नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -11
अंजू नें विनय केँ लन्ड कों मूह सें बाहर् निकाला औऱ फिनबेड पर्र घूमी विनय कि तरफपीठ कर ली….औऱफिन घुटनो केँ बलबेड केँ किनारे पर्र बैठते हुए, उसने साड़ी औऱ पेटिकोट कों एक् संगउठा कर अपनीकमर तक ऊपरउठा लिया औऱ फिनआगे कि तरफ झुकते हुए डॉगी पोज़िशन मे आँ गये…उसने अपनेफेस कों घुमाकर पीछे खड़े विनय केँ तरफ देखा औऱ फिन मदहोशी सें भरी मस्त आवाज़ मे बोलि….”आज जा विनय बाबूडाल दो अंदर….औऱ निकाल लोदिन कि जुदाई कि भडास…”यह कहतेहुए अंजू नें अपनी जाँघो कों फेला लिया….
औऱ आगे कि तरफ झुकते हुए अपनेसर कों बेड पऱ टिका दिया….जिससे अंजू कि गान्ड जैसे हि ऊपर कि तरफउठी, तोँ उसकी बुर कां छेद पीछे कि तरफ बाहर् कों निकल आया….विनय तौ जैसेइस लम्हा केँ लिएकब सें तड़परहा थां। अब साराडर धूल हौ चुका थां…वोँ अंजू केँ पीछेआया, औऱ अपने लन्ड केँ सुपाडे कों अंजू कि बुर केँ छेद पऱ टिकाते हुए, अपनीकमर कों आगे कि तरफपुश किया….विनय कां लन्ड जोँ कि अंजू केँ थूक सें गीला होकर चिकना हौ गय़ा थां…अंजू केँ सुखी फुद्दि मे घुसता चला गय़ा….”शीई अह्ह्ह्ह ओह विनय बाबू…….हाआँ डालदो पूरा कां पूरा अंदर…ओह्ह्ह….” अंजू नें अपनी गान्ड कों पीछे कि ओर किया तौ, विनय कां लन्ड सरकता हुआ, अंजू कि बुर मे घुसता चला गय़ा….]
लन्ड बुर मे जाते हि, विनय उतावलों कि तरह अपनेकमर कों तेज़ी सें हिलाते हुए अपने लन्ड कों अंदर बाहर् करने लगा…थोड़ी हि देर मे अंजू कि बुर नें भि अपने कामरस कां खजाना खोल दिया…अब अंजू कि बुर सें निकलरहे पानी सें विनय कां लन्ड औऱ भि चिकना होकर आसानी सें अंदर बाहर् होने लगा….”आहह-आहह शियीयीयियीयियी आहह-आहह आहह-आहह उंह हाआँ औऱ ज़ोर सें ठोको अपना खुन्टा अह्ह्ह्ह हइई मेरीए बुर….अहह ….”
अंजू भि एक् दम मस्त हौ चुकी थि….विनय अब अपना लन्ड सुपाडे तक बाहर् निकाल-2 कर अंजू कि बुर कि गहराईयो मे घुसारहा थां…लगभग 10 मिनिट कि चुदाई केँ बाद दोनो बुरीतरह सें झड़ने लगी….जब विनय कां लन्ड सिकुड कर बाहर् आया तोँ, अंजू नें विनय कों जल्द सें नीचे जाने केँ लिए कहा…विनय नें अपने लन्ड कों वहा पड़े कपड़े सें सॉफ किया औऱ फिन वोँ नीचे आँ गय़ा….
विनय नीचे आँ गय़ा….वोँ मन हि मन बहोत खुश थां…मन मे लड्डू फूटरहे थें….अंजू नें स्वयं घऱआकर उसे बुर दि दि थि। ऐसे मोके तोँ अब मिलते हि रहेंगे…विनय बाहर् हाल मे बैठकर टेलीविज़न देखने लगा….किरण नहाकर बाहर् आई, उसने साड़ी पहनी हुइ थि। उसके खुलेहुए भीगेबाल जौ उसके चुतड़ों तक लंबे थें…किसी कों भि अपना दीवाना बना सकती थि…अपने मामीजी केँ गोरे औऱ कामुक जिस्म कों देखकर विनय केँ दिमाग़ मे कल दोपहर वाली घटनाफिन सें ताज़ा होँ गई,। उसकाबस नहींचल रहा थां…नहीं तोँ वोँ अभि मामीजी केँ पास जाता औऱ उससे बाहों मे भरकर उसके आगोश मे समा जाता….
तभी डोरबेल बजी तोँ, किरण नें बाहर् जाकरगेट खोला….सामने अभि खड़ा थां…उसने किरण केँ पाँव छुए….औऱ विनय केँ बारे पूछा। “ मामीजी विनय भैया कों मां बुलारही हैं…” किरण नें वही सें विनय कों आवाज़ दि तोँ, विनयउठ करगेट कि तरफचला गय़ा…” जी मामीजी” उसने किरण कि ओर देखते हुए कहा….”जा बेटा तेरी मासी बुलारही हैं…” विनय अभि केँ संग उसकेघऱ चला गय़ा…किरण नें गेटबंद किया औऱ वापिस अंदरहाल मे आँ गई, ….
औऱ टेलीविज़न देखने लगी……थोड़ी देरबाद अंजू भि अपनाकाम निपटा कर नीचे आँ गई, …किरण नें घड़ी मे वक्त देखा अभि 11 हि बजे थें… घऱ कां साराकाम निपट चुका थां…अब 1 बजेलंच हि बनाना थां…”हौ गई, सफाईऊपर भि….” किरण नें मुस्कराते हुए पूछा…”जी हौ गई, …अब औऱ क्याँ करना हैं….” अंजू नीचे बिछी चटाई पर्र बैठते हुएकहा….
किरण:कुछ नहीं अभि थोडा आरामकर लेँ…फिन 1 बजे खानां बनाना हैं.
अंजू:जी…
किरण: (अपने हाथो कि तरफ देखते हुए…) इतनी गरमी हैं कि, पूरी स्किन रूखी सि हौ गयीँ, हैं….
अंजू: दिदी जी आप् नहाने सें पहलेतैल लगा लियाकरो….
किरण: नहींकल इनसे बॉडी लोशन मँगवाया थां….वोँ लगा लेती हूं….
यहकहकर किरण कुर्सी सें उठी, औऱ अपनेरूम मे चली गई, …वहा सें बॉडी लोशन केँ बॉटलली औऱ फिनहॉल मे आँ गई, ….औऱफिन कुर्सी पर्र बैठकर अपने हाथों औऱ बाहों पऱ बॉडी लोशन लगाने लगी…फिन उसने थोडा सां बॉडी लोशनहाथ मे लिया औऱ अपनी गर्दन केँ पीछे कि तरफ लगाने लगी….ऐसा करतेहुए, किरण कों थोड़ी तकलीफ़ हौ रही थि… “दिदी जी आप् बोलो तौ मे लगादूं….” अंजू नें मुस्कुराते हुएकहा….
अब किरण कों इससे अधिक औऱ क्याँ चाहिए थां…नौकरानी भि मिलीओए ऐसी मिली कि उसकाहर तरह कां काम करने सें इनकार नाँ करे….“हां चल तुँ आकरलगा दे….” किरण नें मुस्कराते हुए कहा….अंजू वहा सें उठी औऱ किरण केँ पीछेआकर खड़ी हौ गयीँ, ….उसने बॉटल सें अपने हथेली पऱ बॉडी लोशन टापकया औऱ फिन बॉटल कों टेबल पर्र रखा…फिन अपने दोनो हाथों कों आपस मे मला औऱ किरण कि गर्दन केँ पीछे बॉडी लोशन लगाने लगी…अंजू केँ नरम हाथो कां अहसास किरण कों बेहद सुखद महसूस होँ रहा थां…मानो जैसे उसकी काफ़ी दिनो कि थकान ख़तम हौ गयीँ, होँ….
अंजू धीरे-धीरे-2 अपने हाथो कों उसकी गर्दन औऱ खुलेहुए कंधो पऱ घूमते हुए सहलारही थि….”अर्रे वाउ आंजू तुँ तोँ मालिश भि बहोत अच्छी कर लेती हैं…” किरण नें आँखेबंद करतेहुए कहा…तौ अंजू नें भि शोखी मे आतेहुए, अपने किस्से सुनाना शुरुआत करदिए….” यह तौ कुछ भि नहीं दिदी जी….पता हैं मेरे गाओं मे कई औरतें आती थि…मेरे पास मालिश करवाने केँ लिए….सब कहती थि कि, अंजू तेरे हाथो मे तौ चमत्कार हैं….” किरण अंजू कि बातसुन कर हँसने लगी… “ तौ तूँ गाओं मे यहकाम करती थि….” किरण नें आगे कि तरफ झुकते हुए कहा…ताकि अंजूठीक सें उसके गर्दन औऱ पीठ केँ मालिश करसके।
अंजू:अब क्याँ करती दिदी….गाओं कि औरतें सभी जानकार थि….माना भि तौ किसी कों नहींकर सकती थि….मालिश करवाती तौ स्वयं हि कुछ नां कुछदे जाती….
किरण:हां सही कहती थि…तुम्हारे गाओं कि औरतें….बहोत सकूनमिल रहा हैं….
अंजू उसके कंधो औऱ पीठ पर्र हाथों सें सहलाते हुए, बीच-2 मे जब उसके कंधो कों दबाती तोँ, किरण केँ शरीर कों ऐसा सकून मिलता। कि उसकादिल करनेलगा कि, अंजूऐसे हि उसकी मालिश करतीरहे…। “यह तोँ बसऐसे हि कररही हूं…असली मालिश तौ अभि मेने कि हि नहीं…आप् करवाएँगी मुझसे मालिश….” उसने किरण केँ सामने आतेहुए कहा… तोँ किरण नें अपनी आँखेखोल कर अंजू कि तरफ देखा…
किरण: क्याँ इस टाइम….?
अंजू:हां क्यूं….?
किरण: पर्र अभि तोँ मेनेनहा लिया….
अंजू: तौ क्याँ हुआ….यह क्रीम तोँ नहाने केँ बाद भि लगाते हैं नाँ, इस सें कर देती हूं…
किरण:(कुछ देर सोचने केँ बाद…)चल ठीक हैं करदे…
अंजू:ठीक हैं दिदी…पहले आप् यह साड़ी उतारकर कोई पुरानी धुलने वाली पेटिकोट पहन लो…यहा बाँध लीजिएगा….
अंजू नें अपनी चुचियों कि तरफ इशारा करतेहुए कहा, तोँ किरण मुस्कुराइ औऱ उठकर बाथरूम मे चली गई, …एक्-2 करके उसने अपने सारे कपड़े उतार दिया…औऱ जोँ पेटिकोट उसने नहाने केँ वक्त उतारा थां…उसे अपनी चुचियों पर्र बढ़ा लिया….औऱ बाहर् आँ गये….अंजू बाहर् चटाई पर्र बैठी हुइ प्रतीक्षा कररही थि….जब किरणआए तौ, अंजू नें वहा पऱ एक् साइड मे लगेहुए बिस्तर सें एक् तकिया उठाया औऱ उसे चटाई पर्र रख दिया…। “आप् यहालेट जाए….पैट केँ बल…” अंजू नें चटाई कि तरफ इशारा करतेहुए कहा। तोँ किरण चटाई पर्र पैट केँ बललेट गई, …
अंजू बॉडीलोशन कि बॉटल लेकर उसकेबगल मे बैठ गयीँ, …फिन अंजू नें किरण केँ पेटिकोट कों उसके घुटनो तक उठाया….औऱ अपनी हथेली मे बॉडी लोशनलगा कर किरण कि पिंदलियों पर्र लगाते हुए मालिश करनेलगी… अंजू केँ हाथों कां स्पर्श किरण कों बहोत सकूनदे रहा थां…अंजू भि पूरेमन केँ संग किरण केँ पैरो सें लेकर पिंडलयों तक मालिश कररही थि….उसने लगभग 6-7 मिनिट तक किरण केँ पैरो सें लेकर पिंडलियों तक मालिश कि, औऱ फिन उसने किरण केँ पेटीकोटे कों औऱ ऊपर सरकाते हुए, उसके चुतड़ों तक ऊपर चढ़ा दिया….इतना ऊपर कि किरण कि वाइटकलर कि पैंटी भि सॉफ नज़रआने लगी….
किरण नें भि कोई ऐतराज नाँ किया…अंजू भि तौ स्त्री थि…अबभला उससे क्याँ शरमाना…”सच अंजू तुँ तौ बहोत अच्छी मालिश करती हैं। कहां तूँ यहघऱ केँ कामो मे लगी हैं….मालिश कां काम हि कर लें… जिनके नये बच्चे होते हैं….वोँ लोग तौ औरतों कि मालिश करने वाली औरतों कों ढूंढते फिरते हैं….”
किरण नें अंजू कि हॉंसला अफजाई कि तोँ, अंजू भि खुश हौ गई, …। “नहीं दिदी जी…मुझे पैसो केँ लिएयह काम करना अच्छा नहीं लगता। वोँ आपकेयहा तोँ कामकर रही हूं, इसीलिए आपकी मालिश कररही हूं…” अंजू नें फिन सें बॉडी लोशन कों अपनी हथेलयों मे टपकाया औऱ किरण कि जाँघो पर्र लगाते हुए उसकी जाँघो कि मालिश करने लगी…जब उसकी जांघों कि मालिश करतेहुए अंजू केँ हाथ किरण कि जाँघो केँ अंदर कि तरफआते, तोँ किरण केँ जिस्म मे सरसराहट सि दौड़ जाती…। “आहह-आहह अंजू….बहोत सकून औऱ मजा मिलता रहा हैं….” किरण नें सिसकते हुएकहा…
अंजू: दिदी एक् बात कहूँ….?
किरण:हां कहो….क्याँ बात हैं….?
अंजू: दिदी आपकी स्किन कितनी सॉफ्ट हैं…औऱ एक् दम गोरी भि…
किरण: ह्म्म्म अच्छा….
अंजू:हां दिदी सच मे, आपके पति तौ आपसे बहोत प्रेम करते होंगे…
अंजू नें मानो जैसे किरण कि दुखती रग पर्र हाथधर दिया थां….किरण तौ एक् दम सें दुःखी सि होँ गयीँ, ….औऱ कुछबोल नां पे….”दिदी क्याँ हुआ, सच कहा नां मेने….?” अंजू नें अपने हाथो कों किरण कि जाँघो पऱ औऱ थोडा सां ऊपेर लेजाते हुएकहा, तोँ किरण अंजू केँ हाथों कि उंगलियों कों अपनी जाँघो पर्र बुर केँ पास महसूस करके सिहर उठी….”श्िीिइ… “ कहां अंजू, तुम्हे ऐसा लगता होगा…पऱ ऐसा हैं नहीं….”
अंजू: क्यूं क्याँ हुआ….मैने कुछ ग़लतबोल दिया….
अंजूअब किरण कि जाँघो कि जडो तक आँ चुकी थि…औऱअब उसकी उंगलियाँ औऱ किरण कि पैंटी मे कसी हुई बुर केँ बीच 1-2 इंच कां फंसला हि रह गय़ा थां…” सच बताऊ तौ अंजू….इनके पाससमय नहीं होता मेरे लिए….सुभह 6-7 बजे हि चले जाते हैं, औऱ रात कों 10-11 बजेआते हैं… औऱ आते हैं तौ बहोत थकेहुए होते हैं….खानां खाते हें औऱ सो जाते हैं…” किरण नें भि अपनेदिल केँ भडास अंजू केँ सामने निकाल दि…”औऱ तूँ बता तेरा पति तोँ 2 -3 बजे केँ बाद तोँ फ्री होँ जाता होगा….तुम् तौ बहोत खुश भाग्य हौ…”
अंजू: क्याँ खाकखुश क़िस्मत हूं दिदी….कहते हैं नां दूसरी कि थाली मे पड़ा लड्डू बड़ा नज़रआता हैं…वैसे हि मेराहाल हैं। विवाह कों इतनेसाल होँ गये…अभि तक एक् बच्चा भि नहींदे पाएजी मुझे…
किरण: क्यूं कोईकमी हैं तेरे पति मे….
अंजू: दिदी अब एक् हौ तोँ बताऊ…अब केसे कहूँ आपसे मुझे तोँ कहतेहुए भि शरमआती हैं…
किरण: अर्रे इसमे शरमाने वालीबात क्याँ हैं…बता नां….मैने भि तोँ अपनेदिल कि बात तुम्हे बता दि हैं….
अंजू:ठीक हैं दिदी आप् कहती हें तौ बता देती हूं….
फिन अंजू नें किरण केँ पेटिकोट कों औऱ ऊपर सरकाते हुए, उसकीकमर तक ऊपेर चढ़ा दया…”दिदी इसे उतारदूं…” अंजू नें किरण कि पैंटी कों पकड़ते हुए कहा….”क्यूं क्याँ हुआ….” किरण नें पीछे कि तरफफेस घूमाते हुए कहा…”यहा भि कर देती हूं…आपको अच्छा लगेगा….” अंजू नें किरण केँ जवाब कां प्रतीक्षा किए बिना हि उसकी पैंटी कि एलास्टिक मे अपनी उंगलियों कों फसाया औऱ नीचे सरकाने लगी…किरण नें भि अपनी गान्ड कों थोडा सां ऊपेरउठा लिया….जिससे अंजू नें आसानी सें पैंटी कों उसकी टाँगो सें निकाल कर साइड मे रख दिया…औऱ फिन किरण चुतड़ों पर्र बॉडी लोशनलगा कर अपने दोनो हाथों सें किरण केँ चुतड़ों कों मसलते हुए मालिश करनेलगी…
किरण केँ शरीर मे मानो मस्ती कां ज्वालामुखी फूट पड़ा होँ…उसका शरीर एक् दम सें कांप गय़ा…औऱ किरण अपने आप् कों सिसकने सें रोक नां सकी….”श्िीीईईई ओह….” अंजू किरण कों सिसकते हुएदेख मुस्कुराइ औऱ फिन बोलि…” दिदी वोँ क्याँ हैं नां…मेरे पति कां तोँ खड़ा हि नहीं होता। “ अंजू नें किरण केँ चुतड़ों कों दोनोतरफ फेलाकर मसलते हुए कहा…”शीइ क्याँ….? खड़ा नहीं होता…?”
अंजू:हां दिदी…घऱ वालो नें सरकारी जॉबदेख मेरी विवाह कर दि। फिन सुहागरात मे यह दारू पीकरनशे मे आए.औऱआते हि सोगये। हफ़्ता गुजर गय़ा….कुछ नां हुआ, औऱ फिन धीरे-धीरे-2 मुझेपता चला कि, इनमे प्राब्लम हैं….
किरण: (अंजू कि बातसुन कर चोन्कते हुए…)क्याँ इसका मतलब तूने विवाह केँ बाद सें कभी वोँ किया हि नहीं….
अंजू: (मुस्कुराते हुए…) मैनेऐसा कब कहा….चलिए अब सीधी होँ जाए….
किरणपलट कर सीधी हुई औऱ पीठ केँ बललेट गयीँ, ….वोँ हैरत सें अंजू कों देखरही थि….”अगर तुम्हारे पति कां खड़ा नहीं होता तौ तुमने किया केसे…” किरण कि बातसुन कर अंजू शरमाते हुए मुस्कुराइ औऱ फिन धीरे-धीरे सें ऐसे बोलीं….जैसे कोई बहोत बड़ा राज़ खोलने वाली होँ….”दिदी आप् किसी कों बताएँगी तोँ नहीं….” उसके कहने केँ अंदाज़ सें हि किरण केँ मन मे उत्सुकता जाग उठी…दिल तेज़ी सें धड़कने लगा….
किरण: नहीं बताउन्गी….तुँ बता तौ सही….
अंजू: दिदी वोँ सभी किया तौ बहोत बार हैं…पर्र अपने पति केँ संग नहीं….
किरण: क्याँ तुँ यह क्याँ बोलरही हैं…किसके संग कियाफिन….?
अंजू: दिदी….इनकी बहन कां बेटा हैं…जब मेरीनयी-2 विवाह हुईँ थि। तब वोँ मेरी ससुराल मे हमारे पास हि रहता थां…उस वक्त वोँ विद्यालय मे थां….उसी केँ संग किया….
किरण: क्याँ तूने अपने भान्जे केँ संग…छि….
अंजू: तौ दिदी मे क्याँ करती…इनका तोँ खड़ा हि नहीं होता…नाम कि विवाह हुई थि…फिन क्याँ करती…बाहर् किसी केँ संग करती तौ, इज़्ज़त जाने कां ख़तरा रहता…इसीलिए घऱ मे उसकेसंग करना हि ठीकलगा….
किरण: तूने अपने भान्जे केँ संगकर केसे लिया….
अंजू:(अनु नें किरण कि चुचियों केँ ऊपेर बँधे पेटिकोट केँ नाडे कों खेंचकर खोल दिया…औऱ फिन बॉडी लोशन कों हाथो मे लेकर उसकी चुचियों पर्र जैसे हि लगाने लगी तौ, किरण केँ रोम-2 मे मस्ती कि लहर दौड़ गई, …) दिदी मे हि जानती हूं….मे कितना तड़पती थि। जब मेरी सहेलियाँ….अपने पति केँ संग हुई चुदाई केँ किस्से सुनाती थि….रहा नहीं जाता थां…
अंजूअब धीरे-धीरे-2 किरण कि चुचियों पर्र बॉडी लोशन लगाते हुए सहलारही थि….जब किरण कि चुचियों केँ तनेहुए निपल्स अंजू कि हथेलयों केँ बीच मे रगड़ खाते तोँ, किरण मस्ती मे एक् दम सि सिसक उठती….“हाई अंजू तूने अपने भान्जे सें वोँ सभी करवा लिया…” किरण नें मदहोशी मे सिसकते हुएकहा…। “हां दिदी…औऱ कोई तौ थां भि नहीं…वोँ हमारे यहा हि रहता थां….इसीलिए उसकेसंग यहसभी करना मुझे आसानलगा। यह तौ मेरेसंग रात कों सोते भि नहीं थें…”
किरण: तोँ फिन तूनेयह सभी केसेकर लिया….वोँ तेरेसंग यहसभी करने केँ लिएमान केसे गय़ा….
अंजू: दिदी **** सें **** साल कि उमर केँ लड़को मे यहसभी करने कि बहोत तेज ख़्वाहिश होती हैं…वैसे हि मेरे भांजा भि थां…नवीन… मेरी विवाह कों 2 महीने होँ चुके थें….एक् रात वोँ मेरेसंग सोयाहुआ थां.मेरा पति बाहर् अंगान मे सोरहा थां….औऱ सासू ससुरजी भि….सर्दियों केँ दिन थें। वोँ मेरी चारपाई केँ संग वाली चारपाई पर्र लेटाहुआ थां….
आधीरात कों मुझेऐसा लगा कि, कोई मेरी चारपाई पर्र चढ़कर मेरी रज़ाई मे घुस गय़ा हैं…जब मैनेउस तरफ करवटबदल कर अंधेरे मे पूछा तौ, नवीन बोला….मामीजी सर्दी बहोत लगरही हैं….क्याँ मे आपकी रज़ाई मे आपकेसंग जाउ….”
किरण:फिन तुमने क्याँ कहा….
अंजू: मेनेउसे संग सोने केँ लिएकह दिया….पऱ फिन वोँ….(कहते-2 अंजू एक् दम सें चुप हौ गयीँ, …औऱ शरमाते हुए मुस्कारने लगी….)
किरण: (किरण केँ शरीर मे अंजू कि कही बातों नें जैसेआग लगा दि होँ। अब वोँ सुने बिनारह नहीं सकती थि…) फिन क्याँ हुआ.जब उस टाइम करतेहुए नहीं शरमाई तोँ, अब क्यूं शर्मा रही होँ…
अनु: क्याँ दिदी…अब ऐसीबात किसी केँ सामने करोगे तौ, शरम तौ आएगी हि नां…
किरण:देख तूँ मुझे दिदी कहती हैं नां…चल आज सें तुँ मेरी सहेली हैं। औऱ अपनी सहाली सें कुछ नहीं छुपाते….अब जल्दबोल…
अंजू: दिदी मैनेउसे संग सोने केँ लिएहां तौ कर डी….पर्र उसरात मेरा इतना बुराहाल हुआ कि, मत पूछो….
किरण: क्यूं किया उसनेरात कों….
अंजू: दिदी कुछ किया तौ नहीं…फिन मे उसकीतरफ पीठ करकेलेट गई,। औऱ उसका वोँ मुझे मेरेयहा चुतड़ों केँ बीच सारीरात रगड़ ख़ाता हुआ महसूस होता रहा…हाई दिदी क्याँ बताऊ…मेरी हालत बहोत खराब होँ गयीँ, थि…जब सुभहउठी औऱ नहाने गयीँ, तौ, देखा कि मेरी कच्छि एक् दम नीचे सें गीली थि….
किरण: श्िीीईईई फिन….(किरण केँ दिमाग़ मे पिछले दो दिनो मे विनय केँ संग हुइ घटना मानो जैसेफिन सें उसकी आँखो केँ सामने सें गुजर गयीँ, हौ….)
अंजू:फिन क्याँ दिदी….वोँ बच्चा थां….कच्चा खिलाड़ी थां…सुभह मुझसे आँख नहीं मिलापा रहा थां…डर रहा थां बेचारा…फिन मुझेलगा क्यूं नाँ इसी कों पटा लिया जाए…घऱ कि बातघऱ मे हि रह जाएगी…
किरण:फिन तूने केसे पटाया….उसे….
अंजू: दिदी अपनी टाँगे थोडा सां खोला नाँ….
too be continued.
Keep reading and supporting give your valuable feedback and follow for updates thank you। Real incest person can dm mai।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -12
औऱ फिन जैसे हि किरण नें अपनी टाँगो कों खोला….अंजू नें अपना एक् हाथ नीचे लेजाते हुए, किरण कि बुर कि फांको पर्र रख दिया.औऱ धीरे-धीरे-2 मसलने लगी….”शियीयीयीयियी ओह्ह्ह्ह अंजू क्याँ कररही हैं….” उसने अंजू कां हाथ पकड़ते हुए सिसककर कहा….”मालिश कररही हूं दिदी…आपके जिस्म कों ठंडाकर दूँगी….” अंजू नें अपनेहाथ सें किरण कि बुर कि फांको औऱ उसकी बुर केँ दाने कों मसलते हुएकहा थां…किरण मस्ती मे एक् दम सें कांप गयीँ, ….उसकी आँखेबंद होँ गयीँ, ….
अंजू: दिदी फिन वोँ बेचारा मुझसे डरताफिन रहा थां….फिन मैने धीरे-धीरे-2 बहाने बहाने सें उसे अपने शरीर दिखाना शुरुआत कर दिया…कभी जानबुझ करउसे अपनी कच्छि दिखा देती….तौ कभीझुक कर अपनी चुचियों कों…एक् बार वोँ आंगन मे बैठापढ़ रहा थां….औऱ मे कपड़े धोरही थि…हम् दोनो आमने सामने बैठे थि.मेरे यह औऱ सासू माँ ससुरजी खेतों मे गयेहुए थें…फिन मेने बैठे-2 अपने पेटिकोट कों ऊपेरउठा कर अपनी जांघे औऱ झान्टो सें भरी बुर खूब दिखाई उसे…
किरण: (सिसकते हुए…)फिन….? फिनकुछ किया उसने…”
अंजू: कहां दिदी कच्चा थां नां….इसीलिए एक् रात सोतेहुए, मैने हि पहलकर दि….अपना पेटिकोट उठाकर उसके लन्ड पऱ अपनी गान्ड कों रगड़ा। औऱ फिनपता नहीं उसमे हिम्मत कहां सें आई….औऱफिन उसने अपना लन्ड बाहर् निकाल कर पीछे सें मेरी बुर मे पेल दिया….
किरण: क्याँ सच्ची…पीछे सें हि डाल दिया….
अंजू:हां दिदी…फिन क्याँ थां…हौ गय़ा शुरुआत…लगा ठोकने वोँ मुझे। मैने भि पूरासंग दिया…पऱ पहलीबार थां नां बेचारे कां। जल्द पानी निकाल दिया उसने….
किरण: शाइयीईयी हाईए इसका मतलबफिन तेरी बुर प्यासी रह गई, …
अंजू: प्यासी तोँ तब रहती…अगर वोँ रहने देता….दिदी इननये लड़कों मे बुर कों लेकर बड़ाजोश होता हैं….हमेशा ऊपेर चढ़ने कों रेडी रहते हैं….चाहे चारबार पानी फेंक दिया होँ इनके लन्ड नें… पता नहीं केसे खड़ा होँ जाता हैं….
किरण: तोँ उसनेफिन सें किया…
अंजू:हां दिदी…इस बार तौ मेरे ऊपेर हि चढ़ आया…हवा मे टाँगे उठाकर पेल दिया अंदर औऱ कमर हिला -2 करलगा चोदने…। फिन मेने भि खूब गान्ड उछाली औऱ फिनजब बुर नें पानी फेंका तोँ, ठंडी हुईँ….फिन एक् साल तक तौ उसने मुझेखूब चोदा…
किरण:फिन तोँ तेरे बच्चा होँ जानां चाहिए थां.कभी पेट सें नहीं हुई…
अंजू: नहीं दिदी…उसकी उम्र नहीं हुइ थि…उसमे अभि वीर्य बनना शुरुआत नहींहुआ थां….औऱ फिन हम् यहा आँ गये….औऱ वोँ अपने मम्मी बाप केँ यहाचला गय़ा….उसके बाद मोका नहीं मिला….
किरण: तौ तूँ रोज करती थि उसकेसंग….?
अंजू: मे कहां दिदी उसकेबाद तोँ वोँ जब हम् घऱ पऱ अकेले होते…वोँ कही भि शुरुआत हौ जाता.कई बार तौ खड़े-2 हि चोदा उसने मुझे…सच मे दिदी बड़ामजा आता थां.
किरण: क्याँ खड़े खड़े हि…
अंजू:हां दिदी आजकल केँ छोरो केँ शॉंक हैं यह सभी…ऐसे हि अलग -2 तरह केँ तरीकों सें करते हैं…बस इनकी बातों कों मानते रहो….फिन देखो केसेमजा देते हैं….”लो दिदी हौ गय़ा….मेरे कथा भि ख़तम औऱ आपकी मालिश भि…
किरण: अच्छा एक् बातबता तेरीकभी यह नहीं लगता कि, तूनेयह सभी करके बहोत ग़लत किया हैं…पाप किया हैं….
अंजू:लो दिदी कॉन सें जमाने मे जीरही होँ आप्….केसे ग़लतहुआ भला.अगर नां करती तौ, ऐसेघुट -2 करमर नां जाती.जवानी यूँ हि निकल जाती। औऱ किसी कों क्याँ फरक पड़ा…हम् दोनो नें हि मजा किया…आज वोँ अपनी स्थान सुखी हैं.औऱ मे यहा….अच्छा दिदी आप् अब नहाना होँ तौ नहालो.
अंजू कि बातों नें किरण केँ दिमाग़ मे वासना केँ आगजला दि थि….जिसका असर सीधा उसकी बुर पर्र होँ रहा थां…अंजू कि बातें सुनते हुए, उसके जेहन मे विनय केँ संग हुई वोँ घटनाघूम रही थि.वोँ उठकर बाथरूम मे आई, औऱ अपना पेटिकोट उतारकर शवर लेने लगी….शवर लेने केँ बाद वोँ फिन सें साड़ी पहनकर बाहर् आँ गई, …औऱलंच बनाने लगी….अंजू 1:30 बजे वापिस चली गई, …विनय औऱ वशाली दोनोघऱ आए, औऱ फिन तीनो नें खानां खाया…
अंजू कि चुदाई कि बातें उसके दिमाग़ सें निकलने कां नाम हि नहीं लें रही थि….विनय कों खानां ख़ाता देख, उसके दिमाग़ मे अंजू कि कहीहर बातघूम रही थि…वोँ अंजू कि स्थान स्वयं औऱ उसके भान्जे कि स्थान विनय कों रखकरवही सारीबात सोचरही थि….यहसभी सोचते हुए, उसकी बुर मे तेज खेंचाव सां महसूस होनेलगा थां….किरण कि बुर लन्ड माँगरही थि…औऱ लन्ड केँ लिए तरसते हुए अपना कामरस बहारही थि….
विनय औऱ वशाली दोनोखा कर अपने अपनेरूम मे चले गये…मगर वशाली थोड़ी देरबाद बाहर् आई, औऱ रिंकी घऱचली गये…किरण नें गेटबंद किया औऱ बर्तन उठाए रसोई मे रखे, सब लाइट्स औऱ पंखेबंद करके अपनेरूम चली गई, … उसने अपनी साड़ी उतारी, औऱ फिन ब्लाउस औऱ पेटिकोट मे बेड पर्र लेट गये….आज किरण केँ दिल मे मानो जैसेकोई तूफान सें उठा हौ….रह-2कर उसे अंजू कि बातें याद आँ रही थि….औऱ अंजू कि बातयाद करती, तौ विनय कां शॉर्ट मे तनाहुआ लन्ड उसकी आँखो केँ सामने आँ जाता…। “क्याँ यहसभी संभव हैं….क्याँ ऐसा होँ सकता हैं…क्याँ मे औऱ विनय। नहीं नहींयह मे क्याँ सोचरही हूं…”
अगर विनय कों पताचला कि, मे उसके बारे मे क्याँ सोचरही हूं। तोँ वोँ क्याँ सोचेगा…पऱ बुर लन्ड माँगरही थि….जोँ उस टाइम किरण केँ पास नहीं थां…जिसका थां…वोँ उससेसमय नहींदे पाता थां…किरण अपने हि ख्यालों मे खोई हुईँ थि कि, तभीउसे बाहर् सें कुछ आवाज़ आई। वोँ उठी औऱ बाहर् गयीँ, ….
किरण बाहर् आए तोँ, उसने देखा कि रसोई कां डोर खुलाहुआ थां। वोँ रसोई कि तरफ बढ़ी। औऱ जब वोँ रसोई मे पहुँची तौ, उसने देखा कि विनय फ्रिड्ज सें कोल्ड ड्रिंक कि बॉटल निकाल कर अपनेलिए ग्लास मे कोल्ड ड्रिंक डालरहा थां…जब उसने किरण कि तरफ देखा तौ किरण नें मुस्कराते हुए कहा…”विनय मेरेलिए भि ग्लास मे डालदे….” विनय नें मामीजी कि बातसुन कर एक् औऱ ग्लास उठाया औऱ कोल्ड ड्रिंक डालने लगा…फिन उसने बॉटल कों फ्रिड्ज मे रखा औऱ बाहर् आँ गय़ा….किरण नें रसोई कां डोरबंद किया, औऱ फिन विनय केँ हाथ सें कोल्ड ड्रिंक कां ग्लास लेकरहॉल मे नीचे बिछे कार्पेट पऱ बैठकर कोल्ड्ड्रिंक पीनेलगी…
विनय भि मामीजी केँ पासबैठ गय़ा….” क्याँ हुआ नींद नहीं आँ रही…?” किरण नें विनय कि तरफ देखते हुए पूछा…तौ विनय नें नाँ मे सर हिला दिया…बिना साड़ी केँ अपनी मामीजी कों पेटिकोट औऱ ब्लाउस मे कसेहुए गोरे जिस्म जोँ थोडा सां भराहुआ थां…उसके लन्ड मे हलचल सि होनेलगी थि…तभी विनय नें देखा कि, कोल्ड्रींक पीतेहुए, ग्लास सें कोल्ड्रींक छलकी औऱ किरण कि नाभि औऱ पेटिकोट पऱ गिरी…किरण नें पेटिकोट पर्र गिरी हुई थोड़ी सि कोल्ड ड्रिंक तोँ सॉफकर दि….पऱ नाभि पऱ गिरी कोल्ड ड्रिंक वैसे हि लगीरही….
विनय कां ध्यान अबबार-2 अपनी मामीजी कि गहरी नाभि पर्र जारहा थां। दोनो नें कोल्ड ड्रिंक ख़तमकर ली थि…। “चलआजा मे तेरासर सहला देती हूं…” यह कहतेहुए वोँ विनय कां हाथ पकड़कर खड़ी हुई, औऱ विनय कों लेकर अपनेरूम मे आँ गई, … फिन विनयबेड पऱ चढ़ गय़ा। मामीजी नें एसीऑन किया औऱ बेड पऱ आई, औऱ पालती मारकर बैठते हुए, उसने विनय केँ सर कों अपनीगोद मे रखकर उसकेसर कों सहलाना शुरुआत कर दिया….विनय कां फेस किरण केँ पेट कि तरफ थां…जिससे विनय कों मामीजी कि नाभि पऱ कोल्ड ड्रिंक लगी हुई सॉफ नज़र आँ रही थि…जौअब सुख चुकी थि। पऱ ऑरेंज कलर कां निशान सॉफ दिखाई देरहा थां….
फिन अचानक सें पता नहीं विनय कों क्याँ हुआ, विनय नें अपने होंटो कों मामीजी कि नाभि पऱ रखतेहुए चूसना शुरुआत कर दिया….विनय कि इस हरक़त सें किरण कां बदनआग कि तरहदहक उठा…पूरा शरीरऐसे थरथरा गय़ा… जैसे किसी नें उसकेपेट पऱ ठंडी बर्फरख दि होँ…उसने विनय केँ सर कों दोनो हाथो सें पकड़कर उसके होंटो कों अपनी नाभि सें दूर काया…। “ हउंह विनययह क्याँ कररहा हैं….” किरण नें हल्का सां हंसते हुए कहा….पर्र वोँ विनय कि इस हरक़त सें शॉक्ड भि होँ गई, थि….
विनय कों जब अहसास हुआ कि, वोँ क्याँ कर गय़ा हैं। तोँ वोँ हकलाते हुए बोला। “ वोँ मामीजी यहा वोँ कोल्ड ड्रिंक गिरी थि….” उसने किरण कि नाभि कि तरफ इशारा करतेहुए कहा तौ, किरण नें भि सर कों झुकाकर अपनी नाभि कि तरफ देखा तौ, वही अभि भि ऑरेंज कलर कां निशान थां…। “विनय पागल होँ…कोल्ड ड्रिंक पीने कां मन हैं तौ, फ्रिड्ज सें औऱ लें लो….” विनय मामीजी कि बातसुन कर थोडा सां दुःखी हौ गय़ा…” वोँ मन नहीं हैं…बस ऐसे हि….मामीजी प्लीज़ इसेपी लूँ….” विनय नें नाभि कि तरफ इशारा करतेहुए कहा…तोँ वोँ विनय कि बातसुन करहंस पड़ी….
किरण: पागल हौ गये हौ क्याँ…
किरण नें विनय केँ सर कों फिनगोद मे रखकर सहलाते हुए कहा…औऱ पता नहीं क्यूं विनय कों ऐसालगा कि, मामीजी अबउसे मना नहीं करेगी। औऱ नां हि क्रोध….इसीलिए उसनेफिन सें अपने होंटो कों मामीजी कि नाभि पऱ लगाकर उस हिस्से कों चूसना औऱ चाटना शुरुआत कर दिया….” शियीयियीयियी विनयफिन सें शुरुआत होँ गये आहह-आहह नहीं प्लीज़ विनयमत करो नाँ…” किरण नें एक् दम सिसकते हुए कहा…मन तोँ उसका भि नहीं थां कि, विनय उसकी नाभि कों चूसना औऱ चाटना बंदकर दे….पर्र फिनलोक लाज केँ चलतेहुए वोँ घबरारही थि….”प्लीज़ मामीजी….” औऱ यह कहतेहुए उसनेफिन सें अपने होंटो कों किरण कि नाभि पर्र लगा दिया…किरण एक् दम सिहर उठी…उसने अपनासर पीछे कि तरफ लुडकाते हुएबेड कि पुष्ट सें टिका दिया….”शाइयीईयी ओह विनययह क्याँ पागलपन कररहे हौ अहह आहह-आहह उंह”
किरण कि आँखे मस्ती मे बंद होँ गयीँ, थि…औऱफिन विनय नें जैसे हि अपनीजीभ कों किरण कि गहरी नाभि मे घुसाकर ज़ोर-2 घुमाया तोँ, किरण केँ रोंगटे मस्ती मे एक् दम सें खड़े हौ गये….उसने विनय केँ सर कों अपने दोनो हाथों सें पकड़ते हुए अपनेपेट सें औऱ चिपका लिया….” ओह्ह्ह्ह उंह विनय नाँ करो नाँ….प्लीज़ मानजाओ नाँ….शाइयीईयी हाईए….”इस दौरान किरण सिर्फ़ बोलकर हि मनाकर रही थि….पर्र उसने विनय कों पीछे करने कि कॉसिश नहीं कि….किरण कि बुर कि आग एक् बारफिन भड़कउठी थि…
उसे अपनी पैंटी केँ अंदर गीलापन महसूस होनेलगा थां…पूरा जिस्म थरथर कांपरहा थां…वोँ कभी मस्ती मे अपनेसर कों इधरउधर पटकती तोँ, कभी अपने होंटो कों अपने दाँतों केँ बीच मे चबाने लगती….तभी किरण कां ध्यान विनय केँ फूलेहुए शॉर्ट्स कि तरफ गय़ा। तोँ किरण अपनी पलकें झपकाना भि भूल गई, ….विनय कां लन्ड उसकी शॉर्ट्स मे विशाल उभार बनाएहुए थां….जिससे उसके लन्ड कि लंबाई औऱ मोटाई कां अंदाज़ा सॉफ लगाया जा सकता थां.
किरण तोँ मानो जैसे साँस लेना भि भूल गयीँ, होँ…वोँ अपनी मदहोशी भरी आँखो सें विनय केँ शॉर्ट्स मे बनेहुए टेंट कों देखरही थि। तभीउसे अंजू कि कही हुईँ एक्-2 बात उसके दिमाग़ मे कोंधने लगी। मानो जैसे अंजू कि बताई हुईँ किस्सा संजीव होँ होकर उसकी आँखो केँ सामने आँ गई, हौ…किरण कों अपनी बुर मे तेज कुलबुलाहट होती हुईँ सॉफ महसूस होनेलगी थि…उसके हाथो कि उंगलियाँ बेखयाली सें विनय केँ सर केँ बालो मे थिरकरही थि…क्याँ विनयसच मे मेरे शरीर कां लमस पाकरकर गर्म हौ गय़ा हैं…क्याँ विनय कां लन्ड सच मे मेरे शरीर कि गरमी सें खड़ाहुआ हैं। क्याँ विनयसच मे मेरे बारे मे ऐसाकुछ सोचता हैं…जिसकी कल्पना भि कभी मेने नहीं कि….
यहसभी प्रश्न किरण केँ मन मे एक् -2 करके कोंधरहे थें….पर्र इनका जवाब स्वयं किरण केँ पास नहीं थां। जवाब सिर्फ़ विनय केँ पास थां। पऱ अब किरण विनय सें जाने तोँ केसे जाने…विनय कि तोँ छोड़ो, अगर विनयसच मे मुझे एक् स्त्री कि तरह देखता हैं, तौ क्याँ मुझेआगे बढ़कर उससे संबंध बना लेने चाहिए…कम सें कमइस तरसती बुर कों एक् लन्ड तौ मिल जाएगा….छि यह मे क्याँ सोचरही हूं….विनय मेरे बेटे जैसा हैं। वोँ क्याँ सोचेगा….मेरे बारे मे…। क्याँ सोचेगा अगर वोँ स्वयं हि यही चाहता हौ….बेटे जैसा हैं…पऱ बेटा तौ नहीं…किरण तूँ किस जमाने मे जीरही हैं….आज कल तौ यहआमबात हैं…वोँ देहातन अंजू नें भि तोँ अपने भानजे केँ संग….
तभी किरण कों अहसास हुआ, कि, विनय उसकीगोद मे लेटा-2सो गय़ा हैं। उसने विनय कों सीधा करकेबेड पऱ लिटा दिया…औऱ उसके चेहरे कि ओर देखा….अभि भि उसके चेहरे पऱ वही मासूमियत झलकरही थि। जिस पऱ किरण अपनीजान छिढ़कती थि….फिन वोँ अपने आप् कों उसकी शॉर्ट्स कि तरफ देखने सें नाँ रोक पाए…पर्र अबवहा कोई उभार नहीं थां…विनय केँ संग-2 उसका लन्ड भि सो चुका थां….उसने विनय केँ माथे पर्र प्रेम सें चूमा औऱ फिन खड़ी होकर बाहर् आई….”यी वशाली भि नाँ अभि तक नहींआई….” किरण नें झुनझूलाते हुएकहा….
औऱ फिनगेट खोलकर बाहर् गई, …रिंकी कां घऱ उनकेघऱ केँ सामने हि थां….उसने वहा जाकरडोर बेल बजाई तोँ, थोड़ी देरबाद रिंकी नें डोर खोला वशाली भि उसकेसंग मे हि थि….”तुम्हारी तरफघऱ नहीं आनां क्याँ। देख कितना समय हौ गय़ा हैं…?” किरण नें थोडा सां क्रोध दिखाते हुए कहा….”आंटी मे घऱ अकेली हूं…वशाली कों यही रहनेदो नां। हम् यहीघऱ केँ अंदर हि तौ हैं…गेट भि बंदकर रखा थां….” रिंकी नें किरण कि मिन्नत सि करतेहुए कहा….
किरण: अच्छा ठीक हैं…पऱ अबसाम कों हि आनां…मे सोनेलगी हूं। नींदमत खराब करनागेट खटकाकर….
वशाली: जी माँ….
जैसे हि किरण मूडी रिंकी नें फिन सें गेटबंद कर लिया….किरण वापिस अपनेघऱ मे घुसी औऱ गेटबंद करके, अपनेरूम मे चली गई, … जहा विनय उसकेबेड पर्र धीरे-धीरे सोरहा थां…विनय कों देखते हि, वहीसभी उसके दिमाग़ मे फिन सें घूमने लगा….
किरण नें वोँ सभी अपने दिमाग़ सें निकालने कि बहोत कॉसिश कि, पऱ हरबार दिमाग़ कि सुईवही आकरफंस जाती.फिन किरण नें मन हि मन एक् फैंसला किया…औऱ वोँ अबयह जानना चाहती थि कि, आख़िर विनय केँ मन मे हैं क्याँ…औऱ यह जानना इतना आसान नहीं थां…यह सभी जानने केँ लिए किरण कों अपनीकुछ मर्यादाओं कों लंगाना ज़रूरी थां….फिन उसनेसभी कुछताक पऱ रख दिया….किरण बेड पऱ आकरलेट गयीँ, …उसने अपनीपीठ विनय कि तरफकर ली…औऱफिन बहोत देर सोचने केँ बाद उसने अपने पेटिकोट कों अपने चुतड़ों तक ऊपेरउठा लिया….औऱ फिन अपनी पेंटी नीचे सरकाते हुए, अपने शरीर सें अलग करकेवही बेड केँ पलंग केँ नीचेरख डी।
औऱ फिन अपनी गान्ड कों थोडा सां बाहर् निकाल कर विनय कि तरफपीठ करकेलेट गयीँ, …पऱ विनय तौ गहरी नींद मे थां.औऱ अब किरण कों प्रतीक्षा थां विनय केँ उठने कां….वोँ जानना चाहती थि कि, विनयजब उठेगा तौ, उसेइस हालत मे देखकर उसका क्याँ रियेक्शन होगा…क्याँ वोँ कुछ करेगा। याँ नहीं करेगा….पर्र यहसभी तबपता चले…जब विनय नींद सें बाहर् आए…इसीलिए वोँ वैसे हि करवट केँ बल लेटी रही…प्रतीक्षा केँ सिवाए औऱ वोँ कुछकर भि नहीं सकती…पऱ प्रतीक्षा इतना लंबा होँ गय़ा कि, उसे नींदआने लगी…औऱ फिन किरण कों आख़िर नींद नें अपने घेरे मे घेर हि लिया…
दूसरी तरहसाम केँ लगभग 4:30 बजे विनय कि नींद खुली….उसने अपनी आँखे खोली औऱ अपने आप् कों मामीजी केँ रूम मे पाया….लाइट बंद थि। डोर भि बंद थां…इसीलिए बहोत कम रोशनी थि रूम मे…पर्र इतनी थि। कि रूम मे आसानी सें देखाजा सकता थां….विनय कों अब हल्का हल्का दिखाई देनेलगा तौ, उसने अपनी नज़रउस तरफ घुमाई….जिस तरफ उसकी मामीजी लेटी हुई थि….जैसे हि उसके नज़र करवट केँ बल लेटी हुईँ अपनी मामीजी पर्र पड़ी तौ, विनय कि साँसे मानो उसकेहलक मे हि रुक गई, होँ। उसकी आँखो कि पुतलियाँ ऐसेफेल गई, ….जैसे उसने अपने सामने किसी अजीब सि चीज़ कों देख लिया होँ…
सामने उसकी मामीजी उसकीतरफ पीठकिए हुए करवट केँ बल लेटी थि…। उसकी मामीजी नें ब्लॅक कलर कि प्रिंटेड साड़ी औऱ ब्लॅक कलर कां बहोत हि पतला सां ट्रॅन्स्परेंट ब्लाउस पहनाहुआ थां। यहा तक कि उस ब्लाउस केँ नीचे पहनी हुइ किरण कि ब्लॅक कलर कि ब्रा भि सॉफ नज़र आँ रही थि। उसकी साड़ी औऱ पेटिकोट उसकीकमर तक ऊपेर चढ़ाहुआ थां…किरण केँ मोटे औऱ बड़े-2 चुतड़ों कों एक् दम नंगा देखा, मानो जैसे विनय कों साँप सूंघ गय़ा होँ…वोँ कुछ लम्हा बिना पलकें झपकाए अपने सामने मनमोहक औऱ कामुक नज़ारे कों देखता रहा….उसके शरीर मे तेज झुरजुरी दौड़ गयीँ, ….
फिन उसने घबराते हुएरूम मे चारोतरफ देखा, वशाली अभि तक रिंकी केँ घऱ सें नहींआई थि…मामीजी कि मोटी गदराई हुइ गान्ड देख उसके लन्ड नें शॉर्ट केँ अंदर अपना आकार लेना शुरुआत कर दिया थां… औऱ उसने सिसकते हुए, जैसे हि अपने लन्ड केँ ऊपेरहाथ रखा तौ, उसके लन्ड नें ऐसा जबरदस्त झटका खाया कि, विनय कां हाथ भि उसके लन्ड पऱ सें छिटक गय़ा। उसका दिमाग़ एक् दम सुन्न हौ चुका थां…उसे नां कि कुछ सुनाई देरहा थां…औऱ नाँ हि कुछसमझ आँ रहा थां….किरण केँ नंगे चुतड़ों कों देख तौ 80 साल केँ बूढ़े कां लन्ड भि खड़ा हौ जाता.
उसकेदिल कि धड़कने तेज होकरइस बात कि गवाही देरही थि….किउस टाइम विनयकिस हद तक एग्ज़ाइटेड हौ चुका थां….दिल धकधक करताहुआ सीना फाड़कर बाहर् आने कों हौ रहा थां…उसके हाथपेर, औऱ यहा तक कि उसका पूरा जिस्म मामीजी केँ चुतड़ों कों देखते हुए मारे रोमांच केँ कांपउठा थां…उसे अपने गाले कां थूक भि गटकना मुस्किल हौ रहा थां….वोँ चुपचाप धीरे-धीरे-2 बिना आवाज़ किए किरण कि तरफमूह करके करवट केँ बलफिन सें लेट गय़ा…फिन धड़कते दिल केँ संगकुछ देर प्रतीक्षा किया…औऱ फिन थोडा सां घबराते हुए मामीजी कि तरफ खिसका….फिन रुका औऱ फिन सें मामीजी कि तरफ खिसका…औऱ इसबार वोँ मामीजी केँ जिस्म केँ इतना लगभग थां कि, उसे मामीजी केँ गदराए हुए जिस्म सें उठती हुईँ तपिश भि सॉफ महसूस होनेलगी थि….
विनय कों ऐसा लगनेलगा थां कि, सिर्फ़ मामीजी केँ शरीर कि गरमी सें उसका लन्ड पिघल जाएगा…औऱ पानी छोड़ देगा….पऱ फिन भि विनय किसीतरह मैदान मे डटा रहा….वोँ कभी अपने लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें सहलाता तोँ, कभी अपने लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें पकड़कर अपनी मुट्ठी मे कसकरदबा लेता….फिन उसनेकुछ पलों केँ प्रतीक्षा केँ बाद अपने काँपते हुएहाथ कों उठाया औऱ किरण कि नंगीकमर पऱ रख दिया…किरण तौ बेचारी इसी कां प्रतीक्षा करते-2सो गई, थि….मामीजी कि नंगीकमर कों छूते हि, उसके जिस्म मे मानो बिजली सि कोंध गयीँ, होँ….
उसने साँसे तेज होँ चली थि….उसे साँस लेने मे भि परेशानी होनेलगी थि….जब उसके नथुनो सें हवा बाहर् निकलती तोँ, उसकी आवाज़ भि उसरूम मे सॉफ सुनाई देती….फिन उसने अपनीकमर केँ नीचे वाले हिस्से कों आगे कि तरफ सरकाना शुरुआत किया….इंच दरइंच वोँ धीरे-धीरे-2 अपनीकमर केँ नीचे वाले हिस्से कों सरकाता हुआआगे लेँ जाता रहा…औऱ फिन जैसे हि उसका लन्ड शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें मामीजी केँ नंगे चुतड़ों पर्र टचहुआ, तौ उसका पूरा जिस्म कांप गय़ा….दिल कि धड़कने मानो जैसेथम गई, होँ। उसने अपनी सांसो पर्र काबू पातेहुए, अपनेसर कों हल्का सां उठाकर किरण केँ फेस कि तरफ देखा….
औऱ फिनजब विनय कों पूरा यकीन होँ गय़ा कि, मामीजी गहरी नींद मे हैं….तोँ उसने अपनेसर कों वापिस नीचेरख लिया….विनय नें अपना एक् हाथ नीचे लेजाते हुए, अपने लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें पकड़ा औऱ फिन थोडा सां डरतेहुए, अपने लन्ड कों पकड़कर किरण कि गान्ड कि दरार मे घुसाते हुए रगड़ने लगा….”आहह-आहह” विनय हल्का सां सिसकउठा। उसका लन्ड अब एक् दम लोहे कि रोड कि तरहतन कर खड़ा थां….वोँ शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें अपने लन्ड कों किरण केँ चुतड़ों कि दरार मे रगड़कर मदहोश हुआजा रहा थां….
पर्र आज मोका इतना अच्छा थां कि, विनयउसे अपनेहाथ सें जाने नहीं देना चाहता थां…वोँ थोडा सां पीछे कि तरफ खिसका। औऱ फिन अपने शॉर्ट्स कि ज़िपखोल कर अपने लन्ड कों बाहर् निकाला….औऱ फिन सें पहले वाली पोज़िशन मे आँ गय़ा….कुछ पलों केँ प्रतीक्षा केँ बाद उसनेफिन सें अपने लन्ड कों किरण केँ चुतड़ों कि दरार मे रगड़ा…तोँ इसबार उसका लन्ड किरण कि दरार मे सरकता हुआ, उसकी गान्ड केँ छेद पऱ जा लगा….”विनय कि तोँ आत्मा अंदर तक हिल गयीँ, ….उसे अपने लन्ड केँ सुपाडे पर्र तेज सरसाहट महसूस हुई…
औऱ अगले हि लम्हा विनय कि आँखे मस्ती मे बंद होतीचली गयीँ, …उसने अपने लन्ड सें हाथ हटाया, औऱ किरण कि कमर कों उसीहाथ सें कसतेहुए उससे एक् दम चिपक गय़ा…मामीजी केँ शरीर केँ सुखद अहसास सें विनय एक् दम मदहोश होँ गय़ा थां….वासना नें डर कां जैसेदमन कर दिया थां। औऱ वासना केँ आवेश मे विनयसभी कुछभूल बैठा थां…वोँ धीरे-धीरे-2 अपनीकमर कों हिलाने लगा…उसके लन्ड कां सुपाडा जब किरण कि गान्ड केँ छेद पऱ रगड़ ख़ाता तोँ, उसका पूरा जिस्म सिहर जाता….
“किरण नें अपना एक् हाथ पीछे लेजाकर विनय कि जाँघ पऱ रखाहुआ थां। वोँ अपने पीछे लेटेहुए विनय कि जाँघ पऱ हाथरखे अपनी गान्ड पीछे कि ओर दाखेल रही थि…विनय कां लन्ड उसकी गान्ड केँ छेद मे अंदर बाहर् हौ रहा थां…जब विनय अपने लन्ड कों उसकी गान्ड केँ छेद सें बाहर् खेंचता तोँ, किरण भि अपनी गान्ड कों आगे कि तरफ सरकाती। औऱ फिनजब विनय अपने लन्ड कों उसकी गान्ड केँ छेद मे चांपता, तोँ वोँ भि अपनी गान्ड विनय कि तरफ पीछे कि ओर धकेल्ती…जिससे विनय कि जाँघो कि जडे उसके चुतड़ों सें आकर चिपक जाती…”ओह्ह्ह्ह उंह श्िीीईई विनय ओह्ह्ह……” तभी उसकी बुर मे तेज रिसाव होने लगा….खुशी चरम पऱ पहुँच गय़ा….बुर सें निकले पानी सें उसकी कालीघनी झन्टे एक् दम सें चिपचिपा गई, …
औऱ फिन किरण एक् दम सें उठकरबैठ गयीँ, ….उसकी साँसे उखड़ी हुई थि…उसने बेड पर्र नज़र मारी…पऱ वहाकोई नहीं थां.उसकी साड़ी औऱ पेटिकोट अभि तक उसकीकमर पर्र चढ़ाहुआ थां….किरण नें अपनी आँखो कों सॉफ किया…उबासी ली….”ओह्ह यह तौ सपना थां….” किरण अपने आप् मे हि बुदबुदाई…फिन तभी उसके दिमाग़ मे आया कि, विनय भि तोँ यही सोया थां…औऱ अचानक सें उसेयह सपना केसे आँ गय़ा…क्याँ विनय नें उसके चुतड़ों कों देखकर कुछ किया थां…याँ फिन उसने देखा हि नां होँ….
too be continued.
Keep reading and supporting give your valuable feedback and follow for updates thank you
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजक एपसोड हैं भइया मज़ा आँ गय़ा अगले रोमांचकारी धमाकेदार औऱ चुदाईदार एपसोड कि प्रतिक्षा रहेगी जल्द सें दिजिएगा
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Ab aage.
किरण अभि इन्ही ख्यालों मे खोई हुई थि कि, उसे अपने चुतड़ों कि दरार मे औऱ गान्ड केँ छेद पर्र कुछ चिपचिपा सां महसूस हुआ….उसने अपना एक् हाथ पीछे लेजाकर अपनी गान्ड कि दरार मे लगाकर देखा, तोँ वहाकुछ गीला सां फील हुआ….फिन उसने अपनी उंगलियों कों अपने आँखो केँ सामने लाकर देखा तौ, यह वाइटकलर कि जेल जैसाकुछ थां…किरण कां दिलयह देखकर मानो जैसे धड़कना हि भूल गय़ा हौ….यह विनय केँ लन्ड सें निकाला उसका वीरे थां….भले हि उस टाइम विनयरूम मे नहीं थां… पर्र वोँ अपने लन्ड केँ चाप किरण केँ चुतड़ों केँ बीच मे छोड़ गय़ा थां….
किरण कां शकअब यकीन मे बदल चुका थां….किरण कों कुछसमझ मे नहीं आँ रहा थां…आख़िर उसेऐसा सपना क्यूं आया…उसने कभी भि अपने पति सें अपनी गान्ड नहीं मरवाई थि….किरण जानती थि कि, गान्ड मरवाने मे पहलीबार कितनी परेशानी होती हैं…औऱ विनय नें ख्वाब मे उसकी गान्ड मारी थि….आख़िर ऐसा हि सपना क्यूं आया…शायद विनयजब अपना लन्ड उसकी गान्ड केँ छेद पर्र रगड़रहा थां…तब वोँ कच्ची पक्की नींद मे हौ….इसलिये उससेजब अपनी गान्ड केँ छेद पर्र जब विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कि रगड़ महसूस हुईँ तौ वोँ इसतरह कां सपना देखने लगी हौ….
किरणवही बैठीइसी तरह केँ क्यास लगारही थि…कि उससे बाहर् सें डोरबेल सुनाई दि….वोँ बेड सें उठी अपनी साड़ी ठीक कि, औऱ लाइटऑन करकेसमय देखा तौ, 5:30 बजरहे थें….
किरणरूम सें निकलकर बाहर् आई तौ देखा विनयहाल मे बैठाहुआ टेलीविज़न देखरहा थां….जैसे हि उसने विनय कि तरफ देखा तोँ, विनय नें अपनी नज़रें चुरा ली….किरण विनय कि तरफ देखते हुएगेट कि तरफचली गयीँ,। किरण नें गेट खोला तोँ, सामने वशाली खड़ी थि…वशाली अंदरचली गयीँ, ….किरण नें गेटबंद किया औऱ फिन बाथरूम मे घुस गई, …बाथरूम केँ डोर कों अंदर सें बंद किया औऱ फिन अपनी साड़ी औऱ पेटिकोट अपनीकमर तक उठाकर अपनी गान्ड पर्र लगेहुए विनय केँ सुख चुके वीर्य कों धोने लगी…फिन उसने अपने चुतड़ों कों टवल सें पोन्छा औऱ वहा पर्र लटकरही वाइटकलर कि पैंटी उठाकर पहनली।
दूसरी तरफ वशाली विनय केँ पास जाकर सोफे पऱ बैठगये थें….जब उसने देखा कि मामीजी बाथरूम मे घुसी हैं, तोँ उसने मोका देखते हुए, विनय सें कहा….”विनय….”
विनय: हूं….
वैशाली: वोँ रिंकी उसदिन केँ लिए सॉरीबोल रही हैं….
विनय: तोँ मे क्याँ करूँ….मुझे अब उससेकोई बात नहीं करनी…
वशाली: विनय प्लीज़ उसे क्षमा करदे नाँ….वोँ बारबार मुझसे कहरही थि कि, मेरे विनय सें फिन सें दोस्ती करवादो….
विनय:उस दिन तौ वोँ अपने आप् मे बड़ीबन रही थि…उससे कह देना कि, अब मुझे उससे दोस्ती नहीं करनी….
वशाली: प्लीज़ विनयमान जाओ नाँ….पता हैं वोँ कितना रोरही थि…
विनय: क्याँ वोँ क्यूं रोरही थि….?
वशाली: इसलिये केँ अब तुम् उससेबात नहीं करते….प्लीज़ भइया एक् बारउसे क्षमा कर दो….सॉरी भि तोँ बोलरही हैं….
विनय:ठीक हैं….पर्र उससेकह देना….आगे सें कभी मेरा मज़ाक नाँ उड़ाए….
तभी किरण बाथरूम सें बाहर् निकली तोँ दोनो एक् दम सें चुप हौ गये.अब वशाली केँ पेट मे कीड़े कुलबुला रहे थें….वोँ जल्द सें जल्दयह खबर रिंकी कों बताना चाहती थि…आख़िर उसकी बुर कां दाना भि तोँ अब फड़कने लगा थां….रिंकी नें उसे अपनी भइया केँ संग सेट्टिंग करवाने कां प्रॉमिस किया थां….इसलिये वशाली भि फिन सें रिंकी कां संग देनेलगी थि। किरण नें रसोई मे पहुँच करचाइ बनाई औऱ फिन तीनो नें चाइपी। शीतल भि अपने बच्चों कों लेकरवहा आँ गये…वशाली नें जब देखा केँ किरणअब मस्सी केँ संग बातों मे मगन हैं, तौ खिसककर बाहर् चली गई, ….औऱ सीधे जाकर रिंकी कों यहखबर बताए….
शीतलकुछ देरवहा बैठी औऱ फिन किरण सें कहा कि, उसे बाज़ार तक सब्जी लेने जानां हैं…यह बोलकर वोँ अपने बच्चो कों छोड़कर वहीचली गयीँ, …दूसरी तरफ विनय केँ विद्यालय केँ बाहर् एक् महिला अपने चेहरे कों दुपट्टे सें पूरीतरह कवरकिए हुए खड़ी थि…उसने गेट कों दोतीन बारनॉक किया, तोँ अंजू नें थोड़ी देरबाद विद्यालय कां छोटा वाला साइडगेट खोला….”कैसी हौ अंजू….?” उसने अंजू कि तरफ देखते हुएकहा….
अंजू: मे ठीक हूं….आप् यहाकोई ज़रूरी काम थां….?
स्त्री: मेने जोँ कहा थां….वोँ कामहुआ कि नहीं…?
अंजू: धुँआ उठनेलगा हैं….आग किसी भि टाइम भड़क सकती हैं….
महिला: (कुछ पैसे निकाल कर अंजू कों देतेहुए….) यहरखो जब मेराकाम हौ जाएगा, तौ तय कि हुइ कीमत तुझेही मिल जाएगी….
अंजू:जी धन्यवाद….आइए नाँ अंदर…
स्त्री: नहीं अभि मुझेकाम हैं….
अंजू:ठीक हैं जैसे आपकी मरजी…
उसकेबाद वोँ स्त्री चली गयीँ, ….अंजू नें गेटबंद कर लिया….इधर किरणरात केँ खाने कि तैयारी मे बिज़ी थि….पऱ दिमाग़ मे आज जौ हुआ थां। वहीसभी घूमरहा थां….जब सें वोँ उठी, तब सें उसे अपनी बुर मे टीस उठती हुईँ महसूस हौ रही थि….वोँ रसोई मे काम करतेहुए बार -2 मूडकर विनय कों देखरही थि…विनय उससे नज़रें चुरारहा थां। यह किरण भाँप चुकी थि….औऱ उसका अंदाज़ा अब औऱ पक्का होनेलगा थां। कहते हैं नाँ चोर कि दाढ़ी मे तिनका…वही हाल विनय कां उस टाइम थां। भले हि किरण नें अभि तक विनय सें ऐसाकुछ नहींकहा थां…जिससे विनय कों पता चलता कि, उसकी मामीजी कों उसकी हरकतों कां पताचल चुका हैं……पर्र फिन भि नज़ाने क्यूं विनय केँ मन मे अजीब सां डर बैठाहुआ थां….
बुर मे उठती मीठीटीस उसेबार -2 विनय कि तरफ देखने पर्र मजबूर कररही थि…किरण कि बुर चीख-2कर लन्ड माँगरही थि। किरण नें रात कां खानां रेडीकर लिया….औऱ फिन अपना पसीना सुखाते हुए वोँ विनय औऱ वशाली केँ पास जाकरबैठ गये….विनय सोफे केँ बीच मे बैठाहुआ थां….एक् तरफ वशाली थि….औऱ दूसरी तरफ किरण…। “क्याँ हुआ बड़ेचुप-2 हौ तुम् दोनो….” उसने विनय केँ बालो कों सवारते हुएकहा। तौ, विनय थोडा सां चोंक गय़ा….हालाँकि चोन्कने वालीबात नहीं थि…वोँ थोडा सां घबराया हुआलग रहा थां…
उसेडर थां कि, कही मामीजी कों उसके लन्ड सें निकले पानी कां जौ उसने मामीजी कि गान्ड कि दर्रार मे निकाला हैं…वोँ पता नाँ चल जाए….”आँ ऐसे हि…” विनय नें हकलाते हुए कहा….औऱ उठकर अपनेरूम मे चला गय़ा, अब किरणसमझ चुकी थि…कि विनय दोपहर कि हरक़त केँ कारणडरा हुआ हैं। अब उसने फैंसला कर लिया थां कि, जबउसे चोदने केँ लिए पागल एक् लड़काघऱ मे जवान औऱ फ्रेश लन्ड लेकरघूम रहा हैं…तोँ फिन वोँ क्यूं मर-2कर जिए….क्यूं नाँ वोँ अपने जिस्म औऱ बुर कि प्यास कों विनए केँ लन्ड सें बुझा लेँ….आख़िर विनय भि तौ उसका चोदना चाहता हैं…औऱ पता नहीं कितनी बार वोँ मुझे ख्यालों मे चोद भि चुका होगा। औऱ मुझेकुछ पता भि नहींचला….
यहीसभी सोचते हुएकब 8 बज गये….किरण कों पता हि नहींचला… किरण कि तंद्रा तब टूटी….जब वशाली नें पासआकर उसे हिलाया….”क क क्याँ हुआ वशाली….?” उसने वशाली कि तरफ देखते हुए पूछा….”हहा हा मम्मा आप् डर क्यूं गये…?” वशाली नें हंसते हुएकहा….” नहीं तोँ वोँ मे कुछसोच रही थि…तूँ बता क्याँ हुआ….?”
वशाली: मोम 8 बज चुके हैं….औऱ मुझेभूख लगी हैं….
किरण:ठीक हैं….मे खानां लगा देती हूं…तुम् जाकर विनय कों बुलालाओ….
वशाली विनय कों बुलाने उसकेरूम मे चली गई, ….किरण नें जल्द सें टेबल पऱ खानां लगाया….औऱ फिन तीनो नें संग मे हि खानां खा लिया….उस रात कों अजय 11 बजेघऱ वापिस आया…आज भि वोँ दारू पीकरआया थां…इसलिये खानां खाया औऱ बेड पऱ लेटते हि सो गय़ा…किरण बेड पऱ लेटी हुइ अपनी क़िस्मत कों कोसरही थि….पऱअब उसनेआगे बढ़ने केँ बारे मे सोच लिया थां…चाहे कुछ भि हौ जाए…मे अब औऱ घुट-2कर नहींजी सकती….मुझे भि लाइफ कों एंजाय करने कां हक़ हैं…पिछले 8 सालो मे मे इसघऱ मे सिर्फ़ नौकरो कि तरहकाम हि तौ करतीरही हूं।
अगली सुबन किरण 6 बजे उठी…उसने अजय कों नाश्ता बनाकर दिया तोँ, बाकीसभी केँ लिए भि पहले सें नाश्ता बनाकर रख लिया…आज कां प्लान उसके दिमाग़ मे रेडी थां…वोँ जानती थि, कि उसे मंज़िल तक पहुँचना आसानकाम नहीं हैं….पऱ जौ उसने सोचा थां…अगर वोँ धीरे-धीरे-2 कदमसही ढंग सें बढ़ेगे तोँ, वोँ जल्द हि विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर मे लेने कां सपना पूराकर सकती हैं…
अजय ऑफीस केँ लिए निकल गय़ा….विनय औऱ वशाली दोनो 7 बजेउठ गये…। दोनोनहा धोकर फ्रेश हुए, औऱ नाश्ता करके टेलीविज़न देखने लगी.तभी बाहर् डोरबेल बजी तौ, किरण नें जाकरगेट खोला….सामने रिंकी खड़ी थि….”नमस्कार आंटीजी…” रिंकी नें अंदरआते हुएकहा…
.”नमस्कार बेटा….”
रिंकी: वशाली कहां पर्र हैं…?
किरण: अंदर हि हैं….
फिन रिंकी अंदरआई, किरण रसोई मे बर्तन सॉफ करने लगी….जब रिंकी नें विनय कों वशाली केँ पास बैठे देखा तौ, उसने मुस्करा कर विनय कि तरफ देखा….औऱ फिन पहले वशाली कि तरफहाथ बढ़ाया…औऱ हाथ मिलाने केँ बाद विनय कि तरफहाथ बढ़ाया….विनय नें रिंकी केँ फेस कि तरफ देखा….जोँ बड़ीअदा केँ संग मुस्करा रही थि…वशाली नें विनय कों कोहनी मारते हुए इशारा किया तौ, विनय नें अपनाहाथ आगे बढ़ा दिया.“अब तौ नाराज़ नहीं हौ नां….?” रिंकी नें मुस्कराते हुए पूछा….तोँ विनय नें नां मे सर हिला दिया….
रिंकी: चल वशाली मेरेघऱ चलते हैं….
वशाली: चलठीक हैं एक् मिनिट माँ कों बतादूं…
रिंकी: जल्दकर….
वशाली रसोई मे गयीँ, …औऱ किरण कों बताकर रिंकी केँ घऱचली गई,। किरण तोँ स्वयं चाहती थि कि, वोँ विनय केँ संगघऱ मे अकेली रहे। पर्र जैसे हि रिंकी औऱ वशाली गये, तौ शीतलवहा आँ धमकी….अपने बच्चो कों भि संगली आई थि….किरण बर्तन सॉफ करके बाहर् आई…औऱ नीचे चटाई पर्र बैठते हुए बोलीं….”होँ गय़ा घऱ कां काम ख़तम दिदी…?”
शीतल:हां अभि निबटा करआई हूं…औऱ तुम्हारा….
किरण:बस सिर्फ़ सॉफ सफाई कां कामबचा हैं….आंजू आँ जाएगे तौ वोँ भि ख़तम हौ जाएगा….
शीतल: किरणयह तूने बहोत अच्छा किया….यह घऱ भि तोँ कितना बड़ा हैं। सॉफ सफाई करते-2कमर टूट जाती होगी तेरी….
किरण:हां दिदी….
शीतल: अक्चा किरण मे बाज़ार जारही हूं….बच्चो केँ लिएकुछ कपड़े लेने थें…तुँ भि संग मे चल….तुझे ही तौ कपड़ों कि कवालिटी केँ बारे मे काफ़ी नालेज हैं….
किरण: दिदी पर्र घऱ कां काम….
शीतल: वोँ नौकरानी किसलिए रखी हैं….वोँ कर देगेसॉफ सफाई.वैसे भि 1 डेढ़ घंटे मे वापिस आँ जाएँगे…
किरण:ठीक हैं दिदी….आप् बैठो मे सजधजकर होकरआती हूं….तब तक अंजू भि आँ जाएगी…उसको काम समझाकर चलते हैं….
शीतल:ठीक हैं….जल्द कर….
किरणउठ कर अपनेरूम मे चली गई, …15 मिनिट बादजब वोँ सजधजकर होकर बाहर् आई तौ, उसी वक्त अंजू भि वहा आँ गयीँ, ….किरण नें उसे बताया कि सिर्फ़ सॉफ सफाई कां हि काम करना हैं….औऱ वोँ काम ख़तमकर जा सकती हैं….अंजू कों काम समझाने केँ बाद वोँ शीतल औऱ उसके बच्चो केँ संगघऱ सें निकल गये…उन सभी केँ जाने केँ बाद अंजू नें गेट कों अंदर सें बंद किया औऱ अंदरहाल मे आँ गई, ….वहा सोफे पर्र विनय कों बैठादेख वोँ मुस्कराते हुए उसकेपास चली गयीँ, ….औऱ सोफे केँ सामने नीचे बैठते हुए उसने अपना एक् हाथ विनय कि जाँघ पऱ उसके लन्ड केँ पासरख दिया….
अंजू: क्याँ हुआ मेरे राजा कों…बड़े चुपचुप होँ….
अंजू नें अपनेहाथ कि उंगलियों सें जैसे हि विनय केँ लन्ड कों छुआ तोँ, विनय केँ शरीर मे झुरजुरी दौड़ गई, ….उसने तरसती नज़रो सें अंजू कि तरफ देखा औऱ उखड़ी हुइ सांसो कों संभालते हुए बोला…”क कुछ भि तोँ नहीं…” अंजू विनय कि बातसुन कर मुस्कुराइ….”आज करना हैं….” अंजू नें विनय केँ लन्ड कों उसके शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें सहलाते हुए कहा….तोँ विनय नें अंजू कि आँखो मे झाँकते हुएहां मे सर हिला दिया…
अंजू:ठीक हैं…मगर पहलेकाम ख़तम करना पड़ेगा….नहीं तोँ अगर दिदी घऱ आँ गये….औऱ काम ख़तम नां हुआ…तौ क्याँ कहूँगी उनसे…। मे जल्द -2 काम ख़तमकर लेती हूं….
विनय:ठीक हैं….
अंजूउठी औऱ बाहर् गेट केँ पास पड़ी हुइ झाड़ू कों उठाकर लाई…” विनय बाबूजी मेरे सहायता करो नां काम करवाने मे….जितनी जल्दकाम ख़तम होगा…उतना ज्यादा वक्तहमे मिल जाएगा…” अंजू नें अपने होंटो कों दाँतों मे दबाते हुए कहा….अंजू कि यहअदा देखकर विनय केँ लन्ड नें शॉर्ट्स मे झटका खाया…”आप् बालटी मे पानीभर कर रखो…तब तक मे झाड़ू लगाती हूं…”
विनय:ठीक हैं….
विनय नें जलदी सें बालटी उठाई…औऱ बाथरूम मे जाकर उसमे पानी भरने लगा….पानी भरकर उसने उसमे पोच्छा डालकर बालटी कों बाहर् लें आया…अंजू किरण केँ रूम कि सफाईकर रही थि…विनय सीधा मामीजी केँ रूम मे चला गय़ा…अंजू नें झाड़ू लगाते हुए विनय कि तरफ देखा। विनय उसके ब्लाउस मे झाँकरही चुचियों कों खा जाने वाली नज़रो सें देखरहा थां…”विनय बाबू तुम्हे मेरी चुचियाँ अच्छी लगती हैं नाँ…?” अंजू नें विनय कि आँखो मे झाँकते हुए पूछा…”हां” अंजू नें अपनी साड़ी केँ पल्लू कों अपनी चुचियों सें हटाकर अपनीकमर मे फँसा लिया….”कितनी ….” उसनेफिन सें झुककर झाड़ू मारते हुएकहा….
विनय: बहोत अधिक….
अंजू: देखनी हैं….?
विनय:हां….
अंजू: बाहर् कां गेटबंद हैं नाँ….
विनय:हां बंद हैं…
अंजू:फिन थोडा सबरकरो मेरे राजा….आज सभीकुछ खोलकर दिखाउन्गि तुम्हे….फिन अंजू नें जल्द जल्द सारे कमरो मे झाड़ू मारा…औऱ फिन उसने बालटी औऱ पूछा लेकरहाल मे लगाना शुरुआत कर दिया…फिन अंजू नें सबसे पहले किरण केँ रूम मे पोन्छा मारा उसकेबाद ममता केँ रूम मे फिन वोँ बालटी लेकरजब विनय केँ रूम मे आए तोँ देखा, विनयबेड पऱ बैठाहुआ थां…उसने बालटी नीचे रखी…औऱ नीचे पैरो केँ बलबैठ कर पोंच्छा लगाना शुरुआत कर दिया…
विनय केँ नज़ारे तौ जैसे ब्लाउस मे सें झाँकरही अंजू कि चुचियों पर्र चिपक सि गई, थि….अंजू भि विनय कि तरसती हुई नज़रों कां मजा लें कर अपनी चुचियों कों औऱ झुका-2कर दिखारही थि….अंजू नें जल्द सें विनय केँ रूम मे पोन्छा लगाया….औऱ फिन खड़े होकर बालटी उठाते हुए बोलि….”बस निपट गय़ा काम…मे बालटी रखकरआती हूं…” यहकहकर अंजू बाहर् गयीँ, ….औऱ बालटी औऱ पोंछे कों रखकर विनय केँ रूम मे आँ गई, …विनय तौ इसीसमय केँ प्रतीक्षा मे बैठाहुआ थां…अंजू जैसे हि विनय केँ पासआई, विनयबेड सें नीचेउतर कर खड़ा होँ गय़ा…अंजू नें विनय केँ शॉर्ट्स मे तनेहुए उसके लन्ड कि तरफ देखा, औऱ फिन मुस्कुराते हुए, अपना एक् हाथ विनय केँ लन्ड पर्र शॉर्ट्स केँ ऊपेररख दिया।
अंजू:यह ऐसे हि खड़ा करके रखते हौ क्याँ आप्….?
अंजू नें जैसे हि शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें विनय केँ लन्ड कों मुट्ठी मे भरा। तौ विनय एक् दम सें सिसक उठा….”कहो क्यूं खड़ाकर रखा हैं इससे…” अंजू धीरे-धीरे-2 विनय केँ लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें सहलाते हुए विनय कि हालत कां मजा लेँ रही थि…”मेरी बुर मे घुसने केँ लिए नाँ….?” उसनेइस बार विनय केँ लन्ड कों अपनी मुट्ठी मे भर हलका सां मसला, तौ विनय एक् दम सें सिसकते हुएबोल पड़ा….”हां….” अंजू विनय कि बातसुन कर मुस्कुराइ….”तौ फिन इतनी सें देर क्यूं रुकाहुआ थां तुँ…” अंजू नें एक् हाथ सें विनय केँ लन्ड कों सहलाते हुए दूसरे हाथ कों नीचे लेजाते हुए विनय केँ शॉर्ट्स कों नीचे सरकाना शुरुआत कर दिया….
फिन वोँ एक् दम सें नीचे पैरो केँ बलबैठ गई….विनय कां शॉर्ट्स उसके शरीर कां संग छोड़ चुका थां….उसका तनाहुआ 7 इंच कां लन्ड हवा मे झटकेखा रहा थां….अंजू कि आँखे विनय केँ झटके खातेतने हुए लन्ड कों देखकर चमक उठी…”बोल नां फिन इतनीदेर सें क्यूं रुकाहुआ थां। “ इसबार जैसे हि अंजू नें विनय केँ नंगे लन्ड कों हाथ मे लेकर हिलाया तौ, विनय कों लगा जैसे उसके पैरो मे खड़े रहने केँ लिएजान नाँ बची होँ….उसके हाथ पांवऐसे कांप गए…जैसे वोँ सर्दी केँ मौसम मे बरफ पऱ नंगा खड़ा होँ…”सीईईई अह्ह्ह्ह वोँ वोँ तुम् कामकर रही थि….” विनय नें लड़खड़ाती हुई आवाज़ मे कहा…
अंजू: तौ क्याँ हुआ…मे तौ कब सें प्रतीक्षा कररही थि कि, तुम् कब मुझे पकड़कर मुझेचोद डालो….पऱ तुम् तोँ किसीकाम केँ नहीं होँ….डरते हौ मुझसे….(अंजू नें विनय केँ लन्ड कों तेज़ी सें हिलाना शुरुआत कर दिया…)
विनय:क क्याँ सच मे…?
अंजू: (मुँह बनाते हुए) औऱ नहीं तोँ क्याँ….देखो तुम्हारा लन्ड बुर मे लेने केँ लिए मे साड़ी केँ नीचे पैंटी औऱ ब्रा भि नहींपहन कर आई….यह देखो…
यह कहतेहुए अंजू नें अपने ब्लाउज केँ हुक्स खोलने शुरुआत करदिए। विनय नज़रें गाढ़े अंजू कि चुचियों कि तरफदेख रहा थां…जैसे हि अंजू केँ ब्लाउज केँ हुक्स खुले तोँ, अंजू केँ 38 साइज़ कि बड़ी-2 चुचियाँ उछलकर बाहर् आँ गई…साँवले रंग कि चुचियों पर्र बनेहुए कालेरंग-2 केँ बड़े-2 गहरे औऱ कालेरंग केँ मोटे-2 निपल्स देख विनय केँ लन्ड नें झटके खाने शुरुआत कर दिए….पर्र अंजू नें अभि औऱ कहर उसके लन्ड पर्र ढाना थां। “देखा मे तुम्हारे लिए बिना ब्रा पहने आई…औऱयह देखो…। पैंटी भि नहीं पहनी नीचे…”यह कहतेहुए उसने अपनी साड़ी औऱ पेटिकोट कों अपनीकमर तक ऊपेरउठा लिया…औऱ अपनी जाँघो कों फेलाते हुए अपनी बुर कों विनय कों दिखाते हुए बोलीं….
यहसभी देखते हुए विनय कां लन्ड झटके पे झटकेखा रहा थां…फिन अंजू नें विनय केँ लन्ड कों मुट्ठी मे भर लिया औऱ औऱ विनय कि आँखो मे झाँकते हुए बोलीं….”ओह्ह विनय बाबूऐसा लन्ड मेरे नसीब मे होगा मेनेकभी सोचा भि नहीं थां…” यह कहतेहुए उसनेझुक कर विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कों अपने मुँह मे भर लिया औऱ अपनासर आगे पीछे करतेहुए, तेज़ी सें विनय केँ लन्ड कों मुँह केँ अंदर बाहर् करनेलगी… किरण कों गएहुए एक् घंटाबीत चुका थां….वोँ नहीं चाहती थि कि, किरण केँ आने सें पहले वोँ प्यासी रहजाए….
उसने तेज़ी सें सर हिलाते हुए विनय केँ लन्ड कों चूसना शुरुआत कर दिया…फिन थोड़ी देरबाद विनय केँ लन्ड कों मुँह सें बाहर् निकाला…औऱ उस पऱ अपनाथूक गिराते हुए, विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे औऱ चारोतरफ हाथ सें हिलाते हुए फेलाने लगी….
विनय भि एक् दमजोश सें भर चुका थां…उसने अपनी टीशर्ट भि उतारकर बेड पऱ फेंक दि थि….अंजू खड़ी हुईँ, औऱ विनय केँ लन्ड कों हिलाते हुए बोलि…”चल बेड पऱ लेट जा…आज मुझे अपने घोड़े जैसे लन्ड पर्र सवारी करनेदे….”
विनय तोँ जैसेइसी लम्हा केँ प्रतीक्षा मे अपनी जीवनकाट रहा थां…वोँ बेड पर्र एक् दम सीधालेट गय़ा….अंजू बेड पऱ चढ़ि…औऱ फिन अपने दोनो घुटनो कों विनय कि जाँघो केँ दोनोतरफ टिकाते हुए, उसके ऊपेर आँ गई। “आज तोँ घऱ मे कोई भि नहीं हैं….आज खूबउछल-2 कर तेरे लन्ड पर्र बुर पटकुंगी….चल अब रेडी हौ जा….”
यह कहतेहुए उसने अपना एक् हाथ नीचे लेजाते हुए विनय केँ लन्ड कों पकड़कर अपनी बुर केँ छेद पर्र सेट किया औऱ….धीरे-धीरे-2 अपनी बुर कों नीचे कि ओर दबाते हुए बैठने लगी…विनय केँ लन्ड कां सुपाडा अंजू कि पनियाई हुई बुर केँ छेद कों फेलाता हुआ धीरे-धीरे-2 अंदर घुसता चला गय़ा….फिन जैसे हि विनय कां पूरा लन्ड अंजू कि बुर केँ गहराईयो मे उतरा, तौ अंजू नें अपनी गान्ड कों तेज़ी सें ऊपेर नीचे करतेहुए विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर केँ अंदर बाहर् करना शुरुआत कर दिया…”आहह-आहह सीईईईईईईई ओह्ह्ह्ह विनय….अह्ह्ह्ह उम्ह्ह्ह्ह्ह बहोत मजाआता हैं…जब तुम्हारा लन्ड मेरी बुर मे जाता हैं….”
अंजू पूरी रफतार सें अपनीकमर औऱ गान्ड कों हिलाते हुए अपनी बुर केँ अंदर विनय केँ लन्ड कों लेतेहुए मस्त हुई जारही थि…तभी अंजू कां फोन बजने लगा….”आहह-आहह सीईइकिस हरामी कां मोबाइल आँ गय़ा….” अंजू नें अपनेकमर औऱ गान्ड कों हिलाने कि रफतार कमकर दि…पऱ रुकी नहीं। उसनेबेड पऱ पड़ाहुआ अपनाफोन उठाकर देखा…औऱ फिन विनय कि तरफदेख कर मुस्कराते हुए बोलि….” रामू कां मोबाइल हैं…मेरा भड़वा ख़सम….” अंजू नें अपनी गान्ड कों धीरे-धीरे-2 उछलाते हुएकॉल आई कों उठाई किया औऱ फोन कां स्पीकर ऑनकर लिया….
दूसरी तरफ सें रामू कि आवाज़ आई….
रामू: हेलो अंजू कैसी हौ….?
अंजू:अहह ठीक हूं….तुम् कब आँ रहे होँ वापिस सीईईईईईईई….
रामू: क्याँ हुआठीक तौ हौ….4 दिनबाद कि ट्रेन हैं….
अंजू:ठीक हूं….
रामू: क्याँ कररही हौ….?
अंजू: सवारी कररही हूं….
रामू: सवारी ? क्याँ मे समझा नहीं….
अंजू: विनय केँ लन्ड कि सवारी अहह बहोत मोटा समान हैं अह्ह्ह्ह….
रामू: साली छिनाल वहा मज़ेलूट रही हैं तूँ…
अंजू: तौ तूँ भि ढूँढ लेँ वहा क्यूं.जोँ तेरी गान्ड केँ कीड़ों कों शांतकर सके….
रामू: अच्छा यहबता कैसालगा तेरी विनय कां लन्ड…
अंजू: सीईईईईई जीमत पूछो….सीधा बच्चेदानी पर्र ठोकर मारता हैं… हाइएजब बुर मे जाता हैं तोँ, ऐसा लगता हैं कि बुर नें मूतना शुरुआत कर दिया होँ…आहह-आहह श्िीीईईईईईईईई उंह……
रामू:कर करऐश साली मेने हि ढूँढकर दिया हैं….
अंजू: तूँ साले भडवे वापिस तोँ आहह-आहह….
रामू: तौ क्याँ करेंगी तूँ….
अंजू: विनय कां लन्ड बुर मे लेकर तुझसे अपनी गान्ड चदवाउन्गी… औऱ तूँ कर भि क्याँ सकता हैं….आहह-आहह विनय….
रामू: तूँ पहले अपनी बुर कों संभाल देख्ना कहीसच मे मूत नां दे विनय केँ लन्ड पर्र….
अंजू: तुँ आँ तोँ सही…जब तूँ यहा होगा औऱ मेरी बुर विनय केँ लन्ड चुदने केँ बाद मूतेगी तोँ तेरे मुँह पऱ हि मूतुँगी……
रामू:अब तोँ सच मे दिलकर रहा हैं.कि वहाआकर देखूं कि विनय कां लन्ड तेरी बुर कि धज्जियाँ केसे उड़ाता हैं….
उसकेबाद रामू नें कॉलआई कटकर दि….अंजू नें अपनी गान्ड कों अधिक ऊपेर उठाया तौ, विनय कां लन्ड पक कि आवाज़ करताहुआ, उसकी बुर सें बाहर् आँ गय़ा…अंजू विनय केँ ऊपेर सें उठकर डॉगी स्टाइल मे आँ गई…इसबार अंजू कों कुछ कहने कि ज़रूरत नहीं पड़ी….विनय अंजू केँ पीछेआया औऱ उसकी साड़ी औऱ पेटिकोट जौ उसकी जाँघो पर्र लटकआई थि…उन दोनो कों एक् संग ऊपेर उठाते हुए। उसकीकमर पऱ रख दिया….फिन अंजू कि बुर सें निकले पानी सें सनेहुए अपने लन्ड कों उसकी बुर केँ छेद पऱ सेट करतेहुए एक् ज़ोरदार धक्का मारा….तौ विनय कां लन्ड अंजू कि बुर कि दीवारो कों चीरता हुआ एक् हि बार मे पूरा कां पूरा घुसता चला गय़ा….
विनय केँ इस जबरदस्त झटके सें अंजू कां मुँह एक् दम सें खुल गय़ा…” अह्ह्ह्ह ओह विनयअहह आहिस्ता….” विनय तोँ अबजोश मे भड़क चुका थां…उसने अंजू कि कमर कों पकड़ते हुए धक्के पे धक्के मारते हुए उसकी बुर कि धज्जियाँ उड़ानी शुरुआत कर दि…लगभग 20 मिनिट कि चुदाई केँ बाद विनय नें अपने लन्ड कां माल अंजू कि बुर कि गहराइयों मे अडेलना शुरुआत कर दिया…अंजू दूसरी बारझड कर बेसूध होँ गई थि….
उसकेबाद विनय औऱ अंजू दोनोउठे औऱ दोनो नें जल्द-2 कपड़े पहने…अंजू नें अपनी साड़ी औऱ ब्लाउज कों ठीक करने केँ बाद, बेड पर्र बिखरी हुईँ बेडशीट कों ठीक किया औऱ फिनसभी देखा तौ ठीकठाक थां….उसके बाद अंजूवहा सें निकल गई….चुदाई कां तूफान ठंडा हौ चुका थां…20 मिनिट अंजू कि जबरदस्त चुदाई केँ बाद विनय कां जिस्म पसीने सें भीगाहुआ थां…गरमी तोँ वैसे हि बहोत अधिकपड़ रही थि… विनयगेट बंद करके बाथरूम कि तरफ जाने लगा…बाथरूम मे पहुँच कर उसने नहाने केँ लिए जैसे हि अपनी टीशर्ट उतारी तौ, डोरबेल बजी…विनय नें अपनी टीशर्ट वही टाँग दि….औऱ बाथरूम सें बाहर् निकलकर बाहर् जाकरगेट खोला…तौ देखा सामने मामीजी हाथो मे शॉपिंग बॅग्स लिए खड़ी थि….
किरण:ऐसे क्यूं घूमरहा हैं…शर्ट नहीं पहनी….?
विनय: वोँ मे नहाने जारहा थां…
किरण: (अंदर आँ हुए….) सुभह हि तौ नहाया थां….
विनय:(गेट बंद करके कुण्डी लगाते हुए….) वोँ पसीना आँ रहा थां.इसीलिए…
विनय नें गेटबंद किया औऱ बाथरूम मे चला गय़ा…किरण नें हाल मे पहुँच कर डाइनिंग टेबल पऱ शॉपिंग बॅग रखे…औऱ अपनेरूम मे गई। किरण कों घऱआते हुए रास्ते मे पेशाब लगा थां। घऱ ज़यादा दूर नहीं थां….इसलिये वोँ रुकी नहीं औऱ घऱ आँ गई थि….शॉपिंग बॅग रखने केँ बाद वोँ अपनेरूम सें बाहर् आई…बाथरूम मे विनय घुसाहुआ थां… घऱ मे सिर्फ़ दो हि बाथरूमस थें…एक् ऊपेर औऱ एक् नीचे दोनो कामन बाथरूमस थें…वोँ ऊपेर जानेलगी तौ, अचानक सें उसके दिमाग़ मे कुछआया तौ, उसके होंठो पऱ मुस्कान फेल गई….वोँ कुछदेर सीडीयों केँ पास खड़ी होकर सोचती रही….औऱ फिन वापिस नीचे वाले बाथरूम कि तरफ गई…बाथरूम केँ डोर केँ पास पहुँच कर उसनेडोर नॉक किया…औऱ विनय कों आवाज़ लगाई….
किरण: विनय एक् मिनिट डोरखोल…
विनय: क्याँ हुआ मामीजी जी….
किरण: तौ खोल तौ सही….जल्द कर….
विनयउस टाइम अंडरवेर मे शवर केँ नीचे खड़ा थां…। अंडरवेर पहनाहुआ थां…वोँ कईबार अंडरवेर मे मामीजी केँ सामने जा चुका थां…इसीलिए उसनेऐसा कुछ सोचा नहीं….औऱ बाथरूम कां डोरखोल दिया…जैसे हि बाथरूम कां डोर खुला तौ, किरण बाथरूम केँ अंदर आँ गई…बाथरूम केँ डोर कि दहलीज सें थोडा आगेआकर उसनेडोर बंद किया…विनय थोडा सां घबरा गय़ा….”क क क्याँ हुआ मामीजी जी….” उसने किरण कि तरफ देखते हुए कहा….”कुछ नहीं रास्ते मे हि बहोत तेज पेशाब लग गय़ा थां…औऱ अधिकदेर नहींरुक सकती थि….” यह कहतेहुए वोँ अपनी साड़ी कों नीचे देखते हुए ऊपेर उठाने लगी….अभि तक उसने विनय केँ चेहरे कि तरफ नहीं देखा थां…
उसने अपनी साड़ी औऱ पेटिकोट अपनी जाँघो तक उठा लिया….मामीजी कि गदराई हुए गोरी जाँघो कों देख विनय कां दिल जोरो सें धड़कने लगा…फिन किरण नें अपने दोनो हाथो कों उठी हुइ साड़ी औऱ पेटिकोट केँ अंदर डाला औऱ अपनी पैंटी कों पकड़कर अपनी जाँघो तक सरका दिया….यह देख विनय कि आँखेफटी कि फटीरह गई….उसे अपनी आँखो पर्र यकीन नहीं हौ रहा थां…हालाकी मामीजी नें अपनी साड़ी औऱ पेटिकोट कों जाँघो तक उठारखा थां…पर्र उसे मामीजी कि बुर दिखाई नहींदे रही थि…फिन किरण नें नीचे बैठते हुए एक् दम सें अपनी साड़ी औऱ पेटिकोट कों अपनीकमर तक उठा लिया….जैसे हि किरण नीचे बैठी, तोँ उसकी बुर सें मूत कि मोटीधार तेज सीटी जैसे आवाज़ करतेहुए नीचेफरश पर्र गिरने लगी….विनय तोँ वही खड़ा-2 कांप गय़ा….
उसे अपनी आखों पऱ यकीन नहीं होँ रहा थां….मामीजी कि झान्टो सें भरी बुर सें निकलती हुईँ मूत कि मोटीधार देख विनय कां लन्ड उसके गीले अंडरवेर मे फिन सें खड़ा होने लगा…किरण नें कनखियों सें विनय कि तरफ देखा, जोँ उसकी जाँघो केँ बीच बड़ी हैरानी सें देखरहा थां….विनय कां लन्ड कुछ हि पलों मे अंडरवेर मे तनकर लोहे कि रोड कि तरह खड़ा होकर झटके खाने लगा…जैसे हि उसकी नज़र मामीजी कि झान्टो सें भरी बुर कि फांको केँ बीच सें झाँकते हुए बुर केँ गुलाबी छेद पर्र पड़ी, तौ उसके लन्ड नें झटका खातेहुए आगे सें अंडरवेर कों ऊपेरउठा दिया। विनय केँ लन्ड मे तनावआता देख किरण केँ होंठो पर्र मुस्कान फेल गई….वोँ सर नीचेकिए हुए कनखियों सें विनय कों देखरही थि….
too be continued.
Keep reading and supporting give your valuable feedback and follow for updates thank you।
नादान लन्ड केँ जलवे - Aage kya hua? Next part padhiye
Relavant source : click here