शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
विक्रम अपनी भीगी आंखों सें वापिस उदयगढ़ आँ गय़ा औऱ बेचैनी सें इधरउधर टहलरहा थां! उसने ड्रीम्स मे भि नहीं सोचा थां कि सलमा उसकेहाथ ऐसा बर्ताव करेगी! जब सलमा नें उसे थप्पड़ मारा तोँ उसकामन किया थां कि उसका मुंह तोड़दे मगर अपनी इश्क कि वजह सें खामोश रहा औऱ जिसतरह सें सलमा नें उसे बेइज्जत करके अपने कक्ष सें निकाला थां उससे उसकादिल बुरीतरह सें टूट गय़ा थां औऱ विक्रम कों अब बिलकुल भि चैन नहींमिल रहा थां! जिस सलमा केँ लिए उसने अपनी जीवन दांव पऱ लगा दि औऱ अपनीजान सें अधिक प्रेम किया उसने हि उसने धमकी दि कि सुल्तानपुर कि सीमा मे दिखे तौ जिंदा वापिस नहीं जाओगे यहसभी सोचकर उसे रोना आँ रहा थां!
बेचैनी सें इधरउधर टहलते हुए विक्रम कों पूरीरात हौ गई औऱ जैसे हि सुभह हुईँ तोँ वोँ अजय उसकेपास आया औऱ उसकीलाल आंखे देखकर बोला:"
" क्याँ हुआ युवराज ? आपकी आंखे बड़ीलाल हौ रही हें जैसे आप् पूरीरात सोए नहीं हौ!
विक्रम केँ चेहरे पर्र छाई उदासी उसकी हालत बयानकर रही थि औऱ विक्रम बोला:"
" ऐसाकुछ नहीं हें बस आंखे दर्दकर रही थि तोँ इसलिये नींद नहींआई मुझे!
अजय:" माफ कीजिए युवराज मगर आपके चेहरे पऱ छाई उदासी मुझेकुछ औऱ हि संकेत देरही हें !
विक्रम थोड़ी देरचुप रहा औऱ बोला:"अजय ऐसाकुछ भि नहि हैं, बसकल कुश्ती केँ बाद नींद नहींआई तौ इसलिये सो नहीं पाया मे अच्छे सें!
अजय नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोला:" युवराज एक् बार मुझे अपनी समस्या बताकर तौ देखिए, मुझे आपकेकाम आकर खुशी होगी!
अजय नें उसकीतरफ ध्यान सें देखा औऱ फिनकुछ सोचते हुए बोला:"ठीक हें अजय, सही टाइमआने पऱ आपसेसभी बाते साझा करूंगा!
अजय:" मे बेताबी सें उस लम्हा कां प्रतीक्षा करूंगा युवराज! चलिए आप् नहा लीजिए फिन आपको राजमाता नें बुलाया हें!
विक्रम नहाने केँ लिए अंदरचला गय़ा औऱ थोड़ी देरबाद दोनो राजमाता केँ सामने खड़ेहुए थें औऱ राजमाता गायत्री देवी विक्रम कों देखकर बोलि:"
" क्याँ हुआ युवराज? आपके चेहरे पर्र यह पीड़ा किसलिए ?
विक्रम जानता थां कि वोँ चाहकर अपनी माँ कि नजरों सें नहींबच सकतामगर सचकह पाने कि हिम्मत उसमें नहीं थि औऱ बोला:"
" तबियत थोड़ी ठीक नहीं हैं मेरीबस इसलिये ऐसालग रहा हैं आपको!
राजमाता:" केवलयह हि बात हें याँ कुछ औऱ भि वजह हें युवराज?
अजय नहीं चाहता थां कि विक्रम कों राजमाता केँ औऱ सवालों कां सामना करना पड़े इसलिये विषय कों बदलते हुए बोला:"
" राजमाता कल युवराज नें सागोला कों कुश्ती मे हरा दिया! सागोला नें हमारे राज्य केँ कई पहलवानों कि रीढ कि हड्डी तोड़ दि थि!
राजमाता नें आगे बढ़कर विक्रम कां माथाचूम लिया औऱ बोलि:"
" शाबाश मेरेशेर बेटे!ऐसे हि दुश्मनों केँ हौसलों कों तबाह करतेरहे औऱ उन्हें धूल चटाते रहो आप्!
उसकेबाद राजमाता बोलि:"
" कलअजय कां उदयगढ़ कां सेनापति बनाया जायेगा इसलिये आप् उत्सव कि तैयारी मे जुट जाएं युवराज! मुझेअजय सें कुछबात करनी हैं आप् !
विक्रम उसकीबात सुनकर बोला:" जौ आज्ञा राजमाता!
इतना कहकर वोँ बाहर् निकल गय़ा औऱ उसके जाने केँ बाद राजमाता अजय सें बोलीं:
" अजयपता करने कि कोशिश करो कि विक्रम कों क्याँ हुआ हें ? उसके चेहरे कि पीड़ा हमसे देखी नहींजा रही हैं!
अजय:" आप् चिंता मत करिए राजमाता! मे युवराज कि समस्या औऱ समाधान दोनो ढूंढ लूंगा!
गायत्री:"मुझे आप् पऱ पूरा भरोसा हें अजय! मेरीकोई भि मदद चाहिए तौ बता देना!
अजय:" जी राजमाता! मे भि घऱ जाऊंगा औऱ उसकेबाद कुछ तलवारों औऱ तीरों कां मुआयना करना हैं मुझे ताकि जरूरत पड़ने पर्र दुश्मन कों मुंह तोड़ जवाब दियाजा सके!
राजमाता: वैसे तोँ आप् आसऐसा कोई राज्य हें नहीं जौ उदयगढ़ कि तरफनजर उठाकर देखसके! बस हमें पिंडारियो केँ हमले सें बचने कि जरूरत हें क्योंकि उन्हें हराना बेहद मुश्किल हें औऱ वोँ राज्य कां खजाना औऱ खूबूसरत जवान औरतों कों उठाकर लेँ जाते हें!
अजय:" आप् चिंता नं करे राजमाता, मे सौगंध खाता हूं कि उदयगढ़ कि तरफ बुरीनजर डालने वालेहर दुश्मन कों नर्क मे आया दूंगा चाहे तौ पिंडारी हौ याँ फिनकोई दूसरा!
राजमाता:" हमे आप् पर्र पूरा भरोसा हैं अजय! आप् जाकर अपनेकाम कीजिए!
उसकेबाद अजय राजमाता केँ कक्ष सें निकल गय़ा औऱ अपने कामों मे लग गय़ा! वहीं दूसरी तरफ मेनका कों समझ नहि आँ रहा थां कि वोँ आजरात होने वाली विधि केँ लिएअजय कों केसे समझाए क्योंकि जौ रूपउसे धारण करना थां वोँ समाज केँ नियमो केँ खिलाफ थां मगर तलवार सौंपने कि विधि कि पहली औऱ आखिरी सबसे जरूरी शर्तवही थि!
दूसरी तरफ विक्रम केँ जाने केँ बाद सलमा अपनेबेड पर्र गिर पड़ी औऱ लंबी लंबी सांसे लेनेलगी! उसकादिल यह मानने केँ लिए सजधजकर हि नहि थां कि विक्रम उसकेसंग इतना बड़ा धोखाकर सकता हैं उसे अपनी सच्चाई नहीं बताई औऱ उसकेसंग प्रेम करतारहा! सलमा कि बारबार आंखेभर भर आँ रही थि औऱ उसे अपने आपसे नफरत होँ रही थि कि उसने जीवन मे उस व्यक्ति सें प्रेम किया जिसके पिता नें उसके अब्बा कि हत्या कर दि औऱ उन्हें धोखा दिया! सलमा कों अपने आप् पऱ बाद क्रोध आँ रहा थां कि केसे वोँ स्वयं अपनेबदन कों विक्रम केँ हवाले कर बैठी थि!
पूरीरात ऐसे हि कट गई औऱ अगलेदिन सीमा औऱ राधिका दोनो आँ गए औऱ राधिका शहजादी केँ लिए पानीगरम करनेचली गई तौ सीमा उसकी हालत देखकर बोलीं:"
" क्याँ हुआ शहजादी ? आप् बड़ी परेशान लगरही हैं!
सलमा नें उसकी तारीफ दुःखी नजरो सें देखा औऱ कोई जवाब नहीं दिया तोँ सीमा उसके लगभगबैठ गई औऱ बोलि:"
" बताओ नां शहजादी? मुझसे आपकीयह हालत नहीं देखी जाती!
सलमा कां दिलभर आया औऱ वोँ बोलीं:"
" आपकोपता हैं कि विक्रम कहां कां युवराज हें?
सीमा नें इंकार मे उसकीतरफ सिर हिलाया तोँ सलमा बोलि:"
" उदयगढ़ कां! उसी उदयगढ़ कां जिनकी वजह सें हमारे अब्बा कि मौत हुईँ थि!
सीमा कि आंखे उसकीबात सुनकर खुली कि खुलीरह गई औऱ थोड़ी देर शांति छाईरही तोँ सलमा बोलीं:"
" हमने उससे इतना प्रेम किया औऱ उसने हमने धोखे मे रखा औऱ हमसे अपनी सच्चाई छुपाई! आज केँ बाद हम् किसी सें प्रेम करना कां सच भि नहि सकते!
इतना कहकर सलमा नें अपनासिर उसके कंधे पर्र टिका दिया औऱ रो पड़ी! सीमाउसे थपथपाती रही औऱ फिन उसके आंसूसाफ करतेहुए बोलीं:
" उसनेगलत किया आपकेसंग! उसे सच्चाई बता देना चाहिए थि आपको!
इतने मे राधिका कक्ष मे आँ गई तौ दोनोचुप होँ गई मगर शहजादी कि लाल आंखे राधिका सें छुपी नाँ रहसकी मगर उसनेकुछ नहींकहा औऱ सलमा बोझल कदमों सें नहाने केँ लिएचली पड़ी! नहाकर आने केँ बाद उसने जबरदस्ती सीमा केँ जोर देने पऱ थोडा सां कुछ खाया औऱ उसकेबाद धीरे-धीरे अपने कक्ष मे हि लेट गई!
रात केँ लगभगआठ बजगए थें औऱ मेनका कों समझ नहीं आँ रहा थां कि वोँ अजय कों केसे समझाए कि आजरात वोँ किसरूप मे उसके सामने आयेगी तौ उसने आखिर गाड़ी उससेबात करने कां निर्णय लिया औऱ उसके कक्ष कि औऱ चल पड़ी!अजय बैठाहुआ कुछकाम कररहा थां औऱ मेनका कों देखते हि खड़ाहुआ औऱ बोला:"
" माता आप् यहां? मुझे भि बुला लिया होता आपनेआने कां कष्ट क्यूं किया ?
मेनका उसकेपास पहुंच गई औऱ बोलि;" इतनी भि कमजोर नहीं हुइ अभि कि चलकर आपके कक्ष तक नं आँ सकू पुत्र!
अजयबेड सें उठ गय़ा औऱ खड़े होतेहुए बोला:" मेरा वोँ मतलब नहि थां माता, आप् तौ अभि बिलकुल स्वस्थ जान पड़ती हें! आइए बैठिए आप्!
मेनका बेड पर्र बैठ गई औऱ उसकाहाथ पकड़कर अजय कों भि अपनेपास बैठा लिया औऱ बोलि:" पुत्र आज मे आपके पूर्वजों कि निशानी भेंट करूंगी! मगर उसकेलिए कुछ नियम हें जौ हम् सदियों सें मानते आँ रहे हें औऱ मुझे भि उनका पालन करना हि होगा!
अजय:" हमारे पूर्वजों कि परंपरा हमे माननी हि चाहिए यह तौ बहोत अच्छी बात हैं!
मेनका कों उसकीबात सुनकर थोड़ी हिम्मत मिली औऱ बोलीं:
" बेटा तलवार कों देने केँ लिए एक् विधवा स्त्री अपशकुन मानी गई हैं! औऱ मे एक् विधवा स्त्री हु तोँ मे चाहकर भि आपको तलवार नहींदे सकती हैं औऱ हमारे परिवार केँ सिवा औऱ कोई वोँ तलवार उठा नहीं सकता!
अजय उसकीबात सुनकर थोडा हैरान हुआ औऱ फिन बोला:"
" मगरफिन दूसरा कोई तरीका तोँ होगा न् माता!
मेनका नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोलीं:" एक् हि तरीका हें औऱ वोँ यह हें कि मुझे विधवा कां रूप नहीं बल्कि एक् सुहागन महिला कां रूप धारण करके आपको तलवार देना होगी!
अजय नें हैरानी सें अपनी माता कि तरफ देखा औऱ बोला:"
" मगर क्याँ यह समाज केँ नियमो केँ खिलाफ नहीं होगा कि आप् एक् विधवा होतेहुए सुहागन औरत कां रूप धारणकरे! समाज क्याँ कहेगा ?
मेनका उसकीबात सुनकर उसकीतरफ देखती हुईँ बोलीं:"
" देखो बेटा हमारे पूर्वजों नें जौ नियम बनाए हें वोँ हमे मानने हि होंगे औऱ फिन इसमें किसी कों कुछ नहींपता चलेगा तौ समाज क्याँ कहेगा इसकी चिन्ता आप् छोड़दो! मे सुहागन कां रूप नीचे गुफा मे धारण करूंगी औऱ फिनउसी रूप मे आपकेसंग नदी तक घोड़ा बग्गी केँ अंदर जाऊंगी औऱ वही आपके हवाले यह तलवार करूंगी!
अजय:"ठीक हें माता! जैसे आपकोठीक लगे! आप् बड़ी हें तौ जोँ भि करेगी सोच समझकर हि करेगी!
मेनका:" अजय पुत्र आपने मेरी बहोत बड़ी समस्या हलकर दि हें! मे अब चलतीहु औऱ 10 बजेठीक आप् नीचे गुफा मे आँ जानां!
इतना कहकर वोँ चल पड़ी औऱ अजयउसे जातेहुए देखता रहा! मेनका नें अच्छे सें नहाकर स्वयं कों स्वच्छ किया औऱ फिन गुफा केँ अंदर पहुंच गई! उसने कमरे कों खोला औऱ उसकेबाद संदूक कों खोल दिया जिसने तलवार रखी हुइ थि औऱ उसे बाहर् निकाल लिया! उसकेबाद उसने संदूक सें एक् बेहद हसीन साड़ी निकाली औऱ आभूषण केँ संगसंग सौंदर्य प्रसाधन कां सामान भि निकाल लिया जोँ सदियों प्राचीन थां मगर अदभुत थां! मेनका नें सभी सामान निकालने केँ बाद सबसे पहले अपनेबदन सें चादर कों हटाया औऱ उसकेबाद उसने एक् कालेरंग कि बेहद आकर्षक रत्न जड़ित ब्रा पेंटी कों अपनेहाथ मे लिया तौ मेनका उसे देखती हि रह गई क्योंकि यह बेहद सुंदर औऱ रसीले थि! मेनका नें सामने दीवार पऱ पड़ेहुए परदे कों हटाया तौ एक् सामने एक् बड़ा सां दर्पण नजरआया औऱ मेनका कि नजर जैसे हि स्वयं पर्र पड़ी तोँ वोँ स्वयं सें हि शर्मा गई! उसे बड़ा अजीब सां लगरहा थां क्योंकि पिछले 15 साल सें केवल सफेद साड़ी पहनने वाली मेनका केँ हाथ मे कालेरंग कि ब्रा पेंटी थि! मेनका नें शीशे मे देखते हुए ब्रा कों अपनी चुचियों पर्र रखा औऱ उसकी स्ट्रिप कों अपने कंधे पऱ सें होतेहुए पीछे लें गई औऱ हुक लगाने कि कोशिश करनेलगी मगर कामयाब नं हुइ क्योंकि उसकी बड़ी बड़ीगोल मटोल चुचियों बेहदकसी हुईँ थि जिस कारणउसे हुक लगाने मे दिक्कत हौ रही थि औऱ मेनका नें अपनी चुचियों कों जबरदस्ती ब्रा मे ज़ोर सें ठूंस दिया औऱ फिनहुक लगा दिया औऱ उसकेबाद पेंटी पहनकर अपने शरीर ब्लाउस कों पहनकर साड़ी कों बांध लिया!
कपड़े पहनकर मेनका नें अपनी आंखो मे वोँ दुर्लभ काजल लगाया औऱ उसकेबाद उसने लिपिस्टिक निकाली जोँ सदियों पुरानी विधि सें बनाई गई थि औऱ बेहदलाल सुर्ख थि! मेनका नें अपने होंठो पऱ लिपिस्टिक कों लगाया औऱ उसकेबाद शीशे मे स्वयं कों निहारने लगी!
मेनका अपने आपको शीशे मे देखकर अपनेरूप सौंदर्य पर्र मंत्र मुग्ध सि हौ गई औऱ बिना पलके झुकाए स्वयं कों निहारती रही! मेनका नें देखा कि उसकीकमर अभि कि बेहद आकर्षक थि औऱ बस पिछले कुछ सालों मे उसकीकमर कि चर्बी थोड़ी सि बढ़ गई थि जिस कारण वोँ औऱ ज़्यादा मादक होँ गई थि! मेनका नें अपने बालो कों खोल दिया औऱ काले बालो मे उसका हसीन चेहरा औऱ भि खूबसूरत नजर आँ रहा थां! अपने बालो कों अपनी उंगलियों सें सहलाती हुई मेनका केँ होंठो पर्र मुस्कान आँ गई थि औऱ वोँ पलटकर स्वयं कों देखने लगी औऱ तभीउसे किसी केँ कदमों कि आहत सुनाई पड़ी तौ उसने देखा कि अजय कमरे मे आँ गय़ा थां औऱ मेनका कों हि देखरहा थां औऱ औऱ मेनका आज पहलीबार अपने बेटे केँ सामने स्वयं कों असहज महसूस करती हुईँ बोलीं:
" पुत्र आओ मे आपका हि प्रतीक्षा कररही थि! मुझेऐसे सुर्ख कपड़ो मे देखकर नाराज तौ नहीं हौ नां ?
अजययह तौ जानता थां कि उसकी मम्मी मेनका खूबसूरत हैं मगरलाल सुर्ख कपड़ो मे ऐसी अप्सरा लगेगी उसे उम्मीद नहीं थि इसलिये बोला:"
"मे भला क्यूं बुरा मानने लगा!मगर आप् बुरा नां माने तौ एक् बात कहूं आपसे?
मेनका चलती हुई उसके लगभगआई औऱ बोलीं:
" मे भला क्यूं आपकीबात कां बुरा मानने लगी! बोलो नाँ पुत्र?
अजय नें एक् नजर अपनी माता पर्र फिन सें डाली औऱ बोला:" अदभुत, अकल्पनीय सौंदर्य हें आपका माता! सच मे आप् स्वर्ग सें उतरी हुईँ अप्सरा लगरही हौ!
मेनका कों अपने बेटे सें ऐसी प्रसंशा कि उम्मीद नाँ थि मगर वोँ अबअबकर भि क्याँ सकती थि क्योंकि वोँ जानती थि कि उसकारूप सौंदर्य सच मे बेहद कमाल कां हें औऱ उसका बेटा भि आखिर एक् जवान मर्द हें तोँ वोँ कुछ नहि बोलि औऱ अजय कों अपनेपास आने कां इशारा किया तोँ अजय चलताहुआ उसकेपास आया तोँ मेनका नें उसे एक् पटरी पऱ खड़ा किया औऱ फिन एक् थाली मे जलतेहुए दीपक रखकर उसकी आरती उतारने लगी औऱ जलतेहुए दीपकों कि मध्यम रोशनी अब उसके चेहरे कों औऱ आकर्षक बनारही थि औऱ आरती उतारने केँ बाद मेनका नें अजय केँ माथे पर्र तिलक लगाया औऱ उसकेबाद थाली कों एक् तरफरख दिया औऱ बोलीं:
" अजयअब हम् दोनोइसी गुफा सें बाहर् जायेंगे औऱ नदी केँ किनारे बाकीबची हुई विधियां करने केँ बाद तलवार आपके हवाले कर दूंगी!
मेनका नें उसकेबाद तलवार कों उठाया औऱ दोनो मम्मी बेटे गुफा केँ अंदर केँ अंदरचल दिए! गुफा मे हल्का हल्का प्रकाश थां जिस कारण दोनो कों कोई दिक्कत नहि होँ रही थि! चलते चलते दोनो गुफा केँ आखिरी छोर तक पहुंच गए औऱ तभी मेनका कां पांव गुफा मे पड़ेहुए पत्थर सें टकराया औऱ वोँ फिसल पड़ी औऱ उसकी साड़ी कां पल्लू उसके सीने सें सरक गय़ा! पल्लू केँ सरकने सें उसकीगोल गोल चुचियों केँ बीच कि गहरीखाई नजर आँ गई औऱ अजय उसकेपास आया औऱ उसकीनजर पहलीबार अपनी माँ केँ सीने पऱ पड़ी औऱ दोनो चुचियों केँ बीच झांकती हुईँ गहरीखाई कों देखकर उसकी आंखे खुली कि खुलीरह गई औऱ उसने अपनी माता कि तरफहाथ बढ़ाया औऱ मेनका उसकाहाथ पकड़कर धीरे-धीरे धीरे-धीरे खड़ी होनेलगी जिसकी उसकी चुचियों कां उभार औऱ अधिक बाहर् कों छलक पड़ा!अजय केँ उपर मानो कयामत टूट पड़ी थि औऱ अजय नां चाहते हुए भि अपनीसगी मम्मी कि चुचियों कों देखरहा थां औऱ जैसे हि मेनका खड़ी हुइ थि तौ उसे अपने बेटे कि नजरो कां एहसास हुआ औऱ उसकी आंखे लज्जा सें झुक गई!
मेनका कों समझ नहींआया कि क्याँ करे औऱ थोड़ी देर केँ लिए आंखे नीचेकिए खड़ीरही औऱ अजय नें उसकाहाथ पकड़े हुए मौके कां फायदा उठाते हुएजी भरकर उसकी चुचियों केँ उभार कों निहारा औऱ उसकेबाद अजय नें होश मे आतेहुए जमीन पर्र पड़ेहुए उसकी साड़ी केँ पल्लू कों उठाया औऱ उसके कंधे पऱ रख दिया तौ मेनका नें अपनी साड़ी केँ पल्लू कों ठीक किया!
अजय:" माता आप् ठीक तौ हें नं ? आपकोचोट तौ नहींआई ?
मेनका नें अपनाहाथ उससे छुड़ाया औऱ फिन सें तलवार कों उठाते हुए बोलीं:"
" हम् ठीक हें पुत्र! आपनेहमे बचा लिया!
उसकेबाद दोनो गुफा सें बाहर् निकलगए औऱ बाहर् खड़ी हुईँ बग्गी मे बैठकर नदी कि तरफचल पड़े!अजय बग्गी कों चलारहा थां औऱ मेनका अंदर परदे मे बैठी हुइ थि औऱ उसे अपने आप् पर्र लज्जा आँ रही थि कि थोड़ी देर पहले केसे उसके बेटे केँ सामने उसकी साड़ी कां पल्लू सरक गय़ा गय़ा औऱ उसकी चुचियों कां उभार साफ़नजर आँ गय़ा थां! मेनका अभि तक यकीन नहींकर पारही थि कि क्याँ सच मे अजय उसकी गोलाईयों कों देखरहा थां याँ यह केवल उसकावहम थां! मेनका नें जान बूझकर अपने पल्लू कों सरका दिया औऱ अपनी चुचियों केँ उभार कों देखने लगी कि क्याँ सच मे उसकी चूचियां अभि भि इतनी आकर्षक हें औऱ उनकेबीच कि कसी हुईँ गहरीखाई कों देखते हि मेनका कों अपनेऊपर अभिमान हुआ औऱ उसने एक् हथेली कों अपनी एक् मम्मों केँ उपररख दिया औऱ छूकर देखने लगी मानो उसकी सख्ती कों महसूस करना चाहती होँ औऱ मेनका कि सांसे तेज होँ गईं! मेनका कों एहसास होँ गय़ा थां कि उसकी चूचियां अभि भि आश्चर्यजनक रूप सें सख्त हें याँ फिन कहीं मुझेसच मे भरम तौ नहीं हौ रहा हैं! यह विचार उसकेमन मे आते हि उसकादिल तेजी सें धड़का औऱ उसने खिड़की सें झांककर अपने बेटे कि तरफ देखा जौ बग्गी चलाने मे व्यस्त थां औऱ मेनका नें पर्दे कों खिड़की पऱ टांग दिया औऱ फिन अपने एक् हाथ कों अपनी ब्रा मे घुसा दिया औऱ अपनी अपनी नंगी मम्मों कों हाथ मे भर लिया जिससे उसके मुंह सें अहह निकल गई! मेनका कि बड़ीगोल मटोल मम्मों उसकेहाथ मे ठीक सें समा नहींरही थि औऱ मेनका उसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे सहलाकर उसकी कठोरता कां जायजा लेनेलगी औऱ जिस्म मे कंपकपी सि आँ गई क्योंकि उसकी आश्चर्यजनक रूप सें कसी हुईँ थि ! मेनका अपनी मम्मों कों दबा हि रही थि कि बग्गी रुक गई औऱ मेनका नें पर्दा हटाकर देखा तोँ नदी आँ गई थि औऱ अजय बग्गी सें नीचेउतर गय़ा औऱ बोला:"
" हम् नदी पर्र आँ गए हें माता! आप् बाहर् आँ सकती हें!
मेनका नें अपनेहाथ कों अपनी ब्रा सें बाहर् निकाला औऱ अपनी हालत कों ठीक करती हुइ खड़ी हुई औऱ बग्गी सें नीचेउतर गई! मेनका अपनी उत्तेजना सें लाल सुर्ख आंखो केँ संग अपनीतेज गति सें चलरही सांसों कों संभालने कां प्रयास करनेलगी औऱ अजय उसकी अजीब सि हालत देखकर बोला:"
" क्याँ हुआ माता? आप् ठीक तौ हैं नं?
अपने बेटे कि बात सुनकर मेनका कां दिल तेजी सें धड़कउठा औऱ बोलि: मे ठीकहु पुत्र! आओ हम् आगे कि विधि पूर्ण कर लेते हें!
इतना कहकर मेनका तलवार लेकरनदी मे उतर गई औऱ अजय उसकेसंग संगचल पड़ा! मेनका अबनदी केँ बीच मे खड़ी हुईँ थि औऱ तलवार कों मयान सें बाहर् निकाल कर एक् डुबकी लगाई औऱ उपर आँ गई औऱ बोलि:
" लो पुत्र, पवित्र नदी औऱ अपने पूर्वजों कों ध्यान मे रखतेहुए डुबकी लगाओ!
अजय नें तलवार कों हाथ मे लिया औऱ पानी मे डुबकी लगाई औऱ फिन मेनका नें उसे तलवार कों वापिस लिया औऱ फिन सें डुबकी लगाई! दोनो नें इसीतरह तीनतीन डुबकियां लगाई औऱ औऱ उसकेबाद मेनका नें तलवार कों अजय कों दिया औऱ फिन दोनो हाथो मे जल लेकर आंखेबंद करतेहुए कुछ बुदबुदाने लगी! मेनका केँ कपड़े पानी सें भीग जाने केँ कारण उसकेबदन सें चिपकगए थें जिस कारण उसकी काली ब्राअब साफनजर आँ रही थि औऱ ब्रा मे फड़फड़ा रही उसकी चुचियों कां सम्पूर्ण आकार देखकर अजय मंत्र मुग्ध सां हौ गय़ा औऱ एक् बारफिन सें अपनी मम्मी कि चुचियों कों घूरने लगा! मेनका नें अपनी आंखे खोली औऱ जल कों नदी मे गिरा दिया औऱ अजय कों भि वैसा हि करने केँ लिएकहा तोँ अजय नें तलवार मेनका कों दि औऱ हाथो मे जल भरकर क्रिया कों दोहराने लगा! मेनका कि नजर अपने आप् पऱ पड़ी तोँ उसे अपनी सांसे रुकती हुईँ सि महसूस हुई क्योंकि कपड़े भीग जाने केँ कारण ब्रा मे कैद उसकी चूंचियां अपने सम्पूर्ण आकार मे अपनी अनौखी छटा बिखेर रही थि! मेनका कों समझ नहि आँ रहा थां कि अब क्याँ करे क्योंकि अब उसके अंदर अपने बेटे कि नजरो कां सामना करने कि हिम्मत नहि बची हुईँ थि! अजय नें पानी कों नदी मे अर्पण किया औऱ अब मेनका कि बारी थि तोँ मेनका अंदर हि अंदर कांपउठी औऱ हिम्मत करके उसनेजल कों दोनो हाथों मे लिया औऱ आंखेबंद करके ध्यानमग्न हौ गई औऱ अजय कि नजरे उसकी चुचियों पर्र आँ टिकी औऱ मेनका नें धीरे-धीरे सें अपनी आंखो कों हल्का सां खोला औऱ समझ गई कि उसका बेटा उसकी चुचियों कों टकटकी लगाएदेख रहा थां तौ उसकी आंखेतेज हौ गईं! मेनका नें अपनी विधि कों पूर्ण किया औऱ उसकेबाद अजय नें विधि कों पूर्ण किया!
उसकेबाद मेनका नदी केँ किनारे कि तरफचल पड़ी औऱ यही उससेभूल होँ गई क्योंकि उसकी भीगी हुई साड़ी उसके नितंबों केँ उभार सें पूरीतरह सें चिपक गई थि औऱ उसकी भारी भरकम पिछवाड़े कि गोलाई औऱ मोटाई देखकर अजय कों दूसरा झटकालगा औऱ मेनका केँ चलने सें उसकी गांड़ तराजू केँ पलड़े कि तरहउछल रही थि! मेनका चलती हुईँ बाहर् आँ गई औऱ बग्गी मे बैठ गई तोँ अजय नें बग्गी कों अपनेघऱ कि तरफ दौड़ा दिया! गुफा केँ पास पहुंच कर उसने बग्गी कों रोक दिया औऱ उसकेबाद दोनोमा गुफा मे घुसगए! अजय औऱ मेनका दोनोसंग चलरहे थें औऱ मेनका बोलीं:
" बेटा आज अच्छे सें सारी विधियां पूर्ण हौ गई हैं! अबबस मे आपको तलवार दूंगी!
अजय:" माता आपने मेरेलिए इतनाकुछ किया!सच मे आप् महान हौ! समाज केँ नियमो कों ताक पऱ रख दिया!
मेनका नें उसकाहाथ पकड़ा औऱ बोलि:" वोँ मेरा दायित्व हें पुत्र! मे समाज कि परवाह नहीं करती बल्कि आपकी खुशी मेरेलिए मायने रखती हें!
अजय:"सच माता मे धन्यहु जौ आप् जैसी माता मिली!
उसकेबाद दोनोफिन सें कक्ष मे आँ गए औऱ मेनका नें अपने पूर्वजों कि तस्वीर केँ आगे तलवार कों निकालकर अजय केँ हाथ मे दिया औऱ बोलीं:सि
" आज सें अपने पूर्वजों कों साक्षी मानकर मे यह तलवार आपके हवाले कररही हूं! ध्यान रखना कि इस तलवार कां उपयोग मात्र धर्म औऱ न्याय कि रक्षा केँ लिए हि करना!जान देकर भि अपने पूर्वजों केँ वचन कि रक्षा करना आपकी जिन्दगी कां लक्ष्य होगा!
अजय नें तलवार कों हाथ मे लिया तौ उसका समूचा शरीर कांपउठा औऱ अजय बोला:"
" मे आपकेसिर कि शपथ खाताहु कि अपने प्राणों कां बलिदान देने सें भि पीछे नहि हटूंगा! मुझे आशीर्वाद दीजिए माता!
इतना कहकरअजय उसके कदमों मे झुका तौ मेनका नें उसे आशीर्वाद देतेहुए गलेलगा लिया औऱ माथाचूम कर बोलीं:
" मेरा आशीर्वाद सदैव आपकेसंग हैं पुत्र! जुगजुग जियो मेरेलाल!
उसकेबाद अजय औऱ मेनका दोनोउस कक्ष सें निकलकर अपनेघऱ मे आँ गए औऱ रात कां लगभग एक् बज गय़ा थां तोँ अजय सोने केँ लिए अपने कक्ष मे चला गय़ा औऱ मेनका अपनेखाट पर्र लेटी हुई थि! वहीलाल सुर्ख दुल्हन कां जोड़ा पहनेहुए औऱ जैसे हि उसकीनजर स्वयं केँ कपड़ो पर्र गई तौ वोँ स्वयं कों नाँ रोकपाई औऱ शीशे केँ सामने फिन सें खड़ी हौ गईं औऱ स्वयं कों निहारने लगी! मेनका नें देखा कि उसकी मांगा कां सिंदूर भीगकर हल्का सां फ़ैल गय़ा थां जिससे वोँ अब औऱ भि अधिक सुंदर लगरही थि! मेनका केँ भीगेहुए बाल पहले सें अधिक आकर्षक लगरहे थें औऱ मेनका नें अपनेगले मे पड़ेहुए मंगल सूत्र कों देखा तौ उसे अपने पति कि याद आँ गई औऱ उसकी आंखेभर आई! मेनका नें अपने मंगल सूत्र कों पकड़ा औऱ उसे उतारने लगी तोँ उसकेहाथ कांपउठे क्योंकि उसेयाद आया कि अब वोँ चाहकर भि जीवनभर इस मंगल सूत्र कों नहीं उतार सकती क्योंकि ऐसा करना उसके बेटे केँ लिए अपशकुन होगा! मेनका नें मंगल सूत्र कों अपने कपड़ो केँ अंदर छुपा लिया औऱ फिन वापिस अपनेबेड पऱ आँ गई! वोँ चाहती थि तौ अपने कपड़े उतारकर दूसरे कपड़े पहन सकती थि मगर वोँ स्वयं कों इन कपड़ो मे बेहद हसीन औऱ आकर्षक महसूस कररही थि जिस कारण उसकामन नहि हुआ औऱ उन्ही कपड़ों कों पहनेहुए अपने कक्ष मे आँ गई औऱ फिन थोड़ी देर केँ बाद गहरी नींद मे चली गई!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
बढ़िया एपसोड।
जैसा कि पहले सें मालूम थां, सलमा नें अपनेकदम वापस खींचलिए जैसे हि उसे विक्रम केँ बारे मे पताचला। मगरउसे यह भि सोचना चाहिए थां कि पूछने पऱ विक्रम नें उसेसच हि बताया, नं कि कोई गोलमोल जवाब दिया, इसका मतलब वोँ धोखा तौ नहीं हि देरहा थां।
बाकीअजय कों तलवार मिल गई, औऱ मेनका कों नं चाहते हुए भि सुहागन कां रूप धारण करना पड़ा।
मगरयह रस्मकुछ अजीबलगी मुझे कि मंगलसूत्र उतर नहीं सकते, क्योंकि जैसा लिखा हैं उस हिसाब सें तोँ माँ हि देगी तलवार, मगर पिता कि मृत्यु पऱ तोँ उसे मंगलसूत्र उतरना हि पड़ेगा।
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
राधिका पलंग पर्र पड़ी हुई लंबी लंबी सांसे लें रही थि क्योंकि अभि वोँ जब्बार केँ संग एक् दमदार चुदाई करकेहटी थि! जब्बार भि उसकेपास हि लेटाहुआ थां औऱ बोला:"
" राधिका सलमा कां क्याँ हुआ? तुम्हे तोँ काम दियाकुछ आगे। बढ़ा क्याँ ?
राधिका उसकीतरफ सरकी औऱ उसकी छाती चूमती हुईँ बोलीं:"
" सलमा कों मैने अपने शीशे मे उतारना शुरुआत कर दिया हें! सच मे कमाल कां शरीर हें उसका!मगर पिछले दोदिन सें कुछ दुखी औऱ परेशान सि लगरही हैं वोँ! कुछ न् कुछबात तौ हुइ हें!
जब्बार उसकीबात सुनकर बोला:"पता लगाने कि कोशिश करो कि क्याँ हुआ हैं?
राधिका:" मुझे सलमा अधिकभाव नहि देती क्योंकि उसकी सीमा सें अधिक बनती हें औऱ दोनोआपस मे हि गुपचुप बाते करती हैं!
जब्बार केँ होंठो पऱ मुस्कान आँ गई औऱ बोला:"फिन एक् काम करताहु कि सीमा कों भि उसकेपास सें हटा देता हूं औऱ कल सें मात्र तुम् सलमा केँ सभीकाम करोगे तोँ फिन वोँ मजबूरी मे तुम्हें हि अपना राजदार बनाएगी!
राधिका:" हानयह भि ठीकमगर सीमा कों केसे उससेअलग करोगे क्योंकि सलमाउसे अपनेपास सें जाने नहीं देगी!
जब्बार:" उसकी चिंता मतकरो, वोँ मेराकाम हें! तुम् बस सलमा पऱ नजर बनाएरखो!
राधिका:" ठीक हें मगर बताओ तौ सीमा कां क्याँ करोगे?
जब्बार:" ध्यान सें मेरीबात समझने कि कोशिश करना, सीमा केँ सिर चोरी कां इल्जाम लगाकर थोड़े दिन केँ लिएउसे जेल मे डाल देंगे औऱ फिनबाद मे जबसभी राज्य मेरेहाथ मे आँ जाएगा तौ सीमा कों बाहर् कर देंगे!
राधिका उसकीबात सुनकर थोड़ी परेशान होती हुई बोलि:"
" नहींयह तरीका ठीक नहि हैं, कोई दूसरा बताओ, सीमाकभी चोरीकर हि नहि सकती औऱ फिन इससे मेरे मम्मी बाप कों बेहददुख होगा!कोई दूसरा तरीका सोचो!
जब्बार:" राधिका तुम् चिंता मतकरो औऱ मुझ पऱ भरोसा रखो!कुछ हि दिन कि बात हें फिनसभी ठीक होँ जाएगा औऱ आप् देख्ना केसेसभी लोग आपकेसिर झुकाकर सलाम करेंगे!
राधिका उसकीबात सुनकर थोड़ी देर केँ लिएसोच मे पड़ गई औऱ बोलीं:" मगर मेरी बेहन कों बाद मे कोई दिक्कत तौ नहीं होगी नाँ?
जब्बार:" मेरे होतेहुए चिंता मतकरो, मे उसेकोई दिक्कत नहीं होने दूंगा!
राधिका जब्बार सें लिपट गई औऱ बोलीं:" ठीक हें मगर अपना वादायाद रखना! वोँ मेरीसगी बेहन हें!
जब्बार नें उसे एक् बार चोदना शुरुकर दिया औऱ राधिका भि उछलउछल कर चुदने लगी!!
अगलेदिन सुभह सलमाउठी तोँ उसने देखा कि केवल राधिका हि आई हैं औऱ सीमा नहींदिख रही हैं तौ बोलि:"
" राधिका यह सीमा क्यूं नहि आईआज ?
राधिका कां चेहरा दुःखी हौ गय़ा औऱ बोलीं:" शहजादी बेहद बुरीखबर हैं कि सीमा कों जेल मे भेज दिया गय़ा हैं चोरी केँ इल्जाम मे!
सलमा उसकीबात सुनकर चिल्ला उठी:"यह क्याँ बकवास कररही हौ तुम्? सीमाकभी चोरीकर हि नहि सकती, किसकी हिम्मत हुइ उसेजेल भेजने कि?
राधिका सलमा कां क्रोध देखकर एक् समय केँ लिए कांपउठी औऱ बोलीं:" वोँ उसकेपास सें शाही गहने मिले हें! जब्बार नें उसको अभि जेलभेज दिया हैं जिस पर्र सुनवाई होगीआज!
सलमा उसकीबात चिढ़ गई औऱ बोलि:" सीमा कों जेल भेजने वाला जब्बार होताकौन हैं? जाओ औऱ सीमा कों आजादकरो यह सलमा कां शाही फरमान हें राधिका!
राधिका:" माफ कीजिए शहजादी, सीमा मेरी भि बेहन हें मगरजब तक वोँ राजसभा मे निर्दोष साबित नहि होतीतब तक मे कुछ नहि कर सकती!
उसकीबात सुनकर सलमा गुस्से सें पांव पटकती हुई रजिया केँ कक्ष मे आँ गई औऱ उसे सारीबात बताई औऱ बोलि:"
" हमे किसी भि कीमत पर्र सीमा बाहर् चाहिए अम्मी! जब्बार कां कुछ सोचिए वोँ अपनीमन मर्जी ज़्यादा कररहा हें आजकल!
रजिया:" तुम् फिक्र मतकरो, मे सीमा कों छुड़ाने कि कोशिश करूंगी!
उसकेबाद लगभगआधे घंटेबाद सभालगी हुईँ थि औऱ सीमा बेड़ियों मे बंधी खड़ी हुई थि जिसका मुंहलाल होँ गय़ा थां औऱ आंखो सें आंसू निकलरहे थें! उसकी हालत सलमा कां दिलभर आयामगर चुप हि रही!
राजसभा पूरीभर चुकी थि औऱ सबलोग सुनवाई कां प्रतीक्षा कररहे थें क्योंकि सीमा कां परिवार राज परिवार कां सबसे वफादार रहा हैं! रजिया सभा मे आई तौ सब नें झुककर सलाम किया औऱ रजिया अपने सिंहासन पऱ बैठ गई औऱ बोलीं:"
" आज कि कार्यवाही शुरुआत कि जाए!
दरबान:" महारानी शहजादी सलमा केँ संग रहने वाली सीमा पर्र आरोप हें कि उसनेराज परिवार केँ शाही गहने चुराए हें औऱ कल्लू सुनार कि दुकान पऱ बेचने केँ लिए गई तौ राज परिवार केँ वफादार औऱ ईमानदार कल्लू नें वोँ बात सेनापति जब्बार कों बताई !
रजिया:" सीमा क्याँ कहना चाहती हौ आप् ?
सीमा:" रानी साहिबा यहसभी कुछ हें मैनेकोई गहने नहीं चुराए हें! मेरे खिलाफ जरूरी कोई साजिश हुई हें!
राजमाता;" कल्लू सुनार आप् क्याँ कहना चाहेंगे? कलयहसच बोलरही हैं?
कल्लू:" यह लड़की हि मेरेपास गहने लेकरआई थि औऱ मुझे बेचना चाहरही थि!
सीमा बुरीतरह सें फंस गई थि क्योंकि सारे सुबूत औऱ उसके गवाह उसके खिलाफ थें! शाही गहने सुबूत केँ तौर पर्र सभा मे पेशहुए औऱ रजिया चाहते हुए भि सीमा कों नहींबचा सकती थि तौ औऱ बोलि:"
" सीमाअगर तुम् सचबोल दोगी तौ हम् तुम्हारी सजाकम कर सकते हें!
सीमा कि आंखो सें आंसूछलक पड़े औऱ बोलीं:" मेरा यकीन कीजिए राजमाता! मैने चोरी नहींकरी हैं! मे बेकसूर हु!
सलमासमझ गई थि कि सीना बुरीतरह सें फंस गई औऱ अगर एक् बार भि वोँ जेल गई तौ जिन्दगी भर बाहर् नहीं आयेगी औऱ जेल मे उसकी जीवन जहन्नुम बन जाएगी क्योंकि जेल पूरीतरह सें जब्बार केँ इशारों पऱ चलती थि! रजिया कुछ बोलती उससे पहले हि सलमाबोल पड़ी:"
" सीमा नें कोई चोरी नहींकरी हें बल्कि जौ कुछहुआ हैं उसके जिम्मेदार हम् हें! हमेखबर मिली थि कि कल्लू सुनार चोरी केँ गहने खरीदता हें तौ हम् उसे उसकी सच्चाई जानने केँ लिए गहने देकर सीमा कि उसकेपास भेजा थां! सीमा कि कोई गलती नहीं हैं बल्कि असली गुनाहगार हम् हें क्योंकि हमने कल्लू पऱ शक कियामगर वोँ ईमानदार निकला! उसकी ईमानदारी केँ इनाम केँ तौरयह शाही गहने कल्लू केँ देदिए जाए औऱ आप् हमे होँ चाहेसजा दे सकती हें!
राजसभा मे पूरा सन्नाटा छायारहा! जब्बार औऱ राधिका कि नजरे मिली तौ दोनो कों समझ नहींआया कि क्याँ करे औऱ वही कल्लू समझ गय़ा थां कि उसे इनाम तोँ जरूर मिलने वाला हें मगरअब उसकी शामतआने वाली हैं क्योंकि सलमाउसे छोड़ने वाली नहीं थि!
रजिया:" शहजादी सलमा आप् आगे सें ध्यान रखना कि बिनाहमे बताएऐसा कोईकदम नं उठाए नहीं तौ आपके खिलाफ कार्यवाही होगी औऱ कल्लू कों यहसभी गहने इनाम मे दिएजाए!
कल्लू केँ तौ वारे न्यारे होँ गए क्योंकि पहले सें जब्बार उसेझूठ बोलने केँ लिए बहुत मोटामाल दे चुका औऱ अब शाही गहने मिलने सें तोँ उसकी क़िस्मत हि बदल जानीतय थि!
कल्लू गहने लेकर अपनेघऱ आँ गय़ा औऱ सीमा सलमा केँ संग आँ गई औऱ उससे लिपटकर रोनेलगी औऱ बोलीं:"
" हमेमाफ कर दीजिए शहजादी कि हमारी वजह सें आपको नीचा देख्ना पड़ामगर मेरा यकीन कीजिए मैनेकोई चोरी नहीं कि हैं
सलमा:"हमे तुम् पऱ पूरा विश्वास हैं सीमातभी तौ तुम्हे बचाया हैं! आपके खिलाफ यह साजिश जरूरी कोई बहोत बड़ीचाल कां हिस्सा हौ सकता हें!
सीमा:" मे आपकायह उपकार कभी नहि भूल सकती!मगर मुझेसमझ नहि आँ रहा हैं कि गहने मेरेपास केसे पहुंचे?
सलमा:" तुम् ज़्यादा मत सोचिए मे स्वयं पतालगा लूंगी! कुछखाओ औऱ अपना ध्यान रखो!
सलमा केँ लिए एक् केँ बाद एक् समस्या खड़ी होँ रही थि! पहले तौ विक्रम नें उसे धोखा दिया औऱ अब सीमा केँ खिलाफ साजिश जरूर उसकेलिए खतरे कां संकेत थां जिसे वोँ भली भांति समझरही थि! धीरे-धीरे धीरे-धीरे रात होनेलगी औऱ सलमा कों विक्रम की याद आँ रही थि मगर एक् बार प्रेम नहीं बल्कि क्रोध थां!
रात केँ लगभग 11 बजे सलमा अपने कक्ष मे बेचैनी सें टहलरही थि औऱ तभीउसे किसी केँ कदमों कि आहत हुई तोँ उसने चौंककर देखा तोँ सामने विक्रम खड़ाहुआ थां औऱ सलमा कों अपनी आंखो पर्र यकीन नहींहुआ तौ उसनेफिन सें ध्यान सें देखा तौ विक्रम हि थां जौ उसकीतरफ आँ रहा थां औऱ उसे देखते हि सलमा कि आंखे गुस्से सें लाल हौ गई औऱ बोलि:"
" तुम्हारी हिम्मत कैसी हुई राजमहल केँ अंदरकदम रखने कि विक्रम?
विक्रम उसके लगभग आँ गय़ा औऱ बोला:" सलमा मेरीबात समझने कि कोशिश करो, ध्यान सें मेरीबात सुनो!
सलमा:" विक्रम अगर अपनी जीवन सें प्रेम हें तौ वापिस चलेजाओ नहीं तौ जिंदा नहींबच पाओगे!
विक्रम नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोला:" सलमा पहले मेरीबात तौ सुन लीजिए आप्! इतना बेइज्जत होने केँ बाद भि आपकेपास इसलिये आयाहु कि क्योंकि मे आपसे प्रेम करता हूं औऱ आपको खोना नहीं चाहता!
सलमा नें गुस्से सें उसकाहाथ झटक दिया औऱ बोलीं:" खबरदार जोँ मुझेछुआ तोँ मुझसे बुराकोई नहीं होगा! मे अंतिम बारकह रहीहु कि वापिस चलेजाओ नहीं तौ मुझे सैनिकों कों बुलाना पड़ेगा!
विक्रम:" मे जानता हूं कि आप् ऐसा नहींकर सकती क्योंकि आप् मुझे प्रेम करती होँ!
सलमा नें उसे गुस्से सें देखा औऱ बोलीं:" प्रेम करती थि विक्रम मगरअब मात्र नफरत करतीहू! मे अंतिम बारकह रहीहु खुदा केँ लिएचले जाओ नहीं हैं मुझे मजबूरी मे सैनिकों कों बुलाना हि पड़ेगा!
विक्रम उसकेबेड पऱ बैठ गय़ा औऱ हल्की सि मुस्कान देतेहुए बोला:" सलमा आप् ऐसा नहींकर सकती क्योंकि आप् मुझसे प्रेम करती हैं!
सलमा नें तभी गुस्से सें वही पड़े हथौड़े कों जोर सें सायरन पर्र मारा औऱ एक् तेज आवाज़ पूरेमहल मे गूंजउठी औऱ देखते हि देखते चारोतरफ भाग दौड़मच गई! विक्रम यकीन नहि करपारहा थां कि सलमासच मे ऐसाकर सकती हूं औऱ उसकाभरम भि टूट गय़ा कि सलमा उससे प्रेम करती हैं! विक्रम नें जान बूझकर अपनी तलवार कों सलमा केँ कदमों मे रख दिया औऱ बोला:"
" अगर मेरीमौत सें हि आपको खुशी मिलेगी तोँ हमें खुशी खुशीयह मौत भि कुबूल हैं!
देखते हि देखते सैनिकों नें कक्ष कों चारोओर सें घेर लिया औऱ विक्रम नें पूरीतरह सें हाथ खड़ेकर दिए औऱ उसे बंदीबना लिया गय़ा! विक्रम जंजीरों मे बंधाहुआ थां औऱ सैनिक उसे घसीटते हुएजेल मे लेँ गए औऱ अंदरबंद कर दिया!!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Next part mein bada twist
bhay Vikram hi kahani kaa hero hu. Sehzadi Salma khud vikram k tarf chl pade. Salma ko Vikram kee fauladi baju mai hi surakshit mehsus hu.
क्रोध औऱ नफरत इंसान केँ विवेक कों खा जाता हें औऱ ऐसा हि कुछ सलमा केँ संग हौ रहा हें!
लेखक कों अपने हिसाब सें लिखने दो,,,, युनिक-स्टार पऱ हाम्हे पुरा भरोसा हें -the Best
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