शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
सैनिकों नें विक्रम कों बुरीतरह सें मारा औऱ देखते हि देखते यहबात आग कि तरहफैल गई कों कोईचोर राजमहल मे घुसने कि कोशिश कररहा थां औऱ पकड़ा गय़ा! सीमा तक भि यहबात पहुंची तौ वोँ हैरान होँ गई औऱ सलमा सें मिलने केँ लिएरात कों हि आँ गई औऱ बोलीं:"
" आप् सुरक्षित तोँ हें नाँ? सुना हें राजमहल मे कोईचोर घुसआया थां औऱ आपके कक्ष तक पहुंच गय़ा थां वोँ!
सलमा थोड़ी देरचुप रही तौ सीमा बोलि:" बोलिए न् शहजादी? मे आपसे हि बातकर रही हूं!
सलमा:" वोँ चोर औऱ कोई नहि बल्कि युवराज विक्रम हें जोँ हमसे मिलने आया थां!
सीमा उसकीबात सुनकर हैरानी सें उछल पड़ी औऱ बोलीं:"
" क्याँ बातकर रही हौ आप् ? विक्रम आपसे मिलने सें लिए अपनीजान हथेली पर्र रखकर राजमहल तक पहुंच गए!
सलमा:हान वोँ आँ गय़ा थां औऱ हमने हि सैनिकों कों बुलाकर उसेकैद करवा दिया हैं!
सीमा उसकीबात सुनकर हैरान हौ गई औऱ उसे घूरती हुइ बोलीं:"
" यह आपने क्याँ गजबकर दिया शहजादी? विक्रम कों कुछ होँ गय़ा तौ आप् अपने आपकोकभी माफ नहि कर पाएगी क्योंकि ऐसा सच्चा प्रेम करने वाले भाग्य सें मिलते हें!
सलमा उसकीबात सुनकर बोलीं:" मत भूलो सीमा कि उसके बाप नें हमारे अब्बा कां खून किया हैं! हमे नहीं चाहिए ऐसी मुहब्बत जिसके हाथखून सें रंगेहुए होँ!
सीमा:" औऱ आप् क्याँ कररही हैं! आप् भि तौ अपनेहाथ खून सें हि रंगरही हैं शहजादी! एक् बेगुनाह कों सजादे रही हैं आप्! विक्रम नें तौ आपके अब्बा कां खून नहि किया!
सलमा उसकी बातो कों सुनकर थोडा शांत हुइ औऱ बोलि:"
"सीमा अपनो कों खोने कां दर्द आप् कभी नहि समझ सकती!
सीमा उसकाहाथ पकड़कर उसे झंझोड़ती हुई बोलि: आप् फिन सें यह दर्दसहन करने केँ लिए सजधजकर रहो क्योंकि विक्रम भि आपका अपना हि तौ हें!
सलमा उसकीबात सुनकर कांपउठी औऱ बोलि:" उदयगढ़ कां कोई भि व्यक्ति कभी मेरा नहीं हौ सकता सीमा!
सीमा:" तोँ फिन क्याँ आपने विक्रम सें प्रेम नहीं किया थां ? मानती हु कि उसने आपसे छिपाया मगर आपके पुछने पर्र तौ नहीं बोला वोँ!
सलमा:"हान प्रेम किया थां मगर वोँ सभीसच जानता थां तौ मुझे पहले क्यूं नहि बताया?
सीमा:" क्योंकि वोँ जानता थां कि आप् नाराज होँ जाएगी औऱ शायद वोँ आपको खोना नहि चाहता थां! मुझे आपसेयह उम्मीद नहि थि शहजादी!
सलमा केँ पासअब कोई जवाब नहि थां औऱ चुपरही तौ सीमा बोलि:" आपकोबता हें कि दोनो राज्य पहले सें हि दुश्मनी कि आग मे जलरहे हें औऱ आप् देख्ना कि सुभह जब्बार विक्रम कों मार देगा औऱ उसकेबाद जोँ तबाही औऱ बर्बादी होगी उसकी जिम्मेदार मात्र आप् होगी!
सलमा कां चेहरा पूरीतरह सें सपाट हौ गय़ा थां औऱ उसेसमझ नहीं आँ रहा थां कि क्याँ करे! सीमा नें उसकाहाथ पकड़ा औऱ बोलि:" अगर आप् इस बर्बादी कों रोकना चाहती हें तौ विक्रम कों सुरक्षित भेज दीजिए चाहे आप् उससे प्रेम करे याँ न् करेयह आपकी अपनी मर्जी हैं मगर दोनो राज्यों कि भलाई केँ लिए आपकोयह करना हि पड़ेगा!
सलमा:"मगर केसे? विक्रम तौ अबजेल मे कैद हौ चुका हैं औऱ जेल तौ पूरीतरह सें जब्बार औऱ उसके मित्र रमन केँ हाथ मे हैं!
सीमा:"कुछ भि करके विक्रम कों बचाना हि पड़ेगा! मे कुछ सोचती हु क्याँ करना होगा!
सलमा:" एक् तरीका हैं कि किसीतरह विक्रम कों जेल सें निकालकर पवन तक पहुँचा दियाजाए फिन वोँ किसी केँ हाथ नहीं आयेंगे!
सीमा:" आप् चिंता मत करिए! मे विक्रम कों छुड़ाने कां इंतजाम करतीहू!
वहीं दूसरी तरफजेल मे विक्रम कों अलग हि कमरे मे डाल दिया गय़ा थां औऱ उसका बेहद बेहद दर्दकर रहा थां क्योंकि उसकेबदन पऱ बहुत सारेघाव थें! विक्रम कों अब सलमा सें नफ़रत हौ गई थि क्योंकि उसने साबित कर दिया थां कि वोँ उससे प्रेम नहीं करती हैं! विक्रम केँ लिए सबसे बड़ी चुनौती जेल सें आजाद होना थां औऱ विक्रम नें आसपास देखा तौ एहसास हुआ कि पूरीतरह सें कमरे मे अंधेरा थां औऱ बस एक् खिड़की सें हल्की सि रोशनी आँ रही थि! विक्रम हिम्मत करके खिड़की तक पहुँचा औऱ ताकत लगाते हुएउसे उखाड़ दिया औऱ धीरे-धीरे सें खिड़की सें बाहर् निकलने लगा!
विक्रम एक् चौड़े रास्ते पर्र आँ गय़ा जहां बहुत रोशनी थि औऱ सामने हि सैनिक पहरादे रहे थें तौ विक्रम वापिस मूड गय़ा औऱ एक् तहखाने मे घुस गय़ा जहां बहुत सारा सामान भराहुआ थां औऱ बदबू फैली हुई थि!
तभीउसे किसी केँ आने कि आहत हुईँ तोँ उसे सावधान होँ गय़ा औऱ एक् तरफछुप गय़ा! सामने सें कुछ सैनिक निकले औऱ जैसे हि दूरगए तोँ विक्रम दांई तारीफ मुड गय़ा औऱ सावधानी सें आगे बढ़ने लगा! विक्रम अब एक् हाल मे खड़ाहुआ थां औऱ जैसे तैसे करके खिड़की केँ सहारे छत तक आया औऱ छत कि जाली कों उखाड़ दिया औऱ छत पऱ चढ़ गय़ा! पहरादे रहे एक् सैनिक कि नजरउस पर्र पड़ी औऱ विक्रम नें उसेमौत केँ घाट उतार दिया औऱ आगेबढ़ गय़ा! छत पर्र बहुत सारे सैनिक थें औऱ उधर सें निकलना आसान नहीं थां! विक्रम थोड़ी देरऐसे हि सोच मे पडारहा औऱ तभीउसे लगा कि कोईउसी तरफ आँ रहा हैं तौ वोँ सावधानी सें छिप गय़ा औऱ उसने देखा कि कोईदया उसकीतरफ आँ रहा हें हैं तौ विक्रम छुपारहा औऱ जैसे हि उसके लगभग सें गुजरा तौ विक्रम नें उसके मुंह पऱ हाथ रखतेहुए अपनीतरफ खींचकर औऱ उसकी गर्दन पऱ तलवार रख दि तोँ वोँ साया बोला:"
" विक्रम मे सीमाहु!
यह सुनकर विक्रम नें उसे छोड़ दिया औऱ सीमा बोलीं:"
" घबराओ मत! मे आपको यहां सें सुरक्षित जगह तक पहुँचा दूंगी!
उसकेबाद सीमाउसे अपनेसंग लेकरचल पड़ी औऱ थोड़ी देरबाद विक्रम जेल सें बहोत दूर आँ गय़ा थां औऱ सीमा सें बोला:
" मुझे बचाने केँ लिए आपका आभार मेरी बेहन!
सीमा: भइया कि रक्षा बेहन नहीं करेगी तौ फिनकौन करेगा! मगर आप् जानते हें कि मुझे आपको बचाने केँ लिए शहजादी नें हि भेजा हें!
विक्रम सलमा कां नाम सुनते हि गुस्से सें लाल हौ गय़ा औऱ बोला:"
" उस मतलबी औऱ धोखेबाज औऱ मतलबी कां नाममत लो मेरे सामने! मुझे बचाना हि होता तोँ फांसती क्यूं मुझे!
सीमा:"ऐसा नं बोलो भइया! वोँ मतलबी नहीं हैं बस हालत कों ठीक सें समझ नहींपाई! एक् मर्दकभी नहि समझ सकता कि एक् लड़की कि जीवन मे उसके बाप कि क्याँ अहमियत होती हैं!
विक्रम उसकीबात सुनकर बोला:"मगर सलमासच मे बेहद बुरेदिल कि हें औऱ उससे कहना कि आज केँ बादउसे मेरी परछाई भि नहि दिखेगी!
सीमा उसकाहाथ पकड़कर उसे बताया कि किसतरह सें वोँ चोरी मे फंस गई थि औऱ सलमा नें उसे बचाया! सीमाउसे समझाते हुए बोलि:" भइया सलमा तौ बेचारी मासूम हें औऱ बेहदसाफ औऱ अच्छे दिल कि हें! उसके खिलाफ तौ पहले हि बहोत सारी साजिश रची गई हैं औऱ आपको उसकासंग देना चाहिए नं कि उससे मुंह मोड़ना चाहिए!
विक्रम:" मगर उसने जौ मेरेसंग किया क्याँ वोँ सही हैं?
सीमा:"ठीक हें उसनेगलत कियामगर उसनेसभी कुछठीक सें समझा नहीं इसलिये उससे गलती हुईँ हैं! मगर आपको तौ सभीपता हैं औऱ फिन आप् तौ उससे सच्चा प्रेम करते हौ! उसकासंग मत छोड़ना विक्रम मुझेवचन दो आप्!
विक्रम कों समझ नहीं आँ रहा थां कि क्याँ करेमगर सीमा नें पहलीबार उससेकुछ मांगा थां तौ बोला:"
" ठीक हैं मगर मे आज केँ बादजब तक उससे नहीं मिलूंगा तब तक वोँ स्वयं मुझसे मिलना नहीं चाहेगी! उसेकोई भि दिक्कत हौ तोँ मुझे मेसेज आया देना मे आँ जाऊंगा!
सीमा नें उसकाहाथ चूम लिया औऱ बोलीं:" पवन आपका प्रतीक्षा कररहा हैं! उस पऱ सवार होकर आप् सुरक्षित निकल जाइए! अपना ध्यान रखना
विक्रम पवन पर्र बैठा औऱ देखते हि देखते पवन दौड़चला औऱ हवा सें बातें करते सुल्तानपुर कि सीमा सें बाहर् निकल गय़ा!
सीमा सलमा केँ पास पहुंच गई जहां सलमा बेचैनी सें इधरउधर घूमरही थि औऱ सीमा कों देखते हि बोलि:
"क्याँ हुआ सीमा? विक्रम बचगए हें नां!
सीमा उसकाहाथ पकड़कर बैठ गई औऱ बोलीं:" आपने हि तोँ उन्हे फंसाया थां तौ आपकोअब उनकी इतनी चिंता क्यूं हौ रही हैं शहजादी?
सलमा कि नजरे लज्जा सें झुक गई औऱ बोलीं:" वोँ मेरी गलती थि औऱ मे बदले कि आग सें पागल हौ गई थि इसलिये ऐसाकर दियामगर जब तुमने समझाया तौ मुझेसभी कुछसमझ आया! बताओ नाँ अब मुझे ? ज़्यादा मत तड़पाओ नहीं तोँ मेरीजान निकल जायेगी !
सीमा:" विक्रम सुरक्षित सुल्तानपुर सें बाहर् चलेगए हें! मगर उनके शरीर पर्र कई स्थान जख्म केँ निशान थें!
सलमायह सुनकर प्यास उठी औऱ बोलि: जख्म औऱ विक्रम केँ बदन पऱ ! नाम बताओ मुझे उसकाहाथ तोड़ दूंगी जिसने यहसभी किया हें!
सीमा उसकीबात सुनकर उसकी आंखो मे देखती हुई बोलीं:"
" सभीकुछ आपने हि तौ किया हें! फिन किसी कों क्यूं दोषी ठहरारही हौ आप् !
सलमा थोड़ी देरचुप रही औऱ बोलीं:" मुझसे बहोत बड़ी गलती होँ गई सीमा! क्याँ विक्रम मुझेमाफ कर देंगे ?
सीमा:"पता नहींयह तौ विक्रम हि जानेमगर वोँ आपसे नाराज बहोत ज़्यादा हैं!
सलमा कि आंखे उसकीबात सुनकर भरआई औऱ बोलि:"
" सीमा मुझेऐसा नहीं करना चाहिए थां! मे विक्रम सें मिलना चाहती हूं! एक् कामकरो उदयगढ़ जाने कि तैयारी करो!
सीमा उसकीबात सुनकर उछल पड़ी औऱ बोलीं:" यह क्याँ बोलरही हौ आप् ? हम् उदयगढ़ नहींजा सकते आप् यह जानती हें नं!
सलमाबेड सें खड़ी हुई औऱ बोलीं:" हम् कहीं भि जा सकते हें सीमा!अगर विक्रम हमसे मिलने अपनीजान हथेली पऱ लेकर आँ सकता हें तौ हम् भि उसकी खातिर उदयगढ़ जाएंगे!
उसकेबाद सलमा नें उसे अपना प्लान बताया औऱ सीमा कि आंखे हैरानी सें खुल गई औऱ उसने शहजादी कां संग देने कां फैसला किया!
लगभगआधे घंटे केँ बाद सलमा रजिया सें बोलीं:" अम्मी जान हम् मेला देखने केँ लिए जायेंगे मगरसच कहे तोँ शहजादी होना हमारे लिएअब दिक्कत बन गय़ा हैं! जिधर भि जाते हैं सैनिक संग मे चलते हें! हम् ऐसी जीवन सें तंग आँ चुके हें!
रजिया उसकीबात सुनकर उसकेसिर पर्र हाथ फेरती हुइ बोलीं:"
" बेटी वोँ सभी आपकी सुरक्षा केँ लिए हैं! आपकी रक्षा करना उनका फर्ज हैं!
सलमा:"मगर मेले मे तौ कोई खतरा नहि होता क्योंकि यहां तोँ सभी लड़ाई भूल जाते हें!
रजिया:" बातठीक हें बेटी मगर बिना सुरक्षा केँ जानां ठीक नहि होगा!
सलमा:" आप् हम् पर्र भरोसा रखिए! हम् इतने कमजोर भि नहि हैं कि अपनी रक्षा नां करसके अपनेदम पर्र!
रजिया:" मगर बेटी.
सलमा उसकीबात बीच मे काटते हुए बोलि:" बसअब आप् हमे जाने कि इजाजत दीजिए! मे औऱ सीमा दोनोसंग मे जायेंगे!
रजिया नें उसका माथाचूम लिया औऱ बोलि:" अपना ध्यान रखना औऱ अधिकदेर तक मत घूमना!
सलमा खुशी सें चहकउठी औऱ बोलीं:" अम्मी हम् बता नहीं सकतेआज हम् कितने खुश हें! सच मे आप् दुनिया कि सबसे प्यारी अम्मी हें!
उसकेबाद सलमा औऱ सीमा नें अपनाभेष बदला औऱ साम कों लगभगचार बजे मेले मे जाने केँ लिए निकलगए! मेले केँ बहाने दोनो उदयगढ़ कि तरफचल पड़े औऱ चूंकि मेले केँ कारण राज्य कि सीमाएं खुली हुइ थि तोँ उन्हे अधिक दिक्कत नहि हुइ औऱ दोनो उदयगढ़ केँ अंदरघुस गई औऱ देखा कि उदयगढ़ भि संपन्नता मे कम नहीं थां! चारोओर बनी बड़ी बड़ी इमारतें इसकी गवाही देरही थि! अब सबसे बड़ी समस्या थि कि विक्रम कों केसे ढूंढा जाए तोँ इसकेलिए दोनो नें थोड़ी देरमहल केँ बाहर् हि रुकने कां प्रतीक्षा किया ताकि विक्रम आँ जाए औऱ दोनो उससेमिल सकेमगर निराशा हि हाथलगी! लगभगसात बजे सलमा औऱ सीमा दोनो नें मजल केँ अंदर घुसने कां फैसला कियामगर केसेजाए यह सबसे बड़ी दुविधा थि! फिन सलमा कों एक् तरीका सूझा औऱ उसने सीमा कों कुछ समझाया तोँ सीमा नें गेट पर्र मौजूद एक् दरबान कों सीमा नें इशारे सें अपनेपास बुलाया औऱ उसे विक्रम कि दि हुईँ माला कों दिखाती हुई बोलि:"
" मुझे युवराज विक्रम नें अपनेपास आने केँ लिए बोला थां कि महल मे कुछकाम देंगे! बोला थां कि गेट पऱ मेरीयह माला दिखा देना तोँ मुझसे मुलाकात होँ जायेगी!
दरबान नें माला कों पहचान लिया औऱ बोला:" आप् अंदरआकर बैठिए, मे युवराज तक आपका मेसेज पहुँचा देताहू!
सीमा औऱ सलमामहल केँ अंदरबैठ गई औऱ एक् दूसरा सैनिक माला लेकर अंदरचला गय़ा औऱ जैसे हि विक्रम नें माला देखी तौ समझ गय़ा कि सीमा कां कोई मेसेज आया होगा औऱ बाहर् कि तरफ आँ गय़ा औऱ जैसे हि उसने सीमा केँ संगसंग सलमा कों देखा तोँ उसकादिल खुशी सें उछल पड़ा औऱ अगले हि लम्हा खामोश होतेहुए बोला:"
" आइए आप् मेरेसंग अंदरआइए!
सीमा औऱ सलमा दोनो उसकेसंग महल केँ अंदर जानेलगी औऱ युवराज नें महल केँ अंदरबने एक् आलीशान कक्ष मे दोनो कों बैठने केँ लिएकहा औऱ बोला:"
" आप् थोड़ी देर यहीं बैठिए! मे आपकेलिए कुछ लेकरआता हूं!
इतना कहकर विक्रम जानेलगा तोँ सीमा खड़ी होती हुईँ बोलि:"
" युवराज मुझे पहले आप् बाथरूम किधर हैं यहबता दीजिए!
विक्रम उसे अपनेसंग लें गय़ा औऱ थोड़ी हि दूरी पऱ बने बाथरूम केँ पास छोड़ दिया तोँ सीमा बोलि:"
" युवराज शहजादी आपसे मिलने केँ आई हैं! मैने तौ मना किया थां मगर नहीं मानी! आप् उनसेबात कीजिए!
इतना कहकर सीमा बाथरूम केँ अंदरघुस गई औऱ विक्रम सलमा केँ कक्ष मे आया तोँ उसे देखते हि सलमा कि आंखेभर आई औऱ उसके लगभगआई औऱ बोलि:"
" युवराज केसे हें आप् ? सीमा नें बताया कि आप् जख्मी हुए हें!
विक्रम:" मेरे जख्म सें आपको क्याँ फर्क पड़ता हैं शहजादी? वैसे भि ऐसे जख्म सें कोई मरता नहीं हें!
सलमा नें आगे बढ़कर उसके होंठो पऱ उंगली कों रख दिया औऱ बोलि:" खुदा केँ लिएऐसी मनहूस बाते मुंह सें नं निकालिए युवराज! समझ नहींआता कि केसे औऱ किन शब्दों मे आपसे माफी मांगू?
विक्रम:" माफी कि जरूरत नहि हैं सलमा आपको! मेरी हि गलती थि जोँ आपके कहने पर्र समझ नहींसका!!
सलमा नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ अपनी भीगी हुई आंखो सें उसकी आंखो मे देखती हुई बोलि:" मुझे भि समझना चाहिए थां युवराज! मैने जौ आपकेसंग किया वोँ कोई अपने दुश्मन केँ संग भि नहीं करताजब वोँ आपकेघऱ आयाहुआ हौ! मे आपकी गुनहगार हु विक्रम, मुझे जोँ चाहेसजा दीजिए!
इतना कहकर सलमाजोर जोर सें सिसकउठी औऱ विक्रम कां दिल भि उसकी आंखो मे आंसू देखकर तारतार होँ गय़ा औऱ उसके आंसूसाफ करतेहुए बोला:"
" रोइएमत शहजादी आप्! आपकी सुंदर आंखो मे आंसू अच्छे नहि लगते! गलती हम् दोनो कि हि हैं मुझे पहले हि दिन आपकोबता देना चाहिए थां कि मे उदयगढ़ सें हुमगर मे आपको खोना नहीं चाहता थां बस इसलिये नहींबोल पाया!
सलमा उसकीबात सुनकर जोरजोर सें बिलखउठी औऱ उससे लिपट गई औऱ बोलीं:"
" मगर आपने मेरे पूछने पऱ सच बताया युवराज! आप् चाहते तोँ झूठ भि बोल सकते थें मगर आपनेऐसा नहीं किया!
विक्रम नें भि उसे अपनी बांहों मे भर लिया औऱ उसके आंसूसाफ करतेहुए बोला:"
" बस कीजिए शहजादी! आपको मेरीशपथ हें अब आपकी आंखों सें आंसू नहि आनां चाहिए!
इतना कहकर विक्रम नें अपना मुंहआगे करके उसकागाल चूम लिया औऱ नं चाहते हुए भि सलमा कि आंसू सें फिन सें आंसूटपक पड़े!
विक्रम नें उसके आंसुओं कों साफ किया औऱ उसकीकमर थपथपाते हुएउसे तसल्ली देतारहा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे सलमा कि हिचकियां रुक गई तोँ विक्रम बोला:"
" मुझे सीमाबता रही थि कि आपके खिलाफ राजमहल मे कुछ साजिश होँ रही हें! सीमा कों चोरी केँ इल्जाम मे आपने बचाया यह तौ बहोत अच्छा किया! सीमा आपकेलिए अपनीजान दे देगीमगर आपकोकभी धोखा नहीं देगी!
सलमा उसकी बांहों मे स्वयं कों सुरक्षित महसूस कररही थि औऱ बोलीं:" पता नहींकौन हें मगर हौ नां होँ यहसभी जब्बार कां कियाधरा होँ सकता हें! सलीम भइया तौ दिनभर नशे मे रहते हें औऱ उन्हें राज्य औऱ कामों सें कोई मतलब हैं नहीं!
उसकेबाद सलमा थोड़ी देरचुप रही औऱ फिन अपनेदिल केँ सबराज विक्रम केँ सामने रखदिए कि आजकल सुल्तानपुर मे क्याँ चलरहा हें तौ उसकीबात सुनकर विक्रम बोला:"
" आप् चिन्ता मत कीजिए शहजादी! मेरे होतेहुए कोई आपकाकुछ नहीं बिगाड़ सकता!
सलमा नें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोलि:" हम् आप् पर्र भरोसा हें युवराज तभी तौ आपकोसभी कुछबता दिया हें!
विक्रम उसे अपनी बांहों मे लिए खड़ारहा औऱ बोला:"
" आपने बड़ी हिम्मत करी जौ हमसे मिलने केँ लिए उदयगढ़ हि चलीआई! मानना पड़ेगा आपको शहजादी!
सलमा:" आप् मुझसे मिलने आँ सकते होँ अपनीजान हथेली पऱ रखकर तौ क्याँ मे भि नहीं आँ सकतीहू आपसे मिलने केँ लिए! मे भि आपसे बेहद प्रेम करतीहू युवराज!
विक्रम:" सच मे मे बेहद क़िस्मत वालाहु जौ आपके जैसी खुबसूरत औऱ दिलवाली महबूबा मिली मुझे!
उसकीबात सुनकर सलमा मुस्करा उठी औऱ बोलीं:"
" अच्छा यह दिखाओ आपको कहां कहां जख्मआया हें मेरीवजह सें युवराज?
विक्रम:" कहीं भि नहीं शहजादी! मे तौ बिलकुल ठीकहु!
सलमासमझ गई कि विक्रम ऐसे नहीं मानने वाला तोँ सलमा नें उसकीबात सुनकर एक् झटके केँ संग उसके शरीर पर्र पड़ी हुई चादर कों खींच दिया औऱ विक्रम कि छाती पूरी नंगी होँ गई औऱ सलमा नें देखा कि उसकी छाती पऱ कई स्थान घावहुए थें औऱ लाललाल निशान पड़गए थें तोँ सलमा कां दिल दर्द सें बैठ गय़ा औऱ फिन सलमा पलटकर उसकीकमर देखने लगी औऱ उसकीकमर पऱ लगेहुए जख्मों कों हाथ सें छूकर देखने लगी!
सलमा कां दिल अंदर हि अंदररो रहा थां औऱ फिन वोँ पलटकर विक्रम केँ सामने आँ गई औऱ बोलीं:" विक्रम मुझसे सच मे बेहद बड़ी गलती हौ गई हैं! मे तोँ माफी केँ भि काबिल नहींहु आपकी!
विक्रम नें उसे अपनेगले सें लगा लिया औऱ उसका माथाचूम कर बोला:" आप् कुछमत सोचिए शहजादी! सभीकुछ भूलकर एक् नई शुरुआत करते हें!
सलमा उसकीबात सुनकर खुश हौ गई औऱ उससे कसकर लिपट गई! विक्रम नें भि उसे अपनी बाहों मे कस लिया औऱ दोनोऐसे हि खड़ेहुए एक् दूसरे केँ दिल कि धड़कन सुनते रहे औऱ फिन सलमा कों सीमा कि यादआई तोँ बोलि:"
" युवराज सीमा बाथरूम सें नहींआई अभि तक!
विक्रम उसकीबात सुनकर मुस्कुरा उठा औऱ बोला:"
" कितनी भोली होँ आप् सलमा, वोँ तौ जान बूझकर हमे अकेला छोड़कर गई हें ताकि हम् धीरे-धीरे बातकर सके!
सलमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल हौ गई औऱ कसमसा कर बोलीं:"
" हायरे अल्लाह वोँ क्याँ सोचरही होंगी मेरे बारे मे!!
विक्रम नें पहलीबार अपने हाथो कां दबाव उसकीकमर पर्र बढ़ा दिया औऱ बोला:"
" यही कि सलमा अपने महबूब कि बांहों मे होगी!
सलमा उसकीबात सुनकर कांपउठी औऱ उसकी पकड़ सें आजाद होती हुईं बोलीं:"
" जाइएउसे बुला लीजिए आप्!
सलमा कि बात सुनकर विक्रम कमरे सें बाहर् निकल गय़ा औऱ सीमाउसे बराबर केँ कमरे मे बैठी हुईँ मिल गई औऱ बोलीं:"
" होँ गई क्याँ आपकी सुलह?
विक्रम उसकीबात सुनकर हल्का सां मुस्कुराया औऱ बोला:"
" हानजब आप् जैसी बेहन होँ तोँ भला क्यूं नहीं होगी! शहजादी आपको बुलारही हें!
उसकेबाद सीमा उसकेसंग आँ गई औऱ बोलीं:"
" क्याँ युवराज आपने अभि तक हमे पानी तक नहि पिलाया? कैसी मेहमाननवाजी करते हें आप् उदयगढ़ वाले, शहजादी पहलीबार अपनी ससुराल आई हैं औऱ आप् हें कि कोई फिक्र हि नहि हें आपको!
उसकीबात सुनकर सलमा शर्मा गई औऱ आंखो कों नीचेकर लिया तोँ विक्रम बोला:"
" बस आप् पांच मिनट दीजिए मुझे!
उसकेबाद विक्रम गय़ा औऱ सलमा सीमा कों डांटती हुईँ बोलि:"
" कुछ भि बोल देती होँ, बड़ी बेशर्म हौ गई हौ सीमा!
सीमा नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोलीं:" क्या बात है रब्बा देखो तोँ ससुराल केँ नाम पऱ केसे शर्मा गई आप् शहजादी!!
सलमा कां दिल उसकी बाते सुनकर तेजी सें धड़का उठा औऱ उसका पूरा शरीर कांपउठा औऱ वोँ सीमा कों डांटते हुए बोलीं:"
" एक् बारमहल चलोफिन तुम्हे अच्छे सें सबक सिखा दूंगी!
दोनो कि बातेचल हि रही थि कि विक्रम आँ गय़ा औऱ उसकेहाथ मे एक् ट्रे थि जिसमे खाने केँ लिए बहुत सारे सूखे मेवे औऱ जूस थां औऱ उसनेबेड पर्र सभीरख दिया औऱ उसकेबाद सभी मिलकर खानेलगे मगर सलमा थोडा संकोच कररही थि तौ विक्रम बोला:"
" शहजादी आप् पहलीबार उदयगढ़ आई हें तोँ बिना किसी संकोच केँ खाइए नहीं तौ बाद मे कहेगी कि हमने आपका ध्यान नहि रखा!
सीमा:" बेचारी पहलीबार ससुराल आई हें तोँ इसलिये शर्मा रही हैं युवराज!
उसकीबात सुनकर सलमा कां मुंहलाल होँ गय़ा औऱ उसने घूरकर सीमा कि तरफ देखा तौ सीमा बोलि:"
" नाराज क्यूं होती हें आप्? क्याँ मे झूठबोल रही हूं क्याँ ?
सलमा:" एक् बार तुम् सुल्तानपुर चलोफिन जाकर आपकोसबक सिखाती हु अच्छे सें!
उसकीबात सुनकर सीमा औऱ विक्रम मुस्कुरा दिए! तीनों नें अच्छे सें खाया औऱ उसकेबाद सीमा बोलि:"
"ओहो लगता हें कि फिन सें बाथरूम जानां पड़ेगा आजपेट मे कुछ ज़्यादा हि दिक्कत हें!
इतना कहकर उसने सलमा कों आंखमार दि औऱ बाहर् कि तरफचल पड़ी! उसके जाते होँ सलमा कि सांसे तेज होँ गई क्योंकि अब कमरे मे वोँ औऱ विक्रम दोनो अकेले हौ गए थें! विक्रम उसकेपास आँ गय़ा औऱ उसे अपनी बांहों मे भर लिया तौ सलमा कसमसा उठी औऱ बोलि:"
" आह्ह्ह्ह क्याँ करते हौ युवराज कोईदेख लेगा!
विक्रम नें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोला:" डरती क्यूं होँ शहजादी! कोई नहीं आयेगा यहां!
इतना कहकर उसने शहजादी कों अपनी बांहों मे कस लिया तोँ सलमा भि उससे लिपट गई औऱ विक्रम नें उसका मुंहउपर उठाया तोँ सलमा कि आंखे लज्जा सें झुक गई औऱ विक्रम नें उसकागाल चूम लिया औऱ बोला:"
" शहजादी आप् मुझेमिल गई सभीकुछ मिल गय़ा! अब मुझेमौत भि आँ जाए तौ कोईगम नहीं होगा!
उसकीबात सुनकर सलमा नें अपनी उंगली कों उसके होठों पर्र रख दिया औऱ विक्रम उसकी उंगली कों अपने मुंह मे भरकर चूसने लगा तौ सलमा कि सांसे तेज हौ गई औऱ विक्रम सें कसकर किसी अमरबेल कि तरह लिपट गई!
विक्रम नें अपने हाथो कों उसकी गांड़ केँ उभार पऱ रखा औऱ उसके उंगली कों जोरजोर सें चूसने लगा औऱ तभी सीमा केँ आने कि आहट हुइ तोँ दोनो नं चाहते हुए भि अलग हौ गए औऱ सीमा अंदर आँ गई औऱ बोलीं:"
" शहजादी हमेंअब जानां होगा क्योंकि रात केँ 11 बजगए हें औऱ आपको डांट पड़ेगी!
सीमा कि बात सुनकर सलमा कां ध्यान टाइम कि तरफ गय़ा औऱ बोलि:" ठीक हें हम् चलते हें सीमा! मे एक् मिनटबाद आई मुझे युवराज सें कुछबात करनी हें जरूरी!
उसकीबात सुनकर सीमा बाहर् चली गई औऱ सलमा एक् बारफिन सें विक्रम सें कसकर लिपट गई औऱ उसके होंठ चूसने लगी तोँ विक्रम भि बेकाबू होकर सलमा केँ होंठ चूसने लगा औऱ सलमाकिस तोड़कर धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोलि:"
" आप् मुझसे मिलने केँ लिए परसो 11 बजे आँ जानां! युवराज मे आपका प्रतीक्षा करूंगी !
इतना कहकर उसनेजोर सें विक्रम केँ गाल कों चूस लिया तोँ विक्रम नें उसकी गांड़ कों कसकरदबा दिया औऱ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ एक् झटके केँ संग विक्रम सें अलग हुई औऱ कक्ष सें बाहर् निकल गई!
सीमा औऱ सलमा दोनो विक्रम केँ संग राजमहल सें बाहर् आँ गई औऱ उसकेबाद विक्रम नें उन्हें सुरक्षा केँ संग सुल्तानपुर कि सीमा मे छोड़ दिया औऱ सलमा खुशी खुशी अपने राज्य वापिस लौट पड़ी !!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
सैनिकों नें विक्रम कों बुरीतरह सें मारा औऱ देखते हि देखते यहबात आग कि तरहफैल गई कों कोईचोर राजमहल मे घुसने कि कोशिश कररहा थां औऱ पकड़ा गय़ा! सीमा तक भि यहबात पहुंची तौ वोँ हैरान होँ गई औऱ सलमा सें मिलने केँ लिएरात कों हि आँ गई औऱ बोलि:"
" आप् सुरक्षित तोँ हें नाँ? सुना हें राजमहल मे कोईचोर घुसआया थां औऱ आपके कक्ष तक पहुंच गय़ा थां वोँ!
सलमा थोड़ी देरचुप रही तोँ सीमा बोलीं:" बोलिए नं शहजादी? मे आपसे हि बातकर रही हूं!
सलमा:" वोँ चोर औऱ कोई नहि बल्कि युवराज विक्रम हें जोँ हमसे मिलने आया थां!
सीमा उसकीबात सुनकर हैरानी सें उछल पड़ी औऱ बोलि:"
" क्याँ बातकर रही हौ आप् ? विक्रम आपसे मिलने सें लिए अपनीजान हथेली पऱ रखकर राजमहल तक पहुंच गए!
सलमा:हान वोँ आँ गय़ा थां औऱ हमने हि सैनिकों कों बुलाकर उसेकैद करवा दिया हैं!
सीमा उसकीबात सुनकर हैरान हौ गई औऱ उसे घूरती हुईँ बोलि:"
" यह आपने क्याँ गजबकर दिया शहजादी? विक्रम कों कुछ हौ गय़ा तोँ आप् अपने आपकोकभी माफ नहि कर पाएगी क्योंकि ऐसा सच्चा प्रेम करने वाले क़िस्मत सें मिलते हें!
सलमा उसकीबात सुनकर बोलीं:" मत भूलो सीमा कि उसके बाप नें हमारे अब्बा कां खून किया हैं! हमे नहीं चाहिए ऐसी इश्क जिसके हाथखून सें रंगेहुए हौ!
सीमा:" औऱ आप् क्याँ कररही हैं! आप् भि तौ अपनेहाथ खून सें हि रंगरही हैं शहजादी! एक् बेगुनाह कों सजादे रही हैं आप्! विक्रम नें तोँ आपके अब्बा कां खून नहि किया!
सलमा उसकी बातो कों सुनकर थोडा शांत हुई औऱ बोलीं:"
"सीमा अपनो कों खोने कां दर्द आप् कभी नहि समझ सकती!
सीमा उसकाहाथ पकड़कर उसे झंझोड़ती हुई बोलीं: आप् फिन सें यह दर्दसहन करने केँ लिए सजधजकर रहो क्योंकि विक्रम भि आपका अपना हि तौ हें!
सलमा उसकीबात सुनकर कांपउठी औऱ बोलीं:" उदयगढ़ कां कोई भि व्यक्ति कभी मेरा नहीं हौ सकता सीमा!
सीमा:" तोँ फिन क्याँ आपने विक्रम सें प्रेम नहीं किया थां ? मानती हु कि उसने आपसे छिपाया मगर आपके पुछने पर्र तोँ नहीं बोला वोँ!
सलमा:"हान प्रेम किया थां मगर वोँ सभीसच जानता थां तौ मुझे पहले क्यूं नहि बताया?
सीमा:" क्योंकि वोँ जानता थां कि आप् नाराज हौ जाएगी औऱ शायद वोँ आपको खोना नहि चाहता थां! मुझे आपसेयह उम्मीद नहि थि शहजादी!
सलमा केँ पासअब कोई जवाब नहि थां औऱ चुपरही तोँ सीमा बोलीं:" आपकोबता हें कि दोनो राज्य पहले सें हि दुश्मनी कि आग मे जलरहे हें औऱ आप् देख्ना कि सुभह जब्बार विक्रम कों मार देगा औऱ उसकेबाद जौ तबाही औऱ बर्बादी होगी उसकी जिम्मेदार मात्र आप् होगी!
सलमा कां चेहरा पूरीतरह सें सपाट हौ गय़ा थां औऱ उसेसमझ नहीं आँ रहा थां कि क्याँ करे! सीमा नें उसकाहाथ पकड़ा औऱ बोलि:" अगर आप् इस बर्बादी कों रोकना चाहती हें तोँ विक्रम कों सुरक्षित भेज दीजिए चाहे आप् उससे प्रेम करे याँ नं करेयह आपकी अपनी मर्जी हैं मगर दोनो राज्यों कि भलाई केँ लिए आपकोयह करना हि पड़ेगा!
सलमा:"मगर केसे? विक्रम तोँ अबजेल मे कैद होँ चुका हैं औऱ जेल तौ पूरीतरह सें जब्बार औऱ उसके मित्र रमन केँ हाथ मे हैं!
सीमा:"कुछ भि करके विक्रम कों बचाना हि पड़ेगा! मे कुछ सोचती हु क्याँ करना होगा!
सलमा:" एक् तरीका हैं कि किसीतरह विक्रम कों जेल सें निकालकर पवन तक आया दियाजाए फिन वोँ किसी केँ हाथ नहीं आयेंगे!
सीमा:" आप् चिंता मत करिए! मे विक्रम कों छुड़ाने कां इंतजाम करतीहू!
वहीं दूसरी तरफजेल मे विक्रम कों अलग हि कमरे मे डाल दिया गय़ा थां औऱ उसका बेहद बेहद दर्दकर रहा थां क्योंकि उसकेबदन पऱ बहुत सारेघाव थें! विक्रम कों अब सलमा सें नफ़रत हौ गई थि क्योंकि उसने साबित कर दिया थां कि वोँ उससे प्रेम नहीं करती हैं! विक्रम केँ लिए सबसे बड़ी चुनौती जेल सें आजाद होना थां औऱ विक्रम नें आसपास देखा तोँ एहसास हुआ कि पूरीतरह सें कमरे मे अंधेरा थां औऱ बस एक् खिड़की सें हल्की सि रोशनी आँ रही थि! विक्रम हिम्मत करके खिड़की तक आया औऱ ताकत लगाते हुएउसे उखाड़ दिया औऱ धीरे-धीरे सें खिड़की सें बाहर् निकलने लगा!
विक्रम एक् चौड़े रास्ते पर्र आँ गय़ा जहां बहुत रोशनी थि औऱ सामने हि सैनिक पहरादे रहे थें तोँ विक्रम वापिस मूड गय़ा औऱ एक् तहखाने मे घुस गय़ा जहां बहुत सारा सामान भराहुआ थां औऱ बदबू फैली हुइ थि!
तभीउसे किसी केँ आने कि आहत हुइ तोँ उसे सावधान होँ गय़ा औऱ एक् तरफछुप गय़ा! सामने सें कुछ सैनिक निकले औऱ जैसे हि दूरगए तोँ विक्रम दांई तारीफ मुड गय़ा औऱ सावधानी सें आगे बढ़ने लगा! विक्रम अब एक् हाल मे खड़ाहुआ थां औऱ जैसे तैसे करके खिड़की केँ सहारे छत तक आया औऱ छत कि जाली कों उखाड़ दिया औऱ छत पऱ चढ़ गय़ा! पहरादे रहे एक् सैनिक कि नजरउस पऱ पड़ी औऱ विक्रम नें उसेमौत केँ घाट उतार दिया औऱ आगेबढ़ गय़ा! छत पऱ बहुत सारे सैनिक थें औऱ उधर सें निकलना आसान नहीं थां! विक्रम थोड़ी देरऐसे हि सोच मे पडारहा औऱ तभीउसे लगा कि कोईउसी तरफ आँ रहा हैं तोँ वोँ सावधानी सें छिप गय़ा औऱ उसने देखा कि कोईदया उसकीतरफ आँ रहा हें हैं तौ विक्रम छुपारहा औऱ जैसे हि उसके लगभग सें गुजरा तौ विक्रम नें उसके मुंह पर्र हाथ रखतेहुए अपनीतरफ खींचकर औऱ उसकी गर्दन पर्र तलवार रख दि तौ वोँ साया बोला:"
" विक्रम मे सीमाहु!
यह सुनकर विक्रम नें उसे छोड़ दिया औऱ सीमा बोलि:"
" घबराओ मत! मे आपको यहां सें सुरक्षित जगह तक आया दूंगी!
उसकेबाद सीमाउसे अपनेसंग लेकरचल पड़ी औऱ थोड़ी देरबाद विक्रम जेल सें बहोत दूर आँ गय़ा थां औऱ सीमा सें बोला:
" मुझे बचाने केँ लिए आपका आभार मेरी बेहन!
सीमा: भइया कि रक्षा बेहन नहीं करेगी तोँ फिनकौन करेगा! मगर आप् जानते हें कि मुझे आपको बचाने केँ लिए शहजादी नें हि भेजा हें!
विक्रम सलमा कां नाम सुनते हि गुस्से सें लाल हौ गय़ा औऱ बोला:"
" उस मतलबी औऱ धोखेबाज औऱ मतलबी कां नाममत लो मेरे सामने! मुझे बचाना हि होता तोँ फांसती क्यूं मुझे!
सीमा:"ऐसा न् बोलो भइया! वोँ मतलबी नहीं हैं बस हालत कों ठीक सें समझ नहींपाई! एक् मर्दकभी नहि समझ सकता कि एक् लड़की कि जीवन मे उसके बाप कि क्याँ अहमियत होती हैं!
विक्रम उसकीबात सुनकर बोला:"मगर सलमासच मे बेहद बुरेदिल कि हें औऱ उससे कहना कि आज केँ बादउसे मेरी परछाई भि नहि दिखेगी!
सीमा उसकाहाथ पकड़कर उसे बताया कि किसतरह सें वोँ चोरी मे फंस गई थि औऱ सलमा नें उसे बचाया! सीमाउसे समझाते हुए बोलीं:" भइया सलमा तोँ बेचारी मासूम हें औऱ बेहदसाफ औऱ अच्छे दिल कि हें! उसके खिलाफ तौ पहले हि बहोत सारी साजिश रची गई हैं औऱ आपको उसकासंग देना चाहिए नं कि उससे मुंह मोड़ना चाहिए!
विक्रम:" मगर उसने जोँ मेरेसंग किया क्याँ वोँ सही हैं?
सीमा:"ठीक हें उसनेगलत कियामगर उसनेसभी कुछठीक सें समझा नहीं इसलिये उससे गलती हुई हैं! मगर आपको तौ सभीपता हैं औऱ फिन आप् तोँ उससे सच्चा प्रेम करते होँ! उसकासंग मत छोड़ना विक्रम मुझेवचन दो आप्!
विक्रम कों समझ नहीं आँ रहा थां कि क्याँ करेमगर सीमा नें पहलीबार उससेकुछ मांगा थां तोँ बोला:"
" ठीक हैं मगर मे आज केँ बादजब तक उससे नहीं मिलूंगा तब तक वोँ स्वयं मुझसे मिलना नहीं चाहेगी! उसेकोई भि दिक्कत हौ तोँ मुझे मेसेज पहुँचा देना मे आँ जाऊंगा!
सीमा नें उसकाहाथ चूम लिया औऱ बोलीं:" पवन आपका प्रतीक्षा कररहा हैं! उस पर्र सवार होकर आप् सुरक्षित निकल जाइए! अपना ध्यान रखना
विक्रम पवन पऱ बैठा औऱ देखते हि देखते पवन दौड़चला औऱ हवा सें बातें करते सुल्तानपुर कि सीमा सें बाहर् निकल गय़ा!
सीमा सलमा केँ पास पहुंच गई जहां सलमा बेचैनी सें इधरउधर घूमरही थि औऱ सीमा कों देखते हि बोलि:
"क्याँ हुआ सीमा? विक्रम बचगए हें नां!
सीमा उसकाहाथ पकड़कर बैठ गई औऱ बोलि:" आपने हि तोँ उन्हे फंसाया थां तोँ आपकोअब उनकी इतनी चिंता क्यूं हौ रही हैं शहजादी?
सलमा कि नजरे लज्जा सें झुक गई औऱ बोलीं:" वोँ मेरी गलती थि औऱ मे बदले कि आग सें पागल होँ गई थि इसलिये ऐसाकर दियामगर जब तुमने समझाया तोँ मुझेसभी कुछसमझ आया! बताओ नां अब मुझे ? ज़्यादा मत तड़पाओ नहीं तोँ मेरीजान निकल जायेगी !
सीमा:" विक्रम सुरक्षित सुल्तानपुर सें बाहर् चलेगए हें! मगर उनके शरीर पऱ कई स्थान जख्म केँ निशान थें!
सलमायह सुनकर प्यास उठी औऱ बोलीं: जख्म औऱ विक्रम केँ बदन पऱ ! नाम बताओ मुझे उसकाहाथ तोड़ दूंगी जिसने यहसभी किया हें!
सीमा उसकीबात सुनकर उसकी आंखो मे देखती हुईँ बोलीं:"
" सभीकुछ आपने हि तौ किया हें! फिन किसी कों क्यूं दोषी ठहरारही होँ आप् !
सलमा थोड़ी देरचुप रही औऱ बोलि:" मुझसे बहोत बड़ी गलती हौ गई सीमा! क्याँ विक्रम मुझेमाफ कर देंगे ?
सीमा:"पता नहींयह तोँ विक्रम हि जानेमगर वोँ आपसे नाराज बहोत अधिक हैं!
सलमा कि आंखे उसकीबात सुनकर भरआई औऱ बोलीं:"
" सीमा मुझेऐसा नहीं करना चाहिए थां! मे विक्रम सें मिलना चाहती हूं! एक् कामकरो उदयगढ़ जाने कि तैयारी करो!
सीमा उसकीबात सुनकर उछल पड़ी औऱ बोलि:" यह क्याँ बोलरही हौ आप् ? हम् उदयगढ़ नहींजा सकते आप् यह जानती हें न्!
सलमाबेड सें खड़ी हुईँ औऱ बोलि:" हम् कहीं भि जा सकते हें सीमा!अगर विक्रम हमसे मिलने अपनीजान हथेली पर्र लेकर आँ सकता हें तोँ हम् भि उसकी खातिर उदयगढ़ जाएंगे!
उसकेबाद सलमा नें उसे अपना प्लान बताया औऱ सीमा कि आंखे हैरानी सें खुल गई औऱ उसने शहजादी कां संग देने कां फैसला किया!
लगभगआधे घंटे केँ बाद सलमा रजिया सें बोलि:" अम्मी जान हम् मेला देखने केँ लिए जायेंगे मगरसच कहे तौ शहजादी होना हमारे लिएअब दिक्कत बन गय़ा हैं! जिधर भि जाते हैं सैनिक संग मे चलते हें! हम् ऐसी जीवन सें तंग आँ चुके हें!
रजिया उसकीबात सुनकर उसकेसिर पर्र हाथ फेरती हुईँ बोलि:"
" बेटी वोँ सभी आपकी सुरक्षा केँ लिए हैं! आपकी रक्षा करना उनका फर्ज हैं!
सलमा:"मगर मेले मे तोँ कोई खतरा नहि होता क्योंकि यहां तौ सभी लड़ाई भूल जाते हें!
रजिया:" बातठीक हें बेटी मगर बिना सुरक्षा केँ जानां ठीक नहि होगा!
सलमा:" आप् हम् पऱ भरोसा रखिए! हम् इतने कमजोर भि नहि हैं कि अपनी रक्षा नाँ करसके अपनेदम पर्र!
रजिया:" मगर बेटी.
सलमा उसकीबात बीच मे काटते हुए बोलि:" बसअब आप् हमे जाने कि इजाजत दीजिए! मे औऱ सीमा दोनोसंग मे जायेंगे!
रजिया नें उसका माथाचूम लिया औऱ बोलि:" अपना ध्यान रखना औऱ अधिकदेर तक मत घूमना!
सलमा खुशी सें चहकउठी औऱ बोलि:" अम्मी हम् बता नहीं सकतेआज हम् कितने खुश हें! सच मे आप् दुनिया कि सबसे प्यारी अम्मी हें!
उसकेबाद सलमा औऱ सीमा नें अपनाभेष बदला औऱ साम कों लगभगचार बजे मेले मे जाने केँ लिए निकलगए! मेले केँ बहाने दोनो उदयगढ़ कि तरफचल पड़े औऱ चूंकि मेले केँ कारण राज्य कि सीमाएं खुली हुई थि तौ उन्हे ज़्यादा दिक्कत नहि हुई औऱ दोनो उदयगढ़ केँ अंदरघुस गई औऱ देखा कि उदयगढ़ भि संपन्नता मे कम नहीं थां! चारोओर बनी बड़ी बड़ी इमारतें इसकी गवाही देरही थि! अब सबसे बड़ी समस्या थि कि विक्रम कों केसे ढूंढा जाए तौ इसकेलिए दोनो नें थोड़ी देरमहल केँ बाहर् हि रुकने कां प्रतीक्षा किया ताकि विक्रम आँ जाए औऱ दोनो उससेमिल सकेमगर निराशा हि हाथलगी! लगभगसात बजे सलमा औऱ सीमा दोनो नें मजल केँ अंदर घुसने कां फैसला कियामगर केसेजाए यह सबसे बड़ी दुविधा थि! फिन सलमा कों एक् तरीका सूझा औऱ उसने सीमा कों कुछ समझाया तोँ सीमा नें गेट पऱ मौजूद एक् दरबान कों सीमा नें इशारे सें अपनेपास बुलाया औऱ उसे विक्रम कि दि हुईँ माला कों दिखाती हुई बोलि:"
" मुझे युवराज विक्रम नें अपनेपास आने केँ लिए बोला थां कि महल मे कुछकाम देंगे! बोला थां कि गेट पऱ मेरीयह माला दिखा देना तौ मुझसे मुलाकात होँ जायेगी!
दरबान नें माला कों पहचान लिया औऱ बोला:" आप् अंदरआकर बैठिए, मे युवराज तक आपका मेसेज आया देताहू!
सीमा औऱ सलमामहल केँ अंदरबैठ गई औऱ एक् दूसरा सैनिक माला लेकर अंदरचला गय़ा औऱ जैसे हि विक्रम नें माला देखी तोँ समझ गय़ा कि सीमा कां कोई मेसेज आया होगा औऱ बाहर् कि तरफ आँ गय़ा औऱ जैसे हि उसने सीमा केँ संगसंग सलमा कों देखा तोँ उसकादिल खुशी सें उछल पड़ा औऱ अगले हि लम्हा खामोश होतेहुए बोला:"
" आइए आप् मेरेसंग अंदरआइए!
सीमा औऱ सलमा दोनो उसकेसंग महल केँ अंदर जानेलगी औऱ युवराज नें महल केँ अंदरबने एक् आलीशान कक्ष मे दोनो कों बैठने केँ लिएकहा औऱ बोला:"
" आप् थोड़ी देर यहीं बैठिए! मे आपकेलिए कुछ लेकरआता हूं!
इतना कहकर विक्रम जानेलगा तौ सीमा खड़ी होती हुईँ बोलि:"
" युवराज मुझे पहले आप् बाथरूम किधर हैं यहबता दीजिए!
विक्रम उसे अपनेसंग लेँ गय़ा औऱ थोड़ी हि दूरी पऱ बने बाथरूम केँ पास छोड़ दिया तोँ सीमा बोलीं:"
" युवराज शहजादी आपसे मिलने केँ आई हैं! मैने तौ मना किया थां मगर नहीं मानी! आप् उनसेबात कीजिए!
इतना कहकर सीमा बाथरूम केँ अंदरघुस गई औऱ विक्रम सलमा केँ कक्ष मे आया तोँ उसे देखते हि सलमा कि आंखेभर आई औऱ उसके लगभगआई औऱ बोलीं:"
" युवराज केसे हें आप् ? सीमा नें बताया कि आप् जख्मी हुए हें!
विक्रम:" मेरे जख्म सें आपको क्याँ फर्क पड़ता हैं शहजादी? वैसे भि ऐसे जख्म सें कोई मरता नहीं हें!
सलमा नें आगे बढ़कर उसके होंठो पर्र उंगली कों रख दिया औऱ बोलि:" खुदा केँ लिएऐसी मनहूस बाते मुंह सें न् निकालिए युवराज! समझ नहींआता कि केसे औऱ किन शब्दों मे आपसे माफी मांगू?
विक्रम:" माफी कि जरूरत नहि हैं सलमा आपको! मेरी हि गलती थि जोँ आपके कहने पऱ समझ नहींसका!!
सलमा नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ अपनी भीगी हुई आंखो सें उसकी आंखो मे देखती हुइ बोलि:" मुझे भि समझना चाहिए थां युवराज! मैने जौ आपकेसंग किया वोँ कोई अपने दुश्मन केँ संग भि नहीं करताजब वोँ आपकेघऱ आयाहुआ हौ! मे आपकी गुनहगार हु विक्रम, मुझे जोँ चाहेसजा दीजिए!
इतना कहकर सलमाजोर जोर सें सिसकउठी औऱ विक्रम कां दिल भि उसकी आंखो मे आंसू देखकर तारतार हौ गय़ा औऱ उसके आंसूसाफ करतेहुए बोला:"
" रोइएमत शहजादी आप्! आपकी हसीन आंखो मे आंसू अच्छे नहि लगते! गलती हम् दोनो कि हि हैं मुझे पहले हि दिन आपकोबता देना चाहिए थां कि मे उदयगढ़ सें हुमगर मे आपको खोना नहीं चाहता थां बस इसलिये नहींबोल पाया!
सलमा उसकीबात सुनकर जोरजोर सें बिलखउठी औऱ उससे लिपट गई औऱ बोलि:"
" मगर आपने मेरे पूछने पऱ सच बताया युवराज! आप् चाहते तोँ झूठ भि बोल सकते थें मगर आपनेऐसा नहीं किया!
विक्रम नें भि उसे अपनी बांहों मे भर लिया औऱ उसके आंसूसाफ करतेहुए बोला:"
" बस कीजिए शहजादी! आपको मेरीशपथ हें अब आपकी आंखों सें आंसू नहि आनां चाहिए!
इतना कहकर विक्रम नें अपना मुंहआगे करके उसकागाल चूम लिया औऱ नं चाहते हुए भि सलमा कि आंसू सें फिन सें आंसूटपक पड़े!
विक्रम नें उसके आंसुओं कों साफ किया औऱ उसकीकमर थपथपाते हुएउसे तसल्ली देतारहा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे सलमा कि हिचकियां रुक गई तौ विक्रम बोला:"
" मुझे सीमाबता रही थि कि आपके खिलाफ राजमहल मे कुछ साजिश होँ रही हें! सीमा कों चोरी केँ इल्जाम मे आपने बचाया यह तोँ बहोत अच्छा किया! सीमा आपकेलिए अपनीजान दे देगीमगर आपकोकभी धोखा नहीं देगी!
सलमा उसकी बांहों मे स्वयं कों सुरक्षित महसूस कररही थि औऱ बोलि:" पता नहींकौन हें मगर हौ नाँ हौ यहसभी जब्बार कां कियाधरा होँ सकता हें! सलीम भइया तौ दिनभर नशे मे रहते हें औऱ उन्हें राज्य औऱ कामों सें कोई मतलब हैं नहीं!
उसकेबाद सलमा थोड़ी देरचुप रही औऱ फिन अपनेदिल केँ सबराज विक्रम केँ सामने रखदिए कि आजकल सुल्तानपुर मे क्याँ चलरहा हें तौ उसकीबात सुनकर विक्रम बोला:"
" आप् चिन्ता मत कीजिए शहजादी! मेरे होतेहुए कोई आपकाकुछ नहीं बिगाड़ सकता!
सलमा नें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोलीं:" हम् आप् पर्र भरोसा हें युवराज तभी तोँ आपकोसभी कुछबता दिया हें!
विक्रम उसे अपनी बांहों मे लिए खड़ारहा औऱ बोला:"
" आपने बड़ी हिम्मत करी जोँ हमसे मिलने केँ लिए उदयगढ़ हि चलीआई! मानना पड़ेगा आपको शहजादी!
सलमा:" आप् मुझसे मिलने आँ सकते होँ अपनीजान हथेली पर्र रखकर तौ क्याँ मे भि नहीं आँ सकतीहू आपसे मिलने केँ लिए! मे भि आपसे बेहद प्रेम करतीहू युवराज!
विक्रम:" सच मे मे बेहद क़िस्मत वालाहु जौ आपके जैसी खुबसूरत औऱ दिलवाली महबूबा मिली मुझे!
उसकीबात सुनकर सलमा मुस्करा उठी औऱ बोलीं:"
" अच्छा यह दिखाओ आपको कहां कहां जख्मआया हें मेरीवजह सें युवराज?
विक्रम:" कहीं भि नहीं शहजादी! मे तोँ बिलकुल ठीकहु!
सलमासमझ गई कि विक्रम ऐसे नहीं मानने वाला तौ सलमा नें उसकीबात सुनकर एक् झटके केँ संग उसके शरीर पर्र पड़ी हुईँ चादर कों खींच दिया औऱ विक्रम कि छाती पूरी नंगी होँ गई औऱ सलमा नें देखा कि उसकी छाती पर्र कई स्थान घावहुए थें औऱ लाललाल निशान पड़गए थें तोँ सलमा कां दिल दर्द सें बैठ गय़ा औऱ फिन सलमा पलटकर उसकीकमर देखने लगी औऱ उसकीकमर पऱ लगेहुए जख्मों
कों हाथ सें छूकर देखने लगी!
सलमा कां दिल अंदर हि अंदररो रहा थां औऱ फिन वोँ पलटकर विक्रम केँ सामने आँ गई औऱ बोलि:" विक्रम मुझसे सच मे बेहद बड़ी गलती हौ गई हैं! मे तौ माफी केँ भि काबिल नहींहु आपकी!
विक्रम नें उसे अपनेगले सें लगा लिया औऱ उसका माथाचूम कर बोला:" आप् कुछमत सोचिए शहजादी! सभीकुछ भूलकर एक् नई शुरुआत करते हें!
सलमा उसकीबात सुनकर खुश हौ गई औऱ उससे कसकर लिपट गई! विक्रम नें भि उसे अपनी बाहों मे कस लिया औऱ दोनोऐसे हि खड़ेहुए एक् दूसरे केँ दिल कि धड़कन सुनते रहे औऱ फिन सलमा कों सीमा कि यादआई तौ बोलि:"
" युवराज सीमा बाथरूम सें नहींआई अभि तक!
विक्रम उसकीबात सुनकर मुस्कुरा उठा औऱ बोला:"
" कितनी भोली हौ आप् सलमा, वोँ तोँ जान बूझकर हमे अकेला छोड़कर गई हें ताकि हम् धीरे-धीरे बातकर सके!
सलमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल हौ गई औऱ कसमसा कर बोलीं:"
" हायरे अल्लाह वोँ क्याँ सोचरही होंगी मेरे बारे मे!!
विक्रम नें पहलीबार अपने हाथो कां दबाव उसकीकमर पर्र बढ़ा दिया औऱ बोला:"
" यही कि सलमा अपने महबूब कि बांहों मे होगी!
सलमा उसकीबात सुनकर कांपउठी औऱ उसकी पकड़ सें आजाद होती हुईं बोलीं:"
" जाइएउसे बुला लीजिए आप्!
सलमा कि बात सुनकर विक्रम कमरे सें बाहर् निकल गय़ा औऱ सीमाउसे बराबर केँ कमरे मे बैठी हुइ मिल गई औऱ बोलि:"
" हौ गई क्याँ आपकी सुलह?
विक्रम उसकीबात सुनकर हल्का सां मुस्कुराया औऱ बोला:"
" हानजब आप् जैसी बेहन हौ तौ भला क्यूं नहीं होगी! शहजादी आपको बुलारही हें!
उसकेबाद सीमा उसकेसंग आँ गई औऱ बोलीं:"
" क्याँ युवराज आपने अभि तक हमे पानी तक नहि पिलाया? कैसी मेहमाननवाजी करते हें आप् उदयगढ़ वाले, शहजादी पहलीबार अपनी ससुराल आई हैं औऱ आप् हें कि कोई फिक्र हि नहि हें आपको!
उसकीबात सुनकर सलमा शर्मा गई औऱ आंखो कों नीचेकर लिया तौ विक्रम बोला:"
" बस आप् पांच मिनट दीजिए मुझे!
उसकेबाद विक्रम गय़ा औऱ सलमा सीमा कों डांटती हुईँ बोलि:"
" कुछ भि बोल देती हौ, बड़ी बेशर्म हौ गई हौ सीमा!
सीमा नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोलीं:" क्या बात है रब्बा देखो तौ ससुराल केँ नाम पऱ केसे शर्मा गई आप् शहजादी!!
सलमा कां दिल उसकी बाते सुनकर तेजी सें धड़का उठा औऱ उसका पूरा जिस्म कांपउठा औऱ वोँ सीमा कों डांटते हुए बोलि:"
" एक् बारमहल चलोफिन तुम्हे अच्छे सें सबक सिखा दूंगी!
दोनो कि बातेचल हि रही थि कि विक्रम आँ गय़ा औऱ उसकेहाथ मे एक् ट्रे थि जिसमे खाने केँ लिए बहुत सारे सूखे मेवे औऱ जूस थां औऱ उसनेबेड पऱ सभीरख दिया औऱ उसकेबाद सभी मिलकर खानेलगे मगर सलमा थोडा संकोच कररही थि तौ विक्रम बोला:"
" शहजादी आप् पहलीबार उदयगढ़ आई हें तोँ बिना किसी संकोच केँ खाइए नहीं तोँ बाद मे कहेगी कि हमने आपका ध्यान नहि रखा!
सीमा:" बेचारी पहलीबार ससुराल आई हें तोँ इसलिये शर्मा रही हैं युवराज!
उसकीबात सुनकर सलमा कां मुंहलाल हौ गय़ा औऱ उसने घूरकर सीमा कि तरफ देखा तौ सीमा बोलि:"
" नाराज क्यूं होती हें आप्? क्याँ मे झूठबोल रही हूं क्याँ ?
सलमा:" एक् बार तुम् सुल्तानपुर चलोफिन जाकर आपकोसबक सिखाती हु अच्छे सें!
उसकीबात सुनकर सीमा औऱ विक्रम मुस्कुरा दिए! तीनों नें अच्छे सें खाया औऱ उसकेबाद सीमा बोलीं:"
"ओहो लगता हें कि फिन सें बाथरूम जानां पड़ेगा आजपेट मे कुछ ज़्यादा हि दिक्कत हें!
इतना कहकर उसने सलमा कों आंखमार दि औऱ बाहर् कि तरफचल पड़ी! उसके जाते हौ सलमा कि सांसे तेज हौ गई क्योंकि अब कमरे मे वोँ औऱ विक्रम दोनो अकेले हौ गए थें! विक्रम उसकेपास आँ गय़ा औऱ उसे अपनी बांहों मे भर लिया तोँ सलमा कसमसा उठी औऱ बोलीं:"
" आह्ह्ह्ह क्याँ करते होँ युवराज कोईदेख लेगा!
विक्रम नें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोला:" डरती क्यूं होँ शहजादी! कोई नहीं आयेगा यहां!
इतना कहकर उसने शहजादी कों अपनी बांहों मे कस लिया तोँ सलमा भि उससे लिपट गई औऱ विक्रम नें उसका मुंहउपर उठाया तौ सलमा कि आंखे लज्जा सें झुक गई औऱ विक्रम नें उसकागाल चूम लिया औऱ बोला:"
" शहजादी आप् मुझेमिल गई सभीकुछ मिल गय़ा! अब मुझेमौत भि आँ जाए तौ कोईगम नहीं होगा!
उसकीबात सुनकर सलमा नें अपनी उंगली कों उसके होठों पऱ रख दिया औऱ विक्रम उसकी उंगली कों अपने मुंह मे भरकर चूसने लगा तोँ सलमा कि सांसे तेज होँ गई औऱ विक्रम सें कसकर किसी अमरबेल कि तरह लिपट गई!
विक्रम नें अपने हाथो कों उसकी गांड़ केँ उभार पर्र रखा औऱ उसके उंगली कों जोरजोर सें चूसने लगा औऱ तभी सीमा केँ आने कि आहट हुइ तौ दोनो नं चाहते हुए भि अलग होँ गए औऱ सीमा अंदर आँ गई औऱ बोलीं:"
" शहजादी हमेंअब जानां होगा क्योंकि रात केँ 11 बजगए हें औऱ आपको डांट पड़ेगी!
सीमा कि बात सुनकर सलमा कां ध्यान वक़्त कि तरफ गय़ा औऱ बोलि:" ठीक हें हम् चलते हें सीमा! मे एक् मिनटबाद आई मुझे युवराज सें कुछबात करनी हें जरूरी!
उसकीबात सुनकर सीमा बाहर् चली गई औऱ सलमा एक् बारफिन सें विक्रम सें कसकर लिपट गई औऱ उसके होंठ चूसने लगी तोँ विक्रम भि बेकाबू होकर सलमा केँ होंठ चूसने लगा औऱ सलमाकिस तोड़कर धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोलीं:"
" आप् मुझसे मिलने केँ लिए परसो 11 बजे आँ जानां! युवराज मे आपका प्रतीक्षा करूंगी !
इतना कहकर उसनेजोर सें विक्रम केँ गाल कों चूस लिया तोँ विक्रम नें उसकी गांड़ कों कसकरदबा दिया औऱ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ एक् झटके केँ संग विक्रम सें अलग हुइ औऱ कक्ष सें बाहर् निकल गई! सीमा औऱ सलमा दोनो विक्रम केँ संग राजमहल सें बाहर् आँ गई औऱ उसकेबाद विक्रम नें उन्हें सुरक्षा केँ संग सुल्तानपुर कि सीमा मे छोड़ दिया औऱ सलमा खुशी खुशी अपने राज्य वापिस लौट पड़ी !!
प्रेम सच्चा तौ गलतफहमियां दूर हौ हि जाती हें! बससंग मे संभालने वालाकोई हमदर्द होना चाहिए जौ कि सीमा अभि पूरीतरह सें बनी हुई हें!!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
रात केँ लगभग 10 बजगए थें औऱ मेनका अपनेबैड पर्र लेटी हुईँ थि! नींद उसकी आंखो सें कोसोदूर थि औऱ उसकी नजरेबीच बीच मे अपनेगले मे पड़ेहुए मंगल सूत्र पर्र जारही थि जौ मेनका कों इसबात कां एहसास दिलारहा थां कि वोँ विवाह शुदा हें! मेनका चाहकर भि अपना मंगल सूत्र नहीं उतार सकती थि क्योंकि यह अपशकुन समझा जाता औऱ इससेअजय कि जीवन पर्र व्यापक रूप सें प्रभाव पड़ता! मेनका कि आंखो केँ आगेबार बारवही अपना दुल्हन वालारूप घूमरहा थां जिसमे वोँ बेहद सुंदर लगरही थि! दुनिया कि हर महिला हसीन दिखना चाहती हें औऱ मेनका इसका अपवाद नहि थि!
मेनका कों समझ नहि आँ रहा थां कि वोँ क्याँ करे क्योंकि इसकादिल एक् बारफिन सें स्वयं कों दुल्हन केँ लिबास मे देखने केँ लिए तड़परहा थां! बहुतसोच समझकर उसने फैसला किया कि वोँ फिन सें आज साड़ी पहनेगी औऱ घऱ केँ नीचेबने तहखाने मे उसेकोई देख भि नहीं पाएगा! आखिरकार मेनका अपनेबेड सें उठी औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलती हुईँ अजय केँ कक्ष तक पहुंच गई क्योंकि वोँ यह निश्चित करना चाहती थि कि अजय सोया हें याँ नहि औऱ उसने देखा कि अजयसो गय़ा थां तोँ वोँ फिन सें अपने कमरे मे आई औऱ अलमारी तक पहुंची औऱ एक् बेहद हसीन साड़ी उठाली औऱ तभी उसकेमन मे एक् विचार आया तोँ उसने कांपते हाथों सें अपनी गुलाबी रंग कि ब्रा पेंटी कों भि उठा लिया बाहर् निकल गई! मेनका धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलती हुई तहखाने तक पहुंच गई औऱ उसनेफिन सें स्वयं कों शीशे मे देखते हुए साड़ी पहनना शुरुआत कर दिया!कल मेनका केँ साड़ी पहनने औऱ आज पहनने मे जमीन आसमान कां अंतर थां क्योंकि कल उसने अपने पूर्वजों कि परंपरा केँ तौर पऱ पहनी थि औऱ आज अपनी खुशी केँ लिएपहन रही थि! मेनका नें एक् बार स्वयं कों शीशे मे देखा औऱ जैसे हि स्वयं सें उसकी नजरे मिली तोँ बरबस हि उसके होंठो पऱ मुस्कान आँ गई !
मेनका नें अपनेबदन पर्र सें सफेदरंग कि साड़ी औऱ ब्लाऊज़ कों हटा दिया तोँ तोँ वोँ ऊपर सें नंगी होँ गई औऱ उसने अपनीगोल गोल चुचियों कों देखा तोँ उसकी आंखो मे चमक आँ गई क्योंकि मेनका कां वजन थोडा सां बढ़ गय़ा थां जिससे उसकी चुचियों अब पहले केँ मुकाबले औऱ अधिकभर गई थि! मेनका नें शरीर मे सिरहन सि दौड़ गई औऱ उसकेबाद उसने अपने लहंगे कों उतार दिया तोँ मेनका पूरीतरह सें नंगी होँ गई औऱ स्वयं कों शीशे मे निहारने लगी!सच मे उसका शरीर किसी अजंता कि मूरत कि तरह तराशा हुआ थां औऱ मेनका कि नजर अपनी टांगो केँ बीच मे गई तौ उसकी आंखे लज्जा सें झुक गई क्योंकि उसकी बुर बिल्कुल चिकनी चमेली कि तरह बिलकुल साफ थि! मेनका कों यादआया कि कल उसने सुहागन बनने केँ लिएकिस तरह सें अपनी बुर कों साफ़ किया थां वरना उसकी बुर केँ आसपास बालो कां एक् पूरा जंगलउगा थां जिसमे कुछ भि नजर नहि आँ रहा थां! मेनका अपनेबदन कों लेकर कितनी लापरवाह हौ गई थि इसका अंदाजा इसीबात सें उसेहुआ थां कि उसकी झांटे उसकी पेंटी सें निकलकर उसकी जांघो तक आँ गई थि! मेनका नें गुलाबी रंग कि अपनी ब्रा कों कों उठाया औऱ शीशे मे देखते हुए अपने अमृत कलशो कों बंदकर लिया औऱ उसकेबाद उसने पैंटी कों हाथ मे लिया औऱ जैसे हि एक् टांग कों थोडा ऊपर उठाया तौ उसकी बुर केँ होंठ हल्के सें खुले औऱ मेनका कां समूचा वजूद कांपउठा! मेनका नें बड़ी मुश्किल सें अपनी जांघो कों बंद किया औऱ उसकेबाद पेंटी कों पहन लिया औऱ एक् चैन कि सांसली!
मेनका नें लहंगे कों पहन लिया औऱ उसकेबाद अपनी रेशमी साड़ी कों पहनने लगी औऱ
देखते हि देखते वोँ फिन सें एक् बार दुल्हन केँ लिबास मे आँ गई औऱ बेहद आकर्षक लगरही थि! मेनका बारबार अपने आपको शीशे मे देखरही थि औऱ आनंदित महसूस कररही थि! मगरकल केँ मुकाबले उसेआज कुछकमी महसूस हुईँ औऱ वोँ थि मेकअप कि कमी तौ उसनेफिन सें वही पुरानी मेकअप किट निकालने कां फैसला किया!
वहीं दूसरी तरफअजय अपने कमरे मे लेटाहुआ थां औऱ युवराज विक्रम केँ बारे मे हि सोचरहा थां कि आज वोँ दिनभर कितने परेशान थें जरूरकोई तोँ बात हें जिसका मुझेपता लगाना पड़ेगा! अजय नें अपनी तलवार कि तरफ देखा जौ बेड पऱ रखी हुइ थि औऱ उसे बेहद खुशी हुई! अजयउठा औऱ तलवार कों अपने माथे सें लगाकर चूमते हुए म्यान मे रख दिया औऱ उसकेबाद उसे दीवार पर्र टांग दिया!अजय कों नींद नहि आँ रही थि तोँ उसने थोडा छत पऱ टहलने कां सोचा औऱ छत कि तरफचल पड़ा! उसने देखा कि उसके माँ केँ कक्ष मे एक् भि दीया नहींजल रहा हैं तौ उसे बड़ी हैरानी हुईँ औऱ वोँ उसके कक्ष मे घुस गय़ा मगर कक्ष मे मेनका पाकर वोँ हैरान हौ गय़ा औऱ उसे अपनी माता कि चिंता हुईँ तौ वोँ तेजी सें छत पर्र गय़ा मगरछत पर्र भि उसे मेनका नहीं मिली तौ उसकादिल घबरा गय़ा औऱ तभी उसकेमन मे विचार आया कि एक् बारउसे नीचे तहखाने मे देख्ना चाहिए मगरउसे उम्मीद कम थि क्योंकि रात केँ लगभग 12 बजे उसकी माता तहखाने मे क्यूं जायेगी मगर उम्मीद पऱ दुनिया कायम हैं औऱ उसने नीचे जाने कां फैसला किया! वोँ अपनी माँ केँ कक्ष मे घुसा औऱ दीये कों जलाया तौ उसे उसकी माँ कि अलमारी खुली नज़रआई औऱ अजय सावधानी सें तहखाने मे उतरने लगा!
अजय नीचेउतर गय़ा तौ उसे अंदर प्रकाश नजरआया तोँ उसके अंदर उत्सुकता जागउठी कि उसकी माता इतनीरात कों यहांकर रही हैं तौ वोँ धीरे-धीरे सें आगे बढ़ा औऱ जैसे हि उसने अंदर झांका तोँ उसे मेनका नजरआई जोँ आजफिन सें दुल्हन बनी हुइ थि औऱ आजकल केँ मुकाबले कहीं ज़्यादा हसीनलग रही थि क्योंकि आज वोँ अपनी मर्जी सें औऱ अपने तरीके सें रेडी हुई थि! मेनका अपने होंठो कों गोलाकार किएहुए थि औऱ उन पऱ लिपिस्टिक लगारही थि औऱ यहसभी देखकर अजय कि आंखेफटी कि फटीरह गई! उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि आखिर उसकी विधवा माँ यहसभी क्यूं कररही हैं आजफिन सें!
लिपिस्टिक लगाकर मेनका मुस्कुरा उठी औऱ अजय नें एक् नजरसिर सें लेकर पांव तक अपनी माता मेनका पर्र डाली! मेनका केँ दूध सें गोरे सुंदर पेर औऱ पैरो कि छोटी छोटीमन मोहक उंगलियां, मेनका केँ पैरो मे बंधी हुईँ पतली सि पायल, हरे रंग कि बेहद आकर्षक रेशमी साड़ी औऱ उसके हाथो मे साड़ी सें मिलती हुइ हरेरंग कि हसीन कांच कि चूड़ियां बेहद हसीनलग रही थि! मेनका कां चेहरा बेहद हसीनलग रहा थां औऱ उसके होंठो पर्र मंदमंद मुस्कान फैली थि! उसके कालेघने रेशमी बाल उसकेगले मे स्टाइल केँ संग पड़ेहुए थें औऱ उसकी सोने कि सुकून कों ढकने कां प्रयास कररहे थें! मेनका केँ लाल सुर्ख होंठ उसके मुस्कुराने कि वजह सें औऱ ज़्यादा लरजरहे थें जिससे मेनका कि हुस्न जानलेवा साबित हौ रही थि!
अजय बिना पलके झुकाए वोँ अदभुत सुंदरता कों निहारता रहा औऱ फिन मेनका खड़ी हौ गईं औऱ शीशे मे स्वयं कों निहारने लगी! मेनका केँ खड़े होने सें उसकी साड़ी कां पल्लू सरक गय़ा थां जिससे उसकी चुचियों कां उभार साफ़नजर आँ रहा थां औऱ मेनका अपने बालो सें खेलती हुई स्वयं कों शीशे मे निहार रही थि औऱ एक् हल्की सि बेहद कामुक मुस्कान उसके होंठो पऱ फैली हुइ थि! मेनका कभी अपनी आवारा लटो कों संभालती तोँ कभीपलट कर अपने पीछे केँ हिस्से कों देखती औऱ स्वयं पर्र हि मोहित होतीजा रही थि!
भले हि मेनका उसकी मम्मी थि मगरअजय कों उसकेरूप मे साक्षात स्वर्गलोक कि मेनका नजर आँ रही थि जिससे वोँ कभी कां भूल गय़ा थां कि सामने खड़ी हुइ स्वयं सें अठखेलियां कररही महिला उसकीसगी मम्मी हैं औऱ नारी स्वभाव औऱ सुंदरता सें अपरिचित अजयअब उसकी कामुक अदाओं कों देखकर आनंदित महसूस कररहा थां! दूसरी तरफ मेनका तोँ मानोआज आसमान मे उड़रही थि क्योंकि वोँ जीवन मे पहलीबार खुलकर अपनी हुस्न कों निहार रही थि औऱ मस्त हुईँ जारही थि! कभी वोँ अपने होंठो कों गोलाकार करती तोँ कभीखोल देती औऱ कभी कामुक अंदाज मे सिकोड़ सां लेती मानो सीटी बजाना चाहती होँ!
मेनका नें अपनाहाथ पीछे लेँ जाकर अपने बालो कों पूराखोल दिया औऱ उसके बालो नें उसके हसीन चेहरे कों पूराढक लिया औऱ मेनका नें एक् झटके केँ संग अपने बालो कों पीछे कों झटक दिया तोँ अजय कों आज एहसास हुआ कि वास्तव मे चांद बदली सें केसे निकलता हैं औऱ अजय नें अपने दांतो तले उंगली दबाली! मेनका कि सांसे अबतेज होँ गई थि जिससे उसका जिस्म मचलरहा थां औऱ उसकी छातियों मे कम्पन होना शुरुआत हौ गय़ा थां! मेनका आज स्वयं पर्र हि मोहित हौ गई थि औऱ शीशे मे देखते हुए उसने अपने जिस्म कों हिलाना शुरुकर दिया तौ मेनका कों अद्भुत सुख मिला औऱ वोँ अपने दोनो कंधो कों एक् एक् करके उचकाने लगी जिससे उसकी चूचियां एक् दूसरे कों चिढ़ाती हुईँ उपर नीचे होना शुरुआत हौ गई! मेनका अपने दोनो हाथो मे अपने बालो कों भरती औऱ फिन सें उन्हे खुला छोड़ते हुए अपने चेहरे पऱ फैला देती! मेनका कि सांसे अब उखड़ गई थि औऱ उसकी छातियों मे तेजगति सें कम्पन होना शुरुआत हौ गय़ा थां!
मेनका अब पूरीतरह सें मदहोश होँ गई थि औऱ उसकेपेर जवाब देनेलगे तोँ वोँ हिरनी कि तरह लहराती हुई बेड कि तरफचल पड़ी जिससे उसका बड़ा भारी भरकम पिछवाड़ा अजय केँ सामने करतब करनेलगा औऱ अजय बिना पलके झुकाए अपनी मम्मी केँ इस अदभुत अवतार कां नयनसुख लें रहा थां! मेनका बेड पऱ चढ़ गई औऱ अपनेबदन सें खेलने लगी!कभी वोँ अपनी टांगो कों फैला देती तोँ कभी उन्हे पूरा सिकोड़ लेती औऱ मेनका नें अपनी एक् उंगली कों अपने मुंह मे भर लिया औऱ चूसने लगीं औऱ बेताबी सें अपनी जांघो कों एक् दूसरे सें रगड़रही थि! मेनका कि आंखे वासना सें लाल सुर्ख होकरदहक रही हैं औऱ उसका एक् हाथ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकी दोनो चूचियों कों सहलारहा थां! मेनका अपनेबदन कों खाट पऱ मस्ती सें बैड पऱ पटकरही थि औऱ काम वासना सें भरी हुइ मेनका नें एक् करवटली औऱ अब उसकी गांड़ उभरआई औऱ अपनी दोनो चुचियों कों वोँ बेडशीट पर्र जोरजोर सें रगड़ती हुई बेडशीट कों हाथो सें मरोड़ रही थि औऱ उसकी साड़ी उसकी जांघो तक आँ गई थि जिससे उसकी गोरी चिकनी जांघें साफनजर आँ रही थि औऱ अजय पागल सां हुआ देखेजा रहा थां कि उसकी माता कितनी कामुक हें!
मेनका नें जोरजोर सें अपने शरीर कों पलंग पर्र पटकना शुरुआत कर दिया औऱ उसकीजीभ स्वयं हि बेकाबू होकर उसके होंठो कों चूसने लगी तौ अजय बेचैन होँ गय़ा औऱ अच्छे सें देखने केँ लिए अपनी स्थान सें थोडा सां हिला औऱ यही उससेचूक होँ गई! अजय केँ हिलने सें उसकी परछाई कां प्रतिबिम्ब शीशे पऱ पड़ा औऱ मेनका कों एहसास हौ गय़ा कि कमरे मे कोई हें जौ उसेदेख रहा हैं औऱ वोँ जानती थि कि यहअजय केँ सिवाकोई औऱ नहि होँ सकता क्योंकि तहखाने कों मात्र वही जानता थां! मेरा बेटा मेरी हरकतों कों देखरहा हैं यहसभी सोचकर मेनका लज्जा सें पानी पानी पानी होँ गई औऱ उसकी उंगली उसके मुंह सें बाहर् निकलआई औऱ मेनका सीधीबैड पर्र लेट गई मानो सोने कां प्रयास कररही हौ! अजय कों समझ नहींआया कि अचानक सें उसकी माता कि क्याँ हुआ, कहीं उन्हे पता तोँ नहींचल गय़ा कि मे उन्हें देखरहा हूं ! यह सोचकर अजय कि नजर सामने शीशे पर्र पड़ी औऱ उसे अपनी गलती कां एहसास हुआमगर अब तौ तीर कमान सें निकल गय़ा थां!
अजय जानता थां कि अबकुछ नहि होगा इसलिये वोँ वोँ उपर आँ गय़ा औऱ मेनका समझ गई कि अजयचला गय़ा हैं तौ वोँ थोड़ी देर लेटीरही औऱ अपने अपनी उत्तेजना कों काबू करने कां प्रयास करतीरही
मगर उसकाबदन अब उसके काबू मे नहि रहा थां औऱ उसकी चूचियां कड़ी होँ गई थि जिससे मेनका चाहकर भि अपनी सांसे संयत नहींकर पारही थि,
मगर यहांकब लेटी रहूंगी मुझे अपने कमरे मे जानां हि होगायह सोचकर वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उठी औऱ उसी सुहागन केँ रूप मे तहखाने सें बाहर् आँ गई! चलतेहुए उसके पांव कांपरहे थें औऱ वोँ मन हि मनदुआ कररही थि कि उसका बेटा उसके सामने नं आए इसलिये मेनका धीरे-धीरे धीरे-धीरे संभलकर चलरही थि औऱ अजय तोँ जैसे उसकेलिए हि खड़ाहुआ थां ! रात केँ लगभगदो बजगए थें औऱ घऱ मे बहुत अंधेरा थां जिससे मेनका थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए अपने कक्ष कि ओरजारही थि कि उसेअजय कि आवाज़ सुनाई पड़ी:"
" माता आप् इतनीरात जागरही हैं आपकी तबियत तोँ ठीक हैं?
मेनका उसकी आवाज़ सुनकर कांपउठी औऱ उसकामन किया कि जल्द सें अन्दर घुसजाए मगर आवाज़ कि दिशा मे देखा औऱ बोलि:"
" हानबस नींद नहीं आँ रही थि कि तौ इसलिये तहखाने मे चली गई थि!
अजय थोडा सां आगे बढ़ा औऱ अबअजय औऱ मेनका दोनो एक् दूसरे केँ सामने आँ गए थें औऱ अंधेरे केँ कारण एक् दूसरे कां चेहरा नहींदेख पारहे थें तोँ अजय बोला:"
" ऐसेरात रातभर जागेगी तोँ आपकी तबियत खराब होँ जायेगी!
मेनका उसकीबात सुनकर उसका मतलबसमझ गई औऱ उसकी सांसे फिन सें तेज होना शुरुआत होँ गई औऱ अंधेरे कां फायदा उठाकर अपने कामुक खड़ी चुचियों कों शांत करने केँ लिएउन पर्र हाथरख कर बोलि:"
" नहीं पुत्र, आज पहलीबार ऐसाहुआ हैं कि इतनीरात कों नींद नहि आई मुझे!
अजय जानता थां कि उसकी माता कभीझूठ नहि बोलती ओरअजय उसके थोडा सां औऱ लगभगहुआ औऱ बोला:"
" ऐसा किसलिए हुआ हैं माता कि आपकी नींदउड़ गई हैं! क्याँ कोई कष्ट हें आपको?
मेनका उसकीबात सुनकर कांपउठी औऱ दूसरा उसकी चूचियां शांत होने केँ बजाय ज़्यादा उछल पड़ी औऱ मेनका सोचने लगी कि कष्टइसे केसेबता सकतीहू औऱ बोलीं:"
" नहीं पुत्र कष्ट तोँ कुछ नहीं हैं, बसकभी कभी इंसान पऱ उसके अतीत कि यादें भारीपड़ जाती हें तोँ ऐसा होँ जाता हें!
दोनो एक् दूसरे कों नहींदेख पारहे थें जिससे उन्हें बहुत हिम्मत मिलरही थि औऱ लज्जा कम आँ रही थि! मेनका कि तेजगति सें चलती हुई सांसों कों अजयसाफ महसूस कररहा थां औऱ उसके थोडा औऱ लगभग होँ गय़ा जिससे दोनोअब बिल्कुल एक् दूसरे सें सामने खड़े खड़ेहुए थें औऱ अजय नें हिम्मत करके अपनेहाथ कों उसके कंधे पऱ रख दिया औऱ बोला:".
" मुझे नीचे तहखाने मे नहीं जानां चाहिए थां माता! मेरीवजह सें आपको तकलीफ़ हुइ!
अपने कंधे पऱ अपने बेटे कां हाथ महसूस करके मेनका केँ शरीर मे एक् तेज सिरहन सि दौड़ गई औऱ खामोश रही तौ अजय उसके थोडा औऱ लगभग होँ गय़ा औऱ मेनका कि तेज सांसों केँ संग उठती गिरती हुईँ चूचियां हल्की सि उससे टकरारही थि औऱ मेनका कां पूरा शरीर उत्तेजना सें कांपरहा थां औऱ अजय नें अपने दूसरे हाथ कों भि उसके कंधे पऱ रख दिया औऱ सहलाते हुए बोला:"
" आप् इतना कांप क्यूं रही हें माता ! आपकी सांसे भि तेज हौ गई हैं !!
पल्लू सरक जाने सें मेनका केँ दोनो कंधे नंगे होँ गए थें औऱ अपने बेटे केँ सख्त हाथो कि छूवन महसूस करके मेनका शरीरमचल उठा औऱ उसके होंठअब बुरीतरह सें थरथरा रहे थें! मेनका नें कसकर अपनी जांघो कों भींच लिया उसकी बुर सें सालो केँ बाद न् चाहते हुए भि कामरस कि एक् बूंदटपक पड़ी तोँ उसके मुंह सें अहह निकल गई औऱ मदहोशी मे उसके पांव जवाबदे गए तौ मेनका उसकी बांहों मे झूल सि गई औऱ अजय नें उसे कसकर अपनी बांहों मे भर लिया औऱ जैसे हि उसकी छातियां अजय केँ चौड़े मजबूत सीने सें टकराई तोँ मेनका कां धैर्य औऱ लज्जा सभीटूट गय़ा औऱ वोँ भि किसी प्यासी अमरबेल कि तरहअजय सें लिपट गई! दोनो एक् दूसरे कों औऱ ज़्यादा जोर सें कसने कां प्रयास कररहे थें औऱ मेनका नें मदहोशी मे अपनी दोनो आंखेबंद किए उसकेगले मे अपनी संगमरमरी बांहों कां हार पहना दिया!
दोनो हि एक् दूसरे सें ऐसे लिपटे हुए थें मानो एक् हि बदन हौ औऱ अजय केँ गरम दहकते होंठकभी कभी उसकी हसीन पतली गर्दन कों चूमरहे थें तोँ कभी उसकीकान कि लौ कों सहलारहे थें जिससे मेनका अपने होशो हवास खोतीजा रही थि औऱ अजय केँ हाथअब उसकीकमर सें लिपटकर उसकी चिकनी नंगीकमर कों सहलारहे थें औऱ मेनका मस्ती सें अपनी चुचियों कां वार उसके सीने मे कररही थि औऱ उसने अपनेगरम दहकते अंगारों जैसे होंठो कों अजय केँ गाल पऱ रखा औऱ चूम लिया तोँ अजय उसके होंठो कि तपिश महसूस करकेजोश मे आँ गय़ा औऱ उसने दोनो हाथों सें उसका चांद सां हसीन चेहरा अपने हाथो मे भर लिया औऱ दोनो कि सांसे एक् दूसरे सें टकराने लगी औऱ अजय नें होंठ उसके गालों कों चूमते हुए उसके होंठो कि तरफ बढ़ने लगे!
जैसे हि दोनो केँ होंठआपस मे टकराए तोँ मेनका केँ शरीर मे बिजली सि दौड़ गई औऱ वोँ एक् झटके केँ संगअजय सें अलग हुईँ औऱ तेजी सें चलती हुईँ अपने कक्ष मे जानेलगी औऱ उसकी चूड़ियों औऱ पायल कि छनछनछन खनखनखन करती हुइ आवाज़ गूंजउठी औऱ मेनका अपने कक्ष मे आकरलेट गई औऱ सोचने लगी कि उससे बड़ी भारी गलती हौ गई हैं आज!
मेनका अपनी सांसों केँ संयत करतेहुए सोने कि कोशिश करनेलगी वहीं दूसरी तरफअजय भि समझ नहींपा रहा थां कि जोँ हुआ क्याँ वोँ सच थां! अजय अपने कक्ष मे आँ गय़ा औऱ सोने कां प्रयास करनेलगा मगर नींद उसकी आंखो सें कोसोदूर थि!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Next part mein bada twist
धन्यवाद सिराज भइया आपका! आप् भि अच्छे लेखक हें आपकीकई कहानियां मैने पढ़ी हें जिसमें बदला मेरीबे इज़जती कां मुझे बेहद पसन्द हैं!
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