नादान लन्ड केँ जलवे - Full Story Part 1
हेलो दोस्तों बहोत दिनों केँ बाद एक् नई शुरुआत करनेजा रहा हूं अपना सपोर्ट बनाये रखनाइस कथा मे कुछनया एक्सपीरियंस मिलेगा जोँ बाकीसभी सें हट केँ रहेगी प्रेम तड़प नादानी चुदायी डरहवस दिवानगी सभी मिलेगा मिलते हें जल्द हि नए किरदार मे आपका अपनायार देशी लन्ड ( लोकलबॉय)।
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नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -1
लेखक - लोकलबॉय
*** साल कां मासूम सां विनय अपनी मासी केँ संग हॉस्पिटल केँ आइसीयू केँ बाहर् बैठाहुआ थां। उसके बापू अंदर आइसीयू मे अपनी जीवन केँ लिएलड़ रहे थें….एक् अंजान सां खोफ़ उसकी मौसी मामाजी औऱ मामीजी केँ चेहरे पऱ छायाहुआ थां….जब कभीकोई नर्स याँ वॉर्ड बॉय आइक्यू सें बाहर् आता, तौ उसके मामाजी (अजय) अपने जीजा केँ बारे मे उनसे पूछते….पर्र कोई भि कुछ जवाब नहींदे रहा थां….विनय खोफ़जदा अपनी मौसी सें चिपका हुआ थां….उसने अपनी मौसी केँ चेहरे कि तरफ नज़ारे उठाते हुए सहमेहुए लहजे सें कहा…”मौसी जी माँ कहां गई, हैं….वोँ अभि तक आई क्यूं नहीं….”
शीतल:आज जाएगी बेटा….वोँ तुम्हारे पिताजी कां ऑपरेशन होना हैं नां…उसके लिए पैसे लेने गई, हैं.
शीतल नें अपने भइया यानि कि विनय केँ मामाजी कि ओर लाचारगी सें देखते हुए कहा….अंदर विनय केँ पिताजी कि हालत बेहद खराब थि….अधिक दारू पीने कि वजह सें उनकी दोनो किड्नी खराब होँ चुकी थि। औऱ डॉक्टर्स केँ पास सिर्फ़ एक् हि आख़िरी मार्ग बचा थां….किड्नी ट्रॅन्सप्लॅंट कां….पर्र इतना महँगा ऑपरेशन करवाना कोई आसानकाम नहीं थां….प्राइवेट हॉस्पिटल मे जब तक आप् फीसजमा नहीं करवा देते तोँ वोँ ऑपरेशन कहां करते हैं….उसकी मामीजी (किरण) उसकेपास आती हैं….औऱ विनय केँ सर कों सहलाते हुए शीतल सें कहती हैं…”दिदी कभी सोचा नहीं थां…आज यहदिन भि देख्ना पड़ेगा….हम् तौ बड़ी दिदी कि कोई सहायता नहींकर पारहे….”
शीतल:हां भाभीअब औऱ कर भि क्याँ सकते हैं….जीजा जी पिछले एक् साल सें बीमार हैं….जौ हमारे पास भि थां….वोँ भि हम् नें सभी जीजाजी केँ इलाज केँ लिएलगा दिया हैं……अब तोँ ईश्वर कां हि भोरसा हैं….तभी आईसीयू सें एक् डॉक्टर बाहर् आता हैं….तौ अजय तेज़ी सें उसकीतरफ बढ़कर उसकाहाथ पकड़ लेता हैं। “डॉक्टर साहबअब वोँ केसे हैं……” डॉक्टर एक् बार उनकीतरफ गंभीरता सें देखता हैं….वोँ धीमी सें आवाज़ मे कहता हैं….”आइ आम सॉरीसर, पर्र हम् उन्हे बचा नहीं पाए….मेने तौ आपको पहले हि कहा थां कि, आप् इन्हे किसी अच्छे हॉस्पिटल मे अड्मिट करवा दीजिए….”
तभी पीछे सें कुछ गिरने केँ आवाज़ आती हैं….सभी चोंककर उसतरफ देखते हैं……वहा नीलम विनय कि माँ खड़ी थि……जैसे वोँ बुतबन गये होँ……उसने डॉक्टर कों कहतेसुन लिया थां कि, अब उसका पति इस दुनिया मे नहीं रहा……उसके बाल बुरीतरह सें बिखरे हुए थें….उसका दुपट्टा एक् कंधे पऱ लटकाहुआ नीचे फर्श पर्र धूलचाट रहा थां….उसके सामने एक् पॅकेट गिराहुआ थां….हॉस्पिटल कि उस गॅलरी मे मातम सां छा जाता हैं….किरण औऱ शीतल दोनोउसी समय नीलम कि तरफ भागती हैं। रोतेहुए बिलखते हुए, अजय भि अपने बहन कों उन बेहद दर्दनाक पॅलो मे सहारा देने केँ लिएआगे बढ़ता हैं……सभी रोरहे थें….औऱ विनय बेंच पऱ बैठाहुआ उनसभी कों रोतादेख अपनादिल छोटाकर लेता हैं….
पर्र नीलम कि आँखो मे आँसू नहीं थें……वोँ विनय कि तरफ देखती हैं….औऱ अपनी बहन शीतल सें कहती हैं….”शीतल तुम् विनय कों बाहर् लेँ जाओ….देखो मेरा बच्चा केसे कुम्लाह गय़ा हैं……” शीतलपलट कर विनय कि ओर देखती हैं….औऱ फिनउसे बाहर् लेँ जाती हैं….नीलम गुम्सुम सि बेंच पर्र बैठ जाती हैं….अजय औऱ किरण नीलम केँ पासबैठ कर हॉंसला देते हैं….पर्र वोँ स्वयं उस घटना सें बहोत दुखी थि….उनके आँसू रोके नहींरुक पारहे थें….”भैया आप् उनकी बॉडी कों घऱ लें जाए…औऱ आखिरी संस्कार कि तैयारी कीजिए……” यहकहकर नीलमउठ कर रिसेप्षन पऱ आती हैं…औऱ वहा खड़े एक् लड़के सें एक् पेपर औऱ पेन मांगती हैं….औऱ उसमेकुछ लिखना शुरुआत कर देती हैं….
थोड़ी देरबाद शीतल विनय कों लेकर वापिस आँ गई, ….औऱ नीलम नें उसे वोँ पेपर फोल्ड करके अपनी बहन शीतल कों दिया….”यह क्याँ हैं दिदी……”
उसने सुबक्ते हुए कहा….”इसे अभि मत खोलना….जब तुम्हारे जीजाजी कां आखिरी संस्कार हौ जाए….उसके बादइसे पढ़ लेना…
.शीतलआगे सें कुछ नहीं कहती औऱ उस पेपर कों चुपचाप अपनेपास रख लेती हैं….पोस्टमॉर्टम केँ बाद विनय केँ बापू कि बॉडी उन्हे सोन्प दि जाती हैं….शीतल कां घऱ भि उसीसहर मे थां….यहा पर्र नीलम अपने पति औऱ बेटे विनय केँ संग रहती थि……अगले दिनजब संस्कार कां समयहुआ तोँ, शीतलकुछ समान लाने केँ लिए स्टोर रूम मे गई, ….पर्र जैसे हि वोँ स्टोर रूम मे पहुची तोँ सामने कां नज़ारा देख वोँ एक् दम सें चीखउठी….
उसकी बड़ी बहन पंखे केँ संग लटकी हुइ थि….गले मे रस्सी थि….पता नहींकब उसने फँदालगा कर आत्म हत्या कर ली……नीलम केँ घऱ मे मातम कां माहौल औऱ दुखमय हौ गय़ा….थोड़ी देर मे आएहुए सब रिस्तेदार वहा इकट्ठा होँ गय़ा……विनय अब अनाथ हौ चुका थां….सब केँ मन मे यही प्रश्न थां कि, आख़िर नीलम नें ऐसा क्यूं किया….उसने एक् बार भि क्यूं अपने बेटे केँ बारे मे नहीं सोचा….क्यूं उस मासूम कों वोँ अकेला छोड़कर चली गयीँ, ….बाप कां साया तौ पहले हि उसकेसर सें उठ गय़ा थां….औऱ क्यूं अब उसने विनय कों अपनी ममता सें भि वंचित कर दिया थां……
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नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
बाप कां साया तौ पहले हि उसकेसर सें उठ गय़ा थां….औऱ क्यूं अब उसने विनय कों अपनी ममता सें भि वंचित कर दिया थां……
अबआगे.
प्रश्न अनेक थें….पर्र जवाब किसी केँ पास नहीं थां….कहते हैं नां जाने वाले तोँ चले जाते हैं….पर्र जीवनकभी नहीं रुकती….दोनो कां आखिरी संस्कार होँ चुका थां….विनय कों उसके मामाजी मामीजी अपनेसंग अपनेघऱ लें गये….अब उस बेचारे कां थां भि कॉन….विजय केँ मामाजी भि उसी सिटी मे रहते थें….नीलम केँ घऱ केँ पास हि उनका भि घऱ थां….उस रात संस्कार केँ बाद शीतल नें अपनी बहन कां दियाहुआ लेटरखोल करजब देखा, तोँ उसके रोंगटे खड़े होँ गये……उसके सारे सवालो कां जवाबउस लेटर केँ चन्द शब्दों मे संहित थां….इस बार जौ शीतल कि आँखो सें आँसू निकले….वोँ सिर्फ़ पानी केँ नहीं थि….बल्की खून केँ आँसू थें….
पर्र जौ उस लेटर मे लिखा थां….उसे वोँ सभी अपने तक सीमित रखना थां….शीतल केँ दो बेटियाँ थि। एक् विनय सें दोसाल छोटी थि….औऱ एक् विनय कि हम् उम्र……जौ शीतल नें अपने भइया कों गोद दि हुईँ थि….क्योंकि विनय केँ मामाजी कि अपनीकोई संतान नहीं थि….क्यूं नहीं थि….यह मे भि नहीं जानता। हां उन्हो नें अपनी संतान केँ लिएहर संभव स्थान ठोकर अवश्य खाई थि….पऱ उनकेघऱ बच्चे कि किल्कारी नहीं गूँजी थि……उसके बाद शीतल नें उसे अपनी बेटी दे दि थि….शीतल कां एक् बेटा भि थां…जौ सबसे छोटा थां….
उधर मामीजी केँ घऱ मे विनय कि हम् उम्र उसकी बहन वैशाली थि….जौउसी कि क्लास मे थि….हां वोँ उस गाओं केँ विद्यालय मे पढ़ती थि….मामाजी मामीजी औऱ वैशाली केँ इलावा उनकेघऱ मे उसकी मामीजी कि छोटी बहन भि रहती थि….जोँ वहा हाइयर स्टडी केँ लिएआई हुए थि….उसका नाम ममता थां….उसकी विवाह अभि 6-7 महीने पहले हि हुईँ थि….विवाह केँ बाद उसका हज़्बेंड वापिस यूकेचला गय़ा थां.वोँ वही पर्र नौकरी करता थां….इसीलिए विवाह केँ बाद भि उसने अपनी स्टडी जारीरखी थि…। धीरे-धीरे-2 वक्त बीतता गय़ा….शीतल नें विनय कि ज़िम्मेदारी उसके मामाजी कों सॉन्प दि थि…….
विनय केँ रूप मे उन्हे अपना बेटा मिल गय़ा थां……उसके मामाजी कपड़ों कि दुकान चलाते थें… अधिक बड़ा बिज़्नेस तोँ नहीं थां….पऱ दुकान अच्छी चलती थि….विनय कां अड्मिशन भि वशाली केँ विद्यालय मे करवा दिया थां….वैशाली केँ संग केँ कारण विनय जल्द हि अपने मां बापू केँ गुजरने केँ गम सें बाहर् आँ गय़ा थां….दोनो इकट्ठे विद्यालय जाते इकट्ठे घऱ वापिस आते.संग मे खेलते औऱ संग मे खानां खाते….आम भइया बहनो कि तरह हि आपस मे झगड़ते भि….उनके झगडो कों देखकर जब विनय कि मामीजी क्रोध होती तोँ, उसके मामाजी मामीजी कों टोक देते….औऱ कहते कि, मत डांटा करो इन्हे….यही बालपन देखने केँ लिए हि तौ हमनेपता नहीं कहां-2 धक्के खाए हैं….
वैशाली तौ किरण कों अपनी मम्मी हि समझती थि….औऱउसे मां हि कहती थि….उसे तौ पता भि नहीं थां कि, उसके मामाजी नें उससेगोद लिया हैं…पऱ विनय अभि भि उन्हे मामाजी मामीजी हि कहता थां….उसकी मौसी शीतलरोज दोपहर कों उनकेघऱ आती थि….उसके बच्चे भि संग मे आँ जाते थें….बच्चे आपस मे मिलकर खूबधमा चोकड़ी मचाते थें….शीतल नें अपने खरचे पऱ एक् दाई कों रख लिया थां….वोँ रोज दोपहर कों अजय केँ घऱआती, औऱ विनय कि मालिश करती….पऱ बंद कमरे मे….दाई कि एजकोई 65-70 साल केँ लगभग थि….
पर्र फिन भि किरण कों उसदाई कां विनय कों बंद कमरे मे लेजाकर मालिश करनाकुछ अटपटा सां लगता थां….पऱ शीतल नें कहदया थां….कि वोँ यहसभी उसके कहने पऱ कररही हैं….विनय धीरे-धीरे -2 8थ क्लास मे पहुँच गय़ा थां…दोस्तो आप् तोँ जानते हि हैं यह उमेर कैसी होती हैं…। दुनिया भर कि तमाम जानकारी हासिल करने कि हसरतइस उम्र मे ज़ोर लगाने लगती हैं…। इस उम्र कां हर लड़का याँ लड़कीहर उस चीज़ कों जानने कि कॉसिश करता हैं….जिसे बड़े उनसे छुपाकर रखते हैं….यही हाल वशाली औऱ विनय कां भि थां…….
दोपहर केँ 1 बजे कां समय थां….10थ केँ उस विद्यालय मे विद्यालय बंद होने कि घंटी बजाते हि बच्चों कां हजूम बाहर् केँ गेट कि तरफ दौड़ा….विनय भि अपना विद्यालय बॅग कंधे पर्र लटकाए हुए बाहर् कि तरफबढ़ रहा थां….तभी पीछे सें आकर वशाली नें उसकाहाथ पकड़ लाया….”ओये कबूतर कहां उधरजा रहा हैं….मुझे अकेला छोड़कर….” वशाली नें ताव मे आतेहुए कहा……
विनय:घऱ जारहा हूं….दिखाई नहीं देता क्याँ….?
वशाली: देता हैं, तभी तौ पूछरही हूं…मां नें कहा हैं नाँ….विद्यालय सें संगघऱ आयाकरो……
विनय: तोँ चलो रोका किसने हैं तुम्हे….
वशाली: चलते हैं रूको रिंकी कों भि आने दो……उसने भि तोँ संग चलना हैं….
विनय: अर्रे मे नहीं जाता उसके संग….बहोत दिमाग़ खराब करती हैं….हर वक्तबॅड-2 करती रहती हैं….तुम्ही आनां उसकेसंग….
इतने मे रिंकी भि आँ जाती हैं….रिंकी कां घऱ उनकेघऱ केँ ठीक सामने थां….औऱ तीनोघऱ कि तरफचल पड़ते हैं….रिंकी उन दोनो सें दो क्लास ऊपेर यानी कि 10थ मे थि….अभि अभि **5 कि हुईँ थि….जवानी कि तरफ उसने पहलाकदम बढ़ाया थां….उनका एरिया सिटी सें थोडा बाहर् थां….इसीलिए वोँ एरिया सिटीकम औऱ गाओं ज़यादा लगता थां….रिंकी कि उम्र केँ संग-2 उसमे चंचलता भि बढ़ गई, थि….अपने सें बड़ी उम्र कि लड़कियों सें बात करना….उनके बॉयफ्रेंड केँ किस्से सुनना उसे अच्छा लगता थां….औऱ वोँ सभी सुनेहुए किस्से, आगे वैशाली कों सुनाती.
पऱ विनयअब भि इन बातों सें अंज़ान थां….उसे नहींपता थां कि, स्त्री मारद मे क्याँ फरक होता हैं….जौ बाहरी फ़र्क उसे दिखाई देता थां…उसे उसी कि जानकारी थि….विनय औऱ वशाली 9थ क्लास मे पहुँच गये थें….औऱ रिंकी अब11थ मे हौ गयीँ, थि….वोँ विद्यालय 10थ तक हि थां। इसीलिए अब उसकी अड्मिशन सिटी केँ एक् बड़े गर्ल्स कॉलेज मे करवा दि गई, थि….उसके पिताजी उस पर्र बहोत कड़ी नज़र रखते थें….सुभह विद्यालय छोड़कर आनां औऱ दोपहर कों भि लेकर आनां। वोँ लड़को सें बात नहींकर सकती थि….पर्र विनय औऱ विशाली केँ संग उनके परिवार कां अच्छा मैल मिलाप थां…उनके लिए तौ समझोघऱ वालीबात थि….
एप्रिल कां मंथ थां….गर्मियाँ अभि शुरुआत हुईँ थि….विद्यालय मे हाफ वक्तचल रहा थां…औऱ विनय अपने बाकी क्लास मेट्स केँ संग विद्यालय केँ ग्राउड मे खेलरहा थां….तभी उसे बहोत तेज पेशाब लगी….बाथरूम सेकेंड फ्लोर पर्र थां…जब तक ऊपेर जाता तोँ, बीच मे हि निकल जाने केँ संभावना थि….इसीलिए वोँ भागकर विद्यालय कि बिल्डिंग केँ पीछे गय़ा….उस बिल्डिंग केँ पीछे विद्यालय कि पुरानी इमारत हुआ करती थि….जोँ अब करीब खंडहर बन चुकी थि….
वोँ भागकर उस खंडहर बन चुकी बिल्डिंग केँ पास गय़ा……अपनी पेंट खोली औऱ अपने लन्ड ओह्ह सॉरी “नूनी”उस वक्त तक तौ वोँ अपने लन्ड कों नूनी हि बुलाता थां…बाहर् निकाली औऱ पेशाब करने लगा….तभी उसके कानो मे किसी केँ कराहने जैसी आवाज़ सुनाई दि….बेचारे कां डर केँ मारेमूत भि बंद होँ गय़ा….उसने अपने लन्ड कों वापिस डाला औऱ ज़िपबंद करके, एक् टूटी हुई खिड़की कि तरफ बढ़ा….जिस तरफ सें वोँ आवाज़ आँ रही थि….जैसे हि वोँ उस खिड़की केँ पास पहुचा औऱ उसने अंदर झाँककर देखा, वोँ एक् दम सें हैरान रह गय़ा……
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