Erotica वासना का भंवर - Hotel Talasaniya - Latest Update 1
वासना कां भंवर
केरल केँ सेंट मैरीशहर केँ पुलिस स्टेशन मे सुभह८ बजे कि हलचल थि। रात केँ स्टाफ़ कि ड्यूटी समाप्त हौ रही थि लिहाज़ा मॉर्निंग स्टाफ़ केँ संग हैन्डिंग ओवर कि प्रक्रिया चलरही थि। थाना इंचार्ज जय सिंह जिसकी उम्र करीब३6 साल कि थि, क़द६ फ़ीट, रंग गेहूँआ। अपने रिलीवर कां इंतजार कररहा थां।
यहरात भि बिना किसी जुर्म केँ कट गई,। कोई वारदात नहि हुई थि। इसबात कि तसल्ली केँ संग वोँ गरमचाय कि चुस्कियाँ लेँ रहा थां कि अचानक कंट्रोल रूम कां फ़ोन लम्बी घंटी केँ संगबज उठा। वहा खड़ेसब पुलिसकर्मी चौंकगये। कंट्रोल कां फ़ोन एक् ऐसा फ़ोन थां जिसकी घंटीकोई भि नहि सुनना चाहता थां।
जय नें हाथ बढ़ाकर फ़ोनउठा लिया-
"हैलो पंजिम पुलिस स्टेशन, एसएचओ जय सिंह। "जय नें कंट्रोल सें कुछ आदेश लिये औऱ हरकत मे आँ गय़ा। उसने अपनी टोपी उठायी औऱ स्टाफ़ कों आवाज़ लगाते हुएकहा-
"जल्दचलो। होटल तलसानियाँ." अगले हि लम्हा पुलिस कि वैन अपना परिचित सायरन बजाते हुए केरल कि सड़कों पऱ दौड़रही थि। जिसमें तीन हवलदार औऱ दो लेडी कांस्टेबल भि थीं। मामला गंभीर लगरहा थां। जय नें समय बर्बाद नं करतेहुए रास्ते मे हि डिटेक्टिव कुणाल कों फ़ोनलगा दिया।
कुणाल जिसकी उम्र४० केँ आसपास रही होगी। सर पे हल्के घुँघराले बाल। हर काम धीमीगति सें करने कि जिसकी आदत हैं। यहा तक कि बात भि उसीगति सें करता हैं। उसने सुभह कि पहली उबासी लेतेहुए पूछा-
"बोलिये जयजी सुभह-सुभह मेरीयाद केसे आँ गई,।
जय जौ अभि भि अपनीजीप मे होटल तलसानियाँ कि तरफ़बढ़ रहा थां उसने मुस्कुराते हुएकहा-
डिटेक्टिव कुणाल अभि-अभि एक् वारदात हुई हैं होटल तलसानियाँ मे, वहींजा रहा हूं। सोचा आप् इसकेस मे इंट्रेस्टेड होंगे तौ फ़ोनकर दिया। "
कुणाल- "क्याँ हुआ हैं?"
जय- "मर्डर
एक् नहि दो-दो.हनीमून कपल थां। " इतना सुनकर कुणाल कि नींदहवा होँ गई,।
"रियली? साउंड्स वीयर्ड! ठीक हैं मे पहुँचता हूं। " कहते हि वोँ बाथरूम मे घुस गय़ा।
उधर होटल तलसानियाँ कि तीसरी मंज़िल केँ रूम नंबर 224 केँ बाहर् होटल केँ स्टाफ़ कि भीड़जमा थि। तभी इंस्पेक्टर जय कों अपनीटीम केँ संगवहा पाकर, वहा केँ मैनेजर कुलकर्णी नें सबको पीछेकर दिया औऱ जय कों मार्ग दिखाते हुएरूम नंबर 224 मे लेँ गय़ा। जय वोँ नज़ारा देखकर चौंक गय़ा। वहा ज़मीन पऱ एक् लड़का जिसकी उम्र करीब२८ साल कि रही होगी, सर सें ख़ून बहकरसूख गय़ा थां। हाथ मे चाक़ू थां जौ ख़ून सें सनाहुआ थां। यहराज हैं। ऐसा प्रतीत होँ रहा थां कि उसनेइस चाक़ू सें उस लड़की कां क़त्ल कर दिया हैं जिसकी लाश सामने हि बिस्तर पऱ पड़ी थि। जय नें नज़दीक जाकर देखा, बिस्तर पऱ एक् ख़ूबसूरत लड़की कि लाश पड़ी थि। यह डॉली थि। शरीर सें काफ़ी ख़ून बहने सें पूरा कां पूरा पलंग ख़ून सें भराहुआ थां। जय नें कुलकर्णी कि तरफ़ रुख़ करतेहुए पूछा-
"कौन हें यहलोग?"
कुलकर्णी- "सरइस लड़के कां नामराज शर्मा हैं औऱ यह इसकी पत्नी डॉली शर्मा। हनीमून केँ लिएआये थें यहा। दो दिन पहले हि इन्होंने इस होटल मे चेकइन किया थां औऱ आज सुभहजब हाउस कीपिंग वाला राउंड पऱ आया तौ उसनेरूम नंबर 224 मे इन दोनों कि लाश देखी। फ़ौरन मैंने १०० नंबर पर्र फ़ोनकर दिया। "जय नें हवलदार कों दोनों लाशों कां मुआयना करने कों कहा औऱ ख़ुद कुलकर्णी केँ संग बाहर् आँ गय़ा।
जय अभि कुलकर्णी सें पूछताछ कर हि रहा थां कि जय नें देखा डिटेक्टिव कुणाल भि वहा पहुँच चुका थां। सर पर्र एक् भूरेरंग कि हैट औऱ उससे मैचिंग लम्बा कोट। जय नें उसेआधी हि बात बतायी थि पऱ कुणाल पूरीबात समाझ गय़ा थां। यही तौ उसकी ख़ासियत थि कि वोँ इन्सान कि चाल देखकर बता देता थां कि वोँ कहां सें आया हैं औऱ कहां कों जायेगा। वक्त बर्बाद नाँ करतेहुए उसनेजय केँ संगरूम नंबर 224 कां रुख़ किया। जहाँ पुलिस टीम वारदात केँ सारे सबूत इकठ्ठा कररही थि। कुणाल नें डॉली कि लाश कों ग़ौर सें देखा जिसकी उम्र २५-२६ केँ आसपास थि। निहायत ख़ूबसूरत, रंग सफ़ेद। कुणाल नें तोँ आँखों सें हि उसकाक़द नाप लिया५" ७' औऱ फिनराज कि लाश कों जिसका रंग सफ़ेद थां, वर्ज़िशी जिस्म, देखने मे किसी अच्छी फ़ैमिली सें लगरहे थें दोनों।
जय- "मुझे तौ कोई आपसी झगड़े कां मामला लगता हैं। शायद एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर कां चक्कर। हाल मे कुछ मामले आये हें मेरे सामने कि विवाह केँ बाद लड़कियाँ अपने पुराने बॉयफ़्रेंड्स सें मिलती हें जिससे उनके पतियों कों परेशानी होती हैं याँ लड़के कों उसकी एक्स-गर्लफ़्रैंड मिलने आती हैं औऱ पत्नी कों पताचल जाता हैं। कुणाल नें ग़ौर सें दोनों लाशों कों देखते हुएकहा,
"पोस्सीबल हैं." पऱ अबइसबात कि पुष्टि करने केँ लिए दोनों मे सें कोई ज़िन्दा नहि हैं! अब तोँ हमेंउन सुबूतों पऱ निर्भर होना पड़ेगा जोँ यहा मिलेंगे याँ फिनवही पोस्टमोर्टम रिपोर्ट, CCTV फ़ुटेज। आप् एक् काम कीजिये लाशों कों पोस्टमोर्टम केँ लिए भिजवाइये, CCTV फ़ुटेज चेक करवाइये फिन देखते हें। " कहतेहुए उसने अपनी सिगरेट निकाली औऱ उसे सूँघता हुआ बाहर् कॉरिडोर मे आँ गय़ा।
पुलिस टीम केँ लोग, प्राथमिक औपचारिकता केँ बाद दोनों लाशों कों स्ट्रेचर पऱ लेँ जारहे थें। जय कुलकर्णी सें पूछताछ करनेलगा। कुणाल जेब सें लाइटर निकालकर सिगरेट जलाने लगा कि अचानक सिगरेट जलाते हुए कुणाल कि नज़र ज़मीन पर्र गयीँ,। उसने पाया कि कुछ ख़ून कि बूँदें कॉरिडोर मे गिरी हुई हें। उसने वहीं सें आवाज़ लगाकर उन लोगों कों रोक दिया जौ इन लाशों कों लेँ जारहे थें।
कुणाल-"ऐ। एक् मिनट रुको." औऱ भागता हुआ डॉली औऱ राज कि लाश केँ पास आँ गय़ा। उसकीयह हरकतदेख जय भि चौंक गय़ा। कुणाल नें ग़ौर सें देखा केँ ख़ून कि बूँदें राज कि लाश सें टपकरही थीं। उसनेफट सें अपनेकोट कि जेब सें रबर कां दस्ताना निकालकर पहना औऱ राज कि गर्दन पर्र हाथरख कर उसकी नब्ज़ देखने लगा। जय भि यह नज़ारा देखकर हैरान थां। कुणाल नें तब सबकोयह कहकर चौंका दिया-
"यह लड़का ज़िन्दा हैं! जयजी जल्द एम्बुलेंस बुलवाइए। "
कुणाल कि बात सुनकर जय हरकत मे आँ गय़ा उसने एक् हवलदार कों इशारा किया औऱ वोँ हवलदार अपना फ़ोन निकालकर काम पे लग गय़ा।
जय- "आपको केसेशक हुआ कि यह ज़िन्दा हैं?"
कुणाल- "इसकी बॉडी कां ख़ून अभि सूखा नहि हैं, जबकि इस लड़की कि बॉडी कां ख़ूनसूख चुका हैं। " कहतेहुए उसने अपनी सिगरेट जला दि।
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जय भि कॉरिडोर मे राज केँ शरीर सें टपकी इक्का-दुक्का ख़ून कि बूँदों कों देखरहा थां। इतनी बारीक नज़र रखता हैं डिटेक्टिव कुणाल, इसीलिए तौ जय भि उसे मानता हैं।
कुछ हि पलों मे एम्बुलेंस होटल केँ आहाते मे आँ गई, औऱ डॉली कि लाश कों मुर्दाघर मे औऱ राज कों इलाज केँ लिए हॉस्पिटल भेज दिया गय़ा। अगले हि लम्हा जय औऱ कुणाल होटल तलसानियाँ केँ रेस्टोरेंट मे बैठेगरम चाय कि चुस्कियाँ लें रहे थें। होटल कां मैनेजर अपना रजिस्टर लेकरजय कों उपयुक्त जानकारी देरहा थां। जय नें मैनेजर सें पूछा-
"यह दोनों 224 मे कब सें रुके हें?" कि मैनेजर कुलकर्णी नें कुणाल कों यहकहकर चौंका दिया-
"नहींसर यह दोनों राज शर्मा औऱ उनकी पत्नि डॉली शर्मा तोँ 331 नंबररूम मे रुके थें। यहरूम तोँ कल तक ज्योति शर्मा नाम कि लड़की केँ नाम सें बुक थां। "
"ज्योति शर्मा?" इसकेस मे नयानाम सुनकर कुणाल नें हैरानी सें जय कि ओर देखा। जय जानता थां कि उसे क्याँ करना हैं, उसनेफट सें मैनेजर सें कहा-
इस समय ज्योति शर्मा कहां मिलेगी? उसकाकोई फ़ोन नंबर?"
मैनेजर रजिस्टर पलटकर उसे ज्योति शर्मा कि सारी इन्फ़ोर्मशन देनेलगा।
उधर केरल एयरिपोर्ट पऱ अनायुन्स्मेंट होँ रही थि, "मिस ज्योति शर्मा जौ गोएयर कि उड़ान संख्या GA 563 सें दिल्ली जारही हें, उनकेलिए यह फ़ाइनल कॉलआई हैं। कृपया बोर्डिंग केँ लिये प्रस्थान करें। " कि अचानक वहा बैठी एक् ख़ूबसूरत लड़की कि यह आवाज़ सुनकर नींद खुली। यह ज्योति थि। रंग गोरा उम्र करीब-करीब २४साल, सर पे हल्के घुँघराले बाल। किसी मॉडल सें कम नहि लगरही थि। उसे एहसास हुआ कि नींद केँ कारण उसकी फ़्लाइट छूटने वाली थि। उसने तोँ अभि सिक्यूरिटी चेक भि नहि किया थां। बसहाथ मे बोर्डिंग पास पकड़े सो गई, थि। उसने अपना एक् हैण्ड बैगहाथ मे लिया औऱ ट्राली बैग कों घसीटते हुए सिक्यूरिटी चेकइन काउंटर कि तरफ़ दौड़ने लगी।
"हट जाइये। प्लीज़ मेरी फ़्लाइट छूट जायेगी। प्लीज़ मार्ग दीजिये। " वोँ दौड़ते हुएसब सें आग्रह कररही थि, पऱ वोँ जैसे सिक्यूरिटी चेकइन काउंटर पर्र पहुँचने वाली थि कि उसका फ़ोनबज उठा। उसने देखा कि ट्रू कॉलर पऱ केरल पुलिस फ़्लैश होँ रहा थां। ज्योति हैरान हुई कि केरल पुलिस कां फ़ोनउसे क्यूं आँ रहा हैं? उसनेझट सें फ़ोन उठाया-
"हैलो, कौन?"
दूसरी ओर होटल तलसानियाँ केँ रिसेप्शन सें जय कुलकर्णी केँ संग खड़ा थां। जिसने रजिस्टर मे ज्योति कां नंबर देखकर अपनेफोन सें उसे फ़ोन लगाया थां।
जय-"मिस ज्योति मे इंस्पेक्टर जयबोल रहा हूं, केरल पुलिस। आपसे ज़रूरी बातचीत."
ज्योति नें उसकीबात काटते हुएकहा-
"देखिये आपको जौ भि बात करनी हैं ५ मिनट केँ बाद कीजिये प्लीज़, मेरी फ़्लाइट छूट जायेगी। "
जय नें सख़्ती सें जवाब दिया-
"आप् कहीं नहि जा रहीं, आप् होटल तलसानियाँ केँ जिसरूम नंबर 224 मे ठहरीथीं उसमें एक् ख़ून हौ गय़ा हैं."
ज्योति- "ख़ून? किसका?"
जय- " एक् लड़की कां। नाम हैं डॉली। हेलो! हेलो, मिस ज्योति आप् सुनरही हें?"
ज्योति कों तोँ काटो ख़ून नहि, वोँ सुनरही थि कि उसकेनाम कि अनाउंसमेंट बार-बार होँ रही हैं।
ज्योति- "जीहाँ."
जय नें आगे करीबउसे चेतावनी देतेहुए कहा-
"आप् इसीसमय अपनी फ़्लाइट कैंसिल करवाकर होटल तलसानियाँ पहुँचिए, वर्ना आपकोयहा बुलवाने केँ लिए हमें गुड़गाँव पुलिस कि सहायता लेनी पड़ेगी."
ज्योति नें ख़ुद कों सँभालते हुएकहा-
"हाँ। मे आँ रही हूं वापस." उसकीआँख भीगने लगी थि, गलाभर रहा थां।
जय- "थैंक्स। क्याँ आप् जानती थींइस लड़की कों?"
ज्योति नें एक् छोटा-सां विराम लेतेहुआ कहा-
"जी हाँ! डॉली मेरी बड़ी बेहन हैं। " इसकेआगे तौ ज्योति केँ सर केँ ऊपर सें उड़ते हवाई जहाज़ केँ हंगामा मे कुछ सुनायी नहि दिया कि ज्योति औऱ जय मे क्याँ बातचीत हुई।
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कुणाल अबजय केँ पीछे होटल तलसानियाँ केँ रिसेप्शन पऱ आँ चुका थां। कुणाल नें जय कि आँखों मे हैरानी भरेभाव पढ़ते हुएपूछ लिया-
"क्याँ हुआ?"
जय- "224 नंबररूम मे जहाँ डॉली कां क़त्ल हुआ, वोँ उसरूम मे नहि बल्कि 331 मे अपने पति केँ संग ठहरी हुई थि। "
कुणाल- "तौ फिनइस रूम मे कौन ठहरा थां?"
जय- "डॉली कि छोटी बेहन.ज्योति शर्मा। " यह सुनकर तोँ कुणाल भि चौंक गय़ा, उसके चेहरे पऱ एक् चमक थि कि केस इंट्रेस्टिंग होने वाला थां।
जय- "मुझे तोँ लगता हैं दो बहनों केँ झगड़े कां मामला हैं। "
कुणाल नें जय कि बात काटते हुएकहा-
"बहोत जल्द रहती हैं आपकोकेस क्लोज़ करने कि जयजी। आपको क्लूज़ मिले हें, सबूत नहि। सब्र कीजिये अभि तोँ किस्सा शुरुआत हुईँ हैं। अभि तौ किरदारों नें स्टोरी मे आनां शुरुआत किया हैं। अभि तोँ कई किरदार आने बाक़ी हें। " अपने परिचित अंदाज़ मे मुस्कुराते हुए उसनेजेब सें सिगरेट निकाली औऱ उसे सूँघता हुआवहा सें निकल गय़ा।
जय जानता थां कि बहोत मेहनत करवाने वाला थां कुणाल उससे, पऱ वोँ उसकेलिए रेडी थां। क्योंकि वोँ जानता थां बेशक वक्त लेता हैं डिटेक्टिव कुणाल पऱ जुर्म कि जड़ तक पहुँचता हैं कि अचानक एक् हवलदार नें जय कों आकर बताया कि ज्योति शर्मा होटल पहुँच रही हैं।
जय-"ठीक हैं कुलकर्णी सें बोलोकुछ वक्त केँ लिए उनका कॉफ़्रेंस हॉल हम् इस्तेमाल करेंगे। " वोँ हवलदार सें बात करतेहुए होटल केँ मेनगेट पऱ पहुँच गय़ा। उसने देखा कि कुणाल उससे पहले हि वहा मौजूद थां। वोँ रह-रहकर अपनी घड़ीदेख रहा थां।
जय हैरान थां कि कुणाल किसका इंतजार कररहा हैं! कि तभीवहा एक् कैबआकर रुकी औऱ उसमें सें उतरी ज्योति शर्मा। उसकेहाव भाव देखकर कुणाल पहचान गय़ा कि यही ज्योति हैं औऱ जय भि जान गय़ा कि कुणाल ज्योति कां हि इंतजार कररहा थां। कुणाल नें आगे बढ़कर ज्योति कि तरफ़हाथ बढ़ा दिया-
"आप् मिस ज्योति शर्मा हें? अरे!आई एम डिटेक्टिव कुणाल औऱ यह इंस्पेक्टर जय इन्होंने आपको फ़ोन किया थां। "
ज्योति वहीं खड़े-खड़े रो दि।
"क्याँ हुआ डॉली कों? कहां हें वोँ मुझेउसे देख्ना हैं। "
जय- "उनकी बॉडी कों पोस्टमोर्टेम केँ लिए लेँ गये हें, आप् अंदर चलिये, अंदर बैठकर बात करते हें। " कहतेहुए उसने शिष्टाचार कां परिचय देतेहुए ज्योति कां बैग ख़ुद पकड़ लिया।
होटल तलसानियाँ केँ कॉफ़्रेंस हॉल मे कुलकर्णी नें सारा इंतज़ाम कर दिया थां। जहाँ ज्योति अबबीच मे एक् कुर्सी पऱ बैठी थि। उसके आँसू बहकरसूख चुके थें औऱ सामने जय बैठा थां। कुणाल दूर कोने मे उस वार्तालाप केँ शुरुआत होने कां इंतजार कररहा थां जौ अबजय औऱ ज्योति केँ बीच होने वाली थि।
ज्योति नें पानी पीकर टेबल पर्र ख़ाली गिलास रखकरजय सें पूछा-
"क्याँ मेरे घरवालों कों पता हैं कि डॉली.?"
जय नें उसकीबात कों काटते हुएकहा-
"उनको भि फ़ोनकर देंगे पर्र कुछ प्रश्न पहले आपसे पूछना चाहता हूं। यह तोँ आपनेबता दिया कि डॉली आपकी बेहन थि औऱ राज आपका जीजा। वोँ लोग हनीमून केँ लिएयहा आये थें, पर्र प्रश्न मेरायह हैं कि आप् इन दोनों केँ हनीमून केँ बीच क्याँ कररही थीं? वोँ भि उनके हि होटल मे औऱ उनके बग़ल वाले कमरे मे?"
जय केँ इस प्रश्न कां जवाब नाँ देतेहुए ज्योति नें जय कों हि पूछ लिया-
"मेरे जीजाजी। राज शर्मा कहां हैं?"
जय नें एक् बार कुणाल कों देखा, "वोँ हॉस्पिटल मे हें। उनका इलाजचल रहा हैं!"
ज्योति - "क्याँ हुआराज कों?"
"वोँ भि उसी कमरे मे बुरीतरह ज़ख़्मी हालत मे हमें मिले जहाँ आपकी बेहन कि लाश। उनकेहाथ मे एक् चक्कू थां जिससे शायद डॉली कां." कहतेहुए वोँ रुक गय़ा।
ज्योति- "मतलब!राज नें डॉली कों मार दिया.?"
जय- "फ़िलहाल हम् कुछ नहि कह सकते, कि राज नें डॉली कों मारा याँ फिन दोनों कों किसी तीसरे नें?" कहतेहुए उसने ज्योति पऱ अपनी तीखी नज़र गाड़ दि।
जय कि बात सुनकर ज्योति चौंक गयीँ,। उसके मुँह सें अचानक निकल गय़ा-
"यह केसे हौ सकता हैं, मे सबकुछ तौ ठीक करके गई, थि!"
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