बरसात की वो हसीन रात - maa beta - Latest Update 1
मे रीमा उम्र 38 साल।
पति कि मौत केँ बाद अपना देहात छोड़ना पड़ा औऱ शहर आँ गई। दिल्ली मे आने केँ बाद मैंने एक् सिलाई कि दुकान खोलली औऱ कपडे सिलने लगी जिससे मेरे परिवार कां खर्च चलनेलगा। मेरे परिवार मे केवल एक् मेरा बेटा राज थां। मैंने उसकी पढ़ाई पऱ ध्यान दियामगर उसका पढ़ाई मे ध्यान नहि लगता थां जिससे उसकीरोज विद्यालय सें शिकायते आती थि औऱ एक् दिन उसने अंतिम निर्णय कर लिया कि वोँ अब विद्यालय नहि जाएगा तौ मैंने उसे समझाया मगरबात नहि बनी। आखिरकर मे उसकीजिद केँ आगेहार गई औऱ उसकी पढ़ाई बंद होँ गई।
बरसात की वो हसीन रात - maa beta – New Episode
राज नें पढ़ाई छोड़ दि औऱ कॉलोनी केँ कुछ आवारा लडको कि संग रहनेलगा जिससे वोँ पूरीतरह सें बिगड़ गय़ा। उसकी मुझे शिकायत आनीलगी तोँ एक् दिन मैंने उससेबात करना हि बेहतर समझा औऱ बोलीं:"
" रात पढ़ना तौ तुम्हे हें नहि तौ तुम् कुछकाम हि करलो, कम सें कम मेरी सहायता हि हौ जाएगी कुछ।
राज:" कहां मां अभि तौ मे बच्चा हू मस्ती करने कि उम्र हें मेरी, अभि सें मे क्यूं कामकरू ?
मे:" राजअब तुम् बच्चे नहि हौ पूरे 18 साल केँ हौ गए होँ। तुम्हे अबकाम पऱ ध्यान देना चाहिए।
राज:"ओह माँ अभि तौ मुझे अच्छा नहि लगताकाम करना, जब मुझे लगेगा कि मुझेकाम करना चाहिए तोँ मे स्वयं हि काम शुरुकर दूंगा। दुनिया अपनेचार पांच बच्चो कां पेट पालती औऱ एक् आप् हें कि एक् बेटे कों नहि खिलापा रही हैं।
मे हैरान सि खड़ी हुइ उसका मुंह देखती रह गई औऱ वोँ एक् झटके केँ संग बाहर् निकल गय़ा अपने आवारा दोस्तो केँ संग घूमने केँ लिए। मुझे यकीन नहि हौ रहा थां बेटा इतनी बड़ी बड़ी बाते करनेलगा हें। बस एक् काम नहि करना इसने बाकी उल्टे पुल्टे काम करने हें कमीने कों। मैंने सोचाचलो समयआने पर्र इसको अपने आप् अक्लअा जाएगी।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे कुछ महीने निकलगए मगरराज पहले सें अधिक बिगड़ता चला गय़ा औऱ हद तोँ तब हौ गई जब एक् दिन वोँ शराब पीकरघऱ अा गय़ा।
मुझेउस पर्र बहोत क्रोध आया औऱ मे चिल्लाते हुए बोलि:"
" यह क्याँ बदतमीजी हें राज?अब तुम्हारी हिम्मत इतनीबढ़ गई हें कि तुम् दारू पीकरघऱ आनेलगे ?
राज नें मेरीतरफ मुंह उठाया उसकी आंखेनशे केँ कारणलाल होँ रही थि औऱ वोँ बोला:"
" मे कौन सां अकेला दारू पीताहू, मेरे सारे साथी पीते हें !! हिम्मत कि तोँ मेरे अंदरकोई कमी नहि हैं माँ।
मे:" बेटा दारू पीनेगलत बात हें, तुम्हारे अंदर सें कमजोर कर देगी तुम् समझो मेरीबात।
राज:"ऐसा कुछ नहि हें मां, यहसभी कहने कि बाते हें, ऐसा होता तौ शायदकोई शराब नहि पीता।
इतना कहकर वोँ अंदर कमरे मे चला गय़ा औऱ मे अपनी भाग्य कों कोसने लगी। उफ़्फ़ क्याँ करूयह ईश्वर मे इस लड़के कां। मैंने दुखीमन सें खानां खाया औऱ बाहर् हि लेट गई। मे किराए केँ घर-मकान मे रहती थि इसलिये एक् हि रूम थां औऱ बाहर् थोड़ी स्थान थि छत पर्र जहांमै अक्सर सो जाया करती थि।
मे नींद मे जाने हि वाली थि कि तभी मुझेराज केँ कमरे सें हल्की हल्की आवाजे सुनाई दि। वोँ कुछ बडबडा रहा थां औऱ मे उठकर देखने केँ लिएचल दि तोँ खिड़की सें देखा तौ मेरी सांसे रुक सि गई। मुझे जैसे स्वयं पर्र यकीन हि नहि हौ रहा थां मे जौ देखरही हूं क्याँ वोँ सच हें। राज बिल्कुल नंगा थां औऱ एक् तकिए कों अपने नीचे दबाएहुए धक्के पऱ धक्के लगारहा थां। बिल्कुल किसी पागल सांड कि तरह बहोत तेजी सें तकिए कों ऐसेचोद रहा थां मानो किसी लड़की कों चोदरहा हौ।
उसके मुंह सें मस्ती भरी सिसकारियां निकलरही थीं औऱ मे बिना सांसलिए एकटकउसे देखेजा रही थि। उसकी स्पीड देखकर मुझे यकीन नहि हौ रहा थां कि यह दुबला पतला सां लड़का कैसी इतनी तेजी सें लगा पड़ाहुआ थां। तकिया धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगेसरक रहा थां जिससे राज दीवार मे अड गय़ा तोँ उसने थोडा सां पीछे होने केँ लिए अपनाबदन उपर उठाया औऱ तकिए कों पीछे खींचा तौ मेरी नज़रे उसके लन्ड पऱ चली गई।
हायराम ईश्वर मे यह क्याँ देखरही हूं, क्याँ ऐसे भि लन्ड होते हें, उसका लन्ड बहोत मोटा औऱ लम्बा थां। मुझे तोँ यकीन नहि हौ रहा थां कि क्याँ मे इंसान कां लन्ड देखरही हूं याँ किसी घोड़े कां। राज नें फिन सें धक्के लगाने शुरुआत करदिए औऱ इसबार उसकी स्पीड पहले सें कहीं ज़्यादा थि।
उसकेहर धक्के पऱ बेडहिल रहा थां। मैंने अपने पति केँ आलावा कभी किसी कों नजर भरकर भि नहि देखा थां मगरआज मे स्वयं पऱ काबू नहि रखपाई औऱ मेरी सांसे तेज हौ गई। एक् मा होने केँ नाते मुझे अपने बेटे कों समझाना चाहिए कि मगर मेरेमन नें काम करना बिल्कुल बंदकर दिया थां। मेरागाल सूख गय़ा थां औऱ मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहि बची थि कि मे वापिस अपनी चारपाई तक जा पहुंच सकू।
मेरेबदन मे कुछकुछ होनेलगा औऱ राज कों देखते देखते हि मेरा एक् हाथकब मेरी बुर पऱ चला गय़ा मुझेपता हि नहि चला। जब मेरी उंगली मेरी बुर कों सहलाने लगी तोँ मुझे बुर केँ गीलेपन कां एहसास हुआ। राज कों देखते हि देखते मेरी उंगली बुर मे अंदरघुस गई औऱ मेरे होंठो सें एक् मस्ती भरीअहह निकल पड़ी। बुर मे उंगली घुसते हि मे पूरीतरह सें बेकाबू हौ गई औऱ मेरी सालो सें दबी हुईँ प्यास भड़कउठी। मैंने दूसरे हाथ सें अपनी चूचियों कों सहलाना शुरुआत कर दिया औऱ एक् उंगली पूरी बुर मे अंदर बाहर् होँ रही थि। मुझे नाइटी केँ उपर सें मम्मों दबाने मे आनंद नहि आँ रहा थां तौ मैंने अपनी नाइटी कों उतार फेंका औऱ पूरीतरह सें नंगी हौ गई औऱ राज कों देखते हुए बुर मे उंगली करनेलगी औऱ उसके धक्कों केँ संग अपनी उंगली कि गति मिलाने लगीं। राज केँ मुंह सें जोरजोर सें निकलती हुई मस्ती भरी सिसकारियां मेराजोश औऱ बढ़ारही थि औऱ मे पूरी ताकत सें लगी हुइ थि। तभीराज केँ धक्कों मे तेजीअा गई तौ उसने पूरीजोर सें धक्के लगाने शुरुआत कर मानो तकिए कों फाड़ देना चाहता हौ। मेरी भि बुर झड़ने केँ लगभग पहुंच गई तौ मैंने जोर सें अपनी उंगली कों बाहर् निकाला औऱ जड़ तक अंदर घुसा लिया औऱ मेरी बुर झड़ती चली गई औऱ मस्ती सें मेरा मुंह खुलता चला गय़ा। राज नें भि अपनी गांड़ उपर कि तरफ उठाई औऱ एक् अंतिम धक्का तकिए पर्र दे मारा औऱ मस्ती सें सिसकउठा।
एक् केँ बाद उसके लन्ड सें वीर्य कि पिचकारी निकलने लगी औऱ तकिए कों भिगो दिया। जैसे हि राज कां स्खलन ख़त्म हुआ तोँ वोँ उठा औऱ बाहर् कि तरफआया तौ मेरी हालत खराब हौ गई औऱ मे तेजी सें बाहर् कि तरफ भागी औऱ गैलरी नें बिछी अपनी चारपाई पऱ लेट गई। बाहर् नाइट बल्बजल रहा थां जिसकी गुलाबी रोशनी फैली हुईँ थि। हाय ईश्वर यह क्याँ हौ गय़ा मुझे अपनी गलती कां एहसास हुआ कि मेरी नाइटी तोँ उसके कमरे केँ गेट मे पड़ी हुइ रह गई। आहयह क्याँ हौ गय़ा, अब क्याँ करू। मैंने एक् सफेदरंग कि बहोत पतली सि चादर कों अपनेउपर औढ़ लिया। आज मेरी क़िस्मत हि खराब थि हाययह चादर तौ बहोत छोटी थि, उपर सें ढकू तोँ नीचे सें जांघें नंगी हौ जाती थि औऱ अगर जांघें धकू तोँ बूब्स आधे सें ज़्यादा नजर आँ रहे थें। समझ मे नहि अारहा थां कि क्याँ करू। मे हाथ जोड़कर प्रार्थना करनेलगी कि हैं ईश्वर आजबचा लेँ बस मुझे।
राज नशे मे कमरे सें बाहर् निकला औऱ ओहरे मेरी फूटी क़िस्मत उसकेपेर नाइटी मे फसगए औऱ वोँ लड़खड़ा करगिर पड़ा। उसके गिरते हि मेरी सांसे जैसेरुक सि गई अब क्याँ होगा। वोँ खड़ाहुआ औऱ देखा कि मेरी नाइटी कि वजह सें वोँ गिरा हें तोँ मुझे उसके चेहरे पर्र हैरानी केँ भावसाफ दिखाई दिए कि मेरी नाइटी वहां केसे पहुंच गई क्योंकि वोँ तोँ मैंने पहनाहुआ थां।
उसने नाइटी कों ध्यान सें देखा तोँ उसे नाइटी एक् स्थान सें गीली महसूस हुई। उफ्फयह क्याँ हौ गय़ा मुझसे, नाइटी मेरी टांगो केँ बीच मे गिर गई थि जिस कारणउस पर्र मेरी बुर सें निकलने कामरस कि कुछ बंदेगिर गई थि। राजउसे अपनीनाक केँ पास लें गय़ा औऱ सूंघने लगा।
हे ईश्वर मे यह क्याँ देखरही हूं, मेरासगा बेटा मेरी बुर कां रस सूंघरहा हैं। ओह देखते हि देखते उसने नाइटी पर्र अपनीजीभ लगा दि औऱ चाटने लगा। मेरे शरीर मे यह देखते हि कंपकपी सि दौड़ गई। राज नाईट कों जीभ निकाल निकाल करचाट रहा थां औऱ मेरीतरफ चल दिया।
मे लज्जा केँ मारेमरी जारही थि, एक् बारफिन सें मेरी सांसे उखड़ चुकी थि औऱ चूचियां उछलने लगी जिससे चादर हिलने लगी। राज धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलताहुआ मेरेपास अा गय़ा। मे अबहिल भि नहि सकती थि औऱ सांसे उसे अपने इतनेपास देखकर किसी धौकनी कि तरह चलनेलगी। चोटी सि चादर नां तोँ ठीक सें मेरी जांघों कों छुपापा रही थि औऱ नाँ हि चूचियां।
राज कि नजरे मेरेबदन पऱ गड़ गई औऱ अपनी अधखुली आंखों सें वोँ सभीदेख रही थि। राज मेरा बेटा मेरे सामने बेखौफ खड़ा बिल्कुल नंगा खड़ाहुआ थां। मेरीउपर नीचे होती चूचियां देखकर उसके लन्ड मे तनावआने लगा औऱ उसनेजोश मे आकर मेरी नाइटी कों मुंह मे भर लिया। उसका लन्ड देखते हि देखते फिन सें अपनी औकात पर्र अा गय़ा औऱ मेरी आंखो केँ आगे लहरारहा थां। उफ़्फ़ कितना मोटा सुर्ख सुपाड़ा थां, मेरी नज़रे लन्ड कि लम्बाई पऱ गई तोँ मेरी बुर नें जैसेफिन सें बगावत कर दि औऱ बुर फिन सें गीली होनेलगी।
साहिल नें अपनाहाथ नीचे लातेहुए लन्ड कों फिन सें सहलाना शुरुआत किया तोँ आसमान मे बादल गड़गड़ा उठे औऱ देखते हि देखते तेज बारिश शुरुआत हौ गई जिससे मेरी चारपाई पऱ हवा केँ बहाव केँ चलते बारिश तिरछी होने केँ कारण बूंदे आनेलगी औऱ मेरी चादर पूरीतरह सें गीली होँ गई। चादर शरीर सें चिपक जाने केँ कारण मेरा जिस्म बिल्कुल साफनजर आँ रहा थां।
राज कि आंखे चौड़ी हौ गई क्योंकि मेरी बुर उसेसाफ नजर आँ रही थि औऱ चूचियां भि। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि क्याँ करू। तभी मुझेयाद आया कि आजदिन मे छत पर्र मैंने कपड़े सूखने केँ लिए डाले थें जोँ भीगगए होंगे। मैंने जान बूझकर अंगड़ाई लेतेहुए करवटली तोँ राज केँ हाथरुक गए औऱ बाथरूम मे घुस गय़ा। उसलगरहा थां कि कहीं मेरीआंख नाँ खुलजाए।
उसके जाते हि मैंने चादर कों अपने शरीर पऱ लपेटा औऱ उपर कि तरफ भागी औऱ कपडे समेटने लगीमगर कोई फायदा नहींहुआ क्योंकि कपडे पूरीतरह सें भीग चुके थें।
मे नीचे कि तरफअाई तोँ देखा कि मेरीराज बाथरूम सें बाहर् निकलरहा थां औऱ मुझे देखते हि उसने मेरी नाइटी कों अपने शरीर पर्र ढक लिया। उसका लन्ड अभि तक खड़ाहुआ थां औऱ उसने मेरीतरफ देखा तौ चादर पूरीतरह सें भीगकर मेरे शरीर सें चिपक गई थि।
मे कपडेतार पर्र डालने लगी तौ चादर मेरेहाथ उपर करने केँ कारण थोडा सां उपर खिसक जाती जिससे मेरी नंगी गांड़ राज कि आंखो केँ सामने अा जाती। मैंने उसकीतरफ देखा तौ उसकी आंखेलाल सुर्ख होतीजा रही थि। पता नहीं क्यूं मुझे उससेडर सां लगरहा थां मगरफिन भि मे अपनाकाम करती रही। बस दोचार कपडेबचे हुए थें औऱ आगेतार कि ऊंचाई कुछ ज़्यादा थि। जैसे हि मे अब कपडे डालने केँ लिए उचकी तौ फिन सें मेरी गांड़ नंगी हौ गई मगर मेरेहाथ तार तक नहि पहुंच पारहे थें। राजपास हि खड़ाहुआ मेरी गांड़ कों ताड़रहा थां। मैंने उम्मीद भरी नजरो सें उसकीतरफ देखा तौ वोँ आगे बढ़ा औऱ मेरे पीछे आकार खड़ा होँ गय़ा। जैसे हि मे अबकीबार उपर कि तरफ उछली तोँ वोँ मुझसे सट गय़ा औऱ उसके लन्ड कां एहसास मुझे अपनी गांड़ पर्र हुआ। हाय मेरेबदन कां रोमरोम वासना सें सुलगउठा। उसनेआगे होतेहुए मेरे हाथो सें कपडे पकड़लिए औऱ आगे कि तरफ होतेहुए तार पर्र टांग दिया। अभि कुछ कपडे औऱ बचेहुए थें तौ मे कपडे लेकरआगे कि तरफ बढ़ी तोँ वोँ भि मेरेसंग भि खिचाचला गय़ा। फिन सें उसनेदो कपडे औऱ तार पऱ टांगदिए। अब अंतिम कपड़ा बचाहुआ थां औऱ तार भि बहुत ऊंचाई पर्र थि औऱ उसकेहाथ भि छोटेपड़ रहे थें।
मैंने उम्मीद भरी नजरो सें उसकीतरफ देखा औऱ कपड़ा आगे बढ़ा दिया तौ उसने कपड़ा पकड़ लिया औऱ उपर कि तरफ उछलामगर उसकेहाथ तार तक नहि पहुंच पाए। उसनेफिन सें कोशिश करीमगर नतीजा वही। उसका लन्ड बारबार मेरी गांड़ पर्र लगरहा थां औऱ उसके उछलने सें मेरी नाइटी उसके शरीर पर्र सें हट गई औऱ अब वोँ बिल्कुल नंगा होँ गय़ा थां। जैसे हि मुझे अपने पैरो मे पड़ी हुईँ नाइटी दिखी तौ मेरेबदन मे हलचल सि मच गई। चूचियां अकड़ने लगी औऱ बुर फिन सें गीली हौ गई।
राजबार बारउछल रहा थां जिससे लन्ड गांड़ पर्र अडरहा थां औऱ मुझेअब आनंदमिल रहा थां। मैंने वासना सें पागल होकर अपनी टांगे चौड़ी कर दि तौ राज मेरा इशारा समझ गय़ा औऱ उसने उछलना कमकर दिया औऱ गांड़ पऱ लन्ड केँ धक्के लगाने लगा। बीच बीच मे बस एक् बार मुश्किल सें वोँ कपड़ा टांगने कि कोशिश कररहा थां।
मुझसे लन्ड कि रगड़ बर्दाश्त नहि हुई औऱ मेरेहाथ कि उंगलियां मेरी बुर पर्र पहुंच गई तोँ मेरे मुंह सें एक् मस्ती भरीअहह निकल पड़ी औऱ राज जैसे पागल होँ गय़ा। उसने चादर कों एक् तरफ फेंक दिया औऱ मुझे अपनी बाहों मे भर लिया।
" अहह बेटा यह क्याँ कररहा हैं तुँ? मे तेरीसगी मा हूं?? छोड़दे मुझे
मे उसकी बांहों मे कसमसाते हुए बोलि जबकि मैंने अपनेबदन कों पूरीतरह सें ढीला छोड़ दिया थां। राज नें अपने दोनोहाथ आगे लातेहुए मेरी चुचियों कों हाथो मे थाम लिया औऱ दबाने लगा। मेरे सीने मे मीठा मीठा दर्द होनेलगा औऱ एक् मर्द केँ हाथो कां एहसास अपनी मम्मों पऱ करते हि मे प्यास उठी औऱ सिसकते हुए बोलीं:"
" अहह उफ्फ नहि बेटा, मानजा मेरे बेटे, उफ्फ क्या बात है देख तुँ मेरा अच्छा बेटा हें,
इतना कहतेहुए मैंने अपनी गांड़ कों पीछे कि तरफ धकेल दिया तौ लन्ड गांड़ केँ छेद कों सहलाने लगा। राज़ नें जोर सें मेरी चूचियां कों मसल दिया औऱ बोला:'
" बंदकर अपनी बकवास, इतनीदेर सें मुझे क्यूं तड़पा रही थि अपनी गांड़ हिला हिलाकर!!
मम्मों ज़्यादा जोर सें मसले जाने सें मे दर्द सें कराहउठी औऱ सिसकते हुए बोलि:"
"अहहराज, उफ़्फ़ मे तोँ बस कपडे हि तोँ फैलारही थि बेटा, अहहहट जा नां। देख मे तेरीसगी मा हूं बेटा।
इतना कहकरमै अपनी टांगो कों पूरीतरह सें खोलते हुए हल्का सां झुक गई तौ लन्ड मेरी बुर सें जा टकराया। मेरे मुंह सें मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी। साहिल अपने लन्ड सें मेरी बुर रगड़ते हुए बोला:"
" अहह मां तेरी बुर कितनी गरम हें, देख नाँ कितनी भीग गई हैं, लन्ड चाहिए इसे रीमा। क्याँ तुँ अपने बेटे कां लन्ड अपनी बुर मे लेगी ??
मेरी हालत पूरीतरह सें खराब हौ गई थि। मे अपनी बुर कों लन्ड पऱ रगड़ते हुए बोलि:_
" एसआईआईआ उफ्फचुप कर बेशर्म अपनीमा सें ऐसीबात मतकर, कितना बिगड़ गय़ा हैं तूँ।
राज नें मेरी चूचियों नें निप्पल कों उंगली मे पकड़कर मसल दिया तौ मुहे अपनी चूचियो मे तेज दर्द कां एहसास हुआ औऱ मे दर्द सें कराहउठी औऱ बोलि:"
" म्म्म इतनीजोर सें मत भींच मेरी मम्मों, कुछ तोँ लज्जा कर, उफ़्फ़ बेटा।
राज नें प्रेम सें मेरी चूचियों कों सहलाना शुरुआत कर दिया औऱ बोला:".
" अहह माँ, अब तोँ ठीक हें नाँ, बोल नां अब देगी क्याँ अपनी बुर मुझे मां?
मुझेअब बहोत आनंद आँ रहा थां औऱ मे सिसकते हुए बोलीं:'
" अहह नहि दूंगी तुम को, स्स्स ओहमा, कितना बिगड़ गय़ा हैं, आवारा लडको केँ संग जोँ घूमता हें।
राज नें मुझे एक् झटका देकर अपनीतरफ पलटा दिया औऱ मेरी आंखो मे देखते हुए बोला:"
" अहह माँ आपकीशपथ मे सभीकुछ बंदकर दूंगा, बसकाम पर्र ध्यान दूंगा। कहो नां दोगी नां अपनी बुर मुझे?
इतना कहकर उसने अपने लन्ड सें मेरी बुर कि क्लिट कों रगड़ दिया तौ मस्ती सें मेरी आंखेबंद हौ गई औऱ मेरी बुर झड़ती चली गई औऱ मे मस्ती सें सिसकते हुए बोलीं:"
" अहहराज, दूंगी तेरी अपनी बुर, अपने बेटे कों नहि दूंगी तोँ औऱ किसे दूंगी।
इतना कहकर मैंने राज केँ होंठो कों चूसना शुरुआत कर दिया। राज भि मेरे होंठो पऱ टूट पड़ा औऱ मैंने जोश मे आतेहुए अपनीजीभ उसके मुंह मे घुसा दि तौ राज मेरीजीभ कों पकड़कर चूसने लगा। नीचे मेरे बेटे कां लन्ड मेरी बुर केँ होंठ चूमते हुए उससेजान पहचान बढ़ा थां।
जैसे हि हमारी किस टूटी तौ राज नें मुझे अपनी बाहों मे उठा लिया औऱ चारपाई पऱ पटक दिया औऱ मेरेऊपर लेट गय़ा। एक् बारफिन सें वोँ मेरे होंठो पर्र टूट पड़ा तौ मैंने अपनी बांहे उसकेगले मे लपेट दि औऱ उसके होंठ चूसने लगी। बारिश कि बूंदे अभि भि हल्की हल्की पड़रही थि औऱ हमारे शरीर कि आग कों औऱ ज़्यादा भड़का रही थि।
मेरी खुलीहुए टांगो केँ बीच लन्ड मेरी बुर कों सहलारहा थां औऱ मे अपनी बुर उठाउठा कर लन्ड पर्र रगड़रही थि। राज नीचे अाया औऱ मेरी एक् मम्मों कों अपने मुंह मे भर लिया तौ मेरे मुंह सें मस्ती भरीअहह निकल पड़ी
" अहहराज, हाय बेटा, कितना अच्छा हैं तुँ, चूसऐसे हि।
राज नें दूसरे हाथ सें मेरी मम्मों कों सहलाना शुरुआत किया तौ मे मस्ती सें कांपने लगी। मेरा एक् हाथ अपने आप् उसकेसिर पऱ पहुंच गय़ा औऱ मै उसकेसिर कों अपनी मम्मों पऱ दबाने लगी। जबकि दूसरे हाथ सें मैंने उसके लन्ड कों पकड़ लिया औऱ अपनी बुर पर्र रगड़ते हुए सिसकउठी
" अहहराज, कितना मोटा हैं यह बेटा, ओह क्याँ खाता हें तुँ ??
राज नें एक् बार मेरी आंखो मे देखा औऱ बोला:"
" कैसालगा तुम्हारी तरफ अपने बेटे कां लन्ड रीमा!
इतना कहकर उसने अपना पूरा मुंह खोलते हुए मेरी मम्मों कों आधे सें ज़्यादा अपने मुंह मे भर लिया तौ मे उत्तेजना सें पागल सि होँ गईं औऱ लन्ड कों जोर सें दबाकर बोलीं:'
" बहोत मोटा हैं, आह अच्छा तौ हें बहोत मगर अंदर केसे जाएगा ! हाय मेरी तोँ सोचकर हि हालत खराब हौ रही हैं बेटा!!
राज नें मम्मों चूसते चूसते हि अपनेहाथ कों जोड़कर बुर केँ आकार कां बनाते हुए इशारा किया कि चला जाएगा औऱ एक् उंगली उसमे अंदर घुसा दि तौ मे भि कहां पीछे रहने वाली थि, मैंने भि अपनी उंगली औऱ अंगूठे कों मोड़कर बुर कां आकारबना दिया औऱ उसमे एक् संगतीन उंगली घुसाने कि कोशिश करतेहुए इशारा किया कि अगरघुस भि गय़ा तोँ मेरी बुर कों फ़ाड़ देगा। इशारा करने केँ बाद मैने नें एक् झटके सें तीनो उंगली घुसा दि औऱ उंगली औऱ अंगूथा अलग हौ गय़ा। मे तड़पते हुए बोलि
" अहहराज अगरघुस भि गय़ा तोँ फाड़ देगायह मेरी बुर, आहकुछ कर, देख नाँ मेरी बुर कितनी गीली होँ गई हैं।
इतना कहकर मैंने अपनी उंगली कों बुर रस सें भिगो दिया औऱ राज कि आंखो केँ आगेकर दिया। बुर कां रस मेरी उंगली सें टपकरहा थां औऱ मै बोलीं;"
" अहहदेख नाँ क्याँ हाल होँ गय़ा हैं तेरीमा कि बुर कां राज, तुँ कुछकर नाँ बेटा। अहहमा मेरी बुर।
राज नें मेरी कि टांगो कों खोल दिया औऱ मेरी बुर कों देखा जौ पूरीतरह सें रस सें भीग चुकी थि।
इतना कहकर मैंने अपनी उंगली कों राज कों दिखाते हुए मुंह मे भरकर चूसना शुरुआत कर दिया तोँ राज उसका इशारा समझ गय़ा औऱ नीचे झुकते हुए अपने होंठो कों मेरी बुर सें चिपका दिया
" अहह भोसडी कां राज"
राज़ नें देखते हि देखते अपनीजीभ कों मेरी बुर मे उतार दिया औऱ जोरजोर सें चूसने लगा। मेरे मुंह सें मस्ती भरी सिसकारियां निकलरही थीं औऱ बारिश कि बूंदों केँ कारण मेरी आवाज़ बाहर् नहि जारही थि। मैंने राज केँ सिर कों अपनी टांगो केँ बीचदबा दिया औऱ नीचे सें अपनी बुर उसके मुंह पऱ उछालरही थि औऱ जोरजोर सें सिसकरही थि
" अहहराज, उफ़्फ़ मेरे राजा, ओह अहह तूँ तौ कमाल कां लड़का हें मेरीजान!!
राज नें जीभ केँ संगसंग अपनी एक् अंगुली भि मेरी बुर मे सरका दि तोँ मुझसे सें इतनी मस्ती बर्दाश्त नहि हुइ औऱ मे जोर सें सिसकते हुएझड़ गई औऱ मेरी बुर पानी पानी होँ गई।
राज नें मौके कि नजाकत कों समझते हुए लन्ड कों मेरी बुर पर्र टिका दिया तोँ मेरारोम रोम कांपउठा। मेरी बुर डर केँ मारे सिकुड़ सि गई।
राज पूरीतरह सें मेरेउपर छा गय़ा औऱ अपने दोनो हाथों सें मेरे कंधो कों थाम लिया औऱ मैंने अपने बेटे कि आंखो मे देखते हुए अपने मुंह सें ढेर साराथूक निकाल कर राज़ केँ लन्ड कों पूरीतरह सें अपनी बुर मे जाने लायकबना दिया। राज केँ इशारे पर्र मैंने लन्ड कों अपनी बुर केँ छेद पर्र रखा औऱ अपने होंठो पऱ जीभ फेरते हुए अपने बेटे कों इशारा किया तोँ राज नें अपनी पूरी ताकत सें एक् जोरदार धक्का लगाया औऱ उसी टाइम आकाश मे तेज बिजली कड़की औऱ मे डर केँ मारेराज सें चिपकती चली गई औऱ लन्ड मेरी बुर कों फाड़ते हुएजड़ तक घुस गय़ा। मे दर्द सें बेचैनी उठी औऱ मेरे नाखून राज कि कमर मे घुसते चलेगए
" अहहराज तेरीमा कि बुर, अहह स्स्स एसआईआई मारी क्या बात है ईश्वर
राज नें मेरी आंखो मे देखते हुएतेज तेज धक्के लगाने शुरुआत करदिए औऱ मुझे मेरी बुर फटतीनजर आईं औऱ मे दर्द सें कराहउठी
" अहहराज हाय थोडा प्रेम सें बेटा, तेरीसगी मा कि बुर हें, अहह शैतान नहि
राज नें बिना मेरे दर्द कि परवाह किए मेरी टांगो कों खोलकर अपने कंधे पर्र रख लिया औऱ बिनादेर किए मेरी बुर कों चोदना शुरुआत कर दिया
" अहह रीमा मेरी मां, अरे तेरी बुर कितनी गरम औऱ टाइट हैं, म्म्म केसेफस फसकर लन्ड घुसरहा हें!!
मे हर धक्के पर्र सिसकरही थि, मचलरही थि, उतावलापन रही थि। कुछ धक्कों केँ बाद मेरी बुर खुल गई तोँ अब मुझे दर्द सें ज़्यादा आनंदआने लगा औऱ मैंने राज केँ होंठचूम लिए। राज समझ गय़ा कि मे अब चुदाई कां आनंद लेँ रही हूं तौ उसनेजोर जोर सें धक्के लगाने शुरुआत करदिए। चारपाई पूरीतरह सें हिलरही थि औऱ बुर सें निकलती हुइ फ़चफच कि आवाज़ माहौल कों औऱ गरमकर कररही थि।
लन्ड औऱ बुर कां यह मधुर म्यूज़िक सुनकर मेरी आंखे मस्ती सें बंद होँ गई औऱ राजअब मजे सें मेरी बुर चोदरहा थां औऱ हर धक्के पऱ मेरी चूचियां हिलरही थि औऱ मे स्वर्ग कि सैरकर रही थि।
मे झड़ने केँ कगार पऱ पहुंच गई औऱ मेरी बुर मे कम्पन होनेलगा तोँ मैनेराज कों पूरी ताकत सें कस लिया औऱ सिसकउठी।
" अहहराज मेरी बुर गई, उफ़्फ़ चुद गई तेरीमा तेरे लन्ड सें।
राज नें अबफिन सें मेरी बुर कों जोरजोर सें चोदना शुरुकर दिया। हर धक्के पऱ लगरहा थां मानो वोँ लन्ड केँ संग स्वयं अंदर घुसना चाहरहा थां। तभी उसके मुंह सें भि अहह निकलने लगी औऱ उसने लन्ड कों पूरा बाहर् निकाला औऱ एक् तेज धक्का लगाया तौ लन्ड घप कि आवाज़ करताहुआ जड़ तक उतर गय़ा तोँ मुझे अपनी बच्चेदानी हिलती हुईँ महसूस हुई औऱ मै उससे कसकर लिपट गई औऱ उसके लन्ड नें मेरी बुर कों भरना शुरुआत कर दिया। वोँ मेरी चूचियों पऱ हि ढेर होँ गय़ा। मे उसकीकमर सहलाने लगी।
उसदिन केँ बाद सें आज तक मे रोज अपने बेटे सें चुदरही हूं औऱ उसने भि मेरीबात मानते हुए अपनी उल्टी सीधी हरकतबंद करतेहुए काम शुरुआत कर दिया औऱ जल्द हम् दोनों कि मेहनत रंगलाई औऱ हमने एक् नया अपनाघऱ खरीद लिया। बरसात कि वोँ हसीनरात मेरी ज़िन्दगी कों खुशियों सें भर गई मुझे खुशी हुइ कि मेरी बुर नें आखिर मेरे बेटे कों सही दिशा दिखाईं।
ख़त्म
बरसात की वो हसीन रात - maa beta – New Episode
bhay ji me sacch mai aapka बहुत बड़ा fan hoon aapki sabhi kahaniyan mene padhi joo incredible haen unki कोई kisi bi story से tulna नहीं की ja sakti ishwar kuchh khas logo ko hi khas tohfon से nawaajta h bhagwaan ne aapko yeh tohfaa दिया h की aapki imaginations kamaal की haen incredible haen bus थोड़ा dukh तब hotha h jaab ap update dene mai der kr dete hu aapki lekhani mai woh jaadu h की mann krta h की bus padhte hi raho और ऊपर से ap story aisi जगह par laa kr chhod dete hu jahan से kautuhal और badh jata h तब story khatam hu jaati h और update kaa intjaar बहुत बुरा hotha h tim katta hi नहीं की yeh सोच krr की aage क्या hoga bus isiliye woh sab bol दिया thaa एक baar phir से mafi chahta hoon dill ❤️ से और bhay apne कहा की apni kahani khud likh lo bhay me un khushkismat logon mai नहीं hoon jinhe imaginations kaa tohfa bhagwaan de एक baar phir से friend dill ❤️ से sorry मेरा matlab aapka dill ❤️ dukhana नहीं thaa
बरसात की वो हसीन रात - maa beta - Kahani ab aur interesting hogi
क्यूं शर्मिंदा कररहे होँ हर्षित भइया आप्। आपकेलिए तौ मैंने एक् किस्सा हि लिख दि। मुझे आपसेकोई नाराजगी नहि हें।
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