नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -9
अंजू नें विनय कों बेड कि तरफ इशारा करतेहुए बैठने कों कहा….विनय बेड पऱ बैठते हुएइधर उधर देखने लगा….”आज गरमी बहोत हैं नाँ……” उसने फ्रिज कि ओर जातेहुए कहा… तोँ विनय नें हां मे सर हिलाते हुए हामीभर दि….अंजू नें फ्रिज सें ठंडे पानी कि बॉटल निकाली औऱ एक् ग्लास मे पानीडाल कर विनय कों दिया….गरमी सें वैसे भि विनय कां गलासूख रहा थां….जैसे हि ठंडा पानी विनय केँ हलक सें नीचे उतरा तौ, थोड़ी राहत मिली….विनय नें खाली ग्लास अंजू कि तरफ बढ़ाया तौ अंजू नें मुस्कराते हुए, विनय केँ हाथ सें ग्लास पकड़ा औऱ रूम मे बनी हुईँ सेल्फ़ पर्र रख दिया….
ग्लास रखने केँ बाद अंजू नें सब विंडोस केँ आगे पर्दे कर दिए….जोँ पहले सें हि बंद थि….विनय कां दिल जोरो सें धड़करहा थां….जब वोँ वापिस आकर विनय केँ पासबेड पर्र बैठी, तोँ उसने विनय सें नज़र बचाते हुए, जान बुझकर अपनी साड़ी कां पल्लू कों सरका दिया….उसके ब्लाउस केँ ऊपेर वालेदो हुक खुलेहुए थें….जिसमे सें उसकी 40 साइज़ कि बड़ी-2 साँवले रंग कि चुचियाँ बाहर् आने कों उतावली हौ रही थि….जैसे हि विनय कि नज़र अंजू केँ बड़े-2 साँवले रंग केँ तरबूजों पर्र पड़ी, तोँ विनय केँ लन्ड नें पेंट मे अपना आकार बढ़ाना शुरुआत कर दिया। अगले हि लम्हा उसकी आँखो केँ सामने ममता वशाली औऱ मामीजी किरण कि चुचियाँ एक् एक् करकेघूम गयीँ, ….इन चारो मे सें अंजू कि चुचियों कां मुकाक़बला सिर्फ़ मामीजी किरण केँ संग हि थां…
अंजू कि चुचियाँ उसकी मामीजी कि चुचियों सें भि कुछ बड़ी थि….अपनी चुचियों कों इसतरह घुरता देख अंजूमन हि मन मुस्कुराइ, औऱ मुस्कराते हुए, उसने अपना एक् हाथ विनय कि जाँघ पर्र बिल्कुल उसके लन्ड पर्र रख दिया….विनय केँ पूरे जिस्म मे झंझनाहट सि दौड़ गई, ….उसका केलज़ा मूह कों आने कों हौ गय़ा थां…उसने सवालियाँ नज़रों सें अंजू कि आँखो मे देखा औऱ अंजू नें कातिल अदा केँ संग मुस्कुराते हुए, अपनेहाथ सें उसकी जाँघ कों सहलाते हुए कहा….”विनय बाबू क्याँ लोगे….चाइ याँ दूध….”यह कहतेहुए, अंजू नें अपने ब्लाउस केँ गले कों थोडा सें नीचे खेंचा तोँ, उसकी एक् चुचिकुछ ज्यादा हि बाहर् आँ गई, ….
अब तक विनय भि इन दोहरे अर्थ वाली बातो कों कुछ-2 समझने लगा थां…उसने अपनेगले कां थूक गटकते हुए बड़ी हिम्मत सें कहा….”कक कॉन सां दूध….” अंजू विनय कि बातसुन कर मुस्कुराइ, औऱ फिन विनय कि तरफ थोडा सां झुकते हुए बोलीं….”जोँ तुम् बोलो….मे मना नहीं करूँगी….” अब अंजू केँ हाथ कि उंगलिया बार-2 विनय केँ लन्ड कों पेंट केँ ऊपेर सें टच होँ रही थि….जिसके कारण विनय कां लन्ड पेंट केँ अंदर एक् दम टाइट हौ चुका थां….कामवासना अब विनय केँ सर पऱ चढ़कर बोलरही थि……रामू तौ उसे पहले हि बता गय़ा थां कि, अंजू लन्ड केँ लिए उतावलापन रही हैं…जिसके कारण विनय कां हॉंसला कुछबढ़ सां गय़ा थां….
उसने अपने काँपते हुएहाथ कों उठाकर धीरे-धीरे-2 अंजू कि चुचियों कि तरफ बढ़ाना शुरुआत कर दिया….अंजू विनय केँ हॉंसले कों देखकर मन हि मन मुस्कुराइ, औऱ उसने अपने साड़ी केँ पल्लू कों अपने कंधे सें नीचे सरका दया….विनय नें जैसे हि अपने काँपते हुएहाथ सें अंजू कि चुचियों कों ब्लाउस केँ ऊपेर सें पकड़ा तौ, अंजू एक् दम सें सिसक उठी…उसने मस्ती सें भरी आँखो सें विनय कों मुस्कुराते हुए देखा औऱ फिन मदहोशी भरी आवाज़ मे बोलि….” एक् हि बाहर् निकाल कर चूसना हैं….याँ फिन पूरी नंगीकर दूं इनको….” विनय कों अपने कानो पऱ यकीन नहीं होँ रहा थां….उसने कभी सोचा भि नहीं थां कि, उसे एक् औऱ नयी बुर इतनी आसानी सें मारने कों मिल जाएगी….
उसने तरसती हुई नज़रों सें अंजू कों देखा औऱ फिनहां मे सर हिला दिया….अंजू मुस्कुराइ औऱ फिनबेड सें उठकर नीचे खड़ी हुई औऱ, अपनी साड़ी उतारनी शुरुआत कर दि….अंजू नें अपनी साड़ी उतारकर टांगी औऱ फिन अपने ब्लाउस केँ बाकी केँ बटन कों खोलने लगी….जैसे -2 अंजू केँ ब्लाउस कि बटन्स खुलरहे थें….वैसे-2 विनय कां लन्ड उसकी पेंट मे झटके पे झटकेखा रहा थां…। अंजू नें अपना ब्लाउस उतारकर बेड पऱ फेंक दिया….अब अंजू फरोज़ी कलर केँ पेटिकोट औऱ वाइटकलर कि ब्रा मे विनय केँ सामने खड़ी थि….वाइट कलर कि ब्रा मे कसी हुई अंजू कि चुचियों कों देखकर तौ विनय कां लन्ड पेंट कों फाड़कर बाहर् आने कों उतावला होँ गय़ा…
अंजू: (वासना सें भरी आवाज़ सें….) विनय बाबूअगर लन्ड तंगकर रहा हौ तोँ, पेंट निकाल दो….
अंजू केँ मूह सें यहबात सुनकर विनय एक् दम हड़बड़ा गय़ा……पर्र अंजू कि तरफ सें यहसॉफ संकेत थां कि, अंजू उससे चुदवाने केँ लिए कितनी बेकरार हैं…अंजू नें अपने दोनो हाथो कों पीछे लेजाते हुए, अपनी ब्रा केँ हुक्स खोलकर उसे भि अपने शरीर सें अलगकर दिया….अंजू केँ साँवले रंग कि मोटी-2 गुदाज चुचियाँ उछलकर बाहर् आई तौ, विनय कि जान उसकेहलक मे आकरफँस गयीँ, ……अब अंजू उसके सामने ऊपेर सें बिल्कुल नंगी खड़ी थि….उसकी चुचियों केँ कालेरंग केँ मोटे-2 निपल्स एक् दमतने हुए थें….
अंजू धीरे-धीरे-2 विनय कि तरफ बढ़ी, औऱ जैसे हि वोँ विनय केँ पास पहुँची तोँ, विनय नें अपना उतावला पन दिखाते हुए, अंजू कि दोनो चुचियों कों लपककर अपने हाथों मे भर लिया….
औऱ अगले हि लम्हा उसने अंजू केँ अंगूर केँ जितने मोटे निपल कों अपनेमूह मे भरकर पागलों कि तरह चूसना शुरुआत कर दिया……”श्िीीईईईईईईईईईईई ओह विनय उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह….” अंजू नें सिसकते हुए, विनय केँ सर कों अपनी चुचियों पऱ दबाना शुरुआत कर दिया….विनय कि इस हरक़त सें अंजू कां पूराबदन मस्ती मे एक् दम सें कांप उठा….बुर कि फांके कुलबुलाने लगी….उसने अपना एक् हाथ नीचे लेजाते हुए पेंट केँ ऊपेर सें विनय केँ लन्ड कों पकड़कर धीरे-धीरे-2 सहलाना शुरुआत कर दिया…जौ पहले हि लोहे कि रोड कि तरहतना हुआ थां….
जैसे हि अंजू कों विनय केँ लन्ड कि सख्ती औऱ लंबाई मोटाई कां अंदाज़ा हुआ, अंजू कि बुर मे तेज सरसराहट दौड़ गई, …बुर केँ अंदर धुनकि सि बजने लगी….एक् लम्हा भि औऱ बर्दास्त करना उसकेसबर सें बाहर् हौ गय़ा थां….उसने विनय कों अपने सें अलग किया…औऱ नशीली आँखो सें विनय केँ तमतमाते चेहरे कों देखकर बोलि….”जल्द करो विनय बाबूअब औऱ प्रतीक्षा नहीं होता…उतार दो अपने कपड़े….” विनय भि तोँ इसीबात कां प्रतीक्षा कररहा थां…उसने जल्द सें अपने कपड़े एक् एक् करके निकालने शुरुआत कर दिए….औऱ फिन आख़िर मे जैसे हि उसने अपने अंडरवेर कों नीचे उतारा…औऱ उसका 7 इंच लंबा लन्ड हवा मे आकर झटके खानेलगा तोँ,
हैरानी सें अंजू कि आँखेफेल गयीँ, ……उसे यकीन नहीं होँ रहा थां कि, इस ***** साल केँ लड़के कि जाँघो केँ बीच इतना बड़ा औऱ मोटा हथियार होँ गय़ा….उसका लन्ड एक् दमतना हुआ ऊपेर कि तरफसर उठाएहुए थां……फिन अंजू नें अपने पेटीकोटे केँ नाडे कों खेंचते हुएखोल दिया…। औऱ अगले हि लम्हा अंजू कां पेटिकोट उसकीकमर सें सरक नीचे फर्श पर्र पड़ाधूल चाटरहा थां……उसने विनय केँ पासआते हुए, विनय कों पीछेबेड पर्र धकेल दिया….औऱ जैसे हि विनय पीछेबेड पर्र लेटा तौ, अंजू एक् दम सें उसके ऊपेर आँ गयीँ, ….
अंजू केँ बड़ी-2 गुदाज चुचियाँ अब विनय केँ चेहरे केँ ऊपेरलटक रही थि….उसके निपल्स अब औऱ ज्यादा तीखे होकरतन चुके थें….नीचे विनय कां लन्ड अंजू कि बुर कि फांको पऱ दस्तक देरहा थां….विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कि गरमी कों अपनी बुर कि फांको पर्र महसूस करके अंजू एक् दम सें सिसक उठी….उसके रोम-2 मे वासना सें भरी मस्ती कि लहर दौड़ गई, …। अंजू कि बुर तोँ तब सें पानी छोड़रही थि….जब सें वोँ गेट पर्र बैठी हुइ थि, विनय केँ आने कां इंताजार कररही थि….अंजू कों रामू नें विवाह केँ बाद सें सिर्फ़ 4-5 बार हि चोदा थां….वोँ भि अपने 4 इंच केँ लन्ड सें, इसीलिए अंजू कि बुर बहोत ज़यादा टाइट थि….विनय तोँ जैसे जन्नत मे पहुँच गय़ा थां….वोँ अपने ऊपेरझूल रही अंजू कि चुचियों कों अपने हाथो मे पकड़कर मसलते हुए ज़ोर -2 सें चूसरहा थां….
अंजू एक् दम गर्म होँ चुकी थि….उसने अपना एक् हाथ नीचे लेजाते हुए विनय केँ लन्ड कों पकड़ औऱ अपनी बुर कि गीली फांको केँ बीच रगड़ते हुए, बुर केँ छेद पर्र भिड़ा दिया…औऱ फिन जैसे हि उसने अपनी गान्ड कों नीचे कि ओर करके अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे पऱ दबाना शुरुआत किया…औऱ जैसे हि विनय केँ लन्ड कां मोटा सुपाडा उसकी बुर केँ छेद कों फैलाता हुआ अंदर घुसा तौ, अंजू एक् दम सें चीख पड़ी….उसकी चीखसुन कर विनय भि घबरा गय़ा….”क्याँ हुआ….?” विनय नें घबराते हुए पूछा, ”
तौ अंजू नें अपने होंटो पऱ मुस्कान लातेहुए कहा….”कुछ नहीं….”
विनय: तौ चीख क्यूं रही होँ….?
अंजू: (दर्द सें मुस्कुराते हुए….) तुम्हारा समान बहोत मोटा हैं….इसीलिए….हाईए….
वासना केँ आगे दर्द कहां ठहरता, अंजू अपनी बुर कों धीरे-धीरे-2 विनय केँ लन्ड पर्र दबाती चली गई, ….औऱ विनय केँ लन्ड कां सुपाडा अंजू कि बुर कि दीवारों सें रगड़ ख़ाता हुआ अंदरजा घुसा.“ओह हइई छोरे तेरे लौन्डे नें तोँ मेरी चूत कों पूराभर दिया….उंह श्िीीई हाईए कितना मोटा लन्ड हैं रे तेरा….” विनय नें अंजू कि चुचियों कों चूस्ते हुए अपने दोनो हाथो कों पीछे लेजाकर अंजू केँ चुतड़ों पर्र रखतेहुए मसलना शुरुआत कर दिया….”ओह्ह्ह ओहउंह सबाश मेरे राजा……हां मसलदे मेरी गान्ड कों अहह मेरे गान्डू पति नें आज तक इन्हे छुआ भि नहीं….”
अंजू नें धीरे-धीरे-2 अपनी गान्ड कों ऊपेर नीचे करतेहुए कहा….विनय कां लन्ड अंजू कि बुर केँ गाढ़े लैस्दार पानी सें गीला होकर अंदर बाहर् होनेलगा थां….विनय कों अपना लन्ड अंजू कि बुर कि दीवारो मे बुरीतरह पिसता हुआ महसूस होनेलगा थां….दिमाग़ मे ज्यादा उतेजना केँ कारण, वोँ झड़ने केँ लगभग पहुँच गय़ा थां….औऱ जैसे हि उसे लगनेलगा कि, उसका लन्ड पानी छोड़ने वाला हैं, तोँ विनययह सोचकर घबरा गय़ा कि, कही अंजू भि रिंकी कि तरह उसका मज़ाक नां उड़ाये….औऱ कहीउसे अंजू सें भि हाथ नां धोना पड़े….
पऱ दूसरी तरफ तौ जैसे अंजू मदहोशी मे पागल होँ चुकी थि….उसने अपनी गान्ड कों पूरी रफतार सें ऊपेर नीचे करतेहुए, अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड पर्र पटकना शुरुआत कर दिया थां….”श्िीीईईईईईईईईईईईई ओहओह अह्ह्ह्ह आहह-आहह आहह-आहह हाईए विनय बाबू कितना मस्त लन्ड हैं अह्ह्ह्ह तुम्हारा….अह्ह्ह्ह मज़ाअ आँ गय़ा……” अंजू केँ भारी भरकम चूतड़ विनय कि जाँघो सें टकराकर सर्प-2 कि आवाज़ करनेलगे थें….तभी विनय कों अपने शरीर कां साराखून अपने लन्ड कि नसों कि तरफ दौड़ता हुआ महसूस हुआ, औऱ फिन विनय केँ लन्ड सें वीर्य कि बोछार अंजू कि बुर मे होनेलगी….
विनयमजा केँ चरम पऱ पहुँच चुका थां….पऱ उसने अपनी सिसकारियों कों दबारखा थां। डर थां कि कही अंजू भि रिंकी कि तरह नाराज़ नाँ होँ जाए…
विनय बुरीतरह झडरहा थां….औऱ अंजू कि बुर मे अपने वीर्य कि बोछार किएजा रहा थां….पर्र अंजू तोँ जैसे कामवासना केँ नशे मे बेसूध सि होँ गयीँ, थि….वोँ पूरी रफ़्तार सें अपनी गान्ड कों ऊपेर नीचे उछलाते हुए, अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड पऱ पटकरही थि…। झड़ते हुए विनय कि बर्दास्त सें बाहर् हौ गय़ा थां…वोँ आँखेबंद किएहुए, किसीतरह अपनी उखड़ी हुईँ सांसो कों संभालने कि कॉसिश कररहा थां…कुछ लम्हा बीते तोँ, विनय कां झड़ना बंदहुआ, उसका लन्ड मानो जैसे सुन्न पढ़ गय़ा होँ….उससे अपने लन्ड पऱ क़िस्सी तरह कां अहसास नहीं हौ रहा थां….
जब उसने अपनी आँखो कों खोलकर देखा, तोँ अंजू अभि भि उसके ऊपेर थि….औऱजब उसने नीचे अपनी लन्ड कि तरफ नज़र डाली तौ, उसका लन्ड अभि भि लोहे कि रोड कि तरह खड़ा थां। जोँ उसके वीर्य औऱ अंजू कि बुर सें निकलरहे पानी सें एक् दमसना हुआ थां….अंजू नें मुस्कराते हुए विनय कि आँखो मे देखा औऱ फिन काँपती हुई मदहोशी सें भरी आवाज़ मे बोलि.” आहह-आहह विनय बाबू तुम्हारा हथियार तोँ सच मे कमाल कां हैं….इतना सख़्त लन्ड ओह्ह्ह्ह हाई मे तोँ वारीजाउ तुम्हारे लन्ड पऱ…अह्ह्ह्ह….उंह श्िीीईईईई हाईएआज तौ अपनी चूत कि प्यास भुजाकर हि रहूंगी……”
यह कहतेहुए, उसने औऱ तेज़ी सें अपनी गान्ड कों ऊपेर नीचे करना शुरुआत कर दिया….अब विनय कों फिन सें उसके लन्ड पऱ अंजू कि टाइट बुर कि दीवारें रगड़ खाती हुईँ महसूस होनेलगी थि…। विनयफिन सें गर्म होनेलगा थां…उसने अपने हाथो सें जोँ कि पहले सें अंजू केँ चुतड़ों केँ ऊपेर थें….अंजू कि गान्ड कों दोबच-2कर दबाना शुरुआत कर दिया…”आहह-आहह सबाश छोरे आहह-आहह औऱ मसल मेरी गान्ड कों आहह-आहह उम्म्म्मममम आहह-आहह हांऐसे हि औऱ ज़ोर सें…। आह्ह्ह्ह मेरी गान्ड मे उंगली डालकर पेल दे…आहह-आहह…”
यहसुन कर विनय कों शॉकलगा कि, क्याँ कोई गान्ड मे उंगली भि डालता हैं….पर्र विनय कों अबहर चीज़ सीखनी थि….औऱ इसीलिए उसने बिना अधिक सोचे, अंजू केँ चुतड़ों कों दोनोतरफ फेलाते हुए अपनी एक् उंगली कों उसकी गान्ड केँ छेद पर्र रखकरदो चारबार कुरेदा तोँ, अंजू मस्ती मे एक् दम सें पागल होँ गयीँ, ….”ओह हाआन विनय बाबू आअहह घुस्साओ नाँ… ओह्ह्ह्ह हाईए….मेरी बुर ओह….” अंजू कां शरीर भि ऐंठने लगा थां….विनय केँ लन्ड कां सुपाडा जब उसकी बुर केँ अंदर उसकी बच्चेदानी सें जाकर रगड़ ख़ाता तोँ, अंजू मदहोश होकर सिसक उठती…
अंजू: आहह-आहह आहह-आहह ओह्ह्ह्ह पूराभर दिया तूने मेरी बुर कों ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह बहोत बड़ा लन्ड हैं तेरा अह्ह्ह्ह….यह लें ईए लेँ देख मेरी बुर पानी छोड़ने वाली हैं….हाई ओह्ह्ह लेँ मे तोँ गयीँ, …ओह ईए लें छोड़ दिया मेरी बुर नें पानी आहह-आहह उंह श्िीीईईईईईई….
अंजू कां शरीर झड़ते हुए बुरीतरह सें काँपने लगा थां….उसकी कमररुक -2 कर झटके खाने लगी….अंजू विनय केँ ऊपेरढेर होँ चुकी थि….पर्र अभि तौ विनय कां लन्ड खड़ा थां। अंजू नें पागलो कि तरह विनय केँ गालो होंटो पर्र चूमना शुरुआत कर दिया….चुदाई कां सुख क्याँ होता हैं……अंजू कों आजपता चलरहा थां….अंजू कि बुर सें पानी निकलकर विनय केँ बॉल्स तक कों गीलाकर रहा थां….अंजू कों अपनी पानी छोड़ती बुर मे अभि भि विनय कां लन्ड लोहे कि रोड कि तरह खड़ाहुआ सॉफ महसूस होँ रहा थां….जिसे नीचे लेटा विनय अपनीकमर कों ऊपेर कि तरफ धकेलते हुए, अंदर बाहर् करने कि कॉसिश कररहा थां….
अंजू मुस्कुराते हुए जैसे हि विनय केँ ऊपेर सें उठी….तौ विनय कां लन्ड पक कि आवाज़ करताहुआ अनु कि बुर सें बाहर् आँ गय़ा….अंजू विनय केँ बगल मे बैठ गई, ….उसकी नज़रें विनय केँ झटके खातेहुए लन्ड पऱ रुक सि गयीँ, थि….अंजू मन हि मनसोच रही थि। कि विनय केँ लन्ड मे कितना दम हैं….जौ मेरे जैसी गर्म महिला कि बुर कि गरमी कों भि सहनकर गय़ा….उसने विनय केँ झटके खातेहुए लन्ड कों मुट्ठी मे पकड़ लिया….औऱ विनय कि तरफदेख कर मुस्कुराते हुए बोलि….”वाउ विनय बाबू आप् केँ लन्ड नें तोँ कमालकर दिया हैं….” हाएऐसे हि लन्ड कों अपनी बुर मे लेने केँ लिए नज़ाने कब सें बेचैनी रही थि मे….
हाई कितना मोटा औऱ लंबा मुनसल जैसा लन्ड हैं तुम्हारा….” औऱ यह कहतेहुए, अंजू नें झुककर विनय केँ लन्ड कों मूह मे भर लिया….जैसे हि उसने विनय केँ लन्ड कों मूह मे भरकर चुप्पे लगाने शुरुआत किए तौ, विनय एक् दम हैरान रह गय़ा….यह पहला मोका थां…जब उसके लन्ड कों कोईचूस रहा थां….किसी नें मूह मे लिया थां….सेक्स मे यहसभी भि होता हैं…विनय इन बातों सें अंजान थां….विनय केँ जिस्म मे मस्ती कि तेजलहर दौड़ गयीँ, ….”ओह आंटीजी यहयह क्याँ कररही हैं आप्….अहह अह्ह्ह्ह छोड़िए….”
अंजू: (विनय केँ लन्ड पर्र लगे विनय केँ वीर्य औऱ अपनी बुर केँ पानी कों चाट -2 करसॉफ करतेहुए….) श्िीीईई ओह्ह्ह्ह विनय तुम्हारे लन्ड कों प्रेम कररही हूं मेरे राजा….इसने मेरी बुर कि खुजली मिटाई हैं, तोँ इसकी देखभाल करना औऱ इसकी सेवा करनाअब मेराधरम हैं….गल्प…
अंजू नें फिन सें झुककर विनय केँ लन्ड कों मूह मे भर लिया औऱ पागलो कि तरहसर हिलाते हुए उसके लन्ड कों चूसने लगी….विनय कि मस्ती कां तौ कोई ठिकाना हि नां रहा….वोँ मदहोश होकर आँखेबंद किए लेटेहुए सिसकार रहा थां….अंजू नें विनय केँ लन्ड कों मूह सें बाहर् निकाला औऱ उसकीबगल मे लेटते हुए बोलीं….”आजा विनयठोक दे अपना खुन्टा मेरी भोसड़ी मे.चल ऊपेरआजा….” उसने विनय कों पकड़कर जैसे हि अपने ऊपेर खेंचा तौ, विनय जल्द सें उठकर अंजू कि जाँघो केँ बीच घुटनो केँ बलबैठ गय़ा….अंजू नें अपनी बुर कि फांको कों दोनो हाथों सें फेलाते हुए अपनी बुर कां छेद विनय कों दिखाते हुए कहा….”लें डालदे अपना मुन्सल मेरी चूत मे….फाड़ दे मेरी बुर….” विनय कों तोँ मानो जैसे स्वर्ग मिल गय़ा हौ। उसने अपने लन्ड कों पकड़कर सुपाडे कों अंजू कि बुर पर्र टीकाया औऱ एक् ज़ोरदार धक्का मारा.
लन्ड कां सुपाडा अंजू कि गीली बुर केँ छेद कों फैलाता हुआ अंदर घुसता चला गय़ा….” आहह-आहह सबाश छोरे….ओह हइई….हां आईसीए हि ज़ोर ज़ोर सें थोककर फाड़दे मेरी भोसड़ी….ओह अह्ह्ह्ह औऱ ज़ोर सें कर नां……हाईए विनय मुझे नहींपता थां कि, तूँ इतनी अच्छी तरह बुर ओह्ह्ह्ह आहह-आहह मारता हैं….हाईए अब तोँ रोज अपनी चूत कों तेरे लन्ड पिलवाउन्गी….आहह-आहह श्िीीईईईईई हाईएठोक दे पूराठोक दे….” विनय भि अंजू कि बातें सुनकर जोश मे आँ चुका थां….औऱ अपने लन्ड कों सुपाडे तक बाहर् निकाल कर-2 अंजू कि बुर कि गहराइयों मे उताररहा थां…बीच मे जबकभी विनय कां लन्ड उसकी बुर सें बाहर् आँ जाता तौ, अंजूझट सें उसका लन्ड पकड़कर अपनी बुर मे डाल लेती…
जिस पुराने बेड पर्र चुदाई कां यहखेल चलरहा थां….अब उसकीचूं-2 कि आवाज़ निकलनि शुरुआत होँ गयीँ, थि….विनय अंजू कि चुचियों कों कभी कसकस केँ दबाने लगता तोँ, कभीउन पऱ झुककर उन्हे चूसने लगता……”आहह-आहह ओह हाआँकाट खा मेरी राजाखा जा मेरी चुचियों कों अह्ह्ह्ह श्िीीईईईई उंह हाईए कहां थां तूँ अब तक….मजा आँ रहा हैं नां तुम्हे मेरी बुर मार कर….हां बोल आँ रहा हैं नां….”
विनय:अहह हां आंटी बहोत मजा आँ रहा हैं….
अंजू:ओह ओह्ह्ह ऐसे नहींबोल हाआँमजा आँ रहा हैं अंजू अंजूबोल मुझेबोल साली रांडी तेरीचोद कर बड़ामजा आँ रहा हैं ओह्ह्ह्ह बोल नाँ….
विनय: अह्ह्ह्ह हाआँ मज़ाअ आँ रहा हैं अंजू…….
अंजू:बोल नाँ विनय मुझे गाली दे….बोल मे रांड़ तेरी बुर कि खुजली मिटाउंगा….
विनय: हान्ंनणणन् सालीम्म मे मिटाउंगा तेरी बुर कि खुजली….रांडी आहह-आहह….
अंजू: ओह्ह्ह्ह श्िीीईईई तुँ मिटाएगा आहह-आहह लें देखफिन इस रंडी कि बुर कि गरमी कों अहह ओह्ह्ह श्िीीईई श्िीीईईईईईई उंह आहह-आहह अहह्ा आहह-आहह….
अंजूफिन सें गर्म होनेलगी थि….वोँ पागलो कि तरह अनशन बकतेहुए अपनी गान्ड कों तेज़ी सें ऊपेर कि ओरउठा कर अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड पऱ पटकने लगी….”अहह ओह्ह्ह्ह औऱ ज़ोर सें ठोक साले आहह-आहह आहह-आहह हाआँ औऱ ज़ोर सें….रुकना नहीं दिखा मुझे तेरे टट्टों मे कितना दम हैं…अहह आहह-आहह…….”
इधर विनय भि अब पूरेरंग मे आँ चुका थां….औऱ पूरी तेज़ी सें अपने लन्ड कों अंजू कि बुर केँ अंदर बाहर् करतेहुए उसेचोद रहा थां…अब विनय कि जांघे उसके मोटे चुतड़ों सें टकराकर थप-2 कि आवाज़ करनेलगी थि….अंजू कि बुर नें फिन सें लावा उगलना शुरुआत करदया थां….”ओह आहह-आहह हइईईए लेँ मेरी बुर ओह हाईएफॅट गाईए साली आहह-आहह ह लीयीयी लीदेख सालीफॅट गयीँ, ….निकल गय़ा पानीअहह आहह-आहह शियीयीयी.” पऱ विनय तोँ जैसे रुकने कां नाम हि नहीं लें रहा थां….अंजू बुरीतरह झाड़रही थि…औऱ अभि भि विनय कां लन्ड किसी पिस्टन कि तरह उसकी बुर केँ अंदर बाहर् हौ रहा थां….जिससे अंजू केँ झड़ने कां मजा औऱ दुगना होँ गय़ा थां….
जब झड़ने केँ बाद अंजू कि साँसे दुरुस्त हुईँ तौ, उसे अहसास हुआ कि, विनय अभि भि शॉट पर्र शॉट लगाते हुए उसकी बुर कि धज्जियाँ उड़ारहा थां….जब उसका लन्ड अंदर बाहर् होता अंजू कि बुर कि दीवार सें रगड़ ख़ाता तौ, अंजू कों अपनी बुर केँ अंदरतेज सरहसाराहट महसूस होती…दो बार झड़ने केँ बाद अंजू बहाल हौ चुकी थि….पऱ वोँ विनय कों अबरोक करउसे नाराज़ नहीं करना चाहती थि….विनय औऱ अंजू दोनो केँ जिस्म पसीने सें तर हौ चुके थें….विनय कि साँसे भि थकावट केँ कारण फूलने लगी थि….औऱ उसके धक्कों कि रफ़्तार भि कम हौ चुकी थि….अंजू नें पास मे पड़ी अपने साड़ी उठाई, औऱ विनय केँ माथे औऱ चेहरे पर्र आएहुए पसीने कों पोंछते हुए बोलि….”अभि तक हुआ नहीं तुम्हारा……” तौ विनय नें धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड कों अंदर बाहर् करतेहुए नाँ मे सर हिला दिया….
अंजू:थक गय़ा हैं….
विनय:हां….
अंजू:रुक एक् मिनिट बाहर् निकाल…
विनय नें अपना लन्ड जैसे हि अंजू कि बुर सें बाहर् निकाला तौ अंजूघूम कर डॉगी स्टाइल मे आँ गई, ….उसने अपनेसर औऱ चुचियों कों आगे कि तरफ पलंग सें सटाते हुए, अपनी गान्ड कों ऊपेर कि ओर उठाया औऱ कमर कों नीचे कि तरफ दबाया तोँ, अंजू कि बुर पीछे सें बाहर् निकलकर ऊपेर कि तरफउठ गयीँ, …पीछे बैठे विनय नें जबयह नज़ारा देखा तोँ, उसके लन्ड नें ज़ोर सें झटका खाया….क्याँ मस्त गान्ड थि अंजू कि एक् दमगोल मटोल गुदाज बड़े -2 फेलेहुए चूतड़….अंजू नें अपनी जाँघो केँ बीच सें अपना एक् हाथ निकालते हुए, अपनी बुर कि फांको कों फेलाया औऱ अपनी बुर कां गुलाबी रस सें भराछेद दिखाते हुए बोलि….
अंजू:आजो विनय बाबू औऱ ठोकदो अपना मोटा लट्ठ इसमे….
विनय तौ जैसे अंजू केँ इसी ऑर्डर कां प्रतीक्षा कररहा थां…वोँ अंजू केँ पीछेआकर घुटनो केँ बलबैठ गय़ा….औऱ अपने लन्ड केँ सुपाडे कों अंजू कि बुर केँ छेद पर्र सेट करतेहुए एक् जोरदार शॉट मारा…लन्ड गछ कि आवाज़ करताहुआ एक् हि बार मे अंजू कि बुर कि गहराइयों मे समाता चला गय़ा….”ओह श्िीीईईईईईई विनय…….हाआअँ ठोकदे पूरा कां पूरा अंदर……”फिन क्याँ थां, विनय बाबू शुरुआत होँ गये…अंजू कि बड़ी सि कमर कों अपने दोनो हाथो मे थामे विनय पूरी ताक़त सें अपने लन्ड कों अंजू कि बुर केँ अंदर बाहर् करने लगा….थप-2 केँ थपेड़ो कि आवाज़ पूरीरूम मे गूँज गई, ….6-7 मिनिट बाद अंजू कि बुर नें जैसे हि तीसरी बार लावा उगला तोँ अंजूकाम मे बहाल होँ गई, …….औऱफिन विनय नें भि ऐसेशॉट लगाए कि अंजू कि बुर कि धज्जियाँ उड़ गई, ….औऱ वोँ झाड़ता हुआ अपना पानी अंजू कि बुर मे उडेलने लगा.
दोनो पसीने सें तरबतर बेड पर्र लेटेहुए अपनी उखड़ी हुइ सांसो पऱ काबू पाने कि कॉसिश कररहे थें….अंजू कों यकीन नहीं होँ रहा थां कि, एक् **** साल केँ लड़के नें उसके इतनी जबरदस्त ठुकाइ कि हैं….अंजू कों अपनी बुर मे मीठा-2 दर्द कां अहसास होँ रहा थां…मानो लन्ड कि रगड़ सें उसकी बुर सूज गई, होँ….विनय छत पर्र लगे पंखे कों देखरहा थां….अंजू किसीतरह खड़ी हुइ, औऱ बेड सें उतरकर अपने पेटिकॉट कों पकड़ा औऱ अपनी चुचियों केँ ऊपेर बाँधकर बाहर् चली गयीँ, ….बाहर् आकर वोँ एक् कोने मे बनेहुए बाथरूम मे घुस गई, ….चुचियों पर्र बँधा होने केँ कारण उसका पेटिकॉट वैसे हि उसकी जाँघो तक आँ रहा थां….उसने अपने पेटिकॉट कों थोडा सां ऊपेर उठाया औऱ मूतने केँ लिए नीचेबैठ गये…
उसकी बुर सें मूत कि मोटी औऱ तेजधार बाहर् आकरफरश पऱ गिरने लगी….सीटी कि तेज आवाज़ अंदर खड़े विनय तक कों सॉफ सुनाई देरही थि….जौ अपने कपड़े पहनरहा थां…आज अंजू कि बुर सें जबमूत कि धार निकलरही थि….तोँ उसे अजीब सां मजा आँ रहा थां…आख़िर अंजू केँ मन कि मुराद भि पूरी हौ गई, थि….मूतने केँ बादजब अंजूरूम मे पहुँची तोँ, देखा विनय कपड़े पहनकर बेड पऱ बैठाहुआ थां….जैसे हि अंजू अंदरआई तौ, विनय खड़ा हौ गय़ा….
विनय:अब मे जाऊं….(उसने भोलेपन केँ संगकहा….)
अंजू: रूको मे साड़ी पहनलूँ फिन तुम्हे गेट तक छोड़कर आती हूं….
अंजू नें जल्द सें साड़ी पहनी औऱ फिन विनय कों संग लेकर विद्यालय केँ मेनगेट तक गयीँ, ….गेट खोला औऱ विनय विद्यालय सें बाहर् निकल गय़ा….”कल आओगे….” अंजू नें विनय कों पीछे सें आवाज़ लगाते हुए कहा….अब विनयमना करता भि तौ केसे….बुर स्वयं लन्ड कों बुलारही थि… विनय नें हां मे सर हिला दिया….अंजू कातिल अदा केँ संग मुस्कुराइ….औऱ फिन विनयपलट करघऱ कि तरफचल पड़ा….दिल मे ख़ुसी सें लड्डू फूटरहे थें…आज तोँ मेने बहोत देर तक फुददी मारी हैं….विनय यहसोच -2 करमन हि मनखुश हौ रहा थां….पर्र उसकेसर मे हल्का -2 दर्द भि हौ रहा थां….शायद वियाग्रा कां असर थां….अक्सर इस टॅबलेट कों खाने केँ बादसर फटने सां लगता हैं….
ऊपेर सें तेजधूप मे सर औऱ भि तप गय़ा….जब तक विनयघऱ पहुंचा तोँ, वियाग्रा केँ असर सें उसकासर बहोत दर्द करनेलगा थां….गला एक् दमसूख चुका थां….जब घऱ पहुँच कर उसनेडोर बेल बजाई तोँ, गेट किरण नें खोला……”अर्ररे तुँ जल्द आँ गय़ा….कह कर गय़ा थां कि साम कों आएगा….” विनय नें गेट केँ अंदरआते हुएकहा…। “वोँ मेरासर दर्दकर रहा हैं इसीलिए आँ गय़ा….”
किरण: कितनी बार समझाया हैं तुम्हारी तरफधूप मे मत निकला कर बाहर्….पर्र तूँ मेरी सुनता कहां हैं….मामीजी हूं नां मम्मी नहीं….इसीलिए तुँ मेरेबात नहीं मानता….
किरण अंजाने मे यहसभी शब्दबोल गई, थि….पऱ अगले हि समयजब उसने विनय केँ उतरेहुए चेहरे कों देखा तोँ, उसे अपनी ग़लती कां अहसास हुआ…हाई यह मेने क्याँ कह दिया…। किरण नें मन हि मन अपने आप् कों कोसा….औऱ जल्द सें गेटबंद करके विनय कि तरफ मूडी…पहले उसने विनय केँ माथे पऱ हाथलगा कर देखा….धूप मे आने केँ कारण उसका माथा तोँ ऐसे हि तपरहा थां….”कहीं बुखार तोँ नहीं हौ गय़ा….” चल अंदर आँ….” किरणउसे अपने चिपकाए हुए अपनेसंग अपनेरूम मे लेँ गयीँ, …पहले उसने थर्मॉमीटर सें विनय कां बुखार चेक किया….थर्मॉमीटर कों गोर सें देखते हुए बोलि….” बुखार तोँ नहीं हैं….यह सभी नां तुम्हारे धूप मे घूमने केँ कारणहुआ हैं….अब कल सें बाहर् निकलकर देख्ना……”
विनयरूम सें बाहर् जानेलगा तौ, किरण नें उससे आवाज़ देकररोक लिया….”कहां जारहा हैं अब…? “ विनयपलट कर मामीजी कि तरफ देखा….वोँ मे पानी पीनेजा रहा थां….बहोत प्यास लगी हैं.” किरणबेड सें खड़ी हुई औऱ बाहर् जातेहुए बोलि….”तूँ लेट यहीं….मे लेकरआती हूं पानी….” किरण रसोई मे चली गयीँ, ….उसने फ्रिड्ज सें पानी कि बॉटल निकाली औऱ एक् ग्लास उठाकर अपने कमरे कि तरफचल पड़ी….उधर विनय किरण केँ बेड पर्र बैठाहुआ थां….औऱ वशाली कों देखरहा थां….जोँ गहरी नींद मे सोईहुए थि….किरण रूम मे आई औऱ ग्लास मे पानीडाल कर विनय कों दिया….विनय नें पानी पिया औऱ खाली ग्लास अपनी मामीजी कों पकड़ा दिया
too be continued.
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Vinay kee age mai juldi paani jhadna aam baat h. Mere sath bi aesa hi huwa thaa jb meri mausi ne pahli bar maira nunu pakda thaa. Tab mein 8th class mai thaa.
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर कामोत्तेजक एपसोड हैं भइया आनंद आँ गय़ा
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Ab aage.
किरण: (ग्लास औऱ बॉटल टेबल पऱ रखतेहुए….) चललेट जा….मे तेरासर दबा देती हूं….
किरण नें बेड पऱ चढ़ते हुएकहा तौ, विनय मामीजी केँ बगल मे लेट गय़ा….मामीजी केँ दूसरी तरफ वशाली गहरी नींद मे सोरही थि……किरण नें विनय कि तरफ करवट बदली। औऱ उसकासर दबाने लगी….विनय उस वक़्त सीधापीठ केँ बल लेटाहुआ थां….कुछ देरबाद विनय नें अपनी आँखेबंद कर ली……किरण कों लगा कि शायद विनयसो गय़ा हैं….उसने एक् बार दीवार पऱ लगी घड़ी पऱ नज़र डाली तौ देखा 2:00 बजरहे थें….गरमी तौ बहोत थि….इसीलिए किरणबेड सें धीरे-धीरे सें उठी ताकि विनय याँ वशाली जाग नाँ जाए….
वोँ बेड सें उठकररूम सें बाहर् चली गई, ….विनय आँखेखोल करयहसभी देखरहा थां….पऱ कमरे मे अंधेरा थां……इसीलिए मामीजी नहींदेख पे थि….किरण बाथरूम मे घुस गयीँ, ….जल्द सें अपनी साड़ी खोलीफिन पेटिकॉट औऱ ब्लाउस औऱ अगले हि लम्हा पेंटी औऱ ब्रा भि खोलकर वही टाँग दि….औऱशवर लेने लगी….शवर लेने केँ बाद उसने अपने जिस्म कों पोंच्छा औऱ फिन अपने पेटिकॉट कों पहना उसकेबाद उसने ब्लाउस कों पहना औऱ बाथरूम कां डोरखोल कर बाहर् निकली औऱ अपनेरूम कि तरफ जातेहुए अपने ब्लाउस केँ हुक्स कों बंद करने लगी….गरमी कि वजह सें उसने नाँ तौ पेंटी पहनी थि औऱ नां हि ब्रा….साड़ी तौ दूर कि बात थि….
इधर विनय मामीजी केँ बेड पऱ लेटाहुआ थां….उसके सर मे अभि भि दर्द थां….तभी रूम कां डोर खुला औऱ किरणरूम मे अंदरआई औऱ डोरबंद करके, ऊपेर केँ खुलेहुए दो हुक्स कों बंद करने लगी….वियाग्रा कां असर तौ अभि तक थां….जैसे हि विनय कि नज़र मामीजी केँ खुलेहुए ब्लाउस मे सें झाँकरही गोरेरंग कि चुचियों पऱ पड़ी….विनय केँ लन्ड मे झुरजुरी सि दौड़ गयीँ, ……घऱ पर्र बच्चों केँ इलावा औऱ कोई नहीं थां….गेट बंद थां….इसीलिए किरण थोडा लापरवाही सें काम लेँ रही थि….उसके मुताबिक तोँ दोनो बच्चे सोरहे थें….
खैर किरण नें ब्लाउस केँ हुक्स बंदकिए, औऱ बेड पऱ चढ़ि, तोँ विनय नें वशाली कि तरफ करवट बदली….क्योंकि वोँ जानता थां कि, मामीजी बीच मे लेटने वाली हैं….औऱ उसकेमन मे अब मामीजी कि चुचियों कों देखने केँ ख़्वाहिश जाग चुकी थि….जैसे हि किरणउन दोनो केँ बीच मे लेटी, तोँ विनय नें अपनी आँखेबंद कर ली….किरण कि नज़र जैसे हि विनय केँ भोले भाले मासूम सें दिखने वाले चेहरे पऱ पड़ी, तोँ उसकी ममताजाग उठी….उसने भि विनय कि तरफमूह करके करवटली औऱ लेट गई, ….
किरण नें एक् हाथ विनय कि पीठ पऱ रखकर औऱ उसे अपने सीने सें लगा लिया….इधर जैसे हि विनय कां फेस मामीजी केँ तरोताज़ा मम्मो पर्र ब्लाउस केँ ऊपेर सें टचहुआ, उधर विनय केँ लन्ड नें भि जोश मे आकर झटका खाया….”क्याँ मस्त अहसास थां मामीजी कि चुचियों कां……किरण कि चुचियाँ अंजू कि चुचियों सें थोड़ी हि छोटी थि….पर्र किरण कां रंग अंजू केँ मुकाबले बहोत ज्यादा गोरा थां…औऱ उसकी चुचियाँ दूध कि तरह सफेद थि….यही अहसास विनय कों पागलकिए जारहा थां….
किरण अपनेहाथ कि उंगलियों कों विनय केँ सर केँ बालो मे घुमारही थि….विनय कां लन्ड एक् दमतन चुका थां….विनय नें सोने कां नाटक करतेहुए, अपने होंटो कों मामीजी केँ ब्लाउस केँ ऊपेर सें झाँकरही चुचियों केँ क्लीवेज मे सटा दिया….एक् समय केँ लिए किरण केँ जिस्म मे भि सिहरन सि दौड़ गयीँ, ……पऱ वोँ समझरही थि कि, विनय गहरी नींद मे हैं। इसीलिए उसने विनय कों अपने सें अलग करने कि कोशिश नहीं कि….हां यहबात भि थि, कि विनय केँ नरम होंटो कां स्पर्श उसे अपनी चुचियों कि दरार मे एक् सुखद अहसास करवारहा थां… विनयचाह कर भि इससे ज़यादा कुछ नहींकर सकता थां….इसीलिए अपनी मामीजी कि चुचियों कि गर्माहट सें संतुष्ट होनेलगा….
मामीजी कि उंगलियाँ अभि भि उसके बालो मे घूमरही थि….जिसके चलतेहुए उसेअब नींदआने लगी थें….औऱ फिन विनय धीरे-धीरे-2 नींद केँ आगोश मे समाता चला गय़ा…लगभग 3 घंटेबाद 5 बजे विनय नींद सें जागा….सर मे जोँ दर्द थां….वोँ अब पहले सें कम होँ चुका थां….विनय कां उठने कां ज़रा भि दिल नहींकर रहा थां….रूम मे अभि भि अंधेरा थां…उसकी नज़रबगल मे लेटी हुईँ मामीजी पऱ पड़ी….नींद मे किरण नें करवटबदल कर उसकीतरफ पीठकर ली थि….मामीजी कि मोटी गान्ड देखउसे अंजू केँ संग कियाहुआ चुदाई कां खेलफिन सें यादआने लगा……
उसने थोडा सां उठकररूम मे नज़र दौड़ाई….मामीजी औऱ वशाली अभि भि गहरी नींद मे थि….वोँ मामीजी कि तरफ खिसका औऱ मामीजी केँ पास करवट केँ बल लेटते हुए, अपने शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें हि अपने सेमी एरेक्टेड लन्ड कों मामीजी कि गान्ड कि दरार मे सटाकर चिपककर लेट गय़ा….जैसे गहरी नींद मे सोरहा हौ….मामीजी कि मोटी कि गान्ड कि तपिश नें अपना कमाल दिखाना शुरुआत कर दिया थां….कुछ हि पलों मे विनय कां लन्ड फिन सें खड़ा होँ चुका थां… औऱ मामीजी केँ पेटिकॉट कों उसकी गान्ड कि दरार केँ बीच मे धँसता हुआ उसकी गान्ड केँ छेद पर्र दस्तक देनेलगा….
विनयकुछ देरऐसे हि बिना हीले डुले लेटा रहा….पर्र इससेआगे कुछ करने कि उसकी हिम्मत नहीं हौ रही थि….उसने अपना एक् हाथ मामीजी कि कमर पऱ रखा औऱ उससे बिल्कुल चिपककर लेट गय़ा… विनय तौ जैसे मज़े कि दुनिया मे उड़रहा थां….पता नहींकब तक वोँ ऐसे हि लेटारहा। बिना हीले डुले….इधर किरण कि नींद भि टूट गई, थि….वैसे भि उसके उठने कां टाइम हौ गय़ा थां….जब उसकी नींद अच्छी तरह सें खुली तौ, उसे अपने चुतड़ों कि दरार मे कुछ सख़्त सि चीज़ चुभती हुइ महसूस हुईँ, तोँ उसके पूरे जिस्म मे सिहरन सि दौड़ गई, ….उसने अपनीकमर पऱ रखेहुए विनय केँ हाथ केँ ऊपेर अपनाहाथ रखा तौ, उसे अहसास हुआ कि, विनय उससे केसे चिपककर लेटाहुआ हैं….
पर्र यह उसकी गान्ड केँ छेद पर्र क्याँ रगड़खा रहा हैं…….अजीब सि बेचैनी नें उसकेदिल कों घेर लिया……उधर विनय कों भि अहसास हौ चुका थां कि, उसकी मामीजी जाग गई, हैं….इसीलिए वोँ आँखेबंद करकेऐसे लेट गय़ा……जैसे बहोत हि गहरी नींद मे होँ……
किरण कां दिलउस वक्त जोरो सें धड़कने लगा…….जब उसके दिमाग़ मे आया कि कहींयह विनय कां लन्ड तोँ नहीं….”नहीं नहीं विनय तौ अभि….औऱ इसका इतना बड़ा केसे….” किरण नें जल्द सें अपनीकमर पऱ रखे विनय केँ हाथ कों हटाया औऱ थोडा सां आगे खिसककर उठकरबैठ गई, …। उसने एक् गहरी साँसली, औऱ फिनसो रहे विनय कि तरफ देखा….देखने सें तोँ लगरहा थां। जैसे विनय अभि भि गहरी नींद मे हैं….तभी जैसे हि उसके नज़र विनय केँ फूले शॉर्ट्स पर्र पड़ी, तोँ उसकी आँखे हैरानी सें ऐसेफैल गयीँ, ….मानो जैसे उसने दुनिया कां 8वाँ अजूबा देख लिया हौ….विनय कां लन्ड तनकर उसके शॉर्ट्स कों आगे सें किसी टेंट कि तरह उठाएहुए थां….
किरणकभी विनय केँ चेहरे कों देखती तोँ, कभी विनय केँ शॉर्ट्स मे फूलेहुए उभार कों। उसको अपनी आँखो पऱ यकीन नहीं हौ रहा थां….फिन एक् दम सें उसके होंटो पर्र मुस्कान फेल गयीँ, ….उसने मन हि मन सोचा कि, अब मेरा विनय बच्चा नहीं रहा….जवानी कि दहलीज पऱ उसने पहलाकदम रख दिया हैं…। हालाकी किरणइस बात सें अंज़ान थि कि, यह बच्चा जवानी कि कितनी सीढ़ियाँ चढ़ चुका हैं….
किरण धीरे-धीरे सें बेडउठी, लाइटऑन कि औऱ फिनरूम सें बाहर् निकलकर बाथरूम कि तरफ जाने लगी….जब वोँ बाथरूम कि तरफजा रही थि….तब भि उसे अपने चुतड़ों केँ बीच विनय कां लन्ड जैसे चुभता हुआ महसूस हौ रहा थां….अजीब सि सिहरन उसके जिस्म कों बार -2 जिंझोड़ रही थि….किरण नें किसीतरह अपने दिमाग़ कों घऱ केँ कामो केँ बारे मे सोचने केँ लिए लगाना शुरुआत किया….बाथरूम मे जाकर उसने ब्रा औऱ पेंटी पहनीफिन साड़ी पहनकर बाहर् आई, औऱ रसोई मे जाकरचाइ बनाने लगी……चाइ कां बर्तन गॅस पऱ रखकर वोँ फिन सें अपनेरूम मे आई औऱ विनय औऱ वशाली कों आवाज़ देकर उठाने लगी….
विनय तौ पहले हि उठाहुआ थां….मामीजी कि आवाज़ सुनकर ऐसे आँखे मलतेहुए उठकर बैठा। जैसे अभि गहरी नींद सें जागा होँ….वशाली भि उठ गयीँ, ….फिन दोनो फ्रेश हुए औऱ चाइ पी….रात ऐसे हि कट गई, ….मामाजी रोज कि तरफउस रात भि लेटआए थें….अगली सुभह विनय कां मन बड़ा बेचैन थां….वोँ अंजू केँ पास जाने केँ लिए अंदर हि अंदर प्यास रहा थां….पर्र जाए तौ केसे….मामीजी नें सख्ती सें घऱ सें बाहर् निकलने सें मना जौ कर दिया थां। उसदिन विनय नें कई बहाने बनाए…पऱ किरण नें उसे बाहर् नहीं जाने दया……दो दिनबीत गये। दूसरी तरफ अंजू भि बेचैन थि….वोँ जानती थि कि, विनय कां घऱपास मे हि हैं.
पऱ वोँ चाहते हुए भि उसकेघऱ तोँ नहींजा सकती थि….जाती भि तोँ केसे….किस काम सें जाती….इधर यहा विनय कां लन्ड बुर नाँ मिलने केँ कारण सीना ताने खड़ा होकर विनय कों तंग करता तौ, उधर अंजू कि बुर मे जबटीस उठती तौ, वोँ पागल सि होँ जाती, कभी अपनी उंगलियों कों अपनी बुर मे लेती तौ कभीकोई बैंगन उठाकर उसे अपनी बुर मे अंदर बाहर् करने लगती….पऱ जोँ खुजली लन्ड केँ मिटाने सें मिटनी थि….वहा बैंगन क्याँ करता….तीसरे दिन कि साम कों अंजू सें जबसबर नां हुआ तोँ, वोँ विद्यालय सें निकलकर विनय केँ घऱ कि तरफचल पड़ी.
इस उम्मीद सें कि, शायदउसे विनय बाहर् गली मे खेलता हुआमिल जाए, तोँ कोईबात बने.साम केँ 6 बजरहे थें….जब वोँ विनय कि गली मे जारही थि….उसने बाहर् खेलरहे एक् लड़के सें विनय केँ घऱ कां पता पूछा तौ, उसने इशारे सें उसकेघऱ कां बता दिया…अंजू नें जैसे हि उसघऱ कि तरफ देखा तौ, बाहर् गेट पऱ किरण खड़ी थि….जोँ रिंकी कि मां सें बातकर रही थि….पऱ विनय बाहर् नहीं थां….वोँ धीरे-धीरे-2 चलतेहुए, जैसे हि विनय केँ घऱ केँ लगभगआई तौ, किरण औऱ रिंकी मां केँ बातें उसके कानो मे पड़ी….
रिंकी कि मां किरण कों अपनीनयी नौकरानी केँ बारे मे बतारही थि…। कि उसेअब बहोत आराम हौ गय़ा हैं….भइया अब नौकरानी रखी थि, तौ शैखी तौ दिखानी थि….मिडेल क्लास केँ लोगो केँ मोहल्ले मे घऱ पर्र नौकरानी रखनाहर किसी केँ बस कि तोँ बात नहीं…। “किरण मे तौ कहती हूं…तूँ भि घऱ केँ कामकाज केँ लिए अपनेलिए नौकरानी रख लेँ….” रिंकी कि मां नें अपनी शोखी झाड़ते हुएकहा….
किरण:हां सोच तोँ मे भि यहीरही हूं….पर्र कोईढंग कि मिले तौ रखूं….यह (अजय) भि कहरहे थें कि, नौकरानी रख लो….अगले महीने मे मेरे छोटे भइया कि विवाह भि हैं। वोँ यहीआकर विवाह करने वाले हैं, तौ काम तौ आगे-2 बढ़ना हि हैं….
यहबात जैसे हि अंजू केँ कानो सें टकराई तोँ, उसका दिमाग़ ठनका….वोँ थोडा सां हिककते हुए, किरण केँ पास गई, ….जब किरण नें अंजू कों देखा….तौ थोडा सां सवालियों नज़रों सें उसे देखने लगी….क्योंकि किरण नें अंजू कों पहलेकभी नहीं देखा थां…। “नमस्कार बहन जी। “ अंजू नें किरण केँ पास खड़े होतेहुए कहा….”नमस्कार जी कहिए….”
अंजू: वोँ मे यहा सें गुजररही थि….तौ आपकीबात सुनी….आप् घऱ केँ कामकाज केँ लिए किसी कों ढूँढरहे हैं नाँ….?
किरण:जी……
अंजू:अगर आप् मुझेरख लें तौ बड़ा अहसान होगामुझ पर्र….
किरण:हां पऱ तुम् होँ कॉन….कहां रहती होँ….?
अंजू:जी यह जोँ विद्यालय हैं नाँ….
किरण:हां….
अंजू:जी मे वहीं रहती हूं….मेरे पति वहा पऱ पीयान हैं….
किरण: ओह्ह्ह अच्छा….
किरण नें सोचाक़ि, यह महिला अंज़ान नहीं हैं….उसका पति सरकारी विद्यालय मे पीयान कां नौकरी कररहा हैं….इसलिये किसी चोरी चाकरी कां ख़तरा भि नहीं हैं….अगर इसेकाम पऱ रख लेती हूं तोँ कोई बुराई नहीं…। “अच्छा ठीक हैं….तुम् कल आनां….आज मे अपने पति सें बातकर लेती हूं। उसकेबाद तुम्हे बता दूँगी…”
अंजू:जी अच्छी बात हैं….
उसकेबाद अंजू वापिस चली गयीँ, ….उस रात भि विनय कां मामाजी अजयरात कों देर सें आया.तब तक विनय अपनेरूम मे सो चुका थां.औऱ वशाली किरण केँ रूम मे….किरण नें अजय कों खानां लगाकर दिया, औऱ स्वयं भि संग खाने केँ लिएबैठ गयीँ, ….”जी सुनिए मुझे आप् सें कुछबात करनी थि….” किरण नें खानां खातेहुए कहा…तौ अजय नें भि खाने केँ नीवाले कों निगलते हुए कहा…”हां बोलो क्याँ बात हैं….”
किरण:जी आप् कहरहे थें नां….कि घऱ पर्र काम करने केँ लिए किसी महिला कों रखलूँ.
अजय:हां कहा तौ थां….
किरण:आज एक् स्त्री आई थि….काम केँ लिएपूछ रही थि….वोँ विनय औऱ वशाली कां विद्यालय हैं नाँ….उसी विद्यालय केँ पीयान कि पत्नि हैं….आप् क्याँ कहते हैं…उसे काम पऱ रखलूँ….
अजय: पैसो कि बातकरी तुमने उससे….?
किरण: नहीं अभि तक तौ नहीं कि….
अजय:ठीक हैं…पहले पैसो कि बातकर लेना….अगर 3000 तक माने तौ हि रखना नहीं तौ मनाकर देनाउसे……
किरण:जी ठीक हैं……
उसकेबाद दोनो नें खानां खाया….औऱ फिन दोनो अपनेरूम मे आकरलेट गये….आज किरण कां बहोत मूड होँ रहा थां….अजय नें उसेकोई महीना भर पहले चोदा थां….औऱ उस वक़्त भि किरण कि प्यास पूरीतरह सें नहींबुझ पाई थि….आजजब साम कों उसने विनय केँ लन्ड कों अपने चुतड़ों कि दरार मे महसूस किया थां, तौ तभी सें उसकी बुर नें रिसना शुरुआत कर दिया थां। हालाकी उसके दिमाग़ मे विनय केँ लिएकोई ऐसी फीलिंग नहीं थि….पर्र बुर तौ लन्ड केँ स्पर्श सें पिघल जाती हैं….फिन बुर यह नहीं देखती क़ि, वोँ लन्ड किसका हैं….अब लगाएकोई औऱ बुझाए कोई….यह कैसा इंसाफ़ हुआ….रूम केँ अंदरआते हि, बेड पर्र लेटी किरण नें अजय सें चिपकाना शुरुआत कर दिया…तौ अजय भि उसकेमन कों घूर गय़ा….पर्र विस्की केँ नशे केँ कारण उसकी आँखेबंद हुईँ जारही थि….
पऱ किरण भि कहां मानने वाली थि…….जैसे तैसे उकसाकर उसनेअजय कों अपने ऊपेर चढ़ा हि लिया…फिन क्याँ थां…मामाजी कि बेजान चुदाई कब शुरुआत हुइ औऱ कब ख़तमपता भि नहीं चला….किरण बेचारी तोँ बेचैनी कररह गयीँ, ……अगली सुभह विनयजब उठा तौ सुभह केँ 8 बजरहे थें….फ्रेश होकर उसने मामाजी मामीजी औऱ वशाली केँ संग नाश्ता किया औऱ फिन मामाजी जीघऱ सें निकलगये अपनेशॉप पर्र जाने केँ लिए….आज मामीजी कां मूडकुछ ठीक नहीं थां….इसीलिए वशाली जब भि थोड़ी सें शैतानी करती तोँ, उससे डाँट देती….क्रोध तौ मामीजी कों मामाजी केँ लन्ड पऱ थां….पर्र निकाल वोँ रही थि वशाली पऱ….
मामीजी केँ द्वारा वशाली कों फटकारते हुएदेख विनय भि चुप सां होकर अपनेरूम मे बैठ गय़ा…पता नहींअब कहीं उसकी बारी नां आजाए….पर्र विनय तोँ आज अंजू केँ पास जाने केँ लिएकोई जुगतसोच रहा थां….आख़िर बेचारा बाहर् जाए तोँ जाए केसे….वैसे भि मामीजी कां मूडआज ठीक नहीं थां……अब एक् सच्ची आवाज़ लन्ड सें निकले औऱ बुर नाँ सुने….ऐसा होँ सकता हैं क्याँ। लगभग 10 बजे अंजू नें विनय केँ घऱ केँ बाहर् पहुँच करडोर बेल बजाई, तौ किरण नें डोर खोला…सामने अंजू खड़ी थि…उसने अंजू कों अंदर बुलाया….औऱ हाल मे कुर्सी पऱ बैठाकर स्वयं उसके सामने बैठगये….
अंजू: तोँ आपने अपने पति सें बात कि….?
किरण:हां कि……अच्छा यह बताओ कि, महीने केँ कितने पैसे लोगे….
अंजू:जी आप् जोँ ठीक समझें दे दीजिएगा ….
उधरजब विनय केँ कानो सें अंजू कि आवाज़ टकराई तोँ, विनय एक् दम सें चोंक उठा…मन हि मन सोचने लगा कि, आवाज़ तोँ अंजू कि लगती हैं…पऱ वोँ उनकेघऱ पर्र क्याँ कररही हैं… अपनेशक कों यकीन मे बदलने केँ लिए वोँ अपनेरूम सें बाहर् आया औऱ हाल मे पहुँच कर देखा तौ अंजू उसकी मामीजी केँ सामने बैठी हुईँ थि….अंजू नें एक् लम्हा केँ लिए विनय कों देखा औऱ फिन किरण सें बात करने लगी….इधर विनयहाल मे खड़ा नाँ हुआ, औऱ रसोई मे जाकर पानी पीने केँ बहाने उनकी बातें सुनने लगा….
किरण:फिन कुछ तोँ सोचा हि होगा तुमने बताओ कितने पैसे लोगी एक् महीने केँ काम केँ….
अंजू:जी आप् स्वयं हि बता दीजिए….मैने पहलेकभी औऱ कहींकाम नहीं किया हैं तौ इसलिए मुझेपता नहीं हैं….
किरण : (कुछदेर सोचने केँ बाद….) 2000 रुपये दूँगी चलेगा….
अंजू:जी ठीक हैं….
किरण: पहलेकाम सुन लो….फिन बाद मे सोचना कि ठीक हैं कि नहीं….
अंजू:जी कहिए….
किरण: पूरेघऱ कि सफाई करनी होगी….ऊपेर वाली मंज़िल पर्र अगर हफ्ते मे एक् बार भि करोगी तौ चलेगा….पऱ नीचे 4 कमरेयह हाल औऱ कीचीं यहसभी रोजसॉफ करने होंगे…
अंजू:जी….
किरण: कपड़े भि दोतीन बाद धुलते हैं हमारे घऱ….वोँ भि धोने पड़ेंगे….औऱ हन बर्तन सॉफ करना भि तुम्हारा काम हैं….दोपहर 2 बजे तक काम ख़तम करकेचली जाया करना….
अंजू:जी ठीक हैं….यह सभी मे कर लूँगी….
किरना: वैसेकुछ अधिककाम नहीं हैं….कपड़े धोने केँ लिए मशीन हैं……औऱ वैसे भि खानां तौ मे हि पकाउन्गी….औऱ फिन मे भि तोँ संग मे कामकर दिया करूँगी….
अंजू:ठीक हैं दिदी जी….फिन कब सें आउ मे….
किरण:कल सें आँ जाओ….
अंजू:जी ठीक हैं फिन मे चलती हूं….कल सुभह आँ जाउन्गी….
too be continued।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -10
अंजू केँ जाने केँ बाद विनय अपनेरूम मे आँ गय़ा….उसे कुछसमझ मे नहीं आँ रहा थां….कि आख़िर अंजू उसकेघऱ पर्र काम क्यूं करना चाहती हैं…वोँ अंजू केँ इस फैंसले सें थोडा डराहुआ भि थां…। डर थां कि, कही मामीजी कों कुछपता नां चल जाए…क्योंकि विनय इतना मेच्यूर नहीं थां कि, वोँ यहसभी हॅंडेल कर सके….इस लिए उसकाडर भि जायज़ थां…अंजू केँ जानेबाद किरण रसोई मे गई, ….औऱलंच सजधजकर करने लगी…तभी बाहर् डोरबेल बजी तौ, किरण नें हॉल मे बैठी वशाली कों बाहर् कां गेट खोलने केँ लिएकहा….
जब वशाली नें बाहर् जाकरगेट खोला तौ, सामने पिंकी औऱ अभि खड़े थें….दोनो विनय औऱ वशाली केँ संग खेलने आए थें….किरण नें रसोई सें उन दोनो कि आवाज़ सुनली थि….इसलिये वोँ अपनेकाम मे मगनरही। वशाली नें गेटबंद किया औऱ फिन तीनो अंदरआए, औऱ सीधा विनय केँ रूम मे चलेगये….” चलो नां भैया….हाइड & सीक खेलते हैं…” अभि नें बेड पर्र बैठेहुए विनय कां हाथ पकड़कर खेंचते हुएकहा… “नहीं मुझे नहीं खेलना…तुम् लोग जाकर खेलो….” विनय कां तोँ जैसेअब इन खेलो मे मन हि नहीं लगता थां…
पिंकी: चलो नां भैया…तीन लोग केसे खेलेंगे मजा नाही आएगा इतनेकम लोगो मे…
विनय: मेरामूड नहीं हैं….तुम् जाओ….मेरे सर मे दर्द हैं….
पिंकी: (वशाली कि तरफ उदासी सें देखते हुए…)अब क्याँ करें…
वशाली: चलो बाहर् चलकर लुडो खेलते हैं…
अभि: हांचलो….
फिन तीनो बाहर् हाल मे आँ गये….नीचे ठंडे फर्श पर्र बैठकर तीनो लुडो खेलने लगी…मामीजी रसोई मे खानां पकाते हुए उनको खेलते हुएदेख रही थि….”वशाली विनय नहींखेल रहा क्याँ बात हैं…” जब किरण नें विनय कों नहीं देखा तौ उसने वशाली सें पूछा…। “ माँ उसकेसर मे दर्द हैं…” यहकहकर वशाली फिन सें खेल मे मगन होँ गये….”सर मे दर्द….पर्र आज तौ कही बाहर् भि नहीं गय़ा। पहले तोँ कभीऐसी दिक्कत उसकेसंग नहीं हुईँ थि….डॉक्टर सें चेक करवाना पड़ेगा….आज रात कों यहजब आएँगे तौ, उन्हे कहूँगी कि एक् बार विनय कां चेकप किसी अच्छे डॉक्टर सें करवा लाएँ….” किरण खानां पकाते हुएमन हि मन बुदबुदा रही थि…लगभग आधे घंटे मे हि किरण नें खानां भि रेडीकर लिया थां….
फिन 1 बजेसभी नें वही एक् संग खानां खाया….विनय तोँ खानां ख़तम करते हि, अपनेरूम मे चला गय़ा….थोड़ी देरबाद विनय केँ मासी शीतल अभि औऱ पिंकी कों लेने आँ गई, ….औऱफिन वोँ दोनो अपने मम्मी केँ संगचले गये….खानां खाने केँ बाद वशाली औऱ किरणरूम मे आकरलेट गये….वशाली तौ बेड पर्र लेटते हि नींद केँ आगोश मे समा गई,। पऱ किरण कों अभि शवर लेने जानां थां….क्योंकि वोँ रोज सुभह 6 बजेउठ कर सबसे पहलेअजय कां ब्रेकफास्ट औऱ दोपहर कां लञ्च सजधजकर करती थि….इसीलिए सुभहउसे नहाने कां समय नहींमिल पाता थां….वोँ अक्सर दोपहर कों सब कामो सें फारिग होकर हि नहाया करती थि….
थोड़ी देर आराम करने केँ बाद, किरणउठी औऱ बाथरूम मे चली गयीँ,। कलरात सें वोँ अजय केँ कारण बहोत अपसेट थि…विवाह कों अभि 4-5 साल हि बीते थें…कि अजय कां इंटेरेस्ट सेक्स मे ख़तम होताचला गय़ा… पिछले दो सालो सें किरणइसे अपनी नीयती मानकर जीरही थि….वोँ बाथरूम मे पहुँची अपनी साड़ी उतारी औऱ फिन ब्लाउस पेटिकोट ब्रा औऱ पैंटी भि उतार दि…शवर ऑन किया औऱ नीचे खड़ी होँ गयीँ, ….
लगभग 10 मिनिट बाद उसनेरोज कि तरहशवर लेने केँ बाद अपनेबदन पऱ सिर्फ़ ब्लाउस औऱ पेटिकोट पहना औऱ बाथरूम सें बाहर् आई…औऱ अपनेरूम कि तरफ जाने लगी…तभी उसके दिमाग़ मे आया कि, वशाली कहरही थि कि, विनय केँ सर मे दर्द थां….इसीलिए वोँ पहले विनय केँ रूम मे गई,। जब वोँ विनय केँ रूम केँ डोर पर्र पहुँची तौ, उसने देखा कि विनय गुम्सुम सां बेड पर्र पुष्ट केँ संगपीठ टिकाए हुए बैठा थां…किरण अंदर गयीँ, तोँ, उसके कदमो कि आहटसुन कर विनय जैसे अपने ख्यालों सें बाहर् आया हौ….वैसे भाव लातेहुए, वोँ किरण कि ओर देखने लगा…
किरण: (विनय कि तरफदेख कर मुस्कुराते हुए….) नींद नहीं आँ रही…?
विनय: नहीं….
किरण: क्यूं आजफिन सें सर मे दर्द हैं….?
विनय:हां थोडा सां हैं मामीजी….
किरण:सर दर्द कि टॅबलेट दूं….?
विनय: नहींअब पहले सें ठीक हैं….
किरण: तेरी इसीलिए मना करती हूं कि, धूप मे मत निकला कर….चल आँ मे तेरासर सहला देती हूं….नींद आँ जाएगी…
किरण नें विनय कि बगल मे लेटते हुएकहा, तोँ विनय भि किरण कि तरफफेस करके करवट केँ बललेट गय़ा….मामीजी केँ शरीर सें आती भीनी-2 खुसबू जब उसके नथुनो सें टकराई तोँ, एक् दम सें उसके दिमाग़ मे कल दोपहर वाली घटना कोंध गई, …मामीजी नें ममता दिखाते हुए, उसे अपनी बाहों मे भर लिया…औऱ उसकेसर केँ बालों मे अपनी उंगलियों कों घुमाने लगी….विनय नें अपनेफेस कों मामीजी कि नरम चुचियों केँ क्लीवेज़ केँ बीचो-2 भिड़ा दिया….
किरणइस बात सें अंजान ममता केँ मोह मे बँधी हुइ उसके बालों कों सलहारही थि कि, अब उसका विनयकिस ओरबढ़ रहा हैं…विनय कि गर्म सांसो कां सुखद अहसास उसे अपने ब्लाउस केँ ऊपेर सें झाँकरही चुचियों पर्र सॉफ महसूस होँ रहा थां….पर्र उसके दिमाग़ मे यहबात कतई नहीं थि कि, विनययह सभीजान बुझकर रहा हैं….विनय अभि भि उसकेलिए बच्चा हि थां….विनय कों सुलाते-2 किरण कि आँखे भि भारी होनेलगी थि…औऱफिन उसेकब नींदआई पता भि नहीं चला….विनय भि इससे अधिक औऱ कुछ नहींकर सकता थां…इसीलिए वोँ भि नींद केँ आगोश मे चला गय़ा….
लगभग 3 बजे थें कि, विनय कि नींद टूटी, जब उसने आँखेखोल कर देखा तौ, मामीजी अभि भि वही लेटी हुइ थि…पर्र अब मामीजी कि पीठ उसकीतरफ थि…उसका पेटिकोट सोते समये उसकी जांघों तक ऊपेरचढ़ चुका थां… किरण कि आधी सें ज्यादा जांघे विनय कों सॉफ दिखाई देरही थि…यह नज़ारा देख विनय केँ मन मे हलचल सि होने लगी…उसने थोडा सां सरउठा कर मामीजी केँ फेस कों देखा तोँ, उसे यकीन होँ गय़ा कि, मामीजी अभि भि गहरी नींद मे हैं….उसने मामीजी कि तरफ करवट बदली, औऱ ठीक किरण केँ पीछेआकर उससे चिपककर लेट गय़ा….विनय कां लन्ड तोँ मामीजी कि मांसल औऱ गोरी जांघों कों देखते हि खड़ा हौ गय़ा थां….
उसने डरतेहुए, थोडा सां अपनीकमर कों आगे कि तरफ खिसका कर अपने लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें किरण केँ पेटिकोट केँ ऊपेर सें उसकी गान्ड कि दरार केँ बीचो-बीच टिका दिया….यह सभी करतेहुए, विनय कां दिल जोरो सें धड़करहा थां….केसे होता हैं इस वासना कां नशा भि…इंसान डरता तोँ मरने कि हद तक हैं…पर्र करताफिन भि वही हैं….जोँ वासना उसकेसर पऱ चढ़कर उससे करवाती हैं….विनय कां लन्ड मामीजी केँ चुतड़ों कि दरार मे मानो जैसेफँस सां गय़ा थां….पेटिकोट केँ अंदर छुपेहुए मामीजी केँ बड़े-2 चुतड़ों कि गरमीजब विनय कों अपने लन्ड पर्र सहन नां हुई थि…तौ उसनेठीक चोदने वाले अंदाज़ मे अपनीकमर कों धीरे-धीरे-2 हिलाना शुरुआत कर दिया…
उसका लन्ड मामीजी केँ मोटे-2कसे हुए चुतड़ों मे बुरीतरह रगड़खा रहा थां….वासना एक् बारफिन उसकेसर पर्र चढ़कर नंगानाच कररही थि….औऱ विनयकुछ अधिक हि एग्ज़ाइटेड हौ गय़ा थां…वैसे हि जैसे वोँ वशाली केँ संगहुआ थां….अब उस नादान कों कॉन समझाए कि, सेक्स सिर्फ़ शारीरिक तौर पऱ हि नहीं किया जाता….अपने दिमाग़ कों भि कंट्रोल करना पड़ता हैं….पर्र विनय तौ मानो अपनीधुन मे मगन थां… वासना कां नशाइस कदरचढ़ गय़ा थां कि, वोँ यह भि भूल गय़ा…कि जिसतरह सें वोँ अपनीकमर कों हिलाते हुए अपने लन्ड कों मामीजी कि गान्ड कि दरार मे रगड़रहा हैं….उसके चलते मामीजी कभी भि उठ सकती हैं….
पऱ इधर विनय अपनेचरम कि औऱ अग्रसर होँ चुका थां….औऱ फिन उसके लन्ड कि नसेंदम सें फूलने लगी…औऱ विनय नें इसबार कुछ ज्यादा हि ज़ोर देकर अपने लन्ड कों मामीजी केँ पेटिकोट केँ ऊपेर सें उसके चुतड़ों केँ बीच मे धंसा दिया…औऱ उसके लन्ड नें झटके खातेहुए अपना लावा उगलना शुरुआत कर दिया…किरण भि जाग गयीँ, ….जब उसेबेड हिलता हुआ महसूस हुआ.जब वोँ पूरीतरह स्थान जागी तौ, उसे अपनी चुतड़ों कि दरार मे कुछ हिलता औऱ झटके ख़ाता हुआ महसूस हुआ…कल कि तरहआज भि विनय कां हाथ उसकी नंगीकमर पऱ थां….
जब उससेइस बात कां अहसास हुआ कि, आज भि विनय उससे पीछे सें सटाहुआ, तोँ उसकादिल एक् बार तौ जैसे धड़कना हि भूल गय़ा…विनय कां लन्ड अभि भि अपना लावा उगलते हुए, आख़िरी कमजोर पड़ते हुए झटकेखा रहा थां। जिसे नींद सें जाग चुकी किरण अपने चुतड़ों कि दरार मे सॉफ महसूस करपारही थि….अगले हि समय उसने जैसे हि विनय केँ हाथ कों अपनीकमर सें हटाया तौ, विनय कों तोँ जैसे साँप सूंघ गय़ा होँ…ऐसे हालत विनय कि हौ गई, थि…उसने जल्द सें अपनी आँखेबंद कर ली….किरण कों कुछसमझ मे नहीं आँ रहा थां कि, आख़िर हौ क्याँ रहा हैं.जौ कुछ उसने थोड़ी देर पहले महसूस किया…क्याँ वोँ सच थां….याँ सिर्फ़ उसका वहम….वोँ उठकरबैठ गई, …औऱफिन विनय कि तरफ देखा….
वोँ अपने चेहरे पर्र ऐसी मासूमियत लिए सोने कि आक्टिंग कररहा थां… जैसेइस दीन दुनाया सें अंजान होँ…किरण नें बड़ेगोर सें उसके चेहरे कों देखा औऱ फिन उसके शॉर्ट्स कि तरफ….आज उसकी शॉर्ट्स मे किरण कों कोई उभार नज़र नहीं आया….तोँ किरण नें राहत कि साँस ली….रूम मे लाइटऑफ थि….इसलिये रूम मे हल्का अंधेरा थां…वोँ उठी औऱ बाहर् चली गई, ….विनय नें राहत कि साँस ली…आज तोँ मरते-2बचा थां विनय…। वोँ मन हि मन अपने आप् कों कोसरहा थां….औऱ आगे सें ऐसा दोबारा नाँ करने केँ लिए अपने आप् कों हि कहरहा थां…
साम कां वक्त होँ गय़ा थां….विनय अपनेरूम मे बैठाहुआ छुट्टियों केँ लिए मिला होमवर्क पूराकर रहा थां….दूसरी तरफ वशाली हॉल मे बैठी हुई टेलीविज़न देखरही थि कि, तभी रिंकी उनकेघऱ आई…जब सें रिंकी नें विनय कां मज़ाक उड़ाया थां….तब सें उन दोनो केँ बीचबात चीत बिल्कुल बंद थि….इस दौरान नाँ तोँ रिंकी हि उनकेघऱ आई थि….औऱ नाँ हि वशाली उनकेघऱ गयीँ, थि….किरण भि हाल मे बैठी हुई रात केँ खाने केँ लिए सब्जी काटरही थि….
किरण: (रिंकी कों देखते हुए…) अर्रे रिंकी आओ अंदर आओ…आज बड़े दिनोबाद आई हौ…कही घूमने गयीँ, थि….?
रिंकी: (वशाली कि तरफ देखते हुए…) नहीं आंटीजी वोँ ऐसे हि तबीयत थोड़ी खराब थि….इसीलिए नहींआई…
किरण नें सब्जी काटली थि….इसीलिए वोँ उठकर रसोई मे चली गयीँ, … रिंकी वशाली केँ संग जाकर कुर्सी पऱ बैठ गई, ….”नाराज़ होँ अभि तक मुझसे.” रिंकी नें भोला सां फेस बनाते हुए कहा….”तुम् अबयहा क्याँ लेनेआई हौ। उसदिन तुम्हारा पेट नहींभरा मेरे भइया कां मज़ाक उड़ाकर….” वशाली नें अपनेदिल कि भडास निकालते हुएकहा….
रिंकी: सॉरी दोस्त उसदिन मुझसे ग़लती होँ गयीँ, थि….मुझे क्षमा नहीं करेगी तुँ….प्लीज़ दोस्त क्षमा करदे नाँ….
वशाली: ठीक हैं…पहले प्रॉमिस कर….अबफिन कभी नाँ तौ भइया औऱ नां हि मेरा मज़ाक उड़ाएगी….
रिंकी: प्रॉमिस माइ स्वीटू….अब खुश….
यह कहतेहुए रिंकी नें अपनाहाथ आगे बढ़ाया तोँ, वशाली नें उससेहाथ मिलाया….”अच्छा सुनकल सुभह माँ बापूजा रहे हैं बाहर् ….औऱ भइया भि बाहर् गय़ा हुआ मामाजी केँ पास…तुँ कल सुभह मेरेघऱ चलना मेरे संग…कुछ बहोत हि हॉट आइटम्स दिखाउन्गी….” वशाली नें कुछदेर सोचा औऱ फिन धीरे-धीरे सें बोलि….” ठीक हैं कल चलूंगी मे तुम्हारे संग। उसकेबाद रिंकी अपनेघऱ चली गई, …वशाली कों थोड़ी हैरानी अवश्य हुइ, रिंकी बदलेहुए रवैये कों देख कर…पर्र उसनेकुछ ज्यादा सोचा नहीं…
दोस्तो दरअसल रिंकी नें उसदिन केँ बादफिन सें बहोत ट्राइ किया कि, उसकी सेट्टिंग किसी लड़के सें हौ जाए…पऱ मां बाप कि सख़्त निगरानी केँ कारण…वोँ ऐसा नहींकर पाई थि.अब विनय तौ घऱ कि बात थि….एक् बारफिन सें आज़माने मे क्याँ जाता उसका…इसीलिए उसने वशाली सें फिन सें दोस्ती करली थि….उसदिन औऱ कुछ ख़ास नाँ हुआ, दिन तोँ जैसे तैसेकट गय़ा थां। पर्र रात विनय नें करवटें बदलते हुए गुज़ारी थि….
सुभह केँ 8 बजरहे थें….किरण अजय कों ऑफीसभेज चुकी थि….वोँ पहले अपनेरूम मे गई,, जहाँ वशाली अभि तक सोरही थि…उसने वशाली कों उठाया औऱ फ्रेश होने कों कहा औऱ फिन वोँ विनय केँ रूम मे आई, जोँ अभि तक सोरहा थां….मामीजी बेड केँ किनारे जाकर बैठी औऱ विनय केँ सर कों सहलाते हुए बोलीं…”उठ जाओ विनय देखो 8 बजगये हैं…” विनय जोँ रात कों ठीक सें सो नहीं पाया थां….मामीजी कि आवाज़ सुनकर उसकी नींद खुली, उसने अपनी बोझिल आँखो सें बेड पर्र बैठी अपनी मामीजी कि तरफ देखा…
विनय: मामीजी थोड़ी देर औऱ सोजाउ….
किरण: क्याँ हुआ तबीयत ठीक नहीं हैं क्याँ…
विनय: नहीं वोँ मामीजी रात कों नींद नहीं आँ रही थि….
किरण:चल सोजा…
यह कहकर किरण अपनेरूम सें बाहर् आँ गई, ….पिछले कुछ दिनो सें वोँ विनय मे आए बदलाव कों देखकर थोडा परेशान थि….वोँ सोचरही थि कि, यहसभी विनय कि किशोरा अवस्था केँ शुरुआत होने केँ संकेत हैं…याँ फिन विनय केँ संगकुछ प्राब्लम हैं….9 बज चुके थें…वशाली ब्रेकफास्ट करके रिंकी केँ संग उसकेघऱ चली गई, थि…रिंकी उसे सुभह-2 हि लेने आँ गयीँ, थि….कितभी डोरबेल बजी, किरण नें जाकरजब गेट खोला तोँ सामने अंजू खड़ी थि….अंजू किरण कि तरफ देखते हुए मुस्कुराइ औऱ फिन उसकेसंग अंदर आँ गई, ….
अंजू: बताएँ दिदी जी क्याँ करना हैं….
किरण:(कुछ देर सोचने केँ बाद….) तुँ ऐसा कर….सबसे पहलेसब कमरो कि सफाई करके पोंच्छा लगा दे…मेतब तक मशीन निकाल देती हूं…औऱ कपड़े धोना शुरुआत करती हूं….
अंजू:जी दिदी….
अंजू नें झाड़ू उठाया औऱ कमरो कि सफाई करनी शुरुआत कर दि….सबसे पहले उसने किरण कां रूमसॉफ कियाफिन ममता कां….औऱ फिनजब वोँ विनय केँ रूम मे पहुँची तौ, उसने देखा कि विनय अभि भि सोरहा हैं….विनय कों देखकर उसके होंटो पर्र कामुकता भरी मुस्कान फेल गयीँ,। उसने एक् बार बाहर् कि तरफ झाँका….किरण बाथरूम केँ बाहर् वॉशिंग मशीन मे कपड़े डालरही थि…
औऱ फिन झाड़ू लगाना शुरुआत कर दिया….जब झाड़ू लगाते हुए वोँ विनय केँ बेड केँ पासआई, तौ, उसने एक् बारडोर कि तरफ देखा औऱ फिन जल्द सें विनय कों हिलाया तोँ, विनय जैसे हि नींद सें जागा तौ, अपनेरूम मे अंजू कों देखकर चोंका औऱ घबरा भि गय़ा…अंजू नें अपने होंटो पऱ उंगली रखतेहुए, उसेचुप रहने कां इशारा किया….औऱ फिन उसकीतरफ देखते हुए, झाड़ू लगाने लगी….झाड़ू लगाते हुए, वोँ बार-2 विनय कों आँखो हि आँखो सें इशारे भि कररही थि…
अंजू नें आधे घंटे मे हि नीचे वाले फ्लोर कि सफाई करके पोंचा भि लगा दिया थां…बाहर् किरण नें वॉशिंग मशीन मे कपड़े भि धोलिए थें…विनय भि उठकर बाहर् आँ गय़ा…औऱ सीधा बाथरूम मे चला गय़ा…फ्रेश हुआ औऱ फिनजब किरण नें देखा तौ, उसने अंजू कों कपड़ों कों ऊपेरधूप मे डालकर आने कों कहा…औऱ स्वयं विनय केँ लिए ब्रेकफास्ट लगाने केँ लिए रसोई मे चली गयीँ, …इधर विनय ब्रेकफास्ट कररहा थां। औऱ उधर अंजू ऊपेर कपड़ों कों धूप मे सुखाने केँ लिएछत पर्र डालरही थि…
थोड़ी देरबाद अंजू नीचे आई….औऱ नीचे फर्श पर्र बिछी चटाई पऱ बैठकर अपनी साड़ी केँ पल्लू सें अपने चेहरे पर्र आए पसीने कों सुखाने लगी…”हौ गय़ा दिदी जी….अब बताए औऱ क्याँ करना हैं…” उसने विनय कि तरफदेख कर मुस्कुराते हुए कहा…”थोड़ी देर आरामकर लें…काम तौ होता हि रहेगा…अभि 10 हि तोँ बजे हैं….” किरण नें घड़ी कि तरफ देखते हुए कहा.विनय चोर नज़रों सें अंजू कि तरफदेख रहा थां… आज अंजूखूब सजसंवर करआई थि….उसने ब्लूकलर कि साड़ी पहनी हुई थि…हल्का सां मेकप कियाहुआ थां…
विनय नें ब्रेकफास्ट ख़तम किया तोँ, किरण झूठे बर्तन उठाने लगी। तौ अंजू नें किरण कों रोक दिया…”दिदी मुझेकिस लिएरखा हैं….लाइए मे उठा लेती हूं….” यह कहतेहुए अंजूउठी औऱ डाइनिंग टेबल केँ पासआई औऱ झुककर विनय कों अपनी चुचियों केँ दर्शन करवाते हुए बर्तन उठाकर रसोई मे चली गई, ….नीचे कां काम ख़तम होँ चुका थां….
किरण: अंजूअब तुँ ऊपेर केँ रूम्स कि सफाईकर दे जाकर….झाड़ू पोंचा लें जा, वैसेरोज-2 करने कि तोँ ज़रूरत नहीं हैं….पऱ हफ्ते मे एक् आधबार कर दिया करना….
अंजू:जी दिदी कर दिया करूँगी….
अबजब किरण फ्री थि…तोँ उसनेशवर लेने कि सोची…इसीलिए वोँ स्वयं बाथरूम मे घुस्स गई, ….अंजू नें पानी सें भरी बालटी औऱ झाड़ू उठाया औऱ सीडीयों कि तरफ जातेहुए, विनय कों इशारे सें ऊपेरआने कों कहा.विनय अभि भि थोडा सां घबराया हुआ थां…अंजू केँ ऊपेर जाने केँ लगभग 5 मिनिट बाद, विनयउठा औऱ दबे पाँव सीढ़ियाँ चढ़ता हुआ ऊपेर जाने लगा…ऊपेर अंजू एक् रूम मे लगेहुए बेड पर्र जमीधूल हटारही थि। जब विनय ऊपेर पहुंचा तोँ उसनेरूम कां डोर खुला देखा, तोँ वोँ उसरूम केँ अंदरचला गय़ा…
विनय कों रूम मे देखकर अंजू केँ आँखेचमक उठी…उसने जल्द सें विनय केँ पास जाकर उसकाहाथ पकड़ा औऱ अपनीतरफ खेंचते हुए धीरे-धीरे सें बोलीं….”क्यूं रे उसकेबाद तूँ आया नहींवहा पऱ…” विनय नें अपनेगले कां थूक गटकते हुए कहा….”वोँ मामीजी बाहर् नहीं जाने देतीधूप मे। “ अंजू विनय कि बातसुन कर मुस्कुराने लगी….”चल कोईबात नहीं तूँ नहींआया तोँ मे चली आई…तुम्हारा दिल नहीं करता वोँ सभी दोबारा करने कों…” अंजू नें विनय कि आँखो मे झाँकते हुएकहा….
विनय:हां करता हैं….
अंजू: अभि करना हैं….?
विनय:(डोर कि तरफ देखते हुए) मामीजी अगर ऊपेर आँ गयीँ, तौ…
अंजू: इतनी जल्द नहीं आएगी…नहाने गई, हैं नां….तुँ बोल करना हैं….
विनय:(हाँ मे सर हिलाते हुए…)हां…
अंजू नें विनय कां हाथ छोड़ा…औऱ फिन जल्द सें बेड पऱ चढ़कर बाहर् सीढ़ियों कि तरफलगी हुई खिड़की कों खोला औऱ फिन सें विनय केँ पास आँ गई, …उसने विनय केँ शॉर्ट्स केँ ऊपेर उसके लन्ड पऱ हाथ रखा…जौ डर कि वजह सें मुरझाया हुआ थां….अंजू कां हाथ लन्ड पर्र पड़ते हि, विनय केँ शरीर नें झटका खाया, “यह तोँ सोयाहुआ हैं….इसे जगाना पड़ेगा.” अंजू नें विनय केँ लन्ड कों उसके शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें सहलाते हुएकहा…
फिन उसने विनय कि आँखो मे झाँकते हुए विनय केँ शॉर्ट्स कों उसकी जाँघो तक उतार दिया…औऱ अगले हि लम्हा उसनेबेड पर्र बैठते हुए, विनय केँ लन्ड कों मूह मे लेकर चूसना शुरुआत कर दिया….”श्िीीई ओह आंटी.” विनय नें सिसकते हुए अंजू केँ सर कों दोनो हाथो सें पकड़ लिया…अंजू विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कों अपने दोनो होंटो मे दबा-2कर चूसने लगी… जिससे विनय कां लन्ड कुछ हि पलों मे एक् दम लोहे कि रोड कि तरह खड़ा होँ गय़ा…
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too be continued।
नादान लन्ड केँ जलवे - Next part miss mat karna
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