाँचवी बार हैं। " पल्लवी नें हँसते हुए, आँख मारते हुएकहा।
"तुम्हें बिलकुल भि लज्जा नहि हैं"
"आपसे तौ बिलकुल भि नहि - आप् मेरी मम्मी कम औऱ मित्र ज़्यादा हें"
"बसबस, मस्का मतलगा, औऱ जाकर कपडेपहन लें। "
"आज तोँ मा-बदौलत ऐसे हि रहेंगी - पति कां आदेश जोँ हैं। " पल्लवी नें आँख मटकाते हुएकहा।
"एक् तुम् औऱ तुम्हारा पति, दोनों हि एक् नंबर केँ बेशरम होँ"
"अरेहाँ, मे यह बताने आई थि कि आज मे औऱ रूद्र दोनों हि न्यूडिस्ट बनने वाले हें। मतलब, आज हम् दोनों हि कपडे नहि पहनेंगे। सोचा कि आपकोबता दे, नहि तौ आप् शाक्ड होँ जाएँगी। "
पल्लवी नें थोडा सोचते हुएआगे कहा "वैसे मां, कितना मजा आएगाअगर आप् भि मत पहनिए। फिन हम् मे सें कोई भि संकोच नहि करेगा" आखिर उसनेकह हि दिया - मगर उसकादिल धक् सें हौ गय़ा कि उसनेयह क्यूं बोला!
"मे नहि बनतीकोई न्यूडिस्ट व्यूडिस्ट। न् जाने कहां कहां सें आइडियाज लाते हें यह दोनों। " माला बुदबुदाई। "कोई छोटा बच्चा हौ तौ समझ मे भि आये! तुम् दोनों जवान होँ गए होँ। मुझे नहि मनपसंद हैं यहसभी। "
पल्लवी नें देखा कि मां कां प्रतिवाद औऱ क्रोध ठीक उतना हि हैं जितना कि बिना पूछे, चोरी सें रसगुल्ला खाने पर्र होता हैं।
फिन भि उसने थोड़ी सतर्कता सें बोला, "मां, प्लीज आप् नाराज़ मत होइए। ठीक हैं आप् कपडे पहने रहिएगा, मगर मे अकेले हि ऐसे रहूंगी तोँ मुझे अजीब सां लगेगा। रूद्र बेचारे कों भि अलाऊकर दीजिये नं?" पल्लवी नें किसी छोटे बच्चे कि तरह चिरौरी करतेहुए कहा।
"मे कौन होती हूं अलाऊ करने वाली! अपने कमरे केँ अन्दर जैसे रहना होँ रहो, औऱ जौ करना हैं करो। मगर बाहर् तोँ ठीक सें रहो"
माला कि नं नुकुर औऱ पल्लवी कि हठभरे निवेदनो केँ बीच माला केँ मन मे विचार ज़रूर आया कि ऐसे सुन्दर नौजवान नग्न देखने कों मिलेगा। "ऐसीकोई बुरीबात भि नहि हैं, अगर दोनों नग्न रहते हें। बच्चे हि हें दोनों। क्याँ फर्क पड़ता हैं?" इस तर्क सें माला कां प्रतिरोध ढीला हौ गय़ा।
प्रत्यक्ष मे उसनेकुछ कहा नहि, मगर नाँ नाँ कहनाबंद कर दिया।
"तोँ हम् लोगआज बिना कपडे केँ रह सकते हें?"
माला नें कुछ नहि कहा, मगर उसकी आँखें कहरही थि कि वोँ कोई विवाद नहि करेगी।
"थैंकयु मम्मी!" पल्लवी नें ख़ुशी केँ मारेजोर सें कहा औऱ मम्मी सें कस केँ चिपक गयीँ,।
माला नें भि उसको प्रेम सें गलेलगा लिया औऱ उसकीपीठ सहलाने लगी। उसकेमन मे हुआ कि पल्लवी केँ नितम्ब छूकर देखे कि केसे लगते हें। बचपन मे छुआ थां, तब सें अब तक कितना वक्त होँ गय़ा।
"पल्लवी." माला उसको उसकेनाम सें तब बुलाती थि जब वोँ उसके अपने बराबर कां समझती थि।
"हाँ मां"
"मे आईटचयोर बटक्स?" किसीबात कों बोलने मे जब माला कों शर्मआती थि, तोँ अंग्रेजी मे बोलने लगती थि।
"मम्मी, युकैन टचनॉट ओन्ली माई बटक्स, बट आल्सो माय ब्रेस्ट्स एंड देअर। आई विल नेवर माइंड योर टचिंग" बोलते हुए पल्लवी आलिंगन तोड़ केँ अलगहट गई औऱ मां कि तरफपीठ करके खड़ी हौ गई।
माला नें बहोत हिचकते हुए पल्लवी केँ उन्नत नितम्बों कों छुआ। "वाकई कितने चिकने हें। औऱ ठोस भि! गुरुत्व कां कोई प्रभाव नहि। रंग भि कितना साफ हैं!" उसने अपनाहाथ हटाया, तौ पल्लवी मुस्कुराते हुएपलट गयीँ,।
माला कि दृष्टि मे पल्लवी केँ बूब्ज़ सबसे सुन्दर थें। उसको अपने स्वयं केँ बूब्ज़ बहोत प्यारे लगते थें, मगर पल्लवी केँ स्तनों मे जौ यौवन कि ताजगी थि, उसके कारण वोँ औऱ भि सुन्दर लगते थें।
"तुम् बहोत सुन्दर हौ, पल्लवी" माला नें उसके स्तनों कों देखते हुएकहा।
"मे, याँ मेरे ब्रेस्ट्स?"
"तुम् भि औऱ तुम्हारे ब्रेस्ट्स भि" माला कि हिचककम होँ रही थि।
पल्लवी गर्व सें मुस्कुराई। अगर मम्मी कों मेरे ब्रेस्ट्स मनपसंद हें, तौ यह अवश्य हि बेस्ट होंगे!
"मम्मी, अगर आप् मेरे ब्रेस्ट्स कों लाइक करती हैं तोँ प्लीस, इनकोचूम लीजिये। जैसेआज मैंने आपके चूमे थें"
माला ठिठक गयीँ,, "चूमे कहां थें - चूसे थें!" "मे अपनी बेटी केँ बूब्ज़ चूसूंगी? अपनी मम्मी केँ बादयह पहला बूब्ज़ होगा जौ माला चखेगी। " यह एक् रोंगटे खड़े करने वाला रोमांच थां। क्याँ उसनेसही सुना थां, निश्चित करने केँ लिए माला नें पल्लवी कि तरफ देखा।
पल्लवी नें प्रेम सें मुस्कुराते हुए हामी दिखाने केँ लिएसर हिलाया।
माला नें अनिश्चय भरे तरीके सें पल्लवी केँ छोटे, गहरे लाल-भूरे रंग केँ आकर्षक बाएं स्तनाग्र कों अपने अपने खुलेहुए होंठो मे भर लिया औऱ जीभ कों थोडा पीछे करके हलके सें चूसा।
इतनेकम अन्तराल मे पहले रूद्र औऱ अब माला द्वारा अपने स्तनों पर्र होने वाली क्रिया सें पल्लवी रोमांचित होँ गयीँ,। प्यार-हर्मोनो केँ प्रभाव औऱ संवेदनशील अंग कि छेड़खानी सें वोँ फिन सें मदमस्त होनेलगी।
थोड़ी थोड़ी देर तक दोनों स्तनों कों हल्का हल्का चूसने केँ बाद माला संयत होँ करअलग खड़ी होँ गई,। "अद्भुत हैं, स्तनपान करना औऱ कराना - दोनों हि! आज सवेरे हि पल्लवी नें इनको पीकर मुझे इतनासुख दिया, औऱ अब अपने बूब्ज़ पिलाकर फिन सें!
"थैंक्स मां" पल्लवी कि आँखों मे वोँ वासना केँ हलकेलाल रंग केँ डोरेसाफ देख सकती थि, औऱ जानती थि कि उसकी स्वयं कि आंखे भि यही किस्सा कहरही हैं।
"थैंक्स मुझे कहना चाहिए पगली। तुमको नहि मालूम, कि तुमने मुझे कितनी ख़ुशी दि हैं। "
दोनों कुछ लम्हा ऐसे हि प्रेम सें एक् दुसरे कों देखती रही। अचानक पल्लवी कि आँखों मे शरारत कां भाव आँ गय़ा।
वोँ बोलि, "मां, आपने अभि अभि रूद्र कों फ्रेंच-किस किया हैं"
"क्याँ.!? मैंने कब.!?"फिन उसकोसमझ आया - रूद्र नें भि बसकुछ हि देर पहले इन्ही स्तनों कों चूमा चूसा होगा, जिसको वोँ चूसरही थि।
"रूद्र कों फ्रेंच-किस! पागल!"इस भावना सें उसे स्वयं हि लज्जा आँ गई,। "तुम् आज सचमुच कुछ नहि पहनोगी?" माला कां स्वरअब एकदम शांत थां।
जीवन का सुख - beti ki kahani - Continue reading for full story
Relavant source : click here