नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
उसने स्वयं हि बात कों आगे बढ़ाया….उसने पुस्तक बंद करके एक् साइड मे रख दि…
Ab aage.
ममता: विनयउस दिन तुम्हे मजाआया थां नाँ……?
विनय:जी…….
ममता: पहलेकभी किसी लड़की नें तुम्हे वहाटच किया हैं….?
विनय: (चोंककर ममता कि ओर देखते हुए) नहीं……
ममता: अच्छा यहबता मे तुम्हे कैसी लगती हूं….?
विनय:जी बहोत अच्छी….
ममता: औऱ……
विनय: औऱ क्याँ….
ममता: मेरा मतलब मे देखने मे केसे लगती हूं….
विनय: बहोत खूबसूरत……
ममता: मुझमे सबसे खूबसूरत क्याँ लगता हैं तुम्हे….घबरा नहीं….देख आज तक मेनेकभी तेरी किसी भि बात कि शिकायत कि हैं….
विनय: (नाँ मे सर हिलाते हुए) आप् बुरा तोँ नहीं मनोगे….
ममता: नहींबता भि नां….
विनय: (ममता कि चुचियों कि तरफ इशारा करतेहुए….) यह आपकेदूध….
ममता:हहा हा क्याँ कहा तुमने दूध मेरे भौंदू राम इन्हे दूध नहीं चुचियाँ कहते हैं….क्याँ कहते हैं…(ममता नें विनय कि तरफ वासना भरी नज़रो सें देखते हुएकहा….)
विनय: (कांपती हुइ आवाज़ मे….) चुचियाँ…….
ममता: तुम्हे इन्हे छूना अच्छा लगता हैं नां….?
विनय:(हां मे सर हिलाते हुए)जी….
ममता: अभि भि छूने कां मन हैं नां……
विनय चोंककर ममता कि तरफ देखने लगा….
ममता: अभि छूना चाहता हैं……?
विनय: (लड़खड़ाती हुईँ आवाज़ मे) हां….
ममता कि आँखो मे वासना केँ गुलाबी डोरेतैर रहे थें……7 महीने हौ चुके थें….उसे अपने पति सें चुदेहुए, अभि -2 तोँ उसे लन्ड कां स्वाद अच्छा लगनेलगा थां कि, विवाह केँ 1 महीने बाद हि उसका पति अब्रॉड चला गय़ा थां…….ममता कुछसोच कर बोलीं….
ममता: बाहर् गेटलॉक हैं नां….?
विनय:हां….
ममता:जा एक् बारफिन सें चेक करके आँ……
विनयबेड सें उठा औऱ जैसे हि वोँ ममता केँ रूम सें बाहर् निकला तौ वोँ तेज़ी सें गेट कि तरफ भागा…अभि वोँ गेट केँ पास पहुचा हि थां कि, डोरबेल बज उठी…अंदर बैठी ममता नें भि डोरबेल सुनी तौ, वोँ एक् दम झुंझला सि गयीँ, ….उसने घड़ी मे समय देखा तौ, अभि सिर्फ़ 10 बजरहे थें….”अब इससमय कॉन कम्बख़्त आँ मरा……” ममता एक् दम सें खीजते हुएउठी औऱ रूम सें बाहर् आई, जब वोँ रूम सें बाहर् आई तौ, देखा कि विनयहाथ मे एक् बड़ा सां बर्तन उठाएहुए, गेट कि तरफजा रहा थां….
ममता:कॉन हैं विनय….औऱ तूँ यह पतीला कहां लिएजा रहा हैं….
विनय: वोँ मासीजी दूध वाला हैं….
ममता: ओह्ह्ह जा जल्द सें दूध डलवाला….
विनय बाहर् गय़ा तौ, ममता भि गेट पर्र चली गई, ….थोड़ी देरबाद विनय भि दूध लेकरघऱ केँ अंदर आँ गय़ा….”जा रसोई मे रख दे….मे गर्मकर देती हूं…कही खराब हि नां होँ जाए….” ममता नें गेट केँ कुण्डी लगाते हुए कहा….ममता नें सोचा कि वोँ तौ भूल हि गयीँ, थि कि, इस वक्तदूध वालादूध देनेआता हैं….ममता नें गेटलॉक किया औऱ वही खड़े होकरमन हि मनदुआ करनेलगी कि, अबकम सें कम 2-3 घंटो तक कोई औऱ नां आए…….
गेट लॉक करने केँ बाद ममता रसोई मे गयीँ, ….औऱ दूध गर्म करने लगी….विनय भि वही खड़ा थां….”तूँ क्यूं यहा गरमी मे तपरहा हैं….जाकर बाहर् बैठ……मे दूध गर्म करकेआती हूं….” ममता नें दूध गर्म किया, फिन रसोई सें बाहर् निकलकर रसोई कां डोरबंद किया औऱ अपने दुपट्टे सें पसीना पोंछते हुए अपनेरूम मे जाने कि बजाए किरण केँ रूम मे चली गयीँ, ……
क्योंकि पूरेघऱ मे किरण केँ रूम मे हि एक् विंडो एसी थां….उसने वहा जाकरएसी ऑन किया औऱ अपना पसीना सुखाने लगी….विनय वही बाहर् बैठा थां……जाते हुएउसे मासी नें क्यूं अपनेसंग जाने केँ लिए नहीं कहा…यह सोच -2 कर वोँ परेशान होँ रहा थां….लगभग 10 मिनिट बाद किरण केँ रूम सें ममता कि आवाज़ आई….”विनय इधरआओ….” विनयउठ कर किरण केँ रूम कि तरफचल पड़ा….जैसे हि वोँ रूम मे पहुंचा तोँ देखा ममताबेड पऱ पीठ केँ बल लेटी हुइ थि….उसने अपना दुपट्टा उतारकर टेबल पऱ रखाहुआ थां….उसकी मोटी-2 चुचियाँ उसकी कमीज़ मे कसी हुइ, ऊपेर नीचे होँ रही थि…
ममताबेड पऱ लेटेहुए डोर पऱ खड़े विनय कों देखकर मुस्कुराइ, औऱ कामुकता भरी आवाज़ मे उसे अंदरआने कों कहा….”विनय अंदर आँ जाओ….” जैसे हि विनय अंदर कि तरफ बढ़ा। “विनयडोर बंदकर दोएसी चलरहा हैं….” डोर कों बंद करना हैं, यह सुनते हि विनय केँ लन्ड मे कुछ हलचल सि होने लगी….एक् अंजान उत्सुकता उसकेदिल कों घेरने लगी….उसने मूडकर डोरबंद किया तौ, ममता नें एक् औऱ ऑर्डर उसेदे डाला….”विनय यह लाइट भि बंदकर दो। आँखो मे चुभरही हैं….
विनय नें लाइटबंद कि, औऱ धीरे-धीरे-2 बेड कि तरफ बढ़ा….ममता केँ पास जातेहुए उसकादिल जोरो सें धड़करहा थां….वोँ पास पहुँच करबेड केँ किनारे बैठ गय़ा…ममता पीठ केँ बल लेटी हुइ थि….जब विनयबेड केँ किनारे पऱ बैठा तोँ, ममता नें उसकीतरफ करवट बदलते हुए, उसकाहाथ पकड़कर बहोत हि लरजता सें कहा….”लेट जाओ नाँ….ऐसे बैठे-2थक जाओगे….” विनय नें ममता कि बात सुनी औऱ फिन पैरो मे पहनी हुइ चप्पल उतारकर बेड पर्र पीठ केँ बललेट गय़ा….”
मेरीतरफ फेस करके लेटो….” ममता नें उसे कंधे सें पकड़कर अपनीतरफ घूमाते हुएकहा, तौ विनय स्वयं हि करवट लेतेहुए उसकीतरफ घूम गय़ा….
पूरेघऱ मे एक् दम सन्नाटा छायाहुआ थां….कहां तौ कुछदिन पहले तक इस टाइमसब बच्चे मिलकर हुड़दंग मचाया करते थें….पर्र आजवही हुड़दंग विनय केँ मन मे मचाहुआ थां….आगे क्याँ नया होने वाला हैं, यहसोच-2 कर हि विनय कां बुराहाल हौ रहा थां….दोनो एक् दूसरे कि तरफफेस किएहुए लेटेहुए थें….ममता नें विनय कां हाथ पकड़ा औऱ अपने राइट मम्मे पर्र रखतेहुए धीरे-धीरे सें मस्ती भरी आवाज़ मे फुसफुसा कर कहा….”तुम्हे इन्हे छूना अच्छा लगता हैं नां….?”
ममता नें उसकेहाथ कों अपनी चुचि पर्र दबाना शुरुआत कर दिया….विनय नें अपनेगले कां थूक निगलते हुएहाँ मे सर हिला दिया….”फिन दबाओ नाँ….जैसे उसरात कों दबारहे थें….” विनय सवालिया नज़रों सें ममता कि ओर देखने लगा….वोँ अभि डररहा थां कि, कही ममता मासी बुरा नाँ मान जाए….”शियीयीयी दबाओ नाँ कुछ नहीं कहूँगी मे….” ममता नें अपनाहाथ उसकेहाथ केँ ऊपेर सें हटाते हुए कहा….तौ विनय नें डरतेहुए, धीरे-धीरे-2 उसकी चुचि कों दबाना शुरुआत कर दिया….ममता केँ पूरे जिस्म मे मस्ती कि लहर दौड़ गई, ….
उसने विनय कि कमर मे अपनी बाहों कों डालते हुए, उसे अपनीतरफ खेंचते हुए अपने सें सटा लाया….”आहह-आहह हाआँ सबाश विनय हाआँऐसे हि थोडा सां ज़ोर सें दबाओ….हां थोडा औऱ ज़ोर सें….” विनय ममता कि चुचियों कों दबाता हुआ, उसके तमतमा रहेफेस कों देखरहा थां….उसकी आँखे मस्ती मे बंद हौ गयीँ, थि….औऱ ममता धीरे-धीरे-2 सिसकारियाँ भररही थि… ममता कि बुर मे सरसराहट अब औऱ बढ़ चुकी थि…उसने अपना एक् हाथ नीचे लेजाते हुए, उसके लन्ड पर्र शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें रख दिया, औऱ धीरे-धीरे-2 उसके लन्ड कों सहलाने लगी….
विनय कां सेमी एरेक्टेड लन्ड थोड़ी हि देर मे पूरे तनाव मे आँ चुका थां……औऱ उसका शॉर्ट्स फाड़कर बाहर् आने कों उतावला होँ रहा थां……”शीई विनय तुम्हे अच्छा लगता हैं, जब मे तुम्हारे लन्ड कों सहलाती हूं….” उसने विनय केँ लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें मुट्ठी मे भरतेहुए कहा….
विनय: (काँपती हुई आवाज़ मे…) हां मासीजी….
ममता: कितना अच्छा लगता हैं….?
विनय: बहोत……
ममता: औऱ मेरी चुचियों कों दबाना….?
विनय: औऱ भि ज्यादा अच्छा लगता हैं…
ममता: देख्ना चाहता हैं इन्हे….
विनय: हूं….
ममता नें विनय कां लन्ड छोड़ा औऱ एक् दम सें उठकरबैठ गयीँ, ….उसने जैसे हि अपनी कमीज़ कों पकड़कर ऊपेर उठाना शुरुआत किया, तौ टेलीविज़न पऱ रखा उसकाफोन बजने लगा….वोँ बेड सें नीचे उतरी औऱ अपनी कमीज़ उतारकर बेड पऱ फेंकते हुए, टेलीविज़न कि ओर बढ़ी, पीछे बैठा विनय हैरानी सें यहसभी देखरहा थां….ममता कि नंगीपीठ देखते हि उसके लन्ड नें झटके खाने शुरुआत कर दिए….उसकी पीठ पर्र कसी हुईँ ब्रा केँ स्ट्रॅप्स कितने सेक्सी लगरहे थें…ममता नें जाकर अपनाफोन उठाकर देखा, तोँ उसके मायके सें मोबाइल थां….
ममता: हेलो….
दूसरी तरफ सें किरण कि आवाज़ आई….
किरण: हेलो ममता कैसी हौ….?
ममता: मे ठीक हूं दिदी आप् केसे होँ….?
किरण: मे भि ठीक हूं….मे परसो वापिस आँ रही हूं….कोई तकलीफ़ तोँ नहीं हैं नाँ….?
ममता: नहीं दिदी कोई तकलीफ़ नहीं हैं…….
किरण: अच्छा विनय कैसा हैं….?
ममता:जी वोँ भि ठीक हैं……
किरण:ला मेरे राजकुमार सें मेरेबात तोँ करवा….
ममता: दिदी वोँ तौ सोरहा हैं….
किरण: अच्छा चल रहनेदे उसे सोने दे….सुन घऱ कां औऱ विनय कां ध्यान रखना….
ममता: दिदी यह भि कोई कहने वालीबात हैं….क्याँ यह मेराघऱ नहीं हैं….
किरण:हां बिल्कुल तुम्हारा हि घऱ हैं….अच्छा अब मे मोबाइल रखती हूं….
ममता:ओके दिदी बाइ….
ममता नें जलदी सें मोबाइल कट किया….औऱ अपनी सलवार कां नाडा पकड़कर खोलते हुएउसे भि उतार दिया….अब ममता औऱ देर नहीं करना चाहती थि….क्योंकि वोँ जानती थि कि, कभी भि कोई भि कबाब मे हड्डी बन सकता हैं……जैसे हि ममता अपनाफोन टेलीविज़न पऱ रखकर विनय कि तरफ मूडी, तौ विनय कां मूह खुला कां खुलारह गय़ा….यह नज़ारा विनय अपनी जीवन मे पहलीबार देखरहा थां….ममता गोलडेन स्किन कलर कि ब्रा औऱ पेंटी पहने उसके सामने खड़ी थि…….रूम मे बेहद अंधेरा थां….इसीलिए ममता नें टेलीविज़न ऑनकर दिया….औऱ उसकी वॉल्यूम कों बिल्कुल बंदकर दिया…….
वोँ धीरे-धीरे-2 बेड कि तरफ बढ़ी, औऱ बेड पऱ बैठते हुए बोलीं….”क्याँ देखरहा हैं….कैसी लगरही हूं मे….”
उसने मुस्कराते हुएकहा…। “बहोत सुंदर…” विनय नें वैसे हि लेटेहुए कहा, तोँ ममता नें अपने दोनो हाथो कों पीछे लेजाते हुए, अपनी ब्रा केँ हुक्स खोलदिए। औऱ फिन अगले हि समय उसने धीरे-धीरे-2 ब्रा कों अपने शरीर सें अलग करतेहुए बेड पर्र रख दिया…ममता कि 34 साइज़ कि तनी हुइ मोटी-2 चुचियाँ देख विनय कि आँखे हैरानी सें फेल गई, ….वोँ एक् टक ममता कि चुचियों कों घुरेजा रहा थां….
ममता नें अपनी चुचियों पर्र अपने हाथों कों फेरते हुए विनय कि तरफ देखा औऱ फिन धीरे-धीरे सें मादक आवाज़ मे बोलीं….”विनय तुम्हे मेरी चुचियाँ कैसीलगी….”
तौ विनय नें हकलाते हुएझपक सें बोला….”बहोत हॉट हैं मासी……” तौ ममतामन हि मन अपनी चुचियों कि तारीफ सुनकर मुस्करा पड़ी….”मासी नहीं ममताबोल मुझे……अब तौ हम् मित्र हैं नाँ….”
विनय:जी….
ममता:फिन बोल नां मुझे ममता….
विनय: ममता……
ममता धीरे-धीरे सें विनय केँ पासपीठ केँ बललेट गई, ……औऱ उसका एक् हाथ पकड़कर अपनी चुचि पऱ रखतेहुए, धीरे-धीरे सें फुस्फुसाइ….”अब तुम्हें किसबात कां प्रतीक्षा हैं मेरे राजा….दबा नां इनको तुम्हें इन्हे दबाना अच्छा लगता हैं नां….” विनय ममता केँ ऊपेरझुक गय़ा….उसने अपने काँपते हाथो कों जैसे हि ममता कि चुचियों पर्र रखा तौ, ममता नें भि अपने दोनोहाथ उसके हाथो पऱ रख दिए….जैसे वोँ चाहती होँ कि, अबयहहाथ हमेशा उसकी चुचियों सें हि चिपके रहे….पिछले 6 महीने सें पति केँ लन्ड केँ लिएतरस रही ममता, कि चुचियों पऱ विनय केँ हाथलगे हि थें कि, ममता कि बुर मे तेज सरसराहट हुई, उसकी आँखे मस्ती मे बोझल होनेलगी….
ममता: (सिसकते) श्िीीईई विनयदबा नां….ज़ोर ज़ोर सें जितना तेरामन करे, जब तक तेरादिल नाँ भरे अपनी ममता कि चुचियों कों दबाता रह….
विनयअब थोडा सहज महसूस करनेलगा थां….उसके हाथो मे ममता कि 34 साइज़ कि चुचियाँ संभाले नहीं संभाल पारही थि….एक् बहोत हि सुखद अनुभाव विनय केँ हाथो सें होताहुआ, उसे अपने लन्ड पऱ महसूस हौ रहा थां….वोँ भि ममता कि तरहगरम होँ चुका थां। औऱ जैसे हि विनय नें पहलीबार ममता कि नंगी चुचियों कों अपने हाथों मे भरकर दबाया तौ, ममता कि आँखे मस्ती मे बंद हौ गयीँ, ….पूरा शरीर थरथरा कररह गय़ा… होन्ट खुल गये….”आहह-आहह श्िीीईईईईई विनय हाआँ मेरेजान ऐसे हि औऱ ज़ोर सें दबा नाँ….” ममता नें जैसे विनय सें मिन्नत करतेहुए कहा….
ममता कि मस्ती भरी सिसकी नें आग मे घी कां काम किया, औऱ विनय नें धीरे-धीरे-2 ममता कि चुचियों कों दबाना शुरुआत कर दिया….ममता केँ तीखेनोक दार निपल्स विनय कि हथेलियों केँ बीच मसलेजा रहे थें……जिसके कारण ममता कों अपनी चुचियों केँ निपल्स मे तनाव बढ़ता हुआ महसूस होँ रहा थां….उसकी बुर अबचीख-2 कर लन्ड माँगरही थि….वोँ एक् दम मदहोश हौ चुकी थि….अब उसकेसबर कां पैमाना उछलने कों थां….उसने विनय केँ सर कों दोनो हाथो सें पकड़ा, उसके होंटो कों अपने होंटो सें लग दिया….
अगले हि समय ममता विनय केँ लड़कियों जैसे जूसी होंटो कों पागलो कि तरफचूस रही थि….विनय कि आँखे भि मस्ती मे बंद होँ गयीँ, थि….लगभग 2-3 मिनिट बाद, ममता नें अपने होंटो कों विनय केँ होंटो सें अलग किया, औऱ उखड़ी हुइ सांसो केँ संग मस्ती भरी आवाज़ मे बोलीं……”मेरे शोनाओह तूँ भि चूस नां मेरे होंटो कों….” औऱ फिन सें दोनो केँ होन्ट आपस मे उलझ गये….इस बार विनय ममता केँ होंटो कों चूसरहा थां…धीरे-धीरे-2 नरमी सें…। औऱ ममता उसका हॉंसला बढ़ाने केँ लिए एक् हाथ सें उसकेसर केँ बालो कों औऱ दूसरे हाथ सें उसकीपीठ कों सहलारही थि….
जिससे विनय धीरे-धीरे-2 जोश मे आताजा रहा थां….औऱ यहसोच कर कि, ममता मासी कों उसकायह सभी करना कितना मजादे रहा हैं, उसका कॉन्फिडेन्स लेवेल भि बढ़ता जारहा थां…अब ममता नें उसके ऊपेर वाला होन्ट चूसना शुरुआत कर दिया थां….औऱ विनय ममता कां नीचे वाला होन्ट चूसरहा थां….दो जिस्म काम कि आग मे जलरहे थें….विनय अबजोश मे बढ़ता जारहा थां…उसने धीरे-धीरे-2 फिन सें ममता कि चुचियों कों फिन दबाना शुरुआत कर दिया थां….विनय कि इस हरक़त सें ममतामन हि मनखुश हौ गयीँ, ….आख़िर विनय नें अपनीतरफ सें कोई पहलाकदम उठाया थां….ममता नें अपने होंटो कों विनय केँ होंटो सें अलग किया, तौ विनय नें अपनी आँखो कों खोलकर ममता कि तरफ देखा….
ममता: (मदहोशी भरी आवाज़ मे.) विनय मेरे मम्मे चुस्स नां….पी लेँ मेरादूध….
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Soonnn।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
ममता: (मदहोशी भरी आवाज़ मे.) विनय मेरे मम्मे चुस्स नां….पी लेँ मेरादूध….
Ab aage.
यह कहतेहुए, उसने विनय केँ सर कों पकड़कर जैसे हि उसके होंटो कों अपनी चुचियों पऱ झुकाया तौ, विनय नें भि अपने गीले होंटो मे ममता केँ राइट निपल कों मूह मे भरकर चूसना शुरुआत कर दिया….”ष्हिईीईईईईई हाईए विनय आहह-आहह हां पीजा मेरेदूध कों अह्ह्ह्ह औऱ ज़ोर सें चूस मेरे मम्मे पूरा कां पूरा खालीकर दे…” ममता नें सिसकते हुए, विनय कों अपनी बाहों मे कसतेहुए अपने ऊपेर लुड़का लिया….अब विनय ममता केँ ऊपेर आँ चुका थां। उसका लन्ड ममता कि पेंटी कि पैंटी केँ ऊपेर सें उसकी बुर पर्र दस्तक देरहा थां….
जिसे महसूस करके, ममता कि बुर पैंटी कों अंदर सें पानीबहा कर गीलाकर रही थि…। उसने विनय कि पीठ सें उसकी टीशर्ट केँ अंदरहाथ डालते हुए उसकी टीशर्ट कों उतारना शुरुआत कर दिया….औऱ किसी आग्याकारी बच्चे कि तरह विनय नें भि ममता कि चुचियों सें मूह हटाते हुए अपनी बाहो कों ऊपेरकर लिया, ताकि ममता उसकी टीशर्ट कों उतार सके….टीशर्ट उतारकर ममता नें बेड पर्र फेंकी औऱ फिन विनय केँ शॉर्ट्स कों खेंचकर उतारना शुरुआत कर दिया…।
विनय नें घुटनो केँ बल बैठते हुए स्वयं हि अपने शॉर्ट्स औऱ अंडरवेर कों उतारकर साइड मे रख दिया….ममता कि नज़र जैसे हि विनय केँ तनेहुए लन्ड पऱ पड़ी, तोँ उसकी आँखे वासना कि चमक सें भर उठी….उसने अपने दोनोहाथ नीचे लेजाते हुए, विनय केँ लन्ड कों अपनी मुट्ठी मे भर लिया, औऱ उसके लन्ड कों धीरे-धीरे-2 सहलाते हुए विनय केँ चेहरे कि ओर देखने लगी…
ममता: विनयउस दिन तुम्हे मजाआया थां नाँ….जब मेने तुम्हारे लन्ड कि मूठ मारी थि.
विनय: श्िीीईईई हां मासी….
ममता:चल आज तुम्हें मे उसदिन सें भि अधिकमजा दूँगी…पर्र यहसभी तुँ किसी कों बताएगा तौ नहीं….?
विनय: (नां मे सर हिलाते हुए….) नहीं मासीजी….
ममता: अच्छा चल तौ फिन मेरी पैंटी उतार….(ममता नें मुस्कुराते हुए विनय कों कहा….)
विनय: क्याँ मे….
ममता:हां तेरी हि बोलरही हूं मेरे राजा….उतार नाँ….
विनय नें अपने काँपते हाथो सें ममता कि पेंटी कों दोनोतरफ सें पकड़कर नीचे सरकाना शुरुआत किया तोँ, ममता नें स्वयं हि अपनी गान्ड बेड सें ऊपेरउठा ली, ताकि विनय उसकी पैंटी उतार सके……विनय नें जैसे हि पैंटी कों उतारा तौ देखा, उसकी पैंटी नीचे सें एक् दम गीली थि….ममता केँ कामरस कि तेज सुंगध विनय केँ नथुनो मे घुल गई, ….”इसे प्रीकम कहते हैं….” ममता नें मुस्कुराते हुए कहा….”जब किसी लड़की याँ स्त्री कों कोई लड़का याँ मर्दमजा देता हैं, जैसे तूने मुझे दिया हैं, तौ उसकी फुद्दि सें ऐसा गाढ़ा पानी निकलता हैं….
अब विनय कां ध्यान ममता कि बिना झान्टो वाली क्लीन शेव्ड बुर पर्र गय़ा, तोँ उसके जिस्म मे अजीब सि झुरजुरी दौड़ गयीँ, ….”पहली कभी देखी हैं किसी कि बुर….” ममता नें मुस्कुराते हुए कहा….तौ विनय नें अपनेगले कां थूक गटकते हुए नां मे सर हिला दिया…“देख नाँ इसेखोल कर अपने हाथो सें केसे पानी छोड़रही हैं….”
ममता नें विनय कां एक् हाथ पकड़कर अपनी बुर पऱ रखतेहुए कहा, तोँ विनय कां हाथ अपनी बुर पऱ महसूस करते हि, ममता एक् दम सिसक उठी….”श्िीीईई ओह विनय….” विनय नें एक् बार मस्ती मे सिसकरही ममता कि तरफ देखा, औऱ फिन अपने हाथो कि उंगलियों सें उसकी बुर कि फांको कों फेलाना शुरुआत कर दिया….जैसे हि ममता कि बुर कां गुलाबी रस सें भराछेद विनय कि आँखो केँ सामने आया तोँ, उसके लन्ड नें एक् जबरदस्त झटका खाया। मानो ममता कि बुर कों सलामी देरहा होँ…….
ममता नें फिन सें अपनाहाथ बढ़ाकर विनय केँ लन्ड कों पकड़ लिया, औऱ उसके सुपाडे कि चमड़ी पीछे सरकाते हुए, उसे अपनी बुर कि फांको केँ बीच मे जैसे हि रगड़ा तौ, ममता नें सिसकते हुए, अपनी आँखेबंद कर ली….ममता कि बुर कि गरमी कों अपने लन्ड केँ सुपाडे पर्र महसूस करते हि, विनय भि सिसक उठा….”आहह-आहह मासिईईईईई”
ममता: मासी नहीं ममताबोल नाँ जानू……
विनय: अह्ह्ह्ह ममता बहोत हॉट हैं, आपकी बुर….
ममता:अब तूँ अपना लन्ड मेरी बुर मे घुसा धीरे-धीरे-2….आहिस्ता अंदर करना….
ममता नें विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कों अपनी बुर केँ छेद पर्र सेट करतेहुए कहा….तौ विनय नें धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड केँ सुपाडे कों ममता कि बुर केँ छेद पऱ दबाना शुरुआत कर दिया….जैसे हि विनय केँ लन्ड कां सुपाडा ममता कि बुर केँ छेद फेलाता हुआ अंदर घुसा तोँ, ममता केँ रोम-2 मे मस्ती कि लहर दौड़ गयीँ, ….उसने सिसकते हुए अपनेहाथ कों विनय केँ लन्ड सें हटा लिया….”श्िीीई ओह विनयहां ऐसे हि अंदर करते रहो….धीरे-धीरे-2….उंह” विनय भि अपने लन्ड केँ सुपाडे केँ इर्द गिर्द ममता कि बुर कि टाइट दीवारो कों महसूस करके एक् दम सें सिसकउठा….
उसे अपने कुंवारे लन्ड केँ सुपाडे पऱ मदहोश कर देने वाली गुदगुदी महसूस होँ रही थि… उसकी आँखे भि ममता कि आँखो कि तरह धीरे-धीरे-2 बंद होनेलगी थि….पऱ मासी नें ऑर्डर जोँ दिया थां….औऱ अपनी मासी जोँ कि अब उसकी सबसे अच्छी मित्र बन चुकी थें…उसका कहा विनय केसेटाल सकता थां….अपने लन्ड केँ सुपाडे पऱ हौ रहीतेज सरसराहट कों भि मात देतेहुए, उसने अपने लन्ड कों औऱ अंदर कि तरफ दबाया तौ, विनय कां आधा लन्ड ममता कि बुर केँ दीवारो कों खोलता हुआ अंदरजा घुसा…
ममता:ओह हाईए विनय….तेरा लन्ड किन्ना सोना खड़ा हैं….हाईए करदेहुन पूरा अंदर श्िीीईईईईईईईई………
ममता नें अपनी बाहों कों विनय कि दोनो बगलो सें निकालते हुए, उसकेपीठ पऱ अपनी बाहों कों कस लिया….दोनो नंगे शरीर एक् दूसरे सें ऐसे चिपक गये….जैसे एक् हि बदन होँ….ममता कों मजा आँ रहा हैं….यह देख विनय नें स्वयं पर्र गर्व महसूस किया कि, ममता कों उसका लन्ड अपनी बुर मे लेकरमजा आँ रहा हैं, तोँ उसनेफिन सें अपने लन्ड कों बुर केँ अंदर धकेलना शुरुआत कर दिया….इस बार विनय कां लन्ड ममता कि पनियाई हुइ बुर कि दीवारो कों चीरता हुआ पूरा कां पूरा अंदरजा घुसा….ममता केँ होंटो पऱ कामुक संतुष्टि भरी मुस्कान फेल गई,.
उसने अपनी टाँगो कों उठाकर विनय कि पीठ पऱ कस लिया….”श्िीीईईई उंह विनय हाआँ आईसीए हि लेटेरहो आहह-आहह मेरे ऊपेर….” ममता नें मदहोश होकर विनय केँ गालो कों चूमना शुरुआत कर दिया….”हाईए विनयआज कितने दिनोबाद मेरी बुर कों कितना सकून मिला हैं…उंह उंह…” विनय केँ गालो पर्र चुंबन झाड़ते हुए….) ममता जानती थि कि, भले हि विनय कां लन्ड किसी बड़े मर्द जितना बड़ा होँ गय़ा हैं….पऱ विनय चुदाई केँ इसखेल मे कितनी देरटिक पाता हैं….इसका ममता कों कोई अंदाज़ा नहीं थां….वोँ नहीं चाहती थि कि, विनयउसे बीच मज़धार मे हि छोड़ दे….इसीलिए वोँ विनय केँ लन्ड कों अपनी बुर मे अच्छी तरह महसूस करके पूरीतरह गर्म होँ जानां चाहती थि….ताकि वोँ उस चर्मसुख कों पासके। जिसके लिए वोँ पिछले कई महीनो सें बेचैनी रही थि……
ममता: विनय मेरे मम्मे चूसो नां….प्लीज़ मेरी जान….तुम् बहोत अच्छा चूस्ते होँ….
विनय: मासी आपको अच्छा लगरहा हैं….
ममता: (विनय केँ होंटो कों चूमते हुए)हां बहोत अच्छा मेरे शोना, तुम्हे अच्छा शीईइ नहींलग रहा हैं……
विनय: ओह्ह्ह्ह मासी बहोत गर्म हैं आपकीयह….
ममता: अह्ह्ह्ह क्याँ गर्म हैं….औऱ तूँ श्िीीई फिन सें मासी क्यो क्यूं बोलरहा हैं मेरीजान.
विनय: तुम्हारी बुर ममता….
विनय केँ मूह सें यह सुनते हि, ममता कि बुर नें औऱ रस टपकाना शुरुआत कर दिया….”हाई मेरे शोना….तुम्हे अच्छा लगरहा हैं नाँ….तौ मुझे भि अच्छा लगरहा हैं….लें चूस नां मेरी चुचियों कों….” ममता नें विनय केँ सर कों पकड़कर अपनी चुचि पऱ झुकाते हुएकहा तौ, विनय नें लपककर ममता कि चुचि कों मूह मे भर लिया….औऱ ठीक बच्चों कि तरफ उसके निपल कों अपने होंटो मे दबा -2 कर चूसने लगा….ममता नें मस्ती मे आकर तड़पते हुए अपनेसर कों इधरउधर पटकना शुरुआत कर दिया….
ममता: ओह्ह्ह्ह विनय हाां मेरे शोनाचूस लेँ अपनी मासी कि चुचियों कों अह्ह्ह्ह खाजा मेरीजान हाईए मेरी फुदीओह….
ममता लगातार सिसकते हुए, विनय कि पीठ कों तेज़ी सें सहलारही थि….विनय ममता कि कभी एक् चुचि कों चूस्ता तौ कभी दूसरी कों, उसका लन्ड ममता कि बुर कि गरमी सें औऱ हार्ड हौ चुका थां……जिससे ममता अपनी बुर मे झटके ख़ाता हुआसॉफ महसूस करपारही थि….ममता अब पूरीतरह गर्म हौ चुकी थि….ज़रूरत थि तोँ, सिर्फ़ 15-20 जबरदस्त झटको कि, जौ कि विनय अपना लन्ड सुपाडे तक बाहर् निकाल-2 कर अंदर करतेहुए मारता….
ममता: ओह्ह्ह्ह विनयअब अह्ह्ह्ह धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड कों मेरी बुर केँ अंदर बाहर् करो…ध्यान रखना पूरा बाहर् मत निकाल लेना…
विनय नें जैसे हि ममता कि यहबात सुनी, तोँ उसने ममता कि चुचियों सें अपनामूह हटा लिया औऱ ममता कि नशीली मदहोशी सें भरी आँखो मे देखने लगा….तोँ ममता नें उसकेफेस कों दोनो हाथो मे लेकर उसके होंटो कों अपने होंटो सें लगा दिया….इस बार स्वयं हि विनय नें ममता केँ होंटो कों अपने होंटो मे भरकर चूसना शुरुआत कर दिया….औऱ अपने लन्ड कों धीरे-धीरे-2 सुपाडे तक बाहर् निकाला औऱ फिन सें धीरे-धीरे-2 अंदरकर दिया….”ममता अपनी बुर कि दीवारो पर्र विनय केँ लन्ड केँ सुपाडे कि रगड़ कों महसूस करके एक् दम मदहोश गयीँ,.
उसकी आँखे पूरीतरह सें बंद होँ गई, ……ममता नें अपने होंटो कों ढीला छोड़कर पूराखोल दिया…तौ विनय नें भि ममता केँ जूसीशहद जैसे मीठे होंटो केँ रस कों अपने होंटो सें दबा -2 कर चूसना शुरुआत कर दिया….औऱ संग हि धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड कों ममता कि बुर मे अंदर बाहर् करने लगा….अभि विनय नें 6-7 बार हि अपने लन्ड कों बुर केँ अंदर बाहर् किया थां, कि ममता मस्ती मे एक् दममचल उठी….उसने अपने होंटो कों विनय केँ होंटो सें अलग करतेहुए उसनेसर कों अपनी गर्दन पऱ दबा लिया औऱ काँपती हुईँ आवाज़ मे बोलीं….
ममता:ओह वव विनय ओह्ह्ह मेरे राजाचोद अपनी मासी कों अह्ह्ह ओह्ह्ह औऱ ज़ोर सें घस्से मार….औऱ तेज़ी सें आहह-आहह….
यह सुनते हि विनय एक् दम सें जोश मे आँ गय़ा….औऱ उसने तेज़ी सें अपने लन्ड कों अंदर बाहर् करना शुरुआत कर दिया….”ओह्ह्ह विनय य्स्स बेबी हाआँऐसी हि चोदडाल मुझे आहह-आहह ओह्ह्ह्ह उंह श्िीीईईईईईई हइई विनय आहह-आहह करदे मुझे ठंडी आहह-आहह….” फिन तोँ विनय जैसे हि ममता कि बातें सुनकर ऐसेजोश मे आया कि, उसने ताबडतोड़ धक्के लगाते हुए, ममता कि बुर मे उसके कामरस कि नदीबहा डाली….झाड़ते हुए ममता कां पूरा शरीर काँपने लगा……जब मदहोशी औऱ मस्ती कि इंतिहा होँ गई, तोँ, ममता नें भि नीचे सें झाड़ते हुए, अपनी गान्ड कों खूबकस कर उछाला….औऱ फिन एक् दम काँपते हुए झाड़कर निढाल हौ गई, ….
इधर विनय भि अपनी जवान सें भरपूर मासी कि बुर कि गरमी कों अधिकदेर बर्दास्त नाँ कर सका….”आहह-आहह ओह्ह्ह्ह मस्ससी ओह मेरा आहह-आहह……….” उसने अपने लन्ड मे तेज सनसनाहट महसूस हुईँ, शरीर कां साराखून उसे अपने लन्ड कि नसों मे इकट्ठा होताहुआ महसूस होने लगा….औऱ विनय भि हुंकराते हुए ममता कि बुर मे झड़ने लगा….विनय कां लन्ड अबरह-2कर ममता कि बुर मे झटके ख़ाता हुआ, अपने वीर्य कि बूंदे टपकारहा थां…औऱ विनय ममता कि चुचियों मे अपना चेहरा रखे, अपनी उखड़ी हुइ सांसो पऱ काबू पाने कि कॉसिश कररहा थां….
जैसे हि दोनो कि साँसे दुरस्त हुईँ, तोँ विनय ममता केँ ऊपेर सें उतरकर उसकीबगल मे लेट गय़ा….ममता नें उसकीतरफ करवटली, औऱ उसकी चेस्ट कों हाथ सें सहलाने लगी….”विनय कैसालगा तुम्हे यहसभी करके….?” ममता जानना चाहती थि कि, क्याँ विनययह सभी दोबारा करना चाहेगा….”बहोत अच्छा…बड़ा मजाआया….”
ममता:अब बस किसी कों बताना नहीं….यह बातें सभी सें छुपाकर कि जाती हैं…जब घऱ मे हमारे आसपास कोई होँ तौ, हम् ऐसे बिहेव करेंगे….जैसे आज सें पहले करते थें.
विनय:ओके समझ गय़ा….
ममता:अब तुम्हारा दोबारा जब भि मन करेगा तौ मुझेबता देना……
विनय:ओके बता दूँगा……
इतने मे ममता केँ फोन कि रिंगबजी, तोँ ममता नें उठकर अपनाफोन उठाया…। मोबाइल अजय कि दुकान सें थां….”हेलो हांजी जीजाजी….”
अजय: (दूसरी तरफ सें….) वोँ मेनेयह बताने केँ लिए मोबाइल किया थां कि, आजसाम 7 बजेशो कि टिकेट्स मेनेबुक करवारखी हैं….शीतल दिदी केँ घऱ सें भि सभीजा रहे हैं….तुम् औऱ विनय भि रेडी हौ जानां….मे 6 बजे तक घऱ आँ जाउन्गा….
ममता: (दीवार पऱ लगी घड़ी कि तरफ देखते हुए….जिसमे अभि सिर्फ़ 4 बजे थें…) ओके जीजाजी….
अजय: वैसे वोँ बदमाश हैं कहां पर्र….मेरी बात तोँ करवाओ उसकेसंग….
ममता:सो रहा हैं….
अजय:चल रहने दे….थोड़ी देरबाद उठा देना.
उसके ममता नें कॉलआई कट कि, औऱ विनय कि तरफ मुस्कुराते हुए देखा….”क्याँ हुआ मासी किसका मोबाइल थां….”
ममता: तुम्हारे मामाजी जी कां….कह रहे थें….आज साम कों मूवी देखने चलना हैं….
विनय: 7 बजे वालाशो….?
ममता: हां….पऱ अभि बहोत वक्त हैं हमारे पास….दोबारा करना हैं….?
ममता नें विनय केँ पासआकर बैठते हुए कहा….तौ विनय नें भि हां मे सर हिला दिया… ममता केँ होंटो पर्र तेज कामुक मुस्कान छा गई, …बलि कां बकरा हालाल हौ चुका थां…उसने विनय केँ ऊपेर झुकते हुए, अपने होंटो कों विनय केँ होंटो पर्र रख दिया….दोनो एक् दूसरे केँ होंटो कों चूसने मे मस्त थें कि, तभी बाहर् डोरबेल बजी….ममता एक् दम सें हड़बड़ा गई, ….”हाई अबकॉन आँ गय़ा….” ममता नें जल्द सें अपनेसर कपड़े समेटे….औऱ विनय कों कहा कि, वोँ जल्द सें अपनी टीशर्ट औऱ शॉर्ट्स पहनकर बाहर् कां गेट खोले….वोँ अपनेरूम मे कपढ़े पहनने जारही हैं……
विनय नें एक् हि मिनिट मे अपने शॉर्ट्स औऱ टीशर्ट पहनी, औऱ भागता हुआ बाहर् गेट कि तरफचला गय़ा….जब विनय नें जाकरगेट खोला तोँ, देखा सामने पिंकी औऱ अभि खड़े थें…दोनो बेहदखुश लगरहे थें….शायद उन्हे भि पताचल चुका थां कि, सभीलोग साम कों मूवी देखने जारहे हैं….”विनय भैया पता हैं….बापू कां मोबाइल आया थां….बोल रहे थें कि, हम् सभी मूवी देखने जारहे हैं साम कों आप् भि….”
विनय:हां मुझेपता हैं….
पिंकी: केसे….?
विनय: मामाजी जी कां भि मोबाइल आया थां….
फिन तीनो अंदर आँ गये….थोड़ी देरबाद ममता भि कपड़े पहनकर जबरूम सें बाहर् आई तौ, पिंकी औऱ अभि कों देखकर दाँत पीसने लगी….कि इनको इतनीधूप मे भि सुकून नहीं हैं….सारा मजा किरकारा कर दिया….इन आफ़ात कि पूडियों नें….खैर ममता कों मन मारना पड़ा, साम कों सभीलोग मूवी देखने चले गये….रात कों खाने केँ समय मामाजी नें बताया कि, कल किरण वापिस आने वाली हैं….ममता कों यहसुन कर बुरा तौ लगा, पर्र आख़िर किरण कों अपनेघऱ तौ वापिस आनां हि थां….
उसरात मामाजी विनय केँ संग उसकेरूम मे सो गये….विनय कों प्रेम जौ बहोत करते थें….अगली सुभह भि अजय नें ममता कों जल्दउठा दिया….ममता नें अपने जीजा केँ लिए नाश्ता बनाया औऱ फिन लञ्चपॅक करके दिया….अजय केँ जाने केँ बाद ममता नें गेटबंद किया औऱ फिन सें अपनेरूम मे आकरसो गई, ….जबआँख खुली तोँ 10 बज चुके थि….वोँ जल्द सें उठी, औऱ विनय केँ रूम मे गयीँ,, तौ देखा विनय अभि तक सोरहा थां….उसने विनय केँ पास जातेहुए आवाज़ लगाकर विनय कों उठाया…….
औऱ जैसे हि विनयउठा तोँ, ममता नें झुककर उसके होंटो पऱ हल्का सां चुंबन झाड़दया…। “गुड मॉर्निंग शोना….”उठ जाओ….मे नाश्ता बनाने जारही हूं….फ्रेश होकर डाइनिंग टेबल पऱ आँ जाओ….लगभग 11 बजे दोनो नाश्ता करके फ्रीहुए तोँ, ममता झूठे बर्तन उठाकर रसोई मे चली गई, ……तभी बाहर् डोरबेल बजी, तोँ ममता नें विनय कों गेट खोलने केँ लिए कहा….जब विनय नें जाकरगेट खोला तोँ सामने किरण खड़ी थि……विनय कों देखते हि मामीजी केँ होंटो पर्र ममताभरी मुस्कान उमड़आई, उसने विनय कों अपने सीने सें लगा लिया.
पहले भि कईबार किरण विनय कों दुलारते हुएगले सें लग लेती थि……औऱ विनय नें भि आज तक ऐसाकभी महसूस नहीं किया थां….जोँ वोँ आजकररहा थां….किरण कि 38 साइज़ कि बड़ी-2 चुचियाँ जोँ ममता सें कही ज्यादा बड़ी थि….विनय कों अपने गालो पऱ दबति हुइ महसूस हुइ, तौ उसके शरीर मे वही अजीब सि सरसराहट दौड़ गई,, जौ उसे ममता कि चुचियों कों छूते वक्त हुईँ थि….”कैसा हैं मेराराज कुमार….” किरण नें विनय केँ माथे पर्र चूमते हुएकहा…
विनय: मे ठीक हूं….आप् केसे हैं….औऱ वैशाली कहां हैं….?
किरण: वोँ….उसे तोँ आते हि रिंकी नें रोक लिया….
विनय: (किरण केँ हाथ सें एक् बॅग लेकर उठाते हुए) लाइए मामीजी मे लेजाता हूं अंदर….
ममता भि किरण कि आवाज़ सुनकर बाहर् आँ गयीँ, ….औऱ बाहर् सें वशाली भि अंदर आँ गयीँ,। वशाली औऱ विनय दोनो हि हम् उम्र थें….इसीलिए दोनो मे बेहद लगाव थां….हां हालाकी वशाली थोड़ी तुनक मिजाज़ कि थि….छोटी-2 बातों पऱ भड़क जाती थि….खैर मामीजी औऱ वशाली अंदरआए तोँ, ममता नें उनकेलिए चाइ पानी कां इंतज़ाम किया….
ब्रेकफास्ट करने औऱ थोड़ी देर आराम करने केँ बाद ममता अपनी बहन किरण केँ संग अपने भइया कि विवाह कों लेकर मसरूफ़ होँ गयीँ, ….क्याँ हुआ क्याँ-2 खरीदा कितनी तैयारी हौ गई, ….वग़ैरह-2। किरण नें बातो-2 मे ममता कों बताया कि, माँ बापूकह रहे थें कि, ममता कां कॉलेज जब तक शुरुआत नहीं हौ जाता.तब तक वोँ वहा आँ जाए….अभि विवाह कि बहोत सारी शॉपिंग करनी बाकी हैं……एक् तरफ भइया कि विवाह कि खुशी थि….औऱ दूसरी तरफ अपनेनये प्रेमी सें बिछड़ने कां दुख भि थां….अभि-2 तौ उसने विनय केँ संग पहली चुदाई कां सुख लिया थां….
किरण मामीजी केँ घऱ आँ जाने सें मानोघऱ मे रौनकलौट सि आई थि…….पऱअब विनय कों यह रौनक कहां अच्छी लगती थि….उसे तोँ बस तनहाई मनपसंद थि….वोँ भि ममता केँ संग। जौ अब मामीजी केँ आने केँ बाद उन्हे बेहद मुस्किल सें मिलने वाली थि….उसदिन घऱ मे खूबचहल पहल रही….शीतल भि घऱआई अपने बच्चों केँ संग….विवाह कों लेकर तीनोआपस मे बातें करतीरही….
विनय हमेशा इस तलाश मे रहता कि, उसे ममता केँ संग अकेले रहने केँ लिएकुछ लम्हा हि मिल जाए……वोँ तरसती निगाहो सें ममता कों ताड़रहा थां….औऱ ममता भि उसके आँखो मे छुपी हुइ प्यास कों देखकर मन हि मन मुस्कुरा रही थि….एक् जवान स्त्री याँ लड़की कों इससे ज़यादा औऱ क्याँ चाहिए….कि एक् जवान लड़का केसे उसकेआगे पीछे चक्कर लगारहा हैं। वोँ कईबार विनय कि तरफदेख कर अपने होंटो कों अपने दाँतों मे दबाकर उसे कामुक इशारा करती, तोँ ममता कि नज़रें विनय केँ दिल कों चीर जाती……
विनय कां बेहद बुराहाल थां……घऱ मे रहा तोँ, दिमाग़ हि खराब होँ जाएगा….यह सोचकर विनयघऱ सें बाहर् निकल गय़ा……कुछ देर दोस्तो केँ संग घूमता रहा….पऱ फिनजब वोँ घऱ कों वापिस आनेलगा तोँ, रास्ते मे जब अपने विद्यालय केँ सामने सें गुज़रा तोँ, विद्यालय केँ छोटेगेट केँ बाहर् खड़े पीयान रामू नें उसे आवाज़ देकर अपनेपास बुला लिया….जब विनय उसकेपास गय़ा तोँ, रामू नें विनय सें हाथ मिलाते हुएकहा……
रामू: क्यूं विनय बाबू किधरघूम रहे हौ……?
विनय:कुछ नहींऐसे दोस्तो केँ पास सें आँ रहा हूं……
रामू: दोस्त कामाल होँ इतने दिनो सें यहाआए भि नहीं….आओ अंदर चलते हैं….
विनय: नहीं -2 मुझेदेर हौ रही हैं……
रामू: अर्रे विनय बाबूआओ भि नां….एक् बहोत ज़रूरी बात करनी हैं……
विनय: नहीं मुझेसच मे देर हौ रही हैं….जोँ भि कहना हैं यहीकह दो….
रामू:देख लो विनय बाबू……एक् मस्त चीज़ बतानी थि तुमको….वरना बाद मे हाथ मलतेरह जाओगे……
विनय केँ मन मे अजीब सि हलचल हुईँ, आख़िर ऐसी क्याँ बात हैं……जोँ रामू उसकी इतनी मिन्नतें कररहा हैं….विनय कुछसोच कर रामू केँ संग अंदर आँ गय़ा….रामू नें गेटबंद किया….औऱ उसे विद्यालय कि बिल्डिंग केँ पीछेबने हुए, अपने रूम्स कि तरफ लेजाने लगा….एक् बारफिन सें अंजानी उत्सुकता नें विनय केँ दिल कों घेर लिया थां….”आइए विनय बाबू अंदरआईए….” रामू नें रूम केँ डोर पऱ पहुँचते हुए विनय सें कहा….औऱ फिन अंदरचला गय़ा……जैसे हि विनयउस रूम मे दाखिल हुआ, तौ उसकी नज़र नीचे बैठी एक् स्त्री पऱ पड़ी….जौ नीचेरखे हुएगॅस स्टोव पऱ रात केँ लिए सब्जी बनारही थि….
उस महिला कां रंग सांवला थां….एक् दम गदराई हुई थि….उसने अपनी साड़ी कों अपने घुटनो तक उठारखा थां….उसके साँवले रंग कि सुडोल पिंदलियाँ सॉफ दिखाई देरही थि…। जैसे हि उस स्त्री नें विनय कों रामू केँ संग अंदरआते हुए देखा तौ उसके माथे कि थ्योरियाँ चढ़ गई, …….”अबयह किसेउठा लाया हैं तूँ….दोपहर कों तेराजी नहींभरा….” उस महिला नें मूह मे भुन्भुनाना शुरुआत कर दिया….”पता नहीं इसको कहां-2 सें ऐसे छोकरे मिल जाते हैं…”
रामू: अर्रे ईश्वर यह हमारे विद्यालय मे पढ़ते हैं….विनय बाबू….
स्त्री: विद्यालय मे पढ़ते हैं, तोँ यहाकॉन सें तेरे बाप नें क्लास खोलरखी हैं….जौ तूँ इसेयहा उठा लाया….
रामू नें देखा कि उसकी पत्नि कां मूड उखड़ा हुआ हैं तोँ, उसने विनय कि तरफ मुस्कुराते हुएदेख कर कहा….”विनय बाबू आप् चलिए मेरेसंग….” विनयसमझ चुका थां कि, यह महिला रामू कि पत्नि हैं….पऱ वोँ उस पऱ इतना क्यूं भड़करही हैं….विनय कि समझ मे नहीं आँ रहा थां….जैसे हि दोनोरूम सें बाहर् आए तौ, रामू नें विनय केँ सामने थोडा सां मुस्कुराते हुए कहा….”वोँ मेरी पत्नि हैं….कुछ हि दिन पहले गाओं सें आई हैं….आज सुभह-2 हि इसकेसंग झगड़ा हौ गय़ा थां….तौ इसलिये कुछ गर्म हैं….अच्छा जोँ मे कहना चाहता थां। वोँ अभि नहींबता सकता….मगर आप् कल अवश्य आइयेगा……सच मे बहोत ज़रूरी बात हैं……
विनय:ठीक हैं अब मे जाऊ….बहोत देर होँ रही हैं….
रामू:हां विनय बाबूआइए मे आपको बाहर् छोड़ देता हूं….
उसकेबाद रामू नें विनय कों विद्यालय सें बाहर् छोड़ दिया….औऱ गेटबंद करकेफिन सें अपनेरूम मे चला गय़ा….
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Next soon।
नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -7
रामूगेट बंद करके, जैसे हि अपनेरूम मे पहुंचा तोँ, उसकी पत्नि अंजूउस पर्र बरस पड़ी……”क्यूं रे तेरी गान्ड मे फिन सें कीड़े रेंगने लगे….जोँ तुँ उनको शांत करने केँ लिए इसको बुला लाया थां……पूरी दोपहर तूँ उस छोकरे केँ संग पीछे कमरो मे गान्ड मरवाता रहा….फिन भि तेरादिल नहीं भरा….जौ एक् औऱ नया लड़का ढूँढ लाया……
रामू:ओहो अंजू तुम् भि नाँ….कुछ बोलने सें पहले एक् बारकुछ सोचसमझ तौ लियाकरो… किसी केँ सामने कुछ भि बकती हैं तूँ भि….साली जब देखो रंडी कि तरहमूह सें आग उगलती रहती हैं…अर्रे बोलने सें पहलेयह तोँ जान लेती कि, वोँ कॉन हैं….
अंजू: क्यूं किसी मिनिस्टर कि औलाद हैं काया….?
रामू: नहीं मिनिस्टर केँ औलाद नहीं हैं….पऱ वोँ ऐसा लड़का भि नहीं हैं समझी….मेरी तोँ मति हि मारी हि गयीँ, थि….जौ मेने तेरे बारे मे सोचा….
अंजू:(मूह बनाते हुए)अबे हिजड़े अगर मेरे बारे मे सोचता होता तोँ, आज तक मे 5 बच्चों कि मां बन चुकी होती….पऱ तुझेही तौ बस तेरी गान्ड मे नये-2 लौन्डो कां लन्ड चाहिए….(अंजू बर्तन पऱ बनरही सबाज़ी कि तरफ देखते हुए बोलि….)
रामू: देखा-2 साली रांड़ कां अभि भि मूहबंद नहीं हौ रहा…….अब ईश्वर नें मुझेऐसा बनाया हैं तौ इसमे मेरा क्याँ कसूर….साली तेरे चक्कर मे मेने उसका कोरा लन्ड आज तक अपनी गान्ड मे नहीं लिया……
अंजू: (बेलनउठा कर रामू कों दिखाते हुए)आबे गान्डू चुप कर…….सभी जानती हूं….साला नमार्द कही कां…तूँ क्याँ खाक सोचेगा मेरे बारे मे….
रामू: साली छिनाल तुझसे मिलवाने लाया थां मे उसको……
अंजू: (रामू कि बातसुन कर हैरान होतेहुए) क्याँ मुझसे मिलवाने….क्यूं….ओह्ह्ह अच्छा-2 कही वोँ भि तेरीतरह गान्डू तोँ नहीं हैं….कि इसीलिए तूँ मुझे उससे मिलवा करयह दिखाना चाहता थां कि, देखइस दुनाया मे मै हि अकेला गान्डू नहीं हूं….
रामू: साली सीधीबात तौ तेरीसमझ हि नहीं आती….तुँ सुन छिनाल रंडीयह यह इतना लंबा लन्ड हैं उसका….साला शपथ सें जब खड़ा होता हैं, तोँ…….(रामू बोलते-2 चुप होँ गय़ा….)
अंजू हैरानी सें रामू केँ हाथ कि तरफदेख रही थि….जिससे उसने विनय केँ लन्ड कि लंबाई कों हाथ सें बताया थां….”क्याँ इतना बड़ा….तोँ साले मादरचोद अब तक तूनेउसे छोड़ केसे दिया…” अंजू नें साड़ी केँ ऊपेर सें हि अपनी बुर कों खुजाते हुए कहा….”तेरे लिए छोड़ दिया। साली एक् दम कोरा लन्ड हैं……एक् दम मस्त….तुँ रात कों मुझेतंग करती रहती हैं….साली नें लन्ड केँ चुप्पे लगा-2कर मुरझा दिया हैं….
अंजू: (शर्मा कर मुस्कुराते हुए) कहां अब कहां लगाने देते हौ तुम्….15 दिन होँ गये…। बुर मे जाने लायक तोँ तुम्हारा खड़ा होता हि नहीं….
रामू:देख अंजू……लड़का एक् दम कोरा हैं….जवान हैं….औऱ मुझसे खुलाहुआ भि हैं….हर तरह कि बात हम् आपस मे कर लेते हैं….साली तेरी बुर केँ लन्ड कां इंतज़ाम किया थां….औऱ तूने अपनी भयानक आवाज़ सुनाकर भगा दिया…
अंजू: क्याँ सच मे उस लड़के कां लन्ड इतना बड़ा हैं….
रामू:शपथ मुझे अपनी गान्ड केँ कीड़ों कि….साली लन्ड तौ मस्त हैं उसका….हां पऱ हैं कच्चा खिलाड़ी….मेने अपनी आँखो सें देखा हैं उसका लन्ड….पकड़ा भि हैं….बोल क्याँ कहती हैं….
अंजू:अब तुम् मुझे विद्यालय केँ बच्चे सें चुदवाओगे….
रामू: सालीअब नखरेमत कर….ऐश करेगी….
अंजू: वोँ तुम्हारी पत्नि कों चोदेगा औऱ तुम्हे बुरा नहीं लगेगा….
रामू:देख मे तुम्हे वोँ सुख नहींदे सकता….जौ एक् पति अपनी पत्नि कों देता हैं….पऱ तेरी वोँ सुख दिलवा तोँ सकता हि हूं….मुझे क्याँ ऐतराज होगा….हां पर्र इसके बदले मे मुझे भि कुछ चाहिए….
अंजू:हां बोल क्याँ चाहिए….
रामू:देख आज केँ बाद तुँ मुझे दोबारा कभी नहीं रोकेगी….
अंजू: वोँ तौ बाद कि बात हैं….पहले यह तौ देखलूँ कि जितनी तारीफ तुँ उसके लन्ड कि कररहा हैं….उसमे सच मे इतनादम हैं भि याँ नहीं….
रामू: हैं मेरीजान हैं….
अंजू:चल अगर तेरेबात सही हुइ तोँ, फिन तुम्हे कभी किसीबात केँ लिए नहीं रोकूंगी….
रामू: औऱ मुझ पर्र क्रोध भि नहीं करोगी….
दूसरी तरफजब विनयघऱ पहुंचा तोँ, साम केँ 7 बज चुके थें……उसकी मामीजी बाहर् गेट पर्र हि खड़ी थि….शायद वोँ विनय कों हि ढूँढरही थि….जैसे हि उसने विनय कों देखा तौ उसने राहत केँ साँस ली….”कहां चला गय़ा थां तूँ….कब सें तुम्हे ढूँढरही हूं….कितना समय हौ गय़ा हैं….”
विनय: वोँ मामीजी अपने मित्र केँ घऱचला गय़ा थां….
किरण: साथी केँ घऱचला गय़ा थां….औऱ यह तूने अपनी क्याँ हालतबना रखी हैं…चल अंदरचल करहाथ मूहधो लें….ऐसे हि मत घुमाकर……
विनय अंदरचला गय़ा……औऱ जाते हि बाथरूम मे घुस गय़ा….फ्रेश होकर बाहर् आया, औऱ वशाली केँ संगबैठ कर टेलीविज़न देखने लगा….रात केँ 9 बजे लगभगसभी नें खानां खाया औऱ ममता वशाली औऱ विनय केँ संग ऊपेरछत पर्र जाने कि तैयारी करने लगी…वशाली विनय औऱ ममता नें अपने-2 पलंग उठाए औऱ एक् केँ पीछे एक् लाइन सें चलतेहुए ऊपेर जानेलगे…। सबसेआगे वशाली चढ़रही थि….उसके पीछे ममता औऱ लास्ट मे अपना विनय। ममता जानबूज करकुछ धीरे-धीरे धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़रही थि….वशाली सबसे पहले ऊपेर पहुँची, औऱ अपना पलंगरख कर बिछाने लगी….तब तक विनय औऱ ममता भि ऊपेर आँ गये औऱ पलंग बिछाने लगे….
ममता नें देखा कि वशाली अपना बिस्तरा लगा चुकी हैं….”वशाली बेटा एक् कामकर तूँ नीचे सें पानी कि बॉटल लेँ आँ….नहीं तौ प्यास लगने पर्र नीचे जानां पड़ेगा रात मे….” ममता नें अपनेबैड कों जल्द -2 बिछाते हुएकहा…
वशाली: ठीक मासीजी लेँ आती हूं….
औऱ जैसे हि वशाली सीढ़ियों सें नीचे उतरी तोँ ममता तेज़ी सें सीडयों कि तरफ गयीँ, ….औऱ कुछ सीढ़ियाँ नीचेउतर कर, उसने विनय कों आवाज़ दि….जब विनय नें ममता कि तरफ देखा तोँ वोँ कामुकता केँ संग मुस्कुराते हुएउसे अपनेपास आने कां इशारा कररही थि….विनय भि तोँ कब सें तड़परहा थां….वोँ तेज़ी सें उठा औऱ सीढ़ियों पर्र दोकदम नीचेउतर कर ममता केँ सामने जाकर खड़ा हौ गय़ा….ममता नें एक् बारफिन सें नीचे कि तरफ नज़र डाली औऱ फिन एक् दम विनय कों अपने बाहों मे भरतेहुए, अपने सें चिपका लिया….औऱ उसके गालो औऱ माथे पर्र चूमते हुए बोलि….”ओह्ह्ह मेरे शोना कहां थां सारा दिन….पता हैं इतना अच्छा मोका थां आज….दिदी औऱ वशाली शीतल दिदी केँ घऱगये थें….आधे घंटेबाद वापिस आए….पर्र तूँ पता नहीं कहां गायब होँ गय़ा थां….”
विनय: वोँ मे तोँ मित्र केँ घऱचला गय़ा थां….
ममता:चल वोँ सभी छोड़……आज अपनी साथी कों प्रेम कर लें….कल तोँ मे घऱजारही हूं….
विनय: (चोन्कते हुए) क्याँ कलघऱजा रही होँ आप्….?
ममता:हां मां बापू नें बुलाया हैं….चल वोँ सभीबाद मे बात करेंगे….
यह कहतेहुए ममता नें अपने सुर्ख जूसी होंटो कों विनय केँ होंटो सें लगा दया….जैसे हि विनय केँ मूह मे ममता केँ सुर्ख होन्ट कां रस घुला, तोँ उसकी आँखे मस्ती मे बंद होतीचली गयीँ, ….आँखे तौ ममता कि भि बंद होनेलगी थि….पऱ वशाली कभी भि ऊपेर आँ सकती थि…विनय नें कुछ हि पॅलो मे ममता केँ होंटो कों अपने होंटो मे दबा-2कर चूसना शुरुआत कर दिया….उसका लन्ड उसके शॉर्ट मे एक् दमतन चुका थां….जिसे ममता अपनी सलवार केँ ऊपेर सें अपनी बुर पऱ रगड़ ख़ाता हुआसॉफ महसूस करपारही थि….ममता कां दिल तौ कररहा थां कि, वोँ अभि अपनी सलवार उतारकर विनय केँ लन्ड कों बुर मे घुसवा लें, औऱ विनय उसके जबरदस्त चुदाई करे….
पऱ टाइम इसकी इजाज़त नहींदे रहा थां….विनय केँ हाथ स्वयं ब स्वयं हि, ममता केँ कुर्ते केँ ऊपेर सें उसकी चुचियों पऱ आँ चुके थें….औऱ जैसे हि विनय नें ममता कि चुचियों कों अपने हाथो मे लेकर दबाया तोँ, ममता केँ रोम-2 मे मस्ती कि लहर दौड़ गयीँ, ….पऱ तभीउसे किसी केँ सीढ़ियों पर्र चढ़ने कि आवाज़ आए तौ, वोँ एक् दम सें विनय सें अलग होँ गई, … “लगता वशाली ऊपेर आँ रही हैं….दोनो वापिस ऊपेर जाकर बिस्तरों पऱ बैठगये…
नीचेखाट पऱ बैठकर, कुछदेर वोँ ऐसे हि इधरउधर कि बातें करते रहे….अजय अभि तक नहींआया थां….तीनो रात केँ 10 बजे तक आपस मे बातें करते रहे….फिन धीरे-धीरे-2 सभी कों नींदआने लगी….अजय कबआया उन तीनो कों पता नहीं चला….सुभह-2 5 बजे कां वक्त थां….आज आसमान मे घनेबदल छाएहुए थें….बेहद ठंडीहवा चलरही थि……ऊपेर सें कूलर कि ठंडीहवा सें कूलर केँ सबसे नज़दीक लेटी वशाली कि नींदखुल गई, ….
ऊपेर हल्की-2 सर्दी लगरही थि……इसीलिए वोँ उठकर नीचे जाने लगी….औऱ जैसे हि उसने नीचे जाने केँ लिए सीढ़ियों कां डोर खोला तौ, उसकी आवाज़ सुनकर ममता भि जाग गयीँ, ….उसने अपनीअध खुली नींद सें भरी आँखो सें सीढ़ियों केँ डोर कि तरफ देखा….जहाँ सें वशाली नीचेउतर गयीँ, ….उसने थोड़ी देरवेट किया औऱ फिन सीढ़ियों केँ डोर पऱ जाकर नीचे देखा। वशाली नीचेजा चुकी थि….उसने जल्द सें सीढ़ियों केँ डोर कों फिन सें लॉक किया….औऱ तेज़ी सें विनय केँ पासआकर नीचे बैठते हुए उसके गालो कों थपथपाते हुए जगाना शुरुआत कर दिया….
नादान लन्ड केँ जलवे - Next part miss mat karna
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजक एपसोड हैं भइया आनंद आँ गय़ा अगले रोमांचकारी धमाकेदार औऱ चुदाईदार एपसोड कि प्रतिक्षा रहेगी जल्द सें दिजिएगा
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजक एपसोड हैं भइया मज़ा आँ गय़ा अगले रोमांचकारी धमाकेदार औऱ चुदाईदार भाग कि प्रतिक्षा रहेगी जल्द सें दिजिएगा
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