शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
सलमा नं सिर्फ जिस्म सें हसीन हैं बल्कि वोँ मन सें भि हसीन हैं। उसनेजिस तरह सें अपनी दासी सीमा कां पक्ष लिया औऱ उसे चोरी केँ इल्जाम सें बरी कराया, वो उसकी आंतरिक सुंदरता कों हि दर्शाता हैं।
वोँ एक् निर्भीक साहसी स्त्री हैं। वोँ अपने परिवार कि सबसे बुद्धिमान पर्सनैलिटी हैं। वोँ जब्बार केँ बगुले भगत विहेवियर सें परिचित हैं। उसका विक्रम पर्र क्रोधित होना, उसे बंदी बनाना कहीं सें भि गलत नहीं थां। कोई भि लड़की अपने पिता केँ कातिल पक्ष सें केसे प्यार कर सकती हैं ! उसका तत्कालीन रिएक्शन बिल्कुल उचित थां।
वैसे मुझेये भि संदेह हैं कि मेनका केँ पिता कि हत्यारा जब्बार हि होगा।
इधर मेनका देवी नें खानदानी तलवार सौंपने कि रस्म तौ पुरीकर दि मगरइस प्रक्रिया केँ दौरान वोँ अपने पुत्र पर्र मोहित भि हौ गई। उनकाअजय केँ संग कां अंतरंग पलभले हि कुछ हि लम्हा कां रहामगर मुझे विश्वास हैं इस अंतरंग घनिष्ठता कि नींव बहोत पहले हि सजधजकर हुइ होगी। अचानक सें इन्सेस्ट भावना जन्म नहीं लेती।
वैसेये ताज्जुब कि बात थि कि वोँ सुहागन परिधान मे हि अत्यधिक कामुकता फील करती हैं। ऐसा क्यूं हैं, पता नहीं।
सब एपसोड बहोत हि सुंदर थें।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग भाग यूनिक स्टार भइया।
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
भइयाकथा यहां तक आँ गई मगर अभि तक किसी हीरोइन चाहे राजमाता, मेनका याँ सलमा किसी कि लंड सें अच्छी पिटाई नहीं हुई, सीमा याँ सलमा कों भि जब्बार कां लंड लेना पड़े याँ रजिया कों विक्रम याँ जब्बार सें चुदाई करानी पड़े, ऐसी व्यवस्था कराओ औऱ यहअजय भि अपनेघऱ सें निकल केँ कुछ बहादुरी दिखाए सिर्फ सोचे नं, लड़े भि औऱ किसी कों चोदे याँ अपना बाईसेक्सुअल रूप दिखाकर कोई थ्रीसम करे
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
शहजादी सलमा वापिस महल पहुंच गई औऱ उसे देखते हि उसकी मम्मी नें चैन कि सांसली औऱ बोलि:"
" अच्छा हुआ बेटी आप् आँ गई, मुझे आपकी चिंता होनेलगी थि!
सलमा बेहदखुश थि क्योंकि वोँ पहलीबार अपनी ससुराल जोँ घूमकर आई थि औऱ वोँ रजिया केँ गलेलग गई औऱ उसका मुंहचूम लिया औऱ बोलि:"
" हम् बता नहीं सकतेआज हम् कितनी खुश हें, सालो केँ बाद हमनेआज खुलकर अपनी जीवन कों जिया हें अम्मी!
अनुभवी रजिया उसके द्वारा अपनागाल चूमे जाने सें मुस्कुरा उठी औऱ उसकेकान खींचती हुईँ बोलि:" लगता हें मेरी शहजादी अब जवान हौ गई हैं! कोई शहजादा देख्ना पड़ेगा आपकेलिए!!
रजिया कि बात सुनकर सलमा लज्जा सें लाल होँ गई औऱ अपने मुंह कों हाथो सें छुपा लिया औऱ विक्रम केँ बारे मे सोचकर मुस्कुरा उठी औऱ बोलि:"
" अम्मी आप् भि नाँ बस मुझे परेशान करनेलगी हैं! ऐसेकोई बोलता हैं क्याँ अपनी बेटी कों!
रजिया प्रेम सें उसकेसिर मे हाथ फेरती हुइ बोलि:
" बेटी जवान औऱ हसीन होँ तौ समझाना पड़ता हैं सलमा!चलो अब जल्द सें खानां खालो!
सलमा नें अपनी मम्मी केँ संग खानां खाया औऱ फिन सोने केँ लिए अपने कक्ष मे जानेलगी औऱ बोलीं:
" अम्मी कल तोँ मेला समाप्त हौ हि जायेगा! आपकी इजाजत होँ तोँ कलफिन सें मेलादेख आऊ क्याँ सीमा कों संग लेकर!
राजिया नें मुस्कुरा कर सहमति दे दि औऱ सलमा कां दिल खुशी सें झूमउठा औऱ वोँ अपने कक्ष कि तरफबढ़ गई!
अगलेदिन सुभह उदयगढ़ मे बेहद खुशी कां दिन थां क्योंकि आज राजमाता नें अजय कों तलवार देने केँ बादउसे राज्य कां सेनापति बनाने कां उत्सव थां!
चारोतरफ खुशी कां माहौल थां औऱ पूरा उदयगढ़ दुल्हन कि तरहसजा हुआ थां! विक्रम भि बेहदखुश थां औऱ वोँ चाहता थां कि किसीतरह सलमा भि आज केँ उत्सव कां हिस्सा बने तौ बहोत अच्छा रहेगा!
मेनका सोकरउठी औऱ अपने आपको रेशमी साड़ी मे लिपटी हुईँ देखकर उसकी आंखों केँ आगेरात कि घटनाएं घूमने लगी औऱ वोँ लज्जा सें गड़ीजा रही थि कि रात उसने उत्तेजना मे क्याँ कर डाला!अब वोँ अजय सें नजरे केसे मिला पाएगी यहसभी सोचकर वोँ बेहद परेशान हौ रही थि जिस कारणआज उत्सव कि खुशी मे भि उसेचैन नहींमिल रहा थां औऱ मेनका नहाने केँ लिए बाथरूम मे चली गई औऱ रोज कि तरह उसने सफेद साड़ी कों पहन लिया औऱ सजधजकर होनेलगी! अजय भि उठा गय़ा औऱ नहाकर रेडी होनेलगा! मेनका नें उसके खाने केँ लिएकुछ ताजेफल औऱ पराठे लिए औऱ हॉल मे टेबल पऱ रखदिए जहांअजय पहले सें हि उसका प्रतीक्षा कररहा थां औऱ दोनो बिनाकुछ बोले ब्रेकफास्ट करनेलगे औऱ मेनका कि नजरे लज्जा सें झुका हुईँ थि! अजय कि नजरेबीच बीच मे उसके चेहरे कों देखती औऱ अजयसोच रहा थां कि उसकी माँ केँ चेहरे पर्र कितनी मासूमियत औऱ शराफत हैं! उसे यकीन नहीं होँ पारहा थां कि रात वोँ काम वासना सें उबलती हुइ यही उसकी मम्मी मेनका थि याँ कोई दूसरी स्त्री मगर वोँ सच्चाई सें मुंह नहीं मोड़ सकता थां!
अजय नें आखिरकार चुप्पी तोड़ते हुएकहा:" मां आज तौ आपकेलिए बेहद खुशी कां दिन हें क्योंकि आपका बेटा सेनापति बनाने जारहा हैं औऱ आप् ऐसे दुःखी बैठी हुइ हैं!
उसकीबात सुनकर मेनका कों थोड़ी हिम्मत मिली औऱ नजरे नीचेकिए हुए बोलीं:"
" हान बेटा मे बहोत खुश हूं औऱ परमेश्वर सें प्रार्थना हैं कि आपकोखूब ताकत औऱ हिम्मत दे ताकि आप् अपना कर्तव्य निभासके!
अजय खड़ा औऱ मेनका कि तरफ बढ़ा तोँ मेनका कांपउठी कि पता नहि क्याँ होगामगर अजय उसके कदमों मे बैठ गय़ा औऱ उसकेपेर छूकर बोला:"
" माता मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए बस!फिन आप् देख्ना मे केसे उदयगढ़ कि तरफ उठने वालीहर नजर कों झुका दूंगा!
मेनका नें सुकून कि सांसली औऱ उसकेसिर पऱ हाथ रखकर आशीर्वाद देती हुई बोलीं:"
" पुत्र मेरा आशीर्वाद आपकेसंग हैं हमेशा! भगवान आपको शक्ति दे!
उसकाबाद अजय वापिस अपनीशीट पऱ आँ गय़ा औऱ ब्रेकफास्ट करने केँ बादअजय जानेलगा तौ मेनका नें उसे पीछे सें आवाज़ दि:" रुको पुत्र, ऐसे नहीं जाते हें!
अजयरुक गय़ा औऱ थोड़ी हि देर मे मेनका आरती कि थाली लेकर आँ गई औऱ उसनेअजय कि आरती उतारी औऱ बोलीं:"
" भगवान आपकोहर जंग मे विजयी बनाएअजय!
उसकेबाद उसनेअजय कों एक् हीरे कि अंगूठी दि औऱ उसकी उंगली मे पहनाते हुए बोलि:"
" आप् आपकेखास दिन पऱ आपकेलिए मेरेतरफ सें छोटा सां तोहफा पुत्र!
अजय गदगद हौ उठा औऱ बोला:" माता आज आपने मेरा जिंदगी सफलकर दिया! आपके जैसी माता मिलना मेरेलिए सौभाग्य कि बात हें!
उसकेबाद अजय वहां सें निकल गय़ा औऱ उत्सव कि तैयारी मे लग गय़ा! धीरे-धीरे धीरे-धीरे साम होनेलगी औऱ उत्सव कां शुभ मुहूर्त लगभग हि थां मगर युवराज विक्रम महल सें गायब थें औऱ गायत्री देवी कों उनकी चिंता होँ रही थि कि ऐसे वोँ बिना बताए कहां चला गय़ा औऱ युवराज तोँ मेले मे इस उम्मीद मे घूमरहा थां कि सलमाआए तोँ उसे भि उत्सव मे शामिल कियाजा सके! सलमाकल कि तरहफिन सें सीमा केँ संग निकली औऱ मेले मे पहुंच गई औऱ सीमा केँ संग घूमने लगी तोँ सीमा बोलीं:"
" क्याँ हुआ शहजादी? लगता हें आप् फिन सें आज विक्रम कों ढूंढरही हें मेले मे! कल बोलकर आई थि क्याँ उन्हे?
सलमा उसकीबात सुनकर मुस्कुरा पड़ी औऱ बोलि:"
" बोलकर तौ नहींआई थि मगर क्याँ पता वोँ भि आए औऱ हमेमिल हि जाए!
सीमा:"इतना ज़्यादा प्रेम करनेलगी हैं आप् कि बिना देखेचैन नहींमिल रहा हैं!
सलमा उसकाहाथ पकड़कर बोलीं" सारा संसार एक् तरफ औऱ दोस्त कां दीदार एक् तरफ !
सीमा उसकीबात सुनकर हंस पड़ी औऱ बोलीं:" इतनी बेताबी औऱ बेचैनी भि अच्छी नहीं होती शहजादी! कल हि तोँ आप् मिलकर आई हौ नां!
सलमा उसकीबात सुनकर आंखो मे प्रेम लिएहुए बोलीं:"
" इस बेताबी कां भि अपनाअलग हि मज़ा हैं सीमा! तुम् क्याँ जानो अपने महबूब कि मजबूत बांहों मे जोँ चैन खुशी मिलता हैं वोँ कहीं नहि मिलता!
उसकीबात सुनकर सीमाहंस पड़ी तोँ सलमा कों एहसास हुआ कि उसके मुंह सें क्याँ निकल गय़ा हैं तोँ वोँ उसका मुंहलाल होँ गय़ा औऱ सीमाउसे छेड़ते हुए बोलीं:"
" ओहो तौ यहबात हैं हमारी शहजादी विक्रम कि बांहों मे समाने मे लिए प्यास रही हैं!
सलमा कि नजरे लज्जा सें झुक गई औऱ उसकी सांसे तेज होनेलगी औऱ बोलीं;" चल बेशर्म कुछ भि बोल देती हें!
सीमा नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ उसकी सांसों केँ संग कम्पन कररही छातियों कों देखते हुए बोलीं:" वैसे आप् कबलग गई विक्रम केँ गले! थोडा बचकर हि रहना कहीं पकड़कर मसल नां दे आपको अपनी मजबूत बांहों मे!
सलमा उसकीबात सुनकर मचलउठी औऱ सोचने लगी कि तुम्हे क्याँ मालूम हैं कि मे युवराज केँ संग पूरी पूरी उसकी बांहों मे रह चुकी हूं औऱ मुंह नीचेकिए हुए हि बोलीं:" कलजब हम् मिलने गए थें तौ युवराज नें मुझेकस लिया थां अपनी बांहों मे!
सीमा:" अच्छा जी आप् तोँ बड़ीतेज निकली शहजादी! अच्छा कैसालगा थां आपको!
सीमा कि बात सुनकर सलमा नें अपनासिर उसके कंधे पर्र टिका औऱ बोलि:
" कुछमत पूछ सीमा! मर्द कि बांहों मे जोँ चैन मिलता हैं वोँ कहीं नहि मिलता!
सीमा उसकीबात सुनकर मुस्कुरा दि औऱ उसके कंधो कों पकड़कर बोलीं:"
" केवल बांहों मे भरा हि थां याँ औऱ भि कुछ किया थां शहजादी?
सलमा उसकीबात सुनकर कांपउठी औऱ बोलि:"
" कितनी बेशर्म होँ गई आप् ? युवराज ऐसे नहीं हैं सीमा! वोँ तौ बेहद अच्छे औऱ प्यारे हैं!
सीमा उसकीबात सुनकर हंस पड़ी औऱ उसकाहाथ पकड़कर बोलीं:" मुझेपता हैं कि मर्द केसे होते हें, देख्ना अगलीबार आपको केसे रगड़ देंगे युवराज अपनी बांहों मे भरकर!
उसकीबात सुनकर सलमा कां मुंह लज्जा सें लाल होँ गय़ा औऱ बोलीं:" रुकजरा तेरी अभि तमीज सिखाती हूं!
इतना कहकर उसने सीमा कां हाथ पकड़ लिया औऱ अपनीतरफ खींचने लगी तौ उसे एक् आवाज़ सुनाई पड़ी
" क्यूं बेचारी सीमा केँ पीछे पड़ी हौ शहजादी! ऐसा क्याँ कर दिया इसने?
इस आवाज़ कों सलमा नींद मे भि पहचान सकती थि क्योंकि यह प्रियतम विक्रम कि आवाज़ थि औऱ सीमा बोलि:
" देखो नां युवराज केसे सलमामुझ मासूम पर्र जुल्म करती हैं!
सलमा नें उसेजोर सें अपनीतरफ खींचा औऱ बोलीं:"
" मासूम औऱ तुम्! आज मे तुम को छोड़ने वाली नहींहु!
विक्रम:" जरा हम् भि तोँ जाने कि इसनेऐसा क्याँ गुनाह कर दिया?
विक्रम कि बात सुनकर सलमा शर्मा गई क्योंकि वोँ केसे युवराज सें बोलती कि सीमा कां रही थि कि युवराज आपको अपनी मजबूत बांहों मे भरकर रगड़ देंगे औऱ यह सोचकर सलमा लज्जा सें पानी पानी होँ गई औऱ सीमा उसका आनंद लेती हुई बोलीं:"
" पूछिए नाँ युवराज इनसे?
विक्रम केँ कुछ बोलने सें पहले हि सलमा नें उसकाहाथ छोड़ औऱ बोलि:" घऱ जाकर तुम्हें सबक सिखा दूंगी ध्यान रखना!।।
विक्रम उनकी बातेसुन करहंस पड़ा औऱ बोला:" अच्छा सुनोआज उदयगढ़ मे उत्सव हैं क्योंकि मेरे प्यारे साथी कों सेनापति बनाया जारहा हें! मे आपको हि ढूंढरहा थां आइए मेरेसंग इस उत्सव मे चलिए!
सीमा औऱ सलमा दोनो उसकेसंग चल पड़ी औऱ राज दरबार लगाहुआ थां औऱ हॉल भीड़ सें खचाखच भराहुआ थां औऱ युवराज कों देखते हि प्रजा उसकीजय जयकार करनेलगी तोँ विक्रम बोला:"
" मेरी नहीं बल्कि सेनापति अजय कि जय जयकार कीजिए आप्!
विक्रम आगेबढ़ कर कुर्सी पर्र बैठ गय़ा औऱ सीमा औऱ सलमा केँ लिए विक्रम नें भीड़ केँ बीच हि कुर्सी कि व्यवस्था कर दि थि औऱ सलमा औऱ विक्रम बीचबीच मे एक् दूसरे कों निहार रहे थें औऱ सलमामंद मंद मुस्कुरा रही थि!
दरबान:" आप् सबकी उपस्थिति मे महाबली अजय कों उदयगढ़ कां सेनापति बनाया जारहा हें औऱ इसकेलिए राजमाता गायत्री देवी उन्हे मुकुट पहनाकर इस परंपरा कां मुहूर्त करेगी!
गायत्री देवी नें अपनीसीट सें खड़ी हुइ तौ विक्रम औऱ सलमा कि आंखे मिली मानोपूछ रही हौ कि क्याँ यही हमारी माता हें तौ विक्रम नें इशारे सें सहमति दे दि औऱ सलमाखुश होँ गई! अजयआगे बढ़ा औऱ राजमाता नें एक् मुकुट उसकेसिर पऱ पहना दिया तौ जनताअजय जीजय जयकार करनेलगी औऱ अजय नें झुककर राजमाता केँ पांवछुए तोँ बोला:" मे अपने कर्तव्य कां पालन करने केँ लिए अपने प्राणों कि आहुति देने सें भि पीछे नहि हटूंगा!
उसकेबाद राजमाता नें उसे आशीर्वाद दिया औऱ अजय नें अपनी माता मेनका केँ पांवछुए तोँ मेनका नें उसे आशीर्वाद दिया औऱ थोड़ी देर केँ बाद उत्सव खाने पीने कां दौरचल पड़ा औऱ सीमा औऱ सलमा दोनो कों विक्रम नें अच्छे सें खानां खिलाया औऱ उसकेबाद लगभगरात केँ 10 बजे दोनो वापिस सुल्तानपुर कि तरफलौट पड़ी! विक्रम उन्हे छोड़ने केँ लिए सुल्तानपुर कि सीमा तक आया औऱ उसकेबाद दोनोमहल मे आँ गई तोँ सीमा बोलि:"
" आपको कैसालगा उत्सव शहजादी ?
सलमा:" अच्छा थां औऱ नए सेनापति कों जिम्मेदारी देना बड़ीबात हैं क्योंकि उसकी आंखो उम्र अभि बेहदकम हैं!
सीमा:" उम्रकम हें तोँ क्याँ हुआमगर आप् उसके इरादे देखिए कितने बुलंद हें! मुझे तोँ अच्छा लगा बहोत, लोग बातेकर रहे थें कि अजय कां परिवार राज परिवार कां सबसे वफादार परिवार रहा हैं!
सलमा:"हान यहबात तोँ हें! मैने भि उसके पूर्वजों केँ बारे मे सुना हें औऱ अच्छा लगा! जैसे उदयगढ़ मे अजय कां परिवार हें तोँ वैसे हि यहां आप् हौ सीमा ! हमेशा मेरासंग देती होँ ठीक वैसे हि जैसेअजय युवराज कां संग देता हें हर मुश्किल मे!
सीमा उसकीबात सुनकर हल्की सि मुस्कान दि औऱ बोलि:"
" मुझे वफादार बोलने केँ लिएसच मे आपका बेहद शुक्रिया शहजादी! मेरायह जिंदगी आपको समर्पित हैं औऱ मेरी मृत्यु भि आपकेलिए हि होगी!
सलमा:"ऐसी बाते नहीं बोलते! हम् दोनो जिदंगी भरऐसे हि अच्छे सहेलियां बनकरसंग रहेंगे औऱ एक् अच्छा सां लड़का देखकर तेरी विवाह भि करवा दूंगी समझीकुछ!
सलमा कि बात सुनकर सीमा कि आंखो केँ आगेअजय कां चेहरा आँ गय़ा औऱ बोलीं:"
" जी शहजादी! अच्छा चलोअब आप् आरामकरो, रात बहोत हौ गई हैं!
इतना कहकर सीमा इसके कक्ष सें बाहर् निकल गई औऱ सलमा सोचने लगी कि कल वोँ कल्लू सुनार कों सें पता करेगी कि कौन हैं जोँ सीमा केँ खिलाफ साजिश कररहा हैं!
दूसरी तरफ जब्बार औऱ राधिका पलंग पऱ पड़ेहुए थें औऱ राधिका बोलि:"
" सीमा कों फसाने वाला प्लान काम नहींआया! हमेकुछ दूसरा तरीका सोचना होगा!
जब्बार:" तुम् चिंता मतकरो, मेरेपास व्यक्ति औऱ तरीको कि कमी नहि हैं!
राधिका:" जबऐसा हें तोँ आप् राज गद्दी पर्र क्यूं नहि बैठ जाते होँ ? आपका विरोध करने वालाकोई नहि हैं राज्य मे अब!
जब्बार:" बातठीक हें मगर जोँ काम प्रेम सें होँ जाए उसकेलिए खून खराबा ठीक नहि होगा, फिन अभि राज्य मे कईऐसे वफादार योद्धा हें होँ हमेशा राज परिवार केँ वफादार रहेंगे! हम् उन्हे खोना नहि चाहते क्योंकि आगे चलकरवही हमारे काम आयेंगे!
राधिका:" मगरआगे चलकरवही आपके खिलाफ हौ गए तौ फिन क्याँ होगा?
जब्बार: " कुछ नहीं होगा क्योंकि मेरेपास एक् ऐसा मोहरा हें जौ वक़्त आने पर्र इस्तेमाल करूंगा औऱ उसकेबाद राज परिवार स्वयं हि राजा राजपाठ मुझेदे देगा!
राधिका कों उसकीबात सुनकर हैरानी हुईँ औऱ बोलीं:"
" आप् तोँ बड़ेतेज होँ, मतलब शतरंज केँ सारे मोहरे आपके इशारों पऱ कामकर रहे हैं! कौन हैं वोँ आपका मोहरा ?
जब्बार:" इतनी जल्दठीक नहीं होती, सही समयआने पऱ सबकोपता चल जायेगा!
राधिका कुछ नहीं बोलीं औऱ थोड़ी देर केँ बाद दोनो एक् दूसरे सें गुत्थम गुत्था होनेलगे! वहीं सलीमरोज कि तरह जब्बार कि पत्नि शमा केँ संग थां औऱ शमा नें आजफिन सें उसका लन्ड चूसकर उसे आनंद दिया थां औऱ सलीम कों पूरीतरह सें अपनेबस मे कियाहुआ थां! सलीम इतनाभोग विलासी बन गय़ा थां कि उससेशमा केँ अलावा कुछनजर नहींआता थां जिसका फायदा जब्बार जमकरउठा रहा थां औऱ एक् एक् अपने विश्वास पात्रों कों राज्य मे महत्त्वपूर्ण पददेरहा थां ताकि जरूरत पड़ने पऱ उनकी सहायता सें तख्ता पलटसके!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Continue reading for full story
यह बाजीराव-मस्तानी बाला kahani हें,, जाहां बाजीराव हिंदु , मस्तानी मुसलिम सालमा फिलहाल बिक्रम केँ "uncut" लौड़ा अंदर लेने केँ लिये बेकरार हें
बहोत ग़ज़ब ऐसा खूबसूरत विवरण आपकी लेखनी कों सलाम सागर मे गहरेपैठ कर आप् मोती लेँ करआते हें आपकी लेखनी मे कलात्मकता हैं कृपया लिखते रहें
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