नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -2
अंदर जोँ भि थें….वोँ भि उसको अंदर झाँकते हुएदेख कर खोफ़जदा हौ गये….अंदर विद्यालय कां पीयान औऱ 10 थ कां एक् लकड़ा थां….जोँ उस पीयान कि गान्ड कि बॅंडबजा रहा थां…वही पीयान जिसको वोँ विद्यालय सें अंदर आँ हुएगेट पर्र खड़ा देखता थां…दोनो विनय कों देखकर एक् दम सें घबरा गये….औऱ उनसे अधिक तोँ विनय घबरा गय़ा….वोँ जल्द सें वापिस विद्यालय केँ आगे कि तरफ भागा….
पऱ अभि वोँ कुछकदम आगे हि बढ़ा थां कि, उस लड़के नें आकरउसे पीछे सें पकड़ लाया… विनय नें उसकीतरफ घबराते हुए देखा….औऱ ठीक वैसे हि भावउस लड़के केँ चेहरे पर्र भि थें….”मित्र तूने अंदर जोँ भि देखा किसी कों बताना नहीं….अगर तूने किसी कों बतादया तौ दोस्त मुझे विद्यालय सें निकाल देंगे….” विनय हैरानी सें उस लड़के कों गिड़गिडाता हुआदेख रहा थां….उसे समझ मे नहीं आँ रहा थां कि, वोँ क्याँ करे औऱ क्याँ बोले….”देख यारअगर तुँ यहबात किसी कों नहीं बताएगा….तौ हम् तुम्हे भि इसखेल मे शामिल कर लेंगे….बहोत मजाआता हैं शपथ सें….”
विनय नें उस चपरासी कि तरफ देखा जोँ सहमाहुआ सां उनकीतरफ बढ़रहा थां….”दोस्त साम कों 6 बजे मुझेयहा मिलना….यह पीयान इसी विद्यालय मे हि रहता हैं….प्लीज़ किसी कों बताना नहीं…ऐसा मजा आएगा कि तुम् भि याद करोगे….पऱ प्लीज़ किसी कों बताना नहीं….”
विनय:ओके मेराहाथ छोड़ो नहीं बताता मे किसी कों….
उस लड़के नें जैसे हि विनय कां हाथ छोड़ा….विनय भागकर अपनी क्लास मे आँ गय़ा….वोँ दोनो क्याँ कररहे थें….क्यूं कररहे थें….इसमे क्याँ मजाआता हैं….यह तोँ गंदाकाम हैं। क्याँ सच मे उनकोमजा आता हैं….आता हि होगातभी तोँ करते हैं….विनय केँ दिमाग़ मे ऐसे लाखों प्रश्न घूमरहे थें….क्लास मे पढ़ाई कि तरफ उसका ध्यान उसदिन बिकुल भि नहीं थां….जैसे हि विद्यालय ऑफहुआ, विनय अपनाबॅग उठाकर विद्यालय सें बाहर् निकला औऱ तेज कदमो सें चलताहुआ, विद्यालय सें घऱ जाने लगा….वशाली पीछे सें भागती हुईँ उसे आवाज़े देतेरही। पऱ वोँ नां रुका……5 मिनिट कि दूरी पर्र तौ उनकाघऱ थां….
वोँ घऱ मे घुसा औऱ सीधा अपनेरूम मे चला गय़ा….बॅग नीचे पटका औऱ बेड पऱ लेटकर गहरी साँसे लेने लगा….उसका ध्यान अभि भि वही थां….लेटे-2 वोँ सोचते-2 कब नींद केँ आगोश मे समा गय़ा पता हि नहीं चला….उसकी मामीजी किरणरूम मे आकर देखती हैं कि, विनयबेड पर्र लेटासो रहा थां….उसने अपनेशूस भि नहीं उतारे थें…मामीजी नें उसकेशूस उतारे औऱ उसेठीक सें बेड पर्र लिटाया औऱ सोचाजब उठेगा तब खानां खिला दूँगी….फिन उसकी मामीजी रूम सें बाहर् चली गई, ….
जबसाम कों विनयउठा तौ, 5 बज चुके थें….उसने देखा कि, वोँ आज विद्यालय यूनिफॉर्म मे हि सो गय़ा थां….कपड़े चेंज करतेहुए, उसे एक् दम सें यादआया कि, उस लड़के नें साम कों 6 बजे विद्यालय मे बुलाया थां….उसने कपड़े चेंज किए…औऱ बाहर् आया तोँ, उसे मामीजी नें आवाज़ देकररोक लिया….”विनय कहां जारहा हैं….”
विनय: वोँ मामीजी दोस्तो केँ संग खेलने जारहा हूं….
किरण: बेटा खानां खा लेँ पहले सुभह सें ब्रेकफास्ट कियाहुआ हैं….
विनय:ठीक हैं मामीजी जल्ददो……
किरण नें उसे जल्द सें खानां डालकर दिया, औऱ विनय नें 5-6 मिनिट मे खानां खाया औऱ बाहर् निकल आया….विद्यालय कि तरफकदम बढ़ाते हुएउसे अजीब सां डरलगरहा थां….अजीब -2 तरह केँ ख़याल मन मे आँ रहे थें….जैसे तैसे वोँ विद्यालय केँ बाहर् पहुचा तोँ मेनगेट केँ संग छोटे वालेगेट पर्र वोँ पीयान खड़ा थां….विनय कों देखकर वोँ मुस्कुराया…औऱ उसे अंदरआने कां इशारा काया….
विनय अंदरचला गय़ा….उसने गेटबंद किया….औऱ विनय कों लेकर अपनेरूम मे चला गय़ा। जहाँ पऱ वोँ लड़का पहले सें बैठाहुआ थां……”देखा मेनेकहा थां नाँ यह अवश्य आएगा….चल अच्छा किया जोँ तुँ आँ गय़ा….भइया हम् यहा मस्ती करने केँ लिए इकट्ठे हुए हैं….” तीनो नीचे बिछाए बैड पर्र बैठ जाते हैं….”साथी अपनानाम तोँ बताओ हमें….”
विनय: विनय….
लड़का: मेरानाम मनीष हैं….औऱ इसका (पीयान कां) रामू……
मनीष: अच्छा तोँ विनय। पहलेयह बताओकभी पहले किसी केँ संगऐसा कुछ किया हैं….?
विनय: नहीं….
मनीष: (रामू कि ओर मुस्करा कर देखते हुए) इसका मतलब तुँ अभि बिकुल कोरा हैं….चलो देखते हैं कि तुम् रामू केँ काबिल भि हौ याँ नहीं….
रामू:चल पहले अपनी पेंट सें अपना लन्ड बाहर् निकाल….
विनय: क्यूं….
मनीष: दोस्त वोँ दोपहर वालाखेल खेलना हैं नां….यह देख हम् सभी भि अपने लन्ड बाहर् निकाल रहे हैं……
यह कहतेहुए मनीष नें अपनी पेंटखोल कर नीचे सरका दि….उसका 5 इंच कां लन्ड एक् दमतना हुआ थां….रामू नें भि अपनी लूँगी हटाकर निकाल दि…उसका कालेरंग कां लन्ड महज 4 साढ़े 4 इंच कां थां….जोँ नॉर्मल खड़ा थां….दोनो नें अपने लन्ड कों हाथ मे धीरे-धीरे-2 लेकर हिलाना शुरुआत कर दिया….”यह कररहे होँ तुम् दोनो……”
मनीष:अबे तुँ भि अपना लन्ड निकाल कर हिला जैसे हम् हिलारहे हैं….इसे मूठ मारना कहते हैं….बहोत मजाआता हैं ऐसा करने मे….
विनय नें अपने शॉर्ट्स कों सरकाकर घुटनो सें नीचे तक कर दया….उसका लन्ड बिकुल सिकुडा हुआ थां….औऱ उसके बॉल्स पऱ चिपका हुआ थां….उसने अपने लन्ड कों हाथ मे धीरे-धीरे-2 उनकीनकल करतेहुए हिलाने केँ कोशिस कि, पर्र उसेकुछ अहसास नाँ हुआ….विनय कां सफ़ेद लन्ड देखकर उस पीयान कि आँखो मे अजीब सि चमक आँ गई, ….”ला मे कर देता हूं….तुँ अभि नया हैं नां….” उस पीयान नें विनय केँ लन्ड कों अपनी मुट्ठी मे भर लिया, औऱ धीरे-धीरे-2 उसे सहलाने लगा….
एक् अजीब सि सरसराहट उसके जिस्म मे दौड़ गई, ….धीरे-धीरे-2 उसके लन्ड नें भि अपना आकार बढ़ाना शुरुआत कर दिया….लगभग 2 मिनिट बाद हि उसके लन्ड मे पूरा तनाव आँ चुका थां….जिसे देखकर उन दोनो कि आँखेफटी कि फटीरह गयीँ, ….”अबे यह इंसान कां लन्ड हैं याँ गधे कां….इतनी सि उम्र मे इतना बड़ा लन्ड साले क्याँ ख़ाता हैं….” विनयकुछ बोलने हि वाला थां कि, वोँ कुछसोच करचुप होँ गय़ा…क्याँ बताता कि एक् 70 साल कि दाई उसके लन्ड कि रोज मालिश करती हैं……
रामू: दोस्त सच मे तेरा लन्ड तौ इस उम्र मे इतना लंबा औऱ मोटा हैं, तौ एक् दोसाल बाद तौ यह औऱ लंबा औऱ मोटा होँ जाएगा….
मनीष: क्यूं साले गान्ड मे खुजली होनेलग गई, तेरे लगता दोस्त कां लन्ड देखकर……
रामू:कह तौ तूँ सहीरहा हैं….पर्र अभि इसके बारे मे मे कुछ औऱ हि सोचरहा हूं….
मनीष: क्याँ सोचरहा हैं बे….मुझे भि तोँ बता….
रामू: वोँ बाद मे बताउन्गा….अभि तौ तूँ जल्द सें मेरी गान्ड मार केँ मेरी गान्ड केँ कीड़ों कों सुलादे….
यह कहतेहुए रामू उल्टा हौ गय़ा….औऱ फिन क्याँ थां….मनीष नें उसकी गान्ड मारनी शुरुआत कर दि….अपनी आँखो केँ सामने यहसभी होतादेख विनय कां दिल बैचेन सें होँ गय़ा…”अहह साले तेरी गान्ड मारने मे इतनामजा आता हैं तौ, लड़की कि बुर मारने मे कितना मजा आएगा…हाए रामू दोस्त किसी कि बुर दिलवा दे नां……साले इतने दिनो सें झूठा दिलासा देकर मुझसे अपनी गान्ड मरवारहा हैं……”
रामू:हां मनीष बाबू दिलवा दूँगा….अभि तौ आँ मेरीबजा ….
लड़कियों औरतों लन्ड बुर गान्ड यह शब्दसुन सुनकर विनय कां बुराहाल थां….साम 7 बजे वोँ विद्यालय सें निकलकर घऱ कि तरफचल पड़ा….गर्मियों केँ दिन थें….इसीलिए अभि अंधेरा नहींहुआ थां…जब घऱ पंहुचा तोँ, मामीजी नें हल्की सि डाँट लगाई…
घऱ पहुचकर, उसने अपने विद्यालय कां होम वर्क किया….होम वर्क करते-2उसे 9 बज चुके थें….ममता रूम मे आई, औऱ उसने विनय कों कहा कि, खानां लग गय़ा हैं….आकर खाले….“जी दिदी अभि आता हूं….” विनय ममता कों दिदी कहकर पुकारता थां….विनय खानां खानेचला गय़ा। आज भि उसका मामाजी अभि तक घऱ नहींआया थां….जब उसके मामाजी घऱआते, तौ तब तक विनयसो चुका होता….अजय कां विनय सें बेहद लगाव थां….उसकी बेहन औऱ जीजा कि आख़िरी निशानी जौ थि….
विनय: मामीजी जी मामाजी जी नहींआए अभि तक……
किरण: बेटा दुकान केँ ऊपरनया गारमेंट्स कां काम शुरुआत किया हैं नां….इसलिये वोँ लेटआते हैं.
(दरअसल पिछले एक् साल सें उसके मामाजी नें स्वयं केँ गारमेंट सिलाने केँ लिएनयी मशीन्स लगवाई थि…अपनी हि दुकान केँ ऊपेर वाली मंज़िल पऱ….इसलिए उसके मामाजी रात केँ लगभग 11 बजेआते थें….औऱ सुभह जल्द हि चले जाते थें….कई-2 बार तोँ वोँ मोबाइल करके मामीजी कों कह देते कि वोँ आजवही पऱ रुकने वाले हैं….)
उसकेबाद सभी नें खानां खानां खाया औऱ सभी अपने अपनेरूम मे सोने केँ लिएचले गये। वशाली तौ किरण केँ संग हि सोती थि….चाहे अजयघऱ हौ याँ नाँ होँ….दोस्तो दिनइसी तरह गुजररहे थें….अब विनय अक्सर अपने दोस्तो केँ ग्रूप मे होने वाले लड़कियों केँ जिकर कों ध्यान सें सुनने लगा थां….धीरे-धीरे-2 उसका झुकाव अब सेक्स केँ लिए होनेलगा थां….
जून शुरुआत होँ चुका थां….सम्मर वकेशन स्टार्ट होँ गये थें….मामाजी कां घऱ बहोत बड़ा थां….नीचे चार रूम्स थि….औऱ ऊपेर तीन…ऊपेर वाले तीनो रूम्स खाली थि…कुछ पूर्ण समान ऊपेरइन तीनो रूम्स मे इधरउधर बिखरा रहता थां……विनय वशाली मौसी कि बेटी पिंकी औऱ उनका बेटा अभि औऱ संग मे वशाली कि सहेली जौ अब11थ मे हौ गई, थि… सभीलोग दोपहर कों ऊपेर वाली मंज़िल पऱ इकट्ठा होँ जाते…….
औऱ खूब मस्ती करते….दिन तोँ विद्यालय कां होम वर्क करते औऱ खेल-2 मे निकल जाता….पऱ रात कों विनय केँ दिमाग़ मे अपने दोस्तो केँ संग कि हुइ लड़कियों औऱ औरतों कि बातें घूमती रहती। व्यक्ति औऱ महिला सेक्स केसे करते हैं….कितना मजाआता हैं….यह सभी उसके दिमाग़ मे चलता रहता….जून मे गर्मियाँ कहरढा रही थि….उसरात कों खानां खातेहुए….
ममता: दिदी मे क्याँ बोलरही थि….कि नीचेआब ठीक सोया नहीं जाता….बहोत गरमी हैं…। आज ऊपेरछत पर्र सोते हैं……
किरण: ममता तुझेही तोँ पता हैं हि यहकब आएँगे कोईपता नहीं….तूँ दोनो बच्चों कों लेकर ऊपेरचली जा….
ममता:ठीक हैं दिदी….
उसकेबाद जैसे हि सभी नें खानां खाया, तोँ ममता विनय औऱ वशाली सें कहनेलगी…। “चलो बच्चा बर्थडे पार्टी मेरेसंग आओ……औऱ बिस्तरे ऊपेर लेकर चलो….आज हम् सभी ऊपेर सोएंगे….”फिन तीनो नें बिस्तरों कों ऊपेर लेजाना शुरुआत कर दिया…फिन ममता नें एक् टेबलफॅन भि उठाया औऱ ऊपेर लें गयीँ, ….ऊपेर छत पऱ जाकर नीचे तरपाल बिछाई गई,, औऱ फिन उसके ऊपेरबैड बिछादिए गये। वशाली औऱ विनय केँ पलंग दोनो तरफ़ साइड मे थें….
औऱ ममता कां पलंगउन दोनो केँ बीच मे थां……नीचे केँ तुलना ऊपेर मौसमकुछ ठंडा थां….वशाली तोँ बैड पऱ लेटने केँ 5 मिनिट मे हि सो गई, ….पऱ विनय कि आँखो सें नींद कोसोदूर थि….अबरात कों हमेशा उसकेसोच पर्र औरतें लड़कियों कि बातें हावी रहनेलगी थि….वोँ आँखेबंद किएहुए लेटाहुआ ऐसे हि कुछसोच रहा थां। कि अचानक सें ममता केँ फोन कि रिंग बजनेलगी……
हलाकी उस टाइमफोन आमबात नहीं थि……बहोत कम लोगो केँ पासफोन हुआ करता थां। फोन कां दौरउस टाइम शुरुआत हि हुआ थां….पऱ ममता कां हज़्बेंड यूके मे रहता थां। इसलिये उसने ममता कों यूके वापिस जाने सें पहले एक् फोन दिलवा दिया थां….ताकि वोँ बिना किसी तकलीफ़ केँ ममता सें बातकर सके….ममता सोचरही थि कि, शायद विनय औऱ वशाली दोनोसो चुके हैं……अब इतने दिनोबाद ममता कों उसके पति कां मोबाइल आया थां……तौ कुछ पुरानी यादें ताज़ा होना तोँ लाज़मी थि….औऱ ऊपेर सें अभि नयी-2 विवाह हुइ थि….तोँ आप् सोच हि सकतें हैं कि, उन दोनो केँ बीच मे कैसी बातें चलरही होंगी….
ममता मोबाइल पर्र बात करते हुए, लगतार अपनी कमीज़ केँ पल्ले केँ अंदरहाथ डालकर अपनी बुर कों सहलारही थि……यहदेख विनय एक् दम हैरान रह गय़ा….ममता बीच-2 मे सिसक पड़ती तोँ, विनय कां दिल भि धड़क उठता….कुछ देरबात करने केँ बाद, उसनेकॉल आईकट कि, फोन कों अपने तकिये केँ पास रखा….औऱ फिन दोनो बच्चों कि तरफ देखा….अंधेरे कि वजह सें यह अंदाज़ा लगा पाना मुस्किल थां कि, किसी कि आँखे तौ खुली नहीं हैं….
फिन ममता नें अपनी कमीज़ केँ पल्ले कों उठाकर अपनेपेट पऱ रखा औऱ अपनी सलवार कां नाडा पकड़कर खेंचते हुए, खोल दिया औऱ फिन अपना एक् हाथ अंदर लेजाकर अपनी बुर कों मसलने लगी….”शियीयीयीयियी आहह-आहह” ममता अपनी बुर कों मसलते हुए सिसकने लगी….यह देख विनय केँ लन्ड मे अजीब सि सरसाहट होने लगी….उसका हाथपता नहींकब अपने आप् उसके शॉर्ट्स पऱ उसके लन्ड केँ ऊपेर आँ गय़ा….औऱ वोँ भि ममता कों देखते हुए, धीरे-धीरे-2 अपने लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें मसलने लगा….
बुर कि आग कहां उंगलियों सें ठंडी होती हैं….खस्स्तोर पऱ उनकी जौ एक् बार लन्ड कां स्वाद चख चुकी हौ.ममता बदहवास सि हौ गयीँ, ….जब उंगलियों सें बुर कि आग नाँ ठंडी हुइ तौ, उसने अपनाहाथ सलवार सें बाहर् निकाला, औऱ नाडा बाँधा औऱ सोने कि कॉसिश करने लगी….विनय कां ध्यान ममता कि ऊपेर नीचे होँ रही चुचियों पर्र थां….जौ उसके साँस लेने केँ संग ऊपेर नीचे हौ रही थि….विनय कां हाथअब उसके लन्ड पऱ शॉर्ट्स केँ ऊपेर तेज़ी सें चलनेलगा… ममता जौ अभि आँखेबंद किएहुए सोने केँ कोशिस कररही थि….हल्की सि कपड़ो कि सरसराहट नें उसका ध्यान अपनीतरफ खेंचा……
उसने लेटे-2 अपनीआँख खोलकर देखा, उसकी आँखे हैरानी सें फेल गई, ….विनय अपने लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें पकड़े हुए धीरे-धीरे-2 सहलारहा थां….आज सें पहले विनय कों वोँ भोला भाला बच्चा हि समझती थि….पऱआज उसेसमझ आँ रहा थां कि, यह बच्चा अब किशोरा अवस्था कि तरफ अग्रसर हैं….यह देख नज़ाने क्यूं ममता केँ होंटो पऱ मुस्कान फेल गई, …। उससमय तक ममता केँ मुँह मे विनय केँ लिएऐसा कुछ नहीं थां….उसने अपना ध्यान दूसरी तरफ करने केँ लिए करवटबदल ली औऱ विनय कि तरफपीठ करली….
ममता कों पता नहींचला कबउसे नींद आँ गई, ….सुभह केँ लगभग 5 बजे ममता कि नींद एक् दम सें टूट गई, ….उसे अपने कुर्ते केँ ऊपेरकुछ दबाव सां फील होँ रहा थां…जैसे कोई उसकी चुचियों कों धीरे-धीरे-2 सहलारहा हौ….औऱ अगले हि समय चोन्कते हुए उसकी आँखेखुल गयीँ, …। आसमान मे हल्की-2 रोशनी हौ गई, थि….उसने देखा कि, विनय कां लेफ्ट हॅंड उसकी चुचि पऱ हैं। पऱ अब उसमेकोई हरक़त नहीं होँ रही थि….उसने धीरे-धीरे-2 विनय कां हाथहटा कर साइड मे रखा औऱ उठकर नीचेचली गयीँ, ……नीचे जातेहुए ममतासोच रही थि कि, क्याँ विनयसच मे उसकी चुचियों कों सहलारहा थां….याँ यह सिर्फ़ मेरा वेहम हैं….होँ सकता हैं शायद उसने सोतेहुए, हाथ मेरे ऊपेररख दिया हौ…….
ममता अपनेरूम मे आकरफिन सें सो गई, ….सुभह हुई, तोँ वशाली औऱ विनय भि उठकर नीचे आँ गये……नहा धोकर फ्रेश हुए, ब्रेकफास्ट किया तौ तब तक शीतल भि अपने बच्चों कों लेकर किरण केँ घऱ आँ गयीँ, ……गर्मियों मे हमेशा लाइट कां कटलग जाया करता थां….औऱ विनय केँ मामाजी कां घऱ इतना बड़ा औऱ खुला थां, कि नीचे ग्राउंड फ्लोर पर्र गरमीकम होती थि। दूसरा यह भि कारण थां कि, नाश्ते केँ बाद किरणसब बच्चों कों हाल मे होम वर्क करने केँ लिए बैठा देती थि……जिसमे ममताउन सभी कि हेल्प करती थि….उनसभी कों पढ़ाती थि….
ममतासभी बच्चों कों 12 बजे तक बाँधकर रखती थि……उसदिन भि ममताजब सभी कों पढ़ारही थि, तोँ उसके दिमाग़ मे सुभह वाली घटनाघूम रही थि….वोँ देख्ना चाहती थि कि, विनयकिस कदर तक इनसभी बातों केँ बारे मे जानता हैं….क्याँ उसनेजान बुझकर उसकी चुचियों पर्र हाथरखा थां….इसीलिए वोँ जब विजय कों कुछ समझारही थि….तोँ कुछ अधिक हि झुककर उसके कॉपी मे कुछलिख रही थि……आज सुभह नहाने केँ बाद हि एक् खुली सि सलवार कमीज़ पहनली थि….कमीज़ केँ नीचे ब्रा भि नहीं पहनी थि….कमीज़ कां गला इतनाडीप थां कि, जब वोँ झुकती तोँ उसकी चुचियाँ बाहर् आने कों उतावली होने लगती….औऱ करीब-करीब आधे सें अधिक बाहर् हि आँ जाती……यह सभी करतेहुए, वोँ लगातार विनय कि नज़रो पर्र आँखे जमाएहुए थि….
विनय नें भि एक् दोबार उसके कमीज़ केँ गले सें बाहर् झाँकरही चुचियों कों देखा, उसकेमन मे भि हलचल हुईँ, पर्र विनयउस टाइम नादान थां….इस कंडीशन कों केसे हॅंडेल करते हैं……उसे बिल्कुल भि मालूम नहीं थां….इसलिये फिन उसने अपना सारा ध्यान पढ़ने मे लगा दिया….खैर ममता कों यकीन होनेलगा कि, शायद विनयसो हि रहा थां….औऱ सोतेहुए बच्चों कां हाथपेर इधरउधर होँ जानां बड़ीबात नहीं हैं….
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नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -3
बच्चो नें 1 बजे तक पढ़ाई कि, अबसमय थां दोपहर केँ खाने कां….खानां खाकर फारिग हुए तोँ, बच्चों नें हुडदन्ग मचा दिया….किरण चिल्लाई……मरो ऊपेर जाकरयहा मत चिल्लाओ….” बच्चे ऊपेर कि मज़िल पऱ जैसे हि जानेलगे तोँ रिंकी आँ गयीँ, ….”अर्रे वशाली कहां जारही हैं….”
वशाली: ऊपेर खेलने चल नाँ तुँ भि संग….
रिंकी: (धीरे-धीरे सें वशाली केँ कान मे कहती हैं….) नहीं तुँ मेरेसंग चल मेरेघऱ तुम को एक् नयी चीज़ दिखानी हैं……
वशाली: नहींबाद मे चलेंगे….अभि ऊपेरचल खेलते हैं….
रिंकी: समझाकर नाँ दोस्त बाद मे मोका नहीं मिलेगा….अभि घऱ पऱ कोई नहीं हैं….सभी केँ सामने वोँ चीज़ तुम्हे नहीं दिखा सकती….
ऐसी कॉन सें चीज़ हैं जौ सभी केँ सामने देखी नहींजा सकती….वशाली पहले भि कईबार रिंकी सें उसके विद्यालय कि लड़कियों केँ किस्से सुन चुकी थि…….इसलिये उसकेदिल मे हलचल सि होनेलगी। जब रिंकी नें कहा कि, वोँ सभी केँ सामने उस चीज़ कों नहीं दिखा सकती….”उंह चलफिन जल्द…” उसकेबाद रिंकी जैसे हि वशाली कां हाथ पकड़कर लेजाने लगी तोँ किरण नें रोक लिया….“अब तुम् दोनो कहां जारही होँ इतनीधूप मे….”
रिंकी: वोँ आंटी हम् हमारे घऱजारहे हैं….घऱ पऱ कोई नहीं हैं नाँ….इसलिये इसे भि संग लेँ जारही हूं….घऱ पर्र हि रहँगे….
किरण:ठीक हैं पर्र धूप मे बाहर् मत निकलना….
रिंकी: जी आंटी……
उसकेबाद दोनोतेज कदमो केँ संगघऱ सें बाहर् निकली औऱ रिंकी नें अपनेघऱ केँ बाहर् पहुँच करगेट कां लॉक खोला औऱ फिन तेज़ी अंदर दाखिल होकरगेट बंदकर दिया….गेट कि कुण्डी लगाई औऱ दोनो सीधा रिंकी केँ रूम मे जाकरबेड पर्र लेट गयीँ, ….”अब दिखा नां क्याँ दिखाना हैं। मुझेयहा सुलाने लाई हैं क्याँ….?”
रिंकी: म्म्म ओह नानीमा मम्मी थोडा साँस तोँ लेनेदे दिखाती हूं….
रिंकी नें बेड सें उतरकर अपने स्टडी टेबल केँ पास जातेहुए कहा….औऱ फिन नीचे साइड मे रखाहुआ अपना विद्यालय बॅगउठा कर टेबल पऱ रखा औऱ खोलकर उसमे सें कुछ निकालने लगी…थोड़ी देरबाद जब वोँ मूडी तौ, उसकेहाथ मे एक् पुस्तक थि….
वशाली : तूँ मुझेयह पुस्तक दिखाने लाई हैं……
रिंकी: तुम्हें पतायह कॉन सि पुस्तक हैं……?
वशाली: नहीं बताएगी नहीं तोँ केसेपता चलेगा….
रिंकी: (वशाली केँ पासबेड पऱ बैठते हुए) मेरे पतोले यहऐसी वैसी पुस्तक नहीं हैं….यह देख.
रिंकी नें वशाली कों जैसे हि वोँ पुस्तक खोलकर पहलापेज दिखाया तोँ, वशाली केँ आँखे खुली केँ खुलीरह गई, ……मूह ऐसेखुल गय़ा….जैसे उसने दुनिया कां अठवा अजूबा देख लिया हौ। उसमे एक् स्त्री डॉगी स्टाइल मे सोफे पऱ थि….औऱ उसके पीछे खड़े व्यक्ति कां आधे सें ज़यादा लन्ड उस स्त्री कि बुर मे थां….ऐसी तस्वीर वशाली पहलीबार देखरही थि….उसने लपककर रिंकी केँ हाथ सें वोँ पुस्तक लेँ ली….उस पुस्तक मे अडल्ट पिक्चर्स केँ संग-2 सेक्स स्टोरीस भि थि….
दोनोउन तस्वीरो कों पढ़ते हुए, स्टोरीस पढ़ने लगी……कुछ हि देर मे दोनो बेहद गर्म होँ चुकी थि……वशाली औऱ रिंकी कि दोनो कि बुर मे तेज सरसराहट होनेलगी थि। दोनो अपनी स्कर्ट केँ अंदरहाथ डालकर अपनी चूतो कों मसलरही थि……”हाए वशाली दोस्त अपनासमय कब आएगा……दोस्त मे तौ तरसरही हूं कि, काश मेरा भि कोई बाय्फ्रेंड होँ….तुम्हारा दिल नहीं करता….”
वशाली: करता हैं दोस्त….पऱ अब किसीराह चलते कों तौ अपना बाय्फ्रेंड नहींबना सकती नाँ….पर्र तुँ तौ सहर जाती हैं…वहा पऱ तौ बहोत सें लड़के मिलते होंगे रास्ते मे……
रिंकी: कहां दोस्त तुम्हे तौ पता हैं….पिताजी छोड़ने जाते हैं….औऱ वैसे भि हमारा विद्यालय सिर्फ़ गर्ल्स केँ लिए हैं….मोका हि नहीं मिलता….
वशाली: दोस्त कही10थ केँ बाद माँ बापू मुझे तेरे वाले विद्यालय मे अड्मिशन नां दिलवा दें….औऱ इस विद्यालय मे तोँ कोईढंग कां लड़का भि नहीं हैं….
रिंकी: दोस्त एक् काम होँ सकता हैं……अगर तुँ मेरासंग दे तौ….हम् दोनो कि ऐश होँ जाएगी.
वशाली : (उत्सक होतेहुए) बोल नाँ….?
रिंकी: दोस्त तूँ मेरी विनय केँ संग किसीतरह सेट्टिंग करवादे बस….औऱ मे तेरी अपने भइया (अनूप) केँ संग करवा दूँगी……
विनय अनूप औऱ वशाली तीनो एक् हि क्लास मे पढ़ते थें……”नाँ बाबा नाँ यहमुझ सें नहीं होगा….उस भौंदू कोईअकल तोँ हैं नहीं….अगर उसने मां कों कुछबता दिया नां….तोँ समझ मेरीखैर नहीं….मे नहीं करती उससेकोई ऐसी वैसीबात……”
रिंकी: दोस्त तुझेही बात करने केँ लिएकॉन कहरहा हैं….तुम्हारी तरफ उससेबात करने कि ज़रूरत नहीं… तूँ बस मेरी थोड़ी सि हेल्प कर दिया कर….देख अब हम् जब तेरेघऱ जाएगे तौ, तुम् मेरी हेल्प करना ताकि मे औऱ विनय एक् दूसरे केँ संग अकेले हौ सके….बाकी मे स्वयं कर लूँगी….
वशाली: औऱ मेरी सेट्टिंग….
रिंकी: वोँ तोँ मे ऐसे करवा दूँगी…….(रिंकी नें चुटकी बजाते हुएकहा….)
दोनो कलियों केँ चेहरे पर्र तेज मुस्कान फेल गयीँ, ….रिंकी नें उसबुक कों जल्द सें अपनेबॅग मे किताबो केँ बीच छुपाकर रखा औऱ फिनबॅग बंद करके, नीचेरख दिया….दोनो घऱ सें बाहर् निकली गेटलॉक काया औऱ वशाली कि तरफ जाने लगी….घऱ जातेहुए, दोनो केँ दिल जोरो सें धड़करहे थें….जैसे हि दोनोघऱ मे दाखिल हुई तौ, किरण शीतल केँ संग बरामदे मे फर्श पर्र चटाई बिछाकर बैठी हुई थि…….”क्यूं धूप मे इधरउधर घूमरही हौ तुम् दोनो एक् स्थान सुकून नहीं हैं तुमको…….”
रिंकी: वोँ आंटीघऱ पर्र बैठेबोर होनेलगी थि….इसीलिए यहाचले आए….
वशाली: माँ हम् दोनो भि ऊपेरजा रहे हैं खेलने……
यह कहतेहुए वशाली नें रिंकी कां हाथ पकड़ा औऱ ऊपेरचली गई, ….जब ऊपेर पहुँची तौ देखा विनय अपनी मौसी केँ बच्चो केँ संग हाइड & सीकखेल रहा थां….”हम् दोनो कों भि संग खेलाओ….हमें भि खेलना हैं….” वशाली नें अपने दोनोहाथ कमर पऱ रखतेहुए विनय सें कहा….”ठीक हैं तुम् दोनोबाद मे आए हौ….इसीलिए तुम् दोनो मे सें हि किसी एक् कों हम् सभी कों ढूँढना होगा….”
वशाली नें किरण कि तरफ देखा औऱ फिनकुछ देरसोच कर बोलि……”मे ढूंढूँगी तुम् सभी कों….”
विनय:ठीक हैं नीचे जाकर बाहर् केँ गेट केँ पास 20 तक काउंट करो….हम् छिपते हैं….
वशाली: ठीक हैं…….
उसकेबाद वशाली नीचेचली गयीँ, ….सभी इधरउधर भागे छुपने केँ लिए….विनय पीछेबने हुएरूम कि तरफ भगा….पीछे कि तरफ होने केँ कारणवहा बहोत अंधेरा रहता थां। रिंकी भि उसके पीछे जाने लगी….”तुम् कहां आँ रही हौ….जाओ कही औऱ जाकर छुपो….” विनय नें रिंकी कों अपने पीछेआते हुएदेख करकहा….
रिंकी: मुझेसमझ मे नहीं आँ रहा कहां छिपु….
विनयरूम मे दाखिल हुआ, वहा दीवार केँ संगबनी हुईँ एक् लकड़ी कि अलमारी थि….जोँ खाली थि। उसने अलमारी कां डोर खोला….उसमे एक् साइड मे छोटी-2 रॅक्स थि….तौ एक् साइड बिना रॅक्स केँ थि….विनय उस मे घुस गय़ा….”विनय मुझे अंदरआने दो….मुझे भि छिपना हैं….”
विनय:देख नहींरही हौ…यहा स्थान कहां हैं….
रिंकी: तुम् थोडा पीछेहटो नाँ….
रिंकी नें अलमारी केँ अंदरआते हुए कहा…औऱ मजबूरन विनय कों थोडा सां पीछे होना पड़ा…। रिंकी नें किसीतरह अपनेलिए स्थान बनाई, औऱ अलमारी कां डोरबंद कर दिया….डोर बंद होते हि अंदर एक् दम अंधेरा होँ गय़ा….दोनो एक् दूसरे सें एक् दम चिपके हुए खड़े थें….स्थान हि कहां थि कि, उसमेदो जान एक् संग खड़े होँ सके, रिंकी पीछे कि तरफपीठ टिकाकर खड़ी थि…औऱ विनय रॅक्स केँ साइड केँ संगपीठ टिकाकर खड़ा थां….कुछ देर तोँ उन्हे उस हालत मे अड्जस्ट होने मे लग गयीँ, ……इधर रिंकी नें अपनाखेल शुरुआत कर दिया थां….
उसने अपने दोनोहाथ सीधे नीचे लटकारखे थें….औऱ उसके राइट वाला उल्टा हाथ विनय केँ शॉर्ट्स कि ज़िप केँ ठीक ऊपेरलग रहा थां….पहले तोँ विनय कों कुछ महसूस नहींहुआ, वोँ बाहर् सें आँ रही आवाज़ों कों सुनने कि कॉसिश कररहा थां……इधर रिंकी कां दिल जोरो सें धड़करहा थां….वोँ भि इतनी समझदार नहीं थि….यहसभी करतेहुए, उसके भि हाथ पांव कांपरहे थें….अचानक सें विनय कों अपनी लन्ड पर्र कुछ दबाव बनताहुआ महसूस हुआ, उसनेजब हाथ नीचेलेज करचेक किया तौ, पताचला कि यह दबाव रिंकी केँ हाथ केँ कारण हैं….
भले हि उस वक़्त वोँ खेल मे मगन थां….पर्र अपने लन्ड पर्र शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें रिंकी कां हाथ महसूस करके, उसके शॉर्ट्स मे हलचल होने लगी…धीरे-धीरे-2 उसका लन्ड फूलने लगा…जैसे हि रिंकी कों भि इसबात कां अहसास हुआ, उसने भि धीरे-धीरे-2 अंजान बनतेहुए, अपने उल्टे हाथ कों हिलाते हुए, उसके लन्ड कों शॉर्ट्स केँ ऊपेर सें रगड़ना शुरुआत कर दिया….कुछ हि पॅलो मे उसका लन्ड एक् दम लोहे कि रोड कि तरहतन कर खड़ा होँ चुका थां….”अब तक रिंकी समझ चुकी थि, कि वोँ विनय कों जितना भोला औऱ नादान समझती हैं….असल मे उतना भि भोला नहीं हैं….
रिंकी: उफ़फ्फ़ कितनी गरमी हैं यहा….विनय थोडा पीछे होकर खड़ा होँ नाँ….
रिंकी जानबुझ करयहसभी कररही थि….विनय केँ मोटे लन्ड कों अपने उल्टे हाथ पर्र महसूस करके, रिंकी भि गर्म होनेलगी थि…उसकी स्कर्ट केँ अंदर उसके छोटी सि पेंटी मे उसकी बुर मे तेज धुनकि सि बजनेलगी थि….इसलिये उसने स्थान कम होने कां ड्रामा करतेहुए, अपनीपीठ घुमाकर उसकीतरफ कर दि…रिंकी केँ इसकदम नें मानो विनय केँ ऊपेरकहर हि ढा दिया हौ….विनय कां लन्ड जोँ उसके ढीले शॉर्ट्स मे एक् दमतनकर सीधा खड़ा थां… रिंकी केँ घूम जाने कि वजह सें अब सीधा रिंकी केँ चुतड़ों कि दरार मे जा धंसा…
दोनो केँ मूह सें एक् दम सें आहह-आहह निकल गयीँ, ….दोनो एक् दूसरे कि हालत कों अच्छे सें समझपा रहे थि….पर्र दोनो मे सें कोईकुछ बोल नहींरहा थां….विनय अभि इसखेल मे नया थां…। शायद उसमे दिमाग़ मे यहचलरहा थां कि, रिंकी कों अगरपता चल गय़ा कि, उसकी नूनी खड़ी हैं औऱ उसके चुतड़ों मे धँसी हुईँ हैं, तौ कही वोँ बुरा नां मान जाए…औऱ कही वोँ इसकी शिकायत मामीजी सें नाँ कर दे….इसीलिए वोँ पीछेरॅक केँ संग एक् दम सें सटकर खड़ा हौ गय़ा….उसने अपनेपेट कों अंदर कि तरफ खेंचकर औऱ स्थान बनाने कि कॉसिश कि, थोड़ी कामयाबी मिली भि, पऱ रिंकी तोँ जैसे किसी औऱ हि धुन मे मगन थि….
उसनेफिन सें अपने गान्ड कों पीछे कि ओर सरका दिया….इस बार तोँ उसको विनय कां तनाहुआ लन्ड सीधा अपनी बुर केँ छेद पर्र दस्तक देताहुआ महसूस होँ रहा थां…उसके पूरे शरीर मे सिहरन सि दौड़ गयीँ, ….उसकी स्कर्ट लन्ड केँ दबाव केँ कारण पीछे सें उसके चुतड़ों कि दरार मे धँसी हुई थि….उसके हाथपेर अब औऱ तेज़ी सें काँपने लगे थें….काश बीच मे यह स्कर्ट नाँ आती तोँ, आज मे भि विनय केँ लन्ड कों पहलीबार अपनी बुर केँ औऱ लगभग महसूस कर पाती….यह सोचते हि उसकेदिल नें जोरो सें धड़कना शुरुआत कर दिया….
तभी रूम मे किसी केँ कदमो कि अहाटसुन कर रिंकी एक् दम सें हड़बड़ा गई, ….उसका हाथ जोँ उसने सामने अलमारी कि लकड़ी केँ बोर्ड पऱ रखाहुआ थां….वोँ फिसल गय़ा…औऱ लकड़ी केँ बोर्ड मे तेज आवाज़ हुइ….औऱ अगले हि लम्हा उस अलमारी कां डोर भि खुल गय़ा…सामने वशाली खड़ी थि….”हहा ढूँढ लिया मेने तुम् दोनो कों भि….” वशाली नें हँसते हुएकहा….
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नादान लन्ड केँ जलवे – New Episode
Update -4
दोनो जल्दि सें बाहर् आँ गये….वशाली नें ऐसे एक् दम सें अलमारी कां डोर खोला तोँ विनय थोडा डर गय़ा थां…औऱ कुछ हि पॅलो मे उसका लन्ड डर कि वजह सें सिकुड भि गय़ा थां….”अब किसकी टर्न हैं….” रिंकी नें वशाली कि ओर देखते हुएकहा…। “पिंकी (शीतल कि बेटी) कि टर्न हैं। “ तीनोरूम सें बाहर् आँ गये….अब पिंकी कि बारी थि….विनय कि मासी कि बेटी कि….अबउसे बाकीसभी बच्चो कों दूनढना थां….इसीलिए वोँ काउंटिंग करने केँ लिए नीचेचली गई, ….सभी फिन सें छुपने केँ लिए भागे….
पर्र विनयकुछ समयवही खड़ा रहा….नज़ाने क्यूं उसकेमन मे आँ रहा थां कि, रिंकी इसबार भि उसकेसंग हि उस अलमारी मे छुपे….उसने कुछदेर तक वही खड़े होकर रिंकी औऱ वशाली कों दूसरे रूम केँ अंदर घुसते देखा….रिंकी नें भि डोर पऱ पहुँच कर एक् बारफिन सें विनय कि तरफ देखा तौ उसनेउसे देखकर हल्की स्माइल दि….पर्र अपने भौंदू विनय कों इस स्माइल कां मतलब तक नहींपता थां….वोँ बुझेहुए मन केँ संग वापिस उसरूम मे आया…पर्र नज़ाने क्यूं वोँ उस अलमारी मे दोबारा नहीं छुपा….वोँ उसरूम मे पड़ी हुई चारपाई केँ पीछे जाकरछुप गय़ा….
दूसरी तरफ दोनोजिस रूम मे थि….उसरूम मे घऱ कां काफ़ी प्राचीन समान पड़ाहुआ थां….दोनो एक् टूटेहुए टेबल केँ पीछेछिप कर बैठी हुइ थि….”तौफिन क्याँ बनाकुछ बातबनी कि नहीं….” वशाली नें उत्सकता वश उससे पूछा…….
”तुँ भि नां वशाली कितनी गंदी टाइमिंग हैं तेरी थोड़ी औऱ देरबाद आती तोँ शायदकुछ बातबन जाती….”
वशाली: अच्छा चल मे आँ भि गई, तोँ क्याँ हुआ….अब तूँ मेरेसंग क्यूं छुपी हैं… उसकेसंग हि छुप जानां थां….
रिंकी: वोँ तौ मे नहीं चाहती थि कि, जिस स्थान तुमने हमें पकड़ा हैं, कोई औऱ उस छुपने कि स्थान केँ बारे मे जान सके……देख इसबार जब पिंकी ऊपेर आएगी, तौ तुँ स्वयं हि जानबुझ कर सबसे पहले पकड़ी जानां…फिन तेरा टर्न आएगा तोँ, मे उसकेसंग छुप जाउन्गी….उसी अलमारी मे….तूँ जानबुझ कर हमेंमत ढूँढना जब तक हम् स्वयं बाहर् नहीं आँ जाते….
वशाली: ठीक हैं….पऱ ध्यान रखना कहीं माँ याँ ममता मासी ऊपेर नाँ जाए….
रिंकी: तुँ कुछ इशारा कर देना नां….अगर उनमे सें कोई ऊपेरआए तोँ….
वशाली: ठीक हैं…….
फिन रिंकी केँ प्लान केँ मुताबिक वशाली नें सबसे पहले अपने आप् कों पिंकी सें पकड़वा लिया….फिन पिंकी नें धीरे-धीरे-2 सभी कों ढूँढ लिया….इस बारफिन सें वशाली कि टर्न थि….जैसे हि वशाली काउंटिंग करने केँ लिए नीचे गयीँ,, तौ सभीफिन सें छुपने केँ लिएइधर उधररूम मे भाग गये….विनय भि फिन सें उसीरूम मे चला गय़ा….रिंकी भि उसके पीछे आँ गई,। विनय अभि सोच हि रहा थां कि, इसबार वोँ कहां छुपे, तोँ रिंकी नें स्वयं अलमारी कां डोर खोला औऱ उसमे घुसते हुए धीरे-धीरे सें फुसफुसा कर विनय कों अंदरआने केँ लिएकहा….
विनय: नहीं तुम् छुप जाओ….उसमे स्थान बहोत तंग हैं….मे कही औऱ छुप जाउन्गा….
रिंकी: तुँ आँ तौ सही…हम् अड्जस्ट कर लेंगे….
विनय: पऱ वशाली कों तोँ अबइस छुपने कि स्थान कां पता हैं….वोँ हमें ढूँढ लेगी….
रिंकी: तौ क्याँ हुआ, वैसे भि वोँ इसरूम मे बाद मे हि आएगी….कॉन सां हम् दोनो कि टर्नआने वाली हैं….चल जल्द आँ….
अब वक्त भि होँ चुका थां….वशाली किसी भि समयऊपर आँ सकती थि….इसीलिए विनय नें बिना ज्यादा सोचे समझेउस अलमारी मे छुपना हि सही समझा….फिन जोँ वोँ कुछदेर पहले महसूस कर चुका थां…उस अहसास कों उस लरज़िश मज़े कों दोबारा भि तोँ महसूस करना थां….इस बार रिंकी नें पहले हि अपना माइंड मेकअप कियाहुआ थां कि, क्याँ करना हैं औऱ केसे करना हैं….जैसे हि विनय अलमारी केँ अंदरहुआ औऱ उसने अलमारी कां डोरबंद किया, तौ अलमारी केँ अंदर बेहद अंधेरा हौ गय़ा….इतना क़ीकुछ भि दिखाई नहींदे रहा थां….
इसबार दोनो एक् दूसरे कि तरफफेस किए आमने सामने खड़े थें….विनय कों जैसे हि अपने चेहरे पऱ रिंकी कि गर्म साँसे महसूस हुई, तोँ उसके जिस्म मे सिहरन सि दौड़ गई, … अगले हि समयउसे अपने शॉर्ट्स कि ज़िप्प केँ ऊपेर सें कुछ गर्म सां अहसास हुआ, विनय अपने दोनो पैरो कों जोड़कर खड़ा थां….जब कि रिंकी केँ पांव विनय केँ दोनो पैरो केँ पास फेलेहुए थें। जिस टाइम विनय नें अलमारी कां डोरबंद किया थां….रिंकी नें उसी वक़्त, अपनी स्कर्ट कों आगे सें कमर तक ऊपेरउठा लिया थां….जोँ अबउन दोनो केँ पेट केँ बीच मे फँसी हुइ थि….औऱअब उसकी स्कर्ट नीचे नहीं होँ सकती थि….दोनो केँ शरीर एक् दूसरे कों टच हौ रहे थें….
रिंकी कि सेब केँ आकर कि चुचियाँ विनय कों अपनी चेस्ट पऱ दबति हुईँ महसूस होँ रही थि…। धीरे-धीरे-2 उसका लन्ड फिन सें उसके शॉर्ट्स मे अपनी औकात पऱ आनेलगा थां….जिसे महसूस करके रिंकी नें अपनीकमर कों धीरे-धीरे-2 हिलाना शुरुआत कर दिया….इस बार तोँ विनय केँ लन्ड औऱ उसकी बुर केँ बीच सिर्फ़ उसकी पेंटी औऱ विनय कां शॉर्ट्स हि थां….
जैसे हि विनय कां लन्ड पूरातन कर खड़ाहुआ, वोँ सीधा रिंकी कि छोटी सि पेंटी केँ ऊपेर सें उसकी बुर केँ ठीक बीचो-2दब गय़ा….”श्िीीईईईई आहह-आहह” अपनी बुर पऱ विनय केँ सख़्त लन्ड कों महसूस करते हि, रिंकी एक् दम सिसक उठी…उसने अपने दोनोहाथ उठाकर विनय केँ कंधो पऱ रख लिए….औऱ धीरे-धीरे-2 अपनीकमर कों हिलाने लगी….नीचे विनय कां लन्ड भि अब बग़ावत पऱ उतरआया थां….औऱ रह-2कर झटकेखा रहा थां…जिसे रिंकी अपनी पेंटी केँ ऊपेर सें महसूस करके, मचल जाती, वोँ धीरे-धीरे-2 मदहोश होतीजा रही थि….
विनय कों अपने लन्ड मे तेज सरसराहट महसूस होनेलगी थि….उसे ऐसालग रहा थां कि, जैसे उसके लन्ड सें अभि कुछ निकल जाएगा….जब उससे बर्दास्त नहींहुआ, तोँ उसने अलमारी कां डोरखोल दिया। औऱ बिना रिंकी कि तरफ देखे बाहर् आँ गय़ा….रिंकी बुत सें बनीवही खड़ीउसे रूम सें बाहर् जाताहुआ देखती रह गयीँ, ….”अर्ररे अब्ब्ब इसे क्याँ हौ गय़ा….इतना अच्छा कामबन रहा थां। इस लड़के कां भि कुछपता नहीं चलता….” रिंकी कि बुर अबदहक रही थि….लन्ड कों लेने केँ लिए, पऱ अभि उसे अपनी मंज़िल कोसोदूर नज़र आँ रही थि….
खैर उसकेबाद किरण नें सभी कों नीचेआने केँ लिए कहा….वक्त काफ़ी होँ गय़ा थां….इस लिएसभी नीचे आँ गये….वशाली रिंकी कों लेकर अपने यानी कि किरण केँ रूम मे चली गयीँ, ….वहा पऱ रिंकी नें जौ भि हुआ वोँ सभी वशाली कों बता दिया…कुछ नाँ होने सें कुछ तौ होना अच्छा हि होता हैं….भले हि रिंकी औऱ वशाली दोनो पूरीतरह कामयाब नहीं हुई थि….पऱहां रिंकी नें विनय केँ अंदर केँ छुपी हुईँ वासना कि आग कों हवा अवश्य दे दि थि….
उसरात भि ममता विनय औऱ वशाली खाने केँ बाद, ऊपेरछत पर्र सोने केँ लिए आँ गये…। उन्होने बैड बिछाए औऱ अपनी -2 स्थान पऱ लेट गये….कुछ हि देर मे वशाली तौ सपनो कि दुनियाँ मे पहुच गयीँ, ….पऱ विनय औऱ ममता कि आँखो सें नींद कोसोदूर थि….एक् जवान बुर जौ अपने पति केँ लन्ड केँ लिएतरस रही थि….औऱदिन गिनरही थि कि, कब उसका पति आकर उसकी प्यास कों बुझायेगा….दूसरी तरफ एक् नूनी जोँ अब लन्ड बनरही थि….अपने संगरोज होँ रहेनये-2 हादसो सें उत्सुक दुनिया कों औऱ जानने कि लालसा लिए, अपनीसोच मे मगन थां….
आधा घंटाबीत चुका थां….पर्र विनय कि आँखो मे नींद नहीं थि….अचानक सें उसने करवटबदल कर अपनाफेस जैसे हि, ममता कि तरफ किया तौ, उसकी टीशर्ट मे साँस लेने केँ कारण ऊपेर नीचे हौ रही उसकी 36 साइज़ कि चुचियों कों देखते हि उसकेमन मे आया….”ममता दिदी कि चुचियाँ कितनी बड़ी -2 औऱ मोटी हैं….औऱ रिंकी कि कितनी छोटी हैं……जब रिंकी बड़ी हौ जाएगी तोँ उसकी भि ममता दिदी जितनी बड़ी होँ जाएँगी….”
लेटे-2पता नहीं विनय कों क्याँ हुआ, उसकादिल अब ममता कि चुचियों कों छूने कां करनेलगा। आज ममता कि चुचिया उस टीशर्ट मे कुछ ज्यादा हि बड़ी औऱ फूली हुईँ लगरही थि….उसने लेटे -2 हि ममता कां जायज़ा लेना शुरुआत किया….जब उसे यकीन हौ गय़ा कि, ममतासो रही हैं, तोँ उसने अपना एक् हाथ धीरे-धीरे सें उठाकर ममता कि राइट चुचि पऱ रख दिया….उसका हाथ कांपरहा थां….जैसे हि ममता कों अपनी चुचि पऱ कुछ दबाव सां महसूस हुआ, तोँ उसके पूरे शरीर मे भि सिहरन सि दौड़ गयीँ, ……
ममता अभि तक सोई नहीं थि……पऱ वोँ बिना हीले डुले वैसे हि लेटी रही….वोँ जानती थि उसकी चुचि पर्र विनय कां हाथ हैं…….पऱ वोँ यह जानना चाहती थि कि, क्याँ विनय नें सोतेहुए फिन सें उसकी चुचि पऱ हाथरख दिया हैं……याँ जानबुझ कर वोँ ऐसाकर रहा हैं….कुछ देर वैसे हि बिना हरक़त किए, विनय अपनाहाथ उसकी चुचि पऱ रखे लेटे रहा….ओह क्याँ नरम अहसास हैं, पूर्ण रूप सें विकसित जवान लड़की याँ फिन हम् ममता कों स्त्री कह सकते हैं… कि चुचियों कों छूने कां….विनय केँ जिस्म कां रोम-2 खड़ा हौ चुका थां……
उसे अपने अंदर एक् अजीब सि बेचैनी महसूस होँ रही थि….बेचैनी कुछ करने कि, वोँ जौ उसकी उम्र केँ बच्चे नहीं करते, वोँ जिसे समाजआज तक उससे छुपाता चला आँ रहा थां…आख़िर इसमे इतना क्याँ मजाआता हैं….विनय वासना केँ नशे मे कब इतनाचूर होँ गय़ा कि, उसने धीरे-धीरे-2 ममता कि चुचि कों सहलाना शुरुआत कर दिया….औऱ जबफिन भि दिल कों तसल्ली नाँ हुई तौ, उसने ममता कि चुचि कों धीरे-धीरे-2 दबाना भि शुरुआत कर दिया….विनय कि इन हरकतों सें ममता भि उसीसमय गर्म हौ गई, थि….
पर्र वोँ चुपचाप लेटी रही….दूसरी तरह वशाली सोरही थि….औऱ स्वयं कों गर्म होता महसूस करके, ममता कों लगनेलगा कि, अब विनय कों यहीरोक देना चाहिए…वरना वोँ भि बहक जाएगी, औऱ फिन उसकीआग कों शांत करने वाले भि तोँ नहीं हैं यहा….औऱ यहा विनय केँ संग वोँ किसीतरह कां रिस्क नहीं लें सकती थि….ऊपेर वशाली थि तोँ, नीचे विनय केँ मामाजी मामीजी। पऱ हाथआए इसनये बकरे कों भि जाने नहीं देना चाहती थि….भले हि यह बकरा अभि सेक्स केँ मामले मे मेमना थां….
आज नहीं तौ कल वोँ कभी नाँ कभी विनय सें अपनेतन कि आग कों बुझाकर शांतकर सकती हैं। ज़रूरत हैं तौ, विनय कों सहीढंग सें हॅंडेल करने कि….औऱ वोँ केसे करना हैं, ममता बखूबी जानती थि……अचानक सें उसने विनय केँ हाथ कों पकड़ लिया, औऱ फिनझटक दिया। विनय कि तौ मानो जैसे गान्ड हि फॅट गई, हौ….”चुप चापसो जाओ….” ममता नें थोडा सां गुस्से सें कहा….औऱ फिन दूसरी तरफ करवट लेकरलेट गयीँ, ….
विनय शुकरमना रहा थां कि, ममता नें इस वक़्त तौ कोई बवाल नहीं किया….नहीं तोँ आधीरात कों हि उसकी पिटाई होँ जानी थि….पऱ सुभह क्याँ होगा….अगर ममता नें मामीजी औऱ मामाजी कों बता दिया तोँ, नहीं नहीं मे कल सुभह उनसे माफी माँग लूँगा….कह दूँगा कि, मुझसे ग़लती सें होँ गय़ा….
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