शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
मेनका कि एक् झलक
अजय कां महल केँ पास हि एक् बेहद बड़ा हसीन कां घऱ याँ कहिए एक् शानदार छोटेमहल जैसा हि घऱबना हुआ थां जिसकी सुंदरता दूर सें हि देखते बनरही थि! अजय नें अपने घोड़े कों बाहर् अस्तबल मे खड़ा किया औऱ उसकेबाद अंदर प्रवेश किया औऱ उसकी मम्मी मेनका नें उसे देखकर हमेशा कि तरह एक् बेहद मुस्कान दि औऱ बोलीं:"
" आओ पुत्र, हम् आपका हि प्रतीक्षा कां रहे थें!
अजयआगे बढ़ा औऱ मेनका केँ पांवछू लिए औऱ बोला:"
" देरी केँ लिए माफ़ कीजिए माताश्री, कहिए मे आपकेकिस काम आँ सकता हूं?
मेनका नें उसकेसिर पर्र हाथ रखकर आशीर्वाद दिया औऱ बोलीं:" जुगजुग जियो मेरेलाल, अभि आए तोँ थकगए होंगे, पहलेकुछ खालो तौ उसकेबाद बात करते हें!
अजय नें अपनी माँ कि आज्ञा कां पालन किया औऱ नहाकर धोकर केसर बादाम वालादूध पिया औऱ उसकेबाद अपनी मे कक्ष मे आँ गय़ा औऱ बोला:"
" आप् मुझसे कुछ जरूरी बात करने वाली थि माताश्री!
मेनका अकसर साड़ी हि पहनती थि औऱ आज भि साड़ी हि उसने पहनी हुइ थि जिसमे वोँ सच मे बेहद हसीनलग रही थि! मेनका नें एक् लंबी सांसली औऱ बोलीं:" बेटा आज राजमाता नें मुझे मेसेज दिया थां कि जल्द हि वोँ आपको सारे राज्य कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी सौंप देगी तोँ मुझे बेहद खुशी हुई! दरअसल यह एक् प्रथा हैं कि सदियों सें उदयगढ़ कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी हमारे हि पूर्वज निभाते रहे हें औऱ हमारे पूर्वजों नें अपने शरीर कि अंतिम बूंद बलिदान करके भि उदयगढ़ कि रक्षा करी हैं दुश्मन कमजोर हौ याँ भले हि आज कि सबसे ताकतवर प्रजाति पिंडारी रहे होँ सबके सामने सबसे पहले हमारी तलवार खड़ी हुइ हैं!
आपका सौभाग्य हैं कि जल्द हि यह अवसर आपको मिलेगा कि आप् पीढ़ियों सें चली आँ रहीइस प्रथा कों औऱ अधिक गौरवान्वित करसके!
अजय कों अपने इतिहास केँ बारे मे जाकर बेहद खुशी हुईँ औऱ बोला:" माता मे सदैव आपका आभारी रहूंगा कि आपने मुझेइस काबिल समझा!
मेनका नें प्रेम सें उसकेसिर पऱ हाथ फेरा औऱ बोलीं:"
" जीतेरहो मेरेशेर बेटे, आज मे आपको हमारे पूर्वजों कि एक् ऐसी अनमोल धरोहर दूंगी जिसे पाकर आप् स्वयं कों दुनिया मे सबसे ताकतवर महसूस करोगे!
अजय उसकी बाते सुनकर थोडा अधीर होँ उठा औऱ जल्द सें बोला:"
" जौ भि हैं जल्द सें दीजिए, ऐसी अनमोल धरोहर केँ बारे मे विलम्ब करके हमारे धैर्य कि परीक्षा न् लीजिए माता!
मेनका नें उसकाहाथ पकड़ा औऱ अपनेसंग अंदर लें गई औऱ कमरे मे जाकर एक् तस्वीर कों हटाया तोँ एक् खिड़की जितना मार्ग नजरआया औऱ अजय कि हैरानी कि कोई सीमा नहि थि! खिड़की सें दोनो अंदरघुस गए औऱ नीचे एक् गुफा थि जिसमें वोँ आज पहलीबार घुसरहा थां ! अंदर जाकर मेनका नें एक् दियाजला दिया तौ गुफा मे हल्की सि रोशनी हौ गई औऱ उसकेबाद मेनका नें कक्ष मे रखेहुए एक् अंगीछे सें चाबी निकाली औऱ फिन एक् बड़ी सि पेटी जौ बेड केँ नीचेरखी हुइ थि उसेखोल दिया औऱ उसमें एक् बेहद मजबूत, हसीन औऱ घातक तलवार नजरआई औऱ मेनका नें अजय कों वोँ तलवार उठाने कां इशारा किया औऱ अजय नें आगे बढ़कर फूल कि तरहउस भारी भरकम तलवार कों उठा लिया औऱ मेनका बोलीं:"
" बेटा यहकोई मामूली तलवार नहीं हें बल्कि हमारे पूर्वजों कों एक् लंबी साधना केँ बाद प्राप्त हुई तलवार हें! इस तलवार कि सबसे बड़ी विशेषता हैं कि जिसके हाथ मे भि यह तलवार होती हें उसे दुनिया कि कोई ताकत नहींहरा सकती!आज केँ बादयह तलवार आपकी हुइ औऱ इसे भूलकर भि स्वयं सें अलगमत करना!
अजय नें एक् बारफिन सें अपनी मम्मी केँ पांवछुए औऱ बोला:"
" आप् चिंता न् करे माता! मे आपकीबात कां पालन करूंगा!
मेनका:" एक् बात औऱ मे तुम्हे बताना भूल गई कि इस तलवार कां उपयोग मात्र उदयगढ़ कि भलाई केँ लिए हि मान्य होगा, अगर आपने भूले सें भि उदयगढ़ केँ खिलाफ याँ राज परिवार केँ खिलाफ इसका प्रयोग किया तोँ इसकी सारी शक्तियां काम नहीं करेगी!
अजय:" आप् निश्चित रहे माता, मे आपकीबात कां हमेशा पालन करूंगा!
मेनका:" एक् बात औऱ इस तलवार कों मात्र हमारे हि परिवार केँ लोगउठा पाते हें औऱ उसके अलावा दुनिया मे इसेकोई भि हाथ मे नहीं लें सकता!याद रहेयह तलवार केवल बुराई कां नाश करने केँ लिएबनी हें!
अजय:" आप् निश्चित रहे माता, मे भूले सें भि इसकागलत इस्तेमाल नहि करूंगा!
मेनका:" ठीक हें अब एक् कामकरो कि इसे वापिस रखदो!कल पूर्णिमा हें तौ कल मे रात कों जब पूरी चांदनी होगी तौ एक् रीति रिवाज केँ संगयह तलवार आपके हवाले कर दूंगी!
अजय नें अपनी माँ कि बात कां पालन किया औऱ तलवार कों वापिस रख दिया औऱ मेनका नें लैंप कों बंद किया औऱ उसकेबाद अजय केँ संगउस गुफा सें बाहर् निकलकर अपनेघऱ मे आँ गई औऱ उसकेबाद दोनोमा बेटे नें भोजन किया औऱ फिन सोने केँ लिएचले गए!
सलमा कि आंखो सें नींद कोसों दूर थि औऱ बेड पर्र पड़ी हुईँ करवटबदल रही थि! उसे विक्रम कि बहोत याद आँ रही थि औऱ उसकामन कररहा थां कि उड़कर विक्रम केँ पासचली जाएमगर यह संभव नहि थां! सलमा कों अब अपनेऊपर क्रोध आँ रहा थां कि विक्रम तौ कल हि आने केँ लिएकह रहा थां मगर मेरी हि क़िस्मत खराब थि जोँ उसे एक् हफ्ते बादआने केँ लिएकह दिया, काश मैंने उसेकल हि आने केँ लिएकह दिया होता तोँ कितना अच्छा होता!अब यह एक् हफ्ता मेरीजान लेकर हि रहेगा, पता नहि केसेयह हफ्ता गुजरेगा! सलमाबार बार अपनेहाथ कों चूमरही थि जहां विक्रम नें चूमा थां औऱ बेहद बेचैन होँ रही थि! सच मे कोई तौ बात थि विक्रम मे जोँ उसे उसकीतरफ किसी चुंबक कि ताकत सें खींचरही थि! सलमा बेचैनी सें करवट बदलती रही औऱ रात कां दूसरा पहर शुरुआत हौ गय़ा औऱ जैसे तैसे करके बेचैनी केँ आलम मे वोँ सो गई!
विक्रम कि हालत भि सलमा सें अलग नहीं थि औऱ वोँ तौ यकीन नहींकर पारहा थां कि सलमा जैसी हसीन शहजादी उसे पसन्द कर बैठी हें! सच मे विक्रम नें कभी ख्वाब मे भि नहीं सोचाकोई इतनी सुंदर भि हौ सकती हें जितनी सलमा हें!
विक्रम कि आंखो केँ आगे अभि भि सलमा कां वही चांद सां सुंदर चमकता नूर सें रोशन जगमगाता मुखड़ा हटाए नहींहट रहा थां औऱ विक्रम नें बड़ी मुश्किल सें अपनी आंखेबंद करी थि तोँ उसेउस समय कां एहसास हुआजब उसने सलमा केँ हाथ कों चूम लिया थां! उफ़्फ़ कितने नाजुक नर्म रसीले थें उसकेहाथ बिलकुल रेशम कि तरह!पता नहीं इतने कोमल नर्म हाथो सें सलमा नें तलवार केसे उठाई थि वोँ यकीन नहींकर पारहा थां! विक्रम कों अच्छे सें याद थां कि जब उसने सलमा केँ हाथ कों चूमा थां तोँ उसे बेहद उत्तेजना महसूस हुईँ थि क्योंकि सलमा कां हाथ बेहदगरम थां मानो गर्मी सें तपरहा हौ किसी जलते रेगिस्तान कि तरह बिलकुल गरम! विक्रम नें आज तक किसी कों भि ऐसे नहींछुआ थां मगर रक्षा बंधन पऱ उसे जरूरकुछ लड़कियों नें राखी बांधी थि तोँ उनकेहाथ मे कभी भि उसे गर्मी महसूस नहीं हुईँ औऱ फिन वोँ तोँ अभि विदेश सें पढ़कर आया थां जहां पर्र हाथ मिलाना एक् सभ्यता हें मगर किसी भि लड़की केँ हाथ मे उसे इतनी गर्मी महसूस नहीं हुई थि!
अगर सलमा कां हाथ इतनागरम थां तौ उसका शरीर कितना तपताहुआ, ओह मुझेऐसा नहीं सोचना चाहिए क्योंकि ऐसा सोचना भि पाप होगा क्योंकि मे तोँ सलमा सें दिल सें प्रेम करताहु! अबजब भि मिलेगी तोँ कसकरगले लगा लूंगा उसेतब कहीं जाकर मेरे बेचैन दिल कों करार मिलेगा! हायराम री मेरी भाग्य, उसने तोँ मुझे एक् हफ्ते बाद मिलने केँ लिए बुलाया हें मगर क्याँ मैंने एक् हफ्ते तक स्वयं कों रोक पाऊंगा!
मुझे तोँ लगता हें कि मे उसके बिना एक् हफ्ते नहींजी पाऊंगा! अगर सलमा भि मेरेलिए ऐसे हि बेचैनी रही होगी तोँ निश्चित रूप सें वोँ मुझसे एक् हफ्ते सें पहले हि मिलने केँ लिए बेकरार होगी!यह सभी सोचते सोचते उसे नींद आँ गई औऱ वोँ अपनेगले सें तकिए कों लगाकर सो गय़ा!
सुल्तानपुर मे जब्बार केँ घऱ पऱ शहजादा सलीम नंगा लेटाहुआ थां औऱ जब्बार कि पत्नि शमा उसका पांचइंच लम्बा लन्ड मुंह मे लेकरचूस रही थि औऱ सलीममजे सें सिसकियां लेँ रहा थां ! शमा एक् बेहद तंदुरुस्त औऱ हट्टी कट्टी स्त्री थि औऱ सलीमजोर जोर सें उसके मुंह मे लन्ड घुसारहा थां औऱ देखते हि देखते सलीम केँ मुंह सें तेजतेज सिसकियां निकली औऱ उसनेशमा केँ मुंह कों अपने वीर्य सें भर दिया औऱ बोला:"
" मेरीजान सैकड़ों केँ संग सेक्स कर चुका हूं मगर लन्ड केवल तुम् हि चूसती हौ मेरा! कमालकर देती हौ तुम् शमा!
शमा नें अपने मुंह कि साफ किया औऱ बोलि:" यह तौ मेरी खुशकिस्मती हैं कि होने वाले सुलतान कां लन्ड मेरे बुर औऱ मुंह दोनो मे घुसता हैं!
सलीम:"बस मेरीजान एक् बार मे राजाबन गय़ा तौ तुम्हे मालामाल कर दूंगा!
शमा:" दौलत मुझे नहीं चाहिए, बस आप् बादशाह बन जायेंगे मेरेलिए यही खुशी कि बात होगी!
सलीम नें उसकी नंगी गांड़ पर्र हाथफेर दिया औऱ बोला:"
" आज तोँ मुझे अपनीयह मखमली गांड़ देदोशमा आखिरकब तक मुझेऐसे तड़पाती रहोगी?
शमा नें शर्माने कां नाटक किया औऱ बोलि:" ऐसा भि कहीं नहि होता हें, आपको कितनी बार समझाऊं कि पीछे वाली स्थान यहसभी करने केँ लिए नहीं होती हें!
सलीम:" होती हें मेरी दिलरुबा होती हें, मुझे एक् बेहद कीमती पुस्तक हाथलगी थि जिसमे मैने देखा थां कि आजकलयह सभी भि होता हें बस तुम् मानजाओ नां!
शमा:" आप् जिदकर रहे होँ तोँ ठीक हें मगरआज नहीं, जिस दिन आप् बादशाह बनोगे उसदिन आपको मे अपनीतरफ सें आपकोयह तोहफा दूंगी!
सलीम:" इतने तक मे केसे बर्दाश्त कर पाऊंगा! आप् मेरी थोड़ी भि फिक्र नहीं करती होँ!
शमा:"माफ कीजिए शहजादे मगर इतना सब्र तौ आपको करना हि पड़ेगा!
सलीम नें शमा कि गांड़ पर्र एक् चिकोटी काटली औऱ शमा दर्द सें कराहउठी औऱ शमा नें अपनेसूट कों उठाया औऱ पहनने लगी क्योंकि वोँ जानती थि कि अबचाह कर भि सलीम कां लन्ड पूरीरात खड़ा नहीं हौ पाएगा! सलीम धीरे-धीरे उसे कपड़े पहनते हुए देखता रहा औऱ बाद मे वोँ भि अपने कपड़े पहनकर राजमहल कि तरफचल पड़ा!
सलीम केँ जाने केँ बाद जब्बार आया औऱ शमा नें उसे सारीबात बता दि तोँ जब्बार खुशी सें भरउठा औऱ बोला:"
" आप् कां जवाब नहींशमा मेरी बेगम, आप् ऐसे हि इसगधे कों अपने शीशे मे उतारकर रखो औऱ फिन वोँ दिनदूर नहींजब आप् सुल्तानपुर कि रानी बनोगी औऱ मे आपका राजा!
शमा नें उसे अपनी बांहों मे लेँ लिया औऱ उसके सीने मे घुसती हुइ बोलि:"
" हमारा सपने जल्द हि पूरा होगाबस अब आप् मेराकुछ कीजिए नां, सलीम तौ ठीक सें गरम भि नहीं पाया मुझेअब आप् हि कुछ कीजिए मेरे सरताज!
जब्बार नें उसे पलंग पर्र पटक दिया औऱ उसकेऊपर चढ़ गय़ा औऱ देखते हि देखते दोनो नंगे होकर गुत्थमगुत्था होनेलगे औऱ जब्बार नें अपने मोटे तगड़े लन्ड कों उसकी बुर मे घुसा दिया तोँ रोज चुदने वालीशमा भि दर्द सें कराहउठी औऱ जोरजोर सें दर्दभरी सिसकियां लेती हुइ उससे चुदने लगी! लगभगआधे तक कक्ष मे उनकी सिसकियां गूंजती रही औऱ अंत मे दोनो एक् दूसरे सें लिपटकर सोगए!
बिलकुल प्यार किस्सा कि शुरुवात तोँ जरूर हौ गई हैं मगर जैसे हि सलमा कों विक्रम कि सच्चाई पता चलेगी तौ किस्सा मे बदलाव आयेगा
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
उदयगढ़ मे अगलेदिन राजसभा लगी हुइ थि! सब मंत्री औऱ विशेष गण अपनेजगह पऱ विराजमान थें! राजमाता गायत्री देवी लोगो कि समस्या सुनरही थि औऱ उनका समाधान भि कररही थि! लगभग 11 बजे केँ आसपास सभा ख़त्म हुइ औऱ राजमाता नें अजय सें कहा:"
" अजययह राजकुमार विक्रम आजसभा मे क्यूं नहि आए हें ? उनका स्वास्थ्य तौ ठीक हें नं?
अजय:" आप् निश्चित रहे राजमाता मे पता करकेआता हु!
गायत्री देवी"ठीक हें आप् जाइएतब मे मंत्री दल केँ संग एक् अहम बैठक करतीहू!
अजय वहां सें चला गय़ा औऱ राजमाता गायत्री देवीराज कुर्सी पऱ विराजमान हौ गई औऱ बोलि:"
" जैसा कि संपूर्ण राज्य जानता हैं कि आदिकाल सें राज्य कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी अजय केँ परिवार कि रही हें औऱ इनकी न् जाने कितनी पीढियों नें अपने प्राणों कि बलि देकर राज्य कि सुरक्षा करी हें औऱ उदयगढ़ केँ इतिहास मे इनका अभुपूर्व योगदान हें! अजय भि अब बड़ा होँ गय़ा हैं औऱ जिम्मेदारी लेने केँ लिए पूरीतरह सें रेडी हें! आप् सभी कि क्याँ राय हें ?
भीमा सिंह:" मे आपकीबात सें सहमतहु राजमाता! यह तोँ एक् ऐसी प्रथा हें जिसके बारे मे सब उदयगढ़ वासी अच्छे जानते हें!
मानसिंह:" बिलकुल राजमाता आपकीबात सत्य हें! अजय केँ पुरखो नें अपना बलिदान देकर राज्य कि सुरक्षा करी हें! अजय केँ पिता तौ महाराज कों बचाते हुए वीरगति कों प्राप्त हुए थें यह मैंने स्वयं अपनी आंखो सें देखा हें राजमाता!
कुशल सिंह:"यह तोँ सम्पूर्ण उदयगढ़ केँ लिए गौरव कां लम्हा हें कि राज्य केँ सबसे वफादार परिवार कों फिन सें उनकी जिम्मेदारी दि जारही हैं! शुभ अवसर देखकर आप् इस कार्य कों पूर्ण कीजिए!
सेनापति शक्ति सिंह:" राजमाता आपका हुक्म औऱ मंत्री गण कां फैसला मेरेलिए सर्वोपरि हें मगर मे यह जानना चाहता हूं कि आखिर मुझसे राज्य कि सुरक्षा मे कोईचूक हुईँ हैं याँ मैने अपनाकाम सच्चाई औऱ बहादुरी सें नहीं किया हें क्याँ ?
थोड़ी देर केँ लिए राजसभा मे पूरी शांति छाईरही औऱ अंत मे राजमाता गायत्री देवी नें हि इस चुप्पी कों तोड़ा औऱ बोलि:"
" आपने अपनी कर्तव्य कों पूरीलगन औऱ मेहनत केँ संग पूर्ण किया हें औऱ निसंदेह आप् उदयगढ़ केँ सबसे बहादुर योद्धा मे सें एक् होँ! मगर जैसा कि सब जानते हें कि यह प्रथा हमारे पूर्वजों केँ काल सें चली आँ रही हैं तौ इसे निभाने केँ लिए हम् वचनबद्ध हें शक्ति! मगर आप् निश्चित रहे आपकी निष्ठा कों देखते हुए आपको जल्द हि एक् अहम जिम्मेदारी केँ संगसंग 100 गांवों कि एक् जागीर दि जायेगी! फिन भि आपकोकोई आपत्ति हें तोँ हम् आपसे माफ़ चाहते हें शक्ति सिंह क्योंकि हम् चाहकर भि कुछ नहींकर सकते!
सब मंत्री गण नें राजमाता केँ इस निर्णय कां ताली बजाकर स्वागत किया औऱ शक्ति सिंह बिनाकुछ कहे राजमाता केँ आगे सम्मान मे सिर झुकाकर अपनी स्थान बैठ गय़ा!
राजमाता:" ठीक हें भीमाफिन आप् पुरोहित जी सें एक् शुभ मुहूर्त निकलवा लीजिए औऱ उसीदिन मुहूर्त पर्र अजय कों विधिपूर्वक यह जिम्मेदारी प्रदान कि जायेगी!
भीमा अपनेजगह पर्र खड़ाहुआ औऱ राजमाता केँ आगे सम्मान मे झुकते हुए बोला:"
" जोँ आज्ञा राजमाता! मैआज हि पुरोहित जी सें मिलकर मुहूर्त निकलवा लूंगा!
राजमाता:" ठीक हैं फिनआज कि सभा यहीं खत्म होगी औऱ आप् सब अपनाकाम देखिए! मे चलतीहू क्योंकि मुझे मंदिर जानां होगा!
उसकेबाद राजमाता मंदिर चली गई औऱ दूसरी तरफ विक्रम अपनेबैड पर्र हि लेटाहुआ थां औऱ सुभह सें कुछ खाया भि नहीं थां! उसे देखकर लगरहा थां कि मानो किसी गंभीर बीमारी कां प्रकोप हुआ हैं!
अजय उसके कक्ष मे पहुँचा औऱ बोला:" क्याँ मुझे होने वाले महाराज केँ कक्ष मे आने कि अनुमति हें ?
विक्रम नें एक् बार उसकीतरफ देखा औऱ बिना मुंह सें कुछ भि बोले अपनी गर्दन कों हिला दिया औऱ अजय उसकेपास जाकर खड़ा होँ गय़ा औऱ बोला:"
" क्याँ हुआ युवराज? आपकी तबियत कुछठीक नहि लगरही हैं मुझे?
विक्रम नें दुःखी नजरो सें उसे देखा औऱ फिन शायरी वाले अंदाज मे बोला:"
" आपकी हालत कां एहसास नहीं मुझको, मैने औरों सें सुना हें कि मे परेशान हु!!
विक्रम कि शायरी कां दर्द महसूस करकेअजय उसके बिलकुल पास पहुंच गय़ा औऱ बोला:"
" आप् चिंता नं कीजिए युवराज, मेरे होते आपकोकोई कष्ट हौ तोँ मेरे जिंदगी पऱ धिक्कार हें!
विक्रम नें उसे अपनेपास बैठने कां इशारा किया तौ अजय अपनी स्थान सें नहीं हिला औऱ बोला:"
" मे इस लायक तोँ नहींहु कि होने वाले महाराज केँ बेड पर्र बैठसकू! आप् बस हुक्म कीजिए
विक्रम नें उसकाहाथ पकड़कर बेड पऱ खींच लिया औऱ बोला:"
" अजय तुम् मेरेलिए मेरे सच्चे साथी हौ बिलकुल मेरे छोटे भइया जैसे!फिन हमारे बीचयह महाराज वाला नाता तोँ नहीं होना चाहिए वोँ भि कम सें कम मेरे कक्ष मे तौ किसी भि दशा पऱ नहीं!
विक्रम कां अपनापन देखकर अजय कां रोमरोम उसका कर्जदार हौ गय़ा औऱ बोला:"
" हमे इतनामान औऱ प्रेम देने केँ लिए आपकादिल सें शुक्रिया युवराज! जब आपने मुझे छोटा भइयाकहा हें तोँ फिन मुझे बड़े भइया केँ कष्ट कों दूर करने कां एक् मौका दीजिए!
विक्रम:" जरूर दिया जाएगा अजयमगर अभि उसकेलिए सही वक़्त नहींआया हें! जब आपकी जरूरत होगी तौ हम् आपको जरूर अपनीयह समस्या बताएंगे मेरे भइया!
अजय:" यह तौ मेरेलिए सौभाग्य कि बात होगी!फिन भि आपको कष्ट मे देखकर मेरादिल तारतार होँ रहा हें युवराज! आप् अगर बताएंगे तोँ आपकेलिए जिंदगी भि बलिदान कर दूंगा!
विक्रम नें उसके कंधे पऱ एक् हाथरखा औऱ धीरे-धीरे सें बोला:"
" अपनायह जज्बा औऱ जुनून बचाकर रखिएअजय क्योंकि जल्द हि आपको राज्य कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी मिलने वाली हैं तोँ आप् अपना ध्यान अभि सि तरफ हि लगाए!
अजय:" जैसी आपकी ख़्वाहिश युवराज! मगर पहले आप् नहा लीजिए तब मे आपकेलिए थोडा खाने कां प्रबंध कर देताहू!
इतना कहकरअजय बाहर् आँ गय़ा औऱ विक्रम अनमने ढंग सें नहाने केँ लिएचला गय़ा औऱ थोड़ी देर उसनेअजय केँ संग बैठकर थोडा सां कुछ खाया औऱ उसकेबाद अजय उससे आज्ञा लेकर बाहर् निकलआया!
साम कों राजमाता गायत्री देवी विक्रम केँ कक्ष मे आई औऱ विक्रम कां हाल देखा औऱ बोलि:"
" उदयगढ़ केँ होने वाले महाराज कों क्याँ कष्ट हें जौ उनके चेहरे पर्र इतना दर्द दिखाई पड़ता हें
विक्रम नें अपनी नजरो कों नीचा किया औऱ बोला:"
" कुछ नहीं राजमाता बसकल घोड़े सें थोडा गिर पड़ा थां तोँ पांव मे हल्की सि चोटआई हें बस इसलिये आराम हि कररहा थां!
राजमाता गायत्री:" आपकीबात मुझे हैरान कररही हैं युवराज क्योंकि हमारे शाहीखून मे तौ ताकत होती हें घोड़े उसे चाहकर भि गिरा सकता!
विक्रम उसकीबात सुनकर झेंप सां गय़ा औऱ बोला:" दरअसल वोँ हमे घोड़े सें ऐसी उम्मीद नहि थि तौ इसलिये बसगिर पड़े! आप् मेरा विश्वास कीजिए राजमाता!
राजमाता नें एक् बारगौर सें उसे देखा औऱ बोलीं:"
" आप् कहते हें तोँ विश्वास तौ करना हि पड़ेगा! आज सें आपकेलिए वैद्य जी कों बोलकर एक् शाही नुस्खा सजधजकर करवाना पड़ेगा ताकि आप् फिन सें ऐसे हादसे कां शिकार नं होने पाएं!
विक्रम केँ पासकोई उपाय नहि थां तौ बोला:"
" जैसे आपकोठीक लगे राजमाता!
उसकेबाद बिक्रम नें अपनी माता केँ संग थोडा सां खानां खाया औऱ फिनछत पऱ घूमने लगा औऱ राजकुमारी कि यादउसे भुलाए नहि भूलरही थि!!
वही दूसरी तरफ शहजादी सलमा भि पूरेदिन दुःखी सि हि रही औऱ जैसे तैसे करकेदिन कटा तौ रात कि तनहाई नें उसे आँ घेरा औऱ बैड पर्र पड़ी हुइ सलमा कि आंखो सें नींद कोसों दूर थि औऱ मखमल सां नर्म रसीले खाट भि आज उसकेबदन कों चैन नहींदे रहा थां! सलमा कों स्वयं पऱ यकीन नहि हौ रहा थां कि क्याँ वोँ सच मे विक्रम सें इतना प्रेम कर बैठी जोँ उसके सिवाकुछ याद हि नहि रहरहा हें उसे!सच मे प्रेम मे ऐसी दीवानगी भि होती हें उसे एहसास न् थां क्योंकि उसकीजान पर्र बनआई थि! विक्रम नें जहां उसकेहाथ कों चूमा थां वोँ स्थान कों वोँ इतनाचूम चुकी थि कि गिनती करने कि बात हौ छोड़ो उसकेहाथ कां वोँ हिस्सा चूमने कि वजह सें लालपड़ गय़ा थां!
धीरे-धीरे धीरे-धीरे रात गहराने लगी औऱ सलमा कि बचैनी औऱ अधिक बढ़ती चली गई! रात केँ दूसरे पहर बड़ी मुश्किल सें सलमा कि आंखलगी तौ उसे बेहद हसीन सपने दिया औऱ उसने देखा कि वोँ अपने कक्ष मे बेड पर्र लेटी थि औऱ विक्रम उसके माथे कों चूमरहा थां तौ सलमा नें उसे बड़े प्रेम सें देखा औऱ विक्रम नें उसे अपनीगोद मे उठा लिया औऱ सलमा उसकेगले मे बांहे डाले उससे लिपटी हुईँ थि! विक्रम सलमा कों गोद मे लिएहुए महल कि छत पऱ आँ गय़ा औऱ सामने चांद कि दुधिया रोशनी उनकेबदन पर्र पड़रही थि औऱ सलमा उसके चौड़े मजबूत सीने सें लिपटी हुईँ थि औऱ विक्रम बड़े प्रेम सें उसके सुंदर चेहरे कों देखारहा थां औऱ प्रेम सें बोला;"
" शहजादी सलमा एक् बार अपनी आंखो कों खोलिए न्!
सलमा नें अपनी आंखो कों बड़े प्रेम सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे खोला औऱ दोनो कि आंखे एक् दूसरे सें मिल गई ! दोनो प्रेम सें एक् दूसरे कि आंखो मे देखरहे थें मानो सारी दुनिया भूलगए होँ! चांदनी रात मे सलमा कां नूरानी चेहरा औऱ भि ज़्यादा हसीनलग रहा थां औऱ विक्रम कों सलमा पऱ बेहद प्रेम आँ रहा थां क्योंकि कालीबडी बडीगोल आंखो मे लगी हुइ स्याही उसकी आंखो कों बेहद हसीनबना रही थि औऱ विक्रम धीरे-धीरे धीरे-धीरे शहजादी केँ चेहरे कि तरफ हल्का हल्का झुकने लगा तौ सलमा कों अपनी सांसे उखड़ती हुइ महसूस औऱ पूरा जिस्म कांपउठा औऱ सलमा नें अपने जिस्म कों ढीला छोड़ दिया! विक्रम कां चेहरा अब सलमा केँ चेहरे केँ ठीक सामने आँ गय़ा थां औऱ सलमा केँ लालअब लज्जा केँ मारे गुलाबी होँ गए थें औऱ होंठ उसके होंठ थरथरा रहे थें! विक्रम सलमा कि आंखो मे देखता हुआ उसके चेहरे पर्र करीब-करीब पूरीतरह सें झुक गय़ा औऱ सलमा नें अपनी बांहों कां दबाव उसकी गर्दन पर्र बढ़ा दिया तौ विक्रम नें झुककर उसके एक् गाल कों चूम लिया तौ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ एक् झटके केँ संग उसकीआंख खुल पड़ी औऱ सलमा कों यकीनहुआ कि वोँ तौ मात्र सपनादेख रही थि तौ वोँ उठकरबैठ गई औऱ उसे एहसास हुआ कि उसकी सांसे बेहदतेज हौ गईंथीं औऱ पूरा चेहरा लज्जा सें लाल हौ गय़ा थां!
सलमा केँ ख्वाब मे पहलीबार कोई राजकुमार आया थां औऱ वोँ उसका चहेता विक्रम तोँ सलमा कों अब उदासी हौ रही थि कि विक्रम सच मे कोई नहींआया! जबसच मे आएगा तोँ क्याँ वोँ ऐसे हि उसकागाल चूम लेगा क्याँ जैसे ख्वाब मे चूमा थां यहसभी सोचकर सलमा लज्जा सें दोहरी होतीचली गई क्योंकि उसकी छातियां बेहदजोर जोर सें उछलउछल पड़रही थि औऱ सलमा नें तकिए कों उठाकर अपनी छाती सें चिपका लिया मानो अपनी गोलाईयों कों उछलने सें रोकरही होँ! बड़ी मुश्किल सें सलमा नें अपनेबदन पर्र काबू किया औऱ उठकरवही आकर खड़ी होँ गई जहां वोँ ख्वाब मे विक्रम कि गोद मे सिमटी हुईँ थि औऱ चांद कों निहारने लगी!रात कां तीसरा पहर शुरुआत हुआ औऱ सलमा आखिरकार अपने पलंग आँ गई औऱ विक्रम केँ बारे मे सोचते सोचते वोँ आखिरकार नींद केँ आगोश मे समा गई!!
जब्बार एक् महिला केँ संग नंगा हि पड़ाहुआ औऱ दोनो अभि अभि चुदाई केँ संग अपने सांसे संयतकर रहे थें औऱ वोँ महिला जिसका नाम राधिका थां बोलीं:"
" आपने तोँ मेरेबदन कों पूरा निचोड़ कररख दियाआज! सच मे आपके जैसा मजबूत मर्द मैनेआज तक नहीं देखा!
जब्बार नें अपनी तारीफ सुनी तोँ उसकी मम्मों कों सहलाते हुएकहा:" मेरीजान तुम् भि तोँ कुछकम नहि हौ, जितनी सुंदर होँ उससे ज़्यादा तेजमन होँ!
राधिका:" अच्छा एक् बात पूछूं?
जब्बार:" कहो नाँ मेरी रानी?
राधिका:" क्याँ आप् सच मे मुझे सुल्तानपुर कि महारानी बनाओगे ?
जब्बार नें उसेफिन सें अपनी बांहों मे समेट लिया औऱ उसकी बुर पऱ अपनेआधे खड़ेहुए लन्ड कों रगड़ते हुए बोला:"
" बिलकुल बनाऊंगा मेरीजान, केवल सुल्तानपुर हि नहि बल्कि पूरे हिन्दुस्तान कि महारानी बनाऊंगा!
दोबार हुइ दमदार चुदाई सें राधिका केँ जिस्म कां रेशा रेशाटूट रहा थां मगरअब नाँ चाहते हुए भि उसके शरीर मे फिन सें उत्तेजना भागना शुरुआत होँ गई थि औऱ वोँ जब्बार केँ गले मे अपनी बांहे डालकर उससे लिपट गई औऱ बोलि:"
" फिन आपकी पत्नि शमा कां क्याँ होगा मेरे जहांपनाह?
जब्बार नें उसकीगोल गद्देदार गांड़ कों अपनी हथेलियों मे भर लिया औऱ मसलते हुए बोला:"
" तुम् तोँ जानती होँ कि मे शमा कों पसन्द नहीं करता!बस उसे शहजादे सलीम कों फंसाए रखने केँ लिए इस्तेमाल कररहा हूं क्योंकि सलीम हि मेरे रास्ते मे सबसे बड़ी दिक्कत बन सकता हें आगे चलकर!
इतना कहकर उसने राधिका कों एक् झटके सें अपनीतरफ खींच लिया औऱ उसका पूरा सख्त हौ गय़ा लन्ड उसकी बुर सें टकरा गय़ा तोँ राधिका केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ उसके होंठो कों चूमकर बोलि:"
" तोँ फिनकर लीजिए नां सुल्तानपुर पऱ कब्जा आप् क्योंकि सभीकुछ तोँ अब आपकेहाथ मे हि हैं!
जब्बार एक् झटके केँ संग राधिका केँ उपर आँ गय़ा औऱ राधिका नें अपनी टांगो कों पूरा फैला दिया औऱ लन्ड बुर केँ जूसीछेद पर्र जालगा औऱ जब्बार दोनो हाथों सें उसकी चूचियां मसलते हुए बोला:"
" ऐसे महाराज बना तौ प्रजा विद्रोह कर देगी! तुम्हे मेरा एक् काम करना होगा राधिका!
इतना कहकर जब्बार नें उसकी बुर पर्र एक् जोरदार धक्का लगाया औऱ आधा लन्ड राधिका कि बुर मे घुस गय़ा तोँ राधिका दर्द सें कराहउठी औऱ उससे पूरी ताकत सें लिपट गई औऱ बोलीं:"
" आह्ह्ह्ह्ह मेरेआका, बताए नाँ मुझे क्याँ करना होगा!!
जब्बार नें लन्ड कों जोर सें बाहर् कि तरफ खींचा औऱ उसके कंधो कों थामकर पूरी ताकत सें एक् धक्का लगाया तौ लन्ड जड़ तक उसकी बुर मे समा गय़ा औऱ राधिका दर्द सें बेचैनी उठी औऱ उसकीपीठ कों नाखूनों सें रगड़ती हुइ बोलि:"
" आआह्हह्ह मार डाला मुझे!कहो नां प्लीज मेरीजान क्याँ करना होगा मुझे!
जब्बार नें उसकी बुर मे धक्के मारने शुरुआत करदिए तौ राधिका मस्ती सें बेहाल हौ गई औऱ जब्बार उसकी चुचियों कों मसलते हुए बोला:"
" मुझे शहजादी सलमा कों कुछ भि करके फंसाना होगा अपनेजाल मे क्योंकि अगर वोँ फंस गई तौ मुझे प्रजा खुशी खुशी महाराज स्वीकार कर लेगी!
इतना कहकर जब्बार नें एक् तगड़ा धक्का लगाया औऱ राधिका दर्द सें कराहउठी औरउसकी बात सुनकर राधिका नें उसे गुस्से सें घूरती हुइ बोलि:"
" फिन मेरा क्याँ होगा? शहजादी केँ बाद मुझे तौ भूल हि जाओगे न् तुम् !!
जब्बार उसकी बुर मे जोरजोर सें चोदते हुए बोला:"
" विवाह केँ बाद एक् षडयंत्र मे फंसाकर सलमा कों मौत केँ घाट उतार देने औऱ ऐसे पूरा राजपरिवार समाप्त हौ जाएगा औऱ आप् मेरी महारानी बन जाओगे!
राधिका उसकीबात सुनकर होश मे आँ गई औऱ नीचे सें अपनी गांड़ उठाकर उठाकर चुदने लगी औऱ सिसकी:"
" अअह्ह्ह्ह जब्बार मेरे दोस्त! चोददे मुझे अह्ह्ह्, चोद नां अपनी महारानी राधिका कों!
जब्बार नें उसकोअब पूरी ताकत सें चोदना शुरुकर दिया औऱ पूरे कक्ष मे राधिका कि दर्दभरी सिसकियां गूंजने लगी औऱ जब्बार बोला:"
" एक् काम करना, तेरी एक् बेहन सीमा राजकुमारी केँ संग रहती हें तोँ तुम् उसकेसंग शहजादी केँ लगभगजाओ औऱ मालिश केँ नाम पर्र उसकी उत्तेजना कों पूरीतरह सें भड़का दो ताकि शहजादी बदन कि आग मे जलउठे औऱ फिन मौका देखकर हम् उसे अपनेजाल मे फंसा लेंगे औऱ एक् बारअगर वोँ मेरे लन्ड सें चुद गई तोँ जीवनभर मेरी गुलाम बन जायेगी वोँ !!
दर्द सें कराहती सिसकती हुईँ राधिका पूरी ताकत सें अपनी बुर कों लन्ड पऱ उछालरही थि बोलि:"
" आह्ह्ह्ह मेरे महराज! इस लन्ड कि मारजिस बुर पऱ पड़ेगी वोँ जीवनभर आपकी गुलाम बन जायेगी! अह्ह्ह्हह मेरे राजा बजाओ मेरा बाजा!
उसकेबाद चुदाई कां दौरचल पड़ा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे जब्बार राधिका पर्र भारी पड़ने लगा तोँ राधिका दर्द सें तड़पती, कराहती हुई उसके नीचे चुदाती रही औऱ आखिर मे एक् दमदार चुदाई केँ बाद जब्बार नें उसकी बुर कों लबालब भर दिया!!
अगलेदिन सुभहअजय उठा तोँ उसकी माता मेनका बोलि:"
"पुत्र अजयठीक दोदिन बाद पूरी चांदनी रात होगी औऱ मे आपको विधिपूर्वक यह अद्भुत तलवार दूंगी!
अजय:"ठीक हें माता! बताए उसकेलिए मुझे क्याँ क्याँ करना होगा?
मेनका:" हम् दोनो पवित्र नदी केँ पासआज एक् विधि कों पूर्ण करेंगे! आप् बस मेरेसंग चलनासभी कुछ मे स्वयं व्यवस्था कर लूंगी!
अजय:" जैसी आपकी ख़्वाहिश! मे आपकेसंग चलूंगा औऱ अपनीतरफ सें पूरा योगदान दूंगा!
मेनका:" ठीक हें पुत्र! अब आप् राजसभा मे जाओ औऱ अपना कार्य देखो!
वहीं दूसरी तरफ सलमा बेहद दुःखी थि तौ उसकी उदासी सीमा सें नहीं देखी गई औऱ आखिकार उसने पूछा हि लिया:"
" क्याँ हुआ शहजादी आप् बेहद दुःखी क्यूं जान पड़ती हौ? कईदिन सें देखरही हूं कि आप् नां ठीक सें खापारही हें औऱ पूरेदिन बुझी बुझी सि रहती हैं, आखिर क्याँ हुआ हें आपको, पहले तौ आप् ऐसी बिलकुल नं थि शहजादी!
सलमा:"कुछ भि तोँ नहींहुआ हें हमें, बस आजकल तबियत थोड़ी ठीक नहीं लगती!
सीमा:"ठीक हें फिन मे दाईमा कों बुलाकर लेँ आती हूं ताकि वोँ आपकोदेख सके औऱ आपका उपचार करसके!
इतना कहकर सीमा जानेलगी तोँ सलमा नें झट सें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोलि:"
" कहीं जाने कि जरूरत नहीं हें तुम्हे, यहीं बैठो मेरेपास!
सीमा नें उसे हैरानी सें देखा औऱ बोलीं:" फिन आपकी तबियत कैसीठीक होगी शहजादी?
सलमा नें उसे पकड़कर अपनेपास बिठा लिया औऱ उसके कंधे पऱ अपनासिर रखतेहुए बोलि:
" हर बीमारी कां इलाजदाई मा केँ पास नहीं होता सीमा, कुछ ऐसी बीमारी भि होती हें जोँ लाइलाज होती हें!
सीमा नें हिम्मत करके शहजादी कां हाथ अपनेहाथ मे लिया औऱ बोलीं:" यह आप् कैसी अजीब अजीब सि बातेकर रही हैं, भला बीमारी कां इलाजदाई मा नहीं करेगी तोँ कौन करेगा!
सलमा कों समझ नहि आँ रहा थां केसे वोँ सीमा कों अपनेदिल कां हाल बताए क्योंकि उसके अंदर इतनी हिम्मत नहि थि कि वोँ अपने मुंह सें यहबात कहसके औऱ फिनअगर गलती सें भि सीमा नें किसी केँ सामने कुछकह दिया तोँ वोँ किसी कों मुंह दिखाने केँ काबिल नहीं बचेगी इसलिये वोँ खामोश हि रही तौ सीमाफिन सें बोलीं:"
" बताए नाँ शहजादी, आपकी यह हालत हमसे देखी नहीं जाती, पीड़ा आपके चेहरे पऱ हें औऱ दिल मेराटूट रहा हैं!
सीमा कि बात कां सलमा पर्र गहराअसर हुआ औऱ ऐसे हि उसके कंधे पर्र सिररखे हुए बोलीं:"
" क्याँ मे तुझ पर्र पूरा यकीनकर सकती हूं नाँ सीमा?
सीमा केँ दिल कों उसकीबात सुनकर ठेस पहुंची औऱ बोलीं:"
" आपने यकीन वालीबात कहकर आपकेलिए मेरी निष्ठा कों ठेस पहुंचाई हैं शहजादी! शायद आप् मुझेठीक सें समझ हि नहि पाई हैं आज तक!
सलमा नें कसकर उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोलि:"
" ऐसा नं बोलो सीमा, तुम् पर्र तौ मुझे अपने आप् सें अधिक भरोसा हैं तभी तौ अपनीहर बात तुम्हे बताती हूं मे!
सलमा कि बात सुनकर सीमा केँ मन कों चैन पहुँचा औऱ वोँ शहजादी केँ रेशमी बालों कों सहलाते हुए बोलीं:"
" फिन आपनेयह बातकही हैं तोँ इसका मतलब जरूरकोई बहोत बड़ी औऱ गंभीर समस्या हैं!
सलमा उसका अपनापन देखकर पिघल गई औऱ बोलि:"
" बसऐसा हि कुछसमझ लो सीमा, कुछ बातेऐसी होती हैं जिन्हे इंसान अपनेसाए सें कहतेहुए डरता हैं!
सीमा नें हिम्मत करके शहजादी केँ कंधे पर्र अपनाहाथ रख दिया औऱ उसे हिम्मत देती हुई बोलीं:"
" आप् मुझसे कहिए जौ भि आपका दर्द हें औऱ मेरा वादा हैं आपसे कि मेरे औऱ आपके सिवायह बातकभी किसी कों पता नहि चलेगी!
सलमा तोँ स्वयं चाहरही थि कि वोँ दर्द किसी सें कहे औऱ आखिरकार सीमा केँ रूप मे उसे उसकी सच्ची सहेली औऱ हमदर्द मिल गई तोँ उसनेसभी कुछ बताने कां फैसला कियामगर अब दुविधा यह थि कि केसेकहे क्योंकि चाहकर वोँ कुछ नहि बोलपा रही थि तोँ सीमा बोलीं:"
" अबबोल भि दीजिए नाँ शहजादी
सलमा कां शरीर कांपउठा औऱ सीमा उसकेहाथ कों प्रेम सें सहलाते हुए बोलीं:
" अरे आप् तोँ बोलने सें पहले हि कांपरही हैं, आखिरऐसी क्याँ समस्या होँ गई हैं जिसने हमारी शहजादी कां ऐसाहाल कर दिया हैं आखिर?
सीमा कि बात सुनकर सलमा लज्जा सें पानी पानी होँ गई औऱ उसके शरीर मे एक् तेज झुरझुरी सि दौड़ गई तोँ सीमा नें उसके कंधे कों जोर सें पकड़ लिया औऱ बोलीं:"
" इतना अधिक शर्माएगी तोँ आप् बोल केसे पाएगी शहजादी? जरा हम् भि जाने आखिर हमारी हसीन शहजादी कां ऐसाहाल क्यूं होँ रहा हैं?
सीमा कि बाते सलमा कि बेचैनी कों औऱ बढ़ारही थि औऱ सलमा हिम्मत करकेबोल पड़ी:"
" हमे आजकल रातों कों नींद नहि आती, रात कों चांद कों निहारना अच्छा लगता हें सीमा!
सलमा नें बड़ी मुश्किल सें हिम्मत करकेकहा औऱ सीमा उसकी समस्या कों थोडा थोडा समझ गई मगर वोँ स्वयं सें नहीं बोल्ना चाहती थि क्योंकि अगर उसका अनुमान गलतहुआ तौ वोँ जीवनभर शहजादी सें नजरे नहीं मिला पाएगी इसलिये सीमा बोलीं:"
" चांदनी रातों मे नींद थोडा कम हि आती हें तोँ आप् थोडा जल्द सोने कि कोशिश कीजिए इससे आपको आराम मिलेगा शहजादी!
सलमा उसकीबात सुनकर झुंझला सि उठी औऱ उसकाहाथ दबाते हुए बोलि:"
" आप् समझती क्यूं नहि हैं? मेरीजान पर्र बनी हुइ हें!
सीमा उसकी बेचैनी महसूस करकेमन हि मन मुस्कुरा पड़ी औऱ बोलि:"
" आप् बोलेंगी तभी तौ मे कुछजान पाऊंगी! आप् कहिए नां
मचलती हुई सलमा नें अपने नाखून कों उसकी हथेली मे चुभा दिया औऱ बोलीं:"
" हमेदिन मे भि कुछ भि अच्छा नहि लगता औऱ नं हि कुछ खाने कों मन करता हैं!
सीमा उसकीबात सुनकर अब हल्की सि मुस्कुरा पड़ी औऱ बोलीं:"
" यह तोँ पड़ी अजीब बीमारी हैं शहजादी! आखिरकब सें हुई हैं आपकोयह बीमारी?
सलमा कि सांसे उखड़ सि गई औऱ उसकी उछलती हुईँ चुचियों कि गति इतनीबढ़ गई थि कि वेअब सीमा सें टकरारही थि! सलमा कां पूरा मुंह लज्जा सें लाल सुर्ख होँ गय़ा थां औऱ आंखे लज्जा केँ मारेबंद हौ गई थि औऱ सलमा नें जोर सें सीमा कि उंगलियों कों अपनी उंगलियों मे फंसा लिया औऱ हिम्मत करके धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" जब सें हम् उसदिन नदी पर्र सें वापिस आए हें!
इतना कहकर वोँ उत्तेजना सें कांपती हुई सीमा कि गोद मे गिर पड़ी औऱ अपना चेहरा छिपा लिया तोँ सीमा उसके बालो मे प्रेम सें उंगलियां चलाती हुईँ बोलि:"
" अच्छा तौ यहबात हैं हमारी शहजादी घोड़े वाले राजकुमार सें दिललगा बैठी हैं!
सीमा कि बात सुनकर सलमा केँ मुंह सें अहह निकलते निकलते बची औऱ वोँ उसकीगोद मे पड़ी हुइ कांपती रही तौ सीमा नें फिन सें पूछा:"
" अरेनाम क्याँ थां उस राजकुमार कां मे तोँ भूल हि गई!
मचलती हुईँ कांपती हुई सलमा उसकीगोद मे पड़े पड़े हि धीरे-धीरे सें
फुसफुसाई:"
" वि.वि। विक्रम!
इतना कहकर सलमा नें थोडा सें सीमा कां हाथदबा दिया औऱ सीमा उसकीपीठ प्रेम सें सहलाते हुए बोलीं:"
" अच्छा तोँ हालत शहजादी कि विक्रम कि वजह सें हुइ हें लगता हें आप् बेहद इश्क करनेलगी हें उस विक्रम सें!
इतना कहकर सीमा नें उसे पकड़कर अपनीगोद सें उठा दिया तौ सीमा लज्जा सें लाल हौ गई औऱ आंखे नीचीझुक गई तोँ सीमा बोलीं:"
" अब आप् मुझे बताए मे आपकी क्याँ सहायता कर सकूंगी? वैसे भि जहां तक मुझेपता हैं यह बीमारी तौ दीदार ए महबूब सें हि ठीक होती हें नं शहजादी!
सलमा नें नजरे नीचेकिए हुए अपने गर्दन कों हां मे हिला दिया औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" मेरा एक् काम करेगी क्याँ सीमा?
सीमा:" आप् बोलकर देखिए शहजादी जान भि कुर्बान कर दूंगी आपकेलिए!
सलमा नजरे नीचेकिए हुए हि धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" क्याँ तुम् विक्रम तक मेरा एक् पैगाम आया सकती होँ?
सीमा:" आप् निश्चित रहे शहजादी! आप् अपना पैगाम मुझे दीजिए मे स्वयं उन्हे देकर आऊंगी! मगर इतनाबता दीजिए कि वोँ रहते कहां हें ?
सलमाअब फिन सें उदास होँ गई क्योंकि उसने विक्रम सें कभी पूछा हि नहीं थां कि वोँ कहां पर्र रहता हें औऱ बोलि:"
" यह तौ बड़ी कठिन समस्या हौ गई! मैने विक्रम सें कभी पूछा हि नहि कि वोँ कहां रहते हें!
सीमा:" एक् उपाय हैं मेरेपास! अगर वोँ आपसे प्रेम करते होंगे तौ जरूरनदी केँ पास तौ आयेंगे जहां सें आपकी मुहब्बत कि शुरुवात हुइ हें!
सलमा:"ऐसा नं बोल सीमा, वोँ मुझसे जरूर मुहब्बत करते होंगे! मैने उनकी आंखों मे देखा हें औऱ मेरी आंखे धोखा नहींखा सकती!
सीमा:"ठीक हें फिन आप् अपना पैगाम मुझे लिखकर दीजिए! मे आज हि नदी केँ किनारे जाऊंगी!
सलमा:"मगर अपना ध्यान रखना औऱ एक् काम करनापवन कों लेकर जानां क्योंकि इस घोड़े मे वोँ रफ्तार हें कि इसेकोई छू भि नहि सकता!
सीमा:"हान पवन कमाल कां घोड़ा हें औऱ तेज रफ्तार सें दौड़ता हैं बिलकुल अपने युवराज कि तरह देखो नाँ केसे एक् हि बार मे हमारी शहजादी कों हमसेछीन लिया उन्होंने!
सलमाहंस पड़ी औऱ फिन उसने अपना पैगाम लिखा औऱ उसे एक् लिफाफे मे बंदकर दिया औऱ सीमा कों देतेहुए बोलीं:"
" इसे युवराज तक आया देना सीमा! मुझे यकीन नहीं हें कि इसमें लिखे मेरेदिल केँ हाल कों तुम् पढ़ोगी नहीं!
सीमा: आप् निश्चित रहे शहजादी! आपका पैगाम युवराज केँ सिवाकभी कोई नहींजान पाएगा!
उसकेबाद सलमा नें सीमा कों गले लगाया औऱ उसके माथे कों चूमकर बोलि:"
" जाओ सीमा ! हम् आपका प्रतीक्षा करेंगे
उसकेबाद सीमा वहां सें निकल गई औऱ थोड़ी हि देरबाद नदी पर्र पहुंच गई मगरउसे दूरदूर तक कोईनजर नहींआया तौ उसकादिल बैठ सां गय़ा क्योंकि उसकी उम्मीद केँ मुताबिक विक्रम कों वहां होना चाहिए थां! धीरे-धीरे धीरे-धीरे साम ढलनेलगी औऱ सीमा कि उम्मीद भि डूबते हुए सूरज केँ संग डूबती जारही थि! धीरे-धीरे धीरे-धीरे सभीतरफ अंधेरा होनेलगा औऱ सीमा नें दुःखी मन सें वापिस जाने कां फैसला किया औऱ पवन पर्र सवार होकरचल पड़ीमगर तभीउसे पीछे सें घोड़े कि टापो कि आवाज़ सुनाई पड़ी तोँ उत्सुकता मे रुक गई औऱ उसने देखा कि कोईनदी केँ किनारे अपने घोड़े पऱ सें उतररहा थां! सीमा नें पवन कों उसी दिशा मे घुमा दिया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे बढ़ती चली गई औऱ उसनेगौर सें उस व्यक्ति कों देखा तौ उसकीजान मे जान आँ गई क्योंकि यह तोँ विक्रम हि थां! हानसच मे विक्रम हि थां औऱ सीमा केँ चेहरे पर्र मुस्कान आँ गई औऱ उसकी खुशी देखकर लगरहा थां मानो सलमा कां नहीं उसका महबूब मिलने केँ लिएआया थां!
दबेपैर वोँ घोड़े सें उतरकर धीरे-धीरे सें उसके पीछे पहुंच गई औऱ देखा कि विक्रम भि बहुत दुःखी लगरहा थां औऱ ऐसालग रहा थां मानो उसकाकुछ खो गय़ा हौ! नदी केँ पास बैठकर वोँ दुःखी मन सें वोँ पत्थर उठाउठा करनदी मे फेंकरहा थां औऱ सीमा नें उसे उसकेपास जाकरबैठ गई तोँ विक्रम कों एहसास हुआ कि कोई लड़की उसकेपास आई हें तोँ उसने ध्यान सें देखा औऱ बोला:"
" अगर मे गलत नहींहु तोँ आप् शहजादी सलमा कि सहेली हें न् जौ उसदिन उसकेसंग आई थि
सीमा मुस्कुराई औऱ बोलीं:"
" आप् ठीक पहचाना मुझे युवराज, मे सलमा कि सहेली हि हु औऱ बहुतदेर सें आपका प्रतीक्षा कररही थि!
विक्रम केँ होंठो पर्र मुस्कान आँ गई औऱ बेचैन होकर बोला:"
" कैसी हें शहजादी ? उनकी तबियत तौ ठीक हें न् ? क्याँ कररही थि वोँ? उन्हे कोई दिक्कत तोँ नहीं हैं नं ?
सीमा उसकी बेचैनी महसूस करकेसमझ गई कि आज दोनोतरफ बराबर लगी हैं औऱ बोलीं:"
" एकदम इतने सारे प्रश्न युवराज, मेरेपास आपके किसी भि प्रश्न कां जवाब नहीं हें!
सीमाउसे थोडा छेड़ते हुए बोलीं औऱ विक्रम उदास होतेहुए बोला:"ऐसा नं बोलो सीमा मेरादिल यह मानने केँ लिए रेडी नहि हैं कि ऐसा भि हौ सकता हें!
सीमा नें अपनीजेब सें वोँ पैगाम निकाला औऱ उसे युवराज कों देतेहुए बोलीं:" यह लीजिए शहजादी नें आपकेलिए भेजा हें!
विक्रम केँ चेहरे कि खुशी देखते हि बनती थि औऱ उसने धीरे-धीरे सें लिफाफे कों चूम लिया औऱ उसे खोलने लगा तौ सीना बोलीं:"
" एक् मिनट युवराज, यहखास आपकेलिए हें तौ आप् पढ़ लीजिए!
इतना कहकर वोँ थोडा पीछे होँ गई औऱ विक्रम नें खत कों खोला औऱ पढ़ने लगा
" प्रिय विक्रम पता नहीं आपने क्याँ चमत्कार कर दिया हैं मुझ पर्र, हर टाइम आपके बारे मे हि सोचती रहती हूं, नां खाने कों मन करता हैं औऱ नं हि दिल किसीकाम मे लगता हैं! मे आजरात 10 बजेमहल कि छत पऱ आपका प्रतीक्षा करूंगी!
आपके दर्शन कि अभिलाषी:"
" शहजादी सलमा!!
विक्रम नें जैसे हि खत पढ़ा तौ उसकी खुशी कां कोई ठिकाना नहींरहा औऱ उसनेबार बारखत कों चूमा औऱ उसकेबस सीमा कों अपनेपास बुलाया औऱ बोला:"
" आप् जाकर सलमा सें कहिएगा कि मैनेखत पढ़ लिया हें औऱ शहजादी कि बात मैनेमान ली हें!
इतना कहकर उसने अपनेगले मे पड़ी हुइ एक् बेशकीमती हीरे कि माला कों निकाला औऱ सीमा कों देतेहुए बोला:"
" लीजिए सीमा मेरेतरफ सें आपकेलिए एक् बेशकीमती तोहफा!
सीमा नें उसे लेने सें इन्कार कर दिया औऱ बोलि:"
" मेरी वफादारी कि कीमत लगाने कि भूलकभी मत करना युवराज!
विक्रम कों लगा कि जल्द बाजी मे उसने गलतीकर दि हैं औऱ बोला:"ऐसा मत समझिए सीमा! प्रेम औऱ वफादारी कि कोई कीमत हौ हि नहीं सकती! क्याँ आप् मेरी छोटी बेहन बनेगी? मेरीकोई भि बेहन नहीं हें!
सीमा उसकीबात सुनकर खुश हुईँ औऱ बोलि:"
" ठीक हें युवराज! आज सें आप् मेरे भइयाहुए!
युवराज नें फिन सें माला कों लिया औऱ सीमा केँ गले मे डालते हुए बोला:"अब आप् मुझेमना नहींकर सकती हें मेरी बेहन!
सीमा उसकीबात सुनकर बस मुस्कुरा दि औऱ बोलि:"
" अच्छा अब आप् मुझे जाने कि इजाजत दीजिए! देरी हुईँ तोँ फिन मुझे दिक्कत होगी!
विक्रम:" आप् फिकर नां करे मेरी बेहन! आपके भइया केँ होतेहुए आपकोकोई दिक्कत होँ तोँ मेरे जिंदगी पऱ धिक्कार होगा! चलिए मे आपको सुल्तानपुर कि सीमा तक छोड़कर आताहु!
उसकेबाद विक्रम सीमा केँ संगचल पड़ा औऱ उसे सुल्तानपुर कि सीमा मे छोड़कर अपने राज्य कि तरफ खुशी खुशीचल पड़ा! वोँ अपने राज्य पहुंच गय़ा तोँ उसने देखा कि लगभगसात बजेगए थें औऱ उसे एक् घंटेबाद वापिस निकलना होगाफिन सें सुल्तानपुर जाने केँ लिए! विक्रम बेहदखुश थां क्योंकि आज उसकी महबूबा सें उसकी पहली मुलाकात होने वाली थि!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
सीमा सुल्तानपुर कि सीमा मे घुसने केँ बाद राजमहल पहुंच गई जहां बड़ी बेताबी सें दिल थामकर सलमा उसका प्रतीक्षा कररही थि औऱ सीमा केँ चेहरे कि चमक देखते हि वोँ उसके होंठो पऱ मुस्कान फैल गई औऱ बोलीं:"
" क्याँ हुआ सीमा? बताओ मुझे
सीमाखुश होती हुईँ बोलि:" आपकी बीमारी कां इलाज हौ गय़ा हैं शहजादी सलमा, युवराज विक्रम आए थें औऱ मैनेउन तक आपका पैगाम पहुँचा दिया हैं!
सलमा खुशी सें उछल पड़ी औऱ सीमा कों गले लगाकर उसका मुंह चूमते हुए बोलीं:"
" तुम् सचकहरही हौ नाँ सीमा? मे बता नहि सकती मुझे कितनी खुशी होँ रही हैं!
सीमा उसकी बेचैनी देखकर हंस पड़ी औऱ बोलि:" मे भलाझूठ क्यूं बोलने लगी आपसे ! औऱ आप् अपनायह प्रेम अपने महबूब केँ लिए बचाकर रखिए!
सीमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल होँ गई औऱ औऱ बोलीं:"
" चुप बेशर्म, जोँ मन मे आएबोल देती हैं! अच्छा यहबता युवराज नें क्याँ कहा ?
सीमा:" युवराज नें कहा हैं कि शहजादी कों जाकर कहना कि मुझे उनका पैगाम कुबूल हें!
सलमा नें उसेफिन सें कसकरगले लगा लिया औऱ बोलि:" अच्छा औऱ क्याँ क्याँ बाते हुइ?
सीमा:" वोँ तौ बस आपकेजी बारे मे पूछरहे थें, इतने सारे प्रश्न करदिए कि जवाब देना मुश्किल होँ रहा थां! औऱ उन्होंने मुझे अपनी बेहन भि बना लिया हें औऱ अपनीतरफ सें मुझेयह तोहफा भि दिया हें!
सीमा नें मोतियों कि मालाउसे दिखाई तोँ सलमा बेहदखुश हुई औऱ बोलि:"
" अच्छा यहबता तुम्हे युवराज केसेलगे ?
सीमा:" मुझे तौ बेहद अच्छे लगे, जितने सुंदर औऱ जवान हें उससे कहीं अधिक ताकतवर हें! दिल केँ बहोत अच्छे हें जानती हौ मुझे वोँ सुल्तानपुर कि सीमा तक वापिस छोड़कर गए हें!
सलमा:"यह तोँ बहोत अच्छी हें आखिरअब आप् उनकी बेहनबन गई हौ तौ भइया कों ध्यान तौ रखना हि पड़ेगा! चलोअब एक् कामकरो मुझे बेहदतेज भूखलगी हें जल्द सें कुछ खाने केँ लिए लेकरआओ!
सीमा:"यह हुइ नं बात! देखो मे बोलती थि नं कि दिल कि बेकरारी तोँ महबूब कि चाहत सें होँ दूर होती हें! मे अभि आतीहु!
इतना कहकर सीमाचली गई औऱ सलमा शीशे केँ सामने एक् बार स्वयं कों निहारने लगी ! अपने प्रियतम सें उसकीआज पहली मुलाकात थि औऱ दुनिया कि हर महिला ऐसे मौके पर्र सबसे हसीन दिखना चाहती हैं ! थोड़ी देरबाद सीमा खानां लेकर आँ गई औऱ सलमा नें दोदिन केँ बादआज अच्छे सें खानां खाया! उसकेबाद सीमा बोलीं:"
" मेरेलिए अब क्याँ हुक्म हैं शहजादी?
सलमा:"कुछ नहीं आप् जाओ औऱ आराम करना!कल बात करेंगे आहिस्ता!
सीमा उसके कक्ष सें बाहर् चली गई औऱ सलमामन हि मन मुस्कुरा रही थि क्योंकि उसका प्रियतम जौ आँ रहा थां! सलमा नें अपनेलिए अपना पसंदीदा सूट सलवार निकाला औऱ उसेपहन लिया! वोँ कालेरंग कां सूट उसके गोरे चिट्टे शरीर पर्र बेहद सुंदर लगरहा थां! उसकेबाद सलमा नें अच्छे सें अपना मेकअप किया औऱ वोँ अब बेहद सुंदर लगरही थि! उसकी कालीबडी बडी आंखे गहरा काला काजल लगाने सें बेहद आकर्षक लगरही थि औऱ सुर्ख लालरंग कि लिपिस्टिक सें सजे उसके होंठ बेहद मुलायम हौ गए थें! सलमा नें एक् बेहद मादक परफ्यूम लगाया औऱ उसके जिस्म सें मीठी मीठी खुशबू आँ रही थि!
सलमा नें स्वयं कों शीशे मे निहारा औऱ अपने हि आप् सें शर्मा गई औऱ फिन उसने हिजाब पहना औऱ मुंह पऱ नकाब लगाकर धड़कते दिल केँ संग घड़ी कों देखने लगी! अभि 10 बजने मे 30 मिनट बाकी थि औऱ सलमा सें प्रतीक्षा केँ यहसमय काटे नहींकट रहे थें! बारबार उसका जिस्म कांपरहा थां औऱ पूरे शरीर मे अजीब सि गुदगुदी हौ रही थि! सलमा नें अपनी माँ ररजिया केँ कमरे कों देखा तोँ पाया कि उसके कमरे कि लाइटबंद थि तोँ उसने अंदाजा लगा लिया कि रजिया सो गई हैं औऱ वोँ जानती थि रोज कि तरह सलीममहल मे नहीं होगा तोँ उसे उसकीकोई फिक्र हि नहीं थि! सलमा नें अपने हिजाब कों अपने मुंह पऱ लगाया औऱ महल कि छत पऱ घूमने केँ लिए जानेलगी तौ रास्ते मे खड़े पहरादे रहे सैनिकों नें सिर झुकाकर उसका अभिवादन किया औऱ सलमा बोलीं:"
" आप् सभी दूसरी तरफ पहरा दीजिए! थोड़ी देर हम् चांद कों निहारना चाहते हें!
सलमा केँ हुक्म देते हि वोँ सब सैनिक छत पऱ सें दूसरी तरफचले गए औऱ अबछत पर्र मात्र सलमा खड़ी थि जोँ बेचैनी सें विक्रम कां प्रतीक्षा कररही थि!
विक्रम नें भि अपने आपको अच्छे सें रेडी किया औऱ आठबजे केँ पहले हि महल सें निकल गय़ा औऱ जैसे हि सुल्तानपुर कि सीमा मे घुसा तौ उसनेफिन सें भिखारी कां भेष बनाया औऱ सुल्तानपुर केँ मुख्य दरवाजे पर्र पहुंच गय़ा तौ सैनिक उससे बोला:"
" अरेकौन हौ तुम्? क्यूं राज्य मे घुसना चाहते होँ?
विक्रम:" मंत्री जी वोँ एक् मेरायार हें आपके राज्य मे रहीम जोँ खाने कि दुकान चलाता हें! बस उससे हि मिलने केँ लिएआया हु!
सैनिक:" ठीक हें मगर बिनाहमे खुशकिए तुम् अंदर नहींजा सकते होँ!
विक्रम नें अपनेजेब सें कुछ चांदी कि मुद्रा निकाली औऱ उस सैनिक केँ हवाले कर दि औऱ उसकेबाद राज्य मे घुस गय़ा तौ उसकी खुशी कां ठिकाना नहीं थां! अब उसका औऱ सलमा कां मिलन होने सें कोई नहींरोक सकता थां!
विक्रम सावधानी सें इधरउधर देखते हुए रहीम कि दुकान केँ सामने सें निकला औऱ उसकाहाल चाल पूछने केँ बादआगे बढ़ गय़ा औऱ अब वोँ महल केँ उत्तरी हिस्से मे आँ गय़ा थां जहां सें वोँ उसदिन महल मे घुसा थां! विक्रम जैसे हि उस दलदल केँ पासआया तौ उसने रस्सी निकाली औऱ इससे पहले कि वोँ रस्सी फेंकता उसेछत पऱ सलमा दिखाई पड़ा औऱ जैसे हि दोनो नें एक् दूसरे कों देखा तौ दोनो केँ होंठ मुस्कुरा दिए औऱ सलमा नें विक्रम कों रस्सी फेंकने सें मना किया औऱ थोडा पीछे जाने कां इशारा किया तोँ विक्रम थोडा पीछे गय़ा जहां पर्र कुछ बड़े बड़े पत्थर पड़ेहुए थें! सलमा नें उसे पत्थर हटाने कां इशारा किया औऱ पत्थर हटते हि विक्रम हैरान हौ गय़ा क्योंकि उसे एक् गुफानजर आई औऱ सलमा नें उसे अंदर घुसने कां इशारा किया तौ विक्रम गुफा केँ अंदरघुस गय़ा औऱ उसने देखा कि गुफा केँ अंदर थोड़ी थोड़ी दूरी पऱ कुछ दीपकजल रहे थें तोँ विक्रम समझ गय़ा कि जरूर सलमा नें जलाए होंगे ताकि मुझे अंदरआने मे कोई दिक्कत नं हौ! विक्रम जैसे हि गुफा केँ आखिरी छोर पऱ पहुँचा तोँ उसे सामने सलमा खड़ी हुइ नजरआई औऱ दोनो कि आंखे एक् दूसरे सें टकराई औऱ दोनोबस एक् दूसरे कों देखते रहे!कुछ लम्हा ऐसे हि बीतगए औऱ दोनो कों कोईहोश हि नहि थां बस मदहोश होकर एक् दूसरे कों देखरहे थें! विक्रम केँ होठों पऱ मुस्कान आँ गई औऱ बोला:"
" शहजादी आपनेहमे बुलाया औऱ हम् चलेआए!
सलमा केँ होंठो पऱ हल्की सि मुस्कान आई औऱ उसके आंखे लज्जा सें झुक गई तोँ विक्रम उसके लगभगआया औऱ बोला:"
" क्याँ आपको अभि भि हिजाब मुझसे पर्दा करने कि जरूरत हैं शहजादी? क्याँ मुझे मेरा चांद देखने कां हक नहि हैं?
सलमा नें कुछ जवाब नहि दिया औऱ बस हल्की सि मुस्कान दि तोँ विक्रम नें आगे बढ़कर उसके नक़ाब कों पीछे सें खोल दिया तौ सलमा कां नूरानी चेहरा विक्रम कि आंखे केँ सामने आँ गय़ा औऱ विक्रम उसकी तारीफ करतेहुए बोला:"
" अदभुत अकल्पनीय रूप सौंदर्य हें आपका शहजादी! लगता हें जैसे खुदा नें गलती सें जन्नत सें किसीहूर कों मेरेलिए जमीन पऱ भेज दिया हैं !
अपनीऐसी तारीफ सुनकर सलमा लज्जा सें लाल होँ गई औऱ नजरे नीचीकिए खड़ीरही तोँ विक्रम नें अपनाहाथ आगे बढाकर उसके हसीन चेहरे कों ऊपर कि तरफ उठाया औऱ बोला:"
" मेरीतरफ देखिए नाँ शहजादी! आप् खुश नहि हैं क्याँ मेरेआने सें
दोनो कि आंखे टकराई औऱ सलमा सलमा नें लज्जा सें फिन सें अपनी नजरो कों झुका लिया औऱ विक्रम कां हाथ पकड़कर बोलीं:"
" ऐसा नं कहे युवराज! आपकेआने सें मुझे सारे जमाने कि खुशीमिल गई हैं!
सलमा कि पहल सें विक्रम नें भि उसकाहाथ पकड़कर अपनीतरफ खींचा तौ सलमा अपने आप् किसी चुंबक कि तरह खींची चलीआई औऱ विक्रम कों अपनी बांहों मे भर लिया! दोनो नें एक् दूसरे कों कसकरगले लगा लिया औऱ खुशी खुशी मे दोनो केँ आंसू निकलगए औऱ सलमा नें अपनी बांहों कों पूरी ताकत सें उसकीपीठ पर्र कस दिया!।।
सलमा खुशी सें सिसकती हुईँ बोलि:" युवराज हम् आपके बिनाजी नहि पाएंगे! आज केँ बाद मेरासभी कुछ आप् होँ!
विक्रम कि आंखे भि भरआई थि औऱ उसकीपीठ कों सहलाते हुए बोला:" मे भि आपके बिनाजी नहि पाऊंगा मेरी शहजादी सलमा!
दोनोऐसे हि एक् दूसरे कि बांहों मे खड़े औऱ एक् दूसरे सें आंसूसाफ करतेरहे! सलमा कों होशआया कि वहां वोँ सुरक्षित नहीं हें औऱ कोई भि आँ सकता हैं तोँ वोँ धीरे-धीरे सें विक्रम कि बांहों सें निकली! सलमा नें गुफा कां दरवाजा बंद किया औऱ विक्रम कां हाथ पकड़कर चल पड़ी!
सलमा सावधानी सें इधरउधर देखती हुईँ आगे बढ़ती रही औऱ जल्द हि वोँ अपने कक्ष मे पहुंच गई तौ जोर सें पलटकर फिन सें विक्रम कों अपनी बांहों मे भर लिया औऱ उससे किसी अमरबेल कि तरह लिपट गई औऱ विक्रम नें भि उसे अपने मजूबत बहुपाश मे बांध लिया! खिड़की सें आती चांद कि रोशनी कमरे मे पड़रही थि औऱ माहौल कों औऱ ज़्यादा कामुक बनारही थि! दोनोऐसे हि एक् दूसरे सें लिपटे हुए खड़ेरहे औऱ शहजादी केँ जिस्म मे अब सिरहन सि भागना शुरुआत होँ गई थि क्योंकि अब उसकी सांसे तेज होनेलगी थि!
विक्रम उसकीपीठ कों सहलाते हुए बोला:" क्याँ हुआ शहजादी आप् ऐसे क्यूं कांपरही हें!
सलमा उसकीबात सुनकर मचलउठी औऱ उसकी एक् जोरदार कंपकपी छूट गई औऱ बोलीं:"
" हमसेकुछ न् पूछिए विक्रम! बसऐसे हि अपने सीने मे छुपाए रखिए हमें!
विक्रम नें उसे अपनी बाहों मे कसेरखा औऱ अब शहजादी सलमा कि सांसे इतनी अधिक उखड़ गई थि कि उसके सीने केँ भारी भरकमगोल गोल गुम्बद विक्रम केँ सीने पर्र अपना दबावडाल रहे थें औऱ शहनाज मदहोशी मे उससेहर लम्हा औऱ ज़्यादा जोर सें लिपटने कि कोशिश कररही थि मानो उसकेबदन केँ अंदर घुसना चाहती हौ! विक्रम नें धीरे-धीरे सें उसकेकान मे फुसफुसाया:"
" शहजादी आप् मेरी बांहों मे तौ मौत भि आँ जाए तोँ कोईगम नहीं होगा!
सलमा नें उसके होंठो पर्र अपनी उंगली रख दि तोँ विक्रम नें उसकी उंगली कों चूम लिया तौ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी
" आह्ह्ह् विक्रम!!
सलमा लज्जा केँ मारे उससेअलग हौ गई औऱ बोलीं:"
" आइए नं बैठिए युवराज! सुलतानपुर कि शहजादी केँ कक्ष मे आपका स्वागत हैं! आइए मेरे शाहीबेड पऱ बैठिए!
उसकीबात सुनकर विक्रम मुस्कुरा पड़ा औऱ बोला:"
" जरूर बैठेंगे मगर मेरी भि एक् शर्त हैं शहजादी!
शहजादी नें उसकीतरफ देखा औऱ बोलीं:" हमे आपकीहर शर्त खुशी खुशी मंजूर हैं युवराज! बसऐसा कुछमत मांग लेना जोँ मेरीमान मर्यादा केँ खिलाफ होँ!
विक्रम कां दिल तड़पउठा औऱ बोला:" आपकाऐसा सोचना भि मेरे प्रेम कां अपमान हैं शहजादी!
शहजादी कों अपनी गलती कां एहसास हुआ तोँ जल्दी उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोलि:"
" मेरीबात सें आपकोठेस पहुंची होँ तोँ माफ कीजिए मुझे! बताए नाँ क्याँ शर्त हैं आपकी?
विक्रम नें उसे एक् झटके सें अपनीतरफ खींच लिया औऱ उसके चेहरे कों ऊपर उठाकर अपने सामने करके उसकी आंखो मे देखते हुए बोला:"
" जौ मे मांगूंगा आप् दे पाएंगी क्याँ शहजादी?
सलमा उसकी आंखो मे देखते हुए बोलीं:" आप् जान मांगदेख लीजिए युवराज!
विक्रम नें उसे पूरी ताकत सें अपनीतरफ खींचा करफिन सें अपनी बांहों मे भर लिया औऱ बोला:"ठीक हें फिनजब तक मे यहांहु आप् मेरीगोद मे बैठी रखेगी शहजादी!
सलमा उसकीबात सुनकर जोर सें कांपउठी औऱ उसकी पकड़ सें आजाद होकर बोलीं:"
" बेशर्म कहीं केँ ! आप् इतने शैतान होंगे देखकर लगता तोँ नं थां मुझे!
विक्रम:" सभी आपकी हुस्न कां कमाल हैं शहजादी! मे चाहकर भि स्वयं कों आपसेदूर नहींरख पारहा हूं!
इतना कहकर उसने सलमा कों आगे बढ़कर फिन सें बांहों मे भर लिया औऱ गोद मे उठाकर बेड कि तरफ लेँ चला तोँ सलमा नें भि खुशी खुशी उसकेगले मे अपनी बांहों कां हार पहना दिया औऱ जैसे हि युवराज उसे लेकरबेड पऱ चढ़ा तोँ गद्दा लगभग एक् फीट अन्दर घुस गय़ा औऱ फिन अपने एक् झटके केँ संगउपर आँ गय़ा औऱ यह देखकर विक्रम मुस्कुराते हुए बोला:"
" कमाल कां बेड हें आपका शहजादी! बिलकुल नर्म रसीले औऱ गद्देदार!
अब सलमाबेड केँ बीचों बीच उसकीगोद मे बैठी हुई थीं औऱ बोलि:" यह सुल्तानपुर कां बेड हें युवराज तोँ कमाल तोँ होगा हि!
विक्रम कि छातीअब शहजादी कि कमर सें लगी हुइ थि औऱ विक्रम बोला:" वैसे मानना पड़ेगा सुल्तानपुर कों, सच मे यहां कि हर एक् चीज बेहद कमाल कि हें शहजादी सलमा!
इतना कहकर उसनेजोर सें शहजादी कां हाथदबा दिया तौ सलमा उसकीबात कां मतलब समझते हि मुस्कुरा उठी औऱ बोलि:" विक्रम मैनेकभी नहीं सोचा थां कि मुझे इतना ज़्यादा हौ जायेगा आपसे! आप् मेरी जीवनबन गए होँ! मे इतना बेचैनी रही थि आपकेलिए कि प्रतीक्षा नहींपाई औऱ सीमा कों भेज दिया!
विक्रम:" आप् हि मेरासभी कुछ हौ सलमा! अच्छा हि किया आपने जौ सीमा कों भेज दिया वरना हम् दोनोऐसे हि तड़पते रहते!
सलमा;"हान विक्रम! आपकोपता हैं मुझेकुछ भि अच्छा नहि लगरहा थां आपके बिना! न् ठीक सें खारही थि औऱ नं हि सोपारही थि विक्रम!
विक्रम नें अपने एक् हाथ कि उंगलियों मे सलमा कि उंगलियों कों फंसा लिया औऱ बोला:"
" मेरा भि यहीहाल थां शहजादी! इतनासमझ लीजिए कि जिंदा नहीं थां बस सांसे चलरही थि! वैसे अभि कैसालग रहा हैं आपको?
सलमा उसकीबात सुनकर झूमउठी औऱ अपनी उंगलियों कां दबाव उसकी उंगलियों पऱ देतेहुए बोलि:"
" लगरहा हैं जैसेसभी कुछमिल गय़ा हैं मुझे! आपकीगोद मे बेहदचैन मिलरहा हैं मुझे!
विक्रम नें शहजादी केँ बालो सें उठती हुईँ खुशबू कों सूंघा औऱ बोला :" आपकेबाल बेहदघने औऱ हसीन हें बिलकुल रेशम जैसे शहजादी इनसे उठती हुइ खुशबू मुझे मदहोश कररही हैं!
इतना कहकर उसने अपना मुंह उसके रेशमी बालों मे घुसा दिया तौ सलमामचल उठी औऱ बोलीं:"
" आप् काबू अपनेदिल पर्र नहींरख पारहे हें औऱ इल्जाम मेरे बालो पऱ लगारहे हें! बहाने बनाना सें कोई आपसे सीखे!
विक्रम अपने दूसरे हाथ कों उसकेसिर पऱ लेँ गय़ा औऱ उसके बालो केँ जूडे कों पकड़ते हुए बोला:"
" आपकेबाल खुलदू क्याँ शहजादी? खुले बालो मे आप् रात कों बेहद हसीन लगोगी!
सलमा उसकी बाते सुनकर मचलरही थि औऱ उसकेदिल मे अरमान थें कि उसका प्रेमी उसके बालो कों सहलाए, उनसे खेले तोँ सलमा नें अपनी गर्दन हिलाकर उसे सहमति दे दि औऱ विक्रम नें उसके बालो कों खोल दिया जिससे बाल उसके सुंदर चेहरे केँ चारोओर फैलगए औऱ बोला:"
" आपको मेरीनजर न् लगे राजकुमारी! लगता हें आप् मेरीजान लेकर हि रहोगी आज!
सलमा कां हसीन चेहरा बालो सें घिर गय़ा औऱ सलमा उसकी मस्तानी बातो सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे पिघलरही थि औऱ उसनेफिन सें अपनी उंगली कों विक्रम केँ होठों पर्र रख दिया तौ विक्रम नें इसबार अपने मुंह कों खोला औऱ उसकी ऊंगली कों मुंह मे भर लिया औऱ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी
" हायराम विक्रम!! म्म्म क्याँ गजब करते होँ! यह जुल्म मत कीजिए
विक्रम नें दूसरे हाथ कों सलमा केँ पेट पर्र बांधकर उसे अपनीतरफ खींच लिया औऱ उसकी उंगली कों अपनीगरम तपती हुइ जीभ सें चूसने लगा तौ सलमा मस्ती सें बेहाल होँ गई औऱ उसकी बांहों मे पिघलती चली गई! अब तक सलमा नें अपनी उंगली कों उसके मुंह सें निकालने कि कोई कोशिश नहींकरी थि औऱ विक्रम मजे सें उसकी उंगली कों किसी कुल्फी कि तरहचूस रहा थां औऱ सलमा कां पूरा जिस्म अबजोर जोर सें कांपरहा थां औऱ विक्रम नें उत्तेजना सें मदहोश होकर उसकी उंगली मे दांतगडा दिए तौ सलमा मीठे मीठे दर्द सें कराहउठी औऱ विक्रम नें उसकी ऊंगली कों छोड़ दिया औऱ उसकी गर्दन पऱ अपनीगरम तपती हुइ सांसे छोड़ते हुए बोला:"
" आप् बेहद रसीली होँ मेरीजान सलमा! मे तौ धन्य हौ गय़ा!
सलमा उसकीगरम सांसे अपनी गर्दन पऱ महसूस करके औऱ ज़्यादा मदहोश हौ गई औऱ सिसकते हुए बोलीं:"
" बस कीजिए मेरीजान, मेरे प्रियतम, हम् बहक जायेंगे!
विक्रम नें उसकी सिसकी सुनकर अपनेहाथ कां दबाव उसकेपेट पऱ बढ़ा दिया औऱ उसके बालो गर्दन केँ बिलकुल पास अपनीगरम तपती सांसे छोड़ते हुए धीरे-धीरे सें बेहद कामुक अंदाज मे बुदबुदाया
" तौ बहक जाइए नं मेरी शहजादी सलमा! मे हूं नाँ आपको संभालने केँ लिए!
सलमा पूरीतरह मदहोश होँ गई थि औऱ उसने अपनेसिर कों पीछे करतेहुए उसके कंधे पऱ टिका दिया तोँ विक्रम कां हौसला बढ़ गय़ा औऱ उसने अपनीगरम जीभ कों शहजादी सलमा कि गर्दन पऱ लहरा दिया तौ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ विक्रम केँ हाथ कों जोर सें कस लिया तौ विक्रम नें अब अपना मुंह खोलते हुए शहजादी कि गर्दन कों अपने दांतों मे दबोच लिया औऱ हल्का हल्का काटने लगा तोँ सलमा उत्तेजना सें कांपती हुइ जोर सें थरथरा उठी औऱ विक्रम नें जोर सें उसकी गर्दन कों चूस लिया!
सलमा मस्ती सें सिसकउठी विक्रम धीरे-धीरे सें उसकेकान मे फुसफुसाया"
:"आप् एक् काम कीजिए नां मेरीतरफ मुंह करके मेरीगोद मे बैठिए नं मेरीजान सलमा!
इतना कहकर विक्रम नें उसे हल्का सां उठाया औऱ सलमा किसी रिमोट सें चलने वाली मशीन कि तरह उसकीगोद मे बैठ गई औऱ दोनो कि आंखे टकरा गई तोँ विक्रम नें देखा कि सलमा कां चेहरा पूरीतरह सें लज्जा औऱ उत्तेजना सें लालहुआ थां औऱ उसकी आंखे थोड़ी सि फैल गई थि जिसमे लालरंग केँ कामुक डोरेसाफ नजर आँ रहे थें ! विक्रम नें उसे अपने लगभगकर लिया औऱ विक्रमउसकी आंखो मे देखते हुए बोला:"
" सलमा आपकोकुछ बुरा तौ नहींलग रहा हैं नं मेरीजान!
प्रियतम कि गोद मे बैठी मचलती हुइ सलमा कों भला क्याँ बुरालग सकता थां तोँ सलमा उससे कसकर लिपट गई औऱ बोलि:"
" विक्रम आप् बहोत प्यारे हौ मेरीजान! मुझे कसकर समेट लीजिए अपनी बांहों मे !!
विक्रम नें उसकीकमर पऱ अपने दोनो हाथो कों लपेट दिया औऱ उसे पूरीतरह सें अपने सीने मे घुसा सां लिया औऱ बोला
" अगर आपकी इजाजत होँ तोँ आपका बुर्का निकाल दू क्याँ शहजादी सलमा!
सलमा पर्र मदहोशी कां ऐसा सुरूर चढ़ा थां कि उसनेकुछ भि कहना जरूरी नहि समझा औऱ अपनी टांगो कों फैलाकर विक्रम कि कमर पर्र लपेट दिया तोँ विक्रम नें अपने हाथो कों उसकी गर्दन पऱ लें जाकर बुर्के कि सुकून कों खोल दिया औऱ सलमा कां उपरी हिस्सा अब केवल एक् बेहदकसे हुएसूट विक्रम कि आंखो केँ आगे आँ गय़ा औऱ विक्रम कों अब सलमा कि गोलगोल गुम्बद कि गोलाई औऱ मोटाई कां सही एहसास हुआ औऱ उसने सलमा कों जोर सें अपनी बांहों मे कस लिया तोँ बेकरार सलमा नें आपको ढीला छोड़ दिया तोँ एक् झटके केँ संग दोनोबेड पऱ लुढ़क गए औऱ अब सलमा केँ उपर विक्रम पूरीतरह सें चढ़ाहुआ थां औऱ मदहोश सलमा उसकीकमर मे अपनी बांहों कों लपेटे हुए पड़ी थि! कमाल कि जोड़ी थि दोनो कि लंबाई चौड़ाई बिलकुल बराबर थि एकदमसिर सें लेकरपैर तक! सलमा कि जोरजोर सें चलती हुईँ सांसों केँ कारण विक्रम कों अपने सीने मे उसकी गोलाईयों कां सख्त एहसा होँ रहा थां औऱ विक्रम नें अब उसकी गर्दन कों अपनीजीभ सें चाटना शुरुआत कर दिया तौ सलमाजोर जोर सें कांपने लगी जिससे उसका पूरा जिस्म हिलने लगा तोँ विक्रम नें उसकी टांगो कों अब अपनी टांगो मे जोर सें कस लिया औऱ पूरी लंबाई मे अपनीजीभ निकाल कर सलमा कि पतली सुराहीदार गर्दन कों चूसने लगा तौ सलमा मछली कि तरह मचलती हुईँ उसकीपीठ मे अपने नाखून गड़ा दि औऱ विक्रम नें उसकी गर्दन कों अपने दांतों मे भरकर हल्का हल्का काटना शुरुआत होँ दिया औऱ सलमा सें अब बर्दाश्त नहि हुआ औऱ सिसकते हुए बोलीं:"
" आआआह्हह मत कीजिए मेरे प्रियतम! आजमर जाऊंगी मे!
विक्रम नें अपने जलतेहुए होठों कों अब उसकेगाल पऱ रख दिया औऱ चूमकर मदहोशी सें बोला:"
" अह्ह्ह्ह्ह् मत रोकिए मुझे शहजादी! हम्म मेरी सलमा आपकेगाल कितने अधिक मीठे औऱ नर्म रसीले हें!
इतना कहकर विक्रम नें फिन सें उसके एक् गाल कों इसबार मुंह मे भर लिया औऱ चूसने लगा तौ सलमा कां बदन उत्तेजना केँ मारे झटके खानेलगा औऱ गद्देदार बैड केँ कारण दोनो कां शरीरउपर नीचे होनेलगा मानो चुदाई होँ रही होँ औऱ यह सोचते हि सलमा केँ गोलगोल गुम्बद पूरीतरह सें तनकर अकड़गए औऱ उसकी बुर मे गीलापन आँ गय़ा तोँ सलमा नें तड़पते हुए दोनो हाथों सें विक्रम केँ चेहरे कों पकड़ा औऱ उसके एक् गाल कों चूम लिया तोँ विक्रम नें बेकाबू होकर अपने जलतेहुए होठों कों सीधे सलमा केँ नर्म रसीले नाजुक जूसी होंठों सें जोड़ दिया औऱ दोनो हि बेकाबू होकर एक् दूसरे केँ होंठ चूसने लगे! विक्रम कभीउपर वाले होंठ कों चूसता कभीकभी नीचे वाले होंठ कों! सलमा भि मदहोशी सें आंखेबंद किए अपने होंठ चुसवा रही थि औऱ देखते हि देखते सलमा नें मदहोश होकर अपना मुंहखोल दिया औऱ विक्रम कि जीभ उसकीजीभ सें मिल गई औऱ विक्रम नें उसकीजीभ कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ सलमा नें मस्ती सें अपनी रसीली लसलसी जीभ कों बाहर् निकाल दिया औऱ विक्रम उसकीजीभ कों चूसने लगा औऱ सलमा केँ मजे कि कोई सीमा नहीं थि!।।
। विक्रम उसकीजीभ कों कभी होंठो सें चूसता तौ कभी अपनीजीभ सें उसकारस चूसता! सलमा केँ होंठो औऱ जीभ सें बेहद रसीला औऱ मादकरस निकलरहा थां औऱ विक्रम किसी प्यासे भंवरे कि तरह उसकारस चूसरहा थां! दोनो कि सांसे बुरीतरह सें फूल गई थि मगरकोई भि पीछे हटने कों रेडी नहि थां औऱ खासतौर सें विक्रम क्योंकि सलमा केँ होंठ औऱ जीभ उसके मुंह मे स्पंजी रसगुल्ले कि तरहघुल रहे थें! आखिरकार लगभग पांच मिनट केँ बाद दोनो कि किसटूट हि गई औऱ सलमा लज्जा नें आंखेबंद किए पड़ीरही औऱ विक्रम नें फिन सें उसके होंठो कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ शहजादी सलमा भि कहां पीछे रहने वाली थि औऱ फिन सें दोनो कि जीभ एक् दूसरे सें गुत्थम गुत्था होनेलगी औऱ विक्रम अपने पांव कि उंगलियों सें उसके पांव कि उंगलियों कों सहलारहा थां औऱ दोनोकिस कर हि रहे थें कि शहजादी केँ कक्ष पर्र उसकी एक् नौकरानी नें दस्तक दि औऱ बोलीं:"
" आपके उठने कां वक्त हौ गय़ा हैं शहजादी ! आपके नहाने कां गरम पानी शाही हमाम मे पहुँचा दिया गय़ा हैं!
आवाज़ सुनकर दोनो नें एक् दूसरे कि तरफ देखा औऱ किसफिन सें टूट गई औऱ सलमा नें देखा कि घड़ी मे सुभह केँ पांचगए थें तोँ उसे हैरानी हुईँ कि इतनी जल्द पूरीरात केसे निकल गई उसेपता हि नहींचला!
सलमा:" मुझे नहाने जानां होगा विक्रम! आप् यहीं रुकिए मे आतीहु थोड़ी देरबाद!
विक्रम:" मुझे जाने दीजिए शहजादी नहीं तौ देर होँ जायेगी बहोत!!
सलमा:" आप् ऐसेदिन मे उस रास्ते सें नहीं निकल सकते युवराज! मे आती हूं उसकेबाद बात करते हें!
विक्रम नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ अपनेगले लगाते हुए बोला:"
" मे भि चलू क्याँ आपकेसंग नहाने केँ लिए शहजादी?
सलमा नें उसकागाल चूम लिया औऱ फिनउसे बेड पर्र धक्का देतेहुए बोलि:" बहोत शैतान होँ गए होँ आप् एक् हि रात मे! चलोबेड पर्र आरामकरो!
इतना कहकर वोँ मुस्कुराती हुइ बाहर् निकल गई औऱ विक्रम बेड पऱ लेटकर उसकेआने कां प्रतीक्षा करनेलगा!
थोड़ी देरबाद सलमा केँ कक्ष कां दरवाजा खुला औऱ सलमा एक् हसीन राजसी गाउन मे नजरआई औऱ नहाने केँ बाद वोँ बेहद आकर्षक लगरही थि बिलकुल खिलेहुए गुलाब कि तरह! वोँ चलती हुई विक्रम केँ पासआई औऱ विक्रम आंखे फाड़कर बसउसे हि देखता रहा!
विक्रम नें सलमा कों पहलीबार बुर्के केँ बिना देखा थां औऱ आज पहलीबार उसे सलमा केँ बदन कि सही बनावट कां अंदाजा हुआ औऱ वोँ उसकी हुस्न मे खोयाहुआ थां वोँ सलमा उसकेठीक सामने खड़ी होँ गई औऱ बोलि:"
" कहां खोगए युवराज?
विक्रम उसकी आंखो मे देखते हुए बोला:"बस देखरहा थां कि शहजादी सलमा बुर्के केँ बिना ज़्यादा सुंदर लगती हें!
उसकीबात सुनकर सलमा शर्मा गई औऱ उसकेगले लगाकर बोलि:" आप् नं अपनी छेड़छाड़ सें बाज नहि आते विक्रम!
विक्रम नें उसेफिन सें अपनी बांहों मे समेट दिया औऱ इसबार उसे सलमा केँ शरीर केँ स्पर्श कां बेहद अच्छे सें एहसास हौ रहा थां औऱ विक्रम नें सलमा कां एक् गालचूम लिया औऱ बोला:"
" सलमा आप् मेरे सामने ऐसे हि अब बिना बुर्के केँ आया करनाजब भि मे आपसे मिलने केँ लिएआऊं!
सलमा उसके बालो कों सहलाते हुए बोलीं:" सभी समझती हूं मे आपकी बाते क्यूं आप् ऐसाबोल रहेहों मुझे!
विक्रम नें उसके हसीन चेहरे कों दोनो हाथों मे भर लिया औऱ बोला:" अच्छा जीजरा हमे भि तोँ बताओ क्याँ समझ मे आया आपको शहजादी!
सलमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल हौ गई औऱ बोलीं:"
" जाइए मे आपसेबात नहीं करती विक्रम!
विक्रम नें एक् हाथ उसकेसिर केँ पीछे लेँ जाकर उसके खुले बालो कों पकड़कर उसका चेहरा ऊपरउठा दिया औऱ अपने होंठो कों फिन सें उसके होंठो सें चिपका दिया औऱ सलमा मदहोश होकर उससे लिपट पड़ी औऱ विक्रम नें उसके होंठो कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ देखते हि देखते दोनो कि जीभफिन सें गुत्थम गुत्था होँ गई औऱ विक्रम केँ हाथ उसकीकमर कों सहलाते हुएहुए नीचे कि तरफबढ़ गए तोँ सलमा केँ शरीर मे सिरहन सि दौड़ गई औऱ वोँ पूरी कसकर युवराज सें लिपट गई औऱ मस्ती सें उसकीजीभ कों चूसने लगीं तौ विक्रम नें अपनीजीभ कों सलमा केँ मुंह केँ अंदरडाल दिया औऱ सलमा नें उसकीजीभ कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ विक्रम केँ हाथ उसके चौड़े, गुदाज औऱ ठोस पिछवाड़े कि गोलाई पऱ आँ गए औऱ जैसे हि विक्रम नें उसके नितंबों कों सहलाया तोँ सलमा नें अपने आपको उसकी बांहों मे ढीला छोड़ दिया औऱ उसकीजीभ कों पूरी बेशर्मी दिखाते हुए चूसने लगी औऱ विक्रम नें अब खड़े खड़े हि सलमा कों गोद मे उठा लिया औऱ सलमा कि गांड़ केँ उभारों कों जोर सें मसल दिया तोँ सलमा नें पूरीतरह सें बेकाबू होकर अपनी टांगो कों उसकीकमर मे लपेट दिया जिससे उसका गाउन उसकी गांड़ पर्र सें हट गय़ा औऱ विक्रम नें जैसे हि उसकी नंगी गांड़ कों अपने हाथों मे भरा तौ सलमा कां बचाहुआ धैर्य भि जवाबदे गय़ा औऱ उसने विक्रम कि जीभ कों अपने दांतों मे दबा लिया औऱ दोनो केँ मुंह सें एक् संग मस्ती भरीअहह निकल पड़ी औऱ सलमा एक् झटके केँ संग उसकीगोद सें उतर गई औऱ लंबी लंबी सांसे लेनेलगी! उसकी उठती गिरती हुइ चूचियां अपने पूरे शबाब पऱ थि औऱ विक्रम उसकीतरफ बढ़ा तौ फिन सें दरवाजे पऱ दस्तक हुइ तोँ सलमा विक्रम कि आंखो मे देखते हुए बोलीं:"
" क्याँ हुआ?
औरत सैनिक:" आपका ब्रेकफास्ट रेडी होँ गय़ा हैं! इजाजत होँ तोँ मे खाने कि मेज पऱ लगादू क्याँ?
सलमा नें आगे बढ़कर विक्रम कां हाथ पकड़ लिया औऱ बोलि:"
" आज मे अपने कक्ष मे हि ब्रेकफास्ट करूंगी! लाओ मुझेयही देदो!
इतना कहकर सलमा नें विक्रम कों एक् पर्दे केँ पीछे किया औऱ बाहर् जाकर ब्रेकफास्ट लेकर अंदर आँ गई औऱ फिन विक्रम कों अपने हाथों सें खिलाया औऱ उसकेबाद विक्रम बोला:"
" अबहमे इजाजत दीजिए शहजादी!
सलमा:" आपकाऐसे जानां सही नहीं होगा युवराज! हम् स्वयं आपको अपनेसंग लेकर जाएंगे!
विक्रम:" अच्छा जीभला वोँ केसे शहजादी?
सलमा नें जोर सें ताली कों बजाया औऱ बाहर् सें आवाज़ आई:" हुक्म करो शहजादी?
सलमा:" हम् थोड़ी देरबाद नदी केँ किनारे घूमने जायेंगे! हमारे लिए एक् घोड़ा बग्गी कां इंतजाम कियाजाए!
उसकेबाद सलमा विक्रम सें बोलि:"आप् पहलीबार हमसे मिलने आए हें विक्रम तोँ हमारे संगशान सें बग्गी मे जायेंगे!
इतना कहकर सलमा अपना बुर्का पहनने लगी औऱ जाने केँ लिए सजधजकर हौ गई तौ विक्रम नें उसेफिन सें अपनी बांहों मे कस लिया औऱ उसकेबाद सलमा सावधानी सें विक्रम कों अपनेसंग लेकर अस्तबल कि तरफचल पड़ी औऱ विक्रम कों वहां खड़ी घोड़ा बग्गी मे छुपा दिया औऱ थोड़ी देरबाद हि सैनिक औऱ सीमा भि आँ गई औऱ शहजादी बग्गी केँ अंदरबैठ गई औऱ विक्रम नें बिना मौका गंवाए उसे अपनी बांहों मे समेट लिया औऱ सलमा भि उससे लिपटती चली गई औऱ विक्रम अब प्रेम सें कभी उसकेहाथ कों चूमता तोँ कभी उसके बालो कों संवारता! वही सलमा भि कभी उसकेगाल कों चूम लेती तोँ कभी उसके माथे कों चूमरही थि! बग्गी धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगेबढ़ रही थि औऱ आगे पीछे सैनिक घोड़े पर्र सवार होकरचल रहे थें! जल्द हि बग्गी सुल्तानपुर कि सीमा सें बाहर् निकल गई औऱ नदी कां किनारा आने हि वाला थां तौ सलमा कि आंखेभर आई औऱ बोलीं:
" जानां जरूरी हैं क्याँ युवराज?
विक्रम नें उसके चेहरे कों अपने हाथों मे थाम लिया औऱ बोला:"
" मन तोँ मेरा भि नहींकर रहा शहजादी मगर मे जल्द हि फिन आऊंगा!
सलमा उसकी आंखो मे देखते हुए बोलीं:" मे प्रतीक्षा करूंगी आपका धड़कते दिल केँ संग विक्रम!
विक्रम नें उसके एक् गाल कों मुंह मे भरकरचूस लिया औऱ बोला:"
" अधिकदिल मत धड़काना शहजादी अपना नहीं तौ बहोत कुछ धड़क जायेगा!
उसकीबात कां मतलब समझकर शहजादी सलमा मुस्कुरा उठी औऱ उसकागाल चूमते हुए बोलीं:" अह्ह्ह्ह क्याँ करू आपका!! मे परसोमहल केँ पीछेबने हुए शाही पार्क मे आप् कां फिन सें प्रतीक्षा करूंगी विक्रम!
विक्रम:" मे आऊंगा शहजादी मगर एक् वादाकरो कि मुझे बिना बुर्के केँ मिलोगी!!
सलमा कां मुंह लज्जा सें लाल होँ गय़ा औऱ विक्रम सें कसकर लिपट गई औऱ बोलि:"
" ज़्यादा छेड़छाड़ तोँ नहीं करोगे नाँ मेरेसंग!
विक्रम नें उसके होंठो कों चूम लिया औऱ बोला:" मेरी इतनी हिम्मत कहां जोँ शहजादी सलमा केँ संग छेड़ छाड़कर सकू!
दोनोबात कर हि रहे थें कि बग्गी नदी किनारे रुक गई औऱ सलमा बोलीं:" मे अबनदी कि तरफ जाऊंगी औऱ सभी सैनिक मेरेसंग जाएंगे! आप् धीरे-धीरे पीछे सें चले जानां युवराज!
विक्रम नें उसे प्रेम सें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोला:"
" सलमा आपकासंग गुजारी यहरात मुझे मरतेदम तक याद रहेगी!
सलमा नें उसकीबात सुनकर उसके होंठो पर्र उंगली कों रख दिया तोँ विक्रम नें उसकी उंगली कों चूस लिया औऱ सलमा बोलीं:"
" भूलना मत विक्रम! मे परसोरात 11 बजे आपका प्रतीक्षा करूंगी!
इतना कहकर वोँ विक्रम कां हाथ चूमकर बग्गी सें बाहर् निकल गई औऱ सारे सैनिक उसके पीछेचल पड़े औऱ विक्रम बग्गी सें उतरा औऱ उदयगढ़ कि तरसचल पड़ा!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Aage kya hua? Next part padhiye
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