दीदी ने चखाया अपना गीलापन - दीदी की चुत - Full Story Part 1
इससभी कि शुरुआत दोसाल पहले हुईँ, जब मे 20 साल कां हुआ थां, औऱ मेरी सुधा दिदी 25 साल कि।
सुधा दिदी औऱ मे हम् दोनों बचपन सें हि एक् संग बड़ेहुए थें। तोँ हम् दोनों भइया-बेहन कि तरह नहि बल्कि दोस्तों कि तरह रहते थें। हम् दोनों केँ बीच मे कभीकोई हिचक नहि रही। वोँ अक्सर अपनेरूम मे बिना ब्रा केँ घूमती, औऱ कभी-कभी तौ मात्र एक् टाइट टी-शर्ट पहनकर मेरे सामने आँ जाती।
रात कों भि अक्सर वो मेरेपास हि सो जाया करती थि, औऱ हम् दोनों कों कोई भि कुछ नहि कहता। क्योंकि हम् भइया-बेहन थें, औऱ सभी कों लगता थां कि हम् दोनों मे वैसाकुछ नहि होँ सकता।
रात कों अक्सर हम् दोनों ढेर सारी बातें किया करते। तब सुधा दिदी कां एक् बॉयफ्रेंड भि थां, तौ वो अक्सर उसके बारे मे बताया करती। औऱ मे चुप-चाप उसकी सारी बातें सुन लेता। औऱ भि कई सारी चीजें थीं, जिस पऱ हम् लोग बातें किया करते थें। जैसे उसके पहले किस्स कां अनुभव, याँ किस स्थान उसने पहलीबार अपने बॉयफ्रेंड कां हाथ पकड़ा थां। वो मज़े लेकर मुझे बताती औऱ मे मुस्कराते हुएसभी सुनता।
आगे बढ़ने सें पहले मे आपको सुधा दिदी केँ बदन केँ बारे मे बताता हूं, जैसा मैंने देखा औऱ महसूस किया। वोँ एक्-दम असली औऱ मादक हुस्न कि मिसाल थि। उसकी त्वचा हल्की गेहुंआ, मगर बेहदसाफ औऱ रसीले, जैसे छूते हि उंगलियां उसमें धंस जाएं। जब वोँ बालऊपर बांधती थि, तोँ उसकी गर्दन सें लेकर कंधे तक कि त्वचा इतनी चिकनी दिखती कि नज़रें हटाना मुश्किल होता। उसकी कॉलरबोन उभरी हुइ थि, औऱ गर्दन केँ नीचे कि दरार, उसकेडीप नेकटॉप मे झलकती थि, जैसे किसी खजाने कि पहलीझलक।
उसकी छाती बड़ी, गोल औऱ भरी हुई थि। कोई दिखावे वाली फिगर नहि, बल्कि असली औऱ मांसल उभार, जिनमें वज़न थां। जब वो बिना ब्रा केँ चलती थि तोँ उनकीहर थरथराहट दिल कों झकझोर देती थि। टाइट टी-शर्ट केँ नीचे उनके आकारसाफ उभरते थें, औऱ कभी-कभी तौ निपल्स कि नोकें तक उभरी हुईँ नज़रआती थि। जब वोँ टाइट लेगिंग्स पहनती, तौ उसकी हिप्स कपड़े केँ अंदर सें ऐसे उभरते जैसे उन्हें छू लेना बहुत नहि, बल्कि पकड़ना ज़रूरी होँ।
औऱ उसकी बुर, जब वो बिना पैंटी केँ सलवार याँ ढीली नाइटी मे होती थि, तौ पैरों केँ बीच कां उभारसाफ नज़रआता थां। कपड़ा चिपकता औऱ उसके अंदर कि गहराई औऱ हल्की रेखा तक दिख जाती थि। वो हिस्सा उसके पूरे जिस्म कां सबसे ज्यादा उकसाने वाला हिस्सा थां। हर हलचल मे अपनी मौजूदगी कां अहसास कराता हुआ, जैसे वोँ स्वयं मेरेलिए आहिस्ता खुलरहा होँ।
एक् रात हम् दोनों बहोत देर तक बातें करतेरहे क्योंकि अगली सुभह संडे थां, औऱ हम् दोनों कों भि काॅलेज नहि जानां थां।
“क्याँ तुँ अभि भि वर्ज़न हैं, गोलू?” उन्होंने हंसते हुए पूछा। हम् दोनों बेड पऱ एक्-दूसरे केँ सामने लेटेहुए बातें कररहे थें औऱ कभी-कभी मेरी नज़र उनके क्लीवेज पऱ जाती, जौ डीपनेक वाले टी-शर्ट केँ अंदर सें साफदिख रहा थां।
मैंने सिर हिलाकर हामीभरी। उन्होंने मुझे हंसकर मासूम नज़रों सें देखा। उनके चेहरे पऱ एक् हल्की शरारती मुस्कान थि, जैसे उन्हें पहले सें पता होँ। उनकी आंखें चमकरही थि, गालों पऱ हल्की लालीउभर आई थि, औऱ होंठों केँ कोनों मे वोँ नर्म मुस्कान थमी हुईँ थि, जौ किसी अनकहे राज़ कां इशारा करती हैं। उनके चेहरे पर्र एक् जानी-पहचानी मस्ती थि, जैसे वोँ मुझे छेड़ना चाहती हों, मगर किसी सीमा कों भि समझती हौ।
मैंने आगे जोड़ा, “औऱ आप् दिदी?”
“नहि गोलू, ” उन्होंने कहा, “मे अब वर्ज़न नहि रही। ”
मे कुछदेर शांत बैठारहा, फिन एक् बार वो हौले सें बोलि, “क्याँ अब तुँ अपनी बेहन कों जज करेगा, क्योंकि वो वर्ज़न नहि रही?”
मैंने सिर हिलाकर मना दिया औऱ कुछदेर तक हम् दोनों शांतरह गए। फिन कुछदेर बाद मैंने पूछा, “वो एहसास कैसा होता हैं दिदी? मतलब क्याँ आप् बता सकती होँ कि वो सभी चीजें केसे करते हें?” वो उठकरबैठ गई। मे भि उनके सामने बैठ गय़ा।
“तुये जानना चाहता हैं कि सेक्स केसे करते हें? याँ फिन मैंने सेक्स केसे किया?”
मैंने सिर हिलाकर कहा, “दोनों। ”
सुधा दिदी नें गहरी सांसली औऱ धीरे-धीरे सें बोलि, “ठीक हैं… मगर जोँ मे बताने वाली हूं, वोँ मात्र सुनने केँ लिए नहि हैं, समझने केँ लिए भि हैं। ”
वो मेरेपास आई औऱ धीरे-धीरे सें मेरे हाथों कों अपने हाथों मे लिया। उनकी उंगलियां मेरी हथेलियों पऱ फिसली, फिन उन्होंने अपना चेहरा थोडा औऱ लगभग किया।
“पहलीबार जब मैंने अपने बॉयफ्रेंड कों अपनेऊपर महसूस किया थां नाँ, तौ पूरा शरीर जैसे सिहरउठा थां। उसके होंठजब मेरेगले केँ पास पहुंचे, तोँ ऐसालगा जैसेकुछ गरम-सां अंदर तक उतर गय़ा हौ। फिनजब उसने मेरी ब्रा हटाई औऱ मेरे निपल्स कों अपने होंठों सें छुआ। वोँ अहसास शब्दों मे नहि बताया जा सकता। ”
वोँ मुझे देखते हुए मुस्कराई। “उसकी उंगलियां जब मेरी बुर केँ अंदर गई, तब मे हौले सें कांपी थि। पहले थोड़ी जलन हुई थि, फिन एक् मीठीकसक सि… जैसेकोई भीतरी तालेखुल रहेहों। उसनेजब पहलीबार अपना लन्ड मेरे अंदर डाला, तब मेरा पूरा जिस्म तन गय़ा। वोँ आरामसे आगे बढ़ता रहा… औऱ मे हरउससमय कों महसूस करतीरही। उसरात, मे पूरीतरह उसकी होँ गई थि। ”
वोँ मेरी आंखों मे देखते हुएकुछ समयचुप रहीं, फिन अपनी सांसें गहरीकर ली। “उसकेहर धक्का, हर स्पर्श मेरेबदन मे गूंजता थां। मे उसके नीचे थि, पूरीतरह खुली हुइ, औऱ वोँ मेरे अंदर। उसने मुझेऐसे भर दिया थां जैसे मे उसी केँ लिएबनी थि। मेरी टांगें उसके कूल्हों केँ चारों तरफ लिपटी हुइ थीं, औऱ मे हर लम्हा उसे औऱ गहराई तक खींचना चाहती थि। ”
“जब उसने मुझे एक् हाथ सें पकड़ा औऱ मेरे निपल्स कों दबाना शुरुआत किया, तोँ जैसे पूरेबदन मे एक् झनझनाहट दौड़ गई। उसकी उंगलियों कि पकड़ मे एक् मजबूती थि, एक् प्यास थि। हरबार जब उसकी उंगलियां मेरे निपल्स केँ चारों ओर घूमती, तोँ मेरा जिस्म स्वयं-ब-स्वयं औऱ भि सख्त हौ जाता थां। ”
मे बिनापलक झपकाए सुनरहा थां। दिदी कि बातों मे एक् अलग हि गर्मी थि, जौ मेरेबदन कों अंदर तक भिगोरही थि। मेरी सांसें तेज़ होँ गई थि, औऱ मेरेबदन मे कुछ अजीब सां उबाल आँ रहा थां। मेरा लन्ड अपनी पूरी सख्ती केँ संग खड़ा हौ चुका थां औऱ मैंने धीरे-धीरे सें अपनी पैंट कों एडजस्ट किया। दिदी नें यह देखा, थोड़ी देरबाद उन्होंने मेरी कलाई कों धीरे-धीरे सें छोड़ा औऱ फुसफुसाई, “गोलूये ग़लतबात हैं। अपनी दिदी कि किस्सा सुनकर स्वयं कों सख्त नहि करना चाहिए। ”
मे चुप थां, मगर मेराबदन औऱ मेरी नज़रें कुछ औऱ कहरही थि। दिदी नें एक् लम्हा मेरी आंखों मे झांका, फिन पलंग पऱ पीठ केँ बललेट गई औऱ हल्के सें बोलीं, “अबसोजा। ”
मे धीरे-धीरे सें उनकेपास लेट गय़ा, मगर नींद तौ बहोत दूर कि बात थि। मेरादिल तेज़ी सें धड़करहा थां, औऱ दिदी कि मौजूदगी मेरेहर होश पऱ छाई हुईँ थि।
उसकेबाद मेरे अंदर बहोत कुछबदल गय़ा। मे सुधा दिदी कों उसतरह देखने लगा, जिस तरह पहलेकभी नहि देखा। अब मे उसे केवल दिदी नहि, एक् स्त्री कि तरह देखने लगा थां। एक् ऐसी स्त्री जिसे मे हरसमय महसूस करना चाहता थां। मे जान-बूझ करउसे देखने केँ बहाने ढूंढने लगा।
जब वो नहाकर बाहर् आती, तोँ मे बाथरूम केँ दरवाज़े केँ पास जाकर उसके भीगे जिस्म कों झांकने कि कोशिश करता। कभी उसके कमरे मे जाते वक़्त उसकी अलमारी मे सें उसके अंडरगारमेंट्स ढूंढता, उन्हें छूता, सूंघता औऱ फिन चुप-चाप रख देता। उसकी सलवारों कि सिलवटों मे उसकी खुशबू बस चुकी थि औऱ मे उसे छूते हि सिहर उठता थां।
वोँ जब बेखबर होकर लेटी रहती याँ फोन मे मग्न होती, मे कोने सें बैठकर उसकी टांगों केँ बीच कि हरकतों कों देखता। कईबार जब वो झुकी होती याँ कुछउठा रही होती, मे उसके हिप्स कों ऐसे घूरता जैसे वोँ किसी खजाने कि तरहहों।
अब मे जब भि दिदी केँ संग लेटता, जान-बूझ कर अपनी टांगें उनके जिस्म सें छुआता, जैसे नींद मे करवट लेँ रहा हूं। कईबार मेराहाथ उनकीकमर याँ हिप्स कों छू जाता। कभी हल्का सां टच, कभी थोड़ी देररुक कर।
रात कों जब वोँ करवट लेकर सोती, तौ मे पीछे सें धीरे-धीरे सें खिसककर उनसेसट जाता। मेरा लन्ड उनके हिप्स केँ पास सख्त होकरटिक जाता औऱ मे सांसरोक करउस अहसास मे खो जाता। अगर कभी उनकाहाथ मेरीओर आता, मे स्वयं कों ढीलाकर लेट जाता, जैसेकुछ पता हि नां होँ।
आरामसे ये मेरीआदत बनतीजा रही थि। जान-बूझ कर छूना, फिन मासूम बन जानां। हररात मे उन्हें ऐसे छूने कि कोशिश करता जैसे नींद मे गलती सें होँ गय़ा होँ, मगर अंदर हि अंदर मेरी मंशाकुछ औऱ हि होती थि।
एक् रात मे औऱ अधिक लगभग खिसक गय़ा। मेराहाथ उनकीकमर सें सरकते हुए आहिस्ता उनके सीने तक पहुंच गय़ा। मैंने बहोत धीमे सें अपनी हथेली उनकी एक् छाती पऱ टिका दि, नर्म, भारी औऱ गरम। मे अपनी उंगलियों सें उनकी गोलाई कों महसूस करनेलगा, कभी हल्के सें दबाते हुए, जैसेकोई नींद मे करवट लेता हौ औऱ हाथ कहीं अनजाने मे टिकजाए।
फिन मेराहाथ नीचे फिसलने लगा, उनकीपेट सें होताहुआ जांघों केँ बीच कि तरफ। मैंने उंगलियों कों थोडा औऱ बढ़ाया, औऱ फिन धीरे-धीरे सें उनकी पैंटी केँ ऊपर सें उनके सबसे निजी हिस्से कों छू लिया। हल्के सें, जैसे नींद मे हाथभटक गय़ा होँ। मेरादिल ज़ोर सें धड़करहा थां, मगर मे अपने चेहरे पऱ एक् नींदभरी मासूमियत बनाएरहा, जैसेकुछ भि जान-बूझ कर नहि हुआ हौ।
मे हरबार ऐसा करता, औऱ फिन जल्दी हाथ वापस खींच लेता, जैसे अचानक जागकर संभल गय़ा होँ। मगरहर रात मेरी हिम्मत औऱ बढ़ती जारही थि, औऱ मेरा लालच भि।
too be continued
दीदी ने चखाया अपना गीलापन - दीदी की चुत – New Episode
Update 2
सेक्स किस्सा अबआगे-
एक् दिनजब मे काॅलेज सें घऱआया तौ पाया कि पूराघऱ खाली थां, बस सुधा दिदी सोफे पऱ बैठकर टेलीविज़न पर्र कुछदेख रही थि। मुझे देखते हि उन्होंने टेलीविज़न कों बंदकर दिया औऱ मुझे अपनेपास बैठने कां इशारा किया।
मे जाकर उनकेपास बैठ गय़ा।
“गोलू हमारा नाता क्याँ हैं?” उन्होंने सख्त आवाज़ मे पूछा।
पहले तोँ मे कुछ नहि समझा। फिन बाद मे हौले सें कहा “भइया-बेहन कां। आप् मेरी दिदी हौ। ”
“तोँ तुम् अपनी दिदी केँ प्रायवेट पार्ट कों रात मे क्यूं छूरहे होँ?” उन्होंने पुछा। उनकी आवाज़ मे सख्ती थि, मगर क्रोध नहि थां। जैसे वो सच-मुच जानना चाहती हौ कि मे उसतरह क्यूं कररहा थां।
मैंने घबराकर कहा। “क्याँ दिदी? मे कुछसमझ नहि रहा। ”
“तूँ भोलामत बन गोलू। ” उन्होंने उसी आवाज़ मे कहा। “मे क्रोध नहि, बसबता कि तुँ ऐसा क्यूं कररहा हैं?”
मे थोड़ी देरचुप रहा, फिन धीमे सें बोला, “दिदी… जब आपनेउस रात अपनी सेक्स किस्सा बताई थि नाँ… बसउसी दिन सें मे स्वयं कों रोक नहि पारहा। मे बसउस अहसास कों महसूस करना चाहता हूं… आप् जिसतरह महसूस कररही थि… मे भि चाहता हूं कि आप् मेरी सांसों केँ पासहों… मेरेबदन पऱ महसूस हों…”
मैंने उनकीओर देखते हुए धीमे सें जोड़ा, “मे चाहता हूं कि आपकेहाथ… आपके होंठ… आपका स्पर्श मेरे लन्ड पर्र होँ… जैसे आपनेउस लड़के कों महसूस किया थां… मे भि आपकी छुअन चाहता हूं। ”
मैंने येसभी बहोत धीमे सें कहा, मगर मेरे अंदर कि आगअब थमने वाली नहि थि।
उन्होंने कुछदेर मुझे हैरान होकर देखा, मानोकुछ सूझ हि नहि रहा होँ। फिनकुछ देरबाद कहा, “तुँ अपनेडिक पऱ मात्र मेरा स्पर्श चाहता हैं याँ फिन मेरेसंग सेक्स करना चाहता हैं?”
मैंने घबराते हुए कहां, “मुझे नहीं मालूम मे बस चाहता हूं मेरा लन्ड आपकोछुए। ”
उन्होंने मेरीबात कों ध्यान सें सुना, फिन हल्के सें मुस्कुराई। “गोलू, तुँ अभि छोटा हैं… औऱ मे तेरी दिदी भि हूं… मे तेरीमना नहि करूंगी कि तूँ मुझे महसूस मतकर…मगर सेक्स… वोँ मे नहि कर सकती। ”
मे कुछकह नहि सका, बस उनकाहाथ अपने लन्ड केँ ऊपर महसूस करना चाहता थां। उन्होंने समझदारी सें मेरीबात कों समझा, औऱ अपनाहाथ धीरे-धीरे सें मेरी पैंट केँ ऊपररखा। मे कांपउठा… वोँ बसकुछ लम्हा केँ लिए थां… मगर वोँ एहसास, मेरे शरीर मे आगलगा गय़ा।
फिन उन्होंने कहा, “तूँ अपने सारे कपड़े उतारदे औऱ सोफे पऱ लेटजा। ” उनकीइस लाइन नें जैसे मुझे सुन्न कर दिया। मेरे जिस्म मे एक् तीव्र झनझनाहट दौड़ गई। मेरादिल तेजी सें धड़कने लगा, औऱ एक् समय कों यकीन नहि हुआ कि दिदी नें सच मे ऐसाकहा थां। मे उनकीओर देखने लगा। वोँ बिल्कुल गंभीर थि, उनकी आंखें मेरी आंखों सें टकरारही थि, कोई मुस्कान नहि, कोई मज़ाक नहि।
मैंने धीरे-धीरे सें सिर हिलाया, फिन चुप-चाप अपने कपड़े उतारने लगा। एक्-एक् कर मैंने अपनी टी-शर्ट, फिन पैंट औऱ अंत मे अंडरवियर तक निकाल दिया। मेरा लन्ड सख्त होँ चुका थां, औऱ हवा लगते हि औऱ भि तन गय़ा थां। मे जैसे-जैसे कपड़े उतारता गय़ा, दिदी कि नज़रें मेरेबदन पऱ बनीरही। वोँ कुछ नहि बोलि।
मैंने कपड़े एक् ओररखे औऱ धीरे-धीरे सें जाकर सोफे पऱ बैठ गय़ा, फिनलेट गय़ा। मेरी धड़कनें तेज़ थि, जिस्म गरम हौ चुका थां औऱ मन मे अजीब सि घबराहट औऱ उत्तेजना दोनों संगचल रहे थें। मैंने आंखें बंदकर ली, मगर अंदर हि अंदर दिदी केँ अगलेकदम कां प्रतीक्षा कररहा थां, बेसब्री सें।
“अपनी आंखें बंदमत कर गोलू, ” उन्होंने कहा। मैंने आंखें खोली, तौ देखा दिदी आरामसे अपनेटॉप केँ नीचेहाथ डालरही थि। उन्होंने धीरे-धीरे सें अपनी टी-शर्ट ऊपर खींची औऱ उसे उतार दिया। फिन उन्होंने नीचे कि ओरहाथ लें जाकर अपनी पजामा भि उतार दि। अब वोँ बस ब्रा औऱ पैंटी मे मेरे सामने खड़ी थि। उनका शरीर हल्की पीली रोशनी मे औऱ भि अधिकचमक रहा थां। उनकीभरी हुइ छाती ब्रा केँ अंदर सें उभरी हुइ, औऱ निचले हिस्से कि गोलाई पैंटी केँ कपड़े सें ढकी, मगर बेहद साफ-साफ उभरी हुई।
वोँ कुछदेर वैसे हि खड़ीरही, फिन मेरीओर देखती हुई बोलि, “अबबस लेटारह औऱ कुछ भि मतबोल। ”
फिन वोँ आरामसे मेरीओर बढ़ी, औऱ मेरेपास आकर हल्के सें झुक गई। उन्होंने अपने हाथों सें बैलेंस बनाएरखा, ताकि उनका पूरा जिस्म मुझ पऱ नां पड़े, मगर उनका चेहरा अब मेरे लन्ड केँ बेहद लगभग थां। उन्होंने अपने होंठ मेरे लन्ड केँ पासलाए औऱ हल्के सें उस पर्र एक् चुम्बन दिया।
मैंने करवट लेतेहुए धीरे-धीरे सें कहा, “दिदी… क्याँ मे आपकेऊपर नहि लेट सकता? मुझे आपका पूरा एहसास चाहिए। ”
वोँ थोडा पीछेहटी, मेरी आंखों मे देखा औऱ बोलीं, “ठीक हैं गोलू…मगर तुम् संभाल पाओगे नाँ?”
मैंने बिना झिझके सिर हिलाया। दिदी धीरे-धीरे सें सोफे पर्र लेटी, औऱ मे आहिस्ता उनकेऊपर गय़ा। उन्होंने दोबारा मेरे लन्ड पऱ होंठरखे औऱ हल्के सें चूमा, मगर जब मैंने उनकासिर नीचे कि ओर धकेलना चाहा तोँ उन्होंने मेराहाथ धीरे-धीरे सें हटाते हुएकहा, “गोलू, मे मात्र चूम सकती हूं… ब्लोजॉब नहि करूंगी। ”
मैंने कुछ नहि कहा, बस उनकी आंखों मे देखा औऱ उनकी गर्दन पर्र हल्का सां चुंबन लिया। वोँ अब मेरे नीचे थि, औऱ मे उनकेबदन केँ हर हिस्से कों महसूस कररहा थां पूरीतरह सें, पूरेहोश केँ संग।
कुछ देर तक मे यही सोचता रहा कि अब क्याँ करूं। दिदी नें साफकह दिया थां कि सेक्स याँ ब्लोजॉब नहि होगा। मे उनकेऊपर थां, मेरा लन्ड उनकेपेट केँ ऊपर सख्ती सें धड़करहा थां, मगरअब मे असहाय महसूस कररहा थां।
शायद दिदी नें मेरी हालतसमझ ली। उन्होंने मेरी आंखों मे देखा, फिन बिनाकुछ कहे अपनीपीठ कों थोडा उठाया, औऱ आहिस्ता अपनी ब्रा कि हुकखोल दि। उनकी बड़ी, मांसल छातियां अब पूरीतरह मेरे सामने थि, खुली, नग्न औऱ मेरी सांसों कों थाम लेने वाली।
मैंने जल्दी अपने दोनों हाथ उनकी छातियों पर्र रखदिए। वोँ गरम थि, एक् खासतरह कि महिला कि गर्मी, जौ सीधे हथेलियों सें होकर शरीर मे उतररही थि। उनकी त्वचा बेहदनरम थि, जैसे रेशम पऱ हाथ फिरारहे हों। मैंने धीरे धीरे दबाना शुरुआत किया, कभी उंगलियों केँ बीच सें उठाकर, कभी हथेली सें पूरे उभार कों थामकर। उनकी गोलाई मेरी अंगुलियों मे समा नहि रही थि।
मैंने हल्के सें निपल्स केँ चारों ओर अंगुलियां घुमाई, तौ उनकी गर्मी औऱ भि गहराई सें महसूस होनेलगी। वोँ छातियां नाँ मात्र भारी थि, बल्कि उनमें जान थि। जैसेहर दबाव पर्र एक् स्पंदन उठता होँ, जौ मेरे पूरे शरीर मे फैलरहा थां।
मैंने अपना चेहरा उनकी छातियों केँ लगभग लेँ जाकर धीरे-धीरे सें निपल्स कों चूमना चाहा, मगर तभी उन्होंने मेरासिर रोकते हुएकहा, “गोलू, वहांमत… बसहाथ सें हि। ”
दिदी नें फिन मेरी आंखों मे देखा औऱ एक् हल्की मुस्कान केँ संगकहा, “अपना लन्ड मेरी छातियों केँ बीचरखो। ”
मैंने बिनाकुछ कहे अपना लन्ड उनकीगोल औऱ भरी हुइ छातियों केँ बीच मे रख दिया। उन्होंने अपने दोनों हाथों सें अपनी छातियां थोड़ी औऱ पासलाई, जिससे मेरा लन्ड पूरीतरह उनकेबीच दब गय़ा। वोँ गरम, रसीले औऱ भीगे सें लगरहे थें। मेरी आँखें बंद हौ गई उस एहसास मे।
फिन उन्होंने धीमे सें कहा, “अब अपने कूल्हे हिलाओ… जैसे ऊपर-नीचे करना होता हैं। मे पकड़कर रखूंगी। ” मैंने वैसा हि किया। मेरा लन्ड उनकी छातियों केँ बीच फिसलता रहा, ऊपर-नीचे, औऱ हरबार जब उसकीनोक उनकी ठुड्ढी केँ पास पहुंचती, तोँ एक् अलग हि सनसनी मेरे जिस्म मे दौड़ जाती।
दिदी कि पकड़ नें उस स्पर्श कों औऱ भि टाइटबना दिया थां, जिससे मेरा लन्ड औऱ भि ज़्यादा संवेदनशील हौ गय़ा थां। कुछ मिनटों बादजब मेरी रफ्तार तेज़ हुइ, तौ मे स्वयं कों रोक नहि पाया औऱ अचानक मेरा वीर्य उनकी छातियों पऱ बिखर गय़ा। गरम, चिपचिपा तरल उनकी स्किन पर्र फैलने लगा, मगर कुछ बूंदें इतनी तेज़ निकली, कि उनके चेहरे तक जा पहुंची। उनकेगाल, औऱ एक्-दो बूंदें उनके होठों तक भि लग गई।
वोँ हल्का सां चौंकी, मगरकुछ बोलीं नहि, बस मुझे देखती रहीं, औऱ मे हांफते हुए उन्हें देखता रहा, जैसे अभि-अभि कोई सपना पूराहुआ होँ।
मे थोडा सहम गय़ा थां कि वीर्य उनके चेहरे तक चला गय़ा, मगर उन्होंने बस हल्की मुस्कान दि। फिन मैंने धीरे-धीरे सें उनका चेहरा पोंछा औऱ उनकेपास हि सोफे पऱ बैठ गय़ा। दिदी अब आहिस्ता सोफे पऱ बैठ गई थीं, बिना किसी झिझक याँ तनाव केँ।
मे उनकेपास बैठा थां। कुछ सेकंड बादजब मैंने कपड़े उठाने हाथ बढ़ाया तौ उन्होंने कहा। “देख गोलू मे तेरी बड़ी बेहन हूं, तौ तेरीहर ख्वाहिश पूरी करना मेराकाम हैं। मगर मेरी भि कुछ सीमा हैं। पऱ फिन भि मे तेरेलिए कुछ औऱ भि करना चाहती हूं। ”
उन्होंने मेरीतरफ देखा औऱ कहा, “मेरे सामने घुटनों केँ बलबैठ जा। ”
मे बिनाकुछ कहे उनके सामने ज़मीन पर्र घुटनों केँ बलबैठ गय़ा। वोँ अब मेरे एक्-दम सामने थि। उन्होंने धीरे-धीरे सें अपना जिस्म थोडा आगे किया, मगर पूरीतरह नहि झुकी। उनके चेहरे कि गर्मी औऱ बदन सें आतीमहक नें मेरे पूरे शरीर मे एक् तेज़ सनसनी भर दि। फिन उन्होंने धीरे-धीरे सें कहा, “थोडा औऱ लगभग आँ। ”
उनके शब्द मेरे कानों मे गरम सांसों कि तरहलगे। मे थोडा औऱ उनकेपास सरकआया, अब मेरा चेहरा उनके जांघों केँ बेहद लगभग थां।
“औऱ थौड़ा, ” उन्होंने कहा। मे औऱ भि लगभगचला गय़ा।
फिन, उन्होंने धीरे-धीरे सें अपनी पैंटी कि किनारी कों अंगूठे सें थोडा नीचे खिसकाया, सिर्फ़ इतना कि मे एक् झलकपा सकूं। सामने एक् नरम, गुलाबी सि चीर हल्के भूरे बालों केँ बीच सें झांकरही थि। किनारों पऱ हल्की नमी थि, जैसे वोँ अंग अपने आप् मे सांस लेँ रहा हौ। होंठ हल्के फूलेहुए थें, औऱ बीच मे कि पतली दरार गहराई मे उतरती हुई दिखरही थि। एक् अजीब सि गर्मी औऱ नमी कि खुशबू मेरेनाक तक पहुंची, जिसने मेरी धड़कनों कों औऱ तेज़कर दिया।
फिन दिदी नें मेरी आंखों मे झांकते हुए, आहिस्ता अपनीदो उंगलियां अपनेचीर कि ओर लें गई। उन्होंने अपनी अंगुलियों कों भीतर डाला, पहले हल्के सें औऱ फिन थोडा गहराई तक। उनकी सांसें तेज़ हौ गईं, औऱ वोँ उंगलियां वहां भीतरकुछ समय तक घूमती रहीं, मानो स्वयं सें कुछ महसूस कररही हों। जैसे हि उन्होंने उन्हें बाहर् निकाला, उन पऱ चिपकी गाढ़ी, गरमनमी कि चमक मेरी आंखों केँ सामने थि।
उन्होंने उन उंगलियों कों मेरीतरफ बढ़ाया, बेहद धीरे-धीरे औऱ तय इरादे सें। फिन बिनाकुछ कहे, उन्होंने अपनीवही गीली, नम उंगलियां मेरे होठों पऱ रख दि। वोँ छुअनगरम थि, गाढ़ी, नम औऱ बेहद निजी। जैसेकोई सीधा उनकाअंग हि मेरे चेहरे सें छू गय़ा होँ। मेरी सांसरुक सि गई, औऱ वोँ नमी मेरे होठों पऱ एक् अजीब सि कंपकंपी छोड़ गई। स्वाद नमकीन औऱ तीखा थां।
“तेरी दिदी तुम्हें केवल इतना हि हकदे सकती हैं, ” उन्होंने कहा।
थोड़ी देरबाद, उन्होंने अपनी पैंटी कों वापसठीक किया, औऱ धीरे-धीरे सें मुस्कराते हुएकहा, “अबचल, कपड़े पहन लें। हम् खानां खा लें। ”
मैंने थोड़ी झिझक केँ संग अपने कपड़े उठाए औऱ पहनने लगा। दिदी भि अपने कपड़े पहनने लगी। उन्होंने ब्रा औऱ टॉप पहना, औऱ नीचे लेगिंग्स। जब तक हम् रेडी होकर बाहर् खाने केँ लिए निकले, मेरेमन मे अभि भि बसवही छविघूम रही थि, उनकी वोँ खुलीचीर, वोँ गरमनमी, वोँ शरीर कि गंध।
खाने कि थाली सामने थि, मगर मेरा ध्यान कहीं औऱ थां। मेरेमन मे हरबार उसी लम्हा कि वापसी होतीरही, औऱ एक् अधूरी चाहत सीने मे फंसी थि, कि काश मे उन्हें पूरीतरह पा सकता। उनके भीतरसमा सकता।
too be continued
दीदी ने चखाया अपना गीलापन - दीदी की चुत – New Episode
Update 3
उसदिन केँ बाद मुझेलगा सुधा दिदी औऱ मेरेबीच बहोत कुछबदल जाएगा। मगरकुछ भि नहि बदला, सिवाय एक् चीज़ केँ। अब मैंने दिदी कों चोरी-छुपे देख्ना बंदकर दिया थां। उन्होंने मेरे लन्ड कों अपने गुब्बारों केँ बीच हिलाया थां, औऱ मेरा सफेद पानी अपने चेहरे पऱ महसूस किया थां। यहां तक कि मुझे अपनीउस नाजुक स्थान कों भि दिखाया थां, जिसे देखने केँ लिएहर लड़का पागल हौ सकता हैं।
औऱ मेरेसंग भि वहीं हौ चुका थां क्योंकि दिदी नें मुझे केवलउस स्थान कों दिखाया थां, उससेआगे कुछ भि नहि। उनकेहर एक् हिस्से कों जानने कि चाह मेरे अंदरबढ़ रही थि। अबहरबार जब हम् अकेले होते, मे उनकी हल्की मुस्कान औऱ आंखों कि गहराई मे छिपे इशारों कों पढ़ने कि कोशिश करता। मगर सुधा दिदी कि नजर मे भइया-बेहन कां नाता यहीं तक सीमित थां, औऱ मुझे लगता थां कि मुझे इससे बहोत आगे बढ़ना हैं।
एक् दिन, मे अपने आप् कों रोक नहि पाया। दिल कि धड़कन जैसे कानों मे गूंजरही थि, औऱ दिमाग़ मे बस सुधा दिदी कां चेहरा, उनकीचाल औऱ उनकाबदन घूमरहा थां। मे दबेपैर उनके कमरे कि तरफ बढ़ा। द्वार (दरवाज़ा) आधा खुला थां औऱ अंदर हल्की रोशनी जलरही थि। कमरे मे उनकीगंध फैली हुईँ थि, औऱ वो बिस्तर पर्र बैठकर किसी पुस्तक मे खोई हुई थि। मेरेकदम अपने आप् अंदर बढ़ते चलेगए।
उन्होंने मुझे कमरे मे आते देखा तोँ धीरे-धीरे सें पुस्तक एक् तरफरख दि औऱ मेरीओर देखने लगी। उनके होंठों पऱ हल्की-सि मुस्कान थि, जोँ जैसे सीधे मेरेदिल तक उतररही थि। उनकी आंखों मे एक् अलग-सि चमक थि, मानो वो जानती हों कि मे वहां क्यूं आया थां।
उससमय सुधा दिदी नें सफेदरंग कां टाइट क्रॉप टी-शर्ट औऱ छोटे शॉर्ट्स पहनरखे थें। टी-शर्ट कां कपड़ा हल्का औऱ पतला थां, जिससे उनकेगोल औऱ भरेहुए स्तनों कां उभारसाफ झलकरहा थां। हल्की हरकत मे उनके निपल्स कि झलक कपड़े केँ आर-पार महसूस हौ रही थि। नीचे केँ शॉर्ट्स इतने छोटे थें कि उनकी जांघों कां ऊपरी हिस्सा खुलकर दिखरहा थां, औऱ बीच कां कपड़ा उनकी नाजुक स्थान केँ आकार कों हल्का-सां उभारदे रहा थां।
कपड़ों मे ढका होने केँ बावजूद, उस स्थान कि मौजूदगी औऱ उसकी कसावट साफ़ दिखाई देरही थि, जौ मेरे भीतर एक् अलग हि हलचल पैदाकर रही थि। मे कुछकह पाता, उससे पहले हि उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, “तुम् मेरे कमरे मे क्यूं आए हौ?”
उनकी आवाज़ मे हल्की-सि जिज्ञासा औऱ शरारत थि। मे धीरे-धीरे सें उनकेपास गय़ा औऱ कांपती आवाज़ मे अपनी भावनाएं बताने लगा। केसे मे हर लम्हा उनके बारे मे सोचता थां, केसे उनकापास होना मेरेलिए किसी ख्वाब केँ सच होने जैसा थां, औऱ केसे मे अबइस दूरी कों औऱ सहन नहि करपारहा थां।
मैंने कोई जवाब नहि दिया, बस उनकी आंखों मे गहराई सें देखने लगा। मेरा सीना तेजी सें उठ-गिर रहा थां, सांसें गरम हौ चुकी थि। बिना शब्दों केँ, मे अपनी नज़र औऱ हाव-भाव सें उन्हें ये जताने कि कोशिश कररहा थां कि वो मेरेलिए क्याँ मायने रखती थि। केसे मे उन्हें मात्र दिदी नहि, बल्कि एक् ऐसी स्त्री केँ रूप मे देखता हूं, जिसे मे पूरीतरह अपना बनाना चाहता हूं।
“दिदी, उसदिन केँ बाद मुझसे औऱ रहा नहि जारहा। जब सें आपने अपनी नाज़ुक स्थान दिखाई हैं, तबसे मेरेमन मे बसवही लम्हा घूमरहा हैं। ” मैंने कहा।
मैंने धीरे-धीरे सें अपनाहाथ उनकी जांघ केँ पास बढ़ाया, उस नाजुक स्थान कि ओर जिसे मे महसूस करना चाहता थां। मगर उन्होंने जल्दी मेराहाथ पकड़ लिया औऱ हल्की-सि मुस्कान केँ संग बोलीं, “नहि… यहसही नहि हैं। हम् भइया-बेहन हें, औऱ यह नाताइस तरह नहि बदलना चाहिए। ” उनकी आवाज़ मे नरमी थि, जिससे साफ थां कि वो इस सीमा कों पार नहि करना चाहती थि।
उनकीये बातसुन कर मेरे अंदर क्रोध औऱ उदासी दोनों मिलगए। मैंने फिन सें कोशिश कि, इसबार थोड़ी औऱ जोर सें उनकी नाजुक स्थान कों छूने केँ लिए, मगर उन्होंने कड़े हाथों सें मुझे पीछे धकेला औऱ मेरेगाल पर्र जोरदार थप्पड़ मार दिया। कमरे मे सन्नाटा छा गय़ा, औऱ मेरे कानों मे बसउस थप्पड़ कि गूंजरह गई।
थप्पड़ लगते हि उनकी आंखों मे आंसू आँ गए औऱ वो रोनेलगी। मे कुछसमय वहीं खड़ारहा, फिन बिनाकुछ कहे धीरे-धीरे सें कमरे सें बाहर् निकल गय़ा।
उसदिन केँ बाद सुधा दिदी कां व्यवहार पूरीतरह बदल गय़ा। पहले जहां वो मुझसे सहज होकर बातें करती, हंसतीं औऱ कभी-कभी हल्का मज़ाक भि कर लेती, अब वहां एक् गहरी चुप्पी आँ गई थि। वो मुझसे नज़रें मिलाने सें बचनेलगी, औऱ जब भि मे उनकेपास आता, वो किसी बहाने सें वहां सें उठ जाती, याँ अपनेकाम मे डूब जाती।
हमारे बीच जोँ नज़दीकी औऱ अपनापन थां, वो जैसे आरामसे गायब हौ गय़ा। मुझे महसूस होनेलगा कि वो जान-बूझ कर दूरीबना रही थि, जैसेउस दिन कि घटना उनकेमन मे गहरीचोट छोड़ गई हौ। उनके चेहरे पर्र अबकोई पुरानी मुस्कान नहि थि, औऱ उनकी आंखों मे मुझे देखने कां वोँ अपनापन भि खो गय़ा थां।
कुछ दिनों बाद सुधा दिदी एक् महीने केँ लिए अपनी साथी केँ घऱ छुट्टियों पऱ चली गई। उनकेचले जाने केँ बादघऱ सूना-सूना लगनेलगा। उनकी हँसी, उनकी बातें, औऱ उनकासंग, सभीकुछ इतनी जल्ददूर होँ गय़ा कि मेरी सांसें तक रुक-सि गई।
उन दिनों, जब उनकीयाद दिल पर्र भारी होने लगती, मे अक्सर उनकी वोँ ब्रा औऱ पैंटी देखता जोँ उन्होंने कभी गलती सें कहीं छोड़ दि थि। उनका कपड़ा मेरे हाथों मे जैसे उनकी मौजूदगी कां अहसास दिलाता। मे आहिस्ता उसे छूता, उसकी बनावट महसूस करता, औऱ स्वयं कों उन्हीं यादों मे खो देता। उस नाजुक कपड़े कि खुशबू, उसकी रसीले छुअन, मेरे अंदर एक् अजीब सि तसल्ली भर देती।
कई हफ्तों बाद सुधा दिदी नें बताया कि वो अपनीयार केँ घऱ सें वापस आँ रही थि। बापूउस दिनकाम मे बिजी थें, इसलिये उन्होंने मुझे अपनी गाड़ी लेकर दिदी कों उनकी मित्र केँ घऱ सें लेने भेजा। मे रेडी तौ हौ गय़ा, मगरदिल मे डर थां कि दिदी सें केसे मिलूंगा, खासकर जब वो यह नहि जानती थि कि पिताजी नें मुझे भेजा थां।
वाहन मे बैठते हि मेरादिल तेजी सें धड़कने लगा। रास्ते भर मे सोचता रहा कि दिदी मुझेदेख कर क्याँ कहेंगी, क्याँ बात करेंगे याँ फिन वैसे हि दूर रहेंगे जैसे पहले थें। हरसमय मेरे अंदर घबराहट बढ़ती जारही थि। मगर मे स्वयं कों समझाता रहा कि यह मौका हमारे बीच जौ भि टूटा थां, उसेठीक करने कां थां। मे पूरामन बना चुका थां कि उन्हें लेकर आऊंगा औऱ हमारी दूरी समाप्त करने कि कोशिश करूंगा।
इसकेआगे कि कथा अगले पार्ट मे।
दीदी ने चखाया अपना गीलापन - दीदी की चुत - Continue reading for full story
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