शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Latest Update 1
" भागो भागो अपनीजान बचाओ"
इतना कहकर चिल्लाते हुए भीड़ अपनीजान बचाने केँ लिए मार्ग पर्र सें घरों कि तरफ भागी औऱ देखते हि देखते पूरी मार्ग खाली होतीजा रही थि! सबको अपनीजान प्यारी थि औऱ आखिर होँ भि क्यूं नहीं क्योंकि एक् पागल वहशी घोड़े केँ आगेकोई भि आनां नहीं चाहता थां औऱ भि तबजब वोँ अपनी पूरी रफ्तार सें हवा सें बातेकर रहा थां! उसके पैरो कि टापो सें उड़ती हुइ मिट्टी अपनी पीछेधूल कां तूफान सां खड़ाकर रही थि!
सुल्तानपुर राज्य मे पता नहि कहां सें यह पागल घोड़ा घुसआया थां जिसकी बेरहम कदमों केँ तलेकई गरीब कुचले गए थें औऱ हाहाकार मचाहुआ थां! कुछ सैनिक उसे काबू करने कि कोशिश कररहे थें मगर घोड़ा हवा कि रफ्तार सें दौड़ता हुआ पूरीतरह सें उनके काबू सें बाहर् थां! किसी कों कुछसमझ मे नहीं आँ रहा थां कि तभी अंधा व्यक्ति घोड़ा केँ सामने गिर पड़ा औऱ उसकी मम्मी डर केँ मारेजोर सें चिल्ला पड़ी
" अरेकोई मेरे बेटे कों बचाओ! हैं कोई तौ मेरी सहायता करो
घोड़े बिजली कि गति सें दौड़ता हुआआगे बढ़ा औऱ जैसे हि अंधे कों कुचलने वाला थां कि बिजली कि रफ्तार सें एक् लड़कीआई औऱ बच्चे कों उठा लिया औऱ उसकी मम्मी कों देतेहुए घोड़े केँ पीछे दौड़ पड़ी! मम्मी नें खुशी खुशी अपने बेटे कों चूम लिया औऱ उस लड़की कां धन्यवाद करनेलगी औऱ बोलि
" शहजादी सलमा आप् सदाखुश रहो
स्त्री नें अपनी दुवाएं दि मगर सलमा तोँ पहले हि घोड़े केँ पीछे दौड़ पड़ी थि औऱ अपने काले घोड़े पऱ सवार हुई औऱ देखते हि देखते हि वोँ उस घोड़े केँ पास पहुंच गई जोँ लालरंग कां थां औऱ गलती सें उसके राज्य मे घुसआया थां! सलमा नें घोड़े केँ बराबर मे आकर एक् छलांग मारी औऱ दूसरे घोड़े पऱ सवार होँ गई औऱ घोड़े नें अपनी पूरी ताकत लगाकर उसे नीचे फेंकना चाहामगर सलमा कि मजबूत पकड़ उसकी गर्दन मे बनीरही औऱ घोड़े कि रफ्तार हवा सें बातें करनेलगी मानो वोँ सलमा कों डराने कां प्रयास कररहा हौ औऱ सलमा बखूबी जानती थि कि ऐसे आदमखोरों कों केसे काबू किया जाता हें औऱ उसने घोड़े कि लगाम कों कसकर अपनीतरफ खीच लिया औऱ घोड़े कि रफ्तार मे कुछकमी आई औऱ सलमा नें पूरी ताकत सें उसकेपीठ पर्र वार किया औऱ घोड़े कि रफ्तार धीमी हौ गई औऱ अब थोड़ी देर पहले तूफान बनाहुआ घोड़ा अपनी औकात पऱ आँ गय़ा थां औऱ भीगी बिल्ली बनाहुआ धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलरहा थां औऱ सलमा उसकीपीठ कों सहलाती हुई उसे पुचकारती हुइ वापिस लौटचली औऱ सबलोग यह देखकर तालिया बजाकर उसका स्वागत कररहे थें कि उनकी शहजादी सच मे बेहद सुंदर होने केँ संगसंग ताकतवर भि हें!
शहजादी इससे पहले कि महल मे घुसती एक् राजकुमार घोड़े पऱ आया औऱ बोला:"
" माफ कीजिए शहजादी जी वोँ मेरा घोड़ा हें जोँ गलती सें आपके राज्य मे आँ गय़ा हैं! मेरा घोड़ा मुझे वापिस कर दीजिए आप्!
सलमा केँ मुंह पर्र नकाबलगा हुआ थां औऱ सलमा नें एक् बार उसकीतरफ देखा औऱ बोलीं:"
" यह घोड़ा अबहमे मनपसंद आँ गय़ा हैं तौ आप् तौ इसेअब भूल हि जाए तोँ बेहतर!
राजकुमार जिसका नाम विक्रम चौहान थां उसने गुस्से सें सलमा कि तरफ देखा औऱ बोला:"
" हमारा नाम विक्रम चौहान हें औऱ हिंदुस्तान मे किसी राजा मे इतनी ताकत नहीं कि हमे इंकार करसके! आपके औऱ आपके राज्य केँ लिए बेहतर यही होगा कि आप् मेरा घोड़ा वापिस कर दीजिये वरना.
इससे पहले कि वोँ आगेकुछ बोलते सलमा केँ मयान सें तलवार निकली औऱ उसकी गर्दन केँ ठीक सामने रुक गई औऱ सलमा गुस्से सें दहाड़ती हुई गरजी:"
" अगर हमारे राज्य केँ इतिहास मे एक् भि घटनाघऱ आए मेहमान कों मारने कि होती तोँ खुदाशपथ अब तक तुम्हारी लाश नीचे मार्ग पऱ पड़ी होती, अपनीजान सलामत चाहते होँ तौ वापिस लौटजाओ वरना मेरे एक् इशारे पऱ टुकड़ों मे बांटदिए जाओगे!
विक्रम सिंह नें हाथ सें उसकी तलवार कों अपनी मुट्ठी मे पकड़ लिया औऱ सलमा कि आंखो मे देखते हुए बोला:"
" मरने कां खौफ उन्हे होता हें जिन्हे जीवन सें प्रेम होता हें! जान हथेली पऱ रखकर आपके राज्य मे आयाहु तोँ घोड़ा लिए बिना तोँ नहीं जाऊंगा मे! आप् खुशी सें देगी तोँ लाशों कां ढेर नहीं लगेगा आपके राज्य मे!
इतना कहकर उसने पूरी ताकत सें तलवार कों आगे सें मोड़ दिया औऱ सलमा कों यकीन हौ गय़ा कि यह व्यक्ति सच मे बेहद शक्तिशाली हैं औऱ बोलि:"
" बेशक बहादुर हौ मगर मूर्ख हौ जौ एक् घोड़े केँ लिए अपनीजान दांव पर्र लगाना चाहते हौ!
विक्रम सिंह कों अब तक चारोतरफ सें सैनिकों नें घेर लिया थां मगर उसके चेहरे पऱ कोईडर याँ चिंता नहीं बल्कि आत्म विश्वास थां औऱ वोँ मंदमंद मुस्काते हुए बोला:"
" शहजादी अंतिम बार आपसे निवेदन कररहा हूं कि मेरा घोड़ा मुझे वापिस लौटा दीजिए क्योंकि मे बेकार कां खून खराबा नहीं चाहता!
सलमा नें घोड़े कि पीठ पर्र हाथमार करउसे थपथपाते हुए बोलीं:" घोड़ा तोँ अब आप् भूल जाइए राजकुमार! आज सें मे इसकी सवारी करूंगी!
विक्रम सिंह:" तोँ फिनठीक हें मे भि खून खराबा नहीं चाहता तौ बेहतर यही होगा कि आप् घोड़े कों छोड़ दीजिए जिसके पासयह जाएगा वही इसका असली मालिक होगा!
सलमा नें उसकीबात कों स्वीकार कर लिया औऱ वोँ घोड़े पऱ सें उतर गई औऱ अब खड़ा दोनो केँ बीच मे खड़ाहुआ थां औऱ दोनो हि उसे अपनीतरफ बुलारहे थें औऱ विक्रम जानता थां कि उसका घोड़ा आसानी सें उसकीतरफ आँ जाएगा मगरयह उसकी जीवन कि सबसे बड़ीभूल साबित हुई औऱ घोड़ा शहजादी सलमा केँ पास पहुंच गय़ा औऱ शहजादी सलमा मुस्कुरा कर एक् बारफिन सें उसकीपीठ पर्र सवार होँ गई औऱ विक्रम सें बोलीं:"
" उम्मीद हैं अब आप् अपने राज्य वापिस लौट जाओगे!
विक्रम नें दुःखी नजरो सें अपने घोड़े कि तरफ देखा औऱ फिन शहजादी कों देखा औऱ बोला:"
" ठीक हें शहजादी आज सें यह घोड़ा आपकाहुआ मगर आप् मुझेवचन दीजिए कि महीने मे एक् बार मे इससे मिलने आँ सकू क्योंकि यह घोड़ा मेरीजान हें!
सलमा नें हाथउठा कर उसकीबात मानली औऱ औऱ बोलीं:" सैनिकों विक्रम साहब कों हमारे राज्य कि सीमा सें सुरक्षित बाहर् आयादो!!
इसकेबाद सलमा घोड़े पऱ बैठकर महल कि तरफचल पड़ी!!
उसके होंठो पर्र विजयी मुस्कान थि औऱ विक्रम दुःखी मन सें सैनिकों केँ साए मे सुल्तानपुर कि सीमा सें बाहर् निकलरहा थां औऱ उसकी आंखो मे आंसु थें क्योंकि उसनेकभी ख्वाब मे भि नहीं सोचा थां कि उसका घोड़ा उसेऐसा धोखा भि दे सकता हैं! उसकामन तोँ कररहा थां कि अपने घोड़े कों मार डालेमगर वोँ इंसान थां औऱ ऐसाकभी नहि कर सकता थां!!
Sabse pahle ek nayee kahani start karne k liye congratulations Unique star bhay, Ummeed he yeh story bi aapki baaki kahaniyo kee prakaar agni laga degi
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम अपने राज्य उदयगढ़ वापिस लौटआया औऱ उसे दुःखी देखकर उसके साथीअजय नें पूछा:"
" क्याँ हुआ राजकुमार ? बड़े दुःखी लगरहे होँ ?
विक्रम नें उसकीतरफ निराशा सें देखा औऱ बोला:"
" मत पूछो मेरे साथी!सच कहूं तौ किसी केँ कहने केँ काबिल नहींबचा कुछ !
अजय नें उसकाहाथ अपनेहाथ मे लिया औऱ बोला:"ऐसा नं बोलो मेरे साथी, मेरे भइया ! कोई समस्या होँ तोँ आप् मुझसे कहिए ? कुछ नं कुछ उपाय करेंगे!
विक्रम:" भइयाआज मेरा घोड़ा पवन गलती सें सुल्तानपुर कि सीमा मे चला गय़ा औऱ वहां कि शहजादी नें पकड़ लिया औऱ सबसे बड़ीबात घोड़ा मेरेपास आने कि बजाय उसकेसंग हि चला गय़ा! बसयही मेरेलिए कां विषय हें मेरे भइया!
उसकीबात सुनकर अजय कों मानो सांप सां सूंघ गय़ा औऱ बोला:" क्याँ आप् सचकहरहे हौ राजकुमार ? मुझे यकीन नहीं हौ रहा हैं! आप् सुल्तानपुर गए थें क्याँ?
विक्रम:" हान भइया गय़ा थां मे अपने घोड़े केँ लिए!मगर कुछ हासिल नहि कर पाया!मगर शहजादी नें मुझेवचन दिया हें कि मे जबमनकरे घोड़े सें मिलने आँ सकताहु !
अजय नें हैरानी सें उसकीतरफ देखा औऱ बोला:" आप् बाहर् हि पलेबढे औऱ कुछदिन पहले हि वापिस आए हें! क्याँ आपकोपता हें कि सुल्तानपुर सें हमारे रिश्ते केसे हें ?
विक्रम नें आंखो मे हैरानी लिए उसकीतरफ देखा औऱ बोला:"
" हमारे रिश्ते तोँ सबकेसंग अच्छे हि हैं अजय औऱ फिन किसकी इतनी हिम्मत हें कि उदयगढ़ केँ भावी राजा केँ सामने आंखउठा सके !!
अजय:" राजकुमार आप् मुझसे एक् वादा कीजिए कि आप् आज केँ बाद सुल्तानपुर नहीं जायेंगे!
विक्रम थोडा गुस्से सें उसकीतरफ देखते हुए बोला:"क्यूं नहि जायेंगे हमारा पवन हें वहां ! जब तक वोँ वापिस नहि आएगा हम् सुकून सें नहि बैठ सकते!
अजय नें दोनोहाथ उसकेआगे जोड़दिए औऱ बोला:"
" राजुकमार आपको मेरी दोस्ती कि शपथ कि आज केँ बाद आप् सुल्तानपुर नहीं जायेंगे! पवन कों किसी भि कीमत पऱ मे वापिस लेकर आऊंगा!
विक्रम नें गुस्से सें उसकीतरफ देखा औऱ बोला:"यह हमेंकिस बंधन मे बांधरहे हौ साथी? आखिर वहां जाने मे दिक्कत क्याँ हें क्योंकि शहजादी नें हमे स्वयं वचन दिया हें!! कोईबात हैं तोँ हम् बताए आप्
अजय नें उसके सामने दोनों हाथों कों जोड़ दिया औऱ बोला
" मे विवशहु राजकुमार! चाहकर भि आपकोकुछ नहींबता सकता!बस मेरा यकीन कीजिए कि वहां जानां आपकेलिए ठीक नहि होगा!
विक्रम नें जोर सें एक् मुक्का बराबर मे खड़े पेड़ पर्र गुस्से सें मारा औऱ वोँ मजबूत पेड़बीच सें टूट गय़ा औऱ विक्रम जोर सें भड़का:"
" तुम्हे मेरेशपथ हैं अजय! याँ तौ हमे बताओ नहीं तोँ हमे सुल्तानपुर जाने सें दुनिया कि कोई ताकत नहींरोक पाएगी!
अजय:" नहीं राजकुमार हमे धर्म संकट मे मत डालिए आप्! हमने राजमाता कों वचन दिया हें कि मर जायेंगे मगर हमारी जुबान नहीं खुलेगी!
विक्रम गुस्से सें करीब दहाड़ा औऱ बोला:"
" अगर आप् हमारी शपथ नहीं मानते तौ दुनिया कि कोई ताकत हमें सुल्तानपुर जाने सें नहींरोक पाएगी औऱ आपकीशपथ भि नहि अजय!!
इतना कहकर विक्रम नें अपनी तलवार कों हवा मे लहराया मानो अपनी ताकत कां प्रदर्शन कररहा होँ औऱ अजय उसके कदमों मे गिर पड़ा औऱ बोला:"
" राजकुमार आपको सुल्तानपुर जाने केँ लिए मेरीलाश पर्र सें गुजरना पड़ेगा!!
विक्रम कों मानो उसकीबात पऱ यकीन नहि हुआ औऱ उसकी आंखो मे देखते हुए बोला:"
" अजय तुम् होश मे तौ होँ ? आपकोपता हैं कि क्याँ आप् क्याँ कहरहे हौ?
अजय नें हाथ सें विक्रम कि तलवार पकड़ी औऱ अपनी गर्दन पऱ टिका दि औऱ बोला:"
" जब तक मेरेबदन मे अंतिम सांस होगी आप् सुलतानपुर नहींजा पाएंगे! आप् मेरी गर्दन काटकर हि जा सकते हें!!
विक्रम नें अपनी तलवार कों वापिस म्यान मे रख लिया औऱ तभी किसी केँ आने कि आहट हुइ तौ दोनोचुप होँ गए औऱ अजय नें देखा कि राजमाता गायत्री देवीउधर कि आँ रही हैं तौ उसने इशारे सें विक्रम कि मना किया कि राजमाता सें कोई प्रश्न नं करे! राजमाता उनकेपास आँ गई औऱ बोलि:"
" क्याँ बातेकर रहे थें दोनो जोँ मुझे देखते हि चुप हौ गए?
विक्रम:" कुछ भि नहीं राजमाता! बसअजय बतारहा थां कि हमे अपने राज्य कि सुरक्षा बढ़ानी पड़ेगी क्योंकि सर्दी आने वाली हैं!
राजमाता:" बिलकुल सहीबात हें! सर्दी मे कभीकभी चोर डाकू अंदरघुस आते हें औऱ लूटपाट कां खतरा होँ सकता हैं!
विक्रम:" जी राजमाता फिन मेरे विचार सें आपको पूरे राज्य कि सुरक्षा अजय केँ हाथ मे हि सें देनी चाहिए!
राजमाता:" सोच तोँ मे भि यहीरही हुबसइस बारजब मंत्री दल कि बैठक होगी तोँ यह घोषणा भि कर दि जाएगी! क्यूं अजय तुम्हे कोई दिक्कत तोँ नहीं!
अजय:" मेरा सौभाग्य राजमाता, अपनेखून कि अंतिम बूंद तक उदयगढ़ कि रक्षा करूंगा!
राजमाता:" शाबाश, तुम् जैसे युवा नौजवान हि उदयगढ़ कों ऊंचाई पर्र लेकर जाएंगे! आपकी माँ कैसी हें अभि ?
अजय थोडा दुःखी हौ गय़ा औऱ बोला:"बस पहले सें थोड़ी अच्छी हें, पापा कि याद मे अक्सर रोती रहती हैं! आप् हि उन्हें एक् दिन अच्छे सें समझा दीजिए नां!
राजमाता:" मुझसे बेहतर भला पति कों खोने कां दर्दकौन समझ सकता हैं, ठीक हैं मे बात करूंगी! औऱ कोई जरूरत होँ तोँ बताना मुझे!
अजय:" जी राजमाता!
राजमाता:" अच्छा मे अब चलतीहु, वैसे भि अब मेरी पूजा कां वक्त होँ गय़ा हैं!
इतना कहकर राजमाता चली गई औऱ अजय भि विक्रम सें इजाजत लेकर अपनेघऱ कि तरफलौट चला औऱ विक्रम केँ दिमाग़ मे सवालों कां तूफान मचाहुआ थां कि उसे सुल्तानपुर क्यूं नहि जानां चाहिए! आखिरऐसी क्याँ बात हैं जौ उससे छुपाई गई हें ! जरूरकुछ तौ हें जिसका मुझेपता करना हौ होगा!
विक्रम जानता थां कि उसेयह सभी कहां सें पताचल सकता हैं औऱ वोँ उसी दिशा मे आगेबढ़ गय़ा औऱ अब वोँ राज वैद्य शक्ति सिंह केँ घऱ केँ सामने खड़ाहुआ थां औऱ वोँ जानता थां कि शक्ति सिंह उसके सामने हरहाल मे अपना मुंहखोल देगा क्योंकि अभि तीन पहले भि उसने शक्ति सिंह कों उसके बेटे कि बहु मीनू केँ संग संभोग करतेदेख लिया थां जब वोँ उसकेघऱ आया थां! शक्ति सिंह नें राजकुमार सें माफी मांगी थि औऱ जिंदगी भर उसका वफादार बनने कां वादा किया थां! विक्रम कों अपनेघऱ देखकर शक्ति सिंह हैरान हुआ औऱ बोला:"
" युवराज आपने क्यूं आने कां कष्ट किया मुझेमहल बुला लिया होता आपने!
विक्रम:" हम् एक् मुश्किल मे फंसगए हें वैद्य जी औऱ आप् हि हमारी सहायता कर सकते हें!
वैद्य:" मेरी क़िस्मत होगी! आज्ञा दीजिए आप्!
विक्रम:" सुल्तानपुर औऱ उदयगढ़ कि क्याँ कथा हैं!
यह सुनते हि वैद्य जी केँ चेहरे कां रंगउतर गय़ा औऱ हकलाते हुए बोले:"
" मुझेइस बारे मे कुछ नहि पता राजकुमार!
विक्रम:" फिन आपकी जुबान लड़खड़ा क्यूं रही हैं वैद्य जी? बेहतर होगा कि मेरे सवालों कां जवाबदो!
वैद्य:" मेरी आजकल तबियत ठीक नहि रहती वोँ शायद इसलिये ऐसा होँ गय़ा औऱ मेरी उम्र भि तौ होँ गई हें!!
विक्रम नें अपनी गुस्से सें लाल आंखो सें उसे घूरा औऱ बोला:"
" अच्छा तोँ यहबात हें! खैर छोड़िए एक् बात बताओ मीनू नहींदिख रही हैं? कहीं गई हें क्याँ वोँ आज ?
वैद्य केँ चेहरे पर्र कईरंग आए औऱ गए औऱ वोँ विक्रम केँ आगेहाथ जोड़कर बोला:"
" मुझेमाफ कर दीजिए युवराज! मे मजबूर हू आपकोचाह कर भि कुछ नहि बता सकता!
विक्रम नें उसे अच्छे सें देखा औऱ मुस्कुरा करहुए बोला:"
" कोईबात नहीं वैद्य जीमगर याद रखिए कि मे मजबूर नहींहु आपकीतरह सें! अच्छा मे अब चलताहु!
विक्रम चलनेलगा तोँ वैद्य जी नें उसकेपेर पकड़लिए औऱ बोले:"
" युवराज मुझेमाफ कर दीजिए, मे सभी इज्जत मिट्टी मे मिल जायेगी! मे आपकोसभी बताने केँ लिए सजधजकर हु!
युवराज विक्रम वहीबेड पर्र बैठ गय़ा औऱ वैद्य जी नें बोल्ना शुरुआत किया:"
" अब सें 10 साल पहले दोनो राज्य बेहद सम्पन्न थें औऱ आपस मे आज कि तरहकोई दुश्मनी नहि थि! फिन एक् दिन सुलतान पुर पर्र पिंडारियो नें हमलाकर दिया औऱ पड़ोसी होने केँ नाते आपके पिता महेंद्र सिंह सहायता केँ लिएगए मगरआज तक कभी वापिस नहींआए औऱ लोग कहते हें कि सुल्तानपुर केँ लोगो नें पिंडारियो सें समझौता कर लिया थां औऱ आपके पापा कों पिंडारियों नें मार दिया थां औऱ उनकीलाश हमे सुल्तानपुर केँ जंगल सें मिली थि! उसकेदिन केँ बाद सें हम् सुल्तानपुर केँ लोगो पऱ यकीन नहि करते!
विक्रम कों अपने कानो पऱ मानो यकीन नहि होँ रहा थां औऱ बोला:"
" मगर राजमाता तौ बताती हैं कि शिकार पर्र घायल शेरनी केँ हमले सें पापा कि मौत हुई थि तौ क्याँ यहसच नहि हें ?
वैद्य:" बिलकुल भि सच नहीं हें! आपसेसभी सच्चाई छुपाई गई हैं ताकि आप् भि इस दुश्मनी कां हिस्सा नं बनसके!
विक्रम गुस्से सें भरउठा औऱ उसकी आंखो सें लाल चिंगारिया सि निकलने लगी औऱ बोला:"
" वोँ कौन हैं वैद्य जी जिसने मेरे पापा कों धोखा दिया ? उसके इतने टुकड़े करूंगा कि पूरा सुल्तानपुर नहींगिन पायेगा!
वैद्य:" बेटा तौ सुल्तानपुर केँ राजामीर जाफर थें मगर जीवन नें उसे भि उसकी औकात दिखा दि औऱ वोँ भि पिंडारियो केँ हाथो मारा गय़ा थां!
विक्रम केँ चेहरे पऱ यह सुनकर एक् अजीब सां चैन मिला तौ आंखो मे निराशा भि दिखी औऱ बोला:"
" काश मे उसे अपने हाथो सें मार पाता तोँ मुझे कितनी खुशी होती! अभि वैसे सुल्तानपुर कां राजाकौन हें ?
वैद्य:" युवराज कहने केँ लिए तौ सुलतान कां बेटा राज्य संभालता हें मगर वोँ मानसिक रूप सें बीमार हें औऱ सबसे बड़ीबात वोँ लड़की औऱ शराब सें बाहर् नहीं निकल पाता हैं! राज्य कि देखभाल पूरीतरह सें सेनापति जब्बार खान केँ हाथ मे हें जौ एक् बेहद क्रूर औऱ निर्दयी इंसान हें!
विक्रम:" तोँ क्याँ राजा केँ परिवार मे औऱ कोई नहीं हें क्याँ जोँ राज्य कों संभाल सके ?
वैद्य:" राजा कि बेटी शहजादी सलमा बेहद हसीन होने केँ संगसंग एक् बहादुर औऱ तेजमन वाली लड़की हें मगर उसकी एक् नहींचल पाती क्योंकि वोँ हमेशा सेनापति केँ खिलाफ होती हें!
विक्रम कों सलमा केँ नाम सें यादआया कि उसका घोड़ा पवन तौ सुल्तानपुर मे हि छूट गय़ा हैं औऱ बोला:"
" जब सलमा शहजादी हें तौ वोँ अपनी ताकत कां इस्तेमाल क्यूं नहीं करती हें?
वैद्य:" राज नियमो केँ अनुसार जब तक बेटा जिंदा होँ तौ बेटी कों गद्दी नहीं मिलती हें! राजा केँ बेटे सलीम कों जब्बार नें अंधेरे मे रखाहुआ हैं कि राज्य मे सभीठीक चलरहा हैं जबकि सच्चाई वोँ नहीं जानता हें! बेटे कि जिद केँ आगे सलमा कि अम्मी रजिया भि मजबूर हें औऱ चाहकर भि कुछ नहींकर पाती!
विक्रम:" मतलब राज्य पूरीतरह सें जब्बार केँ इशारों पर्र नाचरहा हैं औऱ सभीकुछ उसकी मर्जी सें हौ रहा हैं!
वैद्य:" आप् बिलकुल ठीक समझे युवराज! मगरयह बातकभी राजमाता कों पता नहि चलनी चाहिए कि मैने आपकोयह सभी बताया हैं!
विक्रम नें वैद्य जी कां हाथ अपनेहाथ मे पकड़ा औऱ बोले:"
" आप् चिंता मुक्त रहिए! मे आपकोवचन देता हूं!
उसकेबाद विक्रम राजमहल कि तरफचल पड़ा औऱ अब उसकेलिए सबसे बड़ी चुनौती किसी भि हाल मे पवन कों वापिस लाना थां क्योंकि जोँ कुछउसे वैद्य नें बताया थां वोँ सभी जानने केँ बाद वोँ किसी भि कीमत पर्र अपने घोड़े कों नहीं छोड़ सकता थां!!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
Uniquestar भइया एक् भाग डेली देने कि कोशिश करो, औऱ प्लीज एक् बार शहजादी सलमा औऱ राजमाता कों सेनापति जब्बार सें जरूर चुदवाना, सलमा कां कुंवारापन हीरो नां तोड़ केँ कोई औऱ तोड़े, बहोत फीलआती हैं जब किसी हीरोइन कों कोई विलेन जबर्दस्त चोदता हैं, मात्र हीरो कि चमचागिरी करने सें बचना, हीरोजब तक अच्छे सें नं पिसेतब तक उसका बदला बेवकूफी लगता हैं
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Next part mein bada twist
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