शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम उदयगढ़ पहुँचा तौ उसे देखते हि राजमाता गायत्री देवी नें सुकून कि सांसली क्योंकि रात सें सब लोगो कि यही चिंता सताएजा रही थि कि युवराज कहां गायब होँ गए हें!
राजमाता:" पुत्र मे बता नहि सकती आपको देखकर मुझे कितनी खुशी हुई हें! बिना बताए कहां चलेगए थें आप् ?
विक्रम किस मुंह सें बताता कि रात वोँ अपनी शहजादी सलमा केँ पास थां तोँ बात कों घुमाते हुए बोला:" राज्य मे हि थां राजमाता, बसदेख रहा थां कि सभीठीक तौ चलरहा हैं नं!
राजमाता:" हमने आपकोहर स्थान ढूढने कि कोशिश करीमगर आप् कहीं नहि मिले!आगे सें आप् प्रतिज्ञा कीजिए कि हमे बिना बताए कहीं नहीं जायेंगे!
विक्रम:" राजमाता हम् कहीं नहि गए थें बसनदी केँ किनारे घूमने गए थें! आपको तौ पता हें कि हमेनदी केँ किनारे घूमना कितना पसन्द हें!
राजमाता:" कोईबात नहीं बेटा! बसआगे सें जाओ तोँ हमेबता देना ताकि आपकी सुरक्षा केँ लिए सैनिकों कों भेजाजा सके!
विक्रम नें उनकीहां मे सिर हिलाया औऱ फिन अपने कक्ष मे चला गय़ा औऱ नहाने केँ बाद थोडा कुछ खाकर नींद केँ आगोश मे चला गय़ा! साम कों लगभगचार बजेउठा औऱ पताचला कि आजनदी केँ किनारे हरसाल लगने वाला मेलालगा हुआ हें तोँ उसनेअजय सें कहा:"
" अजययह मेला अच्छा लगता हें न् ? मैने सुना हैं कि सब राज्यों केँ लोग यहांआते हें !
अजय:" बिलकुल युवराज नदी केँ किनारे बसेसब राज्य इस मेले मे शामिल होते हें क्योंकि नदी केँ पानी सें हि सब राज्यों मे खेती होती हें ! वैसे युवराज अगर आपकी आज्ञा हौ तोँ एक् बात पूछना चाहता हूं!
विक्रम:" बोलोअजय ?
अजय:" आपने राजमाता कों तौ बता दिया कि रात आप् नदी केँ किनारे आए थें मगर मे स्वयं आपकोकम सें कम 5 बारनदी केँ किनारे देखने आया थां मगर आप् नहीं थें यहां!
विक्रम नें उसकीतरफ देखा औऱ मुस्कुरा कर बोला:"
" हमारी बात कां यकीनकरो अजय! हम् झूठ क्यूं बोलने लगेभला आपसे?
अजय:" माफी चाहता हूं युवराज मगर एक् मम्मी केँ ममतामई दिल कों आप् ऐसाबोल केँ तसल्ली दे सकते हौ मगर मुझे नहीं!
विक्रम नें कुछ नहींकहा औऱ थोड़ी देरचुप रहा!अजय नें भि अपनीतरफ सें कुछ नहीं बोला औऱ विक्रम बोला:"
" अजय हमारे संगसाम कों मेला देखने चलोगे न्?
अजय:" बिलकुल युवराज! आपका हुक्म सिर आंखों पऱ!
उसकेबाद लगभगसाम कों छहबजे दोनो घोड़ों पऱ सवार होकर मेला देखने केँ लिए पहुंच गए! मेला बहुतदौर दूर तक लगाहुआ थां औऱ बहुत सारी मिठाई औऱ चाट कि दुकान केँ संगसंग झूले भि लगेहुए थें! अजय विक्रम केँ संग उसकेसाए कि तरह उसकी सुरक्षा मे थां, वैसे तौ मेले मे कोई लड़ाई नहीं होती थि मगरफिन भि कभीकभी कोई दुश्मनी निकालने केँ लिएकुछ भि कर सकता थां!
विक्रम कि नजरे सलमा कों तलाशरही थि कि कहीं वोँ भि तोँ मेला देखने केँ लिए नहींआई हुईँ हैं औऱ उसे निराशा हि हाथलग रही थि! रात केँ लगभग 10 बजगए थें औऱ विक्रम कुश्ती केँ अखाड़े मे पहुंच गय़ा औऱ देखा कि एक् बेहद काला मोटा तगड़ा राक्षस जैसा दिखने वाला पहलवान जिसका नाम सगोला थां औऱ सब पहलवानों कों हरा दिया थां औऱ अभि एक् पहलवान कों खिलौने कि तरहपटक रहा थां! विक्रम सगोला कि ताकत सें बहुत प्रभावित हुआ औऱ बोला :"
" अजय क्यूं न् इसे अपनी सेना मे भर्ती कियाजाए!
अजय:" नामुमकिन हैं युवराज! सच तोँ हें कि यह पिंडारी समुदाय सें हें औऱ बेहद ताकत होने केँ संगसंग खूंखार भि हें! यहअब तक अखाड़े मे उदयगढ़ केँ लगभग 12 पहलवानों कि रीढ कि हड्डी तोड़ चुका हें!
विक्रम:" इसकी इतनी हिम्मत! हम् इसे अभि धूलचटा देंगे!
अजय:" नहीं युवराज, अभि सही वक्त नहींआया हें! इससे जरूर बदला लिया जायेगा!
विक्रम नें उसकीबात सुनकर कुछ नहींकहा औऱ खामोशी सें इधरउधर देखने लगा औऱ तभी एक् बड़ी सि बग्गी आकर रूकी औऱ विक्रम नें जैसे हि उसमे सीमा कों देखा तोँ उसकी आंखे खुशी सें चमकउठी औऱ उसे यकीन हौ गय़ा कि शहजादी भि आज मेला देखने केँ लिएआई हुइ हैं! वही सागोला नें एक् दूसरे पहलवान कों भि पटक दिया थां औऱ सभीलोग सगोला कि जयकररहे थें औऱ सलमा जैसे हि पहलवान कों देखने केँ लिए बाहर् झांकी तोँ उसकी एक् झलक मिलते हि विक्रम कां दिल खुशी सें उछल पड़ा ! सीमा कि नजर विक्रम पर्र पड़ी तौ उसने शहजादी कों विक्रम केँ बारे मे बताया तौ शहजादी नें भि विक्रम कों तरफ देखा औऱ जैसे हि दोनो कों नजरे मिली तोँ शहजादी नें उसे बेहद प्यारी मुस्कान दि !
दोनो कि नजरेबार बारआपस मे टकरारही थि औऱ एक् दूसरे सें इशारों हि इशारों मे बहुत बाते हौ रही थि! सागोला कि जय जयकार केँ नारे शहजादी कों बिलकुल भि अच्छे नहींलग रहे थें क्योंकि दुनिया कि हर महिला चाहती हें कि उसका पति दुनिया कां सबसे सुंदर औऱ ताकतवर इंसान हौ औऱ फिन शहजादी स्वयं जीती जागती कयामत थि तौ उससे बर्दाश्त नहि हुआ औऱ उसने विक्रम कों सगोला सें कुश्ती लड़ने कां इशारा किया !!
विक्रम नें अजय सें कहा:"
" अजय मे आजइस सगोला कों सबक सिखाकर हि रहूंगा! मेरे होतेहुए इसकीजय जयकार मेरे कानो कों पीड़ा देरही हैं!
अजय:" युवराज अगरऐसी बात हैं तोँ ठीक हें फिन मे इससे कुश्ती करताहु!
विक्रम:" नहींअजय, एक् युवराज होने केँ नाते हमारा फर्ज बनता हैं कि हम् कुश्ती लड़े औऱ इसके अपराधो कि सजाइसे दे!
अजय:" मेरे होतेहुए आपको इसकी जरूरत नहि हैं युवराज! आप् फिक्र मत कीजिए इसे मे सजा दूंगा!
विक्रम नें अब गुस्से सें अजय केँ देखा औऱ कहा:"अजय क्याँ आपकोऐसा लगता हें कि हम् इससे कमजोर हें ?
अजय:"माफ कीजिए युवराज मे ऐसा नहि सोचरहा बस मेरे होतेहुए आपको कष्ट न् हौ बस इसलिये कहरहा थां!
विक्रम:" हम् इससे कुश्ती करेंगे औऱ यह आपके युवराज कां हुक्म हें पालन कियाजाए!
अजय नें हैरानी सें अब विक्रम कि तरफ देखा औऱ बोला:" जैसी आपकी आज्ञा युवराज! मे सभी प्रबंध करता हूं!
थोड़ी हि देरबाद विक्रम अखाड़े मे सागोला केँ सामने खड़ाहुआ थां औऱ सागोला उसे देखकर मुस्कुरा रहा थां मानोउसे बेहद आसान शिकार मिल गय़ा होँ क्योंकि युवराज देखने मे बेहद हसीन थां!
सलमा बग्गी सें टकटकी लगाए सांसे थामे विक्रम कों देखरही थि औऱ सागोला नें विक्रम पर्र दांव लगाया औऱ विक्रम नें उसका दांवबचा लिया औऱ फिन तेजी सें एक् झटका सागोला कों दिया जिससे वोँ जमीन पर्र गिर पड़ा औऱ शहजादी केँ होंठो पऱ मुस्कान आँ गई वहींअजय दिल थामेइस मुकाबले कों देखरहा थां!
किसी जंगली भैंसे कि तरह गुस्से सें सागोला खड़ा औऱ सीधे विक्रम कि छाती पर्र हमला किया जिससे उसके सीने पऱ पड़ी हुईँ कमीजफट गई औऱ उसका चौड़ा ताकतवर सीना पूरीतरह सें नंगा हौ गय़ा क्याँ जिस पर्र हल्के सें सागोला केँ नाखूनों केँ निशान भि पड़गए थें! सागोला नें फिन सें विक्रम पऱ हमला किया औऱ झटके केँ संग विक्रम कों पटक दिया औऱ उसकेऊपर सवार होँ गय़ा औऱ उसके दोनो कंधो कों जमीन सें मिलाने कि कोशिश करनेलगा मगर विक्रम भि अब अपनी पूरी ताकतलगा रहा थां जिससे उसकी भुजाए मछली कि तरहफूल गई थि औऱ उसकेहाथ कि नसेखून भर जाने केँ कारण पूरीतरह सें अकड़कर तन गई थि! सागोला दांत भींचे पूरी ताकतलगा रहा थां औऱ विक्रम नें एक् नजर सलमा कि तरफ देखा औऱ फिन पूरी ताकत सें सागोला कों पकड़ लिया औऱ उसकी भुजाए इतनी अधिकफूल गई थि कि उसकी भुजा पऱ बंधी हुईँ मोतियों कि मालाटूट कां बिखर गई औऱ विक्रम नें अपनी बाजुओं मे भरी हुइ ताकत कां उत्कृष्ट प्रदर्शन करतेहुए सागोला कों दूर उछाल फेंका औऱ उसकेबाद सागोला खड़ा नहीं होँ सका औऱ भीड़अब विक्रम कि जय जयकार कररही थि औऱ सलमा केँ चेहरे पर्र मानो सारी दुनिया कि खुशी उमड़आई थि औऱ उसकामन कररहा थां कि अभि जाकर विक्रम सें लिपटजाए मगर मर्यादा केँ चलते मजबूर थि! अजय भि बेहदखुश थां औऱ विक्रम अखाड़े सें निकलआया तौ अजय नें उसे बधाई औऱ विक्रम बोला:"
" यार हमारे लिए थोड़े पानी कां प्रबंध तौ कीजिए!
अजय पानी लेने केँ लिए गय़ा औऱ विक्रम तेजी सें सीमा कि तरफबढ़ गय़ा औऱ उसे पीछेआने कां इशारा किया तोँ सीमा मौका देखकर आँ गई औऱ उसे देखते हि हल्की सि मुस्कान देती हुई बोलि:"
" आपने कमालकर दिया युवराज!
विक्रम उतावला सां होतेहुए बोला:" सीमा सलमा सें कहो कि मे उससे मिलना चाहता हूं!
सीमा उसकी बेचैनी महसूस करके बोलि:"मगर यह मुश्किल होगा युवराज क्योंकि उसकेसंग मे सैनिक औऱ कुछ औऱ लोग भि हें युवराज!
विक्रम:" किसीतरह शहजादी कों मेसेज दीजिए कि मे उनसे मिलना चाहता हूं! मे यहीइस झूले केँ पीछे उनका प्रतीक्षा करूंगा!
सीमा:" मे कोशिश करूंगी युवराज, मगरयह काम बहुत मुश्किल भरा होगा!
विक्रम:" आप् बस सलमा तक मेरा पैगाम पहुँचा दीजिए! वोँ मुश्किल कों स्वयं आसानकर लेगी सीमा!
सीमाचली गई औऱ विक्रम झूले केँ पीछे कि तरफचला गय़ा जहां हल्का अंधेरा थां ! सीमा सलमा केँ पास बग्गी मे पहुंच गई औऱ यहबात सलमा कों बताई औऱ सलमा विक्रम कि झलक पाने केँ लिए तड़पउठी औऱ बोलि:"
" सीमा हम् जरूरी जायेंगे! तुम् एक् कामकरो जल्द सें हमारा यह हिजाब पहनलो औऱ अपनासूट हमेदो!
सीमा उसकीसभी योजना समझ गई औऱ बोलि:" मगर शहजादी यहकाम बहोत सावधानी सें करना!फंस गए तोँ बहोत दिक्कत हौ जाएगी!
सलमा:" आप् फिक्र न् करें सीमा! हम् बस युवराज कि एक् झलक देखकर वापिस आँ जायेंगे!
सीमा उसकाहाथ पकड़कर बोलीं:"अगर झलक हि देखनी हैं तौ वोँ तोँ आप् बग्गी सें भि देख हि ली हैं शहजादी!
सलमा:" मुझे अधिक ज्ञान मतदो! इतने अंधेरे मे दूर सें भला केसे अच्छे सें देख पाऊंगी!
सीमा नें अपनासूट उतारकर उसेदे दिया औऱ उसके कपड़े पहनलिए! सलमा नें उसकासूट पहना तोँ उसके शरीर पऱ फंस गय़ा क्योंकि सीमा उसके मुकाबले थोड़ी सि दुबली थि! सूट पूरीतरह सें सलमा केँ शरीर पर्र कस गय़ा थां औऱ उसके शरीर केँ शानदार कटाव उतार चढ़ाव साफनजर आँ रहे थें! सलमा नें अपनेबदन पऱ एक् चादर लपेटी औऱ बग्गी झूले कि तरफचल पड़ी तौ सीमा बोलीं:"
" केवल देख्ना हि शहजादी युवराज कों! यह मर्द बड़ेतेज होते हें कहीं आपको युवराज पकड़कर गले सें नं लगा लेँ अपने!
सलमा उसकीबात सुनकर शर्मा गई औऱ बोलीं:" चुप बेशर्म, कुछ भि बोल देती हें जौ मुंह मे आता हैं तेरे सीमा! विक्रम ऐसे नहीं हैं
सीमा:"अरे इसमें बेशर्मी कि क्याँ बात हुईँ भला औऱ मे जानती हु सारे मर्द एक् जैसे होते हें! देख्ना अगर मौका मिला तोँ तुझेही गले लगाए बिनाआने नहीं देंगे वोँ!
सीमा कि बातेसुन कर सलमा कों रोमांच मेहसूस होँ रहा थां औऱ सलमाकहो:" थोड़ी सि लज्जा कर सीमा! इतनी बेहयाई अच्छी नहीं होती!
तभी बग्गी झूले केँ सामने आँ गई औऱ सलमा मौका देखकर खुले सें उतर गई औऱ ध्यान पूर्वक उधरइधर देखते हि भीड़ मे गुम होँ गई! सलमा लोगो कि भीड़ मे विक्रम कों तलाशकर रही थि औऱ थोड़ी हि देरबाद वोँ झूले केँ पीछे केँ हिस्से मे पहुंच गई जहां विक्रम खड़ाहुआ थां! विक्रम कों देखते हि उसकेदिल कों बड़ाचैन मिला औऱ उसकेपास चली गई तौ विक्रम नें जैसे हि उसे पहचाना तौ एक् झटके केँ संग उसकाहाथ पकड़ा औऱ बिलकुल झूले केँ टेंट केँ पीछे पहुंच गय़ा जहां किसी केँ आने कि संभावना बेहदकम थि! चोरी छिपे मिलने मे सलमा कों भि अजीब सां रोमांच मेहसूस हौ रहा थां औऱ विक्रम नें अपनी बांहे फैलाई तौ सलमा उसके सीने सें लग गई औऱ दोनो एक् दूसरे सें ऐसे लिपट पड़े मानो सैकड़ों सालों केँ बादमिल रहे हौ! दोनो एक् दूसरे कों औऱ ज़्यादा जोर सें अपने अंदर समेटने कां प्रयास कररहे थें औऱ विक्रम नें सलमा केँ चेहरे कों दोनो हाथों मे भरा औऱ उसकेगाल कों चूमने लगा तोँ सलमा नें उसकेहाथ कों चूमा औऱ उसकी कमीज हटाकर उसकी छाती पऱ हाथफेर कर देखा औऱ बोलि:
" आपकोचोट तोँ नहींआई नं युवराज!
विक्रम उसकी नाजुक कोमल नर्म उंगलियों कां एहसास अपनी छाती पऱ महसूस करके रोमांच सें भर गय़ा औऱ बोला:"
" बहोत ज़्यादा चोटआई हैं शहजादी! थोडा सहला दीजिए नां आप् अच्छा लगेगा मुझे!
सलमा उसकी छाती पऱ प्रेम सें उंगलियां फेरती हुई बोलीं:"
" जब उसने आपको पटका तोँ मे तोँ डर हि गई थि युवराज एक् समय केँ लिए!
विक्रम उसकी आंखो मे देखते हुए बोला:" क्यूं आपको मेरी ताकत पऱ भरोसा नहि थां क्याँ सलमा?
सलमा नें उसकी छाती कों चूम लिया औऱ फिन बोलि:" भरोसा न् होता तौ लड़ने केँ लिए क्यूं बोलती आपको! अच्छा मे चलती हूं युवराज किसी नें देख लिया तौ गजब होँ जायेगा!
विक्रम नें फिन सें उसकाहाथ पकड़कर अपनीतरफ खींचा तौ सलमा कां दुपट्टा उसकेहाथ मे आँ गय़ा औऱ सलमा पहलीबार उसके सामने बिना दुपट्टे केँ आँ गई औऱ विक्रम कि अपनी नजरे उसकेगोल गोल गुंबदों कि गहराई नापने लगी तोँ सलमा नें अपने दोनो हाथों कों अपनी गहराई पऱ रख दिया औऱ लज्जा केँ मारेपलट गई! विक्रम आगे बढ़ा औऱ सलमा कों पीछे सें अपनी बांहों मे भर लिया औऱ उसकी गर्दन कों चूम लिया तौ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ अपनेपेट पऱ बंधे विक्रम केँ हाथो कों अपने हाथो सें ढक दिया तौ विक्रम नें अपनी पूरीजीभ कों लंबाई मे उसकी चिकनी हसीन गर्दन पर्र फिराया तौ शहजादी कि सांसे उखड़ गई औऱ विक्रम सें छूटने कि कोशिश करतेहुए बोलीं:"
" अअह्ह्ह विक्रम! खुदा केँ लिए मुझे जाने दीजिए! किसी नें देख लिया तौ मे फंस जाऊंगी!
विक्रम नें अपनी उंगलियों मे सूट केँ ऊपर सें हि उसके चिकने रसीले सपाटपेट कों सहला दिया औऱ बोला:
" पहले वादाकरो कि कलजब मे मिलने आऊंगा तोँ बुर्का नहीं पहनोंगी!
सलमा अपनेपेट पर्र उसकी उंगलियों कां स्पर्श महसूस करकेमचल उठी औऱ प्यास कर बोलि:" " आप् बहोत बिगड़ते जारहे होँ युवराज! मे नहीं मिलूंगी आपसेकल!
विक्रम नें उसकेपेट कों नाजुक मखमली त्वचा कों अपनी हथेलियों मे भर लिया औऱ हल्का हल्का मसलते हुए उसकीकान कि लौ सहलाकर बोला:"
" फिन तोँ मे आपको जाने हि नहि दूंगा सलमा!आज हि जी भरकर आपको प्रेम करूंगा!
सलमा उसकी हरकते सें पिघलरही थि औऱ तड़पते हुए बोलि:"
" ऐसा जुल्म मत कीजिए युवराज! हमारी मजबूरी समझिए! हमे जाने दीजिए नां
विक्रम नें एक् झटके केँ संगउसे पलट दिया औऱ दोनो हाथों कों सीधे उसकी भारी भरकम उभरी हुई गांड़ पर्र रखकर उसकेगाल चूमकर बोला:"
" पहले वादाकरो कलसूट पहनकर मिलने आओगी!
इतना कहकर विक्रम नें बिना उसकेकुछ बोलने सें पहले हि उसके होंठो कों अपने होंठो मे भर लिया औऱ चूसने लगा! शहजादी सलमा भि अपने महबूब कि मजबूत बांहों मे पिघल गई औऱ उसके होठों कों चूसने लगी!तभी झूले केँ पीछे किसी केँ कदमों कि आहत हुईँ तौ सलमा एक् झटके सें किस समाप्त करी औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" बस कीजिए युवराज! जाने दीजिए हमे, कोई आँ रहा हैं शायदइधर हि!
विक्रम:" पहले आप् वादा कीजिए, जब तक वादा नहीं करेगी तौ मे आपकोऐसे हि प्रेम करता रहूंगा!
विक्रम नें उसकी गांड़ कि गोलाईयों कों थोडा सख्ती सें मसल दिया तौ शहजादी केँ मुंह सें अहह निकलते निकलते बची औऱ गुस्से सें उसकीतरफ देखने लगी तौ विक्रम नें थोडा सां झुकते हुए उसकेगोल गोल गुम्बद केँ बीच कि गहराई कों चूम लिया तौ सलमा बेचैन होँ गई औऱ बोलीं:"
" अच्छा ठीक हैं अब तौ जाने दीजिए नाँ मुझे!
कदमों कि आहत बिलकुल पास आँ गई थि तौ विक्रम नें जल्द सें उसकागाल चूमकर हाथ छोड़ दिया औऱ सलमा तेजी सें करीब-करीब दौड़ती हुइ निकल गई, !!
सलमा बग्गी मे पहुंच गई औऱ फिन वापिस सुल्तानपुर कि तरफचल पड़ी!वही अजय पानी लेकर आँ गय़ा थां औऱ विक्रम नें पानी पिया औऱ उसकेबाद वापिस उदयगढ़ लौट पड़ा!
रात कों अजय नें खानां खाया औऱ सोने केँ लिए अपने कक्ष मे आँ गय़ा मगरउसे नींद नहीं आँ रही थि तौ वोँ थोडा टहलने केँ लिएछत पर्र गय़ा तौ उसने देखा कि उसकी मम्मी पहले सें हि छत पऱ मौजूद थि औऱ चांद कों निहार रही थि!
अजय उसकेपास पहुंच गय़ा औऱ बोला:" क्याँ हुआ माता ? आपकी तबियत तौ ठीक हैं जौ इतनीरात कों छत पर्र टहलरही होँ आप् ?
मेनका;" हानठीक हु मे तौ! बस नींद नहीं आँ रही थि तौ छत पऱ घूमने आँ गई! आपको भि नींद नहीं आँ रही हें क्याँ अजय ?
अजय:"हान माता बस नींद नहीं आँ रही थि तौ थोडा घूमने आया तोँ आपको देखा यहां!
छत पर्र बहुत चांदनी फैली हुई थि औऱ मेनका अपनी विधवा वाली सफेदरंग कि साड़ी मे भि बेहद आकर्षक लगरही थि क्योंकि वोँ अद्वितीय सुंदरी थि औऱ उसकेरूप सौंदर्य मे अजीब सां आकर्षण थां जिसकी तरफ मर्द खींचे चलेआते थें! अजय नें आज तक कभी अपनी मम्मी कों नजरभर कर भि देखा थां क्योंकि उसकी मम्मी उसकेलिए वोँ देवी थि जिसने उसेकभी पिता कि कमी भि महसूस नहीं होने दि औऱ फिनअजय एक् बेहद संस्कारी लड़का थां जिसने आज तक किसी भि लड़की कों गलतनजर सें नहीं देखा थां औऱ फिन मेनका एक् उसकी माता थि!
मेनका:" बसयही देखने आई थि कि चांद अभि कितना पूरा होना बाकी हें क्योंकि फिन मे आपको वोँ जादुई तलवार देना चाहती हू जिसके आप् हकदार होँ !
अजय: मैने भि जबसे उसके बारे मे सुना हें तोँ मे स्वयं उसे ग्रहण करने केँ लिए उत्सुक हु!
मेनका:" बस बेटा आज कि बात औऱ हें! कल मे आपको विधि पूर्वक हि तलवार दूंगी! अच्छा बेटा एक् बात बताओ आपको खुशी तौ होँ रही हें इस तलवार केँ बारे मे सोचकर ?
अजय:* माता सच कहूं तोँ मुझसे अब सब्र नहि हौ रहा हैं! मे प्यास रहा हूं अपने पूर्वजों कि निशानी कों ग्रहण करने केँ लिए!
मेनका नें आगे बढ़कर उसेगले सें लगा लिया औऱ उसका माथाचूम कर बोलि:"
" आप् एक् बहादुर पुत्र हौ! मे आपको पुत्र केँ रूप मे पाकर धन्य होँ गई अजय!
अजय भि अपनी माँ केँ आगोश मे लिपट गय़ा औऱ उसे बेहदचैन मिलरहा थां क्योंकि पता नहीं कितने सालों केँ बाद वोँ ऐसे अपनी मम्मी केँ आंचल मे आया थां! मेनका वहीछत पर्र पड़ेहुए एक् बेड पर्र बैठ गई औऱ अजय उसकीगोद मे सिर रखकरलेट गय़ा तोँ मेनका उसके बालो मे उंगली फेरते हुए बोलीं:"
" पुत्र आपकोकोई दिक्कत तौ नहीं हौ रही हें न् ?
अजय अपनी आखेंबंद किएहुए हि बोला:"आज आपनेपता नहीं कितने सालों केँ बादमुझ पर्र अपनी ममता लुटाई हें! सच मे आपको माता केँ रूप मे पकड़ मे धन्य होँ गय़ा!
इतना कहकरअजय नें आंखे खोली औऱ मेनका कि तरफ देखा औऱ मेनका बोलीं:"
" बेटा आपको नींद आँ रही होगी, नीचे चलते हें क्योंकि रात भि बहोत ज़्यादा हौ गई हैं!
अजय अपनी माँ कि गोद सें उठनेलगा औऱ जैसे हि उसकी नजरे नीचेआई तोँ उसकी नजरे पहलीबार अपने आप् उसकी सीने कि गोलाईयों केँ बीचचली गई जहां बहुत गहरी लकीरबनी हुई थि! अजय कि नजरे जितनी गति सें अपनी माँ केँ सीने पर्र पड़ी उससे कहीं ज़्यादा गति सें हट गई औऱ अजय अपनी मम्मी कि गोद सें उठ गय़ा औऱ फिन दोनोमा बेटे अपने कक्ष मे आकर नींद केँ आगोश मे चलेगए!
अगलेदिन साम कों लगभग 7 बजे शहजादी सलमा नें देखा कि सीमा केँ संग सपना नहींकोई दूसरी लड़कीआई हैं जिसकी शक्ल थोड़ी सीमा सें मिलरही थि तौ उसने पूछा:"
" सपना नहींआई क्याँ आज औऱ यह आपकेसंग कौन हैं?
सीमा:" शहजादी सपना अपनी मम्मी केँ संग कहीं बाहर् गई हैं औऱ कुछदिन बाद आयेगी! तब तक आपकी देखभाल मे औऱ मेरी बेहन राधिका मिलकर करेंगे!
सलमा उसकीबात सुनकर हल्की सि मुस्कान देती हुइ बोलीं:"
" अच्छा यह आपकी बेहन हें, तभी तौ मे सोचु कि इसकी शक्ल आपसे इतनी क्यूं मिलरही हें!
राधिका आगेआती हल्की सि मुस्कान केँ संग बोलि:"
" वोँ हम् दोनोसगी बहनें हें न् बिल्कुल एक् हि माँ बाप कि औलाद इसलिये शक्लमिल गई!
उसकीबात सुनकर सबहंस पड़े औऱ सीमा बोलीं:"
" बहोत जुबान चलती हैं तेरी, जा जाके शहजादी केँ लिए नहाने कां पानीगरम करदे!साम केँ टाइम शहजादी हल्के गुनगुने पानी सें नहाती हैं!
राधिका वहां सें चली गई तौ सीमा बोलीं:" यह बहोत नटखट औऱ चंचल हैं शहजादी! उसकी बातो कां आप् बुरामत मानना!
सलमा:"कोई बात नहि थोडा चंचल तोँ होना भि चाहिए, ! वैसे एक् बात बताओइसे कुछ बताया तौ नहीं नं मेरे बारे मे?
सीमा:"ऐसी गलती तौ मे कभी नहींकर सकती!यह तोँ सबसे बड़ीढोल हें शहजादी! कोई भि बात इसकेपेट मे नहीं पचती औऱ इसके ख्वाब तौ आसमान कों छूते हें! कहती हें कि किसी राजकुमार सें हि विवाह करूंगी!
सलमा:" अच्छा फिन तौ उससे बचकर हि रहना होगा! अच्छा किया तुमने बता दिया मुझे!
सीमा:" वैसे बुरा न् मान तोँ एक् बात पूछूं?
शहजादी:" हानकहो नां सीमा?
सीमा:"उस दिन आप् मेरे मे जब विक्रम सें मिली तोँ कैसालगा थां आपको?
सलमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल हौ गई औऱ बोलीं:" चल बेशर्म कहीं कि, यहसभी बातें भि बताने कि होती हें क्याँ!
सीमा उसकी लज्जा हया देखकर समझ गई कि सलमा कों यहसभी अच्छा लगरहा हैं औऱ वैसे भि अपने आशिक केँ बारे मे बात करके किसी अच्छा नहीं लगता हें! सीमा नें सलमा कां हाथ पकड़ लिया औऱ बोलीं:"
" चलिएमत बताते आप् मगर आपके शर्मो हया औऱ गालों कि लालीपता रहीं हें कि आपको कितना अच्छा लगा होगा!
सलमा नें उसकीतरफ आंखे निकाली औऱ बोलि:"
" तुझेही ज़्यादा मज़ाआता हैं क्याँ मुझसे छेड़छाड़ करने मे?
सीमा:" मुझे तौ इतना नहींआता जितना विक्रम कों आया होगा आपसे छेड़छाड़ करने मे!
सलमा उसकीबात सुनकर मंदमंद मुस्कुरा उठी औऱ बोलीं:"
" चल पागल, कुछ भि बोल देती हें युवराज नें मेरेसंग कोई छेड़छाड़ नहींकरी! वोँ तौ मुझसे बेहद प्यार करते हें!
सीमा:" अच्छा तोँ फिन प्यार हि किया होगा आपको अपनी बांहों मे समेटकर शहजादी क्योंकि आपकी सुंदरता नें उन्हें बहका दिया होगा!
सलमा अपनी तारीफ सुनकर खुश हुइ औऱ उसे भि सीमा कि बाते अच्छी लगरही थि जिस कारण उसकी सांसे बहुततेज होँ गई थि औऱ बोलि;"
" तुम् न् अबमार खाओगी मुझसे सलमा!
सीमा:"फिन आपकी सांसे क्यूं बढ़ गई हैं शहजादी, क्यूं झूठा क्रोध दिखारही होँ! बोलदो नाँ कि युवराज कि बांहों मे आनंदआया थां आपको!
सलमा उसकीबात सुनकर अब छिड़ते हुए बोलि:"
" हानआया थां आनंद मुझे, तेरी भि युवराज केँ गले लगना थां क्याँ सीमा कि बच्ची?
सीमा:" क्या बात है मेरी कहां ऐसी भाग्य, मुझे तोँ विक्रम नें बेहनबना लिया नहीं तौ इतने हसीन ताकतवर राजकुमार पऱ अपनीजान लूटा देती! आप् सच मे बेहदखुश नसीब हौ शहजादी!
सलमा कों अब उसकी बातो मे पूरामजा आँ रहा थां औऱ सलमा भि उसकेरंग मे रंगते हुइ बोलि:" अच्छा जीऐसा क्याँ खास हैं आपके युवराज मे ?
सीमा सलमा केँ हाथ कों सहलाती हुई बोलि:" जीता जागता युगपुरुष हें वोँ शहजादी! हसीन इतना औऱ उसके चौड़े मजबूत कंधे औरचौड़ी बलशाली भुजाए स्स्स जिनमे वोँ अकसर किसी कों कस लें तौ छूट नहींपाए! आपको कैसालगा थां शहजादी उसकी मजबूत भुजाओं मे कसकर ?
सलमाअब पूरीतरह सें उसकी बातो सें मदहोश हौ गई थि औऱ उसकेगले लगती हुइ बोलीं:"
" अअह्ह्ह्ह सीमापूछ मत कितना अच्छा लगा थां!
सीमा उसकी हरकत सें जोश मे आँ गई औऱ उसकीपीठ सहलाते हुए बोलीं:"
" सच मे शहजादी आपकायह मदहोश हसीन जिस्म विक्रम कि बांहों केँ लिए हि बना हैं! उसकीशेर केँ जैसी चौड़ी छाती उसकी मर्दानगी कि जीती जागती मिसाल हैं शहजादी!
सलमा नें अबजोश मे आकर सीमा कां गालचूम लिया औऱ तभी राधिका कि आवाज़ आई:"
" सीमा दिदी आपको बेगम साहिबा बुलारही हें!
सीमा उसकीबात सुनकर धीरे-धीरे सें सलमा केँ कान मे बोलि:"
" मुझे चूमने सें ज़्यादा आनंद आपको विक्रम कों चूमने मे आयेगा! अपनायह प्रेम उनकेलिए बचाकर रखिए!आज रात केँ मेले मे आपकोफिन सें युवराज सें मिलवा दूंगी!
इतना कहकर वोँ चली गई औऱ राधिका अंदरआती हुईँ बोलि:"
" शहजादी आपका पानीगरम होँ गय़ा हैं! आइए आप् नहा लीजिए!
सलमा नें राधिका कों जाने कां इशारा किया औऱ औऱ तेजतेज सांसे लेती हुई देखते हि देखते एक् बेहद हसीन बड़ेबाथ टब मे बैठ गई औऱ अपने शरीर सें सारे कपड़ों कों उतारकर मात्र एक् चादर कों अपने नंगे शरीर पऱ लपेट लिया औऱ बाथटब मे लेट गई तौ पानी सें उसके शरीर पऱ लिपटा कपड़ा भीग गय़ा औऱ उसकी चूचियां बहुतहद तक साफनजर आँ रही थि! सलमा कां ध्यान राधिका कि तरफ नहीं थां औऱ राधिका धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलती हुई उसके पीछे आँ गई औऱ उसकी चुचियों कों देखने लगी औऱ मन हि मनउसे शहजादी सें बेहदजलन हुई क्योंकि उसकी चूचियां शहजादी केँ मुकाबले आधी भि नहि थि औऱ सबसे बड़ीबात कि शहजादी कि चूचियां बिलकुल गोलगोल गुम्बद केँ जैसी औऱ ठोस थि! निप्पल बिलकुल तनेहुए मानो उन्हे अपनी अभिमान हौ रहा होँ कि हम् दुनिया कि सबसे सख्त औऱ गद्देदार चुचियों केँ शिखर पऱ विराजमान हें!
शहजादी कोई मधुरगीत गुनगुनाते हुएनहा रही थि औऱ राधिका कां मन शहजादी कों छुने केँ लिएमचल रहा थां क्योंकि उसे जब्बार कि बातयाद थि कि शहजादी कि वासना कों हवा देनी हैं तोँ राधिका थोडा पीछेचली गई औऱ बोलि:"
" शहजादी साहिबा मेरीकोई जरूरत होँ तोँ बताएगा आप्, !
सलमा उसकीबात सुनकर हंस पड़ी औऱ बोलि, :"
" भला नहाने मे आपकी क्याँ जरूरत पड़ेगी, मे तौ रोज स्वयं हि तोँ नहा लेती हूं!
राधिका:" शहजादी आप् कमर केँ हिस्से कों अच्छे सें साफ नहींकर पाती होंगी औऱ वैसे भि मे मालिश अच्छा कर लेतीहु!
सलमा उसकीबात सुनकर बोलीं:" यहबात तोँ सचकही राधिका कि कमर तक हाथठीक सें नहींजा पाता हैं! चल अच्छा एक् कामकर आजा मेरेपास!
राधिका अपनीचाल मे कामयाब हुईँ औऱ सलमा केँ पास आँ गई औऱ उसके बराबर मे बैठते हुए बोलीं:"
" क्या बात है मे सदके जावा आप् पऱ शहजादी! आपको मेरीजी नजर न् लगजाए! आप् जितनी ज़्यादा खूबसूरत होँ उससे कहीं ज़्यादा आपका जिस्म हसीन हैं!
शहजादी पहले सें हि थोड़ी तेजतेज सांसे लेँ रही थि क्योंकि सीमा नें विक्रम कि बाते करकेउसे मचलने पर्र मजबूर कर दिया थां औऱ अबयह राधिका तोँ उससे भि आगेबढ़ रही थि! सलमा नें मुस्कुरा करउसे देखा औऱ बोलि
" अच्छा बड़ी जानकारी हें तुम्हें महिला केँ बदन कि ! चलइधर आकर मेरीकमर साफकर!
इतना कहकर शहजादी नें उसकीतरफ करवटली औऱ राधिका नें अपनेहाथ कों उसकीकमर पर्र टिका दिया औऱ कमरसाफ करने केँ बहाने उसकीकमर कों सहलाने लगी तौ सलमा कों बेहद अच्छा लगनेलगा औऱ राधिका बोलि:"
" शहजादी आपकीकमर बेहद चिकनी ओर रसीले हें! क्याँ लगाती हैं आप् ?
सलमा उसकी बातो सें अब पूरामजा लेँ रही थि औऱ उसकीतरफ अपनीकमर कों पूरीतरह सें उभार दिया औऱ बोलीं:"
" कुछ भि नहि लगाती! क्याँ सच मे मेरीकमर अच्छी हें राधिका!
कमर केँ संग हि संग सलमा कि गांड़ भि पीछे कों उभरआई औऱ राधिका कि आंखेफटी कि फटीरह गई औऱ बोलीं:"
" शहजादी आप् कि कमर बेहद जानलेवा हैं! बुरा न् माने तौ एक् बात कहूं आपको ?
इतना कहकर राधिका नें उसकीकमर कों अच्छे सें अपनी उंगलियों मे भर लिया औऱ सहलाने लगी! सलमा कों उसकी उंगलियां बेहद मज़ादे रही थि औऱ सलमा बोलि:"
" आपकी मात्र कमर हि नहीं बल्कि आपका पूराबदन हि लाजवाब हैं शहजादी!
उसकीबात सुनकर सलमा शर्मा गई औऱ उसे अपनेऊपर अभिमान हुआ क्योंकि एक् महिला होने केँ बाद भि राधिका जिसतरह सें उसकी तारीफ कररही थि वोँ उसके नारीत्व केँ लिए बेहद गर्व कि बात थि! सलमा उसकी बातो मे डूब गई औऱ बोलीं:"
" अच्छा राधिका, वोँ केसेभला?
राधिका नें अब अपनेहाथ कां दायरा थोडा सां बढ़ाया औऱ उसकी उंगलियां सलमा कि चुचियों कि गोलाई केँ आसपास छूनेलगी औऱ राधिका बोलि:"
" आपका पतलीकमर पर्र आपकाउठा हुआतनी हुई मदमस्त जवानी औऱ मछली कि तरह कटावदार आपकी चिकनी कमर जौ नीचेआती हुईँ आपके नितम्बो केँ पास एकदम सें इतनी चौड़ी होकरउभर गई हैं यकीन नहि होता कि आपकी पतली सि कमर आपके भारी भरकम नितम्बो कां भारउठा सकती हें!
सलमा उसकीबात सुनकर पूरीतरह सें मचलउठी औऱ उसके शरीर मे कंपकपी सि छूट गई औऱ हल्का सां राधिका कि तरफ पलटते हुए बोलि:"
" तुम् सचकहरही होँ नाँ राधिका? क्याँ सच मे मेराबदन ऐसा हि हें!
सलमा केँ पलटने सें उसकी चूचियां राधिका कि उंगलियों केँ औऱ लगभग होँ गई औऱ राधिका नें अब अपनी उंगलियों कों उसकी चुचियों तक पहुँचा दिया औऱ हल्का सां सहलाते हुए बोलीं:"
" सच शहजादी, मम्मी कि शपथ! आपके जैसी हसीन शहजादी केँ लिए दुनिया कां सबसे ताकतवर मर्द होना चाहिए!
राधिका कि बात सुनकर सलमा कि आंखेबंद हौ गई औऱ उसकी आंखो केँ आगे विक्रम कां चेहरा आँ गय़ा औऱ सलमा केँ होंठो पर्र मधुर मुस्कान आँ गई औऱ राधिका कि उंगलियां अब उसकी चुचियों कि आधी गोलाई तक सहलाने लगी औऱ राधिका बोलीं:"
" लगता हें शहजादी कल्पना कररही हैं कि दुनिया कां सबसे ताकतवर मर्द कैसा दिखता होगा!
उसकीबात सुनकर सलमामन हि मन मुस्कुरा उठी औऱ तभी सीमा केँ आने कि आहत हुइ तौ राधिका पीछेहट गई औऱ शहजादी नें चैन कि सांसली ! जिसतरह सें राधिका उसके जिस्म कों छूरही थि उससे सलमा केँ अंगअंग मे मीठी मीठी गुदगुदी हौ रही थि औऱ वोँ अपनी टांगो कों एक् दूसरे सें रगड़ती हुइ पानी मे पड़ी हुइ मचलरही थि!
लगभगआधे घंटे केँ बाद शहजादी बाहर् निकलआई औऱ अपने कपड़ो कों पहन लिया! सीमा केँ संग उसने थोडा सां खानां खाया औऱ फिन सीमा केँ संगसंग राधिका भि उसके कक्ष सें बाहर् चली गई! रात केँ लगभग 10 बजगए थें औऱ शहजादी पलंग पर्र पड़ी हुईँ करवटबदल रही थि क्योंकि उसे अपने प्रियतम केँ आने कां प्रतीक्षा थां औऱ आज उसकी सांसे कल केँ मुकाबले अधिकगंध रही थि!
सलमाबेड सें उठी औऱ अपने आपको शीशे मे देखने लगी औऱ फिन उसने गहरा काला काजल निकाला औऱ अपनी बड़ी बड़ीगोल गोल नशीली आंखों कों औऱ कामुक बनाने लगी!
काजल लगाने केँ बाद वोँ अब बेहद सुंदर लगरही थि मानो उसकी सुंदरता मे चार चांदलग गए थें! सलमा नें हल्का सां मेकअप किया औऱ फिन अपने होंठो पर्र लगाने केँ लिए लिपिस्टिक उठाई औऱ उसकेमन मे कुछआया औऱ वोँ मुस्कुरा उठी औऱ लिपिटिक कों एक् तरफरख दिया औऱ अलमारी सें उसने खोलकर एक् लाल सुर्ख कश्मीरी निकाली औऱ अपने होंठो पर्र फेरने लगी औऱ उसकेबाद उसे मुंह मे भरकरचूस लिया!
सलमा केँ होंठअब बेहद कामुक होकर मुलायम होँ गए थें औऱ सलमा नें हल्का सां बेरी कों दांतो सें काटा तौ उसकारस उसके होंठो पर्र पूरीतरह सें आँ गय़ा औऱ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी! सलमा कों उसका जिस्म बेहद हल्का औऱ हवा मे उड़ता हुआ महसूस हुआ औऱ उसके घुटने कमजोर पड़ने लगे तोँ सलमाबेड पऱ चढ़ गई औऱ तेजतेज सांसे लेनेलगी क्योंकि वोँ जानती थि कुछ हि मिनटों बाद वोँ विक्रम कि मजबूत बांहों मे होगी औऱ यह सोचकर सलमा केँ शरीर नें एक् जोरदार झटका खाया औऱ उसकी छातियां अब उसकी सांसों केँ संगताल सें ताल मिलारही थि!
दूसरी तरफ विक्रम भि सलमा सें मिलने केँ लिए बेहद बेताब थां औऱ मेला होने केँ कारण सुल्तानपुर कि सीमा पूरीरात केँ लिए खुली हुइ थि तौ कोई खतरा भि नहीं थां! रात केँ लगभग 10:30 बजे विक्रम धीरे-धीरे मौका देखकर राजमहल केँ गुप्त रास्ते सें बाहर् निकल गय़ा औऱ घोड़े पर्र सवार होकर सुल्तानपुर कि तरफचल पड़ा, !
बहोत हि शानदार औऱ लाज़वाब एपसोड हैं राजा विक्रम कों सुल्तानपुर केँ बारे मे थोडा कुछपता चला हैं
बहोत हि शानदार औऱ लाज़वाब एपसोड हैं विक्रम औऱ शहजादी कि मुलाकात फिननोक झोंक सें हुईँ हैं लगता हैं जल्द हि प्रेम मे बदलने वाली हैं
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
राधिका औऱ सीमा - दोसगी बहने औऱ दोनोअलग अलग चरित्र कि। एक् देश-भक्ति औऱ स्वामि - निष्ठा सें ओतप्रोत औऱ दूसरी वतन - फरोशी औऱ स्वार्थ सें भरपूर।
सलमा औऱ विक्रम - प्रेमी युगल। दो विभिन्न मजहब केँ प्रेमी युगल। दो प्रतिद्वंदी देश केँ प्रेमी युगल।
अजय औऱ मेनका - वतन केँ वफादार औऱ देशप्रेमी।
बहोत जबरदस्त भुमिका सजधजकर किया हैं आपने यूनिक स्टार भइया। आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग।
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
जैसे हि 11 बजने मे कुछ मिनट थें तोँ सलमा अपनेबेड सें उठ खड़ी हुई औऱ इधरउधर देखती हुई बाहर् निकल गई औऱ विक्रम तालाब केँ पासआया औऱ महल कि छत पऱ देखा औऱ उसकेबाद सावधानी सें गुप्त रास्ते मे दाखिल हौ गय़ा औऱ अंदर कि तरफचल पड़ा! विक्रम जैसे हि गुफा केँ आखिरी छोर पर्र पहुँचा तोँ उसे सामने खड़ी हुइ शहजादी सलमानजर आई औऱ देखते हि दोनो कि आंखे टकरा गई औऱ एक् संग दोनो केँ होंठ मुस्कुरा उठे! सलमा तेजी सें अपने कक्ष कि तरफचल पड़ी औऱ विक्रम उसके पीछे पीछे खींचा चलाआया! शहजादी अपने कक्ष मे आँ गई! जैसे हि विक्रम अंदर घुसा तौ विक्रम नें कक्ष केँ दरवाजे कों बंद किया औऱ कक्ष पर्र एक् नज़र डाली तौ उसे बेहद खुशी हुई क्योंकि आज शहजादी नें कक्ष कों अच्छे सें गुलाब केँ फूलों सें सजा दिया थां औऱ विक्रम आगे बढ़ा औऱ सलमा केँ लगभग पहुंच गय़ा औऱ सलमा कि सांसे औऱ तेज होनेलगी! विक्रम नें उसकाहाथ पकड़ा तोँ शहजादी सें लज्जा सें अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया औऱ विक्रम नें एक् झटके केँ संगउसे अपनीतरफ खींचा तोँ सलमा किसीडोर कि मानिंद खींची चलीआई औऱ उसके सीने सें जालगी औऱ अपना चेहरा छिपा लिया तोँ विक्रम नें उसके कंधो कों पकड़ा औऱ बोला:"
" आप् नहीं जानते थें कि हम् आपको देखने केँ लिए कितना बेचैनी रहे थें शहजादी! मेरेइस सुंदर चांद कों निहारने कां हक हमसेमत छीनिये सलमा!
इतना कहकर विक्रम नें उसका चेहरा ऊपरउठा लिया तौ कांपती हुईँ लरजती हुईँ सलमा कि आंखे लज्जा सें बंद हौ गई औऱ विक्रम नें जी भरकर अपने चांद कां दीदार किया औऱ फिन बोला:"
" आप् सच मे बेहद सुंदर हें शहजादी औऱ आज तौ आप् केँ रूप सौंदर्य मे गजब कां आकर्षण हैं शहजादी! एक् बार अपनी आंखो कों खोलिए न् आप्
अपने खूबसूरती कि सुभह सें तारीफ सुनरही सलमा कों अब अपने महबूब सें अपनी तारीफ सुनकर चैन मिला औऱ उसने अपनी आंखों कों खोल दिया औऱ विक्रम नें उसकी आंखो कों चूम लिया औऱ बोला:"
" आपकी आंखे बेहद हसीन हें शहजादी! इनमे डूबकर मर जाने कों जी चाहता हैं!
सलमा उसकीबात सुनकर उतावलापन उठी औऱ उसके होंठो पर्र अपनी उंगली कों रख दिया तोँ विक्रम नें सलमा कि उंगली कों मुंह मे भरकरचूस लिया तोँ सलमा उससे कसकर लिपट गई! विक्रम उसकी उंगली कों चूसता रहा औऱ सलमा भि मजे सें उसकी लिपटी रही औऱ अपनी उंगली कों उसके मुंह मे डालेरखा ! विक्रम नें अपने हाथो कों पीछे लेँ जाकर उसकीकमर कों थाम लिया औऱ सहलाने लगा तोँ सलमा एक् झटके केँ संगउसे अलग होँ गई औऱ गहरी गहरी सांसे लेनेलगी औऱ सोचने लगी कि क्यूं मे विक्रम सें दूर होँ गई! विक्रम फिन सें आगे बढ़ा औऱ सलमा केँ पास जाकर बोला:"
" वैसे शहजादी हम् आपसे नाराज हें!
सलमा नें दुःखी निगाहों सें उसकीतरफ देखा औऱ बोलि:"
" ऐसा नं कहे युवराज! हमारी जान निकलरही हें ! कहिए तौ क्याँ खता होँ गई हमसे ?
विक्रम नें उसकाहाथ पकड़कर फिन सें अपनीतरफ खींच लिया औऱ बांहों मे समेटकर बोला:"
" आपने वादा किया थां कि बुर्का नहीं पहनोगी सलमा!
सलमा नें उसकागाल चूम लिया औऱ उसकी छाती मे सिमट गई औऱ बोलीं:
" ओहो विक्रम, मेरी तौ जान हि निकाल दि थि आपने!
विक्रम नें उसके दोनो कंधो कों थामा औऱ उसके बुर्के कि सुकून कों खोल दिया तौ सलमा उससे पूरी ताकत सें कसकर लिपट गई औऱ विक्रम नें उसेसमय भर केँ लिए अपने सें अलग किया औऱ बुर्के कों पूरीतरह सें खोलकर उसकेबदन सें उतार दिया औऱ सलमातेज तेज सांसे लेती हुइ स्वयं हि उससे लिपट गई औऱ उसकी छातीचूम कर बोलीं:"
" आप् बहोत शैतान होतेजा रहे होँ युवराज!
विक्रम नें अबउसे थोडा कसकर अपनी बांहों मे समेट लिया तोँ सलमा कसमसा उठी औऱ उसकेकान मे फुसफुसाकर बोलीं:"
" अह्ह्ह्हह विक्रम! मार डालना चाहते होँ क्याँ अपनी शहजादी कों आज
विक्रम नें अपने हाथो कों उसके नितंबों पऱ लें गय़ा औऱ सहलाते हुए उसकी गर्दन चूमकर बोला:
" अह्ह्ह्ह्ह मेरी शहजादी, बस प्रेम करना चाहता हूं!
सलमा अपने नितंबों पऱ उसकाहाथ महसूस करके उत्तेजित होँ गई औऱ अपनी तेजी सें उछलती हुइ छातियों सें उसके सीने मे वार करती हुई मदहोशी सें बोलीं:
" अअह्ह्ह्ह विक्रम मेरे युवराज म्म्म ऐसे ताकत सें भलाकौन प्रेम करता हैं!
विक्रम नें अपनी हथेलियों कों पूरा खोलते हुए उसकीगोल गोल गद्देदार गांड़ कि गोलाईयों कों पूराभर लिया औऱ थोडा कर सहला दिया औऱ बोला:"
" अ हायअह्ह्ह्हह शहजादी! आपको अच्छा नहींलग रहा हैं क्याँ सलमा!
सलमा दर्द औऱ मजे सें कराहउठी औऱ उसके सीने कों जोर सें चूम लिया औऱ सिसकते हुए बोलीं:"
" आह्ह्ह्ह्ह अच्छा तौ लगरहा हैं मेरे युवराज! मर जाऊंगी मे
विक्रम नें अपनीजीभ कों बाहर् निकाल कर सलमा कि चिकनी सुंदर गर्दन पर्र फेर दिया तोँ सलमा कां पूरा शरीर कांपउठा औऱ वोँ एक् झटके केँ संग आह्ह्ह्ह् करती हुई विक्रम कि बांहों सें निकल गई औऱ गहरी गहरी सांसे लेती हुइ विक्रम कों देखने लगी औऱ विक्रम नें आगे बढ़कर फिन सें मचलती हुइ कांपती हुईँ सलमा कों पकड़ लिया औऱ उसकी गर्दन कों चूमना शुरुआत कर दिया
विक्रम कभी उसकी गर्दन कों चूमरहा थां तोँ कभी उसकेगाल कों चूमरहा थां औऱ विक्रम केँ होंठ सलमा केँ पूरे चेहरे पर्र चुंबनो कि बरसात कररहे थें औऱ सलमा मचलती हुइ कांपती हुईँ उससे लिपटरही थि औऱ विक्रम नें एक् हाथ पीछे लेँ जाकर उसकेसूट मे घुसा दिया औऱ उसकी नंगीकमर कों सहलाकर उसकेकान मे फुसफुसाया:"
" आह्ह्ह्ह मेरी शहजादी, आपकेयह अमृतभरे मधुरस होंठो किसके लिए हें!
सलमा सें अब बर्दाश्त नहींहुआ औऱ आंखेबंद करतेहुए विक्रम केँ होंठो सें अपने होंठों कों चिपका दिया औऱ दोनो मदहोश होकर एक् दूसरे केँ होठों कों चूसने लगे! सलमा नें अपने आपको पूरीतरह सें उसकी बांहों मे ढीला छोड़ दिया औऱ उसके होंठो कों चूसने लगी! विक्रम सें अधिकआज सलमा उसके होंठो कों चूसरही थि औऱ सलाम नें अपनीजीभ कों उसके मुंह मे घुसा दिया तोँ विक्रम केँ सब्र कां बांधटूट पड़ा औऱ जोरजोर सें उसकीजीभ कों चूसने लगा, दोनो हि एक् दूसरे सें ज़्यादा जोर सें होंठो कों चूसरहे थें औऱ सलमा कि हालत पूरीतरह सें खराब हौ गई थि औऱ विक्रम नें जैसे हि हाथऊपर लें जाकर उसकी ब्रा कि स्ट्रिप कों छुआ तोँ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ कांपती हुइ सलमा एक् झटके केँ संगफिन सें उससेअलग हौ गई! सलमा कि सांसे इतनी ज़्यादा तेज होँ गई थि उसकी उछलती हुई भारी भरकम छातियां विक्रम कों पागलकर रही थि ! विक्रम आगे बढ़ा औऱ सलमा केँ पीछे जाकरउसे जोर सें अपनीतरफ खींचा औऱ सलमा एक् झटके केँ संगफिन सें उससे आँ लगी औऱ सलमा कि पीठअब विक्रम कि छाती सें मिल गई औऱ विक्रम नें उसकी गर्दन चूमते हुए दोनो हाथों कों सीधे उसकी मचलती हुई छातियों पऱ रख लिया तोँ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ सलमा पलटकर उससे कसकर लिपट गई! विक्रम नें अपने हाथो कों उसके कंधो पर्र रखा औऱ उसकेसूट कों उसके कंधो सें सरका दिया तोँ अपने जलतेहुए होठों कों उसके नंगे चिकने कंधो पऱ रख लिया औऱ चुसने लगा तोँ सलमा केँ मुंह सें मस्ती भरी सीत्कार निकल पड़ी औऱ विक्रम नें बिनादेर किए उसकेसूट कों पीछे सें खोल दिया औऱ सलमा कि पूरी नंगी चिकनी कमर कों अपने हाथों मे भरकर उसके कंधो कों चूमने लगा तोँ सलमा बेकाबू होकर उससे लिपटकर औऱ विक्रम नें उसकेसूट कों उतारकर फेंक दिया औऱ सलमा कि गोलगोल गुम्बद जैसीठोस मदमस्त चूचियां एक् सफेदरंग कि ब्रा मे कसी हुईँ उसके सामने आँ गई औऱ सलमा तड़पते हुए उसकेगले लग गई!
विक्रम नें सलमा कि नंगीकमर कों कसकर अपने हाथो सें सहला दिया तौ सलमा मस्ती सें सिसकउठी औऱ विक्रम केँ सीने मे लज्जा केँ मारेछिप गई औऱ विक्रम उसकी कड़क चुचियों कि छुवन अपने सीने मे महसूस करकेजोश मे आँ गय़ा औऱ सलमा केँ नाजुक जूसी होंठो कों अपने मुंह मे भरकर चूसने लगा औऱ सलमा भि कांपती हुई उसके होंठो कों चूसने लगीं! विक्रम कभी उसके नीचे केँ होंठ कों मुंह मे भरकरजोर जोर सें चूसरहा थां तौ कभी नीचे वाले होंठ कों अपने दांतों सें काटते हुएचूस रहा थां औऱ सलमा पूरी ताकत सें उससे लिपटी हुइ उसके होंठो कों चूसरही थि!
सलमा कि चूचियां पूरीतरह सें अकड़ गई थि औऱ उसकी जांघो केँ बीच मे चिपचिपा रसीला कामरस आँ गय़ा थां जिससे सलमा पूरीतरह सें मदहोश हौ गई औऱ उसने अपने दोनो हाथों कों विक्रम केँ गले मे डाल दिया औऱ उसकी बांहों मे खुल गई क्योंकि उत्तेजना औऱ मस्ती कि वजह सें उसके पैरो नें जवाबदे दिया औऱ विक्रम नें सलमा कों अपनी बांहों मे थाम लिया औऱ सलमा कां इशारा समझकर उसेबेड कि तरफ लेँ चला! विक्रम नें बेड कक्ष केँ चारो औऱ फैले सुंदर पर्दो कों हटा दिया औऱ अंदर घुसा तौ फिन सें गुलाबी रंग केँ परदे आँ गए औऱ विक्रम नें सलमा कां मुंह चूमते हुए उन्हे भि हटा दिया औऱ फिन सलमा कों बेड पर्र लिटा औऱ ज़ोर ज़ोर सें सांसे लेती हुइ सलमाबेड पर्र लेट गई औऱ उछल पड़ी क्योंकि बेड बहोत हि ज़्यादा गद्देदार थां! सलमाबेड पऱ हल्की हल्की उछलती हुइ कामुक नजरो सें अपनी ब्रा मे कैद उछलती हुइ चुचियों केँ संग विक्रम कों देखरही थि औऱ विक्रम बिनादेर किएबेड पर्र चढ़ गय़ा औऱ कांपती हुईँ सलमा केँ उपरचढ़ गय़ा औऱ उसके होंठो कों चूसने लगा औऱ सलमा भि उसके होंठो कों चूसने लगी औऱ विक्रम नें नीचेआते हुए उसकी ब्रा मे कैद चुचियों कों हाथ मे भर लिया औऱ सहलाने लगा तोँ सलमा अपनी चुचियों पर्र उसका कठोर मर्दाना एहसास पाकर मस्ती सें सिसकउठी औऱ उसकेसिर कों अपने हाथो सें थाम लिया औऱ अपने सीने पर्र दबाने लगी तौ विक्रम नें अपने होठों कों उसकेपेट पर्र लगा दिया औऱ उसकीगोल गोल गहरी नाभि मे अपनीजीभ डालकर चूसने लगा तोँ सलमा अपने पैरो कों पटकते हुए अपने दोनो हाथो सें बेडशीट कों मसलने लगी औऱ उसकी सांसे इतनी तेजी सें चलरही थि मानो उसकी चूचियां उसकी ब्रा फाड़कर बाहर् निकल आनांचाह रही हौ!
विक्रम उसकी नाभि कों चूसता हुआउपर कि तरफबढ़ चला औऱ सलमा अपनेबदन कों जोरजोर सें पलंग पऱ पटकरही थि औऱ विक्रम नें अब उसकी ब्रा मे कैद चुचियों कों चूमना शुरुआत कर दिया तौ शहजादी मस्ती सें सिसकउठी औऱ बेकाबू होकर अपने शरीर कों बेड पर्र पटकपटक रही थि तौ विक्रम नें उसके पैरो कों अपने पैरों मे फंसा लिया औऱ उसकी चुचियों पऱ अपनीजीभ कों फेर दिया तोँ सलमा मस्ती सें सिसकउठी
" अह्ह्ह्हह युवराज! मतकरो म्म्म अम्मी!
विक्रम नें उसके मुंह मे अपनी एक् उंगली कों घुसा दिया औऱ सलमा बेकाबू होकर उसकी उंगली कों चूसने लगी औऱ विक्रम उसकी चुचियों कों ब्रा सें हि अपने मुंह मे भरकर चूसने लगा तोँ सलमा कि चूचियां उछलने लगे औऱ विक्रम नें अपने उंगली कों उसके मुंह सें निकाला औऱ उसके चेहरे पर्र फिरते हुए उसके होंठो पर्र आया तौ सलमा नें उसकी उंगली कों जीभ निकाल करचूम लिया औऱ विक्रम केँ हाथ उसकी ब्रा कि तनियो पऱ आए औऱ उन्हे सलमा केँ कंधो पऱ सें सरका दिया औऱ उसकेसंग हि सलमा कि चूचियां नंगी होकर एक् झटके केँ संग उछलती हुई बाहर् आँ गई
सलमा केँ मुंह सें एक् जोरदार मस्ती भरीअहह निकल पड़ी औऱ उसने लज्जा सें अपनी आंखेबंद करकेहुए अपनी दोनो चुचियों कों अपने हाथों सें ढक लिया औऱ अपनेबदन कों किसी जंगली घोड़ी कि तरहबेड पऱ पटकने लगी औऱ विक्रम नें उसके होंठो कों चूमते उसके उसके हाथो कों अपने हाथों मे भर लिया औऱ उसकी उंगलियों केँ बीच अपनी उंगलियों कों घुसा दिया औऱ उसकी चुचियों कों मसलने लगा तौ उसके मर्दाना सख्त हाथो कां एहसास करके हि सलमा नें अपनीजीभ कों उसके मुंह मे घुसा दिया तोँ विक्रम नें सलमा केँ हाथो कों जबरदस्ती उसकी चुचियों पर्र सें हटाया औऱ अपने दोनो हाथों मे उसकी सख्ततनी हुईं चुचियों कों भर लिया औऱ सलमा नें विक्रम केँ मुंह मे अपनीजीभ कों पूरीतरह सें घुसाते हुए उसकीजीभ सें मिला दिया औऱ विक्रम सलमा कि जीभ कों चूसते हुए उसकी चुचियों कों सहलाने लगा औऱ दोनो कों बेहद मस्ती आँ रही हैं! सलमा कि चूचियां विक्रम केँ हाथो मे उछलउछल पड़रही थि मानोउसे उकसारही हौ कि आँ औऱ दाबहमे! विक्रम नें उसकी चुचियों कि चुनौती कों स्वीकार किया औऱ जोर सें कसकरमसल दिया तौ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ लंबी लंबी सांसे लेती हुईँ कामुक नजरो सें विक्रम कि तरफ देखने लगी औऱ विक्रम नें आगे झुककर उसकी एक् मम्मों कों मुंह मे भर लिया औऱ सलमा केँ मुंह सें एक् जोरदार मस्ती भरी सीत्कार निकल पड़ी
" अअह्ह्ह्हह हायय्य सीईईईईईईईई अअह्ह्ह्ह् क्याँ कर दिया मुझे मेरे युवराज !
विक्रम नें उसकी मम्मों कों जोर सें चूसना शुरुकर दिया औऱ सलमाअब पूरीतरह सें बेकाबू होकर अपनी जांघो कों पूरा खोलते जीभ निकलकर जोरजोर सें सिसकियां लेनेलगी औऱ विक्रम नें उसकी एक् मम्मों कों हाथ मे भरा औऱ दूसरी कों मसलना शुरुआत कर दिया औऱ सलमा नें अपनीजीभ निकालकर उसे दिखाई तोँ विक्रम उसकेऊपर चढ़ उसके होंठो कों चूसने लगा औऱ सलमा बेकबू होकर अपना मुंह खोलते हुए उसके होंठो कों चूसने लगीं
विक्रम कि छाती पूरी नंगी थि औऱ अब पूरीतरह सें सलमा केँ ऊपर चढ़ाहुआ थां औऱ होंठो कों चूसते चूसते हि विक्रम नें सलमा कि सलवार केँ नाडे कों पकड़ा औऱ सलमा नें उसकेहाथ कों पकड़ लिया मानोमना कररही हौ मगर विक्रम नें अपनी ताकत कां इस्तेमाल करतेहुए नाडे कों खोलना चाहा औऱ शहजादी उसे रोकने कि कोशिश कररही थि औऱ बेचारे नाडा कमजोर पड़ा औऱ टूट गय़ा औऱ नाडे केँ टूटते हि सलमा नें पागल सि होँ गई औऱ अपनी टांगो कों उसकी टांगों मे फंसा लिया तोँ विक्रम नें सलमा केँ दोनो हाथो कों ऊपर उठाते हुए उसकी ब्रा कों निकाल फेंका तोँ उसकी चौड़ी छाती सलमा कि नंगी चूचियों सें मिल गई औऱ सलमा नें जोर सें सिसककर अपने दोनो हाथों कों उसकीकमर पऱ लपेट दिया औऱ विक्रम उसकी चुचियों केँ कड़क निप्पल कों अपनी छाती सें मसलते हुए धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकी सलवार कों सरका दिया औऱ सलमा केँ शरीर पऱ अब मात्र पेंटी हि बच गई जोँ पूरीतरह सें भीग गई थि! विक्रम नें अपनेहाथ नीचे लातेहुए अपने पायजामें कों उतार दिया औऱ सलमा बेडशीट कों हाथो सें मसलती हुइ लंबी लंबी सांसे लेती हुइ उत्तेजना सें अपनेबदन कों बैड मे पटकरही थि जिससे उसकी चूचियां उछलउछल पड़रही थि!
विक्रम कां फौलादी लन्ड अपने विकराल रूप मे आँ गय़ा थां औऱ एक् अंडर वियर मे सलमा कि पेंटी कि कों रगड़रहा थां औऱ विक्रम उसकी बुर पर्र धक्के मारते हुए उसकी चुचियों कों मसलरहा थां औऱ शहजादी उसे चूमते हुए सिसकरही थि! विक्रम कि गति बढ़ती गई औऱ सलमा कि सिसकियां तेज होनेलगी औऱ हरबार उसका मुंह मस्ती सें खुलरहा थां औऱ विक्रम केँ मुंह सें भि अहह निकल पड़ी! सलमा भि अपने नितंबों कों नीचे सें उठाउठा कर सहयोग कररही थि जिससे धक्कों मे बहोत तेजी आँ गई थि औऱ उसने सलमा कों पूरी ताकत सें कस लिया औऱ जोर सें धक्का लगाया औऱ सलमा केँ मुंह कि चूम लिया विक्रम केँ संगसंग सलमा केँ मुंह सें भि एक् मस्ती भरीअहह निकल पड़ी इसकेसंग हि दोनो एक् संग झड़ते चलेगए औऱ विक्रम उसकी गर्दन चूमते हुए उसकी चुचियों पर्र गिरपडा!
दोनो एक् दूसरे कों चूमते हुए अपनी सांसे दुरुस्त कररहे थें औऱ शहजादी सलमा विक्रम केँ गले मे अपनी बांहों कां हार डालेहुए उससे लिपटी हुई औऱ थोड़ी देर केँ बाद दोनो कि सांसे थोडा संयत हुइ तौ सलमा कों अपनी हालत कां एहसास हुआ औऱ लज्जा केँ मारे विक्रम केँ सीने मे अपना मुंह छुपा लिया औऱ विक्रम नें उसकी हालत समझते हुए एक् चादर कों दोनो केँ बदन पर्र खींच लिया औऱ बोला:"
" शहजादी आपकों कोई तकलीफ तौ नहीं हुइ हें नाँ!
सलमा उसकीबात सुनकर मचलउठी औऱ उसके सीने मे अपने मुंह कों छिपाए हुए इनकार मे गर्दन कों हिला तौ विक्रम नें उसकेगाल कों चूम लिया औऱ प्रेम सें उसके बालो कों सहलाते हुए बोला:"
" आपको आनंदआया नां शहजादी!
सलमाइस बार उसकीबात सुनकर कांपउठी औऱ कसकर उससे लिपट गई औऱ उसका मुंहचूम लिया तौ विक्रम नें भि उसकी नंगीकमर मे हाथ डालकर उसे अपने जिस्म सें चिपका लिया औऱ कभी उसके बालो कों सहलाता तोँ कभी प्रेम सें उसका मुंह चूमता! सलमा कों बेहद अच्छा लगरहा थां क्योंकि विक्रम उसका ध्यान बेहद अच्छे सें रखरहा थां औऱ सलमा बोलीं:"
" युवराज आज आपनेजिस तरह सें सागोला कों हराया मे आपकी कायल होँ गई !
विक्रम अपनी उंगलियों कों उसकी नंगीकमर पर्र कामुक अंदाज मे फेरते हुए बोला:" अच्छा जी! वैसे सागोला कां घमंड तौ मुझे तोड़ना हि थां! मे स्वयं हि उससे लड़ना चाहता थां मगर मेरेयार अजय नें मुझेरोक दिया थां मगर आपके इशारे पऱ मे उससे लड़ा!
सलमा अपनी नंगीकमर मे उसकी उंगलियां महसूस करकेफिन सें अपने जिस्म मे उत्तेजना महसूस कररही थि औऱ उसकी छातीचूम कर बोलीं:"
" ओह आपकेयार आपसे नाराज तौ नहीं होँ जायेंगे न्!
विक्रम:" नहीं शहजादी अजय हमसेकभी नाराज होँ हि नहि सकता!जिस तरह सें आपकी जीवन मे सीमा हें उसीतरह सें अजय मेरायार हें! मगर मैनेउसे अपने औऱ आपको रिश्ते केँ बारे मे नहीं बताया!
सलमा कि चूचियां फिन सें फूलना शुरुआत होँ गई थि औऱ जिस्म नें सिरहन सि भागना शुरुआत होँ गई तौ वोँ विक्रम सें कसकर लिपट गई औऱ बोलीं:"
" अच्छा युवराज आपनेकभी बताया नहीं कि आप् किस राज्य केँ युवराज हें?
विक्रम उसका प्रश्न सुनकर मन हि मनडर गय़ा क्योंकि वोँ शहजादी सें झूठ नहींबोल सकता थां औऱ सच कहने कि उसकी हिम्मत नहि थि तौ विक्रम शहजादी कि आंखो मे देखते हुए बोला:" सलमा मे आज आपसे सबसे अधिक प्रेम करता हूं औऱ मेरीबात कों समझने कि कोशिश करना जोँ मे कहनेजा रहा हूं!
सलमा कि उसकीबात सुनकर हैरानी हुई औऱ उसकी आंखो मे देखते हुए बोलि:"
" मे भि आपसे बेहद प्रेम करती हूं विक्रम! बोलिए आप्!
विक्रम:" शहजादी सच कड़वा हें औऱ वोँ यह हैं कि मे उदयगढ़ कां युवराज हु!
सलमा केँ सीने मे उसकीयह बात जहरीले तीर कि तरह चुभी औऱ वोँ विक्रम कों झटका देती हुई उसकी बांहों सें ऐसे आजाद हुई मानो ज़हरीले सांप सें लिपटी हुईँ थि औऱ खड़ी होकर अपने शरीर कों ढकनेलगी! विक्रम धीरे-धीरे सें खड़ाहुआ औऱ उसकाहाथ पकड़कर बोला:"
" यहसच हैं कि मे उदयगढ़ सें हुमगर शहजादी.
इससे पहले कि विक्रम आगेकुछ बोलता सलमा नें झन्नाटेदार थप्पड़ उसेजड़ दिया औऱ अपनाहाथ छुड़ा कर गुस्से सें बोलीं:"
" दूर होँ जाओ मेरी नजरो केँ सामने सें, मे आपकी सूरत भि नहि देख्ना चाहती!
विक्रम कां मुंह थप्पड़ सें लाल होँ गय़ा औऱ सलमा कां हाथ पकड़कर बोला:"
" पहले मेरीबात सुनो शहजादी.
इससे पहले कि विक्रम कि बात पूरी होती सलमा नें विक्रम केँ हाथ मे अपने दांतगडा दिए तोँ विक्रम दर्द सें कराहउठा औऱ सलमा बोलि:"
" विक्रम तुमने मुझे धोखा दिया हैं, मेरेदिल कों दर्द दिया हैं, बेहतर यही होगा कि आप् चलेजाओ औऱ कभी अपनी शक्ल मुझेमत दिखाना!
विक्रम दर्द सें कराहकर बोला:"
" उदयगढ़ औऱ सुल्तानपुर कि दुश्मनी जब सें चलरही हैं तब मे छोटा बच्चा थां शहजादी! इसमें मेरा क्याँ दोष हैं मैने तोँ सच्चे मन सें आपसे प्रेम किया हें!
सलमा कि आंखेभर आई औऱ उसकीतरफ देखकर बोलीं:"
" विक्रम मुझेकोई बात नहीं सुननी, मे अपने बाबा सें बहोत प्रेम करती थि औऱ आपके पिताजी कि वजह सें वोँ मारेगए! मुझेघिन आती हें अपने आपसे कि मैने आपसे प्रेम किया!
इतना कहकर सलमाजोर जोर सें फफकफफक कररो पड़ी औऱ विक्रम नें आगे बढ़कर उसकाहाथ पकड़ा तौ शहजादी नें झटके सें उसकाहाथ पटकपटक तोँ विक्रम नें उसकाहाथ करउसे दीवार सें अड़ा दिया औऱ बोला:"
" मेरीबात समझ क्यूं नहींरही हौ शहजादी? उसमे मेरीकोई गलती नहि हें !
सलमा कि आंखो सें आंसू निकल पड़े औऱ रोतेहुए बोलि:"
" विक्रम आज केँ बाद हम् कभी नहि मिलेंगे! अपना शक्ल मुझेभूल सें भि मत दिखाना! शराफत सें चलोजाओ इससे पहले कि मे आपको धक्के देकर निकाल दू!
इतना कहकर सलमा नें अपनाहाथ छुड़ा लिया औऱ विक्रम नें गुस्से सें उसकाहाथ छोड़ दिया! सलमारो रही थि औऱ उसका पूरा चेहरा आंसुओं सें भीग गय़ा
सलमा नें विक्रम कां हाथ पकड़ लिया औऱ उसे अपने कक्ष सें बाहर् निकाल दिया औऱ गुप्त रास्ते केँ दरवाजे पर्र लाकर छोड़ दिया औऱ बोलि:"
" मैने प्रेम मे आपकोमहल केँ गुप्त रास्ते दिखादिए हें! अगर आपने मुझसे थोड़ी भि मुहब्बत करी हें तौ इनका इस्तेमाल कभीमत करना!आज केँ बाद सुल्तानपुर मे दिखाई दिए तोँ जिंदा वापिस नहीं जाओगे यह सलमा कां वादा हें युवराज!
इतना कहकर सलमा वापिस चल पड़ी औऱ विक्रम केँ मुंह सें शब्द नहीं निकलपा रहे थें औऱ वोँ भरी हुइ निगाहों सें सलमा कों दूर तक जातेहुए देखता रहा औऱ फिन नं चाहते हुए भि गुफा केँ अंदरघुस गय़ा क्योंकि वोँ जानता कि सलमाअब उसकीकोई बात नहीं सुनने वाली! विक्रम अपनी आंखो मे आंसूलिए रात केँ लगभग एक् बजे वापिस उदयगढ़ कि तरफचल पड़ा!!
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