शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
Uniquestar भइया एक् एपसोड डेली देने कि कोशिश करो, औऱ प्लीज एक् बार शहजादी सलमा औऱ राजमाता कों सेनापति जब्बार सें जरूर चुदवाना, सलमा कां कुंवारापन हीरो नाँ तोड़ केँ कोई औऱ तोड़े, बहोत फीलआती हैं जब किसी हीरोइन कों कोई विलेन जबर्दस्त चोदता हैं, मात्र हीरो कि चमचागिरी करने सें बचना, हीरोजब तक अच्छे सें न् पिसेतब तक उसका बदला बेवकूफी लगता हैं
bhut hi badhiya update he Unique star bhay, Aakhir vikram ko udaygarh or sultanpur kee dushman k bare mai ptaa chl hi gya.ab jald hi vikram dobara sultanpur jayega. Keep posting bhay
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
सुल्तानपुर औऱ उदयपुर कि बीचचल रही दुश्मनी केँ बारे मे जोँ कुछ युवराज विक्रम केँ यारअजय नें कहा औऱ जोँ कुछ उदयपुर केँ वैद्य शक्ति सिंह नें बताया, वो बहुत विरोधाभास लगता हैं।
कौनसच कहरहा हैं औऱ कौनझूठ, ये किसी कों नहींपता मगरइस राजसी किस्सा मे कुछ षडयंत्र तोँ ज़रूर हि हैं।
देखते हें, ये क्याँ चक्कर हैं !
( वैसे यूनिक स्टार भइया, आप् कि थ्रिलर किस्सा पऱ भाग नहीं आँ रहे हैं। आपनेउसे ठंडे बस्ते मे क्यूं डाल दिया ?)
इस किस्सा मे बहोत हि पोटेंशियल हैं। आपकीये कथा राजघराने पर्र आधारित एक् बेहतरीन इन्सेस्ट औऱ थ्रिलर कहानी बन सकती हैं। इस पर्र जराखास ध्यान दीजिए।
भाग हमेशा कि तरह बहोत हि हसीन थां, आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग वाला।
bhut hi shandar update he Unique star bhay, Vikram or Salma kee mulaqat hammesha nuakjhonk k sath hi hoty he.halanki lagta he jald hi dono mai pyaar bi hu jayega. Keep posting bhay
किस्सा मे आगे चलकर बहुत सारे खुलासे होंगे औऱ सच्चाई सब केँ सामने आयेगी! संगबने रहिए औऱ अपने कीमती टाइम देने केँ लिए शुक्रिया
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम महल वापिस आँ गय़ा औऱ राजमाता गायत्री केँ संग बैठाहुआ खानां खारहा थां औऱ बोला:"
" राजमाता आज आपनेअजय कों सुरक्षा प्रमुख बनाने केँ मेरे फैसले कों एकदम सें सहमति दि हैं मुझे बहोत अच्छा लगा!
गायत्री उसे देखकर मुस्कुराई औऱ बोलीं:" बेटे हमने आपकीबात कां मानरखा औऱ फिन आपने बिलकुल सही फैसला किया हें! आप् शायद नहीं जानते होँ कि अजय केँ बापू प्रमोद भि हमारे सुरक्षा प्रमुख थें औऱ युद्ध मे उन्होंने अंतिम सांस तक आपके पिता कां संग दिया थां औऱ फिन पिछली कुछ पीढ़ियों कां इतिहास उठाकर देखिए तोँ सुरक्षा प्रमुख अजय केँ हि पूर्वज रहे हें!
विक्रम:" फिन तोँ यह तोँ बहोत अच्छी बात हें औऱ अजय भि अपनाकाम ईमानदारी सें करेगा औऱ राज्य कि सुरक्षा मे कोईचूक नहीं होने देगा!
राजमाता:" मगर एक् दिक्कत हें कि अभि सुरक्षा प्रमुख केँ पद पर्र तैनात शक्ति सिंह कों हटाना क्याँ सही होगा ?
विक्रम:" मुझे तोँ इसमें कोई दिक्कत नजर नहींआती, फिन सबकेमन मे राज्य कि सेवा कां भाव होना चाहिए पद चाहेकोई भि हौ क्याँ फर्क पड़ता हैं
राजमाता:" बिलकुल सहीकहा विक्रम आपने! राज्य कि सेवा हि सबसेऊपर होनी चाहिए! मे कल भैरव बाबा केँ मंदिर जाऊंगी दर्शन केँ लिए, आप् चाहो तोँ मेरेसंग चल सकते हौ!
विक्रम उसकीबात सुनकर मन हि मन खुशी सें भरउठा औऱ बोला:" देखता हू राजमाता, वैसे तोँ मुझेकल कुछकाम होंगे मगरअगर फ्रीरहा तोँ आपकेसंग जरूर चलूंगा!
अगलेदिन सुभह राजमाता मंदिर जाने केँ लिए रेडी होँ गई तौ विक्रम नें सुरक्षा कि सारी जिम्मेदारी अजय कों दि औऱ बोला:"
" अजय आप् राजमाता कि मंदिर यात्रा कि सुरक्षा आपकेहाथ मे होगी औऱ यही सें आपकी कार्य कुशलता कां भि पताचल जायेगा!
अजय:" आप् निश्चित रहे युवराज! मे किसीतरह कि कोईकमी नहींआने दूंगा!
थोड़ी देरबाद राजमाता मंदिर केँ लिए रवाना होँ गई औऱ अजय केँ पासअब सुनहरा मौका थां सुल्तानपुर जाने कां ताकि वोँ पवन कों वापिस लासके!
विक्रम पहलीबार अनजाने मे गय़ा थां मगरइस बार वोँ जान बूझकर जारहा थां तोँ उसने एक् भिखारी कां भेष बनाया औऱ एक् दूसरे घोड़े पऱ सवार होकरचल पड़ा! अपने घोड़े कों उसने सुल्तानपुर कि सीमा केँ बाहर् हि छोड़ दिया औऱ पैदल हि राज्य कि सीमा मे घुस गय़ा औऱ उस पर्र किसी कां ध्यान भि नहीं गय़ा औऱ वोँ लोगो सें भीख मांगने लगा औऱ उसका पूरा ध्यान इसबात पऱ थां कि कोईउस पऱ शक तोँ नहींकर रहा हैं! राज्य केँ रास्तों सें होताहुआ वोँ राज परिवार कि जय जयकार करताहुआ आगेबढ़ रहा थां औऱ देखरहा थां कि राज्य सच मे बेहद सुंदर थां औऱ आम लोगो केँ आलीशान महल जैसेघऱ राज्य कि संपन्नता कि स्टोरी कहरहे थें! थोड़ी देर मे हि उसे अच्छी खासीभीख भि मिल गई थि औऱ वोँ मुस्कुरा उठा औऱ दोपहर होने कों आईमगर अभि तक उसेकोई मौका नहि मिला थां कि वोँ पवन कों देखरहे याँ पताकर सके कि वोँ कहां पऱ रखाहुआ थां!
एक् दुकान पऱ उसने थोडा सां खानां खानेलगा औऱ खानां देने वाले सें बोला:"
" अरे भइया साहब आपका खानां तोँ बेहद स्वादिष्ट औऱ खुशबू सें गंधरहा हैं!
व्यक्ति खुश होँ गय़ा औऱ बोला:"
" अरे भिखारी यह सुल्तानपुर हें औऱ यहां कां हर व्यक्ति अमीर हें औऱ अपने आप् मे सुलतान हें तोँ खानां तौ अच्छा बनेगा हि! यहां पहलीबार आए होँ लगता हें!
विक्रम:" हानजी सुलतान साहब! मेरे तौ क़िस्मत खुल गई जोँ यहांभीख मांगने चलाआया! इतना तोँ उदयगढ़ मे मुझे महीने मे नहीं मिला थां जितना यहांआधे दिन मे हि मिल गय़ा!
व्यक्ति अपनेलिए सुलतान साहब सुनकर खुशहुआ औरजोर सें हंसा औऱ बोला:"
" अरे वोँ तौ भिखारियों कां राज्य हें! भला उसकी औऱ हमारी क्याँ बराबरी!
विक्रम मन हि मन हंसा औऱ उसकीहान मे हान मिलाते हुए बोला:" बिलकुल सहीकहा आपने! अच्छा यहराज महल किधर हें ?
व्यक्ति:" अच्छा समझ गय़ा तूँ जरूर शाही परिवार सें भीख पाना चाहता हें!
विक्रम:" मे तोँ बस यहां कि महारानी रजिया केँ दर्शन करना चाहता हूं! उनकी दरियादिली केँ बेहद किस्से सुने हें मैंने!
व्यक्ति:" क्यूं घुमा फिराकर बात करते हौ? मतलब वोँ वही हें नाँ! सुनओए भिखारी केँ बच्चे तूँ मुझे 50 मोहरे देगा तोँ तुम्हें सभीबता दूंगा कि केसेमिल सकता हें औऱ वैसे भि तुझेही भीख मे इससे अधिक हि मिल गय़ा होगा!
विक्रम नें जल्दी जेब सें 50 मोहरे निकाली औऱ उस व्यक्ति कों दि औऱ वोँ बोला:"
" देखतीन बजे केँ आसपास राजमहल केँ अंदर जाने कि कोशिश करना क्योंकि उस टाइम सेनापति जब्बार नहीं होता!अगर वोँ तुम्हारी तरफ मिला तोँ समझ लेना कि तुँ जिंदा नहीं बचेगा!
विक्रम:" ऐसा क्यूं भइया? क्याँ वोँ महारानी सें भि बड़ा हें ?
व्यक्ति:" अरे धीरे-धीरे बोल पागल व्यक्ति! सारा राज्य हि उसके कब्जे मे हें औऱ मुझे तौ यह भि सुनने मे आया हें कि वोँ शहजादी सलमा सें विवाह करके राजा बनना चाहता हैं!
विक्रम कि आंखे हैरानी सें फैली औऱ बोला:"उसे कोईकुछ बोलता नहीं हैं क्याँ ? मैने सुना हें कि शहजादा सलीम राज्य कि देखरेख करते हें!
व्यक्ति:" अबे वोँ केवलनाम कां शहजादा हैं, उसे तोँ औरतों केँ अलगकुछ नजर नहि आता, मदिरा पीकर इतना कमजोर होँ गय़ा हैं कि तलवार तक नहि उठा सकता हैं अब वोँ!
विक्रम:" अरे भइयायह क्याँ कहरहे होँ? क्याँ सच मे ऐसा हि हें?
व्यक्ति:" औऱ नहीं तोँ क्याँ, जब राजामरे तौ बेचारे छोटे सें सलीम कों जब्बार कि देख रेख़ मे दिया गय़ा औऱ उसने सलीम कों जान बूझकर ऐसाबना दिया!
विक्रम:" अच्छा यह राजामीर जाफर कि मौत केसे हुई थि?
व्यक्ति:" बेड़ा गर्क होँ इन उदयगढ़ वालो कां जिन्होंने सुलतान कों धोखे सें मारा, उनके जैसानेक इंसान कोई नहीं थां!
विक्रम कों उस पऱ क्रोध तोँ बहोत आयामगर यह सुनकर कि मीर जाफर कों उदयगढ़ वालो नें मारा हैं तोँ उसे बेहद हैरानी हुइ औऱ बोला:"
" मगर मैंने तोँ सुना हें कि सुलतान कों पिंडारियो नें मारा थां!
व्यक्ति:" अरेयह सभी तोँ उदयगढ़ वालो कि बेकार कि किस्सा हें! सचबात तोँ यह हैं कि पिंडारी औऱ उदयगढ़ एक् दूसरे केँ संग हें! बेचारे मीर जाफर पर्र पहले पिंडारियो केँ संग मिलकर हमला किया औऱ बाद मे उसेमार दिया!
तुम् जाओअब औऱ भीख मे कुछ अच्छा मिले तोँ मुझे भि हिस्सा देना! पकड़े गए तोँ खुदा केँ लिए मेरानाम मत लेना!
विक्रम नें उसे वादा किया कि वोँ उसकानाम नहीं लेगा औऱ राजमहल कि तरफचल पड़ा!
विक्रम कों कुछसमझ नहीं आँ रहा थां कि यह व्यक्ति ऐसा क्यूं बोलरहा हैं कि उदयगढ़ वालो नें राजा कों मारा जबकि वैद्य जी नें तौ उसेकुछ औऱ हि बताया थां औऱ वैद्य जीझूठ नहींबोल रहे थें इतना तौ वोँ जानता थां औऱ यह भि उसने महसूस किया थां कि यह दुकान वाला भि झूठ नहींबोल रहा थां! आखिरसच क्याँ हें यहउसे अबपता लगाना हि थां!
धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए विक्रम कों मार्ग केँ दोनोओर बेहद आलीशान घऱनजर आँ रहे थें जोँ इसबात कां सुबूत थें कि आगे जल्द हि महल उसके सामने होगा! विक्रम कों मुख्य दरवाजे सें वैसे भि महल मे जानां हि नहीं थां औऱ नं राजमाता सें मिलना थां! उसे तोँ मात्र यहपता लगाना थां कि पवन कहां पर्र हें औऱ उसे केसे निकाल सकता थां!
जल्द हि उसकी नजरो केँ सामने एक् बेहद सुंदर औऱ आलीशान महल थां जिसकी हुस्न देखते हि बनरही थि! संगमरमर सें बनाहुआ बेहद हसीन जितनी तारीफ कि जाए उतनीकम! महल केँ ऊंचेगोल गोल गुम्बद उसकी भव्यता कि स्टोरी अपने आप् बयानकर रहे हें औऱ महल केँ दरवाजे केँ दोनोतरफ बनेहुए सुनहरे हाथीमहल कि सुंदरता मे चार चांदलगा रहे थें! विक्रम मन हि मन उसकी हुस्न कि तारीफ करतारहा औऱ तभी एक् सैनिक उससे बोला:"
" ओय भिखारी भाग यहां सें क्यूं बिनामौत मरना चाहता हें?
विक्रम बिनाकुछ कहे दूसरी तरफ मुड़ गय़ा औऱ उसने देखा कि महल कि छत पऱ चारोतरफ सैनिक तैनात थें औऱ वोँ जानता थां कि यहसभी सुरक्षा जरूर जब्बार कि लगाई हुइ होगी औऱ इसमें उसके बहुत सारे व्यक्ति होंगे! अब विक्रम केँ सामने चुनौती थि कि महल केँ अंदर केसे घुसे!महल केँ पिछले हिस्से मे दलदल थि जिस कारणउधर सुरक्षा कम थि क्योंकि वहां सें किसी कां आनां असम्भव हि थां! विक्रम नें चारोतरफ देखा औऱ अपनीजेब सें एक् मजबूत रस्सी निकाली औऱ उसका एक् सिरा उसने लोहे केँ शिकंजे मे बांधा औऱ उसने एक् पेड़ कि तरफ पूरी ताकत सें उछाल दिया औऱ उसकी क़िस्मत अच्छी थि कि वोँ पहली हि बार मे पेड़ पऱ फंस गय़ा औऱ विक्रम अब दलदल सें होतेहुए अपनीजान हथेली पऱ रखकर रस्सी केँ सहारे आगेबढ़ गय़ा औऱ उसने जैसे तैसे करके दलदल कों पारकर लिया औऱ उसने देखा एक् बड़ा सां पेड़ थां जोँ महल कि दीवार सें सटाहुआ थां तौ विक्रम धीरे-धीरे सें उस पेड़ पऱ चढ़ा औऱ जैसे हि देखा कि पहरा देने वाला थोडा दूर गय़ा हैं तोँ जल्द सें कूदकर महल कि छत पर्र आँ गय़ा औऱ एक् बड़ी सि दीवार केँ पीछेछिप गय़ा! जैसे हि वोँ पहरा देने वाला सैनिक उधर सें आया तौ विक्रम नें मौका देखकर उस पर्र हमलाकर दिया औऱ जल्द हि उसे बेहोश करके नीचे फेंक दिया औऱ उसकी स्थान स्वयं पहरेदारी करनेलगा औऱ लगभगदो चार चक्कर लगाने केँ बादउसे एहसास होँ गय़ा कि लगभग पूरीछत पऱ अभि 50 केँ आसपास सुरक्षा सैनिक थें!
विक्रम नें दूसरी छत पर्र पहरादे रहे सैनिक कों बाथरूम जाने कां इशारा किया औऱ महल मे अंदरघुस गय़ा औऱ सावधानी सें इधरउधर देखते हि रजिया केँ महल केँ सामने थां औऱ चोरी छिपे वोँ खिड़की पऱ पहुंच गय़ा तोँ देखा कि अंदरदो औरते औऱ एक् व्यक्ति मौजूद थां! विक्रम कों एक् स्त्री जौ लगभग 47 साल कि थि वोँ औऱ लड़का जोँ लगभग 22 साल कां थां दोनोनजर आँ रहे थें जबकि एक् दूसरी महिला कां केवल पीछे कां हिस्सा नजर आँ रहा थां! विक्रम नें अनुमान लगाया कि यह जरूर रजिया औऱ उसकाराज परिवार हें! रजिया बेहद हसीन थि औऱ सोने केँ आभूषणों सें लदे होने केँ कारणइस उम्र मे भि बेहद आकर्षक औऱ कामुक नजर आँ रही थि जबकि सलीम देखने मे खूबसूरत जरूर थां मगर बेहद कमजोर नजर आँ रहा थां मानो हफ्ते मे मात्र एक् हि बार खानां नसीब हौ रहा थां उसे!
रजिया:" बेटा सलीम अपनी सेहत कां ध्यान रखाकरो! आखिर क्यूं दिन पऱ दिन कमजोर होतेजा रहे हौ मुझे फिक्र होती हें आपकी!
सलीम:" अम्मी सुलतान यह आपका प्रेम हें जिसके कारण हम् आपको कमजोर नजरआते हें नहीं तोँ हम् तोँ पहले जैसे हि ताकतवर हें!
सलमा:" भइयाजान आपको एहसास नहीं हें कि आप् सच मे बेहद कमजोर होतेजा रहे होँ! आखिरकब तक आप् अपनी जिम्मेदारियों सें भागते रहोगे?
सलीम:" हमसे थोडा तहजीब सें बात कियाकरो सलमा क्योंकि हम् होने वाले सुलतान हें! हम् किसी सें कमजोर नहि हैं समझी आप्!
सलमा नें गुस्से सें हवा मे अपनाहाथ लहराया औऱ बोलि:"
" सुलतान होँ तौ सुलतान कि तरह ताकतवर औऱ जिम्मेदार बनो!अगर अपनी ताकत पऱ इतना हि भरोसा हें तौ होँ जाएदो दोहाथ मेरेसंग!
सलमा कां हाथहवा मे लहरारहा थां औऱ यकीनन विक्रम नें पहलीबार जीवन मे इतना सुंदर औऱ हसीन सफ़ेद चिट्टा हाथ देखा थां तौ मन हि मन सलमा कि हुस्न कां कायल हौ गय़ा औऱ उसकी हिम्मत तोँ वोँ उसदिन देख हि चुका थां कि किसतरह सें उसके उसके बिगड़ैल औऱ जिद्दी घोड़े पवन कों काबू मे कर लिया थां औऱ आज तौ उसने एक् औऱ बड़ा नमूना अपनी ताकत कां पेश किया थां विक्रम मन हि मन उसकी हुस्न केँ संगसंग उसकी बहादुरी कां भि कायल होँ गय़ा!
सलीम नें अपनाहाथ आगे नहीं बढ़ाया औऱ बोला:"
" वोँ क्याँ हें कि आजकल मेरी तबियत थोड़ी ठीक नहीं हें, एक् हफ्ते रुकजा फिन तेरी सारी गलतफहमी दूरकर दूंगा!
सलमाहंस पड़ी औऱ बोलीं:"
" भइयाकब तक बहाने बनाते रहोगे? मेरीबात मानो औऱ अपनी अय्याशी बंद करके अपने खाने पीने कां ध्यान रखो औऱ जनता कां ध्यान रखो!
सलीम:" जनता कां ध्यान तोँ जब्बार अच्छे सें रख हि रहा हें! वोँ हमे सारी जानकारी दे हि रहा हें औऱ वैसे भि राज्य मे सभीठीक हि चलरहा हैं! अच्छा सुना हें तुमने दोदिन पहलेकोई घोड़ा पकड़ा हें!
सलमा:" अच्छा वोँ काला घोड़ा गलती सें हमारे राज्य मे घुस गय़ा थां तोँ हमनेउसे काबूकर लिया औऱ अब वोँ मेरेपास हि हें! सच मे वोँ बेहद कमाल कां घोड़ा हें ऐसी रफ्तार हमनेआज तक नहीं देखी!
सलीम:" अच्छा फिन तोँ उसकीहमे भि सवारी करनी चाहिए!
सलमा:"उसे काबू करना बच्चो कां काम नहीं हें! जिसदिन मुझेहरा दोगेउस दिन आपको वोँ घोड़ा सवारी केँ लिएमिल जाएगा!!
इतना कहकर सलमा पलटी औऱ पहलीबार विक्रम नें उसके सुंदर चेहरे कां दीदार किया औऱ उसकी आंखे मानोफट सि गई क्योंकि उसे यकीन नहि हौ रहा थां कि कोई इतना भि खबूसरत केसे हौ सकता हैं!!
कालेरंग केँ हिजाब मे लिपटी हुई शहजादी बेहद हसीनलग रही थि! चांद सां सुंदर चेहरा, उसकी बड़ी बड़ीगोल आंखे बिलकुल झील कि तरह गहरी औऱ नशीली औऱ चिकने लाल हल्की लालिमा लिएहुए मानोदूध मे हल्का सां सिंदूर मिलाने पऱ जोँ रंगआए बिलकुल वही रंगतलिए हुए, पतले पतले रसीले नरम जूसी होंठ जोँ लालरंग कि लिपिस्टिक मे बेहद जूसीलग रहे थें औऱ हल्के कसेहुए कपड़ो मे सलमा कां भरा पूरा शरीरखिल कर निखररहा थां जौ इसबात कि गवाही देरहा थां कि वोँ केवलनाम कि हि नहीं बल्कि अपनेबदन सें भि शहजादी हें!
सलमा:" अच्छा मे चलतीहु अबउस घोड़े कि सवारी करने केँ लिए! आप् खायो औऱ ताकत बनाओ।
इतना कहकर सलमा बाहर् कि तरफ जानेलगी तोँ विक्रम थोडा सां साइड मे हौ गय़ा औऱ बाहर् कि तरफ निकल गय़ा औऱ जैसे हि सलमा बाहर् आई तौ उसके मुंह पऱ नकाबलगा हुआ थां औऱ वोँ अब अस्तबल कि तरफबढ़ गई औऱ विक्रम भि उसके पीछे पीछे पीछे सावधानी सें चलरहा थां औऱ अस्तबल मे पहुंची तोँ वहां मौजूद सैनिकों नें उसे झुककर सलाम किया औऱ उसकेबाद थोड़ी देरबाद हि वोँ घोड़े कां लगाम पकड़कर बाहर् निकल गई औऱ जैसे हि बाहर् निकलकर मुख्य रास्ते पर्र आई तोँ विक्रम उसके पीछे पीछे बाहर् आँ गय़ा औऱ जैसे हि वोँ राजमहल सें बाहर् निकलने वाले रास्ते पऱ थि तोँ वोँ अदा केँ संग घोड़े कि पीठ पऱ सवार होँ गई औऱ उसे अपने सामने विक्रम खड़ा दिखाई दिया औऱ बोलि:"
" तुम्हारी इतनी हिम्मत केसे हुइ कि तुम् राजमहल मे घुसआए ?
विक्रम:" शहजादी आपने हि तौ मुझे इजाजत दि थि कि मे अपने घोड़े सें मिलने केँ लिए आँ सकता हूं कभीकभी!
सलमा नें उसे ताड़कर देखा औऱ बोलीं:" मगर राजमहल केँ अंदरआने कि इजाजत नहीं दि थि मैने! तुम्हे किसी नें रोका नहीं क्याँ ?
विक्रम:" आंधियों कों रोक पाना किसी केँ बस कि बात नहीं होती हें वोँ तोँ आँ आकर हि रहती हें!
सलमा:" बड़ा गुरुर हैं आपको अपनी ताकत पर्र ?
विक्रम नें अपनी मूछों पर्र ताव दिया औऱ बोला:"
" ताकत हि एक् मर्द कि पहचान होती हें शहजादी औऱ मेरी रगों मे उबलता हुआखून मेरी ताकत हि पहचान हें!
सलमा:" वक़्त आने पर्र हर किसी कां गुरुर मिट्टी मे मिल जाता हें!
विक्रम:" जब आप् चाहो जैसे चाहो मुझे आजमा लेना!
सलमा:" मे चाहु तोँ अभि मेरे इशारे पर्र आपको जीवनभर केँ लिए बंदीबना लिया जायेगा!
विक्रम:" आज तक किसी मम्मी नें वोँ लाल पैदा नहीं किया जोँ मेरी मर्जी केँ बिना मुझेछू भि सके!
सलमा केँ होंठो पर्र मुस्कान आँ गई औऱ बोलि:"
" बाते तोँ बड़ी बड़ी करते हौ लगता हें अभि किसी सें पाला नहीं पड़ा हैं आपका!मत भूलो कि आप् अभि सुल्तानपुर केँ राजमहल मे खड़े हौ औऱ मे क्याँ कर सकतीहू आप् सोच भि नहि सकते!
विक्रम बात कों बढ़ाना नहीं चाहता थां तौ बोला:"
" मैने तोँ सुना थां कि सुल्तानपुर मे लोगो कि जुबान कि कीमत होती हें औऱ आप् मुझे इजाजत देकरअब धमकीदे रही होँ?
सलमा:" धमकी इसलिये क्योंकि हमने आपको राजमहल मे घुसने कि इजाजत नहि थि मात्र राज्य मे आकर अपने घोड़े सें मिलने कि इजाजत दि थि!
विक्रम:" मे मानता हु कि मुझे राजमहल केँ अंदर नहीं घुसना चाहिए थां मगर मुझे केसेपता चलता कि पवन कहां पर्र हें औऱ मे उससे केसेमिल सकता थां! महल मे आकर मैंने जौ गुस्ताखी करी हैं उसकेलिए आपसे माफ़ चाहता हूं!
विक्रम कि बात सुनकर सलमा थोडा नरम पड़ी औऱ बोलीं:"
" ठीक हें मगर आपको पहलेयह बताना पड़ेगा कि आप् राजमहल तक केसे पहुंचे? अगर आप् पहुंच सकते होँ कोई दुश्मन भि पहुंच सकता हें औऱ क्याँ पताकल आप् हि दुश्मन बनजाए !
विक्रम:"अगर प्रश्न आपकी सुरक्षा कां हें तोँ मे जरूर बताऊंगा! मगर मेरा एक् वादा हें कि जीवन मे आपका दुश्मन बनने सें अच्छा अपनीजान देना पसन्द करूंगा!
सलमा उसकीबात सुनकर घोड़े सें नीचेउतर गई औऱ बोलि:"
" हम् पर्र इस मेहरबानी कि कोईखास वजह?
विक्रम पवन केँ पास पहुंच गय़ा औऱ उसकीपीठ पऱ हाथ फेरा तौ घोड़े नें पूंछ हिलाकर अपना प्रेम दिखाया औऱ विक्रम सलमा कि तरफपलट कर बोला:"
" वजह तोँ एक् यह भि हैं कि पवनअब आपका मित्र बन गय़ा हैं औऱ फिन मेरा साथी तोँ वोँ हैं हि पहले सें! साथी केँ यार कां दुश्मन केसेबन सकताहु भला! वैसेपवन कि सवारी आपको कैसीलगी?
सलमा:"पवन जैसा ताकतवर औऱ मजबूत घोड़ा मैनेआज तक नहीं देखा! दौड़ता हैं तोँ लगता हें मानोहवा सें बातेकर रहा हैं!
विक्रम:" ताकतवर तोँ होगा हि आखिर घोड़ा किसका हैं!
सलमा उसकीबात सुनकर अब हल्की सि हंस पड़ी औऱ बोलि:"
" चलोफिन किसीदिन आपकी ताकत भि देखली जाएगी! अब पहलेयह बताओ कि राजमहल तक केसे पहुंचे?
विक्रम नें उसेसभी कुछबता दिया औऱ सलमा कों मन हि मन हैरानी हुई कि इस व्यक्ति नें 250 मीटरदूर तक लोहे केँ हुक वाली रस्सी कों केसे फेंक दिया यकीनन यह बेहद ताकतवर औऱ बहादुर हैं! सलमा उससे बोलि:"
" यह आपनेहमे अच्छी बात बताई! हम् जरूरी उस दिशा मे अब सुरक्षा कां इंतजाम करेंगे! हम् आपके आभारी रहेंगे!
विक्रम:" आप् चाहे तोँ यह आभार उतार भि सकती हें!
सलमा;" वोँ केसेभला?
विक्रम:" कभी दिनों सें मैनेपवन कि सवारी नहींकरी हैं! अगर आप् मुझेआज पवन कि सवारी करनेदे तौ!
सलमा:"ठीक हें मगर उसकेलिए आप् हमे राज्य केँ बाहर् मिलिए नदी केँ किनारे वाले मैदान पर्र! मगर आप् राज्य सें बाहर् निकलेंगे केसे?
विक्रम:" वोँ आप् मुझ पऱ छोड़ दीजिए! मे आपकोआधे घंटेबाद वही मिलता हु!
इतना कहकर विक्रम सैनिक वेश भूषा मे हि महल सें बाहर् निकल गय़ा औऱ बाहर् निकलते हि उसनेफिन सें भिखारी कां भेष बनाया औऱ उस दुकान वाले केँ पास पहुँचा औऱ बताया कि आज उसकी महारानी सें मुलाकात नहीं हुइ औऱ बाद मे कभी आएगा, संग हि संग विक्रम नें उस व्यक्ति कों जिसका नाम रहीम थां 50 सोने कि मोहरे दि औऱ फिन सुल्तानपुर सें बाहर् निकल गय़ा औऱ फिन सें भेष बदलकर नदी कि तरफचल पड़ा!
वही दूसरी तरफ उसके जाने केँ बाद शहजादी सलमा नें अपनीदो खास सहेलियों सीमा औऱ सपना कों संग मे लिया औऱ नदी कि तरफचल पड़ी!
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