दीदी ने चखाया अपना गीलापन - दीदी की चुत – New Episode
Update 4
साम लगभगसात बजे मे उनकी साथी केँ घऱआया। दिदी नें मुझे देखा तोँ उनका चेहरा थोडा अजीब सां होँ गय़ा। उन्होंने मुझे देखा, फिन नज़रें हटालीं, जैसेसोच रहीहों कि मे यहां केसेआया थां। मे वाहन सें उतरा औऱ उनकेयार औऱ परिवार सें हाथ मिलाया। सभी नें मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया, मगर दिदी बार-बार मेरीतरफ देखरही थि, पऱ कुछ कहने सें बचरही थि।
थोड़ी देरबाद दिदी नें कहा कि चलो, अब चलना चाहिए। मैंने उनकी सहायता कि औऱ दोनों गाड़ी मे बैठे। अंदर बैठते हि मे सोचरहा थां कि यहसमय हमारे लिए कितना खास थां। मगर उनकी चुप्पी औऱ अजीब एहसास नें मेरेमन कों बेचैन कर दिया।
वाहन चलाते हुए मेरी नजरें सुधा दिदी कि छाती पऱ अक्सर टिक जाती थि। उनकी टाइट टी-शर्ट केँ नीचे उनके बड़े औऱ गोल बूब्ज़ हर हल्की हरकत मे ऊपर-नीचे होतेरहे। जब गाड़ी केँ झटकों याँ मोड़ों पऱ उनकाबदन हल्का हिलता, तोँ उनकी छाती कां उछालसाफ दिखता थां। उस नजारे कों देख मेरादिल तेज़ी सें धड़कने लगता थां, औऱ मे स्वयं कों रोकने कि कोशिश करता थां, मगर उनकी हरकतें मेरी नजरों सें छुप नहि पाती थि।
रास्ते मे थोड़ी दूरी चलने केँ बाद मुझेभूख लगनेलगी। मैंने धीरे-धीरे सें कहा, “मुझे थोड़ी भूखलग रही हैं, अगर आप् कहें तोँ पास मे किसी होटल पर्र रुक लें?” वो अब भि मुझसे नाराज़ थि, ये उनकेचुप औऱ सख्त हाव-भाव सें साफ थां, मगर उन्होंने हल्के स्वर मे कहा, “ठीक हैं, अगर तुम्हें रुकना हैं तोँ रुकलो। ” उनके लहजे मे ठंडापन थां, पर्र फिन भि उन्होंने इजाज़त दे दि। मैंने मार्ग किनारे दिखरहे एक् छोटे सें होटल कि ओरकार मोड़ दि, ताकिकुछ खाकरआगे कां सफर जारीरख सकूं।
होटल केँ अंदर हम् दोनों एक् कोने कि मेज़ पऱ बैठगए औऱ खानां ऑर्डर किया। माहौल साधारण थां, पर्र खाने कि खुशबू अच्छी लगरही थि। खानां आने केँ बाद मैंने कोशिश कि कि माहौल हल्का होँ जाए, औऱ धीरे-धीरे सें कहा, “सुधा दिदी, मुझेउस दिन केँ लिए क्षमा करदो… मेरी गलती थि। ” मैंने उनकी आंखों मे देखा, उम्मीद थि कि वो कुछनरम पड़ेंगी, मगर उनका चेहरा सख्तरहा। उन्होंने बस इतनाकहा, “गोलू, कुछ बातें क्षमा करना आसान नहि होता, खास करजबकोई बिना इजाज़त भइया-बेहन कि सीमाएं तोड़े। ”
मैंने थोडा रुककर अपनीबात रखने कि कोशिश कि, “सुधा दिदी, मे मानता हूं कि मैंने ग़लत किया…मगर याद हैं पिछली बारजब आपने मुझे अपनी नाज़ुक स्थान दिखाई थि? उसकेबाद सें हि मे बसउसे महसूस करना चाहता थां, छूना चाहता थां। इसीवजह सें मैंने वोँ ग़लत हरकतकर दि। ” मेरी आवाज़ धीमी थि, जैसे मे अपनी सफाई देने कि कोशिश कररहा थां।
सुधा दिदी नें मेरीबात सुनने केँ बादकुछ देर तक मुझे देखा, फिन प्लेट मे नज़रें गड़ाए चुप-चाप खानेलगी। मैंने महसूस किया कि वो जान-बूझ कर मुझे नज़र-अंदाज़ कररही थि।
थोड़ी देर मे हम् दोनों नें अपना खानां समाप्त किया औऱ फिन वापस व्हीकल मे बैठकर सफ़र जारीरखा। गाड़ी एक् बारफिन सें चलनेलगी। घऱ पहुंचने केँ लिएअब भि तीन घंटे कां सफरतय करना थां। सुधा दिदी अब भि मुझ पर्र क्रोध थि, औऱ उनकोकिस तरह मनाना चाहिए, मुझेसमझ नहि आँ रहा थां।
लगभगरात केँ दसबजे उन्होंने मेरीतरफ हिचकते हुए देखा औऱ हौले सें कहा, “गोलू, मुझेजोर सें बाथरूम जानां हैं। क्याँ तुम् काररोक सकते हौ?” मैंने जल्दी वाहन सुनसान मार्ग किनारे खड़ीकर दि।
वो अब भि मुझसे नाराज़ दिखरही थि, मगर जैसे हि वो वाहन सें उतरी, मैंने सामने वाले शीशे सें उन्हें देख्ना शुरुआत कर दिया।
वो गाड़ी सें थोड़ी दूर जाकर रुकीं, फिन धीरे धीरे अपनी पैंट नीचे करनेलगी। चांदनी कि हल्की रोशनी मे उनकी टांगों कि झलक मुझे साफ़दिख रही थि। वो बैठ गई, औऱ फिन हल्की-सि आवाज़ केँ संग पानी कि धार गिरने लगी, तेज़, साफ़, चमकती हुइ, जोँ छोटे-छोटे पत्थरों पर्र टकराकर बिखररही थि। उस लम्हा मे वो झलक उतनी सुखद नहि थि, मगरफिन भि मे उससे अपनी नज़रें नहि हटापा रहा थां।
कुछदेर बाद वो उठीं, कपड़े ठीककिए औऱ वापस गाड़ी मे आकरबैठ गई। मैंने इंजन स्टार्ट करने केँ लिए चाबी घुमाई हि थि कि उन्होंने हल्के सें कहा, “रुको, गोलू… मुझे तुमसे कुछबात करनी हैं। ”
मैंने उनकीओर देखा, वो थोड़ी गंभीर थि। उनकी नज़रें मेरी आंखों मे टिकी थि, औऱ मे भि बिनापलक झपकाए उन्हें देखता रहा।
उन्होंने धीमे स्वर मे कहना शुरुआत किया, “तुम्हें पता हैं, उसदिन जब तुमने मुझे छूने कि कोशिश कि थि… मुझे बहोत डरलगा थां। ऐसालगा जैसेकुछ टूट गय़ा होँ। मगरबाद मे… मैंने सोचा, शायद मैंने अधिक रिएक्ट किया। क्योंकि तुमने पहले भि… मेरे सीने कों छुआ थां, औऱ तब भि हमारा भइया-बेहन कां नाता टूटा नहि थां। ”
वो कुछसमय रुकी, फिन हल्की सांस लेकरआगे बोलीं, “गोलू, तुम् मेरे भइया होँ… मे तुम्हारी परवाह करती हूं। तुम्हारी खुशी मेरेलिए मायने रखती हैं, औऱ अगर मे तुम्हें खुशदेख सकती हूं, तोँ मे वोँ करना चाहती हूं। ”
इतनाकह कर उन्होंने बिनाकुछ औऱ बोले आहिस्ता अपनी टी-शर्ट ऊपर खींचनी शुरुआत कि। मेरे सामने उनकागला औऱ फिन सीना नज़रआने लगा। मेरादिल तेज़ धड़कने लगा। उन्होंने पूरीतरह टी-शर्ट उतार दि, औऱ फिन धीरे-धीरे सें अपनी ब्रा कि हुक खोली। ब्रा हटते हि उनकी नंगी छाती मेरी आंखों केँ सामने थि, गोलाई सें भरी, रसीले औऱ गर्माहट लिएहुए।
मेरी सांसें रुक-सि गई, जैसेसमय थम गय़ा हौ। इतने दिनों सें जिस सुधा दिदी केँ कपड़ों केँ संग मुझे खुदको अच्छा महसूस करवाना पड़ा थां, वहीं सुधा दिदी एक् बार मेरे सामने नंगी बैठी थि। हल्की चांदनी मे उनके गुब्बारे साफसाफ दिखाई देरहे थें, जैसेदूध सें भरेहों औऱ बस छूने केँ इंतजार मे हों।
मैंने उनकीतरफ देखते हुएकहा, “दिदी, मे तुम्हारे सीने कों पहले हि छू चुका हूं… अब मे तुम्हारे चुत कों महसूस करना चाहता हूं। ”
वोँ हल्का-सां शर्मा गई, आंखें झुकाली, फिन धीरे-धीरे सें बोलि, “ठीक हैं, गोलू… तुम्हें इजाज़त हैं। ” उन्होंने अपनी फिटेड जींस उतारने कि कोशिश कि, मगर गाड़ी केँ छोटे सें अंदरूनी सजावट मे ये मुश्किल हौ रहा थां। फिन वोँ खिड़की सें सिर टिकाकर लेटगईं औऱ धीरे-धीरे सें बोलि, “गोलू, तुम् हि इसे उतारदो। ”
मैंने दोनों हाथों सें उनकी जींस पकड़ी औऱ आरामसे नीचे खींचने लगा। उनकी टांगों कि चमकती त्वचा, जांघों कि रसीले रेखाएं औऱ पतलीकमर पर्र टिकी छोटी-सि पैंटी, सभीकुछ चांदनी मे बेहद सुंदर लगरहा थां। उनके पूरी जिस्म कां हर हिस्सा मेरी आंखों मे बस गय़ा थां, औऱ मेरी सांसें तेज़ होँ चुकी थि।
जैसे हि जींस उनके शरीर सें अलग हुइ, उनके चेहरे पर्र एक् लाली सि छा गई। वोँ शर्माने लगी, औऱ उसी केँ संग उनका चेहरा धीमी मुस्कान केँ संगखिल उठा। हल्की चांदनी मे उनका चेहरा कुछ अधिक हि प्यारा लगरहा थां।
वोँ फिन गाड़ी कि सीट पर्र लेट गई। गाड़ी कां छोटा सां अंदरूनी सजावट उनके जिस्म कों फैलाने केँ लिए बहुत नहि थां, जिससे उन्हें करवट बदलने औऱ धीरे-धीरे लेटने मे मुश्किल होँ रही थि। फिन भि उन्होंने स्वयं कों संभाला औऱ उसीतंग स्थान मे लेटकर अपनी नज़रें मुझ पर्र टिकाए रखी, जबकि मे उनके पैरों केँ पास बैठा थां।
वोँ वाहन कि सीट पर्र तंग स्थान मे लेटी थि, आंखें मुझ पर्र टिकाए, औऱ मे उनके पैरों केँ पास बैठा थां। मैंने धीरे-धीरे सें उनके दोनों पैरों कों पकड़कर ऊपर किया औऱ फिन सावधानी सें उनकी पैंटी कि किनारी पकड़कर नीचे सरका दि। पतली कपड़े कि परत हटते हि उनकी नंगी त्वचा कि गरमाहट औऱ गंध महसूस हुईँ, औऱ वोँ हल्का-सां सिहरउठी।
पतला कपड़ा हटते हि पहलीबार उनकी नंगी स्थान मेरी आंखों केँ सामने थि, गुलाबी आभालिए, नर्म औऱ कोमल त्वचा सें घिरी, बीच मे हल्की-सि दरार जैसी रेखा, जिसके किनारों पर्र महीन, रसीले बाल थें। चांदनी मे वहां कि नमीचमक रही थि, जैसे किसी गुप्त फूल कि पंखुड़ियां खुलकर अपनी खुशबू बिखेर रहीहों।
मे कुछ लम्हा वहींठहर गय़ा, आंखें उनकीउस स्थान पर्र टिकीरही। उनकी सांसें तेज़ हौ गई, चेहरे पर्र गहरी लालीछा गई औऱ पलकों केँ नीचे सें झिझकभरी निगाहें मुझ पऱ पड़ी। होंठ हल्के-सें कांपरहे थें, जैसे वोँ बोल्ना चाहती होँ, पर्र शब्दगले मे रुकगए हों।
मैंने धीरे-धीरे सें अपनाहाथ उनकी जांघों केँ पास लें जाकरउस नर्म हिस्से कि तरफ बढ़ाया, तोँ उन्होंने झटके सें अपनी दोनों टांगें आपस मे भींचली। उनकी आंखों मे झिझक औऱ गहरीलाज साफदिख रही थि, जैसे वोँ किसी अनजाने डर औऱ उत्सुकता केँ बीच फंसी हौ।
मैंने हल्के सें मुस्कुराते हुए उनके घुटनों पर्र हाथरखा औऱ फुसफुसाया, “दिदी… बस एक् बार। ” उन्होंने पलकें झुकाली, होंठ भींचलिए, औऱ चेहरा लाल हौ गय़ा। उनकी सांसें गहरी थि, मानो वोँ स्वयं कों संभालने कि कोशिश कररही हों। मैंने धीरे धीरे उनके घुटनों पऱ दबाव देकर टांगों कों अलग किया। वोँ हल्का-सां कांपी, मगर मैंने नरमी सें उनकी जांघों कों थामकर ऊपर उठाया, ताकि उनका नाजुक हिस्सा पूरीतरह मेरी नज़रों मे आँ जाए।
चांदनी मे उनकी नर्मी औऱ हल्की गुलाबी आभा कों देख मेरादिल जोर सें धड़कने लगा। हम् भइया-बेहन होतेहुए भि, उससमय हम् दोनों केँ बीच कि सारी सीमाएं टूटने कों रेडी थि। कांपते हाथों सें मैंने पहलीबार उनकीउस स्थान कों छुआ, वोँ गरम औऱ रसीले अहसास मेरी उंगलियों सें होतेहुए सीधेदिल मे उतर गय़ा। वोँ हल्के सें सिहरउठी, आंखें बंदकर ली, जैसेउस लम्हा मे टाइमथम गय़ा हौ।
too be continued
दीदी ने चखाया अपना गीलापन - दीदी की चुत – New Episode
Episode 5
उस वाहन केँ छोटे सें इंटिरियर मे सुधा दिदी मेरे सामने पूरीतरह नंगी लेटी थि। रात केँ वक़्त चांदनी उनके खुले जिस्म पऱ ऐसेचमक रही थि, मानो उनका पूराबदन किसी मोती सें बना होँ।
मे हिचकते हुए धीरे धीरे उनके लगभग गय़ा। दिल कि धड़कन इतनी तेज़ थि कि जैसे सीने सें बाहर् निकल आएगी। हाथ काँपरहे थें, मगर चाहत नें हिम्मत दि। पहलीबार मेरी उंगलियाँ उनके निजी हिस्से कों छूनेलगी।
जैसे हि मेरी उंगलियाँ वहां पहुँची, दिदी कां शरीर हल्का-सां कांपउठा। उन्होंने आँखें बंदकर ली, औऱ होंठों सें एक् धीमी-सि कराह निकल गई। मेरेलिए वोँ समय बिल्कुल नया थां। पहलीबार मैंने उन्हें उसतरह छुआ थां। उनकी गर्माहट औऱ नमी मेरी उंगलियों पर्र महसूस हौ रही थि, औऱ मेरादिल मानो रुक-रुक कर धड़करहा थां।
मैंने उंगलियाँ आहिस्ता उनके अंदरूनी हिस्से मे फेरनी शुरुआत कि। हर हल्की हरकत केँ संग उनकी साँसें औऱ भारी होतीजा रही थि। उनका चेहरा कसक औऱ मजा केँ बीच डूबाहुआ थां। माथे पर्र हल्की-सि शिकन थि, आँखें कसकरबंद, औऱ होंठ दाँतों केँ बीचदबे हुए।
उनके होंठों सें कभी धीमी-सि आह, तौ कभी गहरी कराह निकलती। उनकी आवाज़ मे वोँ चाहतसाफ झलकरही थि, जौ मेरेमन कों औऱ अधिक बेचैन कररही थि। मेरेहर स्पर्श केँ संग उनके चेहरे पऱ नए-नएभाव आते, कभी आँखें आधीखुल कर मुझे देखने लगती, तोँ कभी होंठ काँपते हुए कराह सें भर जाते।
इसी बीच सुधा दिदी नें अपने दोनों हाथों सें अपने बड़े-बड़े स्तनों कों सहलाना, औऱ रगड़ना शुरुआत कर दिया। उनकी उंगलियाँ निप्पलों पऱ घूमते हि उनका पूराबदन औऱ भि अधिकमचल उठा। नीचे मेरी उंगलियाँ उनके नाजुक हिस्से सें खेलरही थि औऱ ऊपर उनकेहाथ उनकी छाती मे आगभररहे थें। उनकी कराहें औऱ तेज़ हौ गई, चेहरा औऱ लाल होँ गय़ा, औऱ शरीर अनियंत्रित होकर मेरीओर औऱ सिमटता चला गय़ा।
बंद वाहन केँ भीतर उनकी आवाज़ गूंजने लगी। हर कराह, हर हल्की चीख शीशों सें टकराकर लौटती औऱ माहौल कों औऱ भि मदहोश बना देती। बाहर् गहरीरात कां सन्नाटा थां, औऱ अंदर सुधा दिदी कि मधुर कराहें गूंजकर पूरे डिज़ाइन कों गरम औऱ बेचैन कररही थि।
कुछदेर बाद उन्होंने आँखें खोली, औऱ हल्की मुस्कान केँ संग मुझसे बोलि, “गोलू… मेरीपीठ दुखरही हैं, यह फ्रंट सीट बहोत छोटी हैं। यहा अधिकदेर लेटना मुश्किल हौ रहा हैं। ” उन्होंने मेरेकान केँ पास फुसफुसा करकहा, “चलो पीछे वालीसीट पऱ चलते हैं, वहा हम् औऱ धीरे-धीरे रह पाएँगे। ”
मैंने उन्हें सहारा दिया औऱ हम् दोनों आहिस्ता पीछे वालीसीट पऱ आँ गए। सुधा दिदी नें फिन सें लेटने कि कोशिश कि, मगर मैंने जल्दी उनकाहाथ पकड़ लिया औऱ मुस्कुरा करकहा, “नहि दिदी… लेटोमत। मेरी जाँघों पऱ बैठो। ” मेरी आवाज़ मे चाहत औऱ हुक्म दोनों मिलेहुए थें। उन्होंने मेरीतरफ देखा, हल्की मुस्कान दि औऱ धीरे धीरेआकर मेरी जाँघों पऱ बैठगईं।
जैसे हि उनका खुला नंगा पिछला हिस्सा मेरी जाँघों सें सटा, मैंने अपने कपड़ों केँ ऊपर सें उनकी गर्माहट महसूस कि। उनकी रसीले त्वचा मेरी जाँघों सें रगड़खा रही थि औऱ उस स्पर्श सें मेरे पूरे जिस्म मे एक् सिहरन दौड़ गई। उनका नंगा पिछवाड़ा मेरी जाँघों पर्र टिकते हि मुझेऐसा लगा जैसेआग सीधे मेरी रगों मे भर गई होँ।
मैंने दोबारा अपनी उंगलियाँ उनके निजी हिस्से कि ओर बढ़ाई, औऱ आरामसे वहा खेलने लगा। उसी समय मेरा दूसरा हाथऊपर गय़ा औऱ उनके एक् बूब्ज़ कों कसकर पकड़ लिया। मेरी हथेली मे उनकीगरम, रसीले गोलाई भर गई थि। निप्पल मेरी हथेली पऱ सख्त होकरचुभ रहा थां, जिसे मे अंगूठे औऱ उंगली केँ बीचदबा कर सहलाने लगा।
उनकी छाती कि गर्माहट मेरी हथेली कों भिगोती जारही थि, मानोवहा सें लपटें उठरही होँ। हरबार जब मे नीचे उंगलियों सें खेलता औऱ ऊपर हथेली सें उनके मम्मों कों मसलता, उनकी सिसकारियाँ औऱ कराहें इतनी तेज़ हौ जाती कि गाड़ी कां हर शीशाहिल उठता।
हम् दोनों उससमय मे पूरीतरह डूबेहुए थें, हर स्पर्श कां मजा लें रहे थें। तभी अचानक मेरीजेब मे रखाफोन जोर-शोर सें बजनेलगा। घंटी कि तेज़ आवाज़ नें उसगरम औऱ मदहोश माहौल कों चीर दिया। सुधा दिदी नें आँखें खोली, औऱ मुझे देखा, उनकी साँसें अब भि तेज़ थि, औऱ मैंने महसूस किया कि वोँ भि उतना हि चौंक गई थि जितना मे।
मैंने जल्द सें एक् हाथ सें फोन निकाला औऱ कॉलआई रिसीव कर लिया, मगर मेरा दूसरा हाथअब भि सुधा दिदी केँ भीगे हिस्से पऱ खेलरहा थां। मोबाइल पर्र किसी कि आवाज़ मेरेकान मे गूँजरही थि, मगर मेरा ध्यान पूरा उनके जिस्म पऱ थां। सुधा दिदी नें होंठकाट लिए, उनकी आँखें कसकरबंद थि। वोँ कोशिश कररही थि कि कोई आवाज़ बाहर् नाँ निकले, पऱ उनकी रुक-रुक कर निकलती सिसकारियाँ औऱ काँपता शरीरबता रहा थां कि वोँ अपनी आवाज़ रोकने केँ लिए कितनी जद्दोजहद कररही हैं।
मोबाइल पर्र मां कि आवाज़ आई। उन्होंने धीमेमगर सख़्त लहजे मे पूछा, “गोलू… कितना वक्त लगेगा घऱआने मे?” उनके प्रश्न नें मुझे लम्हा भर कों सकपका दिया। एक् तरफ मेरी उंगलियाँ अब भि सुधा दिदी केँ गीलेपन कों छूरही थि औऱ दूसरी तरफ मम्मी कि आवाज़ मेरे कानों मे गूंजरही थि।
मैंने गहरी साँस लेकरकहा, “मम्मी… करीबतीन घंटे लगेंगे। ”
मां नें फिन पूछा, “औऱ सुधा? वोँ कैसी हैं?”
मैंने सुधा दिदी कि ओर देखा, उनकी आँखें बंद थि औऱ वोँ अपनी साँसों कों दबाने कि कोशिश कररही थि। मैंने हल्की मुस्कान केँ संग जवाब दिया, “वोँ तौ सोरही हैं मम्मी… आरामकर रही हैं। ”
मां नें आख़िर मे कहा, “ठीक हैं बेटा, मगर जल्दघऱ आँ जानां। ज्यादा देरमत करना। ” उनके शब्दों मे हिदायत औऱ चिंता दोनों झलकरही थि।
मम्मी कि आवाज़ कान मे गूँजते हि मेरेदिल मे एक् झटका-सां लगा, पऱ मेराहाथ अब भि सुधा दिदी केँ भीगे-पन सें खेलता रहा।
जैसे हि कॉलआई कट हुइ, सुधा दिदी नें गहरी सांसली, मानो अचानक सें बंधन सें मुक्त हुईँ होँ। उनके चेहरे पर्र राहतसाफ दिखरही थि। अगले हि समय उनकी कराहें फिन सें हवा मे गूंजउठी।
उन्होंने आँखें खोलकर मुझे देखा औऱ काँपती आवाज़ मे बोलीं, “गोलू…अब मत रोकना… मुझे औऱ चाहिए… जोर सें करो… ओह्ह…” उनकी आवाज़ मे अबकोई रोक-टोक नहि थि, बसखुल कर चाहत औऱ प्यास छलकरही थि। उनकीहर कराह, हर हल्की चीख मेरे अंदर औऱ आगभररही थि, औऱ वाहन कां माहौल फिन सें उनके हंगामा सें मदहोश होँ गय़ा।
मे एक् लम्हा कों औऱ गहराई मे जानां चाहता थां, मगर दिमाग़ नें चेताया कि रात बहोत हौ चुकी हैं। इतनीदेर औऱ रुकना खतरे सें खाली नहि होगा। दिल उनकी प्यास बुझाना चाहता थां, मगर समझदारी नें मुझेरोक दिया। मैंने गहरी सांस लेकर अपनी हरकतें थामली, औऱ धीरे-धीरे सें उनकेकान मे कहा, “अब बहोत देर होँ चुकी हैं… हमें रुकना होगा। ” सुधा दिदी नें आँखें खोली, उनके चेहरे पऱ अधूरा सुख औऱ हल्की थकानझलक रही थि, पऱ उन्होंने कुछ नहि कहा, केवल चुप-चाप मेरी बाहों मे सिररख दिया।
मैंने वाहन कि चाबी घुमाई औऱ आरामसे वाहन स्टार्ट कि। इंजन कि हल्की गुनगुनाहट केँ संग मे मार्ग पऱ आगे बढ़ा। सुधा दिदी आरामसे अपने कपड़े पहनने लगी, फ़र्श सें उठाकर। उनकीहर हलचल मे अभि भि रात कि गर्माहट कि परछाई थि, मगर मे ध्यान रखतेहुए ड्राइव करतारहा। बाहर् कि ठंडीरात औऱ गाड़ी कि मंद रोशनी मे उनकेहर मूवमेंट कों महसूस करना अभि भि एक् अलगतरह कां अहसास थां।
उसरात कि घटना केँ बाद, मेरामन बार-बार उसीसमय कों दोहराने कों बेचैन रहता। मे चाहता थां कि हम् वो अधूरी चीज़ पूरी करें, मगर जिंदगी नें फिन सें बाधा खड़ीकर दि। दोदिन बाद हमारा परिवार एक् रिश्तेदार कि विवाह मे जाने केँ लिए रेडी हौ गय़ा। ये विवाह मेरे कज़िन कि थि, इसलिये हमें विवाह सें तीनदिन पहले हि वहा जानां पड़ा। इस वजह सें हमें अकेले रहने कां बिल्कुल भि मौका नहि मिला, औऱ हमारी बीच कि अंतरंगता कों आगे बढ़ाना असंभव हौ गय़ा।
गाँव पहुँचते हि मे औऱ सुधा दिदी अपने कज़िनों सें मिलने केँ लिए उत्साहित हौ गए। लंबे वक़्त केँ बाद हम् सब एक् संग थें औऱ ये मिलन बेहद रोमांचक लगरहा थां। दुल्हन भि हमारे संग जुड़ गई औऱ उसने हमें गाँव कां दौरा कराया, घऱ-घऱ औऱ गलियों कि सैर करवाई। हर स्थान कि हलचल, लोगों कां गर्मजोशी सें स्वागत औऱ गाँव कि छोटी-छोटी बातें हमेंनया उत्साह देरही थि।
रात केँ टाइम, खानां खाने केँ बादसब नें तय किया कि चूँकि घऱ बहोत छोटा हैं, इसलिये सब जवानछत पऱ सोने जाएंगे। वहाकुल 11 लोग थें, 5 लड़कियाँ औऱ 6 लड़के। खुलीहवा मे तारों भरे आकाश केँ नीचे, सब नें अपने-अपने बिछौने बिछालिए औऱ बैठकर बातें करनेलगे। हम् सभी बहोत दिनों बाद एक्-दूसरे सें मिलरहे थें, तौ बातों कां सिलसिला आधीरात तक चलतारहा।
हम् सबलोग एक्-दूसरे कां मज़ाक़ उड़ाते औऱ जोर-शोर सें हंसते। जबसभी कि आंखों पऱ नींदआने लगी तौ हरकोई आहिस्ता अपनी स्थान पऱ लेट गय़ा, औऱ सोने कि कोशिश करनेलगा। ठंडीहवा औऱ खुले आकाश केँ नीचे, सब सगे भइया बेहन पास-पास लेटगए ताकि किसी कों अजीब महसूस नां होँ। बाकीसब कज़िन भि आरामसे सोने कि स्थिति मे आँ गए।
मे भि सोने कि कोशिश कररहा थां, मगर मेरी आँखें स्वयं-ब-स्वयं खुलीरह गई। सुधा दिदी मेरेबगल मे सोरही थि औऱ उनकी मौजूदगी मुझे पूरीतरह सें जागृत कररही थि। उनकी साँसें मेरे चेहरे केँ पासआती, औऱ उनके जिस्म कि गर्माहट महसूस होती।
उनका चेहरा बेहद शांतलग रहा थां, हल्की मुस्कान उनके होंठों पर्र खेलरही थि। नींद मे उनकी पलकों कि हल्की हलचल देखीजा सकती थि। उन्होंने अपनाआधा बदन छोटी चादर मे ढकरखा थां, मात्र चेहरा औऱ छाती दिखाई देरही थि। उनके साँस लेने केँ संग उनकी छाती आहिस्ता उठती औऱ गिरती, औऱ हल्के कपड़े केँ नीचे उनके निप्पल कड़ेनजर आँ रहे थें। उनकी छातीगोल औऱ कोमलदिख रही थि, साँसों केँ संग आरामसे फूलती औऱ सिकुड़ती, हर हल्की हलचल मे नाजुक बनावट औऱ ताप महसूस होँ रहा थां। कपड़े कि हल्की पारदर्शिता औऱ निप्पल कि कठोरता उनके आकर्षण कों औऱ बढ़ारही थि।
मे अपनी इच्छाओं कों औऱ रोक नाँ पाया। मैंने अपनाआधा बदन भि चादर केँ नीचे लें जाकर उनकेपास रखा, औऱ आहिस्ता उन्हें छूना शुरुआत किया। हाथ कि हल्की स्पर्श उनके जिस्म कि नाजुकता औऱ गर्माहट कों महसूस कररहा थां। फिन मैंने उनके कपड़े केँ ऊपर आहिस्ता उनकी छाती कों दबाया। उनकानरम औऱ गरम स्पर्श मेरी हथेली मे पूरीतरह महसूस हौ रहा थां, औऱ उनके निप्पल कि कठोरता कपड़े सें महसूस होतेहुए मेरी संवेदनाओं कों औऱ तेजकर रही थि। हर हल्की हरकत मे उनकी छाती कि गोलाई औऱ मुलायमता मेरेलिए एक् अलग हि अनुभव लारही थि।
अचानक, मे थोडा अधिकदबा बैठा औऱ अनजाने मे उन्हें जगा दिया। उन्होंने हल्का सां हिलते हुए आवाज़ निकालने कि कोशिश कि, औऱ मैंने जल्दी अपनी दूसरी हथेली उनके मुँह पऱ रख दि ताकिकोई आवाज़ नां होँ। थोड़ी देरबाद, उन्होंने धीरे-धीरे सें मेराहाथ हटाया औऱ कान केँ पास फुसफुसाते हुएकहा, “तुम् क्याँ कररहे होँ? अगरकोई जाग गय़ा तौ?”
मैंने उन्हें भरोसा दिलाया, “कोई नहि जागा, सभी सोरहे हैं। अब बहोत देर हौ चुकी हैं। ”
सुधा दिदी नें हल्की सि डर औऱ लज्जा महसूस कि, मगर उनकी आँखों मे एक् चमक औऱ चेहरे पऱ मुस्कान आई। फिन उन्होंने धीरे-धीरे सें फुसफुसाते हुएकहा, “ठीक हैं, तुम् कर सकते होँ। ” उनकी आवाज़ मे डर औऱ शरम थि, मगर वो इशारा कररही थि कि उन्होंने अनजाने मे मुझे अनुमति दे दि थि।
इसकेबाद, उन्होंने अपनीपीठ कों हल्का सां उठाया औऱ टी-शर्ट केँ नीचे ब्रा पूरीतरह सें खोल दि। इसके जल्दी बाद, उन्होंने फिन सें अपनी स्थान ठीक कि औऱ सोने कां नाटक किया, जैसेये सभी सामान्य औऱ आरामदायक होँ।
मे महसूस कररहा थां कि मेरी उत्तेजना चरम पर्र थि। सुधा दिदी नें मेरीओर देखकर हल्की मुस्कान दि, औऱ उनकी आँखों मे शरम औऱ उत्सुकता दोनों झलकरहे थें। धीरे धीरे, मैंने अपनाहाथ उनकी टी-शर्ट केँ नीचे डालते हुए उनकी गर्माहट औऱ मुलायमता कों महसूस करना शुरुआत किया।
उनके खुले स्तनों कों हाथ मे लेते हि महसूस हुआ कि वे कितने नरम औऱ गरम हैं। हर हल्की हरकत मे उनकी त्वचा कि नाज़ुकता औऱ कोमलता मेरे हाथों मे पूरीतरह महसूस हौ रही थि। सावधानी सें, मे उन्हें धीरे धीरे दबाने लगा, ताकि आस-पास सोरहे किसी कों भि कोई आवाज़ नां सुनाई दे, मगर हर स्पर्श मेरी उत्तेजना कों औऱ बढ़ारहा थां।
सुधा दिदी कां चेहरा भि सभीकुछ बयांकर रहा थां। उनकी आँखें आधीबंद थि, होंठ हल्के सें हिलरहे थें, औऱ चेहरे पर्र लज्जा केँ संग हल्की मस्ती औऱ उत्सुकता झलकरही थि। कभी-कभी उनकी सांसें तेज़ होती, औऱ हर छोटे-छोटे भाव मे येसाफ दिखरहा थां कि वो मेरी हरकतों कों महसूस कररही थि, औऱ उसेमजा आँ रहा हैं।
हम् पूरीतरह चुप रहने कि कोशिश कररहे थें। अगर किसी नें अपनी पोज़िशन बदली याँ खाँसी कि, तौ हम् जल्दी रुक जाते औऱ जैसे हि सभीठीक लगता, फिन धीरे धीरेआगे बढ़ते। हरबार पक्का हौ जाने केँ बाद कि कोई जागा नहि, हम् फिन सें अपनी हरकतें शुरुआत करते। ये सावधानी हमें औऱ रोमांचित कररही थि, औऱ हर स्पर्श कों औऱ भि खासबना रही थि।
मैंने अब उनके स्तनों कों जोर सें दबाना शुरुआत किया। वो अपनी सांसें रोकते हुए हल्की-हल्की आवाज़ निकाल रही थि औऱ अपने होंठदबा कर अपनी आवाज़ कों रोकने कि पूरी कोशिश कररही थि। उसके चेहरे पऱ लज्जा औऱ उत्तेजना कां मिश्रण साफ़ दिखाई देरहा थां, औऱ हर हल्की हरकत पर्र वो कुछ लम्हा केँ लिए स्वयं कों संभालने कि कोशिश कररही थि।
मे स्वयं समझ नहि पारहा थां कि आगे क्याँ करूँ। बस मे उनका स्पर्श महसूस करना चाहता थां। धीरे धीरे मैंने उनके निपल्स कों अपनेहाथ मे लिया औऱ उन्हें दबाना शुरुआत किया। हर हल्का दबाव उनकी प्रतिक्रिया कों औऱ स्पष्ट बनारहा थां, औऱ वो अपनी सांसें रोकते हुए स्वयं कों संभालने कि कोशिश कररही थि।
मगर जैसे हि मैंने थोडा औऱ ज़ोर सें दबाया, वो अपनी आवाज़ कों रोक नहि पाई औऱ एक् छोटी सि आवाज़ निकल गई। मैंने जल्दी अपनाहाथ उसके मुँह पऱ रखा औऱ कहा, “दिदी, आवाज़ मत निकालो। ”
उसने धीरे-धीरे सें कहा, “मे स्वयं कों रोक नहि पारही हूं, धीरे-धीरे औऱ हल्का करो। ” उसकी आवाज़ मे हल्की हिचकी औऱ लज्जा दोनों थि, औऱ वो चाहरही थि कि मे थोडा ध्यान रखूँ औऱ उसे आहिस्ता महसूस करूँ।
मैंने उसके कहने पऱ आरामसे फिन सें उनके स्तनों कों छूना शुरुआत किया। हर हल्की दबावट, हर कोमल स्पर्श उसे इतना अच्छा लगरहा थां कि वो अपनी सांसें औऱ हल्की फुसफुसाहटों सें स्वयं कों रोक नहि पारही थि। मे सावधानी सें हर स्थान अपनाहाथ घुमारहा थां, निपल्स कों धीरे धीरेदबा रहा थां, औऱ देखरहा थां कि उसके चेहरे पऱ केसेशरम औऱ खुशी कां मिश्रण खिलउठा।
उसकी प्रतिक्रिया इतनी सजीव औऱ सहज थि कि मुझेहर स्पर्श कां असर औऱ भि अधिक महसूस हुआ। ये सभी इतना धीमा औऱ कोमल थां कि वो पूरीतरह लिपटकर मुझसे जुड़ी हुईँ महसूस कररही थि औऱ हर हल्की हरकत उसकेलिए मोहकबन रही थि।
तभी अचानक किसी नें धीरे-धीरे सें फुसफुसाया, “तुम् लोग क्याँ कररहे होँ?” ये आवाज़ इतनी अचानक आई कि मे औऱ वो दोनों ठिठकगए।
मैंने जल्दी अपनाहाथ उसकी टी-शर्ट सें हटा लिया औऱ चारों ओर देखने लगा। मेरी नज़र सामने खड़े इंसान पर्र पड़ी औऱ मे चौंक गय़ा। वो दुल्हन थि।
too be continued
दीदी ने चखाया अपना गीलापन - दीदी की चुत – New Episode
Episode 6
सुधा दिदी औऱ मे चांदनी मे दुल्हन कां चेहरा देखने लगे। वो हम् दोनों कों गुस्से सें ताड़रही थि। वैसे भि हम् दोनों कों दुनिया कां कोई भि इंसान उस हालत मे पकड़ लेता, तोँ हम् पऱ क्रोध होँ जाता। हम् दोनों भइया-बेहन थें, औऱ इसतरह कि हरकत करना किसी कों भि अजीब लगता। पऱ हम् दोनों केँ लिएये एक्-दूसरे कां प्रेम थां। हमें नहि पता थां कि दुल्हन सें क्याँ कहें, औऱ यहीहाल मेरी दिदी कां भि थां।
दुल्हन नें एक् बारफिन हमसे पूछा कि हम् क्याँ कररहे थें। मगरइस बार उसके शब्दों मे पहले सें कहीं ज़्यादा क्रोध झलकरहा थां।
मैंने बात शुरुआत करने कि कोशिश कि, “हम् दोनों कुछ भि नहि कररहे थें… बसऐसे हि…”
मगर मेरीबात पूरी होने सें पहले हि दुल्हन नें हाथउठा कर मुझेरोक दिया औऱ मेरेपास आकर धीमे सें फुसफुसाई, “झूठमत कहो। मैंने सभी देखा हैं, तुम् दोनों क्याँ कररहे थें। येगलत हैं… भइया-बेहन केँ बीचऐसा नहि होना चाहिए। ”
उसकी आवाज़ सें पास हि छत पर्र सोएहुए हमारे कुछ चचेरे भइया-बेहन करवट लेनेलगे। छत छोटी थि, सभी एक्-दूसरे केँ पास हि सोएहुए थें। तभी उनमें सें एक् नें उनींदी आँखें खोलते हुए पूछा, “क्याँ हुआऊपर? इतनी आवाज़ क्यूं आँ रही हैं?”
दुल्हन नें जल्दी मुस्कुराने कि कोशिश कि औऱ ऊँची आवाज़ मे बोलि, “कुछ नहि हुआ, बस हम् लोग वैसे हि बातें कररहे थें। तुम् सभीसो जाओ। ” इतनाकह कर वो आहिस्ता छत केँ दूसरे कोने कि ओरचली गई, जैसेकुछ हुआ हि नं होँ।
उसके जाते हि आहिस्ता सभीफिन सें सोनेलगे। मगर मे औऱ सुधा दिदी वहींछत पर्र लेटेहुए थें। हम् दोनों कि आँखों मे नींद नहि थि। हमेंडर लगरहा थां। अभि-अभि जौ हुआ, अगर किसी औऱ नें देख लिया होता तौ क्याँ होता? औऱ आगे हमसे क्याँ गलती होँ सकती हैं? इन खयालों केँ संग हम् चुप-चाप करवट बदलते रहे औऱ एक्-दूसरे कि तरफ देखने सें भि कतराते रहे।
सुभह कां उजाला फैला तौ सभीकुछ सामान्य लगनेलगा। पंछियों कि आवाज़, गरमचाय कि गंध औऱ घऱ मे हलचल सें माहौल बदल गय़ा थां। तभी दुल्हन नें हम् दोनों कों इशारे सें बुलाया औऱ कहा, “मेरे कमरे मे आओ, मुझे तुम् दोनों सें कुछ ज़रूरी बात करनी हैं। ”
हम् दोनों आहिस्ता उसके कमरे मे गए। जैसे हि हम् अंदर पहुँचे, दुल्हन नें द्वार (दरवाज़ा) बंदकर दिया। उसने हमें इशारा किया कि पलंग पर्र बैठ जाएँ। मे औऱ सुधा दिदी चुप-चाप जाकर बिस्तर पर्र बैठगए, जबकि दुल्हन हमारे सामने खड़ीरही, जैसे वो कुछ बड़ा कहने वाली होँ।
दुल्हन नें गहरी साँसली औऱ कहना शुरुआत किया, “जोँ तुम् दोनों कलरात कररहे थें, वोँ ठीक नहि हैं… यह रिश्ते केँ ख़िलाफ़ हैं। ”
मगरतभी सुधा दिदी नें उसकीबात बीच मे काट दि औऱ शांत स्वर मे बोलीं, “हमेंपता हैं हम् क्याँ कररहे हें। ये हमारे लिएगलत नहि हैं। हम् दोनों नें इसेसमझ कर हि अपनाया हैं। ”
दुल्हन नें सख़्ती सें जवाब दिया, “चाहे तुम् दोनों इसेसही मानो याँ गलत, मगर सचयही हैं कि तुम् भइया-बेहन हौ। औऱ भइया-बेहन केँ बीचऐसा नाताकभी भि सही नहि होँ सकता। ”
सुधा दिदी नें धीरे-धीरे सें मेरे चेहरे कों अपने हाथों मे लिया औऱ मेरी आँखों मे देखकर मुस्कराई। फिन उसने अपने होंठ मेरे होंठों पऱ रखदिए। उनका किस्स नरम, गरम औऱ धीमा थां, जैसेहर स्पर्श मे चाहत औऱ रोमांस कां मिश्रण होँ। मे बिस्तर पऱ बैठाहुआ उनका स्पर्श महसूस कररहा थां। उनकी उंगलियाँ मेरे गालों पर्र हल्की-हल्की सरसराहट कररही थि। उनकाबदन मेरे लगभग थां औऱ उनके बूब्ज़ मेरे सीने सें टकरारहे थें।
ये किस्स इतनी मधुर औऱ गहराई सें भरी थि कि बिस्तर पर्र बैठाहुआ मे पूरीतरह उससमय मे खो गय़ा। उनके होंठ मेरे होंठों केँ संग जुड़ते औऱ अलग होतेरहे, दोनों कि सांसें एक् संगमिल रही थि, औऱ हर स्पर्श मे एक् अजीब रोमांच औऱ नज़दीकी कां एहसास थां।
तभी दुल्हन नें अचानक बीच मे हमारी ओर इशारा किया औऱ कहा, “रुको! तुम् दोनों क्याँ सोचरहे हौ? तुम् दोनों कों समझना होगा कि येसही नहि हैं। ” उसने गंभीर आँखों सें हमें घूरते हुए प्रश्न किया, जैसे वो हमारी हरकतों केँ पीछे कां कारण जानना चाहती होँ। हमें एक् समय केँ लिए चुप्पी छा गई, औऱ बिस्तर पर्र बैठाहुआ मे उनके शब्दों कों महसूस करतेहुए सोच मे पड़ गय़ा कि भइया बेहन कां इसतरह कां नाता आखिर क्यूं गलत हैं?
सुधा दिदी नें दुल्हन कि तरफ देखा औऱ धीरे-धीरे सें कहा, “ये गलत नहि हैं। हमेंभले हि भइया-बेहन बनकर पैदा किया गय़ा हौ, मगर हम् एक्-दूसरे सें प्रेम करते हें। औऱ प्रेम मे कोई गलती नहि होती। चाहे वो सिर्फ़ एक् किस्स हौ याँ इसकेआगे कां नाता, सभी मे सच्चाई औऱ भावना हैं। ” उसने अपनीबात कों मजबूती सें कहतेहुए मेरीओर देखा औऱ फिन मुस्कुराई।
उसकी बातें सुनकर मुझे भि हिम्मत मिली। धीरे धीरे मैंने अपनाहाथ उसके स्तनों पऱ रखा औऱ हल्के सें दबाने लगा। मेरा इरादा सिर्फ़ ये दिखाना थां कि मे भि उसके प्रेम औऱ नज़दीकी कों महसूस करना चाहता थां। सुधा दिदी नें मेरीओर देखा औऱ मुस्कान केँ संग मेरी प्रतिक्रिया कों स्वीकार किया।
दुल्हन सभीकुछ देखरही थि, उसके चेहरे पऱ हैरानी औऱ सदमे कि झलक थि। उसकी आँखें बड़ी होँ गई थि औऱ उसनेबस खड़ी होकर हमारी हरकतों कों देखा, जैसेउसे विश्वास हि नहि होँ रहा थां कि येसभी सामने हौ रहा हैं।
सुधा दिदी नें दुल्हन कि हैरान आँखों कि ओर देखा औऱ धीरे-धीरे सें बोलि, “कोई भि इसेसमझ नहि पाएगा, मगर हम् मात्र भइया-बेहन नहि हें। हम् इस रिश्ते केँ लिए पैदाहुए हें। ” उसने मेरी तरफ़ देखते हुए मुस्कान दि औऱ मेराहाथ अपने स्तनों पऱ महसूस करतेहुए उसे सहमति दि।
थोड़ी देरबाद दुल्हन कमरे सें बाहर् चली गई। जैसे हि उसने द्वार (दरवाज़ा) बंद किया, हम् दोनों एक्-दूसरे कि आँखों मे देखने लगे औऱ हंस पड़े, जैसे हमनेकोई बड़ीजीत हासिल करली होँ। हम् जानते थें कि दुल्हन हमारे इस रिश्ते केँ बारे मे किसी कों नहि बता सकती औऱ येबात उसकेलिए भि मुश्किल थि। इसीसमझ औऱ सुरक्षा कि भावना केँ बीच हम् एक्-दूसरे कि ओर झुके औऱ फिन सें गहरी, रोमांचक किस्स करनेलगे, ये जानते हुए कि हमारे प्रेम कां ये लम्हा सिर्फ़ हमारे लिए हैं औऱ कोईइसे रोक नहि सकता।
कल विवाह कां दिन थां, इसलिये आजरात सब नें मिलकर जश्न मनाना शुरुआत कर दिया। घऱ केँ सामने सबलोग इकट्ठा हुए औऱ हल्दी कि रस्ममना रहे थें। मे पहले सें हि हल्दी इवेंट मे पहुँच कर प्रतीक्षा कररहा थां। सुधा दिदी कमरे मे कपड़े बदलरही थि। थोड़ी देरबाद वो सजधजकर होकर इवेंट मे आई। पीले औऱ नारंगी रंग कां हल्दी लहंगा उनके जिस्म पऱ हुस्न सें स्लिम थां।
लहंगे कि हल्की फैब्रिक उनके स्तनों औऱ हिप्स कि हसीन आकार कों सहजरूप सें उभाररही थि। उनकीकमर पतला औऱ सजीवदिख रही थि, औऱ लहंगे केँ डिज़ाइन कि सजावट उनके कंधों औऱ हाथों पर्र चमकरही थि। हरकदम पऱ उनका चाल-चलन मोहकलग रहा थां, औऱ हल्दी केँ रंग मे उनकी त्वचा पर्र नरमी औऱ गर्माहट कां एहसास होँ रहा थां। उनकेबाल खुले औऱ सजेहुए थें, चेहरे पर्र हल्की मुस्कान औऱ आँखों मे चमक, पूरे हल्दी समारोह मे उनकी सुंदरता औऱ आकर्षण कों बढ़ारही थि।
जब हम् दुल्हन केँ पास पहुंचे औऱ हल्दी लगाने लगे, तौ दुल्हन नें हमारी तरफ गुस्से भरी नजरों सें देखा। मगर हमनेउसे नजरअंदाज किया औऱ हँसते हुए हल्दी कि रस्म कां मज़ा लिया। तभी डीजे नें म्यूज़िक चालू किया, औऱ हम् दोनों नें एक्-दूसरे कां हाथथाम कर डांस करना शुरुआत कर दिया।
कुछ हि देर मे हमारे कुछ चचेरे भइया औऱ रिश्तेदार भि डांस मे शामिल होँ गए। सब हँसी-खुशी औऱ म्यूज़िक केँ ताल पऱ झूमरहे थें। डांस करतेहुए मेराहाथ कभी-कभी सुधा दिदी केँ जिस्म केँ कुछ हिस्सों कों छू जाता। कभी ये पूरीतरह सें गलती सें होता, तौ कभी मे जान-बूझ करउसे महसूस करने केँ लिए अपनेहाथ कि दिशा बदलता। वो मुस्कराते हुए मेरीतरफ देखती औऱ मुझे रोकने कि बजाय अपने आप् मे उस नज़दीकी कां आनंद लेती।
थोड़ी देरबाद, सुधा दिदी नें धीरे-धीरे सें कहा, “मुझे थोडा अजीब महसूस हौ रहा हैं, मुझेकुछ वक़्त केँ लिए ब्रेक चाहिए। ”
चूंकि घऱ मे बाकी कमरेभरे थें, इसलिये हम् दोनों ब्रेक लेने केँ लिए दुल्हन केँ कमरे कि ओरचले गए। वो थोड़ी हिचकिचाते हुए बोलीं, “इस टाइम मात्र यहीरूम खाली हैं, मुझेबस कुछ टाइम आराम चाहिए। ” हम् चुप-चाप कमरे मे गए।
सुधा दिदी बैड पऱ लेट गई औऱ आँखें बंदकर लीं। हर सांस केँ संग उनके मम्मों हल्के सें ऊपर-नीचे हौ रहे थें, औऱ उनकेबदन कि हर हलचल उनके सीने केँ गोलाई कों औऱ भि स्पष्ट कररही थि। हल्की सि पसीने कि बूंद उनके होंठों पऱ झलकरही थि, जिससे उनकी थकान औऱ गर्मी कि झलक दिखाई देरही थि।
मे आरामसे कमरे सें बाहर् जानेलगा, मगर सुधा दिदी नें मुझेरोक दिया। थोड़ी शर्मीली सि मुस्कान केँ संग उन्होंने कहा, ” इतना जल्द क्यूं जारहा हैं? तुम्हारी दिदी अभि थोडा थकी हुई हैं, क्याँ तुम् कुछकर सकते हौ?”
मैंने चौंककर पूछा, “क्याँ ?”
सुधा दिदी नें धीरे-धीरे सें अपनेहाथ फैलाए औऱ मुझे अपनेपास आने कां इशारा किया। उनका शर्मीला चेहरा हल्की मुस्कान सें झिलमिला रहा थां। मे उसकेपास गय़ा औऱ वो अपनेहाथ मेरे कंधों पर्र रखकर मुझे धीरे-धीरे सें अपनेऊपर लेटने कां संकेत देनेलगी। मे उसकेबदन केँ ऊपरलेट गय़ा, औऱ वो मुस्कराते हुए मेरीपीठ पऱ अपनेहाथ रखकर मुझे अपनीतरफ खींचती रही। उसके मम्मों मेरे सीने केँ संग हल्के सें दबरहे थें, उनकी नरमी औऱ गर्माहट हर सांस केँ संग महसूस हौ रही थि।
फिन सुधा दिदी नें मेरे होंठों कि ओर झुकते हुए मुझे धीरे-धीरे सें चुमना शुरुआत किया। मे जल्दी उसे सपोर्ट करनेलगा, औऱ हमारे जुड़ते होंठों केँ बीच उनकीजीभ आरामसे मेरीजीभ कों छूनेलगी। हर स्पर्श मे गर्माहट औऱ हल्की नमी थि। उनकीजीभ औऱ मेरीजीभ कां मिलना हमें औऱ भि लगभगला रहा थां। मे उनके होंठों कां स्वाद लेँ रहा थां, जिसमें हल्की-हल्की उनकी लिपस्टिक कि मिठास भि शामिल थि।
जैसे-जैसे किस्स गहराती गई, मैंने धीरे धीरे अपनेहाथ उनके स्तनों कि ओर बढ़ाए। उनके कपड़े कि फैब्रिक केँ नीचे उनके स्तनों कि नरमी औऱ उभार मेरी हथेली मे पूरीतरह महसूस होँ रहा थां। हर स्पर्श केँ संग उनकाताप, हल्की नर्मी औऱ हल्की भार वो महसूस करारही थि कि जैसे जिस्म औऱ दिल एक्-दूसरे केँ संग पूरीतरह जुड़गए हों। उनके मम्मों मेरेहाथ मे सिकुड़ते औऱ फैलते महसूस होँ रहे थें, औऱ ये स्पर्श हरसमय मुझे औऱ ज्यादा रोमांचित कररहा थां, जैसेहर सांस औऱ हर दबाव कां असर मेरे पूरे जिस्म मे फैलरहा होँ।
थोड़ी देरबाद, दिदी नें आहिस्ता किस्स रोक दि औऱ शर्मीली सि आवाज़ मे मुझसे पूछा, “क्याँ मे… तुम्हारे लन्ड कों चख सकती हूं?” उसका चेहरा हल्का लाल थां औऱ आँखों मे झिझक केँ संग उत्सुकता झलकरही थि।
मैंने उसे देखा औऱ महसूस किया कि वहीशरम, जोँ दिदी कों कुछसाल पहले छोटे शॉर्ट्स पहनने मे होती थि औऱ मेरे सामने शर्माती थि, आज पूरीतरह प्रेम औऱ चाहत मे बदल गई हैं। अब वो खुलेदिल सें मेरे सामने आँ रही थि औऱ सीधेतौर पर्र पूछरही थि कि क्याँ वो मेरे लन्ड कों चख सकती हैं औऱ उनकाइस तरह कहना मुझे प्यारा लगरहा थां।
मे बैड पऱ आहिस्ता लेट गय़ा औऱ अपने जीन्स उतारदिए। जैसे हि मे अपनी अंडरवियर खोलने कि कोशिश करनेलगा, दिदी नें मुझे रोकते हुए हल्की शर्मीली मुस्कान केँ संग पूछा, “क्याँ मे इसेकर सकती हूं?” उसकीये बातसुन कर मे बिस्तर पऱ पूरीतरह आहिस्ता लेट गय़ा औऱ उसके सामने पूरीतरह सहज महसूस करनेलगा।
दिदी नें आहिस्ता मेरी अंडरवियर उतारी औऱ मेरीओर देखा। उसका चेहरा लाल थां औऱ उसकी आँखों मे हल्की शरम औऱ उत्सुकता झलकरही थि। जब उसने मेरा लन्ड देखा, तोँ वो मुस्कराई, मगर उसकी लज्जा अभि भि दिखाई देरही थि। उसने अपने उंगलियों सें धीरे धीरेउसे छुआ। उस हल्की सि छुअन नें मेरे जिस्म मे गर्माहट औऱ उत्तेजना फैला दि। हर स्पर्श मेरेलिए नया औऱ रोमांचक थां, औऱ मे उसकीहाथ कि नर्मी सें पूरीतरह खुश महसूस कररहा थां।
कुछ हि लम्हा बाद, दिदी नें शर्मीली मुस्कान केँ संगकहा, “मे तुम्हें प्रेम करती हूं। ” औऱ उसकेलाल होंठ मेरे लन्ड कों आरामसे चूमने लगे। जब उसके लिपस्टिक भरे होंठ मेरे लन्ड कों छूते, तोँ मुझे बेहद अच्छा लगरहा थां। उसकीजीभ औऱ होठों कि गर्माहट नें मेरे जिस्म मे रोमांच कि लहरें फैलादीं।
फिन दिदी नें आहिस्ता अपनेहाथ सें मेरे लन्ड पर्र कुछ हल्की-हल्की स्ट्रोक्स देना शुरुआत किया। उसकी नर्म उंगलियों औऱ हाथ केँ स्पर्श सें मेरा लन्ड पूरी लंबाई मे सख्त हौ गय़ा। उसकीये हरकत मेरेलिए बेहद उत्तेजक औऱ सुखद थि, औऱ मे पूरीतरह उसके स्पर्श औऱ चाहत मे खो गय़ा।
कुछ लम्हा बाद, दिदी नें हल्की लज्जा केँ संग पूछा, “क्याँ मे इसेचूस सकती हूं?”
मे मुस्कराया औऱ कहा, “तुम्हारा मुंह फूलों सें भि बेहतर हैं, दिदी। तुम् चूस सकती होँ। ” मेरीये बातसुन कर वो मुस्कुराई औऱ मेरे लन्ड कों धीरे धीरे अपने होंठों मे लेँ लिया।
दिदी नें अपने होंठों औऱ जीभ कां इस्तेमाल करतेहुए उसे आहिस्ता चूसना शुरुआत किया। उसकीजीभ केँ हल्के स्पर्श औऱ गर्माहट नें मेरे पूरेबदन मे रोमांच फैला दिया। जब उसकीजीभ मेरे लन्ड केँ चारों ओर घूमती, तौ मुझे उसके स्पर्श कि गहराई औऱ उसकी चाहत कां अहसास हुआ।
धीरे धीरे, उसने अपनीगति औऱ गहराई बढ़ाई, अपने मुंह कों आहिस्ता ऊपर-नीचे मूव करतेहुए, ताकि मे हर स्पर्श महसूस कर सकूँ। बीच-बीच मे वो रुकती, मुझे देखती औऱ शर्मीली मुस्कान केँ संग पूछती, “मे अच्छा कररही हूं नाँ?” इसतरह उसकी नजरों औऱ हल्की मुस्कान नें मेरे उत्तेजना कों औऱ बढ़ा दिया।
जैसे-जैसे उसने आरामसे चूसना जारीरखा, मे महसूस कर सकता थां कि मेरा लन्ड उसके मुंह मे औऱ अधिक सख्त हौ गय़ा। कभी-कभी उसका मुंह पीछे तक तक जाता औऱ उसकीजीभ केँ पीछे कां स्पर्श मेरे लन्ड केँ टॉप पर्र महसूस होता। कभी-कभी वो हल्की गलती सें उसके दांत मेरे लन्ड कों छू लेते, जिससे हल्की चौंक औऱ रोमांच पैदा होता। उसकी मासूम मगर जान-बूझ कर कि गई हर हरकत नें मुझे औऱ उत्तेजित कर दिया।
उस दौरान हमें एहसास हुआ कि कमरे केँ बाहर् कुछलोग थें। येसुन कर हमारी धड़कनें तेज होँ गई औऱ हल्का डर भि महसूस हुआ। मगर दिदी नें अपना मुंह नहि रोका; वो जैसे अपनेकाम मे पूरीतरह लग गई थि, येजान कर कि उसकाकाम सिर्फ़ अपने भइया कों खुश करना थां।
आरामसे, दिदी नें अपनीगति बढ़ानी शुरुआत कि। उसका मुंह औऱ हाथ दोनों हि ज्यादा तेज हौ गए। मे अपनी सीमा तक पहुँच चुका थां औऱ तेज़ी सें बढ़ती आग केँ बीच मैंने पूछा, “क्याँ मे अब तुम्हारे चेहरे पऱ कर सकता हूं?” दिदी नें शर्मीली मुस्कान केँ संग इजाजत दे दि।
फिन दिदी बैड पर्र लेटी औऱ मे उसके जिस्म पर्र बैठ गय़ा। मेरा लन्ड धीरे धीरे उसके होंठों औऱ चेहरे सें रगड़ने लगा। उसने हाथों सें मुझेकुछ हल्के स्ट्रोक्स देना शुरुआत किए। उसकीये हरकत मेरे उत्तेजना कों औऱ बढ़ारही थि। मेरी सीमा केँ पास पहुंचते हि, मैंने उसे बताया कि मे अब अपने आप् कों रोक नहि सकता औऱ उसके चेहरे पऱ समाप्त करना चाहता हूं।
जैसे हि मैंने अपनी ख़्वाहिश पूरी करना शुरुआत किया, मेरी पहली बूंद उसके होंठों कों छू गई, जिससे वो हल्की सि चौंकी औऱ मुस्कुराई। अगली बूंद उसकी ठोड़ी औऱ गालों पऱ गिरी, आहिस्ता चेहरे कों ढकतेहुए। फिन मेरी सारी तरलता उसकी आँखों, गालों, होंठों औऱ ठोड़ी पर्र फैल गई, उसके चेहरे कों पूरीतरह ढकतेहुए। उसके होंठ, गाल, औऱ माथा मेरीगरम रवानगी सें सनेहुए थें, औऱ उसकी त्वचा पऱ मेरी गर्मी कां पूरा एहसास होँ रहा थां। दिदी नें इसे सहतेहुए हल्की मुस्कान दि, औऱ उसका पूरा चेहरा मेरी तरलता सें पूरीतरह सनाहुआ थां।
इसकेबाद, मे आरामसे उसके जिस्म सें उठ खड़ाहुआ। दिदी मेरीओर मुस्कुराती हुइ देखरही थि। कुछ लम्हा केँ लिए, वो मुस्कान केँ संग मेरे औऱ देखती रही औऱ फिनउसे यादआया कि कुछ बूंदें अभि भि उसके होंठों पऱ थि। उसने अपनी उंगलियों कि सहायता सें उन बूंदों कों चखा औऱ शरम केँ संगकहा, “ये बहोत अच्छा हैं। ”
उसकेये कदमदेख कर मे थोड़ी लज्जा महसूस करनेलगा। दिल मे एक् अजीब सि घबराहट हुईँ क्योंकि मे समझरहा थां कि येअब केवल भइया-बेहन कां नाता नहि रहा;ये हमारी सीमा सें कहीं ज़्यादा गहरा होँ चुका थां।
तभी अचानक कमरे कां दरवाजा जोर सें खटखटाया गय़ा। हमारी सांसें फंस गई औऱ हम् दोनों नें एक्-दूसरे कि ओर देखा। मां कि आवाज़ सुनाई दि, “सुधा! गोलू! तुम् लोग कमरे मे क्याँ कररहे हौ?” हमारा दिल धक-धक करनेलगा औऱ हम् समझगए कि अब छिपने याँ जल्द संभालने कां वक़्त आँ गय़ा हैं।
too be continued
दीदी ने चखाया अपना गीलापन - दीदी की चुत - Next part mein bada twist
story ab har update ke bad intense hoty jaa rhi hain. Dekhte hain ab sudha or Holi kaa safai dete hain kamre mai band hone kaa
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