नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
yeh shaks Sheetal h joo Kiran ko vinay से chudwakar bachcha paida karwana chahti h। Ya Kiran ko barbad krna chahti h। Vaishali की seal और poora adhikar vinay kaa hu। Rincky kaa bhay bilkul vaishali ko na chhuye। or vaishali से vinay की shaadi hu। Biologically vinay vaishali mausere bhay behen hu पर logically mama की beti। or sauth Hindustan mai yeh mama bua की beti से shaadi कोई buri bat नहीं। too vaishali vinay से shaadi kare। or vo bi pyaar के chalte। Kisi की use की hoyi stri na mile।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -12
तभी उसकी नज़र अपनी पैंटी पऱ पड़ी….जौ उसकी बुर औऱ विनय कि नज़रो केँ बीच मे आँ रही थि…फिन तौ जैसे किरण नें विनय पर्र कहर हि ढा दिया हौ…उसने अपनी पैंटी कों पकड़ऊपर साड़ी औऱ पेटिकोट केँ संगसटा दिया….किरण खुल केँ अपनी बुर केँ दर्शन विनय कों करवारही थि…
औऱ उसकी नज़रें अब विनय केँ फूलेहुए अंडर वेअर पऱ अटकी हुइ थि….दोनो कि प्यासी निगाहे उसके गुप्त अंगो कों निहार रही थि… विनय कों ऐसालग रहा थां…जैसे किसी करिश्माई झरने सें पानीबह कर नीचेगिर रहा होँ…उसका दिलकर रहा थां कि, वोँ अभि मामीजी केँ टाँगो नीचे जाकरबैठ जाए…औऱ अपना लन्ड निकाल कर मामीजी कि फुद्दि केँ छेद सें भिड़ा दे…औऱ उसकी बुर सें निकलते हुएमूत सें अपने लन्ड कों नहला डाले….
फिन मूतने केँ बाद जैसे हि किरणउठी, तौ विनय नें अपनाफेस दूसरी तरफकर लिया। किरण विनय कां शर्मीले पनदेख मन हि मन मुस्करा उठी…उसने अपनी पैंटी ऊपेर कि औऱ फिन साड़ी औऱ पेटिकोट ठीक करके, डोर खोलकर बाहर् चली गई…फिन डोरबंद होने कि आवाज़ सुनकर विनय जैसे सपनो कि दुनिया सें बाहर् आया…विनय केँ दिमाग़ पर्र एक् बारफिन सें काम वासना कां नशासर चढ़कर बोलरहा थां…उसने डोर कों अंदर सें लॉक किया, औऱ अपना लन्ड अंडरवेर सें बाहर् निकाल करउसे मुट्ठी मे भरकर तेज़ी सें हिलाने लगा….मूठ मारते हुए उसकी आँखो केँ सामने मामीजी कि बुर सें निकलते हुएमूत कि तसेवीर थि….वोँ मामीजी कि झान्टो सें भरी बुर केँ बारे मे सोचते हुए तेज़ी सें अपने लन्ड कों हिलाने लगा….”अह्ह्ह्ह सीईईईई मामीजी….” उसके लन्ड केँ नसेंअब फूलने लगी थि…आँखे मस्ती मे बंद होतीचली गई….औऱफिन विनय केँ लन्ड सें वीर्य कि पिचकारियाँ निकलकर नीचे फर्श औऱ कुछ बूंदे सामने दीवार पऱ जा गिरी….
विनय ठंडापड़ चुका थां….उसके बाद विनय नें शवर लिया औऱ अंडरवेर केँ बिना शॉर्ट्स औऱ टीशर्ट पहनकर बाहर् आँ गय़ा….जब विनय बाहर् आया तोँ, देखा मामीजी बाहर् हॉल मे सोफे पऱ बैठी हुई थि….विनय किरण सें नज़रें चुराता हुआ अपने कमरे कि तरफ जानेलगा तोँ, मामीजी नें उसे आवाज़ देकर अपनेपास बुला लिया…विनय मामीजी केँ पास गय़ा….”जी मामीजी…” किरण नें एक् बारउसे देखा औऱ फिन बोलीं…” जा वोँ शॉपिंग बॅग्स उठाकर ला….” विनय डाइनिंग टेबल पर्र पड़ेहुए शॉपिंग बॅग्स उठाकर मामीजी केँ पास लेँ आया….किरण नें उसमे सें एक् बॅग निकाल कर विनय कों दिया…”यह तेरेलिए हैं…” विनय नें बॅगखोल कर देखा तोँ, उसमे अनडरवेर्ज़ थें…
विनय: पर्र मामीजी मेरेपास तोँ पहले सें दो अंडरवेर हैं….
किरण:पता हैं…पुराने हौ गए थें….इसीलिए नये लेँ आई….औऱ वैसे भि तुँ आजकल अनडरवेर्ज़ कों कुछ ज़यादा हि गंदा करनेलगा हैं…(किरण नें अपने होंठो पर्र कामुक मुस्कान लातेहुए कहा….)
मामीजी कि बातसुन कर विनय एक् दम सें सकपका गय़ा….उसके चेहरे कां रंगऐसे उड़ गय़ा….जैसे गोली चलाने सें पेड़ों पऱ बैठेहुए परिंदे उड़ जाते हैं….”अच्छा जापहन करदेख लेना…फिटिंग सही नां होँ तौ बता देना….कल बदल लेंगे….औऱ सुन जाते-2यह शॉपिंग बॅग्स मेरे कमरे मे रख आनां….मे खाने कि तैयारी करती हूं…” विनय अपनेरूम मे गय़ा…वहा अपना अंडरवेर वालाबॅग रखा औऱ फिन मामीजी केँ रूम्स मे जाकर बाकी केँ शॉपिंग बॅग्स रख दिए…विनय नें समय देखा तौ अभि 11:30 हि हुए थें….आज भला मामीजी कों इतनी जल्द क्याँ पड़ गई खानां बनाने कि…विनय उसकेबाद अपनेरूम मे चला गय़ा….किरण नें खानां सजधजकर कर लिया। किरण नें विनय कों आवाज़ दि…औऱ वशाली कों रिंकी केँ घऱ सें बुलाकर लाने केँ लिएकहा.
विनय रिंकी केँ घऱचला गय़ा….थोड़ी देरबाद दोनो आँ गई…आज तीनो सें सुभह जल्द हि नाश्ता कर लिया थां…इसीलिए उन्होने नें 12:30 हि खानां खा लिया….वशाली नें जैसे हि खानां ख़तम किया वोँ फिन सें रिंकी केँ घऱचली गई….किरण जानती थि कि, अब वशाली साम सें पहले नहींआनी वाली….एक् चोट तौ वोँ विनय केँ लन्ड पर्र कर चुकी थि….अब अगलाकदम उठाने कि बारी थि….वोँ अब तक विनय केँ रवैये सें जान चुकी थि कि, विनय उससे घबरारहा हैं….कि कही उसकेमन मे जौ चोर हैं…वोँ पकड़ा नाँ जाए….औऱ किरण उससे नाराज़ नां हौ जाए….
इसलिये उसने अपनेमन मे उधेड़ बुन करना शुरुआत कर दिया थां…उसने सोच लिया थां कि, सबसे पहलेउसे विनय केँ मन मे बसेहुए डर कों बाहर् निकालना हौ गय़ा….औऱ ऐसा हि वोँ तभीकर पाएगी….जब वोँ औऱ ज़यादा विनय केँ पास जाकर उसको दुलारेगी। उसकोफील करवाएगी कि, उसकी मामीजी उससे किसीतरह भि नाराज़ नहीं होँ सकती…अब धीरे-धीरे-2 सबशरम कि दीवारो कों गिराने कां काम शुरुआत करना थां…वोँ विनय कों स्पेशल ट्रीट करकेयह अहसास दिलाना चाहती थि कि, विनय उसकी जीवन मे क्याँ मायने रखता हैं। वोँ किसहद तक विनय कों प्रेम करती हैं….
मगर किरण केँ मनइनसभी बातों कों लेकरयह डर भि थां कि, कही वोँ विनय कों अपनेजाल मे फँसाने केँ चक्कर मे स्वयं हि नां फँस जाए…किरण जानती थि कि, विनय नादान हैं….औऱ विनय कि एक् नादानी उसकेलिए जीवनभर कर कलंकबन सकती थि। वोँ यहसोच केँ भि घबरारही थि कि, कही विनयकुछ ऐसा सोचता हि नां होँ…औऱ विनय उसके बारे मे कोई ग़लतराय कायम करे…अब किरण कों विनय कि सेक्स केँ आग कों भड़काना थां….औऱ किरण नें सोच लिया थां कि, वोँ विनय केँ अंदर कि वासना कों भड़काएगी अवश्य पऱ कभी स्वयं पहल नहीं करेगी….वोँ चाहती थि कि, विनय स्वयं पहल करे…इससे किरण कों विनय केँ सामने कभी शर्मिंदा नां होना पड़ता….
अभि किरणयही सोचरही थि कि लाइटकट गई….
हॉल मे चलरहा थां बंद होँ गय़ा….पर्र छत पऱ लगा पंखाचल रहा थां…घऱ मे इनवरटर थां…पऱ उसका कनेक्षन सिर्फ़ पँखो औऱ लाइट्स कों हि दिया गय़ा थां…जब अकसर गर्मियों मे लाइटचली जाती थि….तौ ममता वशाली किरण औऱ विनयसभी अपने-2 रूम्स केँ फॅन्स बंद करके बाहर् हॉल मे फॅन केँ नीचेबैठ जाते थें…क्यूं कि कभी-2 लाइटसाम 6-7 बजे तक भि नहींआती थि….सिर्फ़ एक् पंखे सें इनवरटर केँ खपतकम होती थि….जैसे हि लाइट गई तोँ, विनय नें उठकर अपना पंखाबंद किया…औऱ बाहर् हॉल मे आँ गय़ा।
जब विनय नें किरण कों भि वही बैठे देखा तोँ, वोँ सर झुकाए हुए चुपचाप आकर नीचे चटाई पर्र लेट गय़ा….तभी बाहर् डोरबेल बजी, तौ किरण नें बाहर् जाकरगेट खोला तोँ देखा सामने शीतल खड़ी थि…”किरण लगता हैं…हमारा एक् शॉपिंग बॅग तुम्हारे पास आँ गय़ा हैं….” शीतल नें अंदरआते हुए कहा…”अच्छा मेने तौ देखा भि नहीं.आई अंदर चलिए…शीतल अंदरआकर विनय केँ पास नीचे चटाई पर्र बैठ गई…औऱ विनय सें बातें करने लगी…किरण अपनेरूम मे गई औऱ फिन शॉपिंग बॅग्स देखे तोँ, उनमे सें शीतल कां शॉपिंग बॅगमिल गय़ा…वोँ शॉपिंग बॅग कों लेकर बाहर् आई औऱ शीतल कों दिया….
किरण: दिदी आप् बैठो औऱ अपने भानजे सें बातें करो….मे नहाकर आती हूं…
यहकहकर किरण बाथरूम मे चली गई…फिन लगभग 10 मिनिट बाद किरण फरोज़ी रंग कि साड़ी औऱ ब्लाउज पहनकर बाहर् आई…औऱवही चटाई पऱ नीचेबैठ गई। शीतल औऱ किरण नें कुछदेर बातें कि औऱ फिन शीतलचली गई….किरण गेटबंद करकेआई, औऱ विनय केँ पासआकर बैठ गई…विनय आँखेबंद किएहुए लेटाहुआ थां। किरण नें चटाई पऱ बैठते हि, अपनी साड़ी कां पल्लू एक् साइड पर्र कर लिया….किरण नें ब्लूकलर कि साड़ी पहनी हुई थि…किरण कि यह साड़ी उसकी विवाह केँ वक्त कि थि…जिसका ब्लाउज अबउसे तंग होँ चुका थां….इसलिये उसनेइस साड़ी कों पहनना हि छोड़ दिया थां। उसकेतंग औऱ छोटे सें ब्लाउज मे उसकी चुचियाँ एक् दमकसी हुई थि…
किरण कि आधे सें ज्यादा चुचियाँ उसके ब्लाउज केँ ऊपेर सें बाहर् कों सॉफ दिखाई देरही थि….अपने पास मामीजी केँ बैठने कि आहट कों सुनकर विनय नें जैसे हि आँखेखोल कर किरण कि तरफ देखा, तोँ विनय कि आँखेफटी कि फटीरह गई…किरण कि बड़ी-2 गोरी चुचियों कों देखते हि उसकी ज़ुबान उसकेहलक मे फंस गई…किरण कि गुदाज चुचियाँ आधे अधिक उसके ब्लाउज सें बाहर् थि….
औऱ ऐसालग रहा थां कि, उसकी चुचियाँ अभि ब्लाउज फाड़कर बाहर् आँ जाएँगी….विनय बिना पलकें झपकाए अपनी मामीजी केँ ब्लाउज सें झाँकरही चुचियों कों देखरहा थां….किरण भि अपनी हसीन चुचियों कों तरसती नज़रों सें देखरहे विनय कों देखकर मंद-2 मुस्करा रही थि… जैसेमन हि मनसोच रही हौ कि, विनय उसकेजाल मे फँसता जारहा हैं…
“क्याँ हुआ नींद आँ रही हैं…” किरण नें एक् दम सें विनय केँ संग पर्र हाथ रखतेहुए कहा…औऱ धीरे-धीरे-2 उसके बालो कों सहलाने लगी…विनय मामीजी कि आवाज़ सुनकर एक् दम सें घबरा गय़ा…मामीजी भि उसके शरीर कि कंपन कों महसूस कर चुकी थि। उसेपता चल गय़ा थां कि, विनय घबरा गय़ा हैं….यही तोँ वोँ नहीं चाहती थि कि, विनय उससे डरे…औऱ उससे दूरी बनाए…उसने विनय केँ लगभग खिसकते हुए विनय केँ सर कों दोनो हाथो सें उठाकर अपनी जाँघो पऱ रख लिया…औऱ विनय कों अपने जिस्म सें चिपकाते हुएझुक कर उसकेगाल कों चूम लिया….ऐसा करने सें किरण कि बड़ी-2 ब्लाउज कसी हुइ चुचियाँ विनय केँ फेस पर्र दब गई….
विनय केँ गाल कों चूमने केँ बाद वोँ सीधी हुइ, औऱ एक् हाथ सें विनय केँ सर कों सहलाते हुए दूसरे हाथ सें उसके कंधे पऱ थपकी देने लगी…विनय तोँ जैसे स्वर्ग मे पहुँच गय़ा थां….फेस केँ ठीक ऊपेर उसकी मामीजी केँ ब्लाउज मे कसी हुई चुचियाँ थि….वोँ बिना हीले डुले वैसे हि लेटा रहा…धीरे-धीरे-2 उसकी आँखे नींद सें बंद होने लगी…औऱ उसने अपनी आँखेबंद कर ली…किरण नें जब देखा कि विनय कि आँखेबंद हैं तोँ, उसने विनय केँ सर कों अपनी जाँघो सें नीचे उतारा….औऱ उसकेसर केँ नीचे एक् तकिया रखकर चटाई पऱ लेटा दिया…”विनय सोगए क्याँ….” किरण नें आवाज़ लगाकर विनय कों जाँचना चाहा….विनय नें मामीजी कि आवाज़ तोँ सुनी पऱ आँखेबंद किए लेटारहा….
किरण:आह कितनी गरमी हैं आज…….औऱयह ब्लाउज भि बहोत टाइट हैं….
किरण नें अपने ब्लाउज कों अड्जस्ट करतेहुए कहा….किरण उस वक्त नहीं जानती थि कि, विनय अभि जगाहुआ हैं…पऱ किरण केँ दिमाग़ मे यह थां कि अगर विनय जागा भि हुआ हैं तोँ, उसकेपास एक् अच्छा मोका हैं…उसने विनय कि तरफ नां देखते हुए दूसरी तरफफेस घुमा लिया औऱ अपने ब्लाउज केँ हुक्स खोलने लगी….विनय नें हल्की सें आँखखोल करजब मामीजी कि तरफ देखा तौ, विनय कां दिल जोरो सें धड़कने लगा….किरण नें अपने ब्लाउज केँ सारे हुक्स खोलरखे थि…औऱ उसकी बड़ी-2 चुचियाँ ब्लाउज सें बाहर् लटकरही थि….एक् दम गोरेरंग कि चुचियों पऱ कालेरंग केँ गहरे निपल कियामत ढारहे थें…विनय कां दिल किया कि वोँ अभि मामीजी कि चुचियों कों अपनी मुत्ठियों मे भरकरदबा दे….निचोड़ लें औऱ मामीजी कि बड़ी-2 चुचियों कों लेकर मुँह मे चूसे….
पऱ विनय मे इतनी हिम्मत कहां थि….जौ थि वोँ भि मामीजी कि बड़ी-2 चुचियों कों देखकर हवा होँ गई थि….
उसका लन्ड उसकी शॉर्ट मे लोहे कि रोड कि तरहतन चुका थां….किरण नें भि चोर नज़रों सें विनय कि तरफ देखा, तौ उसके नज़रें भि विनय केँ फूलेहुए शॉर्ट्स पर्र जाकररुक गई…एक् जवान लन्ड सजधजकर थां…औऱ एक् मदमस्त गुदाज बुर भि….पऱ अभि दोनो केँ बीचकुछ दीवारे थि….जिनका गिर जानां अबतयलग रहा थां…विनय केँ तनेहुए लन्ड कों देखकर किरण कों अंदाज़ा हौ गय़ा थां कि, विनय अभि भि जागाहुआ हैं….औऱ वोँ यह भि जानती थि कि, विनय अभि आगे बढ़ने केँ लिए सजधजकर नहीं हैं….औऱ उसका औऱ उकसाना ज़रूरी थां…इतना कि वोँ स्वयं पहलाकदम उठाता….मामीजी नें विनय केँ अंदरकाम केँ आग भड़का दि थि…। एक् कदम वोँ बढ़ा चुकी थि….औऱअब उसे प्रतीक्षा थां कि, विनयकब पहलाकदम बढ़ाने कि कॉसिश करता हैं….
लगभग 5 मिनट तक किरण वैसे हि बैठी रही….औऱ अपनी चुचियों कां जलवा विनय कों दिखाती रही….फिन लाइट आँ गई….उसने जानबूज कर विनय कों नहीं उठाया औऱ अपनेरूम मे वैसे हि चली गई….मामीजी केँ जाने केँ बाद विनयउठ करबैठ गय़ा.बड़ा जुलम हौ रहा थां उस बेचारे केँ लन्ड पर्र….वोँ कुछदेर वही बैठा अपने लन्ड कों मसलता रहा…औऱ फिनउठ कर अपने मामीजी केँ रूम कि तरफचल पड़ा….जैसे हि वोँ मामीजी केँ रूम केँ डोर पऱ पहुंचा तौ, अंदर कां नज़ारा देखकर विनय कि आँखेफटी कि फटीरह गई…
अंदर कां नज़ारा देख विनय अपनी पलकें झपकाना भि भूल गय़ा….अंदर मामीजी बेड पर्र लेटी हुइ थि…उसके शरीर पऱ सिर्फ़ वाइटकलर कां पेटिकोट औऱ वाइटकलर केँ ब्रा हि थि…मामीजी नें अपना एक् हाथउठा कर अपनेसर केँ ऊपेर तकिये पर्र रखाहुआ थां…औऱ किरण कां पेटिकोट उसके जाँघो सें काफ़ी ऊपेर तक चढ़ाहुआ थां…किरण नें अपनी एक् टाँग कों घुटने सें फोल्ड कररखा थां…औऱ दूसरी टाँग कों विपरीत दिशा मे मोड़कर फेलारखा थां….पेटिकोट कां हल्का सां पल्ला हि किरण कि बुर कों ढकेहुए थां…
यहसभी देख विनय कि तोँ जैसेदिल कि धड़कने हि थम गई हौ….पेर मानोवही ज़मीन मे धँसगए होँ….किरण अपनी आँखेबंद किएहुए लेटी हुइ थि…कहीं मामीजी उसेयहा खड़ा नां देख लें….यह सोचकर विनय जैसे हि रूम सें बाहर् जाने केँ लिए मुड़ा तोँ, पीछे सें किरण नें उसे आवाज़ देकररोक लिया….
किरण: क्याँ हुआ विनय कहां जारहा हैं….?
विनय: (किरण कि तरफ देखे बिना….) वोँ मे अपनेरूम मे जारहा हूं…
किरण: नींद आँ रही हैं….?
विनय: हूंम्म
किरण: तौ यहीसो जा मेरेपास आकर….
विनय: (हकलाती हुई ज़ुबान मे….) नं न् नहीं मे अपनेरूम मे सो जाउन्गा….
किरण:यहा भि कोई नहीं हैं….वशाली तोँ रिंकी केँ घऱ गई हैं….चल आँ मेरेपास सबाशआजा मामीजी केँ पाससो जाआकर…
विनय तोँ दिल हि दिल मे यहीदुआ कररहा थां कि, उसे मामीजी केँ संगबेड पऱ सोने कों मिल जाए….औऱ वोँ दिलभर कर अपने मामीजी केँ गदराए हुए जिस्म कां दीदार करसके। विनयसर झुकाए हुए पलटा औऱ बेड कि तरफ बढ़ने लगा….”विनय यह लाइटबंद तोँ कर्दे….” किरण नें वैसे हि लेटे-2कहा तौ विनय नें रूम कि लाइटबंद कर दि। पर्र बाहर् आँगन सें अभि भि इतनी रोशनी नज़र आँ रही थि कि, वोँ मामीजी केँ दूध जैसे सफेद गदराए हुए जिस्म कों देख सकता थां….
विनय लाइटबंद करकेबेड पऱ चढ़ गय़ा….औऱ मामीजी केँ बगल मे लेट गय़ा…जैसे हि विनय किरण कि बगल मे लेटा तौ, किरण नें उसकीतरफ करवट बदली औऱ उसके लगभग खिसकते हुए उसकेसर केँ बालो कों सहलाने लगी…दोनो एक् दूसरे कि तरफ करवट केँ बल लेटेहुए थें…। किरण नें उसे बाहों मे भरकर अपने सें चिपका लिया किरण कि एक् बाजू नें विनय केँ सर केँ नीचे सें होतेहुए उसकीपीठ कों जाकड़ लिया थां…। औऱ दूसरे बाजू सें उसकीबगल केँ ऊपेर सें पीठ कों जकड़े हुए थि किरण कि चुचियाँ उसकी वाइटकलर कि कसी हुईँ ब्रा केँ ऊपेर सें बाहर् आनने कों फडकरही थि….ब्रा केँ ऊपेर सें किरण कि चुचियों केँ निपल्स केँ शेप भि सॉफ दिखाई देरहे थें…
उसकी ब्रा मे शेपलिए हुए निपल्स कों देखकर विनय गर्म होँ रहा थां… किरण नें विनय केँ सर कों अपनी चुचियों पऱ दबा लिया….औऱ ऐसे बिहेव करने लगी…जैसे उसे गहरी नींद आँ रही हौ…। विनय केँ होंठ किरण कि वाइटकलर कि ब्रा केँ ऊपेर सें किरण केँ लेफ्ट निपल पर्र जालगा…। किरण कि हल्की चीख निकल गई जिसे विनय नें भि सुन लियाअब विनय भि अपनेहोश खो बैठा थां। उसका एक् हाथ स्वयं ब स्वयं हि किरण केँ खुले पऱ चला गय़ा…। किरण कां पेटिकोट काफ़ी ऊपेरउठा हुआ थां…। विनय कि आधी हथेली केँ नीचे किरण केँ पेटिकोट कां कपड़ा थां औऱ आधी किरण केँ नंगे खुले पऱ थि… किरण अपने खुले पऱ विनय कां हाथ कां स्पर्श महसूस करते हि उसके शरीर मे मस्ती कि लहर दौड़ गई…। थोड़ी देरबाद किरण नें अपनी लेफ्ट जाँघ कों उठाकर विनय कि कमर पे रख दिया जिससे उसका पेटिकोट कमर तक ऊपेर होँ गय़ा…। विनय केँ हाथ केँ नीचे सें पेटिकोट सरककर ऊपेर होँ चुका थां औऱ जाँघकमर पर्र रखने केँ कारण किरण थोडा औऱ आगे होँ चुकी थि… जिससे विनय कां हाथसरक कर किरण कि गान्ड पऱ पहुँच गय़ा……
किरण कों बहोत मजा आँ रहा थां…। आगे सें बुर सें पेटिकोट उठ चुकी थि विनय कां लन्ड शॉर्ट केँ अंदर सें किरण कि बुर केँ पन्खुडियो सें रगड़खा रहा थां…। किरण केँ मुँह सें आहह-आहह निकल गई औऱ आहह-आहह विनयकह केँ विनय सें औऱ ज़ोर सें लिपट गई… किरण कि आँखें बंद होँ गई उसकी साँसें तेज़ी सें चलरही थि… पता नहीं क्यूं पऱ विनय नें अपनेहाथ सें किरण केँ चूतर कों हल्के सें मसल दिया…विनय अपनीइस हरक़त सें घबरा गय़ा….पर्र जब किरण कि तरफ़ सें किसीतरह कां रियेक्शन नहींहुआ तोँ, विनय कि जान मे जानआई…। किरण कि कमर नें झटका खाया औऱ किरण कि बुर विनय केँ लन्ड केँ शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें रगड़खा गई विनय कों बहोत अच्छा लगरहा थां…। यह उसकी जीवन कां नया अनुभव थां… विनय नें धीरे-धीरे सें किरण कि गान्ड कों सहला दिया नीतज़ा फिन किरण कि कमर नें झटका खायाइस बार झटका थोडा तेज थां जिससे किरण कि बुर विनय केँ लन्ड सें रगड़ खातेहुए विनय केँ पेट पर्र चिपक गई….
विनय कां दिल जोरो सें धड़कने लगा उसका पूरा जिस्म रोमच केँ मारे काँपने लगाअब विनय केँ लन्ड कां सुपाडा शॉर्ट्स केँ ऊपेर सीधा किरण कि बुर पर्र टिकाहुआ थां विनय सें बर्दास्त नहीं होँ रहा थां जिससे उसका लन्ड झटके खानेलगा औऱ किरण कि बुर कि फांकों केँ बीचे दस्तक देनेलगा… किरण कि बुर लन्ड लेने केँ लिए बेताब हौ रही थि औऱ पानी छोड़ने लगी थि…। विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर कि फांकों पर्र महसूस करके किरण कि बुर कि फाँकें फड़फड़ाने लगी थि….किरण कों अपनी बुर मे तेज खेंचाव महसूस होनेलगा थां….किरण ऐसे रिएक्ट कररही थि कि, जैसे वोँ बहोत गहरी नींद मे सोरही हौ….उसकी आँखे अभि भि बंद थि…। किरण नें अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे पे दबाना शुरुआत कर दिया औऱ किरण कि बुर केँ होंठफेल गए औऱ लन्ड कां सुपाडा शॉर्ट्स समेत हल्के सें किरण कि बुर केँ छेद पऱ जालगा….
किरण कां पूरा शरीर मस्ती मे कांप उठा….किरण किसीतरह अपनी सिसकारियों कों रोकेहुए थि…औऱ अपने जूसी होंठो कों अपने दाँतों मे दबाते हुएचबा रही थि…विनय भि इसकदर मदहोश होँ चुका थां कि, उसके जेहन मे अबडर कि स्थान वासना नें कोहराम मचाया हुआ थां….विनय नें अपनेसर कों हल्का सां उठाकर किरण केँ फेस कि तरफ देखा….उसे पूरीतरह तोँ नहीं….पर्र थोडा बहोत यकीन हौ गय़ा थां कि, मामीजी इस वक्तसो रही हैं….विनय नें अपनीकमर कों थोडा सां पीछे खिसकाया….औऱ अपना शॉर्ट्स जाँघो तक खिसका कर अपने लन्ड कों बाहर् निकाल लिया….
औऱ फिन सें किरण केँ संग पहले कि तरह चिपक गय़ा….किरण भले हि आँखेबंद किएहुए लेटी हुइ थि…पऱउसे हर लम्हा कां पताचल रहा थां…इस बारजब किरण नें अपनीकमर कों जैसे हि थोडा सां आगे खिसकाया तौ, विनय केँ लन्ड कां दहकता हुआ नंगा सुपाडा उसकी बुर कि फांको केँ बीचोबीच जा लगा….किरण नें अपने होंठो कों दाँतों मे भींच लिया….उसकी बुर धुनक धुनक-2कर बजनेलगी थि…मामीजी कि बुर कां छेद अपने विनय केँ लन्ड कों अंदरसमा लेने केँ लिए हल्का सां खुल गय़ा थां…औऱ इसबार विनय नें अगलाकदम उठाया….औऱ अपनीकमर केँ नीचे वाले हिस्से कों मामीजी कि तरफ औऱ खिसका दिया….
विनय कां लोहे कि रोड कि तरहतना हुआ किरण कि बुर केँ छेद पऱ जा लगा…विनय केँ लन्ड कि नसेंफूल गई जिस्म कां साराखून लन्ड कि नसों मे इकट्ठा होनेलगा…। विनय कों अपने लन्ड कां किरण कि बुर सें स्पर्श अंदर तक हिला गय़ा…। वोँ तोँ जैसे आसमान मे उड़रहा होँ…। विनय केँ लन्ड केँ गर्म सुपाडे कों बुर केँ छेद पर्र महसूस करके किरण मस्ती केँ सागर मे गोतेखा रही थि… विनय सें अब रुका नहींजा रहा थां…। चाहे विनय सेक्स केँ बारे मे बहोत कम जानता थां…। पऱ उसकीकमर अपने आप् हि अपने लन्ड कों किरण कि बुर मे घुसाने केँ लिएआगे कि तरफकमर कों धक्का लगाया…। लन्ड कां सुपाडा किरण कि बुर केँ छेद कों फेलाता हुआ अंदरजा घुसा…। “ सीईईईईईईईईईईईई” कि आवाज़ केँ संग किरण केँ चहरे पऱ ख़ुसी औऱ कामुकता सें भरी हुइ मुस्कान फेल गई किरण केँ होंठ काँपने लगे……
औऱ कमर हल्के झटके खानेलगी …अपनी बुर केँ मुहाने पऱ विनय केँ लन्ड केँ दहकते हुए सुपाडे कों महसूस करके, किरण एक् दम मदहोश होँ गई…किरण कां हाथ विनय कि पीठ सें सरकता हुआ विनय कि गान्ड पर्र आँ गय़ा…। औऱ उसकी गान्ड कों आगे कि तरफ दबाने लगा ….विनय भि अबहोश मे कहां थां…उसे यह भि पता नहींचल रहा थां कि, उसकी मामीजी उसकी गान्ड कों दबाकर उसका लन्ड अपनी बुर मे लेने कि कोशिस कररही हैं…वोँ मदहोश होकर अपने लन्ड कों किरण कि बुर केँ अंदर घुसाने लगा…। लन्ड कां सुपाडा किरण कि बुर कि दीवारों कों फेलाता हुआ अंदर जानेलगा औऱ कुछ हि पलो मे पूरा कां पूरा लन्ड किरण कि बुर मे समा चुका थां… विनय कों महसूस होँ रहा थां जैसे उसके लन्ड कों अंदर सें कोईमसल रहा हैं… किरण कि बुर कि दीवारें विनय केँ लन्ड पर्र कस गई… मस्ती मे आकर किरण कि बुर विनय केँ लन्ड कों कस्ति तोँ कभी ढीला छोड़ती…। किरण सें अब रुका नहींजा रहा थां किरण नें अपने काँपते होंठो कों अपनी दाँतों मे भींचा….औऱ अपनीकमर कों आगे कि तरफपुश करतेहुए, विनय केँ लन्ड कों जड तक अपनी बुर मे उतार लिया….किरण इसकदर मस्त होँ चुकी थि….कि वोँ अपनीकमर कों झटका खाने सें रोक नाँ पाई….औऱ जैसे हि उसकीकमर नें झटका खाया….तौ विनय कों महसूस हुआ कि, उसके लन्ड नें मैदान छोड़ दिया हैं…विनय कां लन्ड किरण कि बुर केँ अंदर झटके खाने लगा…औऱ उसके लन्ड सें वीर्य कि बोछार निकलकर किरण कि बुर कि दीवारो पर्र गिरने लगी….
किरण नें जब विनय कों अपनी बुर मे झड़ता हुआ महसूस किया, तौ उसकेसर सें वासना कि खुमारी ऐसे उतरी….जैसे कोई काला साया उसके ऊपेर सें हट गय़ा हौ….वोँ मछली कि तरह बेचैनी कररह गई…गुस्से सें उसके नथुने फूल गए….विनय नें उसे बहोत अधिक गर्मकर बीच मज़धार मे हि छोड़ दिया थां…औऱ जैसे हि विनय केँ सर सें वासना कां भूत उतरा….तौ उसकी गान्ड अब फटने कों आँ गई….वोँ एक् दमसहम गय़ा…उसने किरण केँ चेहरे कि तरफ देखा….किरण अभि भि आँखेबंद किएहुए लेटी हुइ थि…विनय धीरे-धीरे-2 पीछेहुआ, तोँ उसका लन्ड जोँ अब सिकुड रहा थां.किरण कि बुर सें बाहर् आँ गय़ा….
विनय नें जल्द सें अपने लन्ड कों शॉर्ट्स केँ अंदर डाला…औऱ बेड सें नीचेउतर कर बाहर् चला गय़ा….विनय केँ जाने केँ बाद किरणबेड पर्र उठकरबैठ गई….”सत्यानाश हौ इस कमीने विनय कां….अगर लन्ड मे जान नहीं थि तोँ क्यूं अपनी मम्मी चुदवाने चलाआया….” किरणउस टाइम बहोत ज्यादा फ्रस्टरेटेड हौ चुकी थि….उसका बस नहींचल रहा थां…नहीं तौ वोँ विनय कों नज़ाने क्याँ-2 कह देती….वोँ एक् दम सें बोखलाई हुईँ सि उठी….औऱ बाथरूम मे चली गई…औऱ वैसे हि शवरऑन करके नीचे खड़ी हौ गई……विनय अपनेरूम मे सहमा सां बैठाहुआ थां….वोँ मामीजी केँ बाथरूम मे जाने कि आवाज़ सुन चुका थां….उसे डर थां कि, जोँ सभी उसने मामीजी केँ संग किया हैं। उसकापता मामीजी कों नां चल गय़ा हौ….फिन बाथरूम कां डोर खुलने औऱ किरण केँ रूम कां डोरबंद होने कि आवाज़ आई तोँ, विनय नें थोड़ी सें राहत कि साँसली….
विनय हालात कां जायज़ा लेने केँ लिए बाहर् आया….औऱ मामीजी केँ रूम केँ डोर केँ पास जाकर खड़ा हौ गय़ा….”आप् तौ स्वयं पानी निकाल करचला गय़ा….औऱ यहा मेरी बुर मे आगलगा दि….साला हरामी….चोदने कां दम नहीं थां.तौ क्यूं लन्ड घुसाया…” अंदर सें मामीजी केँ यह शब्दसुन कर विनय कि हालत पतली होँ गई….तोँ क्याँ मामीजी कों सभीकुछ पता हैं….औऱ क्याँ मामीजी सभीकुछ जानती हैं…औऱ वोँ जानबुझ करयहसभी कररही थि….ऐसे हि कई सावलो नें विनय केँ दिमाग़ मे कोहराम मचा दिया…वोँ दबे पाँव वापिस अपनेरूम मे आँ गय़ा….विनय केँ तोँ ख़ुसी केँ मारे पांव ज़मीन पऱ नहींलग रहे थि….चाहे मामीजी गुस्से मे थि….पर्र विनययह जानकर खुश थां कि, मामीजी भि उससे चुदवाने केँ लिए बेकरार हैं….
पऱ वोँ नादान नहीं जानता थां कि, चोटखाई हुईँ नागिन औऱ काम सें बहाल महिला कितनी ख़तरनाक होँ जाया करती हैं….वोँ दिन किसीतरह गुज़रा….अगले दिन वशाली रोज कि तरह रिंकी केँ घऱचली गई….
….इधरआज अंजू कों भि किरण केँ घऱ मे होने केँ कारणकोई मोका नहींमिल रहा थां….वोँ भि अपनाकाम निपटा कर वापिस जा चुकी थि….अंजू केँ जाने केँ बाद किरण नें गेटबंद किया औऱ शवर लेने केँ लिए बाथरूम मे चली गई….जब वोँ शवर लेकर अपनेरूम मे पहुँची तोँ, उसने देखा कि विनय पहले सें हि बेड पर्र लेटाहुआ थां….
too be continued.
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नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -13
विनय कों देखते हि, कल केँ सारी घटना उसके आँखो केँ सामने सें गुजर गई…। “विनय तुम् यहा क्याँ कररहे होँ….जाओ अपनेरूम मे जाकरसो जाओ….” विनय किरण केँ मुँह सें ऐसे रूखे शब्दसुन कर एक् दम हैरान होँ गय़ा….”मामीजी वोँ मे…” किरण विनय कि बातसुन कर एक् दम खीजते हुए बोलि….”क्याँ मे वोँ मे लगारखा हैं… चलजा अपनेरूम मे….”
विनय: मामीजी मे यहीसो जाउ…आपके पास….
किरण: (गुस्से सें विनय कि तरफ देखते हुए….) तुम को एक् बार मे समझ नहीं आता…चल जा अपने कमरे मे……
विनयउठ कर खड़ाहुआ औऱ किरण केँ पास जाकर उससे लिपटते हुए बोला….”प्लीज़ मामीजी यही सोनेदो नां…” किरण पहले सें बहोत अधिक गुस्से मे थि….उसने विनय कों अपने सें अलग किया औऱ एक् थप्पड़ उसकेगाल पऱ झाड़ दिया…विनय एक् दम भौचक्का सां किरण कि तरफ देखता रह गय़ा….”सुना नहीं तुमने जाओयहा सें……”
विनय भौचक्का सां वहा खड़ा रहा….औऱ फिन सूबकते हुए किरण केँ रूम सें बाहर् आँ गय़ा…वोँ सीधा अपनेरूम मे चला गय़ा…औऱ बेड पर्र लेटकर रोने लगा…उसे समझ मे नहीं आँ रहा थां कि, आख़िर मामीजी कों अचानक सें हौ क्याँ गय़ा हैं….वोँ अपनेरूम कों अंदर सें लॉक करकेबेड पऱ वैसे हि लेटा रोता रहा….औऱ मन हि मन मामीजी कों कोस्ता भि रहा…अब विनय नें सोच लिया थां कि, वोँ आगे सें हमेशा मामीजी सें दूसरी बनाकर रखे गा….तभी उसके दिमाग़ रिंकी केँ संग हुईँ वोँ घटनायाद आँ गई। जब रिंकी भि विनय केँ इसतरह जल्दझड जाने सें परेशान हौ गई थि…शायद यही कारण थां कि, मामीजी उससेखुश नहीं थि….यही-2 सभी सोचते-2 विनय कि आँखलग गई।
साम केँ लगभग 5 बजे विनय केँ रूम केँ डोर पऱ नॉक हुई, तौ विनय नें उठकरडोर खोला, तौ देखा सामने वशाली खड़ी थि……”चाइ पीलो बाहर् आकर….माँ बुलारही हैं…” यहकहकर वशाली वापिस चली गई….विनय अपनेरूम सें निकलकर बाथरूम कि तरफ जाने लगा…दूसरी तरफ किरण भि तब सें बहोत पेरशन थि… उसेडर थां कि, कही विनय वोँ सभीकुछ किसी कों बता नाँ दे…जौउन सभी केँ बीचहुआ हैं….विनय फ्रेश होकर बाथरूम सें बाहर् आया….औऱ हॉल मे आकरचाइ पीनेलगा। दिनइसी तरह गुजरने लगे….उस घटना कों हुए 8 दिनबीत चुके थें…इस बीच विनय विद्यालय मे अंजू केँ घऱतीन बारजा चुका थां…उसके लन्ड केँ लिए तोँ एक् बुर हमेशा सजधजकर थि….
विनयउस दिन केँ बाद सें अक्सर दोपहर कों अपनी मासी शीतल केँ घऱचला जाया करता थां…औऱ साम कों हि घऱ वापिस आता थां….इधर किरण पर्र एक् बारफिन सें वासना केँ खुमारी चढ़नी शुरुआत होँ गई थि….उसदिन कि घटना केँ बाद9वे दिन केँ बात हैं। उसदिन भि वशाली रिंकी केँ घऱ गई हुइ थि….औऱ विनय अपनी मस्सी केँ शीतल केँ घऱ पर्र गय़ा हुआ थां…अंजू नें घऱ कां साराकाम किरण केँ संगमिल कर जल्द निपटा लिया थां…अंजू नीचे चटाई पर्र बैठी हुई थि….औऱ किरण सोफे पऱ पीठ टिकाए हुए बैठी हुईँ थि….”अंजू एक् बात पुच्छू….” किरण नें अंजू कि तरफ देखते हुएकहा….
अंजू:जी दिदी पूछिए नां….
किरण: अंजूजब तुम् अपने भान्जे केँ संग वोँ सभी करती थि…तोँ कभीऐसा हुआ थां कि, उसने तुम्हारे अंदर डाला हौ औऱ वोँ जल्दझड गय़ा होँ….
अंजू:हां दिदी पहले -2 एक् दोबार हुआ थां….
किरण:फिन तुमने क्याँ किया….तुम्हे तौ बहोत क्रोध आया होगा….
अंजू:हां दिदी आया तोँ थां….पऱ इसमेउस बेचारे कां भला किया कसूर…। वोँ टाइम नादान थां…जौ लड़के जवानी कि तरफ बढ़ारहे हौ…उनमे जोशहद सें अधिक होता हैं। इसलिये कईबार जल्द मैदान भि छोड़ देते हैं….
किरण:फिन तुम् किया करती थि….?
अंजू: दिदी फिन मेने उसकासंग देना शुरुआत किया…उसकी सहायता करने लगी…उसको समझाया कि यहसभी केसे होता हैं….औऱ किया….
किरण:फिन तुम्हारा कामबना क्याँ उससे…?
अंजू: औऱ नहीं तौ क्याँ…वक्त देना पड़ता हैं….आज कल केँ लौन्डो कों….
किरण: ह्म्म्म्म शायद तुम् सहीकह रही होँ…
अंजू: वैसे दिदी आप् यहसभी क्यूं पूछरही हैं….?
किरना: ऐसे हि पूछा लिया….
अंजू: अच्छा दिदी अब मे चलती हूं….हां दिदी मे कल औऱ परसो नहीं आँ पाउन्गी.
किरण:ठीक हैं….
अंजू केँ जाने केँ बाद किरण नें गेटबंद किया….औऱ अपनेरूम मे आकरबेड पर्र लेट गई….अबउसे अपनेकिए पऱ पछतावा होनेलगा थां…वोँ लेटे -2 हिसाब लगाने लगी कि, विनय केँ विद्यालय शुरुआत होने मे सिर्फ़ 12 दिनबचे हैं….विद्यालय शुरुआत होने केँ बादउसे बाद मे ऐसा मोका नहीं मिलेगा….ममता भि तोँ वापिस आजाएगी तब… पऱ उसके दिमाग़ मे यहबात भि घूमरही थि कि, उसदिन केँ बाद सें विनय उसके लगभग आनां तोँ दूर उसकीतरफ देखता भि नहीं हैं….अब उसे दोबारा शुरुआत सें शुरुआत कर पड़ेगा….उस दिन भि विनयसाम तक मासी शीतल केँ घऱ रहा….साम कों 5 बजे वोँ शीतल केँ घऱ सें निकला औऱ विद्यालय कि तरफचल पड़ा….अंजू कों पहले सें हि खबर थि कि, विनय 5 बजे उसकेपास आएगा….इसलिये वोँ गेट केँ पास हि खड़ी थि….
वहा जाकर विनय नें अपने लन्ड कि गरमी कों अंजू कि बुर मे उडेला औऱ फिनघऱ वापिस आँ गय़ा…किरण नें डोरबेल सुनकर गेट खोला तोँ सामने विनय कों देखकर किरण नें मुस्कराते हुए उसकेगाल कों प्रेम सें सहलाते हुए कहा….”आँ गय़ा मेरा राजा। “ विनय तौ अब मामीजी कों देखकर गुस्से सें पागल होँ जाता थां….उसने मामीजी कां हाथझटक दिया…औऱ बिनाकुछ बोले अपनेरूम कि तरफचला गय़ा…किरण नें गेटबंद किया… औऱ रसोई कि तरफ जातेहुए सोचने लगी कि, विनय अभि भि उससे बहोत नाराज़ हैं… औऱ उसको मनाना इतना भि आसान नहीं होगा….
किरण रसोई मे जाकररात केँ खाने कि तैयारी करने लगी….तभी उसकेफोन केँ रिंग बजी…जोँ उसके बेडरूम मे पड़ा थां….किरण काम छोड़ करके अपनेरूम मे गई…औऱफोन उठाकर देखा तौ उसके मायके सें मोबाइल थां….किरण नें कॉलआई उठाई कि तौ दूसरी तरफ सें ममता कि आवाज़ आई….”हेलो दिदी केसे हौ आप्….?”
किरण: मे ठीक हूं….तुम् कैसी होँ….?
ममता: मे भि ठीक हूं….वशाली औऱ विनय दोनो केसे हैं….?
किरण: वोँ दोनो भि ठीक हैं….तुम् सुनोवहा घऱ पऱ सभीठीक हैं नाँ….?
ममता:हां दिदी सभीठीक हैं….दिदी भैया कि मॅरेज कि डेट चेंज होँ गई हैं….
किरण: क्याँ…? कब पऱ डेट क्यूं चेंज कि अब….?
ममता: दिदी वोँ लड़की वाले जल्द विवाह करने केँ लिएकह रहे थि…इसीलिए डटे चेंजकर दि हैं….जुलाइ कि 12 कों विवाह हैं….
किरण: 12 कों इतनी जल्द…सिर्फ़ 14 दिनबचे हैं ममता….इतनी जल्दसभी केसे अरेंज करेंगे….
ममता: वोँ सभी भि होँ जाएगा दिदी…कल मे माँ बापू औऱ भीयासभी आँ रहे हैं वहा पर्र…अब विवाह भि तौ वही सें करनी हैं….तोँ तैयारी अभि सें शुरुआत करनी पड़ेगी….
किरण:ठीक हैं…। मे तुम्हारे जीजाजी कों बताती हूं….
ममता: नहीं दिदी उसकेकोई ज़रूरत नहीं…बापू नें मोबाइल कर दिया थां जीजाजी कों…औऱ यह भि आँ रहे हैं कल आब्रॅड सें वापिस….
किरण:कॉन तुम्हारे हज़्बेंड….
ममता:हां दिदी…
किरण:तभी तूँ इतनाचहक रही हैं….अच्छा ठीक हैं फिन….
ममता नें फिन थोड़ी देर औऱ बात कि, औऱ मोबाइल कटकर दिया…किरण एक् दम सें परेशान होँ गई….अबकल उसके मायके सें सभी आनने वाले थि….इसका मतलबअब किरणचाह कर भि कुछ नहींकर सकती थि….खैर उसदिन औऱ कोई ख़ास्स बात नां हुई….अगली सुभह विनय वशाली किरण औऱ शीतलसभी मिलकर आने वाले मेहमानो केँ लिए रहने कां इंतज़ाम करने लगी….ऊपेर तीनरूम थें….जिसमे सिर्फ़ एक् मे हि बेड औऱ फर्निचर थां…बाकी दो रूम्स खाली थें….उस रूम मे सॉफ पलंग बिछाकर रोज मारहा कि ज़रूरतों कां समानरख दिया गय़ा थां….बाकी रूम्स केँ सफाई भि कर दि गई थि।
तयहुआ थां कि, ऊपेर वालेरूम मे जिसमे बेडलगा थां…उसमे किरण केँ माँ बापू रहेंगे….नीचे ममता कां स्वयं कां रूम थां हि…वोँ अपने पति केँ संगवही रहेगी…औऱ विनय केँ रूम मे उसका भइया औऱ उसका पति अजय दोनो सोया करेंगे… औऱ किरण केँ रूम मे वोँ वशाली औऱ विनय सोया करेंगे….क्योंकि कि किरण चाहती थि कि, कम सें कमरात कों उसे विनय केँ पास रहने कां मोका मिले…जिससे वोँ कुछकर सके… दोपहर 1 बजे तक किरण नें अंजू औऱ शीतल कि सहायता सें साराकाम निपटा लिया थां… किरण नें आज अंजू कों मोबाइल करके बुला लिया थां….क्योंकि आज अंजू नें नहीं आनां थां। अंजू भि साराकाम निपटा कर वापिस चली गई….
दोपहर केँ 2 बजे किरण केँ मायके सें सबलोग वहा आँ पहुँचे…ममता केँ संग उसका हज़्बेंड भि आयाहुआ थां…किरण नें मेहमानो कि खातिरदारी कि, औऱ फिन खाने पीने केँ बादसब लोगहाल मे बैठकर बातें करनेलगे…। “पिताजी ऊपेर आपकेलिए रूम रेडीकर दिया हैं…आप् औऱ मां ऊपेर जाकरअब आरामकर लीजिए…” किरण नें अपने बापू सें कहा ….”आराम भि कर लेते हैं बेटा….पहले तुम्हारे संग थोड़ी बातचीत होँ जाए….”
ममता: आप् बैठकर बातें करिए पिताजी….मे औऱ विनय ऊपेर आपके बॅग्स रखकरआते हैं….
ममता नें विनय कि ओरदेख कर कहा….औऱ फिन खड़ी होकर विनय कों आकर एक् बॅग उठाने कों कहा….औऱ स्वयं दोबॅग उठाकर ऊपेर जाने लगी….विनय भि उसके पीछेबॅग उठाकर ऊपेर आँ गय़ा….ममता नें रूम कां डोर खोला औऱ दोनो बॅग्स अंदररख दिए….विनय नें भि बॅगरूम मे रखा…तौ ममता नें उसकीतरफ बढ़ते हुएउसे अपनी बाहों मे भर लिया….”केसे हैं तुँ….” ममता नें विनय केँ गालो पऱ हाथ रखतेहुए कहा….”मे ठीक हूं आप् कैसी होँ…?” विनय नें ममता कि आँखो मे झाँकते हुए कहा….”मे भि ठीक हूं….तोँ तुम्हे मेरीयाद नहींआती थि…” ममता नें विनय केँ
होंठो कों हल्का सां चूमते हुएकहा….
विनय:आती थि….
ममता: तोँ फिन मुझे मोबाइल क्यूं नहीं करता थां….
विनय:ऐसे हि….
ममता: अच्छा वोँ सभी छोड़ औऱ मेरीबात ध्यान सें सुन….तेरे मौसाजी मेरेसंग आएहुए हैं…एक् महीने केँ लिएयहा रुकने वाले हैं….विनय इस दौरान तुम् मुझसे थोडा दूर हि रहना….समझ गए नाँ मे क्याँ कहरही हूं…
विनय:जी समझ गय़ा….
ममता: मुहहा मेरा शोना….तुम् सच मे अब समझदार होँ गय़ा हैं….
ममता नें फिन सें विनय केँ होंठो पर्र हल्का सां किस करतेहुए कहा…औऱ फिन विनय कां हाथ पकड़कर उसे सीढ़ियों केँ पास लें आई….वहा सें अगरकोई ऊपेरआता तौ सीढ़ियाँ चढ़ने कि आवाज़ आँ जाती…सीढ़ियों केँ पासआने केँ बाद ममता विनय कि तरफ पलटी….औऱ उसकीतरफ घूमते हुएउसे बाहों मे भर लिया…औऱ अपने मुलायम होंठो कों विनय केँ होंठो सें लगा दिया…दोनो केँ होंठआपस मे घूतम घूता होँ गए….दोनो पागलो कि तरह एक् दूसरे केँ होंठो कों सक करने लगे….विनय नें अपनी बाहों कों ममता कि पीठ पर्र कसरखा थां….
ममता नें अपने दोनोहाथ पीछे लेजाते हुए विनय केँ हाथो कों पकड़ा औऱ फिन उसके हाथो कों नीचे लेजाते हुए, अपनी सलवार केँ ऊपेर सें अपने चुतड़ों पर्र रखकर अपने हाथो सें दबाने लगी…ममता कां इशारा समझते हि, विनय नें स्वयं हि ममता केँ चुतड़ों कों सलवार केँ ऊपेर सें दबाना शुरुआत कर दिया….ममता केँ पूरे शरीर मे मस्ती कि लहर दौड़ गई….तभी नीचे सें किरण नें ममता कों आवाज़ लगाई, तोँ दोनो एक् दूसरे सें अलगहुए, ममता नें मुस्कराते हुए विनय कि आँखो मे देखा….”याद हैं नाँ मेने क्याँ कहा हैं….?” तोँ विनय नें हां मे सर हिला दिया….
औऱ फिन दोनो नीचे आँ गए….फिन सभीलोग जैसे-2 अरेंज किया गय़ा थां….रूम्स मे चले गए….वोँ सभीलोग थकेहुए थि…इसलिये रूम मे बेड पर्र लेटते हि सो गए…विनय भि शीतल केँ घऱ जाने केँ लिए जैसे हि बाहर् जानेलगा, तौ किरण नें उसे आवाज़ देकर रोका….”विनय कहां जारहे हौ…? “ विनय नें पलटकर किरण कि तरफ देखा औऱ सर झुकाते हुए बोला…”मासी केँ घऱजारहा हूं….” किरण उसकीबात सुनकर खीज गई….”क्याँ रखा हैं वहा पर्र….यही नहींसो सकते क्याँ….?’ विनय भि थोडा सां उखड़ गय़ा…औऱ थोडा सां उखड़े हुए अंदाज़ मे बोला….”मे जारहा हूं…” औऱ यह कहतेहुए विनय बिनाकुछ बोलेघऱ सें बाहर् निकल गय़ा….
किरणवही अपनी क़िस्मत कों कोस्ती हुईँ रह गई….वोँ अपनेकिए पर्र अब बहोत अधिक पछतारही थि….वोँ दुःखी सि होकर अपनेरूम मे आकरलेट गई….
किरण कों कब नींद आई….उसे पता नहीं चला….साम केँ 5 बजे किरण कों ममता नें जगाया…औऱ सभी केँ लिएचाइ बनाने केँ लिए कहा….किरण उठकर मुँहहाथ धोनेचली गई….विनय भि घऱ वापिस आँ चुका थां…सभी एक् संगबैठ करचाइ पीरहे थें.तभी किरण कि माँ नें चाइ पीतेहुए किरण सें कहा…”बेटी यहाकही पऱ नीम कां पेड़लगा हैं….” किरण नें अपनी मां कि तरफ देखा औऱ बोलीं….”क्यूं क्याँ हुआ….?”
“वोँ बेटा तुम्हारे पिताजी कों सुभहनीम कि पत्तियों कां रस निकाल कर पीने केँ लिए देते हैं। इनके ब्लड मे थोड़ी इन्फेक्षन हैं, तोँ डॉक्टर नें सहला दि थि….
किरण: मेरी नज़र मे तोँ कही नहीं हैं….एक् मिनट रूको विनय तुमने कही देखा हैं आसपास नीम कां पेड़….?
विनय: हमारे विद्यालय मे हैं….
किरण:ठीक हैं….वहा सें थोड़ी सि पत्तियाँ तोड़कर लें आँ….
विनय:जी….
विनय नें चाइ ख़तम कि….औऱ जैसे हि वोँ बाहर् कि तरफ जानेलगा तोँ, किरण नें उसे आवाज़ देकररोक लिया….”अर्रे रुक विनय मे भि संग मे चलती हूं…वोँ अंजूबोल कर गई थि कि, कल वोँ नहीं आएगी….उससे भि कह दूँगी कि, घऱ पऱ मेहमान आएहुए हैं तौ, कल भि आँ जाए….”यह कहतेहुए किरण सोफे सें उठी औऱ विनय केँ संगघऱ सें बाहर् आँ गई….दरअसल वोँ विनय सें अकेले मे बात करके अपने दोनो केँ बीच केँ तनाव कों कम करना चाहती थि….घऱ पर्र विनय तौ उसके मुँह हि नहीं लगता… इसलिये उसकेपास यह अच्छा मोका थां….दोनो घऱ सें बाहर् निकलकर विद्यालय कि तरफ जानेलगी….
किरण: विनय तुम् उसदिन कि बात सें मुझसे नाराज़ होँ…? (किरण नें सामने कि औऱ देखकर चलतेहुए कहा….)
विनय: (एक् दम चोन्कते हुए….) न् नहीं तौ….
किरण:फिन तुम् मुझसे बात क्यूं नहीं करते…मुझसे दूर क्यूं भागते होँ…। क्याँ मे इतनी बुरी हूं….क्याँ मे हमेशा तुम्हे डाँटती रहती हूं….
विनय: नहीं….
किरण: मुझेपता हैं तुम् उसदिन कि बात सें मुझसे नाराज़ हौ….बेटा उसदिन मे बहोत अधिक अपसेट थि….प्लीज़ मुझे क्षमा कर दो….उसदिन तोँ मुझेपता चला थां कि, तेरे मामाजी जी कि विवाह इतनी जल्दकर रहे हैं….
किरण नें अपने भइया कां विवाह कां बहाने बना दिया….किरण इसबात सें अंज़ान थि कि, उसदिन वोँ अपने कमरे मे बैठी हुइ विनय कों कोसरही थि….वोँ सारीबात विनय नें सुनली थि….किरण अभि तक मन मे यही सोचे बैठे थि…किउस दिन जौ भि कुछहुआ, उसके बारे मे विनय सोचता होगा कि, मे उस टाइम गहरी नींद मे सोरही थि….पर्र वोँ यह नहीं जानती थि कि, विनय उसकेदिल केँ अंदर छुपेहुए राज़ कों जान चुका हैं….
किरण: अपनी मामीजी कों क्षमा नहीं करोगे….देखो मे कान पकड़कर माफी मांगती हूं। आगे सें मे तुम् पर्र कभीहाथ नहीं उठाउंगी….औऱ नां हि कभी किसी भि बात केँ लिए क्रोध करूँगी….चाहे तुम् जौ भि करो….
किरण नें अपने कानो कों पकड़ते हुए कहा….विनय चुप-चाप सर झुकाए हुए चलतारहा। दोनो थोड़ी देरबाद विद्यालय केँ बाहर् पहुँच गए…जैसे हि वोँ दोनो विद्यालय केँ गेट केँ बाहर् पहुँचे तौ, देखा कि अंजू विद्यालय केँ छोटे वालेगेट कों लॉककर रही थि… जैसे हि उसकी नज़र किरण औऱ विनय पर्र पड़ी, तौ वोँ मुस्कराते हुए बोलीं…। “दिदी आप् कहीजा रहे होँ…?’ किरण नें मुस्कराते हुए कहा….”नहीं जा नहींरहे तुम्हारे पासआए थें….”
अंजू: मेरेपास दिदी कहिए क्याँ काम थां….
किरण: वोँ विद्यालय केँ अंदरनीम कां पेड़ हैं नाँ….हमें कुछ पत्तियाँ चाहिए थि…
अंजू:हां दिदी हैं….(अंजू नें जल्द सें गेट कां लॉक खोला….) दिदी आप् अंदर जाकर पत्तियाँ तोड़ लीजिए….मे दुकान पर्र समान लानेजा रही हैं….10 मिनट मे वापिस आती हूं….
किरण:ठीक हैं….जल्द आनां….घऱ पऱ मेहमान आएहुए हैं…
अंजू: दिदी 10 मिनट मे आई…आप् अंदर तोँ चलिए….
अंजू दुकान केँ लिएचली गई…किरण औऱ विनय दोनो विद्यालय केँ अंदर आँ गए…। “कहां हैं वोँ नीम कां पेड़यहा दिखाई तोँ नहींदे रहा….” किरण नें चारोतरफ नज़र दौड़ते हुए कहा…”यहा नहीं वोँ बिल्डिंग केँ पीछे हैं….” विनय नें विद्यालय कि बिल्डिंग केँ पीछे कि तरफ इशारा करतेहुए कहा….जिस तरफ अंजू कां रूम थां… दोनो बिल्डिंग केँ पीछे कि तरफ जाने लगे…बिल्डिंग केँ पीछे एक् तरफ अंजू कां रूम थां। औऱ दूसरी बहोत खाली स्थान थि….जहा पऱ वोँ नीम कां पेड़ थां…वहा कई औऱ पैधो कां झुंड भि थां….वहा पीछेकोई आता जाता नहीं थां…इसीलिए वहा पऱ काफ़ी झाड़ियाँ उगी हुईँ थि…विनय वहा पर्र जाते हि पेड़ पर्र चढ़ गय़ा…पेड़ अधिक उँचा नहीं थां…विनय नें जल्द-2 पेड़ कि छोटी-2 डालिया तोड़ी औऱ नीचे फेंकने लगा…किरण नें डालियों कों इकट्ठा किया….औऱ एक् साइड मे रखतेहुए बोलीं “विनयबस कर इतनी बहोत हैं….चल नीचे आँ जा….
विनय मामीजी कि आवाज़ सुनकर रुक गय़ा…औऱ नीचेआने लगा…तभी किरण नें अपना पहला दाँव खेला….वोँ झाड़ियों कि तरफ बढ़ी….औऱ नीम केँ पेड़ कि तरफफेस करके खड़ी होँ गई…उसने अपनी कमीज़ केँ पल्लों केँ नीचेहाथ डाला औऱ अपनी पाजामा औऱ पैंटी एक् संग सरकाते हुए अपनी जाँघो तक उतार दि….औऱफिन नीचेबैठ गई…। जैसे हि विनय नीचे उतरा, तौ उसकी नज़र मामीजी पऱ पड़ी….जोँ नीचे पैरो केँ बल बैठेहुए मूतरही थि….उसकी बुर सें निकलती मोटीमूत कि धारदेख कर विनय कां दिलधक करकेरह गय़ा…उसने एक् लम्हा केँ लिए अपनी मामीजी कि जाँघो केँ बीच झाँकती हुईँ बुर पऱ मारी…औऱ फिनआगे कि तरफ निकल गय़ा….किरण मन हि मन मुस्कराने लगी….पेशाब करने केँ बाद किरणउठी औऱ झाड़ियों सें निकलकर बाहर् आई तौ, उसने देखा कि, विनय डालियों कों इकट्ठा करके खड़ा थां….दोनो विद्यालय केँ गेट तक आए, तौ अंजू भि दुकान सें समान लेकर वापिस आँ गई….
अंजू नें किरण कों चाइ केँ लिए रोका….पऱ किरण नें मनाकर दिया….औऱ विनय केँ संग वोँ घऱ वापिस जाने लगी….”विनय तूँ अभि तक नाराज़ हैं मुझसे….” किरण नें विनय केँ सर पर्र हाथ फेरते हुए कहा….”नहीं मे नाराज़ नहीं हूं…” विनय नें किरण कां हाथ अपनेसर सें हटाते हुए कहा….”नाराज़ नहीं हौ तोँ यह क्याँ हैं…हाथ तोँ मेराऐसे हटारहे हौ…जैसे मे तुम्हे छूउंगी औऱ तुम् गंदे हौ जाओगे….किरण सारे रास्ते विनय कों मनाती रही….विनय कां क्रोध भि अबकम होनेलगा थां….”तूँ जब मुझसे बात नहीं करता तौ, मेरादिल किसीकाम मे नहीं लगता…प्लीज़ एक् बार अपनी मामीजी कों क्षमा करदे विनय….देख उसदिन सें पहलेकभी मेने तुम्हे गुस्से मे डांटा भि नहीं थां….मुझे मेरी इतनी सि ग़लती कि इतनी बड़ा सज़ा क्यूं देरहे होँ….”
विनय:ठीक हैं मे अब आप् सें नाराज़ नहीं हूं….
किरण: पक्का नाँ….?
विनय:हां….
किरण: तौ फिन तूँ आज मेरेसंग मेरे कमरे मे सोएगा….?
विनय: क्यूं….?
किरण: नहीं तोँ मे समझूंगी कि तुमने मुझे क्षमा नहीं किया…बोल मेरेसंग सोएगा नाँ…
विनय:जी….
दोनोघऱ पहुँच गए….किरण घऱ पहुँचते हि, रात केँ खाने कि तैयारी मे लग गई….उसकी मां औऱ ममता भि किरण कि सहायता कररही थि…किरण नें चावल बनने केँ लिएगॅस पऱ रखे औऱ ममता कों बोलीं कि, वोँ जल्द सें सब्जी काट लें….वोँ अभि आती हैं….यह कहकर किरण अपनी रसोई सें बाहर् निकली…तोँ उसने देखा कि विनय कों छोड़कर सबलोग हॉल मे बैठेहुए बातें कररहे थें…वोँ विनय कों देखने केँ लिए उसकेरूम मे चली गई….विनय अपनेरूम मे स्टडी टेबल पर्र बैठाहुआ पढ़रहा थां….किरण विनय केँ पास गई….औऱझुक कर विनय केँ गाल पर्र अपने दहक्ते हुए होंठो कों लगा दिया….औऱ 4 सेकेंड तक चलने वाला लंबा चुंबन उसके गालो पर्र जड दिया….”क्याँ हुआ अकेले यहा बैठे हौ….?” किरण नें विनय केँ सर कों अपनी बाहों मे लेतेहुए उसे अपनेपेट सें लगाते हुएकहा….
विनय:कुछ नहींबस वकेशन कां होमे वर्ककर रहा हूं…थोडा सां बचा हैं….
किरण:ठीक हैं…काम पूरा करके बाहर् आँ जानां….
यह कहतेहुए किरण विनय केँ रूम सें बाहर् चली गई…विनय नें 15 मिनट मे अपनाबचा हुआ होमवर्क पूरा किया….औऱ उठकर बाहर् चला आया…जैसे हि वोँ बाहर् आकर वशाली केँ पास बैठा, तोँ वशाली उसकीतरफ देखकर हँसने लगी….”हहा हाहायह कहां सें लगा ली….कॉन हैं वोँ….हमे भि तौ मिलाओ उससे….”सब लोग वशाली कि बातसुन करउन दोनो कि तरफ देखने लगे….”क्याँ हुआहंस क्यूं रही होँ…?” विनय नें वशाली कों हंसते देखा तौ खीजते हुए बोला….तौ विशाली नें विनय कि चिन कों पकड़ उसका लेफ्ट गालसभी कों दिखाते हुए कहा…”यह देखो….लगता हैं अपने विनय बाबू पऱ किसी कां दिल आँ गय़ा हैं….” वशाली कि बातसुन करसभी हँसने लगे….विनय कों समझ तोँ आँ गय़ा थां कि, उसकेगाल पऱ कुछलगा हैं…पर्र क्याँ लगा हैं….यह नहींपता थां…सभी लोग विनय कि तरफदेख करहंस रहे थें….
too be continued.
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नादान लन्ड केँ जलवे - Next part miss mat karna
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