नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update-4
अगली सुभहजब विनयउठा तोँ, देखा ऊपेरकोई नहीं थां….नां हि वशाली औऱ नाँ हि ममता। वोँ डरताहुआ नीचेआया, विनयआज बहोत सहमाहुआ थां….डर थां कि, कही ममता नें रात कि बातबता नाँ दि हौ….वोँ केसे अपनी मामीजी कां सामना करेगा….जैसे हि वोँ नीचेआया, तोँ सामने सें मामीजी रसोई सें बाहर् निकली….विनय कि तोँ जैसेडर केँ गान्ड फटने कों आँ गयीँ,। पऱ अगले हि लम्हा उसने राहत केँ साँसली जब मामीजी नें मुस्कुराते हुए उससे फ्रेश होने कों कहा….
विनयभाग कर बाथरूम मे घुस गय़ा….फ्रेश हुआ नाहया औऱ फिन बाहर् आया….तोँ देखा ममता डाइनिंग टेबल पऱ ब्रेकफास्ट लगारही थि….वोँ डरताहुआ डाइनिंग टेबल पर्र जाकरबैठ गय़ा। ममता नें बिना उसकीतरफ देखे उसकी प्लेट मे ब्रेकफास्ट डालकर उसे दिया….औऱ फिन सें रसोई मे चली गई, ….विनय नें जल्द सें ब्रेकफास्ट ख़तम किया औऱ उठकर अपनेरूम मे आँ गय़ा….वोँ अब ममता केँ सामने जाने सें घबरारहा थां….वोँ उससे ऩज़रें नहीं मिलाना चाहता थां…वोँ काफ़ी देर तक अपनेरूम मे बैठा रहा…लगभग 10 बजे वशाली रूम मे आई….” क्याँ कररहे होँ भौंदू राम….” वशाली नें हंसते हुएकहा….
विनय: तुम् सें मतलब….अगर कोईकाम हैं तौ बोल….
वशाली: वोँ ममता मासी बुलारही हैं….
विनय:(डर कर चोन्कते हुए) क्यूं….?
वशाली: क्यूं आज विद्यालय कां होम वर्क नहीं करना हैं क्याँ….?
विनय: ह्म्म्म आता हूं….
वशाली: जल्द आनां….
वशाली केँ बाहर् जाते हि, विनय नें अपने साँस कों दुरस्त किया, औऱ अपनाबॅग उठाकर डरतेहुए बाहर् आँ गय़ा….यहा उसके मासी शीतल केँ बच्चे पिंकी औऱ अभि भि वशाली केँ संग बैठेहोम वर्ककर रहे थें….वोँ ममता कि तरफ देखे बिनाआगे बढ़ा औऱ सभी बच्चों केँ पीछे जाकरबैठ गय़ा……ममता मन हि मनयहसोच कर मुस्करा रही थि, कि उसनेकल बेचारे कों कुछ अधिक हि डरा दिया थां….खैर ममता नें नॉर्मल बिहेव करतेहुए, सबकोहोम वर्क करवाया….उसके बादलंच खाने केँ बादसभी ऊपर खेलने केँ लिएचले गये….
पर्र आज रिंकी नहींआई थि……जब उसने वशाली सें पूछा तोँ पताचला कि, रिंकी 3-4 दिन केँ लिए अपने किसी रिश्तेदार केँ यहा गयीँ, हैं….उस दिन विनय कां खेल मे मन नहीं लगा…इसीलिए वोँ ज्यादा देर नहीं खेला औऱ नीचे अपनेरूम मे आँ गय़ा….दोपहर कों गरमीबढ़ गई, थि…इसीलिए रूम मे बेड केँ ऊपेर लेटते हि, पंखे कि ठंडीहवा सें उसे नींदआने लगी….अभि कुछ हि देर हुईँ थि कि, बाहर् सें मामीजी कि उँची आवाज़ आई, उसे समझ मे तौ नहींआया कि, मामीजी क्याँ बोलरही हैं….पर्र हां इतना अवश्य समझ मे आँ गय़ा थां कि, मामीजी किसीबात कों लेकर बेहदखुश हैं….
अब मामीजी खुश क्यूं हैं यह जानने केँ लिए विनयरूम सें बाहर् आँ गय़ा….मामीजी शीतल औऱ ममता सें बातकर रही थि….उसके चेहरे पऱ जोँ खुशी थि….वोँ देखने लायक थि… जैसे हि किरण नें विनय कों देखा तौ उसने अपनी दोनो बाहें फेलाते हुए, उसे अपनेपास आने कों कहा….”आजा मेरा राजकुमार इधर आँ अपनी मामीजी केँ पास……” विनय मामीजी कि बाहों मे जाते हि उसकीगोद मे सररखकर लेट गय़ा….”क्याँ हुआ मामीजी जी……”
मामीजी: तेरे मामाजी कां नाता हौ गय़ा हैं परसो मँगनी हैं….?
विनय: क्याँ मामाजी कां….
मामीजी: धत पगलेयह वाले मामाजी नहीं…मेरे छोटे भइया कि, वोँ भि तेरे मामाजी हि लगते हैं नां…
विनय: तोँ आप् वहाजा रही हौ….?
मामीजी: हां हम् सभी चलेंगे नाँ….
विनय: क्याँ सच……
मामीजी: हांसच….
उसकेबाद अगलेदिन सारा परिवार ममता औऱ मामीजी केँ मायके चला गय़ा….अगले हि दिन किरण केँ छोटे भइया कि मँगनी होँ गई, थि……जिस लड़की कां मामीजी केँ भइया सें नाताहुआ थां….वोँ उसीशहर कि रहने वाली थि….जहाँ पऱ किरण औऱ अजय कां घऱ थां….मँगनी केँ बादयह तयहुआ कि, विवाह केँ सारी तैयारियाँ किरण केँ घऱ पऱ हि होंगी….वही सें बारात निकले गी औऱ वही सारी रस्मे भि होंगी….क्योंकि किरण कां मायका उनकेशहर सें काफ़ी दूर थां….सितंबर कि 25 कों विवाह कां दिन फिक्स कर दिया गय़ा थां….क्योंकि बच्चो केँ इंटर्नल एग्ज़ॅम सितंबर केँ 23 तक ख़तम होँ जाते थें.औऱ फिन बच्चो कि 7-8 कि छुट्टी भि हौ जाती थि……
मँगनी केँ अगलेदिन जबसभी लोग वापिस जाने केँ सजधजकर करनेलगी तोँ, किरण कि मम्मी नें उसे अपनेपास दोदिन रुकने केँ लिएकहा, ताकि वोँ अपनी बेटी केँ संग विवाह केँ लिएकुछ खरीद दारीकर सके….किरण कां भि वहा रुकने कां बहोत मन थां….आख़िर वोँ लगभग 1 सालबाद अपने मायके आई थि….इसलिये उसने अपनी मम्मी कों इनकार नहीं किया…इधर वशाली भि ज़िद्द पर्र अड़ गयीँ, कि, वोँ माँ केँ संगवही रहेगी….
उसकेबाद विनय अपने मामाजी औऱ ममता केँ संग अपनेघऱ वापिस आँ गय़ा….रात कों 8 बजे अपनेघऱ पहुचे थि….मामाजी जी नें रास्ते मे ढाबे सें हि खानां लें लिया थां….खानां खाकरसो गये….अगली सुभहजब विनयउठा तोँ, घऱ मे कोई नहीं थां….इन बीते दिनो मे विनय नें डर कि वजह सें ममता सें बात करना तौ दूरआँख मिलाकर देखा तक नहीं थां…सुभह उठकर वोँ फ्रेश हुआ, बाहर् बरामदे मे आया तौ देखघऱ एक् दम सूना थां….ममता केँ रूम कां डोर अभि भि बंद थां….वोँ काफ़ी देर तक बाहर् डाइनिंग टेबल पऱ बैठा प्रतीक्षा करतारहा….
पऱ ममतारूम सें बाहर् नहींआई, दरअसल रात कों उसके हज़्बेंड कां यूके सें मोबाइल आया थां। इसीलिए वोँ देररात तक उसकेसंग बात करती रही….फिन सुभह विनय केँ मामाजी नें भि उसे 6 बजेउठा दिया थां….उन्हे शॉप पऱ जानां थां….इसीलिए ममता नें हि सुभहउठ कर उनका ब्रेकफास्ट औऱ लञ्च सजधजकर करके दिया थां….घऱ एक् दम सूना पड़ा थां….जब काफ़ी देर तक ममता नहींउठी तौ, विनय स्वयं हि रसोई मे चला गय़ा….औऱ अपनेलिए चाइ बनाने केँ लिए जैसे हि उसने बर्तन उठाया तोँ उसे पीछे सें ममता कि आवाज़ सुनाई दि….
ममता: विनय क्याँ कररहे हौ तुम्….?
विनय: (घबराकर पीछे देखते हुए) वोँ मे वोँ अपनेलिए चाइबना रहा थां….
ममता: मुझे नहींकह सकते थें….?
विनय: आप् उठी नहीं थि……
ममता: तौ मुझेउठा देते….जाओ बाहर् जाकर बैठो….मे अभि तुम्हारे लिए ब्रेकफास्ट बना देती हूं….
विनय:जी….
ममता: ब्रशकर लिया….
विनय:जी औऱ नहा भि लिया….
ममता:गुड बड़े समझदार हौ….अब तुम् बड़े होँ गये होँ….
ममता नें मुस्कुराते हुए कहा….विनय बिनाकुछ बोले बाहर् चला गय़ा औऱ डाइनिंग टेबल पऱ बैठकर प्रतीक्षा करने लगा….लगभग 15 मिनिट बाद, ममतादो प्लेट्स मे सॅंडविच लेकरआई औऱ टेबल पर्र रखकरफिन रसोई मे वापिस चली गयीँ, ….विनय नें एक् प्लेट उठाकर सॅंडविच खानां शुरुआत कर दिया….इतनी मे फिन सें ममता वापिस आई, उसकेहाथ मे ट्रे थि….उसमे एक् ग्लास दूध औऱ एक् कपचाइ थि….
ममता नें दूध कां ग्लास विनय केँ सामने रखा औऱ चाइ कां कप अपने सामने रखकरबैठ गई, औऱ ब्रेकफास्ट करने लगी….विनय दूध केँ ग्लास कों ऐसेदेख रहा थां….जैसे उसनेदूध पहलीबार देखा हौ….
ममता: क्याँ हुआपीओ नाँ….?
विनय:दूध चाइ नहीं बनाई मेरेलिए….?
ममता: नहींदूध पीलो….
विनय: नहीं मुझे अच्छा नहीं लगता……
ममता: (मुस्करा कर अपनी कमीज़ केँ गले केँ अंदरहाथ डालकर अपनी ब्रा केँ स्ट्रॅप्स कों ऊपेर खेंचती हैं….जिससे उसकी चुचियाँ ऊपेर कों उठती हैं औऱ फिन नीचे होँ जाती हैं….) मे तोँ समझती थि कि, तुम्हे दूध ज्यादा मनपसंद हैं……
विनय ममता कि इस हरक़त सें एक् दम झेंप जाता हैं….बेचारे कि कुछ बोलने कि हिम्मत नहीं होती….विनय नें जल्द-2 अपना ब्रेकफास्ट ख़तम करना शुरुआत कर दिया…औऱ संग-2दूध भि पीने लगा….ममता विनय कि हालतदेख करमन हि मन मुस्कुरा रही थि….”अर्रे धीरे-धीरे कही भागे थोडा जारहा हैं….” ममता नें फिन सें अपनी ब्रा केँ स्ट्रॅप्स कों ऊपर कि तरफ खेंचा तोँ उसकी दोनो चुचियाँ फिन सें उछलकर रह गई, ……
विनय ममता कि बातसुन कर एक् दम चोंक सां गय़ा….औऱ हैरानी सें ममता कि ओर देखने लगा….”दूध कां ग्लास कहीं भागा थोड़े हि जारहा हैं….धीरे-धीरे पीओ…” उसनेफिन सें मुस्कुराते हुए कहा….पर्र विनय नें फिन सें अपनेसर कों झुका लिया….ममता औऱ विनय दोनोघऱ मे अकेले थें….इसीलिए ममताकुछ अधिक हि खुलकर विनय सें बात करने कि कोशिस कररही थि…वोँ जानती थि कि, विनय अभि बच्चा हैं….वोँ किसी भि बात कों लेकर बिदक सकता हैं….इसीलिए उसेहर कदमसोच समझकर उठाना थां….
पऱ घऱ मे विनय कों अपनेसंग अकेला पाकर उसकामन मचलरहा थां….बुर मे अजीब सि सरसराहट होँ रही थि….वोँ धीरे-धीरे-2 सहजता सें बात कों आगे बढ़ाना चाहती थि…अभि दोनो नें ब्रेकफास्ट ख़तम हि किया थां कि, डोरबेल बजी….ममता नें जाकरगेट खोला तोँ देखा, सामने शीतल खड़ी थि….नां चाहते हुए भि ममता जबरन मुस्कुराइ….आज पहलीबार उसे शीतल कां घऱ आनां अच्छा नहींलगा थां….”नमस्कार दिदी आइए नां…” ममता नें जबरन मुस्कुराते हुएकहा….
शीतल केँ संग उसके बच्चे पिंकी औऱ अबी भि थें……वोँ अपने बच्चों कों लेकर अंदरआई तौ, ममतागेट बंद करने लगी….”अर्रे गेटबंद मत करो….मे तौ बच्चों कों छोड़ने आई थि….मे ज़रा मार्केट जारही थि….”
ममता: ओह्ह्ह अच्छा….
शीतल: औऱ बताओ मँगनी ठीक सें हौ गई, …
ममता:जी सभी बहोत बढ़िया सें होँ गय़ा….
शीतल:चलो ईश्वर कां शूकर हैं….बधाई होँ तुम्हे नयी भाभीआने वाली हैं घऱ पऱ.
ममता:जी आप् कों भि….आइए नाँ थोड़ी देर तोँ बैठिए….
शीतल: नहींअब मे चलती हूं……तुम् बच्चों कां ध्यान रखना….औऱ हां मेरा शोना विनय कहां हैं….
ममता:जी वोँ ब्रेकफास्ट कररहा हैं….
शीतल: अच्छा ठीक हैं दोपहर कों आकर मिलती हूं……
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Sooon।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -5
शीतल केँ जाने केँ बाद ममता नें गेटबंद किया….औऱ अंदरआई तौ देखा अभि औऱ पिंकी दोनो विनय केँ संगखेल रहे थें….ममता नें टेबल पर्र सें बर्तन उठाए, औऱ बर्तन सॉफ करने केँ बादघऱ कि सफाई कि, बच्चे टेलीविज़न पर्र चलरहे प्रोग्रॅम्स कों देखने मे मगन थें… सफाई करने केँ बाद ममता भि किरण केँ रूम मे चली गयीँ, ……जहाँ पऱ तीनो टेलीविज़न देखरहे थें…पिंकी अभि औऱ विनय तीनो टेलीविज़न केँ सामने चटाई बिछाकर बैठेहुए थें….
ममतारूम मे आई, औऱ उन केँ पीछेबेड पऱ करवट केँ बललेट गयीँ, ….वोँ भि टेलीविज़न देखने लगी….पऱ उसका ध्यान विनय मे थां….जौ अभि भि बच्चों कि तरहउस कार्टून शो कों देखने मे इतनामगन थां….जैसे उसको सेक्स वासना कां पता हि नां होँ….ममता वही लेटेहुए, प्रतीक्षा कररही थि कि, कब विनयपलट कर उसकीतरफ देखे….पर्र विनय स्वयं हि ममता सें नज़रें चुराता फिनरहा थां….15 मिनिट बीत चुके थें….ममता समझ चुकी थि कि यह तोता अभि नादान हैं….इसको सभीकुछ स्वयं हि सिखाना पड़ेगा……
ममता: विनय……
विनय:(पलट कर ममता कि तरफ देखते हुए)जी
ममता: मेरेलिए एक् ग्लास पानीला दोगे….?
विनय:जी…….
विनयउठ कर रसोई मे चला गय़ा….औऱ एक् ग्लास पानी लेकर वापिस रूम मे आया तोँ देखा ममता उसकीतरफ देखकर मुस्कुरा रही थि….उसने अपनेसर कों झुका लिया औऱ ममता केँ पासआकर खड़ा होँ गय़ा….”दिदी पानी”
ममता: नीचेरख दो….
विनय नें पानी कां ग्लास नीचेरख दिया….औऱ फिन सीधा खड़ा हुआ….”यहा बैठो मेरेपास….” ममता नें धीरे-धीरे सें कहा….तोँ विनय नें एक् बार चटाई पर्र बैठो पिंकी औऱ अभि कि तरफ देखा…औऱ फिन ममता कि तरफ देखने लगा….”बैठो नाँ….” ममता नें उसकाहाथ पकड़कर उसे बैठाते हुए कहा….विनय थोडा डर तोँ गय़ा हि थां….
वोँ नीचेपेर लटकाकर बैठ गय़ा….उसकी पीठ ममता केँ पेट केँ संगलग रही थि….क्योंकि ममता करवट केँ बल लेटी हुइ थि….थोड़ी देर ममता भि चुप रही….शायद वोँ बोलने सें पहलेतय कर लेना चाहती थि कि, उसकाहर एक् शब्दतीर कि तरह एक् दम निशाने पर्र जाकरलगे, ताकि विनयकुछ गड़बड़ नां करसके……
ममता: तुम् नें उसरात मुझेयहा पर्र क्यूं हाथ लगाया……(ममता नें अपनी चुचि पर्र हाथ रखतेहुए कहा….)
ममता कि बातसुन कर तौ जैसे विनय कां मूत निकलने वाला हौ गय़ा….वोँ इतने दिनो सें सोचरहा थां कि, शायद ममता वोँ सभीभूल गयीँ, हैं, तभी उसने किसी कों बताया नहीं “मे क्याँ पूछरही हूं….” ममता नें धीरे-धीरे सें टेलीविज़न कि ओर देखते हुएकहा….
विनय: वोँ वोँ ग़लती सें हाथचला गय़ा….
ममता:झूट बोलरहे होँ तुम्…तुम् उसरात कों जागरहे थें…….हैं नां….सच कहो….
विनय कों अब अपनीजान जंजाल मे फँसती हुई नज़र आँ रही थि….उसने हां मे सर हिला दिया.
ममता:फिन क्यूं छुआ तूने मुझेवहा पऱ….?
विनयचुप….
ममता:बोल नां अब……?
चुप….
ममता:देख मेने अभि तक किसी कों बताया नहीं हैं….इसका यह मतलब नहीं कि मे तुम्हारी उस हरक़त सें नाराज़ नहीं हूं…….तुम्हे यहसभी करना अच्छा लगता हैं….
चुप….
ममता:बोल नां तुम्हें इन्हे छूना अच्छा लगता हैं….?
इसबार विनय नें डरतेहुए हां मे सर हिला दिया……
ममता: तुम्हे पता हैं नाँ यह कितनी ग़लतबात हैं गंदीबात हैं….
विनय:जी….
ममता:फिन भि तुमने मुझेयहा पऱ हाथ लगाया….
चुप….
ममता:अब तुमने ग़लती कि हैं तोँ सज़ा तौ तुम्हे मिलेगी हि….
विनय: आप् चाहे मुझे जौ मर्ज़ी सज़ादे दो….पऱ प्लीज़ मामीजी मामाजी कों नां बताना….
ममता:ठीक हैं नहीं बताती….पर्र तुमने मुझे ग़लत स्थान पर्र टच किया हैं तोँ, मे भि तुम्हारी ऐसी स्थान पर्र टच करूँगी यहा पर्र नहीं करना चाहिए….
ममता कि यहबात सुनते हि, विनय कां दिल जोरो सें धड़कने लगा….इससे पहले कि विनयकुछ बोलाता जानसमझ पाता…ममता नें अपना एक् हाथउठा कर विनय कि जाँघ केँ ऊपेररख दिया। वोँ लगतार सामने टेलीविज़न औऱ बच्चों पर्र नज़र बनाएहुए थि….कुछ देरबाद उसने अपनाहाथ धीरे-धीरे-2 उसके शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें उसके लन्ड कि तरफ बढ़ाना शुरुआत कर दिया….
विनय केँ जिस्म पर्र झुरजुरी सि दौड़ गई, ….आँखे ऐसी हौ गई, ….मानो उसने पूरी बॉटल दारू कि पीलो होँ….होन्ट औऱ गलासुख गये थें….औऱ जैसे हि ममता नें विनय केँ लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें पकड़, विनय कां पूरा जिस्म ऐसे कांप गय़ा….जैसे उसके बिजली कां झटकालगा होँ… उस वक़्त, विनय कां लन्ड एक् दम सिकुडा हुआ थां….पर्र जैसे हि ममता केँ नरमहाथ कां स्पर्श विनय कों अपने लन्ड पर्र महसूस हुआ, उसमेजान आनी शुरुआत होँ गयीँ, ….अभि ममता नें तीनचार बार हि विनय केँ लन्ड कों मुट्ठी मे भरकर दबाया थां कि, विनय कां लन्ड एक् दम हार्ड हौ गय़ा। औऱ अपने पूरेआकर मे आँ गय़ा……
जैसे हि ममता कों विनय केँ लन्ड कि लंबाई औऱ मोटाई कां अंदाज़ा हुआ, तोँ उसकादिल धक करकेरह गय़ा….उसके हाथ पांव मानो सुन्न पड़गये हों….”हाए इतना मोटा लन्ड हैं इसका….इतना लंबा.”उसे अपनी बुर मे तेज खेंचाव सां महसूस होने लगा….जांघे आपस मे स्वयं ब स्वयं सटाती चली गई, ….
तभी सामने चटाई पर्र बैठे अभि नें पीछेमूड कर कहा….”भैया यहाआओ नाँ…” दोनो अभि कि आवाज़ सुनकर जैसे आसमान सें गिरकर ज़मीन पऱ आए होँ…दोनो एक् दम चोंकगये… ममता नें अपनाहाथ जल्द सें पीछे किया…औऱ विनयउठ करआगे जाकर चटाई पर्र बैठ गय़ा। ममता गहरी साँसे लेतेहुए बेहद हैरान हौ रही थि….उसने कभी सोचा भि नहीं थां कि, मासूम सें दिखने वालेइस बच्चे कां हथियार इतना तगड़ा हौ सकता हैं….वोँ अपनी सांसो पर्र काबू पाने कि कोशिस कररही थि…….
उसकादिल बहोत बेचैन हुआजा रहा थां……काश कि यह बच्चे आज नाँ आए होते….पर्र इस विनय नें कॉन सां कहीभाग जानां हैं……रहना तौ यही हैं नाँ इसने….दोपहर कां समय होँ चला थां। ममताउठ कर रसोई मे चली गई, ….औऱ दोपहर केँ खाने कां इंतज़ाम करने लगी….लगभग 30 मिनिट मे उसनेलंच सजधजकर कर लिया….फिन वोँ किरण केँ रूम मे गयीँ, ….जहाँ पर्र तीनो बच्चे बैठे टेलीविज़न देखरहे थें……”चलो बच्चो खानां रेडी हैं….आकर खालो। टेलीविज़न बंदकर दो….कब सें ऑनकररखा हैं तुम् लोगो नें……”
ममता कि बातसुन करसभी उठकर बाहर् आँ गये….विनय नें बाहर् जातेहुए, टेलीविज़न बंदकर दिया। औऱ फिन बाहर् हाल मे आकर खानां खाने लगा….खानां खाने केँ बाद अभि नें विनय सें कहा। “भैया चलो नां हाइड & सीक खेलते हैं……”
ममता:(बीच मे टोकते हुए)कोई हाइड & सीक नहीं खेलेगा……मुझे नींद आँ रही हैं तुम् लोग हंगामा मचाओगे…….
पिंकी: नहीं मासी हम् हंगामा नहीं मचाएँगे….
ममता: एक् बारमना कर दिया नां तौ नहीं खेलना….जाकर लुडोखेल लो….औऱहां आवाज़ मत करना….
अभि: ओके मासी….
तीनो विनय केँ रूम कि तरफ जाने लगी….”अपने आप् मे बनती क्याँ हैं….हिट्लर” पिंकी नें मूह बनाते हुए ममता केँ बारे मे विनय सें कहा…….
विनय:चुप ऐसा नहीं बोलते बड़ी हैं नां वोँ हम् सें….
पिंकी: बड़ी हैं तोँ क्याँ हम् पर्र रोब जमाएगी…….
विनय:अब चलचुप करजा अम्मा….चल लुडो खेलते हैं…….
तीनो विनय केँ रूम मे जाकर लुडो खेलने लगे….उधर ममता नें झूठे बर्तन उठाकर रसोई मे लेजाकर धोए….औऱ फिन अपनेरूम मे आकरलेट गयीँ, ….बेड पऱ लेटते हि उसे नींद आँ गयीँ, ……दूसरी तरफ तीनो बच्चे लुडोखेल रहे थें….औऱ धीरे-धीरे-2 उन तीनो कों भि नींदआने लगी….तभी बाहर् डोरबेल बजी तोँ, विनय नें बाहर् जाकरगेट खोला तौ, देखा सामने उसकी मासी शीतल खड़ी थि……शीतल विनय कों देखकर खुश हौ गयीँ, ….औऱ उसेगले सें लगाते हुए बोलीं…….”आँ गय़ा मेरा बच्चा वापिस……”
विनय:जी मासी……
शीतल: वोँ पिंकी औऱ अभि कहां हैं बेटा….
विनय:जी मेरेरूम मे हैं……
शीतल:जाओ उन्हे बुला लाओ….केहना कि मां आई हैं लेने केँ लिए….
विनय: आप् अंदर नहीं आओगे….
शीतल: नहीं बेटा अभि मुझेकुछ ज़रूरी काम हैं….तुम् साम कों घऱ आनां….ठीक हैं…
विनय:जी मासी……मे अभि अभि औऱ पिंकी कों बुलाकर लाता हूं……
विनयरूम मे गय़ा औऱ पिंकी औऱ अभि कों लेकर वापिस आँ गय़ा……शीतल दोनो कों लेकरघऱ चली गयीँ, ….विनय नें गेटलॉक किया औऱ अपनेरूम मे आँ गय़ा….एक् बारजब फिन सें उसे तनहाई मिली तौ, उसे वोँ याद आँ गय़ा……जब ममता नें उसके लन्ड कों उसके शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें पकड़ा थां….उसका लन्ड केसेकुछ हि सेकेंड्स मे खड़ा होँ गय़ा थां….ममता केँ हाथ कितने नरम औऱ रसीले हैं……कितना मजाआया थां….जब उसने मेरे लन्ड कों पकड़ा थां….काश अभि नाँ बुलाता तौ, ममता मासीकुछ देर औऱ मेरे लन्ड कों पकड़कर रखती…….
यह सोचते हुए, विनयबेड पर्र लेटा थां….उसके हाथ स्वयं ब स्वयं शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें उसके लन्ड पऱ चला गय़ा……औऱ वोँ उसे धीरे-धीरे-2 सहलाने लगा….उसकी आँखे अपने आप् बंद होतीचली गई, ….नज़ाने क्यूं उसकी कल्पना मे ममता कि छविउभर कर आँ गयीँ, ……कि ममता उसके नंगे लन्ड कों हाथ मे पकड़कर धीरे-धीरे -2 हिलारही हैं……यह सभी सोचते हुए उसके लन्ड कि नसें औऱ फूलने लगी……
6-7 मिनिट होँ गये थें….अचानक सें विनय कों लगनेलगा जैसेउसे बहोत तेज पेशाब आँ रहा हैं….उसने अपने लन्ड कों हिलाना छोड़ दिया….औऱ उठकर बाथरूम मे चला गय़ा….बाथरूम मे जाकर उसने अपने शॉर्ट्स कों नीचे उतारा औऱ अपने लन्ड कों बाहर् निकाल लिया….पऱ यह क्याँ, उसके लन्ड सें पेशाब तौ निकल हि नहींरहा थां……फिन उसे क्यूं ऐसालग रहा थां कि, वोँ बेड पऱ हि पेशाब कर देगा….अजीब सें प्रश्न उसके जेहन मे हड़कंप मचाएहुए थें….
जल्द-2 मे वोँ अपने बाथरूम केँ डोर कों बंद करना भि भूल गय़ा थां……कुछ देरवही खड़ा रहा….औऱ फिन उसने सोचा क्यूं नाँ वोँ फिन सें अपने लन्ड कों हिलाकर देखे कि, पेशाब आता हैं कि नहीं….औऱ यह सोचते हि उसनेफिन सें अपने लन्ड कों धीरे-धीरे-2 हिलॅना शुरुआत कर दिया.ठीक मूठ मारने वाले अंदाज़ मे….क्योंकि वोँ अपने विद्यालय केँ लड़के मनीष औऱ पीयान कों मूठ मारते हुएदेख चुका थां……
धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड कों सहलाते हुए, उसके आँखेफिन सें बंद होने लगी….अजीब सि सरसराहट उसे अपने लन्ड केँ सुपाडे पऱ होनेलगी थि….विनय एक् दम गर्म होँ चुका थां….अब उसेफिन सें लगनेलगा थां कि, उसका पेशाब आने वाला हैं….औऱ यह महसूस करते हि उसने अपने लन्ड कों औऱ तेज़ी सें हिलाना शुरुआत कर दिया…
यह क्याँ हौ रहा हैं विनय…….”तभी एक् आवाज़ उसके कानो मे गूँज उठी….ऐसा लगा जैसे किसी नें कोई बॉम्ब फोड़ दिया हौ……अगले हि समय उसका लन्ड मुरझाने लगा….खोफ़जदा आँखो सें उसने पीछेमूड कर देखा तोँ, ममता बाथरूम केँ डोर पर्र खड़ीउसे हि देखरही थि….विनय अभि भि अपने लन्ड कों मुट्ठी मे पकड़े खड़ा थां….पर्र अब उसकाहाथ हिल नहींरहा थां….कुछ पलों केँ लिए मानो वोँ बुतबन गय़ा हौ….
नां कुछ कहने कों बनरहा थां….औऱ नाँ कुछ करने कों……”मैने क्याँ पूछा….? क्याँ कररहे होँ तुम् यह……?” ममता नें आगेबढ़ कर थोडा सां गुस्से मे कहा,
तौ विनय कां मानो सतंभन टूटा हौ……”वोँ मे वोँ वोँ मे पेशाब करनेआया थां……” विनय नें घबराकर हकलाते हुएकहा……
ममता:झूट बोलरहे हौ तुम्….मेने सभी देखा जोँ तुम् कररहे थें……
विनय: नहीं साची मे वोँ वोँ हां मुझे पेशाब आया थां….पऱ वोँ जब मे यहाआया तोँ पता नहीं क्यूं वोँ बाहर् नहीं निकला….
ममता: बाहर् नहीं निकला….अगर पेशाब आया थां तौ क्यूं नहीं निकला…देखो मैनेसभी देख लिया हैं……तुम् गंदाकाम कररहे थें….हैं नां….?
विनय: नहीं नहीं मे सचकहरहा हूं……
ममता:अब चुप बॅस……मुझे सभीपता हैं तुम् मूठमार रहे थें….
ममता केँ मूह सें मूठ शब्दसुन कर विनय कों झटका सां लगा….उसे तौ लगता थां कि, यह वर्ड औरतों कों पता हि नहीं होता….”क्यूं मूठमार रहे थें नाँ तुम्……”
विनय: वोँ मासी मे वोँ…….
ममता:यह वोँ वोँ क्याँ लगारखा हैं……मेने अपनी आँखो सें देखा हैं….तुम् अब मुकर नहीं सकते….(ममता चोर नज़रो सें सिकुड चुके विनय केँ लन्ड कों देखरही थि….जिसे विनय नें अभि भि मुट्ठी मे पकड़रखा थां……औऱ उसने मुस्कुराते हुएकहा….) बेशर्म….
विनय कों अपनी ग़लती कां अहसास हुआ, तौ उसने अपने लन्ड कों छोड़कर जैसे हि, शॉर्ट्स कों ऊपेर करना चाहा तोँ, ममता नें बीच मे टोककर उसेरोक दिया……”जैसे खड़े होँ वैसे हि खड़ेरहो….” ममता विनय कि तरफ बढ़ी, तोँ विनय कां गलासूख गय़ा….उसे लगा कि ममताअब उससे पीटने वाली हैं….पर्र अगले हि समय ममता नें नीचेबैठ कर विनय केँ लन्ड कों हाथ मे पकड़ लिया….
विनय:यह यह आप् क्याँ कररही हैं….छोड़िए प्लीज़….
ममता: (मुस्कुराते हुए ) क्यूं अच्छा नहींलग रहा….याँ फिन मुझसे शरम आँ रही हैं….
विनय: वोँ मासीजी मुझसे ग़लती होँ गयीँ, ….मुझे क्षमा कर दीजिए….आइन्दा ऐसेकभी नहीं करूँगा….प्लीज़ छोड़ दीजिए…….
ममता: मे क्याँ पूछरही हूं….पहले उसका जवाब दो….(ममता नें विनय केँ लन्ड कों मुट्ठी मे पकड़कर दबाते हुए कहा….जोँ अभि सिकुडा हुआ थां….)
विनय: (एक् दम सें सिसकते हुए)जी….
ममता:फिन कहो अच्छा नहींलग रहा याँ शरम आँ रही हैं….
विनय:जी शरम आँ रही हैं……
ममता: इसका मतलब तुम्हे अच्छा लगरहा हैं….कि मेने तुम्हारा लन्ड पकड़ा हुआ हैं….
विनय: (ममता केँ मूह सें लन्ड सुनकर विनय एक् दम भौचक्का रह गय़ा….) अहह नहीं वोँ मेरा मतलब……(ममता नें फिन सें दोबार लन्ड कों हिलाते हुए दबाया….)
तौ विनय केँ लन्ड मे थोडा -2 तनावआने लगा….”शीइ अह्ह्ह्ह” नहीं अच्छा नहींलग रहा हैं….” विनय नें सिसकते हुएकहा……
ममता: (विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कि चमड़ी कों पीछेहटा कर उसके पेशाब वालेछेद कों अंगूठे सें कुरेदने लगी….) अच्छा अगर तुम्हे मजा नहीं आँ रहा तोँ, तुम्हारा यह क्यूं खड़ा होना शुरुआत होँ गय़ा…….
विनय:अहह मुझे नहीं पता….प्लीज़ छोड़ दीजिए नां…….
ममता:(अब थोड़ी तेज़ी सें विनय केँ लन्ड कों हिलाते हुए) छोड़दूं, मजा नहीं आँ रहा….
विनय: नहीं ओह्ह्ह्ह मासी….प्लीज़……
ममता: क्यूं कुछ होँ रहा हैं नां….
विनय:अहह श्िीिइ हाँ मासी……
ममता: क्याँ होँ रहा हैं….(अब ममता पूरीतरह विनय केँ लन्ड कों मुट्ठी मे भरकर हिलारही थि….)
विनय:ओह उफफफफ्फ़ मुझे नहींपता…….
ममता: (लन्ड हिलाते हुए विनय केँ चेहरे कि तरफ देखते हुए, जिसकी आँखेअब मस्ती मे बंद होँ चुकी थि……) मे बताऊं……तुम्हे मेरेहाथ सें अपना लन्ड कि मूठ मरवाने मे मजा आँ रहा हैं नाँ….कहो सच बोल्ना….मे किसी सें कुछ नहीं कहूँगी….शपथ सें……
जैसे हि विनय कां लन्ड पूरीतरह खड़ाहुआ, तोँ ममता कि आँखे उसके लन्ड कों देखकर हैरानी सें फेल गयीँ, ….दिल जोरो सें धड़कने लगा….हाई मे मर जावां….इतना बड़ा इतना मोटा लन्ड वोँ भि इसका केसे मुझे तोँ यकीन हि नहीं होँ रहा….ममता नें अपनेमूह मे आएहुए थूक कों गटकते हुए सोचा….विनय केँ लन्ड कां लाल सुपाडा एक् दमदहक रहा थां…। जिसे देखते हि उसकी बुर नें पानी छोड़कर उसकी पेंटी कों नम करना शुरुआत कर दिया थां….
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Soon।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -6
विनय: ष्हिईीईईईईईई आहह-आहह हाां मौसी……
ममता: क्याँ कहामजा आँ रहा हैं……कितना….?
विनय: बहोत ज्यादा मजा आँ रहा हैं….उफफफ्फ़…….
ममता:फिन करती रहूं….याँ छोड़दूं……
विनय: उफफफ्फ़ आहह-आहह हाईए मासीजी करते रहिए….अहह ओह्ह्ह्ह मासी मेरा पेशाब निकलने वाला हैं….पीछे हट जाओ……आहह-आहह…….
ममता:(यह सुनकर ममता कि आँखे ख़ुसी सें चमक उठी……विनय अब किसी भि समयझड सकता थां… उसने विनय केँ लन्ड कों औऱ तेज़ी सें सहलाना शुरुआत कर दिया……) हाआँकर देकुछ नहीं होता….मे पीछेहट जाउन्गी….
विनय: अह्ह्ह्ह ओह मस्सी उफफफफफ्फ़ अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उंघह उंघह
विनय कि कमरतेज झटके खाने लगी….औऱ ममता कि मुट्ठी मे पकड़ा हुआ लन्ड भि। औऱ संग हि उसके लन्ड सें तेज वीर्य केँ बोछार होने लगी….जौ सीधा जाकर ममता केँ फेस औऱ उसकी कमीज़ केँ ऊपेर खुलेहुए गले सें बाहर् झाँकती चुचियों पर्र भि……विनय कों ऐसालग रहा थां कि, जैसे दुनिया कां सारामजा उसके लन्ड सें होकर बाहर् निकलरहा हैं….मदहोशी केँ आलम मे उसकी आँखे मुन्दती चली गई, ….इतना मजा इतना लुफ्त आज तक कभी नहीं मिला थां….उसका पूरा जिस्म कांपरहा थां….शरीर मानो जैसे सुन्न पड़ गय़ा होँ….
ममता भि फटी हुई आँखो सें उसके लन्ड सें निकलरही वीर्य कि लंबी-2 पिचकारियों कों देखरही थि……उसे यकीन नहीं होँ रहा थां कि, इस उम्र मे हि उसके लन्ड सें इतना पानी निकलरहा हैं….ममता कां पति सेक्स केँ बादजब भि झड़ता थां तौ, वोँ अपना लन्ड बुर सें बाहर् निकाल कर अपना पानी ममता केँ होंटो कों गिराता थां….जिसे ममता भि पसन्द करती थि….दूसरी वजहयह थि कि, अभि कॉन सां दोनो कों 3-4 साल बच्चा करना थां…
विनयझड कर शांत होँ चुका थां….औऱ अपनी सांसो पऱ काबू पाने कि कॉसिश कररहा थां। जब उसने आँखेखोल कर ममता कि तरफ देखा, तौ उसके चेहरे कों अपने लन्ड सें निकले पानी सें पूरीतरह सें सनाहुआ पाया……यह पेशाब तोँ नहीं थां….फिन यह हैं क्याँ ….जिग्याशा वश उसने अपनी एक् उंगली कों ममता केँ गाल पर्र गिरेहुए वीर्य पऱ लगाकर देखा तोँ, वोँ चीज़ एक् दम चिकनी औऱ गाढ़ी थि….ममता उसकीयह हरक़त देखते हुए मुस्कुरा रही थि….उसने पहले तोँ गोर सें अपने वीर्य कों देखा औऱ फिन ममता कि तरफ….
जौ उसकीतरफ देखकर वासना भरी मुस्कान केँ संग मुस्करा रही थि….”सॉरी मासी वोँ मेने पहले हि कहा थां कि, मेरा पेशाब निकलने वाला हैं….पऱ आप् पीछे नहीं हटी…पर्र यह हैं क्याँ….”
ममता: वोँ सभी मे बाद मे बता दूँगी….पहले यहबता तुम्हे केसेलगा….?
विनय:(सर कों झुकाकर शरमाते हुए) बहोत अच्छा लगा……
ममता नें बाल्टी सें एक् मग पानी लिया……औऱ विनय केँ लन्ड पऱ पानीडाल कर उसके लन्ड कों अच्छे सें सॉफ करनेलगी…… “इससे भि अधिकमजा लेना हैं……?” ममता नें उसके लन्ड कों सॉफ करतेहुए कहा….तोँ विनय नें हां मे सर हिला दिया….”
ममता:ठीक हैं……पर्र मेरी एक् बारयाद रखना….यह बात किसी कों पता नहीं चलनी चाहिए। नहीं तौ आज केँ बाद मे तुम्हे कभी बुलाउन्गी भि नहीं……
विनय: नहीं नहीं मे नहीं बताउन्गा किसी कों……
ममता: अच्छा तुँ अभि मेरेरूम मे जा….मे थोड़ी देर मे आती हूं….
विनय नें अपना शॉर्ट्स ऊपेर किया औऱ जाकर ममता केँ रूम मे बैठ गय़ा….उसके दिमाग़ मे उत्सुकता थि….अंजानी उत्सुकता….ढेरो अरमान पता नहींअब ममता मासीउसे क्याँ सिखाने वाली हैं….इससे भि अधिकमजा पर्र केसे….दूसरी तरफ ममता नें अपनाफेस औऱ बूब्स पऱ लगे वीर्य कों अच्छे सें धोया औऱ बाथरूम सें बाहर् आकर जैसे हि अपनेरूम मे जानेलगी तोँ, बाहर् मेनडोर कि बेलबजी….
ममतागेट केँ तरफचली गई, …….जब जाकरगेट खोला तोँ देखा सामने शीतल खड़ी थि…। शीतल नें अंदरआते हुएकहा…” ममता वोँ विनय कों बुला ला….वोँ हम् सभी मार्केट जारहे हैं….शॉपिंग करने तौ, सोचा कि कुछनये कपड़े विनय कों भि दिलवा दूं….” ममता कों यहसुन कर बहोत बुरा लगा….पऱ बेचारी कर भि क्याँ सकती थि….उसने वही खड़े-2 विनय कों आवाज़ लगाकर कहा कि, शीतल मासी बुलारही हैं, तौ विनय उनकेसंग चला गय़ा….
ममता कों बहोत क्रोध आँ रहा थां….यह सोचकर कि, जब भि बात बनने लगती हैं….तौ यह शीतलबीच मे आकर टाँग अड़ा लेती हैं….पर्र फिनमन मारकर, ममता अपनेरूम मे औऱ बेड पर्र लेटकर सो गई, ……साम केँ 6 बजे उठी….अभि तक विनय वापिस नहींआया थां….खैर उसनेरात केँ खाने कि तैयारी शुरुआत कर दि….लगभग 8 बजे शीतल विनय कों वापिस छोड़कर चली गई, ….विनय अपनेलिए लाएहुए नये जीन्स औऱ टीशर्ट दिखाने केँ लिए ममता केँ पास गय़ा.
विनय: (अपनेनये ड्रेस दिखाते हुए)यह देखो मासी शीतल मासी नें मुझेनई पेंट टीशर्ट लेकर दि हैं……
ममता: (बिना उसके कपड़ों कि तरफ देखते हुए) अच्छी हैं….अब जायहा सें मुझे मेराकाम करनेदे….
विनय कों बड़ा अजीब सां लगा….पऱ उसनेकुछ कहनासही नहीं समझा औऱ वोँ अपनेरूम मे आँ गय़ा….रात कों लगभग 9 बजे उसके मामाजी अजय भि वापिस आँ गये….विनय उस वक़्त, उनकेरूम मे टेलीविज़न देखरहा थां….अजय नें विनय कों चॉक्लेट निकाल कर देतेहुए कहा….” अर्रे क्याँ बात हैं विनय बाबूआज सोए नहीं….”
विनय: नींद नहीं आँ रही थि….अभि ममता मासी खानां बनारही हैं….
अजय: अच्छा पऱ बेटा जल्दसो जायाकरो….
विनय: अभि तोँ 9 बजे हैं ….इतनी जल्दसो कर क्याँ करना हैं…कॉन सां विद्यालय जानां हैं अभि….
अजय: ओह्हहां मे तोँ भूल हि गय़ा थां कि, तुम्हारी वाकेशन्स चलरही हैं….अच्छा तुम् टेलीविज़न देखो मे ज़रा कपड़े चेंज करकेहाथ मूहधो लेता हूं….फिन संग मे खानां खाते हैं….
विनय:ओके मामाजी जी……
उसकेबाद तीनो नें एक् संग डिन्नर किया, औऱ अपने अपने रूम्स मे सोने केँ लिएचले गये… ममता कां दिल तोँ कररहा थां कि, वोँ विनय केँ रूम मे चली जाए….याँ फिनउसे अपनेपास बुला लें….पर्र अपने जीजा कि माजूदगी मे वोँ कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थि….सोचा कॉन सां अभि दिदी कुछदिन औऱ आने वाली हैं….कोई नां कोई मोका तोँ मिल हि जाएगा….
ममता नें चिंगारी सुलगा दि थि….वोँ अब प्रतीक्षा मे थि कि, कब वोँ चिंगारी आग मे बदले औऱ स्वयं विनय उसकेपास आए, औऱ उससेकुछ कहे….क्योंकि जिस उम्र मे विनयउस वक्त थां….वोँ उम्रऐसी होती हैं कि, अल्हड़ पन मे बच्चा कुछ भि किसी केँ भि सामने बक सकता हैं
अगली सुभह भि अजय नें ममता कों जल्दउठा दिया….ममता नें अजय कां ब्रेकफास्ट औऱ लञ्च रेडी करके दिया….अभि विनयसो रहा थां….जब उसका मामाजी ब्रेकफास्ट करकेचला गय़ा….ममता नें वक्त देखा तौ 7 बजरहे थें….वोँ अपनेरूम मे फिन सें आकरसो गयीँ, …….फिन 9 बजेउठी, तौ देखा कि विनय अभि भि अपनेरूम मे सोरहा थां….उसने जाकर विनय कों जगाया औऱ स्वयं रसोई मे जाकर ब्रेकफास्ट रेडी करने लगी….विनय भि नहाधो कर बाहर् हाल मे डाइनिंग टेबल पर्र आकरबैठ गय़ा……तभी बाहर् डोरबेल बजी……
ममता: (किचिन सें विनय कों आवाज़ लगाकर कहतेहुए) विनय जाकर देखो तौ कॉन हैं….?
विनय:जी मासी……
विनयउठ कर बाहर् गय़ा तौ, देखा बाहर् उसकी मासी शीतल खड़ी थि….उसने अंदरआकर विनय कों प्रेम दिया….औऱ बोलि, “ब्रेकफास्ट कर लिया बेटा….”
विनय: अभि नहीं मासीबना रही हैं……
शीतल: क्याँ अभि सजधजकर कररही हैं….इतना समय हौ गय़ा….अभि तक मेरे बच्चे कों उसने ब्रेकफास्ट भि नहीं करवाया……चल आँ मेरेसंग……
शीतल अंदर आँ गई, ….औऱ रसोई मे चली गयीँ, ….”अर्रे दिदी आप् नमस्कार….”
शीतल: नमस्कार क्याँ बात हैं ममताआज इतनीलेट केसे हौ गय़ा तुमको….देर सें उठी थि क्याँ…
ममता:हां दिदी वोँ जीजाजी नें सुभह 5 बजेउठा दिया थां….पहले सुभह उनका ब्रेकफास्ट दिया औऱ फिन दोपहर कां दोपहर का खाना भि बनाकर संग मे दिया तौ, उसकेबाद फिन सें सो गई, ….इसलिये बाद मे लेटउठी थि….
शीतल: ओह्ह्ह अच्छा……चल तूँ ब्रेकफास्ट बना मे चलती हूं….
ममता: अर्रे दिदी बैठिए तोँ सही……मे ब्रेकफास्ट बनारही हूं ब्रेकफास्ट करके जानां….
शीतल: नहीं नहीं मे तौ अभि करकेआई हूं….वोँ कलरात किरण सें मोबाइल पऱ बात हुईँ थि। परसो आँ रही हैं……
ममता:जी……
उसकेबाद शीतल अपनेघऱ वापिस चली गयीँ, ….शीतल केँ जाने केँ बाद उसने ब्रेकफास्ट डाइनिंग टेबल पर्र लगाया औऱ फिन विनय औऱ ममता दोनो नें एक् संग ब्रेकफास्ट किया….आज ममताचुप थि। वोँ देख्ना चाहती थि कि, क्याँ विनयउस दिन कि घटना केँ बाद स्वयं कोई हरक़त करता हैं याँ नहीं…आज तौ ममता कि क़िस्मत भि उसका पूरासंग देरही थि….घऱ कां साराकाम निपटाने केँ बाद, वोँ अपनी बहन किरण केँ रूम मे गई, ….जहाँ पऱ विनय अकेला बैठा टेलीविज़न देखरहा थां……ममता नें उस वक़्त बहोत हि डीपनेक कमीज़ पहनी हुइ थि…….जोँ गले सें काफ़ी खुली हुई थि….
विनयबेड केँ किनारे पऱ लेटाहुआ टेलीविज़न देखरहा थां….ममता नें रूम केँ अंदरआकर बेड केँ संग अपनीपीठ टिकाते हुए, नीचे चटाई पऱ बैठ गयीँ, ….”क्याँ देखरहे होँ विनय….” ममता नें विनय कां ध्यान अपनीतरफ खींचने केँ लिए उससेबात शुरुआत कि….वोँ भि सामने टेलीविज़न पर्र हि देखरही थि……”कुछ खास नहीं आँ रहा….” विनय नें जब नीचे बैठी ममता कि तरफ देखा तौ उसकामूह खुला कां खुलारह गय़ा….ममता कि चुचियाँ आधे सें ज़यादा उसकी कमीज़ केँ गले सें बाहर् आँ रही थि….”लाओ रिमोट मुझेदो….” उसने बिना पीछे देखे अपनाहाथ बढ़ाया। तौ विनय नें उसे रिमोट दे दिया……
ममता चॅनेल चेंज करने लगी……पऱ अब विनय कां पूरा ध्यान ममत कि गोरेरंग कि गुदाज मोटी चुचियों पर्र थां……उन्हे देखते हि उसके लन्ड मे तेज सरसाहट होने लगी….ममता कुछदेर बैठी, औऱ फिन अपनेरूम मे चली गयीँ, ….वोँ देख्ना चाहती थि कि, क्याँ विनय उसके पीछे उसकेरूम मे आता हैं याँ नहीं…
.उस दिन ममता मासी नें उसके लन्ड कों कितने प्रेम सें हिलाया थां……सच मे कितना मजाआया थां….उस दिन ममता मासी नें कहा थां कि, वोँ उसे औऱ मजा देंगी….
यह सोचते हि उसके शरीर मे अजीब सि झुरजूरी दौड़ गई, ……वोँ डरतेहुए पऱ दिल केँ हाथो मजबूर होकरउठा औऱ ममता केँ रूम मे चला गय़ा….
ममता अपनेरूम मे बेड पऱ लेटी हुइ अपनीबुक पढ़रही थि….जब उसने विनय कों अपनेरूम मे आते देखा तौ, उसके होंटो पर्र तीखी मुस्कान फेल गयीँ, ….”क्याँ हुआकुछ चाहिए….?” विनय नें नां मे सर हिला दिया….
विनय: वोँ मे अकेला बोर होँ रहा थां……आज पिंकी औऱ अभि भि नहींआए….
ममता: ह्म्म्म्म चल आँ हि गय़ा हैं तौ इधर हि बैठजा….
विनय ममता केँ पास जाकरबेड पऱ बैठ गय़ा….ममता प्रतीक्षा कररही थि कि, विनयकुछ कहे याँ कोई हरक़त करे, पऱ विनय तौ चोर नज़रो सें बीच-2 मे ममता कि कमीज़ मे कसी हुइ चुचियों कों देखकर मन बहलारहा थां….जब ममता कों लगा कि, इस भौंदू सें उम्मीद रखने कां कोई फ़ायदा नहीं हैं तौ, उसने स्वयं हि बात कों आगे बढ़ाया….उसने पुस्तक बंद करके एक् साइड मे रख दि……
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Sooon।
नादान लन्ड केँ जलवे - Aage kya hua? Next part padhiye
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक भाग हैं भइया आनंद आँ गय़ा
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