नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Ab aagee.
विनय नें आँखेखोल कर देखा तौ ममता उसकेबगल मे बैठी हुईँ, उसकीतरफ अजीब सि नज़रो सें देखते हुए मुस्कुरा रही थि……आसमान मे अभि भि हल्का-2 अंधेरा थां….उसने दूसरी तरफ नज़र डाली, जिस तरफ वशाली सोई हुईँ थि……जब उसकोपता चला कि, वशाली ऊपेर नहीं हैं, तोँ उसे ममता कि मुस्कुराहट केँ पीछे छुपेहुए राज़ कां पताचल गय़ा….जब ममता नें विनय कों वशाली कि तरफ देखते हुए देखा तौ, वोँ मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे सें फुसफुसा करकहा… “नीचेचली गयीँ, हैं….” ममता नें इधरउधर देखा, पास केँ घऱ कि छत पऱ भि कुछलोग सोएहुए थें….
ममता: (धीरे-धीरे सें फुसफुसाते हुए) विनय मे बाथरूम मे जारही हूं….थोड़ी देरबाद तुम् भि आँ जानां….
ममता खड़ी हुइ, पास वालेघऱ कि छत पर्र नज़र डाली, औऱ फिन धीरे-धीरे-2 बाथरूम कि तरफ बढ़ी, छत पर्र एक् छोटा बाथरूम थां….जोँ कम हि यूज़ किया जाता थां….औऱ फिन जैसे हि ममता बाथरूम मे घुसी, तोँ विनय भि उठकर बाथरूम कि तरफचल पड़ा….उसकी नज़रें भि बाथरूम कि तरफ जातेहुए, चारोतरफ कां मुआईना कररही थि….फिन वोँ जैसे हि विनय बाथरूम मे एंटरहुआ, तौ ममता नें बाथरूम कां डोरबंद करतेहुए, विनय कों अपनी चुचियों सें कस्के चिपका लिया….
सुभह-2 जैसे हि विनय कों जैसे हि अपनी चेस्ट मे ममता कि चुचियों केँ तनेहुए निपल्स महसूस हुए, तोँ विनय कि सारी सुस्ती औऱ नींद एक् दम सें गायब होँ गई, ……ममता नें कुछ पलों केँ लिए विनय केँ होंटो कों चूमा औऱ फिन विनय सें अलग होतेहुए तेज़ी सें हड़बड़ाते हुए बोलि। “विनय जल्द करो….अपना शॉर्ट्स उतारो…….” विनय नें झुककर अपने शॉर्ट्स कों जैसे हि नीचे किया तौ, उसका लन्ड जोँ कि मॉर्निंग बोनर केँ कारण एक् दमतना हुआ थां, बाहर् आकर झटके खाने लगा….ममता नें लपककर विनय केँ लन्ड कों अपनेहाथ मे भरकर हिलाया….तौ उसका लन्ड औऱ भि तन गय़ा…….
ममता: (विनय केँ लन्ड कों छोड़ते हुए)चल पूरा उतारदे……
विनय नें जैसे हि अपना शॉर्ट्स उतारकर अपनी टाँगो सें निकाला तोँ, ममता नें उसका शॉर्ट्स पकड़कर हॅंगर पऱ टाँग दिया….”चल जल्द सें वहा पर्र बैठजा” ममता नें कमोड कि तरफ इशारा करतेहुए कहा….विनय कमोड पऱ बैठ गय़ा……ममता नें जल्द सें अपनी सलवार कां नाडा खोला औऱ फिन अपनी सलवार औऱ पेंटी केँ जबरन मे उंगलियों कों फन्साते हुए दोनो कों एक् हि संग मे उतारते हुए, अपनी टाँगो सें निकाल कर हॅंगर पर्र टाँग दिया….विनय तरसती हुइ नज़रों सें ममता कि तरफदेख रहा थां…….उसकी बुर कि एक् झलक पाने केँ लिए उसकामन नज़ाने कब सें तरसरहा थां….
अभि भि ममता कि बिना बालो वाली बुर उसकी नज़र केँ सामने नहीं थि….ममता केँ कुर्ते कां पल्ला उसकी जाँघो तक कों ढकेहुए थां….जब ममता नें विनय कों इसतरह अपनी जाँघो कि तरफ घुरता पाया, तोँ उसके होंटो पर्र तीखी कामुक मुस्कान फेल गयीँ, ….वोँ समझ गई, कि, विनय कि नज़रें किस चीज़ कों तलाशकर रही हैं……पऱ आज वोँ विनय केँ दिल कि हर खावहिश पूराकर देना चाहती थि….क्योंकि उसकेबाद तोँ, वोँ 20 दिन केँ लिए अपने मायके जारही थि….वोँ अपनी गान्ड कों मटकाते हुए विनय सामने आकर खड़ी होँ गयीँ, …….
औऱ फिन अपने कुर्ते केँ पल्ले कों पकड़कर धीरे-धीरे-2 अपनीकमर तक उठा दिया……जैसे हि विनय कि नज़र ममता कि जाँघो मे कसी हुइ बुर पऱ पड़ी, तोँ विनय केँ लन्ड नें जबरदस्ता झटका खाया….जिसे देख ममतामंद-2 मुस्कुराते हुए बोलि……”इसे हि ढूँढरही थि नाँ जनाब कि नज़रें….अब ऐसे बैठे देखते हि रहोगे, याँ फिन इसकोछू कर भि देख्ना हैं….” विनय नें ऊपेरसर उठाकर देखा तौ, ममता कि आँखो मे वासना केँ लाल डोरेतैर रहे थि। विनय नें गाले कां थूक गटकते हुए, हां मे सर हिला दिया……
उसने अपने काँपते हुएहाथ कों धीरे-धीरे सें जैसे हि ममता कि बुर कि फांको पर्र रखा, तोँ ममता नें सिसकते हुए, अपनी जानफहो कों खोलकर फेला दिया….”श्िीीईईईईई विनय हाआँ ज़ोर सें मसल इसको……” विनय नें अपनी पूरी हथेली उसकी जाँघो केँ बीच मे लेजाते हुए, बुर कि फांको केँ ऊपेर रखतेहुए धीरे-धीरे-2 उसकी बुर कों मसलना शुरुआत किया, तौ ममता कां पूरा जिस्म थरथरा गय़ा……अभि विनय नें कुछ हि देर ममता कि छूट कों मसला थां कि, ममता नें उसकेहाथ कों अपनी बुर सें हटाते हुए, विनय कि जाँघो केँ दोनोतरफ पेर करके खड़ी होँ गई, ….
फिन एक् हाथ नीचे लेजाकर विनय केँ लन्ड कों पकड़ा औऱ अपनी बुर केँ छेद पर्र सेट करतेहुए धीरे-धीरे-2 नीचे कि ओर अपनी बुर कों दबाने लगी, तौ विनय केँ लन्ड कां सुपाडा ममता कि बुर कि फांको कों बुर केँ छेद पऱ तरफ खेंचता हुआ थोडा सां हि अंदरघुस पाया….ममता कि बुर एक् दम सुखी थि….सुभह-2 उसकी बुर बिल्कुल भि नम नाही थि….ममता नें अपनी गान्ड कों विनय कि जाँघो सें ऊपेर उठाया….औऱ फिन एक् हाथ कों अपनेमूह केँ सामने लातेहुए, उसमे ढेरे साराथूक अपनेमूह सें उगल दिया….
विनययह सभी पहलीबार देखरहा थां….उसे इतना तौ समझ आँ गय़ा थां कि, आज मासी कि बुर उसदिन कि तरह पानी नहीं छोड़रही हैं….पऱ वोँ अपनेहाथ पऱ थूक क्यूं रही हैं….यह बात विनय कि समझ सें परे थि….ममता नें अपनेहाथ मे थूक लेकरहाथ कों नीचे किया…औऱ फिन विनय केँ लन्ड पर्र उसहाथ सें अपनेथूक कों फैलाते हुए मलने लगी….फिन जोँ थोडा सां थूक उसकेहाथ मे बचा थां, उसनेउसे जल्द सें अपनी बुर केँ छेद औऱ फांको पर्र लगा दिया……उसने फिन सें विनय केँ लन्ड कों पकड़कर अपनी बुर केँ छेद पऱ सेट किया, औऱ जैसे हि थोडा सां वजन उसने नीचे कि ओर डाला तौ, ममता केँ थूक सें सनाहुआ विनय कां लन्ड फिसलकर सुपाडे तक ममता कि बुर केँ छेद कों फेलाता हुआ अंदरजा घुसा….
ममता: श्िीीईईईईईई उंहबन गय़ा काम……ओह्ह्ह्ह विनय…….
ममता नें तब तक अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे पऱ दबाना जारीरखा, जब तक विनय कां पूरा लन्ड ममता कि बुर कि गहराइयों मे समा नहीं गय़ा….अपनी बुर कों विनय केँ लन्ड सें पूरीतरह भराहुआ महसूस करके, ममता केँ पूरे शरीर मे मस्ती कि लहर दौड़ गयीँ, … उसने विनय केँ होंटो पऱ अपने तपतेहुए होंटो कों लगा दिया……दोनो पागलो कि तरह एक् दूसरे केँ होंटो कों चूसने लगी….
ममताअब विनय कि जाँघो पर्र बैठी हुइ, तेज़ी सें अपनीकमर कों आगे पीछेकर रही थि…। विनय कां लन्ड भि उसी रफतार सें ममता कि बुर केँ अंदर बाहर् होँ रहा थां….कुछ हि पलों मे ममता इतनी गर्म होँ गई, कि, उसकी बुर जोँ थोड़ी देर पहले एक् दम खुसक थि। अब उसमे मानो जैसे पानी कि बाढ़ आँ गई, हौ….अब विनय कां लन्ड भि ममता कि बुर सें निकलरहे कामरस सें भीगकर आसानी सें अंदर बाहर् होनेलगा थां….
विनय भि अब पूरीतरह मदहोश हौ चुका थां….उसके हाथ स्वयं ब स्वयं ममता कि चुचियों पर्र आँ गये थें……औऱ जैसे हि उसने ममता कि चुचियों कों पकड़कर मसलना शुरुआत किया, तोँ ममता एक् दमजोश सें भरउठी, उसने पूरेजोश मे आतेहुए तेज़ी सें अपनी गान्ड कों आगे पीछे करना शुरुआत कर दिया….”अह्ह्ह्ह ओह विनय श्िीीईईईई ओहमजा आँ रहा हैं नाँ……श्िीीईईई मेरी फुददी मारकर….” ममता नें सिसकते हुए विनय कि आँखो मे देखते हुए बोला….
विनय: आहह-आहह हाआँबॅ बहोत मजा आँ रहा हैं ओह……
ममता नें विनय केँ हाथो पऱ अपनेहाथ रखे, औऱ उसके हाथो कों अपनी चुचियों सें हटाते हुए, अपनीकमर केँ पीछे लेजाना शुरुआत कर दिया….यह सभी करतेहुए ममता कि कमर लगतार आगे पीछे होतेहुए हिलरही थि….उसने विनय केँ हाथो कों पीछे लेजाकर अपने मोटे-2 चुतड़ों पर्र रख दिए….”ष्हिईीईईई ओह विनय इन्हे भि मसलो……श्िीीईईईई” जैसे हि विनय केँ हाथ ममता केँ मोटे चुतड़ों पऱ लगे तोँ, विनय कां दिल औऱ तेज़ी सें धड़कने लगा….आज पहलीबार वोँ ममता केँ चुतड़ों कों छूरहा थां….विनय नें ममता केँ चुतड़ों कों पकड़कर धीरे-धीरे-2 मसलना शुरुआत कर दिया….”श्िीीईईईईई ओह विनय हाआंस ऐसीएहीए औऱ ज़ोर सें दबा मेरी गान्ड कों….”
विनय तौ पहले हि बहोत मस्त हौ चुका थां….इसीलिए अब वोँ ममता केँ चुतड़ों कों पागलो कि तरह अपनी हथेलियों मे दबोचते हुएमसल रहा थां…….ममता नें अब अपनी गान्ड कों पूरी रफ़्तार सें हिलाना शुरुआत कर दिया थां….”ओह श्िीीईईईई विनयओह हइईदेख अहह मेरी फुद्दि पानी छोड़ने वाली हैं आहह-आहह उंह शियीयीयैआइयीयीयियी” ममता बुरीतरह सें मचलते हुए झड़ने लगी……औऱ संग हि विनय केँ लन्ड सें वीर्य कि धार निकलकर उसकी बुर कों अंदर तक भरनेलगी….
सुभह केँ 9 बजरहे थें….ममता अपने मायके जाने केँ लिए सजधजकर थि……विनय बाहर् बरामदे मे एक् कोने मे बैठाहुआ, तरसती हुइ नज़रों सें ममता कों बार-2देख रहा थां। कैसारोग वोँ उस मासूम कों लगाकर उससेदूर जारही थि……अब मे यहसभी किसके संग करूँगा….अब तोँ मासी 20 दिनबाद हि वापिस आएँगी….इतने दिन तक केसेवेट करूँगा.
“विनयजा ममता कों बस स्टॉप तक छोड़ आँ….” अपनी मामीजी किरण कि आवाज़ सुनकर विनय अपने ख़यालों कि दुनिया सें बाहर् आया….”जी छोड़आता हूं……” विनय नें उदासी केँ संगसर कों झुका लिया, तभी ममता भि अपनाबॅग उठाकर विनय केँ पास आँ गयीँ, ….फिन ममता नें किरण सें विदाली, औऱ विनय केँ संग बाहर् आँ गई, ….दोनो गली मे चलतेहुए रोड कि तरफ जानेलगे….
ममता: क्याँ बात हैं दुःखी लगरहे हौ….?
विनय: नहीं तोँ……
ममता: ह्म्म्म्म जानती हूं……तुम्हे मेरा जानां अच्छा नहींलग रहा नां….?
विनय:(हां मे सर हिलाते हुए)जी….
ममता:दिल छोटामत करो मेरे शोना……मे जल्द वापिस आने कि कॉसिश करूँगी….
विनय:कब तक आँ जाएँगी आप्….?
ममता: अभि तोँ कुछकह नहीं सकती……पर्र जल्द सें साराकाम ख़तम करके वापिस आने कि पूरी कॉसिश करूँगी……मेरा भि अब तुम्हारे बिना कहां दिल लगेगा….
ममता कि बातसुन कर विनय कों तसल्ली हुइ, कि ममता भि तोँ उससेदूर जानबुझ कर नहींजा रही हैं….रोड पर्र जाकर दोनोबस स्टॅंड पर्र खड़े होँ गये…….”अब ऐसेमूह लटकाकर रखोगे तौ मुझे सारे रास्ते मे तुम्हारा यह दुःखी चेहरा नज़रआता रहेगा….” ममता नें स्माइल करतेहुए कहा….तोँ विनय नें जबरन अपने होंटो पऱ मुस्कान लातेहुए कहा….”आप् मेरी चिंता मत करिए……आप् वहा जाकर जल्द सें काम ख़तम करके आँ जानां….मे वेट करूँगा…”
इतने मे बस आँ गई, ….ममता नें प्रेम सें विनय केँ गाल कों चूमा औऱ फिनबस मे चढ़ गयीँ, ….विनय नें बाहर् खड़े होकरहाथ हिलाते हुए उससे विदा किया, औऱ उसकेबाद दुःखी चेहरा लिएहुए घऱ कि तरफ लौटने लगा……
तभी सामने सें विनय कों रामूआता हुआ दिखाई दिया….उसके हाथ मे भि बॅग थां….विनय कों देख उसके होंटो पर्र मुस्कान फेल गयीँ, ….जैसे हि वोँ विनय केँ पास पहुचा तोँ, उसने अपनाबॅग नीचेरखा औऱ इधरउधर देखते हुए बोला….”अर्रे विनय बाबूपता हैं सुभह सें आपकेघऱ केँ सामने सें 5 चक्कर लगा चुका हूं…”
विनय: क्यूं……कोई ज़रूरी काम थां….?
रामू:हां वोँ मेरे पिता जी कि तबीयत खराब हौ गई, हैं….इसीलिए गाओंजा रहा हूं….कल आपको बताया थां नाँ कि आजसाम कों घऱ पऱ आनां हैं….?
विनय:हां कहा थां तोँ….?
रामू:वही बताना चाहता थां….कि आज मे गाओंजा रहा हूं….20 दिनबाद हि आउन्गा…। जब विद्यालय शुरुआत होंगे तब….आप् दोपहर कों 12 बजे विद्यालय मे चले जानां….मेरी पत्नि अंजूवही होगे….उससे मिल लेना….वोँ तुम्हे बता देगे कि, मैने तुम्हे क्यूं बुलाया थां….
विनय: नाँ नां मे नहीं जाता उसके सामने……मुझे तोँ बहोत डर लगता हैं तुम्हारी पत्नि सें….
रामू: आप् क्यूं फिकरकर रहे हैं….उसको समझा दिया हैं….उसने तौ आपको बुलाया हैं….देख्ना वोँ आपसे माफी भि माँगेगी….
विनय: नहींफिन भि मे अकेला नहीं जाउन्गा उसकेपास….
रामू: अच्छा एक् काम करो….यह यह पैसे लो….औऱ अभि विद्यालय जाओ…जब वोँ बाहर् आए तोँ, उसेयह पैसे देना औऱ बोल्ना कि, मेने भेजे हैं….अगर तुम्हे लगे कि वोँ अभि भि तुम्हारे संगठीक सें पेश नहीं आँ रही हैं तौ, फिन दोपहर कों मत जानां ठीक हैं……
विनय:(कुछ देर सोचने केँ बाद….) पर्र करना क्याँ हैं वहा मेने जाकरसॉफ-2 बाताओ….
रामू: (उसके सामने चुदाई कां इशारा करतेहुए) यह करना हैं….साली कि बुर मे बहोत आगलगी हुइ….साली कों ठंडाकर देना….
रामू केँ मूह सें यहबात सुनकर विनय एक् दम भौचक्का रह गय़ा…उसे यकीन नहीं होँ रहा थां कि, रामू उससे स्वयं कहरहा हैं, कि उसकी पत्नि कों चोद दे….रामू नें मुस्कुराते हुए विनय केँ कंधे पऱ हाथ मारा….”अच्छा अब मे निकलता हूं, ट्रेन कां समय होँ रहा हैं….जानना अवश्य.” रामू नें अपनाबॅग उठाया औऱ आगे निकल गय़ा….कुछ पलों केँ लिए विनयवहा सें हिल भि नहीं पाया….उसे समझ मे नहीं आँ रहा थां कि, आख़िर यहसभी उसकेसंग होँ क्याँ रहा हैं.
अभि विनय चलने हि लगा थां कि, रामू नें उसेफिन सें आवाज़ लगाई, वोँ थोड़ी दूरी पर्र एक् मेडिसिन कि दुकान पऱ खड़ा थां….शायद कुछ लें रहा थां….विनय धीरे-धीरे-2 उसकीतरफ बढ़ा, इतने मे रामू भि दुकान सें उसकीतरफ आया, औऱ फिनइधर उधर देखते हुए एक् छोटा सां पॅकेट उसकेहाथ मे पकड़ा दया….
विनय:यह क्याँ हैं….?
रामू: (मुस्कुराते हुए) व्याग्रा हैं……
विनय: (पॅकेट खोलकर अंदर पड़ी टॅब्लेट्स कि तरफ देखते हुए….)इन गोलियों कां मे क्याँ करूँगा……
रामू:शीई धीरे-धीरे बोल……सुन यह गोलियाँ बहोत काम कि चीज़ हैं….देख जब तुँ दोपहर कों विद्यालय मे जाएगा तौ, जाने सें 1 घंटा पहले 1 टॅबलेट खा लेना….
विनय: क्यूं…….?
रामू: अर्रे दोस्त इससे लन्ड एक् दम लोहे केँ जैसे सख़्त होँ जाता हैं….बड़ी-2 गस्तियो कि बस होँ जाती हैं….अगर इसकोखा कर किसी केँ ऊपेरचढ़ जाओगे……तुम्हारा लन्ड झड़ने केँ बाद भि नहीं बैठेगा….उस साली रांड़ कि ऐसे ठुकाइ करना कि, साली तेरे लन्ड कि गुलाम होँ जाए….
विनय: दोस्त इसे खाने सें कोई गड़बड़ तोँ नहीं होगी……
रामू: नहीं होती दोस्त मेने स्वयं खाकर देखी हैं….औऱ वोँ मनीष हैं नाँ….उसने भि एक् बारयह गोलीखा कर मेरेऐसे ठुकाइ कि थि, कि साला 4 दिन तक तोँ चल हि नहीं पाया थां…अच्छा अब मे चलता हूं….नहीं तोँ ट्रेन मिस हौ जाएगी….
रामू जल्द सें रोड कि तरफचला गय़ा….विनय धीरे-धीरे-2 घऱ कि तरफ जाने लगा….वोँ बारबार हाथ मे पकड़े हुए पैसो कों देखरहा थां……उसे समझ मे नहीं आँ रहा थां कि, वोँ अब क्याँ करे, रह-2 कर उसके दिमाग़ मे अजीब-2 सें ख़याल आँ रहे थें….कि, कही उसकी पत्नि मुझे किसी चक्कर मे हि नां फँसा दे…अगर कुछ गड़बड़ हुईँ तोँ, घऱ पर्र मेरे बारे मे सभी क्याँ सोचेंगे….एक् हाथ मे पैसे, औऱ एक् पॉकेट मे व्याग्रा केँ 10 टॅब्लेट्स, विनय कों ऐसालग रहा थां। कि जैसे वोँ कोईनशे कां समान चोरी छिपे कहीं लें जारहा होँ….
रास्ते मे जातेहुए जबकभी कोई पहचान वाला दिखाई देता तोँ, विनयडर केँ मारेसर झुका लेता। पहले तोँ इन पैसो कों ठिकाने लगाना हैं….घऱ गय़ा औऱ मामीजी नें मेरेपास यह पैसेदेख लिए तोँ क्याँ जवाब दूँगा….वोँ इसीसोच मे चलताहुआ विद्यालय केँ पास पहुच गय़ा थां…। वोँ मन हि मनसोच रहा थां कि, रामू तोँ विद्यालय केँ बिल्कुल पीछे वालेरूम मे रहता हैं। अगरगेट बंदहुआ तोँ बहोत ज़ोर-2 खटकाना पड़ेगा….औऱ अगर किसी नें देख लिया तौ क्याँ जवाब दूँगा कि, बंद विद्यालय मे क्याँ काम हैं….
बोल दूँगा कि, रामू नें पैसे भेजे हैं वही पकड़ाने हैं……जवाब तोँ विनय केँ पास सजधजकर हि थां….पर्र जैसे हि वोँ विद्यालय केँ सामने पहुंचा तोँ यहदेख कर उसकीजान मे जानआए, कि रामू कि पत्नि अंजू विद्यालय केँ बाहर् गली मे खड़ी हुईँ थि….औऱ सब्जी वाले सें सब्जी लेँ रही थि….उसने मिक्स लाइट पिंक औऱ वाइटकलर कि साड़ी पहनी हुइ थि….वोँ झुंककर ठेले सें सब्जी उठारही थि……जैसे हि अंजू कि नज़र विनय पऱ पड़ी, तोँ उसने होंटो पऱ कामुक मुस्कान लातेहुए विनय कि तरफ देखा, तौ विनय एक् दम सें हैरान होँ गय़ा….वोँ धीरे-धीरे-2 आगे उसकीतरफ बढ़रहा थां……”जाओ भैया इसमे सें कोई भि तरकारी ताज़ी नहीं हैं….नहीं लेने मुझे.” उसनेजब विनय कों पासआते हुए देखा तौ, उसने सब्जी वाले कों दौड़ना हि सही समझा….
Next soon।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
bahut hi gazab kaa likhte hu please kahani की speed एक jaisi rkhna daily ya week mei 3 4 updates जैसे b suitable hu abb kisi b new kahani ko read krte mind mei yehi rhta की pta nahii continues likha jyegi ya nahii और adultery section hi पसंद h तो achhi kahani rukh jye तब बुरा lgta h
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -8
सब्जी वाला भुन्भुनाता हुआआगे चला गय़ा….विनय अंजू केँ पास आया….औऱ अंजू कि तरफ पैसे बढ़ाते हुए बोला……”यह पैसे वोँ अंकल नें दिए थि आपको देने केँ लिए…” अंजू नें मुस्कराते हुए विनय कों ऊपेर सें नीचे कि तरफ देखा, जैसे बिल्ली चूहे कों खाने सें पहलेदेख रही होँ, कि कितना गोश्त हैं उसमे……उसने विनय केँ हाथ सें पैसे लेतेहुए, उसके सामने हि अपने ब्लाउस मे हाथ डालते हुए अंदररख लिए……
अंजू: (कातिल अदा केँ संग मुस्कराते हुए) औऱ कुछ तौ नहींकहा थां……?
विनय:(कुछ सोचकर हकलाते हुए)हां वोँ वोँ कहा थां कि, आप् कों कुछकाम हैं मुझसे इसीलिए 12 बजे आपकेपास आने केँ लिएकहा थां….
अंजू: (होंटो पर्र तीखी जानलेवा मुस्कान लाते हुए….)औऱ कुछ नहींकहा क्याँ……
विनय: नां नहीं औऱ कुछ नहींकहा….
अंजू:(मन हि मान रामू कों कोसने लगी कि, रामू नें उसेसॉफ-2 क्यूं नहीं बताया….अंजू सोचरही थि कि, अबइस चिकने लौन्डे कों स्वयं हि अपनेकाम जाल मे फसाना होगा.)चल कोई नाँ….फिन 12 बजे आँ रहे हौ नां….
विनय:जी आँ जाउन्गा….
अंजू: (विनय केँ बिल्कुल लगभग जाकर खड़े होते हुए….इतना लगभग कि विनय केँ नथुनो सें निकलने वालीहवा उसे अपनी ब्लाउस केँ ऊपेर सें झाँकरही चुचियों पऱ महसूस होनेलगी। विनय कि हालत तौ एक् दम पतली हौ गई, थि….) ठीक हैं आँ जानां….मे तुम्हारा प्रतीक्षा करूँगी….
यहकहकर जैसे हि अंजू मूडी, तौ उसके ब्लाउस मे कसी हुईँ चुचियाँ विनय केँ कंधे सें रगड़खा गई……विनय कां पूरा शरीर झंझणा उठा…”आहह-आहह……” अंजू नें जानबुज कर सिसकते हुए विनय कि आँखो मे देखा औऱ फिन कातिल अदा केँ संग मुस्कुराते हुए विद्यालय केँ अंदरचली गई,। विनय वापिस घऱ कि तरफ जाने लगा….वोँ सारे रास्ते मे अपने हि ख्यालों मे डूबाहुआ थां। जैसे हि वोँ घऱ केँ पास पहुचा तौ उसे अपने पेंट कि पॉकेट मे पढ़ी हुईँ व्याग्रा टॅब्लेट्स कां ख़याल आया……उसका दिल जोरो सें धड़करहा थां….
कि कही मामीजी कि नज़र उसकी पेंट कि फूली हुईँ जेब पर्र नां पड़ जाए….विनय नें डरतेहुए डोरबेल बजाई, तौ थोड़ी देरबाद वशाली नें गेट खोला….विनय नें अंदरआते हुए वशाली सें पूछा, “वशाली मामीजी जी कहां हैं….”
वशाली: वोँ अभि शीतल फूफी केँ घऱ पऱ गयीँ, हैं….
जैसे हि विनय नें सुना कि मामीजी घऱ पर्र नहीं हैं, तौ उसकीजान मे जान आई….वोँ जल्द सें अपनेरूम कि तरफचला गय़ा….रूम मे पहुचकर वोँ ऐसी स्थान तलाश करनेलगा। जहाँ पऱ वोँ उन टॅब्लेट्स कों रख सके…तभी विनय कों अपने पिग्गी बॅंक कां ख़याल आया….जिसमे उसने पिछले एक् साल सें काफ़ी पैसे जोड़कर रखेहुए थें….उसने जल्द सें अपने पीगी बॅंक कां लॉक खोला औऱ उसमे एक् टॅबलेट कों छोड़कर बाकीसभी रख दि….
क्योंकि विनय जानता थां कि, उसके पिग्गी बॅंक कों कोई भि हाथ नहीं लगाता….औऱ वैसे भि उसके पिग्गी बॅंक केँ लॉक कि चाबी सिर्फ़ उससे केँ पास रहती थि….उसके बाद विनय नें घड़ी मे समय देखा तोँ अभि सिर्फ़ 9:30 बजरहे थें….तभी उसे बाहर् सें मामीजी औऱ मासी शीतल कि आवाज़ सुनाई दि….दोनो घऱ आँ चुकी थि….विनय जबरूम सें बाहर् निकलकर बरामदे मे आया तोँ, देखा किरण मामीजी औऱ शीतल मासी केँ संग उनके दोनो बच्चे भि आएहुए थें….
विनय कों देखते हि, पिंकी औऱ अभि दोनो उसकेपास आँ गये…….”चलो भइया हाइड & सीक खेलते हैं….” अभि नें विनय कां हाथ पकड़ते हुए कहा….विनय कां मन तोँ नहीं थां। पर्र 12 बजने मे अभि बहोत वक्त थां….इस लिए वक्तपास तौ करना हि थां….”चलो फिन ऊपेर चलते हैं….” विनय नें अभि कि ओर देखते हुए कहा….तोँ पिंकी वशाली केँ रूम कि तरफ जाने लगी….”मे वशाली दिदी कों भि बुलाकर लाती हूं….” औऱ फिन वोँ वशाली केँ रूम मे चली गई, ….थोड़ी देरबाद जब वशाली रूम सें बाहर् आई, तौ उसकेसंग रिंकी भि थि….रिंकी कों देखते हि, विनय कों कुछदिन पहले हुई अलमारी वाली घटनायाद आँ गई, ….
रिंकी बड़ी हसरतभरी नज़रों सें विनय कि तरफदेख कर मुस्कुरा रही थि….अब विनयकुछ-2 लड़कियों केँ चेहरे केँ हावभाव समझने लग गय़ा थां…
विनय रिंकी कि टीशर्ट मे कसी हुईँ चुचियों कों एक् टक घुरेजा रहा थां….उसकी चुचियाँ ममता सें थोड़ी हि छोटी थि……जब रिंकी नें उसे अपनी चुचियों कि तरफइस तरह घुरता हुआ पाया तोँ, उसने मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे-2 सें वशाली केँ कान मे कुछकहा, तोँ वशाली नें भि विनय कि नज़रों कां पीछा काया, औऱ फिन रिंकी कि तरफ देखने लगी….फिन दोनो एक् दम सें हँस पढ़ी….विनय कों समझ आँ गय़ा कि, यह दोनो उसकी बेफ़्कूफी पऱ हंसरही हैं….इसीलिए उसने शर्मिंदा होतेहुए अपनेसर कों झुका लिया…….
वशाली: अबऐसे हि कबूतर कि तरह खड़ा टुकूर-2 देखता रहेगा……याँ फिनकुछ करेगा भि….?
वशाली नें रिंकी कि कमर मे कोहनी मारते हुए, विनय सें कहा तोँ, विनय एक् दम सें हड़बड़ा गय़ा….”क्याँ क्याँ करना हैं…….” वशाली औऱ रिंकी दोनो एक् दूसरे कि तरफदेख करफिन सें खिलखिलाने लगी….”कुछ नहीं भौंदू राम….तुम् लोग ऊपेर जाकर छुपो….सबसे पहले मे टर्न देती हूं……” वशाली नें आँखो हि आँखो सें रिंकी कों इशारा करतेहुए कहा….
विनय: क्याँ बात हैं, आज बड़ी दयालु होँ रही हैं तुँ हम् सभी पर्र……
वशाली: मेरी मरजीअब जाओ ऊपेर जाकर छुपो नां……मे काउंटिंग स्टार्ट करनेलगी हूं….
वशाली नें इतनाकहा हि थां कि, सभी नें ऊपेर कि तरफ दौड़लगा दि….पिंकी औऱ अभि दोनोअलग -2 कमरो मे छुप गये….जबकि विनयउसी रूम कि तरफबढ़ रहा थां….जहाँ पऱ वोँ कुछदिन पहले रिंकी केँ संग अलमारी केँ अंदर छुपा थां….विनय कां दिलउस रूम कि तरफ जातेहुए जोरो सें धड़करहा थां….कारण यह थां कि, रिंकी आज भि उसके पीछे-2 हि आँ रही थि….रूम मे पहुँच कर, विनय नें वोँ अलमारी खोली, औऱ अंदरघुस गय़ा….तौ बाहर् खड़ी रिंकी नें मिन्नत भरे लहजे मे कहा……”विनय मे भि अंदर आँ जाउ….”
उसके होंटो पर्र मासूम सि स्माइल थि……विनय नें हां मे सर हिलाया तोँ, रिंकी जल्द सें उस अलमारी मे घुस गयीँ, ……अलमारी मे घुसते हि, विनय नें जैसे हि अलमारी केँ डोर कों बंद किया, तौ, रिंकी नें उसीदिन कि तरह हि, अपनी स्कर्ट कों आगे सें ऊपेरउठा लिया….ताकि वोँ अपने मुनिया कां संगम उसके बलमा यानी विनय केँ लन्ड सें करवा सके….जैसे हि डोरबंद हुआ, तौ अंदर एक् दम अंधेरा छा गय़ा……दोनो एक् दूसरे कि तरफमूह करके आमने सामने खड़े थें….दोनो कि साँसे एक् दूसरे केँ चेहरे पर्र टकरारही थि….”आहह-आहह यहा खड़ा होनासच मे बहोत मुस्किल हैं….” रिंकी नें अपने दोनो हाथो कों विनय केँ कंधे पर्र रखतेहुए कहा…
रिंकी कों अपने इतना लगभग पाकर विनय कां दिल भि जोरो सें धड़करहा थां….रिंकी जिस्म सें उठरही भीनी-2 मादक खुसबु उसे दीवाना बनाएजा रही थि….दोनो अंधेरे मे हि एक् दूसरे केँ आँखो मे झाँकने केँ कॉसिश कररहे थें….जब रिंकी कों अपनी जाँघो केँ बीचइस बार विनय केँ लन्ड कां दबाव महसूस नहींहुआ, तोँ उसने अपनी टाँगो कों खोलकर अपनी बुर कों विनय कि पेंट केँ ऊपेर सें लन्ड वाले हिस्से पऱ धीरे-धीरे-2 रगड़ना शुरुआत कर दिया….इतना धीरे-धीरे कि विनय कों अंदाज़ा लगाना भि मुस्किल हौ रहा थां कि, रिंकी यहसभी जानबूझ करकररही हैं….याँ फिन स्थान तंग होने केँ कारण वोँ सही सें खड़े नहीं हौ पारही…….
पऱ जोँ भि थां, रिंकी कि पेंटी मे कसी हुइ बुर कि तपिश उसके लन्ड तक अवश्य पहुँच गई, थि……जिसके कारण उसका लन्ड उसकी पेंट मे अब धीरे-धीरे-2 खड़ा होनेलगा थां….विनय कों भि लगनेलगा थां कि, रिंकी भि उसकीतरह वासना कि आग मे जलरही हैं….उसने हिम्मत करतेहुए औऱ अंज़ान बनतेहुए अपना एक् हाथ उसकीकमर पर्र रख दिया….जैसे हि रिंकी कों विनय कां हाथ अपनीकमर पर्र महसूस हुआ, तौ रिंकी केँ शरीर मे सिहरन सें दौड़ गयीँ, ….उसने अपनी पैंटी केँ ऊपेर सें बुर पर्र विनय कां तनाहुआ लन्ड रगड़ ख़ाता हुआ महसूस होनेलगा थां…
दोनोकुछ देरचुप रहे….दोनो कि साँसे धौंकनी कि तरहतेज चलरही थि….रिंकी कि बुर सें पानीरिस-2 कर उसकी पेंटी कों गीला करनेलगा थां….यही हाल विनय कां भि थां…उसका लन्ड तौ मानो जैसे बागवत पऱ उतरआया थां….वोँ पेंट फाड़कर रिंकी कि बुर मे घुस जानां चाहता थां….औऱ रिंकी कि बुर भि विनय केँ लन्ड कों अपने अंदर महसूस करने केँ लिए धुनकने लगी थि….औऱफिन जब मदहोश होकर विनय नें अपना दूसरा हाथ भि रिंकी कि कमर पऱ रखा। तौ रिंकी एक् दम सें सिसकते हुए विनय सें एक् दम चिपकगये……
उसकीगोल-2 चुचियाँ विनय कि चेस्ट मे दब सें गयीँ, ….लन्ड रिंकी कि बुर पर्र पैंटी केँ ऊपेर सें अंदर जाने केँ लिए दबाव बढ़ाता जारहा थां….”श्िीीईईईईईई विनय…….” रिंकी नें सिसकते हुए, जैसे हि अपनीकमर कों हिलाते हुए अपनी बुर कों उसके लन्ड पर्र रगड़ा तौ, मानो जैसे विनय पऱ कहरबरस गय़ा हौ….विनय केँ लन्ड नें झटके खातेहुए अपना लावा उगलना शुरुआत कर दिया….उसकी साँसे उखाड़ने लगी थि….
औऱ फिन धीरे-धीरे-2 उसका लन्ड सिकुड़ने लगा……एक् अजीब सि शर्मिंदगी उसकेदिल दिमाग़ पर्र हावी होनेलगी थि……झड़ने केँ बादपता नहीं क्यूं अब उसका औऱ मन नहीं थां….वहा खड़े रहने कां….उसने अलमारी कां डोर खोला, औऱ बाहर् आँ गय़ा….रिंकी भि अपनी स्कर्ट ठीक करतेहुए उसके पीछे बाहर् आँ गयीँ, ……रिंकी कों भि विनय कि हालत कां कुछ-2 अंदाज़ा होँ गय़ा थां। “क्याँ हुआ विनय बाहर् क्यूं आँ गये….” रिंकी नें जब विनय कों सर झुकाए देखा तौ, उसने विनय सें पूछा……”क ककुछ नहीं……मेरा मन नहीं हैं….खेलने कां….”
तभी रिंकी कि नज़र विनय केँ पेंट पऱ पड़ी, जौ उसके वीर्य केँ कारणआगे सें गीली हौ चुकी थि…….”हाईए इसका तौ इतनी जल्द हौ गय़ा…….फट्टू साला……” रिंकी नें मन हि मन विनय कों गाली दि….क्योंकि, विनय नें उसे मज़धार मे हि छोड़ दिया थां….वोँ कामवासना कि आग मे सुलगरही थि……औऱमन हि मन विनय कों कोसरही थि….इतने मे वशाली भि आँ गई, ….इससे पहले कि वशाली कुछ बोलती, विनयरूम सें बाहर् चला गय़ा….विनय कों इसतरह गुस्से सें बाहर् जातादेख, वशाली नें रिंकी सें पूछा…….
वशाली: क्याँ हुआ रिंकी, विनय इतने गुस्से मे बाहर् गय़ा हैं क्यूं……?
रिंकी: (एक् घमंडी मुस्कान होंटो पर्र लातेहुए….) हूं कुछ नहीं…….तेरा भइयादो मिनट भि नहींटिक पाया….सारा मजा किरकिरा कर दया….पेंट मे हि लीक होँ गय़ा उसका….
वशाली: श्िीीईई धीरे-धीरे बोल….पागल हैं तूँ भि….अभि उसकी उम्र हि क्याँ हैं……
रिंकी: पर्र इतनी जल्द….मुझे तौ लगता हैं….तेरा भइया नमार्द हैं……
वशाली: देख रिंकी अगरआज केँ बाद तूने विनय केँ बारे मे ऐसाकुछ बोला तौ, मुझसे बुराकोई नाँ होगा….
रिंकी: ठीक हैं……मे भि आज केँ बाद तुमसे कोईबात नहीं करूँगी….मे जारही हूं….
रिंकी औऱ वशाली दोनोइस बात सें अंज़ान थि कि, विनयरूम केँ बाहर् खड़ाछुप कर उनकी बातें सुनरहा हैं….एक् बार तौ उसे वशाली पऱ इतना क्रोध आया कि, वोँ अभि जाकर उसकेमूह पर्र थप्पड़ मार दे….पऱ वशाली नें उसकी साइडली थि….जिसके कारण उसका क्रोध थोडा ठंडा अवश्य होँ गय़ा थां……विनय वापिस नीचेचला गय़ा….औऱ अपनेरूम मे जाकर एक् हाफ पेंटली, औऱ बाथरूम मे घुस गय़ा….उसने उस धब्बे कों सॉफ किया, औऱ फिनहाफ पेंट पहनी औऱ उसमे सें व्याग्रा कि टॅबलेट निकाल कर अपने शॉर्ट्स केँ पॉकेट मे रखली….
उसकेमन मे अजीबतरह कां डरघऱकर गय़ा थां…….कि कहीअगर अंजू केँ पास जाकर भि उसकेसंग ऐसा हि हुआ तौ, कही वोँ भि उसका मज़ाक नाँ उड़ाए….पऱ रामू कि कही हुई बातउसे याद थि….किइस टॅबलेट कों खाने सें क्याँ होता हैं….रिंकी अपनेघऱ जा चुके थि….11 बज चुके थें….विनय नें पहले सें हि अपनेरूम मे पानी कि बॉटलरखी हुईँ थि….उसने जब देखा कि सभीलोग बाहर् बरामदे मे बैठे हैं, तौ उसने व्याग्रा कि टॅबलेट खा ली…फिन बाहर् आकर अपनी मामीजी केँ पासबैठ गय़ा….औऱ 12 बजने कां वेट करनेलगा….
पऱ बाहर् जाने केँ लिए भि तौ कोई नां कोई एक्सक्यूज़ तोँ लगाना हि थां……पऱ विनय जानता थां कि, उसकी मामीजी इतनीतेज धूप मे उसकोघऱ सें बाहर् आसानी सें नहीं जाने देगी….विनय नें लगभग 10 मिनट तक काफ़ी तरह केँ बहाने सोचे….फिन आख़िर गाड़ी उसके दिमाग़ मे कुछआया तोँ वोँ अपनी मामीजी सें बोला……
विनय: मामीजी वोँ मुझे आकाश केँ घऱ जानां हैं….
किरण: आकाशकॉन आकाश….
विनय: मेरे क्लास मे….सुभह जब मे मासी कों छोड़कर आँ रहा थां….तब मुझे अपनी माँ केँ संग मिला थां रास्ते मे….उसकी माँ बोलरही थि कि, तुम् आकाश कों आकर इंग्लीश कां होमे वर्क करवा देना……
किरण: तोँ साम कों चले जानां……इतनी धूप मे क्यूं जानां हैं….?
विनय: वोँ मामीजी उसका होमवर्क बहोत पीछेचल रहा हैं….इसीलिए……
किरण: अच्छा चले जानां….पऱ बाहर् मत घूमना ज्यादा….जा पहलेकुछ खा लें….
विनय: नहीं मामीजी मे आकरखा लूँगा….
किरण:देख ज़िद्द नहीं करते….पता नहींवहा तेरी कितना समय लगे….चल बैठ किचन मे अंगूर रखे हैं……मे लाकर देती हूं….
विनय:जी मामीजी…….
किरणउठ कर रसोई मे गयीँ, ….औऱ एक् प्लेट मे अंगूर डालकर लेँ आई….विनय नें अंगूर खाए…तौ देखा कि, 12 बजने मे सिर्फ़ 15 मिनटबचे हैं….विनय नें अपनी एक् कॉपी औऱ इंग्लीश कि बुक उठाई औऱ घऱ सें बाहर् आँ गय़ा….विद्यालय तौ 5 मिनट कि दूरी पऱ हि थां….धूप इतनीतेज थि कि, गली एक् दम सुनसान थि….कोई भि बाहर् नज़र नहीं आँ रहा थां…विनय अपनीगली सें बाहर् आँ चुका थां….सामने हि विद्यालय थां….औऱ जैसे हि वोँ विद्यालय केँ गेट केँ सामने पहुंचा तोँ, उसने देखा कि विद्यालय कां छोटागेट थोडा सां खुलाहुआ थां……
औऱ अंदर कि तरफ एक् छोटे टेबल पर्र अंजू बैठी हुईँ बाहर् कि तरफदेख रही थि……उसने फरोज़ी कलर केँ साड़ी पहनी हुइ थि….जैसे हि उसने विनय कों विद्यालय केँ गेट केँ सामने देखा तोँ, उसने जल्द सें खड़े होकरगेट खोला औऱ विनय कों अंदरआने कां इशारा काया….विनय नें गली मे दोनोतरफ देखा……गली मे उस वक्तकोई भि नाँ थां……विनय जल्द सें विद्यालय केँ अंदरचला गय़ा….जैसे हि विनय अंदर गय़ा….अंजू नें गेटबंद किया……
औऱ फिन विनय कि तरफपलट कर मुस्कुराते हुए बोलीं….”बड़े समय पऱ आँ गये होँ….नहीं तोँ मुझेयहा गरमी मे बैठना पड़ता….चलो अंदर चलते हैं….” यहकहकर अंजू विद्यालय कि बिल्डिंग केँ पीछेबने हुए अपने रूम्स कि तरफ जाने लगी….अंजू केँ पीछे चलतेहुए विनय कां दिल जोरो सें धड़करहा थां….उसे अभि भि यकीन नहीं हौ रहा थां कि, क्याँ जोँ रामू नें उससेकहा हैं, वोँ सही हैं….आगे चलरही अंजू कि मोटी बलखाती हुई गान्ड कों देखकर विनय केँ लन्ड मे हलचल होनेलगी थि….धूप बहोत तेज थि….इसीलिए अंजू तेज़ी सें चलतेहुए कमरो कि तरफजा रही थि….
उसनेरूम केँ सामने पहुँच कररूम कां डोर खोला, औऱ विनय कों अंदरआने कां इशारा करतेहुए, रूम केँ अंदरचली गये….विनय भि उसके पीछेरूम मे आँ गय़ा….
too be continue।
नादान लन्ड केँ जलवे - Aage kya hua? Next part padhiye
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