नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
You are amazing writer, I never reply on xfourm
lekin this waqt mai khud ko rok नहीं paya reply dene से.
bahut badieya khani h थोड़ा और suspense dalo romance and sex के bich और thodi jyada umar की aurto ko bi laaoo apne hero के नीचे और usko gand kaa bi mazza दो। Mohalle की 2-4 और aunti ko लेकर aoo।
And last ur are amazing bro।
True inspiration for new comers on xforum.live।
आपके लेखन कि श्रेष्टतम बात हैं कि आप् भाग केँ लिए पाठकों कों अधिक इंतज़ार नहि करवाते । ऐसे हि लिखते रहें बहोत बढ़िया चलरहा हैं।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -17
विनयचुप चापबैठ कर खानां खाने लगा…किरण नें शीतल सें भि खाने केँ लिए पूछा तोँ शीतल नें यहकहकर मनाकर दिया कि, वोँ घऱ सें खानां खाकर हि यहाआई थि….किरण स्वयं भि खानां खाने लगी…खानां खाने केँ बाद किरण नें अपने औऱ विनय केँ बर्तन उठाए रसोई मे लेजाकर धोने लगी…शीतल नें किरण सें कहा कि वोँ अबघऱजा रही हैं….शीतल नें अभि कों गेमबंद करके चलने केँ लिएकहा तौ, अभि नें जाने सें मनाकर दिया….किरण नें भि ऊपेरी मन सें कहा कि, अभि कों गेम खलने दो…शीतल अभि कों वही छोड़कर पिंकी कों संग लेकर अपनेघऱ चली गई….
बर्तन सॉफ करतेहुए उसने विनय कों आवाज़ दि….जब विनय रसोई मे गय़ा तौ किरण खीजते हुए बोलि…” क्यूं लगा दि तूनेउसे गेममना नहींकर सकता थां…” विनयसर झुकाकर खड़ा होँ गय़ा…जब सें किरण कों गर्भ निरोधक गोलयाँ मिली थि…उसकी बुर मे हौ रही खुजली कुछ अधिक हि बढ़ गई थि…। “चलजाअब उसकेपास जाकरबैठ….” किरण नें बर्तन सॉफ करतेहुए कहा….तौ विनयवहा सें निकलकर अभि केँ पास जाकर नीचे चटाई पऱ बैठ गय़ा….विनय बार-2 पीछेघूम कर अपनी मामीजी कि तरफदेख रहा थां…किरण नें बर्तन सॉफकिए औऱ फिन अपनेरूम मे चली गई… वहा पहुँच कर उसने अपने साड़ी उतारी औऱ सभीकुछ उतारने केँ बाद एक् ग्रीन कलर केँ मॅक्सी पहनली….
किरण रसोई कां काम निपटा कर अपनेरूम मे चली गई….विनय वही बैठा मायूस होता रहा….किरण नें अपनेरूम मे पहुँच कर अपनी पहनी हुईँ साड़ी उतार डी…उसके बाद सारे कपढ़े उतरने केँ बाद किरण नें एक् ग्रीन कलर केँ मॅक्सी पहन ली…मॅक्सी पहनने केँ बाद किरणहॉल मे आई औऱ सोफे पऱ बैठकर विनय कों देखने लगी… दोनो केँ जब भि नज़रें मिलती….तौ किरण मुस्करा कर विनय कि तरफ देखती… “विनय भैया आप् खेलो नाँ मुझे नींद आँ रही हैं….” अभि नें गेम कां रेमॉर्ट विनय केँ तरफ बढ़ाते हुए कहा….औऱ जैसे हि विनय नें उसकाहाथ सें रेमॉर्ट लिया….अभि वही चटाई पर्र लेट गय़ा…किरण नें देखा कि अभि कों नींदआने लगी थि….शायद टीके कां कुछअसर हौ रहा थां….जब किरण कों यकीन होँ गय़ा कि, अभि अब गहरी नींद मे सो चुका हैं…तौ उसने धीरे-धीरे सें विनय कों आवाज़ दि….
विनय नें अपनी मामीजी कि तरफ देखा, तोँ किरण नें उसे इशारे सें अंदर चलने केँ लिए कहा….औऱ स्वयं खड़ी होकरहॉल केँ संग वालेरूम कि तरफचली गई…विनय नें भि एक् बार अभि कों चेक किया औऱ खड़ा होकर स्टोर रूम कि तरफचल पड़ा….स्टोर रूम मे एक् खिड़की थि जौ हॉल कि तरफ खुलती थि….ताकि हॉल सें कुछ रोशनी स्टोर रूम मे जाती रहे…जैसे हि विनयहॉल मे पहुंचा तोँ, किरण नें उसकाहाथ पकड़कर अपने सें सटाते हुए उसकेकमर मे अपनी बाहों कों डाल दिया….औऱ उसके होंठो पऱ अपने होंठो कों रख दिया….विनय नें भि इसबार ज्यादा देर नाँ करतेहुए, मामीजी केँ होंठो कों अपने होंठो मे लेकर चूसना शुरुआत कर दिया….
किरण कि बुर मे भि कुलबुलाहट मची हुईँ थि….वोँ एक् बार सें अपने भान्जे केँ लन्ड कों जल्द सें जल्द अपनी बुर केँ अंदर महसूस करना चाहती थि…किरण विनय सें अलग हुइ, औऱ अपनी नाइटी कों पकड़कर ऊपेर उठाते हुए विनय सें कहा…” विनयचल जल्द सें बाहर् निकाल इसे….”, किरण नें विनय केँ लन्ड कि तरफ इशारा करतेहुए कहा। औऱ अपनी वाइटकलर कि कच्छि कों पकड़कर नीचे जाँघो तक सरका दिया….औऱ खिड़की केँ पास जाकर खड़ी हौ गई…विनय अपनी मामीजी केँ पीछे जाकर खड़ा होँ गय़ा….औऱ अपने पाजामे कों नीचे सरकाते हुए अपने लन्ड कों बाहर् निकाल लिया…किरण नें थोडा सां आगे कि तरफ झुकते हुए, अपनी गान्ड कों पीछे सें बाहर् केँ तरफ निकाल लिया….”विनय चल जल्दकर डालदे अब अपनी मामीजी कि फुद्दि मे अपना लन्ड….”
किरण नें अपनी टाँगो कों फेलाते हुए, अपनी गान्ड कों ऊपेरउठा कर अपनी बुर केँ छेद कों औऱ बाहर् कि तरफ निकाल दिया…औऱ अगले हि लम्हा विनय केँ मुनसल लन्ड कां दहकता हुआ सुपाडा किरण कि बुर केँ संगजा लगा….
विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कि गरमी कों अपनी बुर केँ छेद पर्र महसूस करते हि, किरण कां पूराबदन कांप गय़ा….बुर नें अपने कामरस केँ खजाने कों खोल दिया….औऱ कुछ हि पलों मे उसकी बुर गीली हौ गई…”हाइए विनय जल्दकर डालदे अपनी मामीजी कि फुद्दि मे अपना लन्ड…अहह ओह्ह्ह हाइएओईए मार दिया अह्ह्ह्ह” विनय नें एक् हि झटके मे अपनाआधे सें अधिक लन्ड किरण कि बुर मे पेल दिया थां….किरण अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड केँ चारोतरफ बुरीतरह जकड़े महसूस कररही थि….औऱउसे अपनी बुर कि दीवारों पऱ विनय केँ लन्ड केँ नसेंसॉफ महसूस होनेलगी….
किरण: आहह-आहह पुत्तर तेरा लन्ड तां बहोत मोटा हौ गय़ा हैं….अपनी मामीजी कि फुद्दि फाड़कर रख दि तूने…आहह-आहह पुत्तर पर्र कोई परवाह नहीं करनी तूने मेरी…ज़ोर ज़ोर बाहर् निकाल निकाल कर फुद्दि मे लन्ड ठोक बेटा….
विनय: धीरे-धीरे अभि सुन नाँ लेँ….
किरण: नहीं सुनता बेटा….तुँ मार मेरी फुद्दि जैसे मर्ज़ी मार….
यह कहतेहुए, किरणआगे कि तरफझुक गई….विनय नें अपने लन्ड कों धीरे-धीरे-2 किरण कि बुर केँ अंदर बाहर् करना शुरुआत कर दिया….विनय केँ लन्ड कि रगड़ कों अपनी बुर केँ दीवारों पर्र महसूस करके, किरण एक् दम मस्त होँ गई…औऱ वोँ भि अपनी गान्ड कों पीछे कि तरफ धकेलते हुए, विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर कि गहराइयों मे लेने केँ लिए मचलने लगी… विनय भि समझ चुका थां कि, यह रांड़ भि अब पूरेरंग मे आँ चुकी हैं… इसीलिए उसने किरण केँ चुतड़ों कों दोनो हाथों सें फैलाते हुए, तेज -2 झटके मारने शुरुआत कर दिए….विनय केँ हर झटके केँ संग किरण कां पूरा शरीरहिल जाता….औऱ मुँह सें मस्ती भरीआह निकल जाती…
किरणबार -2 ऐसे मुँहबना कर पीछे कि तरफ विनय कों देखरही थि… जैसेउसे विनय केँ मुनसल जैसे लन्ड कों झेलने मे दिक्कत होँ रही हौ…”ओह्ह विनयअहह बहोत मोटा हैं रे तेरा लाउडा अहह लगता हैं आजअहह आहह-आहह धीरे-धीरे कर नां पुत्तर आहह-आहह तूँ मेरी फुद्दि फाड़कर हि मानेगा…अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाइीकहा थां तूँ इतने दिनो अह्ह्ह्ह….अपनी मामीजी कां ख़याल रखाकर पुत्तर…तेरे बिना तेरी मामीजी कि फुद्दि कि सुध लेने वालाकोई नहीं हैं…”
विनय: हेयाआहा आहह-आहह….तुँ फिकर नाँ कर मामीजी…मे हूं नाँ….तेरी फुद्दि कि देखभाल केँ लिए अह्ह्ह्ह ईए लेँ….अह्ह्ह्ह
किरण:हां बेटा एक् तूँ हि तौ हैं अहह लें बेटा तेरी मामीजी कि फुद्दि मूतने लगीहाई अहह लीयी मे आई औऱ ज़ोर सें अह्ह्ह्ह….
विनय: आहह-आहह मामीजी भेगोदे मेरे लन्ड कों अपनी फुद्दि केँ पानी सें आहह-आहह आहह-आहह.
किरण: लें बेटा लेँ….तेरे लिए तोँ हैं सभी लें लें अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह माआ.
यह कहतेहुए किरण कां पूरा जिस्म अकड़ने लगा….मस्ती कां तूफान अब ज़लज़ला बन गय़ा थां….औऱ उसकी बुर सें पानी कि नदीबह निकली….विनय कां लन्ड गीला होकरफॅक-2 कि आवाज़ करतेहुए अंदर बाहर् होने लगा….औऱ फिन एक् हलकी सि घुर्राहट केँ संग विनय केँ लन्ड नें भि किरण कि बुर मे वीर्य कि बोछार कर दि
किरण कों अपनी बुर मे ऐसे महसूस हौ रहा थां….जैसे विनय नें उसकी फुद्दि केँ अंदर सैलाब ला दिया हौ….उसे अपनी पूरी बुर उसके वीर्य सें भरी हुइ महसूस होने लगी….किरण आज बहोत दिनोबाद झड़ी थि…जैसे हि विनय कां लन्ड किरण कि बुर सें बाहर् आया…तोँ किरण सीधी हुईँ, उसके सीधे खड़े होते हि, उसकी बुर सें वीर्य कि धारबह कर बाहर् निकलते हुए, उसकी जांघों मे अटकती पैंटी कि ऊपेर पड़ने लगी…। उसके देखते हि देखते उसकी पैंटी उसके वीर्य सें सन गई….
किरण: हाइीमा तूँ इंसान हैं याँ भैंसा….कितना पानी छोड़ता हेरे तेरा लन्ड अह्ह्ह्ह….
यह कहतेहुए किरण नें मुस्कुराते हुए, विनय कि तरफ देखा, औऱ अपनी पैंटी औऱ सलवार कों एक् संग ऊपेरकर सलवार कां नाडा बांधने लगी….
विनय: मामीजी सॉरी वोँ आप् कि पैंटी खराब हौ गई….आप् बाद मे बदल लेना….
किरण: अर्रे नहीं पुत्तर ऐसेकोई बात नहीं….अब यह पैंटी तोँ मे पूरादिन ऐसे हि पहनकर रखूँगी…
विनय: क्यूं ?
किरण: (मुस्कुराते हुए) ताकि तेरे लन्ड कां पानी मेरी फुद्दि कों ठंडारखे। हा हहा…अच्छा अब तूँ जा….मे थोड़ी देरबाद बाहर् आती हूं….
विनय स्टोर सें निकलकर बाहर् आया तोँ, देखा कि अभि सोरहा थां…फिन मामीजी कि फुद्दि कि खुजली मिटी तोँ उसको नींदआने लगी…वोँ अपनेरूम मे जाकरबेड पर्र लेट गई। विनयवही चटाई पऱ अभि केँ संगलेट गय़ा….औऱ कुछ हि पलों मे नींद नें उसे भि अपने आगोश मे लेँ लिया…साम केँ 5 बजरहे थें….जब किरण कि आँख खुली…वोँ उठकर अपनेरूम सें बाहर् आई, तौ देखा विनय औऱ अभि दोनो अभि तक हॉल मे सोरहे थें। उसनेउन दोनो कों जगाया औऱ स्वयं रसोई मे चाइ बनाने चली गई….चाइ पीने केँ बाद विनय अभि कों उसकेघऱ छोड़ने चला गय़ा….इधर किरण अभि रात केँ खाने कि तैयारी कररही थि कि, उसकाफोन बजनेलगा….
उसने रसोई सें बाहर् कर अपनाफोन उठाया तोँ देखा, उसके बापू कां मोबाइल थां… उसके बापू नें बताया कि, वोँ इससमय अपने बड़े भइया केँ घऱ मे हैं…औऱ आजरात वही रुकने वाले हैं…वोँ कल सुभह हि घऱ वापिस आएँगे…किरण नें जैसे हि फोनकट कि तोँ, उसके चेहरे पऱ तीखी मुस्कान फेल गई…अबघऱ पऱ रात पर्र तीन हि लोग मज़ूद होने वाले थें….एक् वोँ दूसरा विनय औऱ तीसरा किरण कां पति अजय….जब सें उनकेघऱ किरण केँ मां बापूआए हुए थें….तब सें अजयघऱ पऱ शराबपी कर नहीं आँ रहा थां…औऱ जबअजय रात कों शराब पीकरआता थां…तब वोँ खानां खाते हि बेड पऱ ढेर होँ जाता थां….उसने अपने पति कां नंबर मिलाया….तोँ थोड़ी देरबाद अजय नें कॉलआई रिसीव की कि….
अजय: हेलोहां किरणकहो….
किरण:जी वोँ आज माँ बापू अपने भइया केँ घऱ पऱ हि रहेंगे….कल आने वाले हैं। आप् थोडा जल्द आँ जानां….घऱ पऱ आज वशाली भि नहीं हैं….
अजय:हां हां मे जल्द आँ जाउन्गा….
उसकेबाद किरण नें फोनकट कि…वोँ जानती थि कि, यहखबर सुनने केँ बाद केँ आज उसके सासू माँ ससुरजी घऱ पर्र नहींआने वाले हैं, तौ वोँ अवश्य दारूपी कर आएगा…औऱ उसकेबाद अजय कों हॅंडल केसे करना हैं….वोँ यह अच्छी तरह सें जानती हैं
रात केँ 8 बज चुके थें….किरण खानां रेडीकर चुकी थि….औऱ वोँ विनय केँ संगहॉल मे बैठेहुए टेलीविज़न देखरही थि….कितभी उसकाफोन बजने लगा….उसने फोनउठा कर देखा, तौ अजय कि कॉलआई थि….अजय नें उसे बताया कि, वोँ आजरात नहीं आँ सकता। एक् ज़रूरी ऑर्डर हैं…जोँ उसेकल तक डिलीवर करना हैं….किरण नें अजय सें बात करकेकॉल आईकट कि तौ, उसके होंठो पऱ मुस्कान फेल गई….वोँ जानती थि कि, घऱ नां आने कां यहअजय कां एक्सक्यूज़ हैं…दरअसल जब भि अजय कां ज़यादा पीने कां मूड होता….तौ वोँ किरण कि झिक-2 सें बचने केँ लिएकाम कां बहाने बना लेता…औऱ अपने ऑफीस मे हि रात कों ठहर जाया करता थां….किरण नें अपनाफोन सोफे पर्र रखा…औऱ विनय केँ सर केँ बालो कों सहलाते हुए उसकेसर कों अपनी जाँघो पर्र रख लिया….
विनय: किसका मोबाइल थां मामीजी जी…
किरण: तुम्हारे मामाजी कां….आज घऱ नहीं आएँगे…
विनय: क्याँ आजघऱ नहीं आएँगे….?
किरण:हां….
विनय: तोँ क्याँ आज हम् सारी रात……(विनय बोलते-2 चुप होँ गय़ा….किरण उसकेदिल कि बात कों जानकर मुस्करा उठी….)
किरण:बोल नाँ क्याँ हम् आज सारीरात…
विनय: कां कुछ नहीं….
किरण: अभि भि मुझसे छुपारहा हैं….बोल नाँ….तूँ जोँ कहगा….वैसा हि होगा…एक् बारबोल कर तोँ देख….
विनय नें अपनी मामीजी कि ऊपेर नीचे हौ रही चुचियों कों देखा…औऱ अपने गाले कों सॉफ करतेहुए कहा….”सच…?” किरण विनय कि तरफदेख कर मुस्कुराइ…औऱ उसके बालो कों सहलाते हुए बोलीं…”तूँ कह केँ तोँ देख….” विनय नें अपनासर किरण कि जाँघो सें उठाया औऱ उठकर बैठते हुए किरण कि नाइटी मे ऊपेर नीचे होँ रही चुचियों कि तरफ इशारा करतेहुए कहा….”मामीजी मुझे तुम्हारी चुचियों कों देख्ना हैं….” किरण विनय कि बातसुन कर मुस्कराने लगी…औऱ उसकेसर पर्र हाथ फेरते हुए बोलीं….”पहले खानां खा लेते हैं…फिन तुम्हें जौ देख्ना होगा…वोँ सभी दिखाउन्गी…”
किरणउठ कर रसोई केँ तरफ जाने लगी….”यह क्याँ मामीजी आपने तौ कहा कि, जोँ भि कहूँगा वोँ आप् करोगे….मुझे अभि देखनी हैं….” किरण नें मूडकर पीछे कि तरफ देखा…औऱ होंठो पर्र कामुक मुस्कान लातेहुए विनय कों चिढ़ाने लगी…किरण रसोई मे पहुँची…औऱ उसने खानां डालना शुरुआत किया….विनय फिन सें टेलीविज़न देखने मे मगन होँ गय़ा….”विनय ज़राइधर तौ आनां….” किरना नें रसोई सें विनय कों आवाज़ लगाते हुए कहा….विनय उठकर रसोई मे गय़ा…”जी मामीजी…” किरण कि पीठ विनय कि तरफ थि…औऱ वोँ प्लेट्स मे खानां डालरही थि…किरण एक् दम सें उसकीतरफ पलटी….तोँ विनय कि आँखे खुली कि खुलीरह गई….किरण नें अपने एक् मम्मे कों अपने नाइटी केँ गले केँ ऊपेर सें बाहर् निकाला हुआ थां….उसका मॅक्सी केँ बाहर् लटकते हुए मम्मे कों देखकर विनय केँ आँखे एक् दमफेल गई….
किरण:यह लें अबदेख लिया…मेने कहा थां नां तुम्हे जौ देख्ना हैं….वोँ सभी दिखाउन्गी….चल यह प्लेट्स लेकर बाहर् चल….मे पानी लेकरआती हूं…विनय अपनी मामीजी कि चुचि कों घुरता हुआ प्लेट्स लेकर बाहर् आँ गय़ा….किरण नें पानी कि बॉटल औऱ ग्लास लिए औऱ बाहर् आँ गई….इसबार जब विनय नें किरण कों देखा तौ, उसके दोनो मम्मे उसकी नाइटी सें बाहर् लटकरहे थें….विनय कां लन्ड अपनी मामीजी कि बड़ी-2 चुचियों कों देखकर शॉर्ट्स मे झटके खाने लगा…किरण विनय केँ सामने चेर पऱ बैठ गई…औऱ खानां खाने लगी….”औऱ कोई फरमाइश हौ तौ वोँ भि बतादो….” विनय नें अपनी मामीजी कि चुचियों कि तरफ देखा….औऱ फिन खाने कां नीवाला निगलते हुए काँपती हुईँ आवाज़ मे बोला……
विनय: मामीजी वोँ मुझे वोँ आपको वोँ करतेहुए देख्ना हैं….
किरण: (मुस्कराते हुए ) क्याँ देख्ना हैं सॉफ-2बोल….
विनय: आपको पेशाब करतेहुए देख्ना हैं….
किरण अपने भान्जे केँ बातसुन करशरम सें लाल होँ गई….फिन अपने होंठो पर्र कामुक मुस्कान लातेहुए बोलीं…”तुँ अपनी मामीजी कों मूतते हुए देखेगा….” विनय नें किरण कि बातसुन करसर झुका लिया…औऱ काँपती हुइ आवाज़ मे बोला….”हां मामीजी.” यह दिमाग़ ख़याल मे आते हि कि वोँ अपने भान्जे केँ सामने अपनी बुर खोलकर पेशाब कररही हैं….किरण केँ शरीर मे झुरजुरी सि दौड़ गई….उसने अपना एक् हाथ नीचे लेजाकर अपनी मेक्सी केँ ऊपेर सें अपनी बुर कों दबाते हुए विनय कि तरफ देखा…”देख लेना.आज तुँ जोँ भि कहेगा….मे तेरीहर बात मानूँगी….”
किरण औऱ विनय नें जल्द-2 खानां ख़तम किया….उसके बाद किरण नें बर्तन सॉफ करके साराकाम निपटा लिया….रसोई कां काम निपटने केँ बाद किरण नें विनय कों अपनेरूम मे जाकर प्रतीक्षा करने कों कहा….औऱ किरण स्वयं बाथरूम मे घुस गई…किरण नें अपने सारे कपड़े उतारे औऱ अपने झान्टो सें भरी बुर कों देखा….तौ कुछसोच कर उसकी बुर कि फांके कुलबुला उठी….उसने बाथरूम मे पड़ी हुईँ अजय कि शेविंग किट उठाई….औऱ शेविंग क्रीम लगाकर अपने झान्टो पऱ झाग बनाने लगी….फिन उसने रेजर सें अपनी झान्टो केँ बालसॉफ करने शुरुआत किए….
अपनी बुर सें बालो कों सॉफ करतेहुए किरण कि बुर यहसोच -2 कर कुलबुला रही थि कि, जब वोँ अपने भान्जे केँ सामने अपनी बुर खोलकर बैठीमूत रही होगी, तब कैसा मंज़र होगा….
अपनी झान्टो कों सॉफ करने केँ बाद पायल सें अपनी बुर कों अच्छे सें धो लिया…औऱ फिन बाथरूम कां डोरखोल कर उसने विनय कों आवाज़ लगाई….विनय मामीजी कि आवाज़ सुनकर रूम सें बाहर् निकाला औऱ बाथरूम केँ डोर पर्र खड़ा होँ गय़ा…किरण नें उसे अंदरआने कां इशारा किया….तोँ विनय बाथरूम केँ अंदरआया तौ, अपनी मामीजी कों पूरा नंगा देखते हि, उसका लन्ड उसके शॉर्ट्स कों फाड़कर बाहर् आने कों उतावला हौ उठा…किरण नें विनय केँ शॉर्ट्स मे झटके खातेहुए लन्ड कों देखा, तोँ उसके होंठो पर्र कामुक मुस्कान फेल गई….”निकाल लेँ नाँ इसे बाहर् क्यूं क़ैद करकेरखा हैं….” किरण नें विनय केँ लन्ड कि तरफ इशारा करतेहुए कहा….तौ विनय नें अपना शॉर्ट्स दोनोतरफ सें पकड़कर नीचे सरकाते हुए अपने शरीर सें अलगकर दिया….
विनय केँ झटके खातेहुए लन्ड कों देखकर किरण नें अपने होंठो कों दाँतों मे भींचा औऱ फिन नीचे फर्श पर्र अपनी मोटी गान्ड टिकाते हुएबैठ कर अपनी दोनो टाँगो कों इसतरह खोलकर फेला लिया कि, उसकी बुर कि फांके भि खुल गई….जिससे उसकी बुर कां पानी सें लबलबा रहाछेद विनय कों सॉफ दिखाई देने लगा…किरण नें विनय कि तरफ देखा….जोँ आँखे फाडे उसकी बुर कि तरफदेख रहा थां…”चल वहाबैठ जा दीवार सें पीठ टिकाकर….” किरण नें सामने दीवार कि तरफ इशारा करतेहुए कहा तौ, विनय दीवार सें पीठसटा कर नीचे फर्श पऱ बैठ गय़ा….”तूँ अपनी मामीजी कि बुर सें पेशाब निकलता हुआ देख्ना चाहता थां नां…” किरण नें अपनी बुर केँ फांको कों अपनी उंगलियों सें फेलाते हुए अपनी बुर कां गुलाबी रसीला छेद विनय कों दिखाते हुएकहा….
विनय: हां….(विनय नें अपनेगले कां थूक गटाकते हुएकहा…)
किरण:चल फिनदेख लेँ….पऱ जब तक मेरी बुर सें मूत कि धार निकलेगी…तब तुँ मेरे सामने अपने लन्ड कि मूठ मारेगा…बोल मारेगा नाँ मूठ अपनी मामीजी कि बुर सें पेशाब निकलता हुआदेख कर….
विनय:हां मामीजी मारूँगा…….(विनय नें अपने लन्ड कों मुट्ठी मे भरतेहुए हिलाना शुरुआत कर दिया….)
किरण नें अपने दोनो हाथो कों पीछे कि औऱ फर्श पर्र टिकाया औऱ अपनी गान्ड कों थोडा सां ऊपेरउठा दिया…कुछ हि पलोंबाद किरण कि बुर सें मूट कि तेजधार सीटी जैसी आवाज़ करतेहुए निकलकर बाहर् फर्श पर्र गिरने लगी….जिसे देख विनय केँ लन्ड केँ नसों मे खून कां दौड़ा तेज हौ गय़ा….औऱ उसने तेज़ी सें अपने लन्ड कों हिलाना शुरुआत कर दिया….”सीईईईई देख विनयदेख तेरी मामीजी कि बुर सें निकलता हुएमूत देख लेँ बेटा….
आहह-आहह देख तेरेलिए तेरी मामीजी कितनी बेशरम हौ गई हैं….हिला अपने लन्ड कों अपनी मामीजी कि बुर केँ लिए….” किरण नें अपने भान्जे केँ लन्ड केँ चमकते हुए सुपाडे कों देखते हुए कहा….औऱ दूसरी तरफ विनय अपनी मामीजी कि बुर सें निकलती मूत कि धार कों देखकर एक् दम मस्त हौ गय़ा….किरण कां मूतना ख़तमहुआ तौ, विनय एक् दम सें उठकर अपनी मामीजी कि जाँघो केँ पासआकर बैठ गय़ा…औऱ झुककर अपनी मामीजी कि बुर कों देखने लगा….
too be continued.
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Real incest person dm mai
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -18
विनय कों इतने लगभग सें अपनी बुर कों देखते देखकर किरण एक् दम सें शरमा गई…वोँ जल्द सें उठी औऱ बाथरूम केँ डोर कि तरफ जाने लगी….इस बात सें अंज़ान कि विनय कां लन्ड अब उसकी बुर मे घुसने केँ लिए कितना बेकरार होँ चुका हैं…जैसे हि किरण बाथरूम केँ डोर पऱ पहुँची…विनय नें किरण कों पीछे सें कंधो सें पकड़ते हुए, उसे बाथरूम केँ डोर केँ संगसटा दिया…इससे पहले कि किरण कों कुछसमझ आता….विनय नें अपने घुटनो कों थोडा सां मोडते हुए, अपने लन्ड कों पकड़ कां किरण कि बुर केँ छेद पर्र टिकाते हुए एक् ज़ोरदार धक्का मारा….विनय केँ लन्ड कां सुपाडा किरण कि बुर केँ छेद कों फेलाता हुआ अंदरजा घुसा….किरण अपने भान्जे कि हिम्मत औऱ उतावले पन कों देखकर खुशी सें उछल पड़ी…उसकी मस्ती कां कोई ठिकाना नहींरहा….
किरण: श्िीीईईईईईई आहह-आहह उंह सबाश मेरीए बाबरशेर अह्ह्ह्ह कर लाइए अपनी कों कोढ़ी……आहह-आहह पूरा अंदरकर दे पुतर…
किरण नें भि अपनी गान्ड कों पीछे कि औऱ निकाल लिया…ताकि विनय बिना किसी तकलीफ़ केँ उसकी बुर मे अपना पूरा लन्ड घुसा सके….विनय कां लन्ड मामीजी केँ कामरस सें भीगी हुइ बुर कि दीवारो कों फेलाता हुआ अंदरजा घुसा….किरण केँ होंठो पर्र कामुकता सें भरी तीखी मुस्कान फेल गई….विनय नें बिना एक् समय गवाए बिना….अपने लन्ड कों मामीजी कि बुर केँ अंदर बाहर् करना शुरुआत कर दिया….किरण अपनी टाँगे फेलाए हुए पीछे सें अपने भान्जे केँ झटको कां मजा अपनी बुर मे लेनेलगी….
अपनी मामीजी कि बातें सुनकर विनय औऱ जोश मे आताजा रहा थां….औऱ वोँ अपने लन्ड कों सुपाडे तक बाहर् निकाल-2 कर किरण कि बुर मे पेलना लगा…”श्िीिइ सबाश मेरे शेररर ओह विनय बाहर् चलयहा बहोत गरमी हैं…” किरण नें सिसकते हुए कहा…तोँ विनय नें अपना लन्ड किरण कि बुर सें बाहर् निकाल लिया….किरण बाथरूम कां डोरखोल कर बाहर् आई, औऱ उसके पीछे विनय भि बाहर् आँ गय़ा….जैसे हि दोनोहॉल मे पहुँचे तोँ, किरण नें विनय कों धक्का देकर सोफे पर्र बैठा दिया…औऱ स्वयं उसके जाँघो केँ दोनोतरफ अपने घुटनो कों टिकाते हुए, उसके ऊपेर आँ गई…किरण नें विनय केँ लन्ड कों पकड़कर अपनी बुर केँ छेद पऱ सेट करतेहुए विनय कि आँखो मे देखा….औऱ फिन धीरे-धीरे-2 अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे पऱ दबाते हुए अपने बुर मे लेना शुरुआत कर दिया….
किरना: ओह्ह्ह्ह विनय तेरा लन्ड जब अंदर जाता हैं….तोँ ऐसा लगता हैं….जैसे मेरी बुर तेरे लन्ड केँ टोपे कों चूमरही होँ….सच मे बहोत मजा आँ रहा हैं….विनय सीईईईई उंह तुम को कैसालग रहा हैं….?
किराना नें धीरे-धीरे-2 अपनी गान्ड कों ऊपेर नीचे करतेहुए कहा….”अह्ह मामीजी आपकी बुर सच मे बहोत गर्म हैं….” विनय नें अपनी मामीजी कि बड़ी-2 चुचियों कों अपनी मुत्ठियों मे भरकर मसलना शुरुआत कर दिया…किरण केँ शरीर मे मस्ती कि लहर दौड़ गई…उसने विनय कि पीठ पऱ अपनी बाहों कों कसतेहुए, तेज़ी सें अपने गान्ड कों ऊपेर नीचे करना शुरुआत कर दिया….किरण कि बुर केँ पानी सें सनाहुआ विनय कां लन्ड आसानी सें उसकी बुर केँ अंदर बाहर् हौ रहा थां…
.”सीईईईई ओहउंह विनय….” किरण पागलो कि तरह मस्ती मे सिसकते हुए विनय केँ गालो औऱ होंठो पऱ अपने होंठो कों रगड़रही थि….विनय तोँ जैसे स्वर्ग कि सैरकर रहा थां….”ओह्ह्ह मामीजी उतरो नीचेबेड पर्र चलकर करते हैं….”
विनय नें सिसकते हुए किरण केँ चुतड़ों कों मसलते हुए कहा….तोँ किरण उसके ऊपेर सें खड़ी होँ गई….औऱबेड पर्र लेटकर विनय कि तरफ देखते हुए बोलीं….”चल आजा जल्दअब….” विनय तोँ किरण सें भि कही ज्यादा बेकरार हुआजा रहा थां…वोँ बेड पर्र चढ़ा औऱ किरण कि जाँघो केँ बीच घुटनो केँ बलबैठ गय़ा….जैसे हि विनय किरण कि जाँघो केँ बीच मे घुटनो केँ बल बैठा…
उसने विनय कों अपनी बाहों मे भरकर अपने ऊपेर खेंच लिया.अब विनय किरण केँ ऊपेर आँ चुका थां….किरण नें अपनी टांगो कों फेलाकर विनय जाँघो पर्र चढ़ा लाया थां….दोनो केँ नज़रे आपस मे जा टकराई…औऱ अगले हि लम्हा दोनो केँ होंठआपस मे कुश्ती लड़रहे थें….
दोनो केँ मुँह सें मुंम्मह-2 कि आवाज़े आँ रही थि….दोनो एक् दूसरे केँ होंठो कों बदस्तूर चूसरहे थें….किरण कि बड़ी -2 चुचियाँ विनय कि छाती मे धँसरही थि…किरण नें अब अपने होंठो कों विनय केँ हवाले कर दिया थां…औऱ विनय उसके दोनो होंठो कों बारी-2 अपने होंठो मे दबा -2 करचूस रहा थां…विनय कां तनाहुआ लन्ड किरण कि बुर पऱ दस्तक देरहा थां….
किरण नें अपने दोनो हाथो सें विनय केँ हाथो कों पकड़कर अपनी चुचियों पर्र रख दिया….विनय नें बिनाकोई समय गवाए, किरण केँ होंठो कों छोड़ा, औऱ किरण कि चुचियों पऱ टूट पड़ा….
उसने किरण कि लेफ्ट चुचि कों मुँह मे भरकर चूसना शुरुआत कर दिया। औऱ राइट चुचि कों अपने एक् हाथ सें मसलना शुरुआत कर दिया….”अहह सीईइ हाइी विनय….चुस्स लेँ मेरे मम्मो कों अह्ह्ह्ह सीईईई अहहअहह औऱ ज़ोर सें चुस्स पुत्तर आहह-आहह मेरीए मम्मे अहहपी लेँ सारादूध पे लेँ” किरण नें सिसकते हुए, विनय केँ सर कों अपनी चुचियों पर्र दबाते हुएकहा…। किरण केँ निपल एक् दम कड़क होँ चुके थें….औऱ काले अंगूर केँ दाने जैसेफूल गए थें….विनय कभी किरण केँ लेफ्ट निपल कों अपने मुँह मे लेकर चूस्ता तौ कभी, राइट निपल कों……विनय कां लन्ड जोँ किरण कि बुर कि फांको केँ बीच रगड़खा रहा थां….अब उसकी नसें फूलने लगी थि….
विनय नें किरण केँ मम्मो कों छोड़ा औऱ सीधा होकर घुटनो केँ बल बैठते हुए मामीजी कि टाँगो कों घुटनो सें मोड़कर ऊपेर उठाते हुए दोनोतरफ फेला दिया…जिससे किरण कि बुर कि फांके फेल गई ….विनय नें देखा किरण कि बुर कि फांके उसकी बुर सें निकलरहे पानी सें एक् दम गीली होकरचमक रही थि…। उसकी बुर कां छेदबार-2 खुलकर बंद होँ रहा थां….”हाइए विनयऐसे मतदेख पुत्तर…” किरण नें विनय कों कंधो सें पकड़कर अपने ऊपेर खेंचते हुए कहा…पऱ इसबार विनय किरण पऱ नहीं झुका औऱ अपनी मामीजी कि बुर कां लबलबाता हुआछेद देखता रहा….किरण यहदेख करशरम सें मरीजा रही थि कि, उसका भांजा केसे उसकी टांगे उठाए उसकी फुद्दि कों देखरहा हैं….औऱ उसका लन्ड केसे उसकी बुर कों देखकर झटकेखा रहा हैं….
विनय नें किरण कि बुर केँ छेद पर्र अपने लन्ड केँ सुपाडे कों टिकाते हुए उसकी आँखो मे देखा….तोँ किरण अपने भान्जे केँ लन्ड केँ गर्म सुपाडे कों अपनी बुर पर्र भिड़ा हुआ महसूस करके सिसकउठी….
किरण: (विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कों अपनी बुर केँ छेद पर्र महसूस करते हि मदहोश होँ गई….) अहह सीईईईई विनय फाड़दीए मेरी उंघह फुद्दि अह्ह्ह्ह…
विनय नें अपने लन्ड केँ सुपाडे कों पूरे ज़ोर सें किरण कि बुर केँ छेद पऱ दबाया, तोँ उसके लन्ड कां सुपाडा किरण कि बुर कि दीवारों कों फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा….विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कि रगड़ अपनी बुर कि दीवारो पर्र महसूस करके किरण केँ पूरे शरीर मे मस्ती कि लहर दौड़ गई। उसने विनय कि पीठ पर्र अपनी बाहें कस ली.औऱ अपनी टाँगो कों उठाकर विनय कि कमर पर्र चढ़ा लिया….
किरण: हाइए विनय तेरा लन्ड तौ बहोत मोटा हैं….मार मेरी फुद्दि आहह-आहह अह्ह्ह्ह होर ज़ोरनाल अहह फाड़दे पुत्तर अपनी मामीजी दि फुद्दि आहह-आहह सि सीईइ हाइईए….
विनय भि अब पूरेजोश मे आकर अपने लन्ड कों किरण कि बुर केँ अंदर बाहर् करने लगा…किरण भि अपनी टाँगो कों पूरा ऊपेरउठा कर अपनी बुर मे विनय कां लन्ड लेँ रही थि….विनय कां लन्ड अंदर बाहर् होतेहुए बुरीतरह सें किरण कि बुर कि दीवारो पर्र रगड़ खानेलगा थां…औऱ किरण मस्ती केँ सागर मे गोतेखा रही थि.विनय किरण कि बुर मे लन्ड पेलते हुए, लगातार उसके दोनो बड़ी-2 चुचियों केँ निपल्स कों अपने हाथों सें मसलरहा थां….
किरण: अह्ह्ह्ह सीईईईईई उंघ हाआँ मरोड़ दे आहह-आहह औरर्र जोर्र्र सें मसल बेटा मेरे मम्मो कों अहहमार फुद्दि मे अपना लन्ड औऱ अह्ह्ह्ह हाइी औऱ जोर्र सें मार अपना लन्ड मेरी फुद्दि अह्ह्ह्ह मेरी अह्ह्ह्ह फुदी मे अह्ह्ह्ह सीईइ उंघह उन्घ्ह ….
चुदाई पूरे उफान पऱ थि….चुदाई कि आवाज़े महॉल औऱ गर्मबना रही थि….किरण कि बुर केँ पानी सें लन्ड चिकना होँ चुका थां…औऱ जब विनय कां लन्ड किरण कि बुर कि गहराइयों मे समाता तोँ पक-2 कि आवाज़ रूम मे गूँज उठती…औऱ इस आवाज़ कों सुनकर किरण एक् दम सें शर्मा जाती… विनय कां लन्ड अब किसी पिस्टन कि तरह किरण कि बुर केँ अंदर बाहर् होँ रहा थां…
किरण: उंघहउंघ अह्ह्ह्ह सीईईई उंहउंह चोद विनयअहह देख मेरीई फुदीी कों तूने पानी अह्ह्ह्ह अहह पानी-2कर अहह दिया.
किरणअब झड़ने केँ लगभग पहुँच चुकी थि…उसने भि अपनी गान्ड कों ऊपेर कि औऱ उछालना शुरुआत कर दिया…”अहह लेँ पुत्तररर आहह-आहह लें मेरी फुदी अह्ह्ह्ह आँ लीईए मेरीई फुद्दि कां काअमम होँ गायाअ अहह सीईईईई उं
ह पुउतर्र चूमादे नाअ….
यह कहतेहुए उसने विनय केँ सर कों पकड़कर अपने होंठो पर्र उसके होंठो कों लगा दिया…औऱ पूरी रफतार सें अपनी गान्ड कों ऊपेर कि ओर उछालते हुए, तेज़ी सें झड़ने लगी….विनय भि पूरेजोश केँ संग अपना लन्ड किरण कि बुर मे पेलते हुए झाड़ गय़ा….दोनो केँ बदन ढीलेपड़ गए….किरण नें उसे अपनी बाहों मे भींच लिया…
दोनो पसीने सें तरबतर थें….औऱ लंबी-2 साँसे लेँ रहे थें….विनय कां लन्ड अभि भि किरण कि बुर मे थां…औऱ वोँ अभि भि ढीला नहीं पड़ा थां…जिसे किरण अपनी बुर केँ अंदरसॉफ महसूस करपारही थि.….किरण नें अपनी मदहोश आँखो कों खोलकर विनय कि ओर देखा…जोँ अपने चेहरे कों उसकी चुचियों पर्र टिकाए हुए लेटाहुआ थां….
किरण: विनय तुम्हारा लन्ड तौ अभि भि खड़ा हैं….
विनय:हां मामीजी मेरा अभि हुआ नहीं हैं…
विनय नें किरण कि बातसुन कर धीरे-धीरे-2 सें अपने लन्ड कों सुपाडे तक किरण कि बुर सें बाहर् निकाला….औऱ फिन एक् झटके मे पूरा अंदरपेल दिया…। किरण केँ शरीर मे मस्ती भरी सिहरन दौड़ गई….”सीईईई ऑश विनय थोड़ी देररुक जा नाँ….”
विनय: क्याँ हुआ मामीजी….
किरण; अभि तोँ तूने मेरी फुद्दि कां पानी निकाला हैं रुक जेया थोड़ी देर….
विनय नें जैसे हि अपना लन्ड किरण कि बुर सें बाहर् निकालना चाहा…किरण नें उसकीकमर पर्र टाँगो कों लपेटकर उसे नीचे कि ओरदबा दिया….”विनय अपना लौडा मेरी फुद्दि मे हि रहनेदे नां… आज सारीरात तेरा लौडा मे अपनी फुद्दि मे लेकर रहूंगी…मुझे सारीरात चोदआज”
विनय:(खुश होतेहुए) सच मामीजी….
किरण:हां विनय….
किरण कों विनय कां लन्ड अभि भि अपनी बुर मे झटके ख़ाता हुआ महसूस होँ रहा थां….जिसे महसूस करके किरण कि बुर अभि-2 कतरा-2 करके अपने प्रेम कां रस विनय केँ लन्ड पऱ उडेलरही थि….विनय मस्ती मे धुन मामीजी केँ मोटे-2 काले निपल्स कों चूसने मे मगन थां…जिससे किरण कि बुर कि आगफिन सें धीरे-धीरे-2 भड़कने लगी थि….
किरण नें मुस्कुराते हुए विनय कि तरफ देखा, औऱ फिन कों लन्ड बाहर् निकालने केँ लिए कहा….विनय नें बेमन सें अपने लन्ड कों उसकी बुर सें बाहर् निकाला औऱ किरण कि बगल मे लेट गय़ा.…किरण नें बेडशीट कों खेंचते हुए, विनय केँ लन्ड कों अच्छी तरहसॉफ किया…औऱ फिनझुक कर उसके लन्ड केँ सुपाडे कों अपने होंठो केँ बीच मे दबा लिया…….विनय कां पूरा जिस्म कांप गय़ा, उसने किरण केँ सर कों दोनो हाथों सें कस्के पकड़ लिया.“यह क्याँ कररही हैं मामीजी आप्, ओह “ किरण नें विनय कि बात पर्र ध्यान दिए बिना…उसके लन्ड कों चूसना शुरुआत कर दिया…….विनय मस्ती मे आहह-आहह ओह्ह्ह कररहा थां…….
एक् बारफिन सें विनय केँ लन्ड मे तनाव आनां चालू हौ गय़ा थां…….जिसे देख किरण कि बुर कि फांके एक् बारफिन सें कुलबुलाने लगी…….औऱ वोँ औऱ तेज़ी सें विनय केँ लन्ड कों चूस्ते हुए, अपने मुँह केँ अंदर बाहर् करने लगी……उसके हाथ लगतार विनय कि बॉल्स कों सहलारहे थें……औऱ विनय केँ हाथ लगतार किरण केँ खुलेहुए बालों मे घूमरहे थें……
किरणबार-2 अपनी मस्ती सें भरी अधखुली आँखों सें विनय केँ चेहरे कों देखरही थि…जौ आँखें बंदकिए हुए अपने लन्ड कों चुस्वा रहा थां……किरण नें विनय केँ लन्ड कों मुँह सें निकाला, औऱ विनय केँ बॉल्स कों मुँह मे भर चूसना चालूकर दिया….”ओह्ह्ह्ह बस मामीजी ओह्ह्ह” विनय कों ऐसालगा मानो उसकी साँस अभि बंद हौ जाएगी….उसका दिल बहोत जोरो सें धड़करहा थां……जब विनय सें बर्दास्त नहींहुआ तौ, उसने किरण कों उसके बालों सें पकड़कर खेंचकर अपने ऊपेर लेटा लिया……किरण कि चुचियाँ विनय कि छाती मे आँ धँसी………
दोनो हान्फ्ते हुए एक् दूसरे केँ आँखों मे देखरहे थें….विनय नें अभि भि किरण केँ बलों कों कस्के पकड़ा हुआ थां….पऱ किरण केँ होंठो पऱ फिन भि मुस्कान फेली हुईँ थि….नीचे विनय कां लन्ड किरण कि बुर केँ ऊपेर रगड़खा रहा थां……किरण विनय कि आँखों मे देखते हुए अपना एक् हाथ नीचे लेँ गई, औऱ विनय केँ लन्ड कों पकड़कर अपनी बुर केँ छेद पऱ टिका दिया…….औऱ विनय कि आँखों मे देखते हुए धीरे-धीरे-2 अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड पऱ दबाने लगी……किरण केँ थूक सें सनाहुआ विनय कां लन्ड उसकी बुर केँ छेद कों फेलाते हुए अंदर घुसने लगा……
विनय कों ऐसेलग रहा थां, जैसे उसके लन्ड कां सुपाडा किसी बुर मे नहीं, बल्कि किसी तपती हुइ भट्टी केँ अंदरजा रहा हौ…….विनय कि आँखें एक् बारफिन सें बंद होँ गई, किरण नें विनय केँ दोनो हाथों कों पकड़कर अपनी चुचियों पऱ रखकर अपने हाथों सें दबा दिया….औऱ अपनी बुर कों तब तक विनय केँ लन्ड पर्र दबाती रही, जब तक कि विनय कां पूरा 7 इंच लंबा लन्ड उसकी बुर कि गहराईयो मे समाकर उसकी बच्चेदानी केँ छेद सें नां जा टकराया……
किरण: (काँपती हुईँ आवाज़ मे) ओह्ह्ह्ह विनय तेरा लन्ड कितना बड़ा हैं,,,,, उंह ओहदेख नां केसे मेरी बुर कों खोलरखा हैं, ………ओह विनय…….
किरण कि बुर तौ जैसे पहले सें एक् औऱ जबरदस्त चुदाई केँ लिए सजधजकर थि….औऱ अपने अंदर कामरस कि नदीबहा रखी थि……विनय कां लन्ड अबजड तक किरण कि बुर मे घुसाहुआ थां, औऱ किरण कि बुर सें कामरस बहकर विनय केँ बॉल्स तक आँ रहा थां……विनय आँखें बंदकिए हुए, किरण कि चुचियों कों अपने हाथों सें मसलरहा थां…बीच मे वोँ उसके निपल्स कों अपनी उंगलियों केँ बीच मे दबाकर खेंच देता…जिससे किरण एक् दम सें सिसक उठती, औऱ उसकीकमर अपने आप् हि आगे कि ओर झटकाखा जाती.
लन्ड बुर केँ दीवारों सें रगड़ ख़ाता, औऱ किरण केँ जिस्म मे मस्ती कि लहर दौड़ जाती। “ हां विनय उफ़्फ़ औऱ ज़ोर सें मसल, मेरे चुचक कों ओह्ह्ह्ह उंह आहह-आहह अह्ह्ह्ह विनय…….चोद डाल मुझे.देख नाँ मेरी फुद्दि केसे पानी छोड़रही हैं, तेरे लन्ड केँ लिए…….ओह विनयउंह हांऐसे औऱ ज़ोर सें मसलओह ओह आहह-आहह” किरण अपनीकमर कों हिलाते सिसकी भररही थि……औऱ अपने दोनो हाथों कों विनय केँ हाथों पर्र दबारही थि…….
विनय भि जोश मे आकर नीचे लेटेहुए ऊपेर कि औऱ धक्के लगाने कि कॉसिश कररहा थां। पर्र दुबले पतले विनय कां बस नहींचल रहा थां, ऊपेर जवानी सें भरपूर किरण जैसी गदराई हुइ महिला जोँ उसके लन्ड पऱ उछलरही थि……विनय तोँ बसअब आँखें बंदकिए हुए किरण कि टाइट बुर केँ मज़ेलूट रहा थां….किरण अब एक् दम गर्म होँ चुकी थि, उसने विनय केँ हाथों सें अपनेहाथ हटाए औऱ विनय केँ ऊपेरझुक कर उसके होंठो कों अपने होंठो मे भर लिया…….जैसे हि विनय केँ हाथ आज़ाद हुए, विनय अपने हाथों कों उसकी गान्ड पर्र लें गय़ा……….
औऱ उसके चुतड़ों कों ज़ोर ज़ोर सें मसलकर दोनोतरफ फेलाने लगा…….किरण नें अपने होंठो कों विनय केँ होंठो सें हटाया, औऱ विनय केँ सर केँ दोनोतरफ अपनी हथेलियों कों टिकाकर अपनी गान्ड कों पूरी रफ़्तार सें ऊपर नीचे करके, अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड पऱ पटकने लगी….विनय कां लन्ड हरबार लगभगआधा बाहर् आता औऱ फिन पूरी रफ़्तार केँ संग किरण कि बुर कि दीवारों सें रगड़ ख़ाता हुआ अंदरघुस जाता…। किरण तौ मानोआज ऐसे निहाल होँ गई थि, जैसेउसे सवर्ग मिल गय़ा होँ……
too be continued.
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नादान लन्ड केँ जलवे - Next part miss mat karna
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आपके लेखन कि श्रेष्टतम बात हैं कि आप् भाग केँ लिए पाठकों कों ज़्यादा इंतज़ार नहि करवाते । ऐसे हि लिखते रहें बहोत बढ़िया चलरहा हैं।
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