नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -19
किरण:हां विनयउंह औऱ ज़ोर सें मसल मेरीईई गान्ड कों ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह विनयदेख मेरी फुद्दि फिर्र पानी छोड़ने वाली हैं आहह-आहह रजाआअ ओहओह आहह-आहह आहह-आहह आहह-आहह
किरण कां जिस्म एक् बारफिन सें अकड़ने लगा…….औऱ उसकी बुर सें पानी कि नदीबह निकली……….विनय भि नीचे लेटेहुए कमर हिलाते हुए झाड़ गय़ा……किरण झाड़कर निढाल होकर विनय केँ ऊपेर लूड़क गई….विनय नें भि नीचे सें कमर हिलाते हुए अपने लन्ड सें वीर्य कि बोछार किरण कि बुर कि गहराइयों मे करनी शुरुआत कर दि…
उसरात तोँ जैसे किरण पऱ विनय केँ लन्ड कां भूत सवार होँ गय़ा थां….किरण दिलखोल कर विनय कों अपनी बुर कां रस चखाती रही….दोनो सुभह 3 बजे सोए….औऱ जबआँख खुली तौ दिन केँ 10 बजरहे थें….किरण नें जल्द सें विनय कों उठाया औऱ फ्रेश होने कों कहा…किरण पहले हि नहाकर खाने कि तैयारी कररही थि….
सुभहजब विनय कि आँख खुली तौ 10 बजरहे थें….वोँ उठकर बाथरूम मे चला गय़ा….किरण रसोई मे ब्रेकफास्ट रेडीकर रही थि…वोँ जानती थि कि अजयशॉप सें किसी नाँ किसी कों ब्रेकफास्ट औऱ लञ्च लाने केँ लिएभेज देंगे…किरण नें जल्द सें ब्रेकफास्ट रेडी किया। औऱ अजय केँ लिए दोपहर का खाना टिफेन मे पॅक करकेरख दिया….फिन उसने विनय औऱ अपनेलिए ब्रेकफास्ट प्लेट्स मे डाला औऱ डाइनिंग टेबल पर्र रखतेहुए विनय कों नाश्ते केँ लिए आवाज़ लगाई, तभी बाहर् डोरबेल बजी…किरण नें जाकरगेट खोला तोँ देखाअजय कि शॉप पर्र काम करने वाला एक् लड़का बाहर् खड़ा थां…वोँ अजय केँ लिए ब्रेकफास्ट औऱ लञ्च लेनेआया थां…किरण रसोई मे वापिस आई, अजय केँ लिएपॅक किएहुए लञ्च कों लाकरउस लड़के कों दे दिया….वोँ लड़का दोपहर का खाना लेकर वापिस चला गय़ा….
किरण नें गेटबंद किया औऱ जब डाइनिंग हॉल मे पहुँची तौ, देखा कि विनयनहा कर डाइनिंग टेबल पर्र बैठा ब्रेकफास्ट कररहा थां….आज किरण केँ चेहरे पर्र खुशी देखते हि बनरही थि….उसने प्रेम सें अपने हाथो सें विनय कों ब्रेकफास्ट करवाया.औऱ फिन स्वयं ब्रेकफास्ट करकेघऱ केँ सॉफ सफाई मे लग गई, ….दोपहर केँ 12 बजे लगभग किरणघऱ कां काम निपटा करनहा धोकर फ्रेश हुई, तोँ डोरबेल बजी…किरण नें जाकरगेट खोला तौ देखा सामने रिंकी केँ मां खड़ी थि….”अर्रे दिदी आप् आएँ अंदर…”
किरण नें मुस्कराते हुएकहा…” नहीं किरण अभि अंदर नहीं आँ सकती, तुँ ऐसाकर जल्द सें सजधजकर होँ जा…मुझे मार्केट जानां हैं, अपनेलिए कुछ साड़ियाँ ख़रीदनी हैं…तेरे चाय्स तोँ बहोत अच्छी हैं…तुँ चल नाँ मेरेसंग….”
किरण रिंकी कि मां कों मना नहींकर पाई…क्योंकि दोनो परिवारों केँ बीच बहोत नज़दीकी थि….इसलिये किरण कों रेडी होकर रिंकी केँ मां केँ संग जानां पड़ा…जाते-2 रिंकी कि मां रिंकी कों विनय केँ पास किरण केँ घऱ पर्र हि छोड़ गयीँ, ….किरण नें जाने सें पहले रिंकी कों कहा थां कि, अगर तुम् दोनो कों भूखलगे तौ, कुछबना करखा लेना…रिंकी कि मोम औऱ किरण 1 बजेघऱ सें निकले….
विनय कों रिंकी केँ संगघऱ मे होना अजीब सां लगरहा थां….पर्र रिंकी हाथआए हुएइस मौके कों हाथ सें नहीं जाने देना चाहती थि….रिंकी नें पिंककलर कि सलवार कमीज़ पहनी हुइ थि….वोँ विनय केँ संगआकर सोफे पर्र बैठ गयीँ, …”तुम् अभि तक नाराज़ हौ मुझसे…” रिंकी नें विनय केँ हाथ पकड़ते हुएकहा, तोँ विनय नें चोन्कते हुए उसकीतरफ देखा….”न् नहीं तोँ….”
रिंकी: फिन मुझसे बात क्यूं नहीं करते….
विनय कां क्याँ बात करूँ….
रिंकी: (मुस्कराते हुए….) प्रेम कि बातें….
विनय: प्रेम….? (विनय नें चोन्कते हुए रिंकी तरफ देखा….
रिंकी: हां विनय मे तुम्हे बहोत लाइक करती हूं….ललव यू विनय….
रिंकी नें धीरे-धीरे-2 विनय कां हाथ पकड़कर अपनी चुचियों कि तरफ लेजाते हुएकहा… यहदेख विनय कां दिल जोरो सें धड़कने लगा…”विनय प्लीज़ मुझे प्रेम करो नां…” रिंकी नें विनय कां हाथ अपनी लेफ्ट चुचि पऱ रखतेहुए कहा….तोँ विनय कों जैसे हि अपनी हथेली मे रिंकी कि नरम चुचि कां अहसास हुआ, तौ विनय केँ लन्ड मे तेज सरसराहट होनेलगी….
रिंकी कि यहबात सुनते हि, उसने कमीज़ केँ ऊपेर सें हि, रिंकी कि चुचि कों मसल दिया…रिंकी तौ जैसे पागल हौ गयीँ, ….उसने पागलों कि तरह विनय केँ होंटो कों चूसना शुरुआत कर दिया…विनय भि उसके होंटो पऱ टूट पड़ा…अब तक मामीजी औऱ अंजू केँ संग चुदाई कां खेलसीख-2 कर विनयअब उसमे माहिर होताजा रहा थां….दोनो केँ होंटो मे मानो जैसेकोई जंग छिड़ गई, हौ…
दोनो पागलो कि तरह एक् दूसरे केँ होंटो कों चूसरहे थें…रिंकी केँ मूह सें उंहउंह कि आवाज़ें आँ रही थि…जब दोनो कां साँस लेना मुस्किल होँ गय़ा, तौ रिंकी नें अपने होंटो कों विनय केँ होंटो सें अलग किया…औऱ फिन अपनी अधखुली नशीली आँखों सें विनय कि आँखो मे झाँकते हुए बोलि.
रिंकी: यहसभी केसे सीखा ?
विनय: (तेज़ी सें साँसे लेतेहुए) ऐसे हि कहीं सें नहीं सीखा थां….
रिंकी अबकोई बात करके वक़्त नहीं गवाना चाहती थि….उसने विनय कां हाथ पकड़ा औऱ उसे उसकेरूम मे लें गयीँ, …औऱ वहा जकारबेड पऱ लेटते हुए विनय कों अपने ऊपेर खेंच लिया….औऱ फिन सें उसके होंटो कों चूसने लगी.इस बार उसनेकुछ देर विनय केँ होंटो कों चूसने केँ बाद, अपने होंटो कों अलगकर दिया….औऱ विनय केँ सर कों अपने गर्दन पऱ झुकाते हुए बोलि.
रिंकी: विनय मुझे प्रेम करो नाँ…मुझे किसकरो। मेरे शरीर Same हर हिस्से कों चुमो, चाटो….खा जाओ मुझे….
विनय जैसे हि रिंकी केँ ऊपेर आया…रिंकी नें अपनी टाँगे खोलली। जिससे विनय कि टाँगें उसकी जांघों केँ बीच आँ गयीँ, …औऱ उसकातना हुआ लन्ड उसकी निक्कर मे सें रिंकी कि सलवार केँ ऊपेर सें उसकी बुर पऱ जा टकराया.”अहह विनयउंह “ रिंकी अपनी सलवार केँ ऊपेर सें हि, विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर पऱ महसूस करतेहुए, सिसक उठी….उसने अपनी टाँगो कों कैंची कि तरह विनय कि कमर पर्र लपेट लिया…विनय नें भि रिंकी कि बुर कि आग कों औऱ बढ़ा दिया…उसने उसके स्तन कों मसलते हुए, अपने होंटो कों उसकी सुरहीदार गर्दन पऱ लगा दिया….औऱ उसकी गर्दन कों चाटने लगा….रिंकी मस्ती मे फिन सें सिसकउठी, उसने विनय केँ सर केँ गिर्द घेराबना करउसे अपने सें औऱ चिपका लिया….
रिंकी: ओह्ह्ह विनय हाआँखा जा मुझे आँ पूरा कां पूरा आहह-आहह…सीईइ विनयआज मेरीआग बुझादे….
विनय भि अब पूरीतरह मस्त होकर उसकी चुचियों कों मसलते हुए, उसकी गर्दन कों चूमरहा थां….औऱ रिंकी उसकेसर कों सहलारही थि…औऱबार अपनीकमर कों ऊपेर कि तरफउठा कर, अपनी बुर कों कपड़ों केँ ऊपेर सें हि, विनय केँ लन्ड पऱ दबारही थि….”ओह्ह्ह विनय आहह-आहह औऱ ज़ोर सें दबा मेरे मम्मे अहह अह्ह्ह्ह…”
फिन विनय उसकी गर्दन कों चूमता हुआ नीचे कि ओरआने लगा….औऱ उसकी कमीज़ सें बाहर् झाँकरहे स्तन केँ ऊपेरी हिस्से कों अपने होंटो मे भरकर चूसने कि कॉसिश करने लगा…”अहह हां चुस्स अह्ह्ह्ह विनय मेरीजान अह्ह्ह” यह कहतेहुए, उसने अपने हाथो कों विनय केँ सर सें हटाया, औऱ फिन अपने दोनो हाथों कों नीचे लेजाकर अपनी कमीज़ कों पकड़कर ऊपेर करने लगी….यह देख विनय जौ कि अपना सारावजन रिंकी केँ ऊपेर डाले लेटाहुआ थां। वोँ अपने घुटनो केँ बल रिंकी कि जाँघो केँ बीच मे बैठ गय़ा….
रिंकी नें अपनी कमीज़ कों पकड़कर ऊपेर करतेहुए, उतार दिया….औऱ फिनबेड पऱ बैठते हुए, अपनी ब्रा केँ हुक्स खोलकर उसे भि बदन सें अलगकर दिया….ब्रा कों अपने जिस्म सें अलग करने केँ बाद, उसने विनय कि ओर देखा, जोँ उसकी 32 साइज़ कि बड़ी-2 चुचियों कों खा जाने वाली नज़रो सें देखरहा थां.
रिंकी: यह तुम्हें बहोत पसंद हैं नाँ ? (रिंकी नें मुस्कुराते हुए विनय कि ओर देखते हुएकहा। विनय नें भि हां मे सर हिला दिया…)
रिंकी नें जल्द सें अपनी सलवार कां नाडा भि खोल दिया औऱ उसने अपनी सलवार उतारकर बेड पर्र रख दिया…।
रिंकी नें फिन सें उसे अपने ऊपेर खेंच लाया….औऱ उसके होंटो कों चूमते हुए बोलि, विनयअब जल्दकर मे कब सें मरीजा रही हूं….” विनय एक् बारफिन उसकी जाँघो केँ बीच मे आँ गय़ा थां….रिंकी नें अपने हाथों कों नीचे लेजाते हुए, उसकी निक्कर कों पकड़कर नीचे खेंच दिया….औऱ फिन विनय नें स्वयं हि, अपनी निक्केर कों अपनी टाँगो सें निकाल दिया…”
रिंकी: तुम्हारी तरफयह पसन्द हें नां यह लें, जीभरकर खेल इनसे….(रिंकी नें अपनी चुचियों कों पकड़कर नॉकदार बनाते हुए विनय कों देखाकर कहा…)
32 साइज़ कि मोटी-2 चुचियों कों देख, विनय कां लन्ड अब पूरी तरहातन गय़ा थां…जौ अब सीधा रिंकी कि बुर कि फांको केँ ठीक ऊपेर थां….
रिंकी नें फिन सें उसे बाहों मे भरतेहुए, उसकेसर कों अपनी चुचियों पर्र दबा दिया…”अहह विनयचूस इसे आहह-आहह” विनय भि पागलो कि तरह रिंकी कि चुचियों पर्र टूट पड़ा….औऱ उसकी एक् चुचि कों मूह मे भरकर उसके अंगूर केँ दाने केँ साइज़ कि निपल कों अपनी ज़ुबान सें दबा -2 कर चूसने लगा…। रिंकी नें उसकेसर कों फिन सें सहलाना शुरुआत कर दिया….
रिंकी: अहह चुस्स्स्स लें अहह विनयखा जा मेरे बूब्ज़ कों आहह-आहह उंह सीईईईई अहहहइई मम्मी ओहहां चुस्स्स्स्स विनय औऱ ज़ोर ज़ोर सें सें चूस.
रिंकी कि आवाज़ मे अब मदहोशी सॉफझलक रही थि….उसका पूरा जिस्म उतेजना केँ कारण कांपरहा थां…उसके गाललाल होकर दिखने लगे…फिन रिंकी कों अपनी बुर कि फांको पर्र विनय केँ लन्ड कां गर्म सुपाडा रगड़ ख़ाता हुआ महसूस हुआ। रिंकी एक् दम सें सिसक उठी….उसने विनय केँ सर कों दोनो हाथों सें पकड़कर ऊपेर उठाया….उसका निपल खींचता हुआ विनय केँ मूह सें पक कि आवाज़ सें बाहर् आँ गय़ा….
रिंकी: (मस्ती मे सिसकते हुए) हाईए कितने जालिम हौ तुम्….
रिंकी कि आँखें अब वासना केँ नशे मे डूबती हुईँ बंद हुईँ जारही थि.उसने अपनी नशीली अध खुली आँखों सें एक् बार विनय कि तरफ देखा, फिन उसके होंटो सें अपने होन्ट सटा दिए….विनय नें भि रिंकी केँ नीचे वाले होन्ट कों अपने होंटो मे दबा-2कर चूसना शुरुआत कर दिया….”उंह आहह-आहह उंघह” रिंकी घुटि आवाज़ मे सिसकरही थि….
उसने अपना एक् हाथ नीचे लेजाकर विनय केँ लन्ड पऱ रखा, औऱ उसे अपनी मुट्ठी मे भर लिया….विनय केँ जिस्म मे तेज सरसराहट दौड़ गयीँ, …रिंकी नें अपने होंटो कों विनय केँ होंटो सें अलग किया….औऱ अपनी टाँगो कों फेलाकर घुटनो सें मोड़कर ऊपेरउठा लिया….विनय तोँ जैसेइस लम्हा कां प्रतीक्षा मे थां….वोँ अपने घुटनो केँ बल रिंकी कि जांघों केँ बीच मे आँ गय़ा…जैसे हि उसकी नज़र रिंकी कि फूली हुइ बुर पऱ पड़ी। उसका लन्ड फिन सें झटके खानेलगा। जौ उससमय रिंकी केँ हाथ मे थां….रिंकी विनय केँ लन्ड केँ फुलति नसों कों अपनेहाथ मे सॉफ महसूस कररही थि….
उसने विनय केँ लन्ड कों पकड़कर अपनी बुर केँ छेद पऱ दबाया….तोँ विनय केँ लन्ड कां सुपाडा उसकी बुर कि फांको कों फेलाता हुआ, छेद पर्र जालगा… रिंकी कि कुँवारी बुर कि फाँकें विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे केँ चारोतरफ फेलते हुएकस गई, ….अपनी बुर केँ छेद पर्र विनय केँ लन्ड केँ गर्म सुपाडे कों महसूस करते हि, उसके जिस्म मे मानो हज़ारो वॉट कि बिजली कोंध गयीँ, होँ….उसका पूरा जिस्म थरथरा गय़ा….
रिंकी कि बुर उसकी बुर सें निकलरहे कामरस सें एक् दम गीली हौ चुकी थि…रिंकी नें अपनी आँखो कों बड़ी मुस्किल सें खोलकर विनय कि तरफ देखा। औऱ फिन काँपते आवाज़ मे बोलि…
रिंकी: विनय धीरे-धीरे-2 अंदर करना….मे यहसभी पहलीबार कररही हूं… इसलिए मुझे दर्द होगा….पऱ तुम् चिंता मत करना चाहे मुझे कितना भि दर्द होँ…तुम् अपना लन्ड मेरी फुद्दि मे घुसा दो…अबकरो भि….
विनय नें धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड केँ सुपाडे कों रिंकी कि बुर केँ छेद पऱ दबाना शुरुआत किया….जैसे हि उसके लन्ड कां सुपाडा, रिंकी कि गीली बुर केँ छेद मे घुसा, रिंकी एक् दम सिसक उठी….विनय केँ लन्ड कां सुपाडा रिंकी कि बुर कि सील पर्र जाकररुक गय़ा….विनय भि इस रुकावट कों सॉफ महसूस करपारहा थां….
रिंकी कि बुर कि झिल्ली, विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे सें बुरीतरह अंदर कों खिच गई, ….जिसके कारण रिंकी केँ शरीर मे दर्द कि तेजलहर दौड़ गयीँ, …उसके चेहरे पऱ सें उसके दर्द कां सॉफपता चलरहा थां….
विनय: क्याँ हुआ रिंकी ? दर्द होँ रहा हैं क्याँ ?
रिंकी: आहह-आहह हां विनय…दर्द होँ रहा हैं….
विनय: बाहर् निकाल लूँ….
रिंकी: नहीं विनय बाहर् मत निकालना….यह दर्द तोँ हर लड़की कों जीवन मे एक् नाँ एक् बार तोँ सहन करना हि पड़ता हैं….विनय ज़ोर सें घस्सा मार….औऱ फाड़दे मेरी फुद्दि….
विनय:अगर तुम्हे दर्दहुआ तोँ ?
रिंकी: मे सह लूँगी……तुँ घुसा नां…
विनय नें अपनी पूरी ताक़त अपनी गान्ड मे जमा कि, औऱ अपने आप् कों अगलेशॉट मारने केँ लिए सजधजकर करने लगा…रिंकी नें अपने दोनो हाथों सें विनय कि बाहों कों कस केँ पकड़ लिया….औऱ अपनी टाँगों कों पूरा फैला लिया.
रिंकी: विनय…विनय फाड़दो अब….
विनय नें कुछ पलों केँ लिए रिंकी केँ चेहरे कि तरफ देखा…जोँ अपनी आँखें बंदकिए हुए लेटी हुइ थि….उसने अपने होंटो कों दाँतों मे दबारखा थां। जैसे वोँ अपने आप् कों उस दर्द केँ लिए सजधजकर कररही होँ….उसके माथे पऱ पसीने कि बूंदे उभरआई थि….विनय नें एक् गहरी साँसली, औऱ फिन अपनी पूरी ताक़त केँ संग एक् ज़ोरधार धक्का मारा….
विनय केँ लन्ड कां सुपाडा रिंकी कि बुर कि झिल्ली कों फाड़ता हुआ अंदरघुस गय़ा…विनय कां आधे सें ज्यादा लन्ड एक् हि बार मे अंदरजा चुका थां…” हाए मां मर गयीँ, हइई आहह-आहह विनय बहोत दर्द हौ रहा हैं….” रिंकी छटपटाते हुए, अपनेसर कों इधरउधर पटकरही थि…उसे अपनी बुर मे दर्द कि तेजलहर दौड़ती हुई महसूस होँ रही थि….
रिंकी केँ इसतरह सें दर्द केँ कारण बिलबिलने सें विनय भि घबरा गय़ा। उसने रिंकी कि ओर देखा, तौ उसकीबंद आँखो सें आँसूबह कर उसके गालों पऱ आँ रहे थें….”रिंकी मे बहार निकाल लेता हूं” विनय नें रिंकी कि ओर देखते हुएकहा….
रिंकी: (अपनी आँखो कों खोलते हुए) नहीं -2 विनय बाहर् मत निकालना…पूरा अंदरकर दो….मेरी फिकरमत करो….
विनय: पर्र रिंकी…
रिंकी: मैनेकहा नाँ मेरी परवाह मत करो….तुम् अपना लन्ड पूरा मेरी फुद्दि मे डालो….
विनय नें अपने लन्ड कि तरफ देखा…जौ रिंकी कि टाइट बुर केँ छेद मे घुसकर फँसाहुआ थां….औऱ फिन उसने एक् बारफिन सें पूरी ताक़त केँ संग, झटका मारा….इस बार उसके लन्ड कां सुपाडा उसकी बुर कि दीवारो कों फेलता हुआ पूरा कां पूरा अंदरजा घुसा…
रिंकी: अह्ह्ह्ह विनय…….(रिंकी नें अपने हाथों सें विनय केँ बाजुओं कों इतनीकस केँ पकड़ा कि, उसके नाख़ून, विनय कि बाहों मे गढ़ने लगे….विनय कों अपने लन्ड केँ गिर्द रिंकी कि टाइट बुर केँ दीवारे कसी हुईँ महसूस हौ रही थि…उसके लन्ड मे तेज गुदगुदी सि होने लगी….किरण औऱ अंजू कि बुर रिंकी कि बुर केँ मुक़ाबले बहोत ढीली महसूस हौ रही थि…)
दोनो थोड़ी देर वैसे हि लेटे रहे….विनय अब धक्के लगाने कों उतावला होँ रहा थां….पर्र रिंकी नें उसकीकमर मे अपनी टाँगो कों लपेटरखा थां… जिस कि वजह सें विनयहिल भि नहींपा रहा थां….कुछ लम्हे दोनोयूँ हि लेटे रहे….फिन धीरे-धीरे-2 रिंकी कां दर्दकुछ कम होने लगा….औऱ उसे अपनी बुर मे अजीब सि सरसराहट होने लगी….अब उसेमजा आनेलगा थां…औऱ उसने अपनी टाँगो कों जोँ कि उसने विनय कि कमर पर्र कसरखी थि…कों ढीलाकर दिया….जैसे हि विनय कि कमर पऱ रिंकी कि टाँगों कि पकड़ ढीली हुइ…
विनय नें अपनाआधे सें ज्यादा लन्ड एक् हि बार मे रिंकी कि बुर सें बाहर् खींचा….औऱ फिन सें एक् झटके केँ संग, रिंकी कि बुर मे पेल दिया…धक्का इतना जबरदस्त थां कि, रिंकी कां पूरा जिस्म हिल गय़ा…”अहह शियीयीयी विनयउंह धीरे-धीरे मेरीजान अह्ह्ह” रिंकी नें फिन सें अपने पैरो कों विनय केँ चुतड़ों केँ ऊपेररख करउसे अपनीतरफ दबा लिया…
जब उसे अपनी बुर कि दीवार पर्र विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कि रगड़ महसूस हुइ, तौ वोँ एक् दम सें मस्त होँ गई, ….फिन थोड़ी देर रुकने केँ बाद, रिंकी नें विनय कों धीरे-धीरे सें कहा….”विनय अब धीरे-धीरे सें बाहर् निकालो…मुझे कुछ देख्ना हैं…” यह कहतेहुए, उसनेफिन सें अपने पैरो कि पकड़ ढीली कि, औऱ विनय नें घुटनो केँ बल बैठते हुए, धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड कों बाहर् निकालना शुरुआत किया….फिन सें वही मज़े कि लहर रिंकी केँ रोम-2 मे दौड़ गई,। उसे विनय केँ लन्ड कां सुपाडा अपनी बुर कि दीवारो पर्र रगड़ ख़ाता हुआसॉफ महसूस हौ रहा थां….
रिंकी: ओह्ह विनय मेरी फुद्दि अहहअहह बहोत मजा आँ रहा हैं.ओह्ह उम्ह्ह.
विनय नें जैसे हि अपना लन्ड रिंकी कि बुर सें बाहर् निकाला। तोँ उसकी आँखेफटी कि फटीरह गयीँ, …उसका लन्ड खून औऱ रिंकी कि बुर सें निकलरहे कामरस सें सनाहुआ थां…जैसे हि, विनय नें अपना लन्ड बाहर् निकाला। रिंकी नें अपनेपास रखे पुराने कपड़े कों अपनी बुर पर्र दबा दिया…ताकि उसमे सें खून निकलकर, बेडशीट पऱ नां गिरे….
फिन उसने अपनी बुर कों उस कपड़े सें रगड़कर सॉफ किया…औऱ फिन विनय कि तरफ देखा….जोँ हैरत सें उसकीतरफ देखरहा थां….
रिंकी: क्याँ हुआऐसे क्याँ देखरहे होँ ?
विनय: रिंकी इसमे सें खून निकलरहा हैं…
रिंकी: हां जानती हूं….पहली बार करने सें निकलता हैं.अब मे ठीक हूं…तूँ घबरामत….
फिन रिंकी उठकर बैठी, औऱ विनय केँ लन्ड कों हाथ मे लेकरउसे कपड़े सें अच्छे सें सॉफ किया…फिन उस कपड़े कों साइड मे रखतेहुए, बेड पऱ लेट गयीँ, …रिंकी नें अपनी बाहों कों खोलकर विनय कों आने कां इशारा किया…विनय उसके ऊपेरझुक गय़ा….रिंकी नें उसे अपनी बाहों मे कस लिया…औऱ उसकी आँखो मे झाँकते हुए बोलीं….”आइ लवयू विनय” औऱ फिन दोनो केँ होन्ट फिन सें आपस मे घूतम घुथ्था होँ गये….फिन सें वही उम्ह्ह आहह-आहह उन्घ्ह कि आवाज़े उनकेमूह सें आनेलगी…
विनय कां लन्ड अब उसकी बुर कि फांको पऱ रगड़खा रहा थां…विनय भि मस्ती मे उसके होंटो कों चूस्ता हुआ, उसके निपल्स कों अपनी उंगलियों सें भींचते हुए उसकी चुचियों कों दबारहा थां….रिंकी कि बुर मे कुलबुली सि होने लगी….वोँ नीचे सें अपनी गान्ड कों हिलाते हुए, विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर केँ छेद पर्र सेट करने कि कॉसिश कररही थि….
थोड़ी देर केँ बाद अचानक सें विनय केँ लन्ड कां सुपाडा रिंकी कि बुर केँ छेद पऱ अपने आप् जा लगा….रिंकी कां पूरा जिस्म एक् दम सें थरथरा गय़ा। उसने अपने होंटो कों विनय केँ होंटो सें अलग किया, औऱ फिन विनय कि आँखो मे देखते हुए मुस्कुराने लगी….फिन उसने अपनी आँखे शरमाकर बंदकर ली, उसके होंटो पऱ मुस्कान फेली हुईँ थि….
विनय नें भि बिनादेर किए, धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड केँ सुपाडे कों रिंकी कि बुर केँ छेद पर्र दबाना शुरुआत कर दिया….”उंह विनय सीईईईई आहह-आहह बहोत माजा आँ रहा हैं….तुम्हे नहीं आँ रहा….”
विनय:हां रिंकी मुझे भि बहोत मजा आँ रहा हैं….
विनय केँ लन्ड कां सुपाडा रिंकी कि बुर केँ छेड़ औऱ दीवारो कों फैलाता रगड़ ख़ाता हुआ, अंदर बढ़ने लगा….रिंकी केँ शरीर मे मस्ती कि लहरे उमड़रही थि….उसका पूरा जिस्म उतेजना केँ कारण कांपरहा थां…उसकी बुर कि दीवारे विनय केँ लन्ड कों अपने अंदरकस कर निचोड़ रही थि…ऐसी सरसराहट विनय नें अपने लन्ड मे पायल कि बुर मारते हुए भि महसूस नहीं कि थि…
धीरे-धीरे-2 विनय कां पूरा लन्ड रिंकी कि बुर मे समा गय़ा….रिंकी नें सिसकते हुए, विनय कों अपनी बाहों मे कस लिया….औऱ उसकी टीशर्ट ऊपेरउठा कर उसकीपीठ कों अपने हाथो सें सहलाने लगी….”अहह विनयकरो नाँ उम्ह्ह आहह-आहह सीईईई अहह विनय मुझे बहोत मजा आँ रहा हैं….”
विनय नें रिंकी केँ फेस कों अपनीतरफ घुमाया, औऱ फिन अपने होंटो कों उसके होंटो पर्र रख दिया…रिंकी नें अपने होंटो कों खोल दिया….औऱ विनय नें थोड़ी देर रिंकी केँ होंटो कों चूसा, औऱ फिन अपने होंटो कों हटाते हुए, उसकी जाँघो केँ बीच मे घुटनो केँ बल बैठते हुए, अपनी पोज़िशन सेट कि, औऱ अपने लन्ड कों धीरे-धीरे-2 आगे पीछे करनेलगा….
विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे रिंकी अपनी बुर कि दीवारो पर्र महसूस करके एक् दम मस्त होँ गई, ….औऱ अपनी आँखें बंदकिए हुए अपनी पहली चुदाई कां मजा लेने लगी…”अह्ह्ह्ह विनयहइई मेरी फुद्दि अहहमार औऱ ज़ोर सें मारअहह फाड़दे अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह”
धीरे-धीरे-2 विनय अपने धक्कों कि रफतार कों बढ़ाने लगा….पूरे रूम मे रिंकी कि सिसकारियों औऱ बेड केँ हिलने सें चर-2 कि आवाज़ गूंजने लगी। रिंकी पूरीतरह मस्त हौ चुकी थि….रिंकी कि बुर उसकेकाम रस सें भीग चुकी थि….जिससे विनय कां लन्ड चिकना होकर रिंकी कि बुर केँ अंदर बाहर् होनेलगा थां….रिंकी भि अपनी गान्ड कों धीरे-धीरे-2 ऊपेर कि ओर उछालकर चुदवा रही थि….
रिंकी: हाईएओईई आहह-आहह मार मेरी फुद्दि अह्ह्ह्ह विनय बहोत मजा आँ रहा हैं.अहह चोद मुझे अह्ह्ह्ह औऱ तेजकर …देख मे झड़ने वाली हूं अहहउहह उहह उंघह अह्ह्ह्ह विनय मे गइईए आहह-आहह….
विनय केँ जबरदस्त धक्कों नें कुछ हि मिनिट मे रिंकी कि बुर कों पानी -2 कर दिया थां….झड़ते हुए, उसका पूरा शरीररह-2 कर झटकेखा रहा थां…विनय अभि भि लगतार अपने लन्ड कों बाहर् निकाल-2 कर रिंकी कि बुर मे पेलरहा थां….रिंकी झड़ने केँ बाद एक् दम मस्त हौ गई, थि…उसकी बुर सें इतना पानी निकला थां कि, विनय कां लन्ड पूरा गीला होँ गय़ा…
अब रिंकी अपनी आँखें बंदकिए हुए लेटी थि…औऱ लंबी -2 साँसे लेँ रही थि…रिंकी नें अपनी आँखें खोलकर विनय कि तरफ देखा…जोँ पसीने सें तरबतर हौ चुका थां.औऱ अभि भि तेज़ी सें धक्के लगारहा थां….अब रूम मे सिर्फ़ बेड केँ चरमराने सें चूं-2 कि आवाज़ आँ रही थि….जैसे -2 विनय झटके मारता, बेड हिलता हुआचूं-2 कि आवाज़ करता.
धक्के मारते हुए, जब विनय नें रिंकी कि आँखो मे देखा….बेड कि आवाज़ अबतेज होने लगी…पता नहीं क्यूं पऱ रिंकी बेड केँ हिलने कि आवाज़ सुनकर शरमा गयीँ,, औऱ अपनेफेस कों साइड मे घुमाकर मुस्कुराने लगी…
विनय: (अपने लन्ड कों अंदर बाहर् करतेहुए) क्याँ हुआ…?
रिंकी: (मुस्कुराते हुए)कुछ नहीं….
विनय:फिन मेरीतरफ देखो नां…
रिंकी: नहीं मुझेशरम आती हैं….
विनय नें अपने दोनो हाथों सें रिंकी केँ चेहरे कों अपनीतरफ घुमाया। पर्र रिंकी नें पहले हि अपनी आँखेबंद करली, उसके चेहरे पऱ शर्मीली मुस्कान फेली हुइ थि….विनय नें रिंकी केँ होंटो कों अपने होंटो मे लेकर चुसते हुए, अपने धक्कों कि रफ़्तार बढ़ा दि…औऱफिन कुछ हि पलों मे उसके लन्ड मे तेज सुरसुरी हुई….उसका लन्ड रिंकी कि बुर मे झटके खाने लगा….औऱ फिन वोँ रिंकी केँ ऊपेर निढाल हौ करगिर पड़ा….
रिंकी नें उसकीपीठ कों सहलाते हुए, अपने होंटो कों उसके होंटो सें सटाये रखा। दोनो काफ़ी देर एक् दूसरे केँ होंटो कों चूस्ते रहे….विनय कां लन्ड भि सिकुड कर रिंकी कि बुर सें बाहर् आँ गय़ा….जब रिंकी कि नज़र घड़ी पर्र पड़ी तौ, उसने विनय कों अपने ऊपेर सें हटने केँ लिए कहा….विनय उसके ऊपेर सें उठकरबैठ गय़ा….फिन रिंकी नें विनय सें कहा कि, वोँ यह कपड़ा जिससे उसने अपनी बुर सें निकला खूनसॉफ किया थां…पीछे प्लॉट मे फेंकदे….
उसकेबाद रिंकी नें अपनी कमीज़ औऱ सलवार पहनी….विनय नें भि कपड़े पहने औऱ दोनो बाहर् आँ गये….
रिंकी औऱ विनय अभि दोनो बाहर् आए हि थें कि, डोरबेल बजी….विनय नें बाहर् करगेट खोला तोँ देखा कि, बाहर् किरण केँ मां बापू खड़े थें…विनय नें उनकेपेर छुए औऱ फिन वोँ अंदर आँ गये….जब किरण कि माँ नें किरण केँ बारे मे पूछा तोँ, विनय नें बता दिया कि, वोँ मार्केट गयेहुए हैं…विनय शीतल केँ घऱ जाकर शीतल कों बुला लाया ताकि वोँ किरण केँ मां बापू केँ लिए लञ्च बनवा सके….शीतल भि बच्चों कों लेकर किरण केँ घऱ आँ गई, ….उसने किरण केँ मां बापू केँ लिए पहलेचाइ नाश्ते कां इंतज़ाम किया औऱ फिन दोपहर केँ खाने कां.
too be continued.
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नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -20
किरण केँ भइया कि विवाह केँ दिन जैसे-2 नज़दीक आँ रहे थें….वैसे -2 घऱ मे मेहमानो कां आनां बढ़ता जारहा थां….वशाली ममता औऱ उसका हज़्बेंड भि वापिस आँ चुके थें….उस दिन केँ बाद किरण कों मोका नहींमिल रहा थां…औऱ नाँ हि रिंकी कों, विनय कां तौ बुराहाल थां…वोँ वासना सें भरी तरसती नज़रों सें दिनभर किरण कों देखता रहता थां…किरण कां भि यहीहाल थां….पर्र घऱ मे इतने लोगो कि मौजूदगी मे वोँ कर भि क्याँ सकती थि….किरण केँ भइया कि विवाह मे सिर्फ़ 4 दिनबचे थें….
विवाह सें 3 दिन पहले कि बात हैं…किरण कां घऱ औऱ उसके बापू नें जौ घऱ लिया थां… दोनोघऱ मेहमानों सें पूरीतरह भर चुके थें….रात कों खाने केँ बादसभी लोग सोने कि तैयारी कररहे थें….विनय औऱ वशाली दोनो हि किरण केँ संग उसकेरूम मे सोते थि…विनय खानां खाकर सबसे पहलेरूम मे चला गय़ा थां…उसे जल्द हि नींद आँ गई, ….धीरे-धीरे-2 घऱ मे सन्नाटा पसरता जारहा थां….वशाली कों एक् नयी हम् उम्र सहेली मिल गयीँ, थि….उसका नामअनु थां….वोँ किरण केँ सबसे छोटे चाचा कि बेटी थि….उसरात कों वशाली औरअनु दोनो विवाह मे पहने जानी वाली ड्रेस केँ बारे मे डिसकस कररही थि….
किरण भि फ्री होकरजब अपनेरूम मे पहुँची तौ, उसने देखा कि विनयसो रहा हैं….पऱ वशाली वहा नहीं थि….वोँ वशाली कों ढूँढते हुए ऊपेरबने रूम मे गई, तोँ, पाया कि वशाली अनु केँ संग गप्पे हांकरही थि…”चल वशाली सोना नहीं हैं क्याँ बहोत देर होँ गई, हैं….अब इनको भि आराम करनेदे…” इससे पहले कि वशाली कुछ बोलती….अनु बीच मे बोल पड़ी….”फूफी वशाली आज मेरेसंग हि सो जाएगी….” अबभला किरण कों औऱ क्याँ चाहिए थां….मन मे तोँ ख़ुसी केँ लड्डू फूटरहे थें….वोँ बिनाकुछ बोले वापिस नीचे आँ गयीँ, ….रूम मे पहुँच कर किरण नें डोरबंद किया…औऱ बेड केँ पासआकर खड़ी होँ गई, ….रूम मे 0 वॉट कां बल्बऑन थां…
जिसकी हल्की रोशनी रूम मे फेली हुई थि….किरण नें बेड पर्र लेटेहुए, विनय कि तरफ देखा, तोँ उसकी आँखे खुली हुइ थि….”सोए नहीं अभि तक….?” किरण नें मुस्कराते हुए कहा….”अभि सोया थां…डोर कि आवाज़ सुनकर उठ गय़ा….” विनय नें मुस्कराते हुए कहा…औऱ बेड पऱ वशाली कों नां पाकर उसने लेटे-2 हि किरण सें पूछा… “मामीजी वशाली कहां हैं….?” तौ किरण नें मुस्कुराते हुए कहा….”वोँ आजअनु केँ संग ऊपेर हि सोएगी….” किरण कि बुर सें तोँ उसी वक्त सें पानी रिसना शुरुआत हौ गय़ा थां….जब वोँ ऊपेर सें नीचेआई थि….
किरण नें जल्द सें अपनी साड़ी खोली औऱ बेड पर्र लेट गयीँ, ….किरण नें विनय कि तरफ करवट बदली उसकीकमर कों अपनी बाहों मे कसतेहुए, उसे अपने सें चिपका लिया…औऱ अगले हि लम्हा विनय नें किरण केँ होंटो कों चूमते हुए, उसे बेड पऱ पीठ केँ बल लेटा दिया, औऱ स्वयं उसके ऊपेरलेट गय़ा……किरण कि साँसे मस्ती मे तेज होँ गयीँ, थि…….औऱ वोँ अपने होंटो कों ढीलाचोर कर विनय सें अपने होंटो कों चुस्वा कर मस्त हुई जारही थि……औऱ विनय उसके होंटो कों चूस्ते हुए, उसके ब्लाउस केँ बटन कों धीरे-धीरे -2 खोलरहा थां…….जैसे हि किरण केँ सारे ब्लाउस केँ बटन खुले, उसके बड़ी-2 गुदाज चुहियाँ ब्लाउज कि क़ैद सें बाहर् उछल पड़ी….
विनय नें अपने होंटो कों किरण केँ होंटो सें अलग किया….औऱ किरण कि आँखों मे देखा….उसकी आँखें बहोत मुस्किल सें खुलपा रही थि….जिसमे वासना कां नशा छायाहुआ थां….किरण कि चुचियाँ ऊपेर नीचे हौ रही थि….जिसे देख विनय कि आँखों कि चमक भि बढ़ गई, ….वोँ किसी भूखे कुत्ते कि तरहा किरण कि चुचियों पर्र टूट पड़ा….
औऱ अपने दोनो हाथों मे जितना भर सकता थां.भर कर दोनो चुचियों कों मसलते हुए, उसके निपल्स पऱ अपनीजीभ कों फिराने लगा……किरण मस्ती मे एक् दम सें सिसकउठी, औऱ उसने विनय कों बाहों मे भरतेहुए अपने शरीर सें चिपका लिया….विनय कां लन्ड उसके पाजामे कों फाड़कर बाहर् आने कों बेकरार हुआजा रहा थां….
किरण: (मस्ती मे सीसियाते हुए)अहह विनय सीईईईईईईई तूने मुझे क्याँ कर दिया हैं…….ओह्ह्ह्ह क्यूं तेरा लन्ड अपनी फुद्दि मे लिए बिना मुझे नींद नहीं आती…….मे मर जाउन्गी, तेरे बिना……
विनय: (किरण कि चुचियों पऱ अपने होंटो कों रगड़ते हुए)अहह मामीजी……मेरा भि तोँ आप् जैसाहाल हैं……। यह लन्ड जब तक आपकी बुर कां रसचख नहीं लेता….मुझे भि नींद नहींआती……
किरण: ओह्ह विनयफिन तडपा क्यूं रहा हैं….डाल दे अपना मुनसल लन्ड मेरी बुर मे…औऱखूब रगड़कर चोद अपनी मामीजी कों…….
यह कहतेहुए, किरणबेड पऱ पीठ केँ बललेट गयीँ, ….उसने अपने पेटिकोट कों अपनीकमर तक ऊपेरउठा दिया……0वॉट केँ बल्ब कि रोशनी मे किरण कि चिकनी बुर कामरस लबालब करचमक उठी……जिसे देखते हि, विनय केँ दम पागलसो गय़ा, औऱ किरण कि जांघों केँ बीच मे आकरउस पऱ सवार हौ गय़ा….
ऊपेरआते हि, विनय नें किरण केँ चुचि कों जितना हौ सकता थां मूह मे भरकर चूसना चालूकर दया….किरण केँ पूरे जिस्म मे मानो बिजली कोंध गयीँ, ……उसने विनय केँ सर कों अपनी बाहों मे जाकड़ कर अपनी चुचियों पऱ दबाना चालूकर दिया…….”अह्ह्ह्ह चुस्स्स मेरीजान चुस्स्स लेँ मेरादूध सभी तेरेलिए हैं….ओह औऱ ज़ोर सें चुस्स्स्स्स अह्ह्ह्ह हाआंन्णजणन् काट लें ओह ढेरीईई”
विनय किरण केँ निपल कों अपने होंटो केँ बीच मे लेकर, अपनीजीभ सें कुलबुलाने लगा….किरण कां पूरा शरीर मस्ती केँ कारण कांपरहा थां….उसकी हल्की सिसकियाँ उसकेरूम केँ दीवारों सें टकराकर उसी कमरे मे खोकररह जारही थि……बुर मे खुजली औऱ बढ़ गयीँ, थि….विनय नें अपना एक् हाथ नीचे लेजाकर अपने पयज़ामे कां नाडाखोल करउसे नीचे सरकाना शुरुआत करदया……
किरण नें अपनी टाँगों कों मोड़कर विनय कि जांघों पर्र पावंरख कर उसके प्यज़ामे म अपने पांव फँसादिए, औऱ फिन उसके प्यज़ामे कों अपने पैरो सें नीचे सरकाते हुए, उसके पैरो सें निकाल दिया….विनय कां फन्फनाता हुआ लन्ड, जैसे हि प्यज़ामे कि क़ैद सें बाहर् आया…….वोँ सीधा किरण कि बुर केँ फांको केँ बीचजा पहुंचा……
जैसे हि विनय केँ लन्ड केँ गर्म सुपाडे नें किरण कि बुर कि फांकों कों छुआ, किरण कि बुर मे सरसराहट औऱ बढ़ गयीँ, ….किरण नें मस्त होकर अपनी टाँगों कों औऱ फेलाकर ऊपेरउठा कर विनय कि कमर पर्र कस लिया……विनय केँ लन्ड कां सुपाडा किरण कि बुर कि फांको कों फेलाकर उसकी बुर केँ छेद पर्र जा लगा….किरण नें अपनी मदहोशी सें भरी आँखों कों खोलकर विनय कि तरफ देखा….
किरण: (मदहोशी औऱ मस्ती भरी आवाज़ मे विनय कि आँखों मे झाँकते हुए) अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह बहोत गर्म हि रे तेरायह लौडा….
विनय:हां मामीजी आप् कि बुर भि भट्टी कि तरहातप रही हैं….
किरण: वोँ तोँ कब सें फुदकरही हैं.तेरे लन्ड कों अंदर लेने केँ लिए……
यह कहतेहुए, किरण नें विनय केँ पीठ पऱ अपनी बाहों कों कस लाया, औऱ ऊपेर कि तरफ अपनी गान्ड कों उठाने लगी….लन्ड पर्र बुर कां दबाव पड़ते हि, किरण कि बुर कि फाँकें फेलने लगी….औऱ विनय केँ लन्ड कां मोटा सुपाडा किरण कि टाइट बुर केँ छेद कों फेलाते हुए, अंदर घुसने लगा….किरण अपनी सांसो कों थामेहुए, तब तक अपनी गान्ड कों ऊपेर कि ओर उठतीरही। जब तक विनय कां लन्ड धीरे-धीरे-2 किरण कि बुर मे जड तक नहींसमा गय़ा…….
जैसे हि विनय केँ लन्ड कां सुपाडा किरण कि बच्चेदानी सें जाकर टकराया, किरण केँ होंटो पऱ सन्तुस्ति भरी मुस्कान फेल गई, ….मस्ती अपनेचरम पर्र पहुँच गये……किरण एक् दम कामविहल हौ गई,। मानो जैसे वोँ जन्नत मे पहुँच गयीँ, हौ….उसने अपनी अधखुली औऱ वासना सें लिप्त आँखों सें विनय कि तरफ देखा, तोँ उसेऐसा लगा.मानो जैसे विनय हि उसकी जीवन होँ…
उसने अपने दोनो हाथों मे विनय केँ चेहरे कों पकड़कर कुछदेर केँ लिए उसकी तरफ़ देखा, औऱ फिन अपने थरथरा रहे होंटो कों, विनय केँ होंटो पर्र लगा दिया……औऱ उसके होंटो कों चूस्ते हुए, अपना सारा प्रेम विनय कों लौटाने लगी….विनय भि मस्ती मे आकर किरण केँ होंटो कों चूस्ते हुए, धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड कों किरण कि बुर केँ अंदर बाहर् करनेलगा….
दोनो एक् दूसरे केँ होंटो कों चूस्ते हुए, अपने प्रेम कां इज़हार एक् दूसरे सें कररहे थें, औऱ जब विनय अपना लन्ड किरण कि बुर सें बाहर् निकाल कर दोबारा अंदर पेलता, तोँ किरण अपनी जांघों कों फेलाकर अपनी गान्ड कों ऊपेरउठा करफिन सें विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर मे लेने केँ लिए आतुर होँ उठती….औऱ जब विनय कां लन्ड फिन सें किरण कि बुर कि गहराइयों मे जाता, तौ किरण अपने दोनो हाथों सें विनय केँ चुतड़ों कों दबाकर उसके लन्ड पऱ अपनी बुर कों औऱ दबा देती….
उसकी बुर कि दीवारे विनय लन्ड कों अंदर हि अंदरकस कर छोड़रही थि….मानो जैसे उसके लन्ड कों मथरही होँ……किरण कि बुर कि गरमी कों अपने लन्ड पर्र महसूस करके, विनय भि मदहोश हुआजा रहा थां….हर धक्के केँ संग विनय कि स्पीड बढ़रही थि, औऱ किरण भि मस्ती मे अपने होंटो कों चुस्वाते हुए, उसकीलय मे अपनी गान्ड कों ऊपेर कि ओर उछालकर विनय कां लन्ड अपनी बुर कि गहराइयों मे लेने कि कॉसिश कररही थि……
अब विनय पूरेजोश मे आँ चुका थां….उसने अपने होंटो कों किरण केँ होंटो सें अलग किया, औऱ उसकी जांघों केँ बीच बैठते हुए, ताबडतोड़ धक्के लगाने लगा….विनय केँ लन्ड केँ तबडतोड़ धक्को नें किरण कि बुर कि दीवारों कों बुरी तरहा रगड़कर रख दिया….उसके पूरे शरीर मे मस्ती कि लहर दौड़ गई, …….
किरण : (अपनी चुचियों केँ निपल्स कों अपने हाथों सें मसलते हुए) आहह-आहह अहह विनय धीरे-धीरे कर ओह्ह्ह मर गइईएरीई धीरे-धीरे बेटा ओह आहह-आहह उंह औऱ बहोत मजा आँ रहा हैं विनय ओह्ह्ह्ह धीरे-धीरे बेटा आहह-आहह अह्ह्ह्ह चोद मुझे आहह-आहह
विनय:अहह चोद तोँ रहा हुन्न्न्न्न्न आहह-आहह अह्ह्ह्ह
किरण नें अपनी सिसकियों कों दबाने केँ लिए अपने होंटो कों दाँतों केँ बाच मे दबा लिया….औऱ तेज़ी सें अपनी गान्ड कों ऊपेर कि औऱ उछलते हुए झड़ने लगी……विनय केँ लन्ड नें भि उसकी बुर कि दीवारों कों भीगोकर रख दिया….झड़ने केँ बाद विनय किरण केँ ऊपेर निढाल होकरगिर पड़ा….
सुभह केँ 5 बज चुके थें….किरण आज काफ़ी दिनो केँ बाद झड़ने केँ कारण काफ़ी हल्का महसूस कररही थि….विनय औऱ किरण दोनो गहरी नींद मे सोरहे थें कि, तभी बाहर् हॉल कि लाइटऑन हुईँ औऱ बाहर् कि हलचल कि आवाज़ सुनकर किरण कि नींद टूटी। वोँ बेड पर्र उठकरबैठ गयीँ, ….उसने अपनीकमर पर्र चढ़ेहुए पेटिकोट कों ठीक किया। औऱ बेड सें नीचेउतर कर अपने ब्लाउस केँ हुक्स बंद करतेहुए, लाइटऑन कि। लाइटऑन करने केँ बाद किरण ड्रेसिंग टेबल केँ सामने जाकर खड़ी होँ गयीँ, ….औऱ अपने आप् कों मिरर मे देखने लगी कि, कही उसके चेहरे पर्र कोई निशान तोँ नहीं हैं…
अभि किरण आईने मे हि देखरही थि कि, विनय नें एक् दम सें उठकर पीछे सें बाहों मे भर लिया….औऱ उसके गालो पऱ अपने होंटो कों रगड़ने लगा…”सीईईई ओह्ह्ह विनयकब उठे तुम्….?” किरण नें मस्ती मे सिसकते हुए कहा….”अभि उठा हूं…” विनय नें अपने दोनो हाथो कों आगे लाकर किरण केँ ब्लाउस केँ ऊपेर सें उसकी चुचियों कों मसलते हुए कहा…तोँ किरण केँ पूरे शरीर मे झुरजुरी सें दौड़ गई, ….” विनय सुभह हौ गयीँ, हैं…सभी लोग उठने वाले होंगे….मुझे सभी केँ लिएचाइ ब्रेकफास्ट भि रेडी करना हैं….” किरण नें विनय कि तरफ घूमते हुएकहा….
विनय: मामीजी इतनी जल्दकोई नहीं उठेगा….कल रात भि एक् बार हि किया थां….प्लीज़ एक् बार औऱ करनेदो नां….
विनय लगातार किरण कि चुचियों कों मसलरहा थां….जिसके कारण किरण भि मदहोश होतीजा रही थि….उसने अपना एक् हाथ नीचे लेजाते हुए अपने पेटिकोट कां नाडा पकड़कर खोल दिया…जैसे हि पेटिकोट कां नाडा खुला पेटिकोट उसकेकमर सें सरकता हुआ नीचे फर्श पऱ जा गिरा…अगले हि समय किरण विनय केँ सामने नीचे पैरो केँ बलबैठ गयीँ, …औऱ उसके शॉर्ट्स कों दोनोतरफ सें पकड़कर खेंचते हुए उसके शरीर सें अलग करके फेंक दिया….
किरण किसी भूखी कुतिया कि तरह विनय केँ लन्ड पर्र टूट पड़ी….उसने विनय केँ लन्ड कों हाथ मे लिया….औऱ अगले हि समय उसने विनय केँ लन्ड केँ गुलाबी सुपाडे कों अपने होंटो मे भरकर चूसना शुरुआत कर दिया…उसने अपने होंटो कों विनय केँ लन्ड पऱ दबाकर अपनेसर कों आगे पीछे करना शुरुआत कर दिया…विनय कि आँखे मस्ती मे बंद होँ गई, … खड़े-2 उसके पांव काँपने लगी….किरण अब पूरेजोश केँ संग विनय केँ लन्ड केँ चुप्पे लगारही थि….औऱ विनय मस्ती मे आहह-आहह आहह-आहह कररहा थां। फिन किरण नें विनय केँ लन्ड कों मूह सें बाहर् निकाला…औऱ उसके लन्ड केँ सुपाडे कों अपने दाँतों सें कुरेदा…तोँ विनय एक् दम सें मचलउठा…
उसने किरण केँ सर कों दोनो हाथो सें कस केँ पकड़ लिया….किरण नें अपनी आँखो कों ऊपेर उठाते हुए उसकीओर देखा.औऱ फिन विनय कि आँखो मे देखते हुए, अपनीलाल रसीली जीभ कों बाहर् निकाल कर लन्ड केँ सुपाडे केँ चारोतरफ फेरा। विनय कि आँखे एक् बारफिन कुछ पलों केँ लिएबंद होँ गई, …यहसभी करतेहुए, किरण विनय केँ चेहरे कों देखरही थि….विनय नें फिन सें आँखेखोल कर किरण कि ओर देखा…तौ उसनेइस बार विनय कि आँखो मे देखते हुए, विनय केँ लन्ड कों थोडा सां ऊपेर उठाया…औऱ फिन अपनीजीभ कों नोकदार बनाकर विनय केँ लन्ड केँ पेशाब वालेछेद पऱ रगड़ने लगी….
मामीजी कि इस हरक़त सें विनय एक् दम सें मचल उठा….उसने किरण केँ कंधो कों पकड़कर ऊपेर उठाया औऱ पीछेबेड कि तरफ धकेल दिया…औऱ अपने लन्ड कों मुट्ठी मे भरकरमूठ मारने वाले अंदाज़ मे हिलाते हुए, किरण कि ओर देखने लगा… किरण नें भि अपनी वासना भरी आँखो सें देखते हुए, अपने ब्लाउस केँ हुक्स कों फिन सें खोलना शुरुआत कर दिया…
यह सभी किरण बड़ी हि अदा केँ संगकर रही थि….वोँ जानबुझ कर अपने ब्लाउस कों खोलरही थि….औऱ विनय कि बेकरारी कों देखकर मुस्करा रही थि….पर्र जैसे हि उसकी नज़र विनय केँ लन्ड पऱ पड़ी। तौ उसकी बुर नें पानी बहाने शुरुआत कर दिया….विनय भि बेड पऱ चढ़ गय़ा। उसने अपनी बेताबी दिखाते हुए, किरण कि दोनो टाँगो कों घुटनो सें पकड़कर ऊपेरउठा दिया….
किरण कि बुर कां कुलबुलाता हुआ रसीला छेद विनय कि आँखो केँ सामने आँ गय़ा…विनय नें अपने लन्ड कों हाथ सें पकड़कर लन्ड केँ सुपडे कों किरण कि बुर कि फांको कि लाइन केँ बीच मे रगड़ा तोँ, किरण एक् दम सें सिसकउठी। उसने सिसकी भरतेहुए, अपनेसर केँ नीचेरखे तकिये कों कस केँ पकड़ लाया….औऱ अपनी गहरी नशीली आँखो सें विनय कि ओर देखते हुए, अपने थरथरा रहे होंटो सें कहा….
किरण:हइई विनय तेरे लन्ड तों आहह-आहह फदड दि मेरी फुद्दि ….
विनय नें किरण कि बातसुन करजोश मे आतेहुए, अपने लन्ड केँ सुपाडे कों बुर केँ छेद पऱ जैसे हि दबाया….किरण कों महसूस हुआ कि, उसकी बुर कां छेद किसी इलास्टिक कि तरहा खिंचकर खुल गय़ा हौ….आज तक उसे अपनी बुर कां छेदइस तरहा खुलाहुआ महसूस नहींहुआ थां.विनय केँ लन्ड कां सुपाडा बुरी तरहा सें उसकेछेद मे फँस गय़ा थां…
औऱ किरण कों अपनी बुर केँ छेद विनय केँ लन्ड पर्र कसाहुआ सॉफ महसूस होँ रहा थां….विनय नें दोतीन बार अपने लन्ड कों किरण कि बुर मे आगे पीछे किया.जिससे विनय केँ लन्ड कां सुपाडा किरण कि बुर सें निकलरहे कामरस सें एक् दमभीग गय़ा….विनय केँ लन्ड कां सुपाडा अब धीरे-धीरे-2 किरण कि गहराइयों मे घुसने लगा…किरण कों अपनी बुर कि दीवारे बुरीतरह फेली हुइ महसूस होँ रही थि….
जैसे हि विनय कां पूरा लन्ड किरण कि बुर मे समाया तौ, किरण कों अपनी बुर आख़िरी हिस्से तक भरी हुई महसूस हुइ…किरण विनय केँ लन्ड कों अपने अंदर महसूस करके एक् दम मस्त होँ गयीँ, थि…उसके पूरा शरीर थरथरा कांपरहा थां….औऱ रह-2कर झटकेखा रहा थां…” हाई विनय तेरा लन्ड इतनाअहह बड़ा केसे होँ गय़ा…अहह मार नां फुद्दि मेरे पुत्तर अहह तेरे कों लन्ड देखते हि मेरी फुद्दि नें पानी छोड़ना शुरुआत कर दिया हैं.
विनय नें भि किरण कि नाइटी कों पकड़कर उसके जिस्म सें अलगकर दिया…अब दो नंगे शरीर एक् दूसरे सें चिपके हुए थें….औऱ विनय अपना मुनसल सां लन्ड किरण कि बुर कि गहराइयों मे ठोकरहा थां…”हाई मर गयीँ, अहहउंह विनय तेरा लौडा आहह-आहह आहह-आहह अहहअहह हाई मेरी फुद्दि फाड़ दि…अह्ह्ह्ह उंह सीईईई सीईइस स विनय मेरी फुद्दि फॅट गई, ….”
जैसे हि विनय पूरी ताक़त सें अपना लन्ड किरण कि बुर कि गहराइयों मे उतरता। किरण बुरा सां मूहबना करहाए-2 करने लगती… उसके चेहरे पऱ सें सॉफझलक रहा थां कि, किरण कों सच मे विनय केँ लन्ड कों लेने मे परेशानी हौ रही हैं….पऱ इस दर्द केँ संग किरणआज मज़े कि उन वादियों मे घूमरही थि…जिसकी उसनेआज तक कल्पना भि नहीं कि थि…किउसे कोईइस तरह सुभह केँ 5 बजे भि उठकर चोदने केँ लिए उतावला होँ सकता हैं…
चुदाई कां यहदौर लगभग 15 मिनिट तक चला….जब दोनोझड कर शांतहुए तौ, दोनो नें जल्द-2 अपने कपड़े पहने औऱ बेड पऱ लेट गये…किरण लगभग 6 बजे तक बेड पऱ लेटी रही….औऱ फिन 6 बजेउठ कर बाहर् आई….किरण फ्रेश होकर सुभह केँ नाश्ते कि तैयारी करने मे जुट गई, ….दोदिन बाद विवाह थि….इसलिये घऱ मे मेहमानो कां ताँता लगाहुआ थां…इसी दौरान विवाह केँ कामकाज औऱ भाग दौड़ मे किरण प्रेग्नेन्सी रोकने वाली टॅब्लेट्स खानां भि भूल गयीँ, ….औऱ घऱ मे मेहमानो औऱ विवाह कां समानइधर उधर बिखरे होने केँ कारण वोँ टॅबलेट भि पता नहीं कहां खो गई, थि….पर्र मसरूफयत कि वजह सें किरण नें उस औऱ ध्यान हि नहीं दिया….
उस रात भि किरण नें विनय सें दोबार औऱ चुदवाया….विवाह कां दिन आँ गय़ा….विवाह बहोत धूमधाम सें हुइ….विवाह केँ अगलेदिन उनकेघऱ मे जश्न थि….इसी तरहमोज मस्ती मे 4 दिन गुजर गये….किरण केँ दिमाग़ सें यहबात निकल हि चुकी थि कि, उसनेगरभ निरोधक टॅब्लेट्स नहींली हैं….इस बीच किरण कां भइया विवाह केँ बाद एक् बारफिन सें किरण केँ घऱ आया….जशन सां महॉल थां…इन 15 दिनो मे….किरण औऱ विनय कि वासना बढ़ती जारही थि….उन्हे जब भि मोका मिलता दोनो चुदाई कां खेलखेल लेते.दिन पऱ दिन गुजरते जारहे थें….किरण कों इस महीने पीरियड्स नहींआए थें…पर्र किरण कां ध्यान इसतरफ गय़ा हि नहीं थां….
इसीतरह एक् मंथ औऱ गुज़रा तोँ, एक् दिन वशाली कों पीरियड्स आए….उसके पास एक् हि पॅडघऱ पर्र बचा थां…वोँ अपनीमोम केँ रूम मे गये….”क्याँ हुआ बच्चे….इतनी परेशान क्यूं हैं….?’ किरण नें वशाली केँ माथे पर्र हाथ रखतेहुए कहा…”मां वोँ मुझे पीरियड्स आएहुए हैं…औऱ घऱ पऱ पॅड ख़तम हैं…आप् बाज़ार सें जाकरला दो नाँ…” वशाली नें किरण केँ पास लेटते हुएकहा….
किरण:ठीक हैं ला देती हूं….
यहकहकर किरणरूम सें बाहर् आई औऱ फिनघऱ सें बाहर् निकलकर शॉप कि तरफ जानेलगी तोँ, एक् दम सें उसके दिमाग़ मे यहबात कोंध गई, कि, उसे लास्ट पीरियड्स दो महीने पहलेआए थें….वोँ भि उसके भइया कि विवाह सें पहले….किरण केँ तोँ पाँव केँ नीचे सें ज़मीन हि खिसक गई,.उसके चेहरे कां रंग एक् दम सें उड़ गय़ा….वोँ घबराई हुइ सि शॉप पऱ पहुँची औऱ जल्द सें पॅड खरीदकर घऱ कि तरफचल पड़ी…
किरण बहोत बुरीतरह घबराई हुईँ थि….वोँ दो महीने सें पेट सें हैं….यह सोचकर हि उसकीरूह कांप जाती….वोँ जल्द सें घऱ पहुँची, औऱ वशाली कों पॅड देकरबेड पर्र बैठ गयीँ, ….वशाली बातरूम मे चली गयीँ, ….उसे समझ मे नहीं आँ रहा थां कि, वोँ क्याँ करे….वोँ किसी डॉक्टर केँ पास जाने सें भि घबरारही थि…उसे समझ मे नहीं आँ रहा थां कि, वोँ क्याँ करे….साम कों सजधजकर होकर वोँ एक् नर्सिंग होम मे पहुचि। औऱ वहा जाकर एक् लेडी डॉक्टर सें मिली….
डॉक्टर: बताए आप् कों क्याँ परेशानी हैं….
किरण:जी वोँ मुझे अबर्षॅन करवाना हैं….
डॉक्टर: आप् अबर्षॅन क्यूं करवाना चाहती हैं……
किरण:जी मेरे पहले सें दो बच्चे हैं….इसीलिए हम् तीसरा बच्चा नहीं करना चाहते….
डॉक्टर: ठीक हैं, आप् अपने हज़्बेंड कों यहा लेँ आएँ….अबर्षॅन केँ लिए उनका सहमत होना भि ज़रूरी हैं….जब तक आपके पति स्वयं यहाआकर पेपर्स साइन नहीं करते…हम् अबर्षॅन नहींकर सकते….(किरण जौ घऱ सें सोचकर आई थि…वोँ वहीरटे रटाये जवाबदे रही थि….पर्र बिना हज़्बेंड कि सहमति केँ अबोर्शन होना नां मुनकीन थां.)
डॉक्टर: आप् बाहर् जाकर अपनानाम औऱ अड्रेस लिखवा दीजिए….औऱ कल अपने पति कों संग लें आएगा….
किरण:जी…
किरण घबराई हुईँ सि बाहर् आई…औऱ बिना अपना अड्रेस लिखवाए हि चली गयीँ, ….किरण चारोतरफ सें बुरीतरह फँस चुकी थि…किअब वोँ सभी क्याँ जवाब देगी….किरण जबघऱ पहुँची तोँ, साम केँ 7 बज चुके थें….उसका कुछ भि करने कां मूड नहीं थां….उसने विनय कों पैसे दिए…औऱ सभी केँ लिए ढाबे सें खानां मँगवा लिया….वोँ रातऐसे हि गुजर गयीँ, ….सोचते-2 अगलेदिन कि दोपहर भि हौ गयीँ, …इसी दौरान किरण केँ दिमाग़ मे आया कि, जब उसके भइया कि विवाह हुई थि…उसके दो याँ तीनदिन बाद उसके पति नें उसके सेक्स किया थां….किरण केँ मन मे उम्मीद कि चिंगारी फूटी औऱ उसनेइस बारे मे अपने पति सें बात करने केँ लिएकहा….
जब किरण केँ दिमाग़ मे यहसभी आया तौ, किरणयह सोचकर खुश होनेलगी कि, उसकेइस झूट सें उसकोदो फ़ायदे हौ जाएँगे….एक् तौ वोँ बदनामी सें बच जाएगी….औऱ दूसरा कि उसे भि मां बनने कां सुखमिल जाएगा….किरण अपनेरूम सें बाहर् आई, औऱ उसने विनय कों जौ कि हॉल मे टेलीविज़न देखरहा थां…उसे शीतल कों बुलाकर लाने कों कहा….विनय अपनी मासी शीतल केँ घऱचला गय़ा…थोड़ी देरबाद जब विनय शीतल केँ संगघऱ वापिस आया तौ, वोँ शीतल कों अपनेरूम मे लें गये….
शीतल:हां बोल किरण क्याँ काम हैं….
किरण: दिदी मुझे आपसे एक् बात करनी हैं….
शीतल:हां बोल….
किरण: दिदी समझ मे नहीं आँ रहा केसे कहूँ….
शीतल: तूँ बोल तोँ सही….
किरण: दिदी मुझेदो महीने सें पीरियड्स नहींआए हैं….
शीतल: (एक् दम चोन्कते हुए) क्याँ फिन तौ तुम्हे किसी डॉक्टर सें चेक करवाना चाहिए थां….
किरण: नहीं दिदी मैनेघऱ पऱ चेक किया हैं….मे दो महीनो सें पेट सें हूं…
किरण कि बातसुन कर शीतल औऱ ज्यादा चोंक गई, ….”पऱयह सभी केसे हुआ….वोँ भि इतने सालो बाद….क्याँ भैया कोई मेडिसिन वहगरा लेँ रहे थें….” शीतल नें बात कि गहराई कों समझने कि कॉसिश करतेहुए कहा….
किरण: नहीं दिदी….वोँ भैया कि विवाह केँ दोदिन बाद हम् दोनो एक् संगहुए थें…पिछले महीने तोँ विवाह कि भागदौड़ मे मैने ध्यान हि नहीं दिया औऱ इसमंथ भि मेरे दिमाग़ मे यहबात नहींआई थि….
शीतल: तौ फिन तुँ इसतरह दुःखी क्यूं लगरही हैं…यह तौ बहोत ख़ुसी कि बात हैं….
शीतल कों खुशदेख कर किरण कों थोडा हॉंसला हुआ…अगर शीतल उसकीबात मान गयीँ, थि…तोँ होँ सकता हैं कि, अजय भि उसकीबात मान जाए….जैसे तैसे वक्तकटा औऱ साम हुइ, अजय अभि घऱ नहींआया थां…रात केँ 8 बजे विनय खानां खारहा थां कि, अभि वहा आँ गय़ा…”भैया मेरेसंग घऱचलो नां…बापू नये वीडियो गेम लेकरआए हैं…” अभि नें विनय केँ पास बैठते हुए कहा…”अच्छा रूको पहले मुझे खानां खानेदो….” विनय नें जल्द खानां खानां शुरुआत कर दिया….
अभि: भैया कल सनडे हैं तौ, आजरात हम् देर तक वीडियो गेम खेलेंगे….
विनय:ठीक हैं…तुँ रुक मे मामीजी सें पूछकर आता हूं….
विनय नें अपने खाली प्लेट्स उठाई औऱ रसोई मे चला गय़ा….किरण नें रसोई मे काम करतेहुए, हि विनय औऱ अभि कि बातें सुनली थि….”मामीजी वोँ मे मासी केँ घऱ जाउ….मौसा जीनये गेम लेकरआए हैं….”
किरण:ठीक हैं जाओ….पर्र जल्दसो जानां….देर रात तक नहीं जागना….
विनय;जी मामीजी….
विनय खुशी सें भागता हुआ रसोई सें बाहर् आया औऱ अभि कों संग लेकर उसकेघऱ चला गय़ा…किरण नें जल्दघऱ कां काम निपटाया औऱ अपने पति केँ आने कां प्रतीक्षा करने लगी…वशाली खानां खाकरसो चुकी थि…रात केँ लगभग 10 जबअजय घऱ पहुंचा तौ, किरण नें उसकेलिए डाइनिंग टेबल पर्र खानां लगाना शुरुआत कर दिया…अजय रूम मे गय़ा….औऱ अपने कपड़े उतारकर कमर पऱ टवल लप्पेटा औऱ बाथरूम मे घुस गय़ा….शवर लेने केँ बाद वोँ कुर्ता पाजामा पहनकर डाइनिंग टेबल पर्र आया तौ, उसने किरण केँ बदलेहुए मूड कों देखते हुए पूछा…
अजय: क्याँ बात हैं….आज बड़ीखुश लगरही होँ….
किरण: (मुस्कुराते हुए….) क्यूं मे खुश नहीं हौ सकती….
अजय: नहीं दरअसल तुम् हमेशा मुझे शराब केँ नशे मे देखकर तोँ, बुददुदाने लगती हौ…आजकुछ ख़ास हैं क्याँ….अच्छा विनयसो गय़ा क्याँ….
किरण: नहीं वोँ आज शीतल दिदी केँ घऱ पऱ हैं वही सोएगा….
अजय: अच्छा अब बताओ इतनीखुश क्यूं होँ….
किरण:जी एक् ख़ूसखबरी हैं….(किरण नें अजय केँ संग वालीचेर पर्र बैठते हुएकहा.)
अजय: तोँ चलो पहले खूसखबरी हि सुन लेते हैं….
किरण:जी मे वोँ….(किरण नें शरमाते हुएकहा….)
अजय:हां भइया कहो….मुझसे प्रतीक्षा नहीं होँ रहा….
किरण:जी वोँ मे पेट सें हूं….
किरण कि बात सुनते हि अजय एक् दम सुन्न पड़ गय़ा….उसे यकीन नहीं होँ रहा थां कि किरण जोँ कहरही हैं क्याँ वोँ सच हैं….”तुम्हे केसेपता चला….”अजय नें पानी कां घूँट भरतेहुए कहा….”जी दो महीने सें डेट नहींआई थि….औऱकल चेक क्याँ तोँ पताचला….” किरण कि बातसुन करअजय चेर सें खड़ा हौ गय़ा….
किरण: क्याँ हुआ जी….पहले तौ मुझे भि यकीन नहीं हौ रहा थां….आप् कों याद हैं नाँ भैया केँ विवाह केँ दोदिन बाद हम् नें वोँ किया थां….
अजय:कुछ नहीं हुआ….मे भि एक् खूसखबरी तुम्हे देना चाहता हूं….
किरण: क्याँ….?
अजय: रूको एक् मिनिट….
यह कहतेहुए वोँ रूम मे चला गय़ा….किरण अभि भि थोडा घबरारही थि…थोड़ी देरबाद अजय वापिस हॉल मे आया औऱ एक् पेपर किरण कि तरफ बढ़ा दिया… किरण नें सवालिया नज़रों सें अजय कि तरफ देखते हुए, वोँ पेपर पकड़ लिया….किरण पेपर देखते हि समझ गयीँ, थि कि यहकोई मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट हैं…पर्र किस चीज़ कि हैं वोँ उसेपता नहींचला…
किरण:जी यह क्याँ हैं…
अजय: मेरे रिपोर्ट्स हैं….पता हैं इसमे क्याँ लिखा हैं….
किरण: नहीं….
अजय नें किरण कों कंधो सें पकड़कर खड़ा किया औऱ फिन अपनेगले लगा लिया औऱ बोला मैने जौ दावाली थि उसकेअसर सें मेरा स्पर्म काउंट बढ़ गय़ा हैं
यह सुनते हि किरण कि जान मे जानआई औऱ वोँ भि बहोत खुश हुइ कि अब वोँ विनय केँ प्रेम कि निशानी कों रख सकती हें।
too be continued.
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बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक भाग हैं भइया आनंद आँ गय़ा
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