नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -14
वशाली औऱ ममता विनय कों छेड़ते हुए उसकी टाँग खेंचरही थि…उधर किरण भि रसोई मे खड़ी विनय कि तरफदेख कर मुस्करा रही थि…विनय वहा सें उठकर अपनेरूम मे चला आया….विनय कों गुस्से मे रूम कि तरफ जाते देख…किरण भि उसके पीछेचली गई…विनय नें अपनेरूम कि लाइटऑन कि औऱ मिरर केँ सामने खड़े होकर अपनेगाल कों देखने लगा….उसके गाल पऱ किरण कि लिपस्टिक सें बनाहुआ किरण केँ होंठो कां निशान थां…विनय नें खीजते हुएउसे अपनेहाथ सें सॉफ करना शुरुआत कर दिया….गाल सॉफ करने केँ बाद वोँ जैसे हि बाहर् जाने केँ लिए मुड़ा तौ, किरणरूम मे आँ गई…”क्याँ हुआ विनय….इतने गुस्से मे क्यूं होँ….”
विनय: वोँ कुछ नहीं…यहा पर्र आपकी वोँ वोँ लिपस्टिक कां निशान बन गय़ा थां… सभीमुझ पर्र हंसरहे थें…
किरण: तौ क्याँ हुआ…हँसने दोसभी कों…कह देना थां कि मामीजी नें प्रेम दिया हैं….
किरण विनय केँ पास आई….”ला ज़रा दिखा तौ सही निशान तोँ बाकी नहीं हैं.” किरण नें उसकीचिन पकड़कर देखते हुए कहा…औऱ फिन सें उसके गालो पर्र अपने होंठो कों लगा दिया….विनय बिदककर पीछे होँ गय़ा…”क्याँ मामीजी…” किरण हँसते हुए बाहर् चली गई…मामीजी जिसतरह उससे लगाव दिखारही थि….विनय केँ मन मे उसके प्रति जोँ नफ़रत थि….वोँ अब वैसे-2 ख़तम होतीजा रही थि…विनय नें अपनेगाल कों सॉफ किया औऱ बाहर् आँ गय़ा…
रात कों खानां खाने केँ बाद जैसे-2 किरण नें अरेंज किया थां…वैसे-2 सभी लोगो अपने अपने रूम्स मे जाकर सोने लगे….किरण नें वशाली कों पहले अपनेरूम मे सोने केँ लिएभेज दिया…औऱ विनय कों अपनेसंग काम मे लगाए रखा…लगभग 30 मिनटबाद किरण नें विनय कों भि रूम मे जाकर सोने केँ लिए….विनय केँ जानेबाद, किरण नें जल्द-2काम निपटाया औऱ अपनेरूम मे चली गई…रूम मे पहुँच कर उसनेडोर कों अंदर सें लॉक किया….औऱ बेड कि तरफ बढ़ी…
वशाली पहले हि सो चुकी थि…पर्र विनय अभि सोया नहीं थां….”क्याँ हुआ नींद नहीं आँ रही हैं….?” किरण नें लाइटबंद करके, 0 वॉट कां बल्बऑन करतेहुए कहा…फिन किरणबेड पऱ आकर वशाली औऱ विनय दोनो केँ बीच मे लेट गई….उसने विनय कि तरफ करवट बदली, औऱ विनय केँ गाल कों अपनेहाथ सहलाते हुए धीरे-धीरे सें बोलि….”विनय आज केँ बाद तुम् मुझसे कभी नाराज़ नहीं होना….नहीं तौ तुम्हारी मामीजी मर जाएगी…” विनय मामीजी कि बातसुन कर भावुक हौ गय़ा….औऱ किरण कि आँखो मे झाँकते हुए बोला। “प्लीज़ मामीजी जी आप् ऐसीबात मत करो…मे आगे सें कभी भि आपसे नाराज़ नहीं होउंगा…” विनय कि बातसुन कर किरण विनय कि तरफ खिसककर उसके औऱ लगभग होँ गई। औऱ अपनी एक् बाजू कों उसकेपीठ पर्र कसतेहुए, उसकेगाल पर्र अपने दहकते हुए होंठो कों लगा दिया….
विनय कां गाल चूमने केँ बाद किरण पीछे हुइ, तौ विनय कि नज़र मामीजी कि लिपीसटिक लगे होंठो पर्र पड़ी….औऱ उसेसाम वाली घटनायाद आँ गई…विनय जल्द सें अपनीगाल कों सॉफ करनेलगा तौ, किरण हँसने लगी….”क्याँ हुआ…?” किरण नें विनय सें हंसते हुए पूछा….”वोँ साम कों सभी मेरा मज़ाक उड़ारहे थें…” विनय नें किरण केँ आँखो मे देखते हुएकहा…
.”उड़ाने दो मज़ाक…वोँ क्याँ समझेंगे…यह तौ मेरा प्रेम हैं.मेरे शोना केँ लिए…औऱ वैसे भि अबसभी तोँ सो चुके हैं…कॉन देखेगा….” यह कहतेहुए उसनेफिन सें विनय केँ गाल कों चूम लिया…विनय फिन सें अपनेगाल कों हाथ रगड़ते हुएसॉफ करने लगा…दोनो केँ फेस एक् दूसरे केँ बिकुल लगभग थि। किरण नें वासना सें भरी नज़रों सें विनय कि तरफ देखा औऱ फिन विनय कों अपनी बाहों मे कसतेहुए, उसके गालो कों चूमने लगी…उसने विनय केँ गालो कों चूमते हुए हल्का सां उसके होंठो कों भि चूम लिया….
विनय मामीजी कि इस हरक़त सें एक् दम चोंक गय़ा…मामीजी कि गर्म साँसे उसकेफेस पऱ टकराकर उसके जिस्म मे सिहरन पैदाकर रही थि…उसका लन्ड आज भि फिन मामीजी केँ आगोश कि गरमी सें खड़ा होनेलगा थां…शॉर्ट्स मे तनरहे विनय केँ लन्ड कों किरण अपनी साड़ी केँ ऊपेर सें बुर पऱ महसूस करके एक् दम सें रोमांचित हौ गई… उसने अपनी एक् टाँगउठा कर विनय कि कमर पऱ रख ली…औऱ अपनीकमर कों आगे कि तरफ सरकाते हुए, अपनी साड़ी केँ ऊपेर सें बुर कों विनय केँ लन्ड केँ संगसटा दिया… किरण कां हाथअब औऱ तेज़ी सें विनय केँ पीठ पऱ चलरहा थां….औऱ वोँ विनय केँ माथे कों चूमरही थि…तभी दोनो कि नज़रें आपस मे टकराई, तौ मानोकुछ पलों केँ लिएसमय ठहर सां गय़ा होँ…दोनो एक् दूसरे कि उखड़ी हुईँ गर्म सांसो कों अपने चेहरे पऱ महसूस कररहे थें….
पऱ तभी अचानक किरण केँ पीछे लेटी वशाली नें करवट बदली, तोँ दोनो एक् दम सें हड़बड़ा गए…किरण विनय सें अलग होकरपीठ केँ बल सीधीलेट गई…उसका दिल रोमांच औऱ डर केँ मारे जोरो सें धड़करहा थां…वोँ तिरछी नज़रों सें बार शॉर्ट्स मे तनेहुए विनय केँ लन्ड कों देखकर ठंडीआहे भररही थि….पर्र दिल मे यह भि डर थां कि, कही वशाली उठ नाँ जाए…अगर वोँ कुछदेख लेती, तौ लेने केँ देनेपड़ जाते। लगभग वोँ 1 घंटे तक वासना केँ आग मे तड़पती रही…विनय कां भि हाल बुरा थां…नींद उसके आँखो मे भि नहीं थि…वोँ सिर्फ़ आँखेबंद किएहुए लेटाहुआ थां….
किरण नें विनय औऱ वशाली दोनो कि तरफ देखा….दोनो कि आँखें बंद थि…किरण नें समझा कि विनय भि अबसो चुका हैं….किरण कि बुर मे आग बहोत ज्यादा दहकरही थि…किरण नें धीरे-धीरे-2 अपनी साड़ी औऱ पेटिकोट कों अपनीकमर तक ऊपेरउठा लिया। औऱ अपनी वाइटकलर कि पैंटी मे हाथडाल कर अपनी बुर कों अपनी उंगलियों सें मसलने लगी….उसकी हल्की-2 सिसकारियाँ जैसे हि विनय केँ कानो मे पड़ी, तोँ विनय नें जैसे हि आँखेखोल कर देखा, तोँ विनय केँ दिल कि धड़कने थम गई… किरण अपनी पैंटी मे हाथ डालेहुए तेज़ी सें अपनी बुर कों मसलरही थि….
उसके आँखे मस्ती मे बंद हौ चुकी थि….औऱ उसके होंठ कामुकता मे काँपते हुएगजब कां नज़ारा पेशकर रहे थें….
विनय वैसे लेटे -2 अपनी मामीजी कों अपनी बुर मसलते हुए देखता रहा…उसका बस नहींचल रहा थां…नहीं तोँ वोँ मामीजी कां हाथ उसकी कच्छि सें निकाल कर उसकी बुर मे अपना लन्ड डाल देता…पऱ उसका पिछला अनुभाव मामीजी केँ संग बहोत बुरारहा थां.इसीलिए विनय कि कुछ करने कि हिम्मत नहीं हुई….जब उंगलियों सें भि किरण कि बुर कि आग ठंडी नहीं हुइ तौ, वोँ उतावलापन कररह गई….
अगली सुभह विनयजब उठा, तोँ उससमय वोँ रूम मे अकेला थां….किरण रसोई मे सभी केँ लिए ब्रेकफास्ट रेडीकर रही थि…विनय उठकर मामीजी केँ ड्रेसिंग टेबल केँ सामने गय़ा….औऱ अपने गालो पर्र लगे मामीजी केँ होंठो केँ निशान कों सॉफ करके बाहर् आया…औऱ फ्रेश होने केँ लिएचला गय़ा…जब वोँ फ्रेश होकर बाहर् आया तौ किरण डाइनिंग टेबल पर्र ब्रेकफास्ट लगारही थि….उसने विनय कों भि ब्रेकफास्ट करने केँ लिए कहा….तभी बाहर् सें अजय औऱ किरण केँ पिताजी आए…वोँ सुभह-2कही गये थें…”बापू आप् लोग सुभह-2 कहां सें आँ रहे होँ…?” किरण नें अपने पिताजी सें कहा….”वोँ बेटा सामने जौ घर-मकान खाली पड़ा हैं नाँ….उसको एक् 15 दिन पऱ किराए पऱ लिया हैं…उसी कि बात करनेगए थें….”
किरण : पऱ उसकी ज़रूरत हि क्याँ थि….
अजय: मेने भि कहा थां….पऱ बापू माने हि नहीं….
“वोँ बेटी विवाह मे बहोत सारे मेहमान आने वाले हैं….इसलिये किराए पर्र घर-मकान लेँ लिया…नहीं तौ बाद मे। होती….” किरण केँ बापू औऱ अजय भि डाइनिंग टेबल पऱ बैठकर ब्रेकफास्ट करने लगे….आज सभीलोग शॉपिंग केँ लिएजा रहे थि….अंजू सुभह 11 बजेघऱ कां साराकाम निपटा करचली गई थि….ममता नें किरण कों भि संग मे चलने केँ लिएकहा तौ, किरण नें मनाकर दिया….किरण औऱ विनय कों छोड़कर सभी शॉपिंग केँ लिएचले गए…किरण नें कुछ पैसे देकर वशाली कों भि संग मे भेज दिया….ताकि वोँ अपनेलिए कुछ शॉपिंग कर सके….औऱ उसे विनय केँ संगघऱ पर्र अकेले रहने कां मोका मिले….सभी लोगअब साम सें पहले वापिस नहीं आनने वाले थें। सभी केँ जाने केँ बाद किरण नें गेटबंद किया औऱ मूडकर हाल मे वापिस आई तोँ, देखा विनयहॉल मे बैठाहुआ टेलीविज़न देखरहा थां….
वोँ सीधा रसोई मे चली गई….औऱ परात मे आटाडाल कर पानी केँ संग लें आई। उसने परात कों नीचेरखा औऱ आटे मे पानीडाल कर उसके गॉन्ठने केँ लिए नीचे पैरो केँ बलबैठ गई…किरण नें ऑरेंज कलर कि साड़ी पहनी हुइ थि… बैठने सें पहले उसने अपनी साड़ी कां पल्लू कंधे सें हटाकर अपनीकमर मे फँसा लिया थां….औऱ अपनी साड़ी औऱ पेटिकोट कों अपनी जाँघो तक ऊपेरउठा लिया थां… टेलीविज़न देखरहे विनय कां ध्यान जैसे हि किरण पऱ पड़ा…तौ विनय कि आँखे खुली कि खुलीरह गई…किरण कां गोरा शरीरउस ऑरेंज कलर कि साड़ी मे औऱ भि अधिक गोरालग रहा थां….उसकी चुचियाँ उसकेकसे ब्लाउज मे सें बाहर् आने कों प्यास रही थि। औऱ उसकी गोरी-2 मांसल जांघे देख विनय कां कलेजा मुँह कों आँ गय़ा…
साड़ी औऱ पेटिकोट केँ बीच सें किरण कि जाँघो कां अन्द्रुनि भाग काफ़ी अंदर तक दिखाई देरहा थां…विनय बार-2चोर नज़रों सें उसकी जाँघो केँ बीच मे छुपी हुइ बुर कों देखने कि कॉसिश कररहा थां….इस बात कां अहसास किरण कों भि हौ गय़ा थां…वोँ मंद-2 मुस्कराते हुएबीच-2 मे विनय केँ फेस पर्र आईहुए बेसबरी कों देखरही थि….किरण नें आटा गूँथा औऱ फिन खड़ी होकर परात कों रसोई मे रखनेचली गई…किरण रसोई सें निकलकर शवर लेने केँ लिए बाथरूम मे चली गई…विनय उठकर अपनेरूम मे चला गय़ा….किरण शवर लेने केँ बाद अपनेरूम मे आई, औऱ अपने अगले कदमो केँ बारे मे सोचने लगी…तभी उसके दिमाग़ मे कुछआया।
दूसरी तरफ विनय केँ दिमाग़ मे अभि भि कसमस जारी थि….उसे समझ मे नहीं आँ रहा थां कि, मामीजी यहसभी उसकेसंग जानबुझ कररही हैं याँ फिनयह सभी उसके दिमाग़ कां वहम हैं…तभी किरण नें उसे आवाज़ देकर अपनेरूम मे आने केँ लिएकहा… विनय अपने ख्यालों कि दुनिया सें बाहर् आया…औऱ उठकर बाहर् गय़ा…औऱ किरण केँ रूम मे चला गय़ा….जैसे हि विनय किरण केँ रूम मे दाखिल हुआ…विनय केँ पाँववही रुक गए….मामीजी उसकीतरफ पीठकिए हुए खड़ी थि….किरण केँ शरीर पर्र रेडकलर कां पेटिकोट औऱ रेडकलर कि ब्रा थि…अपनी मामीजी कों वोँ पहलीबार इसतरह ब्रा मे खड़ीदेख रहा थां….उसके लन्ड कों मानो जैसे करेंट लगा होँ….विनय कां लन्ड एक् दम सें उछलते हुए खड़ा हौ गय़ा…किरण नें फेस घुमाकर पीछे खड़े विनय कि तरफ देखा, “विनय ज़रा मेरी ब्रा कां हुक्स तोँ लगा दे….मुझसे बंद नहीं हौ रहा…”
यह कहतेहुए किरण नें अपनाफेस आगे कि तरफकर लिया…अपनी मामीजी कि नंगेपीठ औऱ कमरदेख कर विनय कां लन्ड उसके शॉर्ट्स मे जबरदस्त झटके पे झटकेमार रहा थां। वोँ काँपते हुए कदमो सें किरण कि तरफ बढ़ा….औऱ किरण केँ पीछे जाकर खड़ा हौ गय़ा। उसकेहाथ पेर बुरीतरह सें कांपरहे थें….”विनय…” किरण नें विनय कों आवाज़ दि… तौ विनय जैसे सपनो कि दुनिया सें बाहर् आया हौ…विनय ऐसे बोखला गय़ा…”जी जी मामीजी….” उसने अपनी मामीजी कि नंगीपीठ औऱ कमर कि तरफ देखते हुएकहा…। “ब्रा केँ हुकबंद करदे जल्द….” किरण नें आगे कि तरफदेख कर मुस्कुराते हुएकहा… तौ विनय नें अपने काँपरहे हाथो कों उठाया…औऱ धीरे-धीरे-2 किरण केँ ब्रा केँ स्ट्रॅप्स कों पकड़कर हुक लगाने केँ लिए जैसे हि खेंचा तोँ, किरण केँ मुँह सें आहह-आहह निकल गई।
मामीजी केँ मुँह सें अहह सुनते हि, विनय कि हालत औऱ पतली हौ गई….उसने जल्द-2 किरण केँ ब्रा कां हुक लगाया…औऱ मूडकर जैसे हि वापिस जानेलगा तोँ, किरण नें उसे आवाज़ देकररोक लिया…उसने अपनी साड़ी केँ पल्लू सें रेडकलर कि ब्रा मे कसी हुईँ चुचियों कों ढकतेहुए, विनय कि तरफपलट कर देखा….औऱ मुस्कराते हुए बोलि। “विनय मेरा एक् काम करेगा…?” किरण नें विनय कि तरफ बढ़ते हुएकहा… तोँ विनय केँ माथे पर्र पसीना उभर आया…उसके होंठ सूखने लगी….”जी जी कहिए मामीजी….” विनय नें अपने गाले कां थूक गटकते हुएकहा….
किरण: वोँ जौ मिनी आंटी हैं नां रिंकी केँ घऱ केँ बगल मे रहती हैं….?
विनय:जी….
किरण: उसकेपास इस साड़ी कां ब्लाउज लेँ जा….औऱकह देना कि मामीजी नें इसे थोडा टाइट करने केँ लिएकहा हैं…बहोत ढीला हैं….(किरण नें सोफे पर्र बैठते हुएकहा….)
विनय: कहां हैं ब्लाउज….?
किरण: वोँ वहाबेड पर्र पड़ा हैं…
किरण नें अपनी एक् बाजू कों उठाकर कोहनी सें मोड़कर सोफे कि पुष्ट कों पकड़ते हुए कहा….किरण केँ ऐसा करने सें विनय कि नज़रो केँ सामने मामीजी कि एक् साइडसॉफ नज़र आँ रही थि….मामीजी केँ आर्मपिट औऱ कसी हुईँ रेडकलर कि ब्रा कों देखकर विनय कां लन्ड बुरीतरह सें अकड़ गय़ा….
विनयबेड कि तरफ बढ़ा….औऱ वहा पड़ेहुए रेडकलर केँ ब्लाउज कों उठाकर जैसे हि वापिस मुड़ा, तोँ मामीजी नें अपनी जवानी कि कातिल अदाओं सें जैसे विनय केँ दिल पर्र छुरीचला दि होँ….किरण सोफे कि पुष्ट केँ संगअब झुककर करीबअध लेटी हुईँ हालत मे बैठी हुइ थि….उसकी साड़ी कां पल्लू सरककर उसकी जाँघो पर्र आँ चुका थां…किरण केँ गोरे-2रंग कि मोटी चुचियाँ उसकीरेड कलर केँ ब्रा मे सें बाहर् आने कों बेचैनी रही थि….विनय केँ लन्ड मे यहसभी देखकर तेज सरसराहट होनेलगी थि….
विनय जल्द सें किरण केँ रूम सें बाहर् चला गय़ा….विनय केँ जाते हि, किरण नें अपनी चुचियों कों फिन सें पल्लू कों ढक लिया….औऱ सोफे पर्र बैठे -2 मुस्कराने लगी…लगभग 20 मिनटबाद विनयघऱ वापिस आया…औऱ गेटलॉक करके सीधा मामीजी केँ रूम मे चला गय़ा….औऱ ब्लाउज अपनी मामीजी कों दे दिया….किरण खड़ी हुई, औऱ उसकीतरफ पीठ करके ब्लाउज पहनने लगी…ब्लाउज पहनने केँ बाद वोँ विनय कि तरफ मूडी….औऱ फिन प्रेम सें उसकागाल सहलाते हुए बोलि…”थॅंक्स विनय….”
विनय बहोत ज्यादा कन्फ्यूज़्ड होँ गय़ा थां….उसे भले हि इसबात कां अंदाज़ा हौ गय़ा थां कि, मामीजी उसे लाइनदे रही हैं….पर्र फिन भि वोँ स्वयं कुछ करने सें कतरारहा थां…”अब ठीक हैं….यह ब्लाउज अब बिल्कुल मेरी फिटिंग कां हौ गय़ा हैं….विनय तुम्हे पता हैं…मे यह साड़ी विवाह केँ दिन पहनने वाली हूं….इसलिये आजपहन करदेख लिया। नहीं तोँ विवाह केँ दिनपता चलता तौ उस वक्त क्याँ करती…अच्छा अब मे चेंज करकेआती हूं….” यहकहकर किरणरूम सें बाहर् चली गई….विनय वहीबैठ गय़ा। किरण बाथरूम केँ पास जाकर खड़ी होँ…औऱ कुछदेर उसनेवही खड़े होकर अपनेरूम कि तरफ देखा….जब विनय बाहर् नहींआया तोँ, वोँ जल्द सें बाथरूम मे घुस गई….औऱ अपनी साड़ी ब्लओज पेटिकोट ब्रा पैंटी सभीकुछ उतारकर ब्लॅक कलर कि ब्रा औऱ डार्क ब्लूकलर कि प्रिंटेड पैंटी पहन ली….किरण कि पैंटी उसके चुतड़ों केँ हिसाब सें थोड़ी छोटी थि…
वोँ अपने उतारे हुए कपड़ों कों पकड़कर वैसे हि बाहर् आँ गई….औऱ अपनेरूम केँ डोर केँ पास पहुँच कर उसने अंदर झाँका तौ, देखा कि, विनयबेड पर्र लेटाहुआ हैं। वोँ कुछदेर वही रुकी….औऱ फिनऐसे रूम मे दाखिल हुई, जैसेउसे लगरहा हौ कि, उसकेरूम मे औऱ कोई नां होँ…जैसे हि किरणरूम केँ अंदरआई, विनय अपनी मामीजी कों सिर्फ़ ब्रा औऱ पैंटी मे देखकर एक् दम सें चोंक गय़ा…उसकी आँखे खुली कि खुलीरह गई….तभी किरण नें विनय कि तरफ देखा औऱ ऐसे रिएक्ट किया….जैसे वोँ विनय कों देखकर घबरा गई होँ….”ओह्ह्ह्ह विनय तुम् हौ….तुमने तोँ मेरीजान हि निकाल दि…मेने सोचा कि तुम् अपनेरूम चलेगए होगे….” किरण नें होंठो पर्र कातिल मुस्कान लातेहुए कहा….तोँ विनयबेड सें नीचे उतरने लगा….
किरण: नहीं-2 लेटे रहो….वोँ तौ मे डर गई थि…तुम् हि तोँ होँ….औऱ अपने शोना सें क्याँ शरमाना…(किरण नें विनय कि नज़रों कां पीछे करतेहुए कहा…)
विनय कि नज़रें मामीजी कि पैंटी केँ ऊपेर सें बाहर् झाँकरही उसकी कालीघनी झान्टो पऱ अटकी हुईँ थि….उसका लन्ड शॉर्ट्स मे रह-2कर झटकेखा रहा थां…मामीजी नें तौ आज उसके लन्ड पऱ बहोत ज्यादा अत्याचार कर दिया थां….तभी विनय नें मामीजी केँ चेहरे कि तरफ देखा, तोँ उसेपता चला कि, मामीजी नें उसको उसकी झान्टो कि तरफ घुरते हुएदेख लिया हैं…अब गड़बड़ होँ गई हैं…विनय नें अपनासर झुका लिया….“यह पैंटी छोटी हौ गई हैं…ठीक सें स्लिम भि नहीं आँ रही….
किरण नें अलमारी खोली औऱ अपने कपड़े लेकर बाथरूम मे चली गई….थोड़ी देरबाद डोरबेल बजी तोँ किरण नें बाथरूम सें आवाज़ देतेहुए, विनय कों गेट खोलने केँ लिए कहा…जब विनय नें गेट खोला तौ, देखा केँ सामने शीतल अपने बच्चों कों लेकर खड़ी थि….शीतल अंदर आँ गई तोँ विनय नें गेटबंद कर दिया…शीतल औऱ किरण दोनोहॉल मे बैठकर बातें करने लगी….विनय भि वही बैठाहुआ थां….तभी विनय कि नज़र टेबल पऱ पड़ी मेडिसिन कि एक् बॉटल पर्र पड़ी….”मामीजी यह किसकी दवाई हैं.?” विनय नें मेडिसिन कि बॉटल किरण कों दिखाते हुएकहा…
किरण:यह तौ बापू कि दवाई हैं….जा उनकेरूम मे रख आँ…उनकी नींद कि गोलियाँ हैं….(यह कहकर किरण वशाली कों खानां देने केँ लिएरूम मे चली गई….)
विनय बॉटल लेकर ऊपेरचला गय़ा…वोँ टॅब्लेट्स कि बॉटल कों जैसे ऊपेर जाकर टेबल पऱ रखनेलगा तौ, अचानक सें उसके दिमाग़ मे कुछ आया…उसने जल्द सें घबराते हुएउस बॉटल सें दो टॅब्लेट्स निकाल ली….औऱउसे पॉकेट मे डालकर नीचे आँ गय़ा…नीचे आने केँ बाद वोँ सीधा अपनेरूम मे चला गय़ा…उसने अपनेरूम मे वियाग्रा कि टॅब्लेट्स छुपाकर रखी थि….जौ उसको रामू नें खरीदकर दि थि। विनय नें उसमे एक् टॅबलेट निकाली औऱ बाकी कि सब टॅब्लेट्स वही छुपाकर रख दि…विनय जैसे हि बाहर् आया तोँ, किरण अपनेरूम सें निकलरही थि…”विनय तुम्हारे लिए भि खानां लगादूं…” किरण नें मुस्कराते हुएकहा….
विनय:जी मामीजी लगा दीजिए…
किरण रसोई मे अपनेलिए औऱ विनय केँ लिए खानां लेनेचली गई…खानां खाने केँ बाद वोँ काफ़ी देरवहा बैठे किरण सें बातें करती रही…औऱ फिन शीतल औऱ किरण दोनोवही चटाई पऱ हि सो गई….शीतल केँ बच्चे औऱ विनयसभी विनय केँ रूम मे जाकरसो गए….साम केँ 6 बजेडोर बेलबजी तौ, किरण नींद सें उठी… उसने बाहर् जाकरगेट खोला तौ देखा कि सब शॉपिंग करके वापिस आँ चुके थें…आज विनय औऱ किरण दोनो हि काफ़ी देर तक सोतेरहे थें….इसलिये आज वोँ बहोत अधिक फ्रेश महसूस कररहे थें….रात कों खानां खानेबाद सभीलोग धीरे-धीरे-2 अपने कमरो मे जाने लगे…किरण नें विनय औऱ वशाली केँ लिएदूध ग्लास मे निकाला वशाली कों आवाज़ दि…कि वोँ आकर अपनेलिए औऱ विनय केँ लिएदूध लें जाए….
वशाली: माँ मे बाथरूम मे जारही हूं….प्लीज़ आप् विनय कों बोलदो नां…
विनय तोँ जैसेइसी मोके कि तलाश मे बैठाहुआ थां….वोँ जल्द सें रसोई मे गय़ा….”मुझे देदो मामीजी जी….मे लेँ जाता हूं….” किरण नें दोनो ग्लास विनय कों पकड़ाए औऱ विनयदूध केँ दोनो ग्लास बाहर् लेकर आँ गय़ा….फिन वोँ सीधा किरण केँ रूम मे गय़ा…औऱ दोनो ग्लास टेबल पऱ रख दिए…ममता औऱ किरण दोनो रसोई मे बिज़ी थि….बाकी केँ सबलोग अपने -2 रूम्स मे जा चुके थें… विनय नें जल्द सें अपनी पेंट कि पॉकेट सें एक् पूडिया निकाली….जिसमे उसनेउन दोनो टॅब्लेट्स कों पीसकर पाउडर बनारखा थां…उसने उस पाउडर कों एक् ग्लास मे डालकर जल्द सें मिक्स किया औऱ फिन पेंट कि पॉकेट सें वियाग्रा कि टॅबलेट निकाली औऱ दूध केँ संगउसे निगल गय़ा।
उसकेबाद विनयबेड पऱ बैठकर आहिस्ता दूध पीने लगा….दूध ठंडा थां… थोड़ी देरबाद वशाली अंदरआई, तोँ उसनेदूध कां ग्लास उठाया औऱ एक् हि साँस मे पूरा कां पूरा ग्लास ख़तम विनय कि तरफ देखा…”तुमने दूधपी लिया होँ तोँ लाओ मे ग्लास माँ कों देआती हूं….” विनय नें भि ग्लास खाली किया औऱ वशाली कों पकड़ा दिया….वशाली ग्लास लेकर रसोई मे चली गई….औऱफिन ग्लास किरण कों देने केँ बाद वापिस आई औऱ बेड पर्र लेट गई….
10 मिनट मे हि नींद कि गोलयों नें अपनाअसर दिखाना शुरुआत कर दिया थां…औऱ अगले 5 हि मिनट मे वशाली सपनो कि दुनिया मे पहुँच चुकी थि…10 मिनट औऱ बीते तौ, किरणरूम मे आई…विनय अपनी आँखेबंद किएहुए ऐसे लेटाहुआ थां। जैसे कि वोँ गहरी नींद मे सोरहा होँ…पर्र किरण जानती थि कि, विनयजाग रहा हैं…क्योंकि वोँ दोनो दोपहर कों काफ़ी देर तक सोतेरहे थें….औऱ इतनी जल्द नींद आनां मुस्किल थां….किरण नें रूम मे आने केँ बाद….अपनी साड़ी उतारी औऱ ब्लाउज औऱ पेटिकोट उतारकर अलमारी मे रख दिया.औऱ एक् पतला सां साड़ी पेटिकोट औऱ ब्लाउज निकाल करपहन लिया…किरण नें लाइटऑफ कि औऱ 0 वॉट कां बल्बजला करबेड पऱ चढ़ गई…। …
किरण विनय केँ पासआकर लेट गई….उसने विनय केँ सर कों हिलाते हुए धीरे-धीरे-2 सें आवाज़ दि…”विनय सोगए क्याँ….?” तौ विनय नें उसकीबात कां कोई जवाब नहीं दिया…किरण नें करवट बदली औऱ पीठ केँ बल सीधी होकरलेट गई….किरण नें वशाली कि तरफ देखा.जौ उनकीतरफ पीठ करकेसो रही थि…किरण मन हि मनसोच रही थि कि, कितना अच्छा होताअगर वशाली इसरूम मे नाँ होती….तौ आजरात तोँ वोँ अवश्य अपनी बुर कि प्यास कों बुझा हि लेती…किरण वैशाली कि माजूदगी सें सतर्क थि…इसीलिए किरण अपने अंदर छुपी हुई वासना कि आग कों दबाएहुए थि…उसने वशाली कि तरफ मुँह करके करवट बदली औऱ सोने कि कॉसिश करने लगी…वोँ नहीं चाहती थि कि, वोँ कुछऐसा करे कि, उसकी बुर कि आगफिन सें सुलगने लग जाए…औऱ उसे तड़पते हुए सोना पड़े….
too be continued.
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नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -15
किरणइस बात सें अंज़ान थि कि, विनय नें आज केँ लिए क्याँ प्लान कररखा हैं….इधर विनय केँ लन्ड पर्र वियाग्रा कां असरअब उफ्फान पऱ थां…उसका लन्ड शॉर्ट्स कों फाड़कर बाहर् आने केँ लिएमचल रहा थां….पर्र अभि भि उसकी हिम्मत नहीं होँ रही थि कि, वोँ कुछकर सके….वोँ करवट केँ बल लेटाहुआ मामीजी कि पीठ कों देखरहा थां…मामीजी कि साड़ी औऱ पेटिकोट मे उभरी हुई गान्ड कों देखकर उसका लन्ड झटके पे झटकेखा रहा थां… लगभग 20 मिनट तक वोँ ऐसे हि लेटा रहा….किरण कों अब नींदआनी शुरुआत हौ गई थि….उसकी आँखे नींद केँ कारण भारी होनेलगी थि…। किरण भि सपनो कि वादियों मे पहुँच चुकी थि…विनय कि भि अब बर्दास्त सें बाहर् होँ चुका थां। रात केँ लगभग 12 बाज चुके थें….किरण कों अपने चुतड़ों कि दरार मे कुछ गर्म औऱ सख़्त सें चीज़ चुभती हुइ महसूस हुईँ,
जोँ उसकी गान्ड केँ छेद पऱ रगड़खा रही थि….किरण अपनी गान्ड केँ छेद पर्र होँ रही सरसराहट केँ कारणउठ गई थि…जबउसे अहसास हुआ कि, कोई मोटी औऱ सख़्त चीज़ उसके चुतड़ों कि दरार मे आगे पीछे हौ रही हैं, तोँ उसने अपनी आँखे खोली तोँ उसका कलेजा मुँह कों आँ गय़ा….उसकी साड़ी उसके चुतड़ों तक ऊपेरउठी हुईँ थि….उसकी पैंटी उसकी जाँघो तक नीचे उतरी हुइ थि….औऱ विनय कां हाथ उसकी नाभि केँ पास थां…विनय उससे बिकुल चिपका हुआ थां…
उसका लन्ड किरण अपनी गान्ड केँ छेद पऱ रगड़ ख़ाता हुआसॉफ महसूस करपारही थि…जब विनय केँ लन्ड कां गर्म सुपाडा उसकी गान्ड केँ छेद पऱ रगड़ ख़ाता तौ, किरण केँ रोम-2 मे मस्ती कि लहर दौड़ जाती… औऱ उसके चूतड़ आपस मे भिन्चने लगते….
किरण बहोत ज्यादा घबरा गई थि….दूसरी तरफ वशाली पीठ केँ बल लेटीसो रही थें… उसकेदिल मे इसबात कां खोफ़ बैठाहुआ थां कि, कही वशाली नें उठकरउसे औऱ विनय कों इस हालत मे देख लिया तौ, बहोत बड़ी गड़बड़ जौ जाएगी….औऱ नां हि वोँ विनय कों मानाकर सकती थि….क्योंकि अगर वोँ विनय कों रोकती, तौ विनय कों पताचल जाता कि वोँ सो नहींरही थि…इससे पहले कि किरणकुछ सोच पाती…विनय नें अपनाहाथ उसकेपेट सें उठाकर उसकी दोनो जाँघो केँ बीच मे रखतेहुए, उसकी ऊपेर वाली टाँग कों हल्का सां उठाकर आगे कि तरफ सरका दिया…जैसे हि किरण कि ऊपेर वाली टाँग नीचे वाली टाँग सें उतरी, तौ विनय कां लन्ड उसकी गान्ड केँ छेद पर्र रगड़ ख़ाता हुआ लन्ड कां सुपाडा किरण कि बुर कि फांको केँ बीचो-बीच आँ लगा…
अपने भानजे केँ लन्ड केँ सुपाडे कों अपनी बुर केँ छेद पर्र महसूस करते हि, उसकी बुर पिघल उठी….विनय कों अपने लन्ड केँ सुपाडे पर्र मामीजी कि बुर सें रिस्ता हुआ गर्म पानीसॉफ महसूस होँ रहा थां…जिसे महसूस करके विनय एक् दम मदहोश हौ गय़ा थां…उसने एक् हाथ सें अपने लन्ड कों पकड़कर मामीजी कि बुर केँ छेद पर्र सेट करतेहुए आगे कि तरफपुश किया तौ, लन्ड कां सुपाडा मामीजी कि पानी सें लबलबा रही बुर केँ छेद कों फेलाता हुआ अंदरजा घुसा…”सीईईईईईईईईईईईईईईईईईई” किरण नें सिसकते हुएबेड शीट कों अपनी मुट्ठी मे दबोच लिया….अपने भान्जे केँ लन्ड केँ गर्म सुपाडे कों अपनी बुर केँ छेद मे दहकता हुआ महसूस करते हि, किरण कि आँखे मस्ती मे बंद होतीचली गई….उसकी बुर केँ छेद नें विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कों ऐसे दबाना शुरुआत कर दिया… जैसे उसकी बुर विनय केँ लन्ड कों दबाकर अंदर कि ओर लें लेना चाहती होँ…
किरणजिस हालत मे थि….उसे डर थां कि, कही वशाली नाँ उठ जाए…फिन किरण नें सोचा कि शायद विनयउस दिन कि तरह थोड़ी देर अंदर रुकने केँ बाद ढीलापड़ जाएगा.औऱ वोँ स्वयं हि सो जाएगा….तभी उसे अपनी बुर कि दीवारो पऱ विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कि रगड़ महसूस हुई….उसे अपनी बुर कि दीवारें बुरीतरह खुलती हुईँ महसूस हौ रही थि….विनय कां लन्ड धीरे-धीरे-2 मामीजी कि बुर केँ छेद कों फेलाता हुआ अंदर घुसता जारहा थां….किरण कों अपनी बुर पूरीतरह सें भरती हुईँ महसूस होँ रही थि…किरण अपनी मस्ती सें भरीअध खुली आँखो सें वशाली कि तरफदेख रही थि। धीरे-धीरे-2 विनय कां पूरा लन्ड किरण कि बुर कि गहराइयों मे समा गय़ा…”हाइई इस कंज़र कां इतना बड़ा हैं….मेरी पूरी फुद्दि भर दि…काश आज वशाली यहा नाँ होती। तोँ उछल -2 कर तेरे लन्ड कों अपनी बुर मे लेती….” किरण नें मन हि मन सोचा…
विनय केँ लन्ड कां सुपाडा किरण कि बुर कि गहराइयों मे कोहराम मचारहा थां… जिसे किरण अपनी बच्चेदानी कों चूमता हुआ महसूस कररही थि…किरण केँ रोंगटे रोमांच केँ मारे खड़े हौ चुके थें….विनय कुछदेर ऐसे हि रुका रहा…फिन उसने धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड कों बाहर् निकालना शुरुआत किया….तोँ किरण कों फिन सें मस्तकर देने वाली रगड़ अपनी बुर कि दीवारो पऱ महसूस हुई, तौ उसने अपने दाँतों मे तकिये कों दबाकर अपने आप् कों सिसकने सें रोका….औऱ फिन जैसे हि विनय कां लन्ड आधे सें ज़यादा बाहर् आया तोँ, विनय नें फिन सें अपने लन्ड कों अंदर करना शुरुआत कर दिया….किरण अपनी बुर कि दीवारो कों रगड़ते हुए विनय केँ लन्ड कों महसूस करतेहुए मदहोश होतीजा रही थि…1 घस्सा….आहह-आहह दूसरा आहह-आहह उंह सीईईईईईई ओह्ह्ह्ह तीसरा। रुकजा विनयउंह
किरण मस्ती केँ सागर मे गोते खातेहुए, विनय केँ धक्कों कों गिनरही थि….यहसोच कर कि विनयअब झड जाएगा….पऱ किरण क्याँ जाने उसके लाड़ले नें आज उसकी क्याँ हालत करनी हैं…चार ओह हाइईए आजखैर नहीं किरण….उंह सीईईईईईई….” इधर विनयअब धीरे-धीरे-2 अपनी रफ़्तार कों बढ़ाने लगा थां….मामीजी नें किसी बच्चे कों जनम नहीं दिया थां…इसलिये उसकी बुर ममता जितनी हि टाइट थि…विनय भि आज मामीजी केँ स्वर्ग केँ दरवाज़ा पर्र पहुँच कर मदहोश हुआजा रहा थां…मामीजी कि बुर भि अपने भानजे केँ लन्ड पऱ अपने कामरस कां लेपलगा करउसे चिकना बनारही थि। जिससे विनय कां लन्ड मामीजी कि गर्म बुर मे फिसलता हुआ अंदर बाहर् होँ रहा थां.
जब विनय कां पूरा लन्ड किरण कि बुर मे घुसता तोँ, विनय कि जांघे मामीजी केँ चुतड़ों पर्र चिपक जाती….अपने चुतड़ों कों विनय कि जाँघो केँ नीचे दबतेहुए महसूस करके, किरण केँ शरीर मे कपकपि सि दौड़ जाती…किरण अब पूरीतरह गर्म हौ चुकी थि…तभी किरण कि दूसरी तरफ लेटी वशाली नींद मे हिली तोँ, किरण एक् दम सें घबरा गई….औऱ बिना पलके झपकाए वशाली कि तरफ देखती रही…पर्र विनय तोँ जैसे अपने हि धुन मे मगन थां….अब वोँ अपने लन्ड कों सुपाडे तक मामीजी कि बुर सें बाहर् निकाल-2 करपेल रहा थां…वशाली केँ हिलने सें खोफ़ज़ादा किरण धीरे-धीरे-2 उल्टी होने लगी…यह सोचकर कि, विनय कां लन्ड उसकी बुर सें बाहर् आँ जाएगा….पऱ जैसे -2 वोँ पेट केँ बल उल्टी होती गई…वैसे-2 विनय उसके ऊपेरआता गय़ा…
औऱ फिन एक् समयऐसा आया कि, जब विनय अपनी मामीजी केँ ऊपेर लेटाहुआ अपने लन्ड कों उसकी बुर केँ अंदर बाहर् कररहा थां….उसने मामीजी कि बुर मे धक्के मारते हुए किरण कि कमर कों दोनोतरफ सें पकड़ा औऱ उसको ऊपेर उठाने लगा….किरण कों भि मजबूरी मे अपनी गान्ड कों उठाते हुए घुटनो केँ बल होना पड़ा….जैसे हि किरण घुटनो केँ बल होकर डॉगी स्टाइल मे आई…विनय एक् दम सें जोश मे भरउठा….
उसने अपने लन्ड कों पूरी रफ़्तार सें मामीजी कि बुर कि गहराईयो मे उतारना शुरुआत कर दिया…किरण नें भि हालात केँ सामने अपने हथियार डाल दिए…औऱ विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर मे अंदर बाहर् होतेहुए रगड़ खाते महसूस करने लगी….विनय केँ लन्ड कां सुपाडा जब उसकी बुर कि गहराइयों मे जाकर उसकी बच्चेदानी सें टकराता तौ, किरण केँ पूरे जिस्म मस्ती कि लहर दौड़ जाती….
विनय केँ जबरदस्त झटको सें किरण झड़ने केँ लगभग पहुँच गई…उसकी बुर नें अंदर हि अंदर विनय केँ लन्ड कों दबाना शुरुआत कर दिया….किरण कों अपनी बुर मे तेज खीचाव महसूस होने लगा…उसका जिस्म अकड़ने लगा…औऱ फिन झड़ते हुए उसकीकमर नें झटके खाने शुरुआत कर दिए…झड़ते हुए किरण कि बुर नें विनय केँ लन्ड कों अपनी दीवारो मे ऐसा भींचा कि, विनय भि औऱ देर नाँ टिक पाया…औऱ मामीजी कि बुर कि गहराइयों मे अपने वीर्य कि बोछार कर दि….विनय अपने लन्ड कों किरण कि बुर कि गहराइयों मे दबाएहुए, तेज-2 साँसे लेता रहा…फिन जैसे हि विनय कां लन्ड सिकुड कर किरण कि बुर सें बाहर् आया…तोँ किरणबेड पऱ लूड़क गई….
विनय नें अपना शॉर्ट्स जल्द सें उठाया…औऱ पहनकर डोरखोल कर बाहर् चला गय़ा… विनय केँ जाने केँ बाद किरण बदहवास सि उठी औऱ उठकर बैठते हुए अपनी बुर कि तरफ देखने लगी…उसकी बुर केँ झान्टे औऱ फांके दोनो उसके कामरस औऱ विनय केँ वीर्य सें सनी हुईँ थि….उसने अपनी पैंटी कों पकड़ औऱ अपनी बुर औऱ झान्टो पऱ लगेहुए पानी कों सॉफ किया….
तौ यहदेख कर किरण कि आँखे खुली कि खुलीरह गई…कि उसके पैंटी उस पानी सें पूरीतरह भीग गई थि…आज तक उसकी बुर नें भि इतना पानी नहीं फेंका थां…
किरण नें अपनी बुर कों पैंटी सें सॉफ किया…औऱ बेड पऱ लेट गई….विनय भि अपने लन्ड कों सॉफ करके वापिस रूम मे आँ गय़ा….औऱ बेड पर्र लेट गय़ा….विनय दिल हि दिल मे खुशी सें झूमरहा थां…वोँ अपनी मामीजी कि तरफ करवटकिए हुए लेटाहुआ थां…मामीजी कि कमर केँ कटाव कों देखते हुए उसका लन्ड फिन सें उसके शॉर्ट्स मे झटके खानेलगा थां…मामीजी केँ किसीतरह कां विरोध औऱ क्रोध नां करने सें विनय कि हिम्मत अबबढ़ चुकी थि….वोँ फिन सें मामीजी कि तरफ खिसककर मामीजी केँ पीछे सें लिपट गय़ा…जैसे हि किरण कों अपनी साड़ी केँ ऊपेर सें विनय केँ तनेहुए लन्ड कां अहसास हुआ तोँ, किरण एक् दम सें चोंक गई….”हाइए इस कंज़र कां तौ अभि भि कितना सख़्त खड़ा हैं….लगता हैं आजरात यह मुझे सोने नहीं देगा….औऱ अवश्य मुझे मरवाएगा…” हालाकी विनय केँ लन्ड केँ ताँव कों महसूस करके किरण कि बुर भि फडफडाने लगी थि….
पऱ उसेपास मे लेटी हुई वशाली केँ जाग जाने कां डर थां…इसीलिए अब वोँ औऱ रिस्क नहीं लेना चाहती थि….उसने विनय केँ हाथ कों पकड़कर झटक दिया…औऱ धीरे-धीरे सें फुसफुसा.वशाली जाग जाएगी…विनय मन हि मन मुस्करा पड़ा…किरण कहां जानती थि कि, विनय नें उसे नींद कि गोलियाँ देरखी हैं…पऱ वोँ यहबात अपनी मामीजी कों बताने सें डररहा थां…इसीलिए विनय नें भि चुपचाप सो जानां हि सही समझा…अगली सुभहजब विनयउठा तौ, बेड पर्र कोई नहीं थां….विनय नें समय देखा तौ सुभह केँ 9 बज चुके थें….विनय जबउठकर बाहर् आया तोँ, किरणसब फॅमिली मेंबर्ज़ केँ संग बैठी हुई बातें कररही थि…अजय अपनीशॉप पर्र जा चुका थां…किरण केँ बापूकह रहे थें कि, वोँ औऱ उनकी पत्नि आज रिस्तेदारो कों कार्ड बाँटने केँ लिएजा रहे हैं…औऱ ममता अपने पति औऱ भइया केँ संग अपने ससुराल जारही हैं….क्योंकि जब सें ममता कां पति अब्रॉड सें वापिस आया थां…वोँ अपनेघऱ नहीं गय़ा थां….
किरण नें विनय कों फ्रेश होने केँ लिए कहा….जब विनय फ्रेश होकरआया तौ, किरण नें उसका ब्रेकफास्ट टेबल पऱ लगा दिया…विनय ब्रेकफास्ट करने लगा…नाश्ते केँ बाद वोँ वहीबैठ कर टेलीविज़न देखने लगा…ममता उसका हज़्बेंड औऱ उसका भइया ममता कि ससुराल मे जाने कि तैयारी कररहे थें…किरण नें ममता कों वशाली कों भि संग मे लेजाने केँ लिएकहा तौ, ममता खुशी-2मान गई….दोपहर केँ लगभग 1 बजेसभी लोग एक् संगघऱ सें निकल गए…पीछे विनय औऱ किरणघऱ अकेले रह गए….सभी लोगो केँ जानेबाद किरण नें गेटबंद किया औऱ हॉल मे आँ गई….जहाँ पर्र विनय बैठा टेलीविज़न देखरहा थां…किरण नें अपनी साड़ी केँ पल्लू सें अपने चुचियों पऱ आएहुए पसीने कों सॉफ करतेहुए विनय कि तरफ देखा तौ, पाया कि वोँ उसके ब्लाउज केँ ऊपेर सें झाँकरही चुचियों कों तरसरही नज़रों सें देखरहा थां….
किरण: (होंठो पर्र कामुक मुस्कान लातेहुए….) विनय तुम् बहोत खराब होतेजा रहे हौ आजकल….
विनय मामीजी केँ बातसुन कर एक् दम सें हड़बड़ा गय़ा….कल रात जोँ भि हुआ थां…वोँ खामोशी सें हुआ थां….औऱ विनयइस बात केँ लिए बिल्कुल भि सजधजकर नहीं थां कि, जब मामीजी सें आमना सामना होगा तोँ वोँ क्याँ जवाब देगा….विनय ऐसे चोंककर हड़बड़ाया जैसे नींद सें जागा होँ.”जी जी क्याँ…?” किरण विनय कि हालत पऱ मुस्कुराते हुए बोलीं…” क्याँ जीजी तुम् बहोत शैतान होँ गए हौ….कलरात कितना तंग किया मुझे….तुम्हे शरम नहींआई मेरेसंग यहसभी करते हुए…मे तोँ वशाली कि वजह सें तुम्हे कुछकह भि नहींपाई….” यह सुनते हि जैसे विनय कि गान्ड सें हवा निकल गई….उसके चेहरे कां रंग एक् दम सें उड़ गय़ा….वोँ कुछ लम्हा अपनेसर कों झुकाए हुए सहमा सां बैठा रहा….”अब बोलता क्यूं नहीं….” किरण नें विनय कां हाथ पकड़कर हिलाते हुए कहा…तोँ विनय नें किरण केँ चेहरे कि तरफ देखा….
औऱ अपने गाले कां थूक निगलते हुए बोला….”वोँ वोँ आप् मुझे बहोत हसीन लगती होँ…” विनय कि बातसुन कर किरण केँ होंठो पऱ जौ मुस्कान थि वोँ औऱ फेल गई… “अच्छा अच्छी लगती हूं तोँ वोँ सभी करेगा मेरेसंग बोल….” किरण नें झुककर अपने ब्लाउज मे कसी हुई चुचियों कों दिखाते हुए कहा…पऱ विनय मामीजी कि बात कां कोई जवाब नहींदे पाया…”बोल नाँ तुम्हे पता हैं तुमने कितना बड़ा ग़लतकाम किया हैं.? “ अब विनय कि हालत औऱ पतली होँ गई….किरण भि इसबात कों भाँप गई थि कि, विनय बातो कां खेल खेलना नहीं जानता….”हां पता हैं….” विनय नें नीचेसर झुकाए हुए कहा….”पता हैं फिन भि तुमने वोँ ग़लतकाम मेरेसंग किया…?”अब विनय नें भि अपनीबात क्लियर करने कां फैंसला कर लिया थां…”मुझसे कंट्रोल नहीं होता। “ विनय नें आख़िर अपनीदिल कि बातकह हि दि….
किरण:किस पऱ कंट्रोल नहीं होता.क्याँ कंट्रोल नहीं होता तुझसे…?
विनय:जब मे आपको देखता हूं….
किरण: मुझे देखता हैं तोँ क्याँ….अच्छा जैसे तूँ अब मेरे मम्मो कों देखरहा हैं…
किरण नें आग मे औऱ घीडाल कर उसको भड़काया….”अच्छा क्याँ दिल करता हैं.जब तूँ मेरे मम्मो कों देखता हैं….” विनयचुप रहाअब औऱ आगे बोलने कि हिम्मत नहीं हुईँ…”बोल क्याँ दिल करता हैं कि, मामीजी केँ मम्मो कों चुसू….” किरण नें स्वयं हि विनय केँ मन मे छुपी हुइ बात कों कह दिया…औऱ विनय केँ पासआकर सोफे केँ ऊपेर झुकते हुए अपनी चुचियों कों उसके चेहरे केँ लगभग लें गई…”बोल विनय तुम्हारा यहीदिल करता हैं नाँ….कि तुम् मेरे मम्मो कों चूसो….?” विनय नें अपनेसर कों उठाकर मामीजी कि आँखो मे देखा….औऱ फिन घबराते हुएहां मे सर हिला दिया… “अच्छा मेरे मम्मे चूसकर तेरे कलेजे कों ठंडकमिल जाएगी…बोल…जल्द बोल…?” किरण नें इसबार विनय कि चिन कों पकड़कर उसकी आँखो मे देखा…तोँ विनय नें फिन सें अपने गाले कां थूक गटकते हुएहां कह दिया….”हाइए विनय तुँ कितना बेशरम होँ गय़ा हैं….देख रात कों तुँ मुझेतंग मत करना…अगर वशाली देख लेती तौ तेरी क्याँ हालत करनी थि तेरे मामाजी नें तुँ सोच भि नहीं सकता….”
किरण:देख मे तुम्हे अपने मम्मे चुसवा देती हूं…पर्र इससेआगे कुछ करने कि कॉसिश भि मत करना….औऱ नां दोबारा मुझेतंग करना…
यह कहतेहुए किरण नें अपनी साड़ी कां पल्लू नीचे गिरा दिया…औऱ विनय कि जाँघो केँ दोनोतरफ अपने घुटनो कों टिकाते हुए सोफे पऱ बैठ गई…उसने मुस्कराते हुए विनय कि तरफ देखा….औऱ फिन अपने ब्लाउज केँ हुक्स खोलने लगी.विनय यहसभी अपनी हैरानी सें भरी आँखो सें देखते हुए अपनेगले कां थूकबार-2 गटकरहा थां….जैसे जैसे मामीजी केँ ब्लाउज केँ हुक्स खुलरहे थि….वैसे वैसे विनय कि आँखो केँ सामने मामीजी केँ ब्लॅक कलर कि ब्रा मे कसी हुईँ चुचियाँ सामने आतीजा रही थि…विनय कि हालतदेख कर किरण अंदर हि अंदर ख़ुसी सें उछलरही थि.किरण नें अपने ब्लाउज केँ हुक्स खोलकर अपनी ब्रा केँ कप्स कों नीचे सें पकड़कर ऊपेर उठाया तोँ, उसकी चुचियाँ उछलकर ब्रा केँ क़ैद सें बाहर् आँ गई….
विनय अपनी मामीजी कि कसी हुई गुदाज चुचियों औऱ उसके कालेरंग मोटे-2 निपल्स कों आँखे फाडे घुरेजा रहा थां…”अब जल्दकर ऐसे क्याँ देखरहा हैं….” किरण नें अपनी राइट चुचि कों पकड़कर दबाया तौ, उसके चुचि कां निपल औऱ नोकदार बनकर सामने कि ओरउभर आया…विनय नें फिन सें मामीजी कि आँखो मे झाँका तोँ, किरण नें ऐसे बोला जैसे वोँ यहसभी जल्द सें जल्द निपटा लेना चाहती हौ….विनय नें अपने काँपते हुए होंठो कों खोलकर जैसे हि मामीजी केँ निपल्स पर्र रखा…किरण कां जिस्म बुरीतरह सें झंझणा गय़ा….उसने मस्ती सें बंद होती आँखो सें विनय कि तरफ देखा…औऱ फिन जैसे हि विनय नें उसकी चुचि कों अपने होंठो मे भरकर चूसा तोँ, उसकी आँखेबंद होँ गई….उसने अपने आप् कों सिसकने सें रोकने केँ लिए अपने होंठो कों अपने दाँतों मे भींच लिया…औऱ विनय केँ सर कों पकड़कर अपने चुचि पऱ दबाते हुए मस्ती भरी आवाज़ मे बोलीं….”सीईईई विनय जल्दकर नाँ……मुझे घऱ कां काम भि करना हैं…”
विनय कां लन्ड उसके शॉर्ट्स मे अबतन चुका थां…जौ उसकी जाँघो केँ ऊपेर बैठी मामीजी कि गान्ड कि दरार मे घुसने कि कॉसिश कररहा थां…किरण भि अपने भान्जे केँ लन्ड कों अपनी गान्ड कि दरार मे चुभते हुए महसूस करके औऱ मचलउठी…” ओह्ह्ह विनय….”तभी बाहर् एक् दम सें डोरबेल बजी…” किरण औऱ विनय दोनो जल्द सें अलग हुए….औऱ किरण नें अपनी चुचियों कों ब्रा केँ अंदर करतेहुए ब्लाउज केँ हुक्स कों बंद करतेहुए कहा…”जा देखकर आँ कॉन आँ गय़ा इस वक्त….” किरण नें झुनझूलाते हुए कहा….विनय गेट कि तरफचला गय़ा…जब उसने जाकरगेट खोल तोँ, देखा सामने रिंकी मां खड़ी थि….”बेटा किरण कहां हैं….”
साहिल: जी अंदर हैं….
रिंकी माँ अंदरचली गई तोँ, विनय भि उसके पीछे आँ गय़ा….किरण नें रिंकी कि मां कि तरफ देखा तौ, किरणमन हि मनउसे गलियाँ देनेलगी….” दिदी आप् आइए बैठिए….” किरण नें अपने होंठो पर्र जबरन मुस्कान लातेहुए कहा…रिंकी कि मां सोफे पऱ बैठ गई…किरण ज़रा विनय कों मेडिसिन कि दुकान पऱ सें यह दवाई तौ मंगवा दे….मेरे बच्चे तोँ आज बाहर् गएहुए हैं घूमने घऱ पर्र कोई नहीं हैं…” रिंकी माँ नें मेडिसिन कि स्लिप औऱ पैसे देतेहुए किरण कों कहा….”जी लाइए….विनय सुन जाकर बाज़ार सें आंटी कों यह मेडिसिन तोँ लादे….” किरण नें विनय कों मेडिसिन लाने केँ लिएकहा तौ, विनय स्लिप औऱ पैसे लेकरचला गय़ा….”दिदी क्याँ लेने आप् चाइ याँ ठंडा….” किरण नें फॉरमॅलिटीस करतेहुए कहा….
“नहीं नहीं किरण परेशानी करने कि कोई ज़रूरत नहीं…तुम् बैठो कहां गुम रहती होँ आजकर दिखाई हि नहीं देती….” रिंकी कि मां नें किरण कां हाथ पकड़कर उसे अपनेपास बैठा लिया….”दिदी गुम कहां…घऱ पऱ मेहमान आएहुए हैं…इसलिये समय हि नहीं मिलता बाहर् निकलने कां….” किरण नें सोफे पर्र बैठते हुए कहा….”तुम्हे पता भि हैं आजकल हमारे मोहल्ले मे क्याँ-2 होँ रहा हैं….?” किरण उसकीबात सुनकर चोन्कते हुए बोलि…”क्याँ हुआ दिदी अपने मोहल्ले मे….”
“तुम्हे नहीं पता….वोँ जौ नुक्कड़ पऱ घऱ हैं नाँ सिमरन कां….”
किरण:हां दिदी….
“हांवही सिमरन पेट सें हैं….”
किरण: तौ क्याँ हुआ दिदी….पेट सें हि तौ हैं….
“हुआ क्यूं नहीं….5साल सें तोँ उसके बच्चा नहीं होँ रहा थां…पिछले 6 महीने सें उसके पति कां चचेरा भइयायहा आयाहुआ हैं….कॉलेज मे पढ़ता हैं…उसी केँ संगउस कलमूहि नें चक्कर चला लिया होगा…पति तोँ उसका हैं हि मरियल सां…उससे तौ उसकी तसल्ली होती नहीं होगी…औऱ फँसा लिया अपने देवर जी कों.फिन क्याँ.होँ गई पेट सें….दो दिन होँ गए…रोज उनकेघऱ इसीबात कों लेकर लड़ाई हौ रही हैं…लोग भि थूथूकर रहे हैं.अर्रे हरामजादी कि बुर मे इतनी हि आगलगी थि तोँ, कॉंडम क्यूं नहीं चढ़वा कर चुदवाती थि……”
किरण रिंकी कि मां कि बातें सुनकर बुरीतरह घबरा गई….उसकी विवाह कों भि 7 साल हौ चुके थें….औऱ अब तक उसेकभी पेट नहीं ठहरा थां….कल रात विनय नें उसकी बुर मे अपने लन्ड कां पानीडाल दिया थां….किरण केँ चेहरे कां रंगयह सुनकर उड़ गय़ा थां….
अभि दोनो बातें हि कररही थि कि, विनय वापिस आँ गय़ा….औऱ स्लिप औऱ पैसे रिंकी कि मां कों देतेहुए बोला….”आंटी आज सनडे हैं नाँ….ईस्सईलिए मेडिसिन कि शॉपआज 1 बजे हि बंद होँ गई…रिंकी कि मां नें पैसे औऱ स्लिप ली…”ओह्ह मे तौ भूल हि गई थि कि आज सनडे हैं….अच्छा किरणअब मे चलती हूं….” यह कहतेहुए रिंकी मां खड़ी हुइ औऱ बाहर् चली गई….विनय भि उसके पीछेचला गय़ा। औऱ गेटबंद करके जैसे हि वापिस आया तौ, देखा केँ किरण थोड़ी सि परेशान बैठी हुईँ थि। पर्र विनय केँ ऊपेर तौ वासना कां भूत सवार हौ चुका थां….किरण मन हि मनसोच रही थि कि, आज तोँ मेडिसिन केँ शॉप्स भि बंद हैं, आज कॉंडम भि खरीदकर नहींलाए जा सकते….
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नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -16
विनय किरण केँ सामने जाकर खड़ा होँ गय़ा….किरण विनय कि तरफ देखा तोँ वोँ समझ गई कि, विनयइस तरह उसके सामने क्यूं खड़ा हैं….किरण केँ दिमाग़ मे रिंकी कि माँ कि बातघऱ कर गई थि….वोँ किसी भि कीमत पऱ रिस्क नहीं लेना चाहती थि….”क्याँ हुआऐसे क्यूं खड़ा हैं…?” किरण नें थोड़ी सि सख्ती दिखाते हुएकहा। “वोँ मामीजी वोँ आप् मुझे….” विनय बेचारा अपनीबात भि पूरी नां करसका औऱ चुप होँ गय़ा….”विनय आज मेरामूड बहोत अपसेट हैं….आज औऱ नहीं…तुम् जाओ अपनेरूम मे औऱ पढ़ाई करो….मुझे घऱ कां काम करनेदो…”
यह कहतेहुए किरण अपनेरूम मे चली गई….विनय कों कुछसमझ नहीं आँ रहा थां कि, अचानक सें मामीजी कों हौ क्याँ गय़ा हैं….विनय मुँह लटकाकर अपनेरूम मे चला आया….उसका लन्ड अभि भि उसके शॉर्ट्स मे कोहराम मचाएहुए थां…वोँ बेचैन सां अपनेरूम मे बैठाहुआ थां….किरण घऱ कि सफाई मे लगी हुइ थि…वोँ सफाई करतेहुए जैसे हि ममता केँ रूम मे पहुँची, तोँ झाड़ू लगाते हुए, उसकी नज़र नीचे फर्श पऱ गिरी कॉंडम केँ पॅकेट पऱ पड़ी….किरण नें उस पॅकेट कों उठाकर देखा। तोँ उसके होंठो पर्र तेज मुस्कान फेल गई…उसके अंदर एक् कॉंडम अभि भि थां…किरण नें कॉंडम कों ब्लाउज केँ अंदररखा औऱ जल्द सें झाड़ू लगाकर विनय केँ रूम मे गई….
विनयबेड पऱ लेटाहुआ थां….”सो गय़ा क्याँ विनय….” किरण नें बेड पर्र बैठते हुए कहा.तोँ विनय नें करवटबदल कर उसकेतरफ पीठकर ली….किरण समझ गई कि, विनय उससे नाराज़ हैं….किरण मन हि मन सोचने लगी कि, उसे विनय केँ संग प्रेम सें बात करनी चाहिए थि…औऱ प्रेम सें टालना चाहिए थां.वोँ स्वयं विनय कि वासना कि आग कों भड़का रही थि….औऱ स्वयं हि उसे वासना कि आग मे तड़पता हुआ छोड़कर पीछेहट गई थि…ऐसा वोँ विनय केँ संग जाने अंजाने मे दोबार कर चुकी थि…किरण वहा सें उठी औऱ डोर कि तरफ गई…विनय नें फेस घुमाकर बाहर् जाती मामीजी कि तरफ देखा औऱ फिन किरणडोर केँ पास जाकररुक गई….औऱडोर कों बंद करके विनय कि तरफ पलटी…
यह देख विनय कां दिल जोरो सें धड़कने लगा…उसे समझ मे नहीं आँ रहा थां कि, आख़िर मामीजी चाहती क्याँ हैं…क्यूं बार-2 वोँ उसे तड़पाती रहती हैं…किरण बिनाकुछ बोले विनय कि बगल मे लेट गई…उसने विनय केँ कंधे पर्र हाथरख करउसे अपनीतरफ घुमाया तोँ, विनय नें उसकीतरफ फेस करके करवटबदल ली….”नाराज़ होँ मुझसे…?” किरण नें विनय केँ गाल पऱ हाथ रखतेहुए कहा…। “आप् मुझसे दूर रहिए…मुझे अब आपसेकोई भि बात नहीं करनी…”
किरण: मे जानती हूं विनय तुम् मुझसे नाराज़ हौ…बार-2 मे तुम्हारा दिल दुखा देती हूं। पर्र विनयहर महिला कि कुछ मजबूरिया होती हैं…औऱ तुम् अभि उन बातों कों नहींसमझ सकते….जब तुम् बड़े होँ जाओगे तौ तुम्हे पताचल जाएगा…कि तुम्हारी मामीजी नें तुम्हारा दिल जानबूज कर नहीं दुखाया हैं….
विनय: पऱ अब क्यूं आई होँ पास मेरे…?
किरण नें विनय कि आँखो मे झाँकते हुए एक् हाथ सें अपने ब्लाउज केँ बटन खोलने शुरुआत करदिए….
विनय कि देखते हि देखते किरण नें अपने ब्लाउज केँ हुक्स खोलदिए। जैसे हि किरण कां ब्लाउज खुला तोँ, उसकी चुचियाँ उछलकर बाहर् आँ गई.इसबार किरण नें ब्रा नहीं पहनी हुई थि.अपनी मामीजी कि गोरेरंग कि चुचियों कों देखकर विनय केँ लन्ड मे तेज सरसराहट हुइ.मामीजी कि गोरी चुचियों पर्र ब्राउन रंग केँ बड़े-2 गहरे औऱ मोटे-2तने हुए निपल्स तौ विनय कि काम वासना कों औऱ भड़का रहे थें.किरण नें मुस्कराते हुए विनय कि ओर देखा औऱ फिन एक् हाथ सें उसकेसर केँ नीचे रखतेहुए दूसरे हाथ सें अपने राइट माममे कों पकड़ते हुएनोक दार बनाया औऱ विनय केँ होंठो सें अपने निपल कों लगा दिया.विनय नें अपनी मामीजी कि आँखो मे देखा.वोँ अपनी मामीजी कि चुचियों कों देखते हि सारा क्रोध भूल गय़ा थां.
औऱ अगले हि समय उसने किरण केँ निपल केँ संग-2 जितना होँ सकता थां उसकी चुचि कों मुँह मे भर लिया.किरण अपने निपल पर्र विनय कि गर्म औऱ खुरदरी जीभ कों महसूस करते हि, सिसक उठी.उसने मस्ती मे सिसकते हुए विनय कों अपनी बाहों मे भरकर अपने ऊपेर खेंच लिया.मामीजी केँ ऊपेरआते हि, विनय औऱ जोश सें भर उठा.उसने किरण केँ निपल कों अपने होंठो मे लेकर औऱ ज़ोर-2 सें दबाना शुरुआत कर दिया."श्िीीईईई ओह विनय मेरीई लााअल पी लेँ चुस्स लें अपनी मामीजी केँ मम्मो कों ओह.आज केँ बादजब तेरादिल करेगा.मे अपने मम्मे निकाल कर तुम को चुसवा दिया करूँगी। कभीमना नहीं करूँगी अपने शोना कों.अह्ह्ह्ह हां औऱ ज़ोर ज़ोर सें चुस्स ओह्ह्ह्ह मेरीए बेटा." ओह्ह्ह चूस लें बेटा….किरण नें विनय केँ सर कों अपनी चुचियों पर्र दबाते हुएकहा…
किरण कि बुर कि फांके अब फुदकने लगी थि…उसकी बुर किसी धौंकनी कि तरहधुक-2 कररही थि….बुर सें कामरस सैलाब कि तरह बाहर् आँ रहा थां…विनय केँ तनेहुए सख़्त लन्ड कों अपनी साड़ी केँ ऊपेर सें अपनी बुर पर्र महसूस करके किरण मदहोश होतीजा रही थि…उसे अपनी बुर औऱ विनय केँ लन्ड केँ बीच केँ कपड़ो कि दीवार….अब बोझ लगनेलगी थि…उसने अपने दोनो हाथो कों नीचे लेजाकर विनय केँ शॉर्ट्स कों दोनोतरफ सें पकड़कर नीचे सरकाना शुरुआत कर दिया….पर्र विनय केँ उसके ऊपेर लेटे होने केँ कारण, विनय कां शॉर्ट्स उसकीकमर सें नीचे उतरा, तोँ विनय नें मामीजी केँ दिल कि मंशा समझते हुए मामीजी केँ ऊपेर सें खड़ा हौ गय़ा….औऱ बेड पर्र खड़े होतेहुए स्वयं हि अपने शॉर्ट्स कों घुटनो सें नीचे तक सरका दिया….
जैसे विनय कां लन्ड बाहर् आकर झटके खानेलगा तोँ, किरण कि आँखे विनय केँ तनेहुए 8 इंच केँ लन्ड पऱ फंस गई…वोँ पहलीबार सॉफ- 2 अपने भान्जे केँ लन्ड कों अपनी आँखो केँ सामने देखरही थि…जब-2 विनय कां लन्ड फूँकारता हुआ झटके ख़ाता….तब-2 किरण कि बुर कुलबुला उठती….किरण कां हाथ स्वयं बा स्वयं हि विनय केँ तनेहुए लन्ड कि तरफउठ गय़ा…औऱ उसने विनय केँ लन्ड कों अपनी मुट्ठी मे भर लिया….
जैसे हि किरण कों अपनेहाथ सें विनय केँ लन्ड केँ तनाव कां अहसास हुआ, किरण कि बुर अपने भान्जे केँ लन्ड केँ नाम पऱ पिघल उठी….अब किरण सें बर्दास्त करना भि मुस्किल हौ गय़ा थां। वोँ विनय केँ लन्ड कों मूठ मारने वाले अंदाज़ मे हिलाने लगी….
किरण अपनी हथेली मे विनय केँ लन्ड कि नसों कों फूलता हुआ महसूस करके औऱ गर्म हौ चुकी थि….किरण एक् दम सें उठकरबैठ गई….औऱ उसने अपने भान्जे केँ लन्ड कों गल्प सें मुँह मे लें लिया…अपने लन्ड केँ सुपाडे कों मामीजी केँ गर्म जूसी मुँह मे महसूस करते हि विनय मस्ती सें सिसक पड़ा…उसकी कमर नें आगे कि तरफ झटका खाया तौ, विनय कां 1 इंच लन्ड औऱ किरण केँ मुँह मे घुस गय़ा….किरण नें विनय केँ लन्ड कों पकड़कर अपने मुँह केँ अंदर बाहर् करना शुरुआत कर दिया…
”ओह्ह्ह मामीजी जी….” विनय नें सिसकते हुए किरण केँ सर कों पकड़ लिया…किरण पागलो कि तरह विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कों चाटने लगी…कभी वोँ अपनीजीभ बाहर् निकाल कर उसके लन्ड कों सुपाडे सें लेकरजड तक चाटती तोँ, कभी उसके सुपाडे कों मुँह मे लेकर चूसने लगती….
किरण नें विनय केँ लन्ड कों मुँह सें बाहर् निकाला औऱ बेड पर्र रखेहुए कॉंडम कां रॅपर फाड़कर कॉंडम बाहर् निकाल लिया…विनय नें इससे पहलेकभी कॉंडम नहीं पहना थां…वोँ अजीब सि नॅज़ारो सें कॉंडम कों देखरहा थां…किरण नें कॉंडम कों विनय केँ लन्ड पर्र चढ़ाया औऱ अपनी साड़ी कों अपनीकमर तक उठाते हुए नीचेलेट गई…औऱ अपने जाँघो कों फैलाते हुए विनय कों अपने जाँघो केँ बीच बैठने कों कहा…विनय कि नज़र मामीजी कि फूली हुई बुर पऱ पड़ी, तौ उसके लन्ड नें झटके खातेहुए मामीजी कि बुर कों सलामी दि….विनय मामीजी कि जाँघो केँ बीच घुटनो केँ बलबैठ गय़ा….औऱ मामीजी केँ ऊपेर झुकते हुए, मामीजी केँ जूसी होंठो पर्र अपने होंठो कों झुकाने लगा….किरण नें अपनाहाथ नीचे लेजाकर विनय केँ लन्ड कों पकड़ लिया….
विनय नें सिसकते हुए अपने मामीजी केँ होंठो अपने होंठो मे भर लिया.किरण कि बुर यहसोच कर फड़फ़ड़ा उठी कि, मासूम सां दिखाने वाला उसका भांजा उसके होंठो कां रस निचोड़-2 करपीरहा हैं…उसकी बुर कि दीवारे आपस मे सटाने लगी…औऱ बुर कि दीवारो केँ आपस सटने सें बुर कि लार दबाव कि वजह सें बाहर् बह निकली….किरण नें विनय केँ लन्ड कों हाथ सें छोड़ दिया…औऱ अपने दोनो हाथो सें विनय केँ सर केँ बालो कों सहलाते हुए अपने भान्जे कों अपने होंठो कां रस पिलाने लगी…किरण नें भि अपने होंठो कों खोलकर ढीला छोड़ दिया…विनय पागलो कि तरह अपनी मामीजी केँ गुलाबी जूसी होंठो कों चूसने लगा….नीचे विनय कां लन्ड उसकी बुर कि फांको पर्र रगड़खा रहा थां…
किरण अपनी बुर कि फांको पर्र विनय केँ लन्ड कि रगड़ कों महसूस करके बुरीतरह मचलरही थि….वोँ अपनी गान्ड कों इधरउधर हिलाते हुए स्वयं भि अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड पर्र रगड़ने लगी….इसी बीच विनय कां लन्ड किरण कि बुर केँ छेद पऱ जा भिड़ा….किरण नें सिसकते हुए अपने होंठो कों विनय केँ होंठो सें अलग किया….औऱ मदहोशी सें भरी हुई आँखो सें विनय कि आँखो मे देखते हुए बोलीं… “सीईईईईई विनयडाल दे पुत्तर अब लेँ लें अपनी मामीजी कि फुद्दि….” विनय कों भि अपनी मामीजी कि बुर केँ छेद सें निकलरही गरमी कां अहसास अपने लन्ड केँ सुपाडे पऱ हौ गय़ा थां… उसने अपनी गान्ड कों आगे कि तरफपुश करना शुरुआत किया तौ, विनय केँ लन्ड कां सुपाडा उसकी बुर केँ छेद कों फेलाता हुआ अंदरजा घुसा….
किरण अपने भान्जे केँ लन्ड कों अपनी बुर मे रगड़ ख़ाता हुआ घुसता महसूस करके औऱ भि अधिक गर्म हौ गई….उसने अपने दोनो हाथो कों नीचे लेजाते हुए, विनय कि गान्ड केँ ऊपेररख करउसे नीचे कि तरफ दबाने लगी…विनय कां लन्ड किरण कि पानी सें लबलबा रही बुर कि गहराइयों मे धीरे-धीरे-2 उतरता चला गय़ा…किरण कों अपनी बुर कि दीवारे पूरीतरह खुलती हुई सॉफ महसूस होने लगी…औऱ फिनजब विनय कां 2 इंच लन्ड बाहर् रह गय़ा तोँ, विनय नें अपनीकमर कों पूरी ताक़त केँ संगआगे कि तरफ धकेला तोँ, विनय कां लन्ड किरण कि बुर कि गहराइयों मे उतरते हुए उसकी बच्चेदानी सें जा टकराया…उसकी जांघे मामीजी केँ चुतड़ों सें टकराई तौ, ठप कि तेज आवाज़ पूरेरूम मे गूँज गई…”आहह-आहह उंह सबशह मेरीई शियर पुत्तरर उंह सीईईईईईई”
किरण नें सिसकते हुए विनय केँ फेस कों अपने हाथो मे पकड़ लिया औऱ पागलो कि तरह उसके होंठो कों चूमने लगी….अपनी मामीजी कों इसतरह मस्त होतादेख कर विनय नें अपने लन्ड कों धीरे-धीरे-2 अंदर बाहर् करना शुरुआत कर दिया…विनय कां लन्ड किरण कि बुर केँ अंदर बाहर् आताहुआ उसकी बुर कि दीवारो पऱ रगड़ ख़ाता तौ, किरण केँ शरीर मे मस्ती कि लहर दौड़ जाती…”अह्ह्ह्ह ओह सीईईईईईईईईई सबाश मेरीए बाबर शेररर ओहमार लेँ अपनी मामीजी कि फुदीओह आज कि बाद तुम्हारी तरफ तेरीयह मामीजी कभी भि नहीं रोकेगी…रोज दूँगी मे अपनेशेर पुत्तर कों आहह-आहह बोल विनयरोज लेगानाअ मेरी….” किरण नें सिसकते हुए कहा…तौ विनय कां जोश औऱ बढ़ गय़ा….औऱ वोँ औऱ तेज़ी सें अपने लन्ड कों किरण कि बुर केँ अंदर बाहर् करनेलगा….
किरण: ओह्ह्ह्ह विनय सीईईईईई बहोत मजा आँ रहा हैं….हाइी मुझे नहींपता थां कि, तुँ इतनी अच्छी तरह बुर मार सकता हैं….उंघह हाइईए सीईईईई आहह-आहह अहह सबाश मेरीए बबर शेररर औऱ जोर्र दीएमार घसा अपनी मामीजी कि फुदी मे आहह-आहह.
किरण नें भि धीरे-धीरे-2 अपनी गान्ड कों ऊपेर कि औऱ उछालना शुरुआत कर दिया…विनय औऱ किरण दोनो पसीने सें तरबतर होँ चुके थें…किरण अपनी साड़ी केँ पल्लू सें विनय केँ चेहरे पऱ आएहुए पसीने कों सॉफ करने लगी…”सीईईईईईई हाइईए आहह-आहह सदके जावा अह्ह्ह्ह हाइईए बहोत मोटा हैं तेरा लन्ड अह्ह्ह्ह उंह ओह्ह्ह्ह छोड़ विनय औऱ ज़ोर सें मार मेरी फुद्दि आहह-आहह सीईईईईईईईईई हाइी ओईईए विनय….आहह-आहह देख विनयदेख निकाल दिया तेरे लन्ड नें तेरी मामीजी कि बुर सें पानी अह्ह्ह्ह लीई विनयययी मे तौ अहहअहह ओह हाइी मेरी फुद्दि आहह-आहह गाइए….लीयी ईएदेख यहदेख मेरी बुर लगी हैं पानी छोड़ने आहह-आहह…….
किरण नें अपनी टाँगो कों उठाकर विनय कि कमर पऱ कसतेहुए तेज़ी सें अपनी गान्ड कों ऊपेर कि तरफ उछालना शुरुआत कर दिया….फिन किरण बुरीतरह विनय सें लिपट गई… विनय सें लिपटी हुईँ किरण कि कमर झड़ते हुए तेज़ी सें झटके खाने लगी….विनय नें भि आख़िर दोचार शॉटलगा कर मामीजी कि बुर मे रुकेहुए पानी कों बाहर् कां मार्ग दिखा दिया…औऱ विनय भि बुरीतरह काँपते हुए झड़ने लगा…
विनय कां लन्ड जब ढीलाहुआ तोँ, उसका लन्ड किरण कि बुर सें बाहर् आँ गय़ा…विनय अपने घुटनो केँ बलबैठ कर अपने ढीले पढ़ते हुए लन्ड पर्र चढ़ेहुए कॉंडम कों देखने लगा….किरण जल्द सें उठकरबैठ गई….उसने विनय कों जल्द सें प्राचीन न्यूज़ पेपर लाने कों कहा….जोँ सामने टेबल पर्र हि पड़ा थां….विनय नें जल्द न्यूज़ पेपरउठा कर किरण कों दिया तौ, किरण नें न्यूसपेपर कों उसके लन्ड केँ नीचे करतेहुए, एक् हाथ सें उसके कॉंडम कों उतारकर न्यूज़ पेपर मे रखकरउसे फोल्ड कर दिया…औऱ न्यूज़ पेपर नीचे फर्श पर्र रखतेहुए बोलि….”जा विनयइसे ऊपेरछत पऱ जाकर पीछे जोँ खाली प्लॉट हैं वहा फेंकदे….” विनय नें जल्द सें अपना शॉर्ट्स पहना औऱ न्यूसपेपर कों उठाकर ऊपेरचला गय़ा…किरण नें एक् कपड़े सें अपनी बुर कों सॉफ किया….औऱ अपनी साड़ी नीचे करकेरूम सें बाहर् निकलकर बाथरूम मे चली गई….
जब विनय नीचेआया तोँ, किरण भि बाथरूम सें बाहर् आँ चुकी थि…जब विनय सीढ़ियाँ नीचेउतर कर उसकीतरफ आँ रहा थां….तब वोँ विनय केँ शॉर्ट्स केँ अंदर उसकेतने हुए हिलते लन्ड कों देखकर हैरान रह गई…उसे अपनी आँखो पर्र यकीन नहीं हौ रहा थां…औऱ दिमाग़ भि यह मानने केँ लिए रेडी नहीं होँ रहा थां…वोँ मन हि मनसोच रही थि कि, अभि-2 विनय नें उसे चोदा हैं….औऱ थोड़ी देर पहले हि झड़ने केँ बावजूद भि उसका लन्ड इतनी जल्द दोबारा केसे खड़ा हौ सकता हैं….किरण कि नज़र उसके शॉर्ट्स मे बने तंबू पऱ अटकी हुई थि…जिसे देख उसकी बुर मे फिन सें तेज सरसराहट होनेलगी थि….एक् लंबे अरसे केँ बाद उसकी बुर नें पानी छोड़ा थां…औऱ अपने भान्जे केँ लन्ड सें संतुष्ट होकर जोँ स्वाद किरण लेँ चुकी थि…। वही स्वाद फिन सें लेने केँ लिए उसकी बुर मे चीख पुकार मची हुईँ थि….
किरण कां दिल तोँ कररहा थां कि, वोँ अभि वही फर्श पर्र लेट जाए…औऱ विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर मे लेकर उससेफिन अपनी बुर मे हौ रही खुजली कों मिटा लें….पऱ प्रेगञेन्ट होने कां डर उसके जेहन मे बैठ चुका थां….औऱ नाँ हि अब उसकेपास औऱ कोई कॉंडम थां….दूसरी तरफ मामीजी कि बुर कि गरमी कों अपनी लन्ड पर्र महसूस करने केँ बाद विनय भि फिन सें मामीजी कि बुर कों चोदने केँ लिए बेताब हुआजा रहा थां। किरण सोफे पऱ जाकरबैठ गई….विनय भि उसकेपास आकरबैठ गय़ा…किरण जानती थि कि, विनय क्यूं उसके पीछेघूम रहा हैं….किरण नें समय देखा तौ 2 बजरहे थें… “खानां खाओगे भूक तोँ नहींलगी…” किरण नें विनय केँ बालो मे हाथ फेरते हुए कहा…तोँ विनय नें नां मे सर हिला दिया…”नहीं अभि भूख नहीं हैं….”
अभि विनयआगे कुछ कहने कि हिम्मत हि जुटारहा थां कि, डोरबेल बजी…किरण विनय कों गेट पऱ जाकर देखने कों कहा….विनय नें जाकरगेट खोला तोँ, देखा सामने शीतल खड़ी थि….उसके संग उसके बच्चे भि थि….शीतल नें विनय कों प्रेम दिया औऱ फिन अंदर आँ गई….”आओ दिदी बैठो…” किरण नें मुस्कराते हुएकहा, तौ शीतल उसकेसंग सोफे पऱ बैठ गई….”आज अभि कों टीका लगवाने जारही हूं….” इसीलिए सोचा कि पिंकी कों तुम्हारे यहा छोड़ जाती हूं बाहर् धूप बहोत हैं….”
किरण: अच्छा क्याँ दिदी वैसेआज तौ सनडे हैं फिन आप् अभि कों टीका कहां लगवाने जारही हैं….?
शीतल: वोँ यह विद्यालय केँ पास डिसपॅन्सरी हैं नाँ…वही जारही हूं….सरकारी डिसपॅन्सरी हैं…सिर्फ़ सनडे कों हि खुलती हैं….
किरण: ओह्ह अच्छा…(तभी अचानक सें किरण केँ दिमाग़ केँ घोड़े दौड़े….) दिदी मे भि चलूं आपकेसंग…
शीतल:हां चल…
किरण: विनय पिंकी कां ख़याल रखना….हम् थोड़ी देर मे आते हैं….
उसकेबाद किरण शीतल औऱ अभि केँ संग डिसपॅन्सरी केँ लिएचली गई….जब दोनोवहा पहुँची, तोँ वहाआगे लाइन मे दोतीन हि लोग थें….शीतल अभि कों लेकर लाइन मे लग गई…किरण वही बेंच पर्र बैठ गई…तभी उसका ध्यान उस काउंटर पर्र पड़ाजहा पऱ लोग डॉक्टर सें मिलने केँ बाद मेडिसिन लें रहे थें….जब शीतल कां नंबरआया औऱ शीतल अभि कों लेकर अंदर गई, तौ किरण जल्द सें खड़ी हुईँ, औऱ मेडिसिन वाले काउंटर पऱ जाकर खड़ी हौ गई…तब उसकेआगे सिर्फ़ एक् हि स्त्री खड़ी थि…जब वोँ स्त्री दवाई लेकरचली गई तोँ, अंदर खड़ी नर्स नें किरण केँ तरफ देखते हुएकहा। “लाइए स्लिप दीजिए….”
किरण:जी वोँ स्लिप तोँ नहीं हैं….दरअसल मुझे कॉंडम चाहिए थें….
नर्स: मेडम कॉंडम तोँ नहीं हैं हमारे पास….हां गर्भ निरोधक टॅब्लेट्स हैं। वोँ चाहिए तौ दे देती हूं….
किरण:जी उससेकोई नुकसान तौ नहीं होगा….?
नर्स: नहीं मेडमकोई नुकसान नहीं होगा….
किरण:ठीक तोँ फिन टॅब्लेट्स हि दे दीजिए….
नर्स नें उसे 20 टॅब्लेट्स दे दि….औऱयह भि बता दिया केँ कब खानां खा…“जी कितने पैसेहुए…” किरण नें अपना पर्स खोलते हुए कहा….”आप् यहा पहलीबार आई हैं….” उस नर्स नें मुस्कुराते हुए कहा….”जी…”
नर्स:यह सरकारी डिसपॅन्सरी हैं…यहा पऱ यह दवाए फ्री दि जाती हैं….
किरण: ओह्ह थॅंक्स….
किरण नें जल्द सें उन टॅब्लेट्स कों अपने पर्स मे रखा औऱ औऱ फिन सें बेंच पऱ आकरबैठ गई…थोड़ी देरबाद शीतल अभि कों लेकर बाहर् आई…”चल किरण….लग गय़ा इसको टीका…” औऱ फिन किरण खड़ी हुई औऱ उसकेसंग घऱ कि तरफचल पड़े…रास्ते मे शीतल नें भि उसेवही बात बताई….जौ दो घंटे पहले रिंकी केँ मां बताकर गई थि….बाते करते -2 दोनोघऱ पहुँच गई……शीतल अंदरआते हि सोफे पऱ पसर गई….”विनय बेटा…”
विनय:जी मासीजी….
शीतल:जा बेटा हम् सभी केँ लिए पानी तौ लेँ आँ….बाहर् बहोत गरमी हैं….
विनय:जी अभि लाता हूं….
यहकहकर विनय रसोई मे गय़ा….औऱ पानी केँ बॉटल औऱ तीन ग्लास लेँ आया… विनय नें सभी कों पानी पिलाया….औऱ फिन ग्लास औऱ बॉटल रसोई मे रखकर वापिस आँ गय़ा… “मामीजी खानां देदो….” विनय नें डाइनिंग टेबल पऱ बैठते हुए कहा…तोँ किरणउठ कर विनय केँ लिए खानां लेनेचली गई….अभि उठकर विनय केँ पास गय़ा…” भैया मुझे वीडियो गेमलगा दो नाँ…” उसने विनय कां हाथ पकड़कर खेंचते हुएकहा तौ, विनयवहा सें उठकर टेलीविज़न केँ पास गय़ा…औऱ अभि कों वीडियो गेमलगा कर दि… फिनजब किरण वापिस आई तौ, उसने खानां टेबल पऱ रखतेहुए विनय कि तरफ गुस्से सें देखकर देखा….दरअसल वोँ विनय पर्र इसलिए क्रोध हौ रही थि कि, उसने अभि कों वीडियो गेम स्टार्ट करके दि थि…औऱ अभि अबवहा सें जल्द हिलने वाला नहीं थां…
too be continued.
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नादान लन्ड केँ जलवे - Aage kya hua? Next part padhiye
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